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ये है सटीक तरीका गर्भधारण करने का?

शादी होने के बाद हर महिला के मन में माँ बनने के ख्वाब आने लगते हैं और हर महिला माँ बनने का खूबसूरत अहसास महसूस करना चाहती है। लेकिन कई बार प्रेगनेंसी में हो रही देरी के कारण महिला की यह चिंता बढ़ने लग जाती है। लेकिन इसमें कोई घबराने की कोई बात नहीं होती है क्योंकि ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं होता है की आप शादी के तुरंत बाद प्रेग्नेंट हो जाएँ बल्कि कुछ महिलाएं साल भर तो कुछ दो साल बाद भी गर्भवती हो सकती है।

लेकिन यदि महिला दवाइयों का सेवन करती है, अबॉरशन करवा लेती है तो ऐसे कुछ केस में बाद में महिला को गर्भधारण करने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको गर्भधारण के कुछ आसान व् असरदार तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे ट्राई करने से आपको जल्द से जल्द गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है। यदि आप भी माँ बनना चाहती है तो यह आर्टिकल आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

हेल्थ है जरुरी

माँ बनने के लिए सबसे जरुरी है की महिला की हेल्थ अच्छी हो यानी की महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें। क्योंकि खान पान जितना अच्छा होगा उतना ही महिला को फिट रहने में मदद मिलेगी और जितना महिला स्वस्थ रहेगी उतना ही महिला को जल्दी गर्भधारण करने में मदद मिलेगी।

रूटीन बनाएं बेहतर

खान पान बेहतर रखने के साथ महिला को अपने हर काम का एक समय बनाना चाहिए जैसे की खाने का, सोने का, व्यायाम का, आदि, अच्छी आदतों को अपने लाइफस्टाइल में ऐड करना चाहिए। क्योंकि जितना अच्छा महिला का रूटीन होगा उतना ही महिला को स्वस्थ रहने और जल्दी प्रेग्नेंट होने में मदद मिलेगी।

वजन नियंत्रित रखें

गर्भधारण के लिए महिला को अपने वजन का भी ध्यान रखना जरुरी होता है क्योंकि यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा कम या जरुरत से ज्यादा होता है। तो इसकी वजह से भी महिला को प्रेगनेंसी में आ रही परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है इसीलिए महिला को अपने वजन को भी नियंत्रित रखना चाहिए ताकि महिला को ऐसी किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

मेंटली या मानसिक रूप से रहे स्वस्थ

महिला को गर्भवती होने के लिए केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फिट होना चाहिए। क्योंकि यदि आप तनाव लेती है तो इससे आपके गर्भधारण के चांस कम होते हैं। साथ ही कई बार कंसीव हो जाने के बाद गर्भपात भी हो जाता है।

ओवुलेशन पीरियड का रखें ध्यान

ओवुलेशन पीरियड वो समय होता है जब अंडाशय से अंडा रिलीज़ होता है और उस समय यदि उसका शुक्राणु से मिलन हो जाता है तो ऐसा होने के कारण महिला के गर्भधारण के चांस बढ़ जाते हैं। और यह समय आपके पीरियड जिस दिन शुरू होते हैं उस दिन से गिनते हुए बारह से सोलह दिन तक का समय होता है। जैसे की आपके पीरियड यदि एक तारिक को आये हैं तो बारह से सोलह तारीख आपकी ओवुलेशन पीरियड होगी। और इस दौरान यदि आप अपने पार्टनर के साथ बेहतर सम्बन्ध बनाते हैं तो आपके गर्भधारण के चांस बढ़ जाते हैं। यदि आपको इस पीरियड के बारे में समझ नहीं आता है तो आप डॉक्टर के पास जा सकती है क्योंकि अजा कल ओवुलेशन पीरियड कब है इसे भी आसानी से चेक करके डॉक्टर्स आपको बता देते हैं।

गर्भनिरिधक दवाइयां नहीं लें

यदि आप जल्द से जल्द प्रेग्नेंट होना चाहती है तो आपको गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि आप उन दवाइयों का सेवन करती रहेंगी तो इससे आपको गर्भधारण नहीं हो पायेगा।

सम्बन्ध बनाने में न करें चूक

ऐसा नहीं होता है की महीने में एक बार सम्बन्ध बनाया और प्रेगनेंसी हो जाएँ हाँ एक दो केस में ऐसा हो भी सकता है। लेकिन यदि आप बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपको रोजाना या फिर एक दिन चढ़कर सम्बन्ध बनाना चाहिए साथ ही सम्बन्ध बनाते समय उसे एन्जॉय भी करना चाहिए। क्योंकि जितने बेहतर तरीके से आप सम्बन्ध बनाते हैं उतना ही आपके गर्भधारण के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

सम्बन्ध बनाने की पोजीशन का ध्यान रखें

जल्दी गर्भधारण के लिए बेहतर सम्बन्ध बनाने के साथ सम्बन्ध बनाने की पोजीशन का भी ध्यान रखें और उन पोजीशन को ट्राई करें जिनमे आपको कोई परेशानी भी नहीं हो और शुक्राणु के अंडे तक पहुँचने के चांस भी अधिक हो। सम्बन्ध बनाते समय इन बातों का ध्यान रखने से भी आपको जल्दी गर्भधारण में मदद मिलती है।

नशीले पदार्थों से दूरी

प्रेगनेंसी के लिए महिला और पुरुष दोनों को ही नशीले पदार्थ जैसे की शराब, धूम्रपान व् अन्य हर प्रकार की नशीली चीजों से दूरी रखनी चाहिए। क्योंकि नशीले पदार्थों का बुरा असर शुक्राणुओं की संख्या पर पड़ता है जिसके कारण महिला को गर्भधारण में आ रही समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

चाय कॉफी का सेवन कम करें

जल्दी गर्भधारण के लिए आपको कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय कॉफ़ी का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा कैफीन का सेवन भी आपके गर्भधारण में रूकावट पैदा कर सकता है।

