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प्रेगनेंसी में मूली खाने के फायदे

प्रेगनेंसी में मूली

खान पान को लेकर गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत परेशानी हो सकती है खासकर जो पहली बार माँ बनने का अनुभव ले रही होती है। क्योंकि कुछ खाने की चीजों को लेकर महिला के मन में सवाल आ सकता है की प्रेगनेंसी के दौरान इसे खाएं या नहीं, जैसे की मूली। तो इसका जवाब है हाँ, गर्भवस्था के दौरान महिला मूली का सेवन कर सकती है क्योंकि इसमें पोषक तत्व जैसे की आयरन, कैल्शियम, फाइबर सभी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही मूली का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है की इसे कितना और किस तरह से खाना चाहिए साथ ही इसको अच्छे से धोने और साफ़ करने के बाद ही खाने के लिए प्रयोग में लाना चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान मूली का सेवन करने से कुछ महिलाओं को गैस की समस्या अधिक होती है ऐसे में मूली का सेवन करते समय महिला को इसे सिमित मात्रा में ही लेना चाहिए ताकि मूली खाने के कारण किसी तरह की समस्या न हो।

प्रेगनेंसी में मूली खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि मूली का सेवन करती है तो इसमें मौजूद पोषक तत्वों का सेवन करने से गर्भवती महिला और शिशु को बहुत फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में मूली का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

पोषक तत्वों से है भरपूर

मूली में विटामिन सी, फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला के साथ, गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं। इसीलिए इन पोषक तत्वों को बॉडी में भरपूर रखने के लिए और प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए गर्भवती महिला को मूली का सेवन जरूर करना चाहिए।

फाइबर

फाइबर का बॉडी में भरपूर मात्रा में होना पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। और मूली में फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होता हैं। इससे महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी से राहत पाने में भी मदद मिलती है। लेकिन कुछ महिलाओं को मूली का सेवन करने से यदि गैस एसिडिटी आदि की समस्या हो सकती है उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए।

स्किन सम्बन्धी फ़ायदे

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला की स्किन पर भी दाग धब्बे की समस्या, झाइयां आदि की समस्या हो सकती है। और मूली का सेवन करने से महिला की स्किन से महिला को स्किन से जुडी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

मूली में कैल्शियम की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती देने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही यदि महिला मूली का सेवन करती है तो इससे थकान व् कमजोरी की समस्या से राहत पाने में भी मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने की समस्या से परेशान हो सकती है। और ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या होने के कारण महिला के साथ शिशु को भी दिक्कत हो सकती है लेकिन यदि महिला अपनी डाइट में सलाद या किसी अन्य रूप में मूली का सेवन करती है। तो इससे ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रखने में मदद मिलती है।

ब्लड शुगर लेवल

गेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी समस्या के होने का डर गर्भवती महिला को हो सकता हैं, लेकिन यदि महिला मूली का सेवन करती है तो इससे ब्लड शुगर लेवल को कण्ट्रोल में रखने में मदद मिलती है। साथ ही यदि महिला शुगर की समस्या से परेशान है तो मूली का सेवन करने से शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

वजन

फाइबर और पानी की मात्रा से भरपूर होने के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है। क्योंकि पानी का सेवन करने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है तो फाइबर की मात्रा प्रचुर होने के कारण पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में मूली का सेवन करते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • मूली मिट्टी में उगाई जाती है ऐसे में इसमें बैक्टेरिया के होने का खतरा हो सकता है, और यदि महिला मूली को बिना अच्छे से धोये इसका सेवन करती है तो यह बैक्टेरिया महिले के स्वास्थ्य के साथ भ्रूण के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।
  • यदि मूली खाने के कारण महिला को गैस की परेशानी होती है, तो मूली का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए क्योंकि मूली का सेवन करने से महिला की यह समस्या अधिक हो सकती है।

प्रेगनेंसी में मूली के पत्ते खाने के फायदे

गर्भवस्था की दौरान केवल मूली का ही नहीं बल्कि मूली के पत्तों का सेवन करने से भी महिला को बहुत फायदे मिलते हैं। जैसे की इससे ब्लड को साफ़ करने, इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है, दिल को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है , ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है, आदि। तो मूली के साथ मूली के पत्तों का सेवन भी गर्भवती महिला चाहे तो कर सकती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए की मूली के पत्तों को अच्छे से धोने के बाद की प्रयोग में लाएं ताकि किसी भी तरह के बैक्टेरियल संक्रमण के खतरे से गर्भवती महिला और शिशु को बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को मूली का सेवन करने से मिलते हैं। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला चाहे तो मूली को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है।

गर्भावस्था में शुरूआती तीन महीनों में कैसे रखे अपना ध्यान?

प्रेगनेंसी का पूरा समय नो महीनो का होता है। नो महीनो बाद हम अपने शिशु को अपने हाथो में लेकर प्यार कर सकते है। पर इन नो महीनो के दौरान गर्भवती महिला को बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। इन पुरे नो महीनो को जानने के लिए हमने इन्हे तीन तीन महीनों के तीन भागों में बांटा है। पहला भाग गर्भधारण के पहले सप्ताह से शुरू हो कर गर्भवस्था के तीसरे महीने तक होता है। इस भाग में हम जानेंगे की एक गर्भवती महिला को शुरूआती तीन महीनो में किन किन बदलावों से गुजरना पड़ता है और इस दौरान किस प्रकार वह अपना और अपने शिशु का ध्यान रख सकती है और साथ ही जानते है के इन तीन महीनो में शिशु का कितना विकास होता है।

शारीरक बदलाव

गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनो में बहुत से बदलाव होते है। इस समय में शरीर में बहुत से हार्मोन्स का निर्माण होता है। यह हार्मोन्स हमारे शरीर के लगभग हर हिस्से पर अपना असर डालते है। सबसे पहला बदलाव होता है की गर्भवती महिला को पीरियड्स आने बंद हो जाते है। पीरियड्स बंद होने के कुछ सप्ताह के भीतर ही महिला को थकान, उलटी, पेट की पाचन क्रिया का धीमा होना, चिड़चिड़ापन, ब्रैस्ट में थोड़ी बहुत अकड़न, छाती में जलन, वेट का बढ़ना, सर दर्द, कुछ चीजों की क्रेविंग्स, कुछ चीजों की स्मेल से उलटी, कब्ज आदि होना शुरू हो जाता है। हर महिला की गर्भावस्था अलग होती है इसीलिए ऐसा भी हो सकता है के कुछ महिलाओं को इनमे से किसी भी लक्षण से ना गुजरना पड़े।

