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गर्भावस्था के दौरान ज्यादा वजन न बढे इसके लिए क्या करें

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प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का वजन बढ़ना अच्छी बात होती है, क्योंकि यह गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास की और इशारा करता है। और महिला का वजन प्रेगनेंसी की दूसरी और तीसरी तिमाही में अच्छे तरीके से बढ़ता है। गर्भवती महिला का प्रेगनेंसी के दौरान ग्यारह से अठारह किलो तक वजन बढ़ सकता है। यह गर्भ में कितने शिशु है इस बात पर भी निर्भर करता है। लेकिन यदि महिला का वजन बहुत ज्यादा बढ़ने लग जाए तो यह प्रेगनेंसी के दौरान महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। जैसे की महिला को हाई ब्लड प्रैशर, शरीर में अधिक दर्द जैसी परेशानी हो सकती है।

लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान वजन को कण्ट्रोल करने के लिए डाइट करना भी सही नहीं होता है, क्योंकि यदि शरीर को पोषक तत्व नहीं मिलते हैं, तो इससे शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही महिला को भी कमजोरी हो सकती है। अधिक व्यायाम कारण भी गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। तो ऐसे में वजन किस तरह घटाया जाए, यह सवाल गर्भवती महिला के मन में जरूर आता होगा। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान वजन कण्ट्रोल करने के लिए आप क्या कर सकती है इस बारे में जानते हैं, इससे गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की परेशानी से बचाव करने में भी मदद मिलेगी।

छोटे छोटे मील लें

गर्भवती महिला को अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले बदलाव के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। लेकिन वजन कण्ट्रोल करने के लिए आपको एक बात का ध्यान रखना चाहिए की आप दिन में बड़े मील लेने की बजाय छोटे मील लें, जिन्हे पचाने में आसानी हो, और आपका मेटाबोलिज्म बेहतर रहे, ऐसा करने से आपके वजन को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन

गर्भवती महिला के लिए पानी एक एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है, साथ ही पानी का भरपूर सेवन गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। और पानी का भरपूर सेवन शरीर पर एक्स्ट्रा चर्बी को जमने से भी रोकता है, ऐसे में गर्भवती महिला को वजन कण्ट्रोल करने के लिए पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, साथ ही वजन कण्ट्रोल करने के लिए निम्बू पानी का सेवन भी एक बेहतर विकल्प होता है। क्योंकि निम्बू पानी आपकी पाचन क्रिया से सम्बंधित परेशानी को दूर करके आपके पेट को साफ़ रखने में मदद करता है।

बाहर के खाने से बचें

जंक फ़ूड, तेलीय आहार, मसालेदार भोजन, बाहर के खाने में कैलोरी व् सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है। जो न केवल गर्भवती महिला के वजन को अधिक बढ़ाते हैं, बल्कि इससे महिला को पेट सम्बन्धी समस्या होने का खतरा भी रहता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान वजन कण्ट्रोल करने के लिए घर में बनाएं संतुलित आहार का सेवन करना ही उत्तम होता है।

अपनी जीभ पर कण्ट्रोल रखें

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कई बार अलग अलग चीजों का सेवन करने का मन करता है। जैसे की चॉकलेट, आइस क्रीम, मिठाइयां, आदि, लेकिन गर्भवती महिला को अपनी जीभ पर कण्ट्रोल करना चाहिए, कभी कभी थोड़ा बहुत इनका सेवन करना ठीक होता है लेकिन अधिक मात्रा में इनके सेवन से बॉडी में कैलोरी बढ़ने के कारण वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है।

वॉक करें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी के लिए ज्यादा वर्जिश न करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को समस्या हो सकती है। ऐसे में आप व्यायाम करना चाहे तो किसी की ट्रेनिंग के अंडर ही करना चाहिए। नहीं तो वजन कण्ट्रोल करने के लिए सुबह शाम वॉक करने से भी आपको फायदा मिलता है।

योगासन करें

मानसिक रूप से फ्रैश महसूस करने के साथ गर्भवती महिला को वजन बढ़ने की समस्या से निजात पाने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान योगासन जरूर करना चाहिए। जैसे की सूर्य नमस्कार, अनुलोम विलोम आदि आपके शरीर को फिट रखने में मदद करते हैं, जिससे आपको वजन को कण्ट्रोल करने में भी मदद मिलती है।

तनाव न लें

तनाव गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी बुरा असर डाल सकता है, साथ ही इससे बॉडी में चल रही प्रक्रियों पर भी बुरा असर पड़ने के कारण गर्भवती महिला को वजन बढ़ने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए और जितना हो अपने आप को व्यस्त रखना चाहिए और खुश रहना चाहिए।

नींद का ध्यान रखें

गर्भवती महिला के लिए बेहतर नींद प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने में मदद करती है। लेकिन जरुरत से कम या ज्यादा सोना शरीर पर नकारात्मक असर भी डाल सकता है, और इसके कारण वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए, की महिला बेहतर नींद ले, लेकिन आवश्यकता से अधिक या कम न सोये।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने वजन को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही आप अपने अप वजन को घटाने के लिए कुछ भी न करें, और यदि वजन कण्ट्रोल न हो रहा हो तो इस बारे में एक बार अपने डॉक्टर से भी परामर्श जरूर लेना चाहिए।

प्रेग्नेंट होना चाहती हैं तो इन गलत आदतों को आज ही छोड़ दें

क्या आप बहुत समय से प्रेग्नेंट होने की कोशिश कर रही हैं? लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी आपका गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं। तो इसका कारण आपकी गलत आदतें हो सकती है। क्योंकि आप अपने रूटीन में क्या करती है इससे आपके स्वास्थ्य पर असर जरूर पड़ता है। जिसकी वजह से हो सकता है की आपको प्रेग्नेंट होने में परेशानी हो रही हो। तो आइये आज हम ऐसी ही आदतों के बारे में बताने जा रहें हैं। जिनसे उन महिलाओं को दूरी बना लेनी चाहिए जो गर्भधारण की कोशिश कर रही होती है।

