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शादी में उबटन लगाने से क्या होता है

शादी में हर रस्म का अपना अलग महत्व होता है, और हर रस्म एक अलग मान्यता की प्रतीक होती है। फिर चाहे वो मेहँदी हो, या चूड़ा डालने की रस्म, जूता चोरी करने की रस्म हो, या फिर उबटन लगाने की, आदि। शादीशुदा जिंदगी के खुशाल रहने की कामना को लेकर परिवार वाले हर एक रस्म को बड़े दिल से निभाते है। ऐसे ही शादी में एक खास रस्म उबटन लगाने की भी होती है। जिसे लड़के और लड़की दोनों को ही लगाया जाता है।

हल्दी के बनाएं इस उबटन को सभी घर वाले अपने आर्शीवाद के साथ दुल्हन और दूल्हे को लगाते है। ताकि जिस तरह हल्दी अपनी खुशबू को बिखेरती है, वैसे ही इनकी शादीशुदा जिंदगी में भी हमेशा खुशबू बरकरार रहे। इसके अलावा और भी कई कारण होते है जिनकी वजह से इस उबटन का प्रयोग किया जाता है। तो आइए अब विस्तार से हम आपको बताते है की शादी में उबटन का प्रयोग क्यों किया जाता है।

शादी में उबटन लगाने से क्या होता है:-

रस्म होती है:-

शादी में हल्दी एक रस्म होती है, जिससे की लड़के और लड़की दोनों को ही हल्दी का उबटन लगाया जाता है। भारतीय रीती रिवाज़ में शादी के दौरान हल्दी की एक खास परम्परा है इसीलिए शादी के दौरान उबटन लगाया जाता है।

चेहरे की चमक बढ़ाने के लिए:-

उबटन का प्रयोग लड़की के चेहरे की चमक को बढ़ाने में भी मदद करता है। और शादी के दिन लड़की को ही सबसे खूबसूरत दिखने का हल होता है, ताकि सब्ज़ी नज़रे दुल्हन पर टिकी रहें। और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि यह किसी भी लड़की के लिए खास दिन होता है। इसीलिए भी शादी में दूल्हा और दुल्हन दोनों के चेहरे की चमक को दुगुना करने के लिए इसे लगाया जाता है।

तनाव कम करती है:-

हल्दी का उबटन एक स्ट्रेस कटर का काम करता है। शादी के दिन लड़की के मन में सौ तरह की बातें चल रही होती है। ख़ुशी के साथ कही न कही उसके मन में डर भी होता है। और उबटन उसके स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है। इसीलिए भी शादी में उबटन लगाया जाता है।

ख़ुशी और समृद्धि:-

पीला रंग चटक होता है, जो की खुशियों और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दूल्हा दुल्हन की जिंदगी में हमेशा खुशियां और समृद्धि बनी रहे, इसीलिए उबटन की रस्म की शुरुआत करके शादी की रस्मो को आगे बढ़ाया जाता है।

ताजगी के लिए:-

हल्दी केवल चेहरे की चमक को ही नहीं बढ़ाती है, बल्कि यदि दुल्हन नहाते समय हल्दी के उबटन का इस्तेमाल करती है। तो ऐसा करने से उसके शरीर की गंदगी को भी निकलने में मदद मिलती है। जिससे उसे ताजगी और शरीर में से भीनी भीनी खुशबू का अहसास होता है।

नकारत्मकता को बाहर करती है:-

शादी में सभी आपकी खुशियों में शामिल होने आते हैं, लेकिन कुछ नेगेटिव लोग भी होते हैं। जिनके कारण उनकी नेगेटिविटी आप पर कोई बुरा असर न डालें, और आपकी खुशियों पर नकारात्मक ऊर्जा का कोई प्रभाव न पड़े इसीलिए भी हल्दी के उबटन को लगाया जाता है। क्योंकि हल्दी को पूजा सामग्री की तरह इस्तेमाल किया जाता है जो बुरी चीजों को नष्ट करने में मदद करती है।

तो इन सभी कारणों की वजह से दुल्हन और दूल्हे को शादी के समय उबटन लगाया जाता है। साथ ही शादी की रस्मो में इसकी मान्यता काफी बरसों से है, और हल्दी को शुभ और अच्छे काम का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए शादी में कोई भी खलल न पड़े और सभी काम शुभ हो इसीलिए इस रस्म से शादी की रस्मो की शुरुआत की जाती है। साथ ही इससे आपकी खुशियों को सभी की बुरी नज़र से बचाने में भी मदद मिलती है।

बाबा रामदेव का पथरी का आयुर्वेदिक इलाज

Baba Ramdev Home Remedies for Stone (Pathri)

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आज के समय में जिस प्रकार फ़ास्ट फ़ूड खाना लोगो की आम आदत बनता जा रहा है उसी प्रकार तरह तरह की बीमारियां भी आजकल आम होती जा रही है। मधुमेह से लेकर थाइराइड तक कुछ ऐसी बीमारियां है जिनसे हर चौथा व्यक्ति परेशान रहता है। ऐसी ही एक बिमारी है पथरी। जिसका होना काफी दुखदाई होता है।

सुनने में पथरी बहुत मामूली बीमारी लगती है लेकिन अगर यह किसी को हो जाए तो उस व्यक्ति को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। असमय पेट में होने वाला दर्द, खाने पीने में परेशानी और ठीक तरह से पेट साफ़ नहीं होना कुछ ऐसी ही समस्याएं है जो पथरी होने के बाद व्यक्ति को झेलनी पड़ती है। वैसे तो ये बीमारी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन महिलाओं की तुलना में पुरुषों में इसकी शिकायत 3 गुना अधिक देखने को मिलती है।

एक बात और यह बिमारी हर उम्र में नहीं होती बल्कि 20 से 30 वर्ष की आयु के बीच होती है जिसका सही समय पर इलाज कराया जाना बहुत जरुरी होती है। क्योंकि अगर समय रहते इस समस्या का सही इलाज नहीं किया जाए तो ये आपके शरीर के फंक्शन को ठीक प्रकार से कार्य नहीं करने देती। पथरी की समस्या में व्यक्ति के पेट, किडनी या पाचन क्रिया से संबंधित किसी भी ऑर्गन में पत्थर का टुकड़ा मौजूद होता है जो दिखने में बहुत छोटा होता है लेकिन दर्द बहुत देता है।

पथरी का इलाज तीन तरह से किया जा सकता है – ऑपरेशन, दवाएं और घरेलू इलाज। और लोग अपनी अपनी जेब और सहूलियत के अनुसार इनका प्रयोग भी करते है। लेकिन क्या आप जानते है की भारत के जाने-माने योग गुरु बाबा रामदेव भी इस समस्या को ठीक करने का दावा करते है। जी हां, बाबा रामदेव द्वारा बताये कुछ उपाय है जिनके द्वारा इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। लेकिन सभी को उन उपायों के बारे में नहीं पता होता।इसलिए आज हम आपको बाबा रामदेव के पथरी ठीक करने के घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप भी अपनी इस समस्या को ठीक कर सकते है।

पथरी के लक्षण :-

शरीर के किसी भी हिस्से में पथरी होने पर सबसे पहले व्यक्ति के पेट में तेज दर्द होने लगता है।

गुर्दे की पथरी होने पर दर्द पीठ से शुरू होता है। जिसके बाद वह पेट में होने लगता है और फिर जांघों में होने लगता है।

  • पेशाब में खून आना या पीब निकलना।
  • यूरिन में इन्फेक्शन होना।
  • बुखार आना या कपकपी होना।
  • रुक-रुक कर पेशाब आना।
  • बार-बार पेशाब आना।
  • पेशाब में बदबू आना, जलन होना और दर्द महसूस होना।
  • पित्त की पथरी होने पर पेट में दर्द के साथ-साथ उलटी भी होने लगती है। और खाना पचाने में समस्या आती है।
  • लगातार दस्त और उल्टियां भी पथरी का एक लक्षण है।

