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क्या आपके मोबाइल में जियो इंटरनेट स्लो चलता है ये करें

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जिओ का नेटवर्क जब से आया है तब से भारत में इंटरनेट की दुनिया में खलबली मच गई है, वैसे जियो जब से लॉन्च हुआ था तब जियो का यह दावा था कि इसकी स्पीड 30 से 35 एमबीपीएस रहेगी लेकिन अभी भी जिओ की स्पीड इतनी नहीं है, जितनी लोग मानकर चल रहे थे, कुछ तो नेटवर्क की प्रॉब्लम की वजह से जिओ की स्पीड कम रहती है,  और कुछ तो मोबाइल में गलत सेटिंग की वजह से जिओ स्पीड कम हो जाती है।

तो चलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं अपने मोबाइल फोन में जिओ की स्पीड कैसे बढ़ाएं इसके लिए कुछ सेटिंग में बदलाव करके आप इसकी हाई स्पीड का मजा ले सकते हैं।

नीचे दिए गए टिप्स से आप अपने जियो की स्पीड बढ़ा सकते हैं।

अपने मोबाइल फोन की एपीएन सेटिंग बदलें, अपने रिलायंस जियो सिम में 4जी की स्पीड बढ़ाने के लिए आप अपने एपीएन सेटिंग में बदलाव कर सकते हैं, इसके लिए सबसे पहले आप सेटिंग में जाएं, अपने नेटवर्क की सेटिंग में जाएं फिर आप नेटवर्क टाइप में जाये और LTE सेटिंग को प्रिफर्ड कर दें, यानि वहा आपको कई सारे विकल्प मिलेंगे, याद रहे उन विकल्पों में आपको LTE सेलेक्ट करना है, फिर वापस ANP में आकर के नीचे स्क्रॉल डाउन करते जाये,  फिर आप APN  प्रोटोकॉल को चुने, प्रोटोकॉल में lpv4/Ipv6 कर दीजिए, फिर इसके बैरियर की सेटिंग में जाकर के LTE को सेलेक्ट कर दें और सारी की सारी सेटिंग सेव कर दें।

अपने मोबाइल फोन के सेटिंग में जाकर के फिर अपने सेटिंग को ओपन करके उसके सर्वर सेटिंग में जाएं सर्वर सेटिंग में आपको www.google.com लिखना है फिर इस सेटिंग को सेव कर दें तब फिर से आप इंटरनेट इंटरनेट को कनेक्ट करें आप पाएंगे कि आपके इंटरनेट की सेटिंग बढ़ चुकी है।

एक और बहुत अच्छा तरीका है जिओ की स्पीड बढ़ाने का, इसके लिए आपको स्नैप वीपीएन नाम का एक एप्लीकेशन play store  से डाउनलोड करना पड़ेगा, इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के बाद आप इस को ओपन करें, ओपन करने पर आपको अपने देश की लिस्ट और अपने देश की जियो सिग्नल स्ट्रेंथ दिखाई देगी, तो जाहिर सी बात है सबसे अच्छी स्ट्रेंथ वाली कंट्री को सिलेक्ट करें और उसे कनेक्ट कर लें, जैसे ही आपका फोन कनेक्ट हो जाता है आपके इंटरनेट की स्पीड बढ़ जाएगी, उसके बाद आप अपने इंटरनेट की स्पीड चेक करें आपको बहुत अच्छी स्पीड मिल रही होगी।

अपने मोबाइल फोन की इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने के लिए एक और तरीका है, वह यह है कि जब भी आप अपना स्मार्टफोन यूज करते हैं तो धीरे-धीरे करके कुछ टेंपरेरी फाइल और Cached फाइल्स सेव होती जाती है, जो कि आपको अच्छे इंटरनेट स्पीड देने में बाधा उत्पन्न करता है तो यह हमेशा याद रखें अपने मोबाइल फोन में Cached फाइल और टेंपरेरी फाइल हमेशा डिलीट करते रहें ऐसा करने से आपको एक अच्छे इंटरनेट की स्पीड मिलेगी।

नीचे दिए हुए स्क्रीन शॉट को देख कर के भी आप अपने मोबाइल फोन में जिओ की स्पीड बढ़ा सकते हैं

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गर्मी में चेहरा काला पड़ जाए तो यह हैं उपाय

गर्मी के मौसम में धूप की तेज किरणें जब स्किन पर पड़ती है तो इससे स्किन को बहुत नुकसान पहुँचता है। क्योंकि धूप के कारण टैनिंग और सनबर्न की समस्या, स्किन का नमी खोना, रूखी व् बेजान त्वचा, मुहांसे दाने आदि की परेशानी, चेहरे का कालापन बढ़ना आदि समस्या हो जाती है। और चेहरे का कालापन आपकी ख़ूबसूरती को कम कर देता है। ऐसे में गर्मियों में भी अपनी स्किन की कोमलता को बरकरार रखने व् चेहरे को गोरा और खूबसूरत रखने के लिए कुछ आसान टिप्स आप ट्राई कर सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्मियों में भी चेचेहरे के निखार को बरकरार रखने के टिप्स कौन से हैं।

निम्बू

एक निम्बू की स्लाइस काटकर आप इसे अपने चेहरे पर रगड़ें। और अच्छे से मसाज करें, या फिर निम्बू का रस निकालकर आप रुई की मदद से इसे चेहरे पर लगाएं। और इसे जब तक लगा रहने दें जब तक की आपकी स्किन इसे अच्छे से सोख न लें। निम्बू में विटामिन सी मौजूद होता है जो एक प्राकृतिक क्लीन्ज़र की तरह काम करता है और डेड स्किन को निकाल देता है। उसके बाद जब निम्बू सूख जाये तो इसे पानी से साफ़ कर दें, ऐसा रोजाना करें, ऐसा करने से चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

