Home Blog Page 158

शहद का इस्तेमाल करके ऐसे बढ़ाएं सुंदरता

एंटी बेक्टेरियल, एंटी सेप्टिक गुणों से भरपूर शहद स्वास्थ्य के साथ सुंदरता बढ़ाने में भी फायदेमंद होता है। इसीलिए स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के बहुत से घरेलू नुस्खों में शहद का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि शहद एक ऐसा घरेलू नुस्खा है जिससे आपकी स्किन को कोई नुकसान नहीं होता है। साथ ही आपकी स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही बेहतरीन टिप्स बताने जा रहे हैं। जो आपकी सुंदरता को बढ़ाने में आपकी मदद करते हैं।

शहद

आप थोड़ा सा शहद लेकर अपनी स्किन पर मास्क की तरह लगाएं। और थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके मसाज करते हुए निकाल दें। सिर्फ शहद का इस्तेमाल करने से ही आपके चेहरे पर जमी धूल मिट्टी व् डेड स्किन को हटाने में मदद मिलती है। जिससे चेहरे की ख़ूबसूरती बढ़ती है।

निम्बू और शहद

शहद में निम्बू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं। और दस से पंद्रह मिनट के बाद चेहरे को साफ कर दें। आपको अपने चेहरे पर तुरंत फ़र्क़ नज़र आएगा। और ऐसा हफ्ते में दो बार जरूर करें इससे चेहरे की ख़ूबसूरती को बने रहने में मदद मिलती है।

बेसन और शहद

एक चम्मच बेसन में थोड़ा शहद और थोड़ा पानी या गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद साफ़ कर दें। इस तरह हनी का इस्तेमाल करने से भी सुंदरता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

टमाटर और शहद

यदि आपकी स्किन पर टैनिंग हो गई है जिसकी वजह से स्किन काली पड़ रही है। तो ऐसे में आप टमाटर का पेस्ट बनाकर शहद में मिलाएं। उसके बाद इस पेस्ट से अपनी स्किन की मसाज करें और दस से पंद्रह मिनट के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो दें। शहद का इस आसान तरीके से इस्तेमाल करके आपको टैनिंग की समस्या को दूर करके अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

केला और शहद

केले को मैश करके शहद के साथ मिलाएं और इस पेस्ट को स्किन पर लगाएं। ऐसा करने से स्किन पर बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने के साथ मुहांसे की समस्या को दूर करने में भी मदद मिलती है। साथ ही इससे आपकी सुंदरता भी बढ़ती है।

ओटमील और शहद

ओटमील और शहद का इस्तेमाल फेस क्लीन्ज़र की तिरह किया जाता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक चम्मच ओटमील में शहद को मिलकर एक पेस्ट बनाएं और इस पेस्ट से अपने चेहरे की मसाज करें। तीन से चार मिनट मसाज करने के बाद अपने चेहरे को अच्छे से धो दें। ऐसा करने के बाद आपके चेहरे पर आया फ़र्क़ आपको साफ़ महसूस होगा।

शहद और दालचीनी

एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी मिलाएं। उसके बाद इस पेस्ट से अपने चेहरे पर मसाज करें और थोड़ी देर के लिए इसे चेहरे पर लगे रहने दें। थोड़ी देर बाद साफ़ पानी से अपने चेहरे को धो लें। ऐसा करने से चेहरे पर होने वाली एक्ने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

सूखे होंठों के लिए हनी

स्किन के साथ सूखे होंठों की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए भी शहद का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए आप हनी की एक पतली लेयर होंठों पर लगाएं। पांच साथ मिनट के बाद होंठों को साफ़ कर लें। ऐसा करने से आपको होंठों से जुडी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं आपकी सुंदरता बढ़ाने के कुछ खास तरीके जिनमे आप शहद का इस्तेमाल करते हैं। तो यदि आप भी अपने चेहरे की सुंदरता को बढ़ाना चाहते हैं तो आप भी इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

जांघो को पतला करने के तरीके

आपके शरीर में मोटापा खासकर आपके पेट या जांघो के आस पास ही इकठ्ठा होता है, जिसके कारण आपका फिगर पूरी तरह से खराब हो जाता है, और यदि एक बार आपकी जांघो के आस पास चर्बी इकट्ठी हो जाएँ तो इसे आसानी से खत्म नहीं किया जा सकता है, साथ ही इसके कारण आपका लुक भी बुरी तरह खराब लगने लगता है, और इसका कारण होता है आपकी कह्राब जीवनशैली, खराब दिनचर्या, खाने में लापवाही, नींद का भरपूर न लेना, व्यायाम न करना, आदि, ये कुछ कारण आपके शरीर पर चर्बी जमाने का काम करते है, क्या आप भी जांघो पर जमी चर्बी से परेशान है, यदि हाँ तो अब आपको घबराने की बिलकुल भी जरुरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, जो आपकी जांघो पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करके आपको फिट करने में मदद करेंगे, जिससे आपको अपनी पर्सनैलिटी को बढ़ाने में मदद मिल सकें।

इन्हें भी पढ़ें:- वजन घटाने का सही तरीका क्या है ? इसे आजमाए और कुछ दिनों में ही वजन कम करें

एरोबिक्स करें:-

aerobics

एरोबिक्स करने से आपके दिल और दिमाग को रिफ्रेश करने के साथ आपकी बॉय को भी फिट बनाने में मदद करते है, यदि आप हफ्ते में तीन दिन भी कम से कम आधे घंटे के लिए एरोबिक्स करते हैं, तो थोड़े ही दिनों में आपको खुद ही फ़र्क़ दिखाई देता है, की आपके जांघो की चर्बी कम हो रही है।

सौंफ का प्रयोग करें:-

आधा चम्मच सौंफ को एक कप पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद इसे ठंडा कर लें, नियमित कम से कम तीन माह तक इसका सेवन करें, इससे आपके जांघो पर जमी चर्बी कम होने लग जाएगी, साथ ही आपके शरीर के अन्य हिस्सों पर जमी अतिरिक्त चर्बी को भी कम करने में मदद मिलेगी।

रस्सा कूदे:-

यह सबसे आसान और ऐसा उपचार है जिससे आपको तेजी से अपने अपनी जांघो की चर्बी को कम करने में मदद मिलता है, क्योंकि रस्सा कूदने से एक तो आपके शरीर में पसीना बहुत अधिक आता है, और साथ ही आपकी जांघो की मांसपेशियों में खिंचाव भी उत्त्पन्न होता है जिससे आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

