प्रेगनेंसी के दौरान हर कोई गर्भवती महिला को एक दिन में दो से तीन गिलास दूध पीने की सलाह देता हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी डॉक्टर्स और बाकी सभी लोग दूध पीने की सलाह दे रहे होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं की प्रेगनेंसी में दूध पीना नुकसानदायक हो सकता है। अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे हो सकता है?
तो इसका जवाब है की वैसे तो प्रेगनेंसी में दूध पीना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि दूध में वो सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए फायदेमंद होते हैं।लेकिन यदि कुछ बातों का ध्यान न रखा जाये, गलत तरीके से दूध का सेवन किया जाये तो दूध पीना नुकसानदायक हो सकता है। जैसे की:
गलत समय पर दूध पीना
दूध को गलत समय पर पीने से आपको नुकसान हो सकता है जैसे की यदि आप खाना खा रही है और साथ में ही दूध पी लेती है। तो ऐसे में दूध को पचाना मुश्किल होता है जिससे आपको परेशानी होती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए खाने के साथ दूध पीने से बचना चाहिए। खाना खाने और दूध पीने में कम से कम एक से दो घंटे का अंतराल रखना चाहिए।
ज्यादा ठंडा दूध
प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा ठंडा दूध पीने से भी नुकसान हो सकता है। क्योंकि इसके कारण जुखाम, खांसी, कॉफ़ी जैसी परेशानी होती है। साथ ही इसके कारण बॉडी के तापमान में बदलाव आने के कारण शिशु को भी दिक्कत होती है।
बहुत ज्यादा गर्म दूध
प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ज्यादा गर्म चीजों का सेवन करने की मनाही होती है। क्योंकि इसके कारण गर्भाशय में संकुचन बढ़ने के कारण गर्भपात, ब्लीडिंग जैसी परेशानी का खतरा होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला बहुत ज्यादा गर्म दूध का सेवन करती है तो इसके कारण भी महिला को नुकसान होता है।
जरुरत से ज्यादा दूध
एक दिन में दो से तीन गिलास दूध गर्भवती महिला पी सकती है। लेकिन जरुरत से ज्यादा दूध का सेवन यदि महिला करती है तो इसके कारण महिला को दूध पचाने में दिक्कत होती है। साथ ही अपच, कब्ज़, पेट में गैस जैसी परेशानी भी हो जाती है।’
गलत चीज के साथ दूध पीना
कुछ ऐसी चीजें होती है जिनके साथ दूध पीने की मनाही होती है। जैसे की फलों के बाद दूध पीना, खट्टी चीजों के सेवन के बाद दूध पीना, नमकीन चीजों के साथ दूध पीना, चिकन मछली खाने के बाद दूध पीना, आदि। यदि प्रेग्नेंट महिला इन चीजों के बाद दूध का सेवन करती है तो महिला को परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
कच्चा दूध पीना
गर्भवती महिला को कच्चा दूध भी कभी नहीं पीना चाहिए क्योंकि इसमें हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होता है। जो गर्भवती महिला के लिए हानिकारक होने के साथ गर्भ में शिशु के लिए भी नुकसानदायक होता है।
कभी कभी दूध पीना
यदि गर्भवती महिला कभी कभी दूध पीती है तो इसके कारण भी महिला को परेशानी होती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दैरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनके कारण पाचन क्रिया धीमा पड़ जाती है। ऐसे में कभी कभी दूध पीने के कारण महिला को दूध को पचाने में दिक्कत हो सकती है।
प्योर दूध नहीं पीना
वैसे आज कल ऐसी कोई चीज नहीं है जिसमे मिलावट नहीं है। लेकिन प्रेगनेंसी वो समय होता है जहां आपको हर एक चीज में सतर्कता बरतने की जरुरत होती है क्योंकि इस समय होने वाली दिक्कत का असर महिला के साथ बच्चे पर भी पड़ता है। ऐसे में यदि महिला प्योर दूध का सेवन नहीं करती है तो इसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। और प्योर दूध के लिए आपको गाय या भैंस जिसका दूध आप पीती है वहां जाकर खुद सामने खड़े होकर निकलवायें ताकि आपको तसल्ली हो सके।
तो यह हैं कुछ गलत तरीके जिनका दूध पीते समय आपको ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि आप भी इस तरीके से दूध पीती हैं तो आपको दूध पीने का फायदा होने की जगह नुकसान होता है। और गर्भवती महिला के लिए तो बहुत जरुरी है की वो इन सभी बातों का ध्यान रखें की क्योंकि इसके कारण केवल महिला को ही नहीं बल्कि बच्चे को भी दिक्कत होती है।
प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला को केवल अपना ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में भी ध्यान रखना होता है। और इसके लिए सबसे जरुरी होता है की महिला अपने स्वास्थ्य को बेहतर रखे, क्योंकि जितना महिला स्वस्थ रहती है उतना ही गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने और उसके बेहतर विकास में मदद मिलती है। और यदि आप गर्भवती है और सर्दियों का मौसम शुरू हो रहा है तब आपको अपना ज्यादा ध्यान देने की जरुरत होती है। क्योंकि एक तो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली दिक्क़तें ऊपर से सर्दी के मौसम में होने वाली सर्दी, खांसी, जुखाम, कफ आदि की परेशानी, ऐसे में गर्भवती महिला को ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपने पहनावे, रहन सहन, खान पान सभी चीजों का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
सर्दियों में गर्भवती महिला को क्या खाना चाहिए?
सर्दी के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए महिला को पोषक तत्वों से भरपूर कौन -कौन से आहार को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। इसका ध्यान गर्भवती महिला को जरूर रखना चाहिए, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में क्या क्या खाना चाहिए।
हरी सब्जियां
सर्दियों में हरी सब्जियां बहुत आसानी से मिल जाती है और हरी सब्जियां पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। जैसे की इसमें आयरन, फोलेट, एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो सर्दियों में इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के साथ महिला और शिशु को स्वस्थ रखने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा सर्दियों में गाजर, गोभी, मटर जैसी सब्जियां भी आसानी से मिल जाती है और प्रेगनेंसी में इनका सेवन भी फायदेमंद होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को हरी सब्जियों व् इन सभी सब्जियों का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान सर्दी के मौसम में भरपूर करना चाहिए।
सूप
सर्दी के मौसम में सूप पीना ज्यादातर लोगो को पसंद होता है ऐसे में गर्भवती महिला तरह तरह की सब्जियों का सूप बनाकर उनका सेवन कर सकती है। इससे महिला को पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मिलते हैं और महिला की जीभ के स्वाद को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
अंडे
अंडे में भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं साथ सर्दियों में अंडे खाना बहुत फायदेमंद भी हो सकता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को नियमित दो से तीन अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही अंडे का सेवन गर्भ में शिशु के दिमागी विकास को बढ़ाने में मदद करता है।
नॉन वेज
सर्दी के मौसम से बचाव, इम्युनिटी को मजबूत, गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में नॉन वेज का सेवन भी जरूर करना चाहिए। यदि महिला नॉन वेज का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को ठण्ड के मौसम में होने वाली परेशानियों से बचाव में मदद मिलती है।
ड्राई फ्रूट
ड्राई फ्रूट पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं साथ ही सर्दियों में यह बॉडी के तापमान को सही रखने और ठण्ड से बचाव करने में भी मदद करते हैं। और इसके लिए महिला बादाम, अखरोट, अंजीर, मूंगफली आदि का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है।