एलोवेरा

एलोवेरा स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है स्किन से जुडी कोई भी परेशानी हो एलोवेरा का इस्तेमाल करने से उससे निजात पाने में मदद मिलती है। ऐसे में चेहरे के कालेपन को दूर करने के लिए आप एलोवेरा जैल को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, या फिर आप रात को सोने से पहले चेहरे पर एलोवेरा जैल लगाएं और इसे रातभर के लिए छोड़ दें। उसके बाद जब जैल सूख जाये तो साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो दें। ऐसा रोजाना करें क्योंकि ऐसा करने से गर्मियों में चेहरे पर निखार लाने के साथ चेहरे से जुडी अन्य परेशानियों को दूर करने में भी मदद मिलती है।

कच्चा दूध

कच्चा दूध भी प्राकृतिक रूप से क्लीन्ज़र का काम करता है। ऐसे में रुई की मदद से सुबह शाम कच्चा दूध चेहरे पर लगाएं और जब आपकी स्किन दूध अच्छे से सोख ले। उसके बाद अपने चेहरे को अच्छे से धो लें, इसके अलावा कच्चे दूध में यदि थोड़ी सी हल्दी और निम्बू का रस मिलाकर आप चेहरे पर लगाते हैं। तो ऐसा करने से भी गर्मियों में चेहरे के कालेपन को दूर करके चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है।

आलू

आलू का इस्तेमाल करने से भी चेहरे पर होने वाली मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप आलू की स्लाइसेस काटकर उससे चेहरे की मसाज करें या आलू को क्रश करके अच्छे से पीस लें, उसके बाद आलू का रस निकालकर रुई की मदद से से उसे अपने चेहरे पर लगाएं। जब आपकी स्किन रस को अच्छे से सोख ले तो उसके बाद आप साफ़ पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा करने से आपके चेहरे को कालेपन को दूर करके चेहरे में निखार लाने में मदद मिलती है।

टमाटर

टमाटर को पीसकर उससे अपने चेहरे की मसाज करें और उस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगे रहने दें। थोड़ी देर बाद साफ़ पानी से चेहरे को धो लें। आप चाहे तो इसमें खीरे का रस, निम्बू का रस आदि भी मिला सकते हैं। ऐसा करने से भी चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

बेसन

एक कटोरी में दो चम्मच बेसन लें उसके बाद उसमे चुटकीभर हल्दी, लेप बनाने के लिए दूध या दही डालें। फिर इस लेप को चेहरे पर लगाएं और दो से तीन मिनट तक मसाज करें। उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें सूखने के बाद साफ़ पानी से धो दें, ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें। ऐसा करने से भी धूप के कारण चेहरे पर हुए कालेपन को दूर करके चेहरे में निखार लाने में मदद मिलती है।

चन्दन और गुलाबजल

एक कटोरी में एक चम्मच चन्दन पाउडर, आधा चम्मच निम्बू का रस, और जरुरत अनुसार गुलाबजल मिलाएं और एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और आँखों पर खीरे की स्लाइसेस काटकर आराम से लेट जाएँ। और उसके बाद जब यह पेस्ट सूखने लगे तो उसके बाद हाथों पर पानी लगाकर मसाज करते हुए इसे साफ कर दें। ऐसा करने से भी चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है।

गर्मियों में धूप के कारण स्किन के कालेपन को दूर करने के अन्य टिप्स

  • पानी का भरपूर सेवन करें इससे स्किन हाइड्रेटेड रहती है, जिससे स्किन की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है।
  • जब भी कहीं बाहर जाये तो सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें, छाता लेकर जाये, चश्मा पहनकर घर से निकलें।
  • घर में नहाने के बाद स्किन पर लोशन का इस्तेमाल जरूर करें।
  • यदि आप कहीं बाहर से आ रहे हैं तो घर आने के बाद हाथ मुँह अच्छे से धोएं, इससे स्किन पर जमी हुई धूल मिट्टी खत्म हो जाती है और चेहरे को निखारने में मदद मिलती है।।
  • रात को सोने से पहले मुँह पर रुई की मदद से गुलाबजल जरूर लगाएं ऐसा करने से स्किन को पोषण मिलता है व् स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है।
  • सफ़ेद चावल को थोड़ी देर पानी में भिगोकर रख दें फिर उस पानी से अपने चेहरे को धो लें इससे भी चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।
  • गुलाबजल और निम्बू की कुछ बूँदे मिलाकर सुबह नहाने से पहले दो से तीन मिनट तक मुँह की मसाज करें, ऐसा करने से चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

तो यदि आप भी गर्मी व् धूप के कारण चेहरे के कालेपन से परेशान हैं तो आप भी इनमे से किसी भी आसान टिप्स को ट्राई कर सकते हैं। लेकिन इन्हे नियमित रूप से करें ताकि गर्मियों में चेहरे के निखार को बरकरार रखने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में कुछ महिलाओं का पेट क्यों नहीं दिखाई देता?

गर्भावस्था के दौरान तीन महीने के बाद थोड़ा थोड़ा महिला का पेट बाहर निकलना शुरू हो जाता है। और जिन लोगो को प्रेगनेंसी की शुरुआत में यह पता नहीं होता है की आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं वो आपके पेट को देख कर अंदाजा लगाने लगते हैं। लेकिन कुछ केस में देखने को मिलता है की कुछ महिलाओं का पेट ज्यादा बाहर की तरफ दिखाई नहीं देता है और उन्हें दूसरी तिमाही में देखकर भी अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता की महिला गर्भवती है या नहीं। और महिला का पेट बाहर अधिक न दिखने पर कुछ महिलाएं परेशान भी हो सकती है। की आखिर उनका पेट क्यों दिखाई नहीं दे रहा है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पेट बाहर निकलना स्वस्थ प्रेगनेंसी और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास की निशानी होती है।

प्रेगनेंसी में पेट कम दिखने के कारण

गर्भावस्था के दौरान पेट के बाहर कम निकलने के कारण कुछ महिलाएं परेशान हो सकती है। लेकिन महिला के पेट के बाहर न निकलने का कोई एक कारण नहीं होता है और ऐसा भी जरुरी नहीं है की पेट का बाहर कम निकलना हमेशा किसी समस्या का संकेत हो। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला के पेट के कम बाहर निकलने के क्या कारण होते हैं।