जितना हो सकें पैदल चलें:-

जांघो की चर्बी को कम करने के लिए आप जितना ज्यादा पैदल चल सकते हो, उतना चलें लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का चुनाव करें, क्योंकि जितना आप पैदल चलते है उतनी ही तेजी से आपके जांघो की चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, साथ ही पैदल चलने से आपके हदय को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

इन्हें भी पढ़ें:- कुछ खास घरेलु उपाय जो आपके बढ़े हुए पेट और वजन दोनों को कम कर देंगे

दौड़ लगाएं:-

daud

दौड़ लगाने से न केवल जांघो की बल्कि आपके शरीर पर जमी हर हिस्से की अतिरिक्त चर्बी को तेजी से कम होने में मदद मिलती है, क्योंकि यह आसान एक्सरसाइज होने के साथ आप इसे किसी भी समय दिन में करते है ये आपको फायदा देती है।

ज्यादा तेलीय पदार्थो का सेवन न करें:-

शरीर पर चर्बी जमने का सबसे बड़ा कारण होता है, की आप जंक फ़ूड, ज्यादा तेलीय आहार, ज्यादा मसालेदार आहार का अधिक मात्रा में सेवन करते है, इसीलिए यदि आप अपने जांघो की चर्बी को कम करना चाहते है तो इसके लिए आपको जितना हो सकें ज्यादा तेलीय आहार से परहेज करना चाहिए।

साइकिलिंग करें:-

साइकिलिंग करने से भी आपकी जांघो पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद मिलती है, क्योंकि इससे आपकी पूरी टांग स्ट्रेच होती है, जिससे जांघो पर भी खिंचाव पड़ता है, इसीलिए नियमित कम से कम आधे घंटे साइकिल चलाने से आपको जांघो की चर्बी को तेजी से कम करने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

पानी का भरपूर सेवन करने से भी आपके शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, क्योंकि यह आपके शरीर में से सभी विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर आपको फिट रखने में मदद करती है, साथ ही इससे आपकी त्वचा की नमी बनाएं रखने में मदद मिलती है, और दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने से आपके शरीर की कैलोरी को भी बर्न होने में मदद मिलती है।

सूर्य नमस्कार करें:-

सूर्य नमस्कार एक ऐसा आसन है जिसे यदि आप नियमित कम से कम पंद्रह मिनट के लिए करते हैं तो इसे करने से आपकी टांगो में खिचान होता है, जिससे आपकी जांघो की अतिरिक्त चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, इसके अलावा और भी कई आसन है जिन्हें यदि आप करते है तो आपको जांघो की चर्बी कम करने में मदद मिलती है, जैसे की वीरभद्रासन आदि।

जांघो की चर्बी को कम करने के अन्य उपाय:-

  • निम्बू व् शहद को गुनगुने पानी में डालकर नियमित खाली पेट उसका सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।
  • दिन में पांच से छह गिलास गुनगुने पानी का सेवन करने से आपके शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम होने में मदद मिलती है।
  • ग्रीन टी का सेवन नियमित करने से आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ आपके मेटाबोलिज्म को बेहतर बनाने में फायदा होता है।
  • अपनी नींद को भरपूर लें, दिन में कम से कम आठ घंटे नींद लेना स्वस्थ व्यक्ति के लिए बहुत जरुरी होता है।
  • ज्यादा समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने से या पैदल कम चलने के कारण भी आपकी जांघो पर फैट जमने लगता है, इसीलिए पैदल जरुर चलना चाहिए।
  • व्यायाम और योगासन को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाएं।
  • खान पान में स्वस्थ व् संतुलित चीजो को शामिल करें।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करने से आपको अपने जांघो की चर्बी को कम करने में मदद मिलती है, साथ ही आपको इन तरीको का इस्तेमाल नियमित रूप से करना चाहिए, क्योंकि यदि आप इन्हे नियमित करते है तो ही यह आपके लिए फायदेमंद होते है, इसके अलावा आपको व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग जरूर बनाना चाहिए ताकि आपके स्वास्थ्य के साथ आपको भी फिट रहने में मदद मिल सकें।

इन्हें भी पढ़ें:- खाना छोड़ वजन घटाने की सोच रहे है? तो हो जाएं सावधान

डिलीवरी के डर को कैसे दूर करें

प्रेगनेंसी के नौ महीने महिला बहुत सी परेशानियों का सामना करने के बाद भी बहुत ख़ुशी से निकाल लेती है। लेकिन जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे महिला के मन में डर, घबराहट, तनाव आदि महसूस होने लगता है खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनती है उन्हें ज्यादा दिक्कत होती है।

और इसका कारण होता है महिला के मन में चल रहे अलग अलग सवाल जैसे की महिला की डिलीवरी कैसे होगी नोर्मल होगी या सिजेरियन होगी, प्रसव होने वाला है इस बारे में महिला को कैसे पता चलेगा, दर्द ज्यादा तो नहीं होगा, बच्चे को कोई नुकसान तो नहीं होगा, टाँके लगने का डर भी महिला को होता है, आदि।

लेकिन यदि महिला यह सब सोच सोच कर डरती है, परेशान होती है, तनाव लेती है तो इसके कारण महिला की मुश्किलें कम होने की जगह बढ़ जाती है। ऐसे में महिला को डिलीवरी के समय कोई दिक्कत न हो इसके लिए अपने दिल और दिमाग से डिलीवरी को लेकर होने वाले डर को कम करना चाहिए। और डिलीवरी के डर को महिला को कैसे कम करना चाहिए आइये जानते हैं।

प्रसव की जानकारी इक्कठा करें

डिलीवरी को लेकर मन में होने वाले डर को कम करने के लिए महिला को सबसे पहले प्रसव की जानकारी इक्कठी करनी चाहिए। जैसे की प्रसव के क्या लक्षण होते हैं, प्रसव होने में कितना समय लगता है, डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचने के लिए क्या करें, आदि।

यदि आप इन सभी बातों की सही जानकारी इक्कठी करती है तो इससे डिलीवरी को लेकर मन में होने वाले डर को कम करने में मदद मिलती है। महिला प्रसव से जुडी जानकारी के लिए किताबों, इंटरनेट, घर के बढ़े बुजुर्गों का सहारा ले सकती है।

नेगेटिव बातों पर ध्यान नहीं दें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी दूसरी महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी के एक्सपीरियंस शेयर करती है। कुछ अच्छे होते हैं और कुछ बुरे, लेकिन जो प्रेग्नेंट महिला के दिमाग पर जल्दी असर करते हैं वो बुरे ही होते हैं। और उन्ही बातों को सुनकर डिलीवरी को लेकर महिला के मन में डर बढ़ता है।