जंक फ़ूड का सेवन

यदि आपकी बाहर का बहुत ज्यादा खाने की आदत है तो आपको अपनी इस आदत को बदल देना चाहिए। क्योंकि जंक फ़ूड का सेवन करने से आपका पेट तो भर जाता है लेकिन शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। और महिले के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण महिला को कंसीव करने में दिक्कत होती है।

नशे का सेवन

अल्कोहल, धूम्रपान किसी भी तरह के नशे का सेवन यदि आप करती हैं तो आपको उनसे भी दूरी बना लेनी चाहिए। क्योंकि यह सभी चीजें न केवल आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है बल्कि इसके कारण आपकी प्रजनन क्षमता में भी कमी आती है जिसकी वजन से आपको माँ बनने में परेशानी होती है। और यदि आपके पार्टनर इनका सेवन करते हैं तो उनके कारण भी आपको गर्भधारण में दिक्कत होती है।

बहुत ज्यादा व्यायाम

व्यायाम करना बहुत अच्छी आदत होती है क्योंकि इससे आपको फिट रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट होना चाहती हैं और साथ ही बहुत ज्यादा व्यायाम कर रही हैं। तो इसके कारण भी आपका गर्भ नहीं ठहर पाता है।

टेंशन

छोटी छोटी बातों को लेकर यदि आप बहुत जल्दी टेंशन ले लेती है और हमेशा तनाव में रहती है, गुस्सा अधिक करती हैं, चिड़चिड़ी रहती है, तो भी आपको अपनी इस आदत को बदल देना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला का बहुत अधिक तनाव में रहना भी महिला को गर्भवती नहीं होने देता है, और यदि महिला गर्भधारण कर भी लेती है। तो तनाव लेने के कारण महिला को गर्भपात का खतरा रहता है।

कभी कभी सम्बन्ध बनाना

ऐसा बिल्कुल नहीं होता है की आप एक बार अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाएं और आपका गर्भधारण हो जाए। यदि आप ऐसा ही करती है तो आपको अपनी इस आदत को बदल देना चाहिए, और जितना हो सके आपको अपने पार्टनर के साथ बेहतर सम्बन्ध बनाना चाहिए। और जब तक आप प्रेग्नेंट नहीं हो जाती हैं तब तक रोजाना सम्बन्ध बनाना चाहिए खासकर ओवुलेशन पीरियड में ऐसा जरूर करना चाहिए।

किसी भी तरह की सेफ्टी का इस्तेमाल करना

यदि आप गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है, सम्बन्ध बनाते समय किसी भी तरह की सुरक्षा का इस्तेमाल करती हैं, तो आपको आज ही अपनी इस आदत को बदल देना चाहिए। क्योंकि यदि आप ऐसा करती है तो आपका गर्भधारण नहीं हो सकेगा।

नींद में कमी

प्रेग्नेंट होने के लिए आपको भरपूर नींद लेना भी जरुरी होता है क्योंकि यदि आप नींद भरपूर नहीं लेती है। तो इसके कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है। जिसकी वजह से महिला को गर्भधारण में परेशानियां आती है।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो यदि महिला करती है तो महिला को प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में महिला को प्रेग्नेंट होने के लिए अपनी इन आदतों को बदल देना चाहिए। साथ ही आपको और आपके पार्टनर को एक बार बॉडी के सभी टेस्ट भी करवाने चाहिए क्योंकि कई बार किसी शारीरिक बीमारी के कारण भी महिला को प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आ सकती है।

प्रेग्नेंट महिला यह खाएं शिशु को पोषण मिलेगा

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि यदि गर्भवती महिला अपने खान पान अच्छे ध्यान रखती है, पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। और इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को खाने में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। लम्बे समय का अंतराल अपने आहार में नहीं रखना चाहिए, ताजे व् संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए, ज्यादा तेल मसाले वाले आहार का सेवन नहीं करना चाहिए, आदि। यदि महिला पूरी प्रेगनेंसी के दौरान इन सभी बातों का ध्यान अच्छे से रखती है तो इसे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की परेशानियों को कम करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को क्या खाना चाहिए

गर्भवती महिला द्वारा लिया गया आहार न केवल पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए बल्कि ऐसा होना चाहिए जिससे गर्भवती महिला को पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को आहार में किन किन चीजों को शामिल करना चाहिए।

पानी

प्रेगनेंसी के दौरान सुबह उठते ही सबसे पहले गर्भवती महिला को पानी का सेवन करना चाहिए इससे न केवल महिला का पेट सही रहता है, बल्कि इससे महिला को एनर्जी भी मिलती है। इसके अलावा दिनभर में भी गर्भवती महिला को आठ से दस गिलास पानी का सेवन करना चाहिए ताकि बॉडी को हाइड्रेट रहने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके।

डेयरी उत्पाद

दूध व् दूध से बने उत्पाद का सेवन भी गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि यह कैल्शियम, प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। और इसके लिए गर्भवती महिला को एक दिन में दो से तीन गिलास दूध, एक कटोरी दही व् छाछ का सेवन जरूर करना चाहिए। रात के समय गर्भवती महिला को दही व् छाछ का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि यह महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

फल व् फलों का रस

फलों का सेवन भी गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। खासकर सुबह के नाश्ते में महिला को केले, सेब जैसे फल जरूर लेने चाहिए, और हो सके तो इनके साथ एक गिलास दूध का भी जरूर पीना चाहिए। इसके अलावा महिला को शाम के समय भी फलों का सेवन जरूर करना चाहिए।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियां जैसे की पालक, ब्रोकली आदि का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इन सब्जियों का सेवन करने से आयरन, फोलेट, कैल्शियम, फाइबर जैसे पोषक तत्व गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में मिलते हैं। जो न केवल गर्भवती महिला को खून की कमी की समस्या से बचाव में मदद करते हैं बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। और इसके लिए कम से एक समय की डाइट में किसी न किसी हरी सब्ज़ी को गर्भवती महिला को जरूर शामिल करना चाहिए।

अंडे व् नॉन वेज

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के बाद से गर्भवती महिला को अपनी डाइट में नियमित रूप से दो अंडो का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि इससे शिशु के शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास को भी बेहतर होने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि प्रेग्नेंट महिला नॉन वेज का सेवन कर लेती है तो महिला हफ्ते में एक या दो बार नॉन वेज का सेवन कर सकती है क्योंकि इससे महिला और शिशु को बहुत अधिक मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं।

