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चिकनपॉक्स के घरेलू उपाय, और इसके निशान दूर करने के नुस्खे:-

चिकनपॉक्स के घरेलू उपाय, और इसके निशान दूर करने के नुस्खे:-

चिकनपॉक्स की समस्या एक वायरस के कारण होती है, जिसे Varicella zoster वायरस कहते है, इस समस्या के होने के कारण, हमारे पुरे शरीर पर दाने निकल जाते है, यह एक बीमारी होती है, जो व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती है, इन दानो में कई बार पस भी पड़ जाती है, कम से कम दो हफ्ते इन दानो को जाने में लगते है, परंतु इस समस्या से पूर्ण रूप से निजात पाने के लिए, बहुत समय लग जाता है, जब ये परेशानी होती है तो पहले तीन से चार दिन आपको बहुत ज्यादा परेशानी हो जाती है।

चिकनपॉक्स के होने के कारण शरीरिक रूप से भी बहुत कमजोरी आ जाती है, और इन दानो पर कभी कभी खुजली या इन्हें घिसना नहीं चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से ये बहुत गंदे दाग छोड़ देते है, इसके अलावा इस परेशानी के होने के आपकी सुंदरता पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, इस बीमारी का इलाज़ तो आप कई बार दवाई लेकर कर लेते है, परंतु इसके दानो का इलाज़ दवाई से भी कई बार नहीं हो पाता है, और साथ ही दवाई कई बार अपना उल्टा असर भी दिखा सकता है।

इस बीमारी पर न तो किसी का जोर लगता है, और न ही इसके दानो पर क्योंकि ये शरीर के अंदर तक जुड़ जाते हैं, तो आइये आज हम आपको चिकनपॉक्स की समस्या का घरेलू इलाज़, इसके दाने मिटाने के घरेलू नुस्खे, इसके कारण और लक्षण पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ओट जितना हो सकें इस समय के होने पर जिसे हो उसके पास नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इसके कारण भी संक्रमण हो जाता है, और यदि आपको हो तो भी आपको सबसे दूर रहना चाहिए, अब आइये जानते है इस समस्या के बारे में विस्तार से।

चिकनपॉक्स के कारण:-

  • अच्छा खाना नहीं खाने या गंदे पानी का सेवन कर लेने से या फिर खुला खाद्य पदार्थ खाने से, इस बीमारी को बुलावा देने जैसा होता है।
  • इसके अलावा अत्यधिक ठंड या गर्म होने से भी यह बीमारी होती है।
  • कई बार हवा में मौजूद बेरीसेला वायरस ठंड में ज्यादा सक्रिय होता है जो बच्चों को प्रभावित करता है, और जिसके कारण ये परेशानी कड़ी हो जाती हैं।
  • जिन बच्चों की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होती है, जो बहुत जल्दी किसी भी बीमारी की चपेट में आ जाती हैं, उसे चिकनपॉक्स होने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं।
  • ज्यादा कडे साबुन या ज्यादा देर तक नहाने से भी यह इंफेक्शन हो जाता है।
  • ज्यादा छोटे बच्चों में मां के दूध को अचानक छोडकर अन्य खाद्य पदार्थ खिलाने से यह इंफेक्शन फैल सकता है।

चिकनपॉक्स के लक्षण:-

  • इस समस्या के होने पर बच्चों को बुखार आता है और वह दो दिनों तक रहता है।
  • उसके बाद शरीर में दाने निकल आते हैं। और छह दिन से नौ दिन बाद दाने स्वयं ही समाप्त हो जाते हैं लेकिन इससे बच्चा कमजोर हो जाता है और शरीर की प्रतिरोधी क्षमता भी कमजोर हो जाती है।
  • यह लाल उभरे दाने से शुरू होता है। और उसके बाद लाल दाने बाद में फफोलों में बदल जाते हैं।है।
  • और उसके बाद उन दानो में मवाद आने लगता है, मवाद फूटकर खुरदुरा हो जाता है।
  • यह मुख्य रूप से चेहरे, खोपडी, रीढ और टांगों पर दिखाई दानो के रूप में देती है।
  • इसमें कई बार तेज खुजली होती है।
  • भूख ना लगना, उल्टी होना इसका प्रमुख लक्षण है।

चिकनपॉक्स से राहत पाने के टिप्स:-

  • चिकन पॉक्स में खान-पान का ध्यान रखें। खुले में रखा खाद्य पदार्थ बिल्कुल भी उसका सेवन न करें।
  • बच्चे के माता-पिता इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चा यदि बीमार है तो उसे स्कूल न भेजें ताकि दूसरे बच्चे इस संक्रमण की चपेट में न आएं। और यदि किसी और बच्चे को यदि ये परेशानी है, तो आप अपने बच्चे को भी उसके पास न जाने दें।
  • ठंड से बच्चों का बचाव करें, क्योंकि ठंडी हवा में इस बीमारी का वायरस बेरीसेला ज्यादा सक्रिय होता है। और इसी समय बच्चे इसी चपेट में आते है।
  • चिकन पॉक्स के इलाज के लिए कई प्रकार की दवाईयां और वैक्सीन भी आज कल बाजार में मिल जाती है, हैं। इनका प्रयोग करके इस बीमारी से निजात पाया जा सकती है।
  • शहद को चिकनपॉक्स वाले व्यक्ति को चाटते रहना चाहिए।
  • नीम का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • निम्बू का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • भीगे हुए चने को भी हाथो में रगड़ने से इस समस्या से राहत पायी जा सकती है।

चिकनपॉक्स के दाग को दूर करने के घरेलू उपाय:-

टमाटर का उपयोग करें:-

टमाटर का उपयोग करने से भी आप चिकनपॉक्स के दाग की समस्या से निजात पा सकते हैं, इसके लिए आप टमाटर के गुद्दे को निकाल कर अच्छे से दाग पर लगाएं, ऐसा नियमित रूपो से करने पर आपको इस परेशानी से आराम मिलता है, आप चाहे तो इस समस्या के इलाज़ के लिए टमाटर के गुद्दे में नीबू का रस मिलाकर अच्छे से उसे अपने दाग पर लगाने से भी इस परेशानी से आराम मिलता है।

एलोवेरा का उपयोग करें:-

एलोवेरा का जेल इन दाग पर लगा कर रखने से भी आपको दाग ख़त्म करने की समस्या से राहत मिलती है, आप इसे आचे से अपने दाग पर लगाएं, और थोड़ी देर बाद अच्छे से इसे धो लें, नियमित रूप से यदि आप इस उपाय को करते है, तो आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

शहद का उपयोग करें:-

शहद को यदि आप इन दाग पर लगाते हैं, और थोड़ी देर के बाद आप इन दाग को अच्छे से धो लेते हैं, ऐसा दिन में दो से तीन बार करने पर दाग धेरे धीरे हलके हो जाते है, और फिर खत्म हो जाते है, इसीलिए आपको इसका इस्तेमाल एक बार जरूर करके देखना चाहिए।

नीबू का प्रयोग करें:-

निम्बू का प्रयोग करने से भी आप इन दाग की समस्या से आसानी से आराम पा सकते हैं, इसके लिए आप निम्बू के रस को अच्छे से इन दागो पर रगड़ें, उसके बाद आप एक घंटे बाद इसे अच्छे से साफ़ कर लें, थोड़े ही दिनों में आपको इसका असर दीखने लगेगा, और ये दाग को साफ़ करने में मदद मिलती है।

लहसुन का इस्तेमाल करें:-

लहसुन का इस्तेमाल करने से भी आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके लिए सबसे पहले आप लहसुन का रस निकालें, और उसे अच्छे से अपने दाग पर लगाएं, और थोड़ी देर बाद इसे धोलें, जल्दी परिणाम के लिए ये एक अच्छा उपाय होता है।

दूध का उपयोग करें:-

दूध का इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप अपने निशान को जब भी धोएं तो उसके लिए आप पानी की जगह दूध का इस्तेमाल करें, ऐसा करने से आपको जल्द ही इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

नारियल का तेल ऐसी परेशानियों को ख़त्म करने का सबसे आसान और कारागार उपाय होता है, इसके लिए आप दिन में चार से पांच बार अच्छे से दाग पर लगाएं, और अच्छे से मसाज करें, ऐसा दिन में चार से पांच बार करने पर आपको जल्दी ही इसका असर दीखने लगता है, ऐसा करने से आपकी स्किन को और भी बहुत से फायदे मिलते है।

