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पेट में बच्चा क्या-क्या हरकत करता हैं? और कौन से महीने से

पेट में शिशु के हरकत: पेट में बच्चा क्या-क्या हरकत करता हैं? और कौन से महीने से:-

जैसे ही किसी भी महिला को पता चलता हैं की वो माँ बनने वाली हैं, तो उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं होता हैं, और महिला क्या उसका सारा परिवार ही बच्चे के आने की ख़ुशी से झूम उठता हैं| गर्भावस्था के दौरान महिला में बहुत से बदलाव आते हैं| जिसकी वजह से महिला बहुत परेशान रहती हैं| इसके साथ आपको बच्चे के आने के बाद इन बातो का अहसास तक नहीं होता हैं| बच्चे के आने से हर महिला की जिंदगी की नई शुरुआत होती हैं| और साथ ही उसकी जिंदगी के लिए नया अनुभव भी होता हैं|

ऐसा कहा जाता हैं की जैसे ही बच्चा जन्म लेता हैं तो उसकी नई जिंदगी की शुरुआत होती हैं| परंतु सच्चाई तो ये हैं की बच्चे की जिंदगी की शुरुआत तो माँ के गर्भ में ही शुरू हो जाती हैं| क्योंकि माँ के गर्भ में भी बच्चा घूमता हैं| साँस लेता हैं, और ये सत्य हैं, यदि आपको जानना हैं तो आप किसी भी महिला से पूछ सकती हैं| क्योंकि कई बार बच्चे पेट में अचानक से ऐसी हरकत करते हैं की माँ हंसती हैं, और सबसे अपने बच्चे की हरकत के बारे में चर्चा करती हैं| और जैसे -जैसे बच्चे के गर्भ में दिन बीतते हैं वैसे ही वो ज्यादा हरकते करनी शुरू कर देता हैं|पेट में शिशु के हरकत

कई बार ऐसा होता हैं की बच्चा थोड़े समय के लिए शांत हो जाता है | तो माँ चाहती हैं की वो हरकत करे, इसके लिए वो तरह-तरह के प्रयत्न करती हैं| परंतु यदि ज्यादा समय तक बच्चा हरकत न करे तो हमे अपने डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए| आइये अब जानते हैं की बच्चा माँ के पेट में कौन-कौन सी हरकत करता हैं| और कौन से महीने से माँ इस अनुभव का अहसास कर पाती हैं|

बच्चा पेट में क्या-क्या हरकत करता हैं:-

आइये जानते है की बच्चा माँ के गर्भ में कौन- कौन सी हरकत करता हैं और कबसे करना शुरू कर देता हैं, इसके आलावा कुछ ऐसी हरकते भी होती हैं , जिन्हें आप महसूस नहीं कर सकते हैं, परंतु बच्चे करते हैं वो भी इस प्रकार हैं|

  • सात से आठ सप्ताह के बीच तक आपका शिशु माँ के गर्भ में सामान्य गतिविधियां शुरु कर देता है, जैसे कि एक तरफ मुड़ना और चौंकना, आदि पर आप इसका अनुभव थोड़े समय के बाद ही कर पाते हैं|
  • नौ सप्ताह के आसपास वह हिचकी लेना शुरु कर सकता है|
  • 10 सप्ताह में वह अपना सिर झुका और घुमा सकता है, और अपना जबड़ा खोल और फैला सकता है|
  • 11 सप्ताह का होने पर वह जम्हाई यानि की अंगड़ाई ले सकता है|
  • 14 सप्ताह में वह अपनी आंखें घुमा सकता है|
  • इन गतिविधियों को आप अल्ट्रासॉउन्ड या स्कैन के दौरान महसूस कर सकते हैं|

20 से 24 सप्ताह में बच्चे करते हैं माँ के गर्भ में ये हरकते:-

जैसे-जैसे माँ के गर्भ में बच्चे के सप्ताह गुजरते हैं, आपके शिशु की गतिविधियां धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं| आप यह जान सकती हैं कि आपका शिशु दिन में अधिक गतिशील रहता है| या फिर अपने हाथ-पांव की हलचल और कला बाजियों का प्रदर्शन वह शाम को ही करता है| और बच्चे शाम के समय ही सबसे ज्यादा हरकते करते हैं|

24 से 28 सप्ताह में बच्चा करता हैं ये प्रदर्शन:-

24 से 28 सप्ताह में आप यह ध्यान देना शुरु कर सकती हैं कि आपका शिशु हिचकियां कब लेता है| शिशु की हिचकियां आपको धक्का लगने जैसा महसूस कराती हैं। एमनियोटिक थैली में अब करीब 750 मि. ली. द्रव्य होता है| इससे शिशु को अपनी मर्जी से चारों तरफ घूमने के लिए पूरा स्थान मिल जाता है| आप यह भी महसूस कर सकती हैं कि अचानक हुई आवाज से शिशु उछलने लगता है| क्योंकि वो अचानक से चौक जाता हैं|

29 से 32 सप्ताह में क्या करता हैं शिशु माँ के गर्भ में:-

29 से 32 सप्ताह में बच्चा आकर में बढ़ने लगता हैं, इसीलिए उसके बढ़ने के साथ-साथ गर्भ में उसे जगह कम पड़ने लगी है| जिसके कारण आप शिशु की हलचल में शायद आप काफी तेजी महसूस करेंगी| इस सप्ताह के बाद आपको महसूस होने वाली शिशु की गतिविधियों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जाएगी| क्योंकि आपके शिशु के पास अब घूमने के लिए काफी कम स्थान है| और आपको ज्यादा देरी की नहीं बल्कि थोड़े समय के लिए ही अपने बच्चे की गतिविधियां महसूस कर पाती हैं|

36 सप्ताह के बाद माँ के गर्भ में होने वाली शिशु की हरकत:-

इस समय तक आमतौर पर शिशु सिर के बल हो कर नीचे की ओर जन्म से पहले की मुद्रा में आ जाता है| और इस समय में बच्चे के हाथो और पैरो की गतिविधियां बहुत ज्यादा शुरू हो जाती हैं| और कई बार तो आप शिशु के नन्हें पैरों की मार से दर्द भी महसूस हो सकता है| और ऐसे समय पर आपको बच्चे के आने की बहुत ज्यादा बेसब्री हो जाती हैं| आपको अपना पूरा ध्यान रखना चाहिए| और साथ ही बच्चे की माँ के गर्भ में होने वाली गतिविधियों का आनंद लेना चाहिए|

बच्चा पेट में कब से हरकत करना शुरू कर देता हैं:-

गर्भावस्था के पांचवे महीने के बाद बच्चा माँ के गर्भ में हलचल करनी शुरू कर देता हैं, शुरुआत में ये थोड़ी कम होती हैं| उन महिलाओ को सामझने में वक़्त लग सकता हैं जो की पहली बार माँ बनने के अनुभव ले रही होती हैं| और यदि आप पहले भी माँ बन चुकी हैं, तो इन संकेतों से आप आसानी से पहचान लेंगी| और आप शिशु के हिलने-डुलने का एहसास 16 हफ्तों के आसपास महसूस कर सकती हैं| परंतु पहली बार माँ बनने वाली महिलाओ को इन सब को समझने में समय लग सकता हैं|

