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10 हरकतें जो गर्भ में शिशु करता है लेकिन आपको वो पता भी नहीं चलती

माँ बनना हर महिला की जिंदगी का एक अनमोल अहसास होता है। और जैसे ही महिला को पता चलता है की वो माँ बनने वाली है और उसके गर्भ में एक नन्ही जान पल रही है। तभी से महिला अपना और ज्यादा ध्यान रखना शुरू कर देती है। अभी गर्भ में शिशु की हलचल भी शुरू नहीं होती है लेकिन महिला अपने बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ जाती है। और महिला को मातृत्व का अहसास होने लगता है। फिर उसके बाद जब गर्भ में शिशु की पहली बार हलचल महिला को महसूस होती है।

तो महिला और भी ज्यादा उत्सुक हो जाती है और पूरा दिन गर्भ में नन्हा शिशु जब जब हलचल करता है तब तब उस लम्हे को एन्जॉय करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं की गर्भ में शिशु हलचल करने के साथ और भी ऐसी हरकतें करता है जिसे महिला न तो देख सकती है न ही महसूस करती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम गर्भ में शिशु द्वारा की जाने वाली ऐसी ही हरकतों के बारे में बताने जा रहे हैं।

हिचकी: गर्भ में शिशु का जैसे जैसे विकास बढ़ता है वैसे ही गर्भ में शिशु अलग अलग हरकतें करता है जैसे की आपका शिशु गर्भ में हिचकी लेता है।

अंगड़ाई: घूमने के बाद जब गर्भ में शिशु थक जाता है और सुस्ती महसूस करता है तब आपका शिशु गर्भ में अंगड़ाई भी लेता है।

अंगूठा चूसता है: आपने कई बच्चों को देखा होगा जिनमे जन्म के बाद अंगूठा चूसने की आदत होती है लेकिन कई बच्चे जन्म के बाद नहीं बल्कि माँ के पेट जब होते हैं तब भी अंगूठा चूसते हैं।

उल्टा सीधा होना: यदि आप ऐसा सोचती है की गर्भ में शिशु केवल ही जगह पर रहता है और केवल वहीँ पर मूवमेंट करता है। तो ऐसा बिल्कुल नहीं हैं बल्कि आपके गर्भ में पल रहा शिशु गर्भ में अपनी पोजीशन बदल सकता है। और वो उल्टा सीधा होकर गर्भ में घूमता रहता है।

आराम भी करता है: ऐसा नहीं है की गर्भ में शिशु सोता नहीं है बल्कि जब घूमने के बाद शिशु थक जाता है तो माँ के पेट में शिशु शांति से आराम भी करता है।

चौंक जाता है: जैसे जैसे शिशु की सुनने की क्षमता में वृद्धि होती है तो शिशु बाहर की आवाज़ों को महसूस करता है। और यदि आपके आस पास बहुत तेज आवाज़ होती है तो उसे सुनकर गर्भ में शिशु चौंक जाता है। जिसके कारण कुछ शिशु गर्भ में हलचल भी अधिक करने लगते हैं।

आँखे घूमाना: माँ के गर्भ में ही शिशु चेहरे के हाव भाव के बारे में सीख लेता है और शिशु गर्भ में अपनी आँखों को झपकाना, आँखों को घूमाना जैसी गतिविधियां भी गर्भ में करने लगता है।

हँसते और रोते हैं बच्चे: आपको यह जानकर हैरानी होगी की गर्भ में बच्चा हँसता भी है और रोता भी है। यदि महिला खुश होती है तो बच्चा भी खुश होता है। यदि आप परेशान होती है तो आपका बच्चा भी परेशान होता है।

स्वाद का अनुभव: माँ के गर्भ में बच्चा स्वाद का अनुभव भी करता है। यानि महिला जो भी खाती है उसका स्वाद केवल महिला ही नहीं लेती है बल्कि जब वह स्वाद एमनियोटिक फ्लूड से बच्चे तक पहुँचता है तो बच्चा भी उसका स्वाद उठाता है।

हाथ पैर मारना: बच्चे जा माँ के पेट में होता है तो बच्चा अपने हाथों पैरों को अच्छे से खोल सकता है और उन्हें तेजी से इधर उधर मारता भी है। और बच्चा जब इधर उधर तेजी से हाथ पैर मारता है। तभी गर्भ में शिशु की हलचल महिला को महसूस होती है।

तो यह हैं वो हरकतें जो गर्भ में शिशु करता है लेकिन महिला इन्हे देख नहीं सकती है। लेकिन जब आप अल्ट्रासॉउन्ड करवाने जाती है तो डॉक्टर आपको स्कैनर की मदद से यह बता देती है की आपका बच्चा गर्भ में क्या कर रहा है।

आयुर्वेद में हल्दी का क्या महत्व है

आयुर्वेद में हल्दी का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि यह औषधीय गुणों से भरपूर होती है। साथ ही हल्दी का इस्तेमाल करने से न केवल आपके खाने का जायका बढ़ता है बल्कि इसका इस्तेमाल बीमारियों के इलाज के लिए, चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए, किसी भी शुभ काम की शुरुआत के लिए, घाव, चोट आदि के इलाज के लिए भी किया जाता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको आयुर्वेद के अनुसार हल्दी के क्या फायदे होते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

लिवर को सही रखता है

हल्दी एक प्राकृतिक डेटोक्सिफायर का काम करती है ऐसे में हल्दी का सेवन करने से खून व् शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। और बॉडी में ब्लड फ्लो को भी बेहतर होने में मदद मिलती है जिससे लिवर को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

शुगर का इलाज

शुगर की बिमारी के लिए भी हल्दी का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि हल्दी का सेवन करने से ब्लड में शुगर के लेवल को मेन्टेन रखने में मदद मिलती है। शुगर की दवाइयों को बनाने के लिए भी हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

हल्दी का पर्याप्त सेवन करने से बॉडी में कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने की समस्या से बचे रहने में मदद में मदद मिलती है। जिससे हदय सम्बंधित परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैंसर से बचाव

आयुर्वेद के अनुसार हल्दी का सेवन करने से बॉडी में कैंसर की कोशिकाओं का विकास रोकने में मदद मिलती है। जिससे कैंसर जैसी बिमारी से आपको सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

