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गर्भावस्था में पानी वाला नारियल फायदेमंद या सूखा नारियल?

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नारियल एक ऐसा फल है जो हर प्रकार से हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद है। नारियल की उपज प्रमुख रूप से तटीय क्षेत्रों में होती है। नारियल मूत्राशय शोधक, ग्राही, पुष्टिकारक, बलवर्धक, रक्तविकार नाशक, दाहशामक तथा वात-पित्त नाशक है। नारियल की तासीर ठंडी होती है। हिन्दू धर्म में नारियल को पूजा पाठ, हवन इत्यादि में विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

नारियल की दो क़िस्म :

यह दो प्रकार के होते है, एक तो पानी वाला नारियल, दूसरा सूखा नारियल जिसे हम आम भाषा में गोला-गरी के नाम से भी जानते है। पानी वाले नारियल का पानी जब कुदरती रूप से सुख जाता है तो वह सूखे नारियल में बदल जाता है।  पानी वाला नारियल ताजा होता है और सूखा नारियल कई दिन पुराना होता है।

गर्भावस्था में नारियल खाने के फायदे:

  • गर्भावस्था में नारियल का इस्तेमाल आप किसी भी रूप में कर सकते है, चाहें नारियल का पानी हो, कच्चा नारियल, या नारियल की मलाई।
  • नारियल के सेवन से पानी की कमी नहीं होती और गर्भवती महिला को हाइड्रेट रखता है।
  •  प्रेगनेंसी की शुरूआती दिनों में घबराहट, जी मचलना आदि से छुटकारा मिल जाता है अगर नारियल पानी का सेवन करें।
  • नारियल में वसा नहीं होता, प्रेगनेंसी में नारियल खाने से अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • नारियल एंटी फंगल, एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, गर्भवती महिला और बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ाता है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं को ज्यादा थकान महसूस होती है, उनके लिए नारियल बहुत ही फायदेमंद होता है।
  • प्रेगनेंसी में महिलाओं के हार्मोन्स में परिवर्तन के कारण, उनका मुड़ बदलता रहता है।  नारियल का सेवन करने से गर्भवती महिलाओं का मुड़ अच्छा रहता है।
  • नारियल खाने से गर्भवती महिलाओं का पाचन शक्ति सुधरती है और पेट सम्बन्धी समस्याओं में राहत मिलती है।
  • नारियल में लैक्टिक एसिड होता है, जो प्रेगनेंसी और स्तनपान के दौरान दूध का निर्माण करने में सहायक होता है।

गर्भावस्था में कौनसा नारियल ज्यादा फायदेमंद :

  • सूखे नारियल की तासीर गर्म होती है। प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में सूखा नारियल पेट में गर्मी कर सकता है।
  • सूखे नारियल में सारा पानी सूखने से तेल ज्यादा होता है, जिसके कारण उसमे वसा भी ज्यादा होता है।
  • नारियल को कई दिनों तक स्टोर करने के बाद सूखे नारियल में तब्दील किया जाता है तो ज्यादा दिनों की स्टोरेज के कारण कीटाणु होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • गर्भवस्था में ज्यादा मात्रा में सूखा नारियल खाने से पेट सम्बंधित बीमारियां बढ़ने की सम्भावना बनी रहती है।

ताजा नारियल या पानी वाला नारियल गर्भावस्था के दौरान हर तरीके से फायदेमंद है, फिर भी कभी पानी वाला नारियल ना मिले तो आप सूखे नारियल का इस्तेमाल कर सकती है। प्रेगनेंसी के आखिरी महीनें में सूखे नारियल का इस्तेमाल डिलीवरी के लिए फायदेमंद होता है।

सिर में होने वाली पानी के फुंसी का इलाज

सिर में खुजली होना एक आम समस्या होती है, और इसका कारण होता है की सिर की साफ़ सफाई का ध्यान न रखना या फिर ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करना, यदि आप अपने सिर की साफ सफाई का ध्यान नहीं रखते है, तो इसके कारण आपके सिर में गंदगी का जमाव होने लगता है, जिसके कारण छोटे छोटे दाने होने लगते है, और आपकी खुजली की समस्या भी बढ़ जाती है, और इसके बाद ये फुंसी फोड़े का रूप ले लेती है, जिसके कारण सिर में दर्द होने लगता है, और साथ ही आपको कंघी तक करने में परेशानी का अनुभव होता है।

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सिर में दाने होने के कारण आपके बाल भी कमजोर हो जाते है, साथ ही यदि इसका समय से इलाज न किया जाएँ तो ये परेशानी गंभीर रूप भी ले सकती है, सिर में फुंसी होने होने के बहुत से कारण हो सकते है, ये समस्या खास कर उन लोगो को होती है, या तो जिनकी सिर की त्वचा तेलीय होती है, या फिर जो अपने सिर की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखते है, तो आइये आज हम आपको इस परेशानी से राहत पाने के लिए कुछ ुपत बताने जा रहे है, जिसके इस्तेमाल से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलेगी, इसके अलावा आपको अपने सिर की साफ़ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए, अच्छे तेल का इस्तेमाल करने चाहिए, तो आइये इसके उपचार जाने से पहले इस समस्या के क्या क्या कारण हो सकते है इस विषय में बात करते है।

सर में फुंसी होने के कारण:-

  • सिर की साफ़ सफाई का ध्यान न रखने के कारण आपको ये समस्या हो सकती है।
  • जिनकी सिर की त्वचा तेलीय होती है उन्हें ये परेशानी हो सकती है।
  • सिर के लिए गंदे तेल का इस्तेमाल करने से भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • सिर में ज्यादा पसीना आने के कारण भी आपको ये समस्या हो सकती है।
  • जिन लोगो को सिर में रुसी की समस्या होती है, उन्हें इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

