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रात को अच्छी नींद आएगी अगर प्रेगनेंसी में यह काम करेंगे

गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जब महिला को भरपूर पोषक तत्वों से युक्त आहार लेना चाहिए, अपनी ज्यादा केयर करनी चाहिए, तरल पदार्थों की कमी शरीर में नहीं होने देनी चाहिए, तनाव नहीं लेना चाहिए, भरपूर नींद लेनी चाहिए, आदि। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला जब इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन गर्भवस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण, शारीरिक परेशानियों के कारण, वजन बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को नींद न आने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में यदि महिला भरपूर नींद नहीं लेती है तो महिला की परेशानियां बढ़ती है और जब माँ परेशान होती है तो इसका असर बच्चे पर भी पड़ता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में गर्भवती महिला के लिए कुछ खास टिप्स बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को बेहतर नींद लेने में मदद करते हैं।

रात के खाने का ध्यान रखें

रात की बेहतर नींद के लिए रात को आप खाने में क्या और कब खा रही है इसका ध्यान जरूर रखें। जैसे की सोने से कम से कम दो घंटे पहले खाना खाएं ऐसा करने से खाने को आसानी से हज़म होने में मदद मिलती है जिससे नींद बेहतर आती है। साथ ही बेहतर नींद लेने के लिए हल्के आहार का सेवन करें। बिल्कुल भी तेल, मसालें, युक्त आहार का सेवन न करें, क्योंकि ऐसे आहार को हज़म करने के दिक्कत होगी और इसके कारण आपको पेट में गैस की समस्या होगी। जिसके कारण आपको सारी रात परेशान होना पड़ेगा।

थोड़ा व्यायाम व् योगासन करें

दिन में कभी भी जब आपको समय लगे थोड़ा बहुत व्यायाम या योगासन जरूर करें आप चाहे तो मैडिटेशन भी कर सकती है। ऐसा करने से बॉडी की सभी क्रियाओं को अच्छे से काम करने में मदद मिलती है। और रात को प्रेग्नेंट महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

रात को सोने से पहले मालिश करें

यदि आपको नींद नहीं आ रही है तो सोने से पहले पैरों, सिर आदि की मालिश करें। ऐसा करने से महिला को रिलैक्स महसूस होगा और रात को बेहतर नींद लेने में मदद मिलेगी।

जहां आपने सोना है उस जगह का ध्यान रखें

गर्भवती महिला को अच्छी नींद लेने के लिए अपने सोने वाली जगह को साफ़ सुथरा रखना चाहिए साथ ही ज्यादा टाइट गद्दे पर नहीं सोना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को सोने में दिक्कत हो सकती है। यदि महिला अपने सोने की जगह को सही रखती है तो इससे भी महिला को अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

सोते समय अपनी पोजीशन का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अच्छी नींद लेने के लिए अपने सोने की पोजीशन का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान बाईं और करवट लेकर सोना सबसे बेहतर पोजीशन होती है। क्योंकि इस पोजीशन में बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर होता है, शिशु को कोई दिक्कत नहीं होती है, महिला को भी कोई दिक्कत नहीं होती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को रात को सोते समय अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

सोने से पहले गुनगुने दूध का सेवन करें

रात को बेहतर नींद लेने के लिए सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध का सेवन करें। यदि आप ऐसा करती है तो इससे गर्भवती महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करें

यदि गर्भवती महिला को रात को सोने में परेशानी होती है। तो महिला को रात को सोते समय पैरों के नीचे पिल्लो लगाकर सोना चाहिए इससे महिला को अच्छी नींद आती है। साथ ही यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहती है तो वो भी कर सकती है क्योंकि प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करने से महिला को रात को सोते समय होने वाली परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

थोड़ा सॉफ्ट म्यूजिक सुनें

प्रेग्नेंट महिला को यदि रात को नींद नहीं आती है तो महिला को थोड़ी देर सॉफ्ट म्यूजिक सुनना चाहिए। ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला रिलैक्स महसूस करती है और महिला को नींद बेहतर लेने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे फॉलो करने से प्रेग्नेंट महिला को रात को अच्छी नींद आएगी। और यदि महिला की नींद बेहतर होगी तो महिला को भरपूर आराम मिलेगा जिससे माँ व् बच्चे दोनों को फिट रहने में मदद मिलेगी।

इन वजह से होती है प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग

इन वजह से होती है प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग, प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने के कारण, गर्भावस्था में स्पॉटिंग के कारण, प्रेगनेंसी में खून के धब्बे लगने के यह कारण हो सकते हैं, प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने पर इन बातों का ध्यान रखें, Bleeding during pregnancy, Causes of bleeding during pregnancy

गर्भवती महिला के शरीर में प्रेगनेंसी के पहले दिन से लेकर शिशु के जन्म तक और उसके बाद भी बहुत से बदलाव देखने को मिलते हैं। कुछ बदलाव होना तो आम बात होती है, जैसे की उल्टी आना, शरीर के अंगो में दर्द महसूस होना, थकावट व कमजोरी का अनुभव होना, वजन का बढ़ना, आदि। लेकिन कुछ ऐसी परेशानी होती है जिनके महसूस होने पर अनदेखा नहीं नहीं करना चाहिए, जैसे की ब्लीडिंग का होना। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग का होना खतरनाक हो सकता है, ऐसे में यदि गर्भवती महिला को पैंटी में खून में धब्बे दिखाई दे तो इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

ज्यादातर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान खून के धब्बे देखकर तुरंत घबरा जाती हैं। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने का कारण केवल गर्भपात ही नहीं होता है। बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान कई कारणों से ब्लीडिंग हो सकती है। और इस बात का भी ध्यान देना जरुरी होता है की ब्लीडिंग ज्यादा हो रही है या कम, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग का होना गर्भ में पल रहे शिशु को बी नुकसान पहुंचा सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने के कौन कौन से कारण हो सकते हैं।

इम्प्लांटेशन के समय हो सकती है ब्लीडिंग

जब निषेचन की प्रक्रिया होती है और अंडा निषेचित हो जाता है, ऐसे में जब वह निषेचित अंडा गर्भाशय की दीवार से जुड़ता है। तो इस दौरान स्पॉटिंग हो सकती है, और यह आम बात होती है। यह गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के पहले एक हफ्ते या दस दिन में महसूस हो सकता है, बहुत सी महिलाओं को यह समस्या हो सकती है।

इन्फेक्शन होने के कारण

यदि गर्भवती महिला यौन संचारित रोग जैसे क्लैमाइडिया आदि से पीड़ित होती है तो ऐसे में भी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसे में इसके लिए गर्भवती महिला को एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

सम्बन्ध बनाने पर

यदि कोई कपल प्रेगनेंसी के दूसरे या तीसरे महीने में ही सम्बन्ध बनता है, तो इस दौरान ज्यादा तेजी करने के कारण गर्भाशय पर चोट आदि लग जाती है जिसके कारण स्पॉटिंग हो सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान सर्विक्स काफी कमजोर हो जाता है, जिसके कारण रक्त नलिकाएं भी उभर जाती है, और सम्बन्ध बनाने पर ब्लीडिंग होने के चांस बढ़ जाते हैं। इसीलिए कहा जाता है की प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में सावधानी बरतनी चाहिए और जितना हो सके सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

गर्भ गिरने यानी की गर्भपात होने के कारण

इन्फेक्शन, भागादौड़ी करना, दवा का रिएक्शन, हार्मोनल प्रभाव, गर्भपात करने वाली चीजों का सेवन करने, तेनेव लेने आदि प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने गर्भपात का कारण बनते हैं। साथ ही पेट में तेज दर्द, कमजोरी, बुखार, चक्कर आना आदि यदि गर्भवती महिला को महसूस होता है तो यह गर्भपात के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में इन लक्षणो के साथ यदि गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, और मासिक धर्म की तरह दर्द का अनुभव होता है तो यह गर्भपात की और इशारा करता है। ऐसे में बहुत अधिक ब्लीडिंग के होने पर जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

प्लेसेंटा प्रेविआ के कारण

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग होना का यह एक मुख्य कारण हो सकता है। यह समस्या तब होती है जब प्लेसेंटा गर्भाशय के निचली हिस्से में बढ़ती है और सर्विकल कैनाल को कवर कर लेती है, प्रेगनेंसी के दौरान यदि किसी महिला की ऐसी स्थिति होती है, तो उसे बेड रेस्ट करने, सम्बन्ध ना बनाने, किसी भी तरह की लापरवाही न करने जैसे की भारी काम न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ऐसी स्थिति के होने पर प्रेगनेंसी में पेरशानी बढ़ सकती है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के कारण

एक्टोपिक प्रेगनेंसी भी एक ऐसी स्थिति है जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। इस तरह की प्रेगनेंसी में भ्रूण गर्भाशय के बाहर जैसे की फैलोपियन ट्यूब में ही बढ़ने लगता है, जिसके कारण ट्यूब के फटने का खतरा भी हो सकता है। ऐसे में आपको इसके लिए डॉक्टर से राय लेना ही सबसे बेहतरीन उपाय होता है।

प्रसव का संकेत

यदि आपको प्रसव का समय आने से पहले ही प्राइवेट पर से रक्त निकलता हुआ महसूस होता है तो यह समय पूर्व प्रसव का संकेत हो सकता है। साथ ही कई बार प्रसव के दौरान एमनियोटिक फ्लूड के साथ रक्त भी दिखाई देता है, ऐसे में दोनों ही केस में आपको जल्दी से जल्दी डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। और प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए जरुरी होता है की यदि आपको कोई भी समस्या है तो आपको तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। ताकि गर्भावस्था के दौरान हर परेशानी से बचने और एक स्वस्थ शिशु को जन्म देने में आपको मदद मिल सके।

क्या आपके बच्चे को कार्टून देखने की लत लग गई है? 

