Home Blog Page 221

उम्र कम दिखाने के लिए ऐसे बांधे बाल

Hairstyle Tips to Look Younger : बालों से महिलाओं की खूबसूरती झलकती है, शायद इसीलिए महिलाएं अपने बालों को लेकर काफी सेंसिटिव रहती है। बालों को लेकर वे जरा भी लापरवाही नहीं बरतना चाहती। फिर चाहे वो उनकी साफ़ सफाई को लेकर हो या उनकी केयर को लेकर। 30 की उम्र तक सभी अपने बालो को खूब सजा कर रखती है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ न जाने क्यों उनका ये शौक लगभग खत्म सा हो जाता है।

हो सकता है, महिलाओं को ऐसा लगता है की “उम्र बढ़ने के बाद बालों में कोई स्टाइल नहीं बनाया जा सकता या किसी भी हेयर स्टाइल को क्यों न अपना लें हमारी उम्र साफ़-साफ दिख जाएगी?” जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है बालों को स्त्रियों का गहना माना जाता है इसलिए उम्र कोई भी हो बालों की देखरेख और उनके बांधने के स्टाइल में परिवर्तन करते रहना चाहिए। khule baal

बालों को लेकर सभी के मन में ये ख्याल जरूर आता है की बालों को किस तरह बांधे की उनकी उम्र कम दिखे? शायद आप नहीं जानती लेकिन कुछ तरीके है जिनके हिसाब से बाल बाँधने से उम्र 10 साल छोटी लगने लगती है। यहाँ हम आपको कुछ ऐसे ही बाल बांधने के तरीको के बारे में बता रहे हैं

उम्र कम दिखाने के लिए बालों को इस तरह से बांधे :

बालों को बाँधने का तरीका काफी हद तक आपकी उम्र को प्रभावित करता है इसलिए बालों को हमेशा सही ढंग से बाँधना चाहिए जिसे उम्र कम दिखे। एक बात और बालों को कभी फैलाकर नहीं रखना चाहिए, इससे उम्र ज्यादा दिखती है क्योंकि बाल फैले रहते है। इसलिए बालों को कभी पूरी तरह खोलकर न रखें।

बालों में बेबी कट करवाएं : Get A Baby Cutbaby cut

उम्र कम दिखाने के लिए आप बालों में बेबी कट भी करवा सकती हैं। ये कट बालों को घना दिखाने के साथ-साथ फेस के चौड़ेपन को भी कम दिखाने में मदद करता है। इसकी मदद से आपकी उम्र काफी हद तक कम दिखती है। इससे आपके फेस का लुक तो बदलता ही है साथ-साथ आपकी पर्सनालिटी भी बदलती है। इसके लिए आप अपने साइड के बालों को कटवा सकती है।

साइड की मांग निकालें : Side Partitionside partition

अपनी उम्र को कम दिखाने के लिए अपने बालों में हमेशा साइड की मांग निकालनी चाहिए। क्योंकि इस तरह बाल बनाने से फेस का कुछ हिस्सा ढक जाता है जो लोगों का ध्यान चेहरे से हटाकर बालों की तरफ ले जाता है। इसके अलावा इस तरह बाल बनाने से बालों का स्टाइल भी बदल जाता है जिससे आपके लुक में भी परिवर्तन आता है।

आगे से ट्विस्ट करके पीछे बांधे : Twist and Tucktwisted hair

अपनी उम्र कम दिखाने के लिए पुरे बाल खुले करने की बजाए आगे के थोड़े बाल लेकर उन्हें दो भागों में बांटकर ट्विस्ट करें। हलके से ट्विस्ट करके दोनों तरफ के बालों को पीछे की तरफ ले जाएं और उन्हें बांध दें। इन्हे आप केवल पिनअप करके या पीछे की तरफ ढीली चुटिया बनाकर रख सकती है बस ध्यान रखना की उन दोनों ट्विस्ट की हुई लेयर्स को बालो में पिनअप किया गया हो।

फ्रेंच बनाएं : Front Frenchfront french

उम्र को कम दिखाने के लिए आप अपने आगे के बालों में फ्रेंच भी बना सकती हैं। ये काफी आसान है और इस हेयर स्टाइल को आप खुद भी बना सकती हैं। इसके लिए पहले आगे के बालों को दो हिस्सों में बांट लें। अब जिस तरह फ्रेंच बनाई जाती है उसी तरह दोनों तरफ के बालों में फ्रेंच बना लें। और पीछे तक पहुंचकर उन्हें पिनअप कर लें।

बालों को हाईलाइट करवाएं : Highlight Your Hairshighlight hair

आजकल ये स्टाइल काफी फैशन में है। जिसमे पुरे बालों को नहीं बल्कि बालों के कुछ हिस्से को कलर या हाईलाइट कर दिया जाता है। जिससे वो हिस्सा दूर से चमकने पर भी दिखाई पड़ने लगता है। कहने को यह एक विदेशी तकनीक है लेकिन यहाँ भी इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है। हाईलाइट करवाने से लोगों का ध्यान आपके चेहरे की जगह आपके बालों की ओर आकर्षित होता है। अगर आप भी चाहती है की आपकी उम्र कम दिखे तो आप इस तरीके का इस्तेमाल कर सकती हैं।

मेस्सी ब्रैड या बन बनाएं : Messy Bun or Braidmessy bun

अगर आपके बाल थोड़े हल्के है और आप उनके साथ भी हेयर स्टाइल बनाना चाहती हैं तो उसके लिए आप मेस्सी ब्रैड या बन बना सकती हैं। ये बालों को हैवी दिखाने के साथ-साथ अच्छा लुक भी देता है। इस तरह के हेयर स्टाइल बनाकर भी आप अपनी उम्र को 10 साल तक छोटा कर सकती हैं। ये स्टाइल काफी इजी है जिन्हे आप खुद भी बना सकती हैं। इसलिए अगली बार हेयर स्टाइल बनाते समय अपनी उम्र को दोष ना दें और बाल बांधने के इन तरीकों से खुद को छोटा व् कम उम्र का दिखा सकती हैं।

क्या खाने से नोर्मल डिलीवरी होती है

क्या खाने से नोर्मल डिलीवरी होती है, नोर्मल डिलीवरी के लिए अपनाएँ यह टिप्स, सामान्य प्रसव के लिए खाएं यह आहार, अगर आप भी चाहती हैं नोर्मल डिलीवरी तो यह खाएं, Food for Normal Delivery

