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पीरियड्स में पेट दर्द दूर करने के उपाय

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माहवारी में पेट और पेडू में दर्द का घरेलू इलाज

हर महीने होने वाले पीरियड्स कई बार महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन जाते है। ऐसे तो यह परेशानी हर महीने होती ही हैं लेकिन बहुत बार इसके कारण महिलाओं को बहुत अधिक शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है। जो अधिकतर पेट दर्द और पीठ दर्द की होती है।

वर्तमान में बदलती जीवनशैली, बाहर का वातावरण और खान-पान में बदलाव के कारण अधिकतर महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बहुत तेज पेट दर्द और पीठ दर्द होता है। अगर ज्यादा दर्द होता है तो पीरियड्स के पेट दर्द में दवा खा सकते हैं लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं खानी चाहिए। लेकिन कुछ घरेलू उपाय हैं जिनकी मदद से बिना दवा खाये पीरियड्स के पेट दर्द से निजात पाई जा सकती है। क्योंकि ये सभी उपाय पूरी तरह घरेलू हैं इसीलिए इनके कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं हैं।

पीरियड्स में पेट दर्द को दूर करने के उपाय

पीरियड्स में तेज पेट दर्द होने पर इन उपायों का प्रयोग कर सकते हैं। ये उपाय ना तो बहुत ज्यादा खर्चीले हैं और ना ही इनके कोई साइड इफेक्ट हैं इसलिए आप बिना झिझक इन उपायों का प्रयोग कर सकती हैं।

अजवाइन 

पीरियड्स के दौरान गैस की समस्या बढ़ जाती है जिसके कारण बहुत तेज पेट दर्द होने लगता है। अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ होता है तो आप अजवाइन का सेवन करके दर्द से निजात पा सकते हैं। इसके लिए गुनगुने पानी में आधा चम्मच अजवाइन और आधा चम्मच नमक मिलाकर पी लें। दर्द में आराम मिलेगा।

तुलसी

पीरियड्स के दर्द में तुलसी प्राकृतिक औषधि के रूप में काम करती है। इस मौजूद तत्व पेट दर्द में आराम दिलाते हैं। इसके लिए तुलसी के पत्तों की चाय का सेवन लाभकारी रहेगा। ज्यादा पेट दर्द होने पर तुलसी के 7 से 8 पत्तों को उबालकर छान लें और उसका सेवन करें।

अदरक 

अदरक का सेवन करने से भी पीरियड्स में होने वाले पेट दर्द में आराम मिलता है। इसके लिए एक कप पानी में कुटी हुई अदरक डालकर अच्छे से उबाल लें। उसके बाद स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पी लें। दिन में 3 बार खाना खाने के बाद इसका सेवन करें दर्द ठीक हो जाएगा।

पपीता 

पीरियड्स में रक्त का ठीक फ्लो होना भी बहुत जरुरी होता है लेकिन जब यह फ्लो ठीक तरह से नहीं हो पाता तो पेट दर्द करने लगता है। इस स्थिति में पपीते का सेवन करना पेट के लिए लाभकारी होता है। पीरियड्स में पपीता खाने से फ्लो तो अच्छा होता है साथ-साथ पेट दर्द भी ठीक होता है।

डेरी प्रोडक्ट

पीरियड्स के दौरान दूध और उससे बने प्रोडक्ट्स का सेवन करने से भी पेट और पीठ दर्द में आराम मिलता है। जिन महिलाओं के शरीर में कैल्शियम की कमी होती है उन्हें पीरियड्स के दौरान बहुत सी समस्याएं होती हैं। लेकिन अगर आप नियमित रूप से दूध और उससे बने प्रोडक्ट का सेवन करेंगी तो शरीर में कैल्शियम की कमी तो पूरी होगी ही साथ-साथ पेट दर्द में भी आराम मिलेगा।

सिकाई 

पीरियड्स के दौरान पेट और पीठ में बहुत तेज दर्द होता है और कई बार स्थिति इतनी खराब होती है की कोई उपाय करने का मन भी नहीं करता। ऐसे में सिकाई बहुत आराम देती है। इसके लिए आप गर्म पानी की थैली या इलेक्ट्रिक हीटिंग पेड का इस्तेमाल कर सकती हैं। ये पेट और पीठ दर्द में आराम दिलाता है।

तो ये थे कुछ सामान्य घरेलू उपाय जिनका प्रयोग करके माहवारी में होने वाले पेट दर्द से निजात पाई जा सकती हैं। अगर आप इन उपायों का इस्तेमाल सही तरीके से करेंगी तो निश्चित ही पेट दर्द में आराम मिल जाएगा।

प्रेगनेंसी में आग सेकने के नुकसान

गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जहां महिला को कुछ भी करने से पहले इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के दौरान उस काम को करना सही है या नहीं। जैसे की सर्दी से बचाव के लिए अधिकतर लोग आग सेकते हैं। आग सेकने से बॉडी में गर्माहट महसूस होती है जिससे ठण्ड से बचाव करने में मदद मिलती है। लेकिन गर्भवती महिला को ऐसा करना चाहिए या नहीं इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है।

प्रेग्नेंट महिला को आग सेकनी चाहिए या नहीं

आग सेकने से गर्भवती महिला को ठण्ड से निजात तो मिल जाता है। लेकिन आग की गर्माहट से बॉडी के तापमान में तेजी से फ़र्क़ आता है। जिसके कारण बॉडी गर्म हो जाती है और बॉडी के तापमान का अधिक बढ़ना गर्भवती महिला व भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला या शिशु को सर्दी से बचाव के लिए आग नहीं सेकनी चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में आग सेकने से प्रेग्नेंट महिला व शिशु को कौन से नुकसान हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी में आग सेकने से हो सकता है गर्भपात

  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिला को आराम की सलाह दी जाती है।
  • ताकि गर्भवती महिला को किसी भी तरह की दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • लेकिन यदि सर्दी का मौसम है और आप प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में आग सेकने लग जाते हैं।
  • तो इससे बॉडी में अधिक गर्माहट महसूस हो सकती है और बॉडी का तापमान तेजी से बढ़ सकता है।
  • जिसके कारण ब्लीडिंग जैसी समस्या या गर्भपात तक होने का खतरा रहता है।

