Home Blog Page 235

कोहनी, घुटनो और एड़ी का कालापन दूर करने के उपाय

आपके चेहरे पर चाँद की चांदनी जैसा नूर है, और हाथो और टांगो की स्किन भी दमकती हुई है, परंतु आपकी कोहनी, घटनो और एड़ी का रंग न तो आपके चेहरे से मेल खा रहा है, और साथ ही आपकी पर्सनैलिटी को भी ख़राब कर रहा है, आपके जॉइंट्स की अच्छे से सफाई न होने के कारण उस पर मैल जमने लगता है, जिसके कारण उसका कालापन बढ़ जाता है, तो आइये आज हम आपको इनके कालेपन को दूर करके इन्हें चमकाने के लिए कुछ टिप्स बताते है।

चेहरे की साफ़ सफाई पर हम महिलाएं सबसे ज्यादा ध्यान देती है, और हाथो पैरो को भी मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करकेसाफ रखने की कोशिश करती है, परंतु फिर भी जॉइंट्स आपके चेहरे की त्वचा से बिलकुल भी मेल नहीं खाते है, और कोहनी, घुटनो और एड़ी का कालापन एक आम समस्या होती है, और महिलाएं इन पर ज्यादा ध्यान भी नहीं देती है, परंतु क्या आप जानती है, इसके कारण आपकी पर्सनैलिटी पर बुरा असर पड़ता है, और इसका उपचार आसानी से किसी क्रीम से होता है, और न ही किसी स्क्रब से आसानी से इसे दूर किया जा सकते है, परंतु ये ऐसी भी समस्या नहीं है, की जिसका कोई इलाज़ न हो, बल्कि कुछ घरेलु उपचार को नियमित रूप से करने पर आपको अपनी कोहनी, घुटनो, और एड़ी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है, तो आइये जानते है की वो कौन से टिप्स है।

निम्बू और मलाई का इस्तेमाल करें:-

निम्बू में कुछ ऐसे एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है, जो आपकी मृत त्वचा को हटाने में मदद करते है, और साथ ही इसके ब्लीचिंग एजेंट के गुण आपके रंग को भी निखारने में मदद करते है, इसके लिए आप एक निम्बू का रस निकाल कर उसमे थोड़ी सी मलाई को अच्छे से मिक्स करें, और उसके बाद अपनी कोहनी, घुटनो और एड़ी पर अच्छे से लगाकर मसाज करें, और सूखने के लिए छोड़ दें, ऐसा करने से आपको इन तीनो के कालेपन की समस्या से निजात मिलेगा, और साथ ही मलाई से त्वचा की कोमलता भी बनी रहेगी, आप निम्बू को यदि सीधा भी कोहनी या घटने पर इस्तेमाल करती है, तो इसके कारण भी आपके कालेपन की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

coconut-oil

नारियल का तेल कालेपन को दूर करने के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं होता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप नियमित रूप से अपनी कोहनी, घुटनो और एड़ी पर इसे लगाएं, ऐसा करने से आपकी त्वचा पर गंदगी नहीं जमती है, और नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने पर आपके कालेपन की समस्या को दूर करने में भी मदद मिलती है, और त्वचा की कोमलता को भी बरकरार रखने में मदद मिलती है।

शहद का इस्तेमाल करें:-

शहद में प्राकृतिक गुण होते है जो आपकी तवचज के कालेपन को दूर करने में मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए थोड़ा शहद लें, और उसमे थोड़ा पानी मिलाएं, उसके बाद इसे अच्छे से अपनी कोहनी, घुटनो और एड़ी पर लगाएं, और स्क्रब की तरह अच्छे से मसाज करें, ऐसा करने से त्वचा की डेड स्किन निकल जायेगी, और सूखने के बाद इसे धो दें, ऐसा करने से आपकी त्वचा के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें:-

एलोवेरा भी कोहनी, घुटनो और एड़ी के कालेपन को दूर करने के लिए एक अच्छा विकल्प होता है, इसके लिए आप सीधा एलोवेरा जेल को अच्छे से अपने घटने, कोहनी, और एड़ी को मसाज करें, और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, और यदि आप नियमोत रूप से इसका इस्तेमाल करते है, तो प्राकृतिक तरीके से आपकी त्वचा के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है, और साथ ही आपको स्किन को कोमल बना रहने में भी मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

तीन हिस्से बेकिंग सोडा के, और एक हिसा पानी का मिला कर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने घुटने कोहनी और एड़ी पर लगाकर अच्छे से मसाज करें, इसके कारण भी आपकी त्वचा के डेड स्किन को निकलने में मदद मिलती है, इसके साथ आप इसे सूखने के लिए भी छोड़ दें, और जैसे ही ये सुख जाएँ, उसके बाद इसे अच्छे से पानी से साफ़ करें, ऐसा करने से आपकी त्वचा की चमक को बढ़ने में मदद मिलती है, और साथ ही घुटनो, एड़ी, और कोहनी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

चीनी का इस्तेमाल करें:-

चीनी का इस्तेमाल भी आप स्क्रब की तरह करके कोहनी, घटनो, और एड़ी के कालेपन और टैनिंग को खत्म कर सकते है, क्योंकि इसके इस्तेमाल से त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर त्वचा में जान लाने में और ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप चीनी और ओलिव ऑयल को बराबर मात्रा में लें, और इससे कम से कम पांच मिनट तक अच्छे से मसाज करें, और उसके बाद धो दें, हफ्ते में तीन बार भी यदि आप इसका इस्तेमाल करते है, तो आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

बादाम का इस्तेमाल करें:-

almond

बादाम और बादाम का तेल दोनों का ही इस्तेमाल करके आप अपनी त्वचा में निखार ला सकते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप बादाम का पाउडर एक चम्मच लें, और उसके बाद उसमे थोड़ा सा दही मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपनी कोहनी, घुटने, और एड़ी की अच्छे से मसाज करें, ऐसा करने के बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दें, और उसके बाद ठन्डे पानी की मदद से धो दें, कुछ ही दिनों के नियमित इस्तेमाल से आपको खुद ही फ़र्क़ दिखने लगेगा।

सिरका और दही का इस्तेमाल करें:-

सिरके और दही का इस्तेमाल करने से भी आपको अपनी कोहनी, घुटनो और एड़ी के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है, क्योंकि सिरके में प्राकृतिक रूप से एसिड विद्यमान होता है, जिसके कारण ये आपके कालेपन को दूर करता है, और साथ ही दही का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा की नमी को बरकरार रखने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप सिरका और दही को बराबर मात्रा में मिला लें, और उसके बाद इसे अच्छे से अपनी कोहनी, घुटनो और एड़ी पर मसाज करें और सूखने के लिए छोड़ दे, और उसके बाद धो लें, ऐसा करने से आपको कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

कोहनी, घटने, और एड़ी का कालापन दूर करने के अन्य टिप्स:-

  • बेसन और दही का पेस्ट बनाकर इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या से राहत मिलती है।
  • आलू के रस का इस्तेमाल करने से भी आपके डेड स्किन को हटा कर त्वचा को चमकदार बना सकते है।
  • एक कप पुदीने की पत्तियो को थोड़े से पानी में अच्छे से उबाल लें, और उसके बाद इस पानी में निम्बू का रस मिलाएं, और रुई की मदद से इसे अच्छे से साफ़ करें, ऐसा करने से भी आपको कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।
  • दूध में विटामिन और फैटी एसिड भरपूर पाएं जाते है, जो आपकी त्वचा की चमक को बढ़ाने में आपकी मदद करते है। इसके इस्तेमाल के लिए आप काली पड़ी स्किन को दिन में तीन से चार बार कच्चे दूध से साफ़ करें।
  • निम्बू का सीधा इस्तेमाल आपकी स्किन पर करने से भी आपकी कालेपन की समस्या को दूर करके उससे निजात पाया जा सकता है।दही का इस्तेमाल करके भी आप कोहनी घुटने और एड़ी के कालेपन की समस्या से राहत पा सकते है।

तो ये है कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको अपनी कोहनी, घुटनो, और एड़ी का कालापन दूर करने में मदद मिलती है, साथ ही स्नान करते समय भी आपको अच्छे से इनकी सफाई पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यदि आप इनकी नियमित रूप से सफाई नहीं करते है, तो इसके कारण इसके ऊपर मिट्टी की परत जमने लगती है, जिसके कारण आपकी त्वचा पर डेड स्किन सेल्स इक्कठे हो जाते है, और आपकी कोहनी, घुटने, और एड़ी काली पड़ जाती है, और उसके बाद यदि आप इस समस्या से परेशान है तो इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आप इनके कालेपन की समस्या को दूर कर सकते है।