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही सुखद अहसास होता है और इस दौरान महिला का मन बहुत ही परेशान भी होता है। क्योंकि उसके मन में तरह तरह के सवाल उथल पुथल मचा रहे होते हैं। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए क्या सही है क्या गलत, क्या खान पान होना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए, शिशु का गर्भ में विकास कैसे हो रहा है, शिशु स्वस्थ है या नहीं, शिशु गर्भ में कब हलचल करेगा, प्रेगनेंसी के समय हो रहे रहे बॉडी में बदलाव के बारे में, साथ ही महिला की डिलीवरी कैसे होगी क्या नोर्मल होगी या सिजेरियन, आदि। और ऐसा भी हो सकता है की प्रेगनेंसी का पूरा समय महिला स्वस्थ रहे और डिलीवरी के दौरान किसी परेशानी के आने के कारण महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़े।

ऐसे सवालों का उठना सही है लेकिन इनके कारण महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए। बल्कि प्रेगनेंसी के अनुभव को एन्जॉय करना चाहिए। साथ ही जो महिलाएं डिलीवरी को लेकर परेशान होती है उन्हें भी परेशान नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब गर्भ से शिशु के गर्भ से बाहर आने का समय होता है तो अपने आप ही पता चल जाता है की शिशु का जन्म किस प्रक्रिया से होगा। लेकिन फिर भी ज्यादातर महिलाएं चाहती है की उनकी डिलीवरी नोर्मल हो, क्योंकि सिजेरियन की बजाय नोर्मल डिलीवरी के बाद माँ और शिशु दोनों ही फायदा मिलता है। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे आहार बताने जा रहे हैं जिनके सेवन से आपको नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

आयरन युक्त आहार

नोर्मल डिलीवरी के लिए महिला के स्वस्थ रहने के साथ बॉडी में ब्लड की मात्रा का भरपूर होना भी बहुत जरुरी होता है। और यदि महिला में खून की कमी होती है तो इसके कारण डिलीवरी के दौरान महिला को परेशानी भी हो सकती है। इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आयरन युक्त आहार जैसे की हरी सब्जियों, अनार, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। इसमें आयरन के साथ, फोलिक एसिड, फोलेट, आदि भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो महिला के नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करते है।

डेरी प्रोडक्ट्स

प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नेशियम, जिनक आदि से भरपूर डेरी प्रोडक्ट्स का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। इससे न केवल महिला को स्वस्थ रहने में बल्कि शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। और गर्भ शिशु और गर्भवती महिला का स्वस्थ रहना नोर्मल डिलीवरी के लिए बहुत जरुरी होता है।

अंडे

अंडे में प्रोटीन, फैट के साथ कोलिन नामक तत्व मौजूद होता है, जो ने केवल शिशु के मानसिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद करता है। बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को जितनी ऊर्जा की जरुरत होती है उसका 25% भी देता है, जो को महिला और शिशु दोनों को फिट रखने में मदद करता है। इसीलिए अंडे को नोर्मल डिलीवरी के लिए एक बेहतरीन स्त्रोत माना जाता है।

कम वसा वाला मीट

आयरन की मात्रा से भरपूर कम वसा वाला मीट भी नोर्मल डिलीवरी में मदद करता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को आयरन की मात्रा भरपूर चाहिए होती है जो की कम वसा वाले मीट में भरपूर होती है।

ब्रोकली

विटामिन बी 9, विटामिन सी, कैल्शियम, फाइबर, व् अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर ब्रोकली का सेवन करने से भी नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाते हैं। क्योंकि इसके सेवन से महिला को डिलीवरी से पहले होने वाले सभी संक्रमण से बचाव करने में मदद मिलती है।

दालें और फलियां

प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फोलेट, फाइबर आदि से भरपूर दालें और फलियों का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करता है। और महिला प्रेगनेंसी के दौरान जितना स्वस्थ रहती है उतना ही महिला के नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाते है।

संतरा

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ संतरे का सेवन करने से महिला और शिशु दोनों को ही संक्रमण से सुरक्षित रहने में भी मदद मिलती है। जिससे की महिला स्वस्थ रहती है और डिलीवरी के दौरान महिला को किसी भी तरह की परेशानी नहीं आती है।

केला

कमजोरी, थकान, महसूस होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। ऐसे में केला गर्भवती महिला के लिए ऊर्जा के स्त्रोत का काम करता है, जिससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। और महिला को केले का सेवन नियमित नाश्ते में करना चाहिए ताकि महिला सारा दिन ऊर्जा से भरपूर रहे और प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहे, और प्रसव के दौरान भी किसी तरह की परेशानी न हो।

नोर्मल डिलीवरी के लिए अन्य टिप्स

  • नोर्मल डिलीवरी के लिए महिला का स्वस्थ होना सबसे ज्यादा जरुरी होता है, इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान शारीरिक व् मानसिक रूप से अपने आप को स्वस्थ रखना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला और शिशु दोनों स्वस्थ रह सकें, और दोनों को भरपूर पोषण मिले।
  • गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में रहता है, जिससे शिशु को ऊर्जा मिलती है, और बच्चा जितनी अधिक मूवमेंट करता है उतना ज्यादा महिला के नोर्मल डिलीवरी के चांस होते हैं, और इसके लिए महिला को चाहिए की उसके शरीर में पानी की कमी न हो इसीलिए महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • तनाव मुक्त रहना भी आपके नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाता है।
  • सारा दिन आराम करना ही प्रेगनेंसी का मतलब नहीं होता है, बल्कि नोर्मल डिलीवरी के लिए महिला को हल्का व्यायाम, वॉक आदि करते रहना चाहिए।

तो यह हैं कुछ आहार और कुछ टिप्स जिनकी मदद से आपके नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको एक बात का और ध्यान रखना चाहिए की नोर्मल डिलीवरी के चक्कर में आपको अपने शरीर पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भ में शिशु और गर्भवती महिला दोनों को परेशानी हो सकती है। और समय पर अपनी जांच भी जरूर करवानी चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली किसी भी तरह की परेशानी से आपको बचाव करने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी से बचने के टिप्स

प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी से बचने के टिप्स, गर्भवती महिला को हाई बीपी से बचने के टिप्स, प्रेगनेंसी में हाई बीपी को ऐसे करे कण्ट्रोल, हाई बीपी को कण्ट्रोल करने के टिप्स, Tips to control high blood pressure during Pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, ऐसे में किसी भी समस्या का ज्यादा बढ़ना गर्भवती महिला के साथ शिशु के लिए भी समस्या खड़ी कर सकता है। कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी की समस्या हो जाती है और इसका बढ़ना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में इससे बचने के लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी से बचने के कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

