पुराने जमाने में लोग कैसे बताते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की

पुराने समय में जब भी कोई महिला गर्भधारण करती थी तो घर की बुजुर्ग महिलाएं गर्भवती महिला के लक्षणों को देखकर बता देती थी की गर्भ में लड़का है या लड़की। और यह किसी एक लक्षण से नहीं बल्कि ऐसे बहुत से लक्षण होते थे जिन्हे देखकर पुराने जमाने में इस बात का अंदाजा लगाया जाता था। हर महिला एक अलग लक्षण से इस बात का अंदाजा लगाती थी। और कुछ महिलाएं तो आज भी गर्भवती महिला के शरीर में महसूस होने वाले लक्षणों को देखकर इस बात का अंदाजा लगाती है। तो आइये अब जानते हैं की पुराने जमाने में लोग कैसे बताते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की:-

मीठा या नमकीन खाना: यदि गर्भवती महिला की मीठा खाने की इच्छा होती है तो गर्भ में लड़की है और यदि गर्भवती महिला का नमकीन खाने का मन है तो गर्भ में बेटा है।

पिता का वजन: होने वाले बच्चे के पिता का वजन यदि बढ़ने लग जाता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

नाक का आकार: गर्भवती महिला की नाक का आकार यदि प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ा हुआ महसूस होता है तो यह पेट में बेटा होने की और संकेत करता है।

ब्रेस्ट का आकार: प्रेग्नेंट महिला का दायां ब्रेस्ट यदि बाएं से बड़ा होता है तो इसका मतलब होता है की पेट में बेटा है जबकि यदि बाएं ब्रेस्ट का आकार दाएं ब्रेस्ट से बड़ा होता है तो यह पेट में बेटी होने का लक्षण होता है।

पेट का आकार: गर्भवती महिला के पेट का आकार यदि गोल व् आगे की तरफ कम निकला हुआ होता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बेटा है। जबकि महिला का पेट बड़ा व् आगे की तरफ ज्यादा निकला हुआ होता है तो गर्भ में लड़की होती है।

बच्चे का लात मारना: पेट में पल रहा बच्चा यदि पेट के निचले हिस्से की तरफ अधिक लात मारता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बेटा है। जबकि गर्भ में बच्चा यदि पसली पर अधिक लात मारता है तो पेट में बेटी है।

बच्चे का भार: सीधे हाथ की तरफ यदि गर्भवती महिला को शिशु का भार अधिक महसूस करती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यदि गर्भ में बच्चे का भार उल्टे हाथ की तरफ अधिक होता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

भूख: यदि प्रेग्नेंट महिला की भूख में बढ़ोतरी होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला को ज्यादा भूख न लगे तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

पैरों के पंजे का ठंडा होना: यदि गर्भवती महिला के पैरों के तलवें ठन्डे रहते हैं। तो पुराने जमाने में ऐसा कहा जाता था की यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण है।

व्यवहार में बदलाव: प्रेग्नेंट महिला के व्यवहार में यदि कोई बदलाव नहीं आता है वो वैसे ही रहती है जैसे की पहले रहती थी तो यह गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है। जबकि यदि महिला के व्यव्हार में बदलाव आता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

थकावट का अहसास: माँ बनने वाली महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहती है, थकान आदि का अहसास महिला को कम होता है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि गर्भ में बेटी होने पर महिला बहुत जल्दी थक जाती है और थकावट आदि की समस्या से ज्यादा परेशान रहती है।

यूरिन का रंग: गर्भवती महिला के यूरिन का रंग यदि बहुत ज्यादा पीला होता है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

स्किन में बदलाव: यदि प्रेग्नेंट महिला को मुहांसे, दाने, दाग धब्बे आदि की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा होती है तो यह गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।

बालों का बढ़ना: गर्भावस्था के दौरान यदि महिला की स्किन पर होने वाले बाल बहुत तेजी से बढ़ते हैं तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है। जबकि बाल यदि सामान्य गति से बढ़ते हैं तो यह गर्भ में लड़की होने का लक्षण होता है।

सोने की पोजीशन: प्रेगनेंसी में वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सोने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला बाईं और करवट लेकर आसानी से सो जाती है। महिला को कोई कोई दिक्कत नहीं होती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

वजन: प्रेग्नेंट महिला का वजन यदि पूरी बॉडी की बजाय पेट की तरफ से ज्यादा बढ़ता है तो यह गर्भ में बेटा होने का संकेत होता है। जबकि यदि महिला की पूरी बॉडी का वजन सभी जगह से बढ़ता है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है।

त्वचा का रूखापन व् फटना: प्रेग्नेंट महिला की स्किन यदि बहुत ज्यादा रूखी व् फटने लगती है तो यह भी एक लक्षण होता है जो यह बताता है की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिन्हे देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जाता था की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की। लेकिन यह पूरी तरह से सच हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। और कई बार ऐसा भी होता है की यह अंदाजा बिल्कुल सही भी होता है।