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खजूर खाने के फायदे और प्रेगनेंसी में कब से और कितने खजूर खाने चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों से सम्पूर्ण आहार को महिला को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। और खजूर भी एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है। और यदि गर्भवती महिला इसका सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला के साथ भ्रूण को भी बहुत से फायदे मिलते हैं। लेकिन खजूर को प्रेगनेंसी के दौरान सही मात्रा में लेना भी बहुत जरुरी होता है। ताकि प्रेग्नेंट महिला को इसके खाने से केवल फायदे ही मिलें और किसी भी तरह का नुकसान न हो।

प्रेगनेंसी में कब से और कितना खजूर खाना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान महिला जिस भी आहार का सेवन करती है उसे सही मात्रा में लेना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन प्रेग्नेंट महिला और शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। वैसे तो खजूर पोषक तत्वों से भरपूर होता है और प्रेगनेंसी के दौरान खजूर का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद भी होता है। लेकिन प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को खजूर का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि खजूर की तासीर गर्म होती है और प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्म तासीर की चीजों का सेवन गर्भ में पल रहे शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से गर्भवती महिला नियमित चार से पांच खजूर का सेवन कर सकती है, क्योंकि यह गर्भवती महिला और भ्रूण के लिए फायदेमंद होता हैं, लेकिन दूसरी तिमाही में भी जरुरत से ज्यादा भी खजूर का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में खजूर का सेवन करने के फायदे

गर्भवती महिला यदि खजूर का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को बहुत से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे होने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान खजूर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

फाइबर

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है जिसके कारण महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन इस समस्या से निजात पाने के लिए महिला खजूर का सेवन कर सकती है क्योंकि खजूर में फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। जो पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करने के साथ मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

फोलिक एसिड

प्रेगनेंसी के खून की कमी होने के कारण गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। लेकिन खजूर का सेवन करने से गर्भवती महिला की बॉडी में खून की मात्रा को पर्याप्त बनाये रखने में मदद मिलती है क्योंकि खजूर में भरपूर मात्रा में आयरन व् फोलिक एसिड मौजूद होता है।

पोटैशियम

खजूर में फाइबर के साथ पोटैशियम भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला के शरीर कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बैलेंस बनाये रखने के साथ दिल को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। साथ ही बॉडी में पोटैशियम की मात्रा भरपूर होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को ब्लड प्रेशर से जुडी समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

प्रोटीन

मांसपेशियों में खिंचाव के कारण गर्भवती महिला को बॉडी में दर्द व् कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में प्रोटीन की बॉडी में पर्याप्त मात्रा के लिए गर्भवती महिला खजूर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है। क्योंकि खजूर में मौजूद प्रोटीन गर्भवती महिला को मांसपेशियों में खिंचाव के कारण होने वाले दर्द की समस्या से राहत दिलाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की मांसपेशियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है। इसके अलावा गर्भवती महिला की मांसपेशियों की मजबूती को भी बरकरार रहने में मदद मिलती है।

मैग्नीशियम

मैग्नीशियम का गर्भवती महिला की बॉडी में भरपूर होना गर्भवती महिला को कमजोरी की समस्या से बचाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में मदद करता है।

फोलेट

गर्भ में शिशु को भरपूर मात्रा में फोलेट न मिलने के कारण जन्म दोष यानी जन्म के समय होने वाली बीमारियों का खतरा रहता है लेकिन खजूर का सेवन करने से शिशु को इस परेशानी से बचाने में मदद मिलती है। क्योंकि खजूर में फोलेट भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जिससे शिशु को शारीरिक व् मानसिक रूप से जन्म के समय होने वाली हर परेशानी से बचाने में मदद मिलती है।

पोषक तत्व

खजूर में आयरन, फोलेट, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, पोटैशियम से पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने और ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं। साथ ही खजूर का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान खजूर का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से खजूर का सेवन जरूर करना चाहिए, एक बार आप चाहे तो खजूर का सेवन प्रेगनेंसी में किस तरह करना चाहिए इसके बारे में डॉक्टर से भी पूछ सकते हैं।

क्या एक मांगलिक लड़की को मांगलिक लड़के से ही शादी करनी चाहिए?

मांगलिक होने का अर्थ होता है की किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल का अधिक प्रभावी होना, शादी के लिए मंगल को जिन स्‍थानों पर देखा जाता है वे लग्‍न, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में होते है, और इनमे से आठवें और बाहरवें स्थान पर मंगल के बहाव को खराब माना जाता है, और इसके बारे में चर्चा जब होती है, जब घर में शादी होती है, तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते की मांगलिक लड़के को केवल मांगलिक लड़की से ही शादी करनी चाहिए या नहीं?

आम तौर पर मांगलिक शब्द तब सुनाई देता है, जब घर में लड़के या लड़की की शादी होने वाली होती है, और कुंडली को मिलाते समय यह बात सामने आती है, कभी लड़का मांगलिक होता है, तो कभी लड़की मांगलिक , ऐसे में कहा जाता है, की एक मांगलिक लड़के की शादी एक मांगलिक लड़की से ही हो सकती है, ऐसा कहा जाता है की लड़की में तो मांगलिक तो होना ही नहीं चाहिए, लड़के में मांगलिक दोष होने पर उसका कुछ निवारण तो किया जा सकता है, परंतु लड़की में मांगलिक दोष के होने पर शादी के बाद वैवाहिक जीवन पूरी तरह से ख़राब हो जाता है।

शादी के लिए यदि देखा जाएँ तो माना जाता है, जो की ज्योतिष बताते है की मंगल भी परिस्थितियों के अनुसार ही काम करता है, यदि व्यक्ति की कुंडली में मंगल अच्छे स्थान पर होता है, तो वो अच्छे परिणाम देता है, यदि नहीं तो वो वो बुरा प्रभाव भी छोड़ता है, लग्‍न का मंगल व्‍यक्ति के व्‍यक्तित्‍व को बहुत अधिक तीक्ष्‍ण बना देता है, तो चौथे का मंगल व्यक्ति को काफी कठिन पारिवारिक कठिनाइयों को देता है, सातवें स्‍थान का मंगल मंगल आपको अपने साथी के प्रति कठोर बनाता है, तो आठवें और बारहवें स्‍थान का मंगल आपकी आयु और शारीरिक जटिलताओं पर असर डालता है।

ये सब बातें मंगल की स्थिति पर निर्भर करती है, की वो आपके लिए अच्छी तरह से प्रभावी है या बुरी तरह से, मांगलिक व्यक्तियों का यह विशेष गुण होता है, मांगलिक व्यक्ति अपनी जिमेवारी को पूरी निष्ठा से निभाता है, कठिन से कठिन कार्य को समय से पहले पूरा करने की क्षमता उनमे होती है, उनके अंदर लीडरशिप की भावना भी होती हैं, मांगलिक लोग ज्यादा घुलते मिलते नहीं है, परंतु जब मिलते है, तो पुरे भाव के साथ, उन्हें गलत के आगे झुकना बिलकुल भी पसंद नहीं होता है, ऐसे की कुछ गुण मांगलिक व्यक्तियों में होते है।

क्या मांगलिक की शादी केवल मांगलिक से ही हो सकती है?