केसर दूध
दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है ऐसे में गर्भवती महिला को दिन में दो से तीन गिलास दूध का सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन ठण्ड के मौसम में ठण्ड से बचाव और बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा को भरपूर रखने के लिए महिला बादाम या केसर दूध का सेवन कर सकती है।
घी
सर्दियों में घी का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है न केवल यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। बल्कि गर्भवती महिला को गर्माहट प्रदान करने में भी मदद करता है जिससे ठण्ड से बचे रहने में मदद मिलती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा इसका सेवन न करें नहीं तो आपको परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए दिन में दो या तीन चम्मच घी का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। और यदि आपका वजन ज्यादा है तो भी आपको घी का सेवन नहीं करना चाहिए।
तो यह हैं कुछ आहार जो प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में जरूर खाने चाहिए ताकि गर्भवती महिला और शिशु को सर्दियों में स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
आपकी आँखे, होंठ, नाक व् चेहरे के अन्य सभी पार्ट्स खूबसूरत होते हैं। तो केवल इन्ही के खूबसूरत होने से ही आपके चेहरे की सुंदरता नहीं बढ़ती है। बल्कि आपके चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने के लिए दांतों का चमकदार होना भी जरुरी होता है। क्योंकि यदि आपका चेहरा तो बहुत सूंदर है। लेकिन जब आप मुस्कुराती है, किसी से बात करती है तो आपके पीले दांत नज़र आने पर आपके पूरे चेहरे की की ख़ूबसूरती कम हो जाती है।
क्योंकि जब आप बात करती है या मुस्कुराती है तो आपके दांतों पर सबसे पहले नज़र जाती है। इसीलिए आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए जितना आँखों की ख़ूबसूरती जरुरी होती है उतना ही ज्यादा दांतों की चमक भी जरुरी होती है। तो आइये अब ऐसे कुछ आसान नुस्खों के बारे में जानते हैं जो दांतों के पीलेपन को दूर करते हैं। और दांतों को मोतियों जैसा सूंदर व् चमकदार बनाते हैं।
निम्बू, नमक और सरसों का तेल
दांतों की चमक को बढ़ाने के यह तरीका पुराना है साथ ही असरदार भी है। इस तरिके का इस्तेमाल करने के लिए आप थोड़ा नमक, थोड़ा सरसों का तेल और थोड़ा निम्बू का रस आपस में मिक्स कर लें। अब ब्रश की मदद से दांत साफ़ करें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करने से आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा। इसके अलावा सिर्फ नीबू को दांतों पर रगड़ने या निम्बू और नमक या फिर नमक और सरसों का तेल मिलाकर दांतों पर घिसने से भी दांतों का पीलापन दूर होता है।
सेब का सिरका
आधा कप पानी लें अब उसमे पानी से आधा सेब का सिरका मिलाएं। अब इसे हिलाकर अच्छे से मिक्स करें। उसके बाद ब्रश की मदद से अपने दांतों को इस मिक्सचर से साफ करें और फिर अच्छे से कुल्ला करें। कुछ दिनों तक रोजाना इस तरीके का इस्तेमाल करें।
केले का छिलका
रोजा केले के छिलके को अंदर की तरफ से अपने दांतों पर दो से तीन मिनट के लिए रगड़ें। और उसके बाद कुल्ला करें कुछ ही दिनों में आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा।
बेकिंग सोडा
ब्रश करते समय पेस्ट के में थोड़ा सा बेकिंग सोडा मिलाएं। और उसके बाद ब्रश करें। बनाकिंग सोडा का इस्तेमाल करने से भी आपके दांतों के पीलेपन को दूर करने में मदद मिलती है। या फिर आप चाहे तो ब्रश करने के बड़ा दांतों पर बेकिंग सोडा लगाकर रगड़ें ऐसा करने से भी दांतों का पीलापन दूर होता है।
नीम
एंटी बैक्टेरियल प्रॉपर्टीज से भरपूर नीम का इस्तेमाल दांतों के लिए करने से दांतों से जुडी सभी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। रोजाना यदि आप नीम का दातुन करते हैं तो इससे दांतों को चमकदार बनाने के साथ दांतों से जुडी अन्य परेशानियों को दूर करने में भी मदद मिलती है।
संतरे का पाउडर
संतरे के छिलकों को सुखाकर उन्हें पीसकर पाउडर के रूप में तैयार कर लें। अब रोजाना ब्रश करने के बाद थोड़ा सा पाउडर लें और ब्रश से इसे अपने दांतों पर घिसें। ऐसा रोजाना करने से कुछ ही दिनों में आपके दांतों को चमकदार बनाने में मदद मिलेगी।
तुलसी के पत्ते
तुलसी के पत्तों में भी दांतों को चमकदार बनाने का गुण मौजूद होता है। इसके लिए आप थोड़े से तुलसी के पत्तों को धूप में सुखाकर पाउडर के रूप में तैयार कर लें। अब पेस्ट के साथ इस पाउडर को मिलाकर ब्रश करें। ऐसा रोजाना करने से आपके दांतों को चमकदार होने में मदद मिलती है। आप चाहे तो तुलसी के पत्तों का पाउडर और संतरे के छिलके का पाउडर मिलाकर भी ब्रश करने के बाद दांतों पर घिस सकते हैं। ऐसा करने से भी दांतों की चमक बढ़ती है।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आपके दांतों की चमक को बढ़ाने में मदद मिलती है। यदि आपको भी दांतों में पीलेपन की समस्या है तो आप भी इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके अपने दांतों की ख़ूबसूरती को बढ़ा सकते हैं।
गर्भ क्यों नहीं ठहरता है, गर्भ न ठहरने के कारण, गर्भधारण न होने के कारण, इन वजहों से नहीं ठहरता है गर्भ, Problems in getting Pregnant
महिला के लिए प्रेगनेंसी का होना जितना खास होता है उतना ही महिला परेशान तब होती है जब उसका गर्भ नहीं ठहरता है। ज्यादातर कपल शादी के एक या दो साल में फैमिली प्लान करने लगते हैं, और यदि वो अभी बच्चा नहीं चाहते हैं तो इसके लिए वो सुरक्षा का इस्तेमाल करते है ताकि महिला का गर्भ न ठहरे। लेकिन कुछ कपल ऐसे भी होते है जो अपनी फैमिली को आगे बढ़ाना चाहते हैं लेकिन महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है। ऐसे में महिलाओं के लिए यह बहुत बड़ी परेशानी का कारण होता है।
क्योंकि यदि प्रेगनेंसी होने में ज्यादा समय लगता है तो सभी के ताने सुन सुन कर महिला और परेशान रहने लगती है। लेकिन इसका इलाज आपके परेशान होने से नहीं होता है। बल्कि आपको सबसे पहले इसका कारण पता करना चाहिए की आपको प्रेगनेंसी क्यों नहीं हो रही है। क्योंकि महिला के गर्भ ठहरने का कोई एक कारण नहीं होता है, बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जब महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है। और यह कारण महिला के साथ कई बार पुरुष से जुड़ा भी हो सकता है।
गर्भ क्यों नहीं ठहरता है
गर्भ न ठहरने का कारण आपकी कोई शारीरिक समस्या, तनाव से जुडी कोई परेशानी, या गर्भाशय से जुडी कोई समस्या हो सकती है। इसके अलावा गर्भ न ठहरने के कई और भी कारण हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिला का गर्भ क्यों नहीं ठहरता है।
फैलोपियन ट्यूब से जुडी समस्या
प्रेगनेंसी के लिए फैलोपियन ट्यूब एक अहम भूमिका निभाती है क्योंकि पुरुष के शुक्राणु अंडे का निषेचन इसी ट्यूब में करते हैं। जिससे महिला का गर्भ ठहरता है लेकिन यदि फैलोपियन ट्यूब से जुडी कोई परेशानी हो तो इसके कारण महिला के गर्भ ठहरने में परेशानी हो सकती है।
उम्र अधिक होने पर
महिला के गर्भ न ठहरने का एक कारण उनकी बढ़ती उम्र भी हो सकती है। क्योंकि जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे वैसे अंडाशय में अंडे बनने कम होने लगते हैं, जिसके कारण उम्र बढ़ने के साथ महिला के गर्भ ठहरने के चांस भी कम हो सकते हैं।
आपका आहार भी हो सकता है कारण