लहसुन का इस्तेमाल करें:-

lehsun ke gun

लहसुन का इस्तेमाल करने से आपको सिर में होने वाली फुंसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप एक या दो लहसुन की कलियों को अच्छे से पीस कर उसे अपने सिर में उस स्थान पर लगाएं जहां फुंसी है, और थोड़ी देर के लिए हलके हाथों से मसाज करें, हफ्ते में तीन से चार बार इस उपाय को करने से आपको आराम मिलता है।

जायफल का इस्तेमाल करें:-

इस तरीके का प्रयोग करने से भी सिर में होने वाली खुजली और फुंसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप जायफल को पीस कर उसमें दूध मिलाकर अपने सिर में उस स्थान पर लगाएं जहां आपको फुंसी की समस्या है, इसके इस्तेमाल से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

नीम का इस्तेमाल करें:-

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नीम किसी आयुर्वेदिक औषधी से कम नहीं है, इसका उपयोग हर तरह के घाव भरने के लिए किया जाता है, सिर में होने वाली फुंसी की समस्या से भी राहत दिलाने में नीम के पत्ते आपके लिए असरदार हो सकते है, इसके लिए आप थोड़े से नीम के पत्ते लेकर पानी में अच्छे से उबाल लें, उसके बाद इन पत्तों को पानी में से छान कर एक लेप तैयार करें, उसके बाद इस लेप को सर के उस हिस्से में लगाएं जहां आपको फुंसी की समस्या है, या फिर आप इसे अपने पूरे सिर में भी लगा सकते है, अब आधे घंटे तक इस लेप मको सर में लगाने के बाद अच्छे से अपने सिर को धो दे, आपको जरूर फायदा होगा।

नारियल के तेल और कपूर का इस्तेमाल करें:-

इस उपचार को करने से भी आपको सिर में होने वाले फुंसी फोड़े की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इस मिश्रण को तैयार करने के लिए नारियल के तेल में थोड़ी सी कपूर को पीस कर अच्छे से मिला लें, उसके बाद इसे सिर में उस स्थान पर लगाएं, जहां आपको फुंसी है या आपके सिर में यदि खुजली होती है तो इसे अपने पूरे सिर में लगाएं, इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको राहत मिलेगी।

चाय के पेड़ का तेल इस्तेमाल करें:-

आपको जान कर हैरानी होगी की चाय के पेड़ के तेल की नियमित मसाज से सिर में होने वाली खुजली, फुंसी फोड़े, और दर्द की समस्या से आसानी से राहत पाने में मदद मिलती है, यदि आपको भी ये परेशानी है तो आप भी इसका इस्तेमाल करके देख सकते है, आपको फायदा महसूस होगा।

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गुलाबजल का इस्तेमाल करें:-

गुलाबजल भी इस समस्या से राहत पाने का एक आसान उपचार है, इसे करने के लिए आप अपने हाथों की मदद से अपने सिर में गुलाबजल से अच्छे से मसाज करें, और उसके बाद इसे थोड़ी देर के लिए बालों में ही रहने दे, इसके कारण आपके सिर को ठंडक मिलती है, और साथ ही आपको खुजली और दर्द की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

बादाम या लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल करें:-

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तेल की ठंडक मिलने के कारण आपके सिर में होने वाली फुंसी की समस्या से राहत पाने में आपको मदद मिलती है, इस समस्या के उपचार के लिए आप बादाम या लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल करके हलके हाथों से अपने सिर की मसाज करें, और रात के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें, और सुबह उठ कर अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपको जरूर फायदा मिलेगा।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

सेब के सिरके का इस्तेमाल करने से भी आपको सिर में होने वाली फुंसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके उपचार के लिए आप थोड़ा सा सेब के सिरका लेकर अपने सिर की अच्छे से मसाज करें, और आधे घंटे के बाद अपने बालों को पानी से धो लें, ऐसा करने से आपकी फुंसी को ठीक होने में मदद मिलती है, साथ ही सिर की गंदगी को भी साफ़ होने में मदद मिलती है।

निम्बू का इस्तेमाल करें:-

निम्बू में मौजूद एंटी बैक्टेरियल गुण आपके सिर में जमी गंदगी को दूर करके सफाई करने में मदद करते है, इस के अलावा आपके सिर में होने वाली फुंसी की समस्या से भी आप इस तरीके का इस्तेमाल करके राहत पा सकते है, इसके उपचार के लिए आप निम्बू के रस से अपने सिर की अच्छे से मसाज करें, और उसके थोड़ी देर बाद पानी की मदद से आप अपने सिर को धो दें, ऐसा करने से आपके सिर में होने वाली फुंसी की समस्या से राहत पाने में आपको मदद मिलती है।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप सिर में होने वाली फुंसी की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा यदि आप अपने सिर की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखते है, जिसके कारण आपके सिर में गंदगी का जमाव जैसे रुसी आदि की समस्या होने लगती है, और बाद में इसी के कारण फोड़े फुंसी होने लगते है, तो यदि आप चाहते है की आपके सर में ऐसी कोई समस्या न हो और आपके बालों की मजबूती भी बनी रहे तो आपको अपने सिर की साफ़ सफाई का ख़ास ध्यान देना चाहिए।

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प्रेगनेंसी में गाजर खानी चाहिए या नहीं?

