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प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने के नुकसान

प्रेगनेंसी हर महिला के लिए बहुत ही नाजुक दौर होता है ऐसे में जरुरी होता है की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें। साथ ही महिला के लिए यह भी जरुरी होता है की महिला ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिससे माँ या बच्चे को किसी तरह का कोई भी नुकसान हो। इसीलिए गर्भवती महिला को हर कोई सलाह भी देता है की प्रेगनेंसी में कुछ भी करने से पहले महिला को जान लेना चाहिए की महिला जो भी कर रही है वह सही है या नहीं है। साथ ही महिला जो भी कर रही है उसके क्या फायदे और क्या नुकसान हो सकते हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने के क्या नुकसान हो सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में सम्बन्ध बनाएं या नहीं?

प्रेगनेंसी की न्यूज़ कन्फर्म होने के बाद से ही महिला अपना अच्छे से ध्यान रखने लग जाती है ऐसे में महिला हर चीजे की जानकारी इक्कठी करती है। और जब बात सम्बन्ध बनाने की आती है तो महिला इसे लेकर या तो बात नहीं करती हैं या फिर ऐसा मानती है की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से गर्भपात, ब्लीडिंग, शिशु के विकास में कमी जैसी समस्या होती है।

जबकि ऐसा नहीं है स्वस्थ प्रेगनेंसी यानी की यदि महिला की प्रेगनेंसी नोर्मल है और उसमे किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं हैं तो गर्भवती महिला बिना किसी डर के आसानी से सम्बन्ध बना सकती है। लेकिन यदि महिला के साथ कोई समस्या है या फिर महिला की सम्बन्ध बनाने की इच्छा नहीं है तो महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला और शिशु को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है।

क्या प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से नुकसान होते हैं?

जी हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को दिक्कत हो रही है, गलत तरीके से सम्बन्ध बनाया जा रहा है, लापरवाही बरती जा रही हैं, तो ऐसे कुछ केस में महिला को दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से कौन कौन से नुकसान होते हैं।

गर्भपात का खतरा

यदि महिला का पहले गर्भपात हो चूका है, समय से पहले डिलीवरी हो चुकी है, ब्लीडिंग की समस्या है, आदि और ऐसे में महिला सम्बन्ध बनाती है तो इन सभी कारणों की वजह से महिला के गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

शिशु को दिक्कत

सम्बन्ध बनाते समय यदि महिला या उनका पार्टनर कोई नया एक्सपेरिमेंट करता है या ऐसा कुछ करता है जिससे पेट पर दबाव बढ़ जाता है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है।

समय से पहले डिलीवरी

सम्बन्ध बनाने में यदि तेजी की जाती है तो इसके कारण गर्भाशय पर चोट लगने का खतरा बढ़ता है और गर्भाशय की ग्रीवा का मुँह समय से पहले खुल जाता है। जिसकी वजह से महिला की समय से पहले डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं। साथ ही समय से पहले जन्म होने के कारण शिशु को भी दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर जब गर्भ में एक से ज्यादा शिशु हो तो महिला को और भी ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है।

पेट में दर्द

कुछ गर्भवती महिलाओं को सम्बन्ध बनाने के कारण पेट में दर्द की समस्या होने का खतरा भी रहता है ऐसे में महिला को रिस्क नहीं लेना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा पेट दर्द होना माँ और बच्चे दोनों के लिए सही नहीं होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने के नुकसान, ऐसे में सम्बन्ध बनाते समय जरूरी है की आप महिला की हेल्थ की सही जानकारी लें, और प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाते समय पूरी सावधानी बरतें ताकि महिला और शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

प्रेग्नेंट महिला को शरीर गर्म रखने के लिए क्या-क्या करना चाहिए?