पपीते का उपयोग करें:-

पीपते का उपयोग करने से भी इस समस्या से राहत मिलती है, क्योंकि ये डेड स्किन को निकाल कर त्वचा में मॉइस्चर को भारत है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप पपीता लें, और उसके बाद उसमे पांच चमच्च दूध, और पांच चमच्च शकर मिलाएं, और मिक्सी में पीस कर अच्छे से उसका पेस्ट तैयार कर लें, अब इसे दाग पर लगाएं, और थोड़ी देर के बाद इन दाग को अच्छे से साफ़ करें, ऐसा करने से आपको इसका थोड़े ही दिनों में असर दीखने लगेगा।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

बेकिंग सोडा स्किन के ph स्तर को सही करता है, इसके लिए आप बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक स्क्रब जैसा तैयार करे, ऐसा करने के बाद आपको इसे स्किन पर स्क्रब की तरह मसाज करना है, और उसके थोड़ी देर बाद इसे अच्छे से साफ़ करें, आपको थोड़े ही दिनों में इसका असर दीखने लगता है, और आपके दाग भी साफ़ हो जाते है।

चन्दन का उपयोग करें:-

चन्दन का उपयोग करने से भी आपको चिकनपॉक्स के दाग की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है, इसके उपयोग के लिए आप चन्दन के तेल में थोड़ा सा ओलिव ऑयल मिलाकर अच्छे से मसाज करें, और उसके बाद इसे सूखने के बाद धो दें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत मिलता है, यदि आप इस परेशानी से राहत पाना चाहते है, तो आपको एक बार इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, साथ ही इससे स्किन को भी बहुत से फायदे मिलते है।

टी ट्री ऑयल का इस्तेमाल करें:-

यह तेल आसानी से बाजार में मिल जाता है, यदि आप भी चिकनपॉक्स से पड़े दाग की समस्या से परेशान है, तो दिन मे इसे बार बार लगाते रहें, ऐसा करने से आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है, आप चाहे तो रात के समय अच्छे से इससे मसाज करके सो भी सकते है, आपको इसका उपयोग करने से थोड़े ही दिनों में इस परेशानी से राहत मिल जाएगी।

ये भी पढ़ें:- चेचक के कारण लक्षण और उपाय 

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सफेद दाग (ल्यूकोडर्मा) का इलाज क्या है? कैसे ठीक करें, अपने चेहरे और हाथ के सफेद दाग को

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सफेद दाग क्या है? What is Leucoderma

इस रोग में शरीर की त्वचा का रंग बदलकर सफ़ेद हो जाता है। इसे “सफ़ेद कुष्ठ” और “सफ़ेद कोढ़” के नाम से भी जाना जाता है। यह देखने में बहुत खराब लगता है और आसानी से लोगो की नजर में आ जाता है। लोग इस दाग को ही घूरने लग जाते हैं। यह दाग धीरे धीरे बढ़ता जाता है और कई बार तो पूरे शरीर में हो जाता है। यह हाथ, पैर, चेहरे, ओंठो, कान, गले सभी जगह फ़ैल जाता है। मेलेनिन वाली द्रव्य की वजह से इस रोग में त्वचा का रंग सफ़ेद हो जाता है।

कभी कभी दाग एक जगह रुक जाते है, पर कभी कभी फैलकर बड़े हो जाते है और पूरे शरीर में फ़ैल सकते हैं। यह रोग संक्रामक नही होता है और इसमें किसी तरह का दर्द नही होता है। इसे अंग्रेजी में Vitiligo कहा जाता है।

कैसे इसे टेस्ट करते है? How to test Leucoderma

रोगी के दाग को डॉक्टर ऊँगली से पकड़कर उपर उठाकर उसने सूई चुभोता है। अगर उसमे खून आ जाये तो रोग साध्य (चिकित्सा लायक) होता है। पर यदि दाग में पानी जैसा पदार्थ निकले तो यह असाध्य होता है, यानी इसका इलाज सम्भव नही है। इसे डॉक्टर ही टेस्ट करके बताते हैं। सफ़ेद दाग होने की शुरुवात में ही डॉक्टर को दिखा देना चाहिये।

सफेद दाग होने के कारण- Reasons of Leucoderma

  • ब्लीचिंग का अधिक इस्तेमाल करने से यह हो सकता है
  • जादा रसायनों chemicals के सम्पर्क मे रहने से हो सकता है
  • प्रकृति विरुद्ध खाना खाने से हो सकता है। जैसे मांसाहार के बाद दूध पीने से, नीबू- घी, घी- दही, बासी भोजन, सड़ा- कीटाणुओं वाला भोजन करने से
  • शरीर में मेलेनिन नामक द्रव्य का अधिक मात्रा में बनना
  • कैंसर के मरीजो को कीमोथेरेपी के बाद यह हो सकता है
  • खराब क्वालिटी की चप्पल, जूते पहनने से हो सकता है
  • एंटीबायोटिक दवाओं और दूसरी दवाओं के अधिक प्रयोग से
  • खराब क्वालिटी की बिंदी लगाने से सफ़ेद दाग स्त्रियों में हो सकता है
  • शरीर में खून खराब, अशुद्ध होने के कारण
  • तनाव, अवसाद, मानसिक चिंता करने से
  • शरीर में कैल्शियम कम होने से
  • सूरज की रोशनी में अधिक देर तक रहने से
  • आनुवंशिक रूप से (जेनेटिक डिसआर्डर)
  • विटामिन B 2 की कमी से

सबसे पहले कहाँ शुरू होता है सफेद दाग- Where it starts first

यह सबसे पहले ओंठो, हाथ, पैर में शुरू होता है। धीरे धीरे पूरे शरीर में फ़ैल जाता है।

सफेद दाग में क्या खाना चाहिये- Food to eat in Leucoderma

  • भोजन करने के बाद छाछ या गाजर का रस पीना चाहिये
  • पेट में कीड़े की जांच करवानी चाहिये
  • बाजरा, ज्वार, जौ की रोटी, मूंग, मसूर की दाल खानी चाहिये
  • चने की दाल, चले की रोटी रोज खानी चाहिये
  • सुबह उठकर भीगे चले और बादाम का सेवन करना चाहिये
  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ- लौकी, गाजर, करेला, तरोई खानी चाहिये

सफेद दाग में क्या नही खाना चाहिये- Precautions in Leucoderma

  • मांसाहार का सेवन नही करना चाहिये
  • तम्बाकू का सेवन नही करना चाहिये
  • दूध और मांस का एक साथ सेवन नही करना चाहिये। यह प्रकृति विरुद्ध है
  • फास्टफूड का सेवन नही करना चाहिये
  • मूली के साथ दूध का सेवन नही करना चाहिये
  • सफ़ेद दाग के रोगियों को टमाटर नही खाना चाहिये

चेहरे और हाथ के सफेद दाग को ठीक करने के घरेलू नुस्खे- Home remedies to cure Leucoderma

  • करेले का सेवन करें
  • सफ़ेद दाग में दूध में हल्दी मिलाकर पीना चाहिये। इससे बहुत फायदा होता है
  • यह रोग होने पर साबुन नही लगाना चाहिये। दूसरे प्रकार के सौंदर्य उत्पादों से परहेज करना चाहिये
  • दूध के साथ मांस या मूली नही खानी चाहिये
  • सफ़ेद तिल का सेवन करना चाहिये
  • सफ़ेद दाग के रोगियों को सुबह खाली पेट तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना चाहिये
  • अदरक का पेस्ट बना ले। उसमे 2 चम्मच लाल मिटटी मिलाकर मिलाकर पेस्ट बना लेना चाहिये और सफ़ेद दाग पर लगाना चाहिये। इससे बहुत फायदा होता है। ताजे अदरक को पतले टुकड़े में काटकर दाग पर रखे जब तक उसका पूरा रस सूख न जाये। इस तरह भी प्रयोग कर सकते हैं।
  • मूली के बीजो को पीसकर इसका पेस्ट बना लें। उसमे 2 चम्मच विनेगर मिलाकर दाग पर लगाये। 30 मिनट बाद गर्म पानी से धोना है।
  • उड़द की दाल को भिगोकर पीस लेना चाहिये। फिर इसका पेस्ट बनाकर दाग पर लगाना चाहिये
  • अनार की पत्तियों को सुखाकर चूर्ण बना ले। उसे रोज एक चम्मच खायें।
  • सफ़ेद दाग पर नारियल तेल लगाने से भी फायदा होता है
  • नीम की पत्ती को पीसकर पेस्ट बना ले। उसमे थोड़ा शहद डाले और अच्छी तरह से मिलाकर सफ़ेद दाग पर लगा लें। सुबह शाम लगाये। इससे लाभ होता है। नियमित तौर पर नीम का रस भी पिया जा सकता है। नीम की पत्तियों को चबाना भी अच्छा विकल्प है।
  • तुलसी का तेल दाग पर लगाने से फायदा होता है
  • सेब के सिरके के साथ कुछ बूंद पानी मिलाकर दाग पर लगाने से लाभ मिलता है
  • लहुसन को पीसकर पेस्ट बना लें। उसने हरड़ को घिसकर मिला दें और दाग पर लगायें।