दालें

दालों का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए क्योंकि दालों में प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में विद्यमान होते हैं। जो गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में भ्रूण के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद करते हैं। इसीलिए दिन में एक समय की डाइट में किसी न किसी दाल का सेवन जरूर करना चाहिए।

साबुत अनाज

प्रेग्नेंट महिला को दलिया, चावल, भूरे चावल, कॉर्न फ्लेक्स, रोटी आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि साबुत अनाज में फ़ाइबर, विटामिन बी, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

ड्राई फ्रूट

सूखे मेवों को भी गर्भवती महिला को अपने खान पान में जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि सूखे मेवों में कई तरह के विटामिन, कैलोरी, फ़ाइबर, ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड, मौजूद होते हैं जो गर्भावस्था के दौरान सेहत के लिए काफ़ी अच्छे होते हैं। साथ ही यह भ्रूण के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

तो यह है प्रेग्नेंट महिला का डाइट प्लान की गर्भवती महिला को सुबह से शाम तक क्या क्या खाना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

समय से पहले डिलीवरी होने के क्या कारण होते हैं?

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए खुशियों से भरा समय होता है। लेकिन कुछ प्रेग्नेंट महिलाओं को इस दौरान बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और इन परेशानियों का कारण गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, महिला द्वारा प्रेगनेंसी में बरती गई लापरवाही हो सकती है। और ऐसी ही एक परेशानी है समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या, जो कुछ गर्भवती महिलाओं को हो सकती है, इसे प्रीमैच्योर डिलीवरी भी कहा जाता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रीमैच्योर डिलीवरी क्या होती है और इसके क्या कारण होते हैं।

प्रीमैच्योर डिलीवरी क्या होती है?

सामान्य प्रेगनेंसी चालीस हफ़्तों में पूरी हो जाती है लेकिन लगभग सेंतीस हफ़्तों तक गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो जाता है। और सेंतीस हफ़्तों के बाद महिला की डिलीवरी किसी भी समय हो जाये यह नोर्मल डिलीवरी मानी जाती है। लेकिन यदि किसी महिला का प्रसव सेंतीस हफ्ते से पहले हो जाता है तो इसे प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है।

अगर प्रसव तेइसवें से अठाईसवें हफ्ते के बीच होता है तो इसे एक्सट्रिमली प्रीमैच्योर डिलीवरी कहते हैं क्योंकि इस दौरान बच्चा बहुत ज्यादा वजन व् आकार में कम होता है। यदि बच्चे का जन्म उन्नतीसवें से तैंतीसवें हफ्ते के बीच होता है तो इसे मॉडरेटली प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है। और यदि बच्चे का जन्म चौंतीसवें हफ्ते से सैंतीसवें हफ्ते के बीच होता है तो इसे लेट प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है।

समय से पहले बच्चा होने के लक्षण

  • प्राइवेट पार्ट से बहुत ज्यादा तरल पदार्थ निकलना और कई बार तरल पदार्थ के साथ खून का आना।
  • पेट में दर्द व् कसाव बहुत अधिक महसूस होना।
  • पेट के निचले हिस्से पर दबाव महसूस होना जैसे की नीचे की तरफ बच्चा अपने आप को धकेल रहा है।
  • पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द की तरह पेट व् पीठ में दर्द का महसूस होना।
  • डायरिया की समस्या होना।

समय से पहले बच्चा होने के कारण

यदि किसी महिला को समय से पहले डिलीवरी हो जाती है तो इसका कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को समय से पहले बच्चा हो सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की समय से पहले बच्चा होने के क्या कारण होते हैं।

खराब जीवनशैली

यदि महिला की जीवनशैली सही नहीं है जैसे की न तो महिला नींद सही से लेती है, न खाना सही से खाती है, नशीले पदार्थों का सेवन करती है, न किसी तरह का व्यायाम आदि करती है, तो इन सबका बुरा असर गर्भ पर पड़ता है जिसके कारण महिला की डिलीवरी समय से पहले हो सकती है।

उम्र

यदि महिला की उम्र अठारह से कम और पेंतीस वर्ष से ज्यादा होती है तो ऐसे में प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले हो सकती है।

तनाव

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला मानसिक रूप से बहुत अधिक परेशान रहती है। तो इस कारण भी महिला व् बच्चे की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। जिसके कारण प्रीमैच्योर डिलीवरी होने के चके बढ़ जाते हैं।

गर्भ में एक से ज्यादा शिशु का होना

यदि किसी महिला के गर्भ में जुड़वां या इससे ज्यादा बच्चें होते हैं। तो इन महिलाओं को भी समय से पहले बच्चा होने के चांस अधिक होते हैं।

अनुवांशिक प्रभाव

अगर गर्भवती महिला की माँ या बहन आदि किसी की पहले समय से पहले डिलीवरी हुई है तो इसका प्रभाव आप पर भी पड़ सकता है और आपके बच्चे का जन्म समय से पहले हो सकता है।

वजन

मोटापे से ग्रसित महिलाओं की डिलीवरी भी समय से पहले होने की सम्भावना अधिक होती है, या फिर जिन महिलाओं का जरुरत से ज्यादा वजन कम होता है उन महिलाओं की डिलीवरी भी समय से पहले हो सकती है।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है लेकिन यदि महिला ऐसा नहीं करती है। तो इसके कारण भी महिला की डिलीवरी समय से पहले हो सकती है खासकर जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है उनके साथ ऐसा होने के चांस अधिक होते हैं।

संक्रमण

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, प्राइवेट पार्ट में संक्रमण जैसी समस्या यदि प्रेग्नेंट महिला को होती है तो इन संक्रमण का गर्भ पर बुरा असर पड़ता है जिसके कारण महिला की डिलीवरी समय से पहले हो सकती है।

बिमारी से पीड़ित

शुगर, हाई ब्लड प्रैशर, थायरॉयड जैसी शारीरिक बिमारियों से गर्भवती महिला ग्रसित होती है। तो इन बिमारियों के बुरे प्रभाव के कारण भी महिला की डिलीवरी समय से पहले हो सकती है।