एंटी बैक्टेरियल, एंटी फंगल, एंटी वायरल गुणों से भरपूर हल्दी का सेवन करने से इम्युनिटी को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जिससे फ्लू, हर तरह के संक्रमण, कफ, खांसी, जुखाम, गले में इन्फेक्शन, गले में खराश, आदि से बचे रहने में मदद मिलती है। इसीलिए आयुर्वेद में रोजाना हल्दी दूध पीने की सलाह भी दी जाती है।

वजन

हल्दी का सेवन करने से मोटापा, वजन बढ़ने जैसी परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है। क्योंकि हल्दी आपके आहार में और आपकी बॉडी में मौजूद वसा को तोड़ने का काम करती है जिससे आपके वजन को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है।

घाव, चोट आदि के लिए

यदि आपको कोई चोट लगने के कारण घाव हो गया है तो हल्दी में पानी मिलाकर लेप बनाकर लगाने से आपको घाव को भरने में मदद मिलती है। साथ ही चोट लगने पर यदि आपको खून आ रहा है तो आपको उस जगह पर हल्दी लगाने से तुरंत ही खून के प्रवाह को रोकने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र होता है मजबूत

हल्दी का सेवन करने से पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलती है। साथ ही हल्दी का सेवन करने से पेट सम्बन्धी परेशानियों से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

सूजन कम करता है

हल्दी में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं जो सूजन की समस्या से बचाव करने में मदद करते हैं। ऐसे में आपको कहीं भी सूजन की समस्या हो तो हल्दी में पानी मिलाकर पतला लेप बनाएं और उस जगह पर लगाएं ऐसा करने से आपको सूजन की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

गठिया

जो लोग गठिया की समस्या से पीड़ित होते हैं उन लोगो को हल्दी का इस्तेमाल करने से इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

अल्ज़ाइमर के लिए

अल्ज़ाइमर मस्तिष्क से सम्बंधित परेशानी होती है जिसमे व्यक्ति की यादाश्त कमजोर होने लगती है, भूलने की समस्या होती है, और एक उम्र के बाद अधिकतर लोग इस समस्या से परेशान हो सकते हैं। लेकिन हल्दी को अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में शामिल करने से इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

तनाव दूर करता है

हल्दी में एंटी एंग्जायटी गुण मौजूद होते हैं जो आपको तनाव जैसी परेशानी से बचाने में मदद करते हैं। ऐसे में आप भी यदि तनाव से परेशान हैं तो आप भी हल्दी का सेवन कर सकते हैं।

स्किन सम्बन्धी परेशानी दूर होती है

सेहत सम्बन्धी परेशानियों के साथ त्वचा से सम्बंधित परेशानियों के लिए भी हल्दी का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है और उन परेशानियों से निजात भी मिलता है।

पीरियड्स में होने वाली परेशानी से राहत

यदि किसी महिला को पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द, ऐंठन आदि की परेशानी अधिक रहती है तो उन महिलाओं को भी हल्दी का इस्तेमाल करना चाहिए। और इसके लिए महिला को हल्दी दूध पीना चाहिए ऐसा करने से महिला को पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

ख़ूबसूरती बढ़ती है

हल्दी का इस्तेमाल केवल ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए ही नहीं किया जाता है बल्कि हल्दी का इस्तेमाल करने से ख़ूबसूरती को बढ़ाने में भी मदद मिलती है क्योंकि यह स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होती है। जैसे की आप हल्दी, बेसन, गुलाबजल का लेप बनाकर अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद इसे अपने चेहरे से साफ कर दें आपको इसका असर अपने आप ही दिखाई देगा।

बालों के लिए है फायदेमंद

स्किन के साथ बालों के लिए भी हल्दी का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है हल्दी का इस्तेमाल करने से बालों से डैंड्रफ, सिर की त्वचा में खुजली जैसी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो हल्दी से होते हैं, ऐसे में आप भी इन फायदों के लिए हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा आपको अपने आहार में तो हल्दी का रोजाना सेवन करना चाहिए।

खीरा खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐसे आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो की महिला को फिट रखने में फायदेमंद हो, क्योंकि यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्वस्थ रहती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। तो लीजिये आज हम आपको खीरे का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान कौन कौन से फायदे मिलते हैं इसके बारे में बताने जा रहें हैं। क्योंकि खीरे में भी बहुत अधिक मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते है।

इम्युनिटी बढ़ाता है

प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए गर्भवती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत होना बहुत जरुरी होता है। और खीरे का सेवन करने से इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।

मूड रखता है बेहतर

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला के मूड और व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिलता है, और खीरे में विटामिन बी होता है जो मस्तिष्क को आराम पहुंचाने में मदद करता हैं और मूड को फ्रेश रखता है।

कब्ज़ से राहत

खीरे में फाइबर की मात्रा भी भरपूर होती है, जो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़ की समस्या से महिला को आराम पहुंचाने में मदद करती है।

सूजन से आराम

पैरों में सूजन का होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है, खासकर तीसरी तिमाही में महिला की यह परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में खीरे का सेवन करने से महिला को इस समस्या से राहत मिलती है और साथ ही यदि सुनाज की समस्या अधिक हो तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

गेस्टेशनल डाइबिटीज़ से बचाव

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का खतरा रहता है। ऐसे में खीरे का सेवन करने से ब्लड में ग्लूकोस की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या से बचा जा सकता है।

डिहाइड्रेशन से निजात

खीरे में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की समस्या से बचाव करने में मदद करता है। और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता, साथ ही पानी की मात्रा पूरी होने से बॉडी से विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

वजन रखता है नियंत्रित

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है। लेकिन बॉडी पर एक्स्ट्रा चर्बी का जमाव महिला और शिशु दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में खीरे का सेवन करने से महिला के वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है।

विटामिन के होता है

विटामिन के हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। और खीरे में यह भरपूर मात्रा में होता है, साथ ही विटामिन बी, आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी इसमें होते हैं जो दिल और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

स्किन के लिए होता है बेहतर

खीरे का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान स्किन में कोलेजन को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे स्किन में खिंचाव आने के कारण होने वाली स्किन से जुडी परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

गर्भ में शिशु का होता है बेहतर विकास

खीरे में विटामिन सी, बी 1, बी 2, बी 3, फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते है। जो न केवल गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करते है, बल्कि उसे जन्म के समय होने वाली परेशानियों से भी सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान खीरे का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। लेकिन जरुरत से ज्यादा भी खीरे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भवती महिला को बार बार यूरिन पास करने की समस्या, गैस, पेट में ऐंठन, एलर्जी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

Hindi Video : Cucumber Benefits During Pregnancy

Pregnancy me khira khana

मुलायम रोटी बनाने के तरीके जानिए ?