ऐसे में इस बात का ध्यान रखें की ऐसा जरुरी नहीं है की जैसा उनके साथ हुआ आपके साथ भी वैसा ही हो। और यही नेगेटिव बातें आपके मन में डर को बढ़ाती है ऐसे में डिलीवरी को लेकर होने वाले डर को कम करने के लिए आपको इन नेगेटिव बातों के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचना चाहिए।

अकेली न रहें

आपने यह तो सुना होगा की खाली दिमाग शैतान का घर होता है, और अकेले रहने से दिमाग में अच्छे विचार कम और बुरे ज्यादा आते हैं। ऐसे में डिलीवरी के डर को कम करने के लिए महिला को बिल्कुल भी अकेले नहीं रहना चाहिए। साथ ही आप परिवार के साथ रहेंगी तो आपको भी अच्छा लगेगा और डिलीवरी के लक्षण महसूस होने पर आपको जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुँचने में भी मदद मिलेगी।

बच्चे को लेकर न डरें

डिलीवरी के समय पास आने पर अधिकतर महिलाएं इस बात को लेकर डरती है तो की कहीं उनके बच्चे को तो कुछ नहीं होगा? यदि आप भी ऐसा सोच रही है तो आप इस बात को अपने दिमाग से निकाल दें, क्योंकि आपके गर्भ में जिस तरह बच्चा सुरक्षित है वैसे ही डिलीवरी के बाद भी शिशु को कोई परेशानी नहीं होगी यदि आप अपना अच्छे से ध्यान रखेंगी।

कोई भी असहज लक्षण के महसूस होने पर डॉक्टर से बात करें

डिलीवरी के डर को को कम करने के लिए डिलीवरी का समय पास आने पर यदि बॉडी में कोई भी असहज लक्षण महसूस हो तो आप तुरंत डॉक्टर से बात करें। इससे आपको हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से महिला के डिलीवरी को लेकर डर को कम करने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपकी डिलीवरी होने वाली है तो इन सभी बातों का ध्यान रखें, और इस बात को मन में बिल्कुल नहीं आने दें की आपकी डिलीवरी में कोई समस्या होगी। साथ ही डिलीवरी आपके अनुसार नहीं होगी इसीलिए इसके बारे में सोच सोच कर अपनी परेशानियों को बिल्कुल भी न बढ़ाएं।

आंवले का सेवन कब और कैसे करना चाहिए प्रेग्नेंट महिला को

गर्भावस्था के दौरान खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि महिला द्वारा लिया गया पोषक तत्वों से भरपूर आहार न केवल गर्भवती महिला बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। तो आज इस आर्टिकल में हम ऐसे ही पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ की बात करने जा रहे हैं। और वो हैं आंवला, आंवले केवल एक फल की तरह नहीं बल्कि एक औषधि की तरह होता है। और गर्भावस्था के दौरान आंवले का सेवन प्रेग्नेंट महिला कर सकती है। क्योंकि यह केवल गर्भवती महिला ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। साथ ही जिन महिलाओं का प्रेगनेंसी के दौरान खट्टा खाने का मन करता है उनकी इच्छा भी आंवले का सेवन करने से पूरी हो जाती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान आंवले के सेवन से जुडी कुछ बातें।

क्यों करना चाहिए प्रेग्नेंट महिला को आंवले का सेवन?

  • विटामिन सी, आयरन, फाइबर, एंटी ऑक्सीडेंट्स व् अन्य पोषक तत्वों से आंवला भरपूर होता है।
  • और गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ शिशु के विकास के लिए इन पोषक तत्वों की बहुत जरुरत होती है।
  • ऐसे में आंवले का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को यह पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने व् शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

कब करना चाहिए प्रेग्नेंट महिला को आंवले का सेवन ?

  • गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दूसरे महीने से ही आंवले का सेवन कर सकती है।
  • बस इसकी मात्रा पर ध्यान देना जरुरी होता है।
  • दिन भर में एक आंवले का सेवन प्रेग्नेंट महिला के लिए सही होता है।
  • और यदि आप आंवले के पाउडर का इस्तेमाल कर रही हैं तो आधा चम्मच आंवले का पाउडर ही खाना चाहिए।
  • साथ ही जूस निकालते समय आप दो आंवले का इस्तेमाल कर सकती है।

प्रेगनेंसी में आंवले का सेवन करने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला यदि आंवले का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला व् भ्रूण को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में आंवले का सेवन करने के क्या फायदे होते हैं।

फाइबर

  • आंवले में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने व् मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद करती है।
  • जिसे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़, अपच, भूख में कमी जैसी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।
  • लेकिन यदि इसका जरुरत से ज्यादा सेवन किया जाये तो फाइबर की मात्रा होने के कारण महिला को दस्त, अपच जैसी परेशानी भी हो सकती है।

आयरन

  • आंवला आयरन व् विटामिन सी से समृद्ध होता है।
  • आयरन जहां बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
  • वहीँ विटामिन सी आयरन को बेहतर तरीके से बॉडी में अवशोषित करने में मदद करता है।
  • जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली खून की कमी व् खून की कमी के कारण होने वाली अन्य परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।

एंटी ऑक्सीडेंट

  • आंवला एंटी ऑक्सीडेंट्स व् विटामिन सी का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है।
  • जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है।
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला व् शिशु को हर संक्रमण से बचाव करने में मदद करता है।
  • साथ ही इससे महिला की ब्रेस्ट में बन रहे दूध में भी प्रतिरोधक क्षमता के गुण विकसित होते हैं।
  • जो जन्म के बाद शिशु को दूध से मिलते है और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में आंवले का सेवन करने से मिलता है कैल्शियम

  • आंवले में कैल्शियम की मात्रा भी मौजूद होती है।
  • जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करके महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या से बचाव करने में मदद करते हैं।
  • साथ ही महिला द्वारा शिशु तक भी कैल्शियम भरपूर मात्रा में पहुंचाया जाता है।
  • जिससे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

एंटी इंफ्लेमेटरी गुण

  • आंवले में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के हाथों पैरों में होने वाली सूजन की समस्या से निजात दिलाने में मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में आंवले का सेवन करने से मिलता है विटामिन सी

  • आंवले में मौजूद विटामिन सी रक्त वाहिकाओं के फैलाव को बढाने में मदद करता है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला के शरीर में ब्लड फ्लो को अच्छे से होने में मदद मिलने के साथ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है।
  • साथ ही आंवले का सेवन करने से ब्लड में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है और बॉडी में ऑक्सीजन के प्रवाह को अच्छे से होने में मदद मिलती है।
  • जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में किस तरह करें आंवले का सेवन

