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प्रेगनेंसी के दौरान इन अंगो में आ सकती है सूजन

प्रेगनेंसी में सूजन

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी शारीरिक परेशानियों से जूझना पड़ता है, और कई बार महिलाएं मानसिक रूप से भी परेशान हो सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव व् शारीरिक बदलाव के कारण यह शारीरिक समस्याएं हो सकती है। चक्कर आना, चिड़चिड़ापन महसूस होना, मूड स्विंग्स होना, बॉडी में दर्द का अनुभव होना, उल्टी आना, आदि समस्याएं प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हो सकती है। इसके अलावा कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी के कई अंगो में सूजन की समस्या भी हो सकती है, और यह काफी सामान्य होता है। लेकिन यदि अंगो में सूजन की समस्या अधिक होने लगे और सूजन के साथ दर्द का अनुभव भी हो तो ऐसे में महिला को इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में सूजन होने के कारण

  • गर्भाशय के अकार में परिवर्तन आने के कारण हदय से पैरों की तरफ जाने वाली नसों में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से नहीं हो पाता है जिसके कारण गर्भवती महिला को सूजन की समस्या हो सकती है।
  • गर्भवती महिला यदि किसी शारीरिक समस्या जैसे की थायरॉइड आदि से जूझ रही होती है तो भी अंगो में सूजन की समस्या हो सकती है।
  • तनाव दूर करने, ब्लड प्रैशर कण्ट्रोल करने वाली दवाइयों का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो भी गर्भवती महिला को यह परेशानी हो सकती है।
  • नमक की मात्रा अधिक लेने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • यदि गर्भवती महिला अपने आहार में पोटैशियम की मात्रा कम लेती है तो भी गर्भवती महिला को सूजन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।
  • देर तक एक पोजीशन में रहने के कारण, बहुत देर तक पैरों के भार खड़े होने के कारण, सीधे सोने के कारण भी गर्भवती महिला को सूजन की समस्या के कारण परेशान होना पड़ सकता है।
  • जो गर्भवती महिलाएं कैफीन का सेवन अधिक मात्रा में करती हैं उन्हें भी सूजन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

गर्भवती महिला के किन अंगो में सूजन की समस्या हो सकती है

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बॉडी के कई अंगो में सूजन की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में किन किन पार्ट्स में सूजन की समस्या हो सकती है।

पैरों में सूजन

ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है, और यह परेशानी प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में सबसे अधिक होती है। क्योंकि वजन बढ़ने के कारण हदय से पैरों तक की मांसपेशियों में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होने समस्या होने के साथ महिला के अधिक देर तक पैरों के भार खड़े रहने के कारण महिला को यह समस्या हो सकती है।

ब्रेस्ट

प्रेग्नेंट महिलाओं के ब्रेस्ट में दूध के उत्पादन होने के कारण दुग्ध ग्रंथियों का फैलाव होने लगता है। जिसके कारण प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में ही गर्भवती महिला को ब्रेस्ट में दर्द, भारीपन महसूस होना, सूजन, खुजली जैसी समस्या हो सकती है।

होंठों

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कई बार महिला के होंठों में सूजन की समस्या भी हो सकती है ऐसे में गर्भवती महिला को बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए।

चेहरे पर सूजन

कई गर्भवती महिलाओं को सूजन की समस्या चेहरे पर भी देखने को मिल सकती है, और यदि चेहरे की सूजन अधिक बढ़ने लगे तो इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर चेक करवाना चाहिए।

मसूड़ों में सूजन

यदि गर्भवती महिला को दांतों में दर्द या मसूड़ों में दर्द की समस्या रहती है, तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को मसूड़ों में भी सूजन की समस्या रह सकती है और कई बार मसूड़ों में से खून भी आ सकती है।

नाक में सूजन

पुराने समय में यदि गर्भवती महिला की नाक में सूजन की समस्या होती थी तो ऐसा कहा जाता था की गर्भवती महिला के गर्भ में लड़की है, जो की केवल अंदाजा ही था। लेकिन यदि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान यदि नाक में सूजन की समस्या होती है तो इसका कारण भी बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं।

टखनों में सूजन

पैरों और टखनों पर बॉडी का पूरा वजन पड़ने के कारण गर्भवती महिला को पैरों के साथ टखनों में भी सूजन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

प्राइवेट पार्ट

गर्भवती महिला को इन्फेक्शन होने के कारण या पेट के निचले हिस्से में दबाव अधिक पड़ने के कारण प्राइवेट पार्ट में भी सूजन जैसी समस्या हो सकती है। और प्राइवेट पार्ट में सूजन होने के कारण यूरिन करने में परेशानी, प्राइवेट पार्ट में दर्द आदि की समस्या भी हो सकती है।

तो यह हैं वो अंग जिनमे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है, लेकिन फिर भी सूजन की समस्या अधिक होने पर या सूजन के साथ दर्द महसूस होने पर इस समस्या से निजात पाने के लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए। ताकि आपकी परेशानी को कम करने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में हेल्दी रहने के उपाय

गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जहां महिला के लिए हर एक पल बहुत ही अहम होता है। क्योंकि इस समय महिला को माँ बनने की ख़ुशी ही को एन्जॉय करना ही जरुरी नहीं होता है बल्कि गर्भवस्था के दौरान हेल्दी कैसे रहे इसका ध्यान रखना भी जरुरी होता है। क्योंकि महिला यदि अपनी सेहत और स्वास्थ्य का ध्यान अच्छे तरीके से रखती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। और यदि महिला खान पान में लापरवाही करती है या ऐसा कोई काम करती है जिसे प्रेगनेंसी में नहीं करना चाहिए। तो इसके कारण महिला का स्वास्थ्य ही प्रभावित नहीं होता है। बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्वस्थ रहे और शिशु के विकास में किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए महिला को अपना ध्यान अच्छे से रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में हेल्दी रहने के टिप्स

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की दिक्कत न हो और महिला और शिशु हेल्दी रहे इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में हेल्दी रहने के लिए क्या करना चाहिए।

गरम ठंडा एक साथ न खाएं

प्रेग्नेंट महिला को ठंडी व् गरम चीजों का सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे न केवल सर्दी खांसी जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है। बल्कि ठंडा गर्म एक साथ खाने पर बॉडी के तापमान पर असर पड़ सकता है जिसके कारण आपके द्वारा लिए गए भोजन को पचाने में ज्यादा परेशानी हो सकती है। और भोजन के अच्छे से हज़म न होने के कारण पेट से जुडी समस्या का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

दही

गर्भवती महिला को दही का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से फायदे मिलते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखे की दही आप दिन के समय ही खाएं क्योंकि रात के समय दही का सेवन करने से गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि रात के समय दही का सेवन करने से गर्भवती महिला को खांसी, कफ, पेट से जुडी परेशानियां, सूजन, जोड़ो में दर्द की समस्या आदि हो सकती है।

जूस

फल व् फलों का रस पोषक तत्वों से भरपूर होता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान इनका सेवन करने की सलाह महिला को दी जाती है। लेकिन गर्भवती महिला को जूस का सेवन ज्यादा भी नहीं करना चाहिए क्योंकि जूस का सेवन अधिक मात्रा में करने से ब्लड में शुगर लेवल बढ़ सकता है, जिसके कारण गर्भवती महिला को गेस्टेशनल शुगर होने का खतरा रहता है, साथ ही मीठा अधिक मात्रा में लेने के कारण वजन बढ़ने की दिक्कत भी हो सकता है।