कहीं घूमने जाएँ

कई बार होता है की परिवार के बीच रहने से महिला और पुरुष को अपने लिए वो समय नहीं मिल पाता है जो की उन्हें चाहिए होता है। और ऐसे में पुरुष अपने काम की और महिला घर की टेंशन लेती रहती है तो इस चक्कर में प्रेगनेंसी होने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में अपने माइंड को रिलैक्स करने के लिए और अपने पार्टनर के साथ अकेले समय बिताने के लिए आपको कुछ दिनों के लिए बाहर जाना चाहिए। और एन्जॉय करना चाहिए ऐसा करने से आपके सम्बन्ध बेहतर होंगे, आप खुश रहेंगे जो की आपके आसानी से कंसीव करने में मदद कर सकते हैं।

भरपूर नींद

खान पान, व्यायाम के साथ भरपूर नींद भी लें क्योंकि नींद भरपूर लेने से शरीर की सभी क्रियाओं को सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है साथ ही शरीर में हार्मोनल बैलेंस बना रहता है। जो की महिला को शीघ्र गर्भधारण करने में मदद करता है।

बिना जरुरत की दवाइयों का सेवन नहीं करें

महिला व् पुरुष दोनों को ही बिना जरुरत के ज्यादा दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इन दवाइयों का सेवन करने से प्रजनन क्षमता और शुक्राणु की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण महिला को प्रेगनेंसी में आ रही परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

जरुरत से ज्यादा व्यायाम नहीं करें

फिट रहने के लिए व्यायाम करना बहुत जरुरी होता है लेकिन यदि आप गर्भधारण के लिए ट्राई कर रही हैं तो आपको जरुरत से ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा व्यायाम करने के कारण भी आपको प्रेगनेंसी में आने वाली दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

सही उम्र

जल्दी गर्भधारण के लिए महिला को अपनी उम्र का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि सही उम्र में गर्भधारण करने में कोई दिक्कत कम होती है जबकि उम्र बढ़ने के बाद गर्भधारण में आ रही परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से गर्भवती महिला को जल्द से जल्द गर्भधारण करने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि बहुत कोशिशों के बाद भी महिला का गर्भधारण नहीं हो रहा हो तो इसके इलाज के लिए आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। और डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी जांच व् अन्य सभी दवाइयों का समय से सेवन करेंताकि आपका जल्द से जल्द गर्भधारण हो सके।

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प्रेगनेंसी में थायरॉइड हो तो क्या करें?

कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी से पहले ही थायरॉइड की समस्या से पीड़ित होती है तो कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान भी थायरॉइड की समस्या हो जाती है। यदि यह समस्या प्रेग्नेंट महिला को होती है तो प्रेगनेंसी के दौरान इनका सही इलाज बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि यह समस्या महिला को बढ़ जाती है तो इसकी वजह से माँ और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है।

इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान या जब आप बेबी प्लानिंग करने से पहले अपने टेस्ट करवाती है तो थायरॉइड का टेस्ट जरूर करवाया जाता है क्योंकि इसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है। साथ ही जिन महिलाओं को पहले से यह समस्या होती है उन्हें शुरुआत से ही अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान थायरॉइड होने पर क्या करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या होता है थायरॉइड

थायरॉइड एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो आपकी गर्दन के बिल्कुल सामने के हिस्से में होती है। जो T3 और T4 हॉर्मोन्स को रिलीज़ करती है। और यही हॉर्मोन्स शरीर में मेटाबोलिज्म, वजन, पाचन क्रिया, तापमान, कोलेस्ट्रॉल, हदय गति आदि को नियंत्रित करते हैं।

ऐसे में यदि यह हॉर्मोन असंतुलित हो जाते हैं तो इसकी वजह से शरीर में दिक्कत हो जाती है और यह सभी क्रियाएं प्रभावित हो सकती है। साथ ही शरीर का वजन या तो बढ़ना शुरू हो जाता है या कम होना शुरू हो जाता है। यदि यह ग्रंथि कम हॉर्मोन का निर्माण करती है इसे हाइपोथाइरोडिज्म कहा जाता है और यदि यह हॉर्मोन अधिक उत्पादित करने लगती है तो इसे हाइपरथाइरॉडिज्म कहा जाता है।

हाइपोथाइरोडिज्म के लक्षण

चेहरे पर सूजन, बहुत ज्यादा थकान, कब्ज़ अधिक होना, ठण्ड ज्यादा लगना और बर्दाश्त नहीं होना, वजन बढ़ना, पेट में खराबी, यादाश्त कमजोर होना आदि हाइपोथाइरोडिज्म के लक्षण होते हैं। यदि प्रेग्नेंट महिला को यह लक्षण महसूस हो तो जल्द से जल्द डॉक्टर से जरूर मिलें।

हाइपरथाइरॉडिज्म के लक्षण

भूख कम या ज्यादा लगना, चक्कर आना, पसीना अधिक आना, नज़र कमजोर होना, डाइबिटीज़ है तो शुगर लेवल का बढ़ना, पेट खराब रहना, वजन कम होना आदि हाइपरथाइरॉडिज्म के लक्षण हैं। इन सभी लक्षणों के महसूस होने पर भी गर्भवती महिला को एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान यदि थायरॉइड का इलाज नहीं किया जाये तो क्या समस्या हो सकती है?

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान थायरॉइड की समस्या का इलाज नहीं करती है तो इसकी वजह से महिला को हाई ब्लड प्रैशर, शरीर में खून की कमी, गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी, शिशु के वजन में कमी, शिशु के मानसिक विकास में कमी, जैसी दिक्कतें होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा शिशु जन्म के बाद भी इस समस्या के दुष्प्रभाव से पीड़ित रह सकता है ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान थायरॉइड से बचाव के लिए बेहतर उपाय अपनाने चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला थायरॉइड होने पर क्या करें?