बैठने पर हो सकती है दिक्कत

  • आग सेकने के लिए प्रेग्नेंट महिला बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठी रहती है।
  • जिसके कारण बॉडी की मांसपेशियों में अकड़न की समस्या हो सकती है।
  • मांसपेशियों में अकड़न होने के कारण गर्भवती महिला के बॉडी पार्ट्स में दर्द की समस्या हो सकती है।
  • लेकिन आग सेकते समय प्रेग्नेंट महिला को बॉडी में आराम ही महसूस होता है।
  • ऐसे में बॉडी में होने वाले दर्द से बचाव के लिए बहुत देर तक एक ही जगह पर चाहे वो दूर से हो या पास से आग सेकने से बचना चाहिए।
  • इसके अलावा यदि पैर के भार बैठकर गर्भवती महिला आग सकती है तो इससे गर्भाशय पर दबाव पड़ सकता है जिससे शिशु असहज महसूस कर सकता है।
  • साथ ही कुर्सी पर ज्यादा देर तक पैर लटकाकर बैठने से बॉडी में ब्लड फ्लो से जुडी समस्या हो सकती है।

तो यह है गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को आग सेकनी चाहिए या नहीं इससे जुड़े कुछ खास टिप्स। तो यदि भी भी प्रेग्नेंट हैं तो सर्दी से बचाव के लिए पूरा दिन गर्म कपडे पहन कर रखें। घर के खिड़कियाँ दरवाज़े बंद रखें ताकि ठण्ड से बचाव होने में मदद मिल सके। इसके अलावा सर्दी में अपने खान पान का बेहतर ध्यान रखें ताकि सर्दी के कारण किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

10 खतरनाक फ़ूड प्रेग्नेंट महिला के लिए

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है। और गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर आहार प्रेग्नेंट महिला को फिट रखने मदद करता है। साथ ही गर्भ में पल रहा शिशु भी अपने विकास के लिए महिला द्वारा लिए आहार पर ही निर्भर करता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। की गर्भवस्था के दौरान किन चीजों का सेवन करना सही होता है।

और किन चीजों का सेवन करना महिला व् शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है। क्योंकि महिला यदि किसी ऐसे आहार का सेवन कर लेती है। जिसका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। तो वह आहार प्रेग्नेंट महिला के साथ शिशु के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए और जो प्रेग्नेंट महिला व् शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

कच्चे अंडे व् नॉन वेज

  • प्रेग्नेंट महिला चाहे तो अच्छे से पकाकर अंडे व् नॉन वेज का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है।
  • क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला व् शिशु के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • लेकिन प्रेग्नेंट महिला को भूलकर भी कच्चे अंडे व् नॉन वेज का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि यह केवल गर्भवती महिला ही नहीं बल्कि भ्रूण के लिए भी नुकसानदायक हो सकते हैं।
  • कच्चे अंडे व् नॉन वेज में लिस्टेरिया, साल्मोनेला, जैसे बैक्टेरिया मौजूद होते हैं।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के लिए स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या के साथ इन्फेक्शन की समस्या भी खड़ी कर सकते हैं।
  • साथ ही इसके कारण भ्रूण के शारीरिक व् मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ने के साथ संक्रमण होने का खतरा भी रहता हैं।
  • और इसके कारण समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या होने का खतरा भी रहता है।
  • इसीलिए इनका सेवन अच्छे से पकाकर करें क्योंकि पकाने के बाद इनमे मौजूद बैक्टेरिया खत्म हो जाते हैं।
  • जिससे किसी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या से महिला व् शिशु दोनों को बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला को नहीं खाना चाहिए मर्करी युक्त समुंद्री भोजन

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उच्च मर्करी युक्त मछलियों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जैसे की शार्क, टाइलफिश, स्वोर्डफ़िश या किंग मैकेरल आदि।
  • क्योंकि इससे तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है खासकर भ्रूण पर यह बुरा असर डाल सकती है।

कच्चा दूध व् उससे बना सामान

  • प्रेग्नेंट महिला को कच्चा दूध व् उससे बने सामान जैसे की पनीर आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि उसमे मौजूद लिस्टेरिया नामक बैक्टेरिया गर्भवती महिला व् शिशु दोनों के लिए स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या व् इन्फेक्शन की परेशानी हो सकती है।
  • साथ ही इसके कारण गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या व् डायरिया जैसी दिक्कत होने का खतरा भी हो सकता है।
  • जिसके कारण शरीर में पानी की कमी होने का भी खतरा रहता है।
  • इसीलिए गर्भवती महिला को अच्छे से उबालने के बाद ही दूध का सेवन करना चाहिए और उससे बनी चीजों को ही अपने आहार में शामिल करना चाहिए।

कैफीन

  • चाय, कॉफ़ी, एनर्जी ड्रिंक्स आदि में कैफीन की मात्रा मौजूद होती है।
  • और प्रेग्नेंट महिला का कैफीन को अधिक मात्रा में लेना बहुत सी परेशानियां खड़ी कर सकता है।
  • जैसे की इसके कारण गर्भपात, शिशु के वजन में कमी, समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या हो सकती है।
  • इसीलिए दिन में एक कप कॉफ़ी या एक दो कप चाय का सेवन कर सकती है। लेकिन इससे अधिक मात्रा में कैफीन के सेवन से बचना चाहिए।

कच्चा पपीता

  • प्रेग्नेंट महिला को कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि कच्चे पपीते में पैपेन नामक एंजाइम होता है।
  • जो गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकता है।
  • और संकुचन का बढ़ना गर्भपात जैसी परेशानी के साथ समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी का कारण भी बन सकता है।