कुछ ऐसी चीजे होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान वर्जित होती हैं क्योंकि उनके सेवन से गर्भ के गिरने का खतरा रहता है। लेकिन यदि आप उन्ही खाद्य पदार्थो का सेवन अधिक करती है जैसे की कच्चा पपीता, अनानास, अंगूर, ज्यादा गर्म तासीर वाली चीजे, कटहल, आदि। तो इसके कारण भी आपके गर्भ न ठहरने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
इनफर्टिलिटी
यह समस्या पुरुषो से जुडी हो सकती है जैसे की पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या निर्मित शुक्राणुओं की संख्या से कम हो। इसके अलावा इसका कारण यह भी हो सकता है की महिला के शुक्राणु निर्मित तो होते हो लेकिन महिला के अंडाणुओं तक नहीं पहुँच पाते हो जिसके कारण निषेचन न होने की वजह से महिला के गर्भ न ठहरने की परेशानी का अनुभव करना पड़े।
गर्भाशय से जुडी समस्या
कई बार ऐसा होता है की महिला के गर्भाशय से जुडी परेशानी के कारण गर्भ नहीं ठहर पाता है, जैसे की महिला यदि अधिक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भाशय की झिल्ली कमजोर हो जाती है, बार बार गर्भपात होने के कारण गर्भाशय से जुडी समस्या हो जाती है, या महिला डॉक्टर से बिना राय लिए ही अन्य दवाइयों का अधिक सेवन करती है तो इससे भी गर्भशय पर बुरा असर पड़ता है।
अंडो का निर्माण न होने के कारण
महिला के अंडाशय में अंडो के निर्माण में होने वाली गड़बड़ी के कारण भी महिला के गर्भ को ठहरने में समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसका कारण महिला का किसी बिमारी से ग्रसित होना हो सकता है जैसे की थायरॉयड आदि।
बेहतर सम्बन्ध न होने के कारण
यदि आप ऐसा सोचते हैं की एक बार शारीरिक रूप से आप करीब आ जाते हैं तो आपका गर्भधारण हो जाता है तो यह बिल्कुल गलत होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के लिए बेहतर सम्बन्ध और सही समय यानी ओवुलेशन पीरियड पर सम्बन्ध बनाना जरुरी होता है, जिससे आपके प्रेग्नेंट होने के चांस बढ़ जाते हैं। इसीलिए यदि आप बेहतर सम्बन्ध नहीं बनाते हैं तो इसके कारण भी महिला का गर्भधारण नहीं होता है, और इस दौरान आपको किसी भी तरह की सुरक्षा का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए।
वजन
आपका मोटापा या दुबलापन भी गर्भ न ठहरने का एक कारण हो सकता है, ऐसे में प्रेगनेंसी के लिए आपको अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए न तो आपका वजन आवश्यकता से अधिक होना चाहिए और न ही कम।
दवाइयों का सेवन
यदि आप तनाव या मानसिक परेशानी से जुडी दवाइयों का सेवन करते हैं तो इसके कारण भी आपके गर्भ को ठहरने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के लिए एक बार इसके लिए डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को गर्भ न ठहरने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको इसके लिए डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए और इसके पीछे के सही कारण का पता करना चाहिए।
विडिओ गर्भ क्यों नहीं ठहरता और गर्भधारण करने का तरीका
गर्मियों में पसीने से आने वाली बदबू के कारण बहुत से लोग परेशान रहते है, ऐसे ही इन दिनों पसीना आपके सिर में भी आता है जिसके कारण आपके बालों में से बदबू आने लग जाती है, शरीर पर इस बदबू से राहत के लिए आप परफ्यूम का इस्तेमाल कर सकते है, परन्तु बालों से आने वाली बदबू का क्या किया जाएँ? इसके लिए आपको सबसे पहले ये जानना चाहिए की बालों से बदबू आने का कारण क्या होता है? क्योंकि इस समस्या का यदि इलाज न किया जाएँ तो आपको दूसरे लोगो के सामने शर्मिंदा होना पड़ सकता है।
बालों में से बदबू का कारण सिंड्रोम होता है, और यह परेशानी केवल महिलाओ के साथ ही नहीं बल्कि पुरुषो के साथ भी होती है, इसके अलावा जिन महिलाओ का स्कैल्प ऑयली होता है उनके साथ ये परेशानी ज्यादा होती है, इसके अतिरिक्त बालों से बदबू आने के और भी कारण हो सकते है, जैसे की बालों की अच्छे से साफ़ सफाई न करना, पसीने वाले बालों को हमेशा बांधे रखना, स्कैल्प की अच्छे से साफ़ सफाई न करना, धूल मिट्टी प्रदूषण के कारण, आदि इन सब की वजह से आपके बालों में पसीना आता है, इसके अलावा कई बार महिलाएं अपने बालों को रोजाना धोती भी है, परन्तु कुछ ही देर बाद उनके बालों में से बदबू आने लग जाती है, परन्तु अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है, यदि आपको भी ये परेशानी है तो आज हम आपको इस समस्या से राहत पाने के लिए कुछ टिप्स देने जा रहे है जो आपकी इस समस्या का समाधान करेंगे।
एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करें:-
इसका इस्तेमाल करने से केवल आपके बालों की चमक ही नहीं बढ़ती है, बल्कि आपको बालों की बदबू से भी निजात मिलता है, इसके प्रयोग के लिए बालों को धोने से पांच मिनट पहले एक कप पानी में थोड़ा सा विनेगर मिलाएं, और इसे अच्छे से अपने बालों में लगाएं, उसके बाद शैम्पू से अपने बालों को धो लें, आप बालों को धोने से पहले इस तरीके का नियमित इस्तेमाल करें, ऐसा करने से आपको इसका असर खुद ही दिखाई देगा।
प्याज़ के रस का इस्तेमाल करें:-
प्याज़ आपके बालों से जुडी बहुत सी परेशानियां जैसे रुसी, बालों का झड़ना, गंजेपन की समस्या से राहत दिलाने में आपकी मदद करता है, क्योंकि इसमें एंटीसेप्टिक और एंटी फंगल गुण पाएं जाते है, इसके साथ ये आपके बालों से आने वाली बदबू की समस्या से भी राहत दिलाने में आपकी मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए प्याज़ के बीजो का रस निकाल लें, और उसके बाद उसका पेस्ट तैयार करें, फिर उसे अपने स्कैल्प और रस को बालों में अच्छे से लगाएं , और थोड़ी देर बाद शैम्पू की मदद से अच्छे से अपने बालों को धो लें, आपको फायदा मिलेगा।
निम्बू के रस का इस्तेमाल करने से आपके बालों के साथ आपकी त्वचा को भी फायदा होता है, इसके इस्तेमाल के लिए बालों को धोने से कुछ देर पहले एक कप पानी में निम्बू का रस मिलाएं, और इसे अपने बालों और स्कैल्प पर अच्छे से लगाएं, और आधे घंटे बाद अपने सिर को धो लें, हफ्ते में दो से तीन बार इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको बालों में इ आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है, इसके अलावा आप ज्यादा समय तक बालों में निम्बू का रस न लगाएं इसके कारण आपके बालों का रंग हल्का पड़ने लगता है।
बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-
बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करने से बालों की बदबू की समस्या को दूर करने के साथ आपकी ऑयली स्कैल्प की परेशानी से भी आपको निजात मिलता है, इसके प्रयोग के लिए पानी में एक चौथाई बेकिंग सोडा मिलाकर पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद इसे अपने स्कैल्प पर अच्छे से लगाएं, और हो सकें तो अपने बालों को गीला करने के बाद इसे अपने बालों में लगाएं, हफ्ते में दो से तीन बार इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको अच्छे परिणाम मिलते है।
ओलिव ऑयल का इस्तेमाल करें:-
ओलिव ऑयल से भी बालों से जुडी परेशानियों का समाधान किया जा सकता है, यदि आप अपने बालों की ओलिव ऑयल से मसाज करती है, तो इसका इस्तेमाल करने से आपको बालों में से आने वाली बदबू से निजात मिलता है, आप हफ्ते में दो से तीन बार एक रात पहले अपने बालों की अच्छे से मसाज करें और सुबह उठ कर शैम्पू से अपने बालों को धो दें आपको फायदा होगा।
सेब का इस्तेमाल करें:-
सेब के छिलके या सेब को अच्छे से पीस कर दही में मिला लें, उसके बाद इसे बालों को धोने से आधे घंटे पहले अपने स्कैल्प और बालों में लगाएं, हफ्ते में दो से तीन बार इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको जरूर फायदा होगा, साथ ही दही से आपके बालों को नमी मिलेगी जिससे बाल मुलायम हो जायेंगे।
मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करें:-