गर्भवती महिला को यदि थायरॉइड की समस्या है तो महिला को नीचे बताएं गए टिप्स को पूरी प्रेगनेंसी के दौरान फॉलो करना चाहिए। ताकि महिला को ऐसी कोई भी दिक्कत होने से बचे रहने में मदद मिल सके।

दवाई समय से खाएं

थायरॉइड की समस्या से बचे रहने और उसे कण्ट्रोल में रखने के लिए आपको डॉक्टर द्वारा जो भी दवाई बताई गई है उसका समय से सेवन करना चाहिए। इससे आपको थायरॉइड लेवल को कण्ट्रोल रखने में मदद मिलती है।

डॉक्टर की बात मानें

गर्भावस्था के दौरान आपको थायरॉइड होने पर किन किन बातों का ध्यान रखना है उन सभी बातों का ध्यान का ध्यान रखना है। और डॉक्टर ने आपको क्या करने व् क्या न करने के लिए कहा है उन सभी का भी ध्यान रखना है।

वाक करें

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर को एक्टिव रखने और थायरॉइड के साथ अन्य शारीरिक परेशानियों को कण्ट्रोल में रखने के लिए थोड़ी देर वाक जरूर करें।

व्यायाम योगा व् मैडिटेशन करें

डॉक्टर द्वारा आपको जो जो व्यायाम, योग करने के लिए कहा गया है उन सभी को नियमित रूप से करें ताकि इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें। साथ ही मैडिटेशन भी जरूर करें ताकि आपको मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान थायरॉइड होने पर क्या करना चाहिए उससे जुड़े टिप्स, यदि महिला इन टिप्स को फॉलो करती है तो इससे महिला को और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में गैस की समस्या और सीने में जलन होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और इन परेशानियों का होना प्रेगनेंसी के दौरान काफी आम बात होती है जैसे की महिला को पेट सम्बन्ध समस्या, शरीर में दर्द, थकान, कमजोरी जैसी बहुत सी समस्या हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान यदि अपना अच्छे से ध्यान रखती है, अपना रूटीन सही रखती हैं, तो ऐसा करने से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी में दौरान होने वाली गैस की समस्या और सीने में जलन की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका सामना अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान करती है।

प्रेगनेंसी में पेट में गैस व् सीने में जलन होने के कारण

यदि आप माँ बनने वाली हैं और आपको भी प्रेगनेंसी में दौरान पेट में गैस व् सीने में जलन की समस्या हो रही है तो इस परेशानी के होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे की:

हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में लगातार व् तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं। और इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की इम्युनिटी कमजोर होने के साथ पाचन तंत्र पर भी असर पड़ता है। जिसकी वजह से महिला का पाचन तंत्र धीरे काम करता है। ऐसा होने की वजह से महिला को खाना हज़म करने में दिक्कत हो सकती है जिसकी वजह से पेट में गैस, सीने में जलन, कब्ज़ जैसी समस्या होना बहुत आम बात होती है।

एक ही बार में खाना खाने के कारण

गर्भवती महिला का पाचन तंत्र थोड़ा धीरे काम करता है ऐसे में महिला को थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए जिससे खाने को आसानी से हज़म करने में मदद मिल सके। लेकिन यदि महिला एक ही बार में पेट भर कर खा लेती है तो इस वजह से खाने को हज़म करने में दिक्कत हो सकती है जिसकी वजह से गैस होना आम बात होती है और गैस के साथ हार्ट बर्न की समस्या भी हो सकती है।

गलत आहार लेने के कारण

प्रेग्नेंट महिला यदि ऐसी चीजों का सेवन करती है जिससे महिला को गैस बन सकती है जैसे की तेलीय आहार, ज्यादा मसालेदार आहार, बाहर का खाना, गैस बनाने वाली सब्जियां, बासी व् ठंडा खाना, जंक फ़ूड आदि। ऐसे आहार को लेने के कारण महिला इसे आसानी से हज़म नहीं कर पाती है जिसकी वजह से महिला को पेट में गैस, सीने में जलन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

खाना खाने के बाद तुरंत सो जाने के कारण

गर्भवती महिला यदि जब भी खाती है और उसके बाद तुरंत आराम करने लग जाती है या वहीँ बैठी रहती है। तो इस वजह से खाना अच्छे से हज़म नहीं हो पाता है और खाना अच्छे से हज़म न होने पर महिला को गैस व् सीने में जलन होने की समस्या होना आम बात होती है।

बढ़ता वजन

प्रेगनेंसी जैसे जैसे आगे बढ़ती है वैसे वैसे महिला का वजन व् गर्भाशय का भार भी बढ़ता जाता है। और ऐसा होने का असर महिला की पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकता है जिसकी वजह से महिला की पाचन क्रिया धीमे काम करने लगती है। और पाचन क्रिया के धीमे काम करने के कारण महिला को पेट में गैस, अपच, कब्ज़, सीने में जलन आदि की समस्या होना आम बात होती है।

पानी की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो इसकी वजह से महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और उन्ही परेशानियों में से एक है पेट में गैस होना और सीने में जलन होना, यदि महिला भरपूर पानी का सेवन नहीं करती है तो इसकी वजह से महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

धूम्रपान करने के कारण

गर्भावस्था के समय यदि महिला धूम्रपान करती है तो इसकी वजह से भी महिला को सीने में जलन की समस्या होना, पेट में गैस होना आदि दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी में पेट में गैस व् सीने में जलन की समस्या से बचने के उपाय

  • गर्भवती महिला को खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए सही समय और पोषक तत्वों से युक्त आहार लेना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला फाइबर युक्त डाइट ले इससे पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें दिन भर में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने के साथ नारियल पानी, निम्बू पानी, छाछ आदि का भी सेवन करें।
  • धूम्रपान नहीं करें और ऐसी जगह पर रहने से भी बचे जहां कोई धूम्रपान कर रहा हो।
  • खाना खाने के बाद उसी जगह बैठें न रहें बल्कि थोड़ा घूमें।
  • अपने रूटीन में व्यायाम योगासन को भी जगह दें क्योंकि इससे शरीर की सभी क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है जिससे महिला इस परेशानी से बच सकती है।
  • अपने बैठने, उठने आदि की पोजीशन का ध्यान रखें।
  • ज्यादा टाइट कायदे नहीं पहनें।
  • ऐसी चीजों का सेवन करने से बचें जिन्हे खाने से पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है।