पथरी होने के क्या कारण होते है?kidney बाबा रामदेव का पथरी का आयुर्वेदिक इलाज

किसी भी बीमारी का इलाज जानने से पूर्व उसके कारणों को जान लेना बेहद आवश्यक होता है ताकि भविष्य में समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।

1. जब पेशाब में यूरिक एसिड, कैल्शियम, ऑक्सलेट की मात्रा सामान्य से अधिक होने लगती है तो वह किडनी से बाहर नहीं निकल पाती जिसके कारण वह किडनी में ही इकट्ठी होने लगती है और आगे चलकर पथरी बन जाती है।

2. पथरी होने का मुख्य कारण शरीर में कैल्सियम की अधिक मात्रा होना भी माना जाता है। क्योंकि इसकी वजह से शरीर ने खाना ठीक तरह से पच नहीं पाता। जो बाद में पथरी का कारण बनता है।

3. इसके अलावा कम पानी पीना, यूरिन में इन्फेक्शन, पेशाब रोकना और पेशाब से जुडी किसी समस्या के लिए दवाओं का सेवन करने से भी पथरी का खतरा बढ़ जाता है।

4. पित्त की पथरी होने का कारण शरीर में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना होता है।

बाबा रामदेव के पथरी के घरेलू इलाज :-

वैसे तो पथरी के लिए लोग दवाओं का इस्तेमाल करना ज्यादा प्रेफर करते है लेकिन कई बार यह ऐसे स्थान पर हो जाती है जहां से इसे केवल ऑपरेशन के द्वारा ही निकाला है सकता है। लेकिन हम यहां कुछ घरेलू उपाय दे रहे है जिनकी मदद से भी इस समस्या का इलाज किया जा सकता है लेकिन ध्यान रहे इनके इस्तेमाल से पूर्व डॉक्टरी सलाह अवश्य ले लें।

1. आयुर्वदिक उपचार :

बाबा रामदेव द्वारा सुझाये गए आयुर्वेदिक इलाज के लिए आप किसी नजदीकी बाबा रामदेव के पतंजलि स्टोर से जाकर आयुर्वेदिक दवा ले सकती है। ये दवाये पित्त, किडनी की पथरी निकालने के साथ-साथ दर्द कम करने में भी मदद करती है।

2. कुल्थी की दाल :

बाबा रामदेव के घरेलू नुस्खे के मुताबिक आप कुल्थी की दाल खाकर भी अपनी पथरी का इलाज कर सकते है। इसके लिए 2 चम्मच कुल्थी लेकर उसे 1 ग्लास पानी में उबाल लें। जब पानी 50 ग्राम रह जाए तो उसे छान कर पी लें।

3. पतंजलि की दवा :

आयुर्वेदिक उपचार के लिए आप बाबा रामदेव की पतंजलि में दिव्या असमरिहार रस का प्रयोग कर सकते है। ये दवाई पथरी को तोड़कर उसके टुकड़ों को पेशाब के जरिये बाहर निकाल देती है।

4. कपालभाति :

पथरी की समस्या के लिए योग भी काफी असरदार उपाय है। इसकी मदद से भी आप अपनी पथरी का इलाज कर सकते है। इसके लिए रोजाना कपालभाति प्राणायाम करें ये पथरी को ठीक करने के साथ साथ आपको अन्य रोगों से भी बचाएगा।

5. कोलेस्ट्रॉल :

पित्त की पथरी शरीर में मौजूद अधिक कोलेस्ट्रॉल के कारण होती है। अगर आप उसे ठीक करना चाहते है तो नियमित रूप से कपालभाति करें। साथ ही ऐसे आहारों से दूर रहे जिनमे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत अधिक होती है।

6. मूली के पत्ते :

मूली के पत्तों के रस का सेवन करके भी आप अपनी पथरी की समस्या को ठीक कर सकते है। इसके लिए मूली के पत्तों का 100 ग्राम रस दिन में 2 से 3 बार पियें। और साथ ही प्रतिदिन सलाद में मूली का सेवन करें।

7. पुदीना :mint

पथरी निकालने के लिए पुदीने की ताज़ी या सुखी पत्तियों को पानी में उबाल लें। अब गुनगुना होने के बाद उन्हें छान लें और पानी में शहद मिलाकर पी लें। कुछ ही दिनों में समस्या दूर होने लगेगी।

8. सेब का सिरका या जूस :

पित्त की पथरी के लिए आप सेब के सिरके या जूस का इस्तेमाल भी कर सकते है। क्योंकि ये पथरी को गलाने का काम करते है और साथ ही शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को भी कम करते है। इसके लिए रोजाना दिन में 2 बार 1 ग्लास सेब के जूस में 1 चम्मच सेब का सिरका डालकर पिएं।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से आप पथरी की समस्या का इलाज कर सकते है। लेकिन ध्यान रहे किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को कार्य करने में थोड़ा समय लगता है इसलिए उपाय का प्रयोग करते रहे बीच में नहीं छोड़ें। अन्यथा पूर्ण लाभ नहीं मिलेगा।

चेहरे पर काले तिल हो गए हैं? ऐसे हटाएँ काले तिल को

चेहरे पर एक दो तिल जहां आपकी सुंदरता में चार चाँद लगा सकते है, वहीं चेहरे पर ज्यादा तिल होने के कारण ये आपकी सुंदरता पर दाग भी लगा सकते है, चेहरे पर काले तिल का अधिक मात्रा में होने का कारण त्वचा की वह कोशिकाएं होती है, जो फैलने की बजाय एक दूसरे से जुड़कर रह जाती है, इन कोशिकाओं को मिलेनोसाइट कहा जाता है, यह कोशिकाएं जब इक्कठी होती है, और सूर्य की किरणों के संपर्क में आती है, तो यह काले या भूरे रंग के दाग में तबदील हो जाती है, इसे ही तिल कहा जाता है।

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चेहरे पर इस तरह इनकी संख्या का बढ़ना आपकी ख़ूबसूरती को खराब कर देता है, ज्यादातर लोगो की नज़र में लेज़र थैरिपी ही इसका इलाज है, परन्तु ज्यादा महंगा होने के कारण लोग इसे नज़रअंदाज़ करना ही पसंद करते है, परन्तु इसके कुछ आसान तरीके भी है जिनसे आप इस समस्या से राहत पा सकते है और अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रख सकते है, और न तो ये तरीके महंगे हैं और न ही मुश्किल परन्तु आपको इनका इस्तेमाल करने के बाद धैर्य से काम लेना होगा क्योंकि ये थोड़ा समय ले सकते है, परन्तु आपको इस समस्या से राहत दिलवा देते है, तो आइये आज हम आपको चेहरे पर होने वाले काले तिल की समस्या से बचने के लिए आसान तरीके बताते है जो आपके चेहरे को साफ़ करने में आपकी मदद करेंगे।

स्ट्रॉबेरी का इस्तेमाल करें:-

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स्ट्रॉबेरी का इस्तेमाल करने से आपके चेहरे से काले तिल को हटाने में मदद मिलती है, इसके उपचार के लिए आप एक स्ट्रॉबेरी को बीच में से आधा काट कर रात के समय इसे काले तिल पर बैंडेज की मदद से अच्छे से चिपका लें, उसके बाद इसे सारी रात ऐसे ही छोड़ दें, कुछ ही दिनों में आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे।