गर्भवती महिला यदि आंवले का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करती है। तो इसे डाइट में किसी एक तरीके से नहीं बल्कि कई तरीके से शामिल किया जा सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला किस तरह से आंवले का सेवन कर सकती है।

  • आंवले को सुखाकर पाउडर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • फलों के रस के साथ आंवले के जूस को मिलाकर भी इसका सेवन किया जा सकता है।
  • घर में आंवले का अचार बनाकर भी इसे खाने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है।
  • आंवले का मुरब्बा बनाकर भी आंवले का सेवन किया जा सकता है और यह प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद भी होता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान आंवले के सेवन से जुड़े टिप्स। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आप आंवले का सेवन करना चाहती है तो बिना किसी डर के आंवले का सेवन सिमित मात्रा में कर सकती हैं। लेकिन ध्यान रखें की आंवले का पैकेट वाला जूस न खरीदें, आंवले को अच्छे से धोने के बाद ही प्रयोग में लाएं। साथ ही आंवले की तासीर ठंडी होती है ऐसे में ठण्ड के मौसम में या सर्दी खांसी की समस्या होने पर इसका सेवन करने से बचें।

प्रेगनेंट महिलायें घर पर कैसे रखे अपने आप को सुरक्षित?

हम सभी इस बात को जानते है के आजकल हमारे आसपास का वातावरण बहुत ही प्रदूषित हो चूका और साथ ही जिस हवा में हम सांस लेते है उसमे बहुत से खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया मिल गए है। जिसके कारण लगभग हर किसी को खांसी, जुकाम और फ्लू बार बार होता ही रहता है।

ऐसे में एक गर्भवती महिला जिसका पहले से ही इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो चूका है, उसे कोई भी फ्लू और बैक्टीरिया आसानी से लगने की सम्भावना बनी रहती है। तो आइये आज हम आपको बताएंगे की गर्भवती महिलायें कैसे रखें घर पर ही अपना ख्याल।

सबसे पहले तो बहुत जरुरी है के गर्भवती महिलायें घर पर ही रहें। जब तब बहुत जरुरी ना हो तब तक घर से बाहर ना जाएँ। अपने हाथों की साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखें। क्योंकि आपके हांथो से ही जर्म्स आपके शरीर में प्रवेश करते है। हर काम करने से पहले हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोये। यदि आप अपने कमरे में भी आराम कर रहे है तो भी कुछ समय के अंतराल पर हाथो को सैनिटाइज़र से क्लीन करते रहें।

हाथों की साफ़ सफाई के बाद ध्यान रखे की जो लोग भी बाहर से आपके घर आ रहें है तुरंत उनसे ना मिले। बाहर से आने के बाद सभी लोगों को हाथों को धोने के लिए कहें। जितना हो सके लोगों से दुरी बना कर रखे। जैसे की आपके घर अगर काम करने के लिए मेड आती है तो उन्हें आते ही हाथ धोने के लिए कहें, जिस जगह वह सफाई करें उस जगह आप ना रुके। बाहर से आये हुए अन्य लोगों के सामने तुरंत ना जाये। यदि हो सके तो अपने कमरे में ही आराम करें।

इसके बाद बात आती है आपके खाने की, जब पूरा वातावरण ही प्रदूषित हो रखा है तो ऐसे में बाजार से आये फल और सब्जियां भी बिना बैक्टीरिया के कैसे बच सकती है। सब्जियों और फलों के बैक्टीरिया को खत्म करने के आप उन्हें तुरंत ना खाये। बैक्टीरिया की यह खासियत है के यदि उसे दूसरे लिविंग ऑर्गैनिस्म का साथ ना मिले तो वह खुद पर खुद ही 12 से 16 घण्टों के बीच खत्म हो जाता है। तो इसके लिए बाजार से लाये हुए फल और सब्जियों को एक स्थान पर रख ले 1 या दो दिन बाद ही इन फलों और सब्जियों का सेवन करे। ऐसा करने से फल और सब्जियों के बैक्टीरिया या उन पर लगे वायरस खत्म हो जायेंगे और आप बेफिक्र होकर उनका सेवन कर सकते है।

इसके आलावा आप कभी भी बाहर जायें तो बाहर से आते ही अपने कपड़े बदले। बाहर पहने हुए कपड़ो को धोने के लिए डाल दे। बाहर जाते समय भी हैंड सैनिटाइज़र अपने साथ रखें किसी भी चीज को छूने से पहले इसका इस्तेमाल करें। और अपने मुँह को मास्क से कवर कर के रखे।

इन सभी चीजों का ध्यान रखने से आप अपनी और अपने शिशु की सेहत को सुरक्षा प्रदान करेगी। यदि फिर भी अगर आपको खांसी, जुकाम या फिर फीवर हो जाए तो बिना देर किये अपने डॉक्टरों से मिलें।

रोटी में घी लगाकर खाना क्यों जरुरी है प्रेगनेंसी में

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जितना महिला हेल्दी चीजों का सेवन करती है उतना ही महिला को फिट रहने गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास होने में मदद मिलती है। जैसे की प्रेग्नेंट महिला को हरी सब्जियों, दालों, फलों, रोटी, चावल आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

और कुछ ऐसी बातें है जिनका ध्यान खाना खाते समय भी रखना चाहिए जैसे की खाना खाने से पहले हाथ धोने चाहिए, खाना खाते समय पानी पीने से बचना चाहिए, रोटी पर घी लगाकर उसका सेवन करना चाहिए, आदि। तो अब हम आगे प्रेगनेंसी में रोटी पर घी लगाकर खाने से प्रेग्नेंट महिला को कौन से फायदे मिलते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

ऊर्जा मिलती है

रोटी और घी दोनों में ही कैलोरीज़ मौजूद होती है और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए अतिरिक्त कैलोरीज़ की जरुरत होती है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि रोटी पर घी लगाकर सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कमजोरी, थकान, बॉडी पेन जैसी परेशानियों से राहत मिलती है।

वजन कण्ट्रोल रहता है

यदि आप ऐसा सोचते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान रोटी पर घी लगाकर खाने से आपका वजन बढ़ जायेगा तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। क्योंकि रोटी पर घी लगाकर खाने से मेटाबोलिज्म बढ़ता है साथ ही यह फैट को एनर्जी में बदल देता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ता नहीं है बल्कि वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र से जुडी परेशानी से मिलता है निजात

रोटी पर घी लगाकर खाने से रोटी को हज़म करने में दिक्कत नहीं होती है जिससे महिला को पाचन तंत्र से जुडी परेशानी जैसे की कब्ज़, अपच आदि से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड शुगर नहीं बढ़ता है

गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल शुगर का खतरा महिला को होता है। लेकिन रोटी पर घी लगकारा खाने से ब्लड में शुगर के लेवल को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है जिससे इस प्रेगनेंसी के दौरान इस परेशानी के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहता है

रोटी पर घी लगाकर खाने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को खत्म करने में मदद मिलती है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रहने में भी मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला का हदय भी स्वस्थ रहता है।

इम्युनिटी बढ़ती है

रोटी पर घी लगाकर खाने से गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

बच्चे का विकास होता है बेहतर

रोटी और घी दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ऐसे में रोटी पर घी लगाकर खाने से यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को मिलते हैं और माँ के शरीर से यह सभी गर्भनाल के माध्यम से बच्चे तक पहुँचते हैं। जिससे गर्भ में बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो गर्भवती महिला और बच्चे को रोटी पर घी लगाकर खाने से मिलते हैं। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी रोटी पर घी लगाकर जरूर खाएं। ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को यह बेहतरीन फायदे मिल सकें। लेकिन ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा घी का सेवन न करें क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान पहुंचा देता है।

Benefits of Eating Ghee on Chapati in Pregnancy

प्रेगनेंसी नहीं पर फिर भी पीरियड लेट क्यों?

पीरियड से जुडी समस्या

पीरियड्स न आने पर महिला के मन में सबसे पहले यही बात आती है की कहीं मैं गर्भवती तो नहीं हो गई? वैसे गर्भावस्था महिला के लिए ख़ुशी की बात होती है लेकिन यदि पीरियड्स मिस होने के बाद महिला जाँच करती है और उसमे नेगेटिव आता है, और महिला को कभी पीरियड्स में देरी की समस्या नहीं हुई है तो महिला और ज्यादा परेशान हो सकती है। क्योंकि यदि महिला गर्भवती नहीं है तो पीरियड्स के लेट होने का क्या कारण हो सकता है? पीरियड्स का दो चार दिन आगे पीछे होना बहुत ही आम बात होती है, लेकिन यदि पीरियड्स एक हफ्ता या दस दिन से ज्यादा लेट हो जाये, और महिला का प्रेगनेंसी किट की जांच भी नेगेटिव आये, तो हो सकता है की पीरियड्स के लेट होने का कोई और कारण हो। ऐसे में पीरियड्स का ज्यादा लेट होना महिला को अनदेखा न करते हुए पीरियड्स मिस होने के सही कारण का पता करना चाहिए।

पीरियड्स लेट होने के कारण

यदि कोई महिला पीरियड्स के लेट होने की समस्या से परेशान होती है तो इसका कारण प्रेगनेंसी ही हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से और भी कारण होते हैं। जिनकी वजह से महिला को पीरियड्स में देरी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की पीरियड्स में देरी होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं।

पीरियड्स की शुरुआत

जिन लड़कियों को अभी अभी पीरियड आना शुरू हुआ है वो लडकियां इस समस्या से परेशान हो सकती है। क्योंकि पीरियड्स की शुरुआत होने के कारण हो सकता है की आपको पीरियड्स समय से पहले आये या फिर मिस हो जाये। ऐसे में परेशान होने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं होती है क्योंकि धीरे धीरे यह अपने आप सही हो जाते हैं।

वजन

जिन महिलाओं का वजन बहुत ज्यादा होता है यानी जो महिलाएं मोटापे की समस्या से ग्रसित होती है। उन महिलाओं को पीरियड्स में देरी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि मोटापे के कारण बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन की समस्या हो सकती है जिनके कारण पीरियड्स पर असर पड़ सकता है। केवल मोटापा ही नहीं बल्कि जिन महिलाओं का वजन बहुत कम होता है उन महिलाओं को भी पीरियड्स से जुडी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को पीरियड्स से जुडी किसी भी तरह की समस्या न हो इसके लिए महिला को अपने वजन को नियंत्रित रखने का प्रयास करना चाहिए।

पोषक तत्वों की कमी

कुछ लडकियां या महिलाएं बढे हुए वजन को कम करने के लिए डाइटिंग शुरू कर देती है, और खाने पीने से परहेज करने लगती है। ऐसा करने से उनके बॉडी में जरुरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, और बॉडी को जरुरी पोषक तत्व न मिलने का असर महिला के पीरियड्स पर भी पड़ सकता है जिसके कारण पीरियड्स मिस होना या लेट होने की समस्या महिला को हो सकती है।

शारीरिक श्रम

कुछ लडकियां व् महिलाएं फिट बॉडी पाने के लिए या जो महिलाएं खिलाड़ी होती है वो अपने स्टेमिना को बढ़ाने के लिए शारीरिक श्रम बहुत अधिक मात्रा में करती है। जिसके कारण एस्ट्रोजन हॉर्मोन्स के लेवल पर असर पड़ता है और महिला को पीरियड्स के मिस होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बिमारी

जो महिलाएं थायरॉइड जैसी बिमारी से ग्रसित होती है, या किसी अन्य बिमारी से ग्रसित होती है और उनसे जुडी दवाइयों का सेवन कर रही होती है। उन महिलाओं को भी पीरियड्स में देरी या पीरियड्स के मिस होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और जैसे ही महिला दवाइयों का सेवन बंद कर देती है और महिला रिकवर होने लगती है वैसे वैसे पीरियड्स से जुडी समस्या से राहत पाने में भी महिला को मदद मिलती है।

गर्भनिरोधक गोलियां

शादी के बाद बहुत सी महिलाएं गर्भधारण से बचने के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है। और गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है। और बॉडी में होने वाले हार्मोनल असंतुलन के कारण महिला के पीरियड्स पर बुरा असर पड़ सकता है जिसके कारण महिला को पीरियड्स में देरी की समस्या या पीरियड्स मिस होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तनाव

जो महिलाएं मानसिक रूप से परेशान रहती है, तो ऐसे में उन महिलाओं की बॉडी में तनाव के कारण हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है। और बॉडी में होने वाले हार्मोनल इम्बैलेंस के कारण पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं। जिसके कारण महिला को पीरियड्स के लेट होने या पीरियड्स में देरी होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

स्तनपान

जिन महिलाओं की अभी डिलीवरी हुई है और वो अपने शिशु को स्तनपान करवाती है। उन महिलाओं को डिलीवरी के बाद आये पीरियड्स के बाद दोबारा पीरियड्स आने में समय लग सकता है। क्योंकि स्तनपान करवाने की वजह से भी महिलाओं को पीरियड्स के मिस होने जैसी समस्या हो सकती है।

