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प्रेगनेंसी के दौरान दूध ज्यादा फायदेमंद होता है या दही?

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही गर्भवती महिला को सभी बेहतरीन खान पान की सलाह देते हैं। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला द्वारा ली गई डाइट के फायदे केवल महिला को ही नहीं मिलते हैं बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। ऐसे में महिला को हरी सब्जियां, दालें व् फलियां, अंडा व् नॉन वेज, साबुत अनाज, फल व् उनका रस, डेयरी प्रोडक्ट्स आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

हर एक खाद्य पदार्थ में अलग अलग पोषक तत्व मौजूद होते हैं ऐसे में महिला को उन सभी खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे की सभी जरूरतें पूरी हो सकें। साथ ही महिला को हमेशा एक ही तरह की डाइट नहीं लेनी चाहिए बल्कि अपनी डाइट में बदलाव करते रहना चाहिए ताकि सभी पोषक तत्वों की मात्रा को शरीर में सही रहने में मदद मिल सके। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान दो डेयरी प्रोडक्ट्स दूध और दही के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं की आखिर दूध या दही कौन ज्यादा फायदेमंद होता है।

गर्भावस्था में दूध या दही या है ज्यादा फायदेमंद

पहली बात दूध व् दही दोनों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान किया जा सकता है, दूसरी बात दूध की मदद से ही दही को तैयार किया जाता है। ऐसे में जो पोषक तत्व दूध में होते हैं वो दही में भी मौजूद होते हैं साथ ही दूध व् दही में अलग अलग और भी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जैसे की दूध कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है और दही प्रोटीन से भरपूर होती है और कैल्शियम और प्रोटीन दोनों ही माँ व् बच्चे के लिए जरुरी होते हैं। इसके अलावा दूध में विटामिन डी होता है तो दही में फाइबर मौजूद होता है और दोनों का ही प्रेग्नेंट महिला के शरीर में सही मात्रा में होना जरुरी होता है।

ऐसे में यह कह पाना की दूध ज्यादा फायदेमंद है या दही थोड़ा मुश्किल होगा। बल्कि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान दूध व् दही दोनों का सेवन करना चाहिए ताकि दोनों में मौजूद पोषक तत्व माँ व् बच्चे को मिल सकें। क्योंकि दूध व् दही दोनों में मौजूद पोषक तत्व माँ और बच्चे के लिए जरुरी होते हैं। और यदि महिला सिमित मात्रा में, सही समय पर इन खाद्य पदार्थों का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को सही मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में दूध का सेवन करने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला दूध का सेवन करती है तो इससे एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे माँ व् बच्चे को मिलते हैं। जैसे की:

कैल्शियम: दूध कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में मदद करता है।

प्रोटीन: दूध में प्रोटीन भी मौजूद होता है जो कोशिकाओं के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में दूध का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रोटीन मिलता है जिससे गर्भवती महिला की मांसपेशियों को पोषण मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर व् मस्तिष्क की कोशिकाओं का विकास अच्छे से होता है।

विटामिन डी: दूध में विटामिन डी भी मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु और गर्भवती महिला के लिए एक जरुरी पोषक तत्व होता है। इसकी कमी के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी आने का खतरा भी होता है।

हाइड्रेट रखता है: दूध का सेवन करने से शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला हाइड्रेट रहती है।

ऊर्जा: दूध का सेवन करने से गर्भवती महिला को बहुत से पोषक तत्व मिलते हैं जिससे गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में दही का सेवन करने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला दही का सेवन करती है तो दही का सेवन करना भी माँ व् बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में दही खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

पाचन में करती है सुधार: दही में गुड़ बैक्टेरिया मौजूद होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला के पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद करते हैं। जिससे महिला को पेट सम्बंधित समस्याओं से बचे रहने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी मजबूत होती है: दही का सेवन करने से महिला को प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला व् शिशु को संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल: प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या से भी परेशान रहती है लेकिन दही का सेवन करने से महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि दही का सेवन करने से ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

हड्डियों के लिए है फायदेमंद: दही में कैल्शियम भी मौजूद होता है जो माँ व् बच्चे की हड्डियों को पोषण पहुंचाने में मदद करता है।

तनाव: गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को तनाव की समस्या होती है उनके लिए भी दही का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

वजन नियंत्रित रहता है: दही का सेवन करने से गर्भवती महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है जो की प्रेगनेंसी के दौरान बहुत जरुरी होता है।

दूध व् दही का सेवन करते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • कच्चे दूध का सेवन नहीं करें।
  • ज्यादा गर्म व् ठन्डे दूध के सेवन से परहेज रखें।
  • रात के समय दही का सेवन नहीं करें।
  • दही का सेवन करने से यदि किसी तरह की दिक्कत हो तो दही का सेवन करने से बचें।
  • दूध व् दही का सेवन एक साथ नहीं करें।
  • सर्दी खांसी जुखाम आदि की समस्या हो तो भी दही का सेवन करने से परहेज करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान दूध व् दही के सेवन से जुडी जानकारी, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को दूध व् दही दोनों का ही सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि दोनों में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला व् शिशु को मिल सकें।

प्रेग्नेंट महिला डॉक्टर से जरूर पूछें यह 10 सवाल?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के मन में बहुत से सवाल उठते हैं खासकर जब महिला पहली बार प्रेग्नेंट होती है तो महिला के मन में कई सवाल आते हैं। साथ ही इन सवालों के साथ महिला के मन में डर भी होता है क्योंकि महिला के पास प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी नहीं होती है।प्रेगनेंसी के दौरान महिला के मन में चल रहे सवाल महिला के शरीर में आने बदलाव से जुड़े हो सकते हैं, गर्भ में शिशु के विकास से जुड़े हो सकते हैं, प्रसव से जुड़े हो सकते हैं, प्रेगनेंसी में क्या करें क्या नहीं, आदि हो सकते हैं।

