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बालों को प्राकृतिक रूप से कैसे बनाएं रेशमी व् घना

जब भी आप किसी से मिलते है तो उसकी सबसे पहली नज़र आपके चेहरे पर जाती है, और चेहरे की सुंदरता में चार चाँद लगाने में बाल बहुत मदद करते है, लम्बे घने बाल हर महिला, और लड़की की चाहत होती है, लेकिन बालों की अच्छे से केयर न करने पर, पोषण न देने के कारण, केमिकल का अधिक इस्तेमाल करने से आपको बालों से सम्बंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे की बालों का झड़ना, बालों का रुखा होना आदि, लेकिन क्या आप जानते है की आप बहुत ही आसान तरीके से अपने बालों को रेशमी और घना बना सकती है, यदि नहीं तो आइये आज हम आपको बालों को रेशमी और घना बनाने के कुछ टिप्स बताने जा रहे है जो बिना किसी दुष्प्रभाव के आपके बालों की रौनक को बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे।

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बियर और शहद का इस्तेमाल करें:-

beer and honey

बियर जहां आपके बालों को घना बनाने में मदद करती है, वहीँ शहद आपके बालों में नमि बनाएं रखता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप बियर लें, और उसमे तीन चम्मच शहद के डालकर अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद इसे तेल की तरह अच्छे से अपने स्कैल्प और अपने बालों में लगाएं, और शावर कैप की मदद से अपनेबलों को ढक लें, उसके एक घंटे बाद बालों को धो लें, हफ्ते में एक बार कुछ दिनों तक इस तरीके का इस्तेमाल करें।

एवोकाडो का इस्तेमाल करें:-

एवोकाडो में विटामिन ए, डी, ई और बी 6 पाए जाते हैं, साथ ही इसमें प्रोटीन, एमिनो एसिड, मैग्नीशियम, फोलिक एसिड, कॉपर और आयरन भी भरपूर मात्रा में होता है, जो की आपके बालों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप 1 पका एवोकाडो, 2 बड़े चम्मच शहद, 3 बड़े चम्मच कैस्टर आयल लेकर अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद इस पेस्ट को अपने सिर में लगाएं, और अपने बालों में एक घंटे के लिए छोड़ दें, और उसके बाद अपने बालों को धो लें।

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एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-

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एलोवेरा भी आपके बालों के लिए किसी जादू से कम नहीं होता है, ये आपके बालों से जुडी हर परेशानी का समाधान करने में आपकी मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप तीन बड़े चम्मच एलोवेरा के जैल में, एक चम्मच निम्बू का रस मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इसे अपने बालों में लगाएं और एक घंटे के लिए छोड़ दें, उसके बाद अपने बालों को धो लें, आपको एक ही बार में इसका असर दिखाई देने लगेगा।

ओट्स का मास्क प्रयोग करें:-

ओट्स और दूध का इस्तेमाल करने से भी आपके बालों को घना और रेशमी बनाने में मदद मिलती है, लेकिन इसमें यदि आप कैस्टर ऑयल मिला देते हैं, तो इससे आपके बालों की रौनक को और भी बढ़ाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप 1 बड़ा चम्मच कैस्टर आयल, आधा कप दूध, एक चौथाई कप ओट्स और इन सबको मिक्स करके पीस लें, और एक मिक्सचर तैयार करें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने बालों की जड़ों में लगाएं, और कुछ देर के लिए छोड़ दें, ऐसा करने से आपको खुद ही इसका असर दिखाई देगा, और हफ्ते में दो बार इसे करने पर ही आपको इसका असर दिखेगा।

बियर और अंडे की जर्दी का मास्क:-

एक कप बियर में एक अंदर को तोड़कर उसके सफ़ेद भाग को अलग करके मिक्स कर दें, और इसे ऐसे ही अपने बालों की जड़ो में अच्छे से लगाएं, और आधे घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें, बालों को घना और चमकदार बनने के लिए प्रोटीन की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है, और इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता हैं, जिससे इसका इस्तेमाल करने पर आपको बालों की जड़ो को मजबूत करने में मदद मिलती है, साथ ही बाल रेशमी और मुलायम भी होते है।

दही का इस्तेमाल करें:-

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दही का इस्तेमाल करने से भी आपके बालों की चमक को बढ़ाने में मदद मिलती है, और यदि आप इसमें कुछ बुँदे निम्बू के रस की मिला देते है, तो यह अपने असर को दुगुना कर देते है, जिससे आपके बालों को मजबूत रेशमी और घना बनने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कटोरी खट्टी दही में कुछ बुँदे निम्बू के रस की मिलाएं उसके बाद इसे अच्छे से अपने बालों में लगाएं और उसके कुछ देर बाद अपने बालों को धो दें, इससे आपके बालों की चमक को बरकरार रहने में मदद मिलेगी।

मेहँदी एक इस्तेमाल करें:-

मेहँदी भी प्राकृतिक रूप से आपके बालों को घना व् चमकदार बनाने में मदद करती है, साथ ही बालों को रेशमी बनाने के लिए आप इसमें एक अंडे की जर्दी को भी मिक्स कर सकते है, इसके लिए आप अपने बालों के अनुसार मेहँदी को रातभर के लिए भिगो कर रख दें, और सुबह उठकर उसमे एक अंदर की जर्दी मिलाएं और अच्छे से फैट लें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद शैम्पू का इस्तेमाल न करें बल्कि साफ़ पानी से इसे धो दें, ऐसा करने से आपके बालों को मजबूत और घना बनने में मदद मिलेगी।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप प्राकृतिक रूप से अपने बालों को घना बना सकते है, और साथ ही इनका इस्तेमाल करने से आपके बालों को किसी तरह का नुकसान भी नहीं होगा, और न ही आपको अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे।

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प्रेगनेंसी में गर्भवती महिलाएं कैसे नहाएं

गर्भावस्था का समय

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जो नई उम्मीदों, खुशियों, सपनो से भरा होने के साथ बहुत सी कन्फ्यूज़न और सवालों से भरा हुआ होता है। हालांकि घर में मौजूद बड़े, इंटरनेट द्वारा, किताबो को पड़ने से गर्भवती महिला को बहुत सी जानकारी मिलती है। लेकिन फिर भी यह नौ महीने महिला को हर कदम यह सोचने पर मजबूर करते हैं की कही उनसे इस दौरान कोई गलती न हो, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान हो। इसीलिए हर गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के दौरान छोटी से छोटी बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। तो आइये आज हम गर्भवती महिला के नहाने से जुड़े कुछ खास टिप्स बताने जा रहे हैं।

गर्भवती महिलाओं को कैसे नहाना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला को केवल अपने खान पान, सोने, पानी पीने, व्यायाम करने का ही नहीं बल्कि नहाने का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की नहाने का समय, पानी का तापमान आदि। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को नहाते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

नहाने का समय

प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों के कारण महिला के रूटीन में बदलाव आना बहुत ही आम बात होती है, लेकिन ऐसे में भी महिला को अपनी दिनचर्या को सही रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की समस्या को बढ़ने न दिया जा सके। ऐसे में महिला को नहाने के लिए भी समय का ध्यान रखना चाहिए गर्मियों में जहां महिला को सुबह नौ या दस बजे से पहले नहा लेना चाहिए, ताकि महिला को फ्रैश महसूस हो सके वहीँ गर्मी का अधिक अनुभव होने पर महिला चाहे तो शाम को भी एक बार नहा सकती है।

पानी का तापमान

नहाने के लिए पानी के तापमान का ध्यान रखना भी बहुत जरुरी है, गर्मियों में जितना हो सके महिला को ताजे पानी से नहाना चाहिए। क्योंकि टंकी का पानी गर्मियों में बहुत जल्दी गर्म होता है और गर्मी में अधिक गर्म पानी से नहाना बॉडी के तापमान को बढ़ा सकता है जिसके कारण स्पॉटिंग या प्रेगनेंसी की शुरुआत में गर्भ गिरने जैसी समस्या हो सकती है, साथ ही गर्मियों में खासकर जिस समय भी नहाएं ठन्डे पानी का ही इस्तेमाल करें।