सर्दियों का मौसम अब शुरू हो चूका है ऐसे में गर्भवती महिला को बदलते मौसम के साथ अपने रहन सहन में भी बदलाव करने की जरुरत है। क्योंकि यदि महिला बदलते मौसम के साथ अपनी सेहत व् स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखती है तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को सर्दियों के होने वाली समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में सर्दियों के होने वाली समस्या की वजह से माँ व् बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को अपने शरीर को गर्म रखने की कोशिश करनी चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं जिससे सर्दियों के मौसम में महिला को अपने शरीर को गर्म रखने में मदद मिलती है।

पहनावे का ध्यान रखें

सर्दियों के मौसम में महिला को अपने पहनावे का ध्यान रखना चाहिए जैसे की महिला को गर्म कपडे पहनने चाहिए, टोपी और जुराबे हमेशा पहनकर रखने चाहिए, बाहर जाना हो तो चप्पल नहीं जूते पहनने चाहिए, आदि। क्योंकि ऐसा करने से महिला के शरीर को ठण्ड से बचे रहने में मदद मिलती है और शरीर गर्म रहता है।

खान पान का ध्यान रखें

बदलते मौसम के साथ गर्भवती महिला को अपने खान पान में भी बदलाव करना चाहिए जैसे की महिला को ड्राई फ्रूट्स खाने चाहिए, हरी सब्जियां खानी चाहिए, केसर मिल्क, हल्दी दूध, आदि पीना चाहिए, यह सब चीजें सर्दियों में इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करती है। साथ ही शरीर को गर्म रखती है जिससे सर्दियों के मौसम में होने वाली परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

धूप में बैठे

सर्दियों के मौसम में महिला को थोड़ी देर धूप में भी बैठना चाहिए इससे माँ व् बच्चे दोनों को सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं साथ ही शरीर गर्म भी रहता है।

व्यायाम करें

सर्दियों के मौसम में बाहर घूमने जाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की आप केवल घर पर आराम करें। बल्कि गर्भवती महिला को दिन भर में थोड़ी देर व्यायाम करना चाहिए इससे गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही व्यायाम करने से शरीर को गर्म रहने में भी मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला सर्दियों में फिट व् एक्टिव रहती है।

सुबह शाम के समय बाहर निकलने से बचें

सर्दियों के मौसम में सुबह व् शाम के समय ठंडी हवाएं चल रही होती है। जिसकी वजह से ठण्ड से जुडी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सर्दी की समस्या से बचे रहने के लिए और शरीर को गर्म रखने के लिए महिला को सुबह व् शाम के समय बाहर नहीं निकलना चाहिए।

घर में रहें

शरीर में गर्मी रहे इसके लिए महिला को सर्दियों में जितना हो सके घर में ही रहना चाहिए। और घर में भी खिड़की दरवाज़े शाम के समय खुले नहीं रखने चाहिए ऐसा करने से घर में आपको ठण्ड नहीं लगेगी और शरीर भी गर्म रहेगा।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे फॉलो करने से गर्भवती महिला को अपने शरीर को गर्म रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को सर्दियों में यदि कोई समस्या होती है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि महिला की परेशानी को खत्म करने में मदद मिल सके।

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प्रेग्नेंट महिला को गर्मियों में अंडे खाने चाहिए है नहीं?

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए सही खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होती है। क्योंकि जितना खान पान सही होता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है उतना ही गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान डाइट में शामिल की जाने वाली चीजों की जानकारी भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर रखनी चाहिए।

जैसे की प्रेग्नेंट महिला जो भी खा रही है वो प्रेग्नेंट महिला के लिए बच्चे के लिए सेफ है या नहीं, उसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए, बदलते मौसम के साथ महिला को उस खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए या नहीं, आदि। क्योंकि खान पान से जुडी जितनी सही जानकारी होती है उतना ही माँ व् बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाले खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है। आज इस आर्टिकल में भी हम प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन करना चाहिए या नहीं खासकर गर्मियों में, उसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्मियों के मौसम में गर्भवती महिला अंडा खाएं या नहीं?