ऐसे में महिला को मन में चल रहे इन सवालों को लेकर परेशान नहीं होना चाहिए। बल्कि महिला को अपनी डॉक्टर से इन सवालों को लेकर बात करनी चाहिए। इसके अलावा पूरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी सवाल पूछना हो तो महिला को अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान आपका सबसे बड़ा साथ आपका डॉक्टर ही होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर से कौन से 10 सवाल पूछने चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में क्या करें क्या नहीं

गर्भावस्था के दौरान सेफ रहने के लिए महिला को प्रेगनेंसी से जुडी सम्पूर्ण जानकारी होनी बहुत जरुरी होती है ऐसे में गर्भवती महिला को डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए। की महिला प्रेगनेंसी के दौरान क्या क्या कर सकती है और क्या क्या नहीं कर सकती है। इसके अलावा क्या करना प्रेगनेंसी के दौरान सेफ होता है और क्या नहीं इससे जुडी जानकारी भी महिला को डॉक्टर से लेनी चाहिए। इसमें घर के काम, ऑफिस के काम, यात्रा, आदि सभी को लेकर महिला को डॉक्टर से पूछना चाहिए।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना नोर्मल है

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग या स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है ऐसे में क्या यह नोर्मल है या नहीं, कितनी और कब स्पॉटिंग होना नोर्मल है इससे जुडी जानकारी भी महिला को डॉक्टर से जरूर लेनी चाहिए।

गर्भावस्था में कौन सा टीकाकरण करवाएं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को टीकाकरण करवाना पड़ता है, टेस्ट करवाने पड़ते हैं, अल्ट्रासॉउन्ड करवाना होता है, दवाइयों का सेवन करना होता है। ऐसे में महिला को कौन सा टीकाकरण करवाना है, कौन सा टेस्ट करवाना है, अल्ट्रासॉउन्ड कब और कितने करवाने हैं, कौन कौन से विटामिन्स लेने है इससे जुड़े जो भी सवाल महिला के मन चल रहे हो उन सभी की जानकारी महिला को डॉक्टर से जरूर लेनी चाहिए। इसके अलावा आपके स्वास्थ्य से जुड़े यदि अन्य और कोई जांच या टीकाकरण की जरुरत होती है तो उसके बारे में भी डॉक्टर से जरूर पूछें।

गर्भावस्था के दौरान वजन कितना बढ़ता है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ता है यह तो सभी जानते हैं लेकिन महिला का वजन कितना बढ़ना सही है और कितना वजन बढ़ना महिला के लिए खतरा हो सकता है इससे जुडी जानकारी भी महिला को डॉक्टर से जरूर लेनी चाहिए। साथ ही यदि आपके गर्भ में यदि जुड़वाँ या इससे ज्यादा बच्चे हैं तो उसके बारे में भी डॉक्टर से पूछना चाहिए।

क्या प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज कर सकते हैं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला व्यायाम कर सकती है या नहीं इस बारे में भी महिला को डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए। इसके अलावा कौन सा व्यायाम सेफ हैं और कौन सा नहीं इसकी भी सम्पूर्ण जानकारी महिला को डॉक्टर से जरूर लेनी चाहिए।

यदि कोई बीमारी है तो उसकी दवाई प्रेगनेंसी में ले सकते हैं

यदि प्रेग्नेंट महिला को कोई बीमारी है तो महिला को उस बिमारी की दवाइयों का सेवन करना चाहिए या नहीं करना चाहिए। इसके बारे में भी महिला को डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए। इसके अलावा यदि कोई समस्या हो तो महिला कौन सी दवाइयां ले सकती है और कौन सी दवाइयां नहीं ले सकती है इसके बारे में भी महिला को डॉक्टर से पूछना चाहिए।

डाइट के बारे में पूछें

प्रेग्नेंट महिला के फिट रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और प्रेगनेंसी में सही डाइट क्या होनी चाहिए किन किन चीजों का सेवन करना चाहिए और किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके बारे में महिला को एक बार डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए। साथ ही कब और कितनी मात्रा में चीजों का सेवन करना है उसके बारे में भी आप डॉक्टर से जरूर पूछें।

सम्बन्ध बनाने के बारे में पूछें

प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने को लेकर अधिकतर कपल अलग अलग राय रखते हैं जैसे की कुछ सबंध बनाने को सेफ मानते हैं तो कुछ प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाना सेफ नहीं मानते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने की सही जानकारी के लिए आपको डॉक्टर से जरूर सवाल करना चाहिए की आखिर प्रेगनेंसी में कब सम्बन्ध बनाना चाहिए और कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

नोर्मल डिलीवरी के लिए क्या करें

अधिकतर गर्भवती महिलाएं चाहती है की वो सामान्य प्रसव से बच्चे को जन्म दें। ऐसे में महिला को डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए की महिला प्रेगनेंसी की शुरुआत से डिलीवरी तक कौन से टिप्स फॉलो करे। जिससे महिला को नोर्मल डिलीवरी होने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में कब तक काम कर सकते हैं

गर्भवती महिला को डॉक्टर से इस बारे में पूछना चाहिए की वो कौन से काम कर सकती है और कौन से काम नहीं कर सकती है। साथ ही कौन से महीने तक महिला को काम करना चाहिए खासकर ऑफिस में काम करने वाली महिलाओं को कब तक काम पर जाना चाहिए। इसके अलावा घर के कौन से काम महिला कर सकती है और कौन से नहीं कर सकती है इससे जुडी जानकारी महिला को डॉक्टर से जरूर लेनी चाहिए।