मांगलिक दोष को लेकर बहुत से अन्धविश्वास फैलें हुए है, जैसे की कई लोग ये कहते है की यदि लड़का मांगलिक नहीं है और लड़की मांगलिक है, तो लड़के की असमय मौत हो जाती है, या उनके बीच हमेशा कलह बना रहता है, या फिर उनका रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं टिक पाता है, और थोड़े ही समय के बाद वो अलग हो जाते है, ऐसे में जब लड़का या लड़की के माँ बाप शादी के लिए वर या वधु को ढूंढते है, और ये मांगलिक शब्द आता है, तो माँ बाप के लिए ये एक परेशानी का सबब बन जाता है, और इसके लिए वो बहुत से पंडितो की राय लेते है, ताकि इस समस्या का हल हो सकें।

परंतु लड़के या लड़की की शादी मांगलिक से होगी या गैर मांगलिक से ये बात उनकी राशि में बैठे राहु, केतु और शनि की स्थिति पर निर्भर करती है, कुछ लोग ये भी कहते है की मंगल का प्रभाव एक समय के बाद या एक उम्र के बाद खत्म भी हो जाता है, तो कुछ कहते है की इसका प्रभाव सारी उम्र रहता है, और ये भी कहा जाता है, की यदि लड़का मांगलिक होता है, तो उसकी शादी उस लड़की से हो सकती है जो मांगलिक नहीं है और जिसके राहु, केतु और शनि दूसरे, चौथे, सांतवें, आंठवें और बाहरवें भाव में बैठे हों, लेकिन अगर राहू केतू और शनि इन भावों में नहीं है, तो उसकी शादी गैर मांगलिक से नहीं हो सकती है।

और यदि आप इन सबको मानते है तो आप अपने पंडित की राय ले सके है, क्योंकि ज्योतिष अच्छे से कुंडली का मिलान करके आपको सही राय दे सकते है, की क्या आप यदि लड़का मांगलिक है तो उसकी शादी किसी ऐसी लड़की से कर सकते है जो मांगलिक नहीं है, या फिर उसकी शादी मांगलिक से ही होगी, और यदि गैर मांगलिक से आप शादी करना चाहते है, तो इसके क्या उपाय होते है, ऐसा ही आप लड़की के लिए भी कर सकते है, वो आपको इस बारे में आपको अच्छे से बता सकते है, और आपको सही राय दे सकते है।

प्रेग्नेंट महिला को शादी पार्टी में जाने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

प्रेग्नेंट महिला को शादी पार्टी, प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कभी अचानक से किसी रिश्तेदार या फ्रेंड की शादी या किसी अन्य जन्मदिन, शादी की सालगिरह की पार्टी में जाना पड़ सकता है। और प्रेगनेंसी कोई बिमारी नहीं है की आपको हर जगह जाने की मनाही हो। बल्कि प्रेगनेंसी एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जहां महिला को अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए। ताकि महिला या भ्रूण को कोई समस्या न हो। ऐसे में यदि महिला स्वस्थ है तो वो किसी शादी या पार्टी में जा सकती है।

लेकिन शादी या पार्टी में जाने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है की महिला अपनी सेहत के साथ किसी भी तरह की लापरवाही करें। बल्कि शादी या पार्टी में जाने पर आपको अपनी सेहत का दुगुना ध्यान रखना चाहिए। ताकि आप पार्टी को एन्जॉय करने के साथ प्रेगनेंसी में होने वाली दिक्कतों से बचे रहें। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को शादी या पार्टी में जाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

ध्यान दे सेहत पर

  • यदि महिला को किसी शादी या पार्टी में बुलाया गया है।
  • तो पहले महिला इस बात का ध्यान दें की क्या वो शारीरिक रूप से स्वस्थ महसूस कर रही है।
  • यदि हाँ, तो महिला उस शादी या पार्टी में जाएँ।
  • और यदि महिला अच्छा महसूस नहीं कर रही है तो महिला को नहीं जाना चाहिए।
  • क्योंकि ऐसा नहीं है की आपके बिना वो प्रोग्राम नहीं होगा।
  • बल्कि आपके जाने से आपकी सेहत सम्बन्धी परेशानी बढ़ सकती है।
  • ऐसे में महिला को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखने के बाद ही किसी फंक्शन में जाने का फैसला लेना चाहिए।

कपडे व् जूतों का रखें ध्यान

  • प्रेग्नेंट महिला को फंक्शन में जाने के लिए महिला को कपड़ों व् जूतों का चुनाव सही करना चाहिए।
  • जैसे की यदि गर्मी का मौसम है तो महिला को ज्यादा भारी, चुभने वाले, टाइट कपडे नहीं पहनने चाहिए।
  • क्योंकि इसके कारण गर्मी के मौसम में महिला दिक्कत का अनुभव कर सकती है।
  • ऐसे में सूती कपडे पहनना बेहतर विकल्प होता है।
  • सूती कपड़ों में प्रेग्नेंट महिला को गर्मी से बचे रहने के साथ आरामदायक महसूस होने में मदद मिलती है।
  • और यदि सर्दी का मौसम है तो महिला को अपने सिर, हाथ, पैर, सभी को अच्छे से ढक कर जाना चाहिए।
  • ताकि प्रेग्नेंट महिला को सर्दी के कारण होने वाली दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • कपड़ों के साथ महिला को आरामदायक चप्पल ता जूते पहनकर जाना चाहिए।
  • ज्यादा ऊँची हील के जूते चप्पल पहनने से बचना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को शादी पार्टी में जाने पर बचना है ज्यादा देर खड़े रहने से

  • शादी या पार्टी में जाने पर लोगो से मिलने के लिए आप ज्यादा देर तक एक ही जगह पर खड़ी न रहें।
  • क्योंकि ज्यादा देर तक एक ही जगह खड़े रहने से आपको पैरों में सूजन, थकावट या कोई अन्य परेशानी हो सकती है।
  • ऐसे में आपको ज्यादा देर एक जगह खड़े रहने से बचना चाहिए। और आरामदायक जगह पर बैठ जाना चाहिए।
  • साथ ही उठते व् बैठते समय सहारा लेकर ही बैठें, न ही झटके से खड़ी हो और न ही बैठें।
  • क्योंकि इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को परेशानी हो सकती है।

खान पान का ध्यान रखें

  • जब भी आप किसी शादी या पार्टी में जाते हैं तो वहां पर अलग अलग तरह के पकवान बने होते हैं।
  • और उन पकवानों में बहुत तेज मसाले व् तेल आदि का इस्तेमाल भी होता है।
  • ऐसे में आपको खाना खाते समय इस बात का ध्यान रखना है की आप बहुत ज्यादा न खाएं।
  • और उतना ही खाएं जितना आपसे खाया जा रहा है।
  • साथ ही यदि आपका खाना खाने का मन नहीं है तो फ्रूट्स, सलाद, आदि का सेवन भी आप वहां पर कर सकती है।
  • इसके अलावा किसी का इंतज़ार नहीं करें की आपके साथ कोई खायेगा तभी आप खाएंगी।
  • यदि आपको भूख लगी है तो आप अकेले ही खा लें।

प्रेग्नेंट महिला को शादी पार्टी में जाने पर रखनी है नशे से दूरी

  • आज कल कोई भी शादी या पार्टी में अल्कोहल या धूम्रपान आदि का होना आम बात होती है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को उस जगह पर नहीं खड़े होना चाहिए जहां लोग ऐसा कर रहें हो।
  • और हो सके तो ऐसे लोगो के पास खड़े होने से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि केवल सेवन करने से ही नहीं बल्कि इसकी सुगंध से भी प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत हो सकती है।

