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शादी में मेहंदी इसीलिए लगाई जाती है!

दूल्हा हो या दुल्हन सभी के जीवन में शादी का बेहद खास महत्व होता है। लेकिन इसी के साथ शादी के समय हाथों में रचाई जाने वाली मेहंदी लगाने का भी एक विशेष महत्व होता है जिसे सामान्यतौर पर सभी नहीं जानते। इसीलिए आज हम आपको शादी के समय दूल्हा दुल्हन के हाथ में लगाई जाने वाली मेहंदी का महत्व बताने जा रहे है।

भारतीय परंपरा में मेहंदी का प्रचलन काफी पुराने समय से है। कोई धार्मिक त्यौहार हो या शादी विवाह का समारोह सभी में मेहंदी को अनिवार्य माना जाता है। क्योंकि मेहंदी सुहागनों के 16 श्रृंगारों में से एक है जिसके बिना हर रीति रिवाज और संस्कारों को अधुरा माना जाता है।

इसीलिए भारत में हर विवाहित महिला शादी-विवाह के अवसर और तीज-त्योहारों में मेहंदी का प्रयोग सर्वोपरी होता है। लेकिन विवाह के समय दूल्हा-दुल्हन के लिए इस रस्म का बेहद ख़ास महत्व होता है। इस दौरान मेहंदी लगाने के लिए एक विशेष आयोजन किया जाता है।

इस रिवाज को शादी से एक या दो दिन पहले किया जाता है। जिसमे दूल्हा और दुल्हन के परिवार वाले उनके हाथों और पैरों में मेहंदी लगाते है। लेकिन क्या आप जानते है की खुशियों के इस मौके पर मेहंदी लगाने की परंपरा क्यों शुरू हुई थी? और इसके पीछे क्या कारण है? शायद नहीं, क्योंकि कभी इसकी जरुरत ही नहीं पड़ी। इसीलिए आज हम आपको शादी में दूल्हा-दुल्हन को मेहंदी क्यों लगाते है इस बारे में बताने जा रहे है!

शादी के समय इसलिए लगाई जाती है मेहंदी :-

1. शादी के समय मेहंदी का महत्व :

हाथों में रचने वाली मेहंदी न केवल आपके हाथों को निखारती है अपितु हमारी संस्कृति का भी अभिन्न हिस्सा है। इसे हमारे जीवन में आने वाली खुशियों का प्रतीक माना जाता है इसीलिए विवाह के समय इसे लगाना बेहद जरुरी होता है। माना जाता है की मेहंदी का रंग जितना खिलकर आता है हमारे घर में खुशियां भी उतनी खिलकर ही आती है। इसीलिए शादी के समय दुल्हन की मेहंदी को सभी बड़े गौर से देखते है की इसका रंग कितना गहरा है। हिन्दुओं में जहां एक तरफ दुल्हन के भरे हाथ मेहंदी लगाने का रिवाज है वहीं दूसरी ओर दुल्हे को भी मेहंदी लगाई जाती है। फिर चाहे वो शगुन का छोटा सा टीका ही क्यों न हो।

2. प्यार का प्रतीक :

शादी के समय दूल्हा दुल्हन के हाथों में मेहंदी लगाना इसीलिए भी जरुरी होता है क्योंकि इसे उनके जीवन के साथ-साथ उनके परिवारों के बीच प्यार और स्नेह का भी प्रतीक माना जाता है। कहते है दुल्हन की मेहंदी का रंग जितना गहरा होगा पति-पत्नी के बीच का रिश्ता उतना ही मजबूत रहेगा। साथ ही ये आपके अटूट प्रेम को भी दर्शाती है।

3. शुभ :

मान्यता है की दूल्हा और दुल्हन के हाथों में लगी मेहंदी जितने ज्यादा दिनों तक उनके हाथों पर लगी रहती है, उतनी ही दोनों के जीवन में खुशियों का शुभ संकेत माना जाता है।

4. औषधीय गुण :

आयुर्वेद के मुताबिक मेहंदी में कई प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते है जो शरीर में शीतलता बनाए रखने में मदद करते है। चूँकि शादी के समय काफी कामकाज रहता है तो इन दिनों दिमागी तनाव होना लाजमी है ऐसे में मेहंदी आपको राहत देने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ये हमारे शरीर को शीतलता देने के साथ-साथ, सर दर्द, तनाव और थकान से राहत देने में भी मदद करती है। इसके अलावा मेहंदी लगाने से त्वचा संबंधी कई रोग भी दूर होते है। साथ ही यह त्वचा में नमी को भी बनाए रखते है। इसके अलावा मेहंदी की खुशबु भी काफी कामोत्तेजक होती है, शादी के बाद दोनों के खास पलों को रोमांटिक बना देती है।

5. प्रेम संबंध :

कहते है दुल्हन के हाथों में लगी मेहंदी का रंग जितना अधिक गहरा होता है, अपने पति के प्रति उसका प्यार भी उतना गहरा होता जाता है। साथ ही दुल्हन को पति के साथ-साथ ससुराल वालों का भी भरपूर प्यार मिलता है।

20, 30 या 40 क्या है महिलाओं के लिए क्या है बच्चे पैदा करने की सही उम्र?

20, 30 या 40 क्या है महिलाओं के लिए क्या है बच्चे पैदा करने की सही उम्र?

हर प्रेग्नेंट महिला चाहती है की उसके गर्भ में स्वस्थ, हष्ट पुष्ट, तंदरुस्त, बुद्दिमान, बच्चे का निवास हो। लेकिन इसके लिए सबसे जरुरी होता है की महिला स्वस्थ है या नहीं क्योंकि गर्भ में बच्चे का विकास पूरी तरह से गर्भवती महिला पर निर्भर करता है। ऐसे में जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के लिए महिला शारीरिक, मानसिक रूप से फिट होनी चाहिए, इसके अलावा महिला की उम्र भी इस मामले में बहुत मायने रखती है। कुछ महिलाएं उम्र से पहले या बहुत ज्यादा उम्र में गर्भधारण भी करती है, लेकिन उन्हें प्रेगनेंसी से जुडी बहुत सी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। और कई बार तो उन्हें गर्भधारण में भी दिक्कते आती है।

अब कई महिलाएं यह सवाल करती हैं की गर्भधारण के लिए सही उम्र क्या होती है? 20, 30 या 40 बच्चे पैदा करने की सही उम्र कौन सी होती है? प्रेगनेंसी यदि कम उम्र में होती है तो शारीरिक रूप से फिट न होने के कारण आपको गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है, तीस की उम्र के बाद प्रेगनेंसी में समस्या होने के साथ कई बार गर्भधारण ही नहीं होता है। क्योंकि एक उम्र के बाद अंडाशय में अंडे बनने बंद हो जाते है। तो आइए आज हम आपके इन्ही सभी सवालों का जवाब देते हैं और आपको बताते हैं की प्रेगनेंसी की सही उम्र क्या होती है।

प्रेगनेंसी की सही उम्र

 बदलते लाइफस्टाइल के साथ शादी का फैसला लोग लेट करते हैं, और उसके बाद फैमिली प्लानिंग में देरी करते हैं। ऐसे में उन्हें अपने परिवार को आगे बढ़ाने में हो सकता है परेशानी का सामना करना पड़ें तो लीजिए आज प्रेगनेंसी की सही उम्र से जुड़े कुछ सवालों का जवाब जानते हैं।

