Home Blog Page 6

चेहरे से दाग धब्बे दूर करने के घरेलू उपाय?

आज कल जिस तरह चेहरे की ख़ूबसूरती को निखारने के लिए लोग केमिकल युक्त क्रीम का इस्तेमाल करते हैं, बहुत से ब्यूटी ट्रीटमेंट लेते हैं, आदि। इसकी वजह से कई बार चेहरे की ख़ूबसूरती बढ़ने की बजाय स्किन से जुडी समस्या होने लगती है। साथ ही आजकल लोगो का गलत लाइफस्टाइल भी चेहरे से जुडी समस्या का कारण हो सकता है। क्योंकि स्किन बहुत सेंसिटिव होती है ।

ऐसे में यदि स्किन की अच्छे से केयर न की जाये, गलत चीजों का अधिक इस्तेमाल स्किन के लिए किया जाए तो इसकी वजह से चेहरे पर छाइयाँ, दाग धब्बे आदि से जुडी समस्या होने लगती है। और यदि आपके चेहरे पर कोई भी दाग धब्बा होता है निशान होता है तो इसकी वजह से चेहरे की रंगत और आपका आकर्षण फीका पड़ने लगता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से निजात पाने और चेहरे के ग्लो को बरकरार रखने के लिए कुछ घरेलू टिप्स बताने जा रहे हैं।

जायफल

जायफल का इस्तेमाल करने से चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों से निजात मिलने के साथ चेहरे को ग्लोइंग बनाने में भी मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप जायफल को पीसकर थोड़े दूध में मिला लें। उसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद मुँह धो लें ऐसा हफ्ते में तीन से चार बार करें।

एलोवेरा

स्किन केयर की बात हो और एलोवेरा का नाम नहीं आये ऐसा तो हो ही नहीं सकता क्योंकि एलोवेरा स्किन से जुडी समस्याओं से निजात पाने में सबसे असरदार होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप रात को सोने से पहले मुँह को पानी से धोएं और उसे साफ़ कर लें उसके बाद एलोवेरा जैल से चेहरे पर मसाज करें। मसाज करने के बाद इसे रातभर चेहरे पर लगे रहने दें और सुबह मुँह धो लें और ऐसा रोजाना करें। या फिर आप नहाने से एक घंटा पहले एलोवेरा जैल को भी चेहरे पर लगा सकते हैं। ऐसा रोजाना करें ऐसा करने से आपको स्किन से जुडी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलेगी।

दही

दही खाने से जितना शरीर को फायदा मिलता है उतना ही इसे चेहरे पर लगाने से स्किन को फायदा मिलता है। क्योंकि दही में ब्लीचिंग गुणों के साथ लेक्टिक एसिड और विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। जो त्वचा का कालापन दूर करने के साथ दाग धब्बों को दूर करने में काफी असरदार होता है। ऐसे में आप रुई की मदद से दही को चेहरे के दाग धब्बों पर लगाएं और थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें। आपको इसका असर धीरे धीरे दिखाई देगा और बेहतरीन नतीजे के लिए ऐसा रोजाना करें।

अंडा

अंडा फोकर उसका सफ़ेद हिस्सा अलग कर लें अब इसे अपने चेहरे पर लगाकर चुपचाप लेट या बैठ जाएँ और इसके सूखने के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में तीन चार बार करें ऐसा करने से भी आपको चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

टमाटर

टमाटर में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। जो स्किन पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या को दूर करने में मदद करने में मदद करते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए आप सबसे पहले टमाटर की प्यूरी बना लें यानी की टमाटर को पीस लें और उसके बाद इससे अपनी त्वचा पर 15 मिनट तक मालिश करें। मालिश करने के बाद ठंडे पानी से धो लें ऐसा हफ्ते में एक से दो बार आप कर सकते हैं लेकिन हर बार मालिश करना जरुरी नहीं है आप महीने में एक दो बार मालिश करें और तीन चार बार इसे चेहरे पर लगाएं। आप चाहे तो टमाटर को पीसने की बजाय टमाटर को काटकर भी चेहरे पर मसाज कर सकते हैं।

आलू

आलू का इस्तेमाल करने से भी चेहरे पर होने वाले डाह धब्बों से निजात पाने में मदद मिल सकती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप आलू की दो स्लाइस काटकर चेहरे की मास्ज़ करें या फिर आलू को क्रश करके पीस दे उसके बाद इसका रस निकालकर उसे रुई की मदद से चेहरे पर लगाएं। फिर पंद्रह से बीस मिनट बाद चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में एक या दो बार करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

ओट्स

ओट्स का इस्तेमाल करने से भी चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच ओट्स को पीस लें उसके बाद इसमें निम्बू का रस मिलाएं। निम्बू का रस मिलाने के बाद इससे चेहरे पर स्क्रब करें स्क्रब करने के बाद इसे पंद्रह मिनट के लिए चेहरे पर ही छोड़ दें। उसके बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें।

निम्बू का रस

निम्बू में मौजूद विटामिन सी भी चेहरे से जुडी इस समस्या के समाधान में आपकी बहुत मदद करता है इसके लिए आप निम्बू कस रस निकाल कर उसे रुई की मदद से चेहरे पर लगाएं। या फिर निम्बू के रस से दो या तीन मिनट तक चेहरे की मसाज करें। उसके बाद साफ़ पानी से चेहरे को धो लें।

प्याज

प्याज को पीसकर एक पेस्ट तैयार करें अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं आप चाहे तो प्याज का रस भी रुई की मदद से लगा सकते हैं। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें ऐसा करने से आपको चेहरे से जुडी इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