नमक

सोडियम को भी गर्भवती महिला को अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए और न ही कम मात्रा में लेना चाहिए। क्योंकि नमक का सेवन अधिक मात्रा में लेने से सूजन, हाई ब्लड प्रेशर जैसी परेशानियां हो सकती है। साथ ही नमक का सेवन कम करने से भी गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु को दिक्कत हो सकती है।

ठंडी चीजें

गर्भवती महिला को हेल्दी रहने के लिए ठंडी चीजों का सेवन भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। क्योंकि अधिक ठंडा खाने के कारण वजन बढ़ने, डिहाइड्रेशन, पाचन क्रिया से जुडी समस्या, सुस्ती, सिर दर्द, गले में इन्फेक्शन, धीमी हार्ट रेट आदि परेशानियां हो सकती है, इसीलिए गर्भवती महिला को इन परेशानियों से बचने और हेल्दी रहने के लिए नोर्मल पानी का ही सेवन करना चाहिए।

रात का खाना

प्रेग्नेंट महिला को रात के खाने में भारी आहार का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि रात के समय खाने को पचाने में दिक्कत हो सकती है। जिसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही रात को खाना खाने के बाद तुरंत सोना भी नहीं चाहिए। क्योंकि इसके कारण भी महिला को दिक्कत हो सकती है।

इन चीजों को साथ में नहीं खाएं

कुछ चीजें हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को साथ में नहीं करना चाहिए जैसे की दूध व् दही, मूली व् दूध, खट्टा व् मीठा, मछली व् दूध, आदि। क्योंकि इन सभी चीजों को साथ में खाने से गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को हेल्दी रहने के लिए इन चीजों का सेवन साथ में करने से बचना चाहिए।

गैस बनाने वाले आहार

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। ऐसे में महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके। ऐसे में जिन चीजों को खाने से गैस बनती है जैसे गोभी, ड्राई बीन्स, ठंडा खाना, आदि नहीं खाना चाहिए।

मौसम का ध्यान

मौसम के अनुसार गर्भवती महिला को अपनी केयर करनी चाहिए ताकि महिला और शिशु को हेल्दी रहने में मदद मिल सके। जैसे की सर्दियों में ठण्ड से बचाव का ध्यान, बरसात में इन्फेक्शन से बचाव का ध्यान, गर्मियों में गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचाव का ध्यान महिला को अच्छे से रखना चाहिए। यदि महिला मौसम के अनुसार अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को हेल्दी रहने में मदद मिलती है।

इन्फेक्शन से बचाव

स्वस्थ व् सेहतमंद रहने के लिए गर्भवती महिला को अपने आस पास, अपने खान पान में साफ़ सफाई का भी अच्छे तरीके से ध्यान रखना चाहिए। साथ ही जिन चीजों में केमिकल का इस्तेमाल होता है उन चीजों के इस्तेमाल से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिए। क्योंकि इनके कारण गर्भवती महिला को इन्फेक्शन का खतरा रहता है। इसके अलावा महिला को प्रदूषण वाली जगह, भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे महिला को इन्फेक्शन का खतरा रहता है। और यदि महिला को इन्फेक्शन होता है तो इससे शिशु को भी दिक्कत हो सकती है। इसीलिए इन्फेक्शन से बचाव और हेल्दी रहने के लिए गर्भवती महिला को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो गर्भवस्था के दौरान महिला को हेल्दी रहने में मदद करते हैं। और यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्वस्थ रहती है तो इससे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

ब्रैस्ट को बढाने के उपाय

Breast Size Badhane ke Tarike

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ब्रेस्ट को महिलाओं के शरीर का सबसे आकर्षक और खुबसूरत अंग माना जाता है। जिसके सुन्दर होने से न केवल महिला सुन्दर दिखती है अपितु उसके नारीत्व में भी निखार आता है। इतना ही नहीं सुन्दर और सुडौल ब्रैस्ट आपको दूसरों से अलग और आकर्षक बनाने का भी काम करती है। लेकिन आजकल के बदलते समय में खान-पान से लेकर रहन-सहन तक सभी में बदलाव होने लगे है जिसका सीधा प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ता है।ब्रैस्ट को बढाने के उपाय

ठीक तरह से खाना नहीं खाने के कारण शरीर को सभी जरुरी तत्व नहीं मिल पाते जिसके कारण शरीर के अंग पूर्ण तरह से विकास नहीं कर पाते। और इसी कारण आजकल की लड़कियों में यह समस्या बढती ही जा रही है। आज के समय में हर 10 में से 6 लड़कियां अपनी छोटी ब्रैस्ट को लेकर परेशान रहती है। ब्रेस्ट का छोटा होना या उनका सही तरीके से विकास नहीं हो पाना महिलाओं की आम परेशानियाँ है। जिसका कारण है आपके शरीर में मौजूद एस्ट्रोजन नामक हॉर्मोन। जी हां, ब्रैस्ट की साइज़ से लेकर आपके मेंस. तक सभी के लिए यह जिम्मेदार होता है।

इसकी कमी के कारण ब्रैस्ट का सही तरह से विकास नहीं हो पाता और वह सामान्य की तुलना में छोटी या अविकसित रह जाती है। ऐसे में बाजार में कई क्रेंस, दवाएं और आयल आदि है जो ब्रैस्ट को बढ़ाने का दावा करते है लेकिन वे सभी अपने कार्य को पूरा नहीं कर पाते। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे आसान और लाभकारी उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आपकी ब्रैस्ट साइज़ कुछ ही हफ़्तों में पहले से बेहतर होने लगेगी। और क्योंकि ये उपाय पूरी तरह प्राकृतिक और घरेलू है तो इनके इस्तेमाल में किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होगा। आइये जानते है छोटी ब्रैस्ट को कैसे बढ़ाएं!

ब्रैस्ट को बढाने के तरीके :-

छोटी ब्रैस्ट होने पर कपड़े शरीर पर ठीक तरह से टिक नहीं पाते जिसके कारण आप कभी भी अपनी मनपसंद ड्रेस या कपडे नहीं पहन पाती। लेकिन अब परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आज हम आपको ब्रैस्ट साइज़ बढाने के घरेलू उपाय बता रहे है। जिसकी मदद से आप बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के अपनी ब्रैस्ट को बड़ा कर सकती है।

1. दूध और पपीता लें :

दूध के साथ पपीते का सेवन करने से छोटे स्तनों का आकार बड़ा होता है। लेकिन इसके सेवन के समय एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की अधिक सेवन से दस्त लगने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को कभी भी इस उपाय का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि पपीता उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं।

2. सौंफ का सेवन करें :choti breast size

सौंफ का सेवन करने से भी छोटी ब्रैस्ट को बड़ा करने में मदद मिलती है। इसके लिए सौंफ को चबा चबाकर खाएं या आप चाहे तो इसका पाउडर बनाकर भी सेवन कर सकते है।

3. अलसी के बीज का प्रयोग करें :

ब्रैस्ट साइज़ को बढाने के लिए आप अलसी के बीजों का भी प्रयोग कर सकती है। इसके लिए अलसी के बीजों को चबा चबाकर खाएं या सलाद में इसे सम्मिलित करें। लेकिन एक बात ध्यान रखें प्रेगनेंसी के समय इसका सेवन करना अच्छा नहीं होता इसीलिए इस समय इसके सेवन से परहेज करें।

4. सोया युक्त प्रोडक्ट्स :