प्रेगनेंसी रिस्की कब होती है जानें

यदि किसी भी महिला से पूछा जाए की उसकी जिंदगी का सबसे अनोखा अनुभव कौन सा होता है तो ज्यादातर महिलाएं प्रेगनेंसी को ही बताती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के समय महिला अपने गर्भ में एक नन्ही जान को रखती है और पूरे नौ महीने तक उसका गर्भ में पालन पोषण करने में बाद उसे जन्म देती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी जटिलताओं का सामना भी करना पड़ता है। जैसे की कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी, बॉडी पेन, सूजन, ब्लड प्रेशर, से लेकर लेबर पेन तक का दर्द सहना पड़ता है। लेकिन डिलीवरी के बाद आपको इन सब परेशानियों से निजात मिल जाता है।

लेकिन क्या आप जानते है की प्रेगनेंसी का भी एक सही समय होता है, एक उम्र होती है। ऐसे में आपको प्रेगनेंसी से जुडी बहुत सी बातों का पता होना चाहिए क्योंकि कई बार प्रेगनेंसी भी रिस्की हो सकती है। अब आप ऐसा सोच रहें होंगे की हम ऐसा क्यों कह रहे है? क्योंकि कुछ महिलाएं तीस की उम्र के बाद प्रेग्नेंट होने का फैसला लेती है, तो कुछ महिलाएं बहुत कम उम्र में ही माँ बन जाती है, कुछ शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार नहीं होती है, तो कुछ किसी बिमारी से पीड़ित होती हैं, आदि। ऐसे में प्रेगनेंसी रिस्की हो सकती है। तो आइये विस्तार से जानते है प्रेगनेंसी कब और क्यों रिस्की होती है।

प्रेगनेंसी रिस्की कब होती है:-

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत बहुत की खास लम्हा होता है लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान आपको बहुत सी सावधानियां बरतनी पड़ती है। साथ ही प्रेगनेंसी के लिए सही समय और आपकी शारीरिक और मानसिक फिटनेस भी बहुत जरुरी होती है। तो आइये जानते हैं की प्रेगनेंसी आपके लिए कब रिस्की हो सकती है।

ज्यादा उम्र होने पर:-

कुछ महिलाएं तीस या उससे ऊपर की उम्र होने के बाद गर्भवती होने का फैसला करती है। लेकिन ज्यादा उम्र होने के बाद अंडाशय में अंडे बनने कम हो जाते है साथ ही प्रेगनेंसी भी कम होने की सम्भावना होने लगती है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हो जाते हैं तो ऐसे में आपको बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, साथ ही अपना बहुत अधिक ख्याल रखना पड़ता है। और इस समय में थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को ही नुकसान पहुंचा सकती है। इसीलिए कहा जाता है की अधिक उम्र में माँ बनना रिस्की होता है।

कम उम्र में माँ बनना भी होता है रिस्की:-

कई बार जल्दी शादी होने के कारण प्रेगनेंसी भी जल्दी ही हो जाती है, लेकिन उस समय आपका शरीर प्रेगनेंसी की जटिलताओं को सहने के लिए तैयार नहीं होता है। जिसके कारण गर्भपात का खतरा बहुत ज्यादा होता है, साथ ही यह महिला की सेहत के लिए भी बहुत हानिकारक होता है। ऐसे में कई बार गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी असर पड़ता है। इसीलिए माँ बनने की सही उम्र बाइस साल के बाद होती है तो उससे पहले माँ बनने के लिए आपको अच्छे से फिट होना चाहिए।

किसी बिमारी के कारण:-

यदि कोई महिला किसी शारीरिक परेशानी से जूझ रही है और इस दौरान वो प्रेग्नेंट हो जाती है। तो ऐसे में यह महिला के लिए हानिकारक होता है साथ ही महिला की बिमारी का दुष्प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर भी पड़ता है। और महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जैसे की शुगर की बिमारी वाली महिला यदि प्रेग्नेंट होती है तो उसे इन्सुलिन के इंजेक्शन लगवाने पड़ते है। और उसकी डिलीवरी में भी परेशानी आ सकती है। इसके अलावा यदि महिला किसी और बिमारी से भी पीड़ित हो तो प्रेगनेंसी के दौरान कई तरह के रिस्क होते है, ऐसे में आपको डॉक्टर की सलाह लेते रहना चाहिए।

सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद:-

सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला को अच्छे से फिर होने में कम से कम छह महीने का समय लगता है। और उसके कम से कम डेढ़ से दो साल तक महिला को प्रेगनेंसी नहीं करनी चाहिए। और इसके लिए ध्यान रखना चाहिए लेकिन यदि महिला सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक साल बाद या उससे पहले ही दुबारा प्रेग्नेंट हो जाती है। तो ऐसे में उसे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और यह महिला के लिए रिस्की हो सकता है इसीलिए महिला को सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रेगनेंसी का फैसला बहुत ही सोच समझ कर लेना चाहिए। इसके अलावा नार्मल डिलीवरी के बाद भी महिला को शारीरिक रूप से फिट होने के बाद ही दूसरी बार प्रेगनेंसी का फैसला लेना चाहिए।

शारीरिक व् मानसिक रूप से तैयार न होने पर:-

कुछ महिलाएं शारीरिक रूप से कमजोर होने के साथ प्रेगनेंसी के लिए मानसिक रूप से भी तैयार नहीं होती है। ऐसे में यदि वो प्रेग्नेंट हो जाती है तो शरीरिक परेशानी के साथ उन्हें तनाव जैसी समस्या का भी सामना करना पड़ता है। इसीलिए महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए। की जब भी महिला प्रेगनेंसी का फैसला लेती है तो उसे शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी फिट होना चाहिए। यदि महिला मानसिक रूप से तैयार नहीं होती है तो ऐसे में प्रेगनेंसी में गर्भपात और ने समस्या का रिस्क ज्यादा होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी से जुडी कुछ बातें इसीलिए महिलाओं को प्रेगनेंसी को लेकर इन चीजों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने के कारण आपको प्रेगनेंसी से जुडी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। और जब भी आप प्रेगनेंसी के लिए तैयार होती है तो एक बार अच्छे से अपनी जाँच भी जरूर करवानी चाहिए, ताकि महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

प्रेगनेंसी टेस्ट में एक लाइन हल्की और एक लाइन डार्क का मतलब

प्रेगनेंसी चेक करना आज कल किसी के लिए भी मुश्किल नहीं है बल्कि आप घर में ही प्रेगनेंसी किट लाकर प्रेगनेंसी चेक कर सकते है। यह आपको आसानी से किसी भी मेडिकल की दूकान पर मिल जाती है। और इस टेस्ट को करने के लिए आप सुबह उठने के बाद सबसे पहले यूरिन का इस्तेमाल करें क्योंकि उस समय हॉर्मोन अधिक संवेदनशील होते है। और आप इस टेस्ट को आपके पीरियड्स मिस होने के एक हफ्ते बाद कर सकते है। इस किट को खोल कर इसमें तीन बूंद यूरिन की डालकर इस टेस्ट को किया जाता है।

उसके बाद इसमें दो लाइन आती है एक जो यह दिखाती है की यह प्रेगनेंसी किट सही है। और दूसरी यह दिखाती है की आप प्रेग्नेंट है। लेकिन यदि इस किट में एक ही लाइन दिखती है तो इसका मतलब यह होता है की आपका टेस्ट नेगेटिव है। लेकिन कई बार प्रेगनेंसी टेस्ट करते हुए बिलकुल हल्की सी लाइन आती है। यह आपकी प्रेगनेंसी चेक करने की संवेदनशीलता पर निर्भर करता है। क्योंकि कई बार जो किट आप इस्तेमाल करते है वो कम संवेदनशील होती है जो आपके परिणाम की गणना अच्छे से नहीं कर पाती है।