हफ्ते में दो से तीन बार मुल्तानी में मिट्टी को पीस कर दही या छाछ में मिलाकर अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और अपने स्कैल्प पर भी अपनी उँगलियों की मदद से लगाएं, दस मिनट से ज्यादा इसे बालों में न रहने दें, दस मिनट बाद अपने बालों को धो दें, इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपको बालों में आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है।
बेसन का इस्तेमाल करें:-
बेसन का इस्तेमाल दही के साथ मिलाकर करने से भी आपको बालों में आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप दही में दो चम्मच बेसन के मिला लें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने स्कैल्प और बालों में लगाएं, और दस मिनट के बाद अपने बालों को धो दें, ऐसा करने से भी आपको फायदा मिलता है, आप इस तरीके का इस्तेमाल हफ्ते में दो से तीन बार कर सकते है।
बालों से आने वाली बदबू को दूर करने के अन्य उपाय:-
सफ़ेद सिरके का इस्तेमाल बालों में करने से आपको बालों की बदबू की समस्या से राहत मिलती है।
टमाटर की प्यूरी का इस्तेमाल सप्ताह में दो से तीन बार बालों के लिए करें, और उसके बाद बालों को धो दें, आपको जरूर फायदा होगा।
पसीने वाले बालों को ज्यादा समय तक न तो बिना धोएं रहने दें, और न ही बालों को बाँध कर रखें, इससे आपके सिर में बैक्टेरिया पनपते है जिससे बालों में बदबू आती है।
जिस पानी से आप सिर धोने वाले है उसमे थोड़ा सा गुलाब जल मिला दें, इससे भी आपको फायदा मिलेगा।
बालों को धोने से थोड़ी देर पहले एलोवेरा जेल से अच्छे से अपने सिर की मसाज करें, इसके कारण भी बालों से बदबू की समस्या खत्म होती है।
मैथी दाने और चाय पत्ती को अच्छे से एक गिलास पानी में उबाले और तब तक इसे उबालते रहें जब तक की ये पानी आधा न रह जाएँ, उसके बाद इस पानी को अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और थोड़ी देर बाद बालों को धो लें, आपको फायदा होगा।
शहद और दालचीनी पाउडर को पानी में उबाल कर ठंडा करके बालों को धोने से आधा घंटा पहले अपने बालों में लगाएं, इससे भी आपके बालों की बदबू को दूर होने में मदद मिलती है।
पानी का भरपूर सेवन करें, और साथ ही अपने आहार को भी संतुलित मात्रा में लें इससे भी आपको पसीने से रहता मिलती है।
अपने बालों को धोने से पहले मसाज भी करें इससे भी आपके बालों को पोषण मिलता है जिसके कारण आपके साथ ये समस्या नहीं होती है।
तो ये कुछ तरीके है जिनका इस्तेमाल करने से आपको बालों में आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है, साथ ही आपको पसीने वाले बालों को कभी बांध कर नहीं रखना चाहिए, ज्यादा दिन अपने सिर को बिना धोएं नहीं रखना चाहिए, पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, बालों को धोने से पहले मसाज करनी चाहिए, ऐसा करने से भी आप अपने बालों से आने वाली बदबू को कम कर सकते है।
गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत ही अहम होते हैं। इसीलिए इस दौरान प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान बरती गई लापरवाही गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है। जैसे की यदि महिला किसी तरह की लापरवाही करती है तो इससे स्पॉटिंग, गर्भपात जैसी परेशानी खड़ी हो सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है क्योंकि इस दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। ऐसे में महिला को अपना दुगुना ध्यान रखने की सलाह दी जाती है है ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु दोनों को ही किसी तरह की परेशानी न हो।
प्रेगनेंसी का दूसरा और तीसरा महीना ऐसे रखें अपना ध्यान
गर्भावस्था के दूसरे और तीसरे महीने में गर्भवती महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, और इस दौरान बहुत सी बातों का ध्यान भी रखना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दूसरे और तीसरे महीने किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
फोलेट का सेवन
प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में शिशु के अंग विकसित होते हैं, ऐसे में शिशु के अंगो के बेहतर विकास के लिए फोलेट का सेवन भरपूर मात्रा करने की सलाह दी जाती है। इससे शिशु की रीढ़ की हड्डी का विकास, शरीर के अंगो का विकास, दिमाग का विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। फोलेट की भरपूर मात्रा के लिए गर्भवती महिला को हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, आदि, नट्स, बीन्स, नॉन वेज, साबुत अनाज आदि का सेवन कर सकती है।
आयरन लें
खून की कमी का होना प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिर तक परेशानी का कारण होता है। इसके कारण गर्भवती महिला को शारीरिक परेशानियां जैसे की एनीमिया, कमजोरी, थकावट आदि होने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी जैसी समस्या हो सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दूसरे तीसरे महीने के साथ पूरी प्रेगनेंसी के दौरान आयरन का भरपूर सेवन करना चाहिए।
काम करते समय बरतें सावधानी
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को काम करते समय बहुत अधिक सावधानी बरतनी पड़ती है। जैसे की भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, पेट के बल किसी काम को नहीं करना चाहिए, झुककर काम नहीं करना चाहिए, सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए और यदि सीढ़ियों का इस्तेमाल करते हैं तो आराम से करना चाहिए, आदि। क्योंकि ऐसे काम को करते समय बरती गई लापरवाही प्रेगनेंसी के दूसरे और तीसरे महीने में परेशानी का कारण बन सकता है।
दर्द को न करें अनदेखा
गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पेट में हल्के दर्द का अनुभव होना आम बात होती है। लेकिन यदि पेट में बहुत तेज दर्द का अनुभव हो, जैसे की मासिक धर्म के दौरान होता है, तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और दर्द के साथ ही ब्लीडिंग भी हो तो यह गर्भपात का लक्षण हो सकता है।
खाने पीने में सावधानी
बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में हो सकता है की गर्भवती महिला के खाने की इच्छा न हो, जीभ के स्वाद में बदलाव आएं। लेकिन फिर भी महिला को खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, खाने में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए, भूखे पेट नहीं रहना चाहिए, और थोड़ी थोड़ी देर बाद कुछ न कुछ पोषक तत्वों से भरपूर खाना चाहिए। साथ ही उन चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए जिनके सेवन से गर्भपात हो सकता है। जैसे की कच्चा पपीता, कटहल, अनानास, गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण गर्भपात हो सकता है।
तनाव
कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण परेशान हो सकती है, जिसके कारण महिलाएं तनाव में आ जाती है। लेकिन तनाव का बुरा असर गर्भवती महिला की सेहत के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर भी पड़ता है, जिसके कारण गर्भपात होने की सम्भावना बढ़ जाती है। ऐसे में महिला को इस दौरान बॉडी में होने वाले परिवर्तन के कारण परेशान नहीं होना चाहिए, क्योंकि तीन महीने के बाद धीरे धीरे परेशानियां कम होने लगती है।
एक्सरसाइज न करें
प्रेग्नेंट महिला को व्यायाम आदि से भी परहेज करना चाहिए, क्योंकि शुरूआती दिनों में बॉडी पर पड़ने वाले अधिक दबाव के कारण गर्भवती महिला को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। ज्यादा तेजी से वॉक आदि भी नहीं करना चाहिए।
नींद भरपूर लें