बच्चे पैदा करने की सही उम्र

 बच्चे को जन्म देने के लिए महिला की सही उम्र का होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि महिला की उम्र बहुत कम या ज्यादा होती है तो इसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की यदि महिला की उम्र बहुत कम होती है तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास और शारीरिक विकास पर असर पड़ता है, और अधिक उम्र होने पर महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है। तो आइए जानते हैं इनसे जुडी कुछ बातें।

  • लड़कियों की शादी की उम्र अठारह वर्ष है जो की सरकार ने निर्धारित की हुई है, लेकिन उस समय शरीर इतना मजबूत नहीं होता है की महिला गर्भधारण कर सकें, और यदि महिला गर्भधारण कर लेती है तो ऐसे में शिशु के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है। लेकिन यदि महिला अठारह वर्ष की उम्र में शारीरिक रूप से फिट होती है, तो वो गर्भधारण कर सकती है, लेकिन यदि महिला फिट नहीं होती है तो इससे शिशु के साथ महिला के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • यदि महिला की उम्र तीस या पैंतीस साल से ऊपर हो जाती है तो इस उम्र में अंडाशय में अंडे बनने की संख्या भी कम होने लगती है। जिसके कारण महिला को गर्भधारण करने में परेशानी होती है, और यदि महिला तीस के बाद गर्भधारण कर भी लेती है। तो ऐसे में उसे अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है।
  • तो यदि महिला की प्रेगनेंसी के लिए सही उम्र की बात की जाए तो वो अठारह से पैंतीस साल तक होती है। क्योंकि यदि अठारह से कम और पैंतीस साल से ज्यादा उम्र में गर्भधारण होता है तो शिशु पर इसका बुरा असर देखना को मिलता है क्योंकि उसका विकास अच्छे से नहीं हो पाता है।

इस उम्र में माँ बनने में नहीं आएगी कोई दिक्कत

वैसे तो महिला के लिए बीस से तीस वर्ष की उम्र माँ बनने के लिए सबसे सही होती है। लेकिन बदलते लाइफस्टाइल के साथ बीस की उम्र में कोई माँ नहीं बनना चाहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की आज कल केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी इनफर्टिलिटी की समस्या से परेशान हो रही हैं। ऐसे मे यह बहुत अहम सवाल होता है की किस उम्र में प्रेगनेंसी में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।

तो ऐसे में स्पेशलिस्ट के अनुसार पच्चीस से तीस वर्ष की उम्र को प्रेगनेंसी के लिए सबसे सही उम्र बताया है, क्योंकि इस दौरान प्रजनन प्रणाली व आपकी बॉडी के अन्य पार्ट्स की क्रियाएं चरम सीमा पर होते है। जिसके कारण आपको प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। बाकी आपकी शारीरिक फिटनेस पर निर्भर करता है।

30 साल की उम्र के बाद प्रेगनेंसी

अपने कैरियर को देखते हुए कुछ महिलाएं जो शादी का फैसला ही लेट करती है तो वो महिलाएं यह सवाल करती है की क्या तीस साल की उम्र के बाद गर्भवती होना सही होता है। इसका जवाब होता है की जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है वैसे वैसे अंडाशय में अंडे बनने की संख्या कम होने लगती है। और 32 की उम्र के बाद तो फर्टिलिटी पर भी असर पड़ता है ऐसे में तीस की उम्र के बाद आपको गर्भधारण करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और यदि गर्भधारण हो जाता है, तो उसके बाद प्रेगनेंसी में भी बहुत ज्यादा कॉम्प्लीकेशन्स होने के चांस होते है।

20 से 25 साल की उम्र में गर्भधारण 

जिन लड़कियों की शादी जल्दी हो जाती है तो जाहिर सी बात होती है की वो फैमिली प्लानिंग करते हैं। ऐसे में गर्भधारण का यह निर्णय सही भी होता है और गलत भी होता है, क्योंकि यदि महिला इस उम्र में शारीरिक रूप से फिट नहीं होती है तो महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए ही यह नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन यदि महिला शारीरिक और मानसिक रूप से यदि तैयार होती है तो महिला की प्रेगनेंसी का फैसला सही भी हो सकता है। ऐसे में 20 से 25 साल की उम्र में मां बनना महिला के शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होने पर निर्भर करता है।

25 से 30 साल की उम्र में प्रेगनेंसी के नुकसान और फायदे

स्पेशलिस्ट के अनुसार इस उम्र को प्रेगनेंसी के लिए बिल्कुल सही माना गया है। क्योंकि इस समय महिला की प्रजनन प्रणाली के साथ उसके शारीरिक रूप से भी पूरी तरह फिट होने के चांस ज्यादा होते है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। लेकिन यदि महिला ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है, या पहले उसका गर्भपात हो चुका है तो हो सकता है की इस उम्र में उसे प्रेगनेंसी से सम्बंधित समय आएं नहीं तो यह उम्र प्रेगनेंसी के लिए बिल्कुल सही होती है। यह केवल महिला पर निर्भर करता है की उसका शरीर फिट है या नहीं, या फिर उसे कोई और समस्या तो नहीं है।

30 साल की उम्र के प्रेगनेंसी में आने वाली दिक्कत

जो महिलाएं तीस या उससे अधिक उम्र में शिशु को जन्म देने का फैसला करती है। हो सकता है की उन्हें प्रेगनेंसी में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। तो आइए जानते है की तीस की उम्र के बाद बच्चा पैदा करने में कौन सी समस्या आती है।

  • सबसे पहले तो महिला को गर्भधारण करने में ही परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • डिलीवरी के समय दिक्कत आ सकती है।
  • सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस बहुत ज्यादा होते है।
  • शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।
  • थोड़ी सी लापरवाही गर्भपात का कारण बन सकती है।

महिलाओं के लिए कौन-सी उम्र सही रहती है प्रेग्नेंसी के लिए

 प्रेगनेंसी सीधा महिला की शारीरिक फिटनेस पर निर्भर करती है क्योंकि यदि महिला बाइस साल की उम्र में शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होती है, तो भी वो एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है। ऐसे में महिला को बीस से तीस साल की उम्र में स्वस्थ प्रेगनेंसी हो सकती है। लेकिन यदि महिला फिट नहीं होती है तो हो सकता है की उसे प्रेगनेंसी के दौरान समस्या का सामना करना पड़े। लेकिन फिर भी आप बीस के बाद और तीस से पहले की उम्र को महिला की प्रेगनेंसी के लिए सही मान सकते हैं।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के लिए सही उम्र से जुडी कुछ बातें, ऐसे में यदि आप भी चाहते हैं की आपको प्रेगनेंसी से जुडी इन परेशानियों का सामना न करना पड़े। और आपकी प्रेगनेंसी में किसी तरह की कोई समस्या न आए तो आपको प्रेगनेंसी का फैसला सही उम्र में ही करना चाहिए। और हो सके तो प्रेगनेंसी से पहले अपने शरीर की अच्छे से जांच भी करवानी चाहिए ताकि आपको प्रेगनेंसी के लिए आप शारीरिक रूप से तैयार हैं या नहीं इस बात का पता चल सके।

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के उपाय

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ाने के उपाय, गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन ऐसे बढ़ाएं, भ्रूण के बेहतर विकास के लिए टिप्स, गर्भ में कमजोर शिशु का वजन बढ़ाने के उपाय

हर महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो, साथ ही उसका वजन भी बढे। और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है, क्योंकि यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है, अपनी अच्छे से केयर नहीं करती है, तनाव लेती है, आदि। तो इसके कारण शिशु को पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं, और शिशु का विकास सही नहीं होता है, जिसके कारण शिशु कमजोर होता है, और कई बार तो जन्म के बाद शिशु को मशीन में भी रखना पड़ता है।