इस समय के दौरान गर्भवती महिला को हर थोड़ी देर में थोड़ा थोड़ा कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। इस समय में तरल प्रदार्थ का ज्यादा सेवन करना चाहिए। पुरे दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास तरल प्रदार्थ का सेवन जरूर करना चाहिए। इस समय में फल और हरी सब्जियों को अपने भोजन में लाना चाहिए। शुरूआती तीन महीनो में ज्यादा भागदौड़ और काम करने से बचना चाहिए। इस समय में अच्छा खानपान और पूरी नींद लेना माँ और भ्रूण के फायदेमंद होता है।

मानसिक बदलाव

इन तीन महीनो में शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव हो रहे होते है जिस कारण कई महिलाओं का मूड़ बार बार बदलता है या फिर उनका व्यवहार बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है। इस दौरान कुछ महिलाओं को स्ट्रेस भी बहुत ज्यादा होता है जैसे की खाना ना पचने का और थकान और दर्द आदि का। इन सभी बदलावों के कारण एक गर्भवती महिला स्वस्थ नींद भी नहीं ले पाती। जिसका सीधा असर उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ता है। पर इस समय में आपको घबराना नहीं चाहिए। अपने मुड़ को अच्छा रखने के लिए अच्छी अच्छी बातें सोचनी चाहिए हो सके तो अपने शिशु के बारे में ज्यादा से ज्यादा सोचें। ऐसा करने से आपको ख़ुशी का अनुभव होगा और आपका मूड़ भी अच्छा होगा।

अपने आप को शांत और खुश रखने के सुबह के समय थोड़ी बहुत योग और मैडिटेशन का सहारा ले सकते है। मैडिटेशन यानी की ध्यान करने से आपका चिड़चिड़ापन खत्म होगा और आपक शान्ति का अनुभव होगा। योग करने से भी मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के फायदे मिलते है। पर गर्भावस्था में हल्की फुलकी योग करना ही सही रहता है। योगा करने से पूर्व अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। अगर इस समय में आपको बहुत ज्यादा स्ट्रेस हो या फिर किसी चीज को लेकर डाउट हो तो अपने डॉक्टर से बात जरूर करे। डॉक्टर से बात करने से आपकी मनोस्थिति में काफी सुधार रहेगा।

शिशु का विकास

गर्भावस्था के शुरू की तीन महीने बेबी के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते है। इस समय में भ्रूण का दिमाग और रीढ़ की हड्डी का विकास होता है। एक महीना पूरा होते ही शिशु की दिल की धड़कन आ जाती है। अल्ट्रासाउंड के दौरान हम बेबी की हार्टबीट को सुन सकते है। इस दौरान कुछ और सप्ताह बीतते ही शिशु के हाथ और पैर बनते है। दूसरे माह का अंत होते होते बेबी के हाथो और पैरो की उँगलियाँ भी बन जाती है। गर्भावस्था के इस भाग के अंत तक शिशु के लगभग सभी पार्ट्स का निर्माण हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार इस भाग के अंत में बेबी 3 इंच लम्बा और 28 ग्राम तक के वजन का होता है।

पेट में गैस होने की ये है पांच वजह

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पहले के समय में लोग कितने हष्ट पुष्ट और स्वस्थ हुआ करते थे लेकिन आजकल जिसे देखों वही किसी ने किसी समस्या से परेशान रहता है। किसी को डायबिटीज सता रही है तो किसी को थाइराइड ने परेशान कर रखा है। जिनका मुख्य कारण है अव्यवस्थित जीवनशैली। जिसके कारण व्यक्ति के शरीर को पूर्ण पोषक तत्व और आराम नहीं मिल पाता है व्यक्ति बीमार हो जाता है।

इन्ही में से एक समस्या है पेट में गैस की। जो किसी को भी हो सकती है। पेट में गैस होना कोई बिमारी नहीं है बल्कि एक तरह की गैस होती है जो खाली पेट रहने या बहुत से अन्य कारणों की वजह से उत्पन्न होती है। पेट में मौजूद गैस दो मार्ग द्वारा बाहर निकलती है एक डकार और दूसरा गुदा मार्ग।

लेकिन कई बार ये गैस इन मार्गों से बाहर नहीं निकल पाती जिसकी वजह से पेट में दर्द और ऐंठन जैसी समस्याएं होने लगती है। बहुत से लोग इस समस्या का कारण जानने के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्स रे आदि भी कराते है। जिसके लिए बहुत से पैसे खर्च करने पड़ते है।

जबकि आपके आसपास ऐसे बहुत से कारण है जिनकी वजह से ये गैस उत्पन्न होती है। और अगर आप थोड़ी सावधानी बरतेंगे को इस समस्या से जिंदगी भर के लिए छुटकारा पा सकते है। लेकिन किसी भी समस्या का उपाय जानने से पहले उसके कारणों के बारे में जानना आवश्यक होता है। ताकि समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके।

इसीलिए आज हम आपको पेट में गैस होने के कुछ कारण बताने जा रहे है। जिन्हे ध्यान में रखकर कुछ हद तक आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते है। तो आइये जानते है पेट में गैस होने के क्या कारण होते है?

पेट में गैस होने के कारण :-

1. हवा :

पेट में गैस बनने का एक कारण पेट में हवा का जाना भी होता है। खाने या बोलते समय हवा हमारे पेट में चली जाती है। हालाँकि यह डकार के जरीय बाहर आ जाती है लेकिन जो हवा आंतों में चली जाती है वह केवल गुदा मार्ग के द्वारा ही बाहर निकलती है।

2. खाद्य पदार्थ :

बींस, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल, फास्ट फूड, दूध और दूध उत्पादों ऐसे कुछ खाद्य पदार्थ है जिन्हे खाने से बहुत से लोगों के पेट में गैस बनती है। जिन खाद्य पदार्थों में कार्बोहायड्रेट की मात्रा अधिक होती है उनसे पेट में गैस बनने की अधिक संभावना होती हैव्

3. लाइफस्टाइल :

केवल आपका खान पान ही नहीं अपितु लाइफस्टाइल भी इस समस्या के पनपने का कारण होती है। जी हां, खराब लाइफस्टाइल कारण भी आपके पेट में गैस बन सकती है। तनाव में रहना, अधिक देर से सोना और सुबह देरी से जागना, समय पर भोजन नहीं करना, शराब आदि का अत्यधिक सेवन कुछ ऐसे कारण है जिनकी वजह से पेट में गैस बनती है।

4. पंचन तंत्र :