इंसान जीवन यापन करने लिए तीन चीज़ो पर निर्भर है – रोटी कपडा और मकान। अगर हम बात करें तो रोटी हमारी पहली जरूरत है। हर कोई २ वक़्त की रोटी के लिए क्या कुछ नहीं करता। सारे दिन व्यक्ति काम करके शाम को जब खाना खाने के लिए बैठे और उस वक़्त रोटी देखने में ही सुंदर या अच्छी न दिखे तो पहले ही काम खाना खाया जाता है।

अक्सर महिलाओं को ये बात सुननी पड़ जाती है की तुम अच्छी रोटी नहीं बनाती, और खाने से पहले ही भूख मर जाती है। तो महिलाएं ऐसे में क्या करें की रोटी भी सुंदर हो और देखने पर भी खाने का मन करें। पर अक्सर महिलाओं को ये परेशानी होती है की या तो जल्दी के चक्कर में  रोटी नहीं फूलती या फिर आटा ही अच्छा नहीं है।  इसलिए रोटी अच्छी नहीं बनती।

रोटी अगर गोल, सुन्दर, और एक दम फूली हुई हो तो भूख बढ़ जाती हैं। रोटी बनाने वाली महिला को भी रोटी बनाते हुए अच्छा लगे और खाने वाले की भी भूख बढ़ जाये। और खाने वाला भी खाने से संतुष्ट हो जाये।

तो आइए जानते है की नर्म और गोल सुन्दर फूली हुई रोटी कैसे बनाई जाये?

आटे को हमेशा छान कर इस्तेमाल करें। क्यूंकि दरदरे आटे की रोटी मुलायम नहीं बनती।

आटे को गूंधते समय हमेशा पानी और आटे की मात्रा को बराबर रखना चाहिए।

आटा सही गूँधा है, यह जानने के लिए आटे पर एक ऊँगली से दबा कर देखें। यदि आटा आसानी से दब जाये तो आटा सही से गूँधा है।

जिस समय आटे को गूंध रहे हो उस टाइम थोड़ी देर के लिए आटे को पानी के साथ ही रख दें। और फिर उसके बाद आटे को अच्छी तरह से मसल कर आटा गूँधे। ऐसा करने से भी रोटी मुलायम बनती हैं।

आटे को गूंधते समय उसमे थोड़ा सा तेल या घी मिलाकर गूंधना चाहिए उससे भी रोटी मुलायम बनती है।

रोटी को हमेशा तेज़ आंच पर सेंकें। क्यूंकि धीमी आंच पर रोटी नहीं फूलती।

रोटी को मुलायम बनाने के लिए आटे को गूंधते समय उसमे थोड़ा सा दूध मिलाकर गूँधना चाहिए।

रोटी सॉफ्ट बने इसके लिए आटा गूंधते समय हल्के गर्म पानी का इस्तेमाल करें।

आटे को जब भी गूंधे हमेशा थोड़ी देर के लिए ढक कर रख दें। इससे भी आटे की रोटी मुलायम बनती है।

कई लोग रोटी बनाते समय ज़्यादा पलोथन का इस्तेमाल करते है इससे भी रोटी नहीं फूलती। तो रोटी को तवे पर डालने से पहले रोटी को अच्छी तरह से झाड़ लें। और फिर तवे पर डालें।

सबसे जरुरी बात की जब भी रोटी बनाने के लिए आटा इस्तेमाल करें हमेशा अच्छी क़्वालिटी का ही करें।

तो ये थे रोटी को मुलायम और नरम बनाने के कुछ तरीके। जिन्हे अपना कर आप अपनी बनाई हुई रोटियों की तारीफें सुनते नहीं थकेंगी। तो आज से जब भी आटा गूंधे इन तरीकों को जरूर अपनाए।

पटाखे से जल गए हो तो ये हैं घरेलु उपचार

Ptakhe Se Jalne Par Kya Kare?

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दिवाली बहुत ही बड़ा और उमंग भरा त्यौहार है जिसे सभी अपने अपने तरीके से एन्जॉय करते है। जहां एक तरफ घर के बड़े और पडोसी आपस में मिठाइयां और गिफ्ट देकर अपना त्यौहार मनाते है वहीं दूसरी तरफ घर के बच्चे पटाखों और खान पान में अपनी मस्ती ढूंढते है। लेकिन कई बार उनकी यही मस्ती उनके लिए परेशानी का कारण बन जाती है।

दीपावली के पर्व पर पटाखे आदि फोड़ना बहुत ही पुरानी और मजेदार रीत है लेकिन इस रीत के साथ-साथ पूर्ण सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी है। क्योंकि अक्सर पटाखे फोड़ते समय की गयी जरा सी लापरवाही आपके और आपके बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

परन्तु आजकल के जिद्दी बच्चे किसी की बात नहीं सुनते और अकेले ही पटाखे फोड़ने चले जाते है जिसके कारण कई बार वे गंभीर हादसे का शिकार हो जाते है। दिवाली के समय होने वाली सबसे बड़ी परेशानी पटाखे जलाने के दौरान होने वाले हादसे ही होते है। ऐसे में पेरेंट्स को अपने बच्चों पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए। ताकि बच्चो को होने वाले हादसों से बचाया जा सके।

दिवाली में पटाखे जलाते समय होने वाली सबसे बड़ी परेशानी हाथ जलने आदि की होती है। इसीलिए आज हम आपको दिवाली के दौरान पटाखों से जलने पर किये जाने वाले घरेलू उपचारों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप इस समस्या का उपचार स्वयं घर पर ही कर पाएंगे। लेकिन एक बात का भी ध्यान रखें की अगर समस्या अधिक गंभीर है तो घरेलू उपचारों का प्रयोग करने की बजाए डॉक्टर के पास जाकर इलाज कराएं।

पटाखे से जलने पर यह है घरेलू उपचार

टूथपेस्ट :

जलाने के तुरंत बाद हाथ या स्किन पर टूथपेस्ट या फाउंटेन पेन की इंक लगा देनी चाहिए। ऐसा करने से जलन कम होती है। साथ ही यह जलने पर होने वाले दर्द को भी दूर करती है। इनके प्रयोग से स्किन पर छाले भी नहीं होते।

तिल का लेप :

पटाखे से हाथ जल जाने पर तिल को पीसकर उसका लेप जले हुए स्थान पर लगाएं। तिल के प्रयोग से स्किन में होने वाली जलन और दर्द में राहत मिलेगी। तिल का पेस्ट लगाने से जले हुए स्थान पर जलने का निशान भी नहीं पड़ेगा।