कच्चा दूध

कच्चा दूध यानी की बिना उबले हुआ दूध रुई की मदद से रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं। चेहरे पर लगाने के बाद सुबह उठकर चेहरे को धो लें। रोजाना ऐसा करें ऐसा करने से भी चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

शहद और हल्दी

एक चम्मच शहद में चुटकीभर हल्दी मिलाएं उसके बाद इसे मास्क के रूप में चेहरे पर लगाएं। थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें ऐसा करने से चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

चेहरे की स्किन व् बॉडी की स्किन को हेल्दी बनाएं रखने के लिए आपको पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में मौजूद हानिकारक तत्व बाहर निकल जातें हैं। जिससे आपकी बॉडी व् स्किन दोनों को हेल्दी रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे कुछ दिनों तक रोजाना ट्राई करने से आपको चेहरे पर होने वाले किसी भी निशान, दाग धब्बे आदि से निजात पाने के साथ चेहरे को खूबसूरत और ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है।

Home remedies for skin care

जब यह हो रहा हो प्रेगनेंसी में तो तुरंत डॉक्टर से मिलें?

गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर बहुत से बदलाव से गुजरता है साथ ही इस दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। किसी महिला की पहली प्रेगनेंसी हो या दूसरी प्रेगनेंसी हो महिला को दिक्कत तो होती ही है। ऐसे में महिला को सलाह दी जाती है की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि माँ व् बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो। और छोटी मोटी परेशानी यदि होती भी है तो ऐसा होना बहुत आम बात होती है।

लेकिन यदि महिला को कोई ऐसी दिक्कत हो रही है जिसके होने पर महिला को असहज महसूस होता है या फिर महिला को उसकी वजह से ज्यादा परेशानी होती है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके महसूस होने पर गर्भवती महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

ब्लीडिंग

यदि प्रेग्नेंट महिला को ब्लीडिंग शुरू हो जाये तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि यह गर्भपात का लक्षण होता है। साथ ही महिला को यदि एक दो बार से ज्यादा हल्का हल्का खून का धब्बा भी नज़र आये तो भी महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए।

जरुरत से ज्यादा उल्टियां आना

उल्टियां आना प्रेगनेंसी का सबसे अहम लक्षण माना जाता है और अधिकतर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला को यह परेशानी ज्यादा होती है तो महिला को इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसकी वजह से शरीर में पानी की कमी हो सकती है और माँ व् बच्चे दोनों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

शिशु की मूवमेंट

गर्भ में शिशु की मूवमेंट होना प्रेगनेंसी के सबसे प्यारा लम्हा होता है और जैसे जैसे प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है वैसे वैसे शिशु की मूवमेंट भी बढ़ने लगती है। लेकिन यदि कभी महिला को ऐसा महसूस हो को शिशु ने लम्बे समय से मूवमेंट नहीं की है। और बहुत कोशिश करने के बाद भी शिशु मूव नहीं कर रहा है। तो ऐसे में महिला को बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यह शिशु के लिए खतरा हो सकता है।

पेट या पीठ में दर्द

यदि डिलीवरी का समय पास आने से पहले ही महिला को पेट या पीठ में बहुत तेज दर्द महसूस हो रहा हो तो भी महिला को इसे अनदेखा नहीं करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यह समय से पहले डिलीवरी होने का संकेत हो सकता है।

सूजन

प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में सूजन होना बहुत ही आम बात होती है इसके अलावा कई बार महिला को हाथों में भी थोड़ी सूजन महसूस हो सकती है। लेकिन यदि महिला को जरुरत से ज्यादा हाथों, पैरों, मुँह या शरीर के किसी अन्य भाग पर सूजन हो साथ ही दर्द भी महसूस हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह शरीर में होने वाली किसी गंभीर बिमारी का संकेत हो सकता है ऐसे में महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

सिर दर्द

गर्भवती महिला को सिर दर्द ज्यादा महसूस होने के साथ चक्कर आना, दिखने में परेशानी होना, धुंधला दिखाई देना आदि समस्या होती है। तो भी गर्भवती महिला को इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

वाटर ब्रेक

प्रेग्नेंट महिला को यदि ऐसा महसूस हो रहा हो की महिला की प्राइवेट पार्ट से यूरिन की तरह कोई सफ़ेद पदार्थ बाहर निकल रहा है तो ऐसा होने पर महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यह एमनियोटिक बैग फटने का संकेत होता है। और इसका मतलब होता है की अब डिलीवरी होने वाली है साथ ही पानी पूरा निकल जाने के बाद गर्भ में शिशु की जान को भी खतरा हो सकता है।

फ्लू के लक्षण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को फ्लू के लक्षण जैसे की सर्दी, खांसी, बुखार आदि महसूस होता है तो भी महिला को इसका घर में इलाज नहीं करना चाहिए। और न ही अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन करना चाहिए। बल्कि महिला को इस समस्या से बचने के लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

कुछ भी हज़म नहीं होना

प्रेगनेंसी के समय शरीर के होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर महिला के पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला को ऐसा महसूस हो की महिला को कुछ भी हज़म नहीं हो रहा है। कुछ भी खाते या पीते ही महिला को उल्टी हो रही है, महिला को भूख नहीं लग रही है। तो ऐसे में महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है जिसका असर माँ बच्चे दोनों की सेहत पर देखने को मिल सकता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो यदि प्रेग्नेंट महिला को महसूस हो तो महिला को इन्हे अनदेखा किये बिना तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यह सभी लक्षण इस और इशारा करते हैं की माँ या बच्चे को कोई दिक्कत होने वाली है ऐसे में माँ व् बच्चे दोनों स्वस्थ रहे इसके लिए इन लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