जिन लोगों के पाचन में गड़बड़ी होती है उनको भी पेट में गैस होने की समस्या बनी रहती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कुछ एन्ज़ाइम्स का उत्पादन कम होने लगता है और खाद्य पदार्थ को सही तरीके से पचाने और बैक्टीरिया को रिमूव करने का काम यही एन्जाइमस करते है। ऐसे में खाना पूरी तरह ठीक से बनी पचता जिसके परिणामस्वरूप पेट में गैस की समस्या उत्पन्न होने लगती है।

5. बैक्टीरिया संक्रमण :

यदि आपके पेट में किसी तरह का बैक्टीरियल संक्रमण है तो भी पेट में गैस की समस्या हो सकती है। क्योंकि ये बैक्टीरिया पेट को भीतरी रूप से नुकसान पहुंचाते है और खाने को पचने में अवरुद्ध उत्पन्न करते है। जिसके कारण खाना ठीक प्रकार से पच नहीं पाता। और पेट में गैस बनती है। ऐसा केवल गंभीर परिस्थितियों में ही होता है। अगर आपके साथ ऐसी स्थिति है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और अपना इलाज करवाएं।

रोजाना सुबह उठ कर पानी पीने के फायदे

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पानी का सेवन एक व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ से दस गिलास तक करना चाहिए, इसके कारण उसे फिट और स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, इसके साथ यदि आप नियमित रूप से सुबह उठ कर दो से तीन गिलास पानी का सेवन कर लेते है, तो ये आपको तंदुरुस्त बनाने के साथ आपके हाज़मे को भी सही रखने में मदद करता है, इसके अलावा ये आपको बॉडी में होने वाली कई परेशानियों से भी बचाता है।

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सुबह उठ कर पानी का सेवन करने से आपके शरीर के सभी टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते है, जिसके कारण आपका शरीर रिलैक्स महसूस करता है, इसके अलावा ये आपकी आँखों की रौशनी को बढ़ाने में मदद करता है, आपकी किडनी, गुर्दो को स्वस्थ रखता है, आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद करता है, आपका वजन घटाने में फायदेमंद है, इसके अलावा सुबह पानी पीने से और भी कई फायदे होते है, यदि आप पानी का सेवन नहीं करते है, और शुरू करना चाहते है तो शुरुआत में एक या दो गिलास से शुरुआत कर सकते है, तो आइये अब आपको विस्तार से बताते है की सुबह उठ कर पानी का सेवन करने से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

मेटाबोलिज्म को बेहतर होने में मदद मिलती है:-

यदि आप नियमित रूप से सुबह उठ कर खाली पेट पानी का सेवन करते है, तो इसके कारण आपके मेटाबोलिज्म को सक्रिय होने में मदद मिलती है, जिसके कारण यदि आप अपने बढ़ते वजन के कारण परेशान है, तो उस समस्या से भी आपको आराम मिलता है, और धीरे धीरे आपका वजन कम होने लगता है।

नई कोशिकाओं का निर्माण होता है:-

पानी को सुबह उठ कर पीने से आपके शरीर में टूटी कोशिकाओं की मरम्मत होने में मदद मिलती है, और साथ ही नई कोशिकाओं का निर्माण भी होता है, और नियमित ऐसा करने से आपको मांसपेशियों को भी मजबूत होने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको फिट रहने में मदद मिलती है।

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आपका खून साफ़ होता है:-

पानी भी किसी औषधि से कम नहीं है, क्योंकि पानी का सेवन करने से आपके शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकलने में मदद मिलती है, और यह विषैले तत्व यूरिन के रास्ते आपके शरीर से बाहर आते है, जिसके कारण आपको बीमारियों से बचने में मदद मिलती है, क्योंकि पानी का सेवन करने से आपके शरीर में खून को साफ़ करने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र से सम्बंधित परेशानी नहीं होती है:-

जो लोग सुबह उठते ही नियमित रूप से पानी का सेवन करते है, उनके पेट को अच्छे से साफ़ होने में मदद मिलती है, जिसके कारण कब्ज़ आदि की परेशानी नहीं होती है, और पेट साफ़ होने के बाद वो जिस भी चीज का सेवन करते है उसे अच्छे से पचाने में उनको मदद मिलती है, जिसके कारण उनके पाचन तंत्र को मजबूत होने में मदद मिलती है, इसीलिए यदि आपको भी कब्ज़ आदि की समस्या रहती है तो सुबह उठ कर खाली पेट दो से तीन गिलास पानी का सेवन आपको जरूर करना चाहिए।

शारीरिक समस्या दूर रहती है:-

सुबह पानी कस सेवन करने से आपको बहुत सी शारीरिक परेशानियों से भी राहत पाने में मदद मिलती है, जैसे की आपको गले से सम्बंधित परेशानी, पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्या, किडनी, यूरिन, आदि की समस्या से राहत मिलती है, जिसके कारण आपका शरीर स्वस्थ रहता है, और आपका बिमारियों से बचाव भी होता है।

त्वचा ग्लोइंग बनती है:-

आपकी ख़ूबसूरती को और भी निखारने के लिए सुबह उठ कर पानी पीना काफी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसके कारण आके शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल जाते है, आपकी त्वचा की नमी को बरक़रार रहने में मदद मिलती है, और साथ ही आपकी स्किन की प्राकृतिक चमक को भी बढ़ने में मदद मिलती है।

ऊर्जा मिलती है:-

आपके शरीर में ऊर्जा के स्त्रोत को बढ़ाने के लिए भी पानी मदद करता है, पानी पीने से आपके शरीर के सभी टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते है, जिसके कारण आपको फ्रैश महसूस होता है, और आपके शरीर को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है, जिसके कारण आपको थकान आदि भी महसूस नहीं होती है, इसीलिए अपने आप को तरोताज़ा रखने के लिए आपको सुबह पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

तो ये कुछ फायदे है जो आपको नियमित रूप से पानी का सेवन सुबह उठ कर करने से होते है, क्योंकि पानी में ऑक्सीजन होता है जो की आपके शरीर के लिए सबसे अहम होता है, इसके अलावा पानी में और भी बहुत से मिनरल होते है जो आपकी स्किन, बालों के साथ आपको शारीरिक रूप से भी फिट रखने में मदद करते है, इसीलिए यदि आप सुबह उठ कर पानी का सेवन नहीं करते है, तो इन फायदों को उठाने के लिए आपको पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

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मछली का कांटा गले में अटक जाए तो ये करें?