पहली प्रेगनेंसी

पहली प्रेगनेंसी के दौरान महिला की मांसपेशियां अच्छे से जुडी हुई होती है उनमे लचीलापन कम होता है, जबकि दूसरी प्रेगनेंसी में मांसपेशियों में लचीलापन अधिक होता है। इसीलिए पहली प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट थोड़ा कम बाहर महसूस हो सकता है जबकि दूसरी प्रेगनेंसी में पेट बाहर की तरफ दिखाई देना जल्दी शुरू हो सकता है।

लम्बाई

गर्भवती महिला की लम्बाई यदि अधिक होती है तो इसके कारण गर्भ में शिशु को ज्यादा जगह मिलती है। और जब शिशु को घूमने के लिए जगह मिल जाती है तो इसके कारण भी महिला का पेट बाहर की तरफ कम दिखाई से सकता है। जबकि जिन महिलाओं की लम्बाई कम होती है उनका पेट बाहर की तरफ ज्यादा दिखाई दे सकता है।

एमनियोटिक फ्लूड

गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में होता है और यदि गर्भ में एमनियोटिक फ्लूड की कमी होती है। तो इसके कारण भी गर्भाशय का आकार कम बढ़ता है और इसके कारण गर्भ में शिशु को भी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में गर्भ में एमनियोटिक फ्लूड की कमी होने के कारण भी महिला का पेट बाहर की और कम दिखाई दे सकता है।

शिशु के वजन में कमी

यदि गर्भ में पल रहे शिशु को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिलते हैं जो उसके शारीरिक विकास के लिए जरुरी होते हैं। तो इसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है जिसके कारण शिशु का विकास अच्छे से न होने के कारण महिला का पेट बाहर की और कम दिखाई से सकता है। इसके बारे में डॉक्टर अल्ट्रासॉउन्ड या अन्य चेकअप के दौरान आपको बता सकते हैं, ऐसे में शिशु के विकास में किसी तरह की कमी न हो इसके लिए महिला को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला का पेट बाहर की तरफ कम महसूस हो सकता है। ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है। और इसे लेकर यदि आपके मन में कोई चिंता हो तो आप डॉक्टर से भी राय ले सकती है।

अखरोट खाने के फायदे

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Akhrot (Walnut) Benefits

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अखरोट, उन ड्राई फ्रूट्स में से एक है जिसे हर कोई खाना पसंद करता है फिर चाहे वो बच्चा हो या बड़ा। लेकिन क्या आप जानते है की इसका सेवन करने के कितने फायदे होते है? जी हां, स्वाद के साथ-साथ यह ड्राई फ्रूट स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। इसके सेवन से शरीर में कई गंभीर बिमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। रोजाना अखरोट के सेवन से कैंसर जैसी घातक बिमारियों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है।

इसके सेवन से शरीर का मेटाबोलिज्म भी स्वस्थ रहता है। प्रतिदिन इसका सेवन करने से ऊर्जा का स्तर भी बना रहता है। बहुत से लोग अखरोट को ब्रेन फ़ूड भी कहते है क्योंकि माना जाता है की इसके सेवन दे मस्तिष्क में सोचने समझने की क्षमता का विकास होता है। याददाश्त कमजोर होने की स्थिति में भी वॉलनट का सेवन लाभकारी होता है।

वैसे इसे दूध के साथ खाना अधिक फायदेमंद होता है। इसके अलावा भी इसके फायदे है जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है। तो आइये जानते है अखरोट के फायदे।

अखरोट खाने के फायदे 

1. वजन :

अखरोट का नियमित सेवन करने से शरीर का वजन घटाने में मदद मिलती है। क्योंकि इस ड्राई फ्रूट में फैट की मात्रा बहुत कम होती है। तो अगर आप भी अपना वजन घटना चाहते है तो आज से ही नियमित रूप से वॉलनट का सेवन करना शुरू कर दें। लाभ होगा।

2. नींद :walnut benefits

आपको जानकर आश्चर्य होगा लेकिन ये सत्य है की अखरोट का सेवन करने से शरीर को आराम मिलता है जिससे अच्छी नींद आती है। और अच्छी नींद का अर्थ है स्वस्थ शरीर। इसलिए अगर आपको भी अक्सर रात नींद नहीं आने की समस्या है तो अभी से अखरोट का सेवन करना शुरू कर दें।

3. दिल के लिए :

वॉलनट का सेवन करने से हृदय स्वस्थ रहता है। क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो हृदय को स्वस्थ बनाने में मदद करती है। और हार्ट अटैक के खतरे को कम करती है।

4. डायबिटीज :

अगर आप भी मधुमेह से परेशान है तो अखरोट आपके लिए बहुत लाभकारी है। इसके नियमित सेवन से आप मधुमेह की समस्या से बच सकते है। इसके सेवन से डायबिटीज 2 में आराम मिलता है।

Read more : डायबिटीज के क्या क्या लक्षण होते है?
5. स्पर्म :

जो पुरुष पिता बनने की इच्छा रखते है उनके लिए भी अखरोट काफी लाभकारी होता है। इससे पुरुषों में स्पर्म काउंट बढ़ता है।

6. ब्रेन फ़ूड :

अखरोट का नियमित रूप से सेवन करने से दिमाग तेज होता है इसलिए इसे ब्रेन फ़ूड के नाम से भी जाना जाता है। इसमें विटामिन सी की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है जो मस्तिष्क को सोचने और समझने की क्षमता को बढ़ाती है। इसे खाने से दिमाग भी तेज होता है।

7. कैंसर :अखरोट

अखरोट के सेवन से पेट के कैंसर में होने वाली समस्याएं दूर होती है। इसके सेवन से इसमें होने वाली पीड़ा भी कम होती है और कमजोरी भी नहीं आती। अगर आपके साथ भी ऐसी कोई समस्या है तो अभी से अखरोट का सेवन करना शुरू कर दें।

8. लॉन्ग लाइफ :