आप भी रोटी को तवे की बजाए सीधे गैस की आंच पर सेंकती हैं और खाती हैं वो भी प्रेगनेंसी में

0

​Roti On Gas Hindi Video for Pregnant Women : गैस पर रोटी सेकनें से कौन सी बीमारी होती है। गर्भवती महिला गैस पर बनी रोटी क्यों नहीं खाने चाहिए। रोटी गैस की आंच पर सीधे सेंकने के नुकसान क्या आप भी रोटी को तवे की बजाए सीधे गैस की आंच पर सेंकती हैं डायरेक्ट गैस की आंच पर रोटी सेंक पर गर्भवती को क्यों नहीं खाने चाहिए क्या गैस की लौ पर सीधे रोटी बनाना हानिकारक है? गैस की रोटी हानिकारक क्यों होती है?

​Roti On Gas Video : आप भी रोटी को तवे की बजाए सीधे गैस की आंच पर सेंकती हैं और खाती हैं वो भी प्रेगनेंसी में हिंदी में वीडियो देखिये

स्तनपान करने वाले शिशु को पानी पिलाना सही है या नहीं?

माँ बनना हर महिला के जीवन का सबसे अलग और खास अनुभव होता है। और जितना यह अनुभव खास होता है उतना ही महिला को प्रेगनेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद दिक्कत का अनुभव करना पड़ता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पूरे नौ महीने तक महिला किसी न किसी दिक्कत का सामना करती है। वहीँ बच्चे के जन्म के बाद भी बच्चा छोटा होता है इसीलिए अपने मन की बात को कह नहीं पाता है।

ऐसे में बच्चे के ज्यादा रोने पर, ज्यादा सोने पर, महिला को के मन में तरह तरह के सवाल आने लगते हैं की आखिर बच्चा ऐसा क्यों कर रहा है। क्योंकि बच्चा तो उस समय बोल नहीं पाता है। वैसे ही बच्चे के जन्म के बाद बच्चे की केयर को लेकर महिला के मन में बहुत सवाल भी होते हैं। और उन सवालों में से एक सवाल यह होता है की स्तनपान करवाने वाले शिशु को पानी पिलाना सही है या नहीं।

क्या स्तनपान करने वाले शिशु को दूध पिलाना चाहिए?

यह प्रश्न किसी भी नई माँ के मन में आना स्वाभाविक होता है। क्योंकि पानी हर किसी के लिए जरुरी होता है। लेकिन जब बात नवजात शिशु की आती है तो इसका जवाब न होता है। क्योंकि बच्चे के जन्म के छह महीने तक बच्चे के लिए माँ का दूध ही पर्याप्त होता है और बच्चे के विकास के लिए जरुरी सभी पोषक तत्व शिशु को दूध से ही मिल जाते हैं। ऐसे में बच्चे को पानी की जरुरत नहीं होती है साथ ही माँ के दूध का आधे से ज्यादा हिस्सा पानी से भरपूर होता है।

इसके अलावा यदि जन्म के बाद बच्चे को यदि छह महीने तक केवल माँ का दूध ही पिलाया जाता है तो इससे बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है। इसके अलावा दूध पिलाने वाली माँ को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो खुद भरपूर पानी का सेवन करें जिससे माँ और बच्चा दोनों हाइड्रेट रह सकें। साथ ही जब बच्चा छह महीने से ज्यादा का होता है और धीरे धीरे अन्न खाना शुरू करता है तो उसके बाद बच्चे को पानी की जरुरत होती है और तब आप बच्चे को पानी पिला सकते हैं।

बच्चे को माँ का दूध पिलाने के फायदे

  • माँ का दूध पीने से बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास तेजी से होता है।
  • बच्चे की इम्युनिटी मजबूत होती है जिससे बच्चे को बीमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • बच्चे के विकास के लिए जितने जरूरी पोषक तत्व चाहिए होते हैं वो बच्चे को दूध से भरपूर मात्रा में मिलते हैं।

नवजात शिशु को दिन में कितनी बार दूध पिलाना चाहिए?

कोई भी महिला जब नवजात को दूध पिलाती है तो महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की बच्चा जब तक स्तन को खुद नहीं छोड़ता है तब तक बच्चे को दूध पिलाना चाहिए। उसके बाद जैसे ही बच्चे का पेट भर जाता है तो बच्चा अपने आप ही दूध पीना बंद कर देता है।

और एक बार दूध पीने के बाद बच्चे को दो से ढाई घंटे तक भूख नहीं लगती है ऐसे में महिला को हर दो से ढाई घंटे के बाद बच्चे को दूध पिलाना चाहिए। इसके अलावा ध्यान रखें की बच्चे को दूध पिलाने के बाद कंधे से जरूर लगाएं क्योंकि इससे बच्चा डकार ले लेता है जिससे दूध को हज़म होने में मदद मिलती है।

तो यह है नवजात शिशु को दूध के साथ पानी पिलाना चाहिए या नहीं उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी नई माँ बनी है तो आपको भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

प्रेगनेंसी में अगर बार बार सिर में दर्द की समस्या हो तो?