डांस से बचें

  • हो सकता है की शादी या पार्टी में कोई आपको डांस करने के लिए कहें।
  • या डांस करने के लिए आपको खींचे, लेकिन आप उन्हें मना कर दे की आपके साथ ऐसा न करें।
  • और डांस तो आपको बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में शिशु को भी दिक्कत हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को शादी पार्टी में जाने पर बचना है ज्यादा शोर से

  • यदि आप किसी शादी या पार्टी में गए हैं तो आजकल वहां पर डीजे का बजना आम बात है।
  • ऐसे में उस जगह के बिल्कुल पास बैठने की बजाय आपको थोड़ा दूर बैठना चाहिए।
  • क्योंकि ज्यादा शोर के कारण गर्भ में शिशु चौक सकता है व् ज्यादा हलचल कर सकता है।
  • साथ ही शिशु की सुनने की क्षमता पर भी इसका असर पड़ सकता है।
  • ऐसे में शिशु को कोई दिक्कत न हो इससे बचाव के लिए महिला को ज्यादा शोर में बैठने से बचना चाहिए।

ज्यादा देर न रुकें

  • गर्भवती महिला यदि किसी शादी या पार्टी में जाती भी है तो जरुरी नहीं है की महिला बहुत देर के लिए वहां रुके।
  • थोड़ी देर रुकने के बाद आपको घर आ जाना चाहिए।
  • क्योंकि ज्यादा देर रुकने के कारण प्रेग्नेंट महिला को हो सकता है परेशानी का अनुभव हो।
  • ऐसे में महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने के लिए गर्भवती महिला को ज्यादा देर शादी या पार्टी में रुकने से बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान प्रेग्नेंट महिला को रखना चाहिए। यदि महिला किसी शादी या पार्टी में जाती है। इन टिप्स का ध्यान रखने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को शादी पार्टी का आनंद लेने का मज़ा मिलने के साथ स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है। क्या आप भी गर्भवती हैं, यदि हाँ तो शादी में पार्टी में जाने पर इन टिप्स का जरूर ध्यान रखें।

होली के रंगों से त्वचा खराब हो गई है? तो अपनाएं ये टिप्स!

रंगों के पर्व होली पर रंग न हो तो त्यौहार का मजा ही नहीं आता। लेकिन होली खत्म हो जाने के बाद त्वचा और बालों में लगे रंग को हटाना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आपको चाहिए की होली खेलने से पहले और बाद में कुछ तैयारियां कर लें। ताकि रंगों के प्रभाव से त्वचा और बालों को बचाया जा सके। आज हम आपको कुछ ऐसी ही टिप्स बताने जा रहे है जिनकी मदद से होली के रंगों से अपनी त्वचा को बचाया जा सकता है।

होली आने में बहुत कम समय बचा है और लोगों ने होली के लिए अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी। आजकल बाज़ारों में भी एक नई रौनक देखने को मिल रही है। जहा एक तरफ लोग अपने दोस्तों के साथ होली खेलने के लिए रंगों का चयन कर रहे है वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसी चिंता में डूबे हुए है की होली के बाद त्वचा को होने वाले नुकसान से कैसे बचा जाए?

होली के दिन रंगों से खेलना तो सभी को बहुत पसंद आता है लेकिन होली खत्म होने के बाद त्वचा और बालों का जो हाल होता है उसे कोई नहीं भूल सकता। जहां एक ओर त्वचा में रंग समा जाता है वहीं दूसरी ओर बालों में भरा रंग और गंदगी को निकालने में पूरा हफ्ता लग जाता है।

ऐसे में आपको चाहिए की कुछ ऐसे उपायों का इस्तेमाल किया जाए जिनकी मदद से आपकी त्वचा को कोई नुकसान भी न हो और उसपर से सारा रंग भी निकल जाए। दरअसल होली के रंगों में कई तरह के केमिकल होते है जो त्वचा और बालों के स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होते है। इनसे छुटकारा पाने की आप कितनी ही कोशिश क्यों न कर लें लेकिन होली के बाद के एक हफ्ते तक आपको इन रंगों से जूजना ही पड़ता है।

आप भले ही आर्गेनिक रंगों से होली खेल रहे है लेकिन सामने वाले के हाथ में कौन से रंग है इस बात का पता तो तभी लगता है जब वो आपकी त्वचा पर लग चुका होता है। जिसके परिणामस्वरूप आपके बाल और त्वचा कुछ समय के लिए क्षतिग्रस्त हो जाती है।

इसीलिए आज हम आपको रंगों से खराब हुई त्वचा को ठीक करने के कुछ घरेलू और आसान तरीके बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आप होली के रंगों को अपनों त्वचा और बालों से बिना किसी परेशानी से निकाल पाएंगे। और सबसे बड़ी बात इन तरीकों के लिए आपको महंगी क्रीम्स और कॉस्मेटिक लाने की भी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि ये सभी उपाय आपके घर में ही मौजूद है। इसके साथ ही होली खेलते समय आपको कुछ खास बातों का भी ध्यान रखना होगा ताकि रंगों का प्रभाव अधिक समय तक न रहे।

होली के रंगों से त्वचा को नुकसान हुआ है? ये है उपाय 

# 1 होली खेलने से पहले :-

Holi खेलने के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान हमारी त्वचा और बालों को ही नुकसान पहुंचता है। ऐसे में आपको चाहिए की होली खेलने से पहले भी कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखें ताकि त्वचा और बालों को रंगों के हानिकारक प्रभाव से बचाया जा सके। आगे हम आपको होली खेलने से पहले किन-किन बातों का ध्यान रखें इस बारे में बताने जा रहे है।

त्वचा की रक्षा के लिए :

– होली के रंगों के दुष्प्रभाव से त्वचा को बचाने के लिए होली खेलने से 20 मिनट पहले 20 SPF वाला सनस्क्रीन त्वचा पर लगा लें।

– यदि आपकी त्वचा पर फोड़े, फुंसी और pimple आफी है तो 20 SPF से अधिक वाले सनस्क्रीन का प्रयोग करें।

– वैसे तो अधिकार सनस्क्रीन में मॉइस्चराइजर होता ही है लेकिन अगर आपकी त्वचा रुखी है तो सनस्क्रीन लगाने के बाद कुछ समय इन्तजार करे और उसके बाद त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगायें।

– अपनी बाजु तथा सभी खुले अंगों पर मॉइस्चराइजर लोशन या क्रीम का प्रयोग करें। ये आपकी त्वचा को रंगों से बचाने में मदद करेगा और उसे रुखा नहीं होने देगा।

बालों की रक्षा के लिए :

– त्वचा के बाद बारी आती है बालों की। इनके लिए होली खेलने से पहले बालों पर हेयर serum या कंडीशनर का इस्तेमाल करें।

– इसे बालों को गुलाल आदि रंगों की वजह से होने वले सूखेपन से सुरक्षा मिलेगी।

– ये तरीका आपके बालों को सूर्य की किरणों के प्रभाव से बचाने में भी मदद करेगा।

– वैसे आजकल बाज़ार में सनस्क्रीन वाले हेयर क्रीम में उपलब्ध है। आप चाहे तो इनका इस्तेमाल भी कर सकते है।