कोई भी महिला प्रेगनेंसी के दौरान केवल दो चीजों के बारे में सबसे ज्यादा सोचती है पहली गर्भ में शिशु के विकास में किसी तरह की कमी न आये और दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके ताकि प्रेगनेंसी और डिलीवरी दोनों के समय किसी तरह की दिक्कत न हो। और इसके लिए सबसे जरुरी होता है की महिला ऐसे आहार का सेवन करे जिसमे न्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद हो, ताकि प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। तो लीजिये आज हम एक ऐसी सब्ज़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे आप सब्जी, सलाद, अचार, जूस किसी भी रूप में खा सकते हैं। और वो है गाजर, लाल लाल गाजर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान न केवल गर्भवती महिला बल्कि शिशु के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

गर्भावस्था में गाजर खाने के फायदे

विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम, जैसे पोषक तत्वों से भरपूर गाजर का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे केवल गर्भवती महिला को नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी बहुत फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान गाजर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

गाजर आयरन का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी को बॉडी में पूरा करने में मदद करता है। लेकिन ऐसा तभी होता है यदि प्रेग्नेंट महिला इसे खाने के लिए अपनी डाइट में शामिल करती है। इसके अलावा गाजर में विटामिन सी होने के कारण यह आयरन को बॉडी में आसानी से अवशोषित करने में भी मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी व् डिलीवरी के समय खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचाव के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

फाइबर

प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया से जुडी समस्या होने के कारण महिला को कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानी का होना आम बात होती है। लेकिन गाजर का सेवन करने से गर्भवती महिला को पाचन क्रिया से जुडी समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है क्योंकि गाजर में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है। जो पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है।

कैल्शियम

कैल्शियम की मात्रा भी गाजर में मौजूद होती है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को थकान व् कमजोरी जैसी परेशानी से राहत दिलाने में मदद मिलती है। इसके अलावा गाजर में मौजूद कैल्शियम गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इससे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के साथ शिशु के दांतों की सरंचना को मजबूत करने में मदद मिलती है।

विटामिन सी

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला का इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिसके कारण गर्भवती महिला को संक्रमण होने का खतरा हो सकता है, साथ ही यह शिशु को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में इम्यून सिस्टम की मजबूती को बनाये रखने के लिए गर्भवती महिला को गाजर का सेवन करना चाहिए। क्योंकि गाजर में विटामिन सी मौजूद होता है जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट है और यह गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाने में मदद करता है।

विटामिन ए

विटामिन ए आँखों के लिए बहुत अच्छा होता है और गाजर में यह प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि गाजर का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला की आँखों को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की आँखों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

फॉस्फोरस

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या से परेशान हो सकती है, जिसके कारण उन्हें बॉडी के कई अंगो में दर्द की समस्या महसूस हो सकती है। और ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। लेकिन इस समस्या से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला गाजर का सेवन कर सकती है क्योंकि गाजर में मौजूद फॉस्फोरस मांसपेशियों में होने वाली ऐंठन की समस्या से गर्भवती महिला को निजात दिलाने में मदद करता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान गाजर का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। ऐसे में इन फायदों के लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान गाजर को किसी न किसी रूप में अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। और एक बात का ध्यान रखें की गाजर को अच्छे से धोने के बाद ही खाने के लिए प्रयोग में लाना चाहिए।

पेट में लड़का कौन सी साइड होता है

पेट में लड़का कौन सी साइड होता है, गर्भ में लड़के का भार किस तरफ होता है, कैसे पता करें गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की

प्रेगनेंसी के कन्फर्म होने बाद महिला में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण हर कोई महिला के लक्षण को देखकर बताने लगता है की लड़का होगा या लड़की। हर कोई अपने तजुर्बे के हिसाब से बताता हैं लेकिन कई बार वो अंदाजा सही भी हो जाता है। गर्भ में लड़का हो या लड़की इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि हर कोई घर में आने वाले नन्हे मेहमान के लिए उत्साहित होता है।

लेकिन फिर भी कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हे लड़के की चाहत होती है या पहले लड़की होने के कारण अब वो अपने परिवार को पूरा करने के लिए लड़के को चाहते हैं। तो आइये आज हम आपको एक ऐसा खास टिप्स बताने जा रहे है जिससे आप शिशु के भार से बता सकते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या नहीं।

गर्भ में लड़के का भार कौन सी साइड होता है

प्रेगनेंसी में पांचवे महीने के बाद शिशु गर्भ में मूव करना शुरू कर देता है ऐसे में यदि आपको अपने सीधे पाँव, या सीधे हाथ की तरफ पेट में अधिक भार या खिंचाव महसूस होता है तो यह गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है इसका एक लक्षण होता है। और यदि आप अल्ट्रासॉउन्ड करवाते हैं और उसमे देखते हैं की शिशु का सिर सीधे हाथ की तरफ है तो यह भी गर्भ में पल रहे शिशु लड़का है इसी को बताता हैं।

तो यह हैं किस तरह आप शिशु के भार को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की, ज्यादातर लोग इस बात को मानते हैं और पुराने समय में औरतें इसी को देखकर बता देती थी की गर्भ में पल रहा शिशु कौन है।

होंठ (Lip) पर छोटी छोटी फुंसी का होना

होंठ पर दाना, Lip par choti-choti funsi hona, होंठ (लिप) पर दाने वाली एलर्जी होना, लिप्स पर एलर्जी जैसे दाने, होंठ पर फुंसिया होना, Pimples on Lips 