आज कल के बच्चों का बचपन कार्टून चैनलों के बीच कहीं गुम-सा हो गया है। कार्टून्स बच्चों को हक़ीक़त से दूर काल्पनिक दुनिया में लेकर जा रहे हैं। बच्चे जो भी टीवी पर देखते हैं, उन्हें लगता है कि वही सच है। कार्टून के कारण बच्चों की जिंदगी में जो बदलाव आ रहे हैं, वो अभिभावकों के लिए चिंता का कारण हैं। खुद बाल-मनोविज्ञानी भी इस बात को मानते हैं कि बच्चे अगर हिंसा भरे खेल और कार्टून देखेंगे तो उनके मन पर वैसा ही प्रभाव पड़ेगा। आज पेरेंट्स के पास बच्चों के लिए वक्त नहीं है, इसलिए उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं दे पाते।

ज्यादातर माता-पिता को शिकायत रहती है कि उनका बच्चा सारा दिन टीवी पर कार्टून देखता है एवं पढ़ाई में रुचि नहीं लेता। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बच्चों को सबसे ज्यादा कार्टून देखना ही पसंद होता है। और कार्टून देखना कोई गलत नहीं है, लेकिन तब तक, जब तक उनमें गुस्सा और हिंसा न दिखाई जाए। कॉमेडी के साथ हल्का-फुल्का मनोरंजन बच्चों के लिए हानिकारक नहीं होता। बच्चे बहुत नाजुक होते हैं, जो वे देखते हैं, सुनते हैं, वही सीखते हैं और उसकी ही नकल करते हैं।

वैसे तो यह भी सही है कि आज के व्यस्तता भरे युग में, जब माता पिता के पास समय ही नहीं बच्चों को कुछ नया सिखाने का, तब बच्चे कार्टून देख कर ही काफी कुछ सीख जाते हैं और स्मार्ट भी बन रहे हैं, उनमें टेक्निकल नॉलेज की समझ बढ़ रही है। लेकिन साथ ही शारीरिक गतिविधियों और खेलकूद से वे कटते जा रहे हैं। उनका व्यवहार चिड़चिड़ा होता जा रहा है।

कैसे लगती है ये कार्टून देखने की लत – 

  • पैरेंट्स का वर्किंग होना – बच्चे के माता पिता दोनों ही अगर नौकरी करते हैं तो उनके पास बच्चे के लिए समय ही नहीं होता है। और बच्चा अपने आप में ही मस्त रहे, इसके लिए वो बच्चे को कार्टून देखने में व्यस्त कर देते हैं।
  • घर के कामों की व्यस्तता की वजह से घर के कामों में व्यस्त होने पर बच्चों की शैतानियों और सवालों से छुटकारा पाने के लिए बच्चों को उनकी माताएँ कार्टून चैनलों के हवाले कर देती हैं। लेकिन कार्टून की लत बच्चों को जल्द ही लग जाती है और इस लत से छुटकारा दिलाने में फिर माता-पिता के पसीने निकल जाते हैं।
  • बच्चों की पसंद इसमें कोई दो राय नहीं है कि बच्चों को सबसे ज्यादा कार्टून देखना ही पसंद होता है। और कार्टून देखना कोई गलत भी नहीं है, लेकिन तब तक, जब तक उनमें गुस्सा और हिंसा न दिखाई जाए। हिंसात्मक कार्यक्रम देखने से बच्चों का व्यवहार भी हिंसात्मक होने लगता है।
  • बढ़ते कार्टून चैनल – दिन प्रतिदिन जाने कितने ही नए नए चैनल खुलते रहते हैं और बच्चों के लिए भी कार्टून चैनल की कोई कमी नहीं रही है। हर चैनल पर बच्चों का कोई ना कोई फ़ेवरिट प्रोग्राम होता ही है, एक प्रोग्राम ख़त्म होता है तो वो चैनल बदल कर दूसरा लगा लेते हैं।
  • एकाकी परिवार – संयुक्त परिवारों के घटते चलन और बढ़ते हुए एकाकी परिवारों ने भी इस लत को जन्म देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पहले संयुक्त परिवार में सब बच्चे अपने कज़िन भाई बहनों के साथ पलते बढ़ते थे, साथ साथ खेलते, खाते और पढ़ते थे। पर अब एकाकी परिवार में एक या दो बच्चे ही होते हैं। अकेला बच्चा क्या खेलेगा और किसके साथ खेलेगा, इसलिए उसका रुझान टीवी और कार्टूनों की तरफ़ बढ़ने लगता है।

कार्टून देखने का प्रभाव आजकल बच्चों का सर्वाधिक समय टीवी (कार्टून) के सामने ही गुजरता है। जैसे ही वे सोकर उठते हैं, पहला काम टीवी ऑन कर कार्टून देखना होता है। पूरा दिन कार्टून देख देख के वो ख़ुद भी कार्टून होते जा रहे हैं, उनकी ही तरह अजीब सी भाषा बोलने लगे हैं और उनकी ही तरह अजीब हरकतें करने लगे हैं।

  • अजीबोग़रीब हरकतें आपने ध्यान दिया ही होगा कि बच्चों का ध्यान अच्छी बातों पर कम और कार्टून चरित्रों के अजीबो-गरीब हरकतों पर ज्यादा जाता है। वे उनकी नकल करने लगते हैं। अक्सर कार्टून में दिखाये जाने वाले हिंसक दृश्य बच्चों के कोमल मन में हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं। मारपीट, अजीब करतब करनेवाले कैरेक्टर की नकल करते रहना उन्हें अच्छा लगता है। कई बार तो ही-मैन और सूपर-मैन को उड़ते देख, वो भी उड़ने के प्रयासों में लग जाते हैं और ख़ुद को ही नुक़सान पहुँचा लेते हैं।
  • बिगड़ती भाषा आजकल कार्टून कैरेक्टर से बच्चे इस कदर प्रभावित होते जा रहे हैं कि आम बोलचाल में भी वही डायलॉग इस्तेमाल कर रहे हैं। कार्टून प्रोग्राम में जानबूझ कर ऐसी भाषा या शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे सुनते ही हँसी आ जाए और सबका ध्यान आकर्षित हो सके, परंतु बच्चों का मन बहुत कोमल होता है, उनमें इतनी समझ नहीं होती कि सही ग़लत का मतलब समझ सकें। इसलिए वो जो सुनते हैं, वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं।
  • आक्रामक और ज़िद्दी होते बच्चे –  कार्टून कैरेक्टर्स का असर बच्चों पर इतना अधिक दिखाई दे रहा है कि कई बार बच्चे अपने साथी या फिर भाई-बहन के साथ आक्रामक भी हो जाते हैं। कार्टून की लत उन्हें इस हद तक लग जाती है कि फिर वो घर में किसी और को टीवी देखने ही नहीं देते, उन्हें बस हर समय कार्टून चैनल ही देखना होता है। और घर में उनकी बात ना मानी जाए तो बात मनवाने के लिए ज़िद करने लगते हैं।
  • बढ़ता मोटापा सारा सारा दिन टीवी के सामने बैठ कर कार्टून देखते रहने से बच्चों में शारीरिक गतिविधियों एकदम कम होती जा रही हैं। बाहर जाकर खेलने में अब उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं बची है। बस सारा दिन टीवी या विडीओ गेम में लगे रहते हैं। इन आदतों से बच्चों में मोटापा बढ़ता जा रहा है।
  • पढ़ाई में रुचि कम हो जाना कार्टून की लत लग जाने पर बच्चे अपना अधिकाधिक समय टीवी के सामने ही बिताने लगते हैं। या तो अपना गृहकार्य पूरा करते ही नहीं या फिर जल्दी से किसी तरह निपटा कर फिर से टीवी से चिपक जाते हैं। इस तरह गृहकार्य करने से एक तो उन्हें कुछ समझ नहीं आता है कि क्या लिखा उन्होंने और दूसरा उनकी लिखावट दिन प्रतिदिन बिगड़ती जाती है।