यदि आपके मन में यह सवाल है की प्रेगनेंसी के दौरान अंडा खाना चाहिए या नहीं? तो इसका जवाब है की अंडे में ओमेगा फैटी एसिड, कोलिन, विटामिन डी, प्रोटीन, कैल्शियम, कैलोरी जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए जरुरी होते हैं। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान अंडा खाना महिला के लिए सेफ भी होता है और यह सभी पोषक तत्व भी गर्भवती महिला के शरीर में सही मात्रा में रहते हैं। जिससे माँ व् बच्चा दोनों को हेल्दी रहने में मदद मिलती है।

लेकिन गर्मियों के मौसम में महिला को अंडे का सेवन करते समय थोड़ी सावधानी बरतने की जरुरत होती है। क्योंकि अंडे की तासीर गर्म होती है जिसकी वजह से रोजाना अंडे का सेवन करने से महिला को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में महिला चाहे तो हफ्ते में दो तीन बार अंडे का सेवन कर सकती है और एक दिन में एक अंडा भी महिला के लिए ठीक होता है।

इसका मतलब यह है की गर्मियों के मौसम में सही मात्रा में अंडे का सेवन करने से भी महिला या शिशु को कोई दिक्कत नहीं होती है बल्कि फायदा ही मिलता है। इसके अलावा महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला यदि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही है तो महिला को गर्मी हो चाहे सर्दी हो अंडे का सेवन करने से बचना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में अंडा खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में अंडा खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि को अंडे को अपनी डाइट में शामिल करती है तो इससे एक नहीं बल्कि कई सेहत सम्बन्धी फायदे गर्भवती महिला और शिशु को मिलते हैं। जैसे की:

प्रोटीन: अंडे में मौजूद प्रोटीन कोशिकाओं के लिए फायदेमंद होता है ऐसे में अंडे का सेवन करने से गर्भवती महिला की कोशिकाओं को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में भी मदद मिलती है।

विटामिन डी: गर्भावस्था के दौरान विटामिन डी एक अहम और जरुरी पोषक तत्व होता है ऐसे में अंडे का सेवन करने से विटामिन डी की कमी गर्भवती महिला के शरीर में पूरी होती है। जिससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

ओमेगा फैटी एसिड: अंडे में मौजूद ओमेगा फैटी एसिड गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास में मदद करते हैं। जिससे आपका बच्चा स्मार्ट व् इंटेलीजेंट होता है।

कोलिन: कोलिन एक ऐसा पोषक तत्व होता है जो यदि सही मात्रा में शिशु तक नहीं पहुँचता है तो इसकी वजह से शिशु के दिमागी विकास में कमी आने का खतरा होता है। लेकिन यदि महिला अंडे का सेवन करती है तो महिला को इस बात को लेकर डरने की जरुरत नहीं होती है क्योंकि अंडे में कोलिन मौजूद होता है जो शिशु के बेहतर दिमागी विकास में मदद करता है।

एनर्जी: अंडे का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में कैलोरी की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला हमेशा एनर्जी से भरपूर और एक्टिव रहती है।

कैल्शियम: अंडे में कैल्शियम भी मौजूद होता है जो माँ व् बच्चे की हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

अंडे का सेवन करते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • घर में अण्डों को स्टोर करके नहीं रखें बल्कि जब भी आपका अंडे खाने का मन हो तो दूकान से जाकर दोबारा अंडे लेकर आएं।
  • अंडे का सेवन करते समय ध्यान रखे की अंडा अच्छे से उबला हुआ या पका हुआ हो आधा उबला या आधा कच्चा अंडा भी नहीं खाएं।
  • अंडा खाने से किसी भी तरह की सेहत सम्बन्धी परेशानी हो तो अंडे का सेवन करने से बचें।

तो यह हैं गर्भवती महिला को अंडे का सेवन करना चाहिए या नहीं उससे जुडी जानकारी, ऐसे में यदि आप भी गर्भवती महिला हैं तो आपको भी यह जानकारी होनी चाहिए। ताकि आपको व् आपके होने वाले बच्चे को अंडा खाने के सेहत सम्बन्धी फायदे मिल सकें और किसी तरह का सेहत सम्बन्धी नुकसान नहीं हो।

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प्रेग्नेंट महिला जितिया/जीवित्पुत्रिका व्रत कर सकती है या नहीं?