अक्सर देखा गया है की कई लोगों के होंठ के साइड और ऊपर वाले हिस्से में एक साथ बहुत सारी छोटी-छोटी फुंसियां हो जाती है जो बाद में घाव का रूप ले लेती है। वैसे तो इस समस्या के होने कोई गंभीर कारण नहीं है लेकिन अगर ध्यान न दिया जाए तो ये आपके फेस के लिए नुकसानदायक हो सकती है इसीलिए आज हम आपको होंठ पर होने वाले छोटे-छोटे दानों के बारे में बताने जा रहे है की इनके होने के क्या कारण होते है और इन्हे किस प्रकार घरेलू तरीकों द्वारा ठीक किया जा सकता है।

होंठ पर दाने होने के निम्नलिखित कारण हो सकते है :-

1. दवाओं के सेवन से –medicine

अत्यधिक दवाओं के सेवन से भी अक्सर होंठ पर ऐसे छोटे-छोटे दाने हो जाते है। क्योंकि दवाओं में बहुत से हैवी केमिकल और कंपोनेंट्स का इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें अगर आप निर्देश मात्रा से ज्यादा खायेंगे तो नुकसान आप ही को होगा। और जब आप दवाओं का सेवन करना बंद करेंगे तो यह स्वयं ही ठीक हो जाएँगे।

2. पेट की गर्मी –pet me gas

इस समस्या के होने का एक कारण पेट की गर्मी भी होता है। क्योंकि जब आप अत्यधिक मात्रा में मसालेदार भोजन का सेवन करते है तो उसके कारण पेट में गर्मी हो जाती है। और पेट में गर्मी होने के कारण कई लोगों को मुहांसे हो जाते है जबकि कुछ को होंठ पर ऐसे छोटे-छोटे दाने निकलने लगते है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो अपने खान पान पर ध्यान दे कुछ समय में ये स्वयं ही ठीक हो जाएँगे।

3. बुखार होना –fever

इसके अलावा अगर आपके शरीर में अंदरूनी बुखार है जो बहुत दिनों से चला आ रहा है तो भी आपके होंठ पर आस पास या ऊपर ऐसे दाने हो सकते है। डॉक्टरों की माने तो बुखार में या बुखार ठीक होने के बाद ऐसे दाने स्वतः ही निकल आते है। जो कुछ समय में अपने आप ही ठीक हो जाते है।

बचाव के उपाय :-

वैसे तो ये फोड़े बहुत ज्यादा दिनों के लिए नहीं होते लेकिन होते बहुत कष्टदायक है। ऐसे में इनसे जल्द से जल्द छुटकारा पाना ही बेहतर उपाय है। इसके अलावा कुछ दिनों में ये अपने आप ही खत्म हो जाते है। तो ऐसे में डॉक्टर से दवा लाना ठीक नहीं। यहाँ हम आपको कुछ उपाय दे रहे है जिनकी मदद से आप इन दानों को जल्दी ठीक कर सकते है।

 

मॉइश्चराइज़र क्रीम –

इसके लिए आप दानों पर मॉइस्चराइज़र क्रीम लगायें फिर चाहे वो वैसलीन हो या कोई एंटीसेप्टिक क्रीम जैसे बोरोलीन या बोरोप्लस। कपूर और नारियल तेल मिलाकर भी इस समस्या के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

पानी –होंठ (लिप) पर दाना

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पानी की सबसे अधिक जरूरत होती है। इसीलिए अगर आपके होंठ पर भी ऐसे दाने होते है तो भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें। इससे आपका शरीर स्वस्थ रहेगा और शरीर में मौजूद सभी टॉक्सिन्स भी बाहर होंगे।

हरी सब्जियां –

हरी सब्जियां भी बहुत सी समस्यायों का रामबाण इलाज मानी जाती है। अगर आपको लगता है की आपके शरीर में हुई किसी कमी की वजह से ये दाने हो रहे है तो हरी सब्जियों का सेवन करना शुरू कर दें। क्योंकि इनमे हर तरह के खनिज और पोषक तत्व पाए जाते है जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है।

बीन्स प्रेगनेंसी में खाना क्यों जरुरी है

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गर्भावस्था एक ऐसा अहसास है जो न केवल माँ के लिए ख़ास होता या बल्कि पुरे परिवार में खुशिया लाता है। प्रेग्ननसी के दौरान बहुत सावधानी बरतने की जरुरत होती है। घर क सभी बड़े हर समय यही सलाह देते है की क्या खाना चाहीये क्या नहीं खाना चाहीये। प्रेग्नन्सी में सिर्फ माँ का ही नहीं बल्कि गर्ब में पलने वाले बच्चे का भी ध्यान रखना होता है।ऐसे में अक्सर डॉक्टर आयरन और कैल्शियम एनरिचेड खाना खाने की सलाह देते है। आइये हम जानते है प्रेगनेंसी में कौनसी ऐसी चीज़ है जो खाने से सभी पोषक तत्व मिलते है। बीन्स एक ऐसी सब्जी है जो रेगुलर खाने से सभी पोषक तत्व मिलते है। बीन्स को गर्भवस्था में खाने के फायदे।