रूटीन में बदलाव

ट्रैवेलिंग अधिक करने के कारण, खान पान, नींद, आदि में लापरवाही करने के कारण या फिर किसी कारण महिला की दिनचर्या में अचानक से बदलाव आ जाये तो इसका असर भी माहवारी पर पड़ सकता है। जिसके कारण महिला को पीरियड्स के लेट आने या पीरियड्स के मिस होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

नशा

जो महिलाएं किसी भी तरह का नशा जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल का सेवन अधिक मात्रा में करती है तो इसके कारण भी महिला के पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं। जिसके कारण महिला को पीरियड्स के लेट होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को पीरियड्स में देरी या पीरियड्स के मिस होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इन सभी टिप्स का ध्यान रखना चाहिए और ऐसे किसी भी काम को करने से बचना चाहिए जिसके कारण महिला को पीरियड्स लेट होने या मिस होने की समस्या से परेशान होना पड़े।

गर्मी में होने वाले फोड़े-फुंसी का इलाज

Fode Funsi Ke Ghrelu Upchar : मौसम परिवर्तन होने के साथ ही शरीर और स्वास्थ्य में कई तरह की परेशानियां होने लगती है, कभी स्वास्थ्य की तो कभी त्वचा की। लेकिन सबसे अधिक समस्या गर्मियों के मौसम के दौरान ही आती है। डिहाइड्रेशन से लेकर चक्कर आने तक कई परेशानियां इसी मौसम में देखने को मिलती है। जिसका मुख्य कारण सूर्य की तेज किरणें और बढती गर्मी होती है।

लेकिन इसके अतिरिक्त भी एक परेशानी है तो सबसे अधिक गर्मियों के मौसम में ही पनपती है। जी हां, हम त्वचा संबंधी समस्यायों के बारे में बात कर रहे है। जिनमे सबसे अधिक परेशान करने वाले त्वचा के फोड़े-फुंसी होते है। गर्मियों में होने वाले फोड़े-फुंसी स्किन पर रैशेस और अन्य समस्यायों का भी कारण बनते है। जो गर्मी के दौरान निकलने वाले पसीने में पनप रहे बैक्टीरिया और विषाणुओं के कारण होते है।

गर्मियों के दिनों में पसीना आना सामान्य है लेकिन अगर उस पसीने की ठीक तरह से सफाई न की जाए तो यह बैक्टीरिया स्किन के रोमछिद्रों में जाकर फोड़े-फुंसी का रूप ले लेते है। गमियों में होने वाले फोड़े-फुंसी में दर्द के साथ-साथ काफी खुजली और जलन भी होती है। जो किसी के लिए भी असहनीय हो सकती है। यह केवल फेस पर ही नहीं अपितु, पीठ, कमर, जांघ, सर और नितंबो पर भी हो जाती है।

फोड़े-फुंसी का होना :-

वास्तव में यह एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है जो विशेष प्रकार के बैक्टीरिया के पनपने से होता है। ये बैक्टीरिया स्किन में घुस कर कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने लगते है और साथ ही स्किन में छोटे लाल दानों के रूप में उभरने लगते है। पहले यह दाना काफी छोटा होता है लेकिन समय के साथ यह बढ़ने लगता है और इसमें पस भी पड़ने लगता है। जिसमे काफी दर्द होता है।त्वचा में खुजली है? ऐसे दूर करें

अगर आपके साथ भी गर्मियों में अक्सर यह परेशानी होती है परेशान न हो क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे आसान और प्रभावी घरेलू उपायों के बारे में बता रहे है जिनकी मदद से कुछ ही समय में इन फोड़े-फुंसियों से निजात पाई जा सकती है।

गर्मी में फोड़े-फुंसी होने के क्या-क्या कारण होते है?

फोड़े फुंसी होने का सबसे बड़ा कारण गर्मियों में निकलने वाला पसीना होता है। जिसमे बैक्टीरिया पनपते है और कुछ समय बाद यही बैक्टीरिया स्किन की सतह के भीतर जाकर फोड़े-फुंसी का रूप ले लेते है। इसके अलावा और भी कई कारण है जिनकी वजह से गर्मियों में फोड़े और फुंसी होने लगते है –

  • रक्त में खराबी या संक्रमण होने के कारण।
  • गर्मियों के मौसम में आम का अधिक सेवन करने से।
  • मच्छर काटने के बाद।
  • बालों की जड़ों में या स्कैल्प में किसी संक्रमण के कारण।
  • गर्मियों में मिलने वाली कच्ची आमियों के अधिक सेवन से।
  • अधिक मिर्च मसालों का सेवन करने से।
  • प्रदूषित वातावरण से।
  • कई बार कुछ बीमारियों में खाई जाने वाली दवाओं के कारण भी त्वचा में दाने होने लगती है।
  • बालतोड़ के कारण।
  • स्किन को जोर से रगड़ने के कारण।

फोड़े-फुंसी के घरेलू उपाय :-

1. लहसुन :

आधा चम्मच लहसुन के रस में 2 चम्मच वैसलीन मिलाएं। और इस मिश्रण को फुंसी पर लगाएं। फुंसी बैठ जाएगी।

2. गाय का घी :

इसके लिए एक कांसे के बर्तन में लहसुन का रस, गाय का घी और पानी डालकर अच्छे से मिला लें। अब रोजाना इसे फोड़े पर लगाते रहें। कुछ ही समय से फोड़ा ठीक हो जाएगा।

3. काली मिर्च :

इस उपाय के लिए काली मिर्च के दानों को बारीक़ पीस लें। अब उसमे थोडा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को फोड़े पर लगाएं। कुछ ही दिनों के लगातार प्रयोग से समस्या पूरी तरह ठीक ही जाएगी।

4. प्याज़ :

आप इसका इस्तेमाल 2 तरह से कर सकते है। पहला प्याज़ को बारीक काटकर पीस लें और फिर उसे फोड़े पर लगाएं। 4-5 दिनों तक इस उपाय का इस्तेमाल करने से फोड़े फुंसी होना कम हो जाएगा। और दूसरा प्याज को काटकर उसका टुकड़ा फुंसी पर रख दें। और किसी कपडे या मेडिकल टेप से बांध दे। ऐसा करने से प्याज का रस और उसका अर्क दोनों फुंसियों को ठीक करने में मदद करेंगे। और फुंसी जल्द ठीक होगी।

