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सातवें महीने में प्रेग्नेंट महिला को भूलकर भी यह काम नहीं करने चाहिए?

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गर्भावस्था के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि पूरी प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे दोनों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आएं। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि किसी भी तरह की लापरवाही करती है, अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है, ऐसा कोई काम करती है जो महिला को नहीं करना चाहिए तो इसकी वजह से न केवल महिला की सेहत पर बुरा असर पड़ता है बल्कि इसकी वजह से शिशु के विकास में भी रूकावट आ सकती है।

वैसे तो प्रेगनेंसी के हर महीने में महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए लेकिन प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही की शुरुआत में महिला को सतर्कता बरतने की जरुरत होती है क्योंकि इस दौरान बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास तेजी से हो रहा होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को कौन कौन से काम नहीं करने चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट के बल कोई काम न करें

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का पेट बाहर निकला हुआ होता है ऐसे में महिला यदि पेट के बल कोई भी काम करती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु दिक्कत होने का खतरा होता है। ऐसे में बच्चे को हर परेशानी से सुरक्षित रखने के लिए महिला को पेट के बल कोई काम नहीं करना चाहिए।

ट्रैवेलिंग करने से बचें

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को ट्रैवेलिंग करने से बचना चाहिए क्योंकि पेट बाहर आने के कारण महिला को लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण दिक्कत हो सकती है। साथ ही यदि कोई झटका आदि लग जाता है तो गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है।

दवाइयों का सेवन नहीं करें

गर्भवती महिला को बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनका असर गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँच सकता है जिसकी वजह से शिशु के विकास में रूकावट आ सकती है।

खान पान में लापरवाही नहीं करें

गर्भावस्था के सातवें महीने में शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास अच्छे से हो इसके लिए महिला को खान पान में लापरवाही नहीं करनी चाहिए साथ ही ऐसी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी आएं। जैसे की महिला को बिना धुले फल सब्जियां, कच्चा अंडा, कच्चा दूध, आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

गलत पोजीशन में नहीं सोएं

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में वजन बढ़ने के कारण महिला को सोने में थोड़ी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। साथ ही महिला को सोते समय सही पोजीशन का ध्यान रखना जरुरी होता है क्योंकि यदि महिला गलत पोजीशन में सोती है तो इसकी वजह से महिला को बच्चे को परेशानी हो सकती है। जैसे की महिला यदि सीधी सोती है तो इसकी वजह से महिला को कमर दर्द की समस्या बढ़ सकती है, बॉडी में ब्लड फ्लो सही न होने के कारण दिक्कत हो सकती है, आदि। पेट के बल सोने के कारण पेट पर दबाव बढ़ सकता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है। ऐसे में महिला को सोने की सही पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ और बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो।

नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें

गर्भावस्था के सातवें महीने में शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास तेजी से होता हैं ऐसे में शिशु के विकास में किसी तरह की रूकावट नहीं आये इससे बचने के लिए महिला को किसी भी तरह के नशे का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि नशीले पदार्थों का सेवन करने से गर्भ में शिशु के विकास में कमी आने का खतरा होता है और जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या आ सकती है।

कैफीन का सेवन करने से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को चाय, कॉफ़ी, चॉकलेट्स व् अन्य कैफीन युक्त चीजों का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। क्योंकि कैफीन युक्त चीजों का सेवन करने से गर्भ में शिशु का विकास तेजी से नहीं होता है जिसकी वजह से जन्म के समय शिशु को दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है।

घर के उन कामों को करने से बचें जिन्हे करने में आपको दिक्कत होती है

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का वजन पहले से बढ़ चूका होता है, महिला का पेट बाहर की तरफ निकला हुआ होता है, पैरों में सूजन आ सकती है, आदि। ऐसे में महिला को काम करने में दिक्कत हो सकती है और दिक्कत होने पर महिला यदि काम करती रहती है तो महिला को ज्यादा परेशानी हो सकती है। ऐसे में महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की महिला से घर के जिन काम को करने में दिक्कत हो वह काम महिला को नहीं करने चाहिए और उनके लिए किसी की मदद लेनी चाहिए।

जांच में देरी नहीं करें

सातवें महीने के बाद डिलीवरी तक आपको डॉक्टर जल्दी जल्दी जांच के लिए बुला सकते हैं ताकि गर्भ में शिशु की स्थिति का सही से पता चल सके और डिलीवरी में कोई दिक्कत नहीं हो। ऐसे में महिला को जांच में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और समय से अपनी जांच करवानी चाहिए।

प्रसव को लेकर तनाव में नहीं आएं

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही लगते ही महिला को प्रसव को लेकर टेंशन नहीं लेनी चाहिए क्योंकि टेंशन से महिला को और दिक्कत हो सकती है। बल्कि महिला को प्रसव की जानकारी इक्कठी करनी चाहिए ताकि प्रसव को आसान बनाने में मदद मिल सकें।

ज्यादा टाइट कपडे न पहनें

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का पेट बाहर निकल चूका होता है ऐसे में ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण पेट पर दबाव बढ़ सकता है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है। साथ ही पेट पर दबाव पड़ने के कारण महिला को भी दिक्कत महसूस हो सकती है ऐसे में महिला को अपने साइज से थोड़े खुले और आरामदायक कपडे पहनने चाहिए। इसके अलावा महिला को जूते चप्पल भी आरामदायक ही पहनने चाहिए ताकि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

ज्यादा शोर में नहीं जाएँ

गर्भवती महिला ऐसी किसी जगह पर नहीं जाएँ जहां पर ज्यादा शोर हो जैसे की जहां पर बहुत तेज गाने बज रहे हो। क्योंकि ऐसी जगह पर जाने के कारण गर्भ में पल रह शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में यदि आप घर में भी गाने सुनने का मन है तो बहुत धीमी आवाज़ में ही संगीत सुनना चाहिए।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेगनेंसी के सातवें महीने में गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए। क्योंकि इन्हे करने से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और शरीर में कोई भी असहज लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे को हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें।

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