ऐसी स्थिति में क्या करें – 

  1. समय निर्धारित करें सारा दिन बच्चों को कार्टून न देखने दें। उनका टीवी देखने का समय निर्धारित करें। सिर्फ कार्टून ही नहीं, अच्छी व मनोरंजक कॉमिक्स और किताबें पढ़ने के लिए भी बच्चों को प्रेरित करें।
  2. अच्छे बुरे का फ़र्क़ समझाएँ बच्चों को कौन-सा कार्टून देखना है, कौन सा नहीं, इसका चुनाव खुद पेरेंट्स करें। कार्टून में भी अच्छे-बुरे सभी तरह के किरदार होते हैं। बच्चों को इनके बीच का फर्क समझाएँ। कुछ कार्टून में अच्छे संदेश भी छिपे होते हैं। उन्हें अपने बच्चों तक पहुंचाएं। आजकल तो महाभारत, रामायण, बुद्ध और कृष्ण आदि के भी कार्टून फिल्म या सीरियल आ रहे हैं। इनके ज़रिए बच्चों को अपनी संस्कृति और इतिहास का ज्ञान दें।
  3. बच्चों पर नज़र रखें कोशिश करें कि बच्चों के साथ बैठकर आप भी कार्टून देखें। इससे आप ध्यान रख पाएंगी कि कहीं बच्चा कुछ गलत तो नहीं देख और सीख रहा, साथ ही आप उसकी जिज्ञासा को भी शांत कर पाएंगे।
  4. बच्चों को अच्छी सेहत के राज़ बताएँ बच्चों को बताएँ कि एक जगह बैठे रहने से कैसे सेहत का नुक़सान होता है और मोटापा बढ़ता जाता है। उसे बताएँ कि यदि वो रोजाना एक घंटे दौड़ने, भागने या तैरने का खेल खेलता है, तो इससे उसकी मासपेशियाँ भी मजबूत होंगी और मजबूती भी बढ़ेगी। बच्चों में आउटडोर गेम्स खेलने से उनमें स्टेमिना बढ़ता है। भविष्य में दिल संबंधी बीमारी होने की आशंका भी कम हो जाती है। आउटडोर गेम्स खेलने से बच्चों में प्रतियोगिता की भावना विकसित होती है, जो बच्चों को मानसिक तौर पर मजबूत बनाती है।
  5. बच्चों को बाहर खेलने के फ़ायदे बताएँ दिन भर टेलीविजन के सामने बैठे रहने की बजाय प्ले-ग्राउंड में खेलने से किस तरह बच्चे चुस्त-दुरुस्त रहते हैं और इसका लाभ क्या हैं, इस बारे में बच्चे को बताएँ। खेलों से बच्चों के शरीर में लचीलापन आता है और उनका आलस भी कम होता है। वे ज्यादा सक्रिय बनते हैं। मिलकर खेलने से बच्चों में सहयोग की भावना विकसित होती है और बच्चे के विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। घर से बाहर निकलकर खेलने पर बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। 
  6. खानाटीवी साथ नहीं – ज्यादातर परिवारों में लोग रात के वक्त खाना खाते हुए एक साथ बैठकर टीवी देखने को पारिवारिक एकजुटता का प्रतीक समझने की भूल करते हैं। लेकिन यह सोच सरासर गलत है। रात का खाना सब मिलकर खाएँ, लेकिन साथ में टीवी नहीं देखें। आपस में बात करें। खासकर बच्चों के मामले में अक्सर देखा गया है कि बच्चा टीवी में इतना मशगूल हो जाता है कि माँ को बार-बार टोक कर खाना खत्म करने के लिए बताना पड़ता है। जब बच्चा खाना खा रहा है तो टीवी बिल्कुल न चलाएँ। आप जैसा माहौल बनाएँगे, बच्चे में वही आदत बन जाएगी।
  7. टीवी के नुक़सान बताएँ बच्चों को समझाएँ कि लगातार टीवी देखने से उनकी आँखो को कितना नुक़सान हो सकता है, लगातार टीवी चला के रखने से noise pollution भी होता है और इससे सिरदर्द हो सकता है, तेज़ आवाज़ रखने से हमारी सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।
  8. बच्चों को ऊर्जा व्यर्थ ना करने के लिए प्रेरित करें बच्चों को समझाएँ कि ज़्यादा देर तक टीवी चला कर रखने से कितनी बिजली बरबाद होती है। हमें ऊर्जा को व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए, बल्कि उसे बचाना चाहिए।

जरूरत से ज्यादा टीवी देखना बच्चों पर तीन तरह से असर करता है। पहला, फिजिकली एक्टिव न होने से बच्चे मोटापे का शिकार हो जाते हैं। उनमें स्टेमिना नहीं बन पाता। साथ ही पास से या गलत तरीके से देखने से आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है। दूसरा असर होता है, बच्चे के मानसिक विकास पर। रिसर्च बताती हैं कि ज्यादा टीवी देखने से बच्चे के सोचने की क्षमता कमजोर होती है। तीसरा और सबसे बुरा असर यह है कि टीवी पर हिंसा देख देखकर वे हिंसक और दूसरे की तकलीफ के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं। वे हिंसा से डरना बंद कर देते हैं और ज्यादा अग्रेसिव हो जाते हैं। इसलिए पेरेंट्स की, बच्चा है तो कार्टून तो देखेगा ही वाली सोच को बदलने की जरूरत है। आप चाहें तो अपने बच्चे का भविष्य सँवार सकते हैं, बस ज़रूरत है समय रहते सजग होने की।

माहवारी के समय बदबू आने के कारण व् उपाय

माहवारी हर महिला को होने वाली एक शारीरिक प्रक्रिया है जिसमे महिला के प्राइवेट पार्ट से रक्त का प्रवाह होता है, और यह आपके शरीर में एक चक्र की तरह काम करता है, और महिला को हर अठाइस दिन बाद पीरियड्स आते है, कई महिलाओ को ये दो तीन दिन आगे पीछे भी हो सकते है, लेकिन अधिक देरी शादी के बाद प्रेगनेंसी और शादी से पहले अनियमित माहवारी की समस्या हो सकती है, और यह हर महिला को आनी जरुरी भी है, पीरियड्स के दौरान कई महिलाओ के प्राइवेट पार्ट से बदबू भी आती है, जो की अच्छी बात नहीं होती है, क्या आपको भी पीरियड्स के दौरान ऐसा होता है, तो आइये जानते है की पीरियड्स के समय प्राइवेट पार्ट से बदबू आने के कौन कौन से कारण होते हैं, और आप किस तरह इसका उपाय कर सकते है।

इन्हें भी पढ़ें:- क्या आप अपने पीरियड्स को आगे पीछे कर सकते हैं? ये हैं घरेलू उपाय

पीरियड्स के दौरान प्राइवेट पार्ट से बदबू आने के कारण:-

साफ़ सफाई न रखने के कारण:-

कई महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई बिल्कुल नहीं रखती है, यहां तक की कई बार पुराना अंडरवीयर भी पहन लेती है, जिसके कारण उनके प्राइवेट पार्ट के आस पास बैड बैक्टेरिया का जमाव होने लगता है, और इसी के कारण पीरियड्स होने पर आपको बदबू आने की परेशानी हो जाती है।

ज्यादा समय तक एक ही पैड लगाने के कारण:-

पीरियड्स आने पर महिला को हर छह घंटे में पैड बदलना चाहिए क्योंकि ज्यादा समय तक एक ही पैड लगाने के कारण भी बैक्टेरिया इक्कठा होने लगता है, साथ ही इसके कारण आपको इन्फेक्शन होने का भी डर रहता है, इसके कारण भी आपको माहवारी के समय बदबू आने लग जाती है।

अनियमित माहवारी की समस्या होने पर:-

अनियमित माहवारी होने पर आपको रक्त का प्रवाह बहुत अधिक होता है, और कई बार उसमे खून के थक्के आदि भी निकलते है, इसके कारण भी आपको प्राइवेट पार्ट में बदबू की समस्या हो सकती है।

इन्हें भी पढ़ें:- पीरियड्स के दर्द से परेशान है? ये करें और दर्द को कहे बाय बाय

संक्रमण के कारण:-

यदि आपको प्राइवेट पार्ट में किसी भी तरह के संक्रमण की समस्या होती है, तो इसके कारण भी आपके प्राइवेट पार्ट से बदबू आने लगती है, और इसके कारण आपको सफ़ेद पानी की समस्या से भी परेशान होना पड़ सकता है।

माहवारी के समय आने वाली बदबू से बचने के उपाय:-

साफ़ सफाई का ध्यान रखें:-

पीरियड्स के समय ही नहीं बल्कि आपको वैसे भी अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए, ऐसा करने से आपके प्राइवेट पार्ट में बैड बैक्टेरिया का जमाव नहीं होता है, इसे अलावा यदि आप आमतौर पर यूरिन करने या पीरियड्स के समय बाथरूम में जाते हैं, तो आपको अपने प्राइवेट पार्ट को पानी से अच्छे से साफ़ करना चाहिए, और उसे सुखाने के बाद ही कपडे पहनने चाहिए।

पैड का ध्यान रखें:-

पीरियड्स के दौरान आपको हर छह घंटे के बाद अपने पैड को चेंगे करना चाहिए ऐसा करने से भी आपके पीरियड्स के समय आने वाली बदबू से राहत के साथ इन्फेक्शन की समस्या से बचने में भी मदद मिलती है।