नहाने जाएँ तो इन बातों का ध्यान रखें

नहाते समय ज्यादा स्लीपरी चप्पल को नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि इसके कारण गिरने की सम्भावना बढ़ सकती है, नहाने के लिए सभी जरुरी चीजों को आस पास रखना चाहिए ताकि बार बार आपको किसी भी चीज के लिए परेशान न होना पड़े।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को नहाते समय रखना चाहिए, ताकि नहाते समय गर्भवती महिला कोई भी गलती न करें और उसे किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रेगनेंसी में बैंगन खाने के फायदे और नुक्सान

बैंगन एक बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी है, जिसे हम उबाल कर, भूनकर, बेक कर के, तलकर या फिर इसके चिप्स बनाकर भी खा सकते है। यह सभी स्वादिष्ट होने के साथ साथ हमारी सेहत के लिए भी बहुत गुणकारी मानी जाती है। बैंगन का पौधा इसके फल के लिए ही लगाया जाता है। बैंगन कार्बोहायड्रेट, प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स का बहुत ही अच्छा स्रोत है। शुरुआत में बैंगन सिर्फ भारत में ही उगाया जाता था पर अब पूरी दुनिया में इसे खूब खाया जाता है और पसंद किया जाता है।

क्या गर्भावस्था में बैंगन का सेवन कर सकते है?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है के गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन करना चाहिए या नहीं। तो इसका साधारण सा जवाब है के गर्भवती महिला बैंगन का सेवन अपनी पसंद के हिसाब से कर सकती है। बैंगन भ्रूण के विकास में मदद करता है इसमें मौजूद विटामिन ए और विटामिन इ से भ्रूण को बहुत फायदा मिलता है। इसके अतिरिक्त बैंगन के और भी बहुत से फायदे है उन्हें जानने के लिए इसके लाभ पढ़िए।

प्रेगनेंसी में बैंगन खाने के फायदे

वैसे तो बैंगन के सेवन के बहुत से फायदे होते है, यहा हम आपको वो कुछ फायदे बता रहे है जो गर्भवती महिला को मिलते है।

इम्युनिटी

गर्भावस्था के दौरान महिला की इम्युनिटी यानि की रोग प्रतिरोधक क्षमता वैसे ही कम हो जाती है ऐसे में बदलते मौसम के कारण गर्भवती महिला को बहुत जल्दी कोल्ड, फ्लू और अन्य बीमारियां लगने का खतरा बढ़ जाता है। बैंगन में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। इसका यही विटामिन सी गर्भवती महिला की इम्युनिटी पावर को बढ़ाकर माँ और शिशु दोनों कई बिमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।

हाइपरटेंशन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन की समस्या होना बहुत ही आम हो जाता है। इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को बैंगन को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। बैंगन को थायमिन, बायोफ्लैवोनॉइड्स और रिबोफ्लॉविन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। यह तीनो ही तत्व हाइपरटेंशन को नियंत्रित करने में मदद करते है। बैंगन का सेवन ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल कर, सही हार्ट रेट लाने में मदद करके, गर्भवती महिला को उन सभी बिमारियों और परेशानियों से बचा सकते है जिन्हे लगभग हर दूसरी महिला गर्भावस्था के दौरान अनुभव करती है।

कोलेस्ट्रॉल लेवल

बैंगन के सेवन से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल कम होता है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ने में मदद मिलती है। इस तरह बैंगन कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर हृदय से संबंधित बिमारियों के खतरे को कम करता है। गर्भावस्था में इसके सेवन से बढ़ते वजन में खराब कोलेस्ट्रॉल की कम मात्रा होती है जिससे की गर्भवती महिला और शिशु को हार्ट से संबंधित बिमारियों का खतरा नहीं होता है।

भ्रूण का विकास

बैंगन विटामिन ए, विटामिन इ, बी कॉम्प्लेक्स और निअचिन का एक बहुत अच्छा स्रोत है। यह सभी जरुरी पोषक तत्व एक साथ मिलकर भ्रूण का विकास में बहुत मदद करते है।

रेड ब्लड सेल्स

रेड ब्लड सेल्स भ्रूण के विकास के लिए बहुत जरुरी है, इन्हीं के कारण शिशु की नसों, दिमाग के सेल्स, मसल्स आदि का निर्माण होता है। इसके अतिरिक्त रेड ब्लड सेल्स ही आयरन को गर्भवती महिला और उसके शिशु तक पहुँचाते है। बैंगन में बहुत सा फोलेट होता है जो शरीर में जाकर फोलिक एसिड बनाता है। फोलिस एसिड रेड ब्लड सेल्स के निर्माण सबसे महत्वपूर्ण आधार है। यदि गर्भवती महिला बैंगन को अपनी डाइट में शामिल करती है तो उसके शरीर में रेड ब्लड सेल्स की गिनती को बढ़ने में मदद मिलती है।

इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस

बैंगन में बहुत से मिनरल्स पाए जाते है जैसे की मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, कॉपर, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक और मैगनीस। यह सभी मिनरल्स गर्भवती महिला के शरीर में जाकर इलेक्ट्रोलाइट की सप्लाई को बढ़ाते है। अगर इन इलेक्ट्रोलाइट की शरीर में कमी हो जाती है तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है ऐसे माँ और शिशु दोनों को खतरा बढ़ जाता है। बैंगन के सेवन से गर्भवती महिला के शरीर के इलेक्ट्रोलाइट की प्रयाप्त मात्रा बनी रहती है।

पाचन शक्ति

बैंगन के सेवन से हमारे पेट को भी बहुत सा फायदा मिलता है, इससे हमारी पाचन शक्ति मजबूत होती है। गर्भावस्था में बढ़ते गर्भाशय के प्रेशर के कारण महिला की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है ऐसे में बैंगन का सेवन इस समस्या से बहुत हद तक छुटकारा दिलाता है।

गर्भावस्था में बैंगन के सेवन से नुक्सान

किसी भी चीज फायदे होते है तो कुछ नुक्सान भी उसके साथ ही होते है। आइये जानते है के प्रेगनेंसी के दौरान बैंगन के सेवन क्या नुक्सान हो सकता है।

समय से पहले डिलीवरी

बैंगन की पैदावार मिटटी में होती है इसीलिए इसमें कुछ मिटटी के हानिकारक तत्व भी शामिल हो सकते है। इसके लिए जरुरी है के बैंगन को खाने से पूर्व अच्छे से धो कर और पका कर खाया जाये। अगर गर्भावस्था में अधपका या बिना धोये हुए बैंगन का सेवन किया जाए तो समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।

एलर्जी

अगर किसी महिला को पहले से ही किसी सब्जी से एलर्जी हो तो उसे बिलकुल भी बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। बैंगन के सेवन से हल्की खुजली और रेडनेस हो सकती है। इसीलिए अगर आप पहले से बैंगन का सेवन करते है तभी प्रेगनेंसी में इसका सेवन करे और अगर पहले कभी भी ना खाया हो तो गर्भावस्था में इसे खाने की कोशिश ना करें।

एसिडिटी

गर्भावस्था के दौरान बैंगन का अधिक सेवन से पेट में एसिड भी बन सकती है और उसके कारण आपको उलटी और पेट में जलन और दर्द हो सकता है। एसिडिटी से बचने के लिए गर्भावस्था में इसका जरुरत से ज्यादा सेवन ना करें।

बैंगन के सेवन से पहले ध्यान देने योग्य बातें

ध्यान रखिये बैंगन से नुक्सान आपको तभी होगा अगर आप इन बातों का ध्यान ना रखे। तो बैंगन से मिलने वाले लाभों को पाने के लिए निचे दी गयी सावधानियां जरूर अपनाये।

  • बैंगन को बनाने से पहले अच्छे से जरूर धोये, बिना धोये इसके सेवन से हानिकारक बैक्टीरिया हो सकता है।
  • जिन महिला को पहले से कोई एलर्जी को वो बैंगन का सेवन ना करें।
  • एसिडिटी से बचने के लिए अच्छे से पका कर इसका सेवन करे।

घमौरियों से निजात पाने के उपाय!