बेकिंग सोडा और अरंडी के तेल का इस्तेमाल करें:-

थोड़ा सा बेकिंग सोडा लें, और उसमें अरंडी का तेल इतना मिलाएं के एक गाढ़ा पेस्ट तैयार हो जाएँ, इसके बाद इसे रात को सोने से पहले अपने तिल पर लगाएं, और सुबह उठ कर अपने चेहरे को धो लें, कुछ ही दिनों के उपचार से आपको इसका असर दिखने लगेगा, और आपके चेहरे से तिल की समस्या को कम होने में मदद मिलेगी।

केले के छिलके का इस्तेमाल करें:-

केले के छिलके का इस्तेमाल करने से भी तिल कुछ ही दिनों में सूख जाता है, और आपके चेहरे को साफ़ होने में मदद मिलती है, इसके लिए आप केले के छिलके को अंदर की तरफ से थोड़ा सा काट कर तिल पर रखें और इसे बैंडेज या किसी और चीज की मदद से रात भर के लिए बाँध कर ऐसे ही छोड़ दें, ऐसा करने से आपको तिल को हटाने में मदद मिलेगी।

अंगूर के रस का इस्तेमाल करें:-

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एक ताजे अंगूर का रस निकालें और उसे अपने तिल पर लगाएं, इस प्रक्रिया को दिन में कई बार दोहराएं और कुछ दिनों तक लगातार इस उपाय को करें, दो हफ्तों तक आपको इसका असर दिखने लग जाएगा, और आपके चेहरे से काले तिल की समस्या को हटाने में मदद मिलेगी।

आयोडीन के घोल का इस्तेमाल करें:-

आयोडीन एक विषैला पदार्थ होता है, इसके उपयोग से पहले आप ध्यान रखें की ये आपके मुँह पर न लगे और आप इसे निगले न, इसके इस्तेमाल के लिए आप दिन में दो बार आयोडीन के घोल को अपने तिल पर लगाएं, उसके बाद आप इसे किसी चीज से अच्छे से कवर कर लें, कुछ ही दिनों में आपको इसका असर दिखने लगेगा, और आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

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सेब के सिरके का इस्तेमाल करने से पहले अपने चेहरे को अच्छे से धो लें, उसके बाद सेब के सिरके से अच्छे से अपने तिल की मसाज करें, और फिर इसे सारी रात के लिए ऐसे ही अपने चेहरे पर छोड़ दें, कुछ दिन इस उपाय को करने से आपको इसका असर खुद ही दिखाई देने लगेगा, और आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

कच्चे आलू का इस्तेमाल करें:-

कच्चे आलू की स्लाइसेस को काट कर दिन में दो से तीन बार अच्छे से तिल की मसाज करें, या आप इसका रस निकाल कर भी मसाज कर सकते है, और रात को मसाज करने के बाद इसे अपने चेहरे पर छोड़ दें, आलू में ये गुण होता है की ये आपकी त्वचा को दाग रहित करने में मदद करता है, तो कुछ ही दिनों तक इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको तिल की परेशानी से राहत मिलेगी।

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फूलगोभी के जूस का इस्तेमाल करें:-

फूलगोभी के जूस का इस्तेमाल करने से भी आपको काले तिल की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए भी आप फूलगोभी का जूस निकाल कर दिन में दो से तीन बार इसे अच्छे से अपने चेहरे पर मसाज करें, कुछ ही दिनों के इस्तेमाल के बाद आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

अनानास का इस्तेमाल करें:-

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अनानास में मौजूद एसिडिक गुण आपके चेहरे पर होने वाले दाग धब्बो को हटाने के साथ काले तिल की समस्या से राहत दिलाने में आपकी मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अनानास के जूस को दिन में दो से तीन बार अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं, साथ ही आप इसे रात को भी लगाकर सो सकते है इसके इस्तेमाल से भी आपको राहत मिलती है।

हरे धनिये की पत्तियों के पेस्ट का इस्तेमाल करें:-

हरा धनिया आप सब्जियों और सलाद को गार्निश करने के लिए इस्तेमाल करते है, परन्तु क्या आप जानते है की इसके इस्तेमाल से आपके अपने चेहरे की ख़ूबसूरती को भी बढ़ा सकते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप हरे धनिये की पत्तियों का पेस्ट बनाकर रात को अपने तिल पर लगाकर सो जाएँ, आप इसे टी पर रखने के लिए बैंडेज का इस्तेमाल भी कर सकते है, ऐसा कुछ ही दिनों तक करने के बाद आपको इसका असर खुद ही दिखने लगता है।

नमक और प्याज के पेस्ट का इस्तेमाल करें:-

प्याज को को पीस कर उसके बाद उसमें थोड़ा सा नमक मिला दें, और इसे अपने तिल वाली जगह पर रखें, ऐसा आप कम से कम दिन में दो से तीन बार करें, और आप रात भर के लिए इसे चेहरे पर भी छोड़ सकते है, कुछ ही दिनों के बाद आपको इस उपाय को करने से भी फायदा होता है, और आपकी त्वचा पर होने वाले काले तिल की समस्या से राहत पाने में भी आपको मदद मिलती है।

लहसुन का इस्तेमाल करें:-

लहसुन का इस्तेमाल काले तिल की समस्या से राहत पाने का बहुत ही महतवपूर्ण उपाय है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दो या तीन लहसुन की कलियों को पीस कर रात के समय अपने चेहरे पर लगाकर सो जाएं, उसके बाद सुबह उठ कर पानी की मदद से अपने चेहरे को साफ कर लें, ऐसा करने से आपको अपने चेहरे से काले तिल हटाने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप चेहरे पर होने वाले काले तिल की समस्या को दूर करके अपने चेहरे के दाग से निजात पा कर अपनी ख़ूबसूरती को बढ़ा सकते है, परतु ये अपना असर तभी दिखाते है जब आप इन्हे नियमित करते है, ऐसा नहीं है की आप दो दिन करने के बाद इसे छोड़ दें, ऐसे में ये आपको असर नहीं देंगे, इनके असर के लिए आपको नियमित कुछ दिनों तक इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

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अबॉर्शन के बाद क्या-क्या परेशानियां आती है

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अबॉर्शन महिला के लिए बहुत ही कठिन समय होता है। क्योंकि गर्भपात के बाद महिला न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी टूट जाती है। साथ ही गर्भपात होने के कारण बहुत सी शारीरिक परेशानियां होने के साथ शिशु को खोने के गम में महिला का धैर्य टूटने लगता है। जिसके कारण महिला का वापिस से रिकवर होना मुश्किल हो सकता है।

इसीलिए गर्भपात होने के बाद महिला को और उनके परिवार को उनका साथ देना चाहिए ताकि महिला को जल्दी से जल्दी फिट होने में मदद मिल सके। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसी परेशानियों के बारे में बात करने जा रहे हैं जो गर्भपात के बाद महिला को हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो परेशानियां कौन से होती है।

हैवी वजाइनल ब्लीडिंग

  • गर्भपात होने के बाद महिला को बहुत अधिक ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।
  • और इस दौरान ब्लड के साथ खून की गांठे भी निकल सकती है।
  • साथ ही इस समय महिला को एक दिन में चार से पांच पैड या इससे ज्यादा पैड बदलने की जरुरत भी पड़ सकती है।

पेट में दर्द

  • ब्लीडिंग की समस्या होने के कारण महिला को पेट, पेट के निचले हिस्से, कमर आदि में दर्द की समस्या भी हो सकती है।
  • ऐसे में इस दर्द से निजात पाने के लिए महिला को दवाई खाने की बजाय गर्म पानी से सिकाई करनी चाहिए।
  • ऐसा करने से महिला को आराम मिलता है।

अबॉर्शन के बाद हो सकता है संक्रमण

  • कुछ महिलाओं को गर्भापत के बाद प्राइवेट पार्ट में संक्रमण की समस्या भी हो सकती है।
  • ऐसे में यदि महिला को संक्रमण का कोई भी लक्षण महसूस हो तो इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए।