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की महिला को पेट में दर्द, उल्टियां, चक्कर आना, पैरों में सूजन, पेट सम्बंधित समस्या होना, नींद कम आना, सिर दर्द की समस्या होना, आदि परेशानियां हो सकती है। ऐसे में महिला को इन सभी को लेकर घबराना नहीं चाहिए क्योंकि इनका होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है।

लेकिन ऐसा जरुरी नहीं होता है की हर एक गर्भवती महिला को एक ही तरह की समस्या हो साथ ही कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो कुछ महिलाओं को कोई दिक्कत नहीं होती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली सिर दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में सिर दर्द होने के कारण

गर्भावस्था में महिला को सिर दर्द की समस्या होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की:

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को यह दिक्कत हो सकती है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं को हाई ब्लड प्रैशर या लौ ब्लड प्रैशर की समस्या रहती है उसे भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • तनाव भी सिर दर्द होने का अहम कारण होता है।
  • जो गर्भवती महिलाएं अपनी नींद पूरी नहीं लेती है उन महिलाओं को भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • शरीर में पानी की कमी होने पर भी गर्भवती महिला को सिर दर्द व् चक्कर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • डाइट सही न लेने के कारण गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिस कारण गर्भवती महिला को कमजोरी हो सकती है और कमजोरी के कारण सिर दर्द की समस्या का सामना महिला को अधिक करना पड़ सकता है।
  • चाय कॉफ़ी व् अन्य कैफीन युक्त चीजों का अधिक सेवन करने के कारण भी महिला को सिर दर्द की परेशानी अधिक हो सकती है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं की आँखे कमजोर होती है उन महिलाओं को सिर दर्द की समस्या हो सकती है।
  • सारा दिन फ़ोन, टीवी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीजों के इस्तेमाल के कारण भी सिर दर्द की समस्या महिला को हो सकती है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं को माइग्रेन की समस्या होती है उन्हें इस समस्या का सामना नहीं करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला सिर दर्द से बचे रहने के लिए इन बातों का ध्यान रखें

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान यदि छोटी छोटी बातों का ध्यान रखती है तो इससे गर्भवती महिला को सिर दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को सिर दर्द से बचे रहने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट

प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है जिससे महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है साथ ही सिर दर्द चक्कर जैसी परेशानी भी महिला को नहीं होती है।

तरल पदार्थों की कमी शरीर में नहीं होने दें

प्रेग्नेंट महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। ऐसा करने से महिला को ऊर्जा से भरपूर व् एक्टिव रहने में मदद मिलती है जिससे महिला को सिर दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

योगासन व् व्यायाम करें

स्ट्रैस होना सिर दर्द का अहम कारण होता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को स्ट्रैस से बचे रहने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान व्यायाम व् योगासन को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बनाना चाहिए। यदि महिला नियमित योगासन, मैडिटेशन, व्यायाम आदि करती है तो इससे महिला दिमागी रूप से रिलैक्स रहती है जिससे महिला को सिर दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नींद लें भरपूर

जो महिलाएं समय से नहीं सोती है, ज्यादा समय के लिए सोती है, भरपूर नींद नहीं लेती है उन महिलाओं को भी सिर दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए ताकि महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें।

मन में नेगेटिव विचार नहीं आने दें

गर्भावस्था के दौरान महिला के मन में बहुत सी बातें आती है और इस दौरान लोगो की अलग अलग बातें सुनकर नेगेटिव विचार मन में आने लगते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने मन में नेगेटिव विचार नहीं आने देने चाहिए क्योंकि ज्यादा गलत सोचने के कारण भी महिला को सिर में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। बल्कि महिला को हमेशा पॉजिटिव सोचना चाहिए और खुश रहना चाहिए ताकि महिला को ऐसी कोई समस्या नहीं हो।

मसाज

सिर दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए आप सिर में मसाज कर सकते हैं ऐसा करने सिर की मांसपेशियों में आये तनाव को दूर करने और सिर में ब्लड फ्लो को सही होने में मदद मिलती है। जिससे सिर दर्द को आराम मिलता है।

डॉक्टर से मिलें

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को सिर दर्द की समस्या सहनीय है तो महिला इसे लेकर बिल्कुल नहीं घबराये लेकिन यदि महिला की यह समस्या असहनीय है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और डॉक्टर से मिलना चाहिए खासकर जिन महिलाओं को माइग्रेन की समस्या के कारण सिर दर्द की समस्या अधिक होती है उन्हें इस बात का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।

फ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करें

गर्भवती महिला को फ़ोन, कंप्यूटर आदि का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। यदि महिला इस बात का ध्यान रखती है तो इससे भी गर्भवती महिला को सिर दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सिर दर्द होने के कारण व् इस समस्या से बचे रहने के कुछ इलाज, यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी यह जानकारी होनी चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको सिर दर्द क्यों हो रहा इसे समझने में और सिर दर्द का इलाज कैसे किया जाएँ इसकी पूरी जानकारी आपको मिल सके।

प्रेगनेंसी में कब हो जाती है स्किन और हेयर प्रॉब्लम्स

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में तरह तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं साथ ही महिला को बहुत सी समस्याएँ भी हो जाती है। और वह समस्याएँ शारीरिक होने के साथ स्किन व् बालों से जुडी भी हो सकती है। स्किन व् बालों से जुडी समस्या का होना भी प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है साथ ही डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान स्किन व् बालों से जुडी समस्या होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं।

हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं जिनका असर महिला की स्किन व् बालों पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में महिला को बालों के रूखे होने, बालों के झड़ने होने, स्किन पर दाग धब्बे व् मुहांसे जैसी समस्या हो सकती है।

पोषक तत्वों की कमी

जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट अच्छे से नहीं लेती है उन महिलाओं के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। और शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण स्किन व् बालों को भरपूर पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। जिसके कारण स्किन व् बालों से जुडी समस्याओं का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