छोटे स्तनों से प्रेषण लड़कियां सोया युक्त उत्पादों का इस्तेमाल करके अपनी इस समस्या से छुटकारा पा सकती है। क्योंकि सोया शरीर में एस्ट्रोजन को बढाने में मदद करता है। इसके लिए सोया मिल्क या सोया बीन्स का सेवन करें। लेकिन इन्हें कैंसर के कारण के रूप में भी देखा जाता है इसलिए अधिक सेवन करने से बचें और इस्तेमाल करने से पूर्व एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

5. दूध और उससे बने उत्पाद :

दूध और दूध से बने सभी उत्पादों में फैट की अधिक मात्रा पाई जाती है जो स्तनों में फैट बढाने में भी मदद करते है। इसीलिए रोजाना दूध और उससे बनी चीजों का सेवन करें। इसके अलावा ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिनमे वसा की मात्रा अधिक पायी जाती है। इससे शरीर का वजन बढ़ता है। लेकिन इसके साथ साथ योग भी बहुत जरुरी है नहीं हो आप मोटी हो सकती है।

6. मेथी के बीज खाएं :

ब्रेस्ट को सही आकार देने के लिए आप मेथी के बीजों का भी सेवन कर सकती है। इसके लिए मेथी के बीजों का सेवन करें और इनका पेस्ट बनाकर अपनी ब्रैस्ट पर लगाएं और मसाज करें। लेकिन हां, गर्भवती महिलाओं को मेथी के बीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ये उनके लिए हानिकारक हो सकता है।

7. मेथी के बीजों के आयल से ब्रैस्ट की मसाज करने से भी उनके आकार में फर्क आता है और वे बड़े हो जाते है।

मालिश करना भी है जरुरी :-breast-msaj

अगर आप भी अपनी ब्रैस्ट साइज़ को बढ़ाना चाहती है और सुन्दर सुडौल स्तन पाना चाहती है तो उसके लिए आपको प्रतिदिन 20 से 30 मिनट ब्रैस्ट की मसाज करनी होगी। इससे उनके आकार में जल्दी फर्क आता है। ऐसा करने से 1 ही महीने के भीतर फर्क महसूस होने लगेगा। क्योंकि मालिश करने से स्तनों में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है जिससे सभी अविकसित होर्मोन्स विकसित होने लगते है और ब्रैस्ट साइज़ बेहतर होता है। मालिश के लिए आप अलसी, सरसों या जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकती है। वैसे आप चाहे तो सामान्य क्रीम की मदद से भी स्तनों की मालिश कर सकती है लेकिन मालिश हलके हाथों से ही करें।

ये तो हो गए कुछ घरेलू तरीके जिनकी मदद से आप ब्रैस्ट साइज़ को बड़ा कर सकती है। लेकिन इनके अलावा कुछ आसान टिप्स है जिनकी मदद से आप अपने स्तनों को वास्तविकता में तो बढ़ा नहीं ससकती लेकिन एक इल्यूजन दे सकती है जिससे आपकी ब्रैस्ट उभरी और बड़ी दिखाई देंगी। तो आइये उन टिप्स के बारे में भी जान लेते है।

ब्रैस्ट को बड़ा दिखाने की टिप्स :-

1. स्तनों को बड़ा दिखाने के लिए आप पैडेड ब्रा का इस्तेमाल कर सकती है। ब्रैस्ट को बड़ा दिखने का ये तरीका काफी आसान और अच्छा उपाय है। इन्हें आप किसी भी कॉस्मेटिक शॉप से खरीद सकती है।

2. ब्रैस्ट को बड़ा दिखाने के लिए नेकलाइंस का बहुत अहम् रोल होता है। जिसके लिए आप बड़े गले वाले टॉप पहनें। यानी ऐसे गले जिसमे लैस, चुन्नटे, कढाई या जड़ाऊ कार्य हो रखा हो। इसके अलावा ऐसी ज्वैलरी का चयन करें जो आपकी ब्रैस्ट से ध्यान भटकाने का काम करें।

3. इसके अलावा हाई नैकलाइंस वाले सूट भी पहन सकती है। ये आपकी गर्दन को छोटा दिखाने में मदद करती है। इसके अलावा अगर आप लो नैकलाइंस वाले गले पहनती है तो यह आपकी ब्रैस्ट को और अधिक छोटा दिखाने का काम करेगा।

4. ब्रैस्ट को बड़ा दिखाने के लिए आपको बोल्ड और चमकीले रंग व् प्रिंटेड टॉप पहनने चाहिए। ये ब्रैस्ट साइज़ से ध्यान हटाकर टॉप पर ध्यान आकर्षित करते है। जिससे लोगों का ध्यान आपके ब्रैस्ट साइज़ पर नहीं आपके टॉप पर जाएगा।

5. भले ही आपकी ब्रैस्ट साइज़ कम क्यों न हो, लेकिन अगर आप अपनी क्लीवेज को शो करना चाहती है तो इसके लिए आप मेकअप का सहारा ले सकती है। जी हां, फाउंडेशन की डार्क शेड्स से ब्रेस्ट को उभरा हुआ दिखाया जा सकता है। इसके लिए आप पार्लर या ब्यूटी एक्सपर्ट की मदद ले सकती है।

तो ये थी कुछ टिप्स और उपाय जिनकी मदद से आप अपनी छोटी ब्रैस्ट को बड़ा कर सकती है। लेकिन ध्यान रहे उपायों का प्रयोग सोच समझकर कर करें। अर्थात अगर आपको इनमे से किसी भी चीज से एलर्जी है तो उसका प्रयोग करने से बचें।

हथेलियों और तलवों से पसीना आने के कारण व् इलाज

हथेलियों और तलवों में पसीना आने के कारण, हथेलियों और तलवों में पसीना आने से बचने के उपाय बॉडी से पसीना आना बहुत ही आम बात होती है खासकर गर्मियों में ऐसा जरूर होता है। बॉडी से पसीना आने के बहुत से फायदे होते हैं जैसे की बॉडी का तापमान नियंत्रित रहता है, बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं जिससे आपको बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है आदि। लेकिन कई लोगो को चाहे सर्दी हो या गर्मी हाथों और तलवों में पसीना आता ही रहता है। क्या आपके साथ भी ऐसा हो रहा है? यदि हाँ, तो इसके बारे में आपके लिए जानना बहुत जरुरी है की आखिर ऐसा क्यों होता है।

क्यों आता है हथेलियों को तलवों से पसीना?

यदि आपको हथेलियों और तलवों से सर्दी के मौसम में बहुत अधिक पसीना आता है, तनाव या कोई परेशानी नहीं है तो भी पसीना आ रहा है। तो इसका कारण हाइपरहाइड्रोसिस नामक बिमारी का होना हो सकता है। हाइपरहाइड्रोसिस की बिमारी होने पर बॉडी में पसीने की ग्रंथि बहुत अधिक सक्रिय हो जाती है जिसके कारण आपको बहुत अधिक पसीना आ सकता है। इस बिमारी के होने पर या तो आपकी पूरी बॉडी या किसी एक या दो पार्ट से ही पसीना अधिक आने की समस्या हो सकती है।

जैसे की इसके कारण आपकी हथेलियों और तलवों पर अधिक पसीना आ सकता है। हाइपरहाइड्रोसिस दो तरह का हो सकता है, एक प्राइमरी और दूसरा सेकेंड्री। प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस होने पर इसका कोई कारण बॉडी में नज़र नहीं आता है बस बहुत ज्यादा पसीना आता रहता है। वहीं सेकेंड्री हाइपरहाइड्रोसिस की समस्या होने के बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे की शुगर, मेनोपॉज़, लो ग्‍लूकोज़ थायरॉयड, आदि।