बुखार व् उल्टियां

  • कुछ महिलाओं को गर्भपात के बाद बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आने के साथ उल्टियां, शरीर में बहुत अधिक कमजोरी आदि की समस्या भी हो सकती है।
  • लेकिन बुखार या उल्टी की समस्या को अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तनाव

  • गर्भपात होने का असर कई बार महिला पर शारीरिक रूप से पड़ने के साथ मानसिक रूप से भी पड़ जाता है।
  • जिसके कारण कई बार महिलाएं तनाव का शिकार हो जाती है।
  • इस स्थिति से महिलाओं को बाहर निकालना बहुत जरुरी होता है नहीं तो महिला के लिए दिक्कतें ज्यादा बढ़ सकती है।

अबॉर्शन के बाद हो सकती है गर्भपात होने की दिक्कत

  • एक बार गर्भपात होने पर, महिला के दूसरी बार प्रेग्नेंट होने पर गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।
  • ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला को दूसरी प्रेगनेंसी का निर्णय अच्छे से फिट होने के बाद ही लेना चाहिए।
  • कुछ महिलाओं को गर्भपात के बाद दोबारा प्रेग्नेंट होने में परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

बच्चेदानी में इन्फेक्शन

  • यदि महिला का गर्भपात हो जाता है लेकिन बच्चेदानी की सफाई अच्छे से नहीं होती है।
  • और भ्रूण के कुछ टिश्यू बच्चेदानी में रह जाते हैं तो इससे बच्चेदानी में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  • इसीलिए गर्भपात होने के बाद एक बार डॉक्टर से बच्चेदानी की जांच जरूर करवानी चाहिए ताकि इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

अबॉर्शन के बाद हो सकती है एक्टोपिक प्रेगनेंसी

  • गर्भपात होने के बाद महिला को दोबारा प्रेगनेंसी होने पर एक्‍टोपिक प्रेग्‍नेंसी होने के चांस काफी बढ़ जाते है।
  • ऐसी गर्भावस्‍था में अंडे, महिला की बच्‍चेदानी में न बढ़कर फैलोपियन ट्यूब या कहीं और पनपने लगते है।
  • और इस तरह के प्रेग्नेंट होने का कोई मतलब नहीं होता है और फिर से महिला को गर्भपात की दिक्‍कत झेलनी पड़ सकती है।

गर्भपात होने के बाद डॉक्टर से कब मिलें

  • ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होने पर।
  • पेट व् पीठ में दर्द का अहसास अधिक महसूस होने पर।
  • यदि प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग के साथ बदबू भी महसूस हो।
  • पेट फूलने की समस्या बढ़ने पर।
  • कमजोरी अधिक महसूस होने पर।
  • यदि महिला को कमर में दर्द के साथ बॉडी का तापमान भी अधिक महसूस हो।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो महिला को गर्भपात के बाद हो सकती है। ऐसे में महिला को इन परेशानियों से उभरने के लिए गर्भपात के बाद परेशान होने की बजाय अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको जल्द से जल्द फिट होने में मदद मिल सके।

गाय के पेशाब के फायदे

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आप सबको ये तो पता है की भारत देश में गाय को सभी माता कहकर पुकारते है, परन्तु क्या कभी आपने ये सोचा है की ऐसा उसे क्यों कहते है, और यदि कहते है तो उसके पीछे कारण क्या है, गाय अपने पूरे जीवन में आपको सिर्फ फायदे की फायदे देती है, चाहे फिर वो उसके दूध से हो, उसके गोबर से हो या फिर गौ मूत्र से, साथ ही गौमूत्र को काफी पवित्र भी माना जाता है, क्योंकि यह पूजा पाठ करने से पहले घर में छिड़का जाता है, और साथ ही गोबर से घर की लिपाई भी की जाती है, और कई जगह तो आज भी यह प्रथा कायम है।

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गौमूत्र पवित्र होने के साथ कीटनाशक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है, और इसके अलावा कहा जाता है की बच्चे को गाय का दूध पिलाना चाहिए इसके कारण उसे मजबूत बनने, उसकी हड्डियों और शरीर का विकास होने में मदद मिलती है, और दूध को कई जैसे दही, पनीर आदि के रूप में इस्तेमाल करके भी आप इसका फायदा उठा सकते है, इसके अलावा गोबर का इस्तेमाल करने से भी आपको कौन से फायदे होते है इस बारे में आप जानते है, ऐसे ही गौ मूत्र के इस्तेमाल से भी आपको बहुत सी बीमारियों से अपने शरीर को बचाने में मदद मिलती है, जैसे की कैंसर जैसी खतरनाक बिमारी की रोकथाम में भी ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है, मोटापे, तिल्ली रोग, गले के रोग, आदि इसके साथ त्वचा सम्बन्ध समाया से भी से बचने में भी आपकी मदद करता है, इसके अलावा गौमूत्र से आपको और भी फायदे होते है आइये जानते है गौमूत्र से मिलने वाले फायदे कौन कौन से है।

आपके लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है:-

शरीर में रक्त का संचार सही से होने के लिए जरूर है, की आपका रक्त साफ़ हो जिसके कारण वो शरीर के सभी अंगो को फायदा पहुंचा सकें, यदि आपको भी लिवर से सम्बंधित कोई समस्या है तो आपको गोमटर का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें वो गुण होते है जो की रक्तशोधक का काम करते है, यानी आपके रक्त को साफ़ करने का काम करते है, जिसके कारण आपक शरीर को बीमारियों से बचाव और फिट रहने में मदद मिलती है।

पेट से सम्बंधित रोग होने पर करें इसका इस्तेमाल:-

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यदि आपको गैस बनती है, तो आपको गौमूत्र का सेवन रोजाना सुबह उठकर खाली पेट उसमे थोड़ा सा नमक और निम्बू का रस मिलाकर करना चाहिए, ऐसा करने से आपको गैस से राहत मिलती है, साथ ही यदि आपको कब्ज़ की समस्या है तो दिन में तीन से चार बार थोड़ी थोड़ी मात्रा में इसका सेवन करें, आपको इसका भी समाधान मिल जाएगा, साथ ही इसके सेवन से आपकी पाचन क्रिया मजबूत होती है साथ ही आपको खुल कर भूख लगती है।

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गले की समस्या का समाधान होता है:-

गौमूत्र का इस्तेमाल करने आपको गले में होने वाली खराश की समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप ताजे गौमूत्र से कुल्ला कर सकती है या फिर एक चम्मच गौमूत्र को लेकर अच्छे से गरम करें, उसके बाद उसमे एक चम्मच शहद, और एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलाएं, और इस मिश्रण को मेह में एक से दो मोइनते के लिए रख कर अच्छे से कुल्ला करें, आपको जरूर फायदा होगा, इसके अलावा आपको इस बात का ध्यान रखना होगा की आप जब भी इस्तेमाल करें आपको ताजे गौमूत्र का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

त्वचा सम्बंधित रोगो से निजात दिलाने में है फायदेमंद:-

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गौमूत्र का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा पर होने वाले किसी भी दाग धब्बे के साथ खाज खुजली की समस्या से भी राहत मिलने में मदद मिलती है, कई बार आपने देखा होगा की त्वचा पर सफ़ेद दाग पड़ने लगते है, इस समस्या से निजात के लिए आप बावची\ बाकुची को अच्छे से पीस कर गौमूत्र में मिलाएं, उसके बाद रात के समय अच्छे से इसे अपने उन दाग पर लगाएं और सो जाएँ, और सुबह उठकर गौमूत्र से ही इसे साफ़ करें नियमित इस्तेमाल करने से आपको कुछ ही दिनों में इस समस्या का समाधान करने में मदद मिलेगी, इसके अलावा यदि आपको स्किन पर खुजली आदि की समस्या है तो जीरे को पीस कर गौमूत्र में मिलाकर स्किन पर लगाएं और थोड़ी देर बाद धो दें, इससे आपको राहत मिलती है, इसके अलावा त्वचा सम्बंधित अन्य रोग जैसे सोरायसिस, एक्ज़िमा आदि से भी राहत मदद मिलती है।