पेट का आकार बढ़ने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के पेट का आकार लगातार बढ़ता है। जिसके कारण पेट की स्किन में खिंचाव आता है और वहां पर भरे रंग के निशान दिखने लगते हैं और धीरे धीरे यह बढ़ते जाते हैं। साथ ही यह निशान डिलीवरी के बाद भी महिला के पेट पर रहते हैं। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से ही इसका इलाज कर सकती है ताकि महिला को स्ट्रेच मार्क्स से बचे रहने में मदद मिल सके।

तनाव के कारण

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाएं तनाव का शिकार हो जाती है। और तनाव का बुरा असर महिला की ख़ूबसूरती पर भी पड़ सकता है। जिसके कारण महिला को त्वचा व् बालों से जुडी समस्या का सामना अधिक करना पड़ सकता है।

गर्भ में लड़का या लड़की होने के लक्षण

ऐसा माना जाता है की यदि प्रेग्नेंट महिला को स्किन सम्बन्धी समस्या होती है तो यह गर्भ में बेटी होने का लक्षण होता है साथ ही यदि महिला को स्किन सम्बन्धी समस्या होने की बजाय स्किन ग्लो करने लगती है तो यह गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को स्किन व् बालों से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही से ही स्ट्रेचमार्क्स न हो इसके लिए कुछ न कुछ करना चाहिए, खुश रहना चाहिए साथ ही पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको शारीरिक रूप से फिट रहने के साथ आपकी ख़ूबसूरती को भी बरकरार रहने में मदद मिल सके।

Hair and skin problems during pregnancy

प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही यह सब बंद करना होगा?

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए वो लम्हा होता है जब महिला अपने माँ बनने की खबर सुनने के साथ ही मातृत्व के अहसास का अनुभव करने लगती है। साथ ही माँ बनना किसी भी महिला के लिए आसान नहीं होता है क्योंकि प्रेगनेंसी के पहले दिन से आखिरी दिन तक शरीर में बहुत से बदलाव का अनुभव करती है, बहुत सी शारीरिक व् मानसिक परेशानियों का अनुभव करती है, अपनी पसंद नापसंद को बदलती है, आदि।

आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जिनका ध्यान रखना महिला के लिए जरुरी होता है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सकें। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को किन किन चीजों को छोड़ देना चाहिए।

गलत दिनचर्या

सबसे पहले महिला को अपनी गलत दिनचर्या को छोड़ देना चाहिए। क्योंकि गलत दिनचर्या आपके स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी दिनचर्या सही करनी चाहिए जैसे की खाने पीने, सोने, व्यायाम करने आदि सभी का एक सही समय बनाएं।

बाहर का खाना

यदि आपको बाहर का खाना खाने का बहुत ज्यादा शौक है तो आपको अपनी इस आदत में भी बदलाव करना चाहिए। क्योंकि बाहर के खाने में बहुत सी ऐसी चीजें होती है जिससे प्रेग्नेंट महिला की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी इस आदत को छोड़कर घर में हेल्दी खाना बनाकर खाना खाना चाहिए।

ज्यादा टाइट कपडे व् ऊँची हील पहनना

यदि आपको स्किन फिट कपडे पहनने का शौक है या ऊँची हील पहनने का शौक है तो आपको अपनी इस आदत में थोड़ा बदलाव करने की जरुरत है। क्योंकि ज्यादा टाइट कपडे पहनने और ऊँची हील पहनना प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

नशे का सेवन

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही गर्भवती महिला को नशे के सेवन से दूरी बना लेनी चाहिए। साथ ही उन जगह पर भी नहीं जाना चाहिए जहां कोई नशा कर रहा होता है। क्योंकि इससे महिला और शिशु दोनों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

ज्यादा भागदौड़ करना

यदि आप पहले किसी भी काम को करने के लिए तुरंत तैयार होकर चल पड़ती थी तो आपको अपनी इस आदत पर प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही थोड़ी रोक लगाना चाहिए। क्योंकि ज्यादा भीड़भाड़ में जाने के कारण, ज्यादा भागदौड़ करने के कारण महिला को परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

पेट के बल सोना

कुछ महिलाओं की आदत होती है की वो उल्टा होकर सोती है और इस पोजीशन में सोने से उन्हें अच्छी नींद आती है। लेकिन प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही आपको अपनी इस आदत को बदलना चाहिए। क्योंकि पेट के बल सोना गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर डाल सकता है।

जरुरत से ज्यादा व्यायाम

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को जरुरत से व्यायाम नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला शरीर पर यदि ज्यादा जोर डालती है तो इसकी वजह से महिला व् शिशु की सेहत को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है।

अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करें

यदि आपको किसी भी तरह की दिक्कत होने पर दवाई खाने की आदत है तो आपको प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही अपनी इस आदत को भी बदलने की जरुरत है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बिना डॉक्टरी परामर्श के दवाइयों का सेवन बच्चे के विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

कभी भी कुछ भी खा लेना

यदि आपकी कुछ भी खा पी लेने की आदत है तो प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी इस आदत को भी बदलने की जरुरत है। प्रेग्नेंट महिला के लिए प्रेगनेंसी के दौरान कुछ भी खाने पीने से पहले उसकी सही जानकारी लेना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन प्रेगनेंसी में न करने की सलाह दी जाती है यदि महिला उन्हें खा लेती है तो इसकी वजह से माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँचने का खतरा होता है। इसके अलावा महिला जो भी कहते है उसकी सही मात्रा, सही समय आदि का ध्यान रखना भी जरुरी होता है।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही महिला को छोड़ देने चाहिए। क्योंकि इन सभी के कारण महिला और बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँचने का खतरा होता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