तो यह हैं वो दस सवाल जो गर्भवती महिला को अपनी डॉक्टर से जरूर पूछने चाहिए इसके अलावा महिला को बिना घबराएं जो भी मन में आये उसे एक बार डॉक्टर से जरूर शेयर करें। क्योंकि ऐसा करने से जितना महिला को प्रेगनेंसी समझने में आसानी होगी उतना ही महिला प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बच सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कोई भी परेशानी हो तो महिला को तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए ताकि माँ व् बच्चे को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

Pregnant women must ask these 10 questions to the doctor

प्रेगनेंसी में बुखार आये तो क्या करना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही जिस तरह आपको कोई भी दिक्कत होने पर आप तुरंत दवाई का सेवन कर लेते हैं वैसा आपको प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल नहीं करना होता है। ऐसे में महिलाएं बहुत ज्यादा परेशान हो सकती है लेकिन ऐसा करने से माँ व् बच्चे को फायदा ही मिलता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं की इम्युनिटी यानी प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर पड़ जाती है।

जिसकी वजह से महिलाओं को इन्फेक्शन, बुखार, फ्लू आदि होने का खतरा भी अधिक होता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने मदद मिल सके। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को बुखार आ जाता है तो महिला को क्या करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में महिला को बुखार होने के कारण

  • गर्भवती महिला की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण महिला को बुखार हो सकता है।
  • यदि महिला किसी संक्रमण से ग्रसित हो जाती है तो महिला को बुखार होने का खतरा होता है जैसे की जुखाम, खांसी होने पर महिला को बुखार भी हो सकता है।
  • जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है उन महिलाओं को थकान व् कमजोरी की समस्या हो जाती है जिसकी वजह से महिला को बुखार भी हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर के तापमान में बदलाव आना स्वाभाविक होता है ऐसे में महिला के शरीर का तापमान बढ़ने के कारण महिला को बुखार महसूस हो सकता है।
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण महिला को दिक्कत हो सकती है।
  • जिन महिलाओं को यूरिन इन्फेक्शन होता है उन महिलाओं को भी बुखार जैसा महसूस हो सकता है।

गर्भावस्था में बुखार से बचे रहने के लिए क्या करें?

गर्भवती महिला को बुखार से बचने के लिए ऐसे तरीके इस्तेमाल करने चाहिए जिससे महिला ठीक भी हो जाए और माँ व् बच्चा स्वस्थ भी रहें। जैसे की:

खान पान का ध्यान रखें

गर्भवती महिला अपनी डाइट में विटामिन्स मिनरल्स से भरपूर चीजों को शामिल करे जिससे शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिल सके। इससे महिला के शरीर में पोषक तत्व सही रहेंगे जिससे महिला एक्टिव और ऊर्जा से भरपूर महसूस करेगी और महिला को बुखार से निजात पाने में मदद मिलेगी।

संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखें

गर्भवती महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की वो किसी भी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में नहीं आये। यदि कोई घर में भी संक्रमित है तो उससे भी दूरी रखें और मास्क का इस्तेमाल करें ताकि आपको कोई दिक्कत नहीं हो।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

घर में, घर के आस पास, अपने खान पान में, अपने हाथो व् अपने शरीर की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखें। क्योंकि जितना अच्छे से महिला साफ़ सफाई का ध्यान रखती है उतना ही महिला को बुखार से निजात पाने व् प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

ठन्डे पानी की पट्टियां रखें

यदि महिला को बुखार आ जाता है तो महिला को अपने माथे पर ठन्डे पानी की पट्टियां रखनी चाहिए ऐसा करने से बुखार से जल्द से जल्द निजात पाने में मदद मिलती है।

टीकाकरण करवाएं

गर्भावस्था के दौरान महिला को जो भी इंजेक्शन लगाए जाते हैं महिला को उन्हें समय से लगवाना चाहिए ताकि महिला की इम्युनिटी को बूस्ट रहने में मदद मिल सकें।

पानी का भरपूर सेवन करें

गर्भावस्था के दौरान पानी का भरपूर सेवन करें इससे शरीर के तापमान को सही रहने मदद मिलती है जिससे महिला को बुखार जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

भरपूर आराम करें

गर्भवती महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं ऐसे में महिला को अपनी सेहत व् स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए दिन भर में भरपूर आराम करना चाहिए। क्योंकि आराम करने से शरीर में एनर्जी आती है और एनर्जी से आपको बुखार जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है।

डॉक्टर से मिलें

गर्भावस्था के दौरान महिला को यदि बुखार होता है तो महिला को घर में ही किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में महिला को सबसे पहले डॉक्टर से मिलना चाहिए और डॉक्टर जो कहे आपको वो करना चाहिए ताकि आपको बुखार से जल्द से जल्द निजात पाने में मदद मिल सके।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बुखार होने पर क्या करना चाहिए उससे जुडी जानकारी, ऐसे में आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान यदि ऐसी कोई दिक्कत होती है तो आपको भी जल्द से जल्द उस समस्या का उपचार करना चाहिए ताकि आपको या आपके बच्चे को कोई भी दिक्कत नहीं हो।

Remedies to cure fever during Pregnancy

Fever during pregnancy and impact on fetus

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बालों को स्ट्रेट करने के लिए क्या-क्या किया जाता है?

