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ब्रैस्टमिल्क बढ़ाने के लिए महिला को क्या क्या खाना चाहिए

शिशु के जन्म के बाद माँ के दूध को शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार कहा गया है। और महिला को शिशु के जन्म के कम से कम छह महीने तक बच्चे को केवल का दूध ही देना चाहिए, इसके अलावा पानी तक नहीं देना चाहिए। माँ के दूध में वो सभी जरुरी मिनरल्स मौजूद होते है जो की शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए सबसे जरुरी होते है। और इससे शिशु के विकास को भी तेजी से होने में मदद मिलती है, और शिशु हष्ट पुष्ट और तंदरुस्त रहता है।

लेकिन कई महिलाओ को डिलीवरी के बाद अच्छे से दूध नहीं उतरता है, ऐसे में बच्चे को अच्छे से माँ का दूध नहीं मिल पाता है। जिसके कारण बच्चे थोड़ी थोड़ी देर में भूखा होकर रोने लगता है। और महिला भी इस बात को लेकर परेशान रहती है, लेकिन यह ऐसी कोई बड़ी समस्या नहीं है जिसका कोई इलाज न हो। बल्कि आपके खान पान में ऐसी चीजों को सम्मिलित करना चाहिए जिससे ब्रैस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिल सकें।

ब्रैस्टमिल्क बढ़ाने के उपाय:-

मेथी के बीज:-

ओमेगा 3, कैल्शियम, आयरन, विटामिन से भरपूर मेथी के बीज ब्रैस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद करते है। इसके लिए आप मेथी के बीजो को पाउडर के रूप में पीस कर अपनी सब्जियों में भरपूर मात्रा में डालें, साथ ही आप परांठे और पूरी बनाकर भी इसका सेवन कर सकते है।

जीरा:-

जीरा भी ब्रैस्टमिल्क को बढ़ाने में बहुत फायदा करता है, इसके लिए आप जीरा को तवे पर अच्छे से पीसकर पाउडर के रूप में तैयार कर लें। उसके बाद आप इसका दाल में ऊपर से डालकर, रायता, सलाद आदि में ऊपर से छिड़ककर इसका सेवन करना चाहिए। नियमित ऐसा करें यह ब्रैस्ट मिल्क को बढ़ाने का प्राकृतिक उपाय है।

सौंफ:-

डिलीवरी के बड़ा महिला सौंफ का सेवन करने से भी ब्रैस्टमिल्क बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप दूध व् चाय में सौंफ डाल सकते है। इसके अलावा आप इसे पीसकर सब्जियों आदि में भी मिलाकर प्रयोग कर सकते है, नियमित सेवन से आपको इसका असर साफ़ दिखाई देने लग जाता है।

दालों का सेवन करें:-

दालों में प्रोटीन व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते है। खासकर मसूर दाल, मूंग की दाल आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। यदि आप नियमित एक समय आहार में दाल, या दाल का सूप आदि पीना चाहिए। इससे भी महिला के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है साथ ही बच्चे को भी मिनरल्स युक्त आहार मिलता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां खानी चाहिए:-

हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन, प्रोटीन, विटामिन कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होती है। इसके सेवन से महिला को सभी पोषक तत्व भरपूर मिलते है, जिससे उसको फिट रहने में मदद मिलती है। जिससे ब्रैस्टमिल्क को भी बढ़ाने में मदद मिलती है।

जई का दलिया:-

जई का दलिया भी ब्रैस्टमिल्क बढ़ाने के लिए बहुत ही अच्छा उपाय है, साथ ही इससे महिला को तनाव से राहत पाने में भी मदद मिलती है। इसके स्वाद और गुणों को बढ़ाने के लिए आप इसमें केसर, मेवे, फ्रूट्स आदि का भी इस्तेमाल कर सकते है। इससे महिलाओ में खून की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है।

नारियल का तेल:-

नारियल तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते है। जिससे यह महिलाओ के ब्रैस्ट में दूध की मात्रा बढ़ाने वाले हॉर्मोन को बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही इससे बच्चे को भी बहुत फायदा मिलता है, इसके लिए नई माँ को दिन में कम से कम एक से तीन चम्मच नारियल के तेल को अपने आहार में सम्मिलित करना चाहिए।

ब्राउन राइस:-

ब्राउन राइस में फाइबर व् ने पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते है, जो की महिला के लिए बहुत फायदेमंद होते है। नियमित इन्हे एक समय अपने आहार में सम्मिलित करने से बॉडी को आवश्यक कैलोरी मिलती है, जिससे ब्रैस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है।

लहसुन:-

लहसुन को भी आपके खाने में जरूर इस्तेमाल करें यह भी आपके शरीर में दूध की ग्रंथियों को बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन कई बार लहसुन के सेवन करने से दूध में इसका स्वाद आता है जो कई बार शिशु को अच्छा नहीं लगता है, इसीलिए इसे अपने आहार में अधिक नहीं लेकिन थोड़ा बहुत जरूर शामिल करें।

गाजर:-

गाजर का सेवन न केवल आपके शरीर में ब्लड की मात्रा को बढ़ाता है, बल्कि इससे महिला को ब्रैस्ट मिल्क को बढ़ाने में भी मदद मिलती है, इसके लिए आप गाजर को सलाद, सब्जी, सूप, या फिर जूस आदि के रूप में ले सकते है। साथ ही आप गाजर और पपीते को कदूकस करके भी इसका सेवन कर सकते है इससे भी दूध की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद मिलता है।

ब्रैस्ट मिल्क को बढ़ाने के अन्य उपाय:-

  • पंप का इस्तेमाल करने से भी आपके ब्रैस्ट में दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • ब्रश वाली कंघी को हल्के हल्के हाथो से प्रेस करने से मांसपेशियों को खुलने में मदद मिलती है जिससे दूध का उत्पादन बढ़ता है।
  • स्तनपान करवाते समय स्तन को अच्छे से दबाते रहना चाहिए, इससे भी आपको फायदा मिलता है।
  • बच्चे को स्तनपान करवाते समय बार बार स्तन को बदलते रहना चाहिए।
  • तनाव नहीं लेना चाहिए, खुश रहना चाहिए क्योंकि यदि आप तनाव लेते है तो इसके कारण भी आपको यह परेशानी हो सकती है।
  • करेला भी विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होता है, इसके अधिक सेवन से भी ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • दूध युक्त पदार्थ, दूध, घी, मक्खन आदि का भी भरपूर सेवन करने से ब्रैस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • विटामिन, प्रोटीन, और मिनरल्स से भरपूर ड्राई फ्रूट का सेवन करने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • तुलसी का सूप या तुलसी के पत्तो को पीसकर शहद के साथ खाने से दूध का उत्पादन बढ़ता है।
  • महिला को अपने आहार का ध्यान रखना चाहिए, और स्वस्थ व् संतुलित आहार का थोड़े थोड़े समय बाद सेवन करते रहना चाहिए, ऐसा करने से महिला को फिट रहने में मदद मिलती है, जिससे ब्रैस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यदि आपको भी डिलीवरी के बाद ब्रैस्टमिल्क नहीं आता है तो आप भी ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है। इसके अलावा यदि फिर भी दूध नहीं आता है तो इस बारे में आप डॉक्टर से भी राय ले सकते है। लेकिन महिला को जितना हो सकें बच्चे को उतना स्तनपान करवाना चाहिए, क्योंकि जन्म के बाद शिशु के बेहतर विकास के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है।