प्रेगनेंसी के दूसरे तीसरे महीने में बॉडी में तेजी से होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बहुत ज्यादा कमजोरी व् थकावट का अनुभव हो सकता है। और ऐसे में बॉडी को फिट रखने के लिए भरपूर आराम की सलाह दी जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला को रात की नींद के साथ दिन में भी थोड़ी देर जरूर आराम करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को आराम महसूस होने में मदद मिल सके।
सम्बन्ध में सावधानी
प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी जाती है, और जिन महिलाओं की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होती है खासकर उन्हें तो प्रेगनेंसी में नौ महीने तक मना किया जा सकता है। और यदि कपल प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में सम्बन्ध बनता है तो इसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है, ऐसे में इसे लेकर एक बार डॉक्टर से बात जरूर करनी चाहिए।
डॉक्टर की राय
प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में किन किन दवाइयों का सेवन करना है, कौन सी जांच करवाना जरुरी होता है, इसके लिए भी गर्भवती महिला को डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दूसरे और तीसरे महीने में रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु के अंगो के बेहतर विकास में मदद मिलती है।
Hindi Video : 2nd and 3rd Month of Pregnancy : Baby Development, Care, Advice, Changes in Woman
ब्लड प्रैशर की समस्या आज कल आम बात हो गई है, और यह किसी भी उम्र में आपको परेशान कर सकती है, ब्लड प्रैशर आपके शरीर में होने वाले रक्त के परिसंचरण से सम्बंधित होता है, रक्त की धमनियों में दबाव पड़बे के कारण कभी कभी आपको लो ब्लड प्रैशर की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, तो आज हम आपको आपके घर में लौ ब्लड प्रैशर से बचने के लिए आपको क्या क्या खाना चाहिए जिससे आपको इसे नार्मल रखने में मदद मिलती है, क्या आप भी लौ ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान हैं यदि हाँ तो आइये जानते हैं की इसके लिए आपको कौन कौन से खाद्य पदार्थो का सेवन करना चाहिए।
नमक का सेवन करना लौ ब्लड प्रैशर वालो के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इसमें मौजूद सोडियम आपके शरीर में ब्लड प्रैशर को बढ़ाता है, इससे बचने के लिए आप एक गिलास पानी में एक चम्मच नमक को अच्छे से मिक्स करके उसका सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।
कॉफ़ी का सेवन करें:-
कॉफ़ी भी लो बी पी की समस्या से बचने के लिए एक असरदार उपाय है परन्तु इसके सेवन से पहले जांच लेना चाहिए की आपको लो बी पी की ही समस्या है, क्योंकि हाई बी पी वालो को इसके सेवन से परहेज करना चाहिए, और लो बी पी वालो को नियमित रूप से सुबह एक गिलास कॉफ़ी का सेवन जरूर करना चाहिए।
चुकंदर के रस का सेवन करें:-
गाजर, चुकंदर को मिलाकर उसका जूस बनाकर नियमित पीने से आपको लो ब्लड प्रैशर की समस्या से निजता मिलता है, साथ ही आपके शरीर को पोषण भी मिलता है।
किशमिश का सेवन करें:-
रात भर दो चम्मच किशमिश को पानी में भिगोकर रख दें, उसके बाद सुबह उठकर इस किशमिश को खाली पेट चबाकर इसका सेवन करें, आप चाहे तो जिस पानी में आपने किशमिश भिगोई थी उस पानी का सेवन भी कर सकते है, ऐसा करने से आपको ब्लड प्रैशर की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
तुलसी का सेवन करें:-
तुलसी में मौजूद औषधीय गुण आपके ब्लड प्रैशर को नार्मल करने में आपकी मदद करते है, इसके लिए आप नियमित सुबह उठकर खाली पेट तीन या चार तुलसी के पत्तों को चबाकर उसका सेवन करें, आपको फायदा मिलेगा।
निम्बू का प्रयोग करने से भी आपको ब्लड प्रैशर की समस्या से निजात तो मिलता ही है, बल्कि साथ में आपको एनर्जी भी भरपूर मात्रा में मिलती है, इसके लिए आप एक गिलास पानी में निम्बू का रस , नमक और चीनी मिलकर उसका सेवन करें आपको फायदा होगा।
खट्टे फलों का सेवन करें:-
खट्टे फलों में मौजूद एसिड और भरपूर मात्रा में पानी आपके लौ ब्लड प्रैशर की समस्या को खत्म करने में आपकी मदद करता है, इसके लिए आपको संतरे, मौसम्बी, जैसे फलों का सेवन करना चाहिए इनके सेवन से आपके शरीर में भरपूर एनर्जी भी आती है।
लहसुन का प्रयोग करें:-
लहसुन का प्रयोग यदि आप भरपूर मात्रा में अपने खाने में करते है, तो ऐसा करने से आपके ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है, आप चाहे तो नियमित सुबह एक कली लहसुन का सेवन भी कर सकते है।
फैट फ्री मीट का सेवन करना चाहिए:-
लो ब्लड प्रैशर की समस्या से यदि आप बचना चाहते है तो आपको फैट फ्री मीट का सेवन करना चाहिए, इसके लिए आप चिकन, टर्की, और मछली का सेवन कर सकते है, पर इस बात का ध्यान रखें की मीट चर्बी वाला नहीं होना चाहिए।
हरी सब्जियों का सेवन करें:-
ताज़ी हरी सब्जियों का सेवन करने से इसमें मौजूद विटामिन और प्रोटीन आपको हाई और लो ब्लड प्रैशर की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते है, साथ ही आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी को भी पूरा करते है, और इससे आपके ब्लड प्रैशर को भी नार्मल बने रहने में मदद मिलती है।
लो ब्लड प्रैशर की समस्या से बचने के लिए अन्य खाद्य पदार्थ:-
ताजे फलों का नियमित सेवन आपके ब्लड प्रैशर को नार्मल रखने में आपकी मदद करता है।
डार्क चॉकलेट का सेवन करने से भी आपको फायदा मिलता है।
ओट्स का सेवन करने से आपको ब्लड प्रैशर को नार्मल करने में मदद मिलती है।
आपके ब्लड प्रैशर को नार्मल रखने के लिए आपको साबुत अनाज का भी सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
ड्राई फ्रूट्स में मौजूद पोषक तत्व आपको ब्लड प्रैशर को नार्मल करने में मदद करते है।
काले खजूर, काले अंगूर आदि के सेवन से भी आपके ब्लड प्रैशर को नार्मल रखने में मदद मिलती है।
तो ये हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिसका सेवन करने से आपको लो ब्लड प्रैशर की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है, यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आपको इनका सेवन जरूर करना चाहिए।
महिलाओ के प्राइवेट पार्ट से बदबू का आना सामान्य बात होती है, परन्तु यह काफी शर्मनाक भी होता है, इसीलिए इस समस्या को कभी भी बढ़ने नहीं देना चाहिए, जितना जल्दी हो सकें इस समस्या से राहत पा लेनी चाहिए, प्राइवेट पार्ट से बदबू का कारण अच्छे से साफ़ सफाई न रखना, योंन रोगो के होने के कारण, संक्रमण होने पर, आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
यदि आप अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई नहीं रखते है तो इसके कारण महिलाओ को खुजली व् जलन जैसी समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, साथ ही बदबू तो आती है, इसका कारण होता है की आपके प्राइवेट पार्ट में बैक्टेरिया बढ़ जाता है, और उसकी ph मात्रा भी असंतुलित हो जाती है, इसके अलावा जो लोग बहुत अधिक मीठे का सेवन करते है, उनके प्राइवेट पार्ट से भी बदबू आने की समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, तो आइये आज हम इस समस्या के समाधान के लिए आपको घरेलु टिप्स देने जा रहे है, जो आपके प्राइवेट पार्ट की दुर्गन्ध को दूर करने में आपकी मदद करेंगे।
प्राइवेट पार्ट में से बदबू आने के कारण:-
यीस्ट संक्रमण होने पर प्राइवेट पार्ट से दुर्गन्ध आती है।
प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा खुशबू वाले साबुन या कठोर साबुन का इस्तेमाल करने से भी आपको ये समस्या हो सकती है।
प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई न करने के कारण भी आपको ये समस्या हो सकती है।
ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण।
गोनोरिया होने पर
पेल्विक इंफ्लेमेटरी रोग होने के कारण