वजन रखें नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान महिला के वजन का बढ़ना आम बात होती है, लेकिन यदि वजन ज्यादा तेजी से बढे तो यह परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपने वजन पर कण्ट्रोल करना चाहिए। इसके लिए डाइट नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने खान पान को समय से लेना चाहिए, भरपूर आराम करना चाहिए, आदि।

नमक का सेवन अधिक न करे

यदि आपको पहले से ही हाई बीपी की समस्या है या प्रेगनेंसी के दौरान आपका बीपी हाई रहने लग गया है तो आपको खाने में नमक का सेवन कम करना चाहिए। क्योंकि नमक का अधिक सेवन आपकी परेशानी को बढ़ा सकता है, यदि आप चाहे तो नोर्मल नमक की बजाय सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

तेलीय व् मसालेदार आहार

मक्खन, घी, ज्यादा तेज मसाले, मसालेदार आहार, तेल, जंक फ़ूड, बाहर का खाना, डिब्बाबंद प्रोडक्ट्स आदि से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इनके सेवन से भी आपको हाई बीपी की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए प्रेगनेंसी के दौरान इनसे भी परहेज करना चाहिए।

व्यायाम करें

हल्का फुल्का व्यायाम भी प्रेगनेंसी के दौरान करने से आपको फायदा मिलता है। इससे आपकी रक्तचाप को सामान्य रहने में मदद मिलती है, साथ ही बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होता है, और आपको वजन बढ़ने जैसी समस्या से छुटकारा मिलने के साथ रिलैक्स महसूस करने में मदद मिलती है, व्यायाम नहीं तो वॉक नियमित जरूर करनी चाहिए।

नशे का सेवन न करें

प्रेगनेंसी के दौरान धूम्रपान, शराब व् अन्य किसी भी तरह का सेवन बहुत नुकसानदायक होता है। इसके सेवन से न केवल महिला को हाई बीपी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है बल्कि इससे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

भरपूर आराम लें

प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा भाग दौड़ भी आपको हाई बीपी से ग्रसित कर सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंसी के दौरान भरपूर आराम करें, किसी काम को करने में थकान का अनुभव हो तो पहले आराम करें बाद में काम करें, साथ ही नींद भरपूर लें, इससे प्रेगनेंसी के दौरान आपको हाई बीपी की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

खान पान का ध्यान रखें

गर्भवती महिला यदि अपने खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखती है, तो प्रेगनेंसी के समय गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला हरी सब्जियों, फलों, दालों, पेय पदार्थ आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए, ऐसा करने से महिला को हाई बीपी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तनाव न लें

प्रेग्नेंट महिला का तनाव लेना भी प्रेगनेंसी के दौरान मुश्किलों को बढ़ा सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए, की प्रेगनेंसी के दौरान जितना हो सके महिला खुश रहने की कोशिश करे, और तनाव से राहत पाने के सबसे आसान तरीका होता है की प्रेगनेंसी के दौरान दिन में थोड़ा समय निकाल कर आप मधुर संगीत सुने।

योगासन व् मैडिटेशन

हाई बीपी की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान निजात पाने के लिए योगासन व् मैडिटेशन भी एक बेहतरीन उपाय है। योगा व् मैडिटेशन करने से हाई बीपी से आराम के साथ आपको तनाव जैसी समस्या से भी राहत मिलती है, जिससे आपको प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

पोटैशियम व् मैग्नीशियम से भरपूर आहार

प्रेग्नेंसी के दौरान हाई बीपी की समस्या से बचने के लिए महिला को पोटैशियम व् मैग्नीशियम से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए जैसे की केला, खजूर, आदि। इससे भी आपके ब्लड प्रैशर को नोर्मल रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान कभी भी आपको हाई बीपी की परेशानी हो तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। और घर में या आस पास क्लिनिक आदि में जाकर बीपी जरूर चेक करवाना चाहिए, और यादो डॉक्टर इसके लिए कोई दवाई बताता है तो नियमित रूप से उसका सेवन करना चाहिए।

कपड़े ख़रीदते समय दुकानदार की बातों में ना आएँ, अपनी अक़्ल लगाएँ!

अगर आप एक महिला हैं तो आपने अक्सर इन दो समस्याओं का सामना किया होगा – एक तो जब कभी बाहर जाना हो तो कपड़े क्या पहने, समझ नहीं आता और दूसरा जब आप ख़रीदारी करके घर आती हैं तो नए कपड़े रखे कहाँ, वो पता नहीं चलता, क्यूँकि अलमारी में जगह ही नहीं होती है, वो पहले से भरी पड़ी होती है। ख़ैर ये तो रही मज़ाक़ की बात, पर हक़ीक़त यही है कि महिलायें शॉपिंग करते बहुत सी चीज़ें बिना सोचे समझे ख़रीद लाती हैं। ख़रीदारी करना महिलाओं का पसंदीदा काम कहा जाए तो कुछ ग़लत नहीं होगा और उसपर अगर कपड़ों की ख़रीदारी की बात हो तो फिर तो क्या कहने। कपड़ों की ख़रीदारी के नाम से ही उनका चेहरा खिल जाता है। महिलाओं के सजने सवरने के शौक़ के बारे में तो सब जानते ही हैं, ऐसे में नए नए परिधान ख़रीदना और पहनना उनका शौक़ ही नहीं आदत भी बन जाती है। अपनी इस आदत के चलते वो धड़ाधड़ ख़रीदारी में लगी रहती हैं। दुकानदार भी उनकी इस आदत को जल्दी भाँप जाते हैं व ख़ूब फ़ायदा उठाते हैं।
दुकानदार तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं अपना सामान बेचने के लिए। जैसे –

डिस्काउंट स्कीम –

आजकल डिस्काउंट स्कीम बहुत ज़्यादा फ़ैशन में है। डिस्काउंट के नाम पर कुछ भी बेच दो, लोग आँखें बंद करके ख़रीद लेते हैं। किसी मॉल में चले जाओ, हर शोरूम में 20% off से लेकर 80-80% off तक लिखा रहता है और लोग डिस्काउंट के लालच में आकर कुछ भी ख़रीद लेते हैं। कई बार तो डिस्काउंट के चक्कर में लोग कपड़े की गुणवत्ता तक पर ध्यान नहीं देते हैं और जब कुछ ही दिन में कपड़ा ख़राब हो जाता है, तब पछताते हैं।

