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दिवाली की साफ़ सफाई ऐसे करें

Diwali Ki Cleaning (Saaf-Safai)

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दिवाली का पर्व हिन्दुओं के उन पर्वों में से एक है जिसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। बच्चो से लेकर बूढ़ों तक सभी में इस पर्व का समान उत्साह देखने को मिलता है। और इस समय शायद ही कोई घर ऐसा होता होगा जो साफ़ सफाई नहीं करता होगा। दिवाली एक मात्र ऐसा पर्व है जिसमे लोग काफी दिनों पहले से ही घर की साफ़ सफाई करना शुरू कर देते है। इस समय आप जिसको भी देखते सुनते होंगे वो अपने घर की सफाई कर रहा होता है।

ऐसे तो सभी रोजाना अपने घर की साफ़ सफाई करते है लेकिन इस सफाई की बात कुछ अलग होती है। इसीलिए कुछ लोग इसे स्वच्छता का पर्व भी कहते है। इन दिनों अपना घर ही नहीं अपितु आस पड़ोस, सोसाइटी, गलिया आदि साफ़ सुथरी नजर आती है।

इसीलिए आज हम आपको दिवाली की साफ़ सफाई किस तरह करें और कैसे करें इसके बारे में बता रहे है क्योंकि बहुत से लोग अक्सर यही सोचते है की दिवाली की सफाई में किन चीजों की सफाई करें और किन की नहीं? इसके साथ ही कुछ लोगों की असमंजस सफाई की शुरुआत को लेकर ही बढ़ जाती है। ऐसे में हमारा ये आर्टिक्ल आपकी मदद कर सकता है। तो आइये जानते है दिवाली के समय में अपने घर को साफ़ सुथरा कैसे बनाया जाए?

दिवाली की साफ़ सफाई कैसे करें?

1. कबाड़ हटाएं :

दिवाली एक ऐसा त्यौहार है जब घर के कोने कोने को अच्छे से साफ़ किया जाता है और इस सफाई में कबाड़ निकलना आम बात है। ऐसे में आपका सबसे पहला काम यही होना चाहिए की आप घर में मौजूद पुरे कबाड़ को घर से निकाल दें ताकि घर अच्छे से साफ़ हो सके। इसके अलावा घर में मौजूद फालतू सामन को निकाल दें। जैसे की पुराने कपडे, टूटे बर्तन, प्लास्टिक के खाली टूटे डब्बे कांच का टुटा सामन आदि। और साथ ही अपनी अलमारियों को भी अच्छी तरह से जंचा लें।

2. मकड़ी के जाले :

सामान्य तौर पर घर में मकड़ी के जले लग ही जाते है। आप चाहे जितनी ही साफ़ सफाई क्यों न कर लें इन जालों से पीछा नहीं छुड़ा पाते। परन्तु दिवाली के सफाई में इन्हे हटाना बेहद जरुरी है क्योंकि यदि आप पुरे घर की सफाई करने के बाद जाले हटाएंगे तो घर फिर से गंदा हो जाएगा। इन्हे साफ़ करने के लिए आप जाले हटाने वाली झाड़ू या सामान्य फूल झाडृ की मदद ले सकते है।

3. दीवारे और फर्श :

अक्सर दीवारों और फर्श पर गंदे गंदे पानी के धब्बे बन जाते है जो देखने में बहुत अजीब लगते है। ऐसे में इनकी सफाई करना भी बेहद जरुरी है। इसके लिए आप सूखे कपड़ें का इस्तेमाल कर सकती है जिससे पेंट भी खराब नहीं होगा। अगर आपने घर में plastic imulsion करवाया हुआ है तो गीले कपडे का भी प्रयोग किया जा सकता है। परन्तु अधिक गीले कपडे से चमक खराब हो सकती है। फर्श को साफ़ करने के लिए उसपर सर्फ का पोंछा मारे या पानी से उसकी धुलाई करें। इसे सफाई के सबसे अंतिम चरण में करना अच्छा होता है।