स्वस्थ और लम्बे जीवन के लिए वॉलनट का सेवन बहुत लाभकारी होता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से जीवनकाल बढ़ता है और शरीर ऊर्जा से भरा रहता है। तो देर किस बात की आज से ही अखरोट का सेवन करना प्रारंभ कर दें।

9. गर्भावस्था :

गर्भवती महिलाओं के लिए अखरोट का सेवन बहुत ही लाभकारी होता है। इसके सेवन से पेट में पल रहे बच्चे को एलर्जी नहीं होती। साथ ही बच्चे की ग्रोथ के लिए जरुरी तत्व भी इससे आसानी से मिल जाते है।

10. तनाव :

Read more : तनाव दूर करने के उपाय 

एक शोध से पता चला है की वॉलनट का सेवन करने से तनाव का स्तर काफी कम हो जाता है। इसके नियमित सेवनब से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है जिससे शरीर थकता नहीं और तनाव से बचा रहता है।

11. स्तनों के लिए :

अगर आप भी अपने स्तनों को सुन्दर, सुडौल और स्वस्थ बनाये रखना चाहती है तो दैनिक रूप से अखरोट का सेवन करना प्रारंभ कर दें। इससे काफी लाभ मिलेगा।

12. बाल :अखरोट के फायदे

अखरोट का सेवन करने से बाल मजबूत होते है और डैंड्रफ की समस्या भी नहीं होती।

13. पथरी :

पथरी की समस्या में वॉलनट एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में कार्य करता है। इसके लिए साबुत अखरोट के चूरन को सुबह और शाम एक चम्मच पानी के साथ खाने से समस्या दूर हो जाती है।

14. बवासीर :

अखरोट को छीलकर उसका छिलका निकाल लें। अब इस छिलके को जलाकर राख बना लें। इस रख में गुरुच (Guruc) मिलाकर दिन में दो बार खाएं। बवासीर की समस्या में लाभ मिलेगा।

गर्भावस्था के छठे महीने में शिशु का विकास और गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव

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गर्भावस्था के छठे महीने में गर्भ के अंदर शिशु में क्या-क्या विकास होता है? और गर्भवती महिला के शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं आज हम उनके बारे में बात कर रहे हैं। गर्भावथा का हरेक महीना गर्भवती महिला के लिए खास होता है। पर छठा महीना उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। क्यूंकि इस महीने तक शिशु की बाहरी संरचनाओं का विकास पूरा हो जाता है। और शिशु गर्भ से बाहर की आवाजें भी सुनने व् पहचानने लगता है। पूर्ण तौर पर कहें तो छठे महीने तक शिशु पूरी तरह बनकर तैयार हो जाता है और एक नवजात की तरह दिखने लगता है।

गर्भावस्था का छठा महीना और शिशु में विकास

प्रेगनेंसी के छठे महीने तक शिशु के मष्तिष्क की कोशिकाएँ पूरी तरह विकसित हो जाती है। पर शिशु की त्वचा अभी भी बहुत नाजुक और पतली है जो जन्म तक सामान्य हो जाएगी।

छठे महीने से शिशु गर्भ के भीतर ज्यादा मूवमेंट करने लगता है जिसे आप अपने हाथ को पेट पर रखकर महसूस कर सकती हैं। ये पल आपके लिए बहुत ही बढियाँ होगा। आपके पेट सहलाने पर शिशु किक करके या मूव करके आपको प्रतिक्रया भी देगा।

इस महीने से शिशु गर्भ के भीतर सोने और जागने भी लगता है। छठा महीना खत्म होते-होते शिशु के मस्तिष्क का विकास पूरा हो जाता है। इस समय तक शिशु के सभी अंदरूनी और बाहरी अंगों का विकास हो जाता है।

प्रेग्नेंसी के छठे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव

गर्भावस्था के छठे महीने में गर्भवती महिला के शरीर में भी कई बदलाव होने लगते हैं, अब उन्ही के बारे में बता रहा हैं। छठे महीने से गर्भवती महिला का वजन तेजी से बढ़ने लगता है जिसके कारण पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है।

बॉडी में हार्मोनल चैंजेस के कारण अपच और कब्ज की समस्या होने लगती है जिसके कारण पेट दर्द की समस्या हो सकती है। इस समय तक शिशु भी बढ़ने लगता है जिसके कारण गर्भवती महिला की भूख बढ़ जाती है। कई महिलाओं को इस महीने में खर्राटे आने की समस्या भी होने लगती है। पर ऐसा जरुरी नहीं है की ये सब के साथ हो।

छठे महीने में गर्भवती महिलाओं के पेट के निचले भाग में तेज खुजली हो सकती है। पीठ और शरीर में दर्द होता है जिसके कारण कई बार रात में नींद नहीं आती। पेट का आकार बढ़ जाने के कारण मांसपेशियों पर खिचांव आने लगता है।

दोस्तों, छठे महीने तक शिशु का काफी विकास पूरा हो जाता है पर अंगों में परिपक्वता आना भी शेष है। तो इस महीने से आपको अपनी खास देखभाल करनी होगी। जरा सी लापरवाही प्रीटर्म डिलीवरी का कारण बन सकती है। इसीलिए छोटी से छोटी परेशानी में भी डॉक्टर को दिखाएं, रेगुलर चेकअप करवाती रहें ताकि शरीर में हो रही पोषक तत्वों की कमी को सही समय पर पूरा किया जा सके और गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ रहे।

सबसे सेफ तरीका गर्भधारण नहीं होने का

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गर्भवती होना हर स्त्री के जीवन का सबसे सुखद अनुभव होता है लेकिन जब यही गर्भ बिना किसी प्लानिंग के ठहर जाए तो ये आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे तो गर्भधारण और प्रेग्नेंसी को रोकने के कई तरीके है लेकिन कहीं ना कहीं किसी उपाय का साइड इफेक्ट हो जाता है।