डॉक्टर से कब मिलें

गर्भावस्था के दौरान महिला को परेशानियों का होना आम बात होती है लेकिन यदि आपकी दिक्कत ज्यादा बढ़ रही है तो ऐसे में आपको बिना देरी किये डॉक्टर से मिलना चाहिए। ऐसे में यदि आपको पेट में गैस, सीने में जलन के साथ उल्टी, भूख न लगना जैसी दिक्कत भी हो रही है तो एक बार डॉक्टर की राय लें।

तो यह हैं गर्भावस्था के दौरान पेट में गैस, सीने में जलन होने के कारण व् इस परेशानी से बचाव के उपाय, यदि आप भी गर्भवती हैं तो इन टिप्स का ध्यान रखें ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकें।

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प्रेगनेंसी के दौरान इन फलों को माना जाता है अमृत

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फलों का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि फलों में आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने और शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं। लेकिन महिला को मौसमी फलों का सेवन ही करना चाहिए यानी मौसम के अनुसार जो फल आते हैं उनका मौसम अनुसार ही सेवन करना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान किन फलों का सेवन अमृत माना जाता है यानी की सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

सेब

डाइट्री फाइबर, आयरन, कैलोरीज़, कैल्शियम, विटामिन्स, पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर एक सेब का सेवन रोजाना गर्भवती महिला को करना चाहिए। क्योंकि यह सभी पोषक तत्व माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। और डॉक्टर्स के अनुसार भी रोजाना एक सेब का सेवन करने से आपको हर तरह की बीमारी से दूर रहने के साथ फिट व् हेल्दी रहने में मदद मिलती है।

अनार

छोटे छोटे लाल दानों वाला अनार बड़े बड़े फायदे आपको देता हैं। खासकर गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए यह फल बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि अनार में विटामिन सी, विटामिन के, फोलेट, प्रोटीन, आयरन, जिंक, पोटैशियम जैसे पोषक तत्व अनार में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही अनार के दानों का सेवन करने के साथ अनार के जूस का सेवन भी गर्भवती महिला कर सकती है। ध्यान रखें गर्भवती महिला जरुरत से ज्यादा और सुबह खाली पेट अनार या अनार के जूस का सेवन करने से बचें।

संतरा

संतरे में विटामिन सी, फाइबर, जिंक, कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान संतरे का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को एक नहीं बहुत से फायदे मिलते हैं। साथ ही महिला संतरे का मौसम होने पर संतरे का सेवन करने के साथ संतरे का जूस भी पी सकती है। संतरे के साथ मौसमी, निम्बू का सेवन भी गर्भवती महिला को भरपूर करना चाहिए।

केला

केला एक ऐसा फल है जो लगभग सभी मौसम में आसानी से मिल जाता है। और प्रेगनेंसी के दौरान केले का सेवन भी माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि केले में पोटैशियम, विटामिन बी 6, विटामिन सी, फाइबर, मैगनीज़, कैल्शियम, कार्ब्स, कॉपर आदि मौजूद होते हैं और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को हेल्दी रखने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए बहुत जरुरी होते हैं। गर्भवती चाहे तो केले को दूध में मिलाकर उसका शेक बनाकर भी पी सकती है ऐसा करने से महिला को केले के फायदे को दुगुना करने में मदद मिलती है।

आम

यदि आम का मौसम है तो गर्भवती महिला को अपने फलों की सूचि में आम को जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि आम विटामिन ए, विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत होता है। और यह दोनों ही गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए बहुत जरुरी होते हैं। इसके अलावा आम में फोलेट, कोलिन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, बीटा कैरोटीन आदि भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

नाशपाती

नाशपाती भी एक ऐसा फल है जिसका सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि नाशपाती में फाइबर मौजूद होता है जो महिला की पाचन क्रिया को मजबूत रखता है, फोलेट होता है जो शिशु के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है, कैलोरीज़ होती है जो गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होती है, इसके अलावा प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन के, पोटैशियम, कार्ब्स व् अन्य पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

अमरुद

अमरुद का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए क्योंकि खाने में स्वादिष्ट होने के साथ अमरुद पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। जो माँ और बच्चे दोनों के लिए जरुरी होते हैं जैसे की विटामिन सी, फोलेट, फाइबर, पोटैशियम आदि। लेकिन ध्यान रखें की कच्चे अमरुद का सेवन नहीं करें क्योंकि इसकी वजह से पेट दर्द की समस्या हो सकती है साथ ही अमरुद में कीड़ा नहीं हो इस बात का भी ध्यान रखें।

तो यह हैं वो फल जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन फलों का सेवन करते हुए महिला को ध्यान रखना चाहिए की महिला अच्छे से धोने के बाद ही फलों को खाने में प्रयोग करे, ताजे व् बिना गले सड़े फलों का सेवन करें, ध्यान रखें की फल मौसमी हो क्योंकि बिना मौसम के फलों को टीका लगाकर पकाया जाता है।

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प्रेगनेंसी में दूध में केसर डालकर क्यों पीते हैं?

जैसे ही महिला गर्भावस्था के पीरियड में कदम रखती है वैसे ही महिला के लिए सलाहों का सिलसिला शुरू हो जाता है। जैसे की कोई कहता है प्रेगनेंसी में ऐसा करो तो कोई कहता है वैसा करों। यहां तक की कुछ जो आपके करीबी होते हैं वो तो प्रेगनेंसी में क्या करे क्या नहीं क्या खाएं क्या नहीं इसकी लिस्ट बनाकर आपको दे सकते हैं। लेकिन हर कोई जो भी राय देता है वो इसीलिए होती है ताकि प्रेग्नेंट महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान दूध में केसर डालकर पीने की सलाह आपको क्यों देते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में केसर दूध पीना चाहिए या नहीं?