पहली बार माँ बनने वाली महिलाओ को बहुत सी बातो को पता चलता हैं, जो बच्चा माँ के गर्भ में करता हैं| और इन सबका अहसास लेने का अनुभव भी भगवान् ने केवल एक औरत को ही दिया हैं| तो हर एक औरत को इस अनुभव का अहसास होता हैं| और ये उनके जीवन का सबसे खास लम्हा होता हैं| और यदि 24 सप्ताह तक आपने अपने शिशु की कोई गतिविधि महसूस नहीं की है, तो अपनी डॉक्टर से संपर्क जरूर करें|

वह आपके शिशु के दिल की धड़कन सुनेंगी और अल्ट्रासाउंड स्कैन या फिर जरुरत हुई तो किसी और चीज की जरुरत हुई तो उसकी भी व्यवस्थज करेगी| और ऐसा होने पर बिलकुल भी देरी न करे|

तो ये सब वो पल हैं जो एक माँ जब जीती हैं जब बच्चा माँ के गर्भ में होता हैं| और साथ ही साथ इस अनुभव को हमेशा के लिए अपने साथ जोड़ कर रखती हैं| महिलाओं को ये अपने खूबसूरत पल अपने साथी के साथ जरूर शेयर करने चाहिए| क्योंकि इससे आपकी खुशिया और भी बढ़ जाती हैं| और इन पलो को आप अपनी जिंदगी के यादगार पलो में शामिल कर सकते हैं| ये बात जान कर ही आप ख़ुशी से झूम उठती हैं की आप माँ बनने वाली हैं| और जैसे ही बच्चा आपकी गोद में आता हैं तब तो आपको लगता हैं की जिंदगी बस यही थम जाएँ|

इसके साथ जरुरी है की आप अपने बच्चे के ध्यान के बारे में पूरी जानकारी रखे, डॉक्टर द्वारा बताएं गए सभी परामर्श का पालन करे| आपको अपने बच्चे के पैदा होने के बाद भी उसकी हरकतों से हर दम हैरान करता रहता हैं| तो इन सब बातो का आपको ध्यान रखना चाहिए| और अपने बच्चे के साथ अपने आने वाले कल की नई उम्मीद को बढ़ाना चाहते हैं| तो आप पाने पति और अपने बच्चे के साथ हर एक पल के मजे ले|

आप इस टॉपिक को जरूर पड़े, और यदि आपको ये टॉपिक पसंद आएं तो इसे शेयर भी जरूर करे| और इस बारे में अपनी राय भी व्यक्त करे|

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प्रेगनेंसी के दौरान मूंगफली का सेवन करना चाहिए या नहीं

गर्भावस्था में मूंगफली

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का हमेशा कुछ न कुछ अलग खाने की इच्छा हो सकती है, लेकिन खान पान की चीजों को लेकर गर्भवती महिला के मन में हमेशा यही चलता रहता है की इस चीज को खाना प्रेगनेंसी के दौरान सुरक्षित है या नहीं। जैसे की मूंगफली, मूंगफली को आपने लोगो को अपने टाइम पास के लिए खाते हुए देखा होगा, लेकिन कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान इसे खाने की इच्छा हो सकती है। तो आपको अपनी पसंद से परहेज करने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान मूंगफली का सेवन किया जा सकता है। साथ ही सिमित मात्रा में गर्भवती महिला इसे नियमित भी खा सकती है, क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होती है।

प्रेग्नेंट महिला को कितनी मूंगफली का सेवन करना चाहिए?

पर्याप्त मात्रा में ही मूंगफली का सेवन ही गर्भवती महिला को करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों को इसका भरपूर फायदा मिल सके। और प्रेगनेंसी के दौरान साठ से सौ ग्राम तक मूंगफली का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है, और मूंगफली के सेवन के लिए आप इसे भिगोकर, खाने की चीजों में ड्राई फ्रूट की तरह डालकर, इसे कच्चा या भूनकर, चाट आदि बनाकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते है।

प्रेगनेंसी में मूंगफली खाने के फायदे

कैल्शियम, आयरन, जिंक, विटामिन्स, प्रोटीन, आदि जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो न केवल गर्भवती महिला के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान मूंगफली का सेवन करने से गर्भवती महिला को कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

पाचन क्रिया

मूंगफली का सेवन करने से गर्भवती महिला को कब्ज़ जैसी समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही नियमित इसका सेवन करने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है, जिससे भूख से जुडी समस्या से निजात पाने के साथ खाने को आसानी से हज़म करने में फायदा होता है, इसीलिए पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने के लिए और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए गर्भवती महिला को मूंगफली का सेवन जरूर करना चाहिए।

हड्डियों की मजबूती

कैल्शियम और विटामिन डी की मात्रा से भरपूर मूंगफली का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने में मदद मिलती है। साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

बैड कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला मूंगफली का सेवन करती है तो इससे कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल करने में मदद मिलने के साथ हदय सम्बन्धी समस्या के होने के खतरे को भी कम करने में मदद मिलती है।

खून की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी गर्भवती महिला के लिए स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या जैसे की एनीमिया का कारण बन सकती है, खून की कमी के कारण डिलीवरी के दौरान भी परेशानी आ सकती है और साथ ही इससे शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला रोजाना पचास से सौ ग्राम तक मूंगफली का सेवन करती है तो इससे बॉडी में खून की मात्रा को पर्याप्त बनाये रखने में मदद मिलती है जिसके कारण गर्भवती महिला को इन परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

विटामिन व् मिनरल्स

विटामिन के, विटामिन इ, विटामिन बी, कैलरीज़, प्रोटीन, मैग्नीशियम व् अन्य मिनरल्स से भरपूर होने के कारण मूंगफली का सेवन करने से यह सब पोषक तत्व गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में मिलते है जिससे गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

प्रोटीन

प्रोटीन से भरपूर मूंगफली का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में पुराने सेल्स की मरम्मत और नए सेल्स का निर्माण करने में मदद मिलती है। साथ ही इससे रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है, जिससे गर्भवती महिला को फिट और एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

फोलेट

मूंगफली में फोलेट प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करने के साथ शिशु को जन्म के समय होने वाली दिक़्कतों को भी कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा मूंगफली का भरपूर सेवन करने से समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में मूंगफली खाने के नुकसान

  • मूंगफली का अधिक सेवन करने से गर्भवती महिला को एलर्जी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • गले में सूजन, खांसी, दर्द जैसी परेशानी का सामना भी गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।
  • यदि आपको मूंगफली का सेवन करने से किसी भी तरह की एलर्जी होती है तो इसका सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।
  • मूंगफली गर्म होने के कारण शरीर के तापमान को बढ़ा सकती है ऐसे में अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो गर्भवती महिला को मूंगफली का सेवन करने से हो सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान मूंगफली का सेवन करना चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में शिशु को उसका फायदा मिल सके, लेकिन जरुरत से ज्यादा भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए की आपको किसी सेहत सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़े। डिलीवरी के बाद भी गर्भवती महिला को मूंगफली का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि मूंगफली का सेवन करने से स्तन में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