गर्भधारण से बचने के आम उपाय

प्रेगनेंसी रोकने के लिए कं-डोम या कंट्रासेप्टिक पिल्स को सबसे बेहतर उपाय माना जाता है, लेकिन बहुत से लोग कं-डोम का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, जबकि बहुत सी महिलाएं गोली नहीं खाना चाहती। इसलिए आज हम आपको उन तरीकों के बारे में बता रहे हैं जिनकी मदद से बिना कं-डोम के संबंध बनाने से भी गर्भधारण नहीं होगा।

गर्भधारण से बचने का सबसे सेफ तरीका

कॉपर-टी 

प्रेगनेंसी से बचने के लिए कॉपर-टी का इस्तेमाल बहुत लाभकारी होता है। इसके इस्तेमाल से काफी हद तक प्रेगनेंसी को रोका जा सकता है, एक बार इस्तेमाल से कई सालों तक गर्भधारण नहीं होता। कॉपर-टी, टी आकार की एक प्लास्टिक की छड़ होती है जिसे महिला के गर्भाशय में लगाया जाता है। इस छड़ के अंतिम छोर पर एक धागा बंधा होता है जो महिला के प्राइवेट पार्ट से बाहर रहता है। यह को अंडे से मिलने से रोकती है जिससे गर्भधारण की संभावना खत्म हो जाती है।

गर्भ निरोधक रिंग

प्रेगनेंसी को रोकने का यह सबसे सरल तरीका माना जाता है। यह रिंग बहुत छोटी और लचीली होती है जिसे महिला के प्राइवेट पार्ट के अंदर डाल दिया जाता है। शरीर में प्रवेश करके यह विशेष हॉर्मोन रिलीज़ करती है जिससे गर्भधारण नहीं होता। यदि गर्भनिरोधक रिंग का सही तरह का इस्तेमाल किया जाए तो 98% तक प्रेग्नेंट होने से बचा जा सकता है।

गर्भनिरोधक टेबलेट

बाजार में आजकल बहुत सारी गर्भनिरोधक गोलियां उपलब्ध हैं, जो आसानी से आपको किसी भी मेडिकल स्टोर पर मिल जायेंगी। इसे रोजाना भी खा सकते हैं या साप्ताहिक या महीने में एक भी खा सकते हैं। अलग-अलग टेबलेट्स को खाने का तरीका अलग-अलग होता है इसलिए दवा लेने से पहले डॉक्टर से मिलें और उनके हिसाब से ही दवा का सेवन करें। संबंध बनाने के 72 घंटों के भीतर  इमरजेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स खाकर भी गर्भधारण से बच सकती हैं। लेकिन ध्यान रहे अधिक इस्तेमाल से आपको शारीरिक हानि हो सकती है इसलिए केवल इमरजेंसी में ही दवा का इस्तेमाल करें।

पुल-आउट

पुल-आउट को गर्भधारण से बचने के प्राकृतिक तरीकों में से एक माना जाता है जिसमे संबंध बनाते समय पुरुष डिस्चार्ज की स्थिति में पहुँचने से पूर्व ही प्राइवेट पार्ट को बाहर निकाल लेते है जिससे शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते। इस विधि का इस्तेमाल अधिक वो कपल करते हैं जो कं-डोम का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। परन्तु इसके प्रयोग के समय सावधानी बरतनी चाहिए, क्यूंकि इसकी जरा की मात्रा भी गर्भधारण की संभावना को बढ़ा सकती है।

गर्भनिरोधक पैच

बदलते समय के साथ-साथ गर्भधारण रोकने के तरीकों में भी बदलाव हो गए हैं। आजकल मार्किट में गर्भनिरोधक पैच भी उपलब्ध हैं को प्रेग्नेंसी को रोकने में काफी हद तक आपकी मदद कर सकते हैं। इन्हे पेट के निचले हिस्से में लगाया जाता है। दरअसल इस पैच में एस्ट्रोजन और प्रेजेस्ट्रोन हॉर्मोन होता है जो शरीर सोख लेता है। शरीर में प्रवेश करने बाद ये हॉर्मोन परिपक्व अंडे निकलने की प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं जिससे इसके साथ निषेचन नहीं होता और प्रेग्नेंसी के चान्सेस भी कम हो जाते हैं।

पीरियड्स साइकिल 

अगर पीरियड्स साइकिल को ध्यान में रखकर सही समय पर संबंध बनाए जाए तो प्रेग्नेंसी के चांसेस बहुत कम हो जाते हैं। महीने में कुछ ऐसे दिन होते हैं जिनके बीच संबंध बनाने से गर्भवती होने से बचा जा सकता है। पीरियड्स होने के पहले के 7 दिनों को इनफर्टाइल दिन कहा जाता है। इस बीच प्रेग्नेंट होने की संभावना बहुत कम होती हैं। लेकिन सभी की प्रेग्नेंसी साइकिल अलग-अलग होती है इसलिए इस उपाय का इस्तेमाल सोच-समझकर ही करना चाहिए। इसके अलावा पीरियड्स के दौरान 1 से 7 दिन के भीतर भी संबंध बनाने से गर्भवती होने की संभावनाएं 80% तक कम हो जाती हैं।

गर्भधारण से बचने के लिए इनका ध्यान रखें 

ऊपर बताये गए तरीकों को अपनाकर आप गर्भधारण से बच सकती हैं। इसके अलावा अगर आप चाहे तो कं-डोम का प्रयोग करके भी गर्भधारण होने से रोक सकती हैं। ऊपर बताए गए तरीके काफी हद तक आपकी प्रेग्नेंसी को रोकने में मदद कर सकते है लेकिन हो सकता है कुछ स्थितियों में वे कारगर ना हो। इसलिए सोच समझकर सही उपाय का इस्तेमाल करें गर्भधारण रोकने के लिए।

प्रेगनेंसी में खजूर खाने के 8 फायदे

गर्भावस्था में खजूर, प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी बहुत सी खाने की चीजें है जिसे लेकर महिला के मन में डर होता है। की क्या उस चीज का सेवन महिला को प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए या नहीं। जैसे की खजूर, प्रेगनेंसी में खजूर का सेवन किया जा सकता है। क्योंकि खजूर में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। जो गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि भ्रूण के लिए भी फायदेमंद होते हैं। साथ ही खजूर का सेवन करने से महिला को केवल प्रेगनेंसी में ही फायदा नहीं मिलता है। बल्कि प्रसव के दौरान भी यह फायदेमंद होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में खजूर का सेवन क्यों करना चाहिए? कब करना चाहिए? और इसका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को क्या फायदे मिलते हैं।

गर्भावस्था में खजूर का सेवन क्यों करना चाहिए ?