तिल्ली रोग और जोड़ो के दर्द के लिए है फायदेमंद:-

तिल्ली रोग से निजात पाने के लिए भी गौमूत्र बहुत अधिक फायदेमंद होता है, इसके सेवन के लिए आप रोजाना गौमूत्र में नमक डालकर इसका सेवन करें, आपको इससे फायदा मिलेगा, इसके अलावा आप इस रोग वाले स्थान पर यदि सिकाई करते है तो भी आपको इससे राहत मिलती है, इसके लिए आप एक सूती कपडे को गौमूत्र में भिगाकर रखें, उसके बाद एक ईंट लें और उसे अच्छे से गरम करें, उसके बाद इस ईंट को उस कपडे में बाँध कर अच्छे से उस जगह की सिकाई करें, इससे प्लीहा घटने लगती है और आपको इस समस्या से राहत मिलती है, जोड़ो के दर्द में भी इससे सिकाई करने पर आपको बहुत फायदा मिलता है।

वजन कम करने में मदद करता है:-

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आज कल हर तीसरा व्यक्ति वजन बढ़ने की समस्या से परेशान है और इस समस्या से निजात पाने के लिए कुछ भी करता है, परन्तु आज हम आपको गौमूत्र का एक ऐसा उपचार बताने जा रहे है जिसके नियमित इस्तेमाल से आपको अपने वजन को घटाने में मदद मिलती है, नियमित सुबह आप एक गिलास गुनगुने पानी में गौमूत्र की चार बबुनदे, एक चम्मच शहद और निम्बू का रस मिलाकर इसका सेवन करें, आपको कुछ ही दिनों में इसका फायदा दिखने लगेगा, और आपके वजन को घटने में मदद मिलेगी।

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कैंसर की समस्या से बचने में मदद मिलती है:-

गले, आहार नली और पेट के कैंसर के लिए गौमूत्र एक अच्छा उपाय है, शरीर में जब करक्यूमिन नामक तत्व की कमी हो जाती है, तो इसके कारण आपको कैंसर की समस्या हो सकती है, और तभी आपके शरीर में कैंसर रोग भी होता है, और गौमूत्र में करक्यूमिन की मात्रा भरपूर होती है, और यदि आप इसका सेवन करते है तो यह तुरंत पच भी जाता है, और आपके शरीर में जाने के बाद तुरंत असर भी करता है, इसीलिए आपको इस परेशानी से बचने के लिए इसका सेवन करना चाहिए।

गौमूत्र से मिलने वाले अन्य फायदे:-

  • यदि आपको आँखों में जलन है तो चीनी मिलाकर इसका सेवन करें।
  • गुर्दे की बिमारी, पीलिया, मूत्राशय से सम्बंधित किसी भी रोग में इसका सेवन फायदेमंद होता है।
  • यदि आपको बहुत ज्यादा आलस आता है तो भी इसका चीनी मिलाकर सेवन करें आपकी सुस्ती को दूर होने में मदद मिलेगी।
  • बवासीर के रोगियों केलिए इसका इस्तेमाल लाभप्रद होता है।
  • अस्थमा, कफ, खांसी जुखाम जैसे रोगो के लिए भी इसका सेवन आपको राहत पहुंचाता है।
  • बच्चों को पेट फूलने की समस्या होने पर एक चम्मच गौमूत्र में नमक मिलाकर बच्चे को इसका सेवन करवाने से फायदा होता है।
  • जिनको भूख कम लगती है इसके सेवन से उनका पाचन सुधरता है और भूख खुल कर लगती है।
  • बड़ो में यदि पेट से सम्बंधित कोई भी भी परेशानी होती है तो भी इसका सेवन फायदेमंद होता है।

गौमूत्र का इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें:-

  • गौमूत्र को हमेशा एक निश्चित तापमान पर रखना चाहिए।
  • गौमूत्र की तासीर गरम होती है इसीलिए इसे गर्मियों में कम ही इस्तेमाल करना चाहिए।
  • आठ वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती स्त्री को इसके प्रयोग से पहले डॉक्टर या वैद्य की राय लेनी चाहिए।
  • मिट्टी कांच या स्टील के बर्तन में ही गौ मूत्र को रखना चाहिए।
  • जो लोग दुबले, कमजोर या थकान आदि से परेशान रहते है उन व्यक्तियों को इसके सेवन से परहेज करना चाहिए।
  • जो पुरुष बांझपन या फिर अनिंद्रा की समस्या से परेशान होते है उन्हें भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

तो ये कुछ फायदे है जो आपको गौमूत्र से मिलते है, इसके अलावा आपको इसके प्रयोग से पहले किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में भी आपको ऊपर बताया गया है, यदि इसका इस्तेमाल करके आपकी किसी समस्या का समाधान होता हो, या फिर किसी बिमारी से लड़ने और उसे खत्म करने में मदद मिलती है, तो इसकी गंध और स्वाद को भूल कर इसका फायदा जरूर उठाना चाहिए, ऐसा इसीलिए कहा क्योंकि गौ मूत्र स्वाद में कसेला, कड़वा और तीखा होता है, और साथ ही इसकी तासीर भी गरम होती है, परन्तु यह आपके भोजन को आसानी से पचाने और भूख को बढ़ाने में भी मदद करता है।

बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए क्या-क्या खिलाएं?

बच्चों की देख-रेख माता पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है जिसे सभी पूरी निष्ठा के साथ पूरा भी करते है। लेकिन सबसे अधिक चिंता तभी होती है जब पूर्ण ध्यान देने के बाद भी बच्चे का वजन नहीं बढ़ता। ऐसे में माँ बाप बच्चे की सेहत को लेकर काफी चिंतित हो जाते है जो लाजमी भी है।

वास्तव में बच्चे का वजन उसकी भूख और संतुलित भोजन का सेवन करने से बढ़ता है। परन्तु आजकल के बच्चे स्वाद के चलते संतुलित और पौष्टिक भोजन खाने की बजाय फ़ास्ट फ़ूड आदि का सेवन करना अधिक पसंद करते है जो सीधे तौर पर उनका स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।

छोटी उम्र में बच्चे के मस्तिष्क और शरीर का विकास होता है ऐसे में उसे सम्पूर्ण पोषण की आवश्यकता होती है, जिसमे फैट, विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन आदि की उचित मात्रा हो। यहाँ हम आपको कुछ पौष्टिक खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे है जिनके सेवन से शिशु का वजन सही और आसान तरीके से बढ़ जाएगा। बस आपको भोजन की मात्रा का ध्यान रखना होगा।

छोटे बच्चों का वजन बढ़ाने वाले पौष्टिक खाद्य पदार्थ :-

अगर आपके बच्चे का भी वजन अपनी उम्र के अनुसार कम है तो आप निम्नलिखित खाद्य पदार्थो की मदद से उसका वजन बढ़ा सकते है।baby food 1

1. मलाई वाला दूध :

बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए बचपन से ही उन्हें दूध का सेवन कराया जाता है। इसमें न केवल प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है अपितु अन्य पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में पाए जाते है। इसके अलावा इसमें मौजूद मलाई में फैट भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो वजन बढाने में बहुत लाभकारी होता है। इसीलिए अगर बच्चे का वजन कम है उसे मलाई वाला दूध पिलाना चाहिए। अगर बच्चे को दूध पसंद नहीं है तो आप स्मूथी, चॉकलेट शेक आदि बनाकर पिला सकती है।