संक्रमण का इलाज करें:-

यदि आपको किसी तरह के वजाइनल इन्फेक्शन के कारण इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो आपको इससे बचने के लिए लेडी डॉक्टर से राय लेनी चाहिए और इस इन्फेक्शन का समाधान करना चाहिए, ताकि आपको इस परेशानी से राहत मिल सकें।

डेली अंडरवियर बदलना चाहिए:-

जिस तरह आप अपने डेली कपडे बदलती है, उसी तरह आपको अपने अंडरवियर को भी बदलता चाहिए, क्योंकि यदि आप पुराना अंडरवियर ही पहन लेती हैं तो इसके कारण आपके प्राइवेट पार्ट में बैड बैक्टेरिया का जमाव होने लगता है जिसके कारण आपको बदबू का सामना करना पड़ता है।

प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई के घरेलू तरीके:-

  • दही को रुई में भिगोकर कुछ समय के लिए प्राइवेट पार्ट पर रखे, और उसके बाद पानी के इस्तेमाल से उसे धो दें, साथ ही अपने आहार में भी दही को शामिल करें।
  • लहसुन को पीसकर इसे अपने प्राइवेट पार्ट पर अच्छे से लगाएं और पंद्रह से बीस मिनट बाद धो दें, इससे भी फायदा होगा।
  • नीम को पानी में उबालकर पीरियड्स के दौरान या आम दिनों में अपनी योनी को साफ़ करें, इसमें ऐसे गुण होते है जो बेक्टेरिया को खत्म करके आपकी इस समस्या को दूर करने में मदद करते है।
  • आंवले का सेवन करने से भी आपको इस समस्या से राहत मिलती है।
  • अपनी डाइट में खट्टे फलों का सेवन भरपूर करें आपको फायदा मिलेगा।
  • पानी का भरपूर सेवन करें, इससे भी आपके बैड बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है।
  • सेब के सिरके को गुनगुने पानी में मिलाकर अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें, इससे भी आपके प्राइवेट पार्ट किदुर्गंध को दूर होने में मदद मिलती है।
  • दो चम्मच चाय के पेड़ का तेल लें, उसमे थोड़ा पानी मिलाएं, और उसके बाद रुई की मदद से इसे अपने प्राइवेट पार्ट मेलगाएँ तो भी आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।
  • पानी में आधा चम्मच सफ़ेद सिरका और नमक मिलाएं और उसके बाद इस पानी में अपने प्राइवेट पार्ट को अच्छे से धोएं तो भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये हैं कुछ कारण जिनकी वजह से पीरियड्स के दौरान आपके प्राइवेट पार्ट से बदबू आती है, और इससे बचने के उपाय, और आपके चाहे तो इस बारे में एक बार लेडी डॉक्टर से भी पूछ सकती है, क्योंकि यह अच्छी बात नहीं होती है, इसके कारण आपके ही स्वास्थ्य के खराब होने की आशंका रहती है, और इसीलिए इस बारे में महिलाओ को बिल्कुल भी शर्माना नहीं चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- पीरियड्स में साफ़ सफाई का ध्यान ऐसे रखें! और इन्फेक्शन से बचें

खुजलाने की समस्या से समाधान ऐसे मिलेगा!

मनुष्य की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है जिस पर कोई भी चीज बहुत जल्दी से प्रभाव दिखाती है. फिर चाहे वो सामान्य ठंड हो या फिर किसी cosmetic या प्रोडक्ट का रिएक्शन. लेकिन किसी अन्य वस्तु के रिएक्शन के अतिरिक्त भी एक समस्या है जो अक्सर लोगो में देखी जाती है. ये समस्या है त्वचा में खुजली की. जिससे लगभग हर 4 या 5 व्यक्ति परेशान रहता है.

त्वचा में खुजली होने की समस्या को Itching skin भी कहा जाता है. इस समस्या में व्यक्ति के शरीर पर लगातार खुजली होती रहती है जिसे शांत करने के लिये मजबूरन त्वचा को नोचना पड़ता है. त्वचा में खुजली विभिन्न तरह के कारण हो सकते है. लेकिन लगातार खुजली की वजह लिवर और किडनी की बीमारी भी हो सकती है. लेकिन सामान्य तौर पर इसका कारण इटचिंग एलर्जी, स्किन रैशेस और चर्म रोग भी हो सकता है.

डॉक्टरों के मुताबिक, खुजली छोटे छोटे जीवाणुओं के संक्रमण से होती है. लेकिन कई-कई दिनों तक स्नान नहीं करने और त्वचा पर अत्यधिक धूल मिटटी जमने से खुजली होना एक आम समस्या है. डॉक्टरों की माने, तो खुजली कोई बीमारी नहीं है ये शरीर के किसी अन्य इन्फेक्शन के कारण होती है. जिसमे ड्राई स्किन, रक्त का दूषित होना और रैशेस आदि सम्मिलित है.

रक्त में आई अशुद्धियों के कारण त्वचा पर फोड़े-फुंसिया और मुहांसो की समस्या होती है जिससे त्वचा में खुजली भी होती है. इसके अलावा पेट में कीड़ा होना और अवैध यौन संबंध भी खुजली का एक कारण होते है.

आज से नहीं बल्कि पिछले कई सालों से ये बीमारी लोगो को परेशान करती आ रही है. जिससे छुटकारा पाने के लिए लोग तरह-तरह के प्रयोग करते रहते है लेकिन उनमे से केवल कुछ उपाय ही कारगर सिद्ध होते है. यदि आप भी इस तरह की समस्या से ग्रस्त है और इससे छुटकारा पाने के लिए विभिन्न उपायो का प्रयोग कर चुके है तो परेशान न हो.

आज हम आपको खुजली की समस्या से निजात पाने के लिए कुछ घरेलू उपाय आसान उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप भी अपनी इस समस्या को आसानी से ठीक कर सकते है. और वो भी बिना अधिक पैसे खर्च किये.

खुजली की समस्या को दूर करने के घरेलू उपाय

1. नारियल का तेल :

जी हां, नारियल का तेल न केवल रूखी और बेजान त्वचा को ठीक करता है अपितु खुजली को शान्त करने में भी मदद करता है. इसके लिए थोड़ा सा नारियल तेल उस क्षेत्र पर लगाएं जहाँ खुजली हो रही है और धीरे-धीरे अपनी उँगलियों से मसाज करें. आपको इसे धोने की आवश्यकता नहीं है. ये आपकी स्किन को हाइड्रेट करके खुजली को शान्त करेगी.

इसके अलावा रोज नहाने से पूर्व हलके गुनगुने नारियल तेल से अपने शरीर की मसाज करें. ये आपकी रूखी त्वचा को नमी देकर उसे अच्छा करने में मदद करेगा. इसके साथ ही नहाने के बाद भी थोड़ा सा तेल अपनी रूखी त्वचा पर जरूर लगाएं.

2. तुलसी :

तुलसी की पत्तियों में anti itching गुण पाए जाते है जो न केवल आपकी त्वचा को खुजली से छुटकारा दिलाते है अपितु त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं को भी ठीक करते है. इसके लिए थोड़ी सी तुलसी की पत्तियों को साफ़ पानी से धो लें, अब इन्हें खुजली वाले स्थान पर रगड़े.

आप चाहे तो तुलसी की पत्तियों को 10 मिनट तक पानी में भिगोएं रखें और उसके बाद पानी से निकाल लें. अब इस पानी का इस्तेमाल खुजलाहट वाले क्षेत्र पर करें. इसके अलावा 5 से 6 तुलसी की पत्तियों को मसलकर उन्हें थोड़े से नारियल तेल में मिलाएं. इस मिश्रण का इस्तेमाल अपनी खुजली वाली त्वचा को ठीक करने के लिए करें.

3. नीम :neem-1

त्वचा संबंधी समस्याओ को ठीक करने के लिए नीम का नाम सबसे ऊपर आता है. इस तरह की समस्यायों के लिए ये एक बेहतर और प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि है. न केवल इसकी पत्तियां अपितु इसका तेल और छाल भी त्वचा के लिए लाभकारी होती है. नीम की पत्तियां अपने Anti Acne और Anti pimple प्रकृति के लिए भी मशहूर है. जो आपकी त्वचा को बिना रुखा किये आपकी समस्या को हल करती है.

इसके लिए या तो नीम का तेल या फिर नीम और नारियल की पत्तियों का मिश्रण बनाकर प्रयोग करें. ये आपकी रूखी त्वचा को नमी पहुँचाकर खुजली की समस्या को भी दूर करेगा.

4. तिल का तेल :

रूखी त्वचा और sun burn के कारण उत्पन्न हुई खुजली को दूर करने का एक अन्य प्राकृतिक उपाय है तिल का तेल. ये आपके skin pores में बहुत आसानी से पहुँच जाता है और उस त्वचा को ठीक करके उसे नमी पहुँचाता है. इसके लिए थोड़ा सा तिल का तेल प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं. इससे त्वचा की लालिमा और जलन भी कम होगी जो खुजली का एक अन्य कारण है. इस प्राकृतिक देन के नियमित प्रयोग से ये एक सनस्क्रीन का काम करता है जो त्वचा को नमी और सुरक्षा प्रदान करता है.