  • कैल्शियम की कमी से माँ और बच्चे दोनों की हड्डिया कमजोर हो सकती है, ऐसे में हमें कैल्शियम से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। बीन्स में कैल्शियम होता है , प्रेगनेंसी में इसे खाने से माँ और बच्चे दोनों के कैल्शियम की कमी पूरी होती है।
  • बीन्स का हफ्ते में ३-४ बार सेवन करने से गर्ब में पलने वाले बच्चे का हार्ट पूरी तरह विकसित होता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अक्सर महिलाओ को डायबिटीज की प्रॉब्लम हो जाती है, बीन्स को हर दो दिन के अंतराल पर खाने से डायबिटीज जैसी बीमारी से सुरक्षा भी मिलती है। जी है बीन्स डायबिटीज जैसे बीमारी के लिए बहुत ही उपयोगी है।
  • प्रेगनेंसी में बच्चे और माँ दोनों में आयरन की कमी हो जाती है। बीन्स में ५% तक आयरन होता है, जिसे खाने से माँ और बच्चे दोनों की आयरन की कमी पूरी होती है।
  • बीन्स में विटामिन-सी २७% तक होता है, जो की गर्बवती महिला के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
  • गर्बवती महिला को शुरुआती महीनो में उल्टिया और जी मचलाना बहुत ही आम बात है। बीन्स का लगातार सेवन इन उल्टियों को रोकने में फायदेमंद होता है।
  • बीन्स में विटामिन बी ६, मैग्नेशियम और जिंक भी होता है , प्रेगनेंसी में बीन्स का रेगुलर उपयोग इन सभी मिनरल्स की कमी को पूरा करता है।
  • बीन्स को रोज अपनी डाइट में शमिल करने से, गर्बवती महिला के गरब में पलने वाले बच्चे को अस्थमा जैसी बड़ी बीमारी से भी सुरक्षा मिलती है।

तो अपने देखा बीन्स का लगातार सेवन, एक गर्बवती महिला और उसके बच्चे के लये कितना जरुरी है, बीन्स और भी बहुत से फायदे है। प्रग्नेंसी में महिलाओं को बीन्स के साथ साथ ताजे फल , हरी सब्जिया , सूखे मेवे, दूध, दही और अंडो का भी सेवन करना चाहिए।

गर्मी से चेहरा काला पड़ गया है तो यह करें

चेहरे का कालापन

गर्मी का मौसम आते ही घर से बाहर निकलने में ही डर सा लगने लगता है, क्योंकि धूप के कारण पसीना, गर्मी अधिक लगने जैसी समस्याएं होने लगती है। इसके अलावा आपकी ख़ूबसूरती पर भी इसका असर दिखाई देने लगता है, क्योंकि धूप की किरणों का प्रभाव बॉडी के जिन अंगो जैसे की चेहरा, बाजू आदि पर पड़ता है, तो उन पर टैनिंग इक्कठी होने के कारण स्किन काली पड़ने लगती है। ऐसे में चेहरे का कालापन, व् शरीर के अन्य अंगो का कालापन गर्मी के दौरान आपकी ख़ूबसूरती को कम कर सकता है। और आपने देखा भी होगा इसी डर के कारण लडकियां अपने मुँह को अच्छे से ढक कर चलती है, ताकि उन्हें कालेपन की समस्या न हो। ऐसे में गर्मी के दौरान स्किन की बेहतर केयर करनी चाहिए ताकि इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

गर्मी में चेहरे के कालेपन को दूर करने के टिप्स

गर्मी के दुष्प्रभाव के कारण चेहरे की स्किन के कालेपन को दूर करने के लिए आप बहुत से तरीको का इस्तेमाल कर सकते है। जो न केवल चेहरे की रंगत को बनाएं रखने में मदद करता है बल्कि स्किन को कोमल भी बनाए रखने में मदद करता है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की गर्मी में चेहरे के कालेपन को दूर करने के लिए आप क्या कर सकते हैं।

लौकी

फोलेट, आयरन, विटामिन्स, कैल्शियम से भरपूर लौकी का सेवन से बॉडी को जितने फायदे मिलते हैं। उतना ही फायदा लौकी के छिलको के अंदर भी होता है, क्योंकि लौकी के छिलको का इस्तेमाल करने से चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप लौकी के छिलको को मिक्सी में पीसकर बारीक पेस्ट तैयार कर लें, उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से पूरे चेहरे पर लगाएं, और लगभग बीस से पच्चीस मिनट के लिए चेहरे पर लगे रहने दें, उसके बाद ठन्डे पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को अच्छे से साफ़ कर लें। ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें पूरी गर्मियां आपको चेहरे से जुडी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलेगी।

टमाटर

टमाटर भी गर्मी के कारण चेहरे पर होने वाले कालेपन को दूर करके स्किन को ग्लोइंग बनाने में मदद करती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप टमाटर को अच्छे से पीसकर इस पेस्ट से दो से तीन मिनट चेहरे की मसाज करें, और इसे चेहरे पर ही छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से चेहरे को धो दें, इस उपाय को हफ्ते में दो से तीन बार करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

निम्बू और शहद

शहद जहां चेहरे की नमी को बनाएं रखने में मदद करता है, वहीँ निम्बू चेहरे पर होने वाली मृत कोशिकाओं को हटाकर चेहरे की रंगत को निखारने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल के लिए दो चम्मच निम्बू के रस में एक चम्मच शहद डालकर अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं। और जब तक स्किन अच्छे से इसे सोख न ले ऐसे ही इस पेस्ट को चेहरे पर लगे रहने दें। इस उपाय को नियमित करें आपको इसका असर अपने चेहरे पर जरूर दिखाई देगा, और गर्मियों में भी आपकी स्किन को ग्लोइंग बने रहने में मदद मिलती है।

कच्चा दूध

रुई की मदद से कच्चे दूध की अपनी स्किन पर लगाएं और उसे सूखने के लिए छोड़ दें, और सूखने के बाद ठन्डे पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को अच्छे से साफ़ कर लें। इस उपाय को रात को सोते समय और सुबह नहाने से पहले दिन में दो बार नियमित करें।