साथ ही प्रेगनेंसी का सही रिजल्ट तभी आता है जब बॉडी में h.c.g हॉर्मोन सही मात्रा में स्त्रावित होता है। और यह हॉर्मोन यदि आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में होता है तभी आपका परिणाम पॉज़िटिव आता है नहीं तो नहीं आता है। और यह हॉर्मोन आपका गर्भधारण होने के छह से बारह दिन के बीच में बॉडी में अच्छे से स्त्रावित होना शुरू हो जाता है। क्या आपके भी पीरियड मिस हो गए है? और आप भी सोच रही है की घर पर ही प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाए। तो आइये आज जानते है की प्रेगनेंसी किट में लाइन के हलके और डार्क आने का क्या मतलब होता है।

प्रेगनेंसी टेस्ट में एक लाइन हल्की और एक लाइन डार्क आने का मतलब:-

घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करने के बाद यदि एक लाइन हल्की और एक लाइन डार्क आने का मतलब न तो आपकी प्रेगनेंसी को पॉज़िटिव बताता है और न ही नेगेटिव बताता है। यदि प्रेगनेंसी टेस्ट करने के बाद आपकी एक लाइन डार्क और एक हल्की आती है तो आपको तीन या चार दिन बाद दुबारा टेस्ट करना चाहिए। साथ ही टेस्ट करने के लिए आपका सही समय पीरियड्स के मिस होने के एक हफ्ते बाद होता है। क्योंकि इस समय आपके शरीर के HCG हॉर्मोन की क्रियाशीलता ज्यादा होती है।

जिससे आपको प्रेगनेंसी का सही परिणाम मिलता है, इसके अलावा आपको इस बात का भी खास ध्यान रखना चाहिए की जब भी आप प्रेगनेंसी टेस्ट करें तो सुबह के सबसे पहले यूरिन का इस्तेमाल करें। और उसके बाद यदि आपका प्रेगनेंसी टेस्ट सही नहीं आता है और आप दुबारा टेस्ट करने की सोच रहे है तो उसके लिए आपको नई किट का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसे आप अपनी प्रेगनेंसी के सही परिणाम की सही जांच कर सकते है, उसके बाद भी आप चाहे तो एक बार डॉक्टर की राय ले सकते है।

प्रेगनेंसी टेस्ट करने का तरीका:-

सबसे पहले बाजार से एक प्रेगनेंसी टेस्ट किट लेकर आए। उसके बाद सुबह उठकर सबसे पहले यूरिन को एक सूखे और साफ़ ढक्कन में लें, फिर प्रेगनेंसी टेस्ट किट को खोलें। उसमे यूरिन के लिए एक ड्रॉपर होता है। उसके बाद ड्रॉपर में यूरिन को भरें, और किट पर जहां S लिखा है उसमे तीन बूंदे आराम से डालें। फिर आप इंतज़ार करें यदि किट पर लिखा C डार्क हो जाता है तो इसका मतलब होता है की प्रेगनेंसी किट सही है। और फिर T भी डार्क हो जाता है तो इसका मतलब होता है की आप गर्भवती है, और यदि T डार्क नहीं होता है तो इसका मतलब होता है की आपका टेस्ट नेगेटिव है।

तो यदि आप भी घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट कर रही है, और इसमें आपकी लाइन हल्की आने के बाद दुबारा टेस्ट करें। नहीं तो आप इसे कन्फर्म करने के लिए डॉक्टर के पास भी जा सकते है। क्योंकि किसी भी महिला के लिए एक बार प्रेगनेंसी टेस्ट में हल्की लाइन आने के बाद दुबारा इंतज़ार कर पाना भावनात्मक रूप से थोड़ा कठिन हो सकता है। इसीलिए आप चाहे तो एक बार डॉक्टर की राय ले सकते है।

चिकनपॉक्स के दाग दूर करने के उपाय

Home Remedies To Remove Chickenpox Scars

चेचक के दाग दूर करने के घरेलू उपाय, Home Remedies To Remove Chickenpox Scars, How to remove chechak spots, Chechak ke sposts dur karne ki tips in hindi

किसी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने, खान पान में लापरवाही बरतने, अत्यधिक ठंड या गर्मियों में गर्मी पड़ने के कारण चेचक बड़ी आसानी से एक से दूसरे व्यक्ति को हो जाता है। जिसे आम भाषा में चिकन पॉक्स, छोटी माता या बड़ी माता के नाम से जाना जाता है। इस समस्या के होने पर त्वचा पर लाल रंग के दाने निकलते है जिनमे पानी भर जाता है।

लेकिन समस्या ठीक हो जाने के बाद ये दाने सूखने लगते है और पपड़ी जन्मे लगती है जिसके बाद उस जगह दाने के निशान और गड्ढे बन जाते है। जो बाद में काफी खराब लगते है। वैसे बड़ों की माने, तो ऐसे निशान केवल तभी पड़ते है जब या तो उन्हें छू लिया जाए या उन्हें नाखूनों को खरोंच लिया जाए।चेचक के दाग दूर करने के घरेलू उपाय

क्योंकि यह समस्या पुरे शरीर में एक समान रूप से होती है तो उसके लिए विशेष सावधानी बरतना काफी मुश्किल हो जाता है। बड़े तो एक बार फिर भी केयर कर लें लेकिन बच्चे समझाने के बाद भी नहीं मानते और परिणामस्वरूप उनके फेस पर ऐसे दाग रह जाते है। पुरे शरीर के दाग तो जाते जाते ठीक हो ही जाते है लेकिन फेस के दाग देखने में तो अजीब लगते ही है साथ-साथ लोग भी इन दागों का काफी मजाक बनाते है।

Read more : चिकनपॉक्स  के कारण, लक्षण और उपाय

यूँ तो बाजार में इन दागों को हटाने की एलोपेथिक दवायें मौजूद है लेकिन उनके इस्तेमाल से मनचाहे परिणाम नहीं मिल पाते। ऐसे में जीवन भर इन दागो के साथ रहना काफी मुश्किल हो सकता है क्योंकि ये न केवल आपके लिए हिचक का कारण बनते है बल्कि आपकी सुंदरता को भी प्रभावित करते है। इसीलिए आज हम आपको चेचक के दाग दूर करने के घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप इन दागों को हमेशा हमेशा के लिए दूर कर सकते है। तो आइये जानते है उन घरेलू उपायों के बारे में –

चेचक के दाग दूर करने के घरेलू उपाय :-

चिकनपॉक्स के दाग त्वचा के भीतर तक होते है जिन्हे हटाने उतना आसान नहीं है जितना सुनने में लगता है। ऐसे में दवाइयों का प्रयोग करना समस्या को बढ़ाने के बराबर है। क्योंकि चिकन पॉक्स होने के बाद व्यक्ति का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है जिससे संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी चीज का प्रयोग नुकसाहदेह हो सकता है। नीचे हम कुछ घरेलू उपाय बता रहे है जिनकी मदद से इस समस्या का परमानेंट इलाज किया जा सकता है।

1. नींबू :

इन दागों को हटाने के लिए आप नींबू का प्रयोग कर सकते है। इसके लिए आपको रोजाना कुछ देर के लिए नींबू को दागों पर हलके हाथों से रगड़ना होगा। रगड़ने के बाद आधा घंटे तक रखें और फिर चेहरा साफ कर लें। रोजाना इसके इस्तेमाल से दाग हलके होकर गायब होने लगेंगे।

2. एलोवेरा :aloevera ke labh 11

एलोवेरा स्किन की समस्यायों के लिए रामबाण के रूप में कार्य करता है। चेचक के दागों के लिए एलोवेरा के पत्ते से जेल निकालकर उसे दागों पर लगाएं। रोजाना लगाने से दाग और निशान अपने आप ठीक हो जाएंगे।

3. लहसुन :

इन दागों को हटाने के लिए आप लहसुन का भी इस्तेमाल कर सकते है। प्रयोग के लिए लहसुन की कलियों को छीलकर पीस लें और रस को निकालकर अलग रख लें। दिन में 2 से 3 बार इसका इस्तेमाल अपने दागों पर करें। दाग ठीक होने लगेंगे।

4. शहद :

इस उपाय के लिए शहद को हाथ में लेकर दागों पर लगाएं। कुछ देर रखें और फिर फेस साफ़ कर लें। दिन में 2 से 3 बार प्रयोग करें निशान अपने आप हलके होकर ठीक होने लगेंगे।

5. टमाटर :

टमाटर के विटामिन सी वाले गुण दागों को हल्का करने की भी क्षमता रखते है। इसके लिए टमाटर के जुड़े को निकलकर उसे दागों पर लगाएं। कुछ देर रखने के बाद उसे पानी से साफ़ कर लें। आप चाहे तो नींबू के रस और टमाटर के रस को मिलाकर भी प्रयोग कर सकते है।