  • विटामिन, फोलेट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, कैलोरी, प्रोटीन, पोटैशियम, व् अन्य बहुत से पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • यह पोषक तत्व केवल गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि भ्रूण के विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए और भ्रूण के बेहतर विकास के लिए खजूर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान खजूर का सेवन कब करना चाहिए?

खजूर का सेवन गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही से लेकर तीसरी तिमाही तक कभी भी कर सकती है। क्योंकि इसका सेवन करने से प्रेगनेंसी की तीनों तिमाही में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। जैसे की यह बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करता है, ब्लड में शुगर के लेवल को मैंटेन करने में मदद करता है, आदि। इसीलिए प्रेगनेंसी में कभी भी गर्भवती महिला खजूर का सेवन कर सकती है।

गर्भावस्था में खजूर खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान खजूर का सेवन प्रेग्नेंट महिला ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान खजूर का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

गर्भावस्था में खजूर खाने से मिलता है आयरन

  • एनीमिया जैसी समस्या का सामना, शिशु के विकास में कमी, आदि दिक्कतें प्रेग्नेंट महिला को आयरन की कमी के कारण हो सकती है।
  • लेकिन खजूर का सेवन करने गर्भवती महिला को इस दिक्कत से निजात मिल सकता हैं।
  • क्योंकि खजूर में आयरन मौजूद होता है।
  • जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

फाइबर

  • प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया के धीमे पड़ने के कारण, वजन बढ़ने के कारण महिला को कब्ज़, एसिडिटी जैसी दिक़्कतें हो सकती है।
  • लेकिन खजूर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इन परेशानियों से निजात मिल सकता है।
  • क्योंकि खजूर में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करता है।
  • साथ ही इससे मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है।
  • जिससे कब्ज़ व् अन्य पेट सम्बन्धी समस्याओं से प्रेग्नेंट महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।

कैलोरी

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है।
  • खजूर में कैलोरी की मात्रा मौजूद होती है।
  • ऐसे में खजूर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में खजूर खाने से मिलता है कैल्शियम

  • गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती के लिए और गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए प्रेग्नेंट महिला को कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • खजूर में कैल्शियम की मात्रा मौजूद होती है।
  • ऐसे में खजूर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी से राहत पाने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
  • साथ ही इसमें मैग्नीशियम भी मौजूद होता है जो हड्डियों व् दांतों के लिए फायदेमंद होता है।

प्रोटीन

  • खजूर में प्रोटीन व् एमिनो एसिड की मात्रा भी मौजूद होती है।
  • जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रखने में मदद करता है।
  • साथ ही इससे भ्रूण के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

रक्तचाप

  • खजूर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर को भी कण्ट्रोल में रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने वाली समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

फोलेट

  • शिशु के गर्भ में बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास, जन्म दोष से बचाव, रीढ़ की हड्डी के बेहतर विकास, के लिए फोलेट की बहुत जरुरत होती है।
  • खजूर में फोलेट की मात्रा मौजूद होती है।
  • गर्भवती महिला यदि खजूर का सेवन करती है।
  • तो इससे शिशु को भरपूर मात्रा में फोलेट पहुंचाया जाता है।
  • जिससे गर्भ में भ्रूण को इन सभी परेशानियों से बचाने में मदद मिलती है।

ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन

  • खजूर का सेवन करने से बॉडी में ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन रिलीज़ होता है।
  • जो प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में प्रसव को आसान बनाने में मदद करता है।

गर्भावस्था में खजूर का सेवन करने के नुकसान

जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन व्यक्ति के लिए नुकसानदायक हो सकता है। और प्रेगनेंसी के दौरान तो इस बात का ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान खजूर का अधिक सेवन करने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

  • अधिक मात्रा में खजूर का सेवन करने से दस्त, डायरिया जैसी समस्या हो सकती है क्योंकि इसमें फाइबर मौजूद होता है।
  • खजूर का अधिक सेवन करने से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ सकता है, जिसके कारण महिला को गेस्टेशनल शुगर की परेशानी हो सकती है।
  • कैलोरी से भरपूर होने के कारण इसके कारण प्रेग्नेंट महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है।
  • दांतों के खराब होने का खतरा खजूर का अधिक सेवन करने से हो सकता है।

प्रेगनेंसी में किस तरह कर सकते हैं खजूर का सेवन

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला यदि खजूर का सेवन करती है। तो एक तरह से नहीं बल्कि कई तरह से गर्भवती महिला खजूर का सेवन कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में खजूर का सेवन किस तरह से किया जा सकता है।

  • खजूर को सुखाने के बाद इसका सेवन किया जा सकता है।
  • मार्किट से लाया ताजा खजूर भी खाया जा सकता है।
  • दूध या किसी फ्रूट के शेक में मिक्स करके भी इसका सेवन किया जा सकता है।
  • खजूर को दही के साथ मिक्स करके भी इसका सेवन किया जा सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान खजूर का सेवन करने के फायदे व् उससे जुड़े अन्य टिप्स। तो यदि आपको भी प्रेगनेंसी में खजूर के सेवन को लेकर कोई दुविधा है तो यह आर्टिकल आपके सभी सवालों का जवाब दे सकता है।