शुगर

  • गर्भवती महिला को शुगर का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि शुगर का सेवन करने के कारण प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ का खतरा होता है।
  • साथ ही अधिक मीठे का सेवन करने के कारण महिला का वजन बढ़ सकता है।
  • और प्रेग्नेंट महिला का वजन ज्यादा होने के कारण महिला और शिशु को दिक्कतें हो सकती है।
  • इसके अलावा अधिक मीठा भ्रूण के पाचन तंत्र, हदय, से जुडी समस्या का कारण बन सकता है।
  • साथ ही इसकी वजह से महिला को समय पूर्व प्रसव होने का खतरा भी हो सकता है।

नमक

  • प्रेग्नेंट महिला को नमक का सेवन सिमित मात्रा में प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।
  • लेकिन अधिक मात्रा में नमक का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए।
  • क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला का हाई ब्लड प्रैशर जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला व् शिशु दोनों के लिए दिक्कत खड़ी कर सकता है।

प्रेग्नेंट महिला को नहीं खाना चाहिए जंक फ़ूड

  • गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का ही प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए।
  • और जंक फ़ूड, ज्यादा तेलीय व् मसालेदार आहार, डिब्बाब बंद आहार के सेवन से बचना चाहिए।
  • क्योंकि ऐसे आहार का सेवन करने से पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या, गेस्टेशनल डाइबिटीज़, वजन में बढ़ोतरी जैसी दिक्कत हो सकती है।
  • साथ ही इसके कारण भ्रूण के वजन में कमी, जन्म के बाद शिशु को किसी तरह की एलर्जी की समस्या हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को नहीं खानी चाहिए बिना धुली सब्जियां या कच्चे स्प्राउट्स

  • गर्भवती महिला को सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • लेकिन अच्छे से धोने के बाद ही उन्हें प्रयोग में लाना चाहिए।
  • क्योंकि सब्जियों पर होने वाले बैक्टेरिया गर्भवती महिला व् शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • साथ ही कच्चे स्प्राउट्स में भी लिस्टेरिया, साल्मोनेला जैसे परजीवी मौजूद होते हैं।
  • जो गर्भवती महिला के स्वास्थ्य व् शिशु के विकास के लिए खतरनाक हो सकता है।

नशा

  • प्रेग्नेंट महिला को किसी भी तरह का नशा जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • साथ ही जहां कोई इस चीज का सेवन कर रहा हो वहां पर बैठना या खड़े भी नहीं होना चाहिए।
  • क्योंकि इसका असर गर्भनाल से शिशु तक पहुँच सकता है जिससे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी हो सकती है।

तो यह हैं वो आहार जिनका सेवन गर्भवती महिला को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह आहार गर्भवती महिला व् शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसके अलावा पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके।

सुबह की पहली खुराक प्रेगनेंसी में

प्रेगनेंसी में सुबह का नाश्ता

नाश्ता रात के बाद लिया गया सबसे पहला आहार होता है जो की गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। क्योंकि सुबह का नाश्ता यदि बेहतर तरीके से किया जाये तो इसे न केवल गर्भवती महिला की परेशानियां कम होती है बल्कि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है। और यदि गर्भवती महिला स्वस्थ रहती है तो गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए गर्भवती महिला को 300 अधिक कैलोरी की जरुरत होती है। ऐसे में सुबह की सबसे पहली खुराक न केवल पोषक तत्वों से भरपूर होनी चाहिए, बल्कि गर्भवती महिला को सुबह उठने के बाद फ्रैश होकर, थोड़ा व्यायाम आदि करने के बाद जितना जल्दी हो सके नाश्ता करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सुबह की सबसे पहली खुराक क्या होनी चाहिए

अब ऐसा भी नहीं है की गर्भवती महिला उठते ही सबसे पहले नाश्ता कर लें, नित्य क्रियाक्रम करने के बाद थोड़ी देर योगासन करने के बाद महिला नाश्ता कर सकती है। तो आइये जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला सुबह उठकर क्या खा सकती है।

पेय पदार्थ

उठने के बाद महिला को पानी का सेवन जरूर करना चाहिए, क्योंकि पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला को तुरंत एनर्जी मिलती है, साथ ही पेट से जुडी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। उसके बाद व्यायाम करके महिला चाहे तो जूस (अनार या संतरे आदि का घर में ताजा बनाया हुआ), नारियल पानी आदि का सेवन कर सकती है, ऐसा करने से थकान, कमजोरी की समस्या महसूस नहीं होती है, साथ ही बॉडी को भरपूर मात्रा में मिनरल्स मिलते हैं।

बादाम

रात को पांच छह बादाम पानी में भिगोकर रखने के बाद गर्भवती महिला को सुबह उठकर उसका सेवन भी करना चाहिए। क्योंकि बादाम में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो न केवल गर्भवती महिला को फिट रखने में मदद करते हैं बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

सुबह का नाश्ता

प्रेग्नेंट महिला को सुबह आठ से नौ बजे के बीच में नाश्ता कर लेना चाहिए, और नाश्ते में महिला को बहुत सी चीजों को शामिल करना चाहिए। अब ऐसा भी नहीं है की एक ही दिन में सब चीजों का सेवन किया जाये बल्कि नियमित नाश्ते में थोड़ा बदलाव करके खाये, ताकि खाने के प्रति किसी भी तरह की दिक्कत न हो। तो लीजिये अब जानते हैं की गर्भवती महिला नाश्ते में किन किन चीजों का सेवन करना चाहिए।

  • उबले हुए अंडे, नाश्ते के दौरान नियमित गर्भवती महिला को दो उबले अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए, क्योंकि यह गर्भवती महिला को फिट रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में भी मदद करता है।
  • फल, फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, ऐसे में सुबह नाश्ते में फलों का सेवन भी गर्भवती महिला महिला चाहे तो कर सकती है। फलों का सेवन करने से पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होने के साथ इससे शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है।
  • साबुत अनाज, ओटमील, दलिया, होलव्‍हीट ब्रेड, आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को नाश्ते में जरूर खाना चाहिए।
  • कैल्शियम से भरपूर आहार, दूध, योगर्ट, ब्रेड, पालक, दूध से बनी चीजों आदि का सेवन गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद भरपूर कैल्शियम गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती को बनाएं रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।
  • इसके अलावा प्रोटीन, फाइबर, आयरन युक्त आहार का सेवन भी गर्भवती महिला को नाश्ते में जरूर करना चाहिए।
  • कैफीन, कच्चे अंडे, कच्चा दूध, आदि का सेवन नाश्ते में करने से बचना चाहिए, और पूरा दिन भी इनका सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गर्भवती महिला की सेहत पर गलत प्रभाव डाल सकते हैं। साथ ही सुबह के नाश्ते में ज्यादा तेल मसाले युक्त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान दिन की पहली खुराक के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा नाश्ते के बाद भी दिन में थोड़े थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ हैल्दी खाते रहना चाहिए ताकि बॉडी में एनर्जी को भरपूर रहने, गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

चूड़ियाँ पहनने से एलर्जी होती है?