महिला द्वारा बरती गई लापरवाही

प्रेग्नेंट महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान ऐसे काम अधिक करती है जिससे पेट पर जोर पड़ता है, ट्रैवेलिंग अधिक करती है, ज्यादा समय खड़े रहती है, पैरों के भार बैठती है, भारी सामान उठाती है तो इसके कारण गर्भ पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण महिला समय से पहले बच्चे को जन्म दे सकती है।

प्रीमैच्योर डिलीवरी महिला को क्या परेशानियां हो सकती हैं

  • महिला की डिलीवरी सिजेरियन होने के चांस होते हैं।
  • महिला को बच्चे को दूध पिलाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • महिला को शुगर, हाई ब्लड प्रैशर जैसी परेशानियां हो सकती है।
  • कमजोरी, थकान जैसी परेशानियां होने के कारण महिला को शिशु की केयर करने में दिक्कत हो सकती है।
  • महिला मानसिक रूप से बहुत ज्यादा परेशान हो सकती है।
  • नींद में कमी, खाने में परेशानी जैसी दिक्कतें भी महिला को हो सकती है।

प्रीमैच्योर डिलीवरी से बचने के टिप्स

  • उम्र को देखकर माँ बनने का निर्णय लें।
  • प्रेगनेंसी से पहले और प्रेगनेंसी के दौरान अपने अच्छे से ध्यान रखें।
  • यदि कोई बिमारी है तो उसका इलाज करवाएं उसके बाद माँ बनने का फैसला लें।
  • शरीर में पोषक तत्वों की कमी न होने दें।
  • वजन को न तो ज्यादा होने दे न कम होने दे संतुलित रखें।
  • नशीले पदार्थों के सेवन से बचें।
  • मानसिक व् शारीरिक रूप से तैयार होने के बाद ही माँ बनने का फैसला लें।
  • पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में दो से तीन साल का अंतर रखें।

तो यह हैं समय से पहले बच्चे का जन्म होने से जुडी बातें, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

घर पर ऐसे रहे स्वस्थ प्रेग्नेंट महिलाये

आज के समय में सबसे ज्यादा जरुरी है सेहतमंद और स्वस्थ रहना। और जब बात गर्भवती महिला की करे तो उनका स्वस्थ रहना तो और भी जरुरी हो जाता है। गर्भवती महिला को अपने और अपने शिशु के लिए अपने स्वास्थय का अच्छे से ध्यान रखना ही पड़ता है। एक बार को आप अपने लिए कोई भी समझौता कर सकते है पर अपने शिशु के स्वास्थ्य के साथ कोई भी खतरा नहीं लेना चाहेगा।

जब आपने तय कर लिया हो के आप एक स्वस्थ शिशु को जन्म देना चाहती है तो जरुरी है के सभी बातो से अपना ध्यान हटाकर अपना पूरा ध्यान खुद पर ही केंद्रित करें। सिर्फ अपने और शिशु के बारे में सोचे, इससे आपको ख़ुशी भी मिलेगी।

जरुरी है के हम जाने के कैसे एक गर्भवती महिला अपना ख्याल रखे, कैसे वह स्वस्थ रहे। किस तरीके से एक हैल्थी प्रेगनेंसी का सफर तय किया जाए? आइये जानते है एक गर्भवती महिला घर बैठे ही कैसे रहे स्वस्थ?

योगा या एक्सरसाइज

सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी योगा और एक्सरसाइज को आवश्यक माना गया है। गर्भावस्था में एक्सरसाइज आपके तनाव को दूर करने, मूड को अच्छा करने और अच्छे नींद लेने के लिए बहुत  फायदेमंद मानी जाती है। आजकल बहुत सी जगहों पर प्रेगनेंसी एक्सरसाइज क्लासेस अलग से दी जाती है। अगर आप क्लास नहीं ज्वाइन करना चाहते तो भी कोई बात नहीं हल्की फुलकी एक्सरसाइज घर पर ही कर सकते है।

ध्यान रहे गर्भावस्था में आपको हैवी एक्सरसाइज नहीं करनी है। हल्की योगा और मॉर्निंग वाक गर्भावस्था के लिए बहुत अच्छी रहती है। प्रेगनेंसी ज्यादा समय एक्सरसाइज ना करके बस 30 मिनट ही एक्सरसाइज को देना बहुत है।

 कैफीन

गर्भावस्था के दौरान हमे बहुत सारी चीजों का सेवन बंद करना पड़ता है, कुछ ऐसी भी जिन्हे हम बहुत शोक से खाते हो। प्रेगनेंसी में प्रदार्थ त्यागने चाहिए जो भी कैफीन युक्त हो जैसे की चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक्स आदि। अगर कुछ महिलाये तम्बाकू या शराब की भी आदि है तो गर्भावस्था में यह सब चीजों को छोड़ देना चाहिए।

कैफीन युक्त चीजों के सेवन से गर्भपात और डिलीवरी के समय का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए अपने शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए चाय, कॉफी और अन्य ठंडे पेय प्रदार्थो का प्रयोग बंद कर देना चाहिए।

काम करने का तरीका

गर्भवती होने के बाद महिलाओं को अपना काम करने का तरीका बदलना पड़ता है। जैसे घर की रोजाना सफाई के समय किसी केमिकल का यूज़ करते है तो वह बंद करें। टॉक्सिक केमिकल्स और बैक्टीरिया से गर्भवती महिला और शिशु को दोनों को नुक्सान पहुंचता है।

गर्भावस्था के दौरान भारी सम्मान उठाना, ज्यादा सीढ़िया चढ़ना या उतरना भी नजरअंदाज करना चाहिए। बाग़ बगीचे की साफ़ सफाई करते समय हाथों में ग्लव्स का इस्तेमाल करें। लम्बे समय तक खड़े भी ना रहें।

बढ़ते वेट की सूचि

गर्भावस्था में वजन बढ़ना नार्मल प्रक्रिया होती है। पर एक हैल्थी वेट का बढ़ना भी बहुत जरुरी है। जरुरत से ज्यादा वेट का बढ़ना भी डिलीवरी के समय खतरा पैदा कर देता है। गर्भवती महिला का वजन उसकी हाइट के अनुसार ही बढ़ना चाहिए।