5. पुदीना :

पुदीने में पाए जाने वाले cooling और astringent गुण इस समस्या के लिए बेहद लाभकारी होते है. पुदीने में anti-inflammatory और antiseptic गुण भी पाए जाते है जो कुछ ही समय में प्रभवित क्षेत्र को सामान्य करने की क्षमता रखते है. इसके लिए थोड़ी सी पोदीने की पत्तियों को धो कर उन्हें मसल लें अब इस रस को खुजली वाले हिस्से में लगाएं.

6. नींबू :

नींबू आपका वजन घटाने और आपकी त्वचा को निखारने में तो मदद करता है लेकिन क्या आप जानते है की इसमें मौजूद acetic acid और citric acid में anesthetic, anti-irritating, anti-inflammatory, astringent, और antiseptic गुण पाए जाते है. इसके साथ ही इसमें anti bacterial गुण भी मौजूद है जो त्वचा संबंधित छोटी से छोटी समस्या को भी हल करने में मदद कर सकता है. इसके लिए थोड़े से नींबू के रस को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दे. नियमित अंतराल के बाद इसका प्रयोग करने से खुजली की समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी.

7. मेथी के बीज :

त्वचा संबंधी कई समस्याओ के समाधान के लिए आज से नहीं बल्कि पिछले कई सालो से इन बीजो का प्रयोग किया जाता आ रहा है. क्योंकि इसमें anti-fungal और anti-bacterial गुण पाए जाते है जो प्रभावित क्षेत्र से toxins साफ़ करने में मदद करते है. इसके लिए 1 चम्मच भुने हुए मेथी के बीजो के पाउडर को 1 चम्मच काबुली चने के आटे और योगर्ट के साथ मिलाएं. अब इस पेस्ट को खुजली वाले क्षेत्र में लगाएं और सूखने के बाद गर्म पानी से धो लें. ये आपको आराम देने में मदद करेगी.

8. बादाम का तेल :

बादाम का तेल त्वचा में बहुत आसानी से रिस जाता है. जिससे त्वचा मॉइश्चराइज़ होकर अच्छी हो जाती है. Skin Itching के लिए भी ये एक बेहतर घरेलू औषधि है. क्योंकि त्वचा में आई मॉइश्चराइज़िंग की कमी भी खुजली का एक कारण होती है. इसके लिए बादाम के तेल को Itching वाली जगह पर लगाएं खुजली के साथ-साथ sun burn और रूखी त्वचा में भी आराम मिलेगा.

9. शहद :

शहद का प्रयोग कई तरह के स्किन केयर प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जाता है. क्योंकि इसमें पाए जाने वाले anti-bacterial और anti-inflammatory गुण खुजली को शान्त करके उसे ठीक करने में मदद करते है. इसके लिए ओलिव आयल के साथ शहद मिलाकर प्रयोग करें. आर्म मिलेगा.

10. एलोवेरा :

त्वचा की खुजली और जलन को दूर करने के लिए एलोवेरा सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय है. इसके साथ ही ये त्वचा को मॉइश्चराइज़ करके उसे कोमल बनाने में भी मदद करता है. स्किन रैशेस, itchy skin, जली हुई त्वचा और मुँहासे वाली वाली त्वचा के लिए ये बेहद लाभकारी होता है. इसके लिए एलोवेरा के गूदे को निकालकर उसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं.

11. ओलिव आयल :olive-oil-ke-fayde

स्किन रैशेस और मुँहासे की वजह से होने वाली स्किन Irritation को ठीक करने के लिए ओलिव आयल बेहद लाभकारी है. इसके लिए आप सीधे-सीधे ओलिव आयल को प्रभावित क्षेत्र पर कुछ दिनों तक लगते रहे. लेकिन एक बात का ध्यान रखे की केवल थोड़ा सा ही तेल का इस्तेमाल करे.

12. बेकिंग सोडा :

शायद आपको विश्वास न हो लेकिन बेकिंग सोडा skin irritation को ठीक करने के लिए भी मशहूर है. इसकी anti-bacterial प्रकृति खुजली की समस्या को कम करने में मदद करती है. इसके लिए बेकिंग सोडा को पानी में मिलाकर उस पेस्ट को त्वचा पर लगाएं.

लेकिन हां, यदि आपकी स्किन sensitive है तो उस पर बेकिंग सोडा का इस्तेमाल न करें.

13. मॉइश्चराइज़िंग लोशन :

त्वचा की खुजली की समस्या को दूर करने के लिए मॉइस्चराजिंग लोशन भी बेहद लाभकारी होता है. यदि आपकी स्किन में भी खुजली हो रही है तो हो सकता है इसका कारण त्वचा का रूखापन हो. इसीलिए मोइश्चराइज़र भी इस समस्या का समाधान बन सकता है. ये आपकी त्वचा को नमी देने के अतिरिक्त sun burn की समस्या को भी दूर करेगा.

14. पेट्रोलियम जेली :

Itchy irritated त्वचा के लिए पेट्रोलियम जेली बेहद लाभकारी होती है. इसमें मौजूद गुण न केवल त्वचा की खुजली को शान्त करते है अपितु रैशेस को ठीक करने में भी मदद करते है. चूँकि ये बहुत अधिक महंगी नहीं है तो आप इसका इस्तेमाल अपने पुरे शरीर के लिए भी कर सकते है.

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आँखों से बार-बार पानी आने के क्या कारण होते हैं

आँखों से पानी आना

आँखों से आंसू का आना आँखों की आगे की सतह को स्वस्थ रखने व् देखने की क्षमता को साफ़ बनाए रखने में मदद करता है। और कई बार अचानक से आँखों से पानी निकल आता है, जैसे की आँखों में धूल मिट्टी जाने के कारण, प्याज काटने पर, आदि। लेकिन आँखों से यदि पानी अधिक आता है तो यह परेशानी का कारण हो सकता है। और आँखों से अधिक पानी आने का क्या कारण होता है इसे समझ पाना मुश्किल होता है। आँखे बहुत ही नाजुक होती है ऐसे में आँखों में अधिक आंसू आने पर इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से चेक करवाना चाहिए ताकि जिस कारण की वजह से भी आँखों में से ज्यादा पानी आ रहा है उस समस्या का समाधान हो सके।

आँखों से पानी आने के कारण

आँखों से पानी आने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिसकी वजह से यह समस्या हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की आँखों से पानी आने के कौन- कौन से कारण हो सकते हैं।

कमजोर आँखे

यदि आँखे कमजोर हो जाती है तो उसके बाद दूर या पास का देखने पर, अधिक लाइट महसूस होने पर आँखों से अपने आप ही पानी निकलने लगता है। ऐसे में घबराने की बात नहीं होती है बल्कि यदि आपको देखने में कोई परेशानी हो पास या दूर का दिखाई न दे रहा हो तो एक बार अपनी आँखे जरूर चेक करवानी चाहिए।

प्रदूषण

आँखे बहुत ही कोमल होती है ऐसे में तेज धूप में जाने के कारण आँखों में जलन महसूस हो सकती है, धूल मिट्टी के आँखों में जाने के कारण आँखे लाल पड़ सकती है, आदि। ऐसे में इन कारणों की वजह से भी महिला की आँखों में आंसू आ सकते है इसीलिए धूप में या वैसे भी बाहर जाते समय आँखों को होने वाली इस परेशानी से बचाने के लिए चश्मा जरूर पहनकर जाना चाहिए।

ज्यादा फ़ोन व् कंप्यूटर का इस्तेमाल

जो बच्चे या बड़े कोई भी ज्यादा फ़ोन, कंप्यूटर या अन्य किसी ऐसी चीज का इस्तेमाल करते हैं जिससे आँखों पर जोर पड़ता है। और ज्यादा देर तक लगातार या बहुत पास से इसके इस्तेमाल के कारण भी आँखों में से पानी आने की समस्या हो सकती है। और यदि आपके घर में बच्चे ऐसी हरकत करते हैं तो कई बार तो इस कारण छोटी सी उम्र में ही बच्चों को बड़े बड़े चश्मे लग जाते हैं।

फीवर

यदि कोई बच्चा या बड़ा तेज बुखार से ग्रसित होता है तो ऐसे में बुखार के कारण बॉडी में कमजोरी आ जाती है जिसके कारण भी आँखों से लगातार पानी गिरने की समस्या हो सकती है। खासकर जुखाम अधिक होने के कारण आँखों से अधिक पानी गिरने की समस्या हो सकती है।

इन्फेक्शन

आँखों में इन्फेक्शन जिसे की आंख आना भी बोला जाता है, एलर्जी आदि होने के कारण भी आँखों में लाली आने के साथ, खुजली, जलन आदि भी महसूस हो सकती है। और ऐसा होने के कारण भी आँखों में से अधिक पानी आने की समस्या हो सकती है।