लेकिन यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है, भरपूर पोषक तत्वों का सेवन करती है, किसी भी तरह की परेशानी नहीं लेती है, खुश रहती है। तो इससे शिशु को पोषक तत्व भरपूर मिलते हैं जिससे उसके अंग अच्छे से विकसित होते है और जन्म के समय शिशु का वजन भी सही होता है। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देने जा रहें हैं जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के साथ उसके वजन को भी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

खान पान का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं फिटनेस के चक्कर में तो कुछ प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण खान पान में लापरवाही करती है। जो की शिशु के विकास पर गलत असर डालता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए, और थोड़े थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ खाते रहें जिससे आपको भरपूर पोषक तत्व मिलें, और शिशु को भी भरपूर पोषण मिलें ताकि उसका विकास बेहतर हो सकें।

आयरन युक्त आहार

गर्भवती महिला को आयरन से भरपूर चीजें जैसे गाजर, चुकंदर, अनार, आदि का सेवन भी नियमित करना चाहिए। इससे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और शिशु में भी रक्त संचार बेहतर तरीके से होता है, जिससे उसका विकास तेजी से होने में मदद मिलती है।

दालें

प्रोटीन युक्त आहार खासकर दालें महिला को प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर खानी चाहिए। चाहे दिन में या रात में एक कटोरी दाल का सेवन करें, लेकिन उसे अपने नियमित आहार में जरूर शामिल करें। साथ ही अंकुरित दालों का भी भरपूर सेवन करें। क्योंकि प्रोटीन युक्त आहार शिशु की हड्डियों, अंगो को मजबूत बनाती है, जिससे शिशु का बेहतर विकास होता है। और शिशु का वजन भी बढ़ता है।

डेरी प्रोडक्ट्स

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दूध व् दूध से बने प्रोडक्ट्स का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि इसमें भी कैल्शियम, प्रोटीन, व् अन्य पोषक तत्व भरपूर होते हैं। जो शिशु के वजन को बढ़ाने में मदद करते हैं। और छेना का सेवन यदि गर्भवती महिला नियमित सुबह खाली पेट करती है तो इससे शिशु का वजन बढ़ने के साथ शिशु का रंग भी गोरा होता है, और यह आपको आसानी से किसी भी मिठाई की दूकान पर मिल जाता है।

तनाव न लें

आपने यह तो सुना ही होगा स्वस्थ गर्भवती महिला के गर्भ में स्वस्थ शिशु निवास करता है, ऐसे में यदि आप गर्भावस्था के दौरान तनाव लेती है तो इससे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है। लेकिन यदि आप चाहती है की आपका शिशु स्वस्थ व् हष्ट पुष्ट हो तो इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान आपको तनाव नहीं लेना चाहिए। और खुश रहना चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनकी मदद से आप गर्भ में पल रहे शिशु के वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसीलिए यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो इन बातों का खास ध्यान रखें ताकि आपके गर्भ में पल रहा शिशु भी स्वस्थ हो, उसका वजन भी सही रहे, और आप एक तंदरुस्त शिशु को जन्म दें।

दोपहर को सोने से क्या-क्या नुकसान होते हैं

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रात की नींद को ही सबसे बेहतर नींद माना जाता है, और रात को सोना ही सबसे उपयुक्त समय होता है। लेकिन बिमारी के कारण, उम्र अधिक होने के कारण, छोटे बच्चे, गर्भवती महिला, पढ़ने वाले बच्चे, दिन के समय भी थोड़ी देर आराम कर सकते हैं। क्योंकि इससे उनके मस्तिष्क को थोड़ा आराम मिलता है, और उन्हें फ्रैश महसूस होता है। लेकिन यदि आप स्वस्थ है और रात को पूरी नींद लेने के बाद भी दिन में थोड़ी देर सोते हैं तो इससे आपको बहुत से नुकसान हो सकते हैं। क्या आप भी दिन में एक झपकी लेते हैं? यदि हाँ तो आइये अब हम आपको बताते हैं की दिन में सोने से आपको कौन- कौन से नुकसान होते हैं।

मस्तिष्क पर प्रभाव

दिन के समय सोने से आपकी यादाश्त कमजोर होने लगती है, और सोचने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण आपके मस्तिष्क की क्रियाओं पर बुरा असर पड़ता है और वो धीरे होने लगती है।

वजन बढ़ता है

मोटापा एक ऐसी समस्या है जो कभी भी शरीर में अकेले नहीं आता है बल्कि और भी बहुत सी बीमारियों को साथ लाता है। और यदि आप दिन में सो जाते हैं तो इसके कारण शारीरिक श्रम में भी कमी आती है, और आलस भी बढ़ने लगता है, जिसके कारण आपको मोटापे जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

ठण्ड महसूस होना या बुखार होना

दिन में यदि आप सोते हैं तो इसके कारण आपको ठण्ड अधिक लगती है, और बुखार होने के चांस भी बहुत ज्यादा होते हैं। और बुखार होने के कारण आपको परेशानी का ज्यादा सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में दिन में सोने से परहेज करना चाहिए और रात को भरपूर नींद लेनी चाहिए।

उल्टी आने की सम्भावना

दिन में सोने के कारण शरीर की प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ता है जिसके कारण कई बार उल्टी आने का मन होता है, या जी मचलाने लगता है।

आलस बढ़ता है

दिन में सोने के कारण आलस बढ़ता है और आलस बढ़ने के कारण न तो आपका किसी काम को करने का मन करता है, साथ ही चिड़चिड़ापन और गुस्सा भी अधिक महसूस होता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है

दिन में सोने के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर हो जाती है। जिसके कारण किसी भी बिमारी के लगने या इन्फेक्शन के चांस बढ़ जाते हैं।

स्किन से जुडी समस्या

दिन में सोने के कारण आपको स्किन से जुडी समस्या होने के चांस बढ़ जाते हैं। साथ ही इसके कारण शरीर के अंगो में सूजन की समस्या का सामना भी आपको कारण पड़ सकता है। इसीलिए यदि आप इस समस्या से बचना चाहते हैं तो आपको दिन में नहीं सोना चाहिए।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो आपको दिन के समय सोने से होते हैं, लेकिन यदि आपकी नींद रात को पूरी नहीं होती है, आप नाइट शिफ्ट में काम करते हैं, बीमार हैं तो आप चाहे तो दिन में आराम कर सकते हैं। क्योंकि नींद की कमी के कारण भी आपको परेशानी हो सकती है।

वात पित्त कफ दोष क्या होता है

वात पित्त कफ दोष : आज के समय में यदि हमे कोई भी दिक्कत होती है तो हम तुरंत डॉक्टर के पास जाते हैं।  नहीं तो अपने आप ही दवाई का सेवन करके उस परेशानी से आराम पा लेते हैं। लेकिन यदि उस परेशानी का जड़ से समाधान न किया जाए तो वह दिक्कत आपको बार बार होती है। ऐसे में आयुर्वेद में कुछ ऐसे नुस्खे बताएं गए हैं, जो आपके शरीर से सम्बंधित परेशानियों को जड़ से खत्म करने में आपकी मदद करते हैं। पुराने समय में जब कोई डॉक्टर नहीं होता था तो जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करके ही रोगो को खत्म किया जाता था। शरीर में तीन दोष होते है वात पित्त और कफ।

क्या होता है ये तीनो दोष?

कई लोग तो आजकल भी घर में छोटी छोटी दिक्कतों के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों का ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आपको परेशानी होने का मुख्य कारण क्या होता है? किस दोष के कारण आपको शारीरिक परेशानी होती है। तो आईये जानते हैं कौन कौन से शरीर में दोष होते हैं ?