गर्मियों में अधिकतर लोग घमौरियों की समस्या से परेशान रहते है। जिनमे जलन होने के साथ-साथ खुजली और चुभन भी होती है। ऐसे में इन्हें ठीक करने के लिए कॉस्मेटिक या पाउडर का इस्तेमाल करना ठीक नहीं। इसीलिए आज हम आपको घमौरियां ठीक करने के कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आपकी समस्या बिना अधिक खर्च के घर बैठे ही ठीक हो जाएगी।

गर्मियों का मौसम अब धीरे धीरे शुरू हो रहा है। और इसी के साथ शुरू होने वाली है तरह-तरह की त्वचा संबंधी समस्याएं। एक बार को व्यक्ति बाकी सारी परेशानियाँ तो सहन कर भी लें लेकिन घमौरियों का नाम आते है सभी घबराने लगते है। गर्मियों के मौसम में होने वाली सबसे आम समस्या है घमौरी। इस दौरान क्या बच्चे और क्या बूढ़े, सभी इस समस्या से परेशान दिखाई देते है।

डॉक्टरी भाषा में इसे एक प्रकार का चर्म रोग माना जाता है। जिनमें खुजली होने के साथ-साथ हलकी सी चुभन भी होती है। वैसे तो ये समस्या अधिकतर गर्मियों में ही देखने को मिलती है लेकिन कई बार बरसात और सर्दियों के मौसम में ये हो सकती है।

घमौरियां अक्सर हमारी पीठ, छाती, बगल एवं कमर के आसपास के हिस्सों में होते है। जिसका मुख्य कारण पसीना होता है। इसके अलावा भी और बहुत से कारणों की वजह से घमौरियों होती है जिनके बारे में हम आपको बताएँगे। घमौरियों होने के बाद इंसान बहुत परेशान हो जाता है। इसीलिए इनके होते ही सब अपनी-अपनी समझ अनुसार इनका इलाज करने में जुट जाते है।

ऐसे तो बाज़ार में बहुत से पाउडर और लोशन उपलब्ध है जिनकी मदद से घमौरियों से निजात पाया जा सकता है लेकिन उनके लिए बहुत से पैसे खर्च करने पड़ते है जो सभी के लिए सम्भव नहीं। इसीलिए आज हम आपको घमौरियां ठीक करने के कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आप अपनी इस समस्या से बिना किसी खर्च के घर बैठे राहत पा सकते है। और सबसे बड़ी बात इन उपायों के कोई दुष्परिणाम भी नहीं है। तो आइए जानते है घमौरियां ठीक करने के घरेलू उपचार!!

घमौरियां होने के क्या कारण होते है?

सामान्य तौर पर घमौरियां गर्मियों के दौरान ही होती है लेकिन कई बार ये सर्दियों में भी देखने को मिलती है। जिनका कारण त्वचा के रोम छिद्रों में पसीने की अत्यधिक मात्रा का जमना होता है। ऐसा तब होता है जब पसीना भाप बनकर उड़ने की बजे त्वचा में ही समा जाता है। यही कारण है की घमौरियां अधिकतर गर्दन, कमर, कांख और त्वचा की सिलवटों में होती है। इसके अतिरिक्त भी कुछ वस्तुएं है जिनके कारण त्वचा में घमौरियां होती है।

-> सिंथेटिक फाइबर से बने कपडें पहनने से भी घमौरियां हो सकती है। क्योंकि ये कपडा पसीने को evaporate नहीं होने देता।

-> अधिक व्यायाम और शारीरिक गतिविधियाँ जिनमे बहुत उच्च स्तर पर पसीना आता हो करने से।

-> तेलीय कॉस्मेटिक का प्रयोग करने से क्योंकि ये आपके sweat gland को बंद करने का काम करते है।

-> सर्दियों के दौरान पसीना आने पर भी अधिक गर्म कपडें पहनने से।घमौरियों से निजात पाने के उपाय

-> ADHD और blood pressure जैसे समस्यायों में प्रयोग होने वाली दवाओं का सेवन करने से भी घमौरियां हो सकती है।

छोटे बच्चे इस समस्या से अधिक परेशान रहते है क्योंकि उनके sweat duct पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते जिसके कारण उन्हें घमौरियां अधिक परेशान करती है।

क्या घमौरियां भी दर्दनाक हो सकती है?

सामान्य स्थितियों में घमौरियां दर्दनाक नहीं होती। क्योंकि ये एक प्रकार के स्किन रैशेज होते है जो बहुत तेज़ खुजली और चुभन के साथ पैदा होते है। कई बार इनमे तेज़ खुजली है जो इन्फेक्शन हो सकता है। ऐसे तो ये सामान्य तरीकों से ठीक हो जाती है लेकिन कई बार इन्हें चुने से ये फफोले का रूप ले लेती है।

घमौरियों के घरेलू इलाज :-

1. दलिए का स्नान :

घमौरियों की समस्या से छुटकारा पाने के लिए दलिए का स्नान करें और अपने शरीर पर 15 से 20 मिनट तक उसे लगायें रखें। आप चाहे तो प्रभावित क्षेत्रों पर दलिए के स्क्रब का भी इस्तेमाल कर सकते है। ये आपकी त्वचः को exfoliate करके बंद sweat ducts को साफ़ करेग। घमौरियों के लिए ये सबसे बेहतर घरेलू उपचार हिया जो खुजली और सुजन से भी राहत दिलाता है।

2. एलोवेरा जेल :aloevera ke fayde 1

एलोवेरा में एंटी बैक्टीरियल और एंटी सेप्टिक गुण पाए जाते है जो विभिन्न तरह के स्किन रैशेज और घमौरियों से निजात दिलाने में मदद करते है। इसके लिए एलोवेरा का एक पत्ता लें और उसे काट लें। इसमें से जेल निकाल कर शरीर के प्रभावित हिस्सों पर लगायें। ये त्वचा की सुजन को कम करके लालिमा को खत्म करने में भी मदद करेगा। आप चाहे तो इसकी जगह aloe rich moisturizing lotion का भी इस्तेमाल कर सकते है। ये घमौरियों को ठीक करने के साथ-साथ स्किन इन्फेक्शन से राहत देने में भी मदद करेगा।

3. काबुली चने का आटा :

इस समस्या के लिए काबुली चने के आटे और पानी को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को त्वचा के प्रभावित हिस्सों पर लगायें और 15 मिनट तक लगे रहने दे। उसके बाद ठंडे पानी से इस पेस्ट को साफ़ कर लें। ये घरेलू उपाय घमौरियों को दूर करने के साथ-साथ उनमे होने वाली खुजली को भी शांत करता है।

4. मुल्तानी मिट्टी :

घमौरियों और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग सदियों से किया जाता आ रहा है। इसके लिए चार चम्मच मुल्तानी मिट्टी में गुलाबजल की कुछ बुँदे डालकर एक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को त्वचा पर लगायें। 3 घंटे बाद इसे ठंडे पानी से साफ़ कर लें।

5. बेकिंग सोडा :

बेकिंग सोडा में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो त्वचा के इन्फेक्शन को ठीक करके उसे सामान्य करने में मदद करते है। इसके लिए बेकिंग सोडा और पानी को मिलाकर एक सामान्य पेस्ट बना लें। अब किसी साफ़ और मुलायम कपडे की मदद से इसे त्वचा के घमौरी वाले हिस्सों पर लगाएं। आराम मिलेगा।