आँखों में कुछ चले जाना

कई बार चलते चलते, या बैठे बैठे, आँखों में कोई बाहरी कण, मच्छर आदि चला जाता है तो उसके कारण एक दम से आंखे बुरी तरह प्रभावित होती हैं और आँखों से तेजी से आंसू आना शुरू हो जाते है।

आँख की सर्जरी

यदि आपकी आँखों की सर्जरी हुई है तो भी आपको आँखों से पानी आने की समस्या हो सकती है, साथ ही यदि सर्जरी होने के बाद आँखों में किसी तरह का इन्फेक्शन है तो भी आँखों में यह समस्या हो सकती है।

लेंस

आँखों की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए आज कल लेंस का खूब इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यदि किसी कारण लेंस सही से नहीं लग पाता है, या इसके कारण आँखों में कोई समस्या हो जाती है तो भी आँखों से अधिक पानी बहने लगता है।

शारीरिक गतिविधियां

यदि आप कई बार बहुत अधिक हंसती है, उबासी लेती हैं, या आपको उल्टी या सिर दर्द जैसी कोई परेशानी होती है तब भी आँखों से अधिक पानी निकलने की समस्या हो सकती है। साथ ही कई बार नींद कम लेने के कारण भी आँखों में दर्द, लालीपन, या आँखों से आंसू गिरने की समस्या हो सकती है।

आँखों से पानी निकलने की समस्या से बचने के टिप्स

  • ज्यादा पास से और ज्यादा देर तक फ़ोन, टी वी, कंप्यूटर आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, खासकर बच्चों को इससे बचा कर रखना चाहिए।
  • बाहर निकलते समय आँखों के लिए चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • नज़र में कमजोरी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • आँखों को दिन में तीन से चार बार ठन्डे पानी से धोना चाहिए।
  • ठन्डे पानी में सूती कपडे को भिगोकर आँखों पर रखना चाहिए इससे भी आखो को आराम मिलता है।
  • आई ड्राप का इस्तेमाल करके भी इस परेशानी से आराम पाया जा सकता है, और इसके लिए पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • आँखों से अधिक पानी के गिरने के कारण, आँखों में जलन या लाली महसूस होने पर आपको बिना देरी किये डॉक्टर से अपनी आँखों की जांच करवानी चाहिए। ताकि आँखों को सुरक्षित रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आँखों में पानी आने की समस्या हो सकती है। साथ ही आँखों में होने वाली किसी भी समस्या को अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि इग्नोर करने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

प्रेगनेंसी में अंडा खाना कब नुकसानदेह होता है?

गर्भावस्था में महिला द्वारा लिया जाने वाला आहार न केवल गर्भवती महिला को हष्ट पुष्ट व् तंदरुस्त रखने में मदद करता है। बल्कि इससे गर्भस्थ शिशु के भी बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है। लेकिन गर्भवती महिला के मन में हर खाने पीने की चीज को लेके संदेह हो सकता है की इसे प्रेगनेंसी में खाना चाहिए या नहीं। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है वो इन चीजों को लेकर ज्यादा परेशान हो सकती है। तो लीजिये आज हम ऐसी ही चीज के बारे में में बात करने जा रहे हैं, और वो है अंडा। अंडे में प्रोटीन, कैलोरी, फैट, choline, जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को अंडे का सेवन करना चाहिए या नहीं इसके बारे में जानना जरुरी होता है।

प्रेगनेंसी में अंडा खाना चाहिए या नहीं

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को न केवल ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो केवल पोषक तत्वों से भरपूर हो, बल्कि ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसके सेवन से महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके, और किसी भी तरह का नुकसान न हो। तो अंडा भी एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ है, पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण यह गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ भ्रूण के भी बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करता है, इसीलिए गर्भवती महिला चाहे तो अंडे को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को अंडे का सेवन करते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है, जैसे की अंडे को किस तरह अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए, प्रेगनेंसी में कब और कितने अंडे का सेवन करना चाहिए, आदि। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में अंडा कब और कैसे आपको नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी में कब अंडे का सेवन नुकसानदायक हो सकता है

गर्भवती महिला यदि अंडे का सेवन करती है तो महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। तो आइये अब जानते हैं की कब अंडे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नुकसानदायक हो सकता है।

कच्चा अंडा या पूरी तरह से न पका हुआ अंडा

अंडा पोषक तत्वों की खान होता है इसीलिए इसे सुपरफूड भी कहा जाता है लेकिन गर्भवती महिला के लिए यह तभी फायदेमंद होता है जब इसका सेवन सही तरीके से किया जाए। जैसे की गर्भवती महिला को कच्चे अंडे या अच्छी तरह से न पके हुए अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें साल्मोनेला नामक बैक्टेरिया होता है। जो बॉडी में पहुंचकर गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या जैसे की सिर दर्द, पेट में दर्द, उल्टियां, तेज बुखार, समय पूर्व प्रसव, फूड पॉइजनिंग, डायरिया आदि से परेशान कर सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव और प्रेगनेंसी में अंडे के भरपूर फायदे के लिए अंडे को अच्छे से पकाने के बाद ही सेवन करना चाहिए। जैसे की अंडा यदि आप उबालकर खा रहे हैं तो उसे जब तक उबालें जब तक की उसके अंदर का भाग अच्छे से ठोस न हो जाये।

ज्यादा अंडे

गर्भवती महिला नियमित एक या दो अंडे का सेवन कर सकती है और एक दिन में इतने अंडे ही महिला और शिशु के लिए सही होते हैं। लेकिन इससे अधिक मात्रा में अंडे का सेवन गर्भवती महिला को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी में जरुरत से ज्यादा सेवन की गई कोई भी चीज गर्भवती महिला और शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

पहली तिमाही

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही गर्भवती महिला के लिए बहुत अहम होती है और यह समय बहुत नाजुक होता है। क्योंकि इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में महिला को गरम तासीर की चीजों का सेवन न करने की सलाह दी जाती है क्योंकि उससे भ्रूण को परेशानी हो सकती है, ऐसे में हो सके तो अंडे का सेवन पहली तिमाही की जगह महिला को दूसरी तिमाही से शुरू करना चाहिए ताकि महिला और शिशु दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में अंडे से जुडी कुछ बातें, इसके अलावा यदि अंडे का सेवन करने से गर्भवती महिला को किसी भी तरह की एलर्जी होती है तो भी महिला को अंडे का सेवन करने से बचना चाहिए। ताकि गर्भस्थ शिशु के विकास को बेहतर तरीके से होने और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से महिला को बचे रहने में मदद मिल सके।

मुहांसे के लिए बाबा रामदेव की टिप्स

Baba Ramdev Tips For Pimples

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वर्तमान में मुहांसे, युवा वर्ग की सबसे बड़ी समस्यों में से बनते जा रहे है। 12 वर्ष के किशोर से लेकर 20 वर्ष के युवा तक सभी इस समस्या से परेशान दिखाई पड़ते है। कोई इनसे किशोरावस्था के बाद छुटकारा पा लेता है तो कोई जिंदगी भर इस परेशानी से पीड़ित रहता है।

ऐसा नहीं है की वे इसे ठीक करने के लिए कुछ करते नहीं। तरह-तरह के उपाय, घरेलू नुस्खे, क्रीम, साबुन फेस वाश इत्यादि का इस्तेमाल करने के बाद भी जब यह जाते नहीं तो बहुत निराशा होती है। कई बार तो तरह तरह की चीजों के इस्तेमाल से ये मुहांसे कम होने की बजाय और बढ़ जाते है। जिसके कारण चेहरा और भी खराब व् दागदार हो जाता है।

इस तरह का फेस देखने में तो अजीब लगता ही है साथ साथ आपकी सुंदरता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। लोग भी उस व्यक्ति का काफी मजाक बनाने लगते है जिससे उसके आत्मविश्वास को भी ठेस पहुँचती है। ऐसे में सही उपाय का प्रयोग करना ही आपके मुहांसों और स्किन के लिए लाभकारी रहेगा।

इसीलिए आज हम आपको बाबा रामदेव के मुहांसे हटाने के कुछ घरेलू और देसी उपायों के बारे में बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आप अपनी इस समस्या को प्राकृतिक तरीके से हमेशा के लिए दूर कर सकते है। तो आइये जानते है क्या है वे उपाय?