चूड़ियाँ पहनने से एलर्जी

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आभूषणों और ज्वैलरी को महिलाओं की सबसे प्रिय वस्तु माना जाता है। क्योंकि यही एकमात्र ऐसी वस्तु है जिसे पाकर वे बेहद प्रसन्न होती है। भारतीय परंपरा में भी गहनों और ज्वैलरी का बेहद खास महत्व है। शादी का दिन हो या घर का कोई छोटा-मोटा फंक्शन सभी महिलाएं अलग अलग तरह से आभूषणों से आभूषित दिखाई पड़ती है।

और हो भी क्यों न, गहनों का महिलाओं के सोलह श्रृंगार में महत्वपूर्ण रोल होता है। फिर चाहे वो गले का हार हो या मंगलसूत्र, कान की झूमकिया हो या बालिया, हाथों की चुडिया हो या कंगन। कुछ महिलाएं इन्हे अपने दैनिक जीवन में पहनना अधिक पसंद करती है जबकि कुछ इन्हे केवल उत्सवों और त्योहारों पर निकालती है।

लेकिन कई बार महिलाओं को आभूषण पहनने से एलर्जी होने लगती है। जिसके कारण त्वचा में जलन, रैशेस, खुजली और दर्द आदि की समस्या होने लगती है। वैसे तो ये अधिकतर आर्टिफीसियल ज्वैलरी पहनने के कारण होती है लेकिन कई बार ओरिजिनल ज्वैलरी के कारण भी ये एलर्जी देखने को मिलती है।

जिसका मुख्य कारण “निकेल” नामक धातु होती है। बहुत से लोगों को गोल्ड और सिल्वर से भी एलर्जी की परेशानी होती है। ऐसा नहीं है की ये केवल बड़ी उम्र की महिलाओं को होती है क्योंकि यह एक सामान्य समस्या है जो किसी को भी हो सकती है।

कारण :-

इसके पीछे एक मुख्य कारण है, आर्टिफीसियल ज्वैलरी तो आर्टिफीसियल ही होती है लेकिन सोने व् चांदी की ज्वैलरी के कारण होने वाली परेशानी के पीछे निकेल नामक धातु का योगदान है। दरअसल प्योर सोना और चांदी बहुत सॉफ्ट होती है जिसके कारण उन्हें गहने की आकृति देने में मुश्किलें आती है। इसीलिए इसमें निकेल, जिंक और कॉपर धातु को मिलाया जाता है ताकि वह कठोर हो जाए और उसे मनचाहा आकार दिया जा सके।

जिंक और कॉपर तो हानिकारक नहीं होते लेकिन निकेल के प्रति त्वचा काफी संवेदनशील होती है। जिसके कारण एलर्जी की समस्या होती है और हम समझते है की आभूषणों से हो रही है जबकि वह तो उसमे मौजूद निकेल धातु के कारण होती है।

इसके अतिरिक्त लंबे समय तक पसीना आना भी एलर्जी का एक कारण होता है। अधिक समय तक आभूषण पहनने से पसीना गहनों में मौजूद निकेल के सम्पर्क में आता है और निकेल साल्ट का निर्माण होता है। और जब यह साल्ट स्किन के सम्पर्क में आता है तो एलर्जी होने लगती है।

नहाते समय या किसी अन्य कार्य को करते समय यदि साबुन या पानी का कुछ अंश गहनों में रह जाए विशेषकर कानो की बाली और अंगूठी में, तो यह त्वचा को बहुत नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में निकेल सीधे स्किन के सम्पर्क में आ जाता है। इसलिए गहने पहनते समय ध्यान रखें की आपका शरीर अच्छी तरह सूखा रहे।

उपाय :-

इस समस्या से बचाने के लिए ज्वैलरी पहनने से पूर्व टेलकम पाउडर लगा लें ताकि वह नमि को सोख लें। बहुत अधिक टाइट ज्वैलरी न पहनें ताकि हवा का प्रवाह होता रहे। समय समय पर अपने आभूषणों को बदलते रहे और उन्हें साफ़ व् सूखा रखें।

गहनों के पिछले हिस्से पर ट्रांसपेरेंट नेल पेंट की कई परतों को लगाकर भी एलर्जी की समस्या से बचा जा सकता है। आप चाहे तो अपने आभूषणों पर पैलेडियम धातु की कोटिंग करवाकर भी त्वचा को निकेल धातु से दुषप्रभाव से बचा सकती है।

नोर्मल डिलीवरी के लिए प्रेगनेंसी के अंतिम महीने में यह खाएं

प्रेगनेंसी के दौरान हर गर्भवती महिला के मन में यह सवाल जरूर आता है की उसकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन? लेकिन यह तय करना आपके हाथ में नहीं होता है, क्योंकि यह पूरी तरह से गर्भ में शिशु की पोजीशन व् स्वास्थ्य पर निर्भर करने के साथ गर्भवती महिला की शारीरिक परिस्थिति पर भी निर्भर करता है। और यह भी सच है की ज्यादातर गर्भवती महिलाएं यही चाहती हैं की उनका प्रसव सामान्य हो, क्योंकि सामान्य प्रसव में डिलीवरी के दौरान तो दर्द सहन करना पड़ता है। लेकिन डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट होने के साथ जन्म के समय शिशु को होने वाली परेशानियों से बचाव करने में भी मदद मिलती है। ऐसे में सामान्य प्रसव के लिए महिला को अपने शरीर पर जोर नहीं डालना चाहिए बस स्वस्थ रहना चाहिए और अपने खान पान का ध्यान रखना चाहिए।