निष्कर्ष: यह एक ऐसा रोग है जिसमे कोई दर्द तो नही होता है पर शरीर की रंगत और खूबसूरती को ये बिगाड़ देता है। इसलिए इसकी शुरुवात होने पर ही डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिये। लोक लाज के डर से रोगी डॉक्टर से नही मिलता है और सफ़ेद दाग बढ़ता चला जाता है। बहुत से लोगो का मानना होता है कि सफ़ेद दाग छूने से फैलता है, पर ये सोच गलत है। सफ़ेद दाग छूने से नही फैलता है।

आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाकर इसका सफल इलाज किया जा सकता है। आज के लेख में हमने आपको सफ़ेद दाग के बारे में विस्तार से बताया है। हमने आपको कुछ बेहतरीन नुस्खे बताये है जिसे अपनाकर आप अपना रोग दूर कर सकते है। ये लेख आपको कैसा लगा, जरुर बतायें।

ब्रैस्ट को सुडौल करने के ये है तरीके

How to Get Perfect Breast Shape

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महिलाओं के शरीर का सबसे आकर्षक हिस्सा उनके स्तन होते है न केवल उनकी खूबसूरती को बढ़ाते है अपितु उन्हें आकर्षक और हटकर बनाने में भी मदद करते है। लेकिन बहुत सी लड़कियां और महिलाएं अपने स्तनों को लेकर काफी चिंतित रहती है। जिसका कारण उनका ढीलापन, बेडौल होना, छोटा या बहुत बड़ा होना आदि होता है। जो कुछ हद तक ठीक भी है, क्योंकि सही आकार और टाइट ब्रैस्ट ही आपको सुन्दर दिखने का काम करती है।

ढीली, छोटी या बहुत बड़ी, लटकी हुई ब्रैस्ट देखने में अच्छी नहीं लगती और इस तरह की महिलाओं पर कोई कपडा भी ठीक से नहीं जंचता। माना जाता है चेहरे के अलावा लड़कियों के स्तनों से भी उनकी सुंदरता को आंका जाता है। जिनके स्तन आकर्षक नहीं होते उन्हें लोग बड़ी ही अजीब नजरों से देखते है जिससे उनके आत्मसम्मान को काफी ठेस पहुंचती है। ऐसे में करे क्या?

परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स देने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने स्तनों को सुडौल और खूबसूरत बना सकती है। बस आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होगा और कुछ आदतों को बदलना होगा। क्योंकि बार आप दिन भर में कुछ ऐसी गलतिया कर बैठती है जो आपके स्तनों की खूबसूरती को प्रभावित करती है।

स्तनों को आकर्षक और सुडौल कैसे बनाएं?

वैसे तो आजकल बाजार में बहुत सी ऐसे दवाएं और क्रीम्स मौजूद है जो स्तनों को कुछ ही हफ़्तों में बड़ा करने का दावा करती है। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। किसी भी क्रीम को बाहरी तौर पर अप्लाई करने से आप अपने स्तनों के साइज को बड़ा नहीं कर सकती। इसके लिए आपको अंदरूनी तौर पर मेहनत करने की आवश्यता होगी। यहाँ हम आपको उन सभी तरीकों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने स्तनों की बिना नुकसान के सुन्दर और सुडौल बना सकती है।

मेडिकल तरीका :

आजकल विज्ञान तकनीक ने काफी वृद्धि कर ली है जिसके अनुसार आज छोटी से छोटी बिमारी या समस्या का इलाज संभव हो पाया है। ब्रैस्ट को बड़ा करने या छोटा करने के लिए भी आप मेडिकल ट्रीटमेंट की मदद ले सकते है। इसके लिए आप निम्न तरीके अपना सकती है- 

1. सर्जरी : अगर आप इसके लिए बहुत से पैसे खर्च करने को तैयार है तो आपके लिए सर्जरी सबसे बेस्ट ऑप्शन हो सकती है। इसमें आपकी ब्रैस्ट इम्प्लांट सर्जरी की जाती है। जिससे आप अपनी अपनी ब्रैस्ट को बेहतर बना सकती है।

2. होम्योपैथिक दवाएं : कुछ दवाएं है जिनकी मदद से आप अपने ब्रैस्ट के साइज को बड़ा कर सकती है। लेकिन इन दवाओं के प्रयोग के लिए आपको डॉक्टरी सलाह लेना जरुरी है। वे आपको आपके शरीर की जरूरत के हिसाब से दवा की डोज देते है। जिससे आप ब्रैस्ट के साइज को बड़ा सकती है।

3. आयुर्वेदिक दवाएं : होमियोपैथिक दवाओं की तरह आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल भी किसी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह से ही करना चाहिए। वे दवाएं आपके शरीर में उन पोषक तत्वों के संचरण को बढ़ाती है जिनका योगदान ब्रैस्ट साइज बढ़ाने के लिए जरुरी होता है।

छोटे ब्रैस्ट को सुन्दर दिखाने के तरीके :-

1. छोटे स्तनों को सुन्दर बनाने के लिए आप घर में सिलबट्टे पर मसाले या चटनी आदि पीसे। इससे उस हिस्से में प्रभाव पड़ेगा और आपके स्तनों के साइज में वृद्धि होगी।choti breast size

2. स्तनों को सही आकार देने के लिए आप दोनों हाथों से दीवार को इस तरह से धकेले जैसे आप उसे गिराने का प्रयत्न कर रही हो। लेकिन ध्यान रहे धक्का देते समय कोहनी बिलकुल सीधी होनी चाहिए। यह एक तरह की एक्सरसाइज है जिसकी मदद से स्तनों के आकार में वृद्धि होती है।

3. इसके लिए सर्दियों के दिनों में तिल का नियमित सेवन करें और तिल के तेल की मालिश स्तनों पर करें। इसमें मौजूद पोषक तत्व आपकी ब्रैस्ट को आकर्षक बनाने में मदद करेंगे।

4. अगर आप काफी कमजोर है तो आप चीनी युक्त चीजें या मिठाइयों का सेवन अधिक करें ये आपके स्तनों को बढ़ाने का काम करेंगे।

5. कपडे धोने के लिए वाशिंग मशीन के इस्तेमाल की बजाय हाथों से कपड़े धोएंगी तो आपके शरीर के उस हिस्से की अच्छी कसरत होगी और आपके स्तन सुन्दर और आकर्षक हो जाएंगे।

सुडौल स्तनों के लिए इन चीजें का प्रयोग करें :-

1. खान-पान :

स्तनों को सुदंर बनाने के लिए उन्हें अंदरूनी पोषण भी देना जरुरी है जिसके लिए आपको अपने खान पान पर ध्यान देना होगा। इसके लिए अंडे, पनीर, बटर, नाशपाती, घी आदि चिकनाई वाली चीजें का सेवन करें। ये शरीर में वसा पहुंचाने का काम करते है जिससे उनके आकार और सुंदरता में वृद्धि होती है।

2. मसाज :