मुहांसे हटाने की बाबा रामदेव की कुछ टिप्स :-

1. कपालभाती और प्राणायाम :kapal randr dhoti

अच्छी तरह सांस लेना भी एक विशेष प्रक्रिया है जिसके द्वारा आप अपने फेफड़ों को बिलकुल साफ़ कर सकते है। और अगर आपके शरीर का आंतरिक भाग स्वस्थ होगा तो आपकी स्किन पर कोई भी बीमारी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाएगी।

इसमें ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन अंदर जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर आती है। यदि आप 6 महीनो तक लगातार कपालभाती करते रहेंगे तो आपकी स्किन से साड़ी अशुद्धियाँ दूर हो जाएंगी। इसके लिए इज़र दिन भर में 2 बार 15 मिनट के लिए जरूर करें।

2. जूस का सेवन :

बाबा रामदेव का कहना है की अगर आप कोल्ड ड्रिंक्स को छोड़कर रोजाना ताजे फलों के रस का सेवन करेंगे तो आपकी मुहांसे और स्किन की अन्य अशुद्धियाँ अपने आप ही दूर हो जाएंगी। इसके अलावा रोजाना फ्रेश जूस पीने के बहुत से स्वास्थ्य लाभ भी होते है। तो इसीलिए इसे भी अपनी आदत बना लें।

3. स्किन को रगड़े :

स्किन को ब्यूटीफुल बनाने के लिए या उसे स्वस्थ रखने के लिए नहाने के बाद अपने फेस को 1 से 2 मिनट तक किसी सॉफ्ट टॉवल से हलके हाथों से रगड़ें। इससे स्किन टाइट होने के साथ-साथ कोमल भी होगी। इस उपाय से आपकी स्किन से डेड स्किन भी खत्म हो जाएगी। जो की मुहांसों का सबसे बड़ा कारण होती है।

4. सफाई रखें :बिना साबुन के चेहरा साफ कैसे करें

फेस पर मुहांसे होने का एक कारण चेहरे पर जमा गंदगी भी होती है जो अक्सर बाहर आने जाने या दिन भर धूल मिटटी में रहने के कारण फेस पर इकट्ठी हो जाती है।ऐसे में अगर आप सही समय पर उसे साफ़ नहीं करेंगे तो ये बाद में मुहासों का कारण बनेंगे। इसलिए जब भी कहीं बाहर से आये या धूल मिटटी भरे वातावरण से गुजरे तो तुरंत अपना चेहरा साफ़ करें। और फेस साफ़ करने के बाद उसपर मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं। ताकि फेस ड्राई न हो।

5. एलोवेरा :

अपने फेस से मुहांसे हटाने के लिए रोजाना एलोवेरा जेल लगाएं। इसे आप दिन में एक बार या दो बार कर सकते है। इससे मुहांसे तो दूर होंगे ही साथ साथ आपके फेस पर अतिरिक्त चमक भी आएगी। यह स्किन को ऊपर से हेल्थी बनाने के साथ-साथ उस पर एक सुरक्षा कवच बनाता है जिससे स्किन पर impurities इकट्ठी नहीं होती और फेस साफ़ रहता है। इसके अलावा किसी घाव या इन्फेक्शन हो जाने के बाद भी आप एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते है।

6. बेसन :

स्किन से जुडी किसी भी समस्या के लिए बाबा रामदेव आयुर्वेदिक चीजों के इस्तेमाल की ही सलाह देते है। और बेसन मुहांसे की समस्या में काफी लाभकारी होता है। इसके एंटी बायोटिक गुण स्किन से सभी अशुद्धियों को साफ़ करके उसे निखारने का काम करते है। अगर आपके मुहांसे भी कई उपायों के बाद ठीक नहीं हो रहे है तो फेस पर बेसन का फेस पैक लगाएं। चाहे तो इसमें थोड़ी हल्दी भी मिला सकते है। हफ्ते में 2 बार के प्रयोग से स्किन में काफी फर्क पड़ जाएगा।

7. नींबू :

फेस की देखभाल की बात करें तो नींबू का नाम सबसे पहला आता है। बाबा रामदेव का कहना है की फेस पर पड़े दाग धब्बे, सन टैनिंग और मुहांसे आदि को प्राकृतिक तरीके से दूर करने के लिए दिन में दो बार नींबू को अपने चेहरे पर रगड़ना चाहिए। और उसे बाद में हलके गुनगुने पानी से साफ कर लेना चाहिए। जानकारी के लिए बता दें, नींबू फेस के बालों को भी प्राकृतिक तरीके से ब्लीच करने का काम करता है।

8. कच्चा दूध :

रात में रोजाना सोने से पहले फेस पर कच्चा दूध लगाने से फेस को ठंडक मिलती है जिससे उत्तेजित पोर्स शांत हो जाते है और मुहांसे होने की संभावना कम हो जाती है। इसके लिए रात में फेस पर कच्चा दूध लगाकर सो जाएँ और अगली सुबह ठंडे पानी से उसे साफ़ कर लें। इस उपाय का प्रयोग रोजाना करने से आपकी स्किन में भी एक नया ग्लो आने लगेगा।

तो ये थे, मुहांसे हटाने के बाबा रामदेव की कुछ टिप्स, जिनकी मदद से आप अपने फेस से मुहांसों को हमेशा के लिए दूर कर सकते है। लेकिन ध्यान रहे किसी भी प्राकृतिक उपाय को कार्य करने में कुछ समय लगता है ऐसे में अगर आप 2 या 3 दिन प्रयोग करके छोड़ देंगे तो कोई फायदा नहीं होगा। इसीलिए कम से कम 1 महीने तक इन उपायों का इस्तेमाल करें और उसके बाद ही निर्णय ले की आपको इनका इस्तेमाल करना है या नहीं?

गर्मियों में गर्भवती महिलाओं को कैसे अपना ध्यान रखना चाहिए?

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गर्मियों का मौसम तो सभी के लिए मुश्किल भरा होता है, हम सभी का मन करता है के ए.सी में ही बैठे रहे और कुछ न कुछ ठंडा पीते रहें। ऐसी चिलचिलाती गर्मी में बात अगर एक गर्भवती महिला की जाये तो उनके लिए और भी ज्यादा परेशानी की बात होती है क्योंकि उनके गर्भ में शिशु पल रहा होता है। आप खुद सोचिये एक महिला को फीवर होता है, और टेम्परेचर बढ़ जाता है शरीर का। कोई जब हाथ लगाता है तो कहता है शरीर तप रहा है। आप खुद सोचिये जिस महिला के गर्भ में शिशु है उसे अगर बुखार आ जाए तो शिशु कितना तपता होगा।

अगर महिला गर्मियों में लू की शिकार हो जाती है, तो उनके शिशु पर उस लू का क्या प्रभाव पड़ेगा आप खुद सोच कर देखिये। शरीर का टेम्परेचर अचानक बढ़ जाए तो शिशु कितनी परेशानी हो सकती है।

गर्मियों में प्रेगनेंट महिला को कैसे अपना ध्यान रखना चाहिए ताकि कोई दिक्कत नहीं हो।

भूखे पेट नहीं रहें :

  • ज्यादा समय भूखे रहने से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में प्रेगनेंट महिलाओं को भूखा नहीं रहना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान हर 2 घंटे के अंतराल में कुछ ना कुछ कहते रहना चाहिए।
  • ठंडी फल और सलाद जैसे केले, बेरीज और खीरे का अपने भोजन में शामिल करें।

पानी की मात्रा :

  • गर्मियों में तेज धुप के कारण हमारे शरीर का पानी सूखता रहता है।
  • गर्भावस्था में भरपूर मात्रा में पानी पिए ताकि डिहाइड्रेशन की परेशानी ना आये।
  • पानी पिने में परेशानी हो तो शिकंजी, फलों का जूस व शरबत जरूर लें।

दहीं और लस्सी :

  • दहीं में लैक्टिक एसिड भरपूर मात्रा में होता है।
  • प्रेगनेंसी में दहीं और लस्सी का सेवन जरूर करें, इनकी तासीर ठंडी होती है।
  • ऐसा करने से आपके पेट में गर्मी नहीं होगी और लू लगने का खतरा भी कम होगा।

कच्चे आम का शरबत :

  • कच्चे आम का शरबत प्रेगनेंसी में फायदेमंद होता है।
  • इस शरबत को रोज ना पीकर 2-3 के अंतराल में ही पीना चाहिए।
  • अगर प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा लू लग गयी हो तो कच्चे आम को हाथो और पैरो के तलवों पर लगा लीजिये, ऐसा करने सारी गर्मी बाहर निकल जायगी।
  • ध्यान रखिये कच्चा आम हमारे अंदर की गर्मी को बाहर निकालता है जरुरत से ज्यादा भी इसका सेवन ना करें।

नहाने का सहीं समय :

  • गर्मियों में अक्सर बार बार नहाने का मन करता है।
  • गर्भावस्था में नहाने के समय का विशेष ध्यान रखें।
  • सुबह और शाम को नहा सकते है, पर दोपहर में बाहर से आते ही ना नहाये, ऐसे में सर्द-गर्म हो सकता है।
  • दोपहर में नहाते ही एकदम से धुप में ना जाये।
  • गर्मियों में टंकी का पानी भी बहुत ही गर्म हो जाता है, प्रेगनेंसी में गर्म पानी से भी ना नहाये।
  • प्रेगनेंसी में ठंडी का अहसास लेने के लिए बहुत ज्यादा ठन्डे पानी से भी ना नहाये।  

चाय, कॉफ़ी और सॉफ्ट ड्रिंक्स :