त्रिदोष क्या होता है?

जब आपको कोई दिक्कत होती है और आप उसके इलाज के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक के पास जाते हैं। तो वो आपसे यह कहते हैं की शरीर में वात के ज्यादा बढ़ने या कमी के कारण दिक्कत हो गई है या फिर कफ का संतुलन बिगड़ने के कारण आपको शरीर में दिक्कत हो रही है।

लेकिन कभी आपने सोचा है की वात, कफ क्या होता है? और इनका संतुलन बिगड़ने का क्या कारण है? आदि। तो इसका जवाब है की आयुर्वेद के अनुसार आपके शरीर का स्वास्थ्य तीन चीजों पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है।

और वो तीन चीजें होती हैं वात, पित्त और कफ। यदि यह तीनों शरीर में संतुलित अवस्था में हैं तो आप भी स्वस्थ हैं, लेकिन यदि इनमें से किसी का भी संतुलन बिगड़ा यानी शरीर में यह कम या ज्यादा हुआ तो इसकी वजह से आपको शारीरिक परेशानी होने लगती है इसी वजह से आयुर्वेद में इन्हें ‘दोष’ कहा गया है। और यह तीन दोष होते हैं इसी कारण ही इन्हें त्रिदोष कहा जाता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की ये दोष क्या होते हैं?

वात दोष

हमारा शरीर पांच तत्व जल, पृथ्वी, आकाश, अग्नि और वायु से मिलकर बना है। और वात दोष वायु और आकाश इन दो तत्वों से मिलकर बना है। शरीर में होने वाली अधिकतर सभी प्रकार की क्रियाओं का जिम्मेवार वात दोष होता हैं। जैसे कि बॉडी में ब्लड फ्लो होना वात के कारण है।

वात की वजह से ही शरीर के सभी अंग अपना अपना काम करते हैं। साथ ही शरीर के किसी एक अंग का दूसरे अंग के साथ जो संपर्क है वो भी वात के कारण ही संभव है। वात इतना ज्यादा प्रभावशाली होता है की यह अन्य दोषों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा देता है। वात के असंतुलन के कारण यदि आपके शरीर में कोई दिक्कत है तो वो और बढ़ जाती है।

आपके शरीर के अंदर होने वाली कोई भी क्रिया जिसमें मूवमेंट है वो वात की वजह से ही होती है। जैसे कि शरीर से पसीना निकलना, यूरिन पास करना आदि। इसके अनुसार देखा जाए तो आयुर्वेद के अनुसार शरीर में सभी प्रकार के रोगों का कारण वात ही है। ऐसा माना जाता है की वात शरीर में पेट के आस पास होता है।

इसके अलावा नाभि से नीचे का भाग, जोड़ो में, रीढ़ की हड्डी, मस्तिष्क, कमर, जांघ, टांग और हड्डियाँ भी वात के रहने की जगह होती हैं। ऐसे में वात दोष में असंतुलन होने के कारण आपके शरीर की अधिकतर सभी क्रियाओं पर बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से आपको शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

पित्त दोष

पित्त दोष अग्नि और जल इन दो तत्वों से मिलकर बना हुआ है। जिस तरह वात शरीर की अधिकतर कोशिकाओं में मौजूद होता है उसी तरह पित्त भी शरीर की अधिकतर कोशिकाओं में मौजूद होता है। पित्त का मतलब होता है की जो तत्व शरीर में गर्मी पैदा करता है। पित्त का सबसे अहम काम बॉडी में पाचन तंत्र की क्रियाओं को नियमित करना व बॉडी में हार्मोनल बैलेंस को बनाएं रखना होता है। ऐसे में यदि आपके शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है तो इसका सबसे ज्यादा असर आपके पांचन तंत्र पर पड़ता है।

जिसकी वजह से आपको पाचन तंत्र से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि आप चाहते हैं की बॉडी में पित्त दोष सामान्य रहे तो इसके लिए आपको ऐसे कोई भी आहार का सेवन करना चाहिए जिससे पित्त दोष बढ़ें। इसके लिए आपको ज्यादा नमकीन, मसालेदार, चटपटे भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। साथ ही अपने आहार में उन चीजों को कभी नहीं लेना चाहिए जिनके सेवन से आपको पेट सम्बन्धी दिक्कत होती है।

कफ दोष

ये पृथ्वी और जल इन दो तत्वों से मिलकर बना हुआ है। ये शरीर की सभी कोशिकाओं में मौजूद होता है और शरीर के सभी अंगों का पोषण प्रदान करता है साथ ही बाकी दोनों दोष का संतुलन बनाएं रखने में भी करता है। आपके शरीर में कफ का मुख्य स्थान पेट, छाती है, गले का ऊपरी भाग, सिर, गर्दन, हड्डियों के जोड़, पेट का ऊपरी हिस्सा आदि होते हैं।

कफ शरीर के हिस्सों को गर्मी से सुरक्षित रखने में मदद करता है। इसके अलावा आपकी मानसिक और शारीरिक काम करने की क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता, धैर्य, आदि कफ के गुण होते हैं। इसीलिए कफ प्रकृति के लोग खुशमिजाज होते हैं। लेकिन यदि आपके शरीर में ये होता है तो इसमें में जो गुण होते हैं उन्ही से सम्बंधित परेशानियों का सामना आपको करना पड़ता है।

तो यह है वात पित्त कफ दोष से जुडी जानकारी, ऐसे में आपको अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि शरीर में इनका संतुलन बना रहे। जिसे आपको बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिल सके।

शादी के बाद मोटापा बढ़ने के क्या कारण होते हैं

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आपने ये तो सुना ही होगा की शादी दो व्यक्तियों की जिंदगी को बदल देता है। लेकिन क्या आपने यह सुना है की शादी आपके वजन को भी बढ़ा देती है? जी हाँ जिस तरह मोटापा बढ़ने का कारण आपका जंक फ़ूड खाना, गलत दिनचर्या, व्यायाम न करना आदि होता है उसी तरह मोटापे का एक कारण अब शादी होना भी हो गया है। ऐसा ज्यादातर कपल में देखा जाता है की शादी के बाद उनका वजन बढ़ने लगता है, और ऐसा ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिलता है। हो सकता है की उन्हें शादी की बहुत अधिक ख़ुशी हो तभी तो ख़ुशी के कारण उनका वजन बढ़ने लग जाता है।

ऐसा एक शोध में बताया गया है की शादी के बाद वजन बढ़ने का कारण उनका लाइफस्टाइल होता है। और साथ ही यह बात भी पता लगाईं गई है की शादी की रस्मो के दौरान दूल्हा और दुल्हन के वजन में दो किलो तक का इजाफा होता है। ऐसा इसीलिए भी होता है जहां कपल्स अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखते है वहीँ उनका शारीरिक श्रम जीरो होता है जिसके कारण उनका वजन बढ़ने लगता है। और महिलाओ का वजन इस समय तेजी से बढ़ता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं शादी के बाद वजन बढ़ने के और कौन कौन से कारण हो सकते हैं।

शादी के बाद वजन बढ़ने के कौन कौन से कारण होते हैं:-

शादी की ख़ुशी हर इंसान को बहुत ज्यादा होती है क्योंकि उन्हें अपनी लाइफ के हर पल को शेयर करने के लिए पार्टनर से ज्यादा एक दोस्त मिल जाता है। ऐसे में आप कितना ही कण्ट्रोल करें जैसे जैसे शादी का समय पास आता है आपकी ख़ुशी और भी बढ़ जाती है। जिससे आपका वजन बढ़ना तो लाज़मी है तो आइये अब जानते है की शादी के बाद वजन बढ़ने के और कौन कौन से कारण होते है।