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गर्भवती महिला को खाना बनाते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

प्रेगनेंसी में काम

गर्भवस्था के दौरान महिला को आराम करने की सलाह दी जाती है पर इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की महिला घर के छोटे काम भी न करें। खासकर किचन में तो महिला को काम करना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल गर्भवती महिला को समय बिताने में मदद मिलती है बल्कि थोड़ा बहुत काम करना प्रेगनेंसी में व्यायाम का काम करता है जिससे महिला को फिट रहने में मदद मिलती है, इसके अलावा घर के थोड़े बहुत काम भी महिला पूरी सावधानी के साथ कर सकती है। लेकिन यदि आपको डॉक्टर ने पूरे आराम की सलाह दी है या प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स ज्यादा है तो आपको घर के काम करने से बचना चाहिए फिर चाहे वो किचन का काम ही क्यों न हो। क्योंकि गर्भावस्था एक नाजुक स्थिति होती है जिसमे बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को किचन में काम करते समय इन बातो का ध्यान रखना चाहिए

किचन का काम तो लगभग हर गर्भवती महिला करती है, लेकिन किचन में काम करते समय भी महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला यदि किचन में काम करते समय थोड़ी सी भी लापरवाही बरतती तो इससे महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को किचन का काम करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पहले करे काम की तैयारी

किचन में आपको जो भी काम करना है उसकी तैयारी आप किचन के बाहर कुर्सी आदि पर बैठकर कर सकती है जैसे की सब्जियां काटना आदि। और जब आपकी खाना बनाने की तैयारी हो जाती है तो उसके बाद आराम से किचन में जाकर आप काम कर सकती है, साथ ही खाना बनाने के लिए जिन जिन चीजों की जरूरत होती है उन्हें किचन में आस पास ही रखें ताकि आपको कोई दिक्कत न हो।

आराम से काम करें

तेजी से काम करने के कारण दिक्कत होने का खतरा हो सकता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को किचन में काम करते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए की काम करते हुए बिल्कुल भी तेजी न करें बल्कि आराम से काम करें। आराम से काम करने से काम बेहतर तरीके से होता है और साथ ही किसी तरह की परेशानी से बचने में भी मदद मिलती है।

थकान होने पर करे आराम

काम करते करते यदि आपको ऐसा लग रहा है की आप थक गई है तो ऐसे में काम छोड़कर बॉडी को थोड़ा आराम देना जरुरी होता है। क्योंकि यदि आप काम कर रही है और कमजोरी व् थकान का अनुभव हो रहा है ऐसे में काम को करते रहने से आपको दिक्कत हो सकती है। इसीलिए किचन में काम करने के साथ थकान होने पर आराम भी करना चाहिए।

ज्यादा देर तक खड़े न रहें

रसोई में काम करते समय गर्भवती महिला को एक ही जगह पर देर तक खड़े नहीं रहना चाहिए। क्योंकि इससे ब्लड फ्लो पैरो तक अच्छे से होने में दिक्कत हो सकती है। जिससे चक्कर व् घबराहट जैसी समस्या प्रेग्नेंट महिला को हो सकती है। इसीलिए खड़े होकर काम करते हुए भी अपनी पोजीशन को बदलते रहना चाहिए।

कुर्सी का इस्तेमाल करें

आराम के लिए किचन में कुर्सी भी गर्भवती महिला रख सकती है, ऐसे में जैसे ही महिला को थकान का अनुभव हो वैसे ही महिला कुर्सी पर बैठकर थोड़ा आराम करें और आराम के साथ किचन का काम भी करें। इससे महिला का किचन का काम भी आसानी से हो जाएगा और किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी।

पंखा लगवाएं

प्रेग्नेंट महिला किचन में गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचने के लिए पंखा भी लगवा सकती है, जितनी देर गैस नहीं चलती है महिला किचन के आने काम कर रही है उतनी देर गर्मी से बचने के लिए पंखा चलाकर महिला आराम से काम कर सकती है। इससे महिला को किचन में गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचने में भी मदद मिलती है।

पेट के बल काम करने से बचें

प्रेग्नेंट महिला को किचन में पेट को शेल्फ के साथ लगाकर काम करने से बचना चाहिए। जैसे की रोटी को बेलते समय, आटा बनाते समय, आदि किचन की शेल्फ से पेट बार बार लग सकता है, ऐसे में महिला को सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

किसी की मदद लें

किचन में अकेले काम करने की बजाय किसी की मदद लेना फायदेमंद होता है जैसे की ज्यादा ऊपर से कोई चीज उठानी है, या झुककर की चीज उठानी है तो इसके लिए किसी की मदद लेना ही फायदेमंद होता है। क्योंकि यदि गर्भवती महिला अपने आप ही यह सब काम करती है तो इसके कारण महिला को परेशानी का अनुभव हो सकता है।

खाने का रखें ध्यान

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने के कारण बॉडी में बहुत से बदलाव देखने को मिलते हैं। और यह बदलाव केवल शारीरिक या मानसिक रूप से नहीं बल्कि महिला के स्वभाव या महिला की पसंद नापसंद से जुड़े भी हो सकते हैं। ऐसे में महिला को कुछ ऐसी चीजें होती है जिनकी गंध से प्रेगनेंसी के दौरान एलर्जी हो जाती है ऐसे में महिला को किचन में उन काम को करने से बचना चाहिए। क्योंकि गंध से एलर्जी होने के कारण महिला को उलटी आदि की समस्या भी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान प्रेग्नेंट महिला को किचन में काम करते समय रखना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने से गर्भवती महिला को किचन में काम करते समय किसी भी तरह की परेशानी से बचने में मदद मिलता है। लेकिन यदि डॉक्टर ने आपको घर का काम न करने की सलाह दी है तो किचन का काम करने से पहले भी एक बार डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए।

मोटापा कम करने के लिए क्या करें?

आज कल हर कोई पतला तो होना चाहता है लेकिन पतला होने के लिए क्या करें यह उन्हें समझ नहीं आता है। जो भी उन्हें वजन कम करने के लिए जैसे टिप्स देता है वो वैसे ही फॉलो करने लग जाते है। यदि आपका भी वजन बढ़ा हुआ है तो वजन कम करने के लिए आप भी दूसरों के कहने पर बहुत कुछ करते होंगे? लेकिन क्या आपको कुछ फ़र्क़ महसूस हो रहा है? यदि नहीं तो इसका कारण होता है।

की या तो आप उन टिप्स को अच्छे से फॉलो नहीं कर रहे हैं या फिर आप गलत टिप्स को फॉलो कर रहे हैं। तो लीजिये आज हम इस आर्टिकल में आपको कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके वजन को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं। बस आप इस बात का ध्यान जरूर रखें एक इन सभी टिप्स को नियमित अच्छे से फॉलो करें। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

डाइट न करें बल्कि डाइट को सुधारे

ज्यादातर लोगो के मन में यही बात होती है की खाना छोड़ने से उनका वजन कम हो जाता है। जो की सही तो है, लेकिन इस तरह वजन कम करने से आप बीमार हो जाते हैं, आपके शरीर में कमजोरी होने लगती है, और उसके बाद जब आप दुबारा खाने लगते हैं तो दुगुनी तेजी से आपका वजन बढ़ता है। ऐसे में वजन कम करने के लिए आपको अपनी डाइट में सुधार करना चाहिए।