हथेलियों को तलवों से पसीना आने की समस्या से बचने के उपाय

  • भरपूर पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।
  • तेज गंध वाली चीजें जैसे प्याज़, लहसुन, बहुत अधिक मसाले आदि का सेवन करने से बचें।
  • बॉडी की साफ़ सफाई का ध्यान रखें नियमित नहाएं और सभी कपडे बदलें।
  • अपने जूतों को धूप व् हवा में रखें।
  • तनाव लेने से बचें।
  • गुनगुने पानी में बेकिंग सोडा डालकर अपने हाथों पैरों को थोड़ी देर डुबोएं ऐसा करने से बहुत देर तक आपके हाथों पैरों में पसीना नहीं आएगा।
  • टेलकम पाउडर का इस्तेमाल करें।
  • सूती कपडे पहने।
  • टमाटर का रस पीएं।
  • अधिक दिक्कत होने पर एक बार डॉक्टर से भी मिलें।

तो यह हैं हथेलियों व् तलवों से पसीना आने के कारण व् इलाज यदि आपको भी यह परेशानी है। तो आपको भी इस समस्या के इलाज के लिए इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। ताकि बॉडी में अधिक पसीना आने के लिए कारण आपको लोगो के सामने होने वाली शर्मिंदगी से बचे रहने में मदद मिल सके।

नींद में चलने की बीमारी कारण और उपाय ?

Nind Me Chalna 

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अक्सर बहुत से लोग रात को सोते समय चलने लगते है कई बार नींद में दिखने वाले स्वपन के कारण तो कभी किसी चिंता के कारण। कई बार तो लोग नींद में चलते चलते घर से बाहर तक चले जाते है और सबसे हैरानी की बात तो ये होती है की उन लोगो को पता तक नहीं चलता की वे चल रहे है। कुछ लोग तो इसे ऊपरी चक्कर, भूत आदि का नाम दे देते है जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है।

दरअसल यह एक सामान्य विकार है जिसे कोई भी व्यक्ति पीड़ित हो सकता है। लेकिन सभी को यह समझ नहीं आता जिसका मुख्य कारण होता है जानकारी का अभाव। इसीलिए आज हम आपको नींद में चलने वाली बीमारी से जुड़े प्रत्येक तथ्य के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

नींद में चलना क्या है?

वास्तव में नींद में चलना एक सामान्य विकार है जो धीरे-धीरे व्यक्ति की आदत बन जाती है। इस बीमारी में व्यक्ति सोते हुए चलने लगता है और अलग-अलग कार्य करने लगता है। इसे निद्रा विकार के रूप में भी जाना जाता है। बड़ो की तुलना में यह बच्चों में बहुत अधिक होती है। सामान्यतः ये बीमारी उन लोगों को होती है जिनकी नींद पूरी नहीं हो पाती।

नींद में चलते समय व्यक्ति को उस दौरान होने वाली घटनाएं याद नहीं रहती और सामान्य तौर पर इस समय व्यक्ति गहरी नींद में होता है और ऐसे में उन्हें जगाना काफी मुश्किल होता है।

वैसे तो ये बीमारी समय के साथ खुद ही ठीक हो जाती है लेकिन इसके ठीक होने से पूर्व बहुत अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। क्योंकि नींद में चलते समय व्यक्ति नींद में होता है ऐसे में दुघटना की संभावना काफी बढ़ जाती है।

रात्रि के समय नींद में चलने के कारण और लक्षण :

बड़ों और बच्चों में नींद में चलने के निम्नलिखित कारण हो सकते है।

  • नींद पूरी नहीं होना।
  • चिड़चिड़ापन।
  • अवसाद।
  • स्पेशल दवायें।
  • शराब का सेवन करना।
  • व्यक्ति की चिकित्सीय स्थिति।
  • व्यक्ति की मानसिक समस्याएं।
  • कुछ केसेस में ये समस्या अनुवांशिक भी होती है।

बीमारी के लक्षण :

नींद में चलने वाले लोगों लो देखकर लगता है की वे जगे हुए है जबकि वे सोए हुए होते है। इस समस्या के होने पर व्यक्ति अपने बिस्तर के आस पास ही चलता है साथ ही कुछ विभिन्न क्रियाएं भी करता है। यदि उन लोगो को जगाया नहीं जाए तो वे नींद में चलते चलते अलग और किसी और जगह पर जाकर वापस सो जाते है।

विकार की पहचान :-

सामान्य तौर पर घर के परिजन बच्चों की इस बीमारी की पहचान करते है जबकि बड़े ऐसी घटनाओं को ध्यान रखकर स्वयं ही इस बीमारी की पहचान कर लेते है। यदि नींद में चलने की घटनाएं बार बार हो रही है तो डॉक्टर से मिलें और मानसिक व् शारीरिक परिक्षण करवाएं।

नींद में चलने की समस्या का उपचार और बचाव :-नींद में चलने

सामान्य तौर पर इस बीमारी के लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन अगर नींद में चलने के दौरान चोट लग जाए या कोई समस्या हो जाए तो उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

  • अगर आप किसी बीमारी की दवा लेते है और उस दवा की वजह से आप नींद में चलने लगे हो तो उनमे परिवर्तन कराएं या उन्हें खाना बंद कर दें।
  • नींद दूर करने के लिए आपकी डॉक्टरी परामर्श से दवाओं का सेवन कर सकते है।
  • नींद में कमी, मानसिक रोग या किसी अन्य समस्या के लिए उपचार करवाएं।

यदि व्यक्ति को नींद में चलने की आदत है तो उसके हाथों को किसी मुलायम चीज या दुप्पटे से बांध दें ताकि जब वह चलने लगे तो आपको पता चल जाए। इसके अलावा अगर संभव हो सके तो रात के समय रोगी का ध्यान रखे और समय समय पर जागकर उसे देखते रहे।

बचाव :
  • अवसाद-रोधकों और शराब के सेवन से दूर रहें।
  • तनाव, विवाद या क्रोध से दूर रहे क्योंकि ये विकार को बढ़ा सकते हैं।
  • अनिद्रा से बचें, नींद में खलल न आने दें।

नींद में चलना कोई गंभीर स्थिति नहीं है। डॉक्टर के पास केवल तभी जाए जब या तो नींद में चलना लगातार जारी है या कोई नींद में चलने के दौरान खतरनाक कार्यवाही (गाड़ी चलाना) करने लगे।
यदि आवश्यक हो तो नींद में चलने वाले को जगा सकते हैं; जागने के बाद थोड़ी देर के लिए भटके हुए या भ्रमित हो सकते हैं। लेकिन बाद में सब नार्मल हो जाएगा।

गर्भ में बेटी होने की क्या निशानी होती है? और चेहरे पर क्या बदलाव होते हैं

गर्भ में बेटी होने की क्या निशानी होती है, गर्भ में लड़की होने पर चेहरे पर होने वाले बदलाव, गर्भ में लड़की होने के लक्षण, कैसे पता करे गर्भ में लड़की है या लड़का, इस तरह जाने गर्भ में लड़की है या लड़का

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में, चेहरे पर तरह -तरह के बदलाव आते हैं। जिन्हे देखकर आप जान सकते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की है। आज हम आपको गर्भवती महिला को महसूस होने वाले व् दिखाई देने वाले लक्षण बताने जा रहें हैं जिनसे आप जान सकते हैं, की आपके गर्भ में एक नन्ही सी परी पल रही है। लेकिन इन तरीको पर पूरी तरह से भरोसा करना भी ठीक नहीं है, क्योंक हो सकता हैं की कई बार यह गलत भी हो। लेकिन पुराने समय से ही इन तरीको का इस्तेमाल किया जा रहा है और ज्यादातर मामलों में यह सही भी होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु अगर लड़की है तो महिला में कौन कौन से लक्षण दिखाई दते हैं।