एक के साथ एक फ़्री

ये डिस्काउंट स्कीम से भी अधिक लुभावना नया हथकंडा है, जो कि दुकान हो या मॉल, सब जगह ख़ूब भुनाया जा रहा है। ख़रीदारी करते वक़्त स्कीम देखकर ग्राहक सोचते ही नहीं कि वो तो एक ही चीज़ ख़रीदने आए थे, एक के साथ एक फ़्री लेकर क्या करेंगे। और एक चीज़ के दाम में दो मिल रही हैं, इस उत्साह में कई बार चीज़ की गुणवत्ता की ओर ध्यान भी नहीं जाता और घटिया क्वॉलिटी की चीज़ लेकर आ जाते हैं, जो की फ़्री होकर भी महँगी पड़ती है।

माँग को लेकर भ्रम पैदा करना

बहुत से दुकानदार ग्राहकों के मन में ये कहकर भ्रम पैदा कर देते हैं कि मैडम ये साड़ी/ड्रेस तो बहुत डिमांड में है। गिने चुने पीस आए थे, सब बिक गए, बस ये आख़िरी है। इतने कम दाम में आपको ये ड्रेस नहीं मिलेगा, बस ये तो आप ले ही लो। ऐसे में ग्राहक को लगता है कि ये दुकानदार तो हमारा ही फ़ायदा सोच रहा है और वो ड्रेस ख़रीद लेते हैं।
उत्पाद की उपलब्धता को लेकर भ्रम फैलाना – कुछ दुकानदार ये कहकर भ्रम फैलाते हैं कि इस उत्पाद की पीछे से सप्लाई नहीं आ रही है, बस यही गिने चुने पीस बचे हैं, आप अभी ले लो, वरना बाद में नहीं मिलेगा। इस तरह की अफ़वाहों पर विश्वास करके ग्राहक बिना ज़रूरत ही चीज़ें ख़रीद लेते हैं।

गर्भावस्था में खुश रहने से क्या होता है और रोने से क्या होता है?

गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए और उसके गर्भ में पल रही नन्ही सी जान के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए गर्भवती महिला हो हमेशा यही सलाह दी जाती है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपने खान पान का ध्यान रखे, खुश रहे, और अपनी प्रेगनेंसी को एन्जॉय करें। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की गर्भवती महिला हमेशा खुश ही रहे। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी के अंदर होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग होना आम बात होती है।

ऐसे में कुछ महिलाएं कई बार भावनात्मक रूप से कमजोर होने के कारण रोने लगती है, चिड़चिड़ाहट महिला को अधिक महसूस होती है, आदि। लेकिन कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी को बहुत अच्छे से एन्जॉय करती है और हमेशा खुश रहती है। लेकिन क्या आप जानती हैं की प्रेगनेंसी के दौरान आप खुश रहती हैं या रोती हैं इस बात का असर भी गर्भ में शिशु पर पड़ता है। जी हाँ, यह बिल्कुल सच है, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं की प्रेग्नेंट महिला यदि खुश रहती है या रोती है तो इससे बच्चे पर क्या असर पड़ता है।

प्रेग्नेंट महिला के खुश रहने से बच्चे पर क्या असर पड़ता है?

जिस तरह महिला अच्छे खान पान का सेवन करती है तो इससे बच्चे का शारीरिक विकास बेहतर होता है। उसी तरह यदि प्रेग्नेंट महिला खुश रहती है तो इससे गर्भ में बच्चा भी खुश रहता हैं, महिला यदि अपनी सोच को सकारात्मक रखती है तो इससे बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है, साथ ही खुश रहने से गर्भवती महिला प्रेगनेंसी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को भी कम कर सकती है। जिससे माँ और बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला के रोने से बच्चे पर क्या असर पड़ता है?

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान छोटी छोटी बातों पर रोती है, नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी होने देती है, तनाव लेती है, आदि। तो इससे गर्भ में बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसा करने से शिशु जे जन्म के बाद आपका शिशु भी बहुत ज्यादा रोता है, महिला के अधिक तनाव लेने व् रोने से गर्भ में शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है, प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स भी बढ़ती है। ऐसे में महिला को इससे बचने के लिए नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए और जिस चीज से आपको ख़ुशी मिलती है उस काम को प्रेगनेंसी में करना चाहिए। ताकि माँ और बच्चे दोनों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के रोने व् खुश होने से बच्चे पर क्या असर पड़ता है उससे जुड़े कुछ अहम बातें, ऐसे में कुछ भी हो प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हमेशा खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में शरीफा खाने के फायदे

शरीफा एक फल होता है जिसे सीताफल भी कहा जाता है और इंग्लिश में इस फल को कस्टर्ड एप्पल कहा जाता है। शरीफा पोषक तत्वों से भरपूर होता है और जब बात प्रेगनेंसी की हो तो इसमें मौजूद पोषक तत्व केवल प्रेग्नेंट महिला के लिए ही नहीं बल्कि भ्रूण के लिए भी फायदेमंद होते हैं। गर्भवती महिला यदि शरीफा का सेवन करती है तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ फिट रहने में भी मदद मिलती है। और गर्भवती महिला को एक नहीं बल्कि रोजाना कम से कम दो शरीफा का सेवन करने की सलग दी जाती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में शरीफा खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट्स

शरीफ में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। साथ ही गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करते हैं। जिससे माँ व् बच्चे दोनों प्रेगनेंसी के दौरान बिमारियों व् संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

कॉपर

कस्टर्ड एप्पल में कॉपर मौजूद होता है जो प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत जरुरी पोषक तत्व होता है क्योंकि यह गर्भवती महिला को गर्भपात जैसी परेशानी से सुरक्षित रखने में मदद करता है।

फाइबर

गर्भावस्था के दौरान पाचन क्रिया धीमी पड़ने के कारण महिला को पेट सम्बन्धी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन शरीफा का सेवन करने से महिला को इन परेशानियों से निजात पाने में मदद मिल सकती है। क्योंकि शरीफा में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है जिससे अपच, कब्ज़ जैसी परेशानियों से महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

विटामिन बी 6

सीताफल में विटामिन बी 6 मौजूद होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से बचने के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिला शरीफा का सेवन जरूर करना चाहिए।

पोटैशियम

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर का ऊपर नीचे होना बहुत आम बात होती है लेकिन यह परेशानी यदि बढ़ जाये तो परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में शरीफा का सेवन महिला के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि शरीफा में पोटैशियम और मैग्नीशियम मौजूद होता है जो गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

मैग्नीशियम

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाएं तनाव में आ जाती हैं जो यह माँ और बच्चे के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। ऐसे में शरीफा का सेवन करने से महिला को मैग्नीशियम मिलता है जो हदय को स्वस्थ रखने और मांसपशियों को आराम पहुंचाने के लिए बहुत फायदेमंद होता है। जिसे प्रेग्नेंट महिला को तनाव जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