हार्मोनल बदलाव होने के कारण:-

शादी के बाद जब महिला और पुरुष एक दूसरे से सम्बन्ध बनाते है तो इस दौरान उनके शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में उनकी ख़ुशी के बढ़ने के साथ उनकी भूख में भी इजाफा होता है जिसके कारण उनका वजन बढ़ने लगता है। इसीलिए शादी के बाद देखा जाता है की ज्यादातर सभी कपल के वजन में थोड़ा बहुत फ़र्क़ जरूर आता है, और महिलाओं के हिप्स और स्टेम का आकर भी बढ़ने लगता है।

टेंशन खत्म होने के कारण:-

अब आप यह सोच रहें होंगे की शादी के बाद तो टेंशन शुरू होती है। लेकिन शादी के बाद लड़का और लड़की की यह टेंशन खत्म हो जाती है की अब उनका पार्टनर उन्हें मिल गया है। ऐसे में वो बेफिक्र हो जाते है और अपना उतना अच्छे से न तो ध्यान रखते हैं, बस शादी के लडू को मन में फोड़ते रहते है जिसके कारण भी उनका वजन बढ़ने लगता है। क्योंकि अब उन्हें यह टेंशन नहीं होती है की उन्हें स्लिम ट्रिम रहना है या कोई उन्हें मना कर देगा बस ऐसे में वो अपना अच्छे से ख्याल नहीं रखते है, और शादी की ख़ुशी में उन्हें भूख भी ज्यादा लगने लग जाती है।

डाइट का अच्छे से ध्यान न रखने के कारण:-

शादी के बाद भूख भी ज्यादा लगने लगती है ऐसे में हर समय कुछ न कुछ खाने का मन करता है, इसीलिए खाना न खाकर बाहर की चीजों का सेवन अधिक लोग करते है, क्योंमि उन्हें अपने पार्टनर के साथ अधिक समय बिताने को मिलता है। जो की उनकी बॉडी में तेजी से फैट बढ़ाने का काम करता है और उनका वजन बढ़ने लग जाता है।

फैमिली प्लानिंग के बारे में सोचने के कारण:-

ज्यादातर लडकियां जो ससुराल में जाती है तो हर कोई उन्हें अपनी फैमिली को आगे बढ़ाने के लिए कहता है। ऐसे में फैमिली प्लानिंग के चक्कार में आप अपने पर ध्यान नहीं रख पाते है जिसके कारण प्रेगनेंसी, डिलीवरी और उसके बाद तो आपका वजन अपने आप ही बढ़ जाता है, और डिलीवरी के बाद फिट होने में आपको समय लगता है।

स्लिम ट्रिम दिखने की फ़िक्र नहीं:-

शादी से पहले हर महिला या पुरुष चाहता है की वो बिलकुल फिट रहे लेकिन शादी के बाद ऐसी कोई टेंशन नहीं होती है। ऐसे में अपनी फिटनेस के प्रति लापरवाह होने के कारण भी वजन धीरे धीरे बढ़ने लगता है। कई पुरुषो की को तोंद बाहर निकलने लगती है, ऐसे में लोग मज़ाक उड़ाने लगते है की लगता है की शादी की ज्यादा ख़ुशी हो गई है, ज्यादातर महिलाओं की हिप्स की चौड़ाई भी बढ़ने लगती है।

नो टाइम फॉर एक्सरसाइज:-

शादी के बाद व्यायाम, जिम, योगासन के बारे में तो सोचने का टाइम ही नहीं होता है। क्योंकि उस समय तो आप चाहते है की जितना हो सके आप अपना समय अपने पार्टनर के साथ बिताएं। और अपने हर पल को अपने पार्टनर के साथ खूब एन्जॉय कर सकें। ऐसे में शारीरिक श्रम कम होने के कारण बॉडी में चर्बी जमने लगती है और आपका वजन बढ़ने लगता है।

शारीरिक और मानसिक बदलाव होने के कारण:-

शादी की शुरुआत में महिला के मन में सौ तरह की बातें चलती है, और दिमाग में भी अलग अलग तरह की सोच हो रही होती है। ऐसे में शादी के बाद बॉडी में केवल मानसिक ही नहीं बल्कि शारीरिक बदलाव भी आते है जिसका असर आपके वजन पर पड़ता है और आपका वजन बढ़ने लग जाता है।

शादी के बाद वजन बढ़ने के अन्य कारण:-

  • जो कपल शादी के बाद अलग रहते है उनमे मोटापे की समस्या ज्यादा देती है क्योंकि शादी के बाद वो बहुत आलसी हो जाते है सिर्फ लाइफ को एन्जॉय करते है और फिटनेस को बिलकुल भूल जाते है।
  • शादी के बाद जब भी पार्टनर इकट्ठे बैठते है तो कुछ न कुछ तला हुआ स्नैक्स खाते रहते है जिसके कारण वजन तेजी से बढ़ता है।
  • कई महिलाएं बहुत लकी होती है जिनके पति शादी के बाद उन्हें बिस्तर से उतरने भी नहीं देते है ऐसे में ज्यादा प्यार भी उनके वजन के बढ़ने का कारण बनता है।
  • यदि महिला शादी के तुरंत बाद प्रेग्नेंट हो जाती है तो इसके कारण भी महिला का वजन बढ़ने लगता है।
  • जब आपकी शादी होती है तो हमेशा कोई न कोई आपको खाने पर बुलाता रहता है या आप भी एक दूसरे के साथ समय बिताने के लिए बाहर खाना खाने जाते है ऐसे में बाहर के खाने के अधिक सेवन के कारण भी वजन बढ़ने लगता है।
  • देखा जाये तो शादी के बाद जिम्मेवारियां भी बढ़ जाती है ऐसे में जो लोग पहले अपनी फिटनेस का ध्यान देते थे वो या तो अब पति का टिफिन और सास ससुर की चाय बनाने में बिज़ी हो जाते है और अपना ख्याल रखना बिलकुल बंद कर देते हैं।
  • परिवार के समय बिताने के चक्कर में लडकियां अपने लिए समय नहीं निकल पाती है इसीलिए ऐसा माना जाता है की ज्यादातर महिलाओं का शादी के बाद वजन बढ़ने लगता है।

तो यह है कुछ कारण जिनकी वजह से शादी के बाद वजन बढ़ने लगता है। क्या आपकी भी नई नई शादी हुई है और आप भी अपने वजन बढ़ने का कारण नहीं समझ पा रही है तो ऊपर दिए गए टिप्स से आपको अच्छे से समझ आ जायेगा की क्यों शादी के बाद आपका वजन बढ़ जाता है। और मोटापा अच्छी बात नहीं होती है इसीलिए अपनी फिटनेस का आपको शादी के बाद भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जिसे आपको अपनी पर्सनैलिटी को मेन्टेन करने में मदद मिल सके।

दांतो की देखभाल के सही तरीके ये है!