महिला हो या पुरुष दोनों ही चाहते हैं की उनके बाल हमेशा खूबसूरत व् चमकदार रहें। क्योंकि खूबसूरत बाल भी आपकी सुंदरता में चार चाँद लगाने में मदद करते हैं। और आज कल आपने देखा होगा की स्ट्रेट बाल कितने ज्यादा चल रहे हैं केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि लड़के भी बाल स्ट्रेट करवाने में पीछे नहीं है। और इसके लिए वो न केवल बहुत ज्यादा पैसे खर्च करते हैं बल्कि बालों पर बहुत से केमिकल्स का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं की केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बालों के लिए अधिक करने की वजह से बालों के झड़ने, टूटने, रुखा होने, जैसी समस्या अधिक होने लगती है। इसके अलावा उसके बाद आपके बाल पहले की तरह प्राकृतिक रूप से अच्छे भी नहीं हो पाते हैं। तो आइये अजा इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स या घरेलू नुस्खे बताने जा रहे हैं जिन्हे ट्राई करने से बालों को सीधा यानी स्ट्रेट होने में मदद मिलती है।

अंडा और ओलिव आयल

एक बाउल में एक अंडा तोड़कर उसका सफ़ेद हिस्सा निकाल लें और उसमे दो से तीन चम्मच ओलिव आयल मिलाएं। आपके बाल यदि ज्यादा लम्बे है तो आप दो अंडे और थोड़ा ज्यादा आयल ले सकते हैं। उसके बाद आप इस मिक्सचर को अच्छे से मिक्स करें और अपने बालों में लगाएं और तोड़ी देर के लिए छोड़ दें उसके बाद बालों को धो लें। ध्यान रखें की बालों को सीधा करके ही साफ़ करें ऐसा करने से आपको बालों में जरूर बदलाव नज़र आएगा साथ ही बालों में चमक भी आएगी।

शहद और स्ट्रॉबेरी

इस उपाय के लिए आपको दो चम्मच शहद और तीन से चार चम्मच दूध में डालकर अच्छे से मिक्स करना है और उसके बाद आपको इसमें तीन चार स्ट्रॉबेरी को पीसकर अच्छे से मिक्स करना है। ऐसा करने के बाद आप इस मिश्रण को मास्क की तरह बालों में लगाएं और बालों को तौलिये से रैप कर लें। उसके बाद दो से तीन घंटे होने पर बालों को अच्छे से धो लें, इससे बालों को सॉफ्ट होने में मदद मिलेगी और बाल सीधे भी होंगे।

गर्म तेल का करें इस्तेमाल

आप बालों में जो भी तेल लगाते हैं नारियल तेल, सरसों तेल, बादाम तेल, जैतून का तेल आदि उसी का इस्तेमाल करके आप अपने बालों को सीधा कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए आप तेल को गुनगुना से थोड़ा ज्यादा गर्म करें उसके बाद अपने हाथों से बालों को सीधा करते हुए इसे लगाएं। ऐसा करने के बाद थोड़ी देर के लिए बालों को खुला ही रहने दें, उसके बाद शैम्पू का इस्तेमाल करके बालों को धो लें, इस उपाय को हफ्ते में तीन से चार बार कुछ समय तक करें इससे आपके बालों की ऐंठन खत्म होगी जिससे बालों को खूबसूरत व् स्ट्रेट रहने में मदद मिलेगी।

एलोवेरा

किसी भी तेल (नारियल, बादाम, जैतून, आदि) के साथ एलोवेरा जैल को अच्छे से मिक्स कर लें और उसके बाद इस मिश्रण को बालों में मास्क की तरह लगाएं। ऐसा करने के बाद इसे दो से तीन घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद बालों को शैम्पू से धो लें। ऐसा करने के बाद भी आपको बालों को सीधा करने में मदद मिलती है।

कैस्टर आयल

कैस्टर आयल का इस्तेमाल करने से भी बालों को सीधा करने में मदद मिलती है इसके लिए आप कैस्टर आयल को बालों में अच्छे से लगाएं। उसके बाद गर्म पानी में एक तौलिया भिगोएं और उसे अच्छे से निचोड़ लें। ऐसा करने के बाद आप इसे बालों में बांधें। और आधे से एक घंटे तक इसे ऐसे ही छोड़ दें इससे बालों को स्टीम मिलेगी, उसके बाद बालों को शैम्पू की मदद से धो लें। ऐसा करने से भी बालों को सीधा करने में मदद मिलती है।

चावल का आटा और मुल्तानी मिट्टी

एक चम्मच चावल का आटा, एक से डेढ चम्मच मुल्तानी मिट्टी का पाउडर, एक अंडे का सफ़ेद हिस्सा और थोड़ा सा पानी डालकर अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट बनाएं। अब इस पेस्ट को बालों की जड़ से नीचे तक अच्छे से लगाएं। उसके बाद बालों में मोटे दांतों वाली कंघी से कंघी कर लें। उसके बाद एक घंटे के लिए इसे ऐसे ही रहने दें और उसके बाद बालों को धो लें। बालों को धोने के बाद एक स्प्रे बोतल में दूध डालकर स्प्रे करें ऐसा करने के बाद बालों को दस से पंद्रह मिनट बाद शैम्पू से धो लें। हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को कुछ दिनों तक करें ऐसा करने से भी आपको बालों को सीधा करने में मदद मिलती है।

निम्बू का रस और नारियल का दूध

एक कटोरी में बराबर मात्रा में नारियल का दूध और निम्बू का रस मिलाकर इतना पेस्ट बनाएं की वो आपके पूरे बालों में अच्छे से लग जाएँ। बालों में इस पेस्ट को मास्क की तरह लगाने के बाद थोड़ी देर के लिए बालों को ऐसे ही छोड़ दें, फिर बालों को स्टीम दें और उसके दस से पंद्रह मिनट बाद बालों को शैम्पू से धोकर सूखा लें, आपको पहली ही बार में इसका असर दिखाई देगा।

दूध और पानी

दूध और पानी को बराबर मात्रा में मिलाएं और उसके बाद इसे स्प्रे बोतल में डालकर अच्छे से बालों में लगाएं ऐसा करने के बाद बालों को एक से डेढ घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद आप बालों को शैम्पू से धो लें ऐसा बालों को धोने से पहले हमेशा करें इससे आपके बालों को हमेशा सीधे रहने में मदद मिलेगी।