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मछली अधिकांशतः हर एक नॉन-वेजीटेरियन के घर में बनती हैं और भारत के सभी प्रांतों में खायी जाती हैं। मछली को लोग बड़े चाव से खाते हैं। क्योंकि इसमें विटामिन, प्रोटीन, वसा और ओमेगा 3 की मात्रा काफी अधिक होती हैं। लेकिन मछली के अंदर कांटे होने की वजह से बहुत से लोग इसे खाने से परहेज करते हैं। अगर कोई बच्चा मछली नहीं खा रहा हैं तो इसका कारण सिर्फ यही हैं की उसे कांटे से डर लगता हैं।

आजकल लोग बिना कांटे वाली मछली भी खूब पसंद करते हैं। लेकिन अधिकांश मछलियों में कांटे होते ही हैं। अगर आप मछली खाते हैं तो कई बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा की मछली का कांटा आपके गले में अटक गया होगा। अगर संयोग से मछली का कांटा आपके मुंह में या कंठ में अटक जाए तो बहुत ही परेशानी होती हैं।

यहाँ तक की थूक को भी नहीं निगल सकते और बार बार थूक निगलने का मन करने लगता हैं और कुछ खाया पिया भी नहीं जाता। कभी आपकी खाने वाली नाली में मछली का कांटा अटक जाए तो परेशान होने की जरूरत नहीं हैं। आज हम आपको हलक में फंसा मछली का कांटा निकालने के तरीके बताने जा रहें हैं।

मछली का कांटा निकालने के तरीके

1. आप चावल (भात) का हाथों से गोला बना लें। और सूखे गोले को ही निगल लें। ऐसा 2 से 3 बार करें। मछली का कांटा आपके पेट के अंदर चला जाएगा।

2. अगर चावल उपलब्ध नहीं हैं तो सुखी रोटी को ही थोड़ा सा चबाकर निगल लें। ऐसे में कंठ में फंसा हुआ मछली का कांटा पेट के अंदर चला जाएगा।

3. मछली का कांटा गले में फंस जाने पर तो केले का टुकड़ा बिना चबाएं निगलने की कोशिश करें।

अगर ऊपर बताये गए तरीके से कांटा निकल न रहा हो तो छोड़ दें। 2-3 घंटे में अपने आप ही निकल जाएगा।

अगर अधिक परेशानी हो रही हो और मछली का कांटा हलक से निकल न रहा हो तो डॉक्टर से मिलें। तो ये हैं कुछ उपाय जिनकी मदद से आप गले में फंसे हुए मछली के कांटे या हड्डी को आसानी से निकाल सकते हैं ।

इन 8 कारणों की वजह से महिला नहीं बन पाती माँ

इन 8 कारणों की वजह से महिला नहीं बन पाती माँ, बांझपन के कारण, महिला के गर्भवती होने में कौन कौन सी परेशानियां आती है, प्रेगनेंसी न होने के कारण, गर्भधारण न होने के कारण, महिला के माँ न बन पाने के कारण

माँ बनना किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे अलग, प्यारा और खास अनुभव होता है। और भगवान द्वारा केवल महिला को ही गर्भ में नौ महीने तक शिशु को रखने के प्यारे अहसास के अनुभव का हक़ दिया है। जिससे महिला नौ महीने बहुत से उतार चढ़ाव के साथ अपनी जिंदगी में से एक और जिंदगी को जन्म देती है। लेकिन कई बार माँ बनने में महिला को समस्या आती है, प्लानिंग करने के बाद भी गर्भ ठहर नहीं पाता है। ऐसे में इनफर्टिलिटी की समस्या किसी भी महिला को परेशान कर सकती है, लेकिन इससे परेशान होने की बजाय महिला को गर्भधारण न होने के कारण को पता करना चाहिए। क्योंकि महिला में इन्फर्टिलटी का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि कई कारण होते है। तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे कारण बताने जा रहे हैं जिनकी वजह से महिला के गर्भ को ठहरने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

अनियमित पीरियड्स

पीरियड्स का नियमित होना प्रेगनेंसी के लिए बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि आपको पीरियड्स समय से बहुत पहले या बहुत बाद में आते हैं, ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती है, सात दिन से ज्यादा आपको पीरियड्स रहते हैं, तो इन्हे अनियमित पीरियड्स कहा जाता है। जिसके कारण ओवुलेशन के समय का पता लगाना मुश्किल होने के साथ गर्भधारण में भी परेशानी हो सकती है क्योंकि ऐसा होने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो जाती है। साथ ही यदि आपको अनियमित पीरियड्स रहते हैं तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से बात जरूर करनी चाहिए।

ट्यूबल रोग के कारण

बहुत सी महिलाओं में माँ न बनने का कारण फलोपियन ट्यूब का बंद होना या खराब होना हो सकता है। क्योंकि गर्भधारण के लिए जरुरी निषेचन की प्रक्रिया फैलोपियन ट्यूब में ही होती है। और यदि फैलोपियन ट्यूब ही बंद होती है तो इसके कारण महिला का गर्भ नहीं ठहरता है।

गर्भाशय से जुडी समस्या होने के कारण

गर्भाशय में गाँठ होने के कारण भी महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है। इसका कारण जब यूटेरस में मांसपेशियों का अतिरिक्त विकास होने लगता है, तो वहां इन मांसपेशियों के इकट्ठे होने के कारण गांड बनने लगती है, जिसे की फाइब्रॉयड भी कहा जाता है। और यदि कोई महिला फाइब्रॉयड से ग्रसित होती है तो इसके कारण पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, सम्बन्ध बनाते समय दर्द, पीरियड्स खत्म होने के बाद भी रक्त स्त्राव का होना, आदि हो सकता है, जिसके कारण निषेचन की क्रिया होने में समस्या होती है। और यदि निषेचन की प्रक्रिया न हो तो महिला को बांझपन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

थायरॉयड होने के कारण

यदि कोई महिला थायरॉयड की समस्या से ग्रसित होती है तो इसके कारण भी महिला को गर्भ न ठहरने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यदि थायरॉयड ग्रंथि सही से काम नहीं करती है या ओवरएक्टिव हो जाती है तो इसके कारण प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है और महिला को गर्भधारण से जुडी समस्या हो सकती है।

वजन

प्रेगनेंसी के लिए वजन का सही होना भी बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि कोई महिला मोटापे की समस्या से ग्रसित है, तो भी महिला को गर्भधारण में समस्या हो सकती है। और यदि किसी महिला के वजन में कमी है तो भी महिला को गर्भधारण में समस्या आ सकती है। ऐसे में जरुरी होता है की महिला अपने वजन को कण्ट्रोल में रखे यदि वजन ज्यादा है तो उसे सही करे, और यदि कम है तो अपने वजन को बढ़ाएं।