इसीलिए जरुरी है के गर्भावस्था में बढ़ते हर बदलाव की आप सूचि बनाये। अपने डॉक्टर से भी सलाह लें की आपका वजन लगभग कितना बढ़ना चाहिए। अगर वजन कम या ज्यादा है तो उसके लिए अपने डॉक्टर से बात करें।

पानी की मात्रा

प्रेगनेंसी के दौरान, आपका ब्लड आपके बेबी को ऑक्सीजन और आवश्यक नुट्रिएंट्स तत्व पहुंचाता है और साथ ही वेस्ट और कार्बन डाइऑक्साइड को शिशु से दूर करता है। इसका मतलब इन सभी कामो को करने के लिए हमारे शरीर में 50 प्रतिशत एक्स्ट्रा ब्लड होना चाहिए। इन सभी एक्टिविटी को सपोर्ट करने के लिए जरुरी है के गर्भवती महिला भरपूर मात्रा में पानी पिए। अच्छी मात्रा में पानी का सेवन करने से शरीर हाइड्रेट रहता है और कब्ज की समस्या भी नहीं होती है।

अगर आप सादे पानी से ऊब जाए तो पानी में निम्बू या फलों का रस का भी सेवन कर सकते है। गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने से समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा बना रहता है। इसीलिए पानी की मात्रा का अच्छे से सेवन करें।

संतुलित भोजन

प्रेगनेंसी में सिर्फ पानी ही नहीं बल्कि सभी जरुरी पोषक तत्वों के लिए संतुलित आहार लेना भी आवश्यक है। आयरन और फोलेट से भरपूर भोजन लेना जरुरी है। जिससे गर्भवती महिला के शरीर में आयरन और फोलेट की कमी ना हो। गर्भाशय में शिशु के विकास के लिए फोलिक एसिड बहुत ही जरुरी होता है। इसके लिए अपने भोजन में दाल, हरी सब्जियाँ, बीन्स, संतरा, दूध और दही शामिल करें।

रोजाना दिन में 4 से 5 बार थोड़ा थोड़ा भोजन खाना चाहिए। गर्भावस्था में एक साथ ज्यादा मात्रा में भोजन नहीं लेना चाहिए बल्कि थोड़ी मात्रा में 2 से 3 घंटे में कुछ कुछ खाते रहना चाहिए।

फल

गर्भावस्था में हर थोड़ी थोड़ी देर में कुछ ना कुछ खाने के लिए चाहिए होता है। और खास बात यह होती है के जल्द ही हम चीजों से ऊब भी जाते है। इसलिए फल भी खाते रहना चाहिए। ताजे फल खाने से विटामिन ए , विटामिन सी और आयरन भी मिलता है। फल खाने से शरीर हाइड्रेट भी रहता है। फलो का सेवन करने से सुबह की मॉर्निंग सिकनेस में भी आराम मिलता है।

फलों में केला, बेरीज, संतरा, सेब, अंगूर आदि को भी शामिल करें। इनके सेवन से आपका एनर्जी लेवल भी बढ़ेगा।

क्रेविंग्स

सच तो यह है के कोई भी नहीं जानता के गर्भावस्था में कब किस चीज की क्रेविंग होगी। अगर आप पूरी तरह अपनी डाइट फॉलो कर रहे है। और सभी जरुरी पोषक तत्वों का सेवन कर रहे है तो कभी कभी अपनी किसी क्रेविंग को भी हाँ बोल सकते है। अपनी किसी खाने की चीज की क्रेविंग को शांत करने पर आपका मूड़ भी रिफ्रेश हो जाता है। जिससे आपको बहुत ख़ुशी मिलती है। गर्भावस्था में खुश रहना शिशु और स्वयं के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। खुश होने से आपका स्ट्रेस भी दूर रहेगा।

पर फिर भी अपनी क्रेविंग्स को शांत करने के लिए उस पर्टिकुलर चीज की मात्रा का भी ध्यान रखे। जैसे की अगर आपको आइसक्रीम की क्रेविंग होती है तो एक बार से ज्यादा आइसक्रीम का सेवन ना करें।

डिलीवरी के बाद पेट क्यों निकलता है? और क्या उपाय करने चाहिए

डिलीवरी के बाद पेट

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी शारीरिक व् मानसिक परेशानियों का सामना करती है, और ऐसा भी नहीं है की डिलीवरी होने के बाद एक दम से सब कुछ नोर्मल हो जाता है। बल्कि डिलीवरी के बाद महिला को फिटनेस से लेकर शिशु की केयर तक बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। और उसके बाद धीरे धीरे सब ठीक होने लगता है। डिलीवरी के बाद सबसे ज्यादा महिलाएं पेट के बढ़ने के कारण परेशान होती है, यह समस्या नोर्मल और सिजेरियन दोनों तरह की डिलीवरी वाली महिलाओं को परेशान कर सकती है।

डिलीवरी के बाद पेट बढ़ने के कारण

डिलीवरी के बाद पेट बढ़ने का मुख्य कारण गर्भाशय के आकार का बढ़ना होता है। क्योंकि गर्भ में शिशु का नौ महीने तक शारीरिक विकास होता है। जिससे गर्भाशय का आकार भी बढ़ जाता है, और डिलीवरी के बाद गर्भाशय को सही आकार में आने के लिए समय लगता है जिसके कारण महिला को पेट बढ़ने की समस्या हो सकती है। साथ ही कुछ महिलाओं का वजन प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक बढ़ जाता है जिसके कारण बॉडी पर चर्बी का जमाव हो जाता है, इसके कारण भी डिलीवरी के बाद महिला को बढे हुए पेट के साथ बढे हुए वजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

डिलीवरी के बाद बढे हुए पेट की समस्या से निजात पाने के उपाय

डिलीवरी के बाद बढे हुए पेट को कम करना ज्यादा मुश्किल नहीं होता है बल्कि कुछ उपाय नियमित रूप से करने पर इन परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद पेट कम करने के लिए महिला कौन से टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ब्रेस्टफीडिंग