जैसे की खाने का एक सही समय बनाना चाहिए, ऑयली मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए, जंक फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए, फाइबर युक्त डाइट लेनी चाहिए, उबला हुआ खाना खाएं, सलाद व् फलों का सेवन करें, जरुरत से ज्यादा नहीं खाएं, खाने के बाद पानी नहीं पीएं, आदि। यदि अपनी डाइट से जुडी इन सभी बातों का ध्यान रखते हैं तो इससे आपके वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

गुनगुना पानी

गुनगुना पानी जरूर पीएं, एक दिन में आठ से दस गिलास पानी पीना बहुत जरुरी होता है। तो उसमे से चार से पांच बार आप गुनगुना पानी पीएं। बाकी समय नोर्मल पानी पीएं ठंडा पानी बिल्कुल नहीं पीएं। इसके अलावा सुबह उठकर एक गिलास गुनगुना पानी लें और उसमे एक निम्बू और एक चम्मच शहद डालकर पीएं। खाना खाने के एक घंटे बाद चाय की तरह उबलता हुआ एक कप पानी पीएं। यदि आप पानी पीने से जुड़े इन टिप्स का ध्यान रखती है तो इससे शरीर में जमने वाले फैट को घटाने में मदद मिलती है। जिससे धीरे धीरे आपका वजन कम होने लगता है।

ग्रीन टी और कॉफ़ी

ग्रीन टी और कॉफ़ी एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती जो मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद करती है। साथ ही शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करती है। जिससे वजन को सही रहने में मदद मिलती है दिन में एक या दो कप ग्रीन टी कॉफ़ी जरूर पीएं। इसके अलावा एक बात का ध्यान रखें की खाली पेट इनका सेवन नहीं करें।

डांस करें

डांस एक एक्सरसाइज होती है जिससे वजन को तेजी से कम करने में मदद मिलती है। ऐसे में आप पूरे दिन में किसी भी समय आधा घंटा डांस जरूर करें। ध्यान रखें की एक ही जगह खड़े रहकर डांस नहीं करना है आपको ऐसे डांस करना है की आपकी पूरी बॉडी मूव करें। ऐसा करने से आपके शरीर से जितना ज्यादा पसीना निकलेगा, आपकी बॉडी जितना अच्छे से मूव करेगी, उतना जल्दी आपके शरीर पर जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलेगी।

साइकिलिंग

यदि आपको साइकिलिंग करनी आती है तो आप दिन में आधा घंटा रोजाना सुबह या शाम को साइकिलिंग भी जरूर करें। क्योंकि साइकिलिंग भी तेजी से भी वजन को कम करने में मदद करती है।

पैदल चलने की आदत डालें

वजन कम करने के लिए पैदल चलना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यह एक बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है। जितना ज्यादा आप पैदल चलते हैं उतना ही शरीर से पसीना निकलता है, चर्बी कम होती है जिससे आपका वजन तेजी से कम होता है। इसके लिए आप लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करें बल्कि सीढ़िया इस्तेमाल करें, कुछ सामान लेने जाना हो तो कोशिश करें की आस पास हो तो पैदल जाएँ, आदि।

योगासन करें

आप सबने यह तो सुना ही होगा की योगा से ही होगा, योगा वजन घटाने के लिए एक बेहतरीन तरीका है। यदि रोजाना आधे घंटे के लिए सही तरीके से योगा किया जाता है तो तेजी से वजन को घटाने में मदद मिलती है। क्योंकि इससे बॉडी स्ट्रेच होती है जिससे शरीर पर जमे फैट को कम करने में मदद मिलती है।

भरपूर नींद

भरपूर नींद भी आपके वजन को कम करने के लिए बहुत जरुरी होती है। क्योंकि यदि आप नींद भरपूर नहीं लेती है तो आपको तनाव होता है, तनाव होता है तो भूख कम या ज्यादा होती है किसी भी काम को समय पर करने का मन नहीं करता हैं, जिसके कारण आपका रूटीन बिगड़ जाता है और रूटीन जब बिगड़ जाता है तो केवल मोटापा ही नहीं बल्कि बहुत सी स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां होने लगती है। ऐसे में आपका रूटीन सही रहे इसके लिए जरुरी है की आप नींद भरपूर लें और कोशिश करें की रात को जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठें।

वजन कम करने के घरेलू तरीके

  • एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद डालकर मिक्स करके पीएं ऐसा रोजाना करें।
  • काली मिर्च का सेवन अपनी डाइट जरूर करें।
  • दालचीनी को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं इसके साथ गुनगुने पानी में निम्बू शहद और दालचीनी पाउडर डालकर रोजाना पीएं।
  • एक कटोरी दही का सेवन रोजाना करें।
  • एक कप एलोवेरा और आंवले का सेवन रोजाना करें।
  • सौंफ के बीज को को भूनकर पीस लें अब इस पाउडर को रोजाना एक चम्मच गुनगुने पानी में मिक्स करके लें।
  • पांच से छह करी पत्ते रोजाना खाएं।
  • अदरक को पानी में उबालकर पानी को छान लें और चाय की तरह उसका सेवन करें।
  • एक दिन में दो से तीन चम्मच नारियल का तेल सेवन करने से भी वजन को कम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से मोटापा तेजी से कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा ध्यान रखें की एक या दो दिन इन टिप्स को ट्राई करने से वजन कम नहीं होगा। बल्कि नियमित रूप से आप इन टिप्स को अपने रूटीन में शामिल करेंगे तभी वजन कम होगा। साथ ही हो सकता है की शुरुआत में आपको थोड़ी दिक्कत हो लेकिन थोड़े दिन इन टिप्स को ट्राई करने से यह आपकी आदत बन जाएगी। और यह आदत आपके स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए बहुत अच्छी होगी।

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गर्भावस्था में सूजन की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में सूजन आना आम बात होती है। और यह आखिरी महीनो में ज्यादा होती है, क्योंकि महिला का वजन बढ़ने के कारण पैरों से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह अच्छे से नहीं हो पाता है। लेकिन यह समस्या केवल पैरों में ही नहीं कई बार हाथों, चेहरे, टखनों में भी दिखाई देती है। सामान्य सूजन को एडिमा कहा जाता है, और इसका कारण शरीर में तरल पदार्थो का अधिकता में होना होता है।

शरीर में तरल पदार्थो के कारण बॉडी में को नरम रहने में मदद मिलती है। जिसके कारण बच्चे का विकास अच्छे से हो पाता है। शरीर को प्रसव के लिए तैयार करने और पैल्विक जोड़ो और उत्तको को तैयार करने के लिए भी शरीर में पानी की मात्रा अधिक होनी चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप अपने चेहरे और हाथों में अधिक सूजन का अनुभव करती है। तो इसे प्री एक्लेम्पसिया कहा जाता है।

एडिमा की सूजन यानी पैरों में या हाथों में हलकी फुलकी सूजन होना सामान्य होता है। लेकिन यदि आपको हाथों, चेहरे, आँखों के अस पास फुंसी आदि होने लगती है। तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत आपको डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। और यदि आपके एक पैर में सूजन अधिक और दूसरे में कम होती है, तो भी डॉक्टर को दिखाना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सूजन के क्या कारण होते है।