धनिया

धनिये को अच्छे से पीसकर उसमे थोड़ा पानी मिलाएं और उसे छानकर उसका रस निकाल लें। ऐसा करने के बाद उस रस को बालों में लगाएं और बालों को आधे घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें। उसके बाद बालों को शैम्पू का इस्तेमाल करके धो दें। ऐसा करने से आपके बालों को सीधा रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से बालों को सीधा करने में मदद मिलती है साथ ही आपके बालों को इन तरीकों से कोई नुकसान भी नहीं पहुँचता है बल्कि पोषण ही मिलता है। तो यदि आप घर में बालों को स्ट्रेट करना चाहते हैं तो आप भी इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं।

Home remedies for hair straightening

आँखों के नीचे या ऊपर सफ़ेद दाग हो तो यह उपाय करें

कई लोगो के आँखों के नीचे या ऊपर की तरफ सफ़ेद दाग हो जाते हैं जो दिखने में काफी भद्दे लगते हैं। इन सफ़ेद दाग के होने का कारण शरीर में कोलेस्ट्रोल लेवल का बढ़ना होता है। साथ ही कई बार यह मस्से का रूप भी ले लेती है जो दूर से सफ़ेद दाग जैसे ही दिखाई देते हैं।

इन दाग का उपचार वैसे तो शरीर में कोलेस्ट्रोल लेवल को बैलेंस करके ही किया जाता है। लेकिन साथ ही यदि आप कुछ घरेलू नुस्खों को इन दागों के लिए ट्राई करते हैं तो आपको इन दागों से निजात पाने में मदद मिल सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की आँखों के नीचे या ऊपर होने वाले सफ़ेद दाग की समस्या से आप कैसे निजात पा सकते हैं।

मेथी बीज

रातभर के लिए दो चम्मच मेथी के बीजों को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। उसके बाद सुबह उठकर इस पानी को छानकर इसका सेवन करें। साथ ही मेथी के बीजों को पीसकर उन दागों पर लगाएं और थोड़ी देर के बाद उन्हें साफ़ कर लें। ऐसा करने से आपको दाग की समस्या से निजात मिलने के साथ मेथी का पानी पीने से कोलेस्ट्रोल लेवल को संतुलित करने में भी मदद मिलती है।

कच्चा दूध

रोजाना दिन में दो तीन बार कच्चे दूध में रुई को डुबोएं उसके बाद रुई की मदद से दूध को सफ़ेद दाग पर लगाएं। ऐसा करने से आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

केले का छिलका

केले के छिलके के अंदरूनी हिस्से से रोजाना उन दाग पर पांच से सात मिनट तक आराम से मसाज करें। और उसके थोड़ी देर बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। ऐसा करने से आपको सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

दही

लैटिंड एसिड और ब्लीचिंग एजेंट के गुणों से भरपूर दही के साथ निम्बू का रस मिलाएं और उसके बाद इस मिश्रण को अपनी आँखों के आस पास होने वाले सफ़ेद दाग पर लगाएं। उसके बाद इसे थोड़ी देर के लिए इसे ऐसे ही को दें फिर साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो लें। ऐसा करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

सेब का सिरका

सेब के सिरके में थोड़ा पानी मिलाकर आँखों के आस पास होने वाले सफ़ेद दागों पर लगाएं और थोड़ी देर बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। कुछ दिनों तक ऐसा रोजाना करें ऐसा करने से आपको अपनी आँखों के आस पास होने वाले सफ़ेद निशानों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

लहसुन

लहसुन का इस्तेमाल करने से भी आँखों के आस पास होने वाले सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप लहसुन की तीन चार कलियों को पीसकर उसका पेस्ट बनाएं। उसके बाद इस पेस्ट को अपनी आँख के आस पास लगाएं फिर पंद्रह से बीस मिनट बाद आँखों के आस पास के हिस्से को अच्छे से पानी से साफ़ कर लें ऐसा एक हफ्ता करें इससे आपको सफ़ेद दाग के साथ मस्सों की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलेगी।

प्याज़ का रस

सबसे पहले एक चम्मच प्याज़ के रस में थोड़ा नमक मिलाएं और उसे रातभर के लिए ढक कर रख दें। उसके बाद सुबह उठकर इस रस को अपनी आँख के आस पास लगाएं। फिर दस से पंद्रह मिनट इसे छोड़ने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके अपनी आँखों को धो लें। ऐसा एक हफ्ते तक लगातार करें आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा।

अरंडी का तेल

थोड़ा सा अरंडी का तेल लें उसके बाद रुई की मदद से इस तेल को अपनी आँख के आस पास लगाएं। फिर दस से पंद्रह मिनट तक इसे छोड़ने के बाद अपनी आँखों को गुनगुने पानी से धो लें। इस उपाय को कुछ दिनों तक नियमित करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

तो यह हैं कुछ उपाय जिन्हे कुछ दिनों तक नियमित ट्राई करने से आपको आँखों के ऊपर या नीचे होने वाले सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आपको समय समय पर अपने कोलेस्ट्रोल लेवल की जाँच करवाते रहना चाहिए। और डॉक्टर की दवाइयों का सेवन भी समय से करना चाहिए ताकि आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें।

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अगर आपका पति शराब पीता है तो आपके होने वाले शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है?