व्यक्ति की सुंदरता उसके चेहरे से झलकती है, जिसमे चेहरे के सभी पार्ट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। जिस प्रकार आँखे आपके व्यक्तित्व को ब्यान करती है उसी तरह आपकी मुस्कान लोगों को आपकी ओर आकर्षित करना का एक माध्यम है। लेकिन अगर इस मुस्कान में कुछ कमी आ जाए तो ये आपकी पर्सनालिटी को प्रभावित कर सकता है।

माना अच्छी मुस्कान होना आपके लिए अच्छा होता है लेकिन इसके अलावा भी कुछ है जिसका हमारी मुस्कान में खास महत्व होता है। और वो है हमारे दांत। व्यक्ति के दांतों की तुलना हमेशा उसकी सुंदरता से की जाती है। अक्सर यही देखा जाता है की जिनके दांत सुन्दर है वे खुद भी बहुत सुन्दर होंगे।

इसीलिए चेहरे की सुंदरता के साथ-साथ दांतों की सुंदरता का ध्यान रखना भी बहुत जरुरी है। क्योंकि सुन्दर दांत न केवल आपकी पर्सनालिटी को अच्छा बनाते है बल्कि सामने वाले पर आपकी अच्छी छाप छोड़ने में भी मदद करते है। परन्तु आजकल के व्यस्त समय में दांतों पर अधिक ध्यान दे पाना हर किसी के लिए संभव नहीं इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे आसान तरीके बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने दांतों की सुंदरता को बरकरार रखने के साथ-साथ उनकी सुंदरता को भी बनाये रख सकते है।

दांतों की देखभाल करने के तरीके :- 

1. खाने के बाद ब्रश :safed dant karne ke upay

बहुत से लोगो की आदत होती है की वे खाना खाने के तुरंत बाद ब्रश करते है लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए।
खाना खाने के बिलकुल तुरंत बाद ब्रश करने से दांतों को बहुत नुकसान पहुँचता है। दरअसल खाने में ऐसे तत्व होते है जो हमारे दांतों के लिए लाभकारी होते है। और जब हम खाना खाने के बाद ब्रश करते है तो उससे वे तत्व साफ़ हो जाते है। इसीलिए खाना खाने के कम से कम 1 घंटे बाद तक ब्रश न करें। ऐसा करने से उन तत्वों को दांतों में ठहरने का समय मिल जाता है।

2. अच्छे से ब्रश करें :

यह पढ़े : दांत में कीड़ा लगा है? ये है उपाय 

दांतों में ब्रश करने का एक सही तरीका होता है और अगर आप इस तरीके का इस्तेमाल नहीं करते है तो हर्जाना आपके दांतों को ही भुगतना पड़ता है। दांतों पर तेज तेज और जल्दी ब्रश करने से मसूड़ों में खून और सूजन की समस्या हो सकती है। इसीलिए जब भी ब्रश करें तो आराम से और हलके हाथों से करें। इससे दांतों और मसूड़ों पर अधिक दबाव नहीं पड़ेगा।

3. धूम्रपान छोड़ें :

धूम्रपान हमारे मसूड़ों के लिए काफी खतरनाक होता है। क्योंकि न केवल हमारे दांतों को हानि पहुंचाता है अपितु हमारे स्वास्थ्य को भी नुकसान होता है। धूम्रपान करने से मुंह में बहुत से बैक्टीरिया चले जाते है जो दांतों को नुकसान पहुंचाते है। तो अगर आप धूम्रपान करते है तो सावधान हो जाइये क्योंकि ये आपकी खूबसूरती में दाग लगा सकते है।

4. मीठे का इस्तेमाल :

मीठा दांतो के लिए दुश्मन के समान होता है। अधिक मीठा खाने से दांत खराब हो जाते है। इसीलिए मीठे खाने का कम से कम प्रयोग करना चाहिए। हम ये कतई नहीं कह रहे है की आप मीठा खाना छोड़ दें लेकिन हां, उसकी मात्रा थोड़ी कम कर दें।

5. ठंडे या गर्म :

अगर आप चाहते है की आपके दांत अधिक समय तक मजबूत और अच्छे बने रहे तो उसके लिए एक बात का ध्यान रखना बेहद जरुरी है और वो है खाने पीने की वस्तुएं। अर्थात जब भी कोई खाने की वस्तु का सेवन करें तो हमेशा इस बात का ध्यान रखे की वो बहुत गर्म या ठंडी नहीं हो। क्योंकि बहुत अधिक ठंडी और गर्म चीजें आपके दांतों को नुकसान पहुंचा सकती है।

यह भी पढ़े : दांत सफ़ेद करने के उपाय 

इसके अलावा आप अन्य उपाय का प्रयोग करके भी अपने दांतो की देखभाल कर सकते है. इसके लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है. इसके लिएdant me kida

  • पीलेपन की समस्या : लकड़ी के कोयले का प्रयोग करके भी दांतो के पीलेपन को हटाया जा सकता है. इसके लिए लकड़ी के कोयले को जलाने के बाद बनने वाली राख को अपने दांतो पर रोज लगाने से दांतो का पीलापन साफ़ हो जाता है.
  • सफ़ेद दांत : नीम के पत्तो की राख में कोयले का चूर्ण और कपूर मिलाकर अपने दांतो पर लगाने से दांत सफ़ेद होते है.
  • दो तीन स्ट्रॉबेरी को अच्छी तरह पीसकर उनका पेस्ट बनाकर अपने दांतो पर लगाएं. कुछ दिनों के लगातार प्रयोग से आपके दांत सफ़ेद होने लगेंगे.
  • दांतों पर दाग : सेब के सिरके का प्रयोग चाय कॉफ़ी आदि से पीले हुए दांतो को सफ़ेद करने के लिए किया जाता है. इसके लिए 1 महीने तक लगातार से के सिरके से अपने दांतो को रगड़े आपके दांतो का पीलापन अपने आप साफ़ हो जायेगा और वे सफ़ेद होने लगेंगे.

डिलीवरी के समय होने वाले दर्द को कम करने के उपाय

बच्चे के जन्म के समय होने वाला दर्द असहनीय होता है। और यह दर्द पांच या दस मिनट के लिए नहीं होता है। बल्कि यह दर्द महिला को चौबीस घंटे तो कुछ महिलाएं दो दिन तक इस दर्द से परेशान रह सकती है। तो कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जिन महिलाओं को पांच सात घण्टे तक ही इस दर्द का सामना करना पड़ता है। लेकिन महिला यदि कुछ बातों का ध्यान रखती है तो महिला को इस दर्द के कारण होने वाली परेशानी से आराम पाने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको उन्ही टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रसव पीड़ा को कम करने के लिए सही पोजीशन अपनाएं

प्रसव के समय होने वाले दर्द से बचने के लिए महिला को अपनी सही पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए है। सही पोजीशन का ध्यान रखने से भी प्रसव के दौरान होने वाले दर्द पर प्रभाव पड़ता है। डिलीवरी के समय सीधे खड़े रहने से प्रसव में तेजी आती है क्योंकि खड़े होने से गुरुत्वाकर्षण बल शिशु के जन्म को और आसान बनाने में मदद करता है। लेकिन यदि महिला पीठ के बल लेटती हैं तो इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है। जो प्रसव को मुश्किल बना देता है। ऐसे में दर्द से बचने के लिए या तो महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान पलंग या दीवार का सहारा लेकर महिला को थोड़ी देर खड़े रहना चाहिए या फिर महिला को बेड पर पीठ के नीचे तकिये रखकर लेटना चाहिए।

थोड़ा चलें

चहलकदमी भी प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को थोड़ा कण्ट्रोल करने में मदद करती है। लेकिन आपको अकेले नहीं बल्कि अपने पार्टनर, नर्स या घर के किसी सदस्य का हाथ पकड़कर घूमना चाहिए। ध्यान रखें की ज्यादा तेजी से न चलें।