स्तनपान डिलीवरी के बाद बढे हुए पेट और वजन को घटाने का सबसे आसान और बेहतर तरीका है। लेकिन कई महिलाएं ब्रेस्ट शेप के खराब होने के डर से शिशु को स्तनपान करवाने से बचती है। और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि स्तनपान करवाने से कैलोरी बर्न होती है। जो बॉडी में जमे फैट को कम करने में मदद करती है, और जैसे ही शिशु ब्रेस्टफीडिंग करना बंद करता है तो धीरे धीरे ब्रेस्ट भी वापिस अपनी शेप में आ जाती है।

खाने का ध्यान

डिलीवरी के बाद बॉडी को जल्दी रिकवर करने और शिशु के लिए दूध के उत्पादन को बढ़ाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना बहुत जरूर होता हो। ऐसे में महिला को थोड़ी थोड़ी देर बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए जिससे बॉडी जल्दी फिट हो। और जैसे जैसे महिला रिकवर होती है वैसे वैसे गर्भाशय भी अपने सही आकार में आने लगता है, जिससे बढे हुए पेट की समस्या से डिलीवरी के बाद महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।

तरल पदार्थ

पानी के साथ अन्य तरल पदार्थ जैसे की जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी, पानी में शहद आदि डालकर भी पीना चाहिए। इससे बॉडी को हाइड्रेटेड रहने के साथ बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इसके अलावा बढे हुए पेट और बॉडी पर जमी हुई चर्बी को कम करने के लिए गरम पानी का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इससे बहुत जल्दी असर पड़ता है, साथ ही महिला को दर्द आदि की समस्या से राहत पाने में भी मदद मिलती है।

मालिश

डिलीवरी के बाद बॉडी को वापिस शेप में लाने के लिए मालिश भी एक बेहतरीन उपाय है, इससे बॉडी को आराम मिलने के साथ महिला को जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है। मालिश करवाने से मेटाबोलिज्म बढ़ता है, स्किन हाइड्रेटेड रहती है, स्किन को टाइट होने में मदद मिलती है, आदि। जिससे पेट को कम करने में मदद मिलती है, लेकिन सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को डिलीवरी के तुरंत बाद मालिश करवाने से बचना चाहिए, और हो सके तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

बेल्ट

आज कल डिलीवरी के बाद महिला को उठने बैठने में होने वाली परेशानी से बचने के लिए पेट पर बाँधने के लिए एक बेल्ट का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। और यह बेल्ट पेट पर बाँधने से पेट पर दबाव पड़ता है, जिससे पेट को बढ़ने से रोकने में मदद मिलने के साथ पेट को वापिस शेप में लाने में भी मदद मिलती है।

तनाव से बचें

डिलीवरी के बाद महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या होने के साथ शिशु की केयर की जिम्मेवारी को लेकर कुछ महिलाएं तनाव में आ जाती है। और तनाव के कारण थकान, कमजोरी, वजन बढ़ने जैसी समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में महिला को तनाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए जिससे बॉडी को जल्दी फिट होने में मदद मिल सके।

योगासन

शिशु के जन्म के तुरंत बाद नहीं बल्कि टांको के अच्छे से ठीक होने के बाद महिला चाहे तो तनाव से राहत पाने के लिए, मस्तिष्क को आराम पहुंचाने के लिए, बॉडी फैट और बढे हुए पेट को कम करने के लिए योगासन कर सकती है। योगासन के साथ सुबह शाम थोड़ी देर धीरे धीरे वॉक भी करनी चाहिए, इससे भी डिलीवरी के बाद बढे हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है।

ज्यादा देर बैठे न रहें

ज्यादा देर बैठे रहने के कारण थकावट का अहसास होने के साथ पेट की स्किन में ढीलापन आने लगता है, जिसके कारण पेट की स्किन ढीली होने साथ लटकी हुई महसूस हो सकती है। ऐसे में महिला को ज्यादा देर एक ही जगह पर बैठे नहीं रहना चाहिए।

आराम लें

डिलीवरी के बाद बॉडी को जल्दी फिट होने के लिए बॉडी को भरपूर आराम देना बहुत जरुरी होता है, ऐसे में महिला को दिन में भरपूर नींद लेनी चाहिए। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है, स्किन को पोषण मिलता है, आदि। और भरपूर आराम करने से महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है जिससे महिला के वजन और बढे हुए पेट को भी कम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने के बाद डिलीवरी के बाद बढे हुए पेट की समस्या से निजता पाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी डिलीवरी के बाद इस समस्या से परेशान हैं तो आप भी ऊपर दिए गए आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन डिलीवरी के तुरंत बाद वजन कम करने के लिए किसी भी ऐसे तरीके का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिससे महिला की सेहत या शिशु के विकास पर किसी भी तरह का बुरा असर पड़े। साथ ही धीरे धीरे महिला को अपना रूटीन बनाना चाहिए ताकि महिला को अपनी फिटनेस का अच्छे से ध्यान रखने में मदद मिल सके।

खाना खाने के तुरंत बाद पानी क्यों नहीं पीना चाहिए?

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भोजन का सेवन करना, भरपूर मात्रा में पानी पीना सेहत के लिए कितना फायदेमंद होता है इस बारे में तो सभी जानते हैं। लेकिन भोजन खाने के तुरंत पहले या बाद में पानी पीना चाहिए या नहीं इस बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। ज्यादातर लोग खाने के बीच में या खाने के तुरंत बाद जितनी पानी पीने की इच्छा होती है उतना पानी पीते हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की खाने के पहले और बाद में पानी पीने बहुत ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की यदि आप खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लेते हैं तो आपकी सेहत को कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं।

खाने को पाचन में होती है दिक्कत: खाने को पचाने के लिए जिस रस की जरुरत होती है खाना खाने के बाद पानी पीने से वह रस पतला हो जाता है। जिससे खाने को हज़म करने में आपको दिक्कत हो सकती है क्योंकि भोजन को पचाने वाले रस के पतले होने के कारण पाचन क्रिया अच्छे से अपना काम नहीं कर पाती है।

गैस, एसिडिटी की समस्या: भोजन के अच्छे से न पचने के कारण आपको पेट में गैस, एसिडिटी, कब्ज़, सीने में जलन, खट्टी डकार, जैसी परेशानियों का होना आम बात हो सकती है। ऐसे में आपको ऐसी कोई दिक्कत न हो इसके लिए आपको खाना खाने के बाद पानी पीने से बचना चाहिए।

पोषक तत्वों की कमी: आप खाना खाते हैं उससे आपका पेट तो भर जाता है, लेकिन वह खाना जब हज़म नहीं होता है तो उसके पोषक तत्व भी आपके शरीर को नहीं मिलते हैं। ऐसे में भोजन के बाद जो लोग बहुत ज्यादा पानी का सेवन करते हैं तो उससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हो जाती है।

यदि आप भी खाना खाने के बाद पानी पीते हैं तो आप भी अपनी इस आदत को बदल दें। ताकि आपको इन सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके। इसके अलावा आप चाहे तो खाने से एक घंटा पहले और आधे घंटे के बाद पानी का सेवन कर सकते हैं ऐसा करने से आपकी सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है।

करवा चौथ 2019 कब है?