शहद :

शहद को जले हुए स्थान पर लगाने से स्किन में ठंडक महसूस होती है। शहद को स्किन पर रगड़ने से समस्या हो सकती है ऐसे में उसे घाव पर हलके हाथों से लगाना ही बेहतर है। इससे जख्म जल्दी भर जाएगा। पटाखों से जलाने पर यह काफी कारगर उपाय है।

गाजर :

गाजर में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो घावों और चोटों को जल्द ठीक करने में मदद करती है। इसीलिए जलने पर सबसे पहले गाजर को पीसकर जले हुए स्थान पर लगाएं। ऐसा करने से स्किन में आराम मिलेगा और लाभ भी होगा।

सिरका :

प्रयोग के लिए सिरके को थोड़े से पानी में मिलाएं। अब इसे किसी छोटे कपडे में भिगो कर जलने वले स्थान पर अच्छे से लगाएं। थोड़ी जलन महसूस होगी लेकिन फायदेमंद रहेगा।

आलू :

आलू में मौजूद गुण जख्मों को ठीक करने में बहुत लाभ कारी होते है। अगर पटाखे जलाने के दौरान आपका हाथ या शरीर का कोई हिस्सा जल जाए तो उस पर आलू को पीसकर लगाएं। इससे जलन वाले हिस्से पर ठंडक मिलेगा और फायदा होगा।

हल्दी :

आग या पटाखे से जल जाने के बाद हल्दी का पेस्ट बनाकर लगाने से राहत मिलती है। क्योंकि इसमें एंटी सेप्टिक गुण भी पाए जाते है तो यह चोट ठीक करने में भी मददगार होती है।

गाय का घी :

जले हुए स्थान पर गाय का घी लगाने से बहुत फायदा होता है। अगर पटाखे जलाते समय आपका हाथ भी जल गया है तो पीतल की थाली में सरसों का तेल, पानी और नीम की छाल मिलाएं और फिर उसमे गाय का घी मिला दें। ये उपाय आपका घाव जल्द से जल्द भर देगा।

एलोवेरा :पटाखे से alovera

पटाखे से जल जाने के बाद जले हुए स्थान पर एलोवेरा जेल लगाने से भी बहुत लाभ होता है। इसके लिए एलोवेरा की पट्टी को तोड़कर उसका रस निकाल लें और उसे घाव पर लगाएं। इससे घाव जल्द ही ठीक हो जाएगा। और इसे लगाने से छाले भी नहीं होंगे।

नारियल का तेल :

नारियल तेल को जली हुई स्किन पर लगाने से बहुत फायदा होता है। प्रयोग के लिए जले हुए स्थान पर धीरे धीरे नारियल तेल लगाएं। कुछ ही दिनों में आपका घाव भरने लगेगा।

तुलसी के पत्तों का रस :

तुलसी के पत्ते हर घर में आसानी से मिल जाते है। पटाखों से जल जाने के बाद तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उन्हें स्किन पर लगाएं। इसे जले हुए स्थान पर दाग आने की संभावना कम होती है और संक्रमण का खतरा भी नहीं होता।

आंखों के लिए :

पटाखे जलाने के दौरान आपको अपनी आंखों की सेफ्टी का खास खयाल रखना होगा। अगर फिर भी गलती से या किसी कारणवश आंख में चिंगारी या बारूद चला जाए तो आंखों को तुरंत पानी से धोएं। उसके बाद किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाएं। अगर आप कांटेक्ट लेंस पहनते है तो आँखों को धोने से पजूरव कांटेक्ट लेंस साफ़ कर लें।

स्क्रब इस्तेमाल करने के क्या फायदे होते है?

महिलाएं आपने चेहरे को निखारने के लिए बहुत से तरीकों का इस्तेमाल करती है जैसे फेशियल करवाना, क्लींजिंग करवाना, फसे वाश का इस्तेमाल और न जाने क्या-क्या? इन्ही तरीकों में से एक है स्क्रब जिसका प्रयोग भी त्वचा की गंदगी साफ़ करने के लिए किया जाता है। आज तक हमने आपको बहुत से स्क्रब बनाने की विधि और उनके प्रयोग के बारे में बताया है। लेकिन आज तक कभी उसके फायदों के बारे में नहीं बताया। इसीलिए आज हम आपको स्क्रब करने के सभी फायदों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

नियमित स्क्रब से चेहरा साफ नजर आता है साथ ही उसपर मौजूद दाग धब्बे भी दूर हो जाते है। नियमित का अर्थ रोजाना से नहीं है अपितु प्रत्येक हफ्ते में २ बार करने से है। साथ ही स्क्रब करते समय कभी भी स्किन को जोर जोर से नहीं रगड़ना चाहिए। स्क्रब को हमेशा गोलाई में करना चाहिए। इसके साथ ही आपको स्क्रब की क्वालिटी का भी ध्यान रखना चाहिए क्योकि गलत स्क्रब से आपकी स्किन पर दुष्प्रभाव आ सकते है।

स्क्रब हमेशा अपनी स्किन टाइप के अनुसार ही लेना चाहिए। वैसे आप चाहे तो बाजार से किसी अच्छी कंपनी का स्क्रब खरीद सकती है लेकिन अगर आपको उन पर भरोसा नहीं है तो आप खुद घर पर ही स्क्रब बना सकती है। इसके बार में अच्छे से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें – घर पर बनायें स्क्रब और चमकाएं अपना चेहरा।

स्क्रब हमेशा दानेदार होना चाहिए क्योंकि स्क्रब के यही दाने स्किन के पोर्स खोलते है जिससे पूरी गंदगी बाहर आ जाती है। तो आइये जानते है स्क्रब करने से कौन कौन से फायदे होते है? और उसके क्या लाभ है।

स्क्रब करने के फायदे :-

1. त्वचा की सफाई :

स्क्रबिंग का सबसे पहला और अधिक फायदा यही होता है की इसे करने के बाद स्किन पूरी तरह साफ़ हो जाती है। इससे स्किन में मौजुद गंदगी, अतिरिक्त आयल और पसीना निकल जाता है। जो वास्तव में स्किन को डार्क और गन्दा दिखाने का काम करते है। इसके लिए आप घर पर ब्राउन शुगर और शहद मिलाकर अपने चेहरे पर स्क्रब कर सकते है। इसे हफ्ते में दो बार करना अच्छा होता है।