सामान्य प्रसव के लिए प्रेगनेंसी में आखिरी महीने में क्या खाएं

यदि प्रेग्नेंट महिला चाहती है की वो सामान्य प्रसव से शिशु को जन्म दे, तो इसके लिए महिला को अपने शरीर पर दबाव देने से बेहतर है की महिला अपने खान पान में ऐसी चीजों को शामिल करें जिससे जिससे महिला को स्वस्थ रहने और नोर्मल डिलीवरी होने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की सामान्य प्रसव के लिए प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में गर्भवती महिला को क्या क्या खाना चाहिए।

घी

नोर्मल डिलीवरी के लिए प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को घी का भरपूर सेवन करना चाहिए, और यदि आपकी डिलीवरी की डेट निकल गई है तो आपको घी पीना चाहिए। ऐसा करने से गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने में मदद मिलती है। क्योंकि ऐसा माना जाता है की घी का सेवन करने से गर्भाशय व् प्राइवेट पार्ट की सतह को चिकना करने में मदद मिलती है जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है, लेकिन यदि महिला का वजन अधिक है तो आपको इसका सेवन अधिक नहीं करना चाहिए।

आयरन

पालक, ब्रोकली, गाजर, चुकंदर, अनार, आदि जिन खाद्य पदार्थो में आयरन प्रचुर मात्रा में होता है उन खाद्य पदाथों का सेवन गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। केवल डिलीवरी का समय पास आने पर ही नहीं बल्कि पूरी प्रेगनेंसी के दौरान इन चीजों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला के शरीर में यदि खून की मात्रा पूरी होती है। तो इससे भी नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और साथ ही इनकी तासीर भी गर्म होती है। ऐसे में नौवें महीने में ड्राई फ्रूट्स का सेवन महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। इससे गर्भाशय में संकुचन की शुरुआत करने में मदद मिल सकती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला की नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

कम वसायुक्त मीट

यदि आप नॉन वेज का सेवन कर लेती है तो कम वसा युक्त मीट नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना गया है। इससे बॉडी में आयरन की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलने के साथ इसे महिला को हज़म करने में भी परेशानी नहीं होती है। ऐसे में यदि आप नोर्मल डिलीवरी चाहती है तो प्रेगनेंसी के अंतिम महीने में कम वसा युक्त मीट का सेवन जरूर करना चाहिए।

संतरा

विटामिन सी जैसे एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर संतरा न केवल महिला और शिशु को हर तरह के संक्रमण से बचाव करने में मदद करता है। बल्कि इससे गर्भवती महिला को हाइड्रेट रहने में भी मदद मिलती है, और प्रेग्नेंट महिला का हाइड्रेट रहना और स्वस्थ रहना गर्भवती महिला के नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।

डेयरी उत्पाद

कैल्शियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस, विटामिन बी, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर डेयरी उत्पाद भी प्रेगनेंसी के अंतिम महीने में महिला को भरपूर मात्रा में लेने चाहिए। क्योंकि यह सभी पोषक तत्व यदि गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद होते हैं तो इससे प्रेग्नेंट महिला और शिशु को स्वस्थ रहने के साथ नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

शकरकंद

बीटा कैरोटीन की मात्रा शकरकंद में भरपूर मात्रा में मौजूद होती है। और गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान या प्रेगनेंसी के आखिरी समय में इसका नियमित सेवन करती है तो इससे भी गर्भवती महिला की डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

पानी

खाने के साथ गर्भवती महिला को अपने शरीर में पानी की कमी भी नहीं होने देनी चाहिए। क्योंकि नोर्मल डिलीवरी के लिए जितना बॉडी में पोषक तत्वों की जरुरत होती है उतना ही बॉडी का हाइड्रेट रहने भी जरुरी होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ नारियल पानी, जूस आदि का भी सेवन करना चाहिए। ताकि महिला को एनर्जी से भरपूर ओरे स्वस्थ रहने में मदद मिल सके जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिल सके।

नोर्मल डिलीवरी के लिए अन्य उपाय

  • हल्का फुल्का व्यायाम प्रेगनेंसी के अंतिम महीने में जरूर करें।
  • सैर जरूर करें।
  • खाने में बिल्कुल भी लापरवाही न करें।
  • तनाव लेने से बचें।
  • किसी भी परेशानी के होने पर डॉक्टर को जरूर बताएं।
  • सामान्य प्रसव के लिए शारीरिक रूप से एक्टिव और ऊर्जा से भरपूर रहें।

तो यह हैं कुछ आहार जिन्हे प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को जरूर खाना चाहिए क्योंकि इससे महिला को सामान्य प्रसव होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को फल, हरी सब्जियों, दालों आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

गर्भावस्था में सांस फूलने की समस्या से ऐसे निजात पाएं

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना कर सकती है। और उन्ही परेशानियों में से एक समस्या है महिला को सांस लेने में तकलीफ होना, वैसे तो बहुत सी महिलाएं इस परेशानी का सामना कर सकती है। यह समस्या आम होने के साथ बढ़ने पर महिला व् बच्चे के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आपको सांस लेने में ज्यादा तकलीफ तो नहीं हो रही है, और यदि हो रही है तो इसे अनदेखा न करे।

क्या प्रेगनेंसी में सांस फूलना आम बात होती है?