जो लोग ज्यादा मीठे भोज्य पदार्थो का सेवन करते है, उनके साथ ये समस्या हो जाती है।
प्राइवेट पार्ट की दुर्गन्ध से छुटकारा पाने के तरीके:-
दही का इस्तेमाल करें:-
दही में लैक्टोबेसिलस की मात्रा अधिक होती है, जो आपके प्राइवेट पार्ट के को संतुलित रखने में मदद करती है, इसके इस्तेमाल के लिए दही को फैट कर उसमे थोड़ा पानी मिक्स करें, उसके बाद उसमे रुई का एक फोहा बनाकर डाल दें, उसके बाद उस फोहे को अच्छे से फूल जाने दें, और उसे पांच से दस मिनट के लिए अपने प्राइवेट पार्ट में रखें या फिर दही को अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट पर लगाएं, और थोड़ी देर बाद धो दें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।
मेथी का उपयोग करें:-
मेथी प्राइवेट पार्ट की बदबू को दूर करने के लिए सबसे अच्छी जड़ी बूटियों में से एक हैं, बल्कि यदि महिलायें इसका सेवन नियमित रूप से करें तो महिलाओ के हॉर्मोन स्तर और मासिक धर्म में आने वाली समस्या और उसे नियमित करने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए रात को सोने से पहले दो चम्मच मेथी को एक गिलास पानी में भिगो कर रख दें, और सुबह उठकर नाश्ते से पहले इस पानी को छानकर पी लें, इससे आपको जरूर फायदा मिलेगा।
लहसुन का इस्तेमाल करें:-
इसके इस्तेमाल के लिए चार या पांच लहसुन की कलियों को लेकर अच्छे से पीस कर एक लेप तैयार करें, उसके बाद इस लेप को अपने प्राइवेट पार्ट की दीवारों पर अच्छे से लगाएं, और दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें, लहसुन में एंटीफंगल, एंटीबैक्टेरियल गुण होते है, जो की प्राइवेट पार्ट में बदबू पैदा करने वाले जीवाणुओं को खत्म करके आपको इस समस्या से राहत दिलाने में मदद करते है।
नीम किसी आयुर्वेदिक औषधि से कम नहीं होती है, प्राइवेट पार्ट में होने वाली दुर्गन्ध की समस्या से निजात पाने के लिए आप नीम की कुछ पत्तियों को पानी में डाल कर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद इस पानी को ठंडा होने के लिए रख दें, और फिर इस पानी से अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट को धोएं, नियमित ऐसा करने से बदबू फ़ैलाने वाले जीवाणुओं को खत्म होने में मदद मिलती है, साथ ही प्राइवेट पार्ट की बदबू से निजात पाने में भी आपको मदद मिलती है, इसके अलावा नीम के तेल का रोजाना नहाने से कुछ देर पहले इस्तेमाल करने से भी आपको बहुत फायदा होता है।
सफ़ेद सिरके का इस्तेमाल करें:-
सफ़ेद सिरके का इस्तेमाल करने से भी आपको प्राइवेट पार्ट में होने वाली दुर्गन्ध से रहता पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आपक बाथ टब में गुनगुना पानी लें, और उसमे आधा कप सफ़ेद सिरका और थोड़ा सा नमक मिलाएं, उसके बाद उसकी मदद से अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट को धोएं या फिर आप उसमे अपने प्राइवेट पार्ट को कुछ समय के लिए डाल कर रख सकती है तो ऐसा करें, और उसके बाद नहा लें, हफ्ते में तीन से चार बार इस उपाय को करने से आपको फायदा मिलेगा।
चाय के पेड़ का तेल इस्तेमाल करें:-
चाय के पेड़ का तेल इस्तेमाल करने से भी आपको प्राइवेट पार्ट की बदबू को दूर करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच तेल में थोड़ा सा पानी मिलाएं, और रुई की मदद से अच्छे से अपने प्राइवेट पार्ट पर लगाएं, और इसे थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, उसके थोड़ी देर बाद इसे अच्छे से धो लें, ऐसा नियमित नहाने से थोड़ी देर पहले करें, और नहाते समय इसे धो लें, आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
खट्टे फलों का सेवन करें:-
खट्टे फलों में विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है, और साथ ही आपको प्राइवेट पार्ट में आने वाली बदबू से बचाने में मदद करता है, यदि आप नियमित रूप से विटामिन सी युक्त फलों का सेवन करते है तो आपको इस समस्या से निजात मिलता है, इसके लिए आप निम्बू, संतरे, मोसम्बी, अनानास, अंगूर आदि फलों का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकते है।
आंवलें का सेवन करें:-
आंवलें का सेवन कच्चा या फिर अचार के रूप में करने से आपको प्राइवेट पार्ट में आने वाली बदबू की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, क्योंकि इसके विटामिन सी भरपूर होता है, साथ ही आंवलें के सेवन से प्राइवेट पार्ट में बदबू फैलाने वाले रोग ल्यूकोरिया को भी पैदा होने से रोकने में मदद करता है, आप इसे गाजर चुकंदर आदि के जूस में डाल कर भी इसका सेवन कर सकते है, आप इसके पाउडर कभी सेवन कर सकते है, इसे किसी भी रूप में लेने से आपको इससे फायदा ही मिलता है।
प्राइवेट पार्ट की दुर्गन्ध को दूर करने के अन्य उपाय:-
पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें, पानी का सेवन करने से शरीर से अतिरिक्त शर्करा को हटाने में मदद मिलती है, जो की प्राइवेट पार्ट से बदबू आने का मुख्य कारण होता है।
प्राइवेट पार्ट को साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, दिन में जितनी बार भी बाथरूम में जाएँ उतनी बार पानी से उसे साफा करना चाहिए।
ज्यादा कठोर या खुशबू वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
जितना हो सकें मीठे से परहेज करना चाहिए यदि आपको ये परेशानी है।
प्राइवेट पार्ट के लिए जांघो की तरफ इत्र का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके इस्तेमाल से भी आप प्राइवेट पार्ट की बदबू को छुपा सकते है।
एक चम्मच बेकिंग सोडा को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से आपको इस समस्या से बचने में मदद मिलती है।
वैजिसिल पाउडर महिलाओ के लिए होता है, इसका इस्तेमाल यदि आप प्राइवेट पार्ट के लिए करते है तो ये तेजी से नमी और वहां की बदबू सोख लेता है।
सेब के सिरके को गुनगुने पानी में मिलाकर नियमित रूप से अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई करने पर आपको इस समस्या से रहता मिलती है।
तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप प्राइवेट पार्ट से आने वाली बदबू की समस्या से रहता प् सकते है, इसके साथ आपको कभी भी ज्यादा टाइट अंडरवियर नहीं पहनना चाहिए, ज्यादा क्रीम आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, खुजली व् जलन होने पर उसका उपचार करना चाहिए ऐसे ही कुछ तरीको का इस्तेमाल करके आप प्राइवेट पार्ट से आने वाली बदबू की समस्या से राहत पा सकते है।
गर्भावस्था में ये ध्यान रखें, प्रेग्नेंसी में ये करें, गर्भधारण होते ही इन चीजों का ध्यान रखें, गर्भधारण के बाद से ये ना करें, Garbhdharan ke bad ye dhyan rakhe, Pregnancy hone par kya kare, गर्भधारण के बाद क्या करें, प्रेग्नेंसी होने पर क्या नहीं करना चाहिए?
गर्भधारण के बाद से ही इन बातों का ध्यान रखें
प्रेग्नेंसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही गर्भवती महिला को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। आज हम आपको उन्ही के बारे में बता रहे हैं।
दोस्तों, गर्भधारण होते ही दो बातों का ध्यान रखना जरूरी है एक अपने और शिशु के स्वास्थ्य के लिए और दूसरा समाज के लिए। क्यूंकि दोनों के तालमेल से ही जिंदगी में खुशियां आती हैं और लाइफ अच्छी होती हैं।
डॉक्टरी इलाज लें
आपको सबसे पहले अपनी और अपने शिशु की केयर करनी होगी। इसके लिए आप सबसे पहले डॉक्टरी इलाज लें। रिजल्ट पोसिटिव आते ही आप किसी अच्छे डॉक्टर का चुनाव करें। उस डॉक्टर के बारे में जानें, ऐसा बिलकुल भी नहीं करें की किसी ने बता दिया हो वहां फलां डॉक्टर है आप दिखा लो। किसी के द्वारा बताए गए डॉक्टर से पास जाने से पहले आप खुद उस डॉक्टर के बारे में जानने की कोशिश करें, की डॉक्टर कैसा है? सही तरीके से इलाज करता है?