2. डेड स्किन :beautiful skin

स्क्रबिंग करने से स्किन की मृत कोशिकाएं यानी डेड स्किन भी निकल जाती है। क्योंकि स्क्रब में दरदरा हिस्सा भी होता है जो मृत कोशिकाओं को आसानी से निकाल देता है। इसके लिए भी आप किसी दरदरे फेस स्क्रब का इस्तेमाल कर सकती है। हफ्ते में एक से दो बार प्रयोग करना आपके लिए अच्छा होगा।

3. चमक :

स्क्रबिंग करने से कसीं में ग्लो भी आता है। ग्लोइंग फेस स्क्रब के लिए आप कच्चे चावलों को दूध में 2 घंटे के लिए भिगो दें। उसके बाद उन्हें पीस लें। अब इसे पेस्ट से फेस पर स्क्रब करें। ये आपके चेहरे में ग्लो लाने के साथ साथ चमक लाने में भी मदद करेगा।

4. डार्क पैचेज :summer skin care tips

अधिक समय तक बाहर घूमने और धुप में कार्य करने के कारण त्वचा डार्क हो जाती है और जब स्किन पर स्क्रबिंग नहीं की जाती तो चेहरे पर डार्क पैचेज दिखने लगते है। ऐसे में आपका रंग काला होने लगता है। इस समस्या के लिए 1 चम्मच दही में कूंची हुई अखरोट डालकर उससे चेहरे की स्क्रबिंग करें। ये आपकी डार्क स्किन को लाइट करने में मदद करेगा। इससे आप घुटने, कोहनियों और गर्दन की भी सफाई कर सकती है।

5. मुहांसे :

आज के समय में मुहांसे की समस्या आम है ऐसे में बार बार क्रीम बदलने से बात नहीं बनेगी। इसके लिए आपको कुछ बेहतर और अच्छे उपाय का इस्तेमाल करना होगा और वो है स्क्रब। जी हां, स्क्रब की मदद से आप अपने चेहरे की मुहांसे भी हटा सकती है। इसके लिए 2 चम्मच बेकिंग सोडा और पानी मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अब इसे अपने चेहरे पर लगाएं। कुछ देर रखने के बाद पानी से साफ़ कर लें।

6. स्मूथ त्वचा :dark to fair skin

त्वचा के खूबसूरत होने के लिए उसका स्मूथ होना भी जरुरी है। क्योंकि अगर आपकी स्किन खूबसूरत है लेकिन उसमे स्मूथनेस नहीं है तो कोई फायदा नहीं। इसके लिए पीसे हुए बादाम में 2 चम्मच शहद और दूध की मलाई डालें। अब इन्हे मिक्स करके अपने चेहरे पर लगाएं। कुछ देर रखने के बाद पानी से साफ़ कर लें। परिणाम आपके सामने होंगे।

7. रंग :

स्क्रबिंग से स्किन का रंग भी साफ़ होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्क्रबिंग करने से स्किन साफ़ हो जाती है। और उसके दाग धब्बे और डार्क स्पॉट्स भी दूर हो जाते है। जिनके कारण स्किन का रंग डार्क होता है। तो अगली बार जब भी लगे की क्रीम्स के इस्तेमाल से कोई लाभ नहीं मिल रहा है तो बस एक बार स्क्रब करें और परिणाम आपके सामने होंगे।

मच्छर के काटने से कौन-कौन सी बीमारियां होती है?

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कहने को तो बरसात का मौसम सभी को खूब भाता है लेकिन इस दौरान होने वाली बीमारियां भी किसी से छुपी नहीं है। मच्छर हो या माखी किट पतंगे हो या अन्य छोटे जीव अक्सर इसी मौसम में अपने बिलो से बाहर निकलते है जिसके चलते हमें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

परन्तु इनमे से सबसे अधिक परेशानी की जड़ मच्छर ही होते है। क्योंकि केवल बरसात ही नहीं अपितु किसी भी मौसम में इन्हे रोक पाना बहुत मुश्किल होता है। और बरसात का मौसम शुरू होते इनकी तादाद बढ़ने लगती है। आस पास इक्कठा बारिश का पानी, उफनती नालियों का गन्दा पानी ये सभी इनके पनपने का कारण होते है।

अन्य ऋतुओं की तुलना में सबसे अधिक मच्छर बरसात के मौसम में ही पनपते है। प्रत्येक वर्ष कई हज़ारों लोग मच्छर के काटने की वजह से होने वाली बीमारियां जैसे डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया आदि से अपनी जान गवां देते है। जिसका मुख्य कारण साफ़ सफाई नहीं रखना और पूर्ण देखभाल नहीं करना होता है।

इसलिए सलाह दी जाती है की बरसात के मौसम में प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर के आस पास सफाई रखनी चाहिए और अपना ख़ास ख्याल रखना चाहिए। इसके अलावा भी कुछ जरुरी बातें है जिन्हे ध्यान में रखकर आप इन मच्छरों से बच सकते है। तो आइये जानते है बरसात के मौसम में मच्छरों के काटने से कौन-कौन सी बीमारियां होती है? और इनसे कैसे बचा जा सकता है?

बरसात के मौसम में मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां :-

1. मलेरिया :

मलेरिया, मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से फैलने वाला रोग है। सर्दी लगना उसके बाद तेज बुखार आना, फिर गर्मी लगाना, पसीने के साथ बुखार उतरना, उलटी, सिर दर्द और खून की कमी आदि इस बुखार के मुख्य लक्षण है। कभी-कभी इसके लक्षण 49 से 72 घंटे के भींतर दोबारा दिखाई देते है।

मलेरिया के लक्षण :

  • तेज बुखार
  • ठंड और कंपकंपी
  • मांसपेशियों में दर्द
  • थकान
  • जी मचलना
  • उलटी और दस्त आदि इस बुखार के लक्षण है।

उपचार में बरतने वाले सावधानियां :

किसी भी संक्रमित मच्छर के काटने से व्यक्ति में मलेरिया के रोगाणु आ सकते है। तो अगर मलेरिया हो तो तुरंत इलाज करवाना चाहिए। इस बात का ध्यान रखे की मलेरिया के मच्चर के काटने के 1 से 4 हफ्ते बाद बिमारी के लक्षण नजर आ सकते है। सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही दवाएं लें नकली दवाओं से सावधान रहें। बच्चों और गर्भवती महिलाओं की स्थिति में जल्द से जल्द इलाज करवाएं अन्यथा जान जाने का खतरा भी बना रहता है।