उँगलियों में सूजन के क्या कारण होते हैं

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सूजन की समस्या का अधिक होना कई बार परेशानी का कारण बन जाता है, क्योंकि इस सूजन के साथ दर्द भी अधिक होने लगता है। तो आज हम आपसे हाथों पैरों की उँगलियों में होने वाली सूजन के बारे में बात करने जा रहे हैं। इस सूजन के होने के कारण काम करने में परेशानी व् चलने फिरने में भी दिक्कत का सामना हो सकता है। इसके अलावा उँगलियों में सूजन होने के बहुत से कारण हो सकते हैं। जैसे की सर्दियों में यह समस्या बहुत अधिक देखने को मिलती है, शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से न होने के कारण भी आपको यह परेशानी हो सकती है, आदि। इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं तो आइये अब जानते हैं की उंगलियों में सूजन होने के कौन कौन से कारण होते है।

ऊंगलियों में सूजन होने के कारण

चाहे हाथ हो या पैर किसी की भी उँगलियों में सूजन का होना बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। और इसके कारण बहुत दिक्कत भी होती है, लेकिन क्या अपने सोचा है की उँगलियों में अधिक सूजन के क्या कारण हो सकते हैं, यदि नहीं तो आइये हम आपको बताते है।

सर्दियों में

सर्दियों में ठण्ड के कारण कई बार बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है, ऐसे में आपको उँगलियों में सूजन की समस्या हो जाती है।

चोट आदि लगने के कारण

यदि कभी आपको हाथ या पैर की ऊँगली में चोट आदि लग जाती है, तो इसके कारण भी ऊँगली में सूजन की परेशानी हो सकती है।

एलर्जी

यदि आपको हाथों या पैरों की उँगलियों में किसी कारण एलर्जी हो गई है तो इसके कारण भी आपको सूजन का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी

प्रेगनेंसी में बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण भी प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मेटाबोलिज्म

बॉडी में मेटाबोलिज्म के घटने के कारण भी आपके हाथों पैरों की उँगलियों में सूजन की समस्या हो सकती है। और मेटाबोलिज्म घटने का कारण आपकी उम्र का बढ़ना हो सकता है।

बिमारी के होने का संकेत

हाथों पैरों की उँगलियों में सूजन अधिक होना शरीर में होने वाले किसी विकार का कारण भी हो सकता है, और यह हृदय रोग, गठिया, रक्त विकार, हाइपो थाइरॉएड, अर्थराइटिस, आदि की और इशारा करता है। इसीलिए यदि आप अधिक सूजन की समस्या रहती है तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

लिवर से जुडी परेशानी

यदि आपको लिवर से जुडी कोई परेशानी है तो कई बार ऐसा हो सकता है की आपको अपने हाथों पैरों की उँगलियों में सूजन की समस्या हो जाए।

खून की कमी

शरीर में खून की कमी होने पर कई बार शरीर के अंगो तक ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से नहीं हो पाता है, जिसके कारण अंगो में सूजन की समस्या देखने को मिलती है।

मौसम के कारण

ठण्ड अधिक होने के कारण कई बार आपके शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है जिसके कारण आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, खासकर जब आप ठंडे पानी में काम करते हैं तो आपको इसका अहसास ज्यादा होता है।

उँगलियों में सूजन को दूर करने के उपाय

  • सरसों के तेल में नमक को अच्छे से मिक्स करके अपनी उँगलियों पर लगाएं, और उसके बाद उँगलियों को कवर कर लें, रात भर के लिए ऐसे ही छोड़ दें सुबह उठकर गुनगुने पानी से उँगलियों को धो लें ऐसा करने से आपको सूजन से आराम मिलेगा।
  • एक बर्तन में पानी में नमक और फिटकरी को डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद उसके गुनगुना रहने पर उसमे अपने हाथों पैरों को डालकर सिकाई करें आपको फायदा मिलेगा।
  • मटर या शलगम का को पानी में उबालकर उस पानी से सिकाई करने पर भी आपको आराम मिलता है।
  • जैतून के तेल में हल्दी मिक्स करके उसे गर्म कर लें, और उसके बाद इसे उँगलियों में लगाकर छोड़ दें, थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से उँगलियों को साफ़ करें आपको फायदा मिलेगा।
  • निम्बू का रस उँगलियों में लगाएं इससे भी आपको सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • सूजन की समस्या होने पर आपको अपने आहार में नमक का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए।
  • गुनगुने पानी से हाथों और पैरों की उँगलियों की सिकाई करें इससे भी आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनकी मदद से आप उँगलियों में होने वाली सूजन की समस्या से राहत पा सकते हैं। इसके अलावा यदि आपको सूजन की समस्या अधिक रहती है तो इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि ज्यादा सूजन की समस्या का होना कई बार किसी बिमारी की और संकेत करता है।

प्रेगनेंसी के चौथे से छठे महीने तक गर्भवती महिला को क्या परेशानियां होती है

गर्भावस्था का चौथे से छठा महीना प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही होती है और इस समय को प्रेगनेंसी का हैप्पी पीरियड भी कहा जाता है। क्योंकि इस दौरान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होने वाली शारीरिक परेशानियों से थोड़ा निजात मिल जाता है। साथ ही इस समय में महिला को शिशु की पहली हलचल, पेट का बढ़ता आकार जैसे अनुभव भी होते हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है की महिला को इस दौरान बिल्कुल भी परेशानी नहीं होती है। थोड़ी बहुत परेशानियों का होना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत आम बात होती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला को क्या परेशानियां होती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

कब्ज़ व् सीने में जलन

गर्भाशय के आकार के बढ़ने, पेट में शिशु के वजन के बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव महसूस होता है। जिसके कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है और खाने को हज़म करने में महिला को दिक्कत होती है जिससे कब्ज़ की समस्या होती है। कब्ज़ के कारण महिला को सीने में जलन व् खट्टे डकार आने जैसी समस्या भी हो सकती है।

भूख में बढ़ोतरी के कारण हो सकती है परेशानी

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला के खाने की इच्छा में बढ़ोतरी होती है जो की एक अच्छी बात होती है लेकिन इस चक्कर में यदि महिला बहुत ज्यादा खाती है तो इसके कारण महिला का जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। साथ ही महिला यदि इस समय जंक फ़ूड, मसालेदार भोजन आदि का सेवन भी करती है तो इसके कारण पेट से सम्बंधित समस्या महिला को हो सकती है। ऐसे में भूख में बढ़ोतरी के कारण होने वाली परेशानी से बचने के लिए महिला को उतना ही खाना चाहिए जितना जरुरी है और जंक फ़ूड आदि के सेवन से परहेज करना चाहिए।