बिमारी के कारण

यदि कोई महिला किसी शारीरिक बिमारी जैसे की तनाव, हाई ब्लड प्रैशर, डाइबिटीज़, टी बी, पॉलिसिस्‍टमिक ओवेरियन डिजीज आदि से ग्रसित है, तो इसके कारण भी ओवुलेशन पर बुरा असर पड़ता है जिसके कारण महिला को बांझपन जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में ऐसी कोई भी समस्या होने पर महिला को जल्दी से जल्दी अपना इलाज करवाना चाहिए।

गलत आदतों के कारण

शराब, धूम्रपान, ड्रग्स, स्‍टेरॉयड के अधिक इस्‍तेमाल करने से शुक्राणु की गुणवत्‍ता और महिला को सेहत दोनों प्रभावित होती है। धूम्रपान करने से जहां शुक्राणु की संख्या में कमी होती है वहीं दूसरी तरफ शराब के सेवन से टेस्‍टोस्‍टेरॉन हार्मोन का उत्‍पादन कम होता है। साथ ही एंटीबॉयटिक दवाइयों का अधिक इस्‍तेमाल करने के कारण भी बांझपन की समस्‍या बढ़ रही है, ऐसे में गर्भवती होने के लिए जरुरी है की महिला को इन गलत आदतों का त्याग करना चाहिए।

वातावरण और खान पान के कारण भी आ सकती है माँ बनने में समस्या

गलत जीवनशैली और खानपान में अनियमितता के कारण भी इं‍फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है और आज कल इसके बहुत से मामले सामने आ रहे हैं। प्रदूषण, टॉक्सिन, सेहत के प्रति लापरवाहीकरने के कारण इन्फर्टिलटी की समस्या बढ़ती जा रही है। फास्‍ट फूड और जंक फूड खाने में मौजूद पेस्‍टीसाइड से बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या उत्पन्न होती है जिसके कारण महिला को माँ बनने में समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि आप गर्भवती होना चाहती है तो इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या और जीवनशैली को बेहतर करना बहुत जरुरी होता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को प्रेगनेंसी से जुडी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उम्र का अधिक होना या बहुत कम होना भी महिला की प्रेगनेंसी में समस्या खड़ी कर सकती है। ऐसे में महिला को इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए, और इस समस्या से निजात पाने के लिए महिला और पुरुष दोनों को ही अपनी अच्छे से जाँच करवानी चाहिए।

डिलीवरी के समय बैग पैक आइटम हॉस्पिटल के लिए

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प्रेगनेंसी का जैसे ही नौवां महीना लग जाता है वैसे ही आपकी डिलीवरी के समय पास आता जाता है, ऐसे में आपको कुछ तैयारी करके रखनी चाहिए। क्योंकि आपको इस बात का पता नहीं होता है की किस समय आपको हॉस्पिटल जाना पड़ सकता है। और आपको बैग पैक करके रखना चाहिए ताकि आपको अचानक यदि डिलीवरी पेन हो जाए तो परेशानी न हो आपका सामान पैक हो और आप जल्दी से हॉस्पिटल चले जाएँ। क्योंकि यदि आप जल्दी जल्दी में तैयारी करती है तो हो सकता है कुछ भूल जाएँ।

डिलीवरी के समय हॉस्पिटल क्या क्या लेकर जाना चाहिए

बच्चे का घर में आना ख़ुशी का सबसे ख़ुशी का पल होता है और ऐसे में आप इस पल को खुलकर एन्जॉय कर सके, इसके लिए आपको प्रसव से पहले का सभी जरुरी सामान बैग में पैक कर लेना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी से पहले बैग पैक करते समय कौन कौन सा सामान रखना चाहिए।

जरुरी कागज़

आपको सभी जरुरी कागज़ जैसे की पहचान पत्र, सभी पहले की महिला की रिपोर्ट्स, अल्ट्रासॉउन्ड की रिपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, कोई स्वास्थ्य बीमा है तो उसके कागज़ आदि सभी बैग में रख लेना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की कागज़ की यदि वहां जरुरत पड़े तो आपको बाद में परेशानी न हो।

महिला के कपड़े व् अन्य सामान

गर्भवती महिला के लिए आपको खुले गाउन, जुराबे, उनका सर ढकने के लिए कपडा, या चुन्नी, चप्पल, पैंटी, ब्रा, पैड, तकिया, आदि रख लेना चाहिए। क्योंकि डिलीवरी के बाद वैसे तो उन्हें हॉस्पिटल से कपडे मिल जाते है लेकिन आपको इन सब चीजों की जरुरत घर आते समय पड़ सकती है। ब्रा, पैंटी आपको दो से तीन जोड़ी रखने चाहिए क्योंकि डिलीवरी के बाद इन चीजों की जरुरत ज्यादा पड़ती है।

बच्चे के कपडे

नवजात शिशु के लिए भी कपडे अच्छे से धोकर रख लेने चाहिए, उसके लिए भी जुराब और टोपी सर ढकने के लिए जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि यदि शिशु के सिर पैर में हवा लग जाती है तो इससे जन्म के बाद उसके बीमार होने का खतरा बढ़ सकता है। और बच्चे के लिए डायपर और एक जोड़ी से ज्यादा कपडे जुराबे आदि रखने चाहिए।

कम्बल

आपको एक कम्बल भी रखना चाहिए ताकि जब आप शिशु को घर लेकर आये तो आप उसे अच्छे से ढक कर लेकर आएं, ताकि शिशु को किसी भी तरह की समस्या न हो और महिला को भी बाहर की हवा न लग जाए।

फ़ोन, कैमरा

माँ बाप बनना, घर में नन्हे मेहमान का आना किसी भी परिवार के लिए ख़ुशी का पल होता है। ऐसे में आप इन लम्हो को कैद करने के लिए फ़ोन, कैमरा, चार्जर, आदि जरूर लेकर जाए ताकि हमेशा के लिए आप इन लम्हो को कैद कर सकें। और इन्हे हमेशा अपनी लाइफ में यादागर रख सकें।

खाने पीने का सामान

वैसे तो महिला के लिए खाना ज्यादातर हॉस्पिटल में ही मिल जाता है लेकिन आपको हॉस्पिटल जाते समय खाने के लिए कुछ फल व् स्नैक्स आदि ले लेने चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास चीजें जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए, की आप इनमे से कुछ भी डिलीवरी से पहले बैग पैक करते समय न भूलें, ऐसा करने से आपको एक दम कुछ नहीं करना पड़ता है। और पहले तैयारी करने से आपको बाद में होने वाले तनाव से बचने में भी मदद मिलती है।