रसोई गैस पर खाना बनाते समय और बाद में बरतें ये सावधानियां

Things to Remember Before & After Using LPG Gas Cylinder 

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प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा चलाये गए “प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना” के तहत आज भारत के अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में LPG गैस का इस्तेमाल मुख्य इंधन में रूप में होने लगा है। छोटे से छोटे गांव से लेकर बड़े से बड़े कसबे तक हर घर तक LPG कनेक्शन पहुँचाना इस योजना का उद्देश्य है। जो काफी हद तक संभव हो चुका है। परन्तु एक ज्वलनशील इंधन होने के कारण इसके प्रयोग में खास सावधानी बरतनी चाहिए।

लेकिन गाँवों में गैस कनेक्शन के बढ़ते उपयोग को देखकर भी गैस उपलब्ध कराने वाली कंपनियां लोगों को इसके प्रयोग और इसके प्रयोग में रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी देना भूल जाते है। यही कारण है की आज भी बहुत से लोग इस सुविधा का ठीक ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाते। शहरों के लोग को इन्टरनेट, स्मार्टफोन, समाचार आदि की मदद से इनके बारे में जान लेते है। लेकिन आज भी बहुत से लोग इस जानकारी से अनजान है इसीलिए आज हम आपको LPG लगाते समय और इसका इस्तेमाल करते समय रखी जानी वाली सावधानियों के बारे में बता रहे है। लेकिन इससे पूर्व यह जान लेना जरुरी है की LPG के इस्तेमाल में इतनी सावधानी क्यों रखी जाती है।

एलपीजी क्या है?

वास्तव में LPG यह खाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लिक्विड गैस होती है। जो ज्वलनशील होती है। जरा सी लापरवाही बरतने से जान और सामन दोनों की हानि होने की संभावना रहती है। आगे हम आपको इसके प्रयोग करने से पूर्व और प्रयोग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में बता रहे है।

रसोई गैस का इस्तेमाल करने से पूर्व ये सावधानी बरतें :-

  • गैस से संबंधित सभी उपकरण जैसे – गैस नोब, रबर पाइप, रेगुलर आदि BIS/ISI प्रमाणित होने चाहिए। जिन्हें आप गैस कनेक्शन के समय पंजीकृत गैस विक्रेता से ले सकते है।
  • नया सिलेंडर लेने पर कम्पनी की सील और सुरक्षा कैप (टोपी) की ठीक तरह से जाँच कर लें।
  • गैस के साथ आई सुरक्षा कैप को गैस के साथ बांधे रखें।
  • समय-समय पर अपने गैस उपकरणों और गैस पाइप की जाँच और सर्विस कराते समय।
  • हर 2 साल में गैस पाइप बदलें और उसके स्थान पर कंपनी की गैस पाइप का ही इस्तेमाल करें।
  • सिलेंडर खत्म होने पर या खाली होने पर उसकी सुरक्षा टोपी को दोबारा लगाकर किसी हवादार स्थान पर रख दें।
  • गैस का इस्तेमाल न करते समय, कहीं बाहर जाने से पहले और रात को सोने से पहले रेगुलेटर नोब बंद कर दें।

सिलेंडर का इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें :-रसोई में एलपीजी का इस्तेमाल

  • गैस सिलेंडर को हमेशा जमीन पर सीधा रखें और गैस स्टोव को हमेशा सिलेंडर से ऊँचे प्लेटफ़ॉर्म पर रखें।
  • किचन की खिड़की और दरवाजें के पर्दे गैस स्टोव के अस-पास न हो।
  • सिलेंडर को हमेशा गर्मी के स्तोत्र और ज्वलनशील पदार्थों जैसे केरोसिन, माचिस आदि से दूर रखें।
  • रसोई में रबर, जूट, चटाई आदि जैसी आग पकड़ने वाली चीजों का संग्रहण न करें।
  • हाई वोल्टेज इलेक्ट्रिक उपकरण जैसे फ्रिज आदि को किचन में न रखें को अच्छा होगा।
  • समय-समय पर प्रेशर रेगुलेटर चेक करते रहे की वह सही से काम कर रहा है या नहीं।

अगर गैस लीक को जाए तो?

  • अगर किसी कारणवश आपके सिलेंडर की गैस लीक हो रही है तो उस स्थिति में निम्नलिखित उपाय अपनाएँ –
  • हवा के आवागमन के लिए सभी दरवाजें और खिड़कियाँ खोल दें।
  • अगरबत्ती, मोमबत्ती, लैंप आदि को बंद कर दें।
  • गैस का रेगुलेटर बंद कर दें और गैस स्टोव भी बंद कर दें।
  • नोब निकालकर सेफ्टी कैप को सिलेंडर पर वापस लगा दें।
  • गैस लीक के समय घर के किसी भी इलेक्ट्रिक स्विच का इस्तेमाल न करें।
  • जितना जल्दी हो सके अपने गैस वितरक या गैस आपातकालीन सेवा को 1906पर सूचित करें।

एलपीजी लगाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • एलपीजी गैस सिलेंडर को कभी भी बंद कमरे में नहीं रखना चाहिए। इसे हमेशा खुले या किसी ऐसे कमरे में रखना चाहिए जहा के खिड़की दरवाजें खुले हों।
  • सिलेंडर को रखने के लिए प्रॉपर स्पेस मिलना चाहिए। अर्थात सिलेंडर ऐसी जगह रखें जहाँ प्रेशर रेगुलेटर का नोब और रबर की ट्यूब को हिलाने में परेशानी न हो।
  • सिलेंडर को हमेशा सीधा रखें। लेटा कर या टेढ़ी-मेढ़ी दिशा में न रखें।
  • उसके वाल्व को हमेशा ऊपर की तरफ ही रखें।
  • गैस सिलेंडर रखने के लिए कभी भी लकड़ी की सतह का इस्तेमाल नहीं करें।

एलपीजी गैस सिलेंडर पर खाना बनाते समय :-How to use LPG connection

एलपीजी गैस प्रयोग करते समय भी आपको बहुत सावधानी बरतनी चाहिए और यह केवल एक दो बार नहीं बल्कि हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए और इनके साथ ही गैस का इस्तेमाल करना चाहिए।

  • गैस जलाने के लिए पहले माचिस या लाइटर जलाएं और उसके बाद गैस चालू करें।
  • रसोई में काम करते समय सूती कपडें पहनें।
  • सिंथेटिक कपडें पहनकर गैस का कोई काम न करें।
  • खाना बनाते समय गर्म बर्तन को पकड़ने के लिए कभी भी अपने पहने हुए कपड़ों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • चलती हुए गैस पर चढा कर भूलें नहीं। उसका पूरा ध्यान रखें।
  • अगर आप गैस पर खाना पका रही है तो उसे ढक कर पकाएं इससे आपकी गैस कम लगेगी।
  • गैस के आस पास कोई ज्वलनशील पदार्थ न लेकर जाएं और उसे रसोई से भी दूर रखें।

तो ये थी कुछ खास सावधानियां जिन्हें ध्यान में रखकर आपको एलपीजी गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करना होगा।