4. धुप :

दिवाली की सफाई के समय आप घर के कबर्ड आदि को भी साफ़ करती है ऐसे में वहां रखें कपड़ें, गद्दों और रजाइयों पर धुप लगाना भी बेहद जरुरी है। ताकि उनमे से आ रही रही लकड़ी की बदबू चली जाए। इससे कपड़ों में मौजूद बैक्टीरिया भी खत्म हो जाए है। इसके लिए कम से कम 1 पुरे दिन या दो दिन कपड़ों में अच्छी धुप लगाएं। बाद में इनमे फिनायल की गोलियां डालकर रख दें। इससे उन में सीलन या लकड़ी की बदबू नहीं आएगी।

5. घर की सेटिंग :

साफ़ सफाई के साथ साथ समान को अपनी जगह पर रखना न भूलें। सफाई करते समय इस बात का ध्यान रखें की कौन सा सामान किस जगह पर रखा है ताकि बाद में उन्हें सही जगह पर रखा जा सके और वे इधर उधर न बिखरा रहे। इसके साथ ही घर के समानों की सेटिंग चेंज करें। बाकी समानों को अच्छे से रखकर उनकी सफाई करें।

6. कपड़ें :

परदे, कुशन चददरें, पायदान, कारपेट आदि को 1 या 2 दिन पहले साफ़ करें। लेकिन एक बात का ध्यान रखें की जब आप बाकी की सफाई कर रही हो तो इन्हे अलग हटाकर रख दें। अन्यथा ये और अधिक गंदे हो सकते हैं। अगर आप नए परदे और कुशन आदि खरीद कर लाएं है तो इन्हे सबसे आखिर में लगाएं।

7. पंखों की सफाई :

घर में पंखे सबसे जल्दी गंदे होते है। इसीलिए इनकी सफाई करवाना भी बेहद जरुरी है। इनकी सफाई करते समय घर के बाकि सामानों पर एक कपडा दाल दें। ताकि उनमे से निकलने वाले धूल मिटटी बाकी सामानों को खराब न कर दें। सफाई के समय घर का मैन स्विच बंद कर दें। इनकी सफाई के लिए सूखे कपडे का प्रयोग करें। पंखुड़ियों को साफ़ करने के लिए आप गीले कपड़ों का इस्तेमाल कर सकती है।

8. रसोई :

दिवाली की सफाई में सबसे अधिक समय और मेहनत किचन की सफाई में ही लगता है। जिसे करने के लिए कम से कम 2 लोगों की आवश्यकता होती है। सफाई के लिए आप किचन के सभी बर्तनों को खाली करके बाहर निकाल लें। किचन की टिलीस और स्लैब को डिटर्जेंट या टाइल्स क्लीनर से साफ़ कर लें। मुश्किल दागों के लिए निम्बू, बेकिंग सोडा या सिरके का इस्तेमाल कर सकते है। बर्तनों के स्टैंड और सभी बर्तनों को साफ़ करने के लिए गर्म पानी का प्रयोग करें। सफाई पूरी होने के बाद सभी को पोंछ कर उनमे सामन भरकर वापस उनकी जगह रख दें। और हां, अंत में सूखे कपडे से फाइनल टच देना न भूलें।

9. दरवाज़े और खिड़कियां :

किचन के बाद घर के सभी दरवाजों, खिड़कियों और फर्नीचर को अच्छी तरह साफ़ कर लें। इसके लिए आप साबुन के पानी का इस्तेमाल कर सकते है। फर्नीचर के लिए हलके गीले कपडे का ही प्रयोग करें। बाद में इन सभी को सूखे कपडे से जरूर साफ़ करें। आप चाहे तो शीशों को अंत में अख़बार से पोंछ सकती है।

10. घर के आस पास :