6. कच्चा आलू :

इसके लिए सामान्य आकार के आलू को काटकर उसकी स्लाइस काट लें। अब उन slices को त्वचा के प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें। ये घमौरियों की खुजली और जलन को शांत करने में मदद करेगा।

7. तरबूज :

थोडा का तरबूज लें। उसके सभी बीजों को निकालकर उसके पल्प को अलग निकाल लें। अब इस पल्प का इस्तेमाल अपनी त्वचा पर करें। आप चाहे तो कुचले हुए तरबूज के रस के इस्तेमाल से भी अपनी इस समस्या को ठीक कर सकते है।

8. अदरक :

अदरक के गुणों के बारे में जितनी बात की जाए उतनी ही कम है। ये घमौरियों के कारण हो रही त्वचा की खुजली और जलन को भी कम करता है। इसके लिए थोड़ी सी अदरक को पीस लें और उसे पानी में उबाल लें। ठंडा होने के बाद साफ़ और मुलायम कपडे की मदद से इस मिश्रण को त्वचा पर लगायें। फ़ायदा मिलेगा।

9. बर्फ के टुकड़े :

इस उपाय के लिए बर्फ के कुछ टुकड़े लें। और उन्हें पानी में डाल दें। पानी के ठंडा हो जाने के बाद किसी साफ़ कपडे की मदद से इस पानी को त्वचा पर लगायें। आप चाहे तो सीधे बर्फ का इस्तेमाल करके भी जलन कम कर सकते है।

10. कपूर :

घमौरियों से राहत पाने के लिए इस उपाय को काफी पुराने समय से प्रयोग में लाया जाता आ रहा है। ये त्वचा की जलन और खुजली को दूर करने में भी मदद करता है। इसके लिए कपूर का पाउडर बना लें। अब इसे नीम आयल के साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को त्वचा के प्रभावित हिस्सों पर लगायें। आपको अच्छा महसूस होगा।

11. हरा धनिया और चंदन का पाउडर :

हरे घनिए की कुछ सुखी पत्तियों और चंदन पाउडर को मिलाकर पीस लें। अब इसमें थोडा सा रोज water मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट का इस्तेमाल त्वचा पर करें। पूरी तरह सूखने तक इस पेस्ट को त्वचा पर लगायें रखें। जब यह सुख जाए तो ठंडे पानी से इसे साफ़ कर लें। धनिया अपने एंटी सेप्टिक गुणों से जाना जाता है जबकि चंदन घमौरियों की जलन और खुजली को कम करता है।

12. हिना पाउडर :

हां, इससे त्वचा पर हलकी लालिमा आ जाएगी लेकिन घमौरियों और रैशेज के लिए ये एक बेहतर घरेलू उपचार है। इसके लिए हिना पाउडर और थोडा सा पानी मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब इसे त्वचा के प्रभावित हिस्से पर लगायें। 15 से 20 मिनट तक रखने के बाद इसे ठंडे पानी से धो लें।

13. नींबू का रस :

नींबू के रस में एंटी oxidents की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो त्वचा को हील करने में मदद करते है। इसके लिए नींबू का ताज़ा रस निकालकर उसमे थोडा पानी मिलाएं। अब इसमें थोडा सा शहद भी मिला लें। रोजाना 3 से 4 ग्लास इसका सेवन करें। आपकी घमौरियां 14 दिन के भीतर गायब हो जाएंगी।

14. खीरा :

घमौरियों के साथ होने वाली सबसे आम बड़ी समस्या है उनमे होने वाली जलन। लेकिन क्या आप जानते है की खीरे की slices की मदद से आप इस समस्या को भी ठीक कर सकते है। जी हां, इसके लिए खीरे की स्लाइस काटकर उन्हें प्रभावित हिस्सों पर लगायें। आप चाहे तो खीरे का कचूमर निकालकर उसके पल्प को अपनी त्वचा पर लगा सकते है। इस पल्प को 30 मिनट तक रखने के बाद पानी से धो दें।

15. नीम :neem

नीम अपने एंटी बैक्टीरियल, एंटी सेप्टिक और astringent गुणों के लिए जाना जाता है। ये त्वचा संबंधी विभिन्न समस्याओं के लिए प्रयोग में लाये जाने वाले सबसे प्रमुख उपायों में से एक है। इसके लिए नीम की पत्तियों को क्रश करके उन्हें रैशेज पर लगायें। और सूखने के बाद पानी से साफ़ कर लें।

तो, ये थे कुछ घरेलू तरीके जिनका इस्तेमाल कर आप त्वचा संबंधी समस्या जैसे घमौरियां, रैशेज आदि से छुटकारा पा सकते है। इसके साथ ही आपको अपने खानपान पर भी ध्यान देना होगा। क्योंकि इस समस्या को भीतरी और बाहरी दोनों ओर से ठीक करना जरुरी है अन्यथा बाद में ये फिर से उत्पन्न हो सकती है।

प्रेगनेंसी में ज्यादा सोना कैसा होता है

प्रेगनेंसी में ज्यादा सोना कैसा होता है, प्रेगनेंसी में ज्यादा सोने से हो सकते है ये नुकसान, गर्भवती महिला को कितना सोना चाहिए, गर्भधारण के बाद ज्यादा सोना कैसा होता है

गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरुरी होता है। भरपूर नींद प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कमजोरी, थकान, तनाव, मूड स्विंग्स, जैसी परेशानी से निजात दिलाने में मदद करती है। साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। इसीलिए डॉक्टर भी प्रेग्नेंट महिला को नींद के प्रति लारपरवाही न करने की सलाह देते हैं, लेकिन पूरा समय सोते रहना भी अच्छी बात नहीं होती है, क्योंकि इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है। तो लीजिये आज हम आपको गर्भवती महिला को दिन में कितनी देर सोना चाहिए, और ज्यादा सोने से क्या होता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भवती महिला को दिन में कितनी देर सोना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान महिला रात के समय आठ से नौ घंटे जरूर सोना चाहिए, साथ ही दिन में भी एक या डेढ़ घंटा आराम करना चाहिए। इससे आपको फ्रैश महसूस होता है। साथ ही बॉडी को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है, और आपको थकान व् कमजोरी जैसी समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलती है। कुछ महिलाओं को बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण रात को नींद न आने की समस्या हो सकती है, ऐसे में अपनी नींद को दिन में सोकर जरूर पूरा करना चाहिए, और नींद न आने की समस्या से निजात पाने के लिए योगासन आदि करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में ज्यादा सोना कैसा होता है

किसी भी चीज की मात्रा यदि जरुरत से ज्यादा हो जाए तो ऐसा होने के कारण वो आपको फायदा कम और नुकसान ज्यादा पहुंचाती है। ऐसे में आपको इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की नींद भी आप ज्यादा न लें, बल्कि जितनी जरुरत है उतनी ही लें, क्योंकि प्रेगनेंसी में भी ज्यादा सोना आपकी परेशानी को बढ़ा देता है।

वजन बढ़ जाता है

गर्भवती महिला का वजन बढ़ना जरुरी होता है, लेकिन यदि वजन ज्यादा बढ़ने लग जाए तो इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है। ऐसे ही गर्भवती महिला यदि सारा दिन सोती है तो इससे बॉडी पर चर्बी जमने लगती है, और वजन बढ़ने के कारण आपको बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

हाई ब्लड प्रैशर

वजन बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या भी हो सकती है। और यदि महिला को यह समस्या हो जाती है तो यह केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचाती है।

आलस बढ़ता है

ज्यादा सोना प्रेगनेंसी के दौरान आलस को भी बढ़ाता है, ऐसे में किसी काम को करने का मन नहीं करता है, यहां तक की जो गर्भवती महिला और शिशु के लिए जरुरी है महिला उससे भी परहेज कर सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आलस आपकी परेशानी को बढ़ा सकता है।