होली का रंग कपड़ो पर से कैसे हटाएं

होली का त्यौहार-मतलब रंगो का त्यौहार, किसको रंगो के साथ होली खेलने का मन नहीं करता। जब लोग बिना किसी टेंशन के होली खेल रहे होते है, फिर भी दिमाग में एक बार ये जरूर आता है की ये तो हमारे वो कपडे हैं जिन्हें हम होली खेलने में इस्तेमाल कर रहे है। क्यूंकि कई बार होली उस समय भी खेल ली जाती है जब हम ऑफिस में हो, कभी स्कूल में हो, या कभी कोई खुद ही आगे से हम पर कोई रंग फेंक दें।

ऐसे में न ही तो मन से होली खेली जाती है, और न ही हम माना ही कर पाते हैं। क्यूंकि कपडे महंगे होने के साथ साथ थोड़े एक्सपेंसिव भी होते है। हमारे पसंद के कपड़ो पर होली का रंग लग जाये तो हम या तो उन्हें फेंक देतें हैं या फिर होली खेलने के लिए हम ऐसे कपडे जो बेकार होते है, उन्हें पहन कर होली खेलने की सोचते है जोकि बिलकुल भी ठीक नहीं है।

तो ऐसे में क्या करें की होली में कपड़ो की परेशानी को लेकर हम होली अच्छे तरीके से खेल सकें।

तो आइए जानते हैं इस आर्टिकल के माधयम से की कपड़ो से होली के रंग हटाने के तरीके

सफ़ेद विनेगर – अगर होली का रंग आपके कॉटन के कपडे पर लग गया है तो आप परेशान न हो। उसके लिए आप थोड़ा सा सफ़ेद विनेगर से दाग वाली जगह पर डाल दें और कुछ देर बाद उसे धो लें। कपड़े  पहले जैसे बेदाग़ हो जायेंगे।

 बेकिंग सोडा – एक बाल्टी पानी में थोड़ा सा बेकिंग सोडा मिला लें। थोड़ी देर के लिए कपड़ो को उस में छोड़ दें।  और उसके बाद उसे धोलें। ऐसा करने से भी दाग आराम से निकल जाते हैं। पर अगर बेकिंग सोडा के साथ थोड़ा सा ब्लीच भी मिला कर कपड़ो को धोएं तो यह ज़्यादा अच्छा काम करेगा।

निम्बू का रस – दाग वाली जगह पर थोड़ा सा निम्बू का रस निकाल कर लगा दें। उसके बाद थोड़ी देर उसे सूखने दें। और फिर साबुन से धो लें। दाग हमेशा के लिए चले जायेंगे।

दही का इस्तेमाल करें – थोड़ा सा दही या फिर खट्टा छाछ हो तो और भी अच्छा है। इसके लिए कपडे को थोड़ी देर के लिए छाछ में भीगे रहने दें। और उसके बाद आप साफ़ पानी से कपडे को धोलें। दाग से निजात तुरंत मिल जाएगी।

नेल पेंट रिमूवर – जिस तरह से हम अपने नाखुनो के लिए नेल पेंट रिमूवर का इस्तेमाल करते है, उसी तरह अगर हम नेल पेंट रिमूवर का अपने कपड़ो पर भी इस्तेमाल करते है तो भी दाग आसानी से निकल जाते है। थोड़े से कॉटन में नेल पेंट रिमूवर लेकर दाग को हटाएं। दाग आराम से चला जायेगा।

टूथ पेस्ट – क्या आपने सोचा था की टूथ पेस्ट से भी दाग हटाए जा सकते हैं। जी हां। टूथ पेस्ट को थोड़ा सा दाग पर लगा दें। लेकिन पेस्ट को दाग के दोनों और लगाना चाहिए। इससे दाग बिल्कुल निकल जाता है।

कॉर्न स्टार्च और दूध – कपड़ो पर से होली के दाग निकलने के लिए दूध और थोड़ा सा कॉर्न स्टार्च को मिलाकर एक घोल बना लें। अब थोड़ी देर के लिए उसे उस दाग पर लगा कर छोड़ दें। थोड़ी देर बाद ही दाग निकल जायेगा। उसके बाद कपडे अच्छी तरह से धो कर सूखा दें।

एल्कोहल – एल्कोहल की कुछ बूंदे कपडे पर दाग वाली जगह पर डाल दें। उसके बाद कपडे को अलग से धो दें।  और सूखने डाल दें। आप देखेंगे की जैसे दाग कभीं था ही नहीं।

डिशवाशर या बर्तन धोने का साबुन – क्या आपने कभी सुना है की डिशवाशर या बर्तन धोने के साबुन भी कपड़ो के दाग निकल जाते हैं। जी हां ये सही बात है। अब तक जिस साबुन से बरतें धोते आये है उसी से कपड़ो से दाग भी निकल जाता है। बर्तन  डीओने के साबुन को या थोड़ा सा डिशवॉशर को दाग लगी जगह पर डाल कर धोने से दाग आसानी से चले जाते है।

तो अब तो बिना किसी परेशानी के होली खेलने का आनंद उठाए। न तो अब कपड़ो पर दाग की टेंशन और न ही उन्हें हटाने या दाग निकालने की टेंशन।

बिजली का झटका लगने पर क्या करें?

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कहने वाले ने बिलकुल सत्य कहा है, “सावधानी हटी , दुर्घटना घटी”। क्योंकि आम तौर पर होने वाले सभी हादसे सावधानी न रखने के कारण ही होते है। जैसे की इलेक्ट्रिक शौक या बिजली का झटका। बिजली का झटका आमतौर पर लोगों को नंगी तार छूने, किसी बिजली का काम करते समय ध्यान न रखें, नंगें पैर बिजली का काम करने से लग ही जाता है।

कहने को तो ये बहुत ही सामान्य सी बात है लेकिन कई बार शौक लगने से हृदय की गति पर भी प्रभाव पड़ता है और ऐसे में इंसान बेहोश हो जाता है। इसके अलावा कई बार बिजली का झटका इतना जोर से लगता है की इंसान दूर गिर जाता है। इस स्थिति में लापरवाही बरतने से व्यक्ति की जान पर बन सकती है। इसीलिए बिजली का करेंट लगने पर तुरंत डॉक्टरी इलाज की सलाह दी जाती है।

लेकिन डॉक्टर के मरीज तक पहुँचने और उसे ले जाने में थोड़ा समय लगता है। जिस बीच हम प्रथम उपचार की मदद से रोगी की दशा में कुछ सुधार ला सकते है। क्योंकि कई बार झटका लगते समय धीरे लगता है लेकिन अधिक समय तक उपचार न होने के कारण वह हृदय को भी प्रभावित करने लगता है। ऐसे में प्रथम उपचार बेहतर उपाय है।

लेकिन सभी को बिजली का झटका लगने के उपचारों के बारे में नहीं पता होता। इसीलिए आज हम आपको बिजली का झटका लगने पर क्या करें? इस बारे में बताने जा रहे है।