लड़की कैसे पैदा होती है

महिला के अंडाशय में xx क्रोमोसोम होते हैं जबकि पुरुष के शुक्राणु में xy क्रोमोसोम होते हैं। और यही क्रोमोसोम निर्धारित करते हैं की शिशु लड़का होगा या लड़की, जब सम्बन्ध बनाने के बाद पुरुष और महिला दोनों के ही x क्रोमोसोम मिलते हैं तो गर्भ में लड़की होती है, जबकि पुरुष का y और महिला का x क्रोमोसोम मिलते हैं तो एक लड़के का जन्म होता है।

शिशु की धड़कन

ऐसा माना जाता हैं की यदि आपके गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कन 140 बी एम पी से ज्यादा है तो समझ जाइये की आपके गर्भ में एक सूंदर सी परी है। ज्यादातर मामलों में यह वैज्ञानिक तरीका सही साबित होता है।

मूड स्विंग्स

वैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग्स होना यानी व्यवहार में बदलाव होना आम बात होती है। लेकिन यदि महिला बहुत ज्यादा चिड़चिड़ी रहती है तो इसका मतलब यही होता है की गर्भ में पल रहा शिशु एक लड़की है।

ब्रेस्ट साइज में बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के ब्रेस्ट में बहुत से बदलाव आते हैं, लेकिन यदि आपके ब्रेस्ट ज्यादा भारी, आकार में बड़े, और ज्यादा टाइट से महसूस होते है, तो यह भी गर्भ में लड़की होने का ही एक लक्षण होता है। जबकि गर्भ में लड़का होने पर ब्रेस्ट में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिलता है।

मीठा खाने का मन मन करना

यह भी गर्भ में लड़की होने का ही एक लक्षण होता है जब गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान केवल मीठा खाने का अधिक मन करता है, जैसे की मिठाइयां आइस क्रीम आदि।

शिशु की हलचल

गर्भावस्था के पांचवे महीने तक गर्भ में शिशु की हलचल आप महसूस कर सकते हैं, और यदि आपका शिशु गर्भ में पसली की तरफ अधिक लाते मारता है। तो समझ जाइये की आपके घर एक प्यारी से गुड़िया आने वाली है।

पेट का आकार

यदि महिला के पेट का आकार अधिक बड़ा और गोल होता है,साथ ही नीचे की तरफ झुका हुआ होता है तो यह बह गर्भ में पल रहा शिशु लड़की है इस बात की और इशारा करता है, जबकि लड़का होने पर पेट का आकार थोड़ा कम होता है।

चर्बी बढ़ना

यदि गर्भवती महिला के कूल्हों और जांघो की चर्बी अधिक बढ़ने लगती है तो शरीर में आने वाला यह बदलाब भी गर्भ में लड़की होने की और इशारा करता है।

मॉर्निंग सिकनेस

गर्भावस्था के दौरान सुबह के समय उठने में परेशानी होना, आलस महसूस होना आम बात होती है। लेकिन यदि महिला को सुबह के समय ज्यादा परेशानी हो, अजीब सा महसूस अधिक होता है। तो यह भी गर्भ में लड़की होने की तरफ इशारा करता है।

बालों में फर्क

बालों का अधिक हल्का होना, प्रेगनेंसी के दौरान वैक्सिंग करवाने पर बालों का धीमी गति से आना भी गर्भ में लड़की होने का संकेत होता है।

गर्भ में लड़की होने पर चेहरे पर आते हैं यह बदलाव

यदि गर्भावस्था के दौरान महिला के चेहरे पर पिम्पल, दाग धब्बे अधिक होने लगते हैं, चेहरे का निखार कम होने लगता है, साथ ही बाल भी बेजान हो जाते हैं, नाख़ून की चमक कम हो जाती है। तो इसका मतलब होता है की गर्भ में पल रही शिशु एक प्यारी सी लड़की है। और चेहरे की ख़ूबसूरती का कम हो रही है तो महिला आसानी से जान सकती है की अब वो एक खूबसूरत सी परी को जन्म देने वाली है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला महसूस करती है तो इसका मतलब यह होता है की गर्भ में पल रह शिशु आपके घर की आने वाली लक्ष्मी है।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भ में बेटी होने पर शरीर और चेहरे पर ये बदलाव आते हैं।

घर से चूहें भगाने के उपाय

घर से चूहें भगाने के उपाय, अक्सर देखा जाता है की घर में चूहें होने के कारण हम परेशान रहते है। और घर में चूहों का होना न केवल घर की चीजों को खराब करता है बल्कि इससे बीमारियां फैलने का भी डर होता है। जैसे की जहां जहां चूहें चलते हैं, खाने के सामान को काट देते हैं, घर में यूरिन व मल कर देते हैं उसके कारण बीमारियां होने का खतरा होता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार भी घर में चूहों का होना नेगेटिव एनर्जी पैदा करता है। और इस समस्या से बचाव के लिए लोग तरह तरह के उपाय का इस्तेमाल भी करते हैं ताकि इस परेशानी से निजात मिल सकें। तो आइये आज हम भी इस आर्टिकल में कुछ आसान उपाय बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल करने से घर में चूहों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

घर से चूहें भगाने के लिए इस्तेमाल करें लाल मिर्च

  • खाने में इस्तेमाल की जाने वाली लाल मिर्च चूहों को भगाने का असरदसार उपाय है।
  • इस उपाय का इस्तेमाल करने के लिए आप जगह घर की उन जगह पर लाल मिर्च का बिखेर कर रख दें जहां चूहें सबसे अधिक आते हैं।
  • ऐसा करने के बाद आप खुद देखेंगे की चूहें उस जगह पर आने के लिए दो बार सोचेंगे।

सिर के बाल

  • चूहें सिर के बालों से बहुत ज्यादा डरते हैं क्योंकि यदि वो इन्हे खा लेते हैं तो इन्हे निगलने से उनकी मौत हो सकती है।
  • ऐसे में जिन जगह से चूहें घर में आते हैं या जहां चूहें अधिक घूमते हैं वहां अपने सिर के थोड़े से बाल रख दें।
  • ऐसा करने से चूहें आपके घर में आने से डरने लग जाएंगे।

प्याज

  • प्याज की बदबू को चूहें बर्दाश नहीं कर पाते हैं ऐसे में चूहें के आने वाली जगह पर प्याज के टुकड़े को काटकर रख दें।
  • ध्यान रखें की रोजाना प्याज के टुकड़े को बदल दें, ताकि प्याज की दुर्गन्ध से आपको किसी भी तरह की परेशानी न हो।

घर से चूहें भगाने के लिए इस्तेमाल करें लहसुन

  • लहसुन को पानी के साथ मिलाकर पीस लें और उसके बाद उसे स्प्रे बोतल में डालकर उन जगह पर छिड़काव कर दें जहां घर में आपको चूहें घूमते हुए दिखाई देते हैं।
  • चूहें लहसुन की तेज दुर्गन्ध से दूर भागते हैं ऐसे में इस उपाय का इस्तेमाल करने से आपको घर से चूहों को दूर भगाने में मदद मिलती है।

लौंग

  • एक कपडे में लौंग के पांच सात पीस लेकर बाँध दें और उस जगह पर रख दें जहां पर चूहें सबसे ज्यादा घूमते हैं या जहां से चूहें घर में आते हैं।
  • ऐसा करने से भी चूहों को घर से भगाने में मदद मिलती है।