गर्भावस्था के दौरान महिला को अच्छी अच्छी चीजों के बारे में सोचने की सलाह दी जाती है, पॉजिटिव रहने की सलाह दी जाती है, नेगेटिव लोगो से दूर रहने की सलाह दी जाती है, अच्छे माहौल में रहने की सलाह दी जाती है, आदि। और यह सलाह इसीलिए दी जाती है क्योंकि इससे गर्भवती महिला को मानसिक रूप से फिट रहने में मदद मिलती है साथ ही गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी यह टिप्स अहम योगदान रखते हैं।

इसके अलावा महिला को शराब व् धूम्रपान के सेवन से परहेज व् उन उस माहौल से भी दूर रहने की सलाह दी जाती है जहां कोई इनका सेवन करता है। लेकिन यदि आपका पति ही शराब पीता है तो उससे दूर कैसे रहा जा सकता है। परन्तु आप अपने और अपने बच्चे के बेहतर विकास के लिए चाहे तो आपकी प्रेगनेंसी के दौरान उन्हें न पीने की सलाह दे सकती है।

क्योंकि शराब पीने के बाद कई बार पुरुष अपने आपे में नहीं रहता है और न चाह कर भी आपका माहौल खराब हो सकता है। जिसका असर महिला व् उसके होने वाले बच्चे को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। क्या आपके भी पति या आपके घर में कोई ऐसा करता है? यदि हाँ तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको यही बताने जा रहे हैं की अगर आपका पति शराब पीता है तो आपके होने वाले शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है?

मानसिक रूप से महिला हो सकती है परेशान

गर्भावस्था के दौरान यदि गर्भवती महिला का पति शराब पीकर आता है तो उस दौरान महिला के मन में यही चल रहा होता है। की उसका पति शराब पीकर आया है कहीं कोई लड़ाई झगड़ा या कोई बात न हो जाये। और इन्ही बातों के बारे में सोच सोच कर महिला तनाव यानी डिप्रेशन में रहने लगती है। जिसके कारण महिला को मानसिक के साथ शारीरिक परेशानी होने का खतरा भी रहता है। और महिला को होने वाली दिक्कत की वजह से शिशु का विकास भी बुरी तरह प्रभावित होता है।

ज्यादा ऊँची आवाज़ के कारण शिशु पर पड़ता है असर

शराब पीने के बाद आदमी अपने होश में नहीं होता है जिसके कारण वो ऊँची आवाज़ या चिल्ला चिल्ला कर सबसे बात करता है। और गर्भ ने शिशु की सुनने की क्षमता लगातार बढ़ती रहती है। ऐसे में यदि शिशु को ऊँची ऊँची आवाज़ सुनाई देती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु चौक जाता है डर जाता है जिसकी वजह से शिशु के दिमागी विकास पर असर पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

पति के गुस्से का शिशु पर पड़ता है असर

शराब पीने के बाद कई लोगो को छोटी छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भी मूड स्विंग्स की समस्या होती है जैसे की महिला छोटी छोटी बातों पर नाराज़ हो जाती है, गुस्सा करती है, आदि। ऐसे में यदि दोनों ही गुस्सा करते हैं तो इसके कारण गर्भ में शिशु के विकास में दिक्कत आने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के आस पास का माहौल अच्छा होना, और महिला का खुश रहना दोनों बच्चे के लिए जरुरी होता है। ऐसे में यदि दोनों ही बातें नहीं होगी तो गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है।

लड़ाई झगडे के कारण पड़ता है शिशु की ग्रोथ पर असर

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला का पति शराब पीता है और हमेशा उनके बीच में लड़ाई झगडे होते रहते हैं। तो इसके कारण महिला मानसिक रूप से परेशान रहती है जिसकी वजह से महिला को भूख में कमी, अपना ध्यान अच्छे से न रखने जैसी दिक्कतें होने लगती है। और ऐसा होने के कारण महिला की सेहत व् दिमाग पर असर पड़ने के साथ शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आने का खतरा रहता है और शिशु की ग्रोथ में रुकावट आ सकती है।

मारपीट होने पर बढ़ सकती है दिक्कतें

शराब पीने के बाद यदि पति पत्नी के बीच कोई बात हो जाये और बात इतनी बढ़ जाये की मार पीट तक बात पहुँच जाये। तो इसके कारण महिला को नुकसान पहुँच सकता है साथ गर्भ को चोट लगने का खतरा होता है जिसके कारण शिशु को गर्भ में दिक्कत हो सकती है।

शिशु के शारीरिक विकास में आ सकती है कमी

शराब पीने के बाद यदि कपल सम्बन्ध बनाता है तो शराब की गंध से उसके मौजूद हानिकारक तत्व शिशु महिला के सांस लेने पर पहुँचने का खतरा रहता है। ऐसे में शिशु के शारीरिक व् दिमागी विकास में कमी आने का खतरा होता है।

गर्भ को नुकसान पहुँचने का होता है खतरा

शराब पीने के बाद यदि कपल सम्बन्ध बनाता है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु को नुकसान पहुँचने का खतरा और बढ़ता है। क्योंकि शराब पीने के बाद आदमी अपने होश में नहीं होता है जिसकी वजह से यदि सम्बन्ध बनाते समय यदि पुरुष तेजी करने लगे, पेट पर दबाव पड़ जाएँ, पुरुष नई नई डिमांड करने लगे तो इन सब के कारण गर्भ में शिशु को चोट लगने का खतरा होता है।

तो यह हैं कुछ दिक्कतें जो अगर आपका पति शराब पीता है तो आपके होने वाले शिशु को हो सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला या बच्चे को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो इसके लिए आपको अपने पति से बात करनी चाहिए। और गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो और घर में एक बेहतर माहौल रहे इसके लिए आपको उन्हें आपकी प्रेगनेंसी के दौरान न पीने या कभी कभी और वो कम मात्रा में पीने की सलाह देनी चाहिए। और कभी कभी पीने पर भी उनको किन किन बातों का ध्यान रखना है उसके बारे में जरूर बात करें।

प्रेग्नेंट महिला के ऐसे सोने पर शिशु पर दबाव पड़ता है?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही बेहतरीन समय होता है ऐसे में इस बेहतरीन समय में महिला या शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो। इसके लिए जरुरी होता है की गर्भवती महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें। और इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खाने पीने का, सोने का सही तरीके से ध्यान रखने की, आदि की सलाह दी जाती है। क्योंकि जितना महिला के लिए भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त आहार लेना जरुरी होता है उतना ही महिला को बेहतर और सही तरीके से नींद लेना भी जरुरी होता है।

ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपनी नींद का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए साथ ही सोने की सही पोजीशन की जानकारी भी रखनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला गलत पोजीशन में सोती है तो इसकी वजह से गर्भवती महिला व् शिशु दोनों को दिक्कत हो सकती है। क्योंकि गलत पोजीशन में सोने की वजह से शिशु पर दबाव पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं गर्भवती महिला के किस पोजीशन में सोने से शिशु पर दबाव पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में किस पोजीशन में सोने से पड़ता है शिशु पर दबाव

गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान महिला का पेट बाहर की तरफ नहीं होता है जिसकी वजह से महिला किसी भी पोजीशन में सो सकती है। लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही में महिला का पेट बाहर की तरफ निकलने लगता है क्योंकि गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है। और ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला गलत पोजीशन में सोती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। तो आइये अब सोने की गलत पोजीशन कौन सी है उसके बारे में जानते हैं।

उल्टा होकर सोना

गर्भवती महिला यदि उल्टा होकर सोती है तो इसकी वजह से पेट पर दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है। और ऐसा होने के कारण गर्भ में शिशु को खतरा भी हो सकता है ऐसे में महिला को उल्टा होकर बिल्कुल भी नहीं सोना चाहिए।

एक ही जगह करवट लेकर सोना

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला एक ही और करवट लेकर सोती है खासकर दाईं और करवट लेकर सोती है तो इसकी वजह से भी शिशु तक ऑक्सीजन व् ब्लड ला फ्लो होने में रूकावट पैदा हो सकती है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है। ऐसे में महिला को यदि दाईं और करवट लेकर सोना भी है तो लम्बे समय तक एक ही और करवट लेकर न सोएं और थोड़ी थोड़ी देर बाद अपनी करवट बदलती रहें।

प्रेग्नेंट महिला के सोने के लिए सही पोजीशन कौन सी है?

गर्भावस्था के दौरान महिला के सोने की सबसे सही पोजीशन की यदि बात की जाए तो वो पोजीशन है महिला के बाईं और करवट लेकर सोना, क्योंकि बाईं और करवट लेकर सोने से गर्भवती महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है, गर्भ में शिशु तक सभी जरुरी चीजें पहुँचती है। ऐसे में महिला को जितना हो सके बाईं और करवट लेकर ही सोना चाहिए।

गर्भवती महिला के लिए दिन भर में कितना सोना सही होता है?

प्रेग्नेंट महिला को दिन भर में वैसे तो आठ से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए। इसके अलावा यदि महिला रात में आठ से नौ घंटे सोती है तो दिन के समय भी एक डेढ़ घंटा महिला को सोना चाहिए। ऐसा करने से महिला को दिनभर एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में बेहतर नींद लेने के लिए क्या करें?

  • महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए बल्कि खुश रहना चाहिए क्योंकि तनाव के कारण नींद में कमी आ सकती है।
  • सोने से पहले महिला एक गिलास गुनगुना दूध पीएं इससे भी बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।
  • रात को सोने से पहले हाथों पैरों की मसाज करें ऐसा करने से महिला को आराम पहुँचता है जिससे बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।
  • सोने से पहले और खाना खाने के बाद थोड़ी देर वाक जरूर करें ऐसा करने से भी बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।
  • यदि गर्भवती महिला को सोने में किसी भी तरह की दिक्कत होती है तो महिला को प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहिए इससे महिला को बेहतर और गहरी नींद लेने में फायदा मिलता है।
  • भूखे पेट नहीं सोएं क्योंकि खाली पेट सोने से नींद लेने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सोते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुड़े टिप्स, हर गर्भवती महिला को इन टिप्स की जानकारी जरूर होनी चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिल सके साथ ही गर्भ में शिशु को भी किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचें।

गर्भ में शिशु की धड़कन कैसे सुनें जानिए?

प्रेगनेंसी कन्फर्म होना महिला के लिए उसकी जिंदगी का वो खुशनुमा पल होता है जिसे लफ्जों में बयान कर पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। क्योंकि वो समय महिला के लिए ऐसा होता है जब वो एक दम से माँ बन जाती है और केवल उन्ही बातों के बारे में सोचने लगती है जो उसके बच्चे के लिए सही होता है। साथ ही प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद महिला के लिए अपने शिशु को महसूस करने का सबसे पहला समय वो होता है जब वो गर्भ में शिशु के दिल की धड़कन को सुनती है।

गर्भ में शिशु का दिल कब धड़कने लगता है?

माँ के पेट में शिशु का दिल छठे या सातवें हफ्ते में धड़कना शुरू कर देता है। और शिशु के दिक् का धड़कना इस बात का संकेत होता है की आपका शिशु गर्भ में सही है और उसका शुरूआती विकास शुरू हो गया है।

शिशु के दिल की धड़कन कब सुन सकते हैं?

महिला के लिए वह पल बहुत ही खास होता है जिस समय वो अपने बच्चे के दिल की धड़कन को सुनती है। और यह धड़कन आप अपने पहले अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन के दौरान सुन सकती है। और इस स्कैन के लिए डॉक्टर्स आपको छठे या सातवें हफ्ते में बुलाते हैं।

किस उपकरण की मदद से सुनाई देती है शिशु के दिल की धड़कन?

वैसे आमतौर पर डॉक्टर्स डॉप्लर की मदद से शिशु के दिल की धड़कन सुनाते हैं लेकिन शिशु के बढ़ते विकास के साथ आप जब भी डॉक्टर से शिशु के दिल की धड़कन को सुनने के लिए कहती हैं। तो वो स्टेथोस्कोप की मदद से भी आपको शिशु के दिल की धड़कन को सुना देते हैं।

यदि शिशु के दिल की धड़कन न सुने तो क्या करें?