घर के साथ साथ आस पास के क्षेत्र पर भी सफाई करना जरुरी है। अर्थात वहा कोई गंदगी या कूड़ा करकट नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा है तो उसे साफ़ करवा लें। क्योंकि केवल घर साफ़ करने से बात नहीं बनेगी घर के आस पास सफाई करना भी जरूरी है।

11. स्टोर रूम

पुरे घर की सफ़ाई के साथ-साथ स्टोर रूम की सफ़ाई करना भी बेहद जरुरी है क्योकि पुरे घर से अधिक गंदगी इसी कमरे में होती है। स्टोर रूम में घर में पड़ी बेकार वस्तुएं रखी जाती है इसीलिए इसमें सबसे ज्यादा ग्नदगी रहती है। इसी कमरे में मकड़ी के जाले भी मिल सकते है। इसीलिए इस कमरे को भी ठीक से साफ़ कर लें।  सफ़ाई करते समय स्किन, फेस और बालो को ढक कर रखें। ताकि धूल मिटटी आपको नुकसान न पहुँचा सकें।

12. मंदिर की सफ़ाई :-

पुरे घर की सफ़ाई हो जाने के बाद सबसे आखिर में मंदिर की सफ़ाई करें। ये सफ़ाई आप दिवाली के दिन करें तो बेहतर होगा क्योकि इसी दिन सबसे बड़ी पूजा की जाती है। मंदिर की शेल्फ़, सारी पुस्तके और भगवानो की मुर्तिया सभी को अच्छे से साफ़ करके मंदिर में जचा लें। बाद में खुशबु के लिए किसी धूपबत्ती

आजकल प्रेग्नेंट महिला कैसे करवायें अपनी जाँच?

हम सभी जानते है के पुरे भारत में लॉक डाउन की स्थिति है। किसी को भी बिना कारण घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। जो के पूरी तरह सहीं भी कोरोना वायरस से बचने के लिए हम सभी को अपने घरो में रहना चाहिए। इस लॉक डाउन की स्तिथि देखते हुए ज्यादातर अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी मरीज ही देखे जा रहे है। लेकिन एक प्रेग्नेंट महिला के लिए ऐसे में बहुत समस्या आ गयी है के वह डॉक्टर से कैसे मिले और कैसे अपने और होने वाली शिशु की सेहत के बारे में जाने।

मौजूदा स्थिति को देखते हुए बहुत से प्राइवेट हॉस्पिटल ने तो मरीजों का ऑनलाइन कंसल्टेशन भी शुरू कर दिया है। कई डॉक्टर फ़ोन पर ही अपने रोगी से बात कर रहे है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसी ही स्थिति आ गयी है तो पहले अपने डॉक्टर से फोन पर बात करें। अपनी प्रोब्लेम्स डॉक्टर से फोन पर या ऑनलाइन एप्प के माध्यम से बताये। किसी कारणवंश यदि आपके पास अपने डॉक्टर का फोन नम्बर नहीं है तो हॉस्पिटल फ़ोन करके बात करें, वहा से मदद लें।

इस समय में सभी लोगों की तरह प्रेग्नेंट महिला का भी घर से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं है। जहां तक हो सके डॉक्टर से घर से कंसल्ट करने की कोशिश करें। परन्तु फिर भी आप अपने डॉक्टर से बात करने में असमर्थ है गर्भावस्था के दौरान ली जाने वाली दवाइयाँ भी खत्म हो रही है तो बिना देर किये अपने डॉक्टर का अपॉइंटमेंट ले। और समय पर जाकर अपने डॉक्टर से जरूर मिले। यदि आपको रास्ते में कोई सुरक्षाकर्मी रोकते है तो उन्हें अपने मैडिकल पेपर्स दिखाएँ। उन्हें अपना अपॉइंटमेंट पेपर दिखाए ऐसे में सुरक्षाकर्मी आपको हॉस्पिटल जान की अनुमति देंगे और साथ ही आपकी मदद भी करेंगे।