जितिया व्रत हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल की आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है। जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। जितिया व्रत को सभी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं संतान प्राप्ति की इच्छा से या उनकी लम्बी आयु के लिए रखती है। जीवित्पुत्रिका का व्रत सबसे कठिन होने के साथ सबसे लम्बा चलता है। यह व्रत तीन दिन तक चलता है और इस व्रत को महिलाएं अपनी संतान की खुशहाली के लिए भूखे प्यासे रहकर करती है। साल 2021 में भी जितिया व्रत अब आने वाला है तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की जितिया व्रत 2021 कब है इसका क्या महत्व है और गर्भवती महिलाएं जितिया व्रत को कर सकती है या नहीं।

जितिया व्रत 2021 कब है?

जीवित्पुत्रिका व्रत 28 सितंबर 2021 से शुरू होकर 30 सितंबर 2021 तक चलेगा। जितिया व्रत 28 सितंबर को नहाए खाए के साथ शुरू होगा। और उसके बाद 29 सितंबर को पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाएगा। फिर उससे अगले दिन यानी 30 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा।

जितिया व्रत शुभ मुहूर्त 2021

जीवित्पुत्रिका व्रत: 29 सितंबर 2021

अष्टमी तिथि की शुरुआत: अष्टमी तिथि की शुरुआत 28 सितंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट से होगी उसके बाद

अष्टमी तिथि समाप्त: 29 सितंबर की रात 8 बजकर 29 मिनट पर इसका समापन होगा।

जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व

जितिया व्रत का महत्व यह है की यह व्रत संतान प्राप्ति और उसकी लंबी आयु की कामना के साथ किया जाता है। इसके अलावा धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा माना जाता है की इस व्रत को करने से संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं। साथ ही पौराणिक कथाओं के में भी इसका महत्व बताया गया है और उसके अनुसार महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुण्य कर्मों को अर्जित करके उत्तरा के गर्भ में पल रहे नन्हे शिशु को जीवनदान का वरदान दिया था, इसलिए यह व्रत संतान की रक्षा की कामना के लिए किया जाता है। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि इस व्रत को रखने से भगवान श्रीकृष्ण आपकी संतान की रक्षा करते हैं।

क्या गर्भवती महिला यह व्रत रख सकती है?

जितिया व्रत वैसे तो संतान के लिए ही रखा जाता है लेकिन यह व्रत पूरे दिन भूखे प्यासे रहकर करना पड़ता है। और प्रेगनेंसी के दौरान भूखे प्यासे रहने के कारण महिला और शिशु की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को यह व्रत नहीं रखना चाहिए ताकि महिला और शिशु को सेहत से जुडी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप यह व्रत नहीं करें, इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

गर्भावस्था से जुडी झूठी बातें जिसे सब सच मानते हैं?

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को हर कोई राय देने लगता है सलाह देने लगता है और प्रेगनेंसी से जुडी बातें बताने लगता है। लेकिन इसमें से कुछ बातें ऐसी होती है जो बिल्कुल सही नहीं होती है, कुछ सलाह ऐसी होती है जो पूरी तरह सही नहीं होती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी से जुडी इन्ही झूठी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान शायद किसी ने जरूर कहीं होंगी तो आइये अब जानते हैं की वो बातें कौन सी है।

गर्भावस्था के दौरान महिला को दो लोगो के लिए खाना चाहिए

अधिकतर गर्भवती महिलाओं को यह सलाह भी मिलती होगी की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दो लोगो के लिए खाना चाहिए। जबकि महिला को केवल उतना ही खाना चाहिए जितना महिला आराम से हज़म कर सके और यदि महिला जरुरत से ज्यादा खाती है तो इसकी वजह से महिला का जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ जाता है। जिसके कारण माँ और बच्चे को दिक्कत होने का खतरा रहता है।

बिना अल्ट्रासॉउन्ड के बच्चा लड़का है या लड़की इसका पता चल जाता है

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत से अलग अलग लक्षण महसूस होते हैं। ऐसे में लोग ऐसा मानते हैं की बिना अल्ट्रासॉउन्ड के केवल उन्ही लक्षणों को देखने से वो यह बता सकते हैं की गर्भ में लड़का होगा या लड़की होगी। जैसे की महिला अगर मीठा अधिक खा रही है तो लड़की होगी और महिला यदि चटपटा अधिक खा रही है तो लड़का होगा जबकि यह केवल एक भ्रम है यह सच नहीं है।