– इसके लिए थोड़ी सी हेयर क्रीम लेकर दोनों हथेलियों में लेकर बालों में हलकी-हलकी मालिश करें।

– आप चाहे तो इसके लिए नारियल तेल का भी इस्तेमाल कर सकते है।

– इससे रासयनिक रंगों से होने वाले बालों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

नाखूनों के लिए :

– त्वचा और बालों के अलावा हमारे नाखूनों को भी रंगों का हानिकारक प्रभाव झेलना पड़ता है। इसके लिए नाखूनों पर नेल वार्निश से मालिश करनी चाहिए।

– आप चाहे तो होली खेलने से पहले नाखूनों पर ट्रांसपेरेंट नेल पेंट लगाकर भी उन्हें रंगों के प्रभाव से बचा सकती है।

– और होली खेलने के बाद रिमोवर से इस नेल पेंट को हटा दे।

# 2 होली खेलने के बाद :-

Holi खेलने के बाद त्वचा पर लगे रंग को छुड़ाना काफी मुश्किल कार्य होता है। ऐसे में बजाय महंगी क्रीम्स और कॉस्मेटिक के इस्तेमाल के कुछ घरेलू तरीकों और इस्तेमाल करना बेहतर होता है। इन उपायों की मदद से आप त्वचा पर लगे रंग के छोटे-से-छोटे से दाग को भी हटा सकते है। इसके अलावा रंग पड़ने के कारण बालों में आए रूखेपन के लिए भी कुछ करना चाहिए। ताकि बालों को पहले की तरह मुलायम और शाइनी बनाया जा सके। आगे हम आपको होली के बाद रंगों को हटाने के लिए कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है। जिनकी मदद से त्वचा और बालों में लगे रंगों को हटाया जा सके।

त्वचा के लिए :

होली के रंगों से खुद को बचाना है तो ये करें

होली खेलने से बाद त्वचा से रंग को हटाना बेहद मुश्किल होता है। इसीलिए सब लोग उसे हटाने के लिए साबुन का प्रयोग करते है जबकि ये बिलकुल गलत है। क्योंकि साबुन के इस्तेमाल से त्वचा रुखी हो जाती है।

– इसीलिए होली खेलने के बाद अपने चेहरे को सबसे पहले साफ़ पानी से बार-बार धो लें।

– उसके बाद त्वचा पर क्लीजिंग क्रीम या लोशन का लेप लगा लें।

– कुछ देर रखने के बाद गीले कॉटन वूल से त्वचा साफ़ कर लें। और बाद में पानी से धो लें।

– आँखों के आसपास के क्षेत्र को साफ़ करना न भूलें।

– इसके लिए किसी हलके कपडे से त्वचा को हलके-हलके से साफ़ कर लें।

– क्लीजिंग जेल से चेहरे पर जमे रंग को साफ़ करने में काफी मदद मिलेगी।

– इसके लिए आप घरेलू तरीके का इस्तेमाल कर सकते है। घरेलू क्लीन्जर  को बनाने के लिए आधा कप ठंडे दूध में तिल, जैतून या सूर्यमुखी या कोई भी वनस्पति तेल मिला लें।

– अब रुई में इस मिश्रण में डुबोकर त्वचा को साफ़ करने के लिए इसका प्रयोग करें।

– तिल के तेल की मालिश त्वचा पर लगे रासायनिक रंगों को हटाने के लिए काफी मदद करती है। इससे न केवल रंग हटते है बल्कि त्वचा को सुरक्षा भी मिलती है।

– तिल के तेल की मालिश करने से सूर्य की किरणों के नुकसान से भी बचाया जा सकता है।

– नहाते समय शरीर को लूफ या वॉश कपडे की मदद से स्क्रब कर लें और नहाने के तुरंत बाद त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगा लें। ये त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करेगा।

– अगर त्वचा में खुजली हो रही है तो पानी के मग में दो चम्मच सिरका मिलाकर उसे त्वचा पर लगायें, इससे खुजली दूर होगी।

– यदि उसके बाद भी खुजली रहती है और त्वचा पर लाल चकत्ते या दाने उभर आये है तो इस स्थिति में डॉक्टर से मिलना सही रहेगा।

– होली के अगले दिन दो चम्मच शहद को आधा कप दही में मिलाकर थोड़ी हल्दी मिलाएं।

– इस मिश्रण का इस्तेमाल अपने चेहरे, बाजू और सभी खुले अंगों पर करें।

– 20 मिनट तक लगे रहने दे और उसके बाद साफ़ ताजे पानी से धो लें। ये त्वचा के कालेपन को हटाकर उसे मुलायम करने में मदद करेगा।

बालों के लिए :

– बालों में घुसे रंग और गुलाल को हटाने के लिए आपको सबसे पहले अपने बालों को बहुत से ताजे पानी से साफ़ करना होगा।

– अच्छी तरह से रंग निकल जाने के बाद हर्बल शैम्पू से अपने बाल धोएं।

– अपनी उँगलियों की मदद से शैम्पू को पुरे बालों में फैला लें। और पूरी तरह से लगाने के बाद पानी से बाल धो लें।

– अंतिम धुलाई के लिए आप बियर का इस्तेमाल करें।

– ये बालों से रंग को निकालकर उन्हें पोषण देकर वापस चमकदार बनाने में मदद करेगा।

– इसके लिए नींबू के जूस में बियर मिलाकर शैम्पू के बाद बालों में लगा लें।

– कुछ मिनट तक रखने के बाद बालों को साफ़ पाने से धो लें।

– इसके अलावा नारियल तेल में एक चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर इसे गर्म कर लें और अपने बालों में लगायें।

– एक तौलिया को गर्म पानी में भिगोकर निचोड़ लें। और इस तौलिया को सर पर लपेट लें।

– 5 मिनट तक पगड़ी की तरह बांधे रखने के बाद हटा लें।

– इस प्रक्रिया को 4-5 बार दोहराएँ। ये स्कैल्प में तेल को जमाने में मदद करेगा।

– एक घंटे बाद बालों को साफ़ ताजे पानी से धो लें।

– बाल पहले की तरह मुलायम और शाइनी हो जायेंगे साथ ही उनमे कलर भी नहीं रहेगा।

रंगों को हटाने के घरेलू तरीके :-

1. चेहरे पर लगे रंग को छुड़ाने के लिए आप खीरे का इस्तेमाल कर सकते है।

2. आलू के टुकड़ों को काटकर उन्हें फ्रिज में रखकर, आप इनका इस्तेमाल रंग हटाने के लिए कर सकती है।

3. त्वचा में हो रही जलन को कम करने के लिए आप खीरे या टी बैग्स का भी इस्तेमाल कर सकते है।

4. रंग उतारने के लिए आप चाहे तो दूध का इस्तेमाल भी कर सकते है। ये बेहतर मॉइस्चराइजर तो है ही साथ-साथ गाढ़े से गाढ़े रंग को भी आसानी से निकालने में मदद करेगा। साथ ही त्वचा को सॉफ्ट भी बनाए रखेगा।

5. होली खेलने से पहले रंगों की अच्छी तरह जाँच कर लें, यदि उनमे कोई भी खराबी है तो उनके इस्तेमाल से बचे। ये आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते है।

6. होली खेलने से पहले त्वचा पर अच्छे से तेल लगा लें। साथ ही सनस्क्रीन आदि क्रीम का इस्तेमाल करना न भूलें।

तो, ये थे कुछ उपाय जिनका प्रयोग आपको होली खेलने से पहले और होली खेलने के बाद करना है। ताकि खुद को रंगों के प्रभाव से बचा जा सके। लेकिन अगर त्वचा रंगों की वजह से खराब हो गई है तो ऊपर बताये गये तरीकों का इस्तेमाल करें। ये आपकी त्वचा और बालों में मौजूद रंग को आसानी से निकालने में मदद करेंगे। तो इस साल बिना किसी डर और परेशानी से मजे से होली खेले।

पेट में शिशु कब थकता है?