  • प्रेगनेंसी में पेय प्रदार्थो का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए।
  • परन्तु चाय, कॉफ़ी और सॉफ्ट ड्रिक्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • सॉफ्ट ड्रिंक्स कुछ देर के लिए गर्मी से राहत जरूर देती है।
  • पर इन सभी प्रदार्थो में कैफीन होती है जो की गर्भावस्था में दौरान हानिकारक होता है।

नॉनवेज :

  • नॉनवेज गर्म तासीर का होता है।
  • गर्मियों में गर्भावस्था के दौरान नॉनवेज ना के बराबर ही खाना चाहिए।

रहन सहन :

  • गर्मियों में हलके रंग के कपड़े पहनें।
  • लाल रंग और काले रंग के कपड़े गर्मी को बढ़ाते है, गर्भवती महिला को इन रंगो के कपड़ो से और भी ज्यादा गर्मी लग सकती है।
  • प्रेगनेंट महिलाये ज्यादा टाइट कपड़े न पहनें।
  • धुप में जाने पर प्रेगनेंट महिलाये अपना सर कवर करकें जाये।
  • पॉलीस्टर और सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें।

अधिक नमक या सोडियम :

  • गर्भावस्था में ज्यादा नमक खाने से भी परहेज करें।
  • नमक में सोडियम होता है, गर्भवस्था में शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ने से शरीर में सूजन भी आने लगती है।
  • नमकीन पेय जल से ज्यादा मीठे पेय जल पिए।

ऊपर बताये गए सभी उपाय गर्भावस्था के दौरान, चिलचिलाती गर्मी में कुछ राहत दिलाएंगे। फिर भी अगर आपको कभी भी गर्मी के कारण कुछ ज्यादा परेशानी हो तो तुरंत अपने डॉक्टरों से मिलें।

मशरुम खाने के फायदे

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मशरुम का नाम तो आप सभी ने सुना होगा और हो सकता है कभी खाया भी हो। इसीलिए आज हम आपको मशरूम और उसके फायदों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है। मशरुम एक तरह एक कवक होता है जिसमे बहुत से गुण और पौष्टिक तत्व पाए जाते है। लेकिन ये केवल एक नहीं बल्कि बहुत सी प्रजातियों में पाया जाता है जिनमे से केवल कुछ ही स्वास्थ्यवर्धक होते है।

मशरुम में मौजूद तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होते है। और इनका सेवन करने से बहुत सी समस्यायों को दूर भी किया जा सकता है। भारत में अधिकतर लोग मशरुम से बनी सब्जी खाना पसंद करते है लेकिन कुछ लोगों को इससे बानी सब्जी खास पसंद नहीं होती तो वे लोग मशरुम का इस्तेमाल कैंडी, सूप, अचार, मुरब्बे और बिस्कुट आदि में कर लेते है।

देश के कई क्षेत्रों में इसे कुकुरमुत्ते के नाम से भी जाना जाता है। जिसके कारण लोगों को यह भ्र्म होता है की यह कुत्ते के मूत्र से उत्पन्न होता है। जबकि कुछ लोग इसे मांसाहारी भोजन मानते है जबकि यह पूरी तरह शाकाहारी है। शायद आप नहीं जानते लेकिन मशरुम की स्पेशल खेती की जाती है। वैसे तो ये पुरे साल भर मार्किट में उपलब्ध रहता है लेकिन सर्दियों के मौसम में आप इसे आसानी से प्राप्त कर सकते है।

मशरुम के बारे में इतना कुछ जानने के बाद आप भी इसके फायदे और गुण जानने के लिए उत्सुक होंगे। तो आइए अब आपको बताते है मशरुम के फायदे!

मशरुम के फायदे :-

त्वचा के लिए :-

1. मशरुम में polysaccharide नामक तत्व पाया जाता है जो त्वचा के लिए मॉइस्चराइज़र के रूप में कार्य करता है। इसकी मदद से झुर्रियां और फाइन लाइन्स जैसी समस्या से निजात पाई जा सकती है। साथ ही सॉफ्ट और सप्पल स्किन भी।

2. इसमें पाया जाने वाला विटामिन D एक्ने की समस्या के लिए दवा का काम करता है। इसके लिए आप मशरुम के एक्सट्रेक्ट को अपनी त्वचा पर लगाएं।

3. Kojic नामक एसिड त्वचा की रंगत निखारने में मदद करता है और मशरुम में ये एसिड अच्छी मात्रा में पाया जाता है। स्किन के रंग को हल्का करके नए सेल्स का निर्माण करता है। साथ ही स्किन कैंसर होने के खतरे से भी बचाता है।

4. मशरुम में एंटी एजिंग गुण भी पाए जाते है। Kojic एसिड का इस्तेमाल कई एजिंग क्रीम्स में किया जाता है और मशरुम में ये प्राकृतिक तौर पर मौजूद है। इसकी मदद से दाग-धब्बे, आगे स्पॉट, त्वचा का कालापन जैसी बहुत सी समस्यायों से निजात पाई जा सकती है।

5. त्वचा में होने वाली विभिन्न समस्यायों के लिए भी मशरुम का इस्तेमाल करना लाभकारी होता है। इसमें मौजूद तत्व फ्री रेडिकल्स, eczema, rosacez और एक्ने जैसी समस्यायों को ठीक करने का काम करते है। साथ ही इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा में आई सूजन को भी दूर करते है।

बालों के लिए :-

6. बालों के झड़ने का मुख्य कारण एनीमिया होता है। और एनीमिया खून में आयरन की कमी के कारण होता है। मशरुम में आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। तो आप इसकी मदद से बालों का झड़ना भी रोक सकते है।

7. मशरुम में कॉपर पाया जाता है जो बालों के लिए बहुत लाभदायक होता है। क्योंकि ये खाने से आयरन को अब्सॉर्ब करने में मदद करता है। साथ ही इसमें मेलेनिन भी पाया जाता है जो बालों को प्रॉपर रंगत देने में मदद करता है।

8. इस सब्जी में सेलेनियम उच्च मात्रा में पाया जाता है जो बालों के बहुत आवश्यक है।क्योंकि ये एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से मुक्ति दिलाकर इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। इसके अलावा सेलेनियम बालों की ग्रोथ को बढ़ाने में भी मदद करता है साथ ही डैंड्रफ की समस्या भी दूर करता है।

स्वास्थ्य के लिए :-

9. कोलेस्ट्रॉल की समस्या में मशरुम का सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है। क्योंकि इसमें बहुत से तत्व पाए जाते है जो खाना पचने के बाद उसमे से कोलेस्ट्रॉल को बर्न करने में मदद करते है।

10. इसमें पाए जाने वाले गुणों की मदद से स्तन और प्रोस्टेट कैंसर की समस्या का भी इलाज किया जा सकता है। साथ ही इसमें मौजूद एसिड मीनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हॉर्मोन को संतुलित रखने में मदद करता है जिससे स्तन कैंसर का खतरा कम हो जाता है।

11. डाइबिटीज के मरीजों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें मौजूद enzymes शुगर और स्टार्च को समाप्त करने में मदद करते है साथ ही endocrinal gland के कार्य को भी ठीक करते है।

12. इसमें मौजूद विटामिन ऐ, बी और सी हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करते है जिससे हमारा शरीर इन्फेक्शन्स से लड़ने के काबिल हो पाता है।

13. वजन घटाने के लिए और अपने शरीर के एक्स्ट्रा फैट को कम करने के लिए भी आप मशरुम का सेवन कर सकते है। क्योंकि डाइटिंग के दौरान प्रोटीन की मात्रा का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो मशरुम में पाया जाता है।

14. मशरुम एक मात्र ऐसी सब्जी है जिसमे विटामिन D पाया जाता है.

15. इसमें विटामिन B1 भी पाया जाता है जिसे थायमिन कहा जाता है। ये शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स से निकलने वाली एनर्जी को नियंत्रित करता है। जो की ब्रेन और नर्वस सिस्टम के नार्मल फंक्शन के लिए जरुरी है।

16. मशरुम में विटामिन B2 भी पाया जाता है जो अच्छी नजर और आँखों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इसके अलावा ये स्वस्थ रेड ब्लड सेल्स की भी देखभाल करता है जिससे इम्यून सिस्टम बेहतर रह सके।

17. विटामिन B3 का स्त्रोत्र मशरुम शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स, फैट और प्रोटीन के रिलीज़ को नियंत्रित करता है। ये आपके पाचन तंत्र और नर्वस सिस्टम को खुश रखने में मदद करता है।

18. मशरुम में विटामिन B5 भी पाया जाता है, जिसे Pantothenic एसिड भी कहा जाता है। ये विटामिन शरीर के लिए बहुत जरुरी होता है। क्योंकि ये नए हॉर्मोन का निर्माण करने में मदद करता है।

19. इसके अलावा इसमें विटामिन B6 भी पाया जाता है, जो मूड को बेहतर बनाने का कार्य करता है। साथ ही ब्रेन के कार्य और उसके विकास को बेहतर करने में भी मदद करता है।

20. इन सभी विटामिन के अतिरिक्त मशरुम में विटामिन B9 और विटामिन H पाया जाता है। को शरीर की ग्रोथ और आंतरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते है।