करवाचौथ

भारत में त्यौहारों, व्रत आदि का अलग ही महत्व है और इनकी धूम भी अलग -अलग जगह पर अलग ही देखने को मिलती है, लेकिन इनका मतलब एक ही होता है बीएस सबके रीति रिवाज़ अलग अलग होते हैं। तो आज हम ऐसे ही एक व्रत के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसके लिए बहुत दिनों पहले से ही महिलाएं तैयारी करना शुरू कर देती है। और वो व्रत है करवा चौथ, यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है, यह त्यौहार सुहागन स्त्रियों के लिए बहुत महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती है और निर्जला उपवास रखती है। साथ ही महिलाएं पूरे सोलह श्रृंगार करके दुल्हन की तरह तैयार होती है। इस दिन की शुरुआत सुबह से ही हो जाती है। सूरज के निकलने से पहले (लगभग सुबह के 4 बजे) व्रत रखने वाली महिला सरगी का सेवन करती है। सरगी में महिलाएं फल, जूस, सेवइयां, ड्राई फ्रूट आदि का सेवन करती है। और यह सरगी उनकी सास द्वारा उन्हें दी जाती हैं जिसमे खाने पीने के साथ महिला के श्रृंगार का सामान भी होता है।

उसके बाद महिलाएं नहा धोकर साफ़ कपडे पहनकर पूजा की तैयारी आरम्भ करती है। पूजा के दौरान महिला अपनी सास के लिए बायना निकालती है, जिसे करवाचौथ की पूजा करने के बाद सास ससुर को दिया जाता है। शाम के समय पूजा के लिए महिलाएं दुल्हन की तरह तैयार होकर करवा चौथ माता की कथा सुनती हैं। और हाथ जोड़ कर करवा माता से अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करने के साथ अपने शादीशुदा जीवन में खुशहाली बने रहने की प्रार्थना करती है। पूजा के बड़ा घर आकर अपने सास ससुर से आशीर्वाद लेकर उन्हें बायना देती है। उसके बाद जैसे जैसे दिन ढलता जाता है वैसे वैसे छतों पर रौनक बढ़ने लगती है, क्योंकि महिलाएं अपने व्रत को पूरा करने के लिए चाँद के आने का इंतज़ार करने लगती है, क्योंकि बिना चाँद को देखे यह व्रत सम्पूर्ण नहीं माना जाता है।

उसके बाद चाँद के आते ही महिलाएं चाँद को जल अर्पित करती है। फिर छलनी में से पहले चाँद को देखती हैं और फिर अपने पति को देखती है। फिर पूजा आरती खत्म होने के बाद महिला अपने जीवनसाथी के पैर छूती है। और पैर छूने के बाद अपने जीवनसाथी का साथ हमेशा बना रहे इसके लिए प्रार्थना करती है। उसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाता है, और मिठाई खिलाता है। केवल महिला की नहीं बल्कि कुछ पति भी अपनी पत्नी का साथ देने के लिए इस दिन निर्जल उपवास भी रखते हैं, और ज्यादातर महिलाएं चाहती भी होंगी की उनके पति भी उनका साथ देने के लिए ऐसा करें। साथ ही अपनी पत्नी को करवा चौथ के दिन बेहतरीन उपहार भी देते हैं। और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि इससे व्रत भी पूरा हो जाता है और पति पत्नी के बीच के प्यार को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

करवा चौथ 2019 कब है पूजा समय व् शुभ मुहूर्त

करवा चौथ 2019: 17 अक्टूबर दिन वीरवार

करवा चौथ पूजा मुहूर्त का शुभ मुहूर्त: शाम 17:46 से 19:02

चाँद निकलने का समय: 20:20 (17 अक्टूबर)

चतुर्थी तिथि आरंभ: 06:48 (17 अक्टूबर)

चतुर्थी तिथि समाप्त: 07:28 (18 अक्टूबर)

तो यह है 2019 करवाचौथ से जुडी जानकारी, तो यदि आप भी इस व्रत को करती है तो इस दिन की सम्पूर्ण जानकारी यहां से ले सकती है।

प्रेग्नेंट महिला यदि घर से बाहर निकल रही है तो इन बातों का ध्यान रखें

गर्भावस्था के दौरान महिला को हर छोटी से छोटी बात का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि किसी भी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी लापरवाही न हो जिससे माँ या बच्चे किसी को भी कोई परेशानी हो। तो आज इस आर्टिकल में गर्भवती महिला के लिए कुछ ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं। जो गर्भवती महिला को किसी काम से घर से बाहर जाते समय या सफर पर जाते समय ध्यान रखने चाहिए।

घर से किसी काम के लिए बाहर जाते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट घर से बाहर नहीं जाना चाहिए क्योंकि खाली पेट बाहर जाने के कारण महिला को थकान, कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला किसी छोटे मोटे काम के लिए घर से बाहर जा रही हैं तो ध्यान रखें की धूप में न निकलें, बल्कि कोई काम है तो सुबह या शाम को कर लें।
  • प्रेग्नेंट महिला को यदि धूप में निकलना पड़ता है तो कॉटन के कपडे पहनकर महिला बाहर जाये, चप्पल आरामदायक पहने, स्किन पर लोशन लगाएं, आँखों के लिए चश्मे का इस्तेमाल करें आदि, ताकि धूप के कारण महिला को किसी भी तरह की परेशानी न ही।
  • गर्भवती महिला जब भी घर से बाहर जाए तो महिला को पानी का बोतल अपने साथ रखना चाहिए और बीच बीच में पानी पीते रहना चाहिए, आप चाहे तो खाने के लिए बिस्कुट आदि भी साथ रख सकती है।
  • यदि बाहर जाने के बाद महिला थका हुआ महसूस करें तो महिला को किसी आरामदायक जगह पर बैठकर थोड़ा आराम करना चाहिए।
  • हो सके तो बाहर जाते समय अपने वाहन का इस्तेमाल करें क्योंकि ऑटो, रिक्शा, बस आदि में झटका आदि लगने के कारण महिला को परेशानी होने का खतरा रहता है।