गर्भ में शिशु की हलचल

प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत सुखद पल होता है। गर्भधारण से लेकर डिलीवरी होने तक हर पल महिलाएं अपने आने वाले शिशु के बारे में सोचती रहती है। सबसे ज्यादा इन्तजार उन्हें अपने शिशु की पहली किक का होता है। सभी प्रेग्नेंट महिलाएं इस बात का बड़ी बेसब्री से इन्तजार करती हैं हैं की उनका नन्हा सा शिशु कब किक करेगा? क्यूंकि गर्भ में पल रहे शिशु की पहली हलचल महिला के लिए बहुत खास होती है। प्रेग्नेंसी के लगभग बीसवे सप्ताह के आस-पास शिशु गर्भ में हलचल करना शुरू कर देता है। और समय बढ़ने के साथ-साथ ये हलचल भी बढ़ने लगती है।

शिशु हमेशा गर्भ में मूव करते रहता है, अपने हाथ पैर चलाता है, और किक भी करता है। पर क्या आप जानती हैं किक करने के साथ-साथ शिशु और भी कई एक्टिविटी करता है। गर्भ में शिशु का दिल धड़कता है, शिशु हँसता है, रोता है, अंगड़ाई लेता है, अपना अगूंठा चूसता है, आपकी बातें सुनता है, सिर घुमाता है, बात करने पर किक करके जबाब भी देता है, अपनी पोजीशन बदलता है, डरता है, चौंकता है और थकता भी है।

जो शिशु जितना ज्यादा एक्टिव रहेगा वो उतना ज्यादा थकेगा। कुछ चीजें तो नार्मल होती हैं जिससे शिशु को थकान कम होती है, जैसे – अंगूठा चूसना, आंखे खोलना, आवाज सुनना, रियेक्ट करना। अब आप खुद ही सोचिये गर्भ में पल रहा नन्हा सा शिशु दिनभर इतनी सारी गतिविधियां करता है, तो एक समय आता है जब शिशु थक जाता है। सबसे ज्यादा थकान आपके कार्य पर निर्भर करती है।

अगर आप दिनभर बहुत ज्यादा काम करती हैं, कहीं बाहर घूमने जाती हैं या बहुत ज्यादा पैदल चलती हैं तो भी शिशु थक जाता है, यात्रा करती हैं, ज्यादा देर खड़ी रहकर बातें करती हैं तो शिशु ज्यादा थकान महसूस करता है। क्यूंकि आपके साथ शिशु का शारीरिक और मानसिक जुड़ाव है। आप थकावट महसूस करेंगी तो शिशु को भी थकान होगी। जब आपको ज्यादा थकान हो जाए तो समझिये शिशु भी थक गया है। और जब आप फ्रेश महसूस करती हैं तो समझ लीजिये आपका शिशु खुश है। अब आप इस बात को अच्छे से समझ गयी होंगी की शिशु को थकान कब होती है।

गर्भावस्था में कमजोरी महसूस होने पर यह करें

प्रेगनेंसी में कमजोरी

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी शारीरिक परेशानियों से गुजरती है। क्योंकि बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव, शिशु का शारीरिक विकास, और बॉडी में आने बदलाव के कारण शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना आम बात होती है। जिसके कारण चिड़चिड़ापन, थकावट व् कमजोरी महसूस हो सकती है, गर्भावस्था में बॉडी में यदि पोषक तत्वों की कमी होती है तो भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और साथ ही महिला यदि बहुत ज्यादा थका हुआ या कमजोरी का अनुभव करती है तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए। ताकि यदि किसी शारीरिक परेशानी के कारण ऐसा हो रहा है तो उसका समाधान किया जा सके।

प्रेग्नेंट महिला कमजोरी महसूस होने पर यह करें

गर्भावस्था में कमजोरी की समस्या से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला बहुत से उपाय का इस्तेमाल कर सकती है। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में कमजोरी महसूस होने पर किन किन टिप्स का इस्तेमाल करना चाहिए।

योगासन

यदि गर्भवती महिला को कमजोरी की समस्या रहती है तो सुबह समय से उठकर योगा करना इस समस्या से निजात पाने का सबसे आसान उपाय होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी में कमजोरी का कारण मांसपेशियों में अकड़न हो सकता है, या बॉडी में ब्लड फ्लो के सही न होने के कारण, तनाव के कारण, आदि अन्य कारणों की वजह से ऐसा हो सकता है। और योगासन करने से शारीरिक के साथ मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिलती है, और बॉडी में ऊर्जा का संचार भी होता है जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

आयरन युक्त आहार

बॉडी में खून की कमी के कारण एनीमिया की समस्या का खतरा रहता है जिसके कारण गर्भवती महिला कमजोरी का अनुभव कर सकती है। ऐसे में कमजोरी की समस्या से बचने के लिए महिला को ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे आयरन भरपूर मात्रा में हो। जिससे बॉडी में खून की कमी को पूरा करने के साथ गर्भवती महिला को कमजोरी की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिल सके। और आयरन की मात्रा को बॉडी में भरपूर करने के लिए गर्भवती महिला को अनार, चुकंदर, गाजर, सूखे मेवे आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

तरल पदार्थ

डिहाइड्रेशन की समस्या होने के कारण भी गर्भवती महिला थकान का अनुभव कर सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को तरल पदार्थो का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। क्योंकि बॉडी में तरल पदार्थो की मात्रा भरपूर होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है साथ ही बॉडी में डिहाइड्रेशन के कारण होने वाली परेशानियों से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन

यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है तो इसके कारण भी गर्भवती महिला को कमजोरी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए, ताकि बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर हो और गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सके। और इसके लिए कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

सोने का रखे ध्यान

प्रेगनेंसी में कम सोना और ज्यादा सोना दोनों की कमजोरी का कारण हो सकते हैं। क्योंकि कम सोने के कारण जहां थकावट की वजह से कमजोरी का अनुभव करवा सकता है, वहीँ अधिक सोने के कारण भी शरीर के अंगो के दर्द रहने के कारण कमजोरी का अहसास हो सकता है। ऐसे में इस परेशानी से निजात पाने के लिए न तो गर्भवती महिला को बहुत कम सोना चाहिए और न ही बहुत अधिक सोना चाहिए।

शारीरिक परेशानी का समाधान

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला बहुत सी शारीरिक परेशानियों से गुजरती है ऐसे में यदि कमजोरी का कारण शारीरिक समस्या होता है। तो ऐसे में इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।ताकि यदि कोई समस्या है तो उसका इलाज करने में आसानी हो और गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सके।