तिल

एक मुट्ठी तिल लें, और इसे अच्छे से पीस लें, अब इसे आधे कप पानी में डालकर बीस मिनट के लिए रखें। अब इसे छान लें, और इस पानी को चेहरे पर लगाएं। और इसे सूखने के लिए छोड़ दें, नियमित ऐसा करके अपने मुँह को साफ़ करें। ऐसा करने से भी धूप के कारण झुलसी त्वचा को ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है।

एलोवेरा

एलोवेरा के पत्ते को काट कर उसका ताजा जैल निकालकर चेहरे की दो मिनट अच्छे से मसाज करें, उसके बाद इस जैल को बीस मिनट के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद चेहरे को साफ पानी से धो लें, इस उपाय को नियमित करें इससे न केवल गर्मी के कारण चेहरे पर होने वाले कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है। साथ ही इससे स्किन की कोमलता को बनाएं रखने के साथ स्किन पर होने वाले दाग धब्बो को दूर करने में भी मदद मिलती है।

खीरा

खीरे का रस या खीरा को पीसकर एक पेस्ट तैयार करें अब इसे चेहरे पर लगाकर दो मिनट मसाज करें। उसके बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद चेहरे को ठन्डे पानी से साफ़ कर दें। यह उपाय भी गर्मी में भी चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

बेसन

एक चम्मच बेसन, चुटकी भर हल्दी, निम्बू का रस, थोड़ा पानी मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसे मास्क की तरह चेहरे पर लगाकर छोड़ दें, ऐसा करने से भी चेहरे को प्राकृतिक रूप से ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है।

दालचीनी

आधा चम्मच दालचीनी पाउडर में दो चम्मच निम्बू का रस मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अच्छे से चेहरे पर लगाएं और चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद चेहरे को अच्छे से साफ़ कर लें।

पपीता

पपीते के गुद्दे को पीसकर उसमे थोड़ा सा निम्बू का रस मिलाकर उससे चेहरे की अच्छे से मसाज करें। मसाज करने के बाद चेहरे को पांच मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें, उसके बाद ठंडे पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को अच्छे से साफ कर लें। इस उपाय को करने से भी गर्मी के कारण चेहरे पर होने वाली परेशानी को दूर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जो गर्मियों में चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा गर्मियों में जितना हो सके सनस्क्रीन लगाकर और बॉडी को अच्छे से ढक कर निकलना चाहिए। साथ ही ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल आप चेहरे के अलावा बॉडी के बाकी अंगो के लिए भी कर सकते हैं जिससे उन अंगो के कालेपन को दूर करने में भी मदद मिलती है।

क्या घी खाने से सामान्य प्रसव होता है

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गर्भवती महिला का सही खान पान प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करता है। और ज्यादातर महिलाएं डिलीवरी के दौरान चाहती है की उनकी नोर्मल डिलीवरी हो क्योंकि नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। लेकिन आपकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन यह बता पाना तो डॉक्टर के लिए भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे में घर के बड़े बुजुर्ग पुराने समय से ही सलाह देता हैं की गर्भवती महिला को ऐसा करना चाहिए या वैसा करना चाहिए इससे नोर्मल डिलीवरी होती है। ऐसी ही एक सलाह होती है की प्रेगनेंसी के नौवें महीने के लगते ही महिला को घी का सेवन शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि घी का सेवन करने से नोर्मल डिलीवरी होती है।

क्या घी का सेवन करने से होती है नोर्मल डिलीवरी?

जी नहीं, ऐसा कुछ नहीं होता है क्योंकि गर्भ में शिशु की मूवमेंट और महिला के स्वास्थ्य पर ही डिलीवरी निर्भर करती है। लेकिन घी का सेवन करने से नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है। क्योंकि घी में रेचक के गुण होते हैं जो गर्भाशय में संकुचन उत्त्पन्न करने में मदद करता है। साथ ही इससे गर्भाशय की सतह में चिकनाहट होती है जिससे गर्भवती महिला का सामान्य प्रसव हो सकता है। लेकिन जरुरी नहीं है की ऐसा ही हो, साथ ही आप यदि इसका सेवन करती है तो इसे दूध में डालकर, या अपनी सब्जियों में शामिल कर सकती है।

घी का सेवन करना सही है या गलत

प्रेगनेंसी के नौवे महीने में गर्भवती महिला को 200 से 300 कैलोरी की आवश्यकता होती है, लेकिन इस कैलोरी की जरुरत केवल घी से पूरी की जाए यह भी गलत होता है। बल्कि आपको संतुलित खान पान के साथ घी का सेवन करते हुए शरीर को स्वस्थ रखना चाहिए। साथ ही यदि आपका शिशु कमजोर है, गर्भवती महिला कमजोर है, तो इसके लिए आप एक बार डॉक्टर से राय ले सकती है की गर्भवती महिला के लिए कितना घी का सेवन सही होता है। क्योंकि यदि आप घी का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं तो इसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी भी हो सकती है।

इसके कारण महिला का वजन अधिक बढ़ जाता है जो की डिलीवरी के बाद घटाना भी मुश्किल हो सकता है, इसके कारण दस्त, डायरिया, उल्टी, जैसी परेशानी का सामना भी आपको अधिक करना पड़ सकता है। साथ ही यदि आप चाहती है की आपकी नोर्मल डिलीवरी हो तो इसके लिए सबसे जरुरी होता है की आप स्वस्थ रहें, हल्का व्यायाम करें, अपने खान पान का ध्यान रखे, समय से अपनी जांच करवाएं, शरीर में पोषक तत्वों की कमी न होने दें, आदि।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के घी का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, इसके अलावा गर्भवती महिला यदि सामान्य प्रसव चाहती है तो उसके चक्कर में महिला को किसी भी तरह का जोर अपने शरीर पर नहीं डालना चाहिए। क्योंकि यदि आप ऐसा करती हैं तो इसके कारण गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की समस्या बढ़ सकती है। और यदि आप नियमित मात्रा में घी का सेवन करती हैं तो ऐसा करने से शिशु का विकास करने के साथ महिला को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।