थकान

अधिक सोने से शरीर के अंगो में दर्द महसूस होता है, जिसके कारण बॉडी को बिना कुछ किये ही हमेशा थका हुआ सा महसूस होता है। ऐसे में कमजोरी महसूस होना भी आम बात होती है।

पीठ दर्द

शिशु का गर्भ में वजन बढ़ने के कारण पीठ में हल्के फुल्के दर्द का रहना आम बात होती है, लेकिन यदि महिला सारा दिन सोती रहती है तो पीठ में बहुत ज्यादा दर्द की समस्या हो सकती है, जिसके कारण महिला को उठने बैठने, यहां तक की सोने में भी परेशानी हो सकती है।

तनाव

अधिक सोने के लिए मस्तिष्क पर भी बुरा असर पड़ता है, जिसके कारण तनाव महसूस होने लगता है, और गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए ही तनाव बहुत ज्यादा नुकसानदायक होता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को ज्यादा सोने से होते हैं, ऐसे में गर्भवती महिला को ज्यादा सोने से परहेज करना चाहिए। यदि कोई शारीरिक समस्या होती है तो अलग बात है, नहीं तो जितनी नींद पर्याप्त होती है उतनी नींद ही लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने के 9 फायदे

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध

गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही नाजुक और परेशानियों से भरा समय होता है। क्योंकि इस दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को शारीरिक परेशानियां हो सकती है। ऐसे में महिला को केवल अपने खान पान का ही नहीं बल्कि महिला क्या कर रही है, बैठने, उठने, आदि सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। ऐसे में कुछ भी करने से पहले गर्भवती महिला और उनका पार्टनर हर बात के लिए डॉक्टर या किसी अन्य व्यक्ति से सलाह जरूर लेते हैं। खासकर जब बात सम्बन्ध बनाने की आती है। प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना चाहिए या नहीं? इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय लेना ज्यादा बेहतर विकल्प होता है। क्योंकि यदि प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है तो सम्बन्ध बनाने में कोई दिक्कत नहीं होती है। जबकि प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होती है तो डॉक्टर्स इसके लिए मनाही कर सकते हैं क्योंकि इसके कारण महिला या शिशु की सेहत को नुक्सान पहुँच सकता है।

गर्भावस्था में सम्बन्ध बनाने के फायदे

यदि प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर आपको सम्बन्ध बनाने के लिए आपको मंजूरी देते हैंं तो आप प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बना सकते हैं। साथ ही यदि आप सुरक्षित तरीके और सभी सावधानियों का ध्यान रखकर सम्बन्ध बनाते हैं तो इसके कारण गर्भवती महिला को बहुत से फायदे भी मिलते हैं, जिससे प्रेग्नेंट महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

इम्युनिटी

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण इम्युनिटी कमजोर हो सकती है जिसके कारण महिला को संक्रमण का खतरा रहता है। लेकिन यदि आप अपने पार्टनर के साथ मिलन करती है तो इससे इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला और शिशु को संक्रमण के खतरे से बचाने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर

ब्लड प्रैशर की समस्या का गर्भवती महिला को होना महिला के साथ शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला के ब्लड प्रैशर का कण्ट्रोल में रहना बहुत जरुरी होता है। और ऐसे में यदि गर्भवती महिला अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाती है तो इससे ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। साथ ही इससे बॉडी में ब्लड फ्लो को भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए बेहतर होता है।

तनाव

प्रेग्नेंट महिला का तनाव लेना महिला के साथ शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन गर्भवती महिला के सम्बन्ध बनाने के बाद बॉडी से एंडोर्फिन हार्मोन उत्सर्जित होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को तनाव की समस्या से सुरक्षित रखने में मदद करता है। और साथ ही इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने में भी मदद मिलती है।

दर्द

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी के अंगो में दर्द की समस्या रह सकती है जिसके कारण कुछ महिलाएं ज्यादा भी परेशान हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला के सम्बन्ध बनाने से शरीर की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

कैलोरी

गर्भवती महिला की भूख प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ सकती है जिसके कारण महिला की अधिक खाने की इच्छा होती है। ऐसे में अधिक खाने के कारण वजन के अधिक बढ़ने की समस्या महिला को हो सकती है। और वजन का अधिक बढ़ना प्रेगनेंसी में गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान यदि प्रेग्नेंट महिला सम्बन्ध बनाती है तो इससे बॉडी में मौजूद अतिरिक्त कैलोरी को बर्न करने में मदद मिलती है, जिससे प्रेग्नेंट महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

प्यार बढ़ता है

प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से बॉडी से ऐसे हॉर्मोन्स रिलीज़ होते हैं जो पति और पत्नी के बीच प्यार को बढ़ाने में मदद करते हैं। ऐसे में पति और पत्नी को अपने बीच प्यार को बढ़ाने के लिए पूरी सुरक्षा के साथ प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

नोर्मल डिलीवरी

गर्भावस्था के आखिरी दिनों में सम्बन्ध बनाने से गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे प्रसव पीड़ा होने के चांस बढ़ते हैं। और महिला की नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ते हैं। लेकिन इस दौरान बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरुरत होती है।

बेहतर नींद

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों, वजन बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को अनिंद्रा की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाती है तो महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि सम्बन्ध बनाने से बॉडी रिलैक्स महसूस करती है। जिससे महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

डिलीवरी

प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में यदि गर्भवती महिला सम्बन्ध बनाती है तो इससे पेल्विक की मांसपेशियों को मजबूती मिलने में मदद मिलती है। जिससे यदि महिला महिला को नार्मल डिलीवरी होती है तो उस दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए

  • यदि महिला का पहले गर्भपात हो चूका हो या फिर गर्भपात होने का दर हो।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी भी तरह की शारीरिक समस्या हो।
  • गर्भ में दो या दो से ज्यादा शिशु के होने पर।
  • महिला को ब्लीडिंग या ऐंठन की समस्या हो।
  • यदि समय से पहले प्रसव होने की आशंका हो।
  • यदि एमनियोटिक थैली से तरल पदार्थ निकलने लगे।
  • सम्बन्ध बनाने में महिला किसी भी तरह की परेशानी का अनुभव करे।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने के कुछ फायदे, ऐसे में यदि प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। तो पूरी सावधानी बरतते हुए आप भी अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बना सकती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखे की यदि महिला तैयार नहीं है या महिला को कोई दिक्कत है तो सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी में कुंदरू खाने के बेहतरीन फायदे

कुंदरू एक मौसमी सब्ज़ी है जो फाइबर, आयरन, विटामिन्स, कैल्शियम, पोटैशियम व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप इस सब्ज़ी का सेवन करना चाहे तो कर सकती है। क्योंकि इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन इसके सेवन से पहले इस बात का ध्यान रखें जरुरत से ज्यादा इसका सेवन न करें। क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन गर्भवती महिला की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान कुंदरू के फायदे के लिए सिमित मात्रा में ही कुंदरू का सेवन करे। तो आइये अब उस आर्टिकल में हम आपको कुंदरू खाने के कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

फाइबर

कुंदरू में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला इसका सेवन करती है तो इससे महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। जिससे कब्ज़, अपच, पेट में गैस, बवासीर जैसी परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

आयरन

कुंदरू का सेवन करने से शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के फायदा होता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों जैसे की थकान, कमजोरी, आलस से निजात पाने में मदद मिलती है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना भी प्रेग्नेंट महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। ऐसे में कुंदरू का सेवन प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि फाइबर से भरपूर होने के कारण कुंदरू प्रेग्नेंट महिला के मेटाबोलिज्म रेट को बढ़ाने के साथ शरीर में चर्बी जमने से भी रोकता है। जिससे महिला के वजन को संतुलित रहने में मदद मिलती है।