बिजली का झटका लगने पर क्या करें :- 

1. मदद के लिए पीड़ित के पास जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें की उसके आस पास कोई करेंट वाली चीज तो नहीं पड़ी है। बता दें पानी और लोहा की चीजों में करंट बहुत जल्दी पास होता है। अगर ऐसी कोई चीज आस पास है तो उसे किसी लकड़ी की मदद से हटा दें।bijli ka jhtka

2. पीड़ित व्यक्ति को करंट लगनी वाली चीज से दूर करने का प्रयास करें। इसके लिए सबसे पहले मैं स्विच ऑफ कर दें। क्योंकि स्विच ऑन रहने से आपको भी करेंट लग सकता है। व्यक्ति को भूलकर भी छुएं नहीं ये आपके लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

3. बिजली से अलग करने के बाद व्यक्ति को रिकवरी पोजीशन में लेटा दें। इस पोजीशन में व्यक्ति किसी एक करवट में होता है और उसका एक हाथ सिर के नीचे और दूसरा हाथ आगे की तरफ होता है। उसका एक पैर सीधा और दूसरा मुड़ा हुआ होता है। इसके बाद उसकी ठोड़ी उठाकर जांच करें कि वो सांस ले रहा है या नहीं।

4. अगर व्यक्ति साँस नहीं ले रहा है और उसके थोड़ी चोट आई है तो उस चोट को पानी से धो दें।

5. अगर जलने वाली जगह से ब्लीडिंग हो रही है तो उस जगह को किसी साफ़ और सूखे कपडे से बांध दें।

6. अगर व्यक्ति किसी भी तरह की कोई गतिविधि जैसे सांस लेना, खाँसना नहीं कर रहा है तो आप सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन) शुरू करें। इस प्राथमिक चिकित्सा से किसी बेहोश या मूर्छित व्यक्ति के दिल और फेफड़ो को पुन: होश में लाया जाता है। (अगर व्यक्ति सांस ले रहा है, तो कभी भी सीपीआर ना करें।)

इन सभी उपचारों के अलावा एक बात का ध्यान रखें कि बिजली का झटका लगने वाले व्यक्ति को मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, भले ही घटना के बाद वह पूरी तरह ठीक लग रहा हो। क्योंकि हो सकता है झटके का असर अब तक तंत्रिका प्रणाली में हो और वो बाद में प्रभाव दिखाए।

प्रेगनेंसी में चुकंदर (Beetroot) खाने के फायदे

प्रेगनेंसी में बीटरूट, प्रेगनेंसी के दौरान केवल गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी पोषक तत्वों से भरपूर आहार विशेष भूमिका निभाता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को न केवल प्रेगनेंसी में खान पान में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है। तो लीजिये आज हम एक ऐसे ही पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ की बात करने जा रहे हैं।

जो गर्भवती को स्वस्थ रखने के साथ भ्रूण के विकास में भी फायदेमंद होता है। और वो खाद्य पदार्थ है चुकंदर, चुकंदर का सेवन प्रेग्नेंट महिला बिना किसी डर के कर सकती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की इसे सिमित मात्रा में खाना चाहिए। और गर्भवती महिला चुकंदर का सेवन कितनी मात्रा में कर सकती है इसके लिए एक बार डॉक्टर से गर्भवती महिला को जरूर पूछना चाहिए।

प्रेगनेंसी में चुकंदर खाने के फायदे

विटामिन, कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर चुकंदर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान किया जा सकता है। और बीटरूट का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं आइये आगे इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं।

आयरन

  • बीटरूट में आयरन की मात्रा मौजूद होती है।
  • जो बॉडी में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाने में मदद करती है।
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी के कारण होने वाली सभी परेशानियों से गर्भवती महिला को निजात मिलता है।
  • साथ ही शिशु के विकास को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।

एंटी ऑक्सीडेंट्स

  • चुकंदर में एंटी ऑक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं।
  • जो प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने व् मजबूत रखने में मदद करते हैं।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

पोटैशियम

  • चुकंदर में पोटैशियम भी मौजूद होता है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
  • जिससे रक्तचाप के कारण होने वाली परेशानी से गर्भवती महिला व् शिशु को बचे रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही बीटरूट के मौजूद पोटैशियम प्रेग्नेंट महिला के मेटाबोलिज्म को सही रखने में मदद करता है।

प्रेगनेंसी में बीटरूट खाने से मिलता है कैल्शियम

प्रेगनेंसी में बीटरूट
  • बीटरूट में कैल्शियम की मात्रा मौजूद होती है।
  • जो गर्भवती महिला की हड्डियों व् दांतों को मजबूत रखने में मदद करती है।
  • साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों व् दांतों के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।
  • जिससे शिशु का शारीरिक विकास अच्छे से होता है।

विटामिन सी

  • विटामिन सी एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है।
  • जो गर्भवती महिला की बॉडी में ब्लड को अवशोषित करने में मदद करता है।
  • साथ ही यह गर्भवती महिला व् शिशु को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।
  • इसके अलावा प्रसव को आसान बनाने के लिए भी विटामिन सी बहुत फायदेमंद होता है।

एंटी इंफ्लेमेटरी

  • बीटरूट में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।
  • क्योंकि इनसे प्रेग्नेंट महिला को जोड़ो में दर्द, सूजन, बॉडी में दर्द आदि की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में बीटरूट खाने से रहता है ब्लड शुगर लेवल मेन्टेन

  • चुकंदर में ग्लाइसेमिक खाद्य पदार्थ मौजूद होता है
  • जो ग्लूकोज में परिवर्तित होने और ब्लड में अवशोषित होने में अधिक समय लेता है।
  • जिससे रक्त में ब्लड शुगर लेवल को मेन्टेन रखने में मदद करता है
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गेस्टेशनल शुगर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में बीटरूट खाने से मिलता है फोलिक एसिड

  • बीटरूट में मौजूद फोलिक एसिड भ्रूण के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • इससे शिशु के मस्तिष्क व् रीढ़ की हड्डी के बेहतर विकास में मदद मिलती है।
  • साथ ही इससे शिशु को होने वाले जन्मदोष की समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

लिवर के लिए है फायदेमंद

  • चुकंदर में betacyanin की मात्रा भी मौजूद होती है।
  • जो लिवर व् ब्लड में मौजूद विषैले पदार्थों को बॉडी से बाहर निकालने में मदद करता है।
  • जिससे पाचन क्रिया को भी सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है।
  • और प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

चुकंदर के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान चुकंदर का सेवन फायदेमंद होता है। लेकिन सिमित मात्रा में यदि किसी चीज का सेवन फायदेमंद होता है। तो जरुरत से ज्यादा उस चीज का सेवन करने से महिला को नुकसान भी हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में चुकंदर का अधिक सेवन करने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

  • बीटरूट का अधिक सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को पेट में गैस, उल्टी, दस्त, जैसी परेशानियां हो सकती है।
  • जरुरत से ज्यादा चुकंदर का सेवन आपकी बोलने की क्षमता पर बुरा असर डाल सकता है।
  • अधिक मात्रा में बीटरूट के सेवन के कारण पेशाब के रंग में परिवर्तन आ सकता है।
  • नाइट्रेट की मात्रा बीटरूट में होने के कारण इसका अधिक सेवन करने से महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या अधिक हो सकती है।
  • बीटरूट का अधिक सेवन करने से महिला को किडनी में पथरी होने की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को चुकंदर का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में इन फायदों के लिए प्रेग्नेंट महिला को सिमित मात्रा में चुकंदर या चुकंदर के रस का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।