प्रेगनेंसी के दौरान सूजन होने के कारण:-

  • अधिक गर्मी होने के कारण भी आपको सूजन हो सकती है।
  • यदि आप ज्यादा देर तक खड़े रहते है तो भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • लम्बे समय तक काम करते रहने से भी आपको सूजन की समस्या हो सकती है।
  • यदि आप अपने आहार में पोटैशियम की मात्रा कम लेते है तो यह भी सूजन का कारण होता है।
  • जो महिलाएं कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन करती है उन्हें भी यह परेशानी हो सकती है।
  • सोडियम यानी नमक का सेवन भी प्रेगनेंसी में अधिक करने से आपकप इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था में सूजन की समस्या से निजात पाने के टिप्स:-

पानी का सेवन करें:-

प्रेगनेंसी के दौरान पानी का सेवन करने से शरीर में तरल पदार्थो को बढ़ने में मदद मिलती है। साथ ही इसके सेवन से आपको यूरिन के माध्यम शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है। और सोडियम व् अन्य अपशिष्ट पदार्थो के बाहर निकालने से सूजन कम करने में आपको मदद मिलती है।

व्यायाम करें:-

व्यायाम करने से आपकी बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। और यदि आप अपने पैरों में मूवमेंट रखते है तो इसके कारण आपके पैरों से भी रक्त का प्रवाह अच्छे से होने में मदद मिलती है। इसीलिए आपको सुबह शाम हल्का फुल्का व्यायाम करते रहना चाहिए इससे आपकी बॉडी को भी फिट रहने में मदद मिलती है।

ज्यादा समय तक खड़े न रहे:-

प्रेगनेंसी के दौरान आपका वजन बढ़ता रहता है, जिसके कारण ज्यादा देर तक खड़े रहने से आपके पैरों पर दबाव पड़ता है, और ब्लड फ्लो भी अच्छे से नहीं हो पाता है, ऐसे में आपको ज्यादा देर एक ही स्थान पर नहीं खड़े रहना चाहिए। साथ ही बैठे हुए भी अपने पैरों को हिलाते रहना चाहिए, इससे भी ब्लड फ्लो अच्छे से होने में मदद मिलती है।

नमक:-

नमक का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान कम करना चाहिए। क्योंकि इसके सेवन से भी आपको सूजन ज्यादा हो सकती है। और ऐसा भी नहीं है की एक दम से आप नमक कम खाना शुरू कर दे, बल्कि धीरे धीरे नमक का सेवन कम करना चाहिए ताकि आपको ब्लड प्रैशर से जुडी कोई परेशानी न हो।

सिकाई करें:-

गर्म पानी से सिकाई करने पर भी सूजन को कम करने और ब्लड फ्लो को बेहतर करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप हॉट पैड का इस्तेमाल करने के साथ गर्म पानी में अपने पैरों को डुबोकर भी सिकाई कर सकते है।

करवट लेकर सोएं:-

यदि आप सीधी सोती है तो सूजन की समस्या से आराम पाने के लिए करवट लेकर सोना शुरू कर दे। इससे आपकी किडनी को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। जिससे शरीर में मौजूद सभी अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकलते है और सूजन की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।

तो यदि आपको भी प्रेगनेंसी में ज्यादा सूजन की समस्या है तो आप भी डॉक्टर से राय ले सकती है। लेकिन यदि आपको हलकी फुलकी सूजन पैरों में है तो आप ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। ऐसा करने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली सूजन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में ज्यादा काम करने के नुकसान

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला शरीर में बहुत से नए बदलाव, नए अनुभव का अहसास करती है। साथ ही इस दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को शरीर में होने वाले बदलाव, शारीरिक परेशानियों के कारण ज्यादा दिक्कत न हो इसके लिए महिला को अपने खान पान, अच्छे से आराम करने की सलाह दी जाती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है की महिला केवल सारा दिन बेड पर लेटी रहें और कोई काम न करें।

बल्कि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए थोड़ा बहुत काम करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इसे महिला को एक्टिव रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि कोई प्रेग्नेंट महिला जरुरत से ज्यादा काम करने लग जाती है तो यह बिल्कुल सही नहीं होता है। और ज्यादा काम करने की वजह से माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत महसूस होती है। जैसे की:

थकान व् कमजोरी

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत जल्दी थकान व् कमजोरी की समस्या होती है। ऐसे में महिला यदि जरुरत से ज्यादा काम करने लगती है तो इसके कारण महिला की यह दिक्कत बढ़ सकती है। और थकान व् कमजोरी की समस्या अधिक होने पर बॉडी पेन, सिर दर्द, जोड़ो में दर्द आदि की समस्या का सामना भी महिला को ज्यादा करना पड़ता है।

सांस फूलने की समस्या

वजन बढ़ने के कारण कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान सांस फूलने की परेशानी हो जाती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला जरुरत से ज्यादा काम करती है तो महिला को इस परेशानी का अधिक सामना करना पड़ता है।

ब्लीडिंग का खतरा

ज्यादा काम करने के कारण महिला को ब्लीडिंग होने का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर जब महिला कोई ऐसा काम कर रही हो जिसकी वजह से पेट पर दबाव पड़ रहा हो, महिला भारी सामान उठाने वाला काम कर रही हो, आदि। और पहली तिमाही में जरुरत से ज्यादा काम करने पर ब्लीडिंग की समस्या यदि अधिक हो जाती है तो इसकी वजह से गर्भपात हो जाता है।

समय से पहले प्रसव

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को यदि जरुरत से ज्यादा काम करती है। तो इसके कारण पेट पर जोर पड़ सकता है, गर्भाशय में संकुचन अधिक हो सकता है, जिसकी वजह से समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

बच्चे को दिक्कत होने की समस्या

आपने यह तो सुना ही होगा गर्भ में पल रहा बच्चा पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। वैसे ही जब महिला जरुरत से ज्यादा काम करती है तो महिला को थकान, कमजोरी, तनाव आदि महसूस होता है तो इसका असर गर्भ में शिशु पर भी पड़ता है। जिसके कारण माँ के पेट में शिशु दिक्कत महसूस कर सकता है।

नींद में कमी

गर्भावस्था के दौरान महिला को बॉडी में हार्मोनल बदलाव, वजन बढ़ने के कारण वैसे भी नींद लेने में परेशानी हो जाती है। ऐसे में यदि महिला ज्यादा काम करती है तो इसके कारण महिला को थकान, बॉडी पेन आदि की समस्या अधिक हो सकती है। जिसके कारण महिला अच्छे से नींद नहीं ले पाती है। और महिला की नींद पूरी न होने के कारण महिला की परेशानियां बढ़ जाती है।

भूख की कमी

फिट रहने के लिए बहुत जरुरी है की आप जितना काम करते है उतनी ही अच्छी आपको डाइट भी लेनी चाहिए। लेकिन प्रेगनेंसी में थोड़ा अलग है महिला को डाइट तो अच्छी लेनी चाहिए, लेकिन काम जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ज्यादा काम करने के कारण महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ जाती है जिसकी वजह से महिला का खाने का मन नहीं करता है। और फिर महिला के साथ बच्चे पर भी इसका असर पड़ता है।

लापरवाही होने का खतरा

यदि प्रेग्नेंट महिला जरुरत से ज्यादा काम करती है या ज्यादा तेजी से काम करती है तो कई बार लापरवाही होने का खतरा रहता है। जैसे की पेट पर दबाव पड़ जाता है, झटका लग जाता है, आदि। और ऐसी लापरवाही का खामियाजा माँ और बच्चे दोनों को भुगतना पड़ता है।

तो यह हैं कुछ समस्या जो प्रेगनेंसी में ज्यादा काम करने के कारण हो सकती है। और साथ ही इसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के लिए थोड़ा बहुत काम करना चाहिए। और जिस काम को करने में माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत न हो महिला को वो काम करना चाहिए। ताकि माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकें।

कौन से तेल बॉडी मसाज के लिए अच्छे होते है? और उनके क्या-क्या फायदे है?