6. बेकिंग सोडा :

यह स्किन के pH level को संतुलित रखने में मदद करता है। चेचक के दाग हटाने के लिए थोड़े से पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर दागों पर लगाएं और मसाज करें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से अंतर दिखने लगेगा।

7. पपीता :Papite ke fayde

पपीता भी स्किन से संबंधित समस्यायों को दूर करने की क्षमता रखता है। इसके लिए एक कप पपीता ले और उसमे 5 चम्मच दूध और 5 चम्मच चीनी मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को अपने दागों पर लगाएं। 15 से 20 मिनट रखें और फिर साफ़ कर लें।

8. ओलिव आयल :

ओलिव आयल और चंदन मिलाकर भी आप इन दागों को दूर कर सकते है। इसके लिए दोनों को मिलाकर फेस के दागों पर लगाएं। रोजाना इस्तेमाल करने से आपकी समस्या जल्द ही ठीक हो जाएगी।

9. नारियल तेल :

सिर्फ चेचक के ही नहीं बल्कि स्किन पर मौजूद हर तरह से दाग धब्बे दूर करने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए नारियल तेल को हाथों में लेकर दागों पर लगाएं। और मालिश करें। दिन में 3 से 4 बार मालिश करने से दाग अपने आप ही दूर हो जाएंगे।

10. नीम की पत्तियां :

नीम की पत्तियों में बहुत से एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल, एंटी बायोटिक, एंटी ऑक्सीडेंट आदि गुण पाए जाते है जो स्किन से संबंधित सभी समस्यायों को दूर करने की क्षमता रखता है। इसके लिए रोजाना रात को सोने से पहले फेस पर नीम की पत्तियों का लेप लगा लें और अगली सुबह इसे धोएं। इस उपाय से नियमित प्रयोग से निशान अपने आप ही ठीक हो जाएंगे।

इन चीजों का भी रखें ध्यान :-

  • त्वचा को धोने के लिए सामान्य पानी की जगह ठंडे पानी का इस्तेमाल करें।
  • चेचक होने पर स्किन का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दौरान किसी भी तरह की क्रीम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • दाने सुख जाने के बाद आने वाली पपड़ी को नाखूनों से नहीं उतारना चाहिए क्योंकि अगर आप ऐसा करते है तो उसके दाग रह जाते है।
  • चेचक के दागों से बचने के लिए दानों को कभी हाथों से नहीं फोड़े और न ही पपड़ी को खुरचे इन्हे स्वतः ही ठीक होने दें।

प्रेगनेंसी से बचने के यह हैं 10 कारगर उपाय

प्रेगनेंसी हमेशा ही ख़ुशी का समय हो यह भी सच नहीं है। क्योंकि कई बार ऐसा होता है की आप शिशु प्लान नहीं कर रही होती है। आप शिशु को जन्म नहीं देना चाहती है, या आपके एक या दो बच्चे हो गए हैं आप आगे और शिशु नहीं करना चाहती है। लेकिन न चाहते हुए भी बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाने के कारण आपका गर्भ ठहर जाता है। ऐसे में आपको गर्भपात करवाना पड़ता है। और बार बार गर्भपात महिला के शरीर को बहुत ज्यादा कमजोर बना सकता है। ऐसे में आपको प्रेगनेंसी से बचने के लिए कुछ तरीको का इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे आपका गर्भ ठहरे ही नहीं। ताकि आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी से बचने के उपाय

क्या आप भी गर्भधारण से कैसे बचा जाए इस बारे में सोच रही हैं? यदि हाँ तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही आसान उपाय बताने जा रहे हैं। जो आपको प्रेगनेंसी से बचाव करने में मदद करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो उपाय कौन से हैं।

कंडोम का इस्तेमाल

  • सम्बन्ध बनाते समय कंडोम का इस्तेमाल करें।
  • यह तरीका आसान होने के साथ फायदेमंद भी होता है।
  • क्योंकि इससे न केवल शुक्राणुओं को अंडे तक पहुँचने से रोकने में मदद मिलती है बल्कि इससे यौन संक्रमण होने का खतरा भी न रहता है।
  • यदि सम्बन्ध बनाते समय पुरुष इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं।
  • तो आज कल महिलाओं के लिए भी यह सुविधा मार्किट में मौजूद है तो इसका इस्तेमाल महिला भी कर सकती है।

थोड़ा संयम बरतें

  • सम्बन्ध बनाते समय थोड़ी सी सावधानी बरती जाये तो अनचाही प्रेगनेंसी से बचा जा सकता है।
  • इसके लिए जब महिला व् पुरुष सम्बन्ध बना रहे होते हैं।
  • तो सम्बन्ध के असली पड़ाव तक पहुँचने से पहले ही थोड़ी सावधानी बरतें और महिला के प्राइवेट पार्ट से अलग हो जाएँ।
  • ऐसा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन ऐसा करने से अनचाही प्रेगनेंसी से बचा जा सकता है।
  • ऐसा करने से शुक्राणु को अंदर प्रवेश नहीं कर पाते हैं।
  • जिससे महिला के प्रेग्नेंट होने के खतरे को कम किया जा सकता है।

प्रेगनेंसी से बचने के लिए लें गर्भनिरोधक दवाइयां

  • ज्यादातर महिलाएं जो गर्भधारण नहीं करना चाहती है वो इसी तरीके का इस्तेमाल करती है।
  • आज कल मार्किट में आपको गर्भनिरोधक दवाइयां मिल जाती है जिनका सेवन करने से आपको अनचाही प्रेगनेंसी के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • आप कौन सी दवाई ले रही है उसे किस तरह और कब खाना है इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय लेना बेहतर होता है।
  • ताकि बाद में इन दवाइयों के कारण आपको किसी तरह की परेशानी न हो।

बर्थ कंट्रोल पैच

  • बर्थ कण्ट्रोल पैच एक प्लास्टिक का पतला पैच होता है।
  • जो की हार्मोन को अवशोषित करता है और अंडे को महिला के फैलोपियन ट्यूब में जाने से रोकता है और अनचाहे गर्भ से बचाता है।
  • इस पैच को शरीर की त्वचा पर लगाया जाता है।
  • और यह पैच आप कूल्हे पर, पेट पर या हाथ के ऊपरी भाग पर कहीं भी लगा सकते हैं।
  • यह उपाय भी अनचाही प्रेगनेंसी से बचने का आसान और असरदार उपाय है।

प्रेगनेंसी से बचने के लिए इस्तेमाल करें बर्थ कंट्रोल रिंग

  • यह एक रिंग होती है जो छोटी और लचीली होती है।
  • जिसे महिला के प्राइवेट पार्ट में डाला जाता है।
  • जिससे प्रेगनेंसी हॉर्मोन को रिलीज़ होने से रोकने में मदद मिलती है।
  • यदि इस रिंग को सही तरीके से प्राइवेट पार्ट में डाला जाता है।
  • और हर महीने समय से इसे बदल दिया जाता है तो इससे भी अनचाही प्रेगनेंसी से बचे रहने में मदद मिलती है।

कॉपर टी

  • यह एक माचिस की तीली की तरह होती है जिसे डॉक्टर्स द्वारा महिला के प्राइवेट पार्ट में डलवाया जाता है।
  • और यह कम से कम तीन और ज्यादा से ज्यादा दस साल के लिए डलवाई जा सकती है।
  • यदि फिर आप चाहे तो फिर दोबारा से इसे बदलवाया भी जा सकता है।
  • इस तरीके का इस्तेमाल करने से महिला को कम से कम तीन साल के लिए प्रेगनेंसी के डर से छुटकारा मिल जाता है।
  • साथ ही यदि आप बीच में शिशु को प्लान करती है तो आप डॉक्टर्स से इसे बाहर निकालने के लिए कह सकती है।
  • इसके कारण आपकी प्रेगनेंसी में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है।

प्रेगनेंसी से बचने के लिए गर्भनिरोधक इंजेक्शन लगवाएं

  • गर्भधारण से बचने के लिए हर तीन महीने में महिला एक इंजेक्शन भी लगवा सकती है।
  • इस इंजेक्शन को लगवाने से बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन बढ़ता है।
  • जिससे ओवुलेशन को रोकने और गर्भधारण से बचने में मदद मिलती है।
  • क्योंकि फैलोपियन ट्यूब तक अंडा नहीं पहुँच पाता है।
  • जिससे निषेचन होने चांस नहीं होते हैं और महिला को अनचाही प्रेगनेंसी के डर से बचे रहने में मदद मिलती है।