गर्भवती महिला को सफर पर जाते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

वैसे तो गर्भवती महिला को जब तक इमरजेंसी न हो तो सफर पर नहीं जाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को खतरा हो सकता है। लेकिन यदि किसी कारण महिला को सफर करना पड़ रहा है तो इन बातों का ध्यान रखें।

  • बस, ट्रेन आदि में जाने की बजाय अपने खुद के वाहन में जाएँ।
  • सफर में एक ही पोजीशन में देर तक न बैठें क्योंकि इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है ऐसे में थोड़ी थोड़ी देर बाद गाडी रोककर गाड़ी से बाहर निकलें, या पिछली सीट पर बैठकर पोजीशन बदलती रहें।
  • पीठ के पीछे पिल्लो लगाकर बैठें।
  • जहां भी आप जा रही है वहां ऐसे कपडे लेकर जाएँ जिनमे आपको कोई परेशानी न हो और आप रिलैक्स रहें।
  • सफर के दौरान बाहर की चीजों का सेवन करने से बचें बल्कि घर से अपने खाने पीने का सामान, उल्टी रोकने वाली दवाई आदि सब साथ लेकर जाएँ।
  • सफर में भारी सामान को बिल्कुल भी न उठायें।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को घर से बाहर निकलते समय रखना चाहिए। ताकि माँ या बच्चे दोनों को सफर के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो।

गर्भधारण के बाद दूध में क्या मिलाकर पीना चाहिए

गर्भधारण के बाद दूध में क्या मिलाकर पीना चाहिए, प्रेगनेंसी में दूध में मिलाएं यह चीजें, गर्भवती महिला को दूध में यह मिलाकर जरूर पीना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि एक नन्ही जान भी पूरी तरह से महिला की सेहत पर ही निर्भर करती है। ऐसे में महिला को खान पान का खास ध्यान रखना पड़ता है, और इस दौरान महिला को भरपूर मात्रा में दूध पीने की सलाह दी जाती है। क्योंकि दूध में भरपूर पोषक तत्व होते हैं जो की महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। और महिला को दूध में केसर, घी आदि भी मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दूध में क्या मिलाकर पीना चाहिए। और उससे क्या क्या फायदे होते हैं।

दूध में मिलाएं केसर

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला नियमित रूप से एक गिलास दूध में चार या पांच रेशे केसर के मिलाकर पीती है। तो ऐसा करने से महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के साथ महिला को तनाव से दूर रखने में मदद मिलती है, शिशु के रंगत में निखार आता है, ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल होता है, पाचन क्रिया बेहतर होती है, साथ ही नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने में भी मदद मिलती है। लेकिन इसका सेवन अधिक नहीं करना चाहिए दिन में एक बार चार से पांच रेशे का सेवन बहुत होता है, और यदि आप इसका अधिक सेवन करते हैं तो यह शिशु के लिए और गर्भवती महिला दोनों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

घी मिलाएं

यदि आप शारीरिक रूप से कमजोर हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान दूध में थोड़ा सा घी डालकर उसका सेवन करने से आपको फिट रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आप स्वस्थ है तो शुरुआत में इसका सेवन न करें। प्रेगनेंसी के नौवें महीना में इसका सेवन बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि घी का भरपूर सेवन करने से गर्भाशय में चिकनाहट बढ़ती है जिससे नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ने के साथ शिशु का विकास भी बेहतर होता है।

हल्दी दूध

हल्दी और दूध दोनों में ही भरपूर पोषक तत्व होते हैं और प्रेगनेंसी के दौरान इनका सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। यदि आप गर्भावस्था में हल्दी दूध का सेवन करती है तो इससे आपकी स्किन की ख़ूबसूरती बरकरार रहती है, पंचन तंत्र दुरुस्त रहता है, कब्ज़ जैसी समस्या से निजात मिलता है, एंटी बायोटिक गुणों से भरपूर होने के कारण गर्भवती महिला और शिशु दोनों को ही हर तरह के संक्रमण से बचाव में मदद करता है, तनाव दूर रखने के साथ आपको बेहतर नींद लेने में भी मदद करता है, आदि। तो यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान इन फायदों को उठाना चाहते हैं तो आप भी प्रेगनेंसी के दौरान हल्दी दूध का सेवन कर सकते हैं।

बनाना शेक

प्रेगनेंसी में केले को दूध में मैश करके उसका सेवन भी शिशु और गर्भवती महिला दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही इसके सेवन से तनाव दूर करने के साथ ब्लड प्रैशर को भी कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

बादाम दूध

बादाम दूध का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे महिला को भरपूर मात्रा में आयरन मिलता है जिससे खून की कमी दूर होती है। साथ ही कैल्शियम, प्रोटीन जैसे पोषक तत्व भी भरपूर मिलते हैं। ऐसे में महिला दो चार बादाम को दूध में अच्छे से मिक्स करके उसका सेवन कर सकती है।

खजूर और दूध

दूध में खजूर मिक्स करके यदि गर्भवती महिला इसका सेवन करती है तो इससे अनीमिया की समस्या से बचाव करने के साथ, कब्ज़ जैसी समस्या से राहत मिलती है, और पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। ऐसे में गर्भवती महिला खजूर और दूध का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है।

तो यह हैं कुछ चीजें जो आप दूध में मिलाकर पी सकते हैं, और साथ ही आपको दिन में दो से तीन गिलास दूध का सेवन जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के साथ शिशु किए बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

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गर्भावस्था के दौरान दूध में क्या मिलाकर पीना चाहिए?