जब गर्भवती महिला पहले स्कैन के लिए जाती है और उस दौरान गर्भ में शिशु की धड़कन नहीं आती है तो डॉक्टर आपको दूसरे स्कैन के लिए बोल सकते हैं। यदि दूसरे स्कैन में शिशु के दिल की धड़कन आ जाती है तो बहुत अच्छी बात होती है। डॉक्टर्स आपको आठवें या नौवें हफ्ते में दूसरे स्कैन के लिए बोल सकते हैं। लेकिन यदि इस दौरान भी शिशु के दिल की धड़कन नहीं आती है तो आपको डॉक्टर गर्भपात के लिए बोल सकते हैं।

तो यह हैं गर्भ में शिशु के दिल की धड़कन कब आती है और कब डॉक्टर की मदद से आप अपने शिशु की धड़कन को सुन सकते हैं। इसके अलावा अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन में आपको डॉक्टर स्क्रीन पर आपके शिशु द्वारा गर्भ में की जाने वाली हरकतों को भी दिखा देता हैं। जैसे की जब आप स्कैन करवाने जाते हैं तो आपका शिशु गर्भ में उस समय क्या कर रहा है वो आप स्कैन में देख सकते हैं।

प्रेगनेंसी में बालों में कलर करते समय इन बातों का ध्यान रखें?

कुछ महिलाओं को बालों को डाई करने की आदत होती है। लेकिन बता प्रेगनेंसी की हो तो महिलाओं को बालों को डाई न करने की सलाह ही दी जाती है क्योंकि बालों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डाई में केमिकल मौजूद होता है। जो माँ व् बच्चे की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। परन्तु यदि भी फिर महिला डाई करना चाहती है तो महिला कर सकती है लेकिन महिला को डाई करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भवती महिला या शिशु को इसकी वजह से कोई भी दिक्कत नहीं हो। तो आइये अब इस आर्टिकल में आगे जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान डाई का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हर्बल डाई का इस्तेमाल करें

प्रेग्नेंट महिला यदि डाई लगाना चाहती है तो महिला को हर्बल डाई का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि हर्बल प्रोडक्ट्स में केमिकल की मात्रा न के बराबर होती है जिससे माँ या बच्चे को दिक्कत होने का खतरा कम होता है।

डाई के पैकेट पर लिखी सामग्री को ध्यान से पढ़ें

आप जिस भी डाई का इस्तेमाल करने जा रहे हैं उस डाई का इस्तेमाल करने से पहले आप डाई के पैकेट पर लिखी डेट व् उसमे इस्तेमाल किये जाने वाले उत्पाद को देखें। की उसमे कहीं कोई ऐसा उत्पाद तो नहीं है जिससे माँ या बच्चे को नुकसान हो, डाई एक्सपायरी तो नहीं है आदि। यदि आपको सब कुछ ठीक लगता है तो उसके बाद आप उस डाई का इस्तेमाल करें।

अमोनिया फ्री डाई इस्तेमाल करें

डाई का इस्तेमाल करने से पहले ध्यान रखें की आप उस डाई का इस्तेमाल करें जिसमे अमोनिया मौजूद नहीं हो क्योंकि अमोनिया एक हानिकारक केमिकल होता है जो शिशु की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। यदि आपके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली डाई में अमोनिया है तो आपको इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

जरुरत से ज्यादा डाई नहीं लगाएं

कई महिलाओं की आदत होती है की एक बाल सफ़ेद हुआ नहीं की डाई लगा लेती है, कहीं जाना हुआ नहीं की डाई का इस्तेमाल करती है, आदि। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अपनी इस आदत पर कण्ट्रोल करना चाहिए और बहुत ज्यादा जरुरी होने पर ही डाई का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा डाई का इस्तेमाल करने की वजह से भी शिशु और महिला की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कलर करने से बचें

गर्भावस्था की पहली तिमाही में शिशु के अंग बन रहे होते हैं और शिशु के अंगो का विकास तेजी से हो रहा होता है ऐसे में बरती गई थोड़ी सी लापरवाही शिशु के विकास में रूकावट पैदा कर सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जितना हो सके गर्भवती महिला को बालों को कलर करने से बचना चाहिए।

जड़ तक डाई नहीं लगाएं

डाई लगाते समय ध्यान रखें की डाई स्कैल्प यानी की बालों की जड़ तक न पहुंचें क्योंकि डाई के स्किन के संपर्क में आने पर इसमें मौजूद केमिकल की शिशु तक पहुँचने की आशंका होती है जिसकी वजह से शिशु को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में जितना हो सके स्कैल्प पर डाई नहीं लगाएं।

हाथों में दस्ताने जरूर पहनें

बालों में डाई लगाते समय महिला दस्ताने जरूर पहने क्योंकि डाई के स्किन के संपर्क में आने पर डाई में मौजूद केमिकल माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही हो सके तो मास्क भी पहनें ताकि सांस लेने के जरिये भी केमिकल आपके शरीर में न पहुंचें।

कोई परेशानी हो तो डाई का इस्तेमाल नहीं करें

यदि आपको डाई का इस्तेमाल करने से कोई दिक्कत होती है तो प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल भी डाई का इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि इस दौरान आपकी परेशानी और बढ़ सकती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को डाई लगाते समय रखना चाहिए। ताकि डाई की वजह से गर्भवती महिला या शिशु को किसी भी तरह की समस्या नहीं हो। इसके अलावा यदि प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपको ज्यादा शारीरिक परेशानियां रहती है तो महिला को ऐसी चीजों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए जिनमे केमिकल मौजूद होता है क्योंकि इनकी वजह से महिला की दिक्कत बढ़ सकती है। साथ ही हो सके तो प्रेगनेंसी के दौरान बालों को प्राकृतिक रूप से कलर करने के लिए हिना यानी मेहँदी का इस्तेमाल करें।

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