खान पान में लापरवाही

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान में लापरवाही भी कमजोरी होने का कारण हो सकता है। क्योंकि बहुत कम खाना, बहुत समय के गैप के बाद भोजन करना भी प्रेगनेंसी में होने वाली इस परेशानी का कारण हो सकता है। इसीलिए गर्भवती महिला को समय से और थोड़ी थोड़ी देर बाद कुछ न कुछ हेल्थी खाते रहना चाहिए। ताकि बॉडी में ऊर्जा को बने रहने में मदद मिल सके, जिससे गर्भवती महिला को कमजोरी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके। और अपने आहार में गर्भवती महिला को साबुत अनाज, ब्राउन राइस, फल और सब्जियां, डेरी प्रोडक्ट्स, दालें, अंडे, मछली, चिकन आदि को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

तनाव से राहत

शारीरिक रूप से थकान होने पर गर्भवती महिला कमजोरी महसूस करे ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है, क्योंकि कई बार गर्भवती महिला मानसिक रूप से परेशान होती है। जिसके कारण गर्भवती महिला कमजोरी का अनुभव कर सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को कमजोरी की समस्या से राहत पाने के लिए केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से रिलैक्स रहना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानी कम हो सके और तनाव के कारण शिशु को होने वाली परेशानी से बचाने में भी मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कमजोरी व् थकावट की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही यदि कमजोरी का कारण खान पान से जुड़ा होता है तो इसके कारण गर्भ में शिशु को भी वजन में कमी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए गर्भवती महिला को कमजोरी से राहत पाने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए इन टिप्स का खास ध्यान रखना चाहिए।

डिलीवरी की तारीख आप भी जान सकते हैं ऐसे

डिलीवरी की तारीख

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने एक एक दिन और एक एक पल महिला उस लम्हे का इंतज़ार करती है की कब उसका शिशु इस दुनिया में आएगा। और उस दिन का अनुमान लगाने के लिए डिलीवरी की डेट कैलकुलेट की जाती है, यह तिथि आपको डॉक्टर्स द्वारा अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन या माहवारी की आखिरी तारीख के हिसाब से बताई जाती है। और ऐसा भी कोई जरुरी नहीं होता है की जो तारीख आपको डॉक्टर्स ने बताई है उस दिन ही शिशु जन्म लें। बल्कि डिलीवरी डेट इसीलिए बताई जाती है, ताकि महिला डिलीवरी के लिए तैयार रहें। क्योंकि डॉक्टर्स द्वारा दी गई डिलीवरी की तिथि से एक हफ्ता पहले या एक हफ्ते बाद या फिर उस समय के आस पास किसी भी समय डिलीवरी हो सकती है। इसके अलावा कुछ ऐसे केस होते हैं जिनमे प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स होती है उन केस में डॉक्टर अपने हिसाब से महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह दे सकते हैं।

डिलीवरी डेट कैलकुलेट करने का तरीका

क्या आप माँ बनने वाली है? यदि हाँ तो आप अपने आप भी घर में बैठे डिलीवरी कब होगी इसका अंदाज़ा लगा सकती है। क्योंकि महिला घर पर बैठे बैठे आसानी से डिलीवरी डेट कैलकुलेट कर सकती है। और इसके लिए सबसे पहले महिला को प्रेगनेंसी से पहले आखिरी माहवारी किस दिन हुई थी उस तारीख का पता होना चाहिए। फिर उस तारीख से लेकर चालीस हफ्ते (280 days) बाद जो तारीख आती है वह महिला की डिलीवरी डेट होती है। लेकिन इसके सही परिणाम के लिए महिला को अपने मासिक धर्म की आखिरी तारीख का सही पता होना चाहिए। ज्यादातर शिशु प्रेगनेंसी के अड़तीस हफ्ते यानी की 266 दिन से लेकर चालीस हफ्ते यानी 280 दिन के बीच जन्म ले सकते हैं।

और ऐसा भी कोई जरुरी नहीं होता है की जो तिथि आपने कैलकुलेट करके निकाली है उसी दिन बेबी हो बल्कि वह एक अंदाज़ा लगाई हुई डेट होती है जिसके आस पास बेबी कभी भी हो सकता है। यदि शिशु की डिलीवरी पूरे समय पर होती है तो शिशु का जन्म होने से शिशु के स्वस्थ होने चांस ज्यादा होते हैं। इसके अलावा डॉक्टर्स द्वारा अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान भी डिलीवरी डेट का अंदाजा लगाया जाता है, ऐसे में इसके लिए आपको डॉक्टर भी बता सकते हैं। और कुछ केस में शिशु का जन्म 37 हफ्ते से पहले ही हो जाता है ऐसी डिलीवरी को प्रीमेच्योर डिलीवरी कहा जाता है, ऐसी डिलीवरी शिशु के वजन में कमी, शिशु को संक्रमण आदि की समस्या होने का खतरा अधिक होता है।

तो यदि आप भी चाहे तो घर पर आसानी से अपनी डिलीवरी डेट को कैलकुलेट कर सकती है। यह केवल अंदाज़े के लिए ही होता है, इसीलिए ऐसा बिल्कुल न सोचें की उसी दिन आपकी डिलीवरी होगी। लेकिन इसे कैलकुलेट जरूर करें ताकि आपको डिलीवरी के डेट का अंदाजा लग सके और आप डिलीवरी के लिए पूरी तरह तैयार रहे। और जैसे ही आपकी बॉडी में आपको प्रसव पीड़ा के लक्षण दिखाई दें तो आप तुरंत डॉक्टर के पास पहुँच जाये।

डिलीवरी डेट से 15 दिन पहले करें यह काम

डिलीवरी का समय जैसे -जैसे पास आता है वैसे -वैसे प्रेग्नेंट महिला के मन में घबराहट हो सकती है, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनती है उन्हें ज्यादा डर महसूस हो सकता है। लेकिन डिलीवरी से पहले महिला का अधिक घबराना या तनाव लेना महिला की मुश्किलों को बढ़ा सकता है। ऐसे में महिला को डिलीवरी का समय पास आने पर केवल यह सोचना चाहिए की किस तरह प्रसव को आसान बनाया जा सकता है। साथ ही डिलीवरी से पहले महिला को कौन से जरुरी काम कर लेने चाहिए। ताकि डिलीवरी के दौरान महिला को किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना न करना पड़े।

डिलीवरी डेट से पहले प्रेग्नेंट महिला करे यह काम

डिलीवरी डेट आने से पहले महिला को अपना ख्याल ज्यादा अच्छे से रखना चाहिए ताकि महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके, साथ ही महिला कुछ ऐसे काम जरूर करने चाहिए जिससे डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके और डिलीवरी के दौरान आपको किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

पानी भरपूर पीएं

प्रेगनेंसी में पानी का भरपूर सेवन करने से न केवल गर्भवती महिला को फायदा मिलता है बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मदद मिलती है। ऐसे में दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। लेकिन जैसे ही महिला की डिलीवरी का समय पास आता है तो महिला को दिन में कम से कम बारह गिलास पानी का सेवन शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि गर्भ में शिशु जिस थैली में रहता है उसमे एमनियोटिक फ्लूड मौजूद होता है। जिससे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होने के साथ शिशु को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। और यदि महिला पानी का भरपूर सेवन करती है है इससे एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को पर्याप्त बनाये रखने में मदद मिलती है। जिससे गर्भ में शिशु स्वस्थ रहता है।