गर्भधारण होते ही शरीर में यह बदलाव आने लगते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान पूरे नौ महीने तक महिला शरीर में बहुत से शारीरिक बदलाव का अनुभव करती है। जैसे की महिला को शारीरिक परेशानियां होती है, महिला के वजन में बदलाव आता है, स्किन से जुडी समस्या महिला को हो सकती हैं, आदि। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं होता है की हर महिला को ही प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी हो या सभी महिलाओं को एक ही तरह की परेशानी हो।

क्योंकि हर महिला का शरीर अलग होता है ऐसे में यह हर महिला के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है की प्रेगनेंसी के दौरान क्या होगा और क्या नहीं। लेकिन प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में महिला को शरीर में अलग अलग बदलाव या लक्षण महसूस हो सकते हैं और यह लक्षण अधिकतर सभी महिलाओं को महसूस हो सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको गर्भधारण होते ही शरीर में कौन से बदलाव आने लगते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पीरियड्स नहीं आना

यदि महिला का गर्भ ठहर गया हैं तो उसके बाद महिला को पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं और पीरियड्स के मिस होने के एक हफ्ते बाद महिला घर में ही प्रेगनेंसी टेस्ट किट की मदद से यह जान सकती है की महिला गर्भवती है या नहीं।

स्पॉटिंग होना

प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में महिला को ब्लीडिंग नहीं होती है लेकिन कई बार खून के धब्बे महसूस हो सकते हैं। क्योंकि अंडाशय से अंडा जब गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है तो ऐसा हो सकता है। इन्हे लेकर महिला को घबराना नहीं चाहिए लेकिन खून के धब्बे ज्यादा महसूस होने पर इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए।

पेट दर्द

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में महिला को थोड़ा थोड़ा पेट दर्द भी रह सकता है। क्योंकि इस दौरान गर्भाशय का आकार थोड़ा बढ़ने लगता है जिसकी वजह से मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है और पेट में हल्का फुल्का दर्द महसूस हो सकता है।

शरीर का तापमान

गर्भावस्था के शुरूआती समय में महिला के शरीर का तापमान भी थोड़ा बढ़ा हुस महसूस हो सकता है लेकिन फिर धीरे धीरे यह नोर्मल होने लगता है।

मॉर्निंग सिकनेस

प्रेगनेंसी के दौरान सुबह उठने पर महिला को जी मिचलाना, उल्टियां, थकावट जैसी समस्या हो सकती है। ऐसा हर गर्भवती महिला के साथ हो ऐसा जरुरी नहीं होता है।

थकान व् कमजोरी

गर्भावस्था की पहली तिमाही में शरीर में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से हो रहे होते हैं। और शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होने के कारण महिला को थकान व् कमजोरी अधिक महसूस हो सकती है।

बार बार यूरिन आना

प्रेगनेंसी की शुरुआत में महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा भी होती है क्योंकि इस दौरान शरीर में किडनी का काम बढ़ जाता है जिसकी वजह से बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है। साथ ही यदि महिला को यूरिन पास करते समय जलन, दर्द, बदबू जैसे लक्षण महसूस हो तो एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए क्योंकि यह यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण होते हैं।

तनाव महसूस होना

शारीरिक बदलाव के साथ प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में होने वाले हार्मोनल बदलाव व् शारीरिक परेशानियों के कारण महिला मानसिक रूप से भी परेशानी का अनुभव कर सकती है।

भूख बढ़ना या कम होना

प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में कुछ महिलाओं को भूख न लगने और कुछ महिलाओं को भूख ज्यादा लगने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की न तो महिला जरुरत से ज्यादा खाएं और न ही कम खाएं।

गंध से एलर्जी

कुछ महिलाओं को गंध से एलर्जी की समस्या भी हो सकती है और केवल गन्दी गंध से ही नहीं बल्कि खाने पीने की चीजों से आने वाली गंध से भी महिला को दिक्कत हो सकती है।

ब्रेस्ट में सूजन

गर्भावस्था के शुरुआती समय में महिला को ब्रेस्ट में सूजन या फिर दर्द जैसी समस्या भी हो सकती है। क्योंकि बच्चे के जन्म से पहले ही ब्रेस्ट में दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और ब्रेस्ट के उत्तकों में फैलाव होने लगता है। जिसके कारण ब्रेस्ट में दर्द, कड़ापन, सूजन आदि महसूस हो सकता है।

उल्टियां अधिक आना

प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में कुछ महिलाओं को उल्टियां अधिक आने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी होते ही महिला के शरीर में कौन कौन से बदलाव आने लगते हैं उससे जुड़े कुछ टिप्स, साथ ही प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की प्रेगनेंसी के शुरूआती तीन महीने बहुत नाजुक होते हैं। ऐसे में माँ और बच्चे दोनों को कोई भी दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

Body changes in pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान आपके सिर में दर्द रहता है? तो हो जाएँ सावधान

गर्भावस्था महिला के लिए जितना खुशनुमा समय होता है उतना ही इस दौरान महिला को इस समय अपने शरीर में होने वाले बदलाव, शारीरिक व् मानसिक परेशानियों आदि से भी गुजरना पड़ सकता है। और यह सब होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है क्योंकि प्रेगनेंसी के समय महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं जिसकी वजह से यह सब होता है साथ ही बढ़ते वजन, पेट का आकार बढ़ने के साथ भी महिला को दिक्कतें हो सकती है। आज इस आर्टिकल में में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले सिर दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपके लिए यह आर्टिकल काफी फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इसमें प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी ही बताई जा रही है।

क्यों होता है प्रेगनेंसी के दौरान सिर में दर्द?