पुदीना

  • पुदीने की गंध भी बहुत तेज होती है और चूहों को तेज गंध से एलर्जी होती है।
  • ऐसे में पुदीने के पत्तों को पीसकर या उनका रस निकालकर उस जगह पर रख दें जहां चूहें आते जाते हैं।
  • ऐसा करने से भी चूहों को घर से भगाने में मदद मिलती है।

घर से चूहें भगाने के लिए इस्तेमाल करें पिपरमिंट

  • पिपरमिंट का उपयोग करने से भी चूहों से छुटकारा मिल सकता है।
  • इस उपाय के लिए घर के हर कोने में रूई में पिपरमेंट को लेकर रख दें।
  • इसकी तेज गंध से चूहे को घर से आसानी से भगाने में मदद मिलती है।

तेज पत्ता

  • घर के मसालों में इस्तेमाल किया जाने वाला तेज पत्ता भी घर से चूहों को भगाने का एक असरदार उपाय है।
  • इसके इस्तेमाल के लिए घर के कोनो व उन हिस्सों में तेज पत्ता रखें जहां चूहें घूमते है।
  • इसा करने से भी घर से चूहों को भगाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान उपाय जिन्हे आप घर में चूहों को भगाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही इनका इस्तेमाल करने से किसी तरह के केमिकल के दुष्प्रभाव से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही यदि आप चूहें भगाने के लिए बाजार से दवाई लेकर आते हैं तो घर में बच्चों आदि को उससे दूर रखें।

अनचाहे हेयर रिमूव करने के सही तरीके और गलत तरीके क्या होते है

अनचाहे बाल होने की समस्या पर आपको कई बार लोगो के सामने शर्मिंदा होना पड़ सकता है, यदि आपके बाल चेहरे पर हो, यदि आप साड़ी पहनती है तो कमर और पेट पर अनचाहे बाल होने के कारण आपको शर्मिंदा होना पड़ सकता है, ये अनचाहे बाल आपके स्वास्थ्य पर तो कोई बुरा प्रभाव नहीं डालते है, परंतु इसके कारण आपके आत्मविश्वास और आपकी पर्सनैल्टी पर जरूर पड़ता है, तो आइये आज हम आपको आपके अनचाहे बाल की समस्या से निजात पाने के टिप्स बताते है।

टीवी में हीरोइन और बच्चे की स्किन को देखकर हर कोई सोचता है की काश हमारी स्किन ऐसी होती, जिस पर कोई बाल नहीं होता और आप भी टीवी हीरोइन की तरह चिकनी और बच्चों की तरह कोमल स्किन पा सकती परंतु जहाँ हीरोइन के बारे में बात आती है, वही महँगे खर्चे को देखकर महिलाये इसे अवॉयड करती है, और घर पर ही रेज़र का इस्तेमाल करके या हेयर रिमूवल क्रीम का इस्तेमाल करके अपने अनचाहे हेयर को रिमूव कर लेती है, परंतु इसके कारण आपकी स्किन पर कितना बुरा असर पड़ता है, शायद ये आप नहीं जानते है, इसके कारण आपके बालों की ग्रोथ ज्यादा होने के साथ बाल बहुत हार्ड भी आते है, और स्किन भी काली पड़ने लगती है।

अनचाहे बालों के होने का कारण आपके शरीर में हॉर्मोन्स का संतुलन होना, पीरियड्स का असंतुलन होना, या तरह तरह की दवाइयों के इस्तेमाल के कारण ये समस्या हो जाती है, और वही यदि आप इसके लिए पार्लर में जाते है, तो इस पर आपके पैसे भी बहुत खर्च होते है, और साथ ही आपको थोड़े दिन बाद वापिस भी जाना पड़ता है, तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे है, जिसके कारण आपके अनचाहे बाल भी रिमूव हो जायेंगे, और आपकी स्किन पर भी कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा, साथ ही इस पर आपको ज्यादा पैसे भी खर्च नहीं करने पड़ेंगे, तो आइये आज हम आपको अनचाहे बालों को रिमूव करने के कुछ तरीके बताते है।

पपीते का इस्तेमाल करें:-

papaya

पपीते में papain एंजाइम होता है, जो की आपके अनचाहे बालों की ग्रोथ को जल्दी से होने नहीं देता है, साथ ही पपीता आपकी स्किन के लिए अच्छा होता है, और आपकी स्किन पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं डालता है, इसके लिए आप दो चमच्च पीसा हुआ पपीता और एक चम्मच हल्दी को अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, और इसे अपने अनचाहे बालों पर लगाएं, और 15 मिनट के बाद धो दें, इस पेस्ट को हफ्ते में दो बार इस्तेमाल करने से आपको अनचाहे बालों से राहत मिलती है।

बेसन और एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-

एक चम्मच पीसा हुआ पपीता, चुटकी भर हल्दी, चुटकी भर बेसन, चार चम्मच एलोवेरा जैल, दो चम्मच सरसों का तेल, अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, अब इस पेस्ट को अपने अनचाहे बालों पर लगाएं, और बालों की जिसमे ग्रोथ है, उसी की उलटी दिशा में पेस्ट को लगाएं, अब उसे पंद्रह से बीस मिनट लगा कर रखें, अब एक साफ़ कपडा लें, और उसे उसी दिशा में साफ़ करें, और पेस्ट को निकालने के बाद पानी से धो लें, और उसके बाद ओलिव ऑयल या मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं, इस प्रक्रिया को हफ्ते में तीन, और तीन महीने तक करने से आपके बालों की ग्रोथ बहुत कम हो जाती है।

हल्दी का इस्तेमाल करें:-

haldi

हल्दी का इस्तेमाल करके आप अपनी ख़ूबसूरती को तो बढ़ा सकते है, और साथ ही इसका इस्तेमाल करके आप अपने अनचाहे बालों की समस्या से राहत पा सकते है, इसके लिए आप दो चम्मच हल्दी में दूध या पानी मिलाकर एक पेस्ट को तैयार करे, और अब इसे अपने अनचाहे बालों पर लगाएं, और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, परंतु यदि आपके बालों की ग्रोथ ज्यादा है, तो आप इसमें बेसन और वाट्स आदि भी मिला सकते है, इससे आपको तेजी से बालों को हटाने में मदद मिलती है, और इसे हटाने के लिए आप गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।

निम्बू और शक्कर का इस्तेमाल करें:-

निम्बू और शक्कर का इस्तेमाल करने से भी आपको शरीर पर होने वाले अनचाहे बालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, निम्बू के अंदर प्राकृतिक रूप से ब्लीचिंग एजेंट के भी गुण होते है, जो आपके बालों की रंगत को हल्का करने में मदद करते है, इस उपचार को करने के लिए आप दो चम्मच शक्कर में दो चम्मच निम्बू का रस मिलाएं, और थोड़ा सा पानी मिलाकर इसे अच्छे से मिक्स कर लें, और अब इस पेस्ट को अपने अनचाहे बालों पर लगाएं, और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, अब इसे उतारते समय मसाज करते हुए उतारे, जिससे आपको अनचाहे बालों को रिमूव करने में मदद मिलती है।