ब्लड में शुगर के लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते है

प्रेगनेंसी के दौरान कुंदरू का सेवन करने से ब्लड में शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान शुगर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को यदि शुगर कम होने की समस्या होती है तो ऐसे में महिला को कुंदरू का सेवन नहीं करना चाहिए।

विटामिन्स और एंटी ऑक्सीडेंट्स

विटामिन्स और एंटी ऑक्सीडेंट्स, एंटी बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल से भरपूर कुंदरू का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद मिलती है। और गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को कुंदरू का सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिल सके।

तनाव

विटामिन ए, विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर कुंदरू का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के मस्तिष्क को भी रिलैक्स रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को तनाव से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो कुंदरू का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को कुंदरू का सेवन कितनी मात्रा में करना चाहिए इसके लिए एक बार डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए।

घर पर बनाएं ये फेस पैक और दिखें जवान और पाएं खूबसूरत त्वचा

त्वचा को हमेशा दमकता हुआ और जवान रखने की इच्छा हर महिला को होती है, साथ ही पुरुष भी अपने चेहरे की केयर का बहुत ध्यान देते है, परन्तु कई बार सही से पोषण न मिलने के कारण, व् धूल मिट्टी से चेहरे पर दाग धब्बे, झुर्रियां, झाइयां जैसी समस्या हो जाती है, जिसके कारण चेहरे का ग्लो कम हो जाता है, और साथ ही त्वचा भी समय से पहले बूढ़ी लगने लगती है, और अपनी त्वचा को आकर्षित बनाने के लिए महिलायें तरह तरह की कोशिश करती है, जैसे की महंगे महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना, और ब्यूटी ट्रीटमेंट लेना, आदि।

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fruits face pack

त्वचा पर धूल मिट्टी के जमने के कारण त्वचा पर मृत कोशिकाएं इकट्ठी होने लगती है, जिसके कारण त्वचा अपनी चमक खो देती है, और इस समस्या को दूर करने के लिए महिलायें बाजार में आये तरह तरह के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती है, परन्तु कई बार ये प्रोडक्ट्स आपकी त्वचा के लिए सेफ नहीं होते है, साथ ही बार बार ब्यूटी ट्रीटमेंट लेना भी काफी महंगा पड़ता है, इसके साथ यदि आप अपनी त्वचा की सही से केयर नहीं करते है, तो भी इसका आकर्षण और चमक भी खो जाती है, परन्तु क्या आप जानते है की आप कम खर्चे और आसानी से घर बैठे इस समस्या का समाधान कर सकते है, क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे फेस पैक बताने जा रहे है, जो आपकी त्वचा को ग्लोइंग बनाने के साथ जवान बनाने में भी मदद करते है, तो आइये आपको विस्तार से जानते है वो फेस पैक कौन से है।

चावल के आटे और दूध से बना फेस पैक:-

chaval ke aate ka fece pack

त्वचा का ढीलापन आपको समय से पहले बूढ़ा बना सकता है, परन्तु यदि आप चावल के आटे से बने इस फेस पैक का इस्तेमाल करते है, तो आपकी त्वचा को खूबसूरत दिखने के साथ जवान रहने में भी मदद मिलती है, इसके लिए आप चावल के आटे में दूध को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद कम से कम पंद्रह मिनट के लिए इसे चेहरे पर लगाकर छोड़ दें, ऐसा करने के बाद अपने चेहरे को पानी की मदद से धो दें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा में कसाव आता है, रिंकल्स और डेड स्किन सेल्स को दूर करने में मदद मिलती है।

अंडे के मास्क का इस्तेमाल करें:-

खूबसूरत त्वचा और जवान दिखने के लिए अंडे का फेस मास्क आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है, और यह उपाय सबसे आसान भी है, इसे करने के लिए आप एक अंडे को फोड़ कर उसका तरल भाग एक बाउल में निकाल लें, उसके बाद उसे अच्छे से फैट लें, अब इसे अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें, ऐसा करने से आपकी स्किन को टाइट, ग्लोइंग और जवान दिखने में मदद मिलेगी, उसके बाद जब यह सुख जाएँ तो साफ पानी की मदद से इसे साफ़ कर लें।

संतरे के छिलके और चन्दन का फेस पैक:-

orange peel

चन्दन का इस्तेमाल सालों से महिलाओ के साथ पुरुष भी अपने चेहरे को चमकाने के लिए करते है, साथ ही इसके कारण आपकी त्वचा की ताज़गी को भी बने रहने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको जवान दीखते है, इसके लिए आप संतरे के छिलको को सुखाकर पाउडर तैयार कर लें, उसके बाद इसमें थोड़ा सा चन्दन का पाउडर और पानी मिलाकर एक गाढ़ा लेप तैयार करें, अब इस लेप को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, आप चाहे तो इससे मसाज भी कर सकते है, उसके पंद्रह मिनट बाद इसे पानी से साफ़ कर दें, आपको फ़र्क़ जरूर दिखाई देगा।

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टमाटर और शहद के फेस पैक का इस्तेमाल करें:-

इस फेस पांच का इस्तेमाल करने से भी आपको जवान बने रहने और ग्लोइंग स्किन पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप दो चम्मच टमाटर के रस में थोड़ा सा शहद डाल कर अच्छे से मिक्स करें, इसके कारण आपके चेहरे से झाइयां, मुहांसे आदि को दूर होने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपकी त्वचा जवान बने रहती है, और साथ ही आपकी स्किन को सॉफ्ट होने में मदद मिलती है, आप इस पैक का इस्तेमाल हफ्ते में दो बार भी कर सकते है।

केले, मलाई और शहद के फेस पैक का इस्तेमाल करें:-

इस फेस पैक को बनाने के लिए एक केले को अच्छे से मैश कर लें, उसके बाद उसमे थोड़ी सी मलाई और शहद को अच्छे से मिक्स करके एक पैक तैयार करें, अब इसे अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें उसके बाद इसे साफ़ पानी की मदद से साफ़ कर दें, ऐसा करने से आपकी स्किन को ग्लोइंग बनने में और साथ ही आपको चेहरे को जवान बनने में मदद मिलती है

हल्दी चन्दन और दूध से बनाएं फेस पैक:-

besan face pack

हल्दी आपकी स्किन को दमकता हुआ बनाने में बहुत मदद करती है, इसके लिए आप एक बाउल लें, उसमे थोड़ी सी हल्दी, उतना ही चन्दन और उपरोक्त मात्रा में दूध डाल कर अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें, अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर अच्छे से लगाएं, और दो से तीन मिनट के लिए मसाज करें, उसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगे रहने दें, और दस से पंद्रह मिनट के बाद पानी की मदद से अपने चेहरे को साफ़ कर दें, ऐसा करने से आपको अपने चेहरे को ग्लोइंग और जवान बनाने में मदद मिलती है।

आटे और हल्दी का फेस पैक बनाएं:-

क्या आप जानते है जिस आटे की आप रोटी खाते है, उसकी मदद से आप अपनी स्किन को ग्लोइंग और जवान बना सकते है, इसके लिए आप हल्दी और आटे के साथ मिलाएं, उसके बाद उसमे थोड़ा सा दूध और थोड़ा सा शहद मिक्स करें, इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाने से पहले अपने चेहरे को अच्छे से धो लें, उसके बाद इस्पेसट को अपने चेहरे पर अच्छे से लगाएं और कम से कम दस मिनट के लिए छोड़ दें, इसके सूखने के बाद इसे गुनगुने पानी की मदद से साफ़ करें, इसे लगाने से आपके चेहरे को दमकता हुआ बनने में मदद मिलेगी, जिसके कारण आप जवान महसूस करेंगी।