शिशु को बोलना का कैसे सिखाये

शिशु को बोलना कैसे सिखाये, कैसे करे बेबी की मदद बोलने में, बेबी कब बोलना शुरू करता है

घर में छोटे शिशु की उपस्थिति किसी त्यौहार से कम नहीं होती। छोटे बेबी के बोलने का सब बहुत बेसब्री से इंतज़ार करते है।

बच्चे अपने माता पिता से ही बोलना सीखते है या यु कहे की बेबी जो सुनते है, देखते है वही सीखते है इसीलिए हम ही अपने शिशु की भाषा को सहज सकते है।

शिशु कब बोलता है ?

  • हमे ये जानकार हैरानी होगी की शिशु पैदा होते ही हमसे बात करने या हमे अपनी बाते समझाने लगता है। कभी रो कर और कभी हंस कर वह अपने हर हाल को हमे समझाता है।
  • चार महीने का बेबी आवाजों को पहचानना सिख जाते है। आवाज़ की तरफ मुड़ कर देखना, हसना या ना में सर हिलाना ये हाव भाव एक शुरुआत होती है शिशु को सबसे जोड़ने की।
  • पांच से आठ महीने के बेबी हकलाना म और ब तुतलाना शुरू कर देते है।
  • नौ माह से एक साल के शिशु मामा, दादा, पापा बोलना शुरू कर देते है।
  • एक साल से दो साल तक के बच्चे दो शब्द वाले अक्षर बोलना सिख जाते है, हमारी कहि बातो को अपनी टूटी फुंटी भाषा में बुदबुदाते है।
  • दो से तीन साल की उम्र के बेबी छोटे छोटे सवाल पूछना शुरू कर देते है। एक बार में एक बात समझने लगते है।
  • तीन से चार साल के बेबी प्लेवे स्कूल (छोटे स्कूल) में जाकर कविताये बोलना भी सिख जाते है।

पर उनकी प्राथमिक भाषा वही होती है जो वो हमसे सीखते है।

बेबी की बोलने और सिखने में मदद कैसे करे ?

बच्चा अपने घर और आसपास के माहौल से ही भाषा बोलना सीखता है। तो उस हिसाब से हम ही अपने बच्चो के पहले टीचर। तो देखते है बच्चो को बोलना कैसे सिखाये ?

  • अपने शिशु के साथ बातचीत करते रहे, या उसके साथ किसी न किसी खेल में शामिल हो।
  • शिशु भले ही बोलेगा नहीं पर आपकी भाषा को सुनेगा और समझेगा जरूर।
  • अपने बेबी को इशारो के साथ चीजे समझाए जैसे की पानी पिलाते समय “प्लीज हैव वाटर” बोलिये, जिससे बच्चे को अनुमान हो जायेगा की पानी को वाटर कहते है।
  • अपनी बात बोलने के बाद रुक कर बच्चे को ड देखे की बेबी का क्या रिस्पांस है।
  • अपने बेबी कोई भी प्ले कीजिये जिससे बच्चे एक्स्ट्रा एक्टिविटी में शामिल होंगे।
  • बेबी को शीशे के आगे ले जा कर पूछिए की “ये कौन है ?”
  • बेबी से उसी लहजे में बात करे जैसे आप किसी बड़े व्यक्ति से करते है।
  • बच्चो को बॉडी पार्ट्स की तरफ इशारा करते हुए समझाइये जैसे नोज, आईज।
  • बेबी को कहानी पढ़ कर सुनाये।
  • रात को सोते समय लोरी गा कर सुलाए।

ध्यान देने योग्य बातें

कुछ बेबी सामान्य बच्चो से थोड़ा लेट बोलते है, पर उसके लिए जरुरी है की बच्चे अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दे। कुछ निचे दी गयी बातों का ध्यान रखें अगर ऐसा कुछ होता है तो शिशु को डॉक्टर को जरूर दिखाए।

  • बच्चा 16 से 18 माह तक एक भी शब्द ना बोले।
  • बेबी 18 महीने तक 2 अक्षर वाले शब्द बोलकर इससे आगे ना बोल पाए।
  • एक साल की उम्र होने पर भी किसी भी शब्द का ना प्रयोग करना।

अगर आपको इनमे से कोई भी झलक अपने शिशु में दिखे तो अपने शिशु को डॉक्टर के पास जरूर ले कर जाए।

स्वस्थ और फिट रहने के लिए दिनचर्या में क्या-क्या करना जरुरी है

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आज कल हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी बिमारी से जूझ रहा है या मोटापे की समस्या से परेशान हैं। और इसका कारण कोई और नहीं है बल्कि आप खुद हैं क्योंकि यदि आप अपनी सेहत के प्रति लापरवाही करते है, अपनी बॉडी की फिटनेस का ध्यान नहीं रखते हैं अपनी दिनचर्या को सही नहीं रखते है तो ऐसा करने से आपको कोई न कोई बिमारी घेर लेती है और शरीर से जुडी कोई न कोई परेशानी लगी रहती है। ऐसे में यदि आप फिट रहना चाहते हैं, और चाहते हैं की आपको शारीरिक परेशानियों से बचे रहें तो इसका सबसे पहला इलाज होता है की आप अपनी दिनचर्या में परिवर्तन लाएं। क्योंकि यदि आप दिनचर्या सही होगी तो आपको स्वस्थ और फिट रहने में मदद मिलती है।