प्रेग्नेंट महिला के कमरे में क्यूट बच्चे की फोटो लगाने से बच्चा क्यूट होता है

आपने देखा होगा की अधिकतर सभी गर्भवती महिलाएं अपने कमरे में क्यूट क्यूट बच्चों की फोटो लगा लेती है। और उसके पीछे का कारण यह होता है की ऐसा करने से उनका होने वाला बच्चा भी क्यूट और वैसा ही होता है जबकि सच यह हैं की बच्चा कैसा होगा यह उसके जीन्स पर निर्भर करता है। ऐसे में आप चाहे तो अपने कमरे में बच्चों की फोटो लगा सकती है ताकि आपका मन खुश रहे लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं सोचें की ऐसा करने से आपका होने वाला बच्चा वैसा ही होगा।

प्रेग्नेंट महिला को ट्रैवल नहीं करना चाहिए

यात्रा करने की जब भी बात आती है तो सभी यही कहते हैं की प्रेगनेंसी में ट्रैवल नहीं करना चाहिए हवाई यात्रा नहीं करनी चाहिए। जबकि यह भी गलत है क्योंकि ऐसा करने से भी माँ और बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है बस आपको एक बार डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए यदि आपने कहीं दूर जाना है।

गर्भवती महिला को सिर्फ आराम करना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान महिला को आराम करना चाहिए यह बिल्कुल सही बात है लेकिन पूरा दिन आराम करना चाहिए यह बहुत गलत बात है। क्योंकि प्रेगनेंसी कोई बिमारी नहीं है जिसमे काम नहीं किया जाये ऐसे में गर्भवती महिला को फिट रहने के लिए घर का ऑफिस का काम जरूर करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से माँ और बच्चे को कोई दिक्कत नहीं होती है।

गर्भवती महिला को सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए

प्रेग्नेंट महिला को सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए ऐसा भी आपको जरूर सुनने को मिला होगा लेकिन सच यह है की आराम से और सही चप्पल जूते पहनकर महिला सीढ़ियां चढ़ सकती है। और इसकी वजह से महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है।

प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज करने से गर्भपात हो जाता है

अधिकतर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान एक्सरसाइज करना बंद कर देती है क्योंकि उन्हें ऐसा बताया जाता है की प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज करने से गर्भपात हो जाता है। जबकि आपने देखा होगा की सभी हीरोइन प्रेगनेंसी के दौरान भी व्यायाम करती है तो उनका गर्भपात क्यों नहीं होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान केवल उन एक्सरसाइज को करने की मनाही होती है जिनसे पेट पर दबाव पड़ता है बाकी महिला आराम से बिना किसी डर के व्यायाम कर सकती है। और एक्सरसाइज करने से महिला और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है इसके अलावा जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होते हैं उन्हें व्यायाम करने की मनाही होती है।

ज्यादा फ़ोन का इस्तेमाल करने से बच्चे को दिक्कत होती है

ज्यादा फ़ोन का इस्तेमाल करने से तनाव होना, आँखों से जुडी समस्या होना आम बात होती है। लेकिन यदि आपको किसी ने ऐसा कहा है की प्रेगनेंसी में फ़ोन देखने से बच्चे को नुकसान होता है तो यह बिल्कुल सही नहीं है।

प्रेग्नेंट महिला के सम्बन्ध बनाने से बच्चे को चोट लग जाती है

अधिकतर लोग आज भी प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने को सुरक्षित नहीं मानते हैं क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से बच्चे को चोट लग जाती है। जबकि सच यह हैं की स्वस्थ प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर्स भी सम्बन्ध बनाने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे महिला की परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में बच्चा एमनियोटिक फ्लूड में होता है और यह फ्लूड बच्चे को सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद करता है।

प्रेगनेंसी के समय चाय कॉफ़ी पीना खतरनाक होता है

गर्भावस्था के दौरान महिला को चाय कॉफ़ी बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात, बच्चे के विकास कमी होने खतरा होता है। जबकि सच यह हैं की महिला थोड़ा बहुत चाय कॉफ़ी का सेवन कर सकती है इससे माँ या बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है।