2. अंडे :

अंडो में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। अगर आपके परिवार में सभी अंडे खाते है जो आप अपने बच्चे को भी अंडे खिला सकते है। यह उनकी सेहत के लिए बहुत लाभकारी होगा। यह न केवल उनका वजन  बढ़ाने में मदद करेगा अपितु उन्हें शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रखेगा।

3. आलू :

आलू को वजन बढाने के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। क्योंकि इनमे कार्बोहायड्रेट और उर्जा की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो वजन बढाने में बहुत लाभकारी होती है। इसके अलावा इसका स्वाद भी बच्चों को खूब पसंद आता है। जिससे आप आलू की तरह तरह की रेसीपीस बनाकर बच्चो को खिला सकती है।

4. शकरकंद :

शकरकंद को स्वास्थ्य के लिए बहुत बेहतर माना जाता है। इसमें मौजूद मिनरल्स, फाइबर, पोटैशियम, विटामिन ए, बी और सी वजह बढाने में लाभकारी होते है। इसके लिए बच्चों को दूध में शकरकंद खिलाएं। वैसे आप चाहे तो शकरकंद को उबालकर उसपर नमक और नींबू लगाकर भी बच्चों को खाने के लिए दे सकते है।

5. ड्राई फ्रूट्स :dry-fruit

ड्राई फ्रूट्स को वजन बढाने के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। क्योंकि सभी तरह के नट्स और ड्राई फ्रूट्स में विटामिन्स और प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। जो केवल शारीरिक ही नहीं अपितु मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होते है। इसके लिए बच्चों को दूध में ड्राई फ्रूट्स घिसकर या दूध में ड्राई फ्रूट्स का पाउडर बनाकर पिला सकते है।

6. केला :

केला बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। शरीर की हड्डियों से लेकर दिमाग की मांसपेशियों तक सभी को बेहतर बनाने के लिए केले का सेवन कराया जाता है। इसके अलावा केले में एनर्जी की भी उच्च मात्रा पाई जाती है जो बच्चों का वजन बढाने में लाभकारी होता है। एक वर्ष से अधिक के बच्चों को केले का शेक दिया जा सकता है। वैसे आप चाहे से कम उम्र के बच्चों को दूध में केला मैश करके भी खिला सकते है।

7. फुल क्रीम दही :

दूध और उसकी मलाई से बनी हर खाद्य वस्तु बच्चों का वजन बढाने के लिए लाभदायक मानी जाती है। फिर चाहे वो पनीर हो या दही। अगर आपका बच्चा दूध का सेवन करना पसंद नहीं करता तो आप उसे दही का सेवन करा सकते है। यह उसके स्वास्थ्य के साथ साथ उसके मानसिक विकास में ही मदद करेगी। इसके लिए आप बच्चे को सादी फुल क्रीम दही (जो मलाई वाले दूध से बनी हो) खिला सकते है या आप चाहे तो उसमें कुछ फ्रूट्स मिलाकर भी बच्चे को दे सकते है।

8. मूंगफली का मक्खन (पीनट बटर) :

पहले लोग इसके बारे में इतना नहीं जानते थे लेकिन इसके गुणों को देखते हुए उसकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई है। प्रोटीन और फाइबर का यह एक बेहतर स्त्रोत्र माना जाता है। अगर आपका बच्चा 1 वर्ष से अधिक आयु का है तो आप रोटी या टोस्ट पर एक चम्मच मूंगफली का मक्खन लगाकर खाने के लिए दे सकते है।

9. जिंक युक्त भोजन :छोटे बच्चों का वजन बढ़ाने वाले पौष्टिक खाद्य पदार्थ

बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी जरुरी होता है। जिसके लिए जिंक बहुत आवश्यक तत्व होता है। शरीर में जिंक की कमी होने के कारण भी बच्चों को भूख कम लगती है जिसकी वजन से उनका वजन नहीं बढ़ता। इसीलिए बच्चों को हमेशा जिंक से भरपूर भोजन देना चाहिए। इसके लिए – तरबूज के बीज, मूंगफली, बीन्स, पालक, मशरूम और दूध आदि बेहतर रहेंगे।

10. प्रोटीन और कार्बोहायड्रेट :

वजन बढाने के लिए प्रोटीन बहुत जरुरी होता है। इसलिए बच्चे को नियमित रूप से प्रोटीन और कार्बोहायड्रेट युक्त भोजन का सेवन कराना चाहिए। इसके लिए चिकन, मछली, अंडा, दूध, बादाम, मूंगफली, पास्ता, ब्राउन राइस, ओटमील और हरी सब्जियां लाभकारी रहेंगी।

तो ये थे कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन करने से बच्चे का वजन कुछ ही महीनों में अपने आप बढ़ने लगेगा। बस आपको ध्यान रखना है की भोजन नियमित और सभी पोषक तत्वों को सही मात्रा बच्चे को दी जाए।

प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण ये होते हैं

पीरियड्स के मिस होने पर शादी के बाद हर महिला के दिमाग में पहला सवाल यही उठता है, की कहीं वो प्रेग्नेंट तो नहीं है, वैसे ये बहुत ख़ुशी की बात होती है, क्योंकि माँ बनना सबसे अनोखा और प्यारा अनुभव होता है, साथ ही आप इसे आसानी से घर पर प्रेगनेंसी किट के द्वारा भी चेक कर सकती हैं, लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपके शरीर में भी बहुत से परिवर्तन होना शुरू हो जाते है, जिनसे आप आसानी से पता कर सकती हैं, की कहीं आप माँ तो नहीं बनने वाली हैं, जैसे की स्वाद में परिवर्तन आना, यूरिन बार बार आना, थकान महसूस होना, उलटी आना, आदि, जिनसे आपको पता चल सकता है की आप प्रेग्नेंट है या नहीं, तो आइये आपको विस्तार से बताते की प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण क्या होते है।

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ब्रैस्ट में भारीपन महसूस होना:-

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं, और इसके कारण ब्रैस्ट के उत्तक भी सवेंदनशील हो जाते है, साथ ही आपको ब्रैस्ट में सूजन आना, और भारीपन महसूस होने लगता है, तो यदि आपको अपने ब्रैस्ट में ऐसा महसूस हो रहा है, तो इसका मतलब आप प्रेग्नेंट हैं।

किसी एक तरह के स्वाद के प्रति आकर्षण होना:-

प्रेगनेंसी के दौरान क्रेविंग होना बहुत ही आम बात होती है, ऐसे में महिलाओ को खासकर खट्टा खाने की बहुत इच्छा उत्त्पन्न होती है, ऐसा जरुरी नहीं है की हर महिला के साथ यही हो कुछ मीठा तो कई महिलाओ को गंध से भी एलर्जी होने लग जाती है।

उलटी व् घबराहट महसूस होना:-

सामान्य रूप से ज्यादातर महिलाओ मो प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनो में अधिक उलटी आती है, यदि आपको नियमित सुबह घबराहार महसूस हो और उलटी आएं और कमजोरी भी महसूस हो तो इसका मतलब भी यह होता है की आप प्रेग्नेंट हैं।

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निप्पल के रंग में बदलाव आता है:-

क्या पीरियड्स के लेट होने के बाद आपके निप्पल के रंग में आपको गहरापन दिखाई दे रहा है, यदि हाँ तो यह भी प्रेगनेंसी का ही एक लक्षण है, इसका कारण होता है की प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में हो रहे हार्मोनल परिवर्तन से मेलनॉइट्स बहुत प्रभावित होते है, और इनका असर आपकी उन कोशिकाओं पर पड़ने लगता है, जो निप्पल के रंग में होने वाले बदलाव के लिए उत्तरदायी होते है।