केसर की तासीर गर्म होती है ऐसे में गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिला को केसर दूध पीने से बचना चाहिए। लेकिन प्रेगनेंसी की दूसरी व् तीसरी तिमाही में महिला केसर दूध पी सकती है। इसके अलावा महिला को एक गिलास दूध में केसर के दो चार रेशे ही डालने चाहिए क्योंकि इतना ही केसर माँ और बच्चे के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही महिला यदि इससे अधिक मात्रा में केसर का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला को दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी में केसर दूध पीने के फायदे

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान केसर मिल्क का सेवन करती है तो केसर और दूध में मौजूद पोषक तत्व महिला को भरपूर मिलते हैं जिससे महिला और शिशु को दुगुना फायदा मिलता है यानी की दूध का भी फायदा मिलता है और केसर का भी फायदा मिलता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में केसर वाला दूध पीने से गर्भवती महिला और बच्चे को कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन मिलता है

गर्भावस्था के दौरान महिला को अतिरिक्त आयरन की जरुरत होती है जिससे गर्भवती महिला को एनीमिया से बचे रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। ऐसे में केसर मिल्क पीने से गर्भवती महिला को भरपूर आयरन मिलता है जिससे गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

नींद आती है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का खान पान बेहतर होने के साथ महिला का भरपूर नींद लेना भी जरुरी होता है। लेकिन कुछ महिलाओं को अनिंद्रा की समस्या का सामना करना पड़ सकता है ऐसे में यदि महिला रोजाना रत को सोने से पहले केसर मिल्क पीती है तो इससे महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है। बेहतरीन फायदों के लिए दूध को थोड़ा गुनगुना ही पीएं।

ब्लड प्रैशर से राहत दिलाए

गर्भावस्था के समय कुछ महिलाओं को ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि महिला को ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या अधिक होती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर गलत असर पड़ने का खतरा रहता है। लेकिन यदि महिला केसर मिल्क का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है क्योंकि केसर में मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रैशर को सामान्य रखने में मदद करता है।

मूड स्विंग्स के लिए है फायदेमंद

गर्भावस्था के समय बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाओं को मूड स्विंग्स की समस्या हो सकती है। जिसके कारण महिला को गुस्सा, चिड़चिड़ाहट आदि महसूस अधिक होता है। ऐसे में केसर मिल्क पीना महिला के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि केसर मिल्क पीने से महिला के मूड को सही रखने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया बेहतर तरीके से करती है काम

गर्भावस्था के दौरान महिला का पाचन तंत्र थोड़ा धीमा हो जाता है ऐसे में महिला को पेट सम्बंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन केसर दूध का सेवन करने से महिला की इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है। क्योंकि केसर शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सही रखने में मदद करता है जिससे महिला का मेटाबोलिज्म दुरुस्त रहता है। और मेटाबोलिज्म बेहतर होने के साथ महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम और प्रोटीन

दूध और केसर दोनों में ही कैल्शियम व् प्रोटीन की मात्रा मौजूद होती है ऐसे में यदि गर्भवती महिला केसर मिल्क पीती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को प्रोटीन व् कैल्शियम मिलता है जिससे उनकी हड्डियों, मांसपेशियों को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है और गर्भवस्था के दौरान माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

मॉर्निंग सिकनेस से मिलती है राहत

जिन गर्भवती महिला को मॉर्निंग सिकनेस यानी की उल्टी, सर दर्द, चक्कर, जी मिचलाना जैसी समस्या अधिक रहती है। उन महिलाओं के लिए केसर मिल्क पीना बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसे पीने से महिला को इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

शिशु की रंगत होती है साफ़

ऐसा माना जाता है जो गर्भवती महिलाएं केसर मिल्क पीती है उनकी होने वाली संतान गोरी होती है और यह आज से नहीं बल्कि पुराने समय से कहा जाता है। ऐसे में यदि आप भी चाहते हैं तो आप भी प्रेगनेंसी के दौरान केसर मिल्क पी सकती है जिससे आपके होने वाले बच्चे की रंगत को निखारने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ फायदे जो केसर मिल्क पीने से प्रेग्नेंट महिला और होने वाले शिशु को मिलते हैं ऐसे में यदि आप भी चाहे तो आप भी इन बेहतरीन फायदों के लिए प्रेगनेंसी के दौरान केसर मिल्क पी सकती है। लेकिन ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा केसर का सेवन नहीं करें क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

Saffron milk in pregnancy

कमर में दर्द रहना कहीं अबॉरशन/ गर्भपात की निशानी तो नहीं प्रेगनेंसी में?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कमर दर्द की समस्या का होना काफी आम बात होती है। और इस समस्या से बहुत सी गर्भवती महिलाओं को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि दर्द के कारण तो महिला तकलीफ में होती ही है साथ कमर दर्द के कारण महिला को उठने, बैठने, लेटने या किसी काम को करने में भी बहुत दिक्कत होती है। साथ ही कई बार महिला को असहनीय कमर में दर्द की समस्या हो सकती है।

लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला कुछ आसान टिप्स को ट्राय करके इस समस्या से निजात भी पा सकती है। और यह एक ऐसी समस्या है जिससे महिला पहली तिमाही में कम लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही में ज्यादा परेशान हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कमर दर्द के कारण कोई समस्या नहीं हो इसके लिए इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की कब महिला के लिए कमर दर्द सही है और कब इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में कमर दर्द के कारण

  • प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे का वजन बढ़ने के कारण रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है जिसके कारण महिला को यह दिक्कत हो सकती है।
  • जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान सीधी होकर सो जाती हैं उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • गलत तरीके से उठने बैठने, जल्दबाज़ी में उठने, बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठे रहने के कारण महिला को कमर दर्द की समस्या हो सकती है।
  • जिन महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी होती है उन महिलाओं को भी कमर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान जिन महिलाओं का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था में कमर दर्द होना कितना सामान्य है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना कर सकती है जिनमे से कमर दर्द महसूस होना भी एक है। ऐसे में महिला को यदि पहले से ही कमर में दर्द की समस्या थी तो यह समस्या प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ सकती है। या फिर महिला को यदि थोड़ा बहुत कमर दर्द रहता है तो भी यह आम बात है लेकिन यदि महिला को दर्द ज्यादा हो रहा है की महिला को बर्दाश नहीं हो रहा है। साथ ही कोई और भी लक्षण जैसे ही ब्लीडिंग या फ्लूड महिला के प्राइवेट पार्ट से निकल रहा है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

क्या कमर में दर्द होने से गर्भपात हो जाता है?