कृष्ण की तरह सुन्दर और बुद्धिमान होगा आपका बच्चा जन्माष्टमी पर करें यह काम

कृष्ण का मनमोहक रूप देखकर हर कोई मोहित हो जाता है और उनकी हर शैतानी, उनका हर एक रूप आज भी लोगो को अपना दीवाना बना देता है। इसीलिए तो हर कोई कृष्ण भगवान को अपनी पसंद के नाम से बुलाता है। जैसे की कोई लड्डू गोपाल कहता है तो कोई मुरली मोहन तो कोई माखन चोर कहता है, कई लोग तो अपने घर में लड्डू गोपाल को अपने बच्चे की तरह रखते हैं साथ ही अपने बच्चे की तरह उनकी देखभाल भी करते हैं।

और हर गर्भवती महिला यही चाहती है की उसका होने वाले शिशु भी लड्डू गोपाल की तरह सूंदर, मनमोहक, बुद्धिमान और थोड़ा शैतान भी हो। क्या आप भी ऐसा चाहती है? यदि हाँ, तो जन्माष्टमी अब आने ही वाली है। और जन्माष्टमी वह दिन होता है जिस दिन लड्डू गोपाल का जन्म हुआ था। ऐसे में इस खास दिन पर कुछ खास उपाय करने से आपकी मनोकामना पूरी हो सकती है। क्या आप जानना चाहती है की इसके लिए आपको क्या करना होगा? तो आइये जानते हैं।

व्रत करें

जन्माष्टमी के दिन आप उपवास करें और पूरा दिन कृष्ण भक्ति में लीन रहें, श्री कृष्ण मन्त्रों का जाप करें, उनकी जय कार करें। और अपने मन की चाह को उन पर जाहिर करें, मन ही मन आप मनोकामना करें। देखिएगा वो आपकी मनोकामना जरूर पूर्ण करेंगे और आपके घर में एक छोटे लड्डू गोपाल आएंगे। ऐसा जरुरी नहीं है की आप प्रेग्नेंट हैं तो आप यह व्रत न करें बल्कि लड्डू गोपाल के जैसे प्यारे शिशु की चाह को लेकर भी आप इस व्रत को कर सकती है।

भोग लगाएं

नन्द लाल जैसे संतान प्राप्ति की इच्छा को पूरी करने के लिए आप उन्हें भोग लगाएं। और श्री कृष्ण का पसंदीदा भोग माखन मिश्री होता है। जन्माष्टमी के दिन आप माखन मिश्री का भोग लगाएं, और अपना व्रत भी उसी प्रसाद से खोलें।

कान्हा को झुलाएं झूला

माखन चोर को जन्माष्टमी के दिन हर कोई झूला झुलाता है कई लोग घर में इनके लिए झूला तैयार करते हैं। तो कई लोग मंदिर में जाकर कान्हा को झूला झुलाते हैं। यदि आप भी कान्हा के जैसी संतान की इच्छा रखती है तो आपको भी जन्माष्टमी के दिन कान्हा को झूला जरूर झुलाना चाहिए। आप चाहे तो घर में या फिर मंदिर या किसी अन्य स्थान पर जाकर कान्हा को झूला झुला सकते हैं।

भगवान विष्णु की करें पूजा

ऐसा माना जाता है की यदि जन्माष्टमी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। तो ऐसा करने से भी भगवान विष्णु की कृपा आप पर बनी रहती है और आपकी मनोकामना पूर्ण होती है। यानि की आपके घर में नंदलाल जैसी सूंदर, मनमोहक, बुद्धिमान औलाद जन्म लेती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो महिलाएं के दिन सूंदर, मनमोहक, बुद्धिमान संतान की इच्छा को लेकर कर सकती है। यदि आपको संतान नहीं हो रही है तो भी आप इस व्रत को संतान प्राप्ति की इच्छा से कर सकती है। इस व्रत को करने से आपके मन की इच्छा जरूर पूर्ण होती है।

पहली बार माँ बन रही महिलाओं के लिए 15 टिप्स

पहली बार माँ बनने का अहसास

गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का बहुत ही खास और यादगार लम्हा होता है। खासकर जब महिला पहली बार माँ बन रही होती है तो उसके लिए यह समय खास होने के साथ थोड़ा मुश्किल भी हो सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान क्या सही है क्या गलत, प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए क्या नहीं, क्या करना चाहिए क्या नहीं, इसके बारे में पूरी जानकारी न होने के कारण महिला थोड़ी परेशानी का अनुभव कर सकती है। साथ ही शुरूआती समय में बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी में होने वाली शारीरिक परेशानियों और शारीरिक बदलाव के कारण भी महिला दिक्कत का अनुभव कर सकती है। लेकिन फिर भी पहली बार माँ बनने का अहसास महिला को इन मुश्किलों के बाद भी प्रेगनेंसी में खुश रहने में मदद करता है, और शिशु के आने की ख़ुशी महिला के प्रेगनेंसी के अनुभव को और भी खास बना देती है।

पहली बार माँ बन रही महिला के लिए 15 टिप्स

पहली गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी भी तरह की दिक्कत न हो, शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो, प्रेगनेंसी में अनुभव को महिला अच्छे से एन्जॉय कर सके इसके लिए गर्भवती महिला को कुछ टिप्स का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। तो लीजिये आज हम पहली बार माँ बन रही महिलाओं के लिए कुछ खास टिप्स बताने जा रहे हैं जो पहली प्रेगनेंसी में आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

अपने पार्टनर को बताएं

महिला के पीरियड्स यदि मिस हो गए हैं तो वो घर पर ही बाजार से प्रेगनेंसी किट लाकर चेक कर सकती है की वो गर्भवती है या नहीं। और यदि रिजल्ट पॉजिटिव आता है तो आपको अपनी इस ख़ुशी को अपने पार्टनर के साथ शेयर करना चाहिए। क्योंकि यदि आप माँ बनने वाली हैं तो वो भी पिता बनने वाले हैं, और दोनों का इस ख़ुशी में शामिल होने का बराबर हक़ है।

डॉक्टर का चुनाव

उसके बाद तुरंत आपको एक बेहतरीन डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए जो प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी सलाह देगा। डॉक्टर का चुनाव करने के बाद आपको उनसे प्रेगनेंसी से जुड़े जो भी सवाल आपके मन में उठ रहे हैं उनके बारे में पूछना चाहिए। और किसी भी बात की हिचकिचाहट नहीं रखनी चाहिए। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान किन टिप्स का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसके लिए भी राय लेनी चाहिए।

सभी जांच

गर्भावस्था की शुरुआत में जिन जांच को करवाना जरुरी होता है डॉक्टर से पूछ कर अपनी उन सभी जांचें करवाएं। जिन दवाइयों का सेवन प्रेगनेंसी के पुरे नौ महीने करना है उनकी राय लें, अपनी सभी वेक्सिनेशन करवाएं, रूटीन में अपना चेकअप करवाएं, प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की दिक्कत हो तो उसके लिए डॉक्टर से राय लें।