बार बार यूरिन का आना:-

प्रेगनेंसी के दौरान आपकी किडनी दुगुनी तेजी से काम करने लग जाती है, जिसके कारण वो अधिक सक्रिय हो जाती है, और आपको बार बार यूरिन आने की समस्या शुरू हो जाती है, जिसके कारण महिलाओ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

थकान महसूस होना:-

शरीर में हार्मोनल बदलाव प्रेग्नेंट होने के बाद इतनी तेजी से होने लगता है, जिसके कारण आपको थकान व् कमजोरी का अहसास होने लगता है, आप न तो अधिक देर कही खड़े रह पाते है।

कब्ज़ की समस्या होना:-

शरीर में होने वाले हॉर्मोन्स के परिवर्तन का असर आपकी पाचन क्रिया पर भी पड़ता है, जिसके कारण आपकी पाचन क्रिया थोड़ा धीरे धीरे काम करना शुरू कर देती है, जिसके कारण आपको कब्ज़ जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सिर में दर्द रहना:-

प्रेगनेंसी के दौरान आपकी रक्त वाहिकाओं में भी रक्त का प्रवाह तेजी से होने लगता है, जिसके कारण आपका ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाता है, और आपके सिर में दर्द होने लग जाता है।

मूड में बदलाव आता है:-

प्रेगनेंसी में समय समय पर आपके मूड में भी बदलाव आता है, कभी आपको कोई चीज बहुत ही अच्छी लगने लगती है, और कभी किसी चीज से नफरत हो जाती है, और धीरे धीरे सब सही हो जाता है।

तो ये है कुछ शुरूआती लक्षण जो आपको प्रेगनेंसी के समय महसूस होते है, इसके अलावा यदि आपके पीरियड्स लेट हो गए है और आपको कुछ ऐसे लक्षण भी नहीं दिख रहे हैं तो आपको एक बार प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए, और यदि आपको प्रेगनेंसी नहीं है तो इस बारे में आपको डॉक्टर से राय लेनी चाहिए की आपके पेरिड्स के लेट होने का क्या कारण है।

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गर्भवती महिला को दही से होने वाले फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला ऐसे आहार का सेवन करना चाहती है जिससे उसे स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। ऐसे में बहुत सी गर्भवती महिलाएं खान पान को लेकर परेशान रहती है। और किसी भी चीज का सेवन करने से पहले सवाल करती है की क्या यह प्रेगनेंसी में खाना सही होता है या नहीं। ऐसे ही कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी में दही का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे में भी सवाल करती है, तो इसका जवाब होता है हाँ, गर्भवती महिला दही का सेवन कर सकती है। क्योंकि कैल्शियम, प्रोटीन, प्रोबायोटिक्स से भरपूर दही गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होती है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को दही का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते है।

न्यूट्रिएंट्स को अवशोषित करने की क्षमता बढ़ती है

दही में मौजूद बैक्टेरिया बॉडी में न्यूट्रिएंट्स को अवशोषित करने की क्षमता को बढ़ाता है, जिससे बॉडी के सभी अंगो को पोषण मिलने में मदद मिलती है, जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखता है।

तनाव से राहत

कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव की समस्या से परेशान रहती है, ऐसे में दही का सेवन करने से मस्तिष्क को शांत रखने में मदद मिलती है, जिससे तनाव जैसी परेशानी से बचाव होने में मदद मिलती है।

प्रोटीन से होती है भरपूर

प्रोटीन की मात्रा दही में भरपूर होती है जो गर्भ में पल रहे शिशु की मांसपेशियों के बेहतर विकास में मदद करती है। जिससे शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है, साथ ही गर्भवती महिला की मांसपेशियों को भी फिट रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर होता है कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर से जुडी परेशानी के कारण गर्भवती महिला को परेशान होना पड़ सकता है, लेकिन यदि गर्भवती महिला दही का सेवन करती है तो इससे ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम होता है भरपूर

गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की हड्डियों की कमजोरी की समस्या को दूर करने के लिए बॉडी में कैल्शियम की मात्रा का भरपूर होना जरुरी होता है। और दही में कैल्शियम की मात्रा प्रचुर होती है ऐसे में अपने आहार में प्रेग्नेंट महिला को दही को जरूर शामिल करना चाहिए।

पाचन क्रिया होती है बेहतर

दही का सेवन करने से पाचन क्रिया सुचारु रूप से काम करती है जिससे भोजन को आसानी से पचने में मदद करती है। और इस्सके कारण पेट सम्बन्धी परेशानियों से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

स्किन के लिए है बेहतर

गर्भवती महिला की बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण स्किन पर दाग धब्बो जैसी परेशानी, रूखेपन की समस्या आदि हो सकती है। ऐसे में दही का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है क्योंकि दही का सेवन करने से स्किन को सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

बॉडी को रखता है ठंडा

प्रेगनेंसी के दौरान जीभ में स्वाद में भी परिवर्तन आता है जिसके कारण मसालेदार खाने की इच्छा होती है, लेकिन मसालेदार खाना खाने के कारण सीने में जलन, एसिडिटी जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में दही का सेवन करने से गर्भवती महिला को इन परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलती है।

प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में करता है मदद

दही में मौजूद गुड बैक्टीरिया संक्रमण पैदा करने वाले बैड बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक होते हैं। साथ ही दही का सेवन करने से गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है क्योंकि यह बॉडी में प्रोबायोटिक्स की संख्या को बढ़ाते हैं जो पाचन के रास्ते से पोषक तत्वों के अवशोषित करने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

वजन नियंत्रित करने में होती है फायदेमंद

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना अच्छी बात होती है लेकिन जरुरत से ज्यादा वजन का बढ़ना भी गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में दही का सेवन करने से बॉडी में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन के स्तर को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है जो हार्मोन्स में असंतुलन और वज़न बढ़ने के लिए ज़िम्मेदार होता है। इसीलिए डॉक्टर भी प्रेगनेंसी के दौरान वजन पर नियंत्रण रखने के लिए दही का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को दही का सेवन करने से मिलते हैं। इसके अलावा रात के समय दही क सेवन करने से परहेज करना चाहिए साथ ही यदि गर्भवती महिला को फ्लू, खांसी, जुखाम आदि की परेशानी है तो भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में यह जरूर करें

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने

गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत ही अहम होते हैं क्योंकि यह प्रेगनेंसी का शुरूआती समय तो होता ही है लेकिन साथ ही इस समय शिशु का विकास भी शुरु होता है, क्योंकि शिशु के अंगो की आकृतियां बन रही होती है। ऐसे में यदि महिला अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है, खान पान में लापरवाही करती है, तनाव लेती है, प्रेगनेंसी में दिखने वाले असहज लक्षणों को अनदेखा करती है, तो इससे न केवल गर्भवती महिला की परेशानियां बढ़ती है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी खतरा हो सकता है। ऐसे में महिला यदि प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही अपने अच्छे से ध्यान रखती है तो प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ शिशु के विकास की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था के पहले तीन महीने में यह जरूर करें

गर्भावस्था के पहले तीन महीने गर्भवती महिला के लिए बहुत अहम होते हैं क्योंकि ऐसे में महिला के बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है, ऐसे में महिला यदि कुछ बातों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु को किसी भी दिक्कत से बचाने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को पहले तीन महीने में क्या जरूर करना चाहिए।

डॉक्टर से जांच

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में जैसे ही पीरियड्स मिस होने के बाद महिला घर में जांच करती है की वो प्रेग्नेंट है या नहीं, और परिणाम सही आता है। तो महिला को बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही प्रेगनेंसी से जुडी सभी जानकारी मिल सके, और प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही सही ट्रीटमेंट शुरू हो सके।