कुछ गलत न खाएं

प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी का समय पास आने पर ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो की पोषक तत्वों से भरपूर हो। जिससे गर्भवती महिला को कमजोरी या खून की कमी जैसी परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही महिला को ऐसी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जिससे महिला की पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़े, और महिला को दस्त, उल्टी, सीने में जलन, गैस जैसी परेशानी का सामना करना पड़े।

सभी रिपोर्ट्स

गर्भावस्था के पहले दिन से लेकर जो भी आपने टेस्ट करवाएं हैं, जो भी जांच करवाई है, अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन करवाया है, जो भी दवाइयां खाने की आपको सलाह दी गई हैं, उन सभी रिपोर्ट्स को इक्कठा कर लें। क्योंकि हो सकता है की डिलीवरी से पहले डॉक्टर आपकी इन रिपोर्ट्स को मांगे, ऐसे में आपको इसके कारण किसी तरह की दिक़्कत न हो इसके लिए आपके पास आपकी सभी रिपोर्ट्स मौजूद होनी चाहिए।

हॉस्पिटल बैग

जो आपको डिलीवरी डेट दी गई है उसी दिन आपकी डिलीवरी हो ऐसा होना जरुरी नहीं होता है, बल्कि उससे आगे पीछे भी आपकी डिलीवरी हो सकती है। ऐसे में आपको डिलीवरी का समय पास आने से पहले ही अपने डिलीवरी बैग को तैयार कर लेना चाहिए, जिसमे वो सभी सामान मौजूद होना चाहिए जिसकी जरुरत आपको डिलीवरी के बाद पड़ सकती है। जैसे की महिला को एक छोटा ब्लैंकेट, दो या तीन नाइटी, सेनेटरी पैड, अंडरवियर, शिशु के कपडे, तौलिया, कुछ कैश, अपना आइडेंटिटी प्रूफ, कोई बीमा हो उसके कागज़ आदि सभी याद करके रख लेने चाहिए। ताकि जैसे ही आपको लगे की डिलीवरी अब होने वाली है तो आप अपना बैग उठायें और डॉक्टर के पास जाएँ।

अपने शरीर के बदलाव का ध्यान रखें

ऐसा बिल्कुल नहीं होता है की आपकी डिलीवरी एक ही दम हो जाती है, बल्कि डिलीवरी होने से पहले बॉडी में कुछ लक्षण महसूस होते है, कुछ बदलाव नज़र आते हैं, जिन्हे देखकर आप जान सकते हैं की अब डिलीवरी होने वाली है। जैसे की एमनियोटिक फ्लूड निकलना, खून के दाग लगना, पेट में दर्द अधिक होना, पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव होना, बार बार वाशरूम जाने की इच्छा होना, गर्भ में शिशु की मूवमेंट का अधिक होना, आदि। ऐसे में आपको प्रसव के इन बदलाव की जानकारी रखनी चाहिए जिससे आपको डिलीवरी का समय पास आ गया है इसके बारे में आसानी से जानने में मदद मिल सके।

प्रसव का दर्द न होने पर

यदि डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद भी आपको बॉडी में कोई भी प्रसव का लक्षण महसूस न हो तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि कुछ केस में ऐसा हो जाता है, ऐसे में डॉक्टर महिला को आर्टिफिशल दर्द देकर या सिजेरियन डिलीवरी से शिशु को जन्म दिलवाने की कोशिश करते हैं। क्योंकि ज्यादा समय होने पर गर्भ में शिशु को रिस्क हो सकता है ऐसे में डिलीवरी डेट आने पर महिला को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए।

तो यह हैं कुछ काम जो गर्भवती महिला को डिलीवरी डेट से पहले करने चाहिए इससे महिला को प्रसव के दौरान आने वाली परेशानी से बचने के साथ प्रसव को आसान बनाने में भी मदद मिलती है। साथ ही महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो डिलीवरी का समय पास आने पर डॉक्टर के संपर्क में रहे ताकि कोई भी दिक्कत होने पर महिला को जल्द से जल्द इलाज मिल सके।

प्रेगनेंसी में झुककर काम करने के नुकसान और कब से नहीं करना झुककर काम

गर्भावस्था हर महिला को बहुत ही ख़ुशी का अहसास देता है। और प्रेग्नेंट महिला ऐसे ही खुश रहे, स्वस्थ रहे, गर्भ में बच्चा भी फिट रहे, इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। जैसे की खाने पीने का ध्यान रखना, उठने बैठने सोने आदि के तरीके का ध्यान रखना, कहीं बाहर आने जाने पर सावधानी बरतना, आदि।

क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान छोटी सी लापरवाही बरतने के कारण माँ और बच्चे दोनों को परेशानी हो सकती है। ऐसे ही गर्भावस्था के दौरान झुककर काम न करने की सलाह भी दी जाती है। क्योंकि झुकने के कारण भी महिला व् बच्चे को परेशानी हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में झुककर काम क्यों नहीं करना चाहिए और कब से नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में झुककर काम क्यों नहीं करना चाहिए?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है। ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए महिला को छोटी छोटी बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान झुककर काम न करने की सलाह भी दी जाती है। और यह सलाह इसीलिए दी जाती है क्योंकि झुककर काम करने से पेट पर झटका लगने का खतरा रहता है, पीठ की मांसपशियों में खिंचाव बढ़ता है, आदि।

जिसके कारण प्रेगनेंसी में आपकी शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है। साथ ही इसके कारण बच्चे का जन्म भी समय से पहले होने का खतरा रहता है। इसके अलावा और भी दिक्कतें हो सकती है। ऐसे में इन परेशानियों से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को झुककर काम करने से बचना चाहिए।

गर्भावस्था में कब से नहीं करें झुककर काम?

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में पेट बाहर निकला हुआ नहीं होता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को झुककर काम करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। लेकिन गर्भावस्था की दूसरी तिमाही से महिला का पेट बाहर निकलना शुरू हो जाता है। जिसकी वजह से झुकने में परेशानी होने के साथ झुककर काम करने के कारण भी परेशानी हो जाती है।

इसीलिए प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से लेकर डिलीवरी तक गर्भवती महिला झुककर काम नहीं करना चाहिए। और यदि कोई काम है जिसे आपको झुककर करना पड़ेगा उस काम के लिए किसी अन्य व्यक्ति की हेल्प जरूर लें।

प्रेगनेंसी में झुककर काम करने के नुकसान

गर्भवती महिला यदि झुककर काम करती है तो इसके कारण महिला को कौन कौन से परेशानियां हो सकती हैं। आइये जानते हैं:

चक्कर आने का खतरा: जब आप झुकती है तो इसके कारण सिर में ब्लड फ्लो तेजी से होने लगता है। जिसकी वजह से चक्कर आने की सम्भावना बढ़ जाती है। और चक्कर आने के कारण गिरने का खतरा रहता है जिससे गर्भ गिरने का डर रहता है।

समय से पहले डिलीवरी: जब आप झुकती है और आपका बैलेंस बिगड़ जाता है तो इसके कारण गिरने का डर रहता है। खासकर पेट के बाहर निकलने पर यदि आप झुककर काम करती हैं तो गिरने का डर ज्यादा होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला गिर जाती है तो इसके कारण समय से पहले बच्चे का जन्म, पेट में शिशु को परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

पीठ में दर्द: झुकने के कारण पीठ की मांसपेशियों में ज्यादा खिंचाव होता है। ऐसे में खिंचाव बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को पीठ में दर्द की परेशानी भी अधिक हो सकती है।

सीने में जलन: जब गर्भवती महिला झुकती है तो पेट पर दबाव पड़ने के कारण पेट में मौजूद एसिड भोजन की नली में चला जाता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को सीने में जलन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

झुकने के कारण क्या बच्चे को नुकसान होता है?