गर्भवती महिला को यदि प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ा बहुत कमर में दर्द रहता है तो ऐसा होना बहुत आम बात है। लेकिन यदि महिला को कमर में या कमर के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो रहा है जो की महिला से बर्दाश नहीं हो रहा है तो ऐसे में महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर से मदद मांगनी चाहिए। क्योंकि पहली तिमाही में कमर के निचले हिस्से में बढ़ रहा दर्द गर्भपात साथ ही दूसरी व् तीसरी तिमाही में होने वाला यह दर्द समय से पहले डिलीवरी होने का संकेत देता है।

ऐसे में महिला को कितना दर्द हो रहा है महिला को इसे समझने की जरुरत है ताकि महिला को कोई भी दिक्कत नहीं हो और यदि कोई दिक्कत शुरू हो जाये तो महिला को उससे जल्द से जल्द निजात पाने में मदद मिलती है। तो इसका परिणाम यह हैं की प्रेगनेंसी के दौरान यदि थोड़ा बहुत कमर में दर्द है तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की गर्भपात होने वाला है। साथ ही यदि दर्द ज्यादा हो रहा है तो महिला को इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह परेशानी का कारण बन सकता है।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द की समस्या से निजात पाने के टिप्स

  • कमर की मालिश करने से इस समस्या से आराम पाने में मदद मिलती है।
  • उठने बैठने में तेजी नहीं करें हमेशा किसी न किसी चीज का सहारा लेकर बैठें।
  • कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें।
  • आलस को छोड़ दिन भर में थोड़ा व्यायाम या योगासन जरूर करें या फिर थोड़ी देर चहलकदमी करें।
  • बहुत लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में नहीं रहें।
  • जिन कामों को करने में आपको ज्यादा देर खड़े रहना पड़ता है, झुकना पड़ता है उन कामों को करने से बचें।
  • बाईं और करवट लेकर सोएं या फिर सोने के लिए प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करें।
  • मैटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल करने से महिला की इस परेशानी को कम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में होने वाले कमर दर्द से जुडी जानकारी, ऐसे में यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी में कमर दर्द क्यों होता है, इस समस्या से कैसे निजात पाना चाहिए साथ ही कब कमर दर्द को अनदेखा नहीं करना चाहिए, इस बात का ध्यान रखना चाहिए। ताकि माँ और बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Is having pain in the back is a sign of abortion/miscarriage in pregnancy

वर्किंग महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी का पूरा समय महिला के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता है। क्योंकि इस दौरान महिला अलग अलग बदलाव का अनुभव करती है। लेकिन साथ ही यह भी सच है की महिला यदि अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो महिला प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम भी कर सकती है।

क्योंकि प्रेगनेंसी कोई बिमारी नहीं है बल्कि महिला के लिए एक एक्सपीरियंस होता है और हर महिला इस एक्सपीरियंस को करना भी चाहती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे वर्किंग प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखने से अपने काम और प्रेगनेंसी के दौरान अपने स्वास्थ्य में सही संतुलन रखने में मदद मिलती है।

हेल्दी डाइट लें

गर्भवती महिला के लिए सबसे जरुरी होता है की महिला अपनी डाइट का ध्यान रखें। क्योंकि जितना महिला अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखती है उतना ही गर्भवती महिला को फिट रहने और गर्भ में शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को ऑफिस में काम के बीच में खाने का ब्रेक लेते रहना चाहिए और कुछ न कुछ हेल्दी कहते रहना चाहिए जैसे की फ्रूट्स, जूस, पनीर, सलाद, खाना आदि। यदि महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है तो जॉब करने के साथ महिला अपने स्वास्थ्य का भी अच्छे से ध्यान रख सकती है।

हाइड्रेटेड रहें

गर्भवती महिला को दिन भर में पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि हाइड्रेटेड रहने से ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है साथ ही प्रेगनेंसी में होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है। हाइड्रेटेड रहने के लिए महिला पानी के साथ जूस, निम्बू पानी आदि का सेवन भी कर सकती है।

चाय कॉफ़ी कम पीएं

ऑफिस में काम करने वाले लोगो को चाय कॉफ़ी पीने की बहुत आदत होती है लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अपनी इस आदत में सुधार करना चाहिए। क्योंकि चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ सकती है और कैफीन का अधिक सेवन करने से गर्भवती महिला की सेहत सम्बन्धी परेशानियां बढ़ने के साथ शिशु के विकास में भी रुकावट आ सकती है। ऐसे में महिला को एक दो कप से ज्यादा चाय कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

ऑफिस में काम करने के साथ आपको खाते पीते समय साफ़ सफाई का भी खास ध्यान रखना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान इम्युनिटी कमजोर होने के कारण इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में महिला को बार बार हाथ धोते रहना चाहिए, अपने खाने पीने की चीजों को साफ़ सुथरी जगह पर रखना चाहिए, आदि।

सप्लीमेंट्स लेना न भूलें

गर्भावस्था के दौरान महिला डॉक्टर द्वारा कुछ सप्लीमेंट्स का सेवन करने की सलाह दी जाती है जिससे गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को ध्यान रखना चाहिए और प्रेगनेंसी के दौरान सप्लीमेंट्स का सेवन समय से करना चाहिए ताकि महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिल सकें।

एक ही जगह बैठी न रहें

ऑफिस में काम करते समय लम्बे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना पड़ता है जिसकी वजह से बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से न होना, पीठ दर्द जैसी परेशानियां हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और थोड़ी थोड़ी देर बाद अपनी जगह से उठकर घूमना चाहिए ताकि महिला को पीठ दर्द की समस्या से बचे रहने के साथ शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होने में मदद मिल सकें।