डायाफ्राम

  • डायाफ्राम एक कप की तरह फैला हुआ होता है।
  • जिसे महिला के प्राइवेट पार्ट में सम्बन्ध बनाने के दौरान डाल दिया जाता है।
  • जिससे जब महिला को पुरुष जब सम्बन्ध बनाते हैं तो अंडे और शुक्राणु का आपस में मिलन नहीं हो पाता है।
  • और मिलन न होने के कारण प्रेगनेंसी से बचे रहने में मदद मिलती है।

नसबंदी

  • यदि आप और शिशु नहीं करना चाहती है तो महिला या पुरुष दोनों में से कोई भी एक नसबंदी करवा लें।
  • नसबंदी करवाने से महिला की प्रेगनेंसी के डर को हमेशा के लिए खत्म करने में मदद मिलती है।
  • यह प्रक्रिया डॉक्टर द्वारा की जाती है जब भी आप चाहे आप ऐसा कर सकते हैं।

ओवुलेशन की जानकारी

  • अनचाहे गर्भधारण से बचने के लिए ओवुलेशन की जानकारी होना भी बहुत जरुरी होता है।
  • ओवुलेशन पीरियड पीरियड्स के पहले दिन से गिनते हुए ग्यारह से अठारह दिन का समय होता है।
  • इस दौरान अंडे के परिपक्व होकर अंडाशय से बाहर निकलने का समय होता है।
  • ऐसे में सम्बन्ध बनाने से निषेचन होने के चांस बढ़ सकते हैं।
  • जिससे महिला के गर्भ ठहरने का खतरा भी होता है।
  • ऐसे में इन दिनों में या तो सम्बन्ध बनाने से बचे या किसी न किसी सुरक्षा का इस्तेमाल यदि किया जाये।
  • तो ऐसा करने से महिला को अनचाहे गर्भ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करने से आपको अनचाहे गर्भ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। और आपको अपने पार्टनर के साथ बिना डर के सम्बन्ध बनाने में मदद मिलती है।

सत्तू के चमत्कारिक फायदे

0

सत्तू भुने चने को पीस कर आटे के रूप में उसे तैयार करके बनाया जाता है, ये एक ऐसी ख़ास चीज़ है जिसे बिहार के लोग और झारखण्ड के लोग बहुत चाव और शौक से खाते है, साथ ही सत्तू में ऐसे बहुत से गन होते है, जो की बहुत फायदेमंद होते है, सत्तू का प्रयोग विभिन्न तरीको से करके किया जाता है, जैसे की सत्तू के पराठे, लिट्टी चोखा, लडडू, आदि बनाकर, गर्मियों में इसका शरबत बनाकर भी पिया जाता है, तो आइये अब आपको विस्तार से सत्तू के बारे में बताते है।

सत्तू खास कर बिहार के लोगो की मनपसंद चीज है, जो लोग बिहार में रहते है या नहीं, वो भी अपनी छुट्टियों में बिहार जाकर सत्तू जरूर भर के लाते है, पहले सत्तू केवल चने को भून कर उसे पीस कर बनाया जाता था, परंतु आज कल इसमें और भी चीजे मिलै जाने लगी है जैसे की जौ का आटा, गेहूं का आटा, आदि, सत्तू संतुलित पोषकों का मिश्रण होता है, जो आपको बहुत से फायदे देता है, जैसे की गर्मी से राहत के लिए लोग इसके शरबत का सेवन करते है, इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण ये आपको पेट से सम्बंधित समस्या से बचाता है, और पाचन को सही रखने में मदद करता है।

इसके साथ सत्तू में लो ग्लाईसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह डायबिटीज़ के रोगियो के लिए भी वरदान की तरह काम करता है, इसके साथ जो लोग जौ के सत्तू का सेवन करते है उन्हें थकावट, आँखों से जुडी कोई भी समस्या हो उससे निजात मिल जाता है, और साथ ही सत्तू में रक्त शोधन का गुण होता है, जिसके कारण रक्त से जुडी गड़बड़ियों को ठीक करने में ये आपकी बहुत मदद करता है, तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है की सत्तू का सेवन करने से आपको कौन कौन से शारीरिक फायदे होते है, और इसकी भी लिट्टी चोखा की रेसिपी भी आपको बताएंगे।

त्वचा को चमकदार बनाने के लिए:-

सूंदर और दमकती हुई त्वचा कौन नहीं चाहता है, लेकिन अपनी त्वचा की अच्छे से केयर न करने के कारण, और पोषक तत्व ठीक से न मिल पाने की वजह से आपकी त्वचा रूखी सूखी और बेजान हो जाती है, इसीलिए सत्तू के सेवन और सत्तू की ड्रिंक पीने से आपकी त्वचा को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है, और त्वचा की नई कोशिकाओं का निर्माण होता है, जिससे डेड स्किन निकल जाती है, और आपकी त्वचा को चमकदार बनने में मदद मिलती है।

बालों के लिए:-

बालों को घना, रेशमी, चमकदार,और मुलायम बनाने के लिए सत्तू बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि बालों को पूरी तरह से पोषण न मिलने के कारण आपको बालों से जुडी समस्या होजाती है, जैसे की बालों का झड़ना, बालों का सफ़ेद होना, या और कोई परेशानी, तो इस समस्या से निजात पाने के लिये सत्तू का ड्रिंक बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स आपको पोषण देने में मदद करते है।

बुजुर्गो के लिए होता है फायदेमंद:-

बुजुर्गो के लिए सत्तू वरदान के लिए काम करता है, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ व्यक्ति को बहुत सी परेशानियां घेर लेती है, जैसे की खराब पाचन, पेट फूलना, कब्ज, एसिडिटी और दिल से जुड़ी कई बीमारियां परेशान  करने लगती है, इसके लिए सत्तू बहुत फायदेमंद होता है।

महिला के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए:-

प्रेगनेंसी के समय और मासिक धर्म के समय महिला के शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है, सत्तू में मौजूद विटामिन, और प्रोटीन्स महिला के शरीर में होने वाली कमी को पूरा कर देते है, जिसके कारण आपके स्वास्थ्य को बेहतर होने में मदद मिलती है।

पेट के लिए फायदेमंद होता है:-

सत्तू में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है, जिसके कारण ये पेट से सम्बंधित परेशानियों को हल करने में आपकी मदद करता है। सत्तू का सेवन करने से आपके पाचन तंत्र को भी मजबूत होने में मदद मिलती है। और यह साबुत अनाज की तरह आपकी भूख को भी बढ़ाने में आपकी मदद करता है।

मोटापा कम करने में मदद करता है:-

सत्तू का सेवन करने से आपके शरीर में जमे फैट को खत्म करने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको पतले होने में मदद मिलती है, परंतु आपको याद रखना चाहिए की सत्तू के बाद या खाने के बीच में कभी भी ज्यादा पानी का सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्मी से राहत दिलाता है:-

गर्मियों में तपती धुप में आपके शरीर की ऊर्जा को खत्म होने में बिलकुल भी समय नहीं लगता है, वही सत्तू का बना शरबत का सेवन करने से आपको गर्मी से राहत मिलती है, और ये आपके लिए किसी एनर्जी ड्रिंक से कम नहीं होती है, इसीलिए गर्मी से राहत पाने के लिए इसका सेवन जरूर करना चाहिए। और साथ ही थकावट और कमजोरी का अहसास जौ की व्यक्ति को धुप के कारण होता है, उस समस्या से भी राहत दिलाने में आपकी मदद करता है।

मधुमेह के रोगियो के लिए लाभदायक होता हैं:-

सत्तू में लो ग्लाईसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह मधुमेह के रोगियो के लिए बहुत लाभदायक होती है, मधुमेह के रोगी यदि इसका सेवन करते है, तो इसके कारण उन्हें फिट रहने में मदद मिलती है, इसके लिए यदि वो चाहे तो एक बार अपने डॉक्टर से भी राय ले सकते है।

गर्भावस्था का सबसे नाजुक महीना

गर्भावस्था का सबसे नाजुक महीना, प्रेगनेंसी का कौन सा  महीना होता है सबसे ज्यादा अहम, प्रेगनेंसी टिप्स, गर्भवस्था का सबसे नाजुक महीना