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आज के समय में हर कोई अपने काम में इतना व्यस्त रहता है की आराम करने का समय ही नहीं मिलता। जिसके कारण बहुत थकान महसूस होती है, ऐसे में थकान दूर करने का एकमात्र उपाय आयल मसाज को ही समझा जाता है। शरीर पर आयल मसाज करने से रक्त का प्रवाह तेज होता है जिससे शरीर की थकान मिटाने में मदद मिलती है।

इसके अलावा तेल मालिश करने से त्वचा में चमक भी आती है और त्वचा टाइट हो जाती है। जिन लोगों के शरीर या चेहरे पर झुर्रियां होती है वे तेल मालिश करें झुर्रियां गायब हो जाएंगी। इसके अलावा भी आयल मसाज करने के बहुत से फायदे होते है। लेकिन इनका फायदा केवल सही तेल के इस्तेमाल से ही मिलता है।

ऐसे तो आपको तेल मालिश के लिए बहुत से ऑप्शन मिल जाएंगे लेकिन कोई भी तेल लगा लेने से बॉडी पर ख़ास प्रभाव नहीं पड़ेगा। जबकि अगर आप सही तेल का इस्तेमाल करेंगे तो फायदा अधिक होता। जैसे सरसो का तेल या फिर जैतून का तेल शरीर पर मसाज करने के लिए लाभकारी होता है।

इससे शरीर का दर्द तो जाता ही है साथ-साथ हड्डियां भी मजबूत होती है। त्वचा को चमकदार बनाने और स्ट्रेच मार्क्स हटाने के लिए जैतून का तेल उपयुक्त होता है। इसके अलावा भी बहुत से तेल है जिनका प्रयोग से आप शरीर की मसाज के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़े फायदे भी पा सकते है।

बॉडी मसाज आयल और उसके फायदे :-

1. जोजोबा आयल :

जोजोबा के पौधे से निकले वैक्स से जोजोबा आयल तैयार किया जाता है जिसके बहुत से फायदे होते है। यह त्वचा से मुहांसे दूर करने के साथ साथ उसे कीटाणुओं से बचाने में भी मदद करता है।

जोजोबा आयल के फायदे :

  • इसकी एंटी बैक्टीरियल प्रकृति पीठ के मुहांसे, त्वचा की एलर्जी और पीठ से जुडी अन्य बिमारियों को दूर करने में मदद करती है।
  • इसमें मौजूद myristic एसिड जलने की समस्या पर बहुत आराम देता है। इसमें एंटी inflammable प्रकृति ड्राई स्किन के लिए एक बेहतर मॉइस्चराइज़र का काम करती है।

2. लेमनग्रास आयल :

इस तेल को सुखी और ताज़ी पत्तियों के एक्सट्रैक्ट से निकाला जाता है। इसे इंडियन वेर्बेना के नाम से भी जाना जाता है। यह तेल विमान यात्रा से हुई थकान और थके हुए शरीर को आराम देने में मदद करता है।

लेमनग्रास तेल के फायदे :

  • यह हमारे नर्वस सिस्टम को मजबूत करके सर दर्द और अन्य तंत्रिका संबंधी समस्यायों में आराम देता है।
  • फ्लू, बुखार जैसी श्वास संबंधी बिमारियों में आराम पहुंचाता है।
  • मांसपेशियों को मुलायम करके उन्ही ऐंठन को कम करने में मदद करता है। साथ ही मांसपेशियों के दर्द, ऐंठन और सूजन को भी कम करता है।

3. स्वीट आलमंड आयल :

बॉडी मसाज के लिए प्रयुक्त होने वाले तेलों में इसे सबसे फायदेमंद और लाभकारी तेल माना जाता है। जैसा की इसके नाम से स्पष्ट होता है की इसे बादाम के एक्सट्रेक्ट से बनाया जाता है जो pale yellow कलर का होता है।

स्वीट आलमंड आयल के फायदे :

  • इसका तेलीय स्वभाव त्वचा को मुलायम बनाने में मदद करता है। और इसकी इसी प्रकृति के कारण त्वचा से अधिक तेजी से अब्सॉर्ब करती है। जबकि जोजोबा आयल की अब्सॉर्प्शन रेट काफी कम होती है। जिसका अर्थ यह है की आपको मसाज का फायदे तभी नहीं कुछ देर बाद मिलता है।
  • यह एक बेहतर आराम देने वाला तरल पदार्थ है जो स्किन को सॉफ्ट करके स्मूथ बनाने में मदद करता है और साथ ही दर्द में भी आराम पहुंचाता है।
  • मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन को कम करने में मदद करता है।
  • इसमें मौजूद oleic और linoleic एसिड की अच्छी मात्रा इसे बेहतर बॉडी मसाज आयल बनाती है।

4. नारियल तेल :

इस तेल की बात करें तो, नारियल तेल बहुत भारी और मोटा तेल होता है जिसे ट्रांसफॉर्म करके हल्का, नॉन ग्रीसी और तरल आयल बनाया जाता है। ऐसा इसीलिए किया जाता है ताकि इसका प्रयोग आसानी से किया जा सके।

नारियल तेल के फायदे :

  • इसमें मौजूद lacric और lauric एसिड एक बेहतर एंटी मिक्रोबाल एजेंट है जो त्वचा को हानिकारक विषाणुओं से बचाने में मदद करते है।
  • त्वचा के लिए यह एक बेहतर मॉइस्चराइज़र के रूप में काम करता है जो स्किन पर फैटी एसिड की एक लेयर बनाकर उसमे नमी बनायें रखने में मदद करता।
  • यह स्किन को रुखा होने और फटने से भी बचाता है।
  • इसमें मौजूद विटामिन E त्वचा को फ्रेश और नया बनाए रखने में मदद करता है।
  • इसके एंटी-ऑक्सीडेंट्स एजिंग साइंस को दूर करके स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करता है।

5. एवोकैडो आयल :

एवोकैडो के फल को दबाने से जो भारी और ग्रीनिश आयल निकलता है उसे एवोकैडो आयल कहते है। इसकी हेविन्स के कारण ही इसे अन्य हलके तेलों जैसे आलमंड और जोजोबा आयल के साथ मिक्स करके प्रयोग किया जाता है।

एवोकैडो आयल के फायदे :

  • इसकी हीलिंग, एंटी बैक्टीरियल और एंटी रिंकल प्रकृति बढ़ती उम्र की निशानियों को कम करने में मदद करती है।
  • इसमे मौजूद विटामिन A, D और पोटैशियम रैशेस, eczema और रूखी त्वचा को ठीक करने में मदद करता है।
  • इसके अतिरिक्त इसमें पाए जाने अन्य गुण त्वचा की नमी बरकरार रखने और त्वचा के रूखेपन को दूर करने में मदद करते है।
  • इसकी मोटाई के कारण यह त्वचा में बहुत जल्दी अब्सॉर्ब हो जाता है और मसाज के लिए एक परफेक्ट तेल बनता है।
  • यह शरीर में कोलेजन मेटाबोलिज्म को स्टिमुलेट करके कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में मदद करता है।

 

प्रेगनेंसी में घेवर क्यों खाना चाहिए?