वैसे तो गर्भ में बच्चा एमनियोटिक फ्लूड में होता है जो बच्चे के लिए गर्भ में गद्दे का काम करता है और बच्चे को नुकसान नहीं पहुँचने देता है। लेकिन फिर भी यदि आप पेट के भार गिर जाती है, पेट पर ज्यादा दबाव पड़ता है तो इसके कारण बच्चे को दिक्कत हो सकती है। साथ ही यदि आप पेट के भार गिर जाती है तो ऐसा करने से समय से पहले बच्चे का जन्म होने का खतरा भी रहता है।

और समय से पहले यदि बच्चे का जन्म हो जाता है तो जन्म के समय शिशु के वजन में कमी व् अन्य परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही शुरूआती दिनों में झुककर अधिक काम करने के कारण गर्भपात होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में गर्भ में शिशु को होने वाली दिक्कत से बचाने के लिए प्रेग्नेंट महिला को झुककर काम करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में झुककर काम करने से जुड़े टिप्स, तो यदि आप भी माँ बनने वाली है तो गलती से भी झुककर काम न करें। यदि किसी चीज को नीचे से उठाना है तो घुटनों के बल नीचे बैठे और उसके बाद नीचे गिरी चीज को उठाएं। ऐसा करने से आपको परेशानी नहीं होगी। या फिर आप किसी की मदद भी ले सकती है।

प्रेगनेंसी में दूध पीने का सही तरीका क्या है?

प्रेगनेंसी में दूध पीने का सही तरीका क्या है,दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम, आयोडीन, विटामिन बी 12, राइबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं बल्कि महिला के पेट में पल रहे बच्चे के विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। इसीलिए यदि आप गर्भवती हैं तो डॉक्टर्स के साथ आपके जानने वाले भी आपको एक दिन में दो से तीन गिलास दूध पीने की सलाह दे सकते हैं।

लेकिन दूध के फायदे के लिए आपको केवल दूध पीना जरुरी नहीं होता है। बल्कि दूध का सेवन सही तरीके से करना भी जरुरी होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को किस तरह से दूध नहीं पीना चाहिए और किस तरह दूध नहीं पीना चाहिए, पहले जानते हैं की किन तरीको से प्रेग्नेंट महिला को दूध नहीं पीना चाहिए।

बहुत गर्म दूध

  • प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा गर्म दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि ज्यादा गर्म दूध पीने से गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ सकता है।
  • जो पेट में पल रहे बच्चे के विकास के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है।
  • ऐसे में गर्भवती महिला को बहुत गर्म दूध पीने की बजाय दूध को गुनगुना करके पीना चाहिए।

प्रेगनेंसी में दूध बहुत ठंडा न पीएं

  • ठन्डे दूध में बैक्टेरिया मौजूद होता है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला बहुत ठन्डे दूध का सेवन करती है तो ठन्डे दूध में मौजूद बैक्टेरिया महिला के पेट में जाकर महिला को परेशान कर सकता है।
  • इसके कारण महिला को पेट में गैस, डायरिया, यहां तक की पेट में इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

कच्चा दूध

  • प्रेग्नेंट महिला को कभी गलती से भी कच्चे दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि कच्चे दूध में लिस्टेरिया व् साल्मोनेला जैसे बैक्टेरिया मौजूद होते हैं।
  • जो महिला के पाचन को खराब करने के साथ शिशु के विकास को भी प्रभावित कर सकते हैं।
  • साथ ही इसके कारण महिला को गर्भपात व् समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में दूध के साथ फल न खाएं

  • दूध और फलों का सेवन एक साथ करने से भी प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए।
  • क्योंकि दूध और फलों का एक साथ सेवन करने से पाचन क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • खासकर खट्टे फलों के साथ तो दूध का सेवन कभी भी नहीं करना चाहिए।
  • यदि आप फल खाना चाहते हैं तो दूध और फलों के सेवन में कम से कम आधे घंटे का गैप रखना चाहिए।

दूध के साथ नमकीन चीजें

  • प्रेग्नेंट महिला को दूध का सेवन करने के साथ नमकीन चीजों का सेवन करने से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि इसके कारण पेट में गैस, सीने में जलन जैसी परेशानियां गर्भवती महिला को हो सकती है।

मलाई वाला दूध

  • प्रेग्नेंट महिला जब भी दूध पीए तो महिला को बिना मलाई वाला दूध पीना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें वसा की मात्रा कम होती है।
  • जबकि मलाई के साथ दूध पीने से बॉडी में वसा की मात्रा बढ़ जाती है।
  • जिसके कारण गर्भवती महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है।
  • ऐसे में जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने की समस्या गर्भवती महिला को बचने के लिए मलाई वाला दूध पीने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी में दूध के साथ नॉन वेज न खाएं

  • गर्भवती महिला को गलती से भी दूध के साथ नॉन वेज का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि दूध के साथ नॉन वेज का सेवन करने से गर्भवती महिला को बॉडी पर सफ़ेद दाग व् अन्य किसी भी तरह की स्किन एलर्जी होने का खतरा रहता है।

खाना खाने के बाद तुरंत दूध न पीएं

  • प्रेग्नेंट महिला को खाने के तुरंत बाद दूध पीने से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि खाने के बाद तुरंत दूध पीना भी पाचन क्षमता पर बुरा असर डाल सकता है।
  • जिसके कारण महिला को पेट में दर्द, गैस बनना जैसी दिक्कतें हो सकती है।
  • ऐसे में खाना खाने के कम से कम आधे घंटे बाद ही प्रेग्नेंट महिला को दूध पीना चाहिए।

जरुरत से ज्यादा दूध

  • गर्भवती महिला को दूध जरूर पीना चाहिए क्योंकि यह महिला के साथ शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है।
  • लेकिन प्रेग्नेंट महिला को जरुरत से ज्यादा दूध का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि जरुरत से ज्यादा दूध का सेवन करने से पेट सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है।
  • इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को एक दिन में दो से तीन गिलास दूध का सेवन ही करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को किस तरह दूध पीना चाहिए?

  • गर्भवती महिला को गुनगुने दूध का सेवन करना चाहिए।
  • दूध के साथ नमकीन, फल, भोजन, नॉन वेज आदि करने से बचना चाहिए।
  • कच्चे दूध का सेवन नहीं करना चाहिए दूध को उबालने के बाद ही सेवन करना चाहिए।
  • जरुरत से ज्यादा दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं गर्भवती महिला के लिए दूध पीने से जुड़े कुछ टिप्स, जिन्हे दूध पीते समय प्रेग्नेंट महिला को ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को दूध पीने के बाद किसी तरह का नुकसान न हो।