आरामदायक कपडे व् जूते पहने

प्रेग्नेंट महिला को ऑफिस जाने पर आरामदायक कपडे पहनने चाहिए और आरामदायक जूते चप्पल पहनने चाहिए ताकि महिला को कोई दिक्कत न हो। क्योंकि यदि महिला जीन्स पहनती है, ज्यादा टाइट कपडे पहनती है, ऊँची हील वाले जूते चप्पल पहनती है तो इनकी वजह से महिला को दिक्कत हो सकती है।

नींद है जरुरी

ऑफिस में सारा दिन काम करने के बाद महिला के लिए आराम भी बहुत जरुरी है इसीलिए महिला को आठ नौ घंटे की नींद भी जरूर लेनी चाहिए। ताकि महिला क्लो रिलैक्स व् एक्टिव रहने में मदद मिल सकें इसीलिए जॉब करने वाली महिलाओं को अपने सोने के लिए एक रूटीन बनाना चाहिए।

थोड़ी एक्सरसाइज भी करें

जॉब करने वाली महिलाओं के पास टाइम थोड़ा कम ही होता है ऐसे में ज्यादा नहीं तो दस से पंद्रह मिनट के लिए ही महिला को एक्सरसाइज या योगा जरुरी करना चाहिए। ऐसा करने से महिला को शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी फिट रहने में मदद मिलती है।

बुरी आदतों से बचें

ऑफिस वाले लोगो के लिए स्मोकिंग करना, अल्कोहल का सेवन करना, पार्टीज में जाना आम बात होता है। लेकिन यदि आप माँ बनने वाली है तो आपको न तो स्मोक करना चाहिए न ही शराब का सेवन करना चाहिए और न ही ऐसी जगह पर जाना चाहिए जहां कोई इन चीजों का सेवन कर रहा हो। क्योंकि यह चीजें गर्भ में शिशु के विकास को बुरी तरह प्रभावित करती है जिसकी वजह से शिशु को दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है।

स्ट्रेस नहीं लें

आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव होना आम बात है और जॉब वालों को तो और ज्यादा काम को लेकर परेशानी रहती है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको ध्यान रखना चाहिए की आप काम को लेकर बिल्कुल भी स्ट्रेस नहीं लें क्योंकि तनाव आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए हानिकारक है। ऐसे में आपको स्ट्रेस को भूलकर खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

जरुरत से ज्यादा काम नहीं करें

कभी कभी ऑफिस में कम काम होता है तो कई बार बहुत ज्यादा भी हो जाता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को ध्यान रखना चाहिए की महिला उतना ही काम करें जिससे महिला को दिक्कत नहीं हो। क्योंकि जरुरत से ज्यादा काम करने के कारण महिला को दिक्कत होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

उठने बैठने की पोजीशन का ध्यान रखें

ऑफिस में जब भी आप चेयर पर बैठती है या उठती है तो आपको आराम से उतना बैठना चाहिए और बैठते समय अपनी पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जल्दबाज़ी में उठने बैठने के कारण या बड़ी देर तक बिना सहारे के बैठने के कारण महिला को पीठ दर्द जैसी परेशानी हो सकती है।

ट्रैवेलिंग से बचें

गर्भावस्था के दौरान यदि आपको ऑफिस की तरफ से कहीं यात्रा करने का मौका मिलता है तो आपको उसे न कहना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी में लम्बा सफर महिला व् शिशु की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

तो यह है कुछ टिप्स जिन्हे यदि वर्किंग प्रेग्नेंट महिला यदि फॉलो करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को अपनी जॉब के साथ अपने आप को फिट रखने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आपको डॉक्टर द्वारा बैड रेस्ट की सलाह दी गई है, आपकी प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स है, आपको बहुत मुश्किलों के बाद गर्भधारण हुआ है तो आपको डॉक्टर द्वारा बताये गए टिप्स को फॉलो करना चाहिए।

Pregnancy tips for working women

प्रेग्नेंट महिला सावन में भूलकर भी नहीं खाए यह चीजें

सावन का महीना बहुत ही पवित्र और पाठ पूजा वाला होता है सावन के दिनों में लोग लोग पूजा पाठ करने के साथ व्रत आदि भी करते हैं। साथ ही शराब पीना, मास खाना, अंडे खाना, आदि चीजों का सेवन बिल्कुल त्याग देते हैं। इसके अलावा सावन के महीने में बहुत ज्यादा बरसात भी होती है ऐसे में खाने पीने में जितनी सावधानी बरती जाये उतना ही अच्छा होता है। प्रेग्नेंट महिला को भी सावन में महीने में अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि जितना अच्छे से अपना धयान रखती है उतना ही माँ व् बच्चे के लिए फायदेमंद होता है। खासकर खान पान में सतर्कता बरतनी महिला के लिए बहुत जरुरी होती है तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को सावन के महीने में क्या- क्या नहीं खाना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

हरी पत्तेदार सब्जियां

हरी सब्ज़ियां पोषक तत्वों से भरपूर होती है लेकिन बरसाती मौसम में गर्भवती महिला को जितना हो सके हरी सब्ज़ियों को खाने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि बरसाती मौसम में कीड़े बहुत पनपते हैं और अधिकतर हरी सब्जियां धरती में होती है तो ऐसे में इनमे कीड़ा होने चांस अधिक होते हैं। ऐसे में यदि इनका सेवन किया जाये तो पेट सम्बन्धी समस्या होने का खतरा रहता है ऐसे में बरसाती मौसम में हरी सब्जियों के सेवन से महिला को परहेज करना चाहिए।

मसालेदार भोजन

बरसात के मौसम में चटपटा और मसालेदार खाने की इच्छा बढ़ जाती है लेकिन गर्भवती महिला के लिए जरुरी होता है की महिला अपनी इस इच्छा पर थोड़ा कण्ट्रोल करे। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया थोड़ी कमजोर हो जाती है जिसकी वजह से भारी व् मसालेदार खाना पचाने में महिला को दिक्कत हो सकती है। और ऐसा होने पर महिला की पेट सम्बन्धी परेशानी बढ़ सकती है। इसीलिए गर्भवती महिला को बरसात के मौसम में मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए।