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने का एक -एक दिन एक -एक पल बहुत ही अहम होता है। और महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने अपना अच्छे से ख्याल भी रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला स्वस्थ रहती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने जहां महिला को पूरे आराम की जरुरत होती है, वहीँ दूसरे ट्राइमेस्टर में महिला को शिशु के बेहतर विकास के लिए ध्यान रखने की जरुरत होती है, लेकिन आखिरी महीनो में और भी ज्यादा केयर की जरुरत पड़ती है, क्योंकि यदि महिला तीसरे ट्राइमेस्टर में अपना अच्छे से ख्याल नहीं रखती है तो इसके कारण समय पूर्व प्रसव, शिशु के विकास से जुडी समस्या, और महिला की सेहत से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इसीलिए गर्भावस्था का पूरा समय महिला को बेहतर खान पान के साथ किसी भी तरह की लापरवाही न करने की सलाह दी जाती है। खासकर यदि महिला की प्रेगनेंसी में यदि किसी भी तरह के कॉम्प्लीकेशन्स हैं तो महिला को पूरी तरह से बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को होने वाली हर तरह की परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके। और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी किसी तरह की कोई कमी न आए। तो लीजिये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के नौ महीनों में से कौन सा महीना सबसे ज्यादा नाजुक होता है। और महिला को इस दौरान क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

प्रेगनेंसी के सबसे नाजुक महीना

गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी का आठवां महीना सबसे ज्यादा नाजुक होता है। क्योंकि इस दौरान शिशु के अंगो का विकास भी पूरी तरह हो चूका होता है, प्रसव का समय भी पास होता है, महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला को परेशानी भी अधिक होती है, जैसे की चलने में, उठने बैठने में, सोने में आदि। तो इस दौरान यदि महिला थोड़ी सी भी लापरवाही करती है तो इससे शिशु समय से पहले जन्म ले सकता है, क्योंकि पेट पर जोर डालने से शिशु नीचे की तरफ आने लगता है, जिसके कारण महिला को पेट में दर्द जैसी समस्या हो जाती है।

और यदि समय से पहले प्रसव हो जाता है तो इसके कारण शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ने के साथ महिला को भी सेहत सम्बन्धी समस्या हो सकती है। सिजेरियन डिलीवरी हो सकती है, शिशु का वजन कम हो सकता है, शिशु का संक्रमण का भय ज्यादा होता है, आदि। इसीलिए महिला को आठवें महीने में भरपूर आराम की सलाह दी जाती है। ताकि नौवे महीने तक महिला आराम से पहुँच जाये और नौवे महीने में किसी भी दिन डिलीवरी हो तो किसी भी तरह की ऐसी कोई समस्या होने के चांस कम होते हैं।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में रखें इन बातों का ध्यान

  • पेट पर जोर न डालें।
  • किसी भी तरह का भारी सामान न उठाएं।
  • तनाव न लें।
  • खान पान में किसी भी तरह की कमी न आने दें, भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों का सेवन करें।
  • नींद भरपूर लें, और सोते समय बाईं और करवट लेकर सोएं।
  • ज्यादा तेजी से न चलें, सीढिया न चढ़ें, यात्रा से बचें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के सबसे नाजुक महीने से जुड़े कुछ खास टिप्स, ऐसे में आपको प्रेगनेंसी के इस महीने में अपना सबसे अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। साथ ही पहले ट्राइमेस्टर में भी किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उस दौरान की गई कोई भी लापरवाही मिसकैरिज की सम्भावना को बढ़ा देती है।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भावस्था का सबसे नाजुक महीना और ध्यान रखने योग्य सावधानियां

संतरे के छिलके के फायदे

0

संतरे में मौजूद विटामिन सी आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है, साथ इसमें विटामिन सी के साथ कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, फाइबर आदि भी उचित मात्रा में होते है, लेकिन क्या आप जानते है की संतरे के साथ संतरे का छिलका भी आपके लिए कितना फायदेमंद होता है, और आप इतने स्वादिष्ट फल का मज़ा लेने के बाद इसके छिलकों को फेंक देते है, लेकिन आज इसके फायदे जानने के बाद आप इसे फेंकने की बजाय इसका इस्तेमाल करेंगे, यह आपकी सेहत के साथ आपके सौन्दर्य को भी बढ़ाने में मदद करता है, और सोंद्रय को बढ़ाने के लिए अप इसे पैक के रूप में इस्तेमाल कर सकते है, साथ ही इसके सेवन के लिए आप इसके छिलकों को सुखाकर पाउडर के रूप में तैयार कर लें, और उसके बाद इसकी चाय या सब्जियों में डालकर इसका सेवन करें, तो आइये अब विस्तार से जानते है की संतरे के छिलकों से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

इन्हें भी पढ़ें:- त्वचा और बालों के लिए सेब के सिरके के फायदे और नुकसान!

संतरे के छिलके के फायदे आपकी सेहत के लिए:-

orange-peel-for-health

मस्तिष्क सम्बन्धी परेशानियों को दूर करता है:-

संतरे के छिलकों में मौजूद विटामिन और खनिज भरपूर होते है, साथ ही इसमें मौजूद विटामिन बी 5, विटामिन बी 6, और फोलेट भरपूर होता है, जो आपको तनाव, माईग्रेन, चिंता आदि समस्या को दूर करने के साथ आपके नर्वस सिस्टम को भी मजबूत करने में मदद करता है।

प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है:-

संतरे के छिलकों का सेवन यदि आप नियमित चाय या फिर अन्य किसी रूप में करते हैं, तो इससे आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे आपको रोगो से बचे रहने में मदद मिलती है।

इन्हें भी पढ़ें:- दूध पीने के फायदे! आपको रोजाना एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिए

हड्डियों को मजबूत करता है:-

हड्डियों की मजबूती के लिए शरीर में कैल्शियम की मात्रा का भरपूर होना बहुत जरुरी होता है, और संतरे के छिलके में कैल्शियम भरपूर होता है, इससे आपकी हड्डियों को मजबूती मिलती है, साथ ही हड्डियों से सम्बंधित रोग ऑस्टियोपोरोसिस होने का भी आपको कोई खतरा नहीं रहता है।

दिल की बिमारियों के लिए है फायदेमंद:-

शरीर में रक्त संचार को सुचारु रूप से चलाने के लिए, और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में संतरे के छिलके आपकी बहुत मदद करते है, जिसके कारण आपको दिल की बीमारियों से दूर रहने में मदद मिलती है, और आपको हार्ट अटैक, ब्लड प्रैशर और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैंसर से बचाव करने में मदद मिलती है:-

कैंसर एक गंभीर समस्या है, जो आपको शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है, और संतरे के छिलके का सेवन करने से आपको हर तरह के कैंसर से बचाव करने में मदद मिलती है, फिर चाहे वो फेफड़ो में हो, कोलोन कैंसर, स्तन कैंसर हो, आपको इस समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

कब्ज़ से राहत दिलाता है:-

संतरे के छिलके में पेक्टिन पाया जाता है, जो की एक फाइबर है,और आपके पेट की बिमारियों को दूर करने में आपकी मदद करता है, और कब्ज़ जैसी परेशानी से भी आपको राहत दिलाने में मदद करता है।

वजन कम करने में आपकी मदद करता है:-

बढ़ा हुआ वजन न केवल आपकी लुक को खराब करता है, बल्कि इसके कारण आपके शरीर में बीमारियां भी होने लगती है, और संतरे के छिलके में ऐसे गुण पाए जाते है, जिससे की प्राकृतिक रूप से आपके वजन को कम करने में मदद मिलती है, और आपके शरीर को किसी तरह का कोई नुकसान भी नहीं होता है।

इन्हें भी पढ़ें:- गुनगुना पानी और निम्बू पानी रोजाना पीने के चमत्कारी फायदे

सौन्दर्य के लिए संतरे के छिलके के फायदे:-

orange-peel-for-beauty

आपकी स्किन टोन को बेहतर बनाता है:-

संतरे के छिलके का इस्तेमाल करके आपके स्किन टोन को निखारने में मदद मिलती है, साथ ही यह सनबर्न के कारण त्वचा पर होने वाले बुरे प्रभाव को खत्म करने में मदद करता है, इसके लिए आप एक कटोरी में दो चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर लेकर उसमे एक चम्मच शहद, और एक चम्मच दही को अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद इसे अपने चेहरे पर पैक की तरह लगाएं, गार्डन पर भी लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दें, और सूखने के बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके आप अपने चेहरे को धो लें, ऐसा हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार करें, आपके चेहरे को फायदा मिलेगा।