यह पढ़े : मलेरिया के बचने और उसके उपचार के तरीके

2. डेंगू :Dengue fever

डेंगू, एक प्रकार के वायरस से होने वाला रोग है जो की संक्रमित मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। इस रोग में तेज बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, जी मचलना, उलटी, दस्त और त्वचा पर लाल दाने हो जाते है। ये दुनिया में पाए जाने वाले सबसे खतरनाल वायरल रोगों में से एक है। क्योंकि केवल एक अकेला संक्रमित मच्छर अनेक लोगों को डेंगू से ग्रसित कर सकता है। इस रोग में व्यक्ति की प्लेटलेट्स में काफी तेजी से गिरावट आदि है। और यदि समय पर सही उपचार न मिले तो व्यक्ति मृत या कोमा में जा सकता है। इसीलिए अगर 2-3 दिन से लगातार बुखार आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाए।

डेंगू के लक्षण :

  • तेज बुखार
  • माँसपेशियपोन एवं जोड़ों में असहनीय दर्द
  • सिर दर्द
  • आँखों के पीछे दर्द
  • जी मचलना
  • उल्टियां
  • दस्त
  • त्वचा पर लाल रंग के दाने होना आदि डेंगू बुखार के मुख्य लक्षण है।

उपचार में बरतने वाली सावधानियां :

डेंगू के बुखार के लिए कोई खास उपचार नहीं है इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर ही इसका उपचार किया जाता है। डेंगू के इन्फेक्शन की जाँच ब्लड टेस्ट द्वारा की जाती है। इससे बचने के लिए कोई विशेष उपचार तो नहीं है लेकिन डॉक्टर अधिक आराम और पेय पदार्थों का सेवन करने की सलाह देते है जिससे बॉडी में नमी बनी रहे।

डेंगू के बाद कैसे बढ़ाएं प्लेटलेट्स :

  • गिलोय को मेटाबोलिक रेट बढ़ाने और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने व् शरीर को संक्रमण से बचाने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। आप चाहे तो इसके साथ तुलसी के पत्तों का प्रयोग भी कर सकते है।
  • पपीते के पत्ते प्लेटलेट्स को बढ़ाने में मदद करते है।
  • मेथी के पत्ते भी बुखार को कम करने में सहायक है।
  • तुलसी के पत्ते और काली मिर्च को पानी में उबालकर पीने से लाभ मिलता है।
  • नीम, पीपली, गेहूं के ज्वारों का रस, आंवला और ग्वारपाठे का जूस भी डेंगू के उपचर में उपयोगी है।
डेंगू के पूर्ण उपचार के बारे में जानने के लिए इसे पढ़े : डेंगू बुखार का इलाज !

3. चिकनगुनिया :

चिकनगुनिया, उन वायरल बुखारों में से एक है जो कभी कभी महामारी का रूप भी ले लेता है। इस बुखार में व्यक्ति के जोड़ों में बहुत अधिक दर्द होता है जिसकी वजह से व्यक्ति झुकी हुई मुद्रा में रहता है। यह एक एडीज मच्छर एड्र्जिप्ती के कारण होता है जो विशेषकर दिन में काटता है। इसके लक्षण कुछ कुछ डेंगू बुखार के जैसे ही होते है।

चिकनगुनिया के लक्षण :

  • शरीर में वायरस के पूरी तरह फ़ैल जाने पर जोड़ों में तेज दर्द शुरू हो जाता है।
  • आमतौर पर बीमारी के 2 से 5 दिन के भीतर धब्बेदार दाने दिखने लगते है।
  • कुछ रोगियों की आँखों में संक्रमण होता है साथ ही आँखों से थोड़ा सा खून का रिसाव भी होने लगता है।

चिकनगुनिया का बचाव कैसे करें?

डेंगू की ही भांति इस बुखार का भी कोई ठोस इलाज नहीं है। इसलिए डॉक्टर जागरूक और सतर्क रहने की सलाह देते है। चिकनगुनिया में जोड़ों में बहुत तेज दर्द होता है जिसके लिए डॉक्टर दर्द निवारक और बुखार रोधी दवाएं देते है। संक्रमित व्यक्ति से बहुत अधिक लोगों को मिलने नहीं दिया जाता और साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।

चिकनगुनिया बुखार का इलाज जानने के लिए इसे पढ़े : चिकनगुनिया से कैसे बचें?

मच्छरों से होने वाली बिमारियों से बचने के उपाय :

  • मच्छरदानी लगाकर सोएं।
  • घर के अंदर मच्छर मारने वाले दवा छिडके।
  • घर के दरवाजो और खिडकियों पर जाली लगवाये।
  • हल्के रंग के कपड़े पहने ,जिनसे आपका शरीर पुरी तरह ढका हो।
  • दीवारों-दरवाजो और खिडकियों की दरारों को भर दे।
  • शाम होते ही घर की खिडकियों को बंद कर ले।
  • अपनी सेहत बनाये रखने के लिए मौसमी फलो का सेवन करे लेकिन सलाद और कच्ची सब्जिया ना खाए।
  • बच्चो को घर के अंदर ही खेलने दे।
  • सूर्योदय और सूर्यास्त के समय एवं शाम को घर के अंदर रहे क्योंकि मच्छर इस वक्त ज्यादा सक्रिय होते है।
  • ऐसी जगह पर न जाए, जहां झाडिया हो क्योंकि वहा पर बहुत मच्छर होते है।
  • अपने घर और आसपास की सफाई का विशेष ध्यान दे।
  • आसपास गन्दगी बिलकुल ना होने दे।
  • कूलर और फ्रिज का पानी नियमित रूप से बदले और घर के आसपास पानी जमा ना होने दे।
  • बारिश का पानी निकलने वाली नालियों , पुराने टायरो ,बाल्टियो , प्लास्टिक कवर ,खिलौनों और अन्य जगह पर पानी बिलकुल ना रुकने दे।

बच्चे को नहलाते समय इन बातों का ध्यान रखें

शिशु बहुत ही कोमल और नाजुक होते हैं ऐसे में उनकी परवरिश करना कोई आसान बात नहीं होती है। और सबसे ज्यादा दिक्कत उन महिलाओं को आती है जो या तो पहली बार माँ बन रही होती है या फिर जो अकेली रहती है और उन्हें राय देने के लिए घर में कोई नहीं होता है। ऐसे में शिशु को को कैसे सुलाना है, कैसे पकड़ना है, कैसे उठाना है, कैसे स्तनपान करवाना है, कैसे नहलाना है यह सब किसी पहेली से कम नहीं होता है। तो आज हम आपको शिशु को कैसे नहलाना चाहिए और शिशु को नहलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