राजस्थान, ब्रज की पारंपरिक मिठाइयों की यदि बात की जाये तो उसमे घेवर का नाम सबसे पहले आता है। घेवर बरसात यानी सावन के मौसम में बनाया जाता है, तीज, रक्षाबंधन आदि त्योहारों पर घेवर की सबसे अधिक बिक्री होती है। जितना खूबसूरत घेवर दिखने में लगता है उतना ही यह खाने में स्वादिष्ट और लजीज भी होता है।

घेवर नाम एक है लेकिन यह कई तरीके से बनाया जाता है जैसे की प्लेन घेवर, मलाई वाला घेवर, मावे का घेवर, पनीर का घेवर आदि। और जब इतने अलग अलग स्वाद में घेवर आता है तो जाहिर सी बात है की लोग खूब चाव के साथ इसे खाना भी पसंद करते हैं। लेकिन जब बात गर्भवती महिला की आती है तो उसके मन में घेवर खाने से पहले यह सवाल जरूर आता है की वो इसे खाएं या नहीं?

प्रेग्नेंट महिला घेवर खाए या नहीं?

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपका घेवर खाने का मन कर रहा है। तो आपको सोचने की जरुरत नहीं है बल्कि आप शौक से इसे खा सकती है। बस इस बात का ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा घेवर न खाएं और अच्छी जगह से घेवर लेकर खाएं। ताकि आप घेवर को खाकर एन्जॉय कर सके, न की इसे खाने के बाद आपको कोई परेशानी हो।

घेवर खाने के फायदे

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला का कुछ न कुछ अलग खाने की इच्छा होती है ऐसे में घेवर खाने से महिला के मुँह का स्वाद बदल जाता है
  • घेवर बनाने में मावा, दूध, मलाई, पनीर आदि का इस्तेमाल किया जाता है और यह सभी चीजें पोषक तत्वों से भरपूर होती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को फायदा मिलता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान घेवर का सेवन करने से जुडी कुछ बातें, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपका भी घेवर खाने का मन कर रहा है। तो बरसात के मौसम को एन्जॉय करने के साथ आप घेवर के स्वाद को भी एन्जॉय कर सकती है।

बार बार मुँह में पानी आने के ये हैं कारण और उपाय

क्या आपके भी मुँह में पानी अधिक आता है? यदि हाँ तो इसमें कोई डरने की बात नहीं होती है, क्योंकि यह परेशानी बहुत से लोगो के साथ होती है, इसके अलावा आपके मुँह में जब भी आप खाना खाते है तो लार ग्रंथियां उस खाने को अच्छे से चबाने में आपकी मदद करती है, और जब भी आप खट्टी चीजो के या अधिक स्पाइसी खाने के बारे में सोचते हैं तो भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, इसके अलावा आपको यह समस्या जागते हुए कम और सोते हुए ज्यादा परेशान करती है, और इसके बहुत से कारण हो सकते है, जैसे की जो लोग कंधे के बल सोते है, उन्हें यह परेशानी होती है, क्योंकि पीठ के बल सोने से लार आपने गले में चली जाती है,

साथ ही रेबीज़ के रोगी, साइनस इन्फेक्शन के कारण, गले में एलर्जी होने के कारण, लार ग्रंथियों में सूजन के कारण आपको ये परेशानी हो सकती है, लेकिन ये ऐसी कोई गंभीर समस्या नहीं है जिसके कारण आपको कोई बिमारी हो सकती है, लेकिन इसका ज्यादा आने के कारण कई बार आपको दुसरो के सामने असहज महसूस हो सकता है, इसके लिए एक तो आपको अपने मुँह की साफ़ सफाई का ख़ास ध्यान रखना चाहिए, तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है की यदि आपको ये समस्या है, तो इसके क्या क्या कारण हो सकते हैं, और आपको किस प्रकार इस परेशानी से राहत मिल सकती है।

मुँह में लार बनने के कारण:-

अधिक गरम व् मीठी चीजों के सेवन के कारण:-

यदि आप अधिक गरम, मसालेदार व् मीठी चीजों का सेवन करते है, तो इसके कारण आपके मुँह में लार अधिक बनती है, जिसके कारण आपको मुँह से पानी आने की समस्या शुरू हो जाती है।

लार ग्रंथियों में सूजन के कारण:-

व्यक्ति के गले में तीन लार ग्रंथियां होती है, यदि कभी उनमे से किसी एक में भी सूजन आ जाती है तो इसके कारण भी आपके मुँह में अधिक पानी आने लगता है।

मुँह में छालें होने के कारण:-

मुँह में छालें होने के कारण भी लार अधिक बनने लगती है, जिसके कारण आपको मुँह से पानी आने की समस्या खड़ी हो जाती है।

मुँह की साफ़ सफाई न रखने के कारण:-

यदि आप अपने मुँह की साफ़ सफाई नहीं रखते हैं, तो इसके कारण भी आपके मुँह से पानी निकलने लगता है, इसीलिए आपको नियमित ब्रश कुल्ला आदि जरुर करना चाहिए।

रेबीज़ की समस्या होने पर:-

यदि कोई व्यक्ति रेबीज़ की समस्या से पीड़ित है तो इसके कारण भी आपको मुँह में अधिक पानी आने की समस्या हो सकती है, क्योंकि इसके कारण रोगी के गले में दर्द व् मांसपेशियों में दर्द रहता है, जिसके कारण मुँह में पानी का उत्पादन अधिक होने लगता है।

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साइनस इन्फेक्शन होने के कारण:-

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यदि आपको सांस लेने में परेशानी का अनुभव होता है, और आप मुँह से सांस लेते है, तो इसके कारण भी आपके मुँह में लार अधिक बनती है, और यह समस्या रात को सोते समय आपको अधिक परेशान करती है, क्योंकि मुँह से पानी अधिक मात्रा में निकलता है।

बुरे सपनो के कारण:-

जो व्यक्ति या तो रात में बुरे सपने देखते है, या किसी चीज को देखकर डर जाते है, उन्हें भी ये परेशानी होती है, और उनके भी मुँह से खासकर रात को सोते समय पानी निकलता है।

ड्रग्स या केमिकल का अधिक सेवन करने के कारण:-

यदि कोई व्यक्ति ड्रग्स या केमिकल का सेवन अधिक मात्रा में करता है, तो उसके मुँह से भी लार का स्त्राव अधिक मात्रा में होता है,जिसके कारण आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

एसिडिटी होने पर:-

एसिडिटी होने पर भी शरीर में एसिड अधिक मात्र में बनता है, जिसके कारण लार ग्रंथियां प्रभावित होती है, और आपको मुँह में पानी आने की समस्या होने लगती है।