गर्भावस्था के दौरान सिर में दर्द महसूस होना एक आम समस्या होती है और यह समस्या अधिकतर गर्भवती महिलाओं को हो सकती है। किसी महिला को कभी कभार सिर में दर्द होता है तो कुछ महिलाएं इस समस्या से ज्यादा परेशान रहती है। गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को सिर में दर्द होता है तो इस परेशानी के होने कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब उन कारणों के बारे में जानते हैं।

  • प्रेग्नेंट महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं जिनकी वजह से महिला को सिर में दर्द की समस्या हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी में दौरान शरीर में दुगुने ब्लड की जरुरत होती है साथ ही शरीर में ब्लड फ्लो भी बढ़ जाता है जिसकी वजह से महिला को सिर में दर्द जैसी समस्या हो सकती है।
  • जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर की समस्या से जूझ रही होती है उन्हें भी सिर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • जिन महिलाओं को माइग्रेन की समस्या होती है उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान सिर दर्द की समस्या अधिक हो सकती है।
  • जो गर्भवती महिलाएं स्ट्रेस में रहती है उन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान सिर में दर्द होना बहुत ही आम बात होती है।
  • शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण भी सिर दर्द होना चक्कर आना आम समस्या होती है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में यदि पानी की कमी होती है तो इस वजह से भी महिला को सिर में दर्द हो सकता है।
  • नींद में कमी या बहुत ज्यादा सोने के कारण भी सिर में दर्द होना आम बात होती है ऐसे में न तो महिला को ज्यादा सोना चाहिए और न ही कम सोना चाहिए।
  • जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ना भी सिर दर्द का एक कारण होता है।
  • चाय कॉफ़ी का सेवन अधिक करने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • यदि आपको आँखें कमजोर है तो भी आपको यह समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी में होने वाले सिर दर्द की समस्या से बचाव के आसान टिप्स

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सिर में दर्द रहता है तो कुछ आसान टिप्स को फॉलो करने से महिला इस समस्या से बच सकती है। जैसे की:

दिनचर्या सही रखें

सबसे पहले महिला को अपनी दिनचर्या को सही रखना चाहिए जैसे की महिला को समय से सोना चाहिए और समय से उठना चाहिए, खाने पीने का सही समय बनाना चाहिए और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए, गलत चीजों जैसे की कैफीन, नशीले पदार्थ आदि से दूरी रखनी चाहिए, आदि। यदि महिला अपनी दिनचर्या सही रखती है तो इससे न केवल सिर दर्द बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली अन्य परेशानियों से भी निजात मिल सकता है।

व्यायाम व् योगा करें

गर्भवती महिला को रोजाना थोड़ी देर व्यायाम या योगा जरूर करना चाहिए इससे शरीर में ब्लड फ्लो सही होता है, मांसपेशियों को रिलैक्स महसूस होता है, शरीर में चल रही क्रियाओं को अच्छे से काम करने में मदद मिलती है, महिला एक्टिव रहती है, शरीर में हार्मोनल बैलेंस बना रहता है, आदि। जिससे महिला को सिर दर्द जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

स्ट्रेस नहीं लें

तनाव सिर दर्द को और ज्यादा बढ़ाता है ऐसे में गर्भवती महिला को बिल्कुल भी तनाव में नहीं आना चाहिए। बल्कि जितना हो सके उतना खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि खुश रहने से भी प्रेग्नेंट महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होने दें

गर्भवती महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए जिससे शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा सही रहें। यदि गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्व सही मात्रा में होते हैं तो इससे भी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचे रहने और हमेशा एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

पानी पीएं भरपूर

गर्भावस्था के दौरान शरीर में पानी की कमी यानी की डी हाइड्रेशन की समस्या होने पर सिर में दर्द महसूस होना और इस समस्या का ज्यादा बढ़ना आम बात होती है। ऐसे में इस परेशानी से निजात पाने के लिए प्रेग्नेंट महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।

नींद सही लें

गर्भावस्था के दौरान महिला को आठ से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए इसके साथ महिला को न तो जरुरत से ज्यादा सोना चाहिए और न ही कम सोना चाहिए। यदि महिला अपनी नींद का पूरा ध्यान रखती है तो इससे भी गर्भवती महिला को सिर दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

मसाज करवाएं

यदि गर्भवती महिला के सिर में हल्का फुल्का दर्द हो रहा है तो महीना गुनगुने तेल से सिर की मसाज करवाएं इससे महिला को आराम महसूस होगा साथ ही बेहतर नींद लेने में भी मदद मिलेगी।

क्या सिर दर्द से बचाव के लिए महिला कोई दवाई ले सकती है?