डॉक्टर के बारे में जानें
डॉक्टर के बारे में जानने का सबसे बढियाँ माध्यम है गूगल पर जाकर डॉक्टर की रेटिंग देखें क्या है? लोगों के अनुभव पढ़ें की वो उस डॉक्टर के बारे में क्या कह रहे हैं। रेटिंग अच्छी है, लोगों ने उसे सराहा है, अच्छी क्वालिफिकेशन है, एक्सपीरियंस रखती हैं तो आप उस डॉक्टर के पास जरूर जाएं।
टेस्ट और रूटीन चेकअप करवाएं
अब आप डॉक्टर की देखरेख में अपना समुचित इलाज करवाएं। जो भी टेस्ट कहती हैं वो सभी करवाएं, समय पर दवाइयां लें, खान-पान का ध्यान रखें, लापरवाही ना करें और समय-समय पर चेकअप करवाती रहें।
दिनचर्या सही रखें
डॉक्टरी इलाज के साथ-साथ आप अपनी दिनचर्या को सुधारे। खान-पान का समुचित ध्यान रखें। सही समय पर सोएं। ज्यादा भारी काम नहीं करें। गुस्सा और चिड़चिड़ापन नहीं रखें। खुश रहने की कोशिश करें।
प्रेग्नेंसी के बारे में किसी को ना बताएं
एक बात और आपको ध्यान रखनी होगी। की आप अपनी न्यूज़ देने के लिए बहुत जल्दी उतावली ना हो जाएं। ये खबर सिर्फ अपने घर तक ही सिमित रखें। दूर के रिश्तेदार, को बिलकुल भी अभी नहीं बताएं। आस-पड़ोस में भी ना बताएं। उचित समय आने दें। लोगों को अपने आप पता चल जाएगा। क्यूंकि तीन महीने का समय थोड़ा crucial होता है। इसलिए थोड़ा इन्तजार करें।
अपना व्यवहार सही रखें
इस दौरान किसी को नीचा ना दिखाएं। अपनी ख़ुशी को किसी पर थोपें नहीं, नार्मल रहें, अपना व्यवहार भी नार्मल रखें, अपने घर में भी व्यवहार को ठीक रखें। कई महिलाएं इस समय ज्यादा आवेश में आ जाती हैं। और चिड़चिड़ी हो जाती हैं। खुद पर संयम रखें, ज्यादा चिड़चिड़ी ना हो। और गुस्सा नहीं करें।
समाज का भी रखें ध्यान
कुछ सामाजिक मान्यताएं भी होती है आपको उनका भी ध्यान रखना है। जैसे – इस दौरान खुशहाल जगहों पर जाएं जहाँ ख़ुशी हो। वैसे जगहों पर नहीं जाएं जहाँ पर दुःख हो, गम हो। वैसी चीजों को ना देखें जो आपको विचलित करती हैं, क्राइम, हॉरर, हिंसक चीजें ना देखें ये आपके गर्भ पर असर डाल सकती हैं। इस समय आप ख़ुशी में शामिल हो सकती हैं पर किसी के दुःख में फिलहाल शामिल ना हो। ये आपके और आपके गर्भ के लिए अच्छा होगा।
अगर आप इन सारी बातों को मानेंगी तो आपको गर्भावस्था के दौरान ज्यादा परेशानी नहीं होगी और आपके शिशु के लिए भी दिक्क्त नहीं होगी। कुछ समाज की बातें भी ध्यान में रखनी होती है। आप भी उनका ध्यान रखें और अपनी लाइफ के इस खूबसूरत पल को एन्जॉय करें।
यूट्यूब विडिओ –
गर्भधारण की रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही इन बातों का ध्यान रखें? क्या करें क्या नहीं?
घी का इस्तेमाल हर भारतीय घर में समान रूप से किया जाता है। कोई इसे पूजा-पाठ आदि कार्यों के लिए प्रयोग में लाता है तो कोई अपने खाने का ज़ायका बढ़ाने के लिए। लेकिन क्या आप जानते है की इसका इस्तेमाल करके आप अपनी स्वस्थ संबंधी कई समस्यायों में राहत पा सकते है। जी हां, आज से नहीं बल्कि प्राचीन काल से घी का इस्तेमाल त्वचा और स्वास्थ्य के फ़ायदों के रूप में भी किया जाता आ रहा है। जलने की समस्या हो त्वचा में किसी प्रकार की सुजन सभी को दूर करने के लिए घी का इस्तेमाल किया जा सकता है। आयुर्वेद की माने की बालों में भी घी के इस्तेमाल से उनकी ग्रोथ अच्छी होती है और साथ ही उनकी सुन्दरता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
खाने में स्वादिष्ट घी जितना आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है उतना ही शुद्ध भी। कुछ लोग इसे फैट बढ़ाने का जरिया समझते है जबकि वे नहीं जानते की इसमें मौजूद तत्व आपका फैट बढ़ाने नहीं बल्कि घटाने में मदद करते है। इसके साथ ही ये ब्लड में कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में भी मदद करते है।
पहले के समय में अधिकतर लोग खाना पकाने से लेकर सभी कार्यों में केवल देसी घी का ही इस्तेमाल किया करते थे लेकिन आजकल जमाना बदल गया है लोग बटर, आयल और अन्य वनस्पति तेलों का इस्तेमाल करने लगे है। क्योंकि वे सभी इस शुद्ध देसी घी के फ़ायदों को नहीं जानते, इसीलिए आज हम आपको देसी घी के पूर्ण फ़ायदों के बारे में बताने जा रहे है। जिन्हें जानकार शायद आप भी इस शुद्ध उत्पाद को पसंद करने लगे।
देसी घी के फ़ायदे :-
ऐसे तो सभी अपने अपने घरों में देसी घी का इस्तेमाल करते है लेकिन अधिकतर लोगों को इसके फ़ायदो के बारे में नहीं पता होता इसीलिए आज हम आपको देसी घी के पूर्ण फ़ायदों के बारे में बताने जा रहे है।
1. फैट की कम मात्रा :
यदि आपको कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो बटर की तुलना में घी आपके लिए बेहतर सिद्ध हो सकता है। क्योंकि बटर में फैट की अधिक मात्रा पाई जाती है जबकि घी में यह बहुत कम होता है। जिसके कारण इसे पचाना बहुत आसान होता है। शोध से पता चला है की घी आँतों में बड़े कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करता है। तो अगर आप स्वस्थ फैट के लिए एक बेहतर आप्शन ढूंढ रहे है तो घी इसके लिए उपयुक्त रहेगा। क्योंकि इसमें saturated फैट भी पाया जाता है।
2. पाचन तंत्र के लिए :
घी में utyric acid नामक तत्व की अच्छी मात्रा पाई जाती है। जो एक तरह का short-chain fatty acid है। ये acid पाचन की समस्या को दूर करके सुजन कम करने में भी मदद करता है। इसके साथ ही घी पेट में acid के सीक्रेशन को बढ़ाता है, जो खाने को बेहतर तरीके से पचाने में मदद करता है। जबकि अन्य तेल और बटर पाचन क्रिया को स्लो करने का काम करते है।
3. इम्यून सिस्टम को मजबूत करें :
घी में एंटी oxidents की अच्छी मात्रा पाई जाती है। जो हमारे शरीर को खाने से मिलने वाले विटामिन्स और मिनरल्स को सोखने की क्षमता को बढ़ाते है। जिसके परिणामस्वरुप आपके इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है। शोध में पाया गया है की जब butyric acid का निर्माण होता है killer T cell का निर्माण शुरू हो जाता है जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूती देता है। ये T cells हमारे शरीर को रोगों से बचाने और उनसे लड़ने में मदद करते है। फैट में घुलनशील विटामिन और मिनरल्स भी इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते है और घी इन सभी नुट्रीएंट्स की absorption में मदद करता है।
4. एसेंशियल विटामिन्स दे :