मसाज

प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को सामान्य करने के लिए महिला को किसी से थोड़ी मसाज करवानी चाहिए आप पीठ, सिर, टांगों की मालिश करवा सकती है। ऐसा करने से बॉडी में गुड़ फील करवाने वाले हॉर्मोन निकलते हैं जो प्रसव के दौरान दर्द कम करने में मदद करते हैं।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज है जरूरी

प्रसव के दौरान तेजी से सांस लेने के बजाए आपको लम्बी लम्बी सांसे लेनी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से महिला के अंदर ऊर्जा बनी रहती है। जिससे आपको प्रसव के दर्द को कम करने में आसानी होगी। साथ ही ब्रीदिंग एक्सरसाइज से एक फायदा यह भी है कि इससे गर्भ में शिशु को भी पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। डिलीवरी के दौरान होने वाले दर्द को कम करने का यह बेहतरीन उपाय है।

आराम करें

प्रसव पीड़ा के दौरान आराम करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन यदि महिला आराम करती है, शांत रहती है, तनाव नहीं लेती है, तो ऐसा करने से महिला को बहुत फायदा मिलता हैं। इससे डिलीवरी को आसान बनाने के साथ प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में मदद मिलती है।

खान पान

दर्द के दौरान खान पान थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन डिलीवरी दर्द शुरू होने से पहले यदि महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है। पानी का भरपूर सेवन करती है तो ऐसा करने से भी महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। जिसे प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के साथ उसे सहन करने की हिम्मत भी महिला को मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से डिलीवरी के दौरान होने वाले दर्द की परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है। तो यदि आपकी भी डिलीवरी का समय पास आ रहा है तो आपको भी प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए इन टिप्स को जरूर ट्राई करना चाहिए।

नार्मल डिलीवरी के लिए प्रसव से पहले महिलाएं यह खाएं

डिलीवरी का समय किसी भी महिला के लिए बहुत खास होता है क्योंकि वो नौ महीने तक इस कीमती और मह्त्वपूर्ण पल का इंतज़ार करती है। क्योंकि यह वो समय होता है जब उसके गर्भ में पल रहा शिशु उसकी दुनिया का एक हिस्सा बनने वाला होता है। ऐसे में महिलाओं के मन यह बात भी चल रही होती है की उनकी डिलीवरी नार्मल होगी या फिर सिजेरियन। लेकिन यदि आप चाहती है की आपकी डिलीवरी नार्मल हो तो इसके लिए आपको प्रसव से पहले कुछ चीजों का सेवन शुरू कर देना चाहिए। वैसे तो यदि आप पूरी प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखते हैं। तो इससे आपको और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है और आपकी फिटनेस आपकी नार्मल डिलीवरी के चांस को भी बढ़ाती है।

जी हाँ यह बिल्कुल सच है की आप यदि डिलीवरी का समय पास आने पर कुछ खास चीजों का सेवन करती हैं तो इससे आपकी डिलीवरी के नार्मल होने के चांस को बढ़ाया जा सकता है। जैसे की नौवे महीने में आप घी का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है, इससे न केवल आपको फायदा मिलता है बल्कि इससे गर्भाशय में संकुचन भी होता है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के नार्मल डिलीवरी से बाहर आने के चांस बढ़ जाते है। इसके अलावा आप यदि अपनी फिटनेस के लिए सभी मिनरल्स युक्त संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करते हैं। तो इससे भी आपको नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। तो आइये नार्मल डिलीवरी के लिए कुछ ऐसे ही टिप्स जो आपको नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करते है।

नार्मल डिलीवरी के लिए प्रसव से पहले यह खाएं:-

पूरी प्रेगनेंसी में ही महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि यदि महिला ऐसा करती है, तो ऐसा करने से महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपका बेहतर और कुछ खास चीजों का सेवन आपकी नार्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में भी मदद करता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की नार्मल डिलीवरी के लिए महिला को प्रसव से पहले क्या क्या खाना चाहिए।

अनानास का करें सेवन:-

अनानास में ब्रोमेलैन नामक एंजाइम मौजूद होते है जो आपके गर्भाशय को नरम करने में आपकी मदद करता है। ऐसे में यदि आपके नौ महीने पूरे हो गए है या होने वाले हैं तो आपको अनानास का सेवन करना चाहिए, या फिर इसका जूस पीना चाहिए। इससे आपकी प्रसव की पीड़ा उत्त्पन करने में मदद मिलती है, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें की आप इसका अधिक मात्रा में सेवन न करें। क्योंकि ज्यादा सेवन आपके पेट को खराब भी कर सकता है। और आप ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगी की डिलीवरी के समय आपका पेट खराब हो।

डेयरी उत्पाद भी होते हैं फायदेमंद:-

प्रोटीन और कैल्शियम का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को बढ़ाने में मदद करता है। और दही में तो यह भरपूर होता है, इसके अलावा डेयरी उत्पाद में मैग्नीशियम, जिंक, फॉस्फोरस, आदि भी भरपूर होता है जिससे आपको नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसीलिए जितना हो सके प्रेगनेंसी के दौरान आपको डेयरी उत्पाद का भरपूर सेवन करना चाहिए। और दही के सेवन इ प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले संक्रमण की सम्भावना भी कम हो जाती है।

पालक का करें भरपूर सेवन:-

आयरन, विटामिन, फोलेट, व् अन्य मिनरल्स से भरपूर पालक का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से आपकी नार्मल डिलीवरी की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स न केवल आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि आपकी पाचन क्रिया को भी मजबूत करते है। इसीलिए आप इसे सलाद, सब्ज़ी, सूप आदि के रूप में अपने आहार में शामिल कर सकते है।

कम वसा वाले मीट का सेवन करें:-

प्रेगनेंसी के दौरान अपने शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाने और नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ने के लिए आप कम वसा वाले मीट का सेवन कर सकती है। यह आसानी से बचने के साथ आपको प्रेगनेंसी के दौरान फिट रखने में भी मदद करता है।

अंडे का सेवन करें:-

विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम, कैलोरी, व् अन्य मिनरल्स से भरपूर अंडा भी परेहनानकी के दौरान आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। न केवल यह आपको फिट बनाएं रखने में मदद करता है। बल्कि इसमें कोलिन नाम का पोषक तत्व होता है, जो की विटामिन जैसा ही होता है, यह आपके मस्तिष्क के विकास के लिए मह्त्वपूर्ण माना जाता है, यदि किसी बच्चे में इसकी कमी होती है तो वो दिमागी रूप से असहज हो सकता है। और यदि आप प्रेगनेंसी के समय यदि आप अंडे का सेवन करते है तो यह शिशु के दिमागी विकास के साथ आपकी नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में भी मदद करता है।

दालें और फलियों का करें सेवन:-

दालें और फलियों के भरपूर सेवन से भी आपको प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से पोषक तत्व तो मिलते ही हैं। बल्कि इससे शिशु को होने वाले कई तरह के संक्रमण से बचाव करने में भी मदद मिलती है। और इसके साथ यदि आप पूरी प्रेगनेंसी में इनका सेवन भरपूर मात्रा में करते हैं। तो ऐसा करने से इससे आपको फिट बनाएं रखने में मदद मिलती है जिससे आपके नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

कैस्टर ऑयल का सेवन भी बढ़ाता है प्रसव पीड़ा:-

इस उपाय का इस्तेमाल आपको अपने डॉक्टर की राय के बाद ही करना चाहिए। यदि आप कैस्टर ऑयल को संतरे के जूस में थोड़ा सा डालकर इसका सेवन करते है। तो इसके कारण आपका मल पतला आने लगता है, जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन आना शुरू हो जाता है, और आपको हल्की हल्की पीड़ा का आभास होने लगता है। ऐसा भी हो सकता है की यह कोई असर न करें और आप इसका अधिक सेवन करें तो इसके कारण आपके पेट पर बुरा प्रभाव पड़े।