छोले के पाउडर का इस्तेमाल करें:-

छोले के पाउडर का इस्तेमाल करने से भी आप अपने अनचाहे बालों को हटा सकते है, इसके लिए आप आधा कप छोले के पाउडर में, आधा कप दूध, और एक चम्मच हल्दी को डालें, और एक पेस्ट तैयार करें, अगर आपकी स्किन ऑयली नहीं है तो आप इसमें एक चम्मच मलाई भी डाल सकती है, अब इसे उस दिशा में लगाएं जिस तरफ आपके बालों की ग्रोथ है, और उसके बाद आधे घंटे तक इसे लगे रहने दे, और उसके बाद अपने हाथो पर थोड़ा सा पानी लेकर मसाज करें, और उसके बाद गुनगुने पानी की मदद से अपनी स्किन को अच्छे से साफ़ करें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपको अनचाहे बाल को हटाने की समस्या से निजात मिलता है।

आलू और दाल का इस्तेमाल करें:-

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इस उपचार को करने के लिए आप रात को मुंग दाल कर भिगो कर रख दे, और सुबह उसमे से पानी को निकाल कर दाल को मिक्सी में पीस लें, अब एक कप आलू का रस, एक कप पीसी हुई मूंग दाल, एक चम्मच शहद, और चार चम्मच निम्बू का रस दाल कर एक पेस्ट तैयार करे, और अब इसे अपने अनचाहे बालों पर लगाएं, और 15 से 20 मिनट तक लगे रहने दें, और उसके बाद मसाज करते हुए पानी से धो लें, ऐसा करने से भी आपको अनचाहे बालों की समस्या से राहत मिलता है।

अंडे से बने मास्क का इस्तेमाल करें:-

अंडे की सफेदी के इस्तेमाल से भी आप अपने अनचाहे बालों की समस्या से निजात पा सकते है, इसके लिए आप एक अंडे को फोड़ कर उसके तरल भाग में एक चम्मच शक्कर, और आधा चम्मच कॉर्नफ्लोर अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट तैयार करे, अंडे के इस्तेमाल से आपकी स्किन ड्राई होती है, और साथ ही इसके कारण अनचाहे बालों की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है। और अच्छे से सूखने के बाद ये बिलकुल उस मास्क की तरह होगा, जैसा की फेस मास्क होता है, अब धीरे धीरे इसे निकालें, ऐसा करने से आपके अनचाहे बालभी साथ ही निकल जायेंगे।

केले और ओटस का इस्तेमाल करें:-

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केले और ओटस के मिक्सचर का इस्तेमाल करने से भी आपको अपने शरीर पर होने वाले अनचाहे बाल की समस्या से राहत मिलती है, इसके लिए आप एक केले को अच्छे से पीस लें, और उसमे ओटस को अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट तैयार करे, और अब इस पेस्ट को अपने अनचाहे बालों पर अच्छे से लगाएं, और मसाज करें, उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, और फिर सूखने के बाद ठन्डे पानी की मदद से धो दें, ऐसा करने से आपको अपने अनचाहे बालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

अनचाहे बालों को हटाने के गलत तरीके:-

  • कई लोग अनचाहे बालों को हटाने के लिए रेज़र का इस्तेमाल करते है, जो की बिलकुल गलत होता है, ऐसा करने से आपको इन्फेक्शन हो सकता है, और साथ ही आपको इसके कारण आपके बालों की ग्रोथ भी पहले से ज्यादा हो जाती है, और बाल भी बहुत हार्ड आते है।
  • आज कल इलेक्ट्रोल्य्सिस, लेज़र ट्रीटमेंट की मदद से भी आपके अनचाहे बालों को रिमूव कर दिया जाता है, परंतु ये तरीके काफी महँगे भी होते है, और इसके कारण आपको शारीरिक तौर पर भी नुक्सान होता है।
  • आज कल मार्किट में हेयर रिमूव करने की कई क्रीम भी आती है, परंतु इसके कारण आपके बाल तो रिमूव हो जाते है परंतु आपकी स्किन ब्लैक होने लगती है, और बालों की ग्रोथ भी ज्यादा आती है।

तो ये कुछ तरीके है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने शरीर के अनचाहे हेयर को रिमूव कर सकते है, और प्राकृतिक तरीके होने के साथ ये आपको नुक्सान भी नहीं पहुँचाते है, और आपके अनचाहे बालों की समस्या को भी खत्म कर देते है, यदि आप भी इस समस्या से परेशान है, तो इस समस्या से राहत के लिए आप भी इन में से किसी भी तरीके का इस्तेमाल दो से तीन महीने तक करने पर अनचाहे बालों की समस्या से बहुत समय के लिए राहत पा सकते है।

मेनोपॉज़ के शुरूआती लक्षण क्या होते हैं?

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महिला अपने जीवन में अपने शरीर में बहुत से बदलावों का अनुभव करती है। चाहे वो फिर पहली बार पीरियड्स का आना हो, ब्रेस्ट साइज में बदलाव आना हो, महिला का प्रेग्नेंट होना हो, मेनोपॉज़ आदि। तो आज हम इस आर्टिकल में महिला में मेनोपॉज़ के बदलाव को लेकर कुछ बातें करेंगे। मेनोपॉज़ एक ऐसी अवस्था होती है जिसमे महिला को पीरियड्स आना बंद हो जाता है। महिलाओं की जब उम्र चालीस से पेंतालिस हो जाती है तो महिला मेनोपॉज़ की स्थिति से गुजर सकती है। लेकिन आज कल गलत जीवनशैली के कारण चालीस की उम्र से पहले ही महिलाएं मेनोपॉज़ का शिकार हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की मेनोपॉज़ क्या होता है और इसके क्या लक्षण होते हैं।

मेनोपॉज़ (रजोनिवृत्ति) क्या होता है?

जब महिला को पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं तो उस स्थिति को रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज़ कहा जाता है। रजोनिवृत्ति का मतलब महिला की प्रजनन क्षमता का अंत होना होता है। क्योंकि इसके बाद महिला के अंडाशय में एस्ट्रोजन व् प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन व् अंडे बनने बंद हो जाते हैं। मेनोपॉज़ एक दम से महिलाओं में नहीं होता है। बल्कि मेनोपॉज़ होने से पहले इसके कुछ लक्षण बॉडी में महसूस होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की रजोनिवृत्ति होने से पहले बॉडी में कौन से लक्षण महसूस होते हैं।

मेनोपॉज़ के लक्षण है पीरियड्स समय पर नहीं आना

  • यदि पहले आपको पीरियड्स समय पर आते थे लेकिन अब समय पर नहीं आ रहे हैं।
  • पीरियड्स दो से तीन या चार महीने के अंतराल में आ रहे हैं।
  • तो समझ जाइये की हो सकता आपको रजोनिवृत्ति की शुरुआत हो रही है।

नींद से जुडी समस्या

  • यदि आपको नींद से जुडी समस्या हो या तो बहुत ज्यादा नींद लेने की इच्छा हो या फिर नींद में कमी आ रही हो।
  • तो यह भी मेनोपॉज़ का ही एक शुरूआती लक्षण हो सकता है।

मेनोपॉज़ के लक्षण है गर्मी अधिक लगना

  • यदि महिला अपनी बॉडी का तापमान अधिक महसूस कर रही हो।
  • या फिर महिला को बहुत अधिक गर्मी महसूस हो तो ये भी मेनोपॉज़ का लक्षण होता है।

मूड स्विंग्स

  • मूड में अचानक से होने वाले बदलाव मेनोपॉज़ के लक्षण होते हैं।
  • ऐसे में उम्र के बढ़ने के साथ यदि मूड स्विंग्स की परेशानी होती है तो यह मेनोपॉज़ के लक्षण हो सकते हैं।