डॉक्टर से मिलने पर उन्हें अपनी प्रोब्लेम्स विस्तार में बताये और मौजूदा हालात को देखते हुए थोड़े लम्बे समय की दवाइयाँ लिखवायें। कहने का मतलब यह है के अगर पहले आप डॉक्टर से हर 15 दिनों के अंतराल पर मिलते थे और डॉक्टर आपको हर 15 दिन की दवाइयों लेने की लिए लिखते थे लेकिन अब कम से कम एक महीने की एक साथ दवाइयां लिखवायें। जिससे की आपको जल्दी जल्दी घर से बाहर ना निकलना पड़े। इसके अतिरिक्त यदि कोई समस्या आये तो उसके लिए अपने डॉक्टर का भी फोन नंबर लेकर रख लें। और अपने डॉक्टर से भी खुल कर सारी बात कर लें।

इन सभी बातो के अलावा घर से बाहर निकलते हुए पूरी सावधानी बरते। अपने बालों, मुँह और हाथों को अच्छे से ढक कर जाए। अपने साथ रुमाल के स्थान पर पेपर टिश्यू का पैकेट रखें। जरुरत पड़ने पर टिश्यू का इस्तेमाल कर उसे डस्टबिन में फेंक दे। घर पर वापस आते ही नहाये और कपड़े भी बदलें।

हिंदी में विडिओ देखिए आजकल प्रेग्नेंट महिला कैसे करवायें अपनी जाँच?

प्रेगनेंसी में कम पानी पीने के नुकसान

गर्भावस्था में पानी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ जैसे की पानी, जूस, नारियल पानी, दूध आदि का सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि जितना गर्भवती महिला के लिए आहार जरुरी होता है उतना ही बॉडी में पानी की मात्रा का पूरा होना भी जरुरी होता है। साथ ही बॉडी के हाइड्रेट रहने के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों से निजात मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। इसीलिए डॉक्टर्स भी प्रेग्नेंट महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने के साथ जूस, दूध पीने की सलाह भी देते हैं।

प्रेगनेंसी में पानी कम पीने से होने वाले नुकसान

हर गर्भवती महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की समस्या न हो और साथ ही उसके विकास में भी किसी भी तरह की कमी न आए। ऐसे में जरुरी है की महिला खाने के साथ बॉडी को हाइड्रेट रखें क्योंकि गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली पानी की कमी के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से की प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में पानी की कमी के कारण कौन कौन सी परेशानी हो सकती है।

सिर दर्द व् चक्कर

पानी की कमी बॉडी में होने के कारण आपको बहुत ज्यादा थकावट का अनुभव हो सकता है। जिसके कारण सिर में दर्द चक्कर जैसी परेशानी का सामना भी महिला को करना पड़ सकता है। इसके अलावा पानी की कमी के कारण बॉडी के अन्य पार्ट्स में भी दर्द की समस्या हो सकती है।

कब्ज़

प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या होना आम बात होती है लेकिन यदि बॉडी में पानी की कमी हो जाती है तो आपकी यह परेशानी बढ़ सकती है। क्योंकि पानी की कमी के कारण बॉडी से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते हैं, और पेट के अच्छे से साफ़ न होने के कारण पाचन क्रिया भी धीमी पड़ने लगती है जिसके कारण कब्ज़ जैसी परेशानी अधिक हो सकती है।

इन्फेक्शन

बॉडी में पानी की कमी होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को यूरिन अधिक नहीं आता है। जिसके कारण विषैले पदार्थ बॉडी से निकलने की बजाय बॉडी में ही एकत्रित होने लगते हैं। और यूरिन इन्फेक्शन या किसी अन्य इन्फेक्शन होने का खतरा बना रहता है।

ऊर्जा में कमी

गर्भवती महिला यदि भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करती है तो इससे बॉडी में ऊर्जा को भरपूर रखने में मदद मिलती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला पानी का सेवन पर्याप्त मात्रा में नहीं करती है तो इसके कारण बॉडी में एनर्जी की कमी हो सकती है, जिसके कारण शरीर के अन्य अंगो में दर्द की समस्या भी हो सकती है।