उम्र बढ़ने के लक्षण को कम करता है:-

आपकी त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने वाले मुक्त कणों से लड़ने में और उसे खत्म करने में संतरे के छिलके में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स आपकी बहुत मदद करते हैं, और चेहरे पर होने वाली झुर्रियों, फाइन लाइन्स आदि को खत्म करने में आपकी मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक चम्मच संतरे के पाउडर में, एक चम्मच दलिया पाउडर, और इन्हे मिक्स करने के लिए शहद का इस्तेमाल करें, और तीनो को अच्छे से मिक्स करके अपने चेहरे पर लगाएं, और उसके सूखने के बाद अपने चेहरे को ठन्डे पानी से धो लें, आपके चेहरे को फायदा पहुंचेगा।

मुहांसों व् पिम्पल की समस्या से निजात दिलाने में मदद करता है:-

मुहांसे व् पिम्पल का कारण आपके चेहरे पर धूल मिट्टी के कणों का जमाव होना होता है, क्योंकि यह आपके चेहरे पर रोमछिद्रो को बंद कर देते है, जिसके कारण स्किन पर मुहांसे होने लगते है, और यदि आप संतरे के छिलकों को पीस कर अच्छे से अपने चेहरे पर लगाते हैं, तो आपको इस समस्या से बचने में मदद मिलती है, साथ ही आपके चेहरे से पिम्पल आदि भी खत्म होने लगते है, आप चाहे तो इसमें कुछ बूंदे निम्बू के रस की भी मिला सकती है।

ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स की समस्या से राहत मिलती है:-

संतरे के छिलके का इस्तेमाल करने से आपको ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स की समस्या से राहत मिलती है, क्योंकि इसमें क्लींजिंग, एंटी फंगल, एंटी बैक्टेरियल, गुण होते है, जो आपके चेहरे से पिम्पल्स, ब्लैकहेड्स और वाइटहेड्स से आपको निजात दिलाते हैं, इसके लिए आप दो चम्मच संतरे के छिलके के पाउडर में दही मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं, और दो से तीन मिनट के लिए मसाज करें, उसके बाद इसे पंद्रह से बीस मिनट के लिए अपने चेहरे पर छोड़ दें, और उसके बाद मसाज करते हुए इसे निकाल दें, आपको इसका असर खुद दिखाई देगा।

तो ये है संतरे के छिलके के कुछ फायदे तो अपनी ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए और बीमारियों से दूर रहने के लिए आपको इसका प्रयोग करके जरूर देखना चाहिए, और यह घरेलू उपाय होने के साथ अधिक खर्चीला भी नहीं होता है।

इन्हें भी पढ़ें:- एलोवेरा के जूस से पाएं बेदाग़ त्वचा और स्वस्थ शरीर ऐसे

शहद और लहसुन खाने से ये रोग दूर होते है

0

शहद और लहसुन दोनों ही गुणों की खान होते है, दोनों का अलग अलग सेवन करने से आपको बहुत से लाभ होते है, और साथ ही यदि आप इन दोनों को साथ में मिलाकर इसका सेवन करते है तो आपको इसके कारण दुगुना फायदा होता है, और ये आपको बहुत सी बीमारियों  से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता भी देता है, तो आइये जानते है लहसुन और शहद का सेवन करने से आपको कौन से शारीरिक फायदे होते है।

बहुत साल पहले से शहद का इस्तेमाल आपकी सुंदरता और स्वास्थ्य के लिए किया जा रहा है, क्योंकि इसमें एंटी बायोटिक और एंटी बैक्टेरियल गुण होते है, वही लहसुन की तीखी गंध भी आपकी बहुत सी शारीरिक समस्या को खत्म  करने के लिए आपको मदद करता है, क्योंकि लहसुन में एलिसिन और फाइबर जैसे न्यूट्रिएंट्स भरपूर होते है, और लहसुन का इस्तेमाल करने से भी आपकी बहुत सी स्वास्थ्य संबंधी और त्वचा संबंधी समस्या का समाधान करने में मदद करता है, और जब आप इन दोनों का सेवन एक साथ करते है, तो इसके कारण भी आपको बहुत सी शारीरिक परेशानियों को हल करने में मदद मिलती है, तो आइये अब विस्तार से हम आपको बताते है की आप किस तरह से लहसुन और शहद का इस्तेमाल करके बहुत सी परेशानियों को हल कर सकते है।

मोटापे से राहत दिलाता है:-

motapa

मोटापे की समस्या से आज के समय में दस में से आठ व्यक्ति परेशान रहते है, और इस समस्या से राहत पाने के लिए आप यदि आप लेहूं और शहद को मिलाकर एक साथ सेवन करते है, तो थोड़े ही दिनों में आपको मोटापे की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

दांतो को मजबूत करने में मदद मिलती है:-

यदि आप दांतो के दर्द, सड़न आदि से परेशान है, तो शहद और लहसुन को एक साथ मिलाकर उसका सेवन करने से आपके शरीर में फॉस्फोरस की मात्रा बड़ जाती है, जिसके कारण दांतो को मजबूत होने में मदद मिलती है।

कैंसर के मरीज़ों के लिए है लाभदायक:-

शहद और लहसुन दोनों ही एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते है, जो की कैंसर से लड़ने में मदद करता है, इसीलिए कैंसर के मरीज़ों को इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए, आप एक साथ या अलग अलग भी इसका सेवन कर सकते है।

सर्दी जुखाम से राहत दिलाता है:-

शहद और लहसुन दोनों की तासीर गरम होती है, इसे खाने से हमारे शरीर को गर्मी मिलती है, यदि आप रोजाना इसका सेवन करते है, तो सर्दी जुखाम जैसी छोटी छोटी समस्या से राहत पाने में आपको मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रोल को खत्म करने में मदद मिलती हैं:-

लहसुन और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर खाने से आपके कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, और जिसके कारण आपके शरीर में रक्त का संचार भी सुचारू रूप से चलता रहता है, jओ आपके दिल के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

गले की खराश को दूर करने में मदद करता है:-

शहद और लहसुन के मिश्रण को मिलाने से इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते है, जिसके कारण गले में होने वाली खराश की समस्या से राहत पाने में आपको बहुत मदद मिलती है, और गले में होने वाले दर्द की समस्या से भी आराम मिलता है। और साथ ही गले में होने वाली सूजन की समस्या से भी राहत मिलती है।

इम्युनिटी बढ़ने में मदद करता हैं:-

लहसुन और शहद के सेवन से आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत होने में मदद मिलती है, और यदि आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, तो आपके शरीर को मौसम में होने वाले बदलाव को झेलने के लिए क्षमता मिलती है। जिससे आपको कोई बीमारी भी नही होती है।

फंगल इन्फेक्शन से सुरक्षा प्रदान करता है:-

फंगल इन्फेक्शन शरीर के कई भागों पर एक साथ हमला करता है, लेकिन यदि आप लहसुन और शहद का एक साथ सेवन करते है, तो इसके एंटी बैक्टेरियल गुण आपके शरीर से बैक्टेरिया को खत्म करके आपको फंगल इन्फेक्शन से सुरक्षा प्रदान करता है।

प्राकृतिक डीटॉक्स का काम करता है:-

लहसुन और शहद एक प्राकृतिक डीटॉक्स का काम करता है, यदि आप रोजाना इसका सेवन करते है, तो इसके खाने के कारण आपके शरीर से गंदगी और दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते है, जिसके कारण आपको बीमारियों से लड़ने के लिए शक्ति मिलती है।

ऊर्जा मिलती हैं:-

यदि आप रोजाना सुबह एक चमच्च शहद में दो से तीन लहसुन की कलिया डाल कर उसका सेवन करते है, तो इसके कारण आपको दिन भर के लिए ऊर्जा मिलती है, और आपको बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है:-

यदि आप नियमित रूप से रोजाना सुबह शहद और लहसुन का सेवन करने से आपको रोगों से लड़ने के लिए सक्षम बनाता है, और इसके कारण आपको बीमारियों से भी सुरक्षा मिलती है, और शारीरिक रूप से भी स्वस्थ बने रहने में भी मदद मिलती है।