ऊर्जा मिलती है

शरीफा का सेवन करने से गर्भवती महिला की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला ऊर्जा से भरपूर रहती है।

डिलीवरी के समय मिलता है आराम

ऐसा माना जाता है की यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी में नियमित रूप से शरीफा का सेवन करती है तो ऐसा करने से महिला को डिलीवरी के समय होने वाले दर्द की परेशानी को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में शिशु को भी फिट रखने में मदद मिलती है।

बच्चे के लिए है फायदेमंद

शरीफा पोषक तत्वों की खान होता है और शरीफा में मौजूद विटामिन्स व् मिनरल्स गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास करने में और शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

कब नहीं खाएं गर्भवती महिला शरीफा

यदि महिला का वजन ज्यादा हो, महिला को डाइबिटीज़ की समस्या हो, ठंडी चीजे खाने से महिला को एलर्जी हो, तो इन केस में महिला शरीफा का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही शरीफा के बीजों का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।

तो प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को मिलने वाले इन बेहतरीन फायदों के लिए गर्भवती महिला को शरीफा का सेवन जरूर करना चाहिए। गर्भवती महिला रोजाना दो या तीन शरीफा का सेवन कर सकती है।

Benefits of eating Custard Apple in Pregnancy

आँखों में जलन होने के कारण

Ankhon Me Jalan 

आंखों में जलन होने के कारण, Ankho me jalan hone ke kya karan hai, Eyes Problem, आंखों में जलन और लालिमा के कारण, आंखों से जुडी समस्याएं

व्यक्ति का शरीर बहुत नाजुक और सेंसिटिव होता है, इसलिए शरीर में हुई छोटी सी बिमारी भी व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन जाती है। फिर चाहे वो खांसी हो या मामूली जुखाम। ऐसी ही एक समस्या है आंखों में जलन होना। वास्तव में आंखों में जलन होना कोई बीमारी नहीं है यह एक आम समस्या है जो किसी के भी साथ हो सकती है। बच्चा हो या बड़ा, बूढ़ा हो या जवान किसी भी उम्र के व्यक्ति के साथ हो सकती है।

वैसे तो ये बीमारी अधिकतर इन्फेक्शन या आंखों पर तनाव के कारण होती है लेकिन कई बार इसके होने की वजह कुछ और कारण भी होते है जिन्हे सामान्य जीवन में पहचानना काफी मुश्किल होता है। हो न हो, आप भी देर रात तक टीवी, लैपटॉप या स्मार्टफोन आदि का इस्तेमाल करते होंगे।

लेकिन क्या आप जानते है की आपके द्वारा की जाने वाली ये गतिविधियां आपकी आंखों को कितना नुकसान पहुंचाती है। जी हां, इन सभी इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं में से निकलने वाली वेव्स आंखों के लिए बेहद खतरनाक होती है। ऐसे में अगर आप देर रात तक इनका प्रयोग करते है तो इसका सीधा प्रभाव आपकी आंखों पर पड़ता है। जिसके कारण आंखों में जलन और लालीपन की समस्या आने लगती है।

कई बार ये समस्या प्रदुषण और धूल मिटटी आदि के कारण भी उत्पन्न हो जाती है। ऐसी में अधिकतर लोग बाजार में मौजूद दवाओं का इस्तेमाल करते है। परन्तु सभी के लिए इन दवाओं को खरीद पाना संभव नहीं। इसीलिए यहाँ हम आपको आंखों में जलन होने के कारण बताने जा रहे है जिन्हें जानकर आप सावधानियां बरत सकते है और इस समस्या को हमेशा के लिए दूर कर सकते है।

आंखों में जलन होने के क्या-क्या कारण है?

1. कंजंक्टिवाइटिस :आँखों में जलन

यह आंखों से जुडी एक बिमारी है जिसमें आई बाल के ऊपर की पतली झिल्ली पर सूजन आ जाती है। और इस सूजन के कारण आंखों में लालिमा भी आ जाती है। वैसे तो यह एक आम बीमारी है लेकिन ध्यान न देने पर समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इस समस्या के कारण अक्सर आंखों में जलन होती है।

2. Uveitis :

ये आंख के रेटिना और उसके सफ़ेद हिस्से के बीच की परत में सूजन होने की वजह से होता है। इस समस्या के होने पर व्यक्ति को धुंधला दिखने लगता है साथ ही आंखों में दर्द और दूर की नजर कमजोर हो जाती है साथ ही आंखों में जलन भी होने लगती है।

3. कॉर्नियल अलसर :

इस समस्या के होने पर आंखों के कॉर्निया पर प्रभाव पड़ता है। जो कांटेक्ट लेंस के प्रयोग या इन्फेक्शन की वजह से होता है। इस समस्या के होने पर आंखों से पानी बहना, दर्द, सूजन आदि की समस्या होती है। इस बीमारी के होने के कारण भी आंखों में जलन और लालिमा आती है।

4. ड्राई आई सिंड्रोम :

आँखों को सुचारु रूप से कार्य करने के लिए लुब्रिकेशन की जरुरत होती है जो हमारे आंसू होते है और जब आँखे पर्याप्त मात्रा में आसूं नहीं बना पाती है तो ये समस्या होती है। कई बार आसूं भी इस समस्या का कारण बन जाते है। इस बीमारी के होने के बाद अक्सर आंखों में जलन होने लगती है।

5. अधिक टीवी देखना :

बहुत अधिक देर तक टीवी देखने से भी आंखों में जलन होने लगती है। क्योंकि देर रात तकल टीवी देखने से आंखों पर प्रेशर पड़ता है जिसे आंखों की मांसपेशियां खींचने लगती है जिससे आंखों में जलन और लालीपन की समस्या होने लगती है। इसके अलावा अधिक देर तक कंप्यूटर पर काम करने से भी आंखों में जलन होने लगती है।

6. बार-बार छूना :

बहुत से लोगों की यह आदत होती है की वे बार-बार अपनी आंखों को छूते है। जबकि ऐसा करने से आंखों में इन्फेक्शन हो सकता है। इसके अलावा घटिया क्वालिटी वाले मेकअप का इस्तेमाल करने से भी आंखों में जलन हो सकती है।

7. कांटेक्ट लेंस :

लंबे समय तक कांटेक्ट लेंस पहनना और उसे पहनने के दौरान सही देखभाल नहीं करने से आंखों में जलन हो सकती है। इतना ही नहीं इससे आंखों में फंगल इन्फेक्शन भी हो सकता है।

8. हर्पीज :