बेसन, हल्दी, दूध और शहद से बना फेस पैक:-

बेसन का हल्दी के साथ इस्तेमाल करने से भी आप अपनी त्वचा को ग्लोइंग और जवान बना सकते है, इसके लिए आप थोड़ा सा बेसन लें, उसमे चुटकी भर हल्दी को मिलाएं, उसके बाद पेस्ट तैयार करने के लिए उसमे दूध और शहद को मिक्स करें, अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं, और दो से तीन मिनट के लिए अच्छे से मसाज करें, और दस मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें, ऐसा करने से आपके चेहरे को नमी मिलेगी, दमकती हुई बन जाएगी, और जवान भी लगेगी।

अंगूर, आटा, और बेकिंग पाउडर का फेस पैक बनाएं:-

इसके लिए आप सबसे पहले चार से पांच अंगूरों का रस निकाल लें, उसके बाद इसमें थोड़ा सा आटा और बेकिंग सोडा मिलाएं, इसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, जैसे ही ये सूख जाएँ उसके बाद अपने चेहरे को पानी की मदद से अच्छे से साफ़ कर लें, इसे चेहरे पर लगाने से आपको अपने चेहरे पर होने वाले सभी दाग धब्बो की समस्या से छुटकारा मिलेगा, जिसके कारण आपको त्वचा को जवान और ग्लोइंग बनने में मदद मिलेगी।

दही और खीरे के फेस पैक का इस्तेमाल करें:-

dahi cucumber

दही में लैक्टिक एसिड होता है जो आपकी त्वचा में निखार लाने में आपकी मदद करता है इसके साथ खीरा भी आपकी स्किन को क्लीन करके उसकी चमक को बढ़ाने में मदद करता है, इसके लिए आप एक बाउल में दही लें, और खीरे और पीस लें उसके बाद दही और खीरे का एक पेस्ट तैयार करके अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, और अपने चेहरे को मसाज करें, उसके बाद इसे थोड़ी देर के लिए चेहरे पर रहने दें, और फिर पानी की मदद से इसे साफ़ कर लें, ऐसा करने से आपके चेहरे को चमकदार बनाने में मदद मिलती है, साथ ही आपकी त्वचा नमीयुक्त और जवान बनने में भी मदद मिलती है।

तो ये कुछ फेस पैक है जिनका इस्तेमाल यदि आप हफ्ते में एक से दो बार भी करते है तो आपकी स्किन को दमकती हुई और जवान बनने में मदद मिलती है, और ये सब घर में बहुत ही आसानी से बन भी जाते है, साथ ही इसमें इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स भी आपकी रसोई में आसानी से उपलब्ध होते है, तो यदि आपको भी अपनी त्वचा को हमेशा खिलखिलाती हुई और जवान रखना चाहते है तो आपको इन टिप्स का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

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प्रेगनेंसी के दौरान संबंध बनाने के फायदे और नुकसान

प्रेगनेंसी में संबंध बनाने के फायदे और नुकसान, क्या प्रेगनेंसी में संबंध बनाना चाहिए, effects of Physical relation during Pregnancy

गर्भावस्था हर लड़की और महिला के लिए महत्वपूर्ण समय होता है। इस समय में महिलाओं के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है। हर महिला के लिए यह समय बहुत ही अनमोल और क्रूशियल होता है। क्योंकि इस समय में गर्भवती महिला को अपनी बहुत से आदतें बदलनी पड़ती है।

आज हम बात करेंगे प्रेगनेंसी के दौरान संबंध बनाने के बारे में। बहुत से लोगों को गर्भावस्था में संबंध बनाने और ना बनाने करने से जुड़े भ्रम है। डॉक्टरों के अनुसार प्रेगनेंसी में संबंध बनाने में कोई परेशानी नहीं होती। पर हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती इसीलिए हर किसी को इसका अलग अलग प्रभाव देखने को मिलता है।

प्रेगनेंसी के दौरान संबंध बनाने के कई फायदे और कई नुक्सान भी होते है।

यहां हम आपको प्रेग्नेन्सी के दौरान संबंध बनाने के फायदे और नुक्सान दोनों के बारे में बताएंगे।

गर्भावस्था के दौरान संबंध बनाने के फायदे

यह पढ़ने में आपको थोड़ी हैरानी होगी की गर्भावस्था में संबंध बनाने से बहुत से फायदे होते है। आईये जानते है गर्भावस्था में क्या है संबंध बनाने के फायदे।

रक्त संचार:

  • प्रेगनेंसी में संबंध बनाने से बेहतर रक्त संचरण होता है।
  • रक्त संचार का अच्छा होना माँ और शिशु दोनों के लिए ही फायदेमंद होता है।

पेल्विक मसल्स:

  • गर्भावस्था के दौरान संबंध बनाने से महिला के पेल्विक मसल्स मजबूत होती है।
  • जब गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनों में सम्बन्ध बनाये जाये तो इससे पेल्विक मसल्स को बहुत फायदा मिलता है।
  • पेल्विक मसल्स स्ट्रांग होने से नार्मल डिलीवरी के दौरान कम परेशानियां होती है।

इम्युनिटी:

  • इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता।
  • आपको यह जानकर हैरानी होगी की प्रेगनेंसी में संबंध बनाने से महिला की इम्युनिटी बेहतर होती है।
  • गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमजोर हो जाती है।
  • ऐसे में संबंध बनाने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी पहले से बेहतर हो जाती है।

तनाव:

  • प्रेगनेंसी के दौरान संबंध बनाने से तनाव में कमी आती है।
  • संबंध बनाने के बाद महिला में एंडोर्फिन हार्मोन्स का जन्म होता है।
  • जिससे स्ट्रेस लेवल कम होता है।

नींद:

  • गर्भवती महिला को संबंध बनाने के बाद नींद अच्छी आती है।
  • अच्छी नींद माँ और शिशु के लिए दोनों ही फयदेमंद होती है।

जैसा की हम पहले भी बता चुके है के हर महिला की गर्भावस्था अलग होती है जरुरी नहीं की गर्भावस्था के दौरान सम्बन्ध बनाने से हर महिला को लाभ भी कुछ महिलाओं को इसके नुक्सान भी हो सकते है।

प्रेगनेंसी में संबंध बनाने से होने वाले नुकसान

आइये जानते है के गर्भवती महिला को संबंध बनाने से क्या क्या नुकसान हो सकते है।

ब्लीडिंग:

  • कुछ गर्भवती महिलाओं को संबंध बनाने के बाद स्पोर्टिंग या ब्लीडिंग की शिकायत हो जाती है।
  • हल्की से स्पोर्टिंग से कोई परेशानी नहीं होती।
  • यदि ब्लीडिंग ज्यादा है तो बिना देर किये अपने डाक्टर से मिले।

गर्भपात:

  • गर्भावस्था के दौरान संबंध बनाने से कुछ महिलाओं को एबॉर्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  • ऐसा तभी होता है जब किसी महिला की गर्भपात की मेडिकल हिस्ट्री हो।
  • किसी गर्भवती महिला का पहले भी कोई गर्भपात हो चूका हो।

वैजाइनल इन्फेक्शन:

  • अगर किसी महिला को पहले भी वैजाइनल इन्फेक्शन हो चूका है।
  • तब गर्भावस्था के दौरान संबंध बनाने से बचना चाहिए।
  • ऐसे में मेडिकल हिस्ट्री के कारण दोबारा भी इन्फेक्शन हो सकता है।
  • इस इन्फेक्शन का खतरा पुरुष के इन्फेक्टेड होने से भी होता है।

दर्द:

  • प्रेगनेंसी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है।
  • कई बार इन बदलावों से गर्भवती महिला के शरीर में दर्द भी रहता है।
  • इस दौरान अगर संबंध बनाने जाए तो वह शारीरक दर्द बढ़ भी सकता है।

शुरूआती तीन महीने:

  • गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीने बहुत ही महत्वपूर्ण होते है।
  • इन दिनों में महिलाओं को थकान, उलटी, चिड़चिड़ापन का सामना करना पड़ता है।
  • इसी कारण महिलाओं का मन संबंध बनाने का नहीं होता।
  • इसीलिए शुरुआत के तीन महीनों में संबंध बनाने से बचना चाहिए।

एक नार्मल गर्भावस्था में संबंध बनाने पूरी तरह से सुरक्षित है। परन्तु यदि आपको कभी भी किसी भी समस्या का सामना करना पड़े तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिले या फिर प्रेगनेंसी के शुरुआत में ही अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लीजिये।

आशा है इस लेख से आपके बहुत सारे सवालों का हल मिला होगा।

बथुए का साग खाने के फायदे

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हरी सब्जियों को खाने के फायदों से हम सभी भली भांति परिचित है। लेकिन फिर भी बहुत से लोग इन सब्जियों को खाने से पहले नाक-मुँह सिकुड़ लेते है। सर्दियों के मौसम में मिलने वाली ये हरी सब्जियां जितनी देखने में सुन्दर लगती है उतनी ही खाने में भी। पालक, मेथी आदि हरी सब्जियों के बारे में तो आप जानते ही होंगे लेकिन इसके अलावा भी जिसका सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है और वो है बथुआ।

बथुए को गेहूं के खेतों में उगाया जाता है। जब गेहूं की बुआई की जाती है तो अक्सर ये खरपतवार के रूप में उग जाता है। लेकिन फिर भी इसे खरपतवार नहीं माना जाता क्योंकि इसमें बहुत से पौष्टिक और लाभकारी गुण होते है। अधिकतर लोग इसका सेवन सर्दियों के दौरान साग के रूप में करते है जो बहुत ही स्वादिष्ट इंडियन शाकाहारी व्यंजन है।

बथुए का साग खाने का सबसे बड़ा फायदा हमारे पेट को होता है इसका सेवन करने से पेट में पथरी नहीं होती। इसकी ठंडी तासीर के चलते ये बढ़े हुए लिवर को सामान्य करने में भी मदद करता है। यूँ तो सभी इसका सेवन साग के रूप में करते है लेकिन कुछ लोग रायते में डालकर भी इसका सेवन करते है। ऐसे तो बथुए का साग हर रूप में हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है लेकिन सभी को इसके फायदों के बारे में पता नहीं होता। इसीलिए आज हम आपको बथुए के कुछ फायदे बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आप भी जान जायेंगे की ये हरी सब्जी आपके लिए कितनी लाभकारी है।

बथुआ और उसका साग खाने के फायदे :-

1. पाचन शक्ति :

भूख न लगना, खाने का ठीक तरह से नहीं पचना, खट्टी डकारें, पेट फूलना आदि जैसी समस्या के लिए बथुए का साग खाना बहुत लाभकारी होता है। इसके सेवन से पाचन क्रिया बेहतर होती है जिससे ये सभी समस्याएं ठीक हो जाती है।

2. गुर्दे की पथरी :

बथुए का साग खाने से गुर्दे की पथरी में बहुत लाभ होता है। इसका सेवन करने से पेट और किडनी मजबूत और सेहतमंद होती है। स्टोन की समस्या के लिए बथुए के रस में शक्कर मिलाकर पीएं। इससे पथरी धीरे-धीरे टूटकर अपने आप बाहर निकल जाती है।

3. पेट की बीमारियां :

आज के समय में पेट से जुडी बीमारियां बहुत अधिक देखने को मिलती है। अगर आप भी अक्सर गैस, अपच, कृमि, पथरी, लकवा, ठिया या गुर्दे के किसी अन्य रोग से परेशान है तो बथुए का सेवन करना शुरू कर दें। इसके लिए आप बथुए के उबले हुए पत्तों में दही मिलाकर उसका सेवन करें।

4. पेट के कीड़े :

बच्चों के पेट में कीड़े होने पर भी बथुआ बहुत लाभकारी होता है। पेट में कीड़े होने यदि कुछ दिनों तक बच्चे को बथुए का साग खिलाया जाए तो इससे पेट के कीड़े मर जाते है। इसके अलावा आप बथुए के 1 कप रस में स्वादानुसार नमक मिलाकर भी इसका सेवन कर सकते है।

5. कब्ज :

कब्ज की समस्या दूर करने के लिए भी बथुए के साग का सेवन करना चाहिए। बथुआ खाने से अमाशय मजबूत होता है। इसे खाने से शरीर में स्फूर्ति और शक्ति भी आती है।

6. रक्त शुद्धि :

रक्त शुद्ध करने के लिए भी बथुआ बहुत लाभकारी होता है। सब्जी के रूप में यह एक बेहतर ब्लड पूरिफिएर है। इसके लिए बथुए को नीम की 4 से 5 पत्तियों को मिलकर एक साथ खाएं। इससे रक्त शुद्ध होगा और साफ़ भी होगा।

7. पीरियड्स :

जिन महिलाओं के पीरियड्स अच्छी तरह से नहीं आते या रुके हुए है उनके लिए भी बथुआ बहुत लाभकारी होता है। इसके लिए 2 चम्मच बथुए के बीज को 1 ग्लास पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। उसके बाद इसे छानकर पी लें। पीरियड्स अच्छी तरह आने लगेंगे।

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8. चर्म रोग :

इस समस्या के लिए बथुए को उबालकर उसका रस पियें। आप चाहे तो इसकी सब्जी बनाकर भी खा सकते है। ऐसा करने से सफ़ेद दाग, खुजली, फोड़े फुंसी, कुष्ट रोग में फायदा मिलता है। बथुए के उबले पानी से त्वचा धोने पर चर्म रोग ठीक होता है।

9. पीलिया :

पीलिया की शिकायत होने पर गिलोय के रस और बथुए के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर एक बोतल में रख लें। और दिन भर में 25 से 30 ग्राम 2 बार इसका सेवन करें। पीलिया में राहत मिलेगी।

10. पेशाब की बीमारी :

पेशाब में जलन, या उस दौरान होने वाले दर्द को दूर करने के लिए आधा किलो बथुए को 3 ग्लास पानी में उबाल लें और इस पानी को छान लें। अब बथुए को निचोड़कर पानी निकाल लें और उसे छाने हुए पानी में मिला लें। फिर इसमें नींबू, जीरा, और थोड़ी सी काली मिर्च और सेंधा नामक मिलाकर इसका सेवन करें।

11. बवासीर :

बथुए का साग खाने से बवासीर में भी राहत मिलती है। इसके अतिरिक्त प्लीहा (तिल्ली) के बढ़ने पर भी उबले हुए बथुए में काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर इसका सेवन करें। इससे ये समस्या अपने आप कम हो जाएगी।

12. इन्फेक्शन :

डिलीवरी के साथ होने वाले इन्फेक्शन में भी आप बथुआ का प्रयोग कर सकती है। इसके लिए 10 ग्राम बथुआ, अजवाइन, मेथी और गुड़ को मिलाकर 10 से 15 दिन तक इसका सेवन करें। आपकी समस्या दूर हो जाएगी।

13. आँखों के लिए :

बथुए के साग में विटामिन ए अच्छी मात्रा में पाया जाता है। जो आँखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। आँखों में सूजन, लाली और दर्द जैसी समस्यायों के लिए भी आप बथुए के साग का प्रयोग कर सकते है।

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14. दांतों और मुंह के लिए :

मुंह से दुर्गन्ध आना, मुंह में अल्सर और पायरिया जैसी समस्यायों के लिए भी बथुआ बहुत लाभकारी होता है। इसके लिए बथुए के पत्तों को कच्चा चबाएं।

15. बालों के लिए :

बालों को सुन्दर, काला और घना बनाने के लिए आप बथुए का सेवन कर सकते है। क्यूंकि इसमें बहुत से विटामिन और मिनरल्स पाए जाते है जो बालों को अंदर से पोषण प्रदान करते है।