अपने ब्रैस्ट के ढीलेपन और आकार को ठीक करने के लिए मसाज बेहद जरुरी है। इसके लिए आप किसी भी आयल की मदद ले सकती है। आपको बस उस तेल से अपने ब्रैस्ट पर मसाज करनी है लेकिन ध्यान रहे मसाज उंगलियों से गोलाई में करनी है। इससे ब्रैस्ट का ढीलापन और आकार दोनों ही अच्छे होंगे। साथ ही उनकी खूबसूरती में भी बदलाव आएगा।

3. केले :

केला स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी फल माना जाता है ये न केवल आपको बिमारियों से बचाने का काम करता है अपितु आपकी हड्डियों को भी मजबूत करता है। इसके सेवन से भी आपके स्तनों में कसावट आती है और वे सुन्दर और बड़े दिखने लगते है।

सुडौल ब्रैस्ट के लिए ये सावधानियां बरतें :-

  • सुन्दर ब्रैस्ट पाने के लिए उन्हें कभी भी बहुत अधिक ठंडे या गर्म पानी से नहीं धोना चाहिए।
  • सर्दियों में संभव हो तो स्तनों की धुप में सिकाई करनी चाहिए। लेकिन वो केवल 10 से 15 मिनट की ही होनी चाहिए।
  • धुप सेंकने के तुरंत बाद स्नान न करें। इससे आपके शरीर में नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।
  • बहुत अधिक टाइट या लूज़ नायलोन की ब्रा नहीं पहननी चाहिए।
  • हमेशा अपने साइज के अनुसार ही ब्रा पहने और सही नम्बर का चुनाव करें।
  • रात्रि में ब्रा उतार कर सोएं और सुबह जागते ही पहन लें।
  • विटामिन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। हरी सब्जियों को अपने भोजन में सम्मिलित करें।
  • स्तनपान कराने वाली महिलाएं अपने ब्रा साइज पर ख़ास ध्यान दें। क्योंकि इस दौरान ब्रैस्ट लटकने की संभावना सबसे अधिक होती है।
ब्रैस्ट ढीली हो गयी हो तो?

अगर आपके स्तन भी किसी वजह से ढीले हो गए है और उनका कोई आकार नहीं सेट हो पा रहा है। तो आप इन उपायों का इस्तेमाल कर सकती है। अपनी डाइट में दूध, पनीर, खोया, सोया, ड्राई फ्रूट्स आदि प्रोटीन युक्त चीजें को सम्मिलित करें। इनके नियमित सेवन से ब्रैस्ट में कसावट आती है। स्ट्रॉबेरी, संतरा, सेब, फूल गोभी, बंद गोभी, सौंफ आदि कुछ अन्य खाद्य पदार्थ है जो आपके स्तनों का ढीलापन दूर करने में आपकी मदद कर सकते है। क्योंकि इनमे वे सभी पोषक तत्व पाए जाते है जो सुडौल ब्रैस्ट के लिए जरुरी होते है।

1 से 3 महीने का गर्भ गिराने के तरीके (1 to 3 Months Pregnancy Abortion)

गर्भपात करने के तरीके : कैसे करें सुरक्षित गर्भपात

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए सबसे बड़ी खुशी का कारण होती है लेकिन अगर यह प्रेगनेंसी बिना तैयारी के आ जाए तो परेशानी का कारण बन जाती है। अगर आपके साथ भी यह स्थिति है आ गयी है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि अन्य तरीकों के अलावा कुछ घरेलू उपाय भी है जिनकी मदद से 1 से 3 महीने का गर्भ गिराया जा सकता है। लेकिन हर स्थिति में ऐसा जरुरी नहीं की घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके अनचाहा गर्भ गिर जाए।abortion

पहले या दुसरे हफ्ते की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग हो जाने पर यह साफ़ हो जाता है की आपका गर्भपात हो गया है। लेकिन इस स्थिति में भी डॉक्टर से परामर्श लेना जरुरी होता है। इसके अतिरिक्त आजकल दो महीने तक की प्रेगनेंसी से निजात पाने के लिए एबॉर्शन पिल्स भी मौजूद है जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इनका इस्तेमाल करने से पूर्व एक बार डॉक्टर से राय ले लेनी चाहिए। लेकिन अगर आपका गर्भ तीन महीने का हो गया है तो इससे निजात पाने के लिए आपको डॉक्टर द्वारा बताएं गए ट्रीटमेंट ही करवाने होंगे।

क्योंकि इस स्थिति में अगर आप घरेलू उपाय का इस्तेमाल करती है तो ब्लीडिंग तो हो जाती है लेकिन सही तरीके से गर्भपात न होने के कारण हो सकता है आपने गर्भाशय में कुछ टिश्यू रह जाएं। जो की बाद में आपके लिए समस्या खड़ी कर सकते है। इसलिए आज हम आपको एक से तीन महीने के गर्भ गिराने के लिए क्या क्या किया जा सकता है इस बारे में बताने जा रहे है। लेकिन ध्यान रहें इनमे से किसी भी उपाय का इस्तेमाल करने से पूर्व डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

1 महीने से 10-15 दिन का गर्भ गिराने के तरीके :-

1. बबूल के पत्ते :

अगर आपकी प्रेगनेंसी 1 महीने से 15 दिन तक की है तो उसके लिए बबूल के पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए 8 से 10 बबूल के पत्ते लें और उन्हें एक ग्लास पानी में उबाल लें। पत्तों को तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। अब इस पानी को ब्लीडिंग शुरू होने तक दिन में 4 से 5 बार पियें। गर्भ अपने आप गिर जाएगा।

2. विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ :

विटामिन सी खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने से भी प्रेगनेंसी को हानि होती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को विटामिन सी का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। अगर आपकी प्रेगनेंसी अभी अभी शुरू हुई है तो आपको विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए। इसके लिए आप कटहल, पपीता, कच्चा पपीता, संतरा, अनानास आदि का सेवन कर सकती है।

3. भुने हुए तिल :

तिल की तासीर बहुत गर्म होती है और अनचाहे गर्भ से निजात पाने के लिए गर्म तासीर वाले भोजन की आवश्यकता होती है। जिसके लिए आप तिल का इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए थोड़े से तिल भुन लें और उसमे दो से तीन चम्मच दिन में 4 बार सेवन करें। इससे आपको जल्द फायदा मिलेगा।

4. भागदौड़ और व्यायाम :exercise

बहुत अधिक भागदौड़ और व्यायाम करने से भी शुरुवाती दिनों का गर्भ गिर जाता है। इसके लिए आप सीढियाँ चढ़ना, भारी सामान उठाना, पेट के बल काम करना आदि जैसी गतिविधियाँ कर सकती है। ये आपका गर्भपात कराने में मदद कर सकती है।

5. सोयाबीन :

सोयाबीन में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते है जो गर्भ ठहरने नहीं देते। इसके लिए रात के समय में थोड़े से सोयाबीन के दानें पानी में भिगोकर रख दें। सुबह जागकर खाली पेट इन्हें चबाकर खाएं। इससे गर्भपात के चांसेस बढ़ जाएंगे।

6. सीताफल के बीज :

इन बीजों का सेवन करने से भी गर्भ से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए सीताफल के बीजों को पीसकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को प्राइवेट पार्ट में लगाएं। ऐसा तब तक करें जब तक ब्लीडिंग न हो जाए।

7. एस्पिरिन :

एस्पिरिन की गोलिया भी गर्भ गिराने में आपकी मदद कर सकती है। इसके लिए रोजाना 4 से 10 एस्पिरिन की गोलियां खाएं। उपाय के बेहतर परिणामों के लिए एस्पिरिन के साथ लौंग, काफी, पार्सले, अदरक और अंजीर का सेवन भी करें। मासिक धर्म अपने आप आने लगेंगे।

गर्भ गिराने के अन्य उपाय :-
  • पपीते में विटामिन सी और पेपाइन नामक एसिड पाया जाता है जजों प्राकृतिक तरीके से गर्भपात करवाता है।
  • अनानास का सेवन करने से भी गर्भपात आसानी से हो जाता है।
  • नियमति रूप से गर्म पानी से नहाने से भी गर्भ गिर जाता है।
  • ग्रीन टी के अत्यधिक सेवन से फर्टिलिटी से संबंधित समस्याएं होने लगती है जिससे गर्भपात भी हो सकता है।
  • किसी भी तरह की चीज़ का सेवन करने से अनचाहा गर्भ नहीं ठहरता। क्योंकि इन्हें बिना उबले दूध से बनाया जाता है।
  • अनार को उसके बीजों के साथ खाने से भी मिसकैरेज के चांसेस बढ़ जाते है।
दो महीने का गर्भ गिराने के तरीके :-PREGNANCY-PROBLEM