5. नींबू का रस :LEMON JUICE

नींबू के रस का इस्तेमाल आप कई तरह से फुंसियों के उपचार के लिए कर सकते है।

  • एक करेले के रस में 1 चम्मच नींबू का रस मिलाकर रोजाना इसका सेवन करें। शरीर से सभी विषाणु बाहर आ जाएँगे और रक्त शुद्ध हो जाएगा जिससे फोड़े फुंसी नहीं होंगे।
  • नींबू के रस में अजवाइन को पीसकर लेप बना लें और उसे फुंसी पर लगायें। इससे सुजन कम करने में मदद मिलेगी।
  • नींबू, नीम और बबूल की पत्तियों को कडाही में जलाकर चूर्ण बना लें। फिर मीठे तेल में मिलाकर फोड़े-फुंसी पर लगाएं। फायदा होगा।
6. मुल्तानी मिट्टी :

गर्मियों में मुल्तानी मिट्टी स्किन के लिए बहुत लाभकारी होती है। इसकी ठंडक स्किन की इरीटेशन और जलन को कम करके फुंसी को छोटा बनाने में मदद करती है। इसके लिए एक चम्मच चंदन, एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी, एक चम्मच चोकर और नींबू के रस की कुछ बुँदे डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। और इसे अपने फेस पर लगायें। रोजाना सुबह शाम इसका प्रयोग करने से सभी फुंसियां ठीक हो जाएंगी।

7. तुलसी :

तुलसी के फूल, बीज, पत्ते, छाल और जड़ों को पीसकर महीन चूर्ण बना लें। अब इसमें थोडा सा नींबू का रस मिलाएं। और संक्रमित हिसे पर लगायें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से फुंसियां और उनके दाग दोनों दूर हो जाएंगे।

8. नीम :face pack

स्किन संबंधी समस्यायों के लिए इसका इस्तेमाल भी कई तरीको से किया जा सकता है।

  • नीम के साबुन और नीम के तेल का इस्तेमाल करने से फोड़े फुंसी होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। क्योंकि ये स्किन पर मौजूद सभी बैक्टीरिया को समाप्त करने में सक्षम होते है।
  • इसके लिए नीम की छाल या उसकी पत्तियों को तेल में पीसकर लगाने से फोड़े-फुंसी ठीक हो जाती है।
  • नीम की पत्तियों को पीसकर घी में गर्म करके लेप बनाएं और इसका इस्तेमाल त्वचा पर करें।
  • इसके अलावा नीम के पानी से संक्रमित हिस्से को बार बार धोने से भी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
9. सरसों का तेल और तारपीन : 

फोड़े व् फुंसी के इलाज के लिए इनका इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके लिए सरसों के तेल में थोडा सा तारपीन का तेल मिला लें। अच्छे से मिलाकर इसका इस्तेमाल प्रभावित हिस्से पर करें। फोड़े फुंसी ठीक हो जाएँगे।

10. अमरुद :

अमरुद की तीन से चार पत्तियों को पानी में अच्छे से उबाल लें। और पीस लें। अब इस पेस्ट को फोड़े पर लगायें। कुछ दिनों तक नियमित इस उपाय का इस्तेमाल करते रहे समस्या ठीक हो जाएगी।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से गर्मियों में होने वाले फोड़े-फुंसी की समस्या को ठीक किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे, नींबू वाले उपाय सेंसिटिव स्किन वाले इस्तेमाल नहीं करें। अगर आपको करना ही है तो उसमे थोडा पानी मिलाकर पहले नींबू का रस पतला कर लें और उसके बाद ही उपाय का प्रयोग करें।


गर्मी में होने वाले फोड़े-फुंसी का इलाज, फोड़े फुंसी के घरेलू उपाय, गर्मियों में होने वाले दाने ठीक करने के उपाय, फोड़े-फुंसी का घरेलू उपचार, funsi on hips, sir me funsi ka ilaj, phoda phunsi medicine, fode funsi ka ilaj in hindi, fode funsi ka gharelu ilaj in hindi, fungsi ka desi ilaj, फुंसी का इलाज, सिर में फुंसी का इलाज

प्रेगनेंसी में लीची का सेवन करना चाहिए या नहीं

सब्जियों व् फलों का सेवन गर्भावस्था के दौरान जरूर करना चाहिए क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। जो गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। लेकिन केवल उन्ही फलों व् सब्जियों का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए जिसे खाने से गर्भवती महिला व् शिशु को पोषण मिलें न की किसी तरह का नुकसान हो। इसीलिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में किसी भी चीज का सेवन करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान लीची का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को लीची का सेवन करना चाहिए या नहीं?

लीची स्वाद में मीठी होने के साथ रसदार होती है जिसका स्वाद गर्भवती महिला को बहुत पसंद आ सकता है। साथ ही लीची में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं जैसे की विटामिन सी, मैग्नीशियम, एंटी ऑक्सीडेंट्स आदि। जो की गर्भवती महिला व् गर्भ में शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। लेकिन लीची का सेवन करने से पहले अच्छे से देख लेना चाहिए की लीची खराब तो नहीं है, लीची के स्वाद में कोई गड़बड़ तो नहीं है, आदि। साथ ही लीची का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। ऐसे में कभी आपकी इच्छा हो तो स्वाद के लिए दो तीन लीची का सेवन किया जा सकता है।

गर्भावस्था में लीची खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि लीची का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में लीची खाने के क्या फायदे हैं।

विटामिन सी

लीची में विटामिन सी की मात्रा मौजूद होती है जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है। जो गर्भवती महिला की प्रतरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को हर प्रकार के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

खून की कमी पूरी होती है

विटामिन सी और आयरन दोनों की मात्रा लीची में मौजूद होती है। और विटामिन सी बॉडी के सभी पार्ट्स में ब्लड को अवशोषित होने में मदद करता है जिससे गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

फाइबर

लीची में फाइबर की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़ व् अन्य पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

मैग्नीशियम

लीची में मैग्नीशियम भी होता है जो गर्भवती महिला ही हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के विकास में भी मदद करता है।

किन गर्भवती महिलाओं को लीची का सेवन नहीं करना चाहिए?

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को लीची का सेवन करने से किसी भी तरह की एलर्जी होती है तो महिला को लीची का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • शुगर से पीड़ित महिला को लीची का सेवन नहीं करना चाहिए साथ ही लीची का सेवन जरुरत से ज्यादा भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गेस्टेशनल शुगर की समस्या हो सकती है।
  • यदि गर्भवती महिला को नकसीर निकलती है तो भी लीची का सेवन करने से गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी में लीची का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी में लीची का सेवन करते समय इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको या आपके बच्चे को लीची का सेवन करने से किसी भी तरह की परेशानी न हो। साथ ही लीची को अच्छे से चेक करने के बाद ही खाना चाहिए।

पीरियड्स के समय में कमर दर्द होने के क्या कारण होते है?