पीठ व् पेट में दर्द

बच्चे का विकास बढ़ने के साथ गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है जिसकी वजह से पेट व् पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। और पेट के आगे की और बढ़ने के कारण रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ जाता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को पीठ में दर्द जैसी परेशानी होती है। साथ ही इस दौरान महिला को हल्का फुल्का पेट में दर्द होना भी आम बात होती है।

खर्राटे की समस्या

कुछ महिलाओं को वजन बढ़ने के कारण खर्राटे की समस्या भी प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में अधिक होती है। लेकिन यदि बहुत ज्यादा खर्राटे आएं तो इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि बहुत ज्यादा खर्राटे आना गेस्टेशनल शुगर का लक्षण होता है। साथ ही हो सकता है की कुछ गर्भवती महिलाओं को कई बार नाक से खून निकलता हुआ भी महसूस हो, ऐसे में ज्यादा परेशानी होने पर एक बार डॉक्टर से जरूर बात करें।

सूजन

बढ़ते वजन के कारण कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के आखिर में पैरों में हलकी सूजन भी महसूस हो सकती है। और इसे लेकर गर्भवती महिला को घबराना नहीं चाहिए क्योंकि यह गर्भावस्था के दौरान महसूस होने वाला एक सामान्य लक्षण है।

सांस फूलना

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में गर्भाशय का आकार बढ़ने के साथ फेफड़ों पर दबाव भी बढ़ता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को थोड़ा सा काम करने पर ही बहुत जल्दी जल्दी सांस फूलने की परेशानी होती है।

बार बार यूरिन पास करने की इच्छा

हो सकता है की प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में आपको बार बार बाथरूम में जाने की इच्छा हो। क्योंकि गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है।

सफ़ेद पानी

प्रेगनेंसी के चौथे से छठे महीने में गर्भवती महिला को थोड़ा बहुत सफ़ेद पानी गिरने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का खस ध्यान रखें ताकि इन्फेक्शन आदि से बचे रहने में मदद मिल सके।

बवासीर

पेट का आकार बढ़ने के कारण पेट के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव भी बढ़ता है जिसके कारण महिला को बवासीर जैसी परेशानी भी हो सकती है। साथ ही जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ अधिक रहती है। उन्हें भी बवासीर की परेशानी होने की सम्भावना अधिक होती है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के चौथे से छठे महीने में अधिक हो सकती है। और इस बात का ध्यान रखें की थोड़ी बहुत परेशानी होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। लेकिन यदि कोई भी परेशानी ज्यादा हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान हेयर डाई लगाना सुरक्षित है या नहीं?

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जैसे ही आप गर्भवती होती तो आपके लिए सब कुछ बदल जाता है। जैसे की आपके पसंदीदा कपड़े, पसंदीदा भोजन आदि।  प्रेगनेंसी के दौरान बहुत साड़ी आदतों को बदलना पड़ता है जैसे की रात देर तक काम करना, पसंदीदा खाना, कपड़े, रात देर तक पढ़ना, घूमना आदि। इन्ही सब आदतों और शोक में महिलाओं का एक शोक होता है हेयर कलर करना।

क्योंकि हेयर कलर एक केमिकल बेस प्रोडक्ट है तो इसी के साथ यह सवाल उठता है के गर्भावस्था के दौरान क्या हेयर कलर करना सुरक्षित है या नहीं? हेयर कलर सुरक्षित है या नहीं यह जानने के लिए हेयर कलर के बारे में जानना होगा।

हेयर कलर के बारे में एक्सपर्ट्स के सुझाव:

  •  एक रिसर्च के अनुसार, हेयर डाई का इस्तेमाल करने से इम्युनिटी पावर के स्तर कमी आ जाती है।
  • हेयर कलर करते समय हेयर कलर की थोड़ी मात्रा आपकी त्वचा के द्वारा आपके शरीर में भी चली जाती है।
  • हेयर डाई में टॉक्सिक केमिकल मौजूद होते है जो की हेयर कलर करते समय ज़हरीली हवा छोड़ते है।
  • आपका शिशु आपके द्वारा ही सांस लेता है तो कलर करने से थोड़ा प्रभाव शिशु के विकास पर भी पड़ता है।
  • हेयर कलर अमोनिआ बेस्ड होता है, अमोनिआ एक जहरीला तत्व है।
  • एक्सपर्ट्स के अनुसार प्राकृतिक हेयर कलर केमिकल हेयर कलर की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित है।

गर्भावस्था में हेयर कलर का प्रयोग :

  • गर्भावस्था में हेयर डाई कम से कम प्रयोग करें।
  • हेयर कलर की इंग्रेडिएंट्स डिटेल जरूर पढ़े, अगर कलर अमोनिआ बेस्ड है तो प्रेगनेंसी में प्रयोग ना करें।
  • यदि हो सकें तो प्रेगनेंसी के शुरूआती 3-4 महीनें में हेयर डाई ना करें।
  • कलर करना बहुत ही जरुरी हो तो गर्भावस्था में पुरे बालों पर कलर करने की जगह सिर्फ हाइलाइट्स करवा लें।
  • प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सारे हार्मोन्स बदलाव होते है जरुरी नहीं पहले जो चीज आपके लिए सुरक्षित थी वो अब भी आपके लिए सेफ हो, हो सके कलर करने से पहले पैच टेस्ट जरूर कर लें।
  • कलर करवाते समय ध्यान रखें की कलर त्वचा पर ना लगें और बालों की भी जड़ो पर टच-अप ना करवाए।

वैसे तो गर्भावस्था के हेयर कलर करना सुरक्षित ही है लेकिन फिर भी हमारे शिशु से बढ़कर हमारे लिए कुछ भी नहीं है। कोई भी नई चीज आजमाने से पहले अपनी डॉक्टर से जरूर सलाह ले।