अगर आपका गर्भ 2 महीने तक है तो इस स्थिति में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी होगी। वैसे तो इसके लिए बहुत सी दवाएं मार्केट में मौजूद है लेकिन बिना सलाह के इनका इस्तेमाल करना हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा ब्लीडिंग होने के बाद भी डॉक्टर से जाँच जरुर करवानी चाहिए। ताकि भविष्य में किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

तीन माह का गर्भ गिराने के तरीके :-

इस स्थिति में केवल डॉक्टरी सलाह से ही गर्भपात करवाना चाहिए, क्योंकि इस स्टेज पर आकर घरेलू उपाय से गर्भपात करना ठीक नहीं। क्योंकि इस समय तक बच्चा थोडा विकसित हो चुका होता है, ऐसे में गलत तरीकों का इस्तेमाल करके गर्भपात करना मुश्किलों का कारण बन सकता है। इसलिए इस समय में डॉक्टर से सलाह लेकर सही तरीके से ही गर्भपात कराएं।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से एक से तीन महीने का गर्भपात किया जा सकता है। लेकिन इनके इस्तेमाल के समय एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की अगर आप बार-बार गर्भपात करवा रही है तो आगे प्रेगनेंसी में समस्या हो सकती है।


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ये 5 चीजें आपके साथ हो रही हैं तो समझ जाइये की डिलीवरी में समस्या होगी

डिलीवरी में दिक्कत का कारण, गर्भावस्था के नौ महीने महिला बहुत सी परेशानियों से जूझती है। लेकिन सबसे ज्यादा महिला परेशानी व् डर महिला को तब महसूस होता है। जब महिला के शिशु को जन्म देने का समय और करीब आता जाता है। क्योंकि महिला की चाहे पहली डिलीवरी हो या तीसरी लेकिन कहीं न कहीं महिला शिशु और डिलीवरी के दौरान होने वाले दर्द को लेकर चिंतित जरूर होती है।

क्योंकि सच तो यह है एक नन्ही जान को इस दुनिया में लाना बहुत ही मुश्किल होता है। और इन मुश्किलों से बचाव के लिए गर्भवती महिला पूरे नौ महीने अपना अच्छे से ध्यान रखती है। ताकि डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकें। लेकिन कई बार महिला की बॉडी कुछ ऐसे संकेत दे सकती है। जो इस बात की और इशारा करते हैं की हो सकता है। डिलीवरी के दौरान महिला को किसी तरह की समस्या हो।

कौन से लक्षण बताते हैं की डिलीवरी में परेशानी हो सकती है

डिलीवरी में दिक्कत के कारण
डिलीवरी में दिक्कत के कारण

जिस तरह प्रसव के होने से पहले बॉडी कुछ संकेत देती है। जिन्हे देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं की प्रसव का समय पास आ गया है। वैसे ही गर्भवती महिला के शरीर में कुछ ऐसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। जो डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानी की और संकेत करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की कौन से लक्षण बताते हैं की डिलीवरी में परेशानी हो सकती है।

डिलीवरी में दिक्कत का कारण होता है वजन

  • गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो, शिशु का वजन सही रहे, इसके लिए गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ख्याल रखती है।
  • लेकिन कई बार शिशु का वजन यदि जरुरत से ज्यादा हो जाता है।
  • तो यह इस बात का संकेत हो सकता है की महिला को डिलीवरी के दौरान दिक्कत हो सकती है।
  • और कई बार तो डॉक्टर ऐसे केस में सामान्य प्रसव की जगह सिजेरियन डिलीवरी की राय दे सकते है।
  • इसके अलावा यदि प्रेग्नेंट महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है।
  • तो भी डॉक्टर महिला को सिजेरियन डिलीवरी की राय दे सकते हैं।
  • और प्रेग्नेंट महिला के वजन का भी जरुरत से ज्यादा बढ़ना डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानी का संकेत होता है।

डिलीवरी में दिक्कत का कारण होता है शिशु का सही पोजीशन में न होना

  • यदि डिलीवरी का समय पास आने पर भी शिशु अपनी जन्म लेने की सही पोजीशन में नहीं आता है।
  • यानी की शिशु का सिर नीचे की और पैर सीने की तरफ नहीं होते हैं बल्कि पैर नीचे की तरफ और सिर सीने की तरफ होता है।
  • या फिर शिशु ने गर्भनाल को गले में लपेटा हुआ होता है।
  • तो ऐसी किसी स्थिति के होने पर डॉक्टर्स आपको बता देते हैं।
  • जो इस बात का संकेत होता है की आपको डिलीवरी में समस्या आ सकती है।
  • साथ ही ऐसे कुछ केस में डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की राय दे सकते हैं।

डर होना

  • डिलीवरी का समय पास आने पर प्रेग्नेंट महिला के मन में डिलीवरी को डर होना आम बात होती है।
  • लेकिन यदि महिला इस डर को अपने ऊपर हावी होने देती है।
  • तो इसके कारण महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है।
  • या फिर पहली डिलीवरी के दौरान महिला का अनुभव सही न रहा हो इसीलिए इस बार महिला को डर लग रहा हो।
  • तो ऐसे में महिला का प्रेग्नेंसी के दौरान डिलीवरी को लेकर हमेशा डर में रहना भी डिलीवरी में होने वाली परेशानियों को बढ़ा सकता है।

डिलीवरी में दिक्कत का कारण होता है गेस्टेशनल डाइबिटीज़

  • गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से जूझ सकती है।
  • और उन्ही स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में से गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या भी एक है।
  • ऐसे में महिला को इस परेशानी के होने पर डिलीवरी से जुडी समस्या का होना आम बात होती है।
  • लेकिन यदि महिला इस समस्या से बचाव के लिए अपना पूरा ध्यान रखती है।
  • और इस समस्या के होने पर भी अपनी सेहत के साथ किसी तरह की लापरवाही नई करती है।
  • तो ऐसा करने से डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

मानसिक रूप से परेशानी

  • प्रेगनेंसी के लिए महिला का केवल शारीरिक रूप से ही फिट होना जरुरी नहीं होता है।
  • बल्कि मानसिक रूप से भी महिला का तैयार होना जरुरी होता है की महिला शिशु को जन्म देने के लिए तैयार है।
  • क्योंकि यदि महिला शारीरिक रूप से तो स्वस्थ है लेकिन मानसिक रूप से परेशान हैं।
  • तो यह दिक्कत न केवल प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को बढ़ा सकती है।
  • बल्कि इसके कारण डिलीवरी के समय भी रिस्क बढ़ सकता है।
  • ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए महिला को माँ बनने का फैसला तभी लेना चाहिए।
  • जब वो शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी शिशु को जन्म देने के लिए तैयार हो।

तो यह हैं हैं वो लक्षण जो यदि प्रेग्नेंट महिला को अपनी बॉडी में महसूस हो तो महिला को समझ जाना चाहिए। की महिला को डिलीवरी के दौरान परेशानी हो सकती है। और इन परेशानियों से बचाव के लिए और हर दिक्कत से बचे रहने के लिए महिला को डॉक्टर के संपर्क में रहने चाहिए।

प्रेगनेंसी में बिछिया पहनने के फायदे

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माँ बनने का सुख हर महिला के लिए बहुत ही खास होता है, और हर प्रेग्नेंट महिला चाहती है की गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ हो। इसीलिए प्रेगनेंसी में आने वाली समस्याओं का सामना करते हुए भी महिला अपने आप को फिट रखने की कोशिश करती है। साथ ही अपने आप को फिट रखने के लिए खान पान से लेकर उठने बैठने, कपडे पहनने तक का भी महिला ध्यान रखती है। और हर किसी से राय लेती है की प्रेगनेंसी के दौरान क्या करना सही होता है और क्या करना गलत होता है। ताकि प्रेगनेंसी के समय आने वाली परेशानियों को दूर करने में मदद मिल सके, तो लीजिये आज हम आपको बताने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचने के लिए बिछिया पहनना कैसे लाभदायक होता है।