Back Pain During Periods

पीरियड्स के समय में कमर दर्द होने के क्या कारण होते है, Back pain during periods, मासिक धर्म में कमर दर्द, पीरियड्स के दौरान कमर में तेज दर्द होने के कारण

पीरियड्स महिलाओं को हर महीने होने वाली एक आम समस्या है। जिसके दौरान महिलाओं को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अधिकतर महिलायें यही कहती है “ये पीरियड्स आते ही क्यों है”? लेकिन यह बात भी सच है की इनका होना भी उतना ही जरुरी है जितना की खाना खाना। क्योंकि अगर पीरियड्स नहीं होंगे तो आपके शरीर से गंदगी बाहर नहीं निकलेगी और अगर गंदगी बाहर नहीं निकलेगी तो वह अंदर ही अंदर आपको बीमार कर देगी।

वैसे देखा जाए तो वाकई ये दिन किसी भी महिला के लिए बेहद पीड़ादायक होते है। क्योंकि पेट दर्द, शरीर में ऐंठन, थकान, कमर में दर्द आदि की समस्या इन दिनों ही सबसे अधिक होती है। बाकी चीजों को तो फिर भी बर्दाश्त किया जा सकता है लेकिन कमर और पेट दर्द के चलते महिलाएं अक्सर पेट पर पड़े रहने पर मजबूर हो जाती है।

इस दौरान पेट में दर्द होना तो स्वाभाविक है क्योंकि इस समस्या का संबंध गर्भाशय से होता है। लेकिन क्या आपने कभी अपने कमर दर्द के बारे में सोचा है? बाकि दर्द तो ठीक है लेकिन कमर में दर्द होता क्यों है? इसके पीछे क्या वजह है?

दरअसल, पीरियड्स के दौरान बॉडी में बहुत से चेंजस आते है जिनके चलते अलग अलग वजहों से कमर में दर्द होता है। यहाँ हम आपको उन्ही कारणों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने जा रहे है। ताकि आप भी समझ पाएं की पीरियड्स के समय पेट के साथ साथ कमर में दर्द आखिर होता क्यों है?back-pain

पीरियड्स के समय कमर में दर्द होने के ये कारण हो सकते है :-

महिलाओं में हर महीने पीरियड्स आना एक सामान्य प्रक्रिया है। इस दौरान हल्का फुल्का दर्द होना स्वाभाविक है लेकिन अगर दर्द कुछ ज्यादा ही हो रहा है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते है जैसे –

ये है वजह :

महिलाओं के गर्भाशय के आंतरिक भाग को एंडोमेट्रियम कहा जाता है। यदि पीरियड्स के दौरान इसका कुछ हिस्सा ओवरी या फेलोपियन ट्यूब तक पहुंच जाता है तो इसकी वजह से भी कमर में तेज दर्द होने लगता है।

इसके कारण भी होता है कमर दर्द :

एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की आंतरिक सतह) में प्रत्येक महीने बहुत से बदलाव एते है और माहवारी के रूप में इसका कुछ हिस्सा रक्तस्राव के साथ निकल जाता है। एंडोमेट्रियम जैसी सतह जब गर्भाशय के अलावा अन्य अंगों (ओवरी, फ़ेलोपियन ट्यूब, आंतों आदि) में विकसित हो जाती है, तो यह अवस्था एंडोमेट्रीओसिस कहलाती है। क्योंकि एंडोमेट्रियम की प्रवृति संकुचन की होती है इसीलिए इन अंगों में भी ऐसा होने लगता है जिससे कमर दर्द की समस्या होती है।

कब्ज :

अगर किसी महिला को कब्ज की परेशानी है तो भी पीरियड्स के दौरान उन्हें कमर में तेज दर्द हो सकता है। इसके लिए आप सबसे पहले अपनी कब्ज की समस्या को दूर करें क्योकि उसके ठीक होते है आपकी सभी समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।

ठंडा-गर्म :

मासिक धर्म के दौरान बहुत अधिक ठंडी और गर्म चीजों का सेवन करने से भी कमार में दर्द हो सकता है, इसीलिए इस दौरान हलके फुल्के भोजन और कम गर्म और ठंडी चीजों का सेवन करें।

कमजोरी :

खून की कमी या शरीर में कमजोरी भी इस समस्या का कारण हो सकती है। यानी अगर किसी महिला के शरीर में खून की कमी है तो इस दौरान उनके कमर में दर्द होगा।

रक्तस्राव :

महिला के शरीर में नया खून बनने में 13 से 14 दिनों का समय लगता है ऐसे में यदि मासिक धर्म के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होगी तो यह कमर दर्द का कारण बन सकती है।

स्मोकिंग :

अगर आपको धूम्रपान करने की गलत आदत है तो आपके पीरियड्स और भी ज्यादा दर्दनाक बन सकते है। क्योंकि जो लोग बहुत ज्यादा धूम्रपान करते है उन्हें अक्सर कमर दर्द की शिकायत रहती है।

जेनेटिक समस्या :

अगर आपके परिवार की किसी महिला को तेज दर्द ककी शिकायत रहती है तो उनके बच्चों में भी यह होना आम बात है। क्योंकि बच्चों के शरीर में मौजूद जीन्स उन्ही के दिए हुए है जिसके साथ उनके दर्द और फायदे दोनों ही बच्चे को मिलते है।

ओवरी में इन्फेक्शन :

यदि आपके गर्भाशय में किसी भी तरह का इन्फेक्शन है तो यह भी आपके कमर में दर्द का एक कारण हो सकता है।

डाइट :

जो महिलाएं सही और हेल्थी डाइट नहीं लेती है उन्हें भी पीरियड्स के दौरान कमर में दर्द की शिकायत रहती है। इसीलिए हमेशा स्वस्थ और हेल्थी डाइट लें।

यह है इलाज :-period

प्रारंभ में आप किसी दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल कर सकती है लेकिन तेज दर्द होने पर कुछ विशेष इंजेक्शन या टेबलेट दी जा सकती है। जिन्हे केवल डॉक्टरी सलाह से ही लगवाना चाहिए। इनके प्रभाव से कुछ महीनों के लिए माहवारी कृत्रिम रूप से बंद हो जाती है। माहवारी न होने से न ही एंडोमेट्रियम का संकुचन होता है और न ही दर्द होता है।

विशेषज्ञों की राय :

माहवारी के दौरान थोड़ा दर्द होना सामान्य है। लेकिन जब दर्द सहन करने योग्य न हो तो इसकी अनदेखी न करें और तुरंत विशेषज्ञ से उचित इलाज करवायें।