ज्यादा मसालेदार चीजें खाने से महिला का गर्भपात हो सकता है

प्रेग्नेंट महिला को अकसर यह भी कहा जाता है की ज्यादा मसालेदार चीजें खाने से महिला का गर्भपात हो सकता है। बल्कि सच यह हैं की ज्यासा मसालेदार चीजें खाने के कारण महिला को पेट में दर्द, गैस, सीने में जलन की समस्या अधिक होने का खतरा होता है।

मॉर्निंग सिकनेस केवल सुबह होती है

ऐसा भी महिला से कहा जाता है की मॉर्निंग सिकनेस यानी उल्टी, जी मिचलाना, थकावट, कमजोरी जैसी की समस्या महिला को सुबह अधिक होती है। जबकि ऐसा नहीं है प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं पूरा समय इस समस्या से परेशान रहती है।

एक बच्चा सिजेरियन होने के बाद दूसरा बच्चा नॉर्मल नहीं हो सकता

ऐसा बहुत सी गर्भवती महिलाएं आज तक भी सोचती है की यदि महिला का एक बच्चा सिजेरियन डिलीवरी से होता है तो दूसरा बच्चा नॉर्मल नहीं हो सकता है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है बल्कि यदि महिला की प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है तो महिला की दूसरी डिलीवरी आराम से नॉर्मल हो जाती है। बस महिला को इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखें।

तो यह हैं कुछ झूठ जो हो सकता है की आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान किसी ने कहे हो, ऐसे में आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान अपने ध्यान रखना चाहिए न की सभी की सलाह मानकर अलग अलग बातों को लेकर टेंशन लेनी चाहिए।

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गर्भ में शिशु के बीमार होने पर क्या होता है?

माँ के गर्भ में शिशु का पूरा विकास अपनी माँ पर ही निर्भर करता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान जितना ज्यादा अच्छे से महिला अपना ध्यान रखती है। उतना ही ज्यादा गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे तरीके से होता है। लेकिन कई बार प्रेगनेंसी के दौरान लापरवाही करने से, महिला का अपनी सेहत के प्रति अच्छे से ध्यान नहीं रखने से, खान पान में लापरवाही बरतने से गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है। ऐसे में गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, गर्भ में शिशु बीमार या कमजोर तो नहीं है इसके बारे में महिला कैसे जान सकती है इसके बारे में आज इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं।

गर्भ में शिशु के बीमार होने पर महसूस होते हैं यह लक्षण

माँ के गर्भ में पल रहा शिशु यदि बीमार होता है तो ऐसा होने पर महिला के शरीर में कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं। जैसे की:

महिला का पेट बाहर नहीं आता है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का पेट महीने दर महीने आगे की और निकलने लगता है। लेकिन यदि महिला का प्रेगनेंसी का टाइम तो आगे बढ़ रहा होता है परन्तु महिला का पेट उस तरह से नहीं बढ़ता है। तो ऐसा होना गर्भ में शिशु के विकास में कमी यानी की गर्भ में शिशु के बीमार होने की तरफ इशारा करता है।

शिशु की मूवमेंट में कमी

यदि गर्भ में शिशु बीमार होता है या शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है तो ऐसा होने पर महिला को शिशु के मूवमेंट में कमी महसूस हो सकती है। क्योंकि शिशु के स्वस्थ होने पर प्रेगनेंसी के टाइम के आगे बढ़ने के साथ गर्भ में शिशु की मूवमेंट भी बढ़ने लगती है। और यदि शिशु की मूवमेंट नहीं बढ़ती है तो इसका कारण गर्भ में शिशु का बीमार होना हो सकता है।

महिला का वजन नहीं बढ़ता है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना जरुरी होता है क्योंकि उसमे महिला के वजन के साथ शिशु का वजन भी जुड़ जाता है। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन नहीं बढ़ता है बल्कि महिला कमजोर हो जाती है तो ऐसा होना भी गर्भ में शिशु के बीमार होने का ही लक्षण होता है।

ब्लीडिंग होना

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है और ऐसा होना आम बात होती है। लेकिन यदि यह समय पूरी प्रेगनेंसी के दौरान होती है तो यह लक्षण गर्भ में शिशु के अस्वस्थ होने की और इशारा करता है। साथ ही ब्लीडिंग बढ़ने के कारण गर्भपात, स्पॉटिंग की समस्या होने के कारण महिला को प्रेगनेंसी में ज्यादा कॉम्प्लीकेशन्स का सामना करना पड़ सकता है।