सभी जरुरी टेस्ट

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में बॉडी के सभी जरुरी टेस्ट महिला को करवा लेने चाहिए जैसे की ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, व् अन्य सभी जो जो जरुरी टेस्ट आपको डॉक्टर कहता है सभी करवाने चाहिए। ताकि यदि कोई परेशानी है तो प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही पता चल जाये और समय रहते इसका इलाज हो सके। और महिला को प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके। साथ ही पहले तीन महीने में यदि महिला को डॉक्टर अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह देते हैं तो वो भी करना चाहिए।

खान पान की जानकारी

गर्भावस्था के पहले तीन महीने में महिला को खान पान से जुडी सभी जानकारी को इक्कठा करना चाहिए। क्योंकि कुछ ऐसी चीजें होती है जिनके सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान परहेज करना चाहिए। क्योंकि उनका सेवन करने से न केवल गर्भवती महिला को बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी खतरा हो सकता है। जैसे की कच्चा पपीता, कच्चे पपीते का यदि गर्भवती महिला सेवन करती है तो इससे महिला के गर्भपात होने का खतरा रहता है। ऐसे में क्या नहीं खाना चाहिए और प्रेगनेंसी के दौरान कौन से आहार को लेना फायदेमंद है इसके बारे में पूरी जानकारी महिला को इक्कठी करनी चाहिए।

क्या करे क्या नहीं

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सावधानी बरतनी की जरुरत होती है ताकि किसी भी तरह की कोई दिक्कत ना हो। ऐसे में प्रेगनेंसी में कौन से काम करने चाहिए और कौन से काम नहीं करने चाहिए। जैसे की पेट पर दबाव पड़ने वाले काम, केमिकल का इस्तेमाल होने वाले काम, घर में पालतू जानवर के काम, अधिक व्यायाम आदि नहीं करना चाहिए, आदि। क्योंकि यह सभी काम गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। और महिला को भरपूर आराम करना चाहिए, खुश रहना चाहिए, आदि। क्योंकि यह प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होते हैं।

प्रेगनेंसी के अनुभव की जानकारी

पूरे प्रेगनेंसी के नौ महीने महिला किसी न किसी नए अनुभव या बदलाव से गुजरती है ऐसे में महिला कई बार तनाव में भी आ सकती है। लेकिन यदि महिला को प्रेगनेंसी के हर अनुभव की जानकारी हो तो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले बदलाव व् अनुभव को समझने में आसानी होती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परशानियों से बचने में मदद मिलती है। और इसके लिए आप इंटरनेट, अपनी सहेलियों, किताबों, घर के बड़े आदि सभी से जानकारी इक्कठी करनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ काम जो महिला को प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में जरूर करने चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी में किसी तरह की दिक्कत न हो और गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेग्नेंट महिला को हरा प्याज़ खाना क्यों जरुरी है?

हरी पत्तेदर सब्जियां तो हमेशा ही फायदेमंद होती हैं। चाहे फिर वो किसी के लिए भी हो। और अगर हम बात करे किसी प्रेग्नेंट महिला की तो उनके लिए इससे अच्छी कोई बात नहीं है। गर्भावस्था में केवल महिला को ही खाने पीने से फायदा नहीं होता है, बल्कि उनके शिशु को भी उतना ही फायदा होता है। उनके शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है। उनके शिशु को कोई शारीरक कमी नहीं होती। कोई बीमारी जल्दी नहीं लगती और वो उनका शिशु भी स्वस्थ रहता है।

हरी पत्तेदार सब्जी में एक सब्जी का नाम है हरी प्याज। जी हां। आज हम बात कर रहे प्याज की।  प्याज २ तरह की होतीं है। एक तो जो हर कोई रोज़ सब्ज़ी में डालते है और दूसरी जो सफ़ेद और हरे रंग की होती है। और जिसे बोलचाल की भाषा या आम शब्दों में spring onion बोलते है।

कई देशों में हरी प्याज को दवाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसमे कैलोरी की मात्रा बहुत ही कम होती है।

हरी प्याज़ खाने से प्रग्नेंट महिला को क्या क्या फायदे होते है आज इस आर्टिकल के माधयम से यही बताने जा रही हूँ।

 प्रेग्नेंट महिला को  हरी प्याज खाने के फायदे

हरी प्याज  में  विटामिन ए, विटामिन बी, और विटामिन सी  भरपूर मात्रा में पाया जाता है।  ये विटामिन और थायमिन का अच्छा स्रोत है।

इसमे फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण  यह शरीर में फाइबर की कमी को भी पूरा करता है। इसमें कॉपर, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, पोटैशियम, क्रोमियम और मैगनीज पाया जाता है। जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है।

दिल के लिए सबसे फायदेमंद

हरी प्याज में विटानीम सी पाया जाता है जो, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का काम करता है। जिससे दिल से जुडी बिमारिओं का कम खतरा होता है। इसमे सल्फर की मात्रा भी होती  है जिससे हदय की धमनियों को  भी खतरा नहीं होता।

DNA डीएनए के लिए सुरक्षित 

इसमें  एंटी एक्सीडेंट गुण  होते हैं जो की डीएनए (DNA) को नुक्सान पहुंचने से रोकते हैं।

सांस लेने में सहायक 

प्रेग्नेंट महिला को अक्सर खासी जुखाम तो लगा ही रहता है। क्यूंकि खासी जुखाम एक तरह से संक्रमण होता है तो यह बहुत जल्दी हो ही जाता है।  लेकिन इससे घबराने की कोई बात नहीं है।  हरी प्याज सांस की परेशानी को काम करता है। क्यूंकि यह श्वसन प्रक्रिया को बेहतर करने में सहायक होता है।

ब्लड शुगर के लेवेल को नियंत्रित रखने  में सहायक 

एक अध्ययन के मुताबिक ये गायत किया गया है की हरी प्याज में पाया जाने वाला सल्फर इन्सुलिन स्तर  को संतुलित बनाए  रखता है।  कई बार प्रेग्नेंट महिला जब मीठा अधिक मात्रा में खातीं है तो उनका शुगर  लेवल बढ़ जाता है लेकिन हरी प्याज खाने से इसे समस्या को निबटाया जा सकता है।

हड्डियों को मजबूत बनाए रखता है 

आपके के लिए हरी प्याज का सेवन बहुत जरुरी है , क्यूंकि यह विटामिन सी का पर्याप्त स्त्रोत है जो आपकी और आपके शिशु की हड्डिओं को मजबूत और क्रियाशीन बनाने में मदद करता है। यदि गर्भ में ही शिशु की हड्डिओं  का विकास अच्छी तरह से हो जाये तो तो आने वाले समय में शिशु स्वस्थ रहता है।

कैंसर में सहायक 

कैंसर जैसी बड़ी और भयंकर बीमारी के लिए भी हरी प्याज बहुत उपयोगी होती है।  सफर की मात्रा होने के कारण  यह कैंसर में बहुत लाभदायक होती है।

संक्रमण से राहत 

यह संक्रमण में भी रहत दिलाने का काम करता है। प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण बहुत जल्दी हो जाता है और इससे बचाव के लिए हरी प्याज का सेवन जरूर करना चाहिए। इसमे पाया जाने वाला सल्फर संक्रमण से बचता है।

तो spring onion कितना फायदेमंद और उपयोगी होता है यह तो जान ही लिया आपने। हरी प्याज का इस्तेमाल आप सलाद में भी इस्तेमाल कर सकतीं है। किसी भी सब्जी को गार्निश करके उसके साथ खाया जा सकता है, इससे सब्जी  देखने में खूबसूरत तो लगेगी ही साथ ही खाने का स्वाद भी बढ़ जायेगा।