छोटे बच्चों को दांत निकलने पर:-

छोटे बच्चो को भी समस्या होती है, क्योंकि जब उनके दांत निकलते है, तो इसके कारण उनके मुँह में अधिक लार बनती है, जिसके कारण आपको ये समस्या हो सकती है।

मुँह में पानी आने की समस्या से बचने के उपाय:-

तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करें:-

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तुलसी के दो तीन पत्ते लें और उन्हें अच्छे से धो लें, उसके बाद अच्छे से उन्हें चबाएं, उसके बाद एक गिलास पानी का सेवन करें दिन में दो से तीन बार इस उपाय को करें आपको इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलेगी।

फिटकरी के पानी का इस्तेमाल करें:-

दिन में दो से तीन बार फिटकरी को पानी में अच्छे से उबाल कर उस पानी के गुनगुना रहने पर दिन में दो से तीन बार उस पानी से कुल्ला करें, आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

खाने का ध्यान रखें:-

यदि आप अधिक मसाले वाले या गरम भोजन करते है, तो कई बार उसे पचाने में आपको समय लग सकता है, जिसके कारण आपके मुँह में लार बनने लगती है, इससे बचने के लिए आपको हलके आहार का सेवन करना चाहिए, और ऐसा आहार लेना चाहिए जिसे आसानी से पचाया जा सकें।

मुँह की साफ़ सफाई का ध्यान रखें:-

इस समस्या से आपको परेशान न होना पड़े, या हो तो इससे निजात पाने के लिए आपको अपने मुँह की साफ़ सफाई का ध्यान अधिक रखना पड़ता है, जिसके कारण आपको इस परेशानी का सामना अधिक न करना पड़े।

डॉक्टर से राय लें:-

यदि आपको किसी प्रकार के इन्फेक्शन या बीमारी के कारण यदि ये समस्या है तो आपको इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए, ताकि आपको इस समस्या से राहत मिलने में मदद मिल सकें।

तो ये हैं कुछ कारण जिसकी वजह से आपको मुँह में अधिक लार बनने की समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, साथ ही आपको इससे बचने के लिए कुछ उपाय भी बताएं गए है जिससे आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी, तो इन टिप्स का करें इस्तेमाल और आपको है यदि मुँह में अधिक पानी आने की समस्या तो इससे हमेशा के लिए आराम पाएं।

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मलेरिया का घरेलू उपचार

मलेरिया एक संक्रामक रोग है जो की आपको मलेरिया के परजीवी मादा मच्छर एनोफिलेज के काटने से फैलता है, यदि आपको यह काट लेता है तो इसके परजीवी आपकी लाल रक्त कोशिकाओं में फैलने लगते है, जिसके कारण आपके अंदर एनीमिया के लक्षण उभरने लगते है, जैसे चक्कर आना, सांस फूलना, बुखार, सर्दी जुखाम, बेहोशी एक आम लक्षण होता है, इसके होने पर रोगी को बहुत अधिक ठण्ड लगती है, जिसके कारण शरीर का तापमान भी 101 से 105 तक रहता है, तो आइये आज हम आपको इसके लक्षण और इससे बचने के लिए कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे है जिससे आपको इस समस्या से बचने में मदद मिलेगी।

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मलेरिया के लक्षण:-

  • मलेरिया होने पर व्यक्ति को 101 से 105 डिग्री तक बुखार रहता है।
  • शरीर में कंपकपी छूटना, और सर्दी लगता आम बात होती है।
  • जुखाम की परेशानी का भी आपको सामना करना पड़ सकता है।
  • सर भारी महसूस होना, सांस फूलना, चक्कर व् कई बार बेहोशी भी होने लगती है।
  • मुँह के स्वाद का खराब होना, उबकाई आना भी मलेरिया का ही लक्षण है।
  • उलटी या उबकाई आना भी मलेरिया के होने का संकेत देता है।
  • भूख न लगना।
  • कमजोरी व् थकावट का अहसास होना, शरीर का टूटना भी मलेरिया का शुरुआती लक्षण होता है।

मलेरिया के लिए घरेलू उपचार:-

तुलसी का प्रयोग करें:-

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तुलसी का प्रयोग करने से आपको मलेरिया से राहत पाने में मदद मिलती है, क्योंकि तुलसी का इस्तेमाल आप एक औषधि की तरह किया जाता है, यदि आप दस तुलसी के पत्ते और साथ आठ काली मिर्च को लेकर थोड़े से पानी के साथ अच्छे से पीस कर उसमे स्वसदानुसार शहद मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करते है, तो आपको मलेरिया से बचाव में मदद मिलती है।

अदरक का सेवन करें:-

थोड़ी सी अदरक लें, और उसमे दो तीन चम्मच किशमिश को मिलाकर पानी में डालकर एक गिलास पानी में अच्छे से उबाल लें, उसके बाद उस पानी को जब तक उबालते रहे जब तक की वो पानी आधा न रह जाएँ, उसके बाद इस पानी को ठंडा कर लें, और दिन में नियमित दो बार इसका सेवन जब तक करें जब तक की आपका बुखार अच्छे से उतर न जाए।

गिलोय का प्रयोग करें:-

गिलोय मलेरिया बुखार के रोगियों को मलेरिया से बचाने के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, इसके इस्तेमाल के लिए आप गिलोय के रस को निकाल कर उसमे शहद को मिलाएं, और उसके बाद इसे एक गिलास पानी में मिलाकर अच्छे से दिन मे दो बार इसका सेवन करें, इसके सेवन से आपको फायदा मिलेगा, इसके अलावा आप चालीस ग्राम गिलोय को अच्छे से पीसकर किसी भी मिटटी के बर्तन में पानी को भरकर उसमे डालकर रात भर के लिए रख दें, उसके बाद इस पानी को दिन में तीन से चार बार सेवन करें ऐसा करने से आपको फायदा मिलेगा।

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नीम का प्रयोग करें:-

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नीम का इस्तेमाल करने से भी आपके शरीर में होने वाले मलेरिया के वायरस को खत्म करके आपको उससे निजात दिलाने में मदद करता है,इसके इस्तेमाल के लिए आप नीम के तने की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में दो से तीन बार उसका सेवन करें, या फिर आप चार पांच नीम के पत्ते, और चार पांच काली मिर्च को पीसकर एक पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद उसे पानी में उबाल दें, उसके बाद उसे छानकर दिन में दो से तीन बार उसका सेवन करें, दोनों से ही आपको फायदा मिलता है, साथ ही आप अपने शरीर पर नीम के तेल की मालिस करते है तो इससे भी मच्छर द्वारा फैलाएं गए वायरस का असर खत्म होने में मदद मिलती है।

दालचीनी और शहद का इस्तेमाल करें:-

शहद और दालचीनी का इस्तेमाल करने से भी आपको मलेरिया से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद, आधा चम्मच काली मिर्च का पाउडर, और एक चम्मच डालिनी पाउडर डालकर अच्छे से उबाल लें, और उसके बाद उस पानी को ठंडा करके इसका सेवन करें, इस उपाय को दिन में दो बार करने से आपको मलेरिया से जल्दी राहत पाने में मदद मिलती है।