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं इस समस्या से परेशान हो सकती है लेकिन इस परेशानी का बढ़ना गंभीर समस्या का संकेत दे सकता है। जैसे की अस्थमा जैसी बिमारी होने का खतरा बढ़ता है, यदि शरीर में खून की कमी होती है तो उसके कारण भी प्रेग्नेंट महिला की सांस फूल सकती है। ऐसे में आपको यदि सांस लेने में अधिक तकलीफ है तो तुरंत आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। इसके अलावा और भी कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से गर्भवती महिला की सांस फूल सकती है।

प्रेगनेंसी में सांस फूलने के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रोजेस्ट्रोन व् एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने लगता है जिसके कारण महिला को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। क्योंकि यह हॉर्मोन सांस लेने की नली में तरल चीजों का जमाव बढ़ा देते हैं।
  • प्रेग्नेंट महिला वजन लगातार बढ़ता है और बढ़ते वजन के कारण गले के कोमल टिशू में वसा का जमाव हो सकता है जिसके कारण महिला को सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है।
  • प्रेग्नेंट महिला, आम महिलाओं के मुकाबले खर्राटे अधिक लेती है जिसके कारण नाक से सांस लेने के मार्ग में रुकावट आती है और महिला को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • भ्रूण का बढ़ता आकार और गर्भाशय के आकार का बढ़ना डायाफ्राम को धक्का देता है, जिससे फेफड़ों के लिए जगह बहुत हो सीमित हो जाती है और उनको फैलने में परेशानी आने लगती है। ऐसे में इस कारण भी प्रेग्नेंट महिला सांस फूलने की समस्या का सामना कर सकती है।
  • प्रेगनेंसी में बॉडी में ब्लड का वॉल्यूम बढ़ जाता है जो सांस लेने के मार्ग को प्रभावित कर सकता है। जिसके कारण महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि किसी प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी या अन्य कोई शारीरिक बिमारी होती है तो भी प्रेग्नेंट महिला को इस समस्या के होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • कुछ प्रेग्नेंट महिलाएं अस्थमा से पीड़ित होती है उन महिलाओं की यह समस्या प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ सकती है।

प्रेगनेंसी में सांस फूलने की समस्या से बचने के उपाय

यदि आप माँ बनने वाली है और आपको सांस फूलने की समस्या है तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करने से आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

वसा युक्त भोजन न करें

उन चीजों का सेवन बिलकुल न करें जिसमे घी, तेल, रिफाइंड, मसालों आदि का ज्यादा इस्तेमाल होता है। क्योंकि इसके कारण बॉडी में फैट का जमाव अधिक होता है जिससे गर्भवती महिला की सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस तरह के भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए।

आयरन व् विटामिन सी युक्त आहार का सेवन करें

उन चीजों का सेवन भरपूर मात्रा में करें जिनमे आयरन व् विटामिन सी की अधिकता होती है। ताकि शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिल सके और बॉडी के सभी अंगो तक ब्लड का प्रवाह अच्छे से हो सके। ऐसा करने से भी सांस फूलने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। और इसके लिए हरी सब्जियां, अनार, सेब, बीन्स, आदि का सेवन प्रेग्नेंट महिला कर सकती है।

बैठने और सोने की पोजीशन का ध्यान रखें

गलत तरीके से सोने या बैठने के कारण भी प्रेग्नेंट महिला को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए महिला को बैठते समय अपने कन्धों को पीछे की और झुकाकर बैठना चाहिए और छाती को आगे की और बढाकर बैठना चाहिए। इस तरीके से बैठने से महिला को सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं होती है। साथ ही सोते समय सीधा होकर नहीं सोना चाहिए, बल्कि बाईं और करवट लेकर पैरों और सिर के नीचे दो सिरहाने लगाकर सोना चाहिए।

आराम करें

प्रेगनेंसी के दौरान हल्का फुल्का काम गर्भवती महिला कर सकती है लेकिन किसी काम को करने में यदि महिला को दिक्कत हो रही है, थकावट महसूस हो रही है तो महिला को पहले बैठकर आराम करना चाहिए। क्योंकि लगातार एक ही काम को करने से शरीर थका हुस महसूस करता है जिससे सांस फूल सकती है। और यदि महिला काम के साथ आराम भी भरपूर करती है तो इससे महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्रीथिंग व्यायाम करें

नाक से सांस लेकर मुँह से सांस को छोड़ें, इस व्यायाम को रोजाना करें, यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला इस व्यायाम को रोजाना करती है तो इससे भी महिला को सांस लेने में होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा थोड़ी बहुत सैर करना भी महिला के लिए फायदेमंद हो सकता है।

सांस फूलने की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलें

  • यदि अचानक ही प्रेग्नेंट महिला को सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगे।
  • प्रेग्नेंट महिला को यदि सांस लेने में बहुत जोर लगाना पड़ता है तो इसे अनदेखा न करते हुए जल्द डॉक्टर के पास जाएँ।
  • यदि आपको ऐसा लग रहा है की आपको सांस लेने की समस्या धीरे धीरे बढ़ रही है।
  • गले में किसी भी तरह की दिक्कत होने पर जिससे सांस लेने में तकलीफ हो।
  • यदि आपको सांस लेने में इतनी परेशानी होती है की रात को बार बार उठना पड़ता है।

तो यह है प्रेगनेंसी में सांस लेने से जुडी समस्या से जुडी बातें, यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको इन सभी बातों की जानकारी होनी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपको यह परेशानी हो तो इस समस्या से बचे के लिए आप क्या कर सकती हैं इसकी जानकारी आपको होनी चाहिए।

होली पर प्रेग्नेंट महिला बरतें यह सावधानियां

कोई भी त्यौहार हो उसके आने की ख़ुशी बहुत दिन पहले से ही होने लग जाती है। की इस बार ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे, और त्यौहार के दिन तो ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं होता है। जैसे की 10 मार्च को होली का त्यौहार आने में अब थोड़ा ही समय रह गया है। और होली रंगों का त्यौहार है और इस त्यौहार पर चारों तरफ रंगों की धूम देखने को मिलती है। जहां हर कोई इस त्यौहार का खूब आनंद लेता है वहीँ प्रेग्नेंट महिला को इस दौरान बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

क्योंकि होली के रंगों के कारण, पानी वाली होली खेलने के कारण, खान पान में लापरवाही बरतने के कारण गर्भवती महिला के साथ महिला के पेट में पल रहे बच्चे को भी परेशानी हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को होली के अवसर पर कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि महिला व् शिशु को हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