होली के रंग से चेहरे पर दाने, त्वचा का फटना और जलन को ठीक करने के उपाय

होली उन त्योहारों में से एक है जिसे क्या बच्चे क्या बड़े सभी बड़े शौक से मनाते है। रंग, गुलाल अबीर से ढके सभी के चेहरे इस पर्व की महत्ता को दर्शाते है। लेकिन बदलते वक्त के साथ-साथ होली खेलने के तरीकों में भी बदलाव आने अलगे है। आजकल लोग अबीर और गुलाल की जगह रंगों का इस्तेमाल करने लगे है जिनमे काफी केमिकल मिलाया जाता है।

इन रंगों के साथ होली खेलने में मजा तो बहुत आता है लेकिन उनसे होने वाले दुष्परिणाम आपकी स्किन को पूरी तरह खराब कर देते है। इतना ही नहीं इस तरह के कलर्स को स्किन से हटाना भी काफी मुश्किल होता है। कई बार कोशिशे करने के बाद भी यह कलर स्किन से नहीं जाते। और इन्हें हटाने के लिए आप लगातार स्किन को रगड़ते रहते है जिससे रैशेस और स्किन एलर्जी की समस्याएं भी होने लगती है। अगर आपकी स्किन में भी इस तरह की समस्याएं हो गयी है परेशान न हो क्योंकि आज हम आपको रंगों से स्किन को होने वाले साइड इफ़ेक्ट और उसके उपाय बताने जा रहे है।

चेहरे पर रंग लगाने के साइड इफ़ेक्टholi skin care tips

होली खेलने का असली मजा तो रंगों के साथ ही आता है। लेकिन की आप जानते है की इन सभी कलर्स में इस तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है जो स्किन की बाहरी परत के साथ-साथ आंतरिक परत को भी नुकसान पहुंचाते है। यह स्किन के रोमछिद्रों के भीतर जाकर न्यू सेल्स को प्रभावित करते है जिससे स्किन में तरह-तरह की समस्याएं होने लगती है। जैसे – जलन होना, दाने होना, मुहांसे होना आदि।

ये सभी साइड इफेक्ट्स तो केवल सामान्य स्किन के लिए है अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो आपको इन कलर का भूलकर भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर आपको होली खेलनी ही है तो आप आर्गेनिक और प्राकृतिक रंगों का भी इस्तेमाल कर सकते है। ये रंग पूरी तरह सुरक्षित और स्किन के लिए सेफ होते है जिनका स्किन पर किसी तरह का कोई साइड-इफ़ेक्ट नहीं होता।

रंग लगाने से चेहरे पर होने वाली परेशानियां

आजकल होली खेलने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले रंगों में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जिनकी वजह से स्किन ही नहीं अपितु शरीर के अन्य हिस्सों में भी समस्याएं होने लगती है। यहाँ हम आपको कलर्स के उन्ही साइड इफेक्ट्स के बारे में बता रहे है –

  • स्किन में रैशेस।
  • छोटे छोटे दाने होना।
  • त्वचा में लालीपन।
  • रंग साफ़ करते समय जलन होना।
  • फुंसिया होना।
  • स्किन में रूखापन।
  • फटी हुई स्किन।
  • लगातार खुजली होना।
  • क्रीम लगाने के बाद भी स्किन का लगातार रुखा रहना। आदि कुछ परेशानियाँ है जो केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग करने से स्किन में होती है।

स्किन से होली के रंगों को छुड़ाने के उपाय :-

होली खेलते समय स्किन पर कलर लग जाने के बाद सभी उसे छुड़ाने के लिए अपनी त्वचा और फेस को रगड़ने लगते है। जिससे कलर तो नहीं जाता लेकिन आपकी स्किन में रैशेस जरुर हो जाते है। अगर आप भी स्किन से कलर निकालने के लिए ऐसा ही करते है तो परेशान न हो क्योंकि हम आपको कुछ उपाय बता रहे है जिसकी मदद से स्किन से होली के रंगों को आसानी से छुड़ाया जा सकता है।

1. बेसन :होली के रंग से चेहरे पर दाने त्वचा का फटना और जलन को ठीक करने के उपाय

बेसन का इस्तेमाल भी होली के रंगों को हटाने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए बेसन, चोलकर, दूध और थोडा सा नींबू का रस मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर स्किन के हर उस हिस्से पर लगायें जहां कलर लगा हुआ है। आधा सूखने तक इन्तजार करें और उसके बाद हाथों को हल्का गीला करके रगड़ते हुए स्किन से यह पैक निकाल दें। उसके बाद किसी सौम्य साबुन से स्किन साफ़ कर लें।

2. मुल्तानी मिट्टी :

इसकी मदद से आप चेहरे और बाल दोनों पर लगे कलर को आसानी से हटा सकते है। फेस के लिए मुल्तानी मिट्टी में थोडा सा गुलाबजल और दही मिलाकर पैक बना लें और इस पैक को अपने फेस पर लगायें। सूखने का इंतजार करें और फिर पानी से साफ़ कर लें। बालों के लिए मुल्तानी मिट्टी में जरुरत के अनुसार पानी मिलाकर उसे अपने बालों में लगाएं और सूखने दें। सूखने के बाद पानी से साफ़ कर लें। रंग निकल जाएगा।

3. नारियल तेल :

इस उपाय का इस्तेमाल आपको होली खेलने से पहले और होली खेलने के बाद दोनों बार करना होगा। यह तेल स्किन से रंग छुड़ाने में काफी मददगार होता है। इसके लिए फेस और शरीर के अन्य हिस्सों पर पर नारियल तेल से अच्छे से मसाज करें और फिर गीले कपडे या वाइप्स से साफ़ कर लें। फिर चेहरे को फेस वाश से धो लें।

4. गेहूं का आटा :

होली के रंग छुड़ाने के लिए आटे में दूध, हल्दी और गुलाबजल मिलाकर मुलायम सा आटा बना लें। अब इस आटे का थोड-थोडा हिस्सा लेकर अपनी स्किन और चेहरे पर रगड़ें। 2 से 3 बार इस उपाय को दोहराएँ और फिर नहा लें। स्किन साफ हो जाएगी।

5. सरसों के दाने :

इसकी मदद से होली का रंग कुछ ही समय में निकल जाता है। उपाय के लीये सरसों के दानों को दरदरा पीसकर उसमे सरसों का तेल मिला लें। अब इस मिश्रण को अपने चेहरे और शरीर पर 5 से 7 मिनट तक रगड़ें। उसके बाद जेंटल साबुन से स्किन साफ़ कर लें। स्किन से रंग निकल जाएगा।