यह एक तरह का वायरल इन्फेक्शन है जो टाइप 1 हर्पीज सिंप्लेक्स वायरस की वजह से होता है जो कॉर्निया के लिए बहुत नुकसानदेह होता है। इसमें आंखे लाल हो जाती है इसी के साथ सूजन, दर्द और पाने बहने की समस्या भी हो सकती है।

9. एलर्जी :

बहुत से लोगों को धूल, केमिकल और कांटेक्ट लेंस से एलर्जी होती है जिसके कारण भी आंखों में जलन और लालिमा आ जाती है।

10. आई ड्राप :

बहुत से लोग अपने नजरे ठीक करने या किसी अन्य कारण की वजह से आई ड्राप का इस्तेमाल करते है, जो कई बार उनके लिए परेशानी का कारण बन जाती है। जी हां, लम्बे समय तक आई ड्राप का इस्तेमाल करने से भी आंखों में जलन हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान वजन अधिक होने के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत से बदलाव का अनुभव करना पड़ता है, यह बदलाव मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से देखने को मिलते है। और शारीरिक रूप में आने वाले बदलाव में से एक गर्भवती महिला का वजन बढ़ना होता है। प्रेगनेंसी के समय महिला का वजन बढ़ना बहुत अच्छी बात होती है। लेकिन यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ता है, तो यह गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचने के लिए और शिशु को स्वस्थ रखने के लिए महिला के वजन का नियंत्रित रहना बहुत जरुरी होता है।

और वजन को नियंत्रित रखने के लिए डाइट करना या बहुत अधिक व्यायाम करना गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसीलिए वजन को नियंत्रित रखने के लिए पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, छोटे छोटे मील लेने चाहिए, थोड़ा बहुत योगा व् व्यायाम करना चाहिए, नींद भरपूर लेनी चाहिए, आदि। ऐसा करने से वजन को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है। और यदि आपका वजन प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ज्यादा बढ़ता है तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से भी बात करनी चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान अधिक वजन बढ़ने के क्या नुकसान होते है।

गर्भपात का खतरा

प्रेगनेंसी के दौरान वजन अधिक होने के कारण महिला के गर्भपात होने के चांस दुगुना हो जाता है। ऐसे में महिला के लिए शिशु के बेहतर विकास के लिए वजन को प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही नियंत्रित रखना बहुत जरुरी होता है।

आलस बढ़ जाता है

अधिक मोटापा महिला के शरीर में ऊर्जा की कमी कर देता है, जिसके कारण महिला एक्टिव रहने की बजाय आलस करने लगती है। और अधिक आलस भी बॉडी के लिए नुकसानदायक होता है साथ ही शरीर में बीमारियों को आमंत्रित कर सकता है।

प्री एक्‍लेम्पसिया

गर्भवती महिला का वजन अधिक बढ़ने के कारण प्री एक्‍लेम्पसिया जैसी समस्या हो सकती है। जिसके कारण महिला का ब्लड प्रैशर भी कण्ट्रोल में नहीं रहता है। और ब्लड प्रैशर का बढ़ना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी में बढ़ती है परेशानी

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बहुत सी शारीरिक परेशानियां जैसे की थकान, कमजोरी, सूजन, बॉडी में दर्द आदि हो सकती है। और प्रेगनेंसी के समय यदि महिला का वजन यदि अधिक बढ़ता है तो इसके कारण इन परेशानियों का सामना अधिक बढ़ सकता है।

अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान होती है परेशानी

अधिक वजन होने के कारण कई बार अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाती है, और शिशु को यदि कोई रोग है तो उसके बारे में भी पता करने में परेशानी का अनुभव हो सकता है।

डिलीवरी के दौरान परेशानी

प्रसव का समय किसी भी महिला के लिए बहुत ही परेशानी भरा होता है, ऐसे में वजन अधिक होने के कारण डिलीवरी के दौरान परेशानी का अनुभव और भी ज्यादा हो सकता है।

सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस

अधिक वजन होने के कारण महिला के नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बहुत ही कम होते हैं। ऐसे में महिला के सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस बहुत ज्यादा होते है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान अधिक वजन बढ़ने के नुकसान, इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने के लिए और उसके बेहतर विकास के लिए वजन को नियंत्रित रखना चाहिए।

मिसकैरिज से बचने के लिए ये चीजे भूलकर भी न खाएं

प्रेगनेंसी के समय गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ रहे इसके लिए महिला को जरुरत होती है की वो अच्छे से अपनी केयर करें, जैसे की चलने फिरने में सावधानी बरतें, भारी सामान उठाने से परहेज करें, पेट के भार कोई काम न करें, ज्यादा झुकने से बचें, अपने शरीर पर अधिक दबाव न डालें, खान पान का ध्यान रखें, ताकि आपके शिशु को कोई परेशानी न हो, और आप गर्भपात के खतरे से बचें रहें, खासकर प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने सावधानी बरतनी बहुत जरुरी होती है, क्योंकि इस समय गर्भपात के चांस सबसे अधिक होते है, इसके अलावा प्रेगनेंसी में खान पान महिला और शिशु को स्वस्थ रखता हैं, वहीँ कुछ ऐसी चीजे भी हैं जो महिला को नहीं खानी चाहिए क्योंकि उनसे गर्भपात यानी मिसकैरिज का खतरा बना रहता हैं तो आइये जानते हैं की वो चीजे कौन सी हैं जिनका सेवन महिला को नहीं करना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी में इन चीजों को खाएं! बच्चा हष्ट पुष्ट और बुद्धिमान होगा

अनार के सेवन से परहेज करें:-

pomegranete-juice

अनार के बीजो का इस्तेमाल गर्भपात के लिए किया जाता है, इसीलिए महिलाओ को जितना हो सकें प्रेगनेंसी के समय अनार खाने से परहेज करना चाहिए, कई महिलाएं इसे शरीर में खून की वृद्धि के लिए सेवन करती हैं, लेकिन पुराने जमाने से ही इसका इस्तेमाल प्राकृतिक रूप से गर्भपात के लिए किया जाता है।

ग्रीन टी का सेवन न करें:-

यदि आप प्रेगनेंसी में अधिक ग्रीन टी का सेवन करती हैं तो इससे आपको फर्टिलिटी से जुडी समस्या खड़ी हो जाती है, जिसके कारण आपके गर्भ के गिरने का डर रहता है, इसीलिए जितना हो प्रेगनेंसी के दौरान इससे परहेज करें।

एस्पिरिन से परहेज करें:-

एस्‍पिरिन के सेवन से भी प्रेगनेंसी में परहेज करना चाहिए और इसके साथ जितना हो लौंग, कॉफी, पार्सले, अदरक और अंजीर भी न खाएं, इसे खाने से आपका मासिक धर्म शुरु होने का खतरा रहता है, जिससे आपको गर्भपात हो सकता है।