होली पर प्रेग्नेंट महिला केमिकल वाले रंगों से दूरी रखे

  • होली खेलने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों में केमिकल की मिलावट हो सकती है।
  • ऐसे में यदि गर्भवती महिला केमिकल के संपर्क में आती है।
  • तो इसके कारण महिला व् शिशु की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • साथ ही होली के रंगों के कांच के छोटे छोटे टुकड़ों की मिलावट भी हो सकती है।
  • ऐसे में महिला को गुलाल से जितना हो दूरी रखनी चाहिए।

पानी से बचें

  • होली के दिन पानी से भी लोग बहुत ज्यादा खेलते हैं।
  • लेकिन प्रेग्नेंट महिला को पानी से भी नहीं खेलना चाहिए।
  • क्योंकि पानी में खेलने के कारण गर्भवती महिला के फिसलने का खतरा होता है।
  • और फिसलने के कारण महिला के साथ शिशु को दिक्कत हो सकती है।
  • इस दिन महिला को पानी से दूरी रखनी चाहिए और चप्पल ऐसी पहननी चाहिए की उसमे आप फिसले नहीं।

होली पर प्रेग्नेंट महिला खान पान में बरतें सावधानी

  • त्यौहारों में बाजार से मिठाइयां आने के साथ घर में भी पकवान बनाएं जाते हैं।
  • और अधिकतर चीजें मीठी और तली हुई ही होती है।
  • जो की गर्भवती महिला की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकती है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला स्वाद के लिए थोड़ा बहुत खा सकती है जितना महिला को हज़म करने में कोई दिक्कत न हो।
  • साथ ही महिला बाहर से लाइ गई मिठाइयों का सेवन करने की बजाय घर में बनी चीजों का ही सेवन करें।

भीड़ में न जाएँ

  • होली के दिन हर जगह भीड़ होती हैं।
  • ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वह भीड़भाड़ वाली जगह पर न जाए।
  • क्योंकि भीड़भाड़ में जाने के कारण गर्भवती महिला को धक्का आदि लगने के साथ इन्फेक्शन होने का खतरा भी रहता है।

किसी को खुश करने के लिए कुछ न करें

  • प्रेग्नेंट महिला होली के दिन इस बात का ध्यान रखें की किसी को खुश करने के लिए कुछ भी न करें।
  • जैसे की यदि कोई भी आपके पास आए और कहे की थोड़ा रंग लगवा लें तो बिल्कुल मना कर दें।
  • साथ ही बच्चों से भी थोड़ा दूरी रखें।
  • क्योंकि बच्चों को कुछ पता नहीं होता है ऐसे में बच्चों के चक्कर में किसी तरह की परेशानी न हो।

तो यह हैं कुछ सावधानियां, जो प्रेग्नेंट महिला को होली के दिन बरतनी चाहिए। ताकि महिला व् शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकने के उपाय

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकने के उपाय:-

प्रेगनेंसी की समस्या: प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत खास लम्हा होता हैं| गर्भावस्था के दौरान महिलाएँ बहुत सी परेशानियों से गुजरती हैं| जैसे की शरीर में होने वाले कई दर्द, उल्टी आना, चक्कर आना आदि| यदि ये समस्या ज्यादा हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए| गर्भावस्था के किसी भी लक्षण को हल्के में नहीं लेनी चाहिए| थोड़ी सी भी समस्या हो तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए|

प्रेगनेंसी में कई महिलाओ को ब्लीडिंग की समस्या भी हो जाती हैं| ऐसे में इस समस्या के होते ही बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए| पहले तीन महीने में खून का एक थप्पा भी गर्भपात की और संकेत कर देता हैं| ऐसे में यदि इस समस्या को अनदेखा किया जाएँ तो आपको परेशानी हो सकती हैं| इसीलिए इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए|

प्रेग्‍नेंसी के दौरान आखिरी समय में ब्‍लीडिंग की समस्‍या होने पर उसे बिल्‍कुल भी इग्‍नोर न करें| इस समय में हल्‍की ब्‍लीडिंग होना सामान्‍य है| 10 में से 1 महिला को ऐसी दिक्‍कत होती ही है, जब वह पूरे नौ महीने की गर्भावस्‍था में होती है| अगर ब्‍लीडि़ंग होती है तो उसका मतलब यह नहीं होता है कि मिस्‍कैरेज यानि गर्भपात हो गया| ऐसा होने पर भी तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए|

प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही में अक्सर यदि प्रेगनेंसी की दूसरी या तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग हो तो फिर किसी गंभीर समस्या की संभावना बन जाती है| और इसे बिकुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए| ब्लीडिंग होने के कई कारण हो सकते हैं| ब्लीडिंग किसी तरह के इंफैक्शन, तनाव से हार्मोन में परिवर्तन और गलत तरीके से शारीरिक संबंध बनाने से होती है|

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने पर ध्यान रखे ये बातें:-

  • अगर ब्लीडिंग हो रही है, तो आपको पैड या पैंटी जरूर पहननी चाहिए| इससे आपको पता चल जाएगा कि कितनी ब्लीडिंग हो रही है और किस प्रकार की ब्लीडिंग हो रही है|
  • ब्लीडिंग होने पर योनि एरिया में डूश न करें|
  • गर्भावस्था में न ही ब्लीडिंग के दौरान शारीरिक संबंध बनाएं|
  • ब्लीडिंग के दौरान अगर आप अन्य किसी तरह का लक्षण जैसे की ज्यादा पेट दर्द का होना आदि, महसूस करें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें|
  • अगर आपको गर्भावस्‍था के दौरान ब्लीडिंग होती है तो परेशान न हों, शांत रहें, ध्‍यान दें कि क्‍या आपको ज्‍यादा दर्द है या फिर ब्‍लड़ ज्‍यादा निकल रहा है, इस बात को अपने डॉक्‍टर को सही-सही बताएं, जिससे वो आपको सही राय और उपचार दे सकें|