जी नहीं, प्रेगनेंसी के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवाई लेना गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को गलती से भी किसी भी दर्द की दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

सिर दर्द की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

यदि प्रेग्नेंट महिला को सिर दर्द के साथ चक्कर, उल्टी, बुखार, सूजन, असहनीय सिर दर्द जैसी समस्या हो रही होती है। तो महिला को बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए और परामर्श लेना चाहिए। ताकि महिला को जल्द से जल्द इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यह है प्रेगनेंसी में सिर दर्द की समस्या से जुडी जानकारी, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि सही जानकारी होने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली मुश्किलों को कम करने और स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Headache problem during pregnancy

प्रेगनेंसी के 1 से 3 महीने तक क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि अब गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर करता है। ऐसे में महिला के लिए बहुत जरुरी होता है की महिला अपन अच्छे से ध्यान रखें और किसी भी तरह की लापरवाही न करें जिससे माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। वैसे तो प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

लेकिन माना जाता है की प्रेगनेंसी की शुरुआती तीन महीने सबसे अहम होते हैं क्योंकि इस दौरान शिशु के अंगों की आकृतियां बन रही होती है। यह तीन महीने महिला के लिए नाजुक होने के साथ परेशानियों से भरे हो सकते हैं। ऐसे में यदि महिला थोड़ी भी लापरवाही करती है तो इसकी वजह से गर्भपात जैसी समस्या होने का खतरा रहता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

डॉक्टर से मिलें

सबसे पहले तो महिला का प्रेगनेंसी टेस्ट यदि घर पर कन्फर्म हो गया है तो उसके बाद महिला को डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताये गए सभी टेस्ट सभी जांच महिला को करवा लेनी चाहिए।

अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करें

गर्भावस्था की पहली में बॉडी में हार्मोनल बदलाव तेजी से होने के कारण महिला को शारीरिक परेशानियां अधिक हो सकती है। ऐसे में महिला को को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की उन परेशानियों से निजात पाने के लिए महिला अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन नहीं करें। क्योंकि इससे शिशु की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

कैफीन का ज्यादा सेवन नहीं करें

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में महिला चाय, कॉफ़ी व् अन्य कैफीन युक्त चीजों का जरुरत से ज्यादा सेवन नहीं करें। क्योंकि कैफीन का अधिक सेवन शिशु के विकास में रूकावट पैदा कर सकता है। साथ ही महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां अधिक होने का खतरा होता है।

व्यायाम नहीं करें

यदि व्यायाम आपकी दिनचर्या का अहम हिस्सा था टी प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में जरुरत से ज्यादा व्यायाम नहीं करें। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान यदि जरुरत से ज्यादा व्यायाम किया जाये तो इसकी वजह से गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है साथ ही गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

यात्रा नहीं करें

गर्भावस्था के पहले तीन महीने में महिला को यात्रा बिल्कुल नहीं करनी चाहिए क्योंकि यात्रा के दौरान झटका आदि लगने के कारण ब्लीडिंग होने का खतरा रहता है। जिससे गर्भपात होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

भारी सामान नहीं उठाएं

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को भारी सामान नहीं उठाना चाहिए। क्योंकि भारी सामान उठाने के कारण पेट पर जोर पड़ता है जिसकी वजह से ब्लीडिंग होने का खतरा रहता है और महिला का गर्भपात होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

सम्बन्ध नहीं बनाएं

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जितना हो सके गर्भवती महिला को सम्बन्ध बनाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इस दौरान सम्बन्ध बनाने में की गई थोड़ी सी लापरवाही का नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

ऐसी चीजों से परहेज करें जो गर्भपात करवा सकती है

गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिला को अपने खान पान का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और इस दौरान ऐसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जिनसे गर्भपात का खतरा हो जैसे की मछली, गर्म तासीर की चीजें, करेला, अनानास, कच्चा पपीता आदि।

नशीले पदार्थों से दूरी

प्रेग्नेंट महिला को नशीले पदार्थ जैसे की शराब, धूम्रपान, तम्बाकू व् अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि नशीले पदार्थों का सेवन करने के कारण भी गर्भपात होने का खतरा रहता है।

गर्म पानी से नहीं नहाएं

गर्भवती महिला को इस दौरान गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए क्योंकि गर्म पानी से नहाने पर शरीर का तापमान बदल सकता है। जिसके कारण गर्भ गिरने का डर होता है।

शरीर में तरल पदार्थों की कमी नहीं होने दें

गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिला शरीर में एनर्जी कम महसूस कर सकती है ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला शरीर में तरल पदार्थों की कमी नहीं होने दें। क्योंकि शरीर में यदि तरल पदार्थों की कमी नहीं होती है तो इससे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

भरपूर नींद लें

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए ताकि महिला को फ्रैश व् एक्टिव रहने में मदद मिल सके। इसके अलावा भरपूर नींद लेने से महिला को तनाव जैसी समस्या से राहत पाने में भी मदद मिलती है।

ज्यादा झुककर काम नहीं करें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में ज्यादा झुककर काम करने से भी बचना चाहिए क्योंकि ऐसा कर पर भी पेट पर दबाव पड़ता है जिसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है।

सीढ़ियां नहीं चढ़ें

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में ज्यादा तेजी से सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए। क्योंकि ज्यादा तेजी से चलने, भागने, सीढ़ियां चढ़ने के कारण भी महिला को ब्लीडिंग हो सकती है जिसके कारण गर्भपात होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

घर का ज्यादा काम नहीं करें

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में घर के काम करने में भी सावधानी बरतें जैसे की ऐसा कोई काम नहीं नहीं करें जिससे पेट पर दबाव पड़े, ऐसा कोई काम नहीं करें जिसमे लम्बे समय तक खड़े रहना पड़े या झुककर काम करना पड़े, आदि। क्योंकि ऐसे सब काम करने के कारण भी महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ सावधानियां जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में बरतनी चाहिए ताकि शिशु के शुरूआती विकास में मदद मिल सके। साथ ही गर्भपात जैसी समस्या से महिला को बचे रहने में मदद मिल सके।

Precautions for first trimester of Pregnancy