महिला बीमार पड़ सकती है

यदि गर्भ में शिशु स्वस्थ नहीं होता है तो इसकी वजह से महिला की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है जिसके कारण महिला भी बीमार महसूस कर सकती है। ऐसे में महिला को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ या शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो इस बात की और इशारा करते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ नहीं है या शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो रहा है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इन लक्षणों के महसूस होने पर इन्हे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि समय रहते बच्चे को सही ट्रीटमेंट मिल सके जिससे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

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Eating bottle gourd during pregnancy can offer benefits such as providing essential vitamins, minerals, and dietary fiber for maternal and fetal health. It may also help in relieving constipation and promoting healthy lactation.

प्रेगनेंसी में लौकी खाने के फायदे और नुकसान, प्रेगनेंसी में लौकी या घीया खाने से क्या होता है, Louki Ke Fayde, Gheeya ke fayde Pregnancy me. गर्भवती महिलाओं के लिए लौकी कितनी फायदेमंद है और कितनी नुकसानदेह, इसके बारे में पता होना जरूरी है। जानते हैं सेवन करते वक्त बरतने वाली सावधानी

प्रेगनेंसी में फिनाइल और फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल करने से क्या नुकसान होते हैं?

गर्भावस्था के दौरान महिला थोड़े बहुत घर के काम कर सकती है। क्योंकि ऐसा करने से महिला का घर का काम भी हो जाता है और महिला का व्यायाम भी हो जाता है साथ ही महिला बिज़ी भी रहती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को एक्टिव रहने में मदद मिलती है। लेकिन घर का काम करते समय महिला को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए जिससे गर्भवती महिला को फिट व् स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और सेहत सम्बन्धी कोई दिक्कत भी नहीं हो।

जैसे की महिला को आराम से काम करना चाहिए, काम करते समय महिला के पेट पर जोर नहीं पड़ना चाहिए, महिला को ज्यादा देर खड़े रहकर काम नहीं करना चाहिए, फिनाइल और फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, आदि। क्योंकि इन सभी के कारण प्रेग्नेंट महिला व् शिशु की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में फिनाइल और फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला और शिशु को क्या नुकसान होते हैं इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

स्किन इन्फेक्शन का रहता है खतरा

फिनाइल व् फ्लोर क्लीनर को बनाने के लिए जिन केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है वह सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक होते हैं। साथ ही प्रेग्नेंट महिला यदि फिनाइल या फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल करती है तो इससे वह केमिकल्स महिला की स्किन के संपर्क में आते हैं। और प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं की स्किन बहुत सेंसिटिव हो जाती है जिसकी वजह से स्किन के संपर्क में आने के कारण उन केमिकल्स का असर स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है। और महिला को इसकी वजह से खुजली, जलन, रैशेस जैसी समस्या हो सकती है।

तेज दुर्गन्ध से पहुँचता है नुकसान

केमिकल्स की मदद से बनाए गए इन फिनाइल और फ्लोर क्लीनर की स्मैल बहुत ज्यादा तेज होती है। और कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान स्मैल से एलर्जी होती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला यदि इनका इस्तेमाल करती है तो इसके कारन महिला को उल्टी आने का मन करना, सिर में दर्द जैसी समस्याएँ हो सकती है।

शिशु के विकास को पहुँचता है नुकसान

प्रेग्नेंट महिला यदि घर की साफ़ सफाई के लिए फिनाइल या फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल करती है तो इससे वह केमिकल्स महिला की स्किन के संपर्क में आते हैं। और स्किन के संपर्क में आने के कारण यह शरीर में भी प्रवेश करते हैं और शरीर में पहुँचने पर इनका असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी पड़ सकता है। जिसकी वजह से शिशु के विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो फिनाइल का फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल करने से हो सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इन चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ताकि माँ और बच्चे दोनों को किसी भी तरह की सेहत सम्बन्धी परेशानी नहीं हो।