प्रेगनेंसी में बिछिया पहनने के फायदे

बिछिया पहनना सुहागन के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है, यह केवल परम्परा ही नहीं है या महिला केवल पैरों की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए इसे नहीं पहनती हैं, बल्कि वैज्ञानिको के अनुसार बिछिया पहनने से बहुत से फायदे भी मिलते हैं। खासकर प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना कारण पड़ता है, और उस दौरान महिला यदि बिछिया पहनती है तो इससे महिला को बहुत से स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में बिछिया पहनने से कौन से फायदे मिलते है।

पेट के लिए है फायदेमंद

बिछिया पहनने से पैरों की उँगलियों पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण यह एक्यूप्रेशर की तरह काम करता है। और यह दबाव न केवल गर्भाशय को स्वस्थ रखने में मदद करता है बल्कि इससे गर्भवती महिलाओं को पेट सम्बन्धी समस्या को दूर करने में भी मदद मिलती है।

पॉजिटिव रहने में मदद करते हैं

चांदी को शरीर के लिए ठंडा माना जाता है, और जब गर्भवती महिलायें इन्हे पहनकर चलती है तो इससे महिला को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, जिससे दिमाग को शांत रहने में मदद मिलती है। और महिला का पॉजिटिव रहना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों को कम करने में मदद करता है।

ब्लड प्रैशर कण्ट्रोल होता है

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर का घटना या बढ़ना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला बिछिया पहनती है तो इससे महिला को ब्लड प्रैशर जैसी समस्या को भी कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

तनाव से बचाव

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण कई बार गर्भवती महिला तनाव में आ सकती है। और तनाव के कारण गर्भवती महिला की परेशानी बढ़ने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में भी कमी आती है, लेकिन बिछिया पहनने से आपके दिमाग को शांत रहने में मदद मिलती है, जिससे गर्भवती महिला को तनाव जैसी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो बेहतर होता है

बिछिया पहनने से पैर की उँगलियों की नसों पर दबाव पड़ता है जिसके कारण बाकी आस पास की नसों पर भी उसका असर पड़ता है, और दबाव पड़ने के कारण ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। और ब्लड फ्लो गर्भाशय में भी बेहतर तरीके से होने लगता है जो की प्रेगनेंसी के दौरान महिला और शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

शिशु के लिए है फायदेमंद

गर्भवती महिला को बिछिया पहनने से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, और यदि महिला स्वस्थ रहती है तो गर्भ में पल रहा शिशु भी स्वस्थ रहता है। साथ ही गर्भाशय को भी सुरक्षित रहने में मदद मिलती है, जिससे शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है।

तो यह हैं कुछ खास फायदे जो गर्भवती महिला को बिछिया पहनने से मिलते हैं। यदि आप भी गर्भवती है और आप भी इन फायदों को उठाना चाहती है तो आप भी बिछिया पहन सकती है।

केले में कौन से विटामिन व् मिनरल्स होते हैं जो गर्भ के लिए फायदेमंद होते हैं

प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। और केला भी उन बेहतरीन फलों में से एक है जो गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही केला हर मौसम में आसानी से मिल भी जाता है साथ ही केले में मौजूद फैटी एसिड, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन सी, विटामिन बी, फाइबर जैसे पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं ऐसे कौन से पोषक तत्व होते हैं जो गर्भ में बच्चे को फायदा पहुंचाते हैं उस बारे में जानते हैं।

फोलेट

फोलेट गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत जरुरी पोषक तत्व होता है। क्योंकि इससे शिशु के मस्तिष्क के बेहतर विकास में मदद मिलने के साथ रीढ़ की हड्डी के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। साथ ही यह जन्म के समय शिशु को होने वाली बिमारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

विटामिन बी 6

केले में विटामिन बी 6 भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के तंत्रिका तंत्र व् मस्तिष्क के विकास को बढ़ाने में मदद करता है।

विटामिन सी

विटामिन सी एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो गर्भ में शिशु तक आयरन की मात्रा को सही पहुंचाने में मदद करने के साथ शिशु के इम्युनिटी लेवल को बढ़ाने में भी मदद करता है। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

केले में कैल्शियम की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में करती है। और हड्डियों का बेहतर विकास होने से शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं केले में मौजूद पोषक जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी गर्भ में पल रहे शिशु के विकास से जुड़े इन बेहतरीन फायदों के लिए केले का सेवन जरूर करना चाहिए।

लू से बचाव, गर्मियों के दिनों में लू लगने से बचने के घरेलू उपाय!

गर्मियों के मौसम में सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की होती है। गर्मी के दिनों में लगातार बढ़ता तापमान और उस दौरान चलने वाली गर्म हवाएं किसी के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती है। गर्मियों के मौसम में तेज धूप के कारण तापमान में होता इजाफा, लू लगना, हवा में रुखापन और शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या होना आम है। बहुत से शहरों में इस दौरान तापमान 45 डिग्री के भी पार हो जाता है। ऐसे में डिहाइड्रेशन और लू लगना एक आम समस्या है।गर्मी में लू से बचने

गर्मी के दिनों में चलने वाली गर्म लू के कारण लोगों को डिहाइड्रेशन, शरीर में कमजोरी और पेट से संबंधित परेशानियां होने लगती है, इसके अलावा बुखार, जी मचलना, कमजोरी, चक्कर आना, मतली, उलटी, दस्त होना आदि भी होने लगती है। अगर आपके साथ भी गर्मियों में इस तरह की समस्याएं होती रहती है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है! क्योंकि आज हम आपको गर्मियों में लू लगने और लू से बचने के लिए क्या करें इस बारे में बताने जा रहे है।

लू से बचने के घरेलू उपाय :-

गर्मियों के मौसम में लू से बचने के लिए आपको थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ेगी। यहाँ हम आपको कुछ सरल घरेलू उपाय बता रहे है जिनकी मदद से डिहाइड्रेशन और लू लगने की समस्या से बचा जा सकता है।

1. धनिया –

गर्मियों के मौसम में लू लगने से बचने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का प्रयोग करना चाहिए जो बॉडी को ठंडक पहुंचा सके। और धनिया आपकी इसमें मदद कर सकता है। इसकी ठंडी तासीर शरीर की ठंडा रखने के साथ-साथ फ्रेशनेस भी प्रदान करेगी। इसके लिए धनिये को पानी में भिगोकर रखें, उसके बाद अच्छे से मसलकर उसे छान लें। अब इस छने हुए पानी में थोड़ा सी चीनी मिलाकर पी जाएं।

2. आम का शर्बत –

भले ही गर्मियों में इसका अधिक सेवन करने से फुंसिया आदि निकल जाती है। परन्तु यदि आप आम का शर्बत, मैंगो शेक और आमपन्ना का सेवन करेंगे तो लू लगने की समस्या से बचा जा सकता है।

3. दही और उससे बनी चीजें –

गर्मियों के मौसम में लस्सी, दही, छाछ और मठा आदि का सेवन करना बहुत लाभकारी माना जाता है। ये न केवल शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करते है अपितु शरीर की पानी की कमी को पूरा करके गर्मी से भी राहत दिलाते है। वैसे आप चाहे तो छाछ में थोड़ा काला नमक और जीरा डालकर भी सेवन कर सकते है।

4. पानी का सेवन –

बहुत से लोगों से घर से बाहर जाते वक्त पानी ले जाने की आदत नहीं होती। लेकिन क्या आप जानते है की आपकी ये आदत आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होती है। इसलिए गर्मियों के दिनों में बाहर जाते हमेशा पानी की बोतल साथ में रखनी चाहिए। और थोड़ी थोड़ी देर में पानी पीते रहना चाहिए। एक और बात कभी भी घर से खाली पेट बाहर नहीं जाना चाहिए। क्योंकि अगर आप बाहर भूखें जाते है तो लू लगने की संभावना अधिक होती है। इसलिए जब भी घर से निकलें तो कुछ खा लें।