प्रेगनेंसी एप डाउनलोड करें

आज कल इंटरनेट पर भी प्रेगनेंसी से जुडी पूरी जानकारी आसानी से मिल जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला के मन में प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने को लेकर कोई भी सवाल हो, प्रसव से जुडी जानकारी चाहिए इन सभी के बारे में आसानी से प्रेगनेंसी एप का इस्तेमाल करके आसानी से जानकारी इक्कठी कर सकती है। और ऐसा करने से महिला थोड़ा रिलैक्स भी महसूस कर सकती है।

अनुभव लें

प्रेगनेंसी से जुड़े सवालों के लिए आप अपने घर के सदस्यों, अपनी सहेलियों से भी राय ले सकती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की ऐसा जरुरी नहीं होता है की जैसा प्रेगनेंसी में उनके साथ हुआ है वैसा ही आपके साथ भी हो। क्योंकि हर गर्भवती महिला में होने वाले बदलाव पूरी तरह से उनकी बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि कोई आपसे कहे की प्रेगनेंसी में मुझे इतनी दिक्कत हुई है तो आपको परेशानी नहीं होना चाहिए और बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए क्योंकि ऐसा बिल्कुल भी जरूरी नहीं होता है की वैसा आपके साथ भी हो।

क्या सही है क्या नहीं

पहली बार माँ बन रही महिलाओं के लिए यह जानना बहुत जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं। जैसे की महिला को खाने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए, ट्रैवेलिंग नहीं करनी चाहिए, भारी वजन नही उठाना चाहिए, पेट के बल काम नहीं करना चाहिए, ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए, गर्म पानी से नहाना नहीं चाहिए, ज्यादा शारीरिक श्रम करने से बचना चाहिए, आदि। क्योंकि यदि आप इससे जुडी जानकारी को इक्कठा करती है तो पहली बार माँ बनने पर आपको प्रेगनेंसी में होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।

क्या खाएं या नहीं

माँ बनने पर महिला की जिम्मेवारी दुगुनी हो जाती है क्योंकि अब वह अकेली नही होती है बल्कि उसके गर्भ में पल रही नन्ही जान भी पूरी तरह से उसी पर निर्भर करती है। ऐसे में महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की महिला को क्या खाना है जैसे की पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए जिससे महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु को भी भरपूर पोषण मिल सके। और क्या नहीं खाना चाहिए जैसे की कच्चा पपीता, अनानास, कटहल, गरम तासीर वाली चीजें आदि, क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा रहता है।

सम्बन्ध

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से कपल इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, खासकर जो पहली बार प्रेगनेंसी का अनुभव ले रहे हो की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना चाहिए या नहीं? तो इसका जवाब होता है की इसके लिए आप एक बार डॉक्टर से जरूर राय लें। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर ही महिला की स्थिति के बारे में सबसे बेहतर तरीके से बता सकती है, ऐसे में डॉक्टर यदि हाँ कहें तो प्रेगनेंसी के दौरान भी आप इसका आनंद ले सकते हैं। और यदि डॉक्टर न कहे तो इसका मतलब न ही होता है।

तनाव न लें

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला प्रेगनेंसी के दौरान परेशानियों का अनुभव कर सकती है। खासकर पहली बार माँ बन रही महिलाओं को ज्यादा असहज महसूस हो सकता है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला इन्हे लेकर मानसिक रूप से परेशान न हो, क्योंकि यदि महिला तनाव लेती है तो इसके कारण गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु को भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, बल्कि महिला को अपने इस पहले अनुभव को लेकर खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

पेट के बल सोना

कुछ महिलाओं को उल्टा सोने की आदत हो सकती है और यदि आपको यह आदत है तो आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना होगा। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान उल्टा सोना गर्भ में शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी में महिला को जितना हो सके करवट लेकर ही सोना चाहिए।

पानी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि यदि महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला के साथ शिशु को भी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में महिला को चाहिए की दिन में आठ से दस गिलास पानी के साथ जूस, नारियल पानी आदि का भी महिला भरपूर सेवन करे। क्योंकि गर्भवती महिला का हाइड्रेट रहना प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करता है।

खाने का ध्यान

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास, गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए भरपूर मात्रा में खाना भी बहुत जरुरी होता है। और पहली बार माँ बन रही महिलाओं के लिए प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना फायदेमंद होता है इससे जुडी जानकारी इक्कठा करना भी बहुत जरुरी होता है।

बेबी के नाम

आने वाले बेबी का आप क्या नाम रखेंगी, उसके बारे में कुछ नाम की सूचि भी महिला को तैयार करनी चाहिए। क्योंकि इससे महिला को खुश रहने में मदद मिलती है। साथ ही आप चाहे तो अपने कमरे में कुछ सूंदर, प्यारे और क्यूट बेबी की फोटोज भी लगा सकती है। ऐसा करने से पहली बार माँ बनने के उत्साह को और बढ़ाने में मदद मिलती है।

डिलीवरी की तारीख

प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर द्वारा एक तारीख दी जाती है जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है की इस दिन के आस पास शिशु का जन्म होगा। ऐसे में महिला को हॉस्पिटल ले जाने वाले एक बैग को तैयार करने के साथ इन दिनों में लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए ताकि डिलीवरी में कोई दिक्कत न हो।

प्रसव की जानकारी

पहली बार माँ बन रही महिलाओं को प्रसव के लक्षणों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि इससे यदि महिला को डिलीवरी का कोई भी लक्षण महसूस होता है तो वो समय रहते डॉक्टर से संपर्क कर सकती है। साथ ही इससे डिलीवरी के समय होने वाली परेशानियों से भी बचे रहने में मदद मिलती है। तो इन जानकारियों को पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं को जरूर इक्कठा करना चाहिए।

तो यह हैं वो टिप्स जिनका ध्यान पहली बार माँ बन रही महिलाओं को जरूर रखना चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और प्रेगनेंसी में होने वाले हर बदलाव और लक्षण से निपटने में महिला को आसानी हो, और किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

गर्भावस्था का अंतिम महीना जरूर रखें इन बातों का ध्यान

प्रेगनेंसी का अंतिम महीना

वैसे तो गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के एक एक दिन बहुत ही अहम होता है। लेकिन प्रेगनेंसी का आखिरी महीना बहुत ज्यादा अहम होता है, क्योंकि अब शिशु के जन्म होने का समय नजदीक होता है और किसी भी समय शिशु के जन्म की ख़ुशी आने वाली होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस दौरान बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी के आखरी महीने में किसी तरह की परेशानी न हो। क्योंकि इस समय महिला का वजन भी बढ़ा हुआ होता है, महिला के मन में ख़ुशी के साथ डर भी हो सकता है, ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती है।

प्रेगनेंसी का आखिरी महीना जरूर रखें इन बातों का ध्यान

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आखरी महीने में अपने और शिशु दोनों का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है, ऐसे में इस दौरान और किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