घी में vitamins A, D, E और K की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो, fat-soluble vitamins है। और ये सभी हमारे हृदय, मस्तिष्क और हड्डियों के इम्यून सिस्टम के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इसके साथ ही इसमें कई dietary fats पाए जाते है जो हमारे शरीर में इन विटामिन्स को सोखने की क्षमता बढ़ाते है।
5. एंटी कैंसर और एंटी इंफ्लेमेटरी प्रकृति :
शोध के अनुसार, butyrate enemas और oral butyrate सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल उन बिमारियों के लिए किया जाता है जिनकी वजह से आंतों की सुजन आती है। जैसे की ulcerative colitis और Crohn’s disease। घी में CLA (conjugated linoleic acid) की अच्छी मात्रा पाई जाती है। (यदि घी का निर्माण उस गाय से किया जाए जो घास का सेवन करती है)
6. हानिकारक प्रभाव नहीं :
घी का निर्माण शुद्ध बटर से किया जाता है, अर्थात इसमें थोडा सा भी दूध और अन्य अशुधियां नहीं होती, जो अन्य डेरी उत्पादों में पाइ जाती है। दूध में पाया जाने वाला ‘Casein’ घी में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही इसमें lactose की बहुत कम मात्रा पाई जाता है। तो, अगर आपको lactose और casein से समस्या है तो परेशान न हो क्योंकि घी में किसी तरह के कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होते।
7. जरुरी Healthy फैट दे :
आपके शरीर को कुछ जरुरी फैट की आवश्यकता ताकि सभी कार्य अच्छी तरह हो सके। इस कार्यों में digestive acids से stomach wall की रक्षा करना, मस्तिष्क को सपोर्ट करना, तंत्रिका और त्वचा को स्वस्थ रखना साथ-साथ नइ कोशिकाओं का निर्माण कर उन्हें मजबूती देना सम्मिलित है। और घी इन सभी फ़ायदों को पूर्ण करने में सक्षम है क्योंकि इसमें अन्य तेल और बटर की तुलना में hydrogenated oils, trans-fats और oxidized cholesterol नहीं पाए जाते।
8. पकाने के लिए :
डायटीशियन के मुताबिक, खाना पकाने के लिए घी सबसे उत्तम पदार्थ है, विशेषकर जब किसी पदार्थ को फ्राई करना हो। खाना पकाने के अन्य तेलों की तुलना में ये हानिकारक फ्री रेडिकल्स को बढ़ने नहीं देता। घी का smoke point 500 डिग्री फ़ारेनहाइट है जबकि सामान्य बटर का 350 डिग्री फ़ारेनहाइट है।
9. जले के लिए :
यदि आप त्वचा के लिए घी के फ़ायदों से अनजान है तो बता दें की घी जले की समस्या के सबसे उत्तम घरेलू उपायों में से एक है। त्वचा के विभिन्न हिस्सों की सुजन को कम करने के लिए इसका बहुत बड़े स्तर पर प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही, ये त्वचा में किसी भी प्रकार की सुजन को कम करने में भी मदद करता है। यदि आप भी रूखेपन से परेशान है तो अपनी त्वचा और स्कैल्प पर घी का इस्तेमाल मॉइस्चराइजर की तरह करें।
10. अशुद्धियों से रहित :
घी बहुत ही शुद्ध होता है इसीलिए इसका इस्तेमाल खाना पकाने के लिए भी किया जाता है। इसमें किसी तरह का साल्ट, और हाइड्रोजनेटेड आयल नहीं पाया जाता। इसके साथ ही इसमें किसी तरह का हानिकारक preservatives और additives भी नहीं पाए जाते।
और चूँकि ये पूरी तरह trans-fat रहित है तो इसमें किसी तरह की अशुद्धियाँ भी नहीं पाई जाती है। तो इस चमत्कारिक पदार्थ का आपके किचन में होना तो बनता ही है।
11. एनर्जी दे :
घी को एनर्जी का भंडार भी कहा जा सकता है, एक चम्मच घी में लगभग 470 KJ एनर्जी पायी जाती है। इसके साथ ही इसमें medium-chain fatty acids भी पाए जाते है जो लीवर द्वारा सीधे सीधे एनर्जी के रूप में absorb कर लिए जाते है। इसके सेवन के कई घंटो बाद तक ये एनर्जी देता हहै जो एथलिट के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा यदि आप व्यायाम से पूर्व एक चम्मच घी का सेवन करें, तो वर्कआउट के मध्य में आपको थकान महसूस नहीं होगी। इसके अलावा ये medium-chain fat acids आपके अतिरिक्त फैट को खत्म करने में भी मदद करते है।
12. त्वचा के लिए फ़ायदे :
घी के रोजाना इस्तेमाल और सेवन से त्वचा को बेहद खास लाभ हो सकता है।
एक बेहतर मॉइस्चराइजर के रूप में – सर्दियों में मुलायम और कोमल त्वचा पाने के लिए अपनी त्वचा पर थोड़े से घी से मसाज करें।
फटे होंठ – अपने होंठो पर थोडा सा घी लगाएं और बिना किसी कॉस्मेटिक के प्रयोग के एक बेहतर pout पायें।
नींद के अभाव में – यदि आपकी आंखों के नीचे भी काले घेरे है तो, घी आपकी इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। इसके लिए रात को सोने से पहले अपने आंखों के चारों ओर घी से मसाज करें।
जलने और रैशेज की समस्या में थोडा सा घी लगाएं।
13. आँखों के लिए :
आंखों के लिए गाय के घी के फ़ायदों को जानते है आप? जी हां, आयुर्वेद के अनुसार घी का सेवन करने से आपकी आंखों की रोशनी को बढ़ाया जा सकता है। नियमित रूप से घी का सेवन करने से eyesight बढ़ाई जा सकती है। यदि आपकी आंखों में जलन होती है, तो आंखों के नीचे थोडा सा घी लगायें।
14. कफ में आराम :
कफ की समस्या के लिए ये बहुत पुराना उपचार है। और साथ ही प्रभावी भी। आप चाहे तो एक चम्मच गर्म घी के साथ एक हर्बल औषधि बना सकते है।
दालचीनी की एक छोटी सी स्टिक को घी में फ्राई कर लें। ठंडा होने दे और उसके बाद उसे निकाल लें और निगल लें।
यदि बलगम के कारण आपकी नाक बंद हो रही है तो अदरक और इलायची को घी में तल कर उसका सेवन करें।
तुलसी और गर्म घी को मिलाकर एक पेस्ट बना लें। तुरंत राहत पाने के लिए इसका सेवन करे आराम मिलेगा।
15. कब्ज में आराम :
कब्ज से परेशान व्यक्तियों के लिए घी एक बेहतर घरेलू उपचार है। आयुर्वेदानुसार, प्राचीन काल से घी का बहुत इस्तेमाल किया जाता आ रहा है। तो फाइबर के सेवन की मात्रा को बढ़ाने की बजाय, गर्भवती महिला को रोजाना रात एक गिलास दूध के साथ एक चम्मच घी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ये कब्ज में राहत देकर मेटाबोलिज्म को अच्छा करता है।
16. थाइरोइड :
अधेड़ उम्र की महिलाओं में होने वाली सबसे आम समस्या है थाइरोइड। जो प्रजनन समस्यायों के साथ-साथ शरीर में हॉर्मोन के असंतुलन का भी कारण बनती है। शुद्ध बटर/मक्खन और घी में दूध के तत्व नहीं पाए जाते और ये डेरी उत्पाद इस समस्या से आराम दिलाने में मदद करते है। इसके अलावा घी Gastrointestinal tracts और इम्यून सिस्टम की जो थाइरोइड gland से समझौता करते है रक्षा करता है। इसके अतिरिक्त घी में मौजूद केमिकल thyroxin हॉर्मोन को भी संचालित करते है।