5. फलों का रस –

गर्मी में खुद को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए फलों का रस भी बहुत लाभकारी होता है। जिसमे ठंडाई, नारियल पानी, नींबू पानी और अन्य फलों का रस सम्मिलित है। गर्मियों के दिनों में इस तरह के तरल पदार्थों का सेवन करते रहने से शरीर में डिहाइड्रेशन नहीं होती।और लू भी नहीं लगती। और इस तरह के तरल पदार्थ मोटापा घटाने में भी मदद करते है।

6. लौकी –

लौकी में पानी की अत्यधिक मात्रा पाई जाती है, जिससे शरीर में पानी की की नहीं होती। गर्मियों में मौसम में शरीर को खाना पचाने में काफी दिक्क़ते होती है। ऐसे में लौकी का रायता, लौकी की सब्जी और उसका जूस आदि आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। लौकी के अलावा आपको तोरई, खीरा, ककड़ी आदि सब्जियों का भी सेवन कर सकते है।

7. जलजीरा –

गर्मियों में होने वाले पेट से संबंधित रोगों, घमौरियों और पित्त आदि से बचने के लिए जलजीरा बहुत बेहतर उपाय है। इसके सेवन से इन समस्यायों को ठीक भी किया जा सकता है। इसके साथ-साथ घमौरियां होने पर तुलसी और नीम का पेस्ट लगना बहुत लाभकारी होता है।

8. एनर्जी ड्रिंक –

गर्मियों में चलने वाली गर्म लू के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या होने लगती है जिसे पानी की कमी की समस्या कहा जाता है। ऐसे में ग्लूकोस और एनर्जी ड्रिंक का सेवन करना फायदेमंद होगा। ध्यान रहें जब तक पूरी तरह स्वस्थ न हो जाएं तब तक ग्लूकोस का सेवन करते रहें।

9. विटामिन सी और ए –

गर्मियों के दिनों में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिनमे विटामिन सी और विटामिन ए की अच्छी मात्रा हो। यह आपको खट्टे फलों जैसे संतरे, मौसमी, नींबू आदि में मिल जाएगा। इसके अलावा पुदीना भी आपकी इस समस्या में मदद कर सकता है। क्योंकि ये जलन के साथ साथ, बुखार गैस और लू की समस्या को भी दूर करता है।

10. सलाद –

गर्मियों के दिनों में खीरा और प्याज का सलाद खाना बहुत लाभकारी होता है। जहाँ खीरा शरीर की पानी की जरुरत को पूरा करता है वहीं कच्ची प्याज लू लगने से बचाती है। अगर गर्मियों में नियमित रूप से प्याज खाई जाए तो लू लगने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

तो ये थे, कुछ घरेलू उपाय जिनकी मदद से लू लगने से बचा जा सकता है। बस आपको अपने शरीर और स्वास्थ्य का ध्यान रखना है। एक और बात, कभी भी कहीं बाहर से आने के बाद तुरंत पानी का सेवन नहीं करें। ऐसा करने से समस्या हो सकती है। आपको पानी पीना है तो शरीर का तापमान सामान्य होने पर ही पियें।

खाने पीने की चीजो को बर्बाद होने से ऐसे बचाएं

भारतीय परंपरा में खाने को फेकना या बर्बाद करना पाप के समान है, खाने पीने की चीजो को आप अपनी मेहनत की कमाई से खरीदते है, ऐसे में उन्हें बर्बाद करने का मतलब होता है, की आप अपनी मेहनत की कमाई को बर्बाद कर रहे है, खाने को बर्बाद करने से पहले यदि आप ये सोचें, की आप तो खाना बर्बाद कर रहें है, परंतु भारत में पता नहीं कितने लोग भूख से मर रहें है, आप खुद सोचिये एक दिन किसी कारण आपके घर पर कहना न बने या केवल सब्ज़ी ही न बने तो आपको कैसा महसूस होता है।

सबसे पहले तो आप खाने पीने का सामान उतना ही खरीदें, जितने की आपको जरुरत है उसके बाद जब भी आप खाना बनाते है तो हिसाब से बनाइये की इतना खाना जरुरी है, ऐसा नहीं है के हमेशा आपका अंदाजा गलत हमेशा सही हो कई बार खाना बच भी जाता है, परंतु इसका मतलब ये तो नहीं है, की आप उसे फेक दे इससे पहले की वि खराब हो उसे किसी गरीब को ही खाने के लिए दे दें, या फिर आप खाने को फ्रिज़ में ही रखते है, ऐसा नहीं है की वो एक रात में ख़राब हो जाता है, आप भी उसका सेवन कर सकते है।

यदि आपको पता नहीं था की आपने कही जाना है और अचानक से आपका प्रोग्राम बन गया है, और आपने भी खाना बना लिए है, ऐसे में उस खाने को उठाकर वैसे ही आप फ्रिज़ में रख दें, और बाद में उसका सेवन करें, कई लोग बहुत दिन रखें फल को भी फेक देते है, पर आज के इस महगाई के समय ,में भी लोग ऐसा करते है तो उनसे बड़ा पागल कोई नहीं है, आप फलो का इस्तेमाल करें कोई शेक या जैम या फिर जेली भी बना सकते है, और उसके बाद बच्चों को इसे ब्रेड के साथ दें, ये अच्छा भी होगा और बच्चों को इससे फायदा भी होगा।

तो आइये आज हम आपको बासी खाने को फेकने से अच्छा आप किस प्रकार उसका इस्तेमाल करके कुछ नया बना सकते है, इस बारे में आपको बताने जा रहे है, फिर चाहे वो सब्जियों के बारे में हो, या फलो के या फिर आपके बनाएं खाने के बारे में, हम आपको ऐसा भी नहीं कह रहे है की फ्रिज़ में रखे दो तीन दिन पुराने खाने का सेवन करें, परंतु इससे पहले की वो ख़राब हो जाएँ, या तो आपको उसका सेवन करना चाहिए, या फिर आपको उसे किसी और को खाने के लिए दे देना चाहिए, आइये जानते हैं की किस प्रकार आप बासी खाने को ख़राब होने से बचा सकते है।

फलो को खराब होने से कैसे बचाएं:-

कुछ लोग एक ही साथ बहुत से फलो को लेकर घर में रख लेते है, जिससे उनका सेवन न करने पर वो ख़राब होने लगते है, और साथ ही बासी फल आपको उतना लाभ भी नहीं देते है, जितना की आपको ताजे फलो का सेवन फायदा करता है, आप उतने ही फल लेने चाहिए, जितने की आप खा सकें, और रोजाना नहीं तो दो दिन के हिसाब से फल ले लिए करें, ऐसे फल खराब भी नहीं होंगे, और उनसे मिलने वाला फायदा भी आपको मिल सकेगा, और यदि कभी आपको ऐसा लगे की फल पड़े हुए सुख रहें है, या आपको ऐसा लगे की वो ख़राब होने वाले है, तो उन्हें फेके नहीं बल्कि आप उन फलो का इस्तेमाल करके कोई ड्रिंक या फिर आप जैम या जेली भी बना सकती है, और उसे ब्रेड पर लगाकर सर्व करें, ऐसे में फल भी खराब होने से बच जायेंगे।

टमाटर को फेकने से कैसे बचाएं:-

कई म,महिलाओ की आदत होती हैं वो सोचती है की प्याज और टमाटर तो रोजाना की जरुरत होती है क्यों न इसे अधिक ले लिए जाएँ, प्याज को तो आप रख सकती है, परंतु टमाटर धीरे धीरे दो से तीन दिन में ही ढीला पड़ने लगता है, और बाद में आप उसे फेकने लगती है, पहले तो आपको इसे नियमित मात्रा में ही खरीदना चाहिए, उसके बाद आप तमात को फेके नहीं, आप इसका सूप बनाकर इसका इस्तेमाल कर सकती है, इसकी चटनी बना सकती है, या फिर आप इसकी प्यूरी भी बना कर रख सकती है, ऐसे में आप टमाटर को फेकने की बजाय इसका इस्तेमाल कर सकती है।

ब्रेड को न फेकें:-

ब्रेड को भी बासी होने पर आप फेके नहीं बासी ब्रेड की पुडिंग बनाकर भी आप इसका इस्तेमाल कर सकती है, इसके अलावा आप इसे तवे पर या ओवन में बनाकर इसे सॉस के साथ भी खा सकती है, इसके अलावा आप इसके टोस्ट भी बनाकर इसका इस्तेमाल कर सकती है, इसीलिए आपके लिए जरुरी होता है, की आप ब्रेड को फेकने की बजाय इन तरीको का इस्तेमाल करें।