डायरिया से बचाता है:-

यदि किसी को भी डायरिया की समस्या होती है, तो उसे लहसुन और शहद का मिश्रण एक साथ मिलाकर खाने से उसके पाचन तंत्र को मजबूत होता है, जिसके कारण पेट में होने वाले कीटाणु खत्म हो जाते है, और आपको डायरिया को खत्म करने में मदद मिलती है।

दिल को सुरक्षा प्रदान करता है:-

लहसुन और शहद का मिश्रण का सेवन करने से आपकी धमनियों में से वसा निकल जाता है, जिसके कारण रक्त का प्रवाह अच्छे से होने के कारण आपके हदय तक रक्त अच्छे से पहुँच जाता है, और आपके दिल को सुरक्षा प्रदान करने में मदद मिलती है।

तो ये सब कुछ फायदे है जो आपको लहसुन और शहद का एक साथ सेवन करने से आपको होते है, यदि आप रोजाना नियमित रूप से लहसुन और शहद के मिश्रण का सेवन करते है, तो इसके सेवन से आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, और लहसुन का सेवन तो आप सब्जियों में डाल कर भी कर सकते है, और इसके कारण आपकी खूबसूरती को भी बढ़ावा मिलता है, तो यदि आप भी लहसुन और शहद से मिलने वाले इन फायदों को उठाना चाहते है, तो आपको नियमित रूप से इनका सेवन करना चाहिए। और हो सकें तो इसका सेवन आपको सुबह ही करना चाहिए।

सर्दियों में च्यवनप्राश खाने से ये फायदे होते है

0

Sardiyon me Chyawanprash

सर्दियों में च्यवनप्राश खाने से ये फायदे होते है, Benefits of Chyawanprashin hindi, च्यवनप्राश के स्वास्थ्य के लिए फायदे, इम्युनिटी के लिए च्वयनप्राश 

वर्तमान की तुलना में पहले के समय का खाना और पर्यावरण दोनों ही बहुत शुद्ध हुआ करता था लेकिन आजकल न तो शुद्ध खाना बचा है और न ही शुद्ध हवा। जिसकी वजह से लोग दिनों दिन भीतर से कमजोर होते जा रहे है। और इस कमजोरी को दूर करने के लिए वे हेल्थ सप्लीमेंट्स का सहारा लेते है। कोई विटामिन और कैल्शियम की गोलियां खाकर अपनी जरूरत पूरी करता है तो कोई हेल्थ ड्रिंक्स पीकर अपनी सेहत बनाता है।

इन्ही कुछ हेल्थ सप्लीमेंट्स में से एक है च्यवनप्राश। जो वास्तव में कोई हेल्थ सप्लीमेंट नहीं है बल्कि एक आयुर्वेदिक औषधि है जो इंस्टेंट एनर्जी देने के साथ-साथ आपके इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करती है।

वास्तव में च्यवनप्राश एक जानी-मानी आयुर्वेदिक औषधि है जिसे बनाने के लिए बहुत सी जड़ी बूटियों और आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इस औषधि का नाम महर्षि चवन के नाम से मिला है। यह न केवल छोटे बच्चों बल्कि बड़ों के लिए भी एक फायदेमंद औषधि है। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा जीरो पाई जाती है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत बुरा होता है।

आयुर्वेद की माने, तो च्यवनप्राश एक बेहतर एंटी-ऑक्सीडेंट जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है। च्यवनप्राश एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रयोग आज से नहीं बल्कि पिछले कई सालों से लाभकारी दवा के रूप में किया जाता आ रहा है। जानकारी के लिए बता दें, केवल गर्मियों में ही नहीं अपितु सर्दियों में भी इसका सेवन करने के बहुत से लाभ होते है। यहां हम आपको सर्दियों में च्यवनप्राश खाने के फायदे बताने जा रहे है। जिन्हे जानकर हो न हो आप भी इस आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करना शुरू कर देंगे।

च्यवनप्राश क्या है?सर्दियों में च्यवनप्राश

च्यवनप्राश आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से बना एक हेल्थ सप्लीमेंट है जिसका सेवन लोग अपने स्टैमिना को बढ़ाने के लिए करते है। छोटी से बड़ी उम्र तक के सभी लोग च्यवनप्राश का सेवन करते है। च्यवनप्राश के नियमित सेवन से महिलाओ और पुरुष दोनों को फ़ायदा मिलता है। इसका स्वाद मीठा, खट्टा और हल्का मसालेदार होता है। इसका रंग हल्का भूरा-काला होता है जो कुछ हद तक फलो के जैम की तरह होता है।

सर्दियों में च्यवनप्राश खाने के फायदे :-

1. यह बढ़ती उम्र की निशानियों और स्वास्थ्य को बेहतर करने वाला एंटी-एजिंग, रेजुवेनेटिंग टॉनिक है। जिसका सेवन करने से बढ़ती उम्र की निशानियों को कम किया जा सकता है।

2. यह शरीर के इम्यून सिस्टम को सुधारने में भी मदद करता है।

3. यह ताकत देने के साथ-साथ स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

4. यह वात, कफ आदि की समस्या को ठीक करके पित्त को बढ़ावा देता है।

5. साँस से संबंधित बीमारियां, खांसी, दुर्बलता, गठिया, आदि से संबंधित रोगों और बहुत सी अन्य बिमारियों में लाभ पहुंचाता है।

6. च्यवनप्राश खाने से व्यक्ति की बुद्धि, याददाश्त, त्वचा का रंग और सामान्य स्वास्थ्य में सुधार होता है।

7. छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्फूर्ति देने वाला बेहतर और लाभकारी टॉनिक है।

8. ये streamline bowel movements और खाने को पचाने में मदद करता है।

9. खून साफ़ करने के लिए च्यवनप्राश एक बेहतर प्राकृतिक औषधि है।

10. च्यवनप्राश हमारे प्रकृतिक blood purification process को भी बढ़ावा देता है।

11. chyawanprash में विटामिन C और आँवला जैसी कई फायदेमंद जड़ी बूटियां पायी जाती है जो आपकी त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

12. मौसम में परिवर्तन के कारण होने वाले सामान्य इन्फेक्शन्स को ठीक करने में मदद करे।

13. च्यवनप्राश के नियमित सेवन से body की फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है।

14. च्यवनप्राश का सेवन करने से शरीर में मेटाबोलिज्म नियंत्रित रहता है जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।

15. Chyawanprash के सेवन से बालो और नाखुनो को भी स्वस्थ रखा जा सकता है।

महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपयोग :-

च्यवनप्राश एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-स्ट्रेस, रक्त-शोधक, यकृत और पाचन के लिए अच्छा होता है। इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने के साथ-साथ मस्तिष्क के लिए भी अच्छा होता है। इसके अलावा निम्नलिखित रोगों में भी इसका सेवन करना लाभकारी होता है-

  • खांसी
  • दमा या अस्थमा
  • आवाज बैठना या गले में तकलीफ heart-attack
  • हृदय रोग
  • अग्निमांद्य
  • छाती के रोग
  • गाउट
  • प्यास
  • मूत्र रोग
  • एजिंग की समस्या
  • पुराना बुखार
  • बिमारी के बाद कमजोरी

सेवन विधि और मात्रा :-

यह आयुर्वेदिक औषधि सभी के लिए फायदेमंद होती है। एक दिन में 12-24 ग्राम च्यवनप्राश को एक ग्लास गुनगुने दूध में मिलाकर पीना चाहिए। इससे अधिक ये नुकसानदेह भी हो सकता है।heart

क्योकि इसकी तासीर बेहद गर्म होती है इसीलिए ये पित्त में भी वृद्धि करता है। इसीलिए जिन लोगो को पित्त विकार है उन्हें इसकी कम मात्रा लेनी चाहिए। इसके अलावा इसे पचाने में भी अधिक क्षमता लगती है। इसीलिए डायरिया और पेप्टिक अल्सर में इसका प्रयोग थोड़ा सावधानी से करना चाहिए।

च्यवनप्राश को या तो खाने से आधा घंटे पहले या खाना खाने से एक घंटे बाद खाना चाहिए। बड़े लोग इसे दूध और पानी के साथ ले सकते है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चो को च्यवनप्राश नहीं देना चाहिए। बेहतर होगा 10 वर्ष की आयु के बाद ही बच्चो को च्यवनप्राश दें।