प्राइवेट पार्ट में सूखापन

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को प्राइवेट पार्ट में सूखेपन की समस्या अधिक होती है।
  • तो यह भी रजोनिवृत्ति का लक्षण हो सकता है।
  • क्योंकि रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन हॉर्मोन का उत्पादन कम होने लगता है।
  • जिसके कारण प्राइवेट पार्ट में सूखेपन की समस्या हो सकती है।

मेनोपॉज़ के लक्षण है यूरिन इन्फेक्शन

  • यूरिन इन्फेक्शन की परेशानी का अधिक रहना भी मेनोपॉज़ का लक्षण हो सकता है।
  • और इस परेशानी के होने का कारण भी बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन के उत्पादन में कमी का होना हो सकता है।

यादाश्त कमजोर होने की समस्या

  • यदि महिला को उम्र बढ़ने के साथ भूलने की समस्या अधिक रहती है।
  • तो यह भी मेनोपॉज़ का ही लक्षण हो सकता है।
  • और इसका कारण रजोनिवृत्ति के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं।

सम्बन्ध बनाने की इच्छा में कमी

  • यदि उम्र बढ़ने के साथ महिला की सम्बन्ध बनाने की इच्छा में कमी आने लगती है।
  • और सम्बन्ध बनाते समय यदि महिला को परेशानी होने लगती है, महिला सम्बन्ध बनाते समय रूचि नहीं दिखाती है तो यह भी रजोनिवृत्ति का लक्षण हो सकता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो मेनोपॉज़ से पहले बॉडी में महसूस हो सकते है। यदि आपकी उम्र बढ़ने के साथ आपको भी बॉडी में यह लक्षण महसूस हो रहे हैं तो यह रजोनिवृत्ति का लक्षण हो सकता है।

पूरी, कचौड़ी और भठूरे खाने से नुकसान प्रेगनेंसी में

प्रेगनेंसी के इस अमूल्य समय में बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। इन सभी बदलावों के अतिरिक्त हमे अपने खाने पीने, पहनने ओढ़ने और सोने जागने की आदतों को भी बदलना पड़ता है। खासतौर पर खाने की आदतों में इतना बदलाव आ जाता जैसे जमीन और आसमान।

पहले जिस समोसे, पूरी, कचौड़ी और भठूरे को हम बिना सोंचे ही अपने मन से खा लिए करते थे अब गर्भावस्था के बाद ऐसा करना संभव नहीं है। इस दौरान सभी चीजों को खाने से पहले उसके साइड इफ़ेक्ट के बारे में जानना पड़ता है। हो सकता है कई बार हमे इन सभी चीजों को खाने की क्रेविंग भी हो। परन्तु अपने शिशु की अच्छी सेहत के लिए हमे अपनी क्रेविंग को बिना इन्हे खाये ही शांत करना होगा।

हमारे इंडियन त्योहारों के दिन घर में पूरी, कचौड़ी या भटूरे ना बने ऐसा तो हो ही नहीं सकता। पर यह सब प्रदार्थ डीप फ्राई करके बनाये जाते है। डीप फ्राई करके बनाया गया भोजन खाने में तो बहुत स्वादिष्ट होता है परन्तु सेहतमंद नहीं होता है। इस तरह के भोजन के नियमित इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान डीप फ्राई भोजन माँ और शिशु दोनों के लिए हानिकारक होता है। आज हम जानेंगे गर्भवती महिला को पूरी, कचौड़ी और भठूरे खाने से क्या नुक्सान पहुंच सकता है।

ओबेसिटी

गर्भावस्था के दौरान वेट बढ़ना अच्छा होता है। परन्तु वेट भी सही तरीके से बढ़ना चाहिए जिससे शिशु और माँ को भरपूर विटामिन्स और प्रोटीन मिले। प्रेगनेंसी में सही वेट का बढ़ना भी जरुरी होता है किस महिला का कितना वेट बढ़ना चाहिए यह बात महिला की हाइट पर निर्भर करती है। जरुरत से ज्यादा वेट नुकसानदेह होता है।

डीप फ्राई भोजन से आपका वेट बहुत तेजी से बढ़ता है परन्तु उस भोजन से आपको मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व ना के बराबर ही मिलते है। एक्सेस में वेट के बढ़ने को ही ओबेसिटी कहते है। प्रेगनेंसी के दौरान ओबेसिटी होने से सी सेक्शन डिलीवरी के चांस ज्यादा बढ़ जाते है। इसके अतिरिक्त हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट से संबंधित बीमारियां और डायबिटीज आदि जैसे बिमारियां भी लग सकती है। इसीलिए गर्भावस्था में पूरी, कचौड़ी और छोले भठूरे जैसे भोजन को ना कहे।

कोलेस्ट्रॉल

डीप फ्राई भोजन में कोलेस्ट्रॉल की अत्यधिक मात्रा पायी जाती है। गर्भावस्था में इन प्रदार्थो के सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल बहुत तेजी से बढ़ने लगता है अगर इस पर रोक ना लगाई जाए तो हमारी आर्टरीज में ब्लड का सर्कुलेशन रुक जाता है जिस कारण हार्ट अटैक या दौरा पड़ने के चांस बढ़ जाते है।

इसके अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने के कारण गर्भावस्था में उठने और बैठने में भी तकलीफ होने लगती है। और हम एक्टिव नहीं रह पाते जिस कारण शिशु भी एक्टिव नहीं होता है।

पाचन शक्ति

अत्यधिक तेल और डीप फ्राई भोजन पचाना आसान काम नहीं होता। इसके नियमित सेवन से पेट में गैस, दर्द, कब्ज आदि जैसी समस्या खड़ी हो जाती है। प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय के आकर बढ़ने से हमारी पाचन क्रिया पहले से धीमे काम करने लगती है ऐसे में तले हुए भोजन के इस्तेमाल से पाचन क्रिया पर और भी असर पड़ता है

अगर गर्भावस्था के दौरान भोजन से संबंधित अपनी आदतों को ना बदले तो पेट से जुड़ी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

नुट्रिशन की कमी

गर्भवस्था में जरुरी होता है के कम भोजन में हमे ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्व मिले। जिससे शिशु की ग्रोथ अच्छे से हो सके। परन्तु अगर पूरी, कचौड़ी और भठूरे की बात की जाए तो यह हमारा पेट तो भर देते है परन्तु इनमे नुट्रिएंट्स बिलकुल ना के बराबर होते है।

यह भोजन सिर्फ हमारे मुँह के स्वाद को संतुष्ट कर सकता है पर हमारे शरीर की जरूरतों को नहीं पूरा करता है। गर्भावस्था के दौरान नूरट्रीएंट्स तत्वों की कमी होने से डिलीवरी के समय बहुत से परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त शिशु की ग्रोथ भी रुक जाती है। जरुरी है के हम ऐसे भोजन का सेवन करें जो हमारे शरीर को सभी जरुरी पोषक तत्व प्रदान करे।

जहरीला तेल

जब बार बार एक तेल को गर्म कर उसमे भोजन पकाया जाता है तो उसमे बहुत से रसायनिक बदलाव होते है जिस कारण वही खाने वाला तेल जहरीली गैस छोड़ता है। और इसी तेल में जो भोजन डीप फ्राई होकर बनता है तो वह भी किसी जहर से कम नहीं होता है। गर्भावस्था में बाजार में बनी पूरी, कचौड़ी और भठूरे का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि बाजार वाले तेल लगातार गर्म करते रहते है जिससे वह पूरी तरीके से जहर का काम करने लगता है।

देखिये वीडियो में गर्भवती महिला को क्यों नहीं खाने चाहिए पूरी कचौरी छोले भटूरे समोसे इत्यादि।