तो, ये थे स्किन से होली के रंगों को छुड़ाने के कुछ उपाय और होली के रंगों के साइड इफेक्ट्स। अब तो आप जान ही चुके होंगे की होली खेलने में इस्तेमाल किये जाने वाले रंग स्किन के लिए कितने हानिकारक होते है। इसलिए अब से होली में केमिकल रंगों की बजाए नेचुरल और आर्गेनिक रंगों का ही इस्तेमाल करें।


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महिलाओ में इनफर्टिलिटी ( बांझपन ) के मुख्य कारण

माँ बनना महिलाओ के लिए इस दुनिया का एक खास अहसास है, और महिला के इस अनुभव को लेकर उससे जुड़ा हर एक व्यक्ति बहुत उत्साहित भी होता है, परन्तु कई बार कुछ कमियों या शारीरिक कारणों की वजह से महिला को गर्भधारण करने में परेशानी आती है या वो गर्भवती नहीं हो पाती है, इसी अवस्था को बांझपन कहा जाता है, जब महिला के मनन बनने के कोई चांस नहीं होते है।

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महिला का माँ न बनना ये महिला के होने वाली शारीरिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है, जैसे की अंडाणु का न निकलना, गर्भाशय से जुडी कोई समस्या होने पर, फेलोपियन टयूब के खराब होने पर या कई बार महिला और पुरुष के बीच सही समय पर सम्बन्ध न बनाने के कारण अंडा निषेचित नहीं हो पाता है जिसके कारण महिला के माँ बनने में समस्या आ सकती है, आप चाहे तो इस समस्या के होने पर एक बार डॉक्टर से भी अच्छे से राय ले सकती है, इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते है जिसके कारण महिला को बांझपन की समस्या हो सकती है, आइये विस्तार से जानते के की महिला के माँ बनने में कौन कौन सी परेशानियां आ सकती है।

अंडाणु के न निकलने के कारण:-

मासिक धर्म के चक्र दौरान होने वाले ओव्यूलूशन पीरियड के दौरान अंडा बनाता है, और जब वो अंडा निषेचित होता है, तभी महिला गर्भवती होती है, परन्तु कई बार महिला का ओव्यूलूशन पीरियड के दौरान अंडा नहीं बनता है, जसके कारण निषेचन नहीं हो पाता है, और यदि ऐसा नहीं होता है तो महिला को बांझपन की समस्या हो जाती है।

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सबंध बनाने में कमी:-

यदि आपके सम्बन्धो में कमी है, तो उसके कारण भी अंडे को निषेचित होने का समय नहीं मिल पाता है, जिसके कारण भी महिला को गर्भाधारण करने में समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए इस बारे में आप चाहे तो एक बार अपने डॉक्टर से भी बातचीत कर सकते है।

गर्भाशय से जुडी परेशानी होने पर;-

यदि महिला को गर्भाशय से जुडी कोई समस्या है तो इसके कारण भी महिला को बांझपन हो सकता है, क्योंकि जैसे ही निषेचन की प्रक्रिया होती है, तो तो गर्भाशय की परान्त से जुड़ कर शिशु के विकसित होने क पहला चरण शुरू होता है, जिसके कारण यदि गर्भ ठहर भी जाता है, तो शिशु को सही से पोषण नहीं मिल पता है, और कई बार महिला को गर्भाशय में गलत स्थान पर या बड़े आकर में हुई रसोली के कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

फेलोपियन टयूब से जुडी परेशानी होने पर:-

पुरुष के शु* क्राणु महिला के मासिक चक्र में विकसित होने वाले अंडो से फेलोपियन टयूब में मिलते है, परन्तु यदि महिला को इस नली के बंद होने या खराब होने जैसी परेशानी हो जाती है, तो इसके कारण भी महिला को बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है, क्योंकि इसके बंद होने के कारण निषेचन की प्रक्रिया नहीं हो पाती है।

कैंसर की समस्या होने पर:-

सर्विक्स कैंसर, फ़िब्रोइड कैंसर आदि की समस्या यदि महिला को हो जाती है, तो इसका इलाज करवाने के बाद महिला के प्रजनन अंगो पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जैसे की गर्भाशय की परत के खराब हो जाती है, जिसके कारण भी महिला को बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पेरीमेनोपॉज होने पर:-

रजोनिवृति से पहले भी महिला को गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है, और इसका कारण एस्ट्रोजेन, प्रोजेस्ट्रोन के उत्सर्जन का कम हो जाना होता है, जिसका असर पीरियड्स और महिलाओ के ओवुलेशन पीरियड पर पड़ता है, नियमित माहवारी, प्रजनन सम्बन्धी अन्य प्रक्रियाओं के मंद पड़ने के कारण भी महिलाओ को बांझपन की समस्या हो जाती है।

संक्रमण होने के कारण:-

महिलाओ में बांझपन का कारण उनमे से  *क्सुअली ट्रांसमिटिड बिमारी होने के कारण भी महिला को ये समस्या हो सकती या इसके अलावा कोई और शारीरिक बिमारी या खनिजों की कमी के कारण भी महिलाओ को इस समस्या का सामना करना पड़ा सकता है।

तो ये कुछ कारण है जिनकी वजह से महिला को इनफर्टिलिटी की समस्या हो जाती है, परन्तु कई बार ऐसा भी होता है की महिला में कोई कमी नहीं होती है, बल्कि पुरुष में कमी होती है, इसके लिए जरुरी है की दोनों पति पत्नी किसी भी निर्णय पर आने से पहले अपनी शारीरिक जांच करवाएं, ताकि कमी का पता चल सकें, और यदि उसका इलाज संभव है तो इलाज करके इस समस्या से निजात पाया जा सकें।

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नारियल कपूर के लेप से होंगे ये फायदे!