इन्हें भी पढ़ें:- गर्भावस्था में उल्टी और गैस की समस्या से निजात पाने के टिप्स

पपीते का सेवन न करें:-

papaya-leaf

पपीते में विटामिन सी की मात्रा अधिक होने के साथ पेपाइन नामक एसिड होता है जो कि प्राकृतिक रूप से मिसकैरेज करवाता है, इसीलिए डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी के दौरान इसके लिए मनाही करते हैं, और यदि आप मिसकैरिज की समस्या से बचना चाहते हैं तो जितना हो सकें इनके सेवन से परहेज रखें।

विटामिन सी युक्त पदार्थो का अधिक सेवन न करें:-

विटामिन सी एक प्राकृतिक कंट्रासेप्‍टिव मानी जाती है जिसमे शुद्ध एस्‍कॉर्बिक एसिड मौजूद होता है जो कि आपके शरीर में प्रोजेस्‍ट्रॉन के प्रोडक्‍शन को रोक कर एस्ट्रोजन के प्रोडक्‍शन को उत्‍तेजित कर देता है जिसके कारण अंडाशय में अंडा अपनी जगह नहीं बना पाता है, और साथ ही विटामिन सी इन हार्मोन्‍स को कंट्रोल कर के शरीर में हार्मोन इंबैलेंस पैदा करता है जिससे मिसकैरेज होने के चांस बढ़ जाते हैं।

अनानास का सेवन न करें:-

अनानास में भी पपीते के ही तरह एक तत्व होता है जो की मिसकैरिज के चांस को बढ़ाने के लिए असरदार होता है, और वो होता है bromelain नामक एंजाइम, जो कि सर्विक्‍स को मुलायम बना कर गर्भपात करवा देता है, इससे महिलाओ के स्वास्थ्य पर तो कोई बुरा असर नहीं पड़ता है, लेकिन इसके सेवन से गर्भपात होने का खतरा बना रहता है इसीलिए प्रेग्नेंट महिलाओ को जितना हो सकें इससे परहेज रखना चाहिए।

गरम तासीर वाली वाली चीजों से परहेज रखें:-

गरम तासीर वाली चीजों का सेवन करने से भी आपके गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते हैं, इसीलिए जितना हो सकें, ड्राई फ्रूट्स जैसे अखरोट, पिस्ता, बादाम, छुहारे, आदि से परहेज रखना चाहिए इलायची का सेवन भी नहीं करना चाहिए, यहां तक की जितना हो गरम पानी से नहाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि गरम पानी से अधिक नहाने से भी गर्भपात के चांस बढ़ जाते हैं।

कटहल का सेवन भी नहीं करना चाहिए:-

प्रेगनेंसी के समय कटहल का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमे भी ऐसे तत्व होते है जो की गर्भपात करवाने में सहायक होते है, इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान इस सब्ज़ी से परहेज करें यदि आप इसका सेवन करते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भपात से बचने के लिए ध्यान देने योग्य अन्य बातें:-

  • महिला को ख़ुश रहना चाहिए और तनाव नहीं लेना चाहिए क्योंकि तनाव से गर्भपात के चांस बढ़ने के साथ शिशु के विकास पर भी असर पड़ता है।
  • अधिक भागादौड़ी व् शारीरिक श्रम नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे स्पॉटिंग का खतरा बना रहता है।
  • पेट बल या पेट पर जिसके कारण दबाव पड़े ऐसे किसी भी काम को नहीं करना चाहिए।
  • खान पान में बिलकुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
  • नशीले पदार्थो और बिना डॉक्टर के परामर्श के किसी भी तरह की दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अधिक सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए, और कुछ भी काम करते हुए यदि आपको थकावट महसूस हो तो बैठकर आराम करना चाहिए न की अपने शरीर पर दबाव डालना चाहिए इसे आपको परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।
  • अधिक कड़ा व्यायाम भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे भी आपको परेशानी हो सकती है।
  • नींद को भरपूर मात्रा में लेना चाहिए क्योंकि इससे आपको स्वस्थ रहने के साथ शिशु के अच्छे से विकास होने में भी मदद मिलती है।
  • इसके अलावा समय समय पर डॉक्टर से अपना चेकअप जरूर करवाना चाहिए ताकि आपको प्रेगनेंसी के समय आने वाली परेशानियों से बचाने में मदद मिल सकें।

तो ये हैं कुछ आहार जिनका सेवन महिला को प्रेगनेंसी के समय नहीं करना चाहिए क्योंकि इनसे महिला के गर्भपात के चांस बढ़ जाते हैं, और महिला को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, इसीलिए महिला और शिशु दोनों को ही स्वस्थ रखने के लिए महिला को इन टिप्स पर ध्यान देंना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- गर्भावस्था के दिनों में पैरो में सूजन है? ये है उपाय

गर्मियों में प्राइवेट पार्ट में जलन और संक्रमण के कारण और उनका समाधान

Private Part Infection

गर्मियों में महिलाओं में प्राइवेट पार्ट्स में जलन और संक्रमण होना आम बात है। गुप्तांगो में पसीना, दाद, दुर्गन्ध, छोटे छोटे लाल रंग के दाने निकल आना, खुजली होना, घमोरियां, बड़े बड़े चकत्ते हो जाना, मूत्र विसर्जन करने पर दर्द और जलन होना, सूजन आदि तरह की समस्याये होना संक्रमण की समस्या है।इसकी वजह है की स्त्रियाँ गुप्तांगो को अच्छी तरह से साफ़ नही करती है। उस तरफ कम ध्यान देती है। कई बार उनको ऐसा करने में शर्म और संकोच होता है जिसकी वजह से समस्या हो जाती है। आइये जानते है की इसके क्या कारण होते है। एक सर्वे के मुताबिक़ देश की 90 % महिलाये इस समस्या से जूझती है।

प्राइवेट पार्ट में जलन और संक्रमण के निम्न कारण हो सकते है

  • गुप्त रोगों के कारण
  • गंदी तौलिया या कपड़े को यूस करने से
  • रोज साफ़ सफाई न करने से
  • जादा चीनी खाने से योनी में खमीर की मात्रा बढ़ जाती है
  • कमजोर इम्यून सिस्टम होने से
  • एलर्जी के कारण खुजली कर देने से
  • गुप्तांगो पर कोई क्रीम न लगाने के कारण
  • यौन सम्बन्ध बनाने के बाद सफाई पर ध्यान न देना
  • सही समय पर माहवारी न होने से
  • योनी का PH लेवल असंतुलित होने से
  • अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक लेने से
  • खमीर संक्रमण के कारण (Vaginal Yeast Infection)