दूध में घी डालकर पीएं:-

दूध में गाय का शुद्ध देसी घी डालकर पीएं, इससे ही गर्भाशय नरम होने लगता है और बच्चे को गर्भाशय की ग्रीवा तक आने में मदद मिलती है। इसके लिए आप दिन में दो बार एक गिलास गर्म दूध में दो चम्मच घी डालकर सेवन करें, यह केवल प्रसव पीड़ा को उत्त्पन्न करने में ही नहीं बल्कि आपके शरीर को स्वस्थ रखने में भी आपकी मदद करता है।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने के लिए जरुरी है की आपके शरीर में पानी की कमी बिल्कुल भी न हो। क्योंकि पानी का सेवन करने से न केवल आपकी बॉडी हाइड्रेट रहती है बल्कि इसके कारण गर्भाशय को भी नरम रहने में मदद मिलती है। साथ ही आपको प्रेगनेंसी के पूरा समय पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है।

स्वस्थ व् संतुलित आहार का सेवन करें:-

नार्मल डिलीवरी के लिए आपकी बॉडी की फिटनेस भी बहुत मायने रखती है ऐसे में यदि आप चाहते हैं की आपकी डिलीवरी नार्मल हो तो इसके लिए आपको स्वस्थ व् संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। यदि आप स्वस्थ रहेंगे तो इससे शिशु का विकास भी अच्छे से होने में मदद मिलती है। साथ ही आपके नार्मल डिलीवरी के चांस भी ज्यादा रहते है।

प्रसव पीड़ा को बढ़ाने के अन्य टिप्स:-

  • वॉकिंग करें क्योंकि ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु को गर्भाशय की ग्रीवा तक आने में मदद मिलती है, जिससे प्रसव पीड़ा होने लगती है।
  • डिलीवरी का समय पास आने पर आपको सम्बन्ध भी बनाना चाहिए, यदि आपकी प्रेगनेंसी में किसी तरह की समस्या नहीं है तो, यदि आप ऐसा करते हैं तो इस दौरान निकलने वाला तरल पदार्थ भी गर्भाशय की ग्रीवा पर चिकनाहट करता है जिससे शिशु को नीचे की और आने में मदद मिलती है।
  • गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने के लिए महिला गर्म पानी से भी स्नान कर सकती है, इससे भी प्रसव पीड़ा को उत्त्पन करने में मदद मिलती है।
  • यदि आप दिन में तीन बार एक एक घंटे के लिए निप्पल को उत्तेजित करती है तो यह भी प्रसव पीड़ा को बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका होता है, क्योंकि ऐसा करने से ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन का स्त्राव होता है जो की गर्भाशय में संकुचन को उत्त्पन होने लगता है।
  • प्राणायाम और व्यायाम को नियमित रूप से करें इससे भी प्रसव पीड़ा को उत्तेजित करने में मदद मिलती है।
  • तनाव न लें यह आपके लिए परेशानी बन सकता है, इसीलिए प्रेगनेंसी का पूरा समय तनाव से दूरी रखें और खुश रहें।
  • भरपूर नींद भी लेना है आपके स्वास्थ्य को फिट रखने के लिए जरुरी इसीलिए नींद के प्रति भी किसी तरह की लापरवाही न करें।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप प्रसव पीड़ा को उत्त्पन कर सकते हैं और ऐसा करने से आपकी नार्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा आपको कोई भी ऐसा काम भी नहीं प्रसव पीड़ा को बढ़ाने के लिए करना चाहिए जिससे आपकी परेशानियां बढ़ जाएँ और आपको या गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचे। इसके अलावा आप चाहे तो इसके लिए डॉक्टर से भी राय के सकते है। और डिलीवरी के समय के पास आने पर आपको समय समय पर डॉक्टर से राय लेते रहना चाहिए।

गर्भावस्था में विटामिन सी लेना क्यों जरुरी होता है?

प्रेगनेंसी में विटामिन सी लेना क्यों लेना जरुरी होता है, प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्वों की बहुत जरुरत होती है। क्योंकि पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही यह पोषक तत्व गर्भनाल के जरिए शिशु तक पहुँचते हैं जो महिला के पेट में पल रहे बच्चे के विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं।

तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम एक ऐसे पोषक तत्व की बात करने जा रहे हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को जरूर लेना चाहिए और वो है विटामिन सी। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में विटामिन सी से कौन से फायदे मिलते हैं और कौन से खाद्य पदार्थों में विटामिन सी की अधिकता होती है।

प्रेगनेंसी में विटामिन सी लेने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान विटामिन सी लेने से गर्भवती महिला व् शिशु को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रेगनेंसी में विटामिन सी लेने से इम्युनिटी बढ़ती है

  • विटामिन सी एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
  • जिससे गर्भवती महिला व् शिशु को हर तरह के संक्रमण से बचें रहने में मदद मिलती है।

आयरन को अवशोषित करने में मदद करता है

  • विटामिन सी बॉडी के सभी अंगों में आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है।
  • जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी जैसी परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही विटामिन सी बॉडी में फोलेट के स्तर को भी बॉडी में बनाए रखने में मदद करता है जो बच्चे के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है।
  • साथ ही इससे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाने में मदद मिलती है।

शिशु के लिए है जरुरी

  • माँ के पेट में पल रहे बच्चे के लिए विटामिन सी युक्त आहार का लेना बहुत जरुरी होता है।
  • क्योंकि विटामिन सी बच्चे के ऊतकों के बेहतर विकास, हड्डियों के बेहतर विकास, दिमाग के बेहतर विकास, स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

स्टोन की समस्या

  • विटामिन सी युक्त आहार लेने से यूरिन में पीएच स्तर को सही बने रहने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को पथरी की समस्या से बचें रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में विटामिन सी लेने से तनाव दूर होता है

  • बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव में आ जाती है।
  • खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनने जा रही होती है उन्हें यह समस्या ज्यादा हो सकती है।
  • ऐसे में विटामिन सी युक्त डाइट लेने से प्रेग्नेंट महिला को तनाव जैसी समस्या से बचें रहने में मदद मिलती है।

विटामिन सी युक्त आहार कौन से होते हैं?

बहुत से ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमें विटामिन सी की अधिकता होती है। और जिनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना फायदेमंद होता है। तो आइये अब जानते हैं की विटामिन सी किन खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है।

  • संतरा, निम्बू, मौसम्बी, स्ट्रॉबेरी, अमरुद, कीवी, अंगूर जैसे फलों में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।
  • हरी सब्जियां जैसे की पालक, ब्रोकली आदि में भी विटामिन सी की अधिकता होती है।
  • लाल, पीली शिमला मिर्च व् हरी मिर्च में भी विटामिन सी की मात्रा मौजूद होती है।
  • आंवले में भी विटामिन सी मौजूद होता है और गर्भवती महिला के लिए आंवलें का सेवन फायदेमंद होता है।
  • टमाटर, शलगम, आलू, मटर, फूलगोभी, पत्तागोभी आदि में भी विटामिन सी की मात्रा मौजूद होती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान विटामिन सी क्यों लेना चाहिए उससे जुड़े कुछ खास टिप्स, साथ ही विटामिन सी कौन से आहार में मौजूद होता है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी विटामिन सी युक्त आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को इसका फायदा मिल सकें।