बासी सब्जियों को न फेके:-

सब्जियों का इस्तेमाल करने के लिए आप फ्रेश सब्जी ही लेनी चाहिए, ताकि उसमे पुरे मिनरल्स और खनिज उचित मात्रा में मौजूद हो, और यदि आप कभी बहुत सी सब्जिया एक साथ खरीद भी लेती है, तो आपको बिलकुल भी ऐसा नहीं सोचना चाहिए, की बासी होने पर आप उन सब्जियों को फेक दें, बल्कि उन सब्जियों को सुखाकर आप उनका इस्तेमाल कर सकती है, गाजर गोभी मूली जैसी सब्जी का तो आप अचार बना कर भी उसका मज़ा ले सकती है, इसके अलावा आपकी सब्ज़ी यदि पकी हुई हैं तो भी आप उसे फेके नहीं बल्कि आप उसे फ्रिज़ में रख दे, और अगले दिन या तो आप उस सब्ज़ी का सेवन कर सकती है, या उसके पराठे बनाकर भी उसके जायके को बड़ा सकती है, ऐसे आप सब्जियों को फेकने से बचा सकते है।

दूध को भी न फेके:-

कई बार दूध दो से तीन दिन का हो जाता है, या किसी कारण ख़राब हो जाता है, तो ख़राब होने पर भी आपको दूध को नहीं फेकना चाहिए, दूध को पवित्र माना जाता हैं, यदि आपका दूध ख़राब हो गया है, तो इसमें कुछ निम्बू के रस की बुँदे मिलाकर इसे गैस पर रखें, और थोड़ी देर के लिए रखा रहने दे आपको इससे पनीर मिलेगा, जीका इस्तेमाल आप सब्ज़ी या फिर सलाद के रूप में इसका सेवन कर सकते है। ऐसे करके आप खराब होने वाली सब्जियों व् अन्य सामान को फेकने की बजाय उन्हें इस्तेमाल में ला सकते है, ऐसा करने से खाने का अपमान भी नहीं होगा, और आपको फायदा भी मिलेगा।

 

फर्स्ट ट्राई में ऐसे हो प्रेग्नेंट

अधिकतर लोग ऐसा ही समझते हैं की एक ही बार सम्बन्ध बनाने से महिला प्रेग्नेंट हो जाती है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि गर्भाधारण के लिए बहुत सी बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। और कोई महिला यदि प्रेग्नेंट होने के लिए सभी जरुरी बातों का ध्यान रखती है और महिला में माँ बनने के सभी जरुरी लक्षण होते हैं तो वो महिलाएं एक ही बार में गर्भाधारण कर सकती है। क्या आप भी माँ बनने का प्रयास कर रही है और चाहती है की एक ट्राई में ही आपका गर्भ ठहर जाएँ, तो आइये आज हम इस आर्टिकल में आपको कुछ ऐसे आसान टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक ही ट्राई में आपका गर्भाधारण करने में मदद करते हैं।

डॉक्टर से करवाएं जांच

यदि आप चाहती हैं की आप फर्स्ट ट्राई में ही गर्भाधारण कर लें तो आपको इसके लिए सबसे पहले आपको अपनी सभी शारीरिक जांच करवानी चाहिए, यदि आपके पीरियड्स अनियमित है तो उसका इलाज करवाना चाहिए, कोई शारीरिक बीमारी है तो उसका इलाज करवाना चाहिए, आदि। केवल महिला को ही नहीं बल्कि पुरुष को भी अपनी सभी जांच करवानी चाहिए। क्योंकि यदि दोनों पूरी तरह स्वस्थ होते हैं तो इससे जल्दी गर्भाधारण होने के चांस बढ़ जाते हैं।

सही ओवुलेशन पीरियड का पता करें

ओवुलेशन पीरियड वो समय होता जब महिला के गर्भाधारण के चांस सबसे अधिक होते हैं। ऐसे में पहली ही बार में माँ बनने के लिए आपको अपने सही ओवुलेशन पीरियड पीरियड को जानना चाहिए और यदि आपको इसका पता नहीं है तो आपको ओवुलेशन किट का इस्तेमाल करने, डॉक्टर की मदद से अपने सही ओवुलेशन पीरियड को जानना चाहिए। यदि आप सही ओवुलेशन पीरियड में अच्छे से सम्बन्ध बनाते हैं तो गर्भाधारण होने के चांस बढ़ते हैं।

वजन नियंत्रित रखें

माँ बनने के लिए बॉडी में हार्मोनल बैलेंस होना बहुत जरुरी होता है इसके लिए महिला को अपने वजन को नियंत्रित रखना बहुत जरुरी होता है। ऐसे में यदि आप पहली ही बार में माँ बनना चाहती है तो इसके लिए आपको न तो अपने वजह को ज्यादा होने देना चाहिए, न ही कम होने देना चाहिए। साथ ही माँ बनने के लिए सही उम्र का ध्यान रखना भी जरुरी होता है और माँ बनने की सबसे सही उम्र बाइस से अठाइस वर्ष तक की होती है।

अपनी डाइट में पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाएं

यदि आप जल्दी गर्भाधारण के लिए सोच रही है तो इसके लिए आपका शारीरिक रूप से भी फिट होना जरुरी होता है। और इसके लिए आपको अपनी डाइट में पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाना चाहिए जैसे की फोलेट, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन युक्त आहार को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए।

मानसिक रूप से रहे फिट

एक ही बार में गर्भाधारण के लिए केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि महिला को मानसिक रूप से भी फिट होना चाहिए, जैसे की तनाव नहीं लेना चाहिए और खुश रहना चाहिए। खासकर जब आप जल्द गर्भाधारण के लिए सम्बन्ध बनाते है तो आपको बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए और खुश होकर अपने पार्टनर के साथ रहना चाहिए इससे भी जल्द गर्भाधारण के चांस बढ़ते हैं।

किसी रोमांटिक जगह पर घूमने जाएँ

जिस तरह शादी के बाद रिलैक्स होकर आप अपने पार्टनर के साथ घूमने के लिए हनीमून पर जाते हैं। उसी तरह बेबी प्लान करने पर भी आपको एक ही बार में गर्भाधारण के लिए अपने पार्टनर को किसी रोमांटिक जगह पर जाना चाहिए। क्योंकि वहां को परेशान करने वाला कोई नहीं होता है, आप दोनों एक दूसरे के साथ खुलकर एन्जॉय करते हैं, तनाव नहीं होता है जिससे बेहतर तरीके सम्बन्ध बनते हैं। और महिला का गर्भ ठहरने में आसानी होती है।

नशे से दूर रहें

महिला व् पुरुष दोनों को ही नशे के सेवन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि नशा प्रजनन क्षमता पर बहुत बुरा असर डालता है। जिससे महिला के गर्भाधारण में समस्या हो सकती है। ऐसे में यदि महिला गर्भाधारण करना चाहती है तो दोनों पार्टनर्स को हर तरह के नशे के सेवन से परहेज करना चाहिए।

किसी भी ऐसी चीज का इस्तेमाल न करें जो आपकी प्रेगनेंसी में रूकावट बने

यदि आप माँ बनने का सोच रही हैं तो आपको गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करना छोड़ देना चाहिए, सम्बन्ध बनाते समय किसी भी तरह की सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि आप इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो इससे पहली ही बार में माँ बनने के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान आपको पहली ही बार में माँ बनने के लिए रखना चाहिए। यह सभी टिप्स गर्भाधारण को आसान बनाने में बहुत मददगार होते हैं। साथ ही यदि आपके और आपके पार्टनर के बीच सम्बन्ध बन गया है और आपको उम्मीद है की आपका गर्भाधारण हो जायेगा, तो उसके बाद आप अपनी सेहत के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही न बरते। क्योंकि हो सकता है की निषेचन हो गया हो लेकिन आपके द्वारा बरती गए लापरवाही के कारण आपको नेगेटिव परिणाम का सामना करना पड़े। ऐसे में अगले पीरियड्स की डेट आने तक आपको बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।