स्वस्थ और फिट रहने के लिए ऐसी हो दिनचर्या

हर व्यक्ति चाहता है की वो हमेशा फिट और स्वस्थ रहे लेकिन गलत दिनचर्या के होने के कारण बॉडी की फिटनेस के साथ स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में यदि आप फिट रहना चाहते हैं और चाहते हैं की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या से भी आप बचे रहें तो इसके लिए आइये जानते हैं की आपको क्या क्या करना चाहिए।

आहार में बनाएं संतुलन

स्वास्थ्य समबन्धी समस्या और बॉडी की फिटनेस के खराब होने का सबसे बड़ा कारण होता है की आप अपने आहार को सही से नहीं लेते है। जैसे की आपके खाने का सही समय न होना, भोजन में पौष्टिक तत्वों का शामिल न होना, जंक फ़ूड व् तेलीय आहार का अधिक सेवन करना, आदि। ऐसे में यदि आप चाहते हैं की फिट रहें तो इसके लिए सबसे पहले आपको अपने आहार में संतुलन लाना चाहिए। ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हो। और आहार से जुडी इन बातों का ध्यान रखें।

  • भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, व् अन्य मिनरल्स को भरपूर मात्रा में शामिल करें।
  • भोजन को खाते समय साफ सफाई का ध्यान रखें, और अच्छे से चबा चबा कर भोजन का सेवन करें।
  • दिन में तीन बड़े मील लेने की बजाय छह छोटे मील बनाएं इससे आपको फिट रहने साथ ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलेगी।
  • खाना खाने के बाद कम से कम पंद्रह मिनट तक चुप रहें ऐसा करने से आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदा मिलता है।
  • रात का भोजन हल्का लें, और समय से भोजन कर लें, इससे आपकी आहार की दिनचर्या को बेहतर होने में मदद मिलेगी जिससे आपके स्वास्थ्य को सही रहने के साथ बॉडी को फिट रहने में भी मदद मिलेगी।

योगासन करें

योगा करने से व्यक्ति को बहुत फायदा मिलता है साथ ही किसी भी बिमारी में व्यक्ति को तेजी से ठीक करने में योगा बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में आपको चाहिए की आप नियमित अपने घर की छत पर ही आधा घंटा योगासन करें। ऐसा करने से आपको फिट रहने के साथ स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत से फायदे होते है। और कोई योगासन नहीं तो नियमित कपाल भाति और सूर्य नमस्कार कारण ही बहुत फायदेमन्द होता है।

व्यायाम भी है जरुरी

एक्सरसाइज करने से आपके शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। और ब्लड फ्लो बेहतर होने से ही आपके शरीर की क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। ऐसे में आपको सुबह समय से उठकर आधा घंटा वाक, दौड़ लगाना, साइकिलिंग करना आदि करना चाहिए, ऐसा करने से आपको बहुत फायदा मिलता है। और यदि आप नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं तो आपको स्वस्थ रहने के साथ फिट रहने में भी फायदा होता है।

पानी का करें भरपूर सेवन

पानी का भरपूर सेवन करने से आपके शरीर को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही पानी पीने से आपके शरीर में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर आपको स्वस्थ रखने में भी फायदा मिलता है। इसके अलावा पानी का भरपूर सेवन आपकी बॉडी को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। और पानी के इतने सारे फायदे उठाने के लिए हर व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन करना चाहिए।

नींद भी है जरुरी

एक दिन में कम से कम आठ घंटे एक व्यक्ति को सोना चाहिए सोने से व्यक्ति को आराम मिलता है, साथ ही उसे एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। और यदि आप नींद पूरी नहीं लेते हैं तो इससे आपको बहुत सी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या जैसे की तनाव, थकान, सर दर्द, मोटापा आदि परेशानियां होती है। साथ ही इससे आपका मस्तिष्क बुरी तरह प्रभावित होता है और आपकी बॉडी में हर एक काम को सुचारु रूप से करने के लिए मस्तिष्क एक अहम रोल निभाता है। ऐसे में आपको फिट रहने के साथ स्वास्थ रहने के लिए एक दिन में आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए और हो सके तो रात को समय से सोना चाहिए और सुबह समय से उठना चाहिए ताकि आपकी दिनचर्या सही हो सके।

स्वस्थ और फिट रहने के लिए इन बातों का भी खास ध्यान रखें

  • आलस न करें एक्टिव रहें।
  • किसी भी तरह के नशे के सेवन से दूर रहें।
  • खाने में अधिक मसाले व् तेल आदि इस्तेमाल न करें और जितना हो सके हेल्दी आहार ले और जंक फ़ूड से दूरी बनाकर रखें।
  • देर रात तक टीवी, फ़ोन लैपटॉप आदि का इस्तेमाल न करें, यदि कोई जरुरी काम है तो रात को समय से सो जाएँ और सुबह समय से उठकर काम करें।
  • वजन को नियंत्रित रखें न ही आपका वजन बहुत ज्यादा होना चाहिए, और न ही बहुत कम होना चाहिए।
  • तनाव न लें जितना हो खुश रहने की कोशिश करें इससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने और इन्हे अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आपको अपने आप को फिट रखने और स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी। और यदि आपकी दिनचर्या सही होती है और आप फिट रहते हैं तो आपको हमेशा ऊर्जा से भरपूर रहने में फायदा मिलता है। साथ ही आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है।