प्राइवेट पार्ट में जलन और संक्रमण की समस्या के उपाय/ घरेलू नुस्खे-

साफ़ तौलिये का इस्तेमाल करे- प्राइवेट पार्ट्स को पोछने के लिए हमेशा धुली हुई साफ़ तौलिया का इस्तेमाल करना चाहिये। किसी दूसरे की तौलिया का इस्तेमाल नही करना चाहिये। साथ ही उसे धोकर प्रेस करना चाहिये। गंदी तौलिया इस्तेमाल करने से फंगल संक्रमण होने का खतरा रहता है।

हमेशा सूती (Cotton) अंडरवियर पहने- सूती अंडरवियर इस्तेमाल करना अच्छा रहेगा। सूती कपड़ा गुप्तांगो के लिए हमेशा ही अच्छा माना जाता है। इसमें हवा अच्छी तरह से पास हो जाती है। इसलिए आप सिर्फ हमेशा सूती अंडरवियर का इस्तेमाल करे। बार बार त्वचा से रगड़ होने पर भी कोई नुकसान नही होगा।

टॉयलेट और यौन सम्बन्ध बनाने के बाद हमेशा योनी को धोइये- ऐसा करने की सलाह डॉक्टर हमेशा देते है। मूत्र, वीर्य या कोई और चिपचिपा पदार्थ योनी पर लगा होने से योनी में संक्रमण का बहुत खतरा रहता है। सफाई आवश्यक है।

रोज सेनेटरी पैड बदले- माहवारी होने पर एक ही पैड को जादा समय तक इस्तेमाल नही करना चाहिये। 4 5 घंटों के बाद इसे आप बदल दे। इससे संक्रमण से बचाव होगा। खुजली की समस्या भी नही होगी।

नीम का प्रयोग-  आप नीभ के पत्तो को पानी में उबालकर अपनी योनी vagina को दिन में दो बार उस पानी से धोइये। आप इस पानी को दिन में 2 बार पी भी सकते है। इससे भी आपको लाभ होगा। आप नीम साबुन का भी इस्तेमाल कर सकते है।

नारियल तेल का इस्तेमाल करे- आप दिन में 2 से 3 बार नारियल तेल अपनी योनी में लगाये। इससे रूखापन खत्म होगा। इसको लगाने से जलन और संक्रमण कम होगा।

तुलसी की पत्तियां- आप प्राइवेट पार्ट में जलन, खुलजी होने की स्तिथि में कुछ तुलसी की पत्तियां धोकर साफ़ पानी में उबाले और ठंडा होने पर पी ले। इस नुस्खे से भी आपको फायदा होगा।

दही का इस्तेमाल करे- योनी में जलन होने पर आप दही का इस्तेमाल कर सकते है। इसमें गुड बैक्टीरिया होता है जो योनी में मौजूद बैड बैक्टीरिया और खमीर को मारता है। आप दिन में 2 बार योनी पर दही का लेप करे, फिर 1 घंटे बाद इसे अच्छे से धो दे। ऐसा करने पर बहुत लाभ होता है। याद रहे की मीठा दही आपको इस्तिमाल नही करना है। सिर्फ सादा इस्तेमाल करे। आप अपने भोजन में दही का इस्तेमाल करे। रोज 1 कप दही का सेवन करे। इससे बहुत फायदा होगा।

लहसुन – प्राइवेट अंगो में इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है। आप लहसुन की 2 3 कलियाँ रोज खाली पेट गर्म पानी के साथ खाये। इससे आपको लाभ होगा। लहुसन में एंटीबायोटिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते है। इससे योनी में संक्रमण खत्म होता है। आप 4 से 6 लहसुन की कलियों का छिलका उतार दे और उसको पीसकर पेस्ट बना ले। फिर उसे योनी पर लगा ले।

एंटी फंगल क्रीम- मेडिकल स्टोर में उपलब्ध किसी भी क्रीम को आप डॉक्टर की सलाह पर इस्तेमाल कर सकते है। इससे आपको काफी फायदा होगा।

सेब का सिरका- आपकी योनी के PH लेवल को संतुलित करता है। इसमें प्राकृतिक एंजाइम होता है जिसमे एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते है। आप इसे दिन में दो बार एक चिम्मच सिरका और एक चिम्मच शहद गर्म पानी में मिलाकर पिये। इससे आपको योनी में जलन, खुजली और बर्निंग में आराम मिलेगा। आप 2 कप गर्म पानी में 2 बड़ा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर योनी को धो भी सकते है। इससे भी आपको आराम होगा।

बर्फ का प्रयोग करे- बहुत अधिक परेशानी होने पर आप फ्रिज में मौजूद बर्फ के टुकड़ों को अपनी वैजाईना Vagina पर रखे। ऐसा करने से आपको तुरंत लाभ होगा। आपको ठंडक महूसस होगी और जलन में तुरंत फायदा मालुम पड़ेगा।

नमक के पानी से स्नान करे- जैसा आपको पता ही होगा की नमक सभी प्रकार के फंगस, कवक, बैड बैक्टीरिया को मारता है। आप नमक के पानी से स्नान करके अपनी योनी को अच्छे से धोये। एक बाल्टी गुनगुने पानी में आधा कप नमक मिला ले और अच्छी तरह से मिलाने के बाद आप स्नान करे। खुजली और जलन से तुरंत लाभ मिलेगा।

गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह ले- अगर उपर बताये उपाय करने के बाद भी आपकी समस्या हल नही होती है तो फौरन डॉक्टर से सम्पर्क करे। अपनी समस्या के बारे में खुलकर डॉक्टर/ चर्म रोग विशेषज्ञ को बताये। किसी तरह की कोई बात न छुपाये क्यूंकि कोई बात छुपाना आपके लिए ही नुकसानदायक हो सकता है। यहाँ सवाल है आपके अपने स्वास्थ्य का।

निष्कर्ष: आपके शरीर की रक्षा करना आपकी जिम्मेदारी है क्यूंकि अगर आपके शरीर में कोई समस्या या रोग होगा तो दिक्कत आपको ही होगी और झेलना आपको ही पड़ेगा। इसलिए प्राइवेट भागो में जलन और संक्रमण होने की स्तिथि में उपर बताये नुस्खो का इस्तेमाल करे।

आपको हमारा लेख कैसा लगा। अगर आपको हमारा लेख अच्छा लगा है तो आप इसे अपने दोस्तों को भी पढने को कहे और शेयर करे।