गर्भावस्था में ब्लीडिंग होने पर गर्भपात के लक्षण:-

योनि से निकलने वाले खून या डिस्‍चार्ज का रंग और महक पर ध्‍यान जरूर देना चाहिए, क्योंकि कई बार इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता हैं की ब्लीडिंग नार्मल हैं या खतरनाक हैं| साथ खून कितनी तेजी से बहता है, गाढ़ा है सा पतला आदि को भी ध्‍यान में रखना चाहिए| आइये गर्भपात के अन्य लक्षणों को जानते हैं|

  • हल्‍के गुलाबी- लाल या भूरे रंग का डिस्‍चार्ज का योनि में से निकलना|
  • पीरियड्स की तरह पेट व् कमर में दर्द होना|
  • तेजी से गाढ़े लाल रंग का खून निकलना व् योनि में खिंचाव होना|
  • खून के गाढ़े थक्‍के निकलना और पेट का दर्द तेजी से बढ़ते देना|
  • अन्‍य दिनों से ज्‍यादा दर्द या खून बहना भी गर्भपात का लक्षण हो सकता हैं|

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग को रोकने के लिए तुरंत संपर्क करें, डॉक्टर से:-

प्रेगनेंसी का हर पल बहुत ही अहम होता हैं| ऐसे में जरुरी हैं की आप यदि कभी भी ऐसा पेट में दर्द महसूस करें,जैसा की पीरियड्स के दौरान होता हैं| इसे बिल्कुल भी अनदेखा न करें, चाहे ब्लीडिंग हो या न हो| और प्रेगनेंसी के पहले तीन महीना में सम्भोग के दौरान सुरक्षा का इस्तेमाल करें, साथ ही कोशिश करे की आप कोई भी ऐसा काम जैसे की भरी सामान उठाना न करें|

क्योंकि कई बार इससे भी ब्लड आने का खतरा हो जाता हैं| इसके आलावा आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की आप अपने डॉक्टर से सारी बात को खुल कर कहें और किसी भी तरह की असावधानी न बरते| जिससे की बाद में कोई नुक्सान हो| गर्भावस्था के आखिरी के महीनो में ब्लड आने की सम्भावना बहुत कम होती हैं| फिर भी आपको अपना ध्यान रखना चाहिए|

तो ये कुछ बातें हैं जो आपको इस बात के बारे में बताती हैं, गर्भावस्था में ब्लीडिंग सही हैं या नहीं? और इसके उपचार के लिए आपको क्या करना चाहिए| प्रेगनेंसी में थोड़ा सा ब्‍लड का थक्‍का भी गर्भपात की निशानी होता है| इसलिए आपको अपना ध्यान रखना चाहिए| लेकिन गर्भावस्‍था के तीसरे महीने के बाद ऐसा होने की संभावना बहुत कम होती है| और आपको समय-समय पर डॉक्टर को चेक कराते रहना चाहिए|

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प्रेगनेंसी में कैल्शियम और आयरन नहीं लेने पर क्या- क्या दिक्कत होती है

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गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर मात्रा में पोषक तत्व लेने की सलाह दी जाती है, ताकि इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और यदि गर्भवती महिला के शरीर में यदि पोषक तत्वों की कमी होती है तो इसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है साथ ही शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर द्वारा भी गर्भवती महिला को फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम की गोलियां खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला इनका सेवन सही तरीके से नहीं करती है तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की परेशानियां बढ़ सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान कैल्शियम व् आयरन की कमी के कारण होने वाली समस्याएं कौन सी है।

एनीमिया

एनीमिया की समस्या का कारण बॉडी में खून की कमी होता है, और इसके कारण शिशु के विकास में कमी आने के साथ, कमजोरी, थकान, डिलीवरी के दौरान परेशानी, चक्कर, आदि की समस्या का सामना गर्भवती महिला को भी करना पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान शिशु के बेहतर विकास और गर्भवती महिला को स्वास्थ्य को फिट रखने के लिए आयरन की कमी को शरीर में नहीं होने देना चाहिए।

हड्डियों में कमजोरी

शिशु के बेहतर शारीरिक विकास और गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रखने के लिए बहुत जरुरी होता है की शरीर में कैल्शियम की मात्रा भरपूर हो। क्योंकि शरीर में कैल्शियम की कमी होने के कारण शरीर अपनी जरुरत को पूरा करने के लिए कैल्शियम हड्डियों से लेने लगता है जिसके कारण हड्डियों में कमजोरी आ जाती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम व् आयरन की मात्रा भरपूर लेनी चाहिए।

शिशु के विकास में कमी

गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से गर्भवती महिला पर निर्भर करता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, आयरन की कमी होती है तो इसके कारण शिशु को गर्भ में पोषक तत्व भरपूर नहीं मिल पाते हैं। और पोषक तत्वों की कमी होने के कारण शिशु के शारीरिक विकास में कमी आ सकती है।

शरीर में दर्द व् कमजोरी

प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी होने के साथ हड्डियों में कमजोरी आने का कारण बॉडी में आयरन व् कैल्शियम की कमी के कारण हो सकता है। और इनकी कमी होने के कारण महिला को पीठ में दर्द, सिर दर्द, जोड़ो में दर्द, जल्दी थकान, कमजोरी का अनुभव होने की समस्या होने लगती है, जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत ज्यादा परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

ऑक्सीजन बेहतर तरीके से नहीं मिलती है

लाल रक्त कोशिकाओं के माध्यम से ही बॉडी में सभी अंगो और उत्तकों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का प्रवाह होता है, और गर्भ में पल रहे शिशु को भी रक्त के माध्यम से ही ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आयरन की कमी होने के कारण बॉडी में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है जो की गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को कैल्शियम व् आयरन की कमी के कारण हो सकते है, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान कैल्शियम व् आयरन की दवाई का सेवन कभी भी आपको खाली पेट नहीं करना चाहिए। खाने के आधे घंटे बाद ही इनका सेवन करें क्योंकि खाली पेट सेवन करने से आपको मुंह सूखना, बार- बार पेशाब जाने की इच्छा होना, मुंह का स्वाद बिगड़ना, उल्टियां होना, कब्ज, पेट में गैस, भूख न लगना, पेट में दर्द, आदि जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।