चिरयता का इस्तेमाल करें:-

मलेरिया के बुखार से बचने के लिए चिरयता भी किसी औषधि से कम नहीं है इसके भी नियमित सेवन से आपको मलेरिया से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक गिलास से थोड़ा ज्यादा पानी लें, उसमे पंद्रह ग्राम चिरयता डाल दें, उसके बाद इसमें दो लौंग, आधा चम्मच दालचीनी पाउडर, मिलाएं और इसे अच्छे से उबाल लें, और फिर थोड़ा थोड़ा करके इसका दिन में तीन से चार बार सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।

सेंधा नमक का प्रयोग करें:-

दस ग्राम सेंधा नमक को चालीस ग्राम बूरे के साथ मिलाकर इसे दिन में तीन बार नियमित गुनगुने पानी के साथ लें, ऐसा करने से आपको मलेरिया से बचाव करने में मदद मिलेगी, साथ ही आप थोड़ा सा सेंधा नमक लेकर उसे अच्छे से तवे पर पकाएं, और जब तक पकाते रहे जब तक की वो लाल न हो जाए, उसके बाद नियमित एक चम्मच नमक को गुनगुने पानी में मिलाकर उसका सेवन करें ऐसा करने से भी आपको मलेरिया से राहत मिलती है।

जीरा का इस्तेमाल करें:-

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जीरे का इस्तेमाल करने के लिए आप एक चम्मच जीरा लें, और उसे अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसमें उसका तीन गुना गुड़ मिला दें, और इन दोनों को अच्छे से मिक्स करें, और गोलियों के रूप में तैयार करें, उसके बाद इन गोलियों को दिन में तीन बार सुबह शाम दोपहर को पानी के साथ लें, नियमित ऐसा करने से इस बुखार को खत्म करने में आपको मदद मिलती है, और यदि आप गोलियां नहीं बनाना चाहिए तो तो इस मिश्रण को तीन हिस्सों में बांटकर पानी के साथ इसका सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।

मलेरिया से बचने के अन्य उपाय:-

  • फिटकरी को तवे पर अच्छे से भून लें, और उसके बाद उसका चूर्ण तैयार करें, उसके बाद उस चूर्ण को आधा चम्मच हर दो घंटे में पानी के साथ लें, ऐसा करने से आपको बुखार से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • गुनगुने पानी में निम्बू डालकर दिन में दो बार उसका सेवन करने से भी आपको मलेरिया से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • थोड़े से कालीमिर्च के पाउडर को पांच मिलीग्राम प्याज़ के रस में मिलाकर दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें, आपको मलेरिया से बचने में राहत मिलेगी।
  • दस ग्राम अदरक को दस मुनक्के के साथ मिलाकर एक गिलास पानी में अच्छे से उबाल लें, उसके बाद जब पानी आधा रह जाएँ, तो इसे छानकर ठंडा करके दिन में दो बार इसका सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।
  • जामुन के पेड़ की छाल को सूखा लें, और उसके बाद उसका चूर्ण तैयार करें, पांच ग्राम चूर्ण को थोड़े से गुड़ के साथ खाएं, इसके सेवन से आपको मलेरिया से राहत पाने में मदद मिलेगी।
  • चकोतरा जो की एक फल है उसके नियमित सेवन से भी आपको मलेरिया से बचने में मदद मिलती है।
  • संतरे के जूस का सेवन भी मलेरिया के रोगियों को पीना चाहिए।
  • बुखार के तेज होने पर माथे पर बर्फ के पानी की पट्टियां रखने से भी आपको आराम मिलता है।
  • हर्बल चाय का सेवन करने से भी आपको मलेरिया के बुखार से आराम पाने में मदद मिलती है।

तो ये है कुछ घरेलू उपाय जिनका इस्तेमाल करके आप मलेरिया की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा यदि आप चाहे तो एक बार डॉक्टर से राय लेकर अच्छे से अपने शरीर की जांच भी करवा सकते है, साथ ही इन घरेलू उपाय का नियमित कुछ दिनों तक इस्तेमाल करने से आपको मलेरिया की समस्या के साथ इसमें होने वाली कमजोरी को भी दूर करने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में ब्राउन शुगर खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान मीठा कम मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है। क्योंकि अधिक मीठा खाने से ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने के कारण महिला को प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी हो सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान वाइट शुगर ज्यादा फायदेमंद होती है या ब्राउन शुगर इस बारे में अधिकतर प्रेग्नेंट महिलाएं जानना चाहती है। तो इसका जवाब है प्रेगनेंसी के दौरान ब्राउन शुगर खाने से ज्यादा फायदा मिलता है क्योंकि इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में ब्राउन शुगर खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

वजन कण्ट्रोल रहता है

सिमित मात्रा में ब्राउन शुगर का सेवन करने से गर्भवती महिला के वजन को कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें सफ़ेद चीनी की अपेक्षा कम कैलोरीज़ होती है। साथ ही ब्राउन शुगर मेटाबोलिज्म को बेहतर रखता है।

ऐंठन की समस्या

भूरी चीनी में पोटैशियम की मात्रा मौजूद होती है। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ऐंठन की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता हैं।

बॉडी को फिट रखता है

सफ़ेद चीनी को बनाने के लिए उसमे बहुत से केमिकल्स को मिलाया जाता है। लेकिन ब्राउन शुगर में केमिकल की मात्रा बिल्कुल भी नहीं होती है। और इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला व् बच्चे के विकास के लिए बहुत जरुरी होते हैं। और माँ व् बच्चे दोनों को फिट रखने में मदद करते हैं।

ऊर्जा को बढ़ाता है

गर्भावस्था के दौरान कमजोरी, आलस, सुस्ती महसूस होना आम बात होती है। ऐसे में यदि आप चाय, निम्बू पानी आदि में एक चम्मच ब्राउन शुगर का मिलाकर लेते हैं। तो ऐसा करने से आपको तुरंत एनर्जी से भरपूर महसूस होता है।

पाचन तंत्र होता है मजबूत

प्रेगनेंसी के दौरान खाना हज़म होने परेशानी, गैस, कब्ज़ जैसी दिक्कतों का होना आम बात होती है। ऐसे मे गुनगुने पानी में एक चम्मच में ब्राउन शुगर और एक चुटकी अदरक का पाउडर डालकर पीएं। ऐसा करने से पाचन तंत्र में सुधार होता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात पाने में गर्भवती महिला को मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान रखता है स्किन को बेहतर

ब्राउन शुगर में विटामिन बी मौजूद होता है जो स्किन को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही इससे आपकी स्किन को हाइड्रेट व् कोमल रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान ब्राउन शुगर का सेवन करने से सूजन की परेशानी से बचाव करने में भी मदद करता है।

डिलीवरी के बाद होती है फायदेमंद

बच्चे के जन्म के बाद महिला को फिट होने में बहुत समय लगता है। लेकिन यदि आप सफ़ेद चीनी की जगह ब्राउन शुगर का सेवन करते हैं। तो ऐसा करने से डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी रिकवर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो गर्भवती महिला को ब्राउन शुगर का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद चीनी की जगह ब्राउन शुगर का सेवन करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें की सिमित मात्रा में ही ब्राउन शुगर का सेवन करें जरुरत से ज्यादा ब्राउन शुगर नहीं खाएं।