सबसे पहले तो शिशु को नहलाने के लिए जिन जरुरी चीजों की जरुरत है उन्हें इक्कठा कर लें। जैसे ही बाथ टब, साबुन, चौकी, तौलिया, साबुन, मग, कपडे, पाउडर, क्रीम आदि। उसके बाद शिशु को नहलाने के लिए जो सामान चाहिए वो बाथरूम में रखें। और नहलाने के बाद जो सामान चाहिए उसे बेड पर रखें।

शिशु को नहलाने के लिए सही समय का ध्यान रखें जैसे की शिशु को न तो बिल्कुल सुबह नहलाएं और न ही शाम को नहलाएं। ऐसे में दिन के ग्यारह या बारह बजे का समय शिशु के लिए सही होता है। क्योंकि इस समय नहाने के बाद शिशु अच्छे से सो भी जाता है।

अब शिशु की मालिश दस या ग्यारह बजे करने के बाद आप शिशु को नहलाने की तैयारी करें। उसके बाद शिशु को नहलाने के लिए न तो ज्यादा गर्म न ज्यादा ठन्डे पानी का इस्तेमाल करें। बाथरूम में पानी रखने के बाद शिशु के कपडे उतार कर शिशु को बाथ टब में लिटाएं। और अपने एक हाथ से उसकी गर्दन व् सर को पकड़ें और थोड़ा ऊपर की और उठायें।

आप आराम से चौकी पर बैठें और ध्यान रखें की आपको बैठने में भी कोई दिक्कत न हो। अब थोड़ा थोड़ा हाथ से पानी शिशु पर डालें। और फिर शिशु के बालों में शैम्पू लगाएं। ध्यान रखें की शिशु की आँखों, कान में शैम्पू या पानी न जाये। उसके बार मग से आराम से पानी डालते हुए शैंपू को निकाल दें। ध्यान रखें की आराम से पानी शिशु पर डालें तेजी बिल्कुल न करें।

फिर शिशु की बॉडी पर साबुन लगाएं और उसे भी आराम से पानी डालते हुए साफ़ कर दें। उसके बाद शिशु को बाथ टब से दोनों हाथों से पकड़कर निकालें और तोलिये में लपेट दें। अब बेड पर लिटाकर शिशु को साफ़ कर दें। और दूसरे तोलिये के ऊपर शिशु को लिटाकर पाउडर, क्रीम, तेल आदि शिशु को लगाएं। उसके बाद शिशु को कपडे पहनाएं।

कपड़े पहनाने के बाद शिशु को पेट भरकर दूध पिलाएं या फिर शिशु यदि छह महीने से पर का है तो आप उसे खुल खिला भी सकती है। उसके बाद शिशु आराम से सो जाता है। ऐसा करने से शिशु नींद भरपूर लेता है जो की शिशु के बेहतर विकास के लिए बहुत जरुरी होता है।

यदि आपका भी बच्चा छोटा है तो आप भी शिशु को नहलाते समय इन बातों का ध्यान रखें। ताकि शिशु को नहलाते समय कोई दिक्कत न हो और शिशु को साफ़ और स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी रुकी है या नहीं? पीरियड्स की डेट से पहले ऐसे जानें

प्रेगनेंसी रुकी है या नहीं पीरियड्स की डेट से पहले ऐसे जानें, पीरियड्स मिस होना प्रेगनेंसी का सबसे अहम लक्षण माना जाता है। लेकिन आपको शायद आपको यह जानकार हैरानी होगी की पीरियड्स मिस होने से पहले ही आप यह जान सकती हैं की आप गर्भवती हैं या नहीं? अब आप सोच रही होंगी की ऐसा कैसे होता है। तो आपके इसी सवाल का जबाब हम इस आर्टिकल में देने रहे हैं। ओवुलेशन पीरियड वो समय होता है जब महिला के गर्भधारण के सबसे ज्यादा चांस होते हैं।

और आपके लास्ट पीरियड्स के पहले दिन से गिनते हुए जो बारह से अठारह दिन का समय होता है वो ओवुलेशन पीरियड होता है। ऐसे में यदि आप अपने पार्टनर के साथ बिना सुरक्षा के बेहतर सम्बन्ध बनाती हैं। तो इससे निषेचन के चांस बढ़ जाते हैं। और यदि निषेचन हो जाता है तो निषेचन होने के साथ ही बॉडी के हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं।

और बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण आपको अपनी बॉडी में शारीरिक परेशानियां या बदलाव महसूस हो सकते हैं। जिनसे आप अंदाजा लगा सकती है की आपका गर्भ ठहरा है या नहीं। तो आइये अब जानते हैं की वो कौन से लक्षण हैं जो पीरियड्स मिस होने से पहले आपको यह संकेत देते हैं की आपका गर्भधारण हो गया है।

प्रेगनेंसी रुकी है या नहीं का लक्षण है थकावट व् कमजोरी महसूस होना

  • यदि आपको बिना काम किए ही बहुत ज्यादा थकान व् कमजोरी का अनुभव हो रहा है।
  • तो यह प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है।
  • क्योंकि बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने लगता है जिससे आपको थकावट व् कमजोरी अधिक महसूस हो सकती है।

ब्रेस्ट में बदलाव

  • यदि आपको अपनी ब्रेस्ट में दर्द, सूजन, भारीपन, ब्रेस्ट को छूते हुए दर्द आदि महसूस हो रहा है।
  • तो ब्रेस्ट में होने वाला यह बदलाव भी आपके प्रेग्नेंट होने की तरफ इशारा करता है।

खाने पीने की पसंद में बदलाव

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है की आपकी जीभ में स्वाद में भी आपको परिवर्तन मसहूस हो।
  • यानी की हो सकता है जो चीजें आप पहले खाती थी अब आपका उनको खाने का मन नहीं करें।
  • और जो चीजें पहले नहीं खाती थी अब उन्हें खाने की इच्छा होने लगे।

प्रेगनेंसी रुकी है या नहीं का लक्षण है रक्तस्त्राव

  • यदि आपको पीरियड्स न आएं लेकिन आपको पैंटी पर खून के धब्बे महसूस हो।
  • और वह धब्बे गुलाबी या हल्के भूरे हो तो यह भी पीरियड्स मिस होने से पहले प्रेगनेंसी का ही एक लक्षण होता है।