बैंगन

बरसात के मौसम में महिला को बैंगन की सब्ज़ी खाने से भी बचना चाहिए क्योंकि बैंगन में भी कीड़ा होने के चांस बहुत अधिक होते हैं। जिसकी वजह से पेट सम्बन्धी परेशानी या इन्फेक्शन आदि होने का खतरा बढ़ सकता है।

स्ट्रीट फ़ूड

प्रेग्नेंट महिला यदि कभी कभार स्ट्रीट फ़ूड खाना चाहे तो कभी कभी महिला किसी अच्छी जगह से खा सकती है। लेकिन बरसात के मौसम में महिला को स्ट्रीट फ़ूड खाने से बचना चाहिए। क्योंकि बरसात होने पर हर जगह मिट्टी भी उड़ती है, बरसात होती है तो ऐसे में साफा सफाई का ध्यान थोड़ा कम हो जाता है। और ऐसा खाना खाने के कारण महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

अंडे व् नॉन वेज

गर्भवती महिला को सावन के महीने में अंडे या नॉन वेज भी नहीं खाना चाहिए। क्योंकि सावन का महीना बहुत ही पवित्र होता है ऐसे में इस दौरान यदि पूजा पाठ में ध्यान लगाया जाये तो मन शांत रहता है जो महिला के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है और महिला को तनाव जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। और ऐसा भी नहीं है की यदि महिला अंडे और नॉन वेज नहीं खाएगी तो इससे शरीर में कोई कमी हो जाएगी बल्कि ऐसी बहुत सी महिलाएं होती है जो इन चीजों का सेवन नहीं करती है। वो भी प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहती है।

बासी खाना नहीं खाएं

गर्भवती महिला को बरसात के मौसम में बासी खाना तो बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि बासी खाना खाने से पेट में दर्द, गैस जैसी समस्या होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान बासी खाना खाने के कारण पेट में इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

ठंडी चीजें

सावन के महीने में गर्भवती महिला को ठंडी चीजों का सेवन भी नहीं करना चाहिए साथ ही जिन खाद्य पदार्थों की तासीर ठंडी होती है उनका सेवन करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि ठंडी चीजों का सेवन करने से गले में इन्फेक्शन, सर्दी खांसी जैसी समस्या होने का खतरा होता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जो सावन के महीने में गर्भवती महिला को नहीं खानी चाहिए यदि महिला इन चीजों का सेवन नहीं करती है। तो इससे माँ व् बच्चे के स्वास्थ्य को सही रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा बरसाती मौसम से भी महिला को थोड़ा बच कर रहना चाहिए ताकि इन्फेक्शन फ्लू जैसी परेशानियों से महिला को बचे रहने में मदद मिल सकें।

प्रेगनेंसी में नारियल पानी कब से कब तक पीना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्वों की मात्रा शरीर में भरपूर होने के साथ शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा का पूरा होना भी जरुरी होता है। और इसके लिए महिला को दिन भर में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ फलों का रस, निम्बू पानी, नारियल पानी आदि का सेवन भी करने की सलाह दी जाती है।

क्योंकि इन सभी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं साथ ही इससे शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं की आखिर प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नारियल पानी का सेवन कब से करना चाहिए। लेकिन उससे पहले जानते हैं की प्रेगनेंसी में नारियल पानी का सेवन क्यों करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में नारियल पानी का सेवन क्यों करना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ताकि शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा सही रहे जिससे महिला व् शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। ऐसे में नारियल पानी का सेवन भी माँ व् बच्चे की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

क्योंकि नारियल पानी में आयरन, विटामिन सी, पोटैशियम, कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन, कार्बो हाइड्रेट, जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में पल रहे विकास के लिए जरुरी होते हैं। इसीलिए इन पोषक तत्वों की मात्रा को गर्भवती महिला के शरीर में सही रखने के लिए नारियल पानी का सेवन करना चाहिए।

गर्भवती महिला को कब से करना चाहिए नारियल पानी का सेवन?

प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने नारियल पानी का सेवन कर सकती है। क्योंकि नारियल पानी पीने से माँ और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है। लेकिन जितना हो सके महिला को सुबह नारियल पानी का सेवन करना चाहिए क्योंकि तब इसका फायदा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

इसके अलावा यदि आपको नारियल पानी पीने से किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होती है तो नारियल पानी का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। साथ ही दिन भर में एक नारियल पानी का सेवन सही होता है जरुरत से ज्यादा नारियल पानी का सेवन भी महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीने के फायदे

यदि गर्भवती महिला नारियल पानी का सेवन करती है तो इससे महिला को एक नहीं बल्कि कई सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। तो आइये अब जानते हैं की नारियल पानी के सेवन से प्रेग्नेंट महिला को कौन से फायदे मिलते हैं।

वजन: नारियल पानी का सेवन करने से मेटाबोलिज्म रेट बेहतर होता है जिससे वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

इम्यून सिस्टम: विटामिन सी से भरपूर नारियल पानी का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत रहता है जिससे गर्भवती महिला और शिशु को संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी: नारियल पानी में बहुत से पोषक तत्व मौजूद होते हैं और यह सभी पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद करते हैं।

फाइबर: फाइबर युक्त चीजों का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान पाचन तंत्र को सही रहने में मदद मिलती है। और नारियल पानी में फाइबर मौजूद होता है ऐसे में नारियल पानी पीने से प्रेग्नेंट महिला को पेट में गैस, कब्ज़ जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर और कोलेस्ट्रॉल रहता है नियंत्रित: नारियल पानी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। जिससे माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

पानी की कमी पूरी होती है: नारियल पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में तरल पदार्थों की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

हड्डियां होती है मजबूत: कैल्शियम से भरपूर नारियल पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलती है साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

तनाव से राहत: नारियल पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला को तनाव जैसी समय से राहत पाने और मूड बेहतर रहने में मदद मिलती है।

बालों और स्किन को फायदा: प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन करने से महिला की स्किन और बालों की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन करने से जुड़े टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन जरूर करना चाहिए इससे आपको और आपके होने वाले बच्चे को बेहतरीन फायदे मिलेंगे।

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