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कपूर का इस्तेमाल जहां घर में पूजा पाठ के लिए किया जाता है, वहीं नारियल का तेल भी बहुत फायदेमंद होता है, और जब आप इन दोनों को अच्छे से मिक्स करके लेप तैयार करते है, तो उसका इस्तेमाल करने से आपको और भी फायदा होता है, जैसे की इससे आपकी त्वचा, आपके बालों, आपको इन्फेक्शन से बचाव में मदद मिलती है, तो आइये आज हम आपको इन दोनों के लेप के कुछ विशेष गुणों के बारे में बताते है।

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नारियल का तेल त्वचा की कोमलता बनाएं रखता है, तो कपूर त्वचा पर होने वाले दाग धब्बो से राहत दिलाने में आपकी मदद करता है, इसके अलावा कपूर और नारियल के तेल का इस्तेमाल करने से आपको त्वचा के संक्रमण, झाइयां, फटी एड़ी, सर्दी जुखाम आदि से भी सुरक्षा देता है, साथ ही ये भी किसी दवाई से कम नहीं होता हैं, परतु इसके इस्तेमाल के साइड इफ़ेक्ट नहीं होते है, यदि आपकी स्किन सेंसिटिव है तो आप एक बार इसका इस्तेमाल करके देख सकते है, की ये आपकी स्किन को सूट कर रही है या नहीं, तो आइये आज हम आपको विस्तार बताते है की नारियल के तेल और कपूर के लेप से कौन कौन से फायदे होते है।

एलर्जी से राहत दिलाता है:-

नारियल का तेल वैसे ही आपकी स्किन को मुलायम बनाने में मदद करता है, इसके साथ यदि आप अच्छे से कपूर को मिक्स करके लेप तैयार करते है, और आपकी बॉडी में किसी भी तरह की एलर्जी हो, उसे खत्म करने में ये आपकी मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप इस लेप को अच्छे से अपनी उस जगह पर लगाएं, जहां पर आपको एलर्जी है, और थोड़ी देर बाद उसे गुनगुने पानी से साफ़ कर दें, ऐसा करने से आपको उसी समय राहत का अहसास होता है।

डैंड्रफ से राहत दिलाता है:-

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सिर में होने वाली रुसी की समस्या से राहत दिलवाने के लिए भी आप नारियल के तेल और कपूर का इस्तेमाल कर सकते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अपने सिर में अच्छे से अपनी ऊँगली के पोरो से अच्छे से मसाज करें, और इसे थोड़ी देर के लिए अपने बालों में मसाज करने के बाद छोड़ दें, और उसके बाद शैम्पू से अपने सिर को धो लें, दो या तीन बार के इस्तेमाल से ही आपको फ़र्क़ दिखाई देगा और आपको डैंड्रफ से राहत मिलेगी।

सर्दी जुखाम से राहत के लिए करे इस्तेमाल:-

सर्दी जुखाम की समस्या से राहत पाने के लिए भी आप कपूर और नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते है, जब भी आपको ये समस्या हो तो आपको नारियल के तेल में कपूर को अच्छे से मिक्स करके अपनी चेस्ट पर लगाना चाहिए, या फिर आप पानी में नारियल का तेल और कपूर मिलाकर इसकी भाप लें, इससे भी आपको आराम मिलता है, और जल्द राहत भी मिलती है।

पिम्पल्स से राहत मिलती हैं:-

चेहरे पर कोई भी दाग धब्बा आपकी ख़ूबसूरती को ख़राब कर सकता है, परन्तु चेहरे पर होने वाले दाग धब्बे और पिम्पल्स से राहत पाने के लिए आप अपने चेहरे पर नारियल का तेल में थोड़ा सा कपूर अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद इस लेप को अच्छे से अपने पिम्पल्स के ऊपर लगाएं, और थोड़ी देर लगा रहने दें, उसके बाद इसे पानी से साफ़ कर लें, थोड़े ही दिनों के इस्तेमाल के बाद आपको इसका असर साफ़ दिखाई देने लगेगा, और आपका चेहरा बिल्कुल साफ़ हो जाएगा।

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खुजली की समस्या से राहत मिलती है:-

नारियल व् कपूर के लेप का इस्तेमाल करने से आपको शरीर पर होने वाली खुजली की समस्या से भी राहत मिलती है, कई बार त्वचा पर किसी चीज का रिएक्शन या त्वचा की साफ़ सफाई ढंग से न होने के कारण आपको खुजली होने लगती है, और ये समस्या आपके सिर में हो जाती है, इसके लिए आप नारियल तेल और कपूर से बने लेप को अच्छे से उस जगह लगाएं जहां आपको खुजली की समस्या है, और लगाने के थोड़ी देर बाद इसे छोड़ दें, आपको फायदा मिलेगा।

झाइयां से निजात दिलाता है:-

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चेहरे पर झाइयां आपको समय से पहले बूढ़ा बना सकती है, और इसके कारण आपकी पर्सनैलिटी पर भी असर पड़ता है, इससे राहत के लिए आप कुछ दिनों तक नियमित नारियल का तेल और कपूर को अच्छे से मिक्स करें और इसे अपनी झाइयों पर लगाएं, ऐसा करने से आपको कुछ ही दिनों में असर दिखने लगता है, और साथ ही आपके चेहरे पर होने वाले अन्य दाग धब्बो को भी दूर करने में मदद मिलती है।

पैरों के संक्रमण से राहत दिलाता है:-

कई बार पैरों का रंग सफ़ेद, और फफूंदी सी लग जाती है, जिसके कारण कई बार इन्फेक्शन या खुजली भी होने लगती है, इससे राहत पाने के लिए आप नारियल के तेल और कपूर को अच्छे से मिक्स करके पैरों में लगाएं, और उसके थोड़ी देर बाद अच्छे से अपने पैरों को धो दें, ऐसा करने से आपके पैरों को इस समस्या से राहत में मदद मिलती है, और यदि आप गरम पानी में कपूर को डाल कर अपनी एड़ी को साफ़ करते है, तो इसके कारण आपको फटी एड़ी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

जले कटे का निशान दूर करने में मदद मिलती है:-

कई बार आपको कही चोट लगती है या जले हुए का निशान रह जाता है, तो इस समस्या से राहत पाने के लिए भी आप नारियल के तेल और कपूर का इस्तेमाल कर सकते है, इसे उस जगह पर नियमित लगाएं जहां आपको जले हुए का निशान है, ऐसा करने से आपको उस निशान को दूर करने में मदद मिलती है, इसके अलावा सिर्फ कपूर का लेप लगाने से भी आपको फायदा मिलता है।

तो ये कुछ नारियल के तेल और कपूर के लेप के फायदे है जो आपको होते है, यदि आपको चेहरे से जुडी कोई परेशानी है, या फिर त्वचा से सम्बंधित कोई परेशानी है तो एक ही बार के इस्तेमाल से ये आपको फायदा करता है, इसके अलावा इसका इस्तेमाल करने से आपको कोई नुकसान भी नहीं होता है इसीलिए आप इनका इस्तेमाल बिना किसी डर के कर सकते है, परन्तु कपूर लेते समय ध्यान रखें की वो ज्यादा पुरानी न हो।

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