कब्ज़

  • यदि आपको पीरियड्स मिस होने से पहले कब्ज़ के कारण अधिक परेशानी हो।
  • तो यह भी महिला के गर्भधारण की और संकेत करता है।
  • क्योंकि बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के स्तर में बदलाव आने के कारण पाचन क्रिया से सम्बंधित परेशानी हो सकती है।
  • जिसके कारण महिला को कब्ज़, भूख में कमी जैसी समस्या हो सकती है।

मूड स्विंग्स

  • यदि आपको बिना किसी कारण बहुत गुस्सा आ रहा है, चिड़चिड़ाहट महसूस हो रही है, या फिर बहुत ज्यादा ख़ुशी महसूस हो रही है।
  • तो आपको महसूस होने वाले यह मूड स्विंग्स आपकी प्रेगनेंसी की तरफ इशारा कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी रुकी है या नहीं का लक्षण है सिर दर्द व् चक्कर

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ब्लड फ्लो धीमा पड़ सकता है।
  • जिसके कारण हो सकता है महिला को सिर में दर्द व् चक्कर जैसी परेशानियां महसूस हो।
  • यदि पीरियड्स मिस होने से पहले आपको अपनी बॉडी में यह लक्षण महसूस होता है।
  • तो यह भी आपकी प्रेगनेंसी की और इशारा करता है।

यूरिन अधिक आना

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण किडनी का काम बढ़ जाता है।
  • जिसके कारण महिला की बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।
  • यदि आपके साथ भी ऐसा कुछ होता है।
  • तो समझ जाइये की आपकी प्रेगनेंसी के चांस हैं।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिन्हे देखकर आप अंदाजा लगा सकती हैं की आपका गर्भ ठहरा है या नहीं। यदि आपकी बॉडी में यह लक्षण महसूस होते हैं। तो इसका मतलब हो सकता है की आपका गर्भ ठहर गया है जबकि यदि आपको बॉडी में कोई लक्षण महसूस नहीं होता है। तो इसका मतलब होता है की आपका गर्भ नहीं ठहरा है।

प्रेगनेंसी में कॉफ़ी पीना फायदेमंद होता है या नुकसानदायक

प्रेगनेंसी में कॉफ़ी, प्रेग्नेंट महिला अपने आहार में जिन जिन चीजों को शामिल करती है। उनका असर गर्भनाल के माध्यम से शिशु पर भी पड़ता है। इसीलिए गर्भवती महिला को केवल उन चीजों को खाने की सलाह दी जाती है। जो न केवल पोषक तत्वों से भरपूर हो बल्कि गर्भवती महिला व् शिशु के लिए फायदेमंद भी हो।

लेकिन कोई भी चीज कितनी भी फायदेमंद हो। वह फायदा तभी करती है जब जरुरत के अनुसार उस चीज का सेवन किया जाता है। जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी के दौरान कॉफ़ी का सेवन फायदेमंद होता है या नुकसानदायक इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में कॉफ़ी का सेवन करना चाहिए या नहीं?

कॉफ़ी का सेवन करने से थकान को दूर करने, तनाव को दूर करने, रिलैक्स महसूस करना जैसे फायदे मिलते हैं। लेकिन प्रेग्नेंट महिला के लिए कॉफ़ी का सेवन सही नहीं माना जाता है। क्योंकि कॉफ़ी में कैफीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर डाल सकती है। इसीलिए डॉक्टर्स भी कॉफ़ी से ज्यादा प्रेगनेंसी में चाय का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं।

लेकिन कॉफ़ी के लिए डॉक्टर भी मनाही करते हैं। यदि कभी कभार आपका कॉफ़ी पीने का मन होता है। तो प्रेग्नेंट महिला कॉफ़ी का सेवन कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की उसमे कॉफ़ी की मात्रा हल्की हो और आप एक बड़ा मग भरकर कॉफ़ी का न पीएं। एक छोटे कप कॉफ़ी का सेवन ही करें। तो इसका मतलब तो यही हैं की प्रेगनेंसी में जितना हो सके कॉफ़ी का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में कॉफ़ी का सेवन करने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला कॉफ़ी का सेवन करती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को नुकसान हो सकता है। साथ ही इससे भ्रूण पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान कॉफ़ी का सेवन करने से कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी में दिक्कत

  • पहले से ही जो महिलाएं कॉफ़ी का सेवन करती है तो ऐसा करने से उन्हें गर्भधारण करने में दिक्कत हो सकती है।
  • क्योंकि कॉफ़ी में मौजूद कैफीन अंडे को अंडाशय से फैलोपियन ट्यूब तक जाने के मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है।
  • जिसके कारण महिला को प्रेगनेंसी न होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भपात

  • यदि कोई गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कॉफ़ी का सेवन अधिक मात्रा में करती है।
  • तो कॉफ़ी का अधिक सेवन करने के कारण महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

भूख में कमी

  • कॉफ़ी का सेवन करने के कारण प्रेग्नेंट महिला को भूख में कमी जैसी दिक्कत हो सकती है।
  • भूख में कमी के कारण गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
  • जिसकी वजन से प्रेग्नेंट महिला की शारीरिक समस्या बढ़ने के साथ शिशु के शारीरिक विकास में कमी आ सकती है।

प्रेगनेंसी में कॉफ़ी पीने से होती है नींद में कमी

  • कॉफ़ी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को नींद में कमी जैसी दिक्कत का सामना भी करना पड़ सकता है।
  • ऐसे में नींद पूरी न होने के कारण प्रेग्नेंट महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ने का खतरा भी रहता है।

प्रेगनेंसी में कॉफ़ी पीने से होती है शिशु के वजन में कमी

  • कॉफ़ी में मौजूद कैफीन का असर गर्भनाल के रास्ते जब शिशु तक पहुँचता है।
  • तो शिशु पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है जैसे की जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी दिक्कत हो सकती है।

समय पूर्व प्रसव

  • शिशु के वजन में कमी ही नहीं बल्कि कॉफी का अधिक सेवन करने के कारण समय पूर्व प्रसव का खतरा रहता है।
  • जिससे अविकसित शिशु के जन्म लेने के कारण शिशु को जन्म के बाद बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान कॉफ़ी का सेवन से जुड़े कुछ खास टिप्स। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो कॉफ़ी का सेवन करने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखें। ताकि आपको कॉफ़ी का सेवन करने के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।