खाने में न करें लापरवाही

वैसे तो प्रेगनेंसी का पूरा समय गर्भवती महिला को खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। लेकिन प्रेगनेंसी के अंतिम चरण में खाने के प्रति बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए आहार का ध्यान रखना जरुरी होता है, ताकि पोषण की कमी के कारण डिलीवरी के दौरान महिला को किसी तरह की परेशानी न आए। साथ ही प्रेगनेंसी के अंतिम चरण में शिशु को यदि वजन में कमी जैसी समस्या होती है तो उसे भी पूरा करने में मदद मिलती है। इसीलिए महिला को दिन में तीन बड़े मील लेने की बजाय हर दो घंटे के बाद कुछ हेल्दी खाना चाहिए।

बैग करें पैक

प्रेगनेंसी के नौवें महीने के लगते ही गर्भवती महिला को हॉस्पिटल ले जाने के लिए एक बैग भी तैयार कर लेना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को जब भी हॉस्पिटल जाना पड़े तो कोई भी जरुरी सामान न भूलना पड़े। जिससे डिलीवरी के दौरान कोई परेशानी हो और हॉस्पिटल ले जाने वाले बैग में शिशु के कपडे, सैनिटरी पैड, डाइपर, बच्चे के कपडे, यदि कोई मेडिकल पोलिसी हैं तो उसके कागज़, प्रेगनेंसी रिपोर्ट्स, आइडेंटिटी कार्ड, आदि को संभाल कर रख लेना चाहिए।

यूरिन न रोकें

नौवे महीने में पेट का आकार पूरा बढ़ जाता है जिसके कारण नीचे की तरफ दबाव पड़ने लगता है, और गर्भवती महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है। ऐसे में यूरिन को रोकने के कारण पेट में दर्द या गर्भाशय में संकुचन होने की दिक्कत हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में यूरिन नहीं रोककर रखना चाहिए।

दर्द बढ़ने पर

प्रेगनेंसी में पेट या पीठ में हल्के दर्द का अनुभव होना आम बात होती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी चरण में इस दर्द का बहुत अधिक अनुभव हो तो ऐसे में यह दर्द लेबर पेन हो सकता है। इसीलिए इस दर्द को अनदेखा न करते हुए जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

प्राइवेट पार्ट का रखें ध्यान

यदि गर्भवती महिला को प्राइवेट पार्ट से यूरिन की तरह सफ़ेद गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ, या ब्लड के धब्बे महसूस हो। तो ऐसे में इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह एमनियोटिक बैग के फटने का संकेत हो सकता है। जिसका मतलब यह होता है की डिलीवरी अब जल्द ही होने वाली होती है।

नोर्मल डिलीवरी

ज्यादातर महिलाएं नोर्मल डिलीवरी ही करवाना चाहती है, लेकिन नोर्मल डिलीवरी के चक्कर में गर्भवती महिला को बॉडी पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए क्योंकि इसके कारण परेशानी भी हो सकती है। बस गर्भवती महिला को सैर करनी चाहिए, खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, तनाव नहीं लेना चाहिए, आदि। क्योंकि इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है और जितना गर्भवती महिला स्वस्थ होती है उतने ही नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ते हैं।

डॉक्टर से संपर्क में रहें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए, ताकि डिलीवरी के दौरान किसी भी तरह की समस्या से बचाव करने में मदद मिल सके। साथ ही यदि डॉक्टर की दी गई डेट के बाद भी महिला को डिलीवरी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं तो इसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए, और डॉक्टर से जाकर मिलना चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान हर गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को कोई दिक्कत न हो। और स्वस्थ महिला एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सके, और दोनों को डिलीवरी के बाद भी हष्ट पुष्ट रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में चिल्ला खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला की कुछ न कुछ अलग खाने की इच्छा होती रहती है। जिससे महिला के मुँह का स्वाद भी अच्छा हो जाये और उस चीज को खाने से महिला को फायदा भी हो। और ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ है बेसन और आटे का चिल्ला, जो न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद भी होता है।

इसके स्वाद को बढ़ाने के लिए आप इसमें प्याज़, हरी मिर्च, धनिया, व् अन्य सब्जियों को भी छोटा छोटा काटकर मिक्स कर सकते हैं। ऐसा करने से न केवल चिल्ले का स्वाद बढ़ता है बल्कि इससे चिल्ले में पोषक तत्व भी बढ़ जाते हैं। जो गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में चिल्ला का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

बेहतरीन नाश्ता है

प्रेग्नेंट महिला के लिए सुबह का नाश्ता ऐसा होना चाहिए जो महिला को पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रखे। ऐसे में आटे और बेसन से बना चिल्ला पोषक तत्वों से भरपूर होता है। जो न केवल प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। बल्कि इससे प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है। इसीलिए चिल्ला गर्भवती महिला के लिए चिल्ला एक बेहतरीन नाश्ता है। और इसे बनाने के लिए यदि आप इसमें सब्जियां भी मिला देते हैं तो इसका फायदा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

मुँह के स्वाद को बढ़ाता है

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाओं के जीभ का स्वाद भी बिगड़ जाता है। लेकिन चिल्ले के सेवन करने से महिला के जीभ के स्वाद को सही करने में भी मदद मिलती है। जिससे महिला की खाने की इच्छा बढ़ने के साथ भूख बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

पाचन तंत्र रहता है दुरुस्त

बेसन, आटे से बने चिल्ले में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला चिल्ले का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। जिससे पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या जैसे की कब्ज़, पेट में गैस, एसिडिटी, पेट में जलन आदि परेशानियों से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

खून की कमी होती है पूरी

शरीर में खून की कमी का होना गर्भवती महिला के लिए बहुत बड़ी परेशानी होती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला चिल्ले का सेवन करती है तो इससे महिला को भरपूर मात्रा में आयरन मिलता है क्योंकि आटे और बेसन दोनों में आयरन की मात्रा मौजूद होती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

शुगर रहती है नियंत्रित

चिल्ले का सेवन करने से ब्लड में ग्लूकोज़ के स्तर को सामान्य बनाएं रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल शुगर जैसी समस्या से प्रेगनेंसी में बचे रहने में मदद मिलती है। और यदि किसी महिला को शुगर है तो उनके लिए चिल्ले का सेवन फायदेमंद होता है।

दर्द से मिलता है आराम

चिल्ले में प्रोटीन व् कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में चिल्ले का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों व् मांसपेशियों को मजबूती मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बॉडी पेन की समस्या से महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

हदय रहता है स्वस्थ

यदि प्रेग्नेंट महिला चिल्ले का सेवन करती है तो इसमें आटे और बेसन की मौजूदगी के कारण घुलनशील फाइबर, पोटैशियम आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल करने के साथ गर्भवती महिला के हदय को स्वस्थ रखने में भी मदद करते हैं। साथ ही इससे प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर को भी नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव

चिल्ले में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही चिल्ले का सेवन करने से गर्भवती महिला को ब्रेस्ट कैंसर जैसी समस्या से भी सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को चिल्ले का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो इन बेहतरीन फायदों और अपने मुँह के स्वाद को सही करने में लिए चिल्ले का सेवन जरूर करना चाहिए।