सूजन

शरीर में पानी की कमी के कारण गर्भवती महिला को सूजन जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। और अंगो में सूजन के साथ दर्द का अहसास भी हो सकता है।

गर्भपात

प्रेग्नेंट महिला यदि भरपूर मात्रा में पानी का सेवन नहीं करती है तो इसके कारण गर्भपात जैसी परेशानी का सामना भी महिला को करना पड़ सकता है। क्योंकि पानी की कमी के कारण गर्भनाल जिससे की भ्रूण के विकास के लिए पोषक तत्व, ऑक्सीजन, ब्लड आदि पहुंचाया जाता है वह सूखने लगती है। और शिशु को पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण महिला को गर्भपात का खतरा रहता है। इसके अलावा गर्भवती महिला की बॉडी में से ज्यादा हीट निकलती है और पानी की कमी के कारण बॉडी का तापमान बढ़ सकता है जिसके कारण भी महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

शिशु की मूवमेंट कम

शरीर में पानी की कमी के कारण एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा में भी कमी आ सकती है। और एमनियोटिक फ्लूड की मदद से ही शिशु गर्भ में हलचल करता है, ऐसे में यदि एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा में कमी होती है तो इससे शिशु की हलचल गर्भ में कम महसूस हो सकती है।

शिशु का विकास

पानी की कमी के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। क्योंकि गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने के कारण गर्भनाल सूखने लगती है। और शिशु तक पर्याप्त पोषण नहीं पहुँचता है जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

डिलीवरी

गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने के कारण महिला को मांसपेशियों में खिंचाव का अनुभव होने के कारण समय से पहले डिलीवरी होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो गर्भवती महिला को पानी का सेवन कम करने से हो सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान इन परेशानियों से बचे रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए पानी का सेवन पर्याप्त मात्रा में करना चाहिए। और दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

सांस की दुर्गन्ध से छुटकारा कैसे पाएं?

Muh ki Durgandh ke Upay : व्यक्ति की चेहरे की स्माइल उसके व्यक्तित्व को निखारने में मदद करती है लेकिन बहुत से लोगों की स्माइल अच्छी होने के बाद भी अच्छी नहीं होती क्योंकि उनकी सांसों से दुर्गन्ध आती है। सांसों से आने वाली दुर्गन्ध न केवल आपकी सुंदरता और पर्सनालिटी को खराब करती है अपितु आपको लोगों के बीच शर्मिंदा भी करती है।

जिन लोगों की सांस से दुर्गन्ध आती है उनसे कोई भी बात करना पसंद नहीं करता और उनके साथ बैठना-उठना भी बंद कर देते है। कई बार इस शर्मिंदगी के कारन उनके आत्मसम्मान को बहुत ठेस पहुंचती है। ऐसे लोग सार्वजनिक स्थानों पर जानें से भी कतराने लगते है। क्योंकि उन्हें हमेशा यही डर बना रहता है की कहीं कोई उनका मजाक न उड़ाए।

अगर आपके साथ भी ये समस्या है और आप अभी तक इसका समाधान नहीं कर पाए है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यहाँ हम आपको सांस की दुर्गन्ध दूर करने के लिए कुछ उपाय बता रहे है जिनकी मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। और क्योंकि ये सभी उपाय पूरी तरह घरेलू है तो इनके कोई हानिकारक साइड-इफ़ेक्ट भी नहीं है। तो आइये जानते है सांसों की दुर्गन्ध दूर करने के घरेलू उपाय।

muh ki badbu

मुंह से बदबू आने के क्या कारण होते है?

सांसों से दुर्गन्ध आने का सबसे बड़ा कारण दांतों की ठीक तरह से साफ़-सफाई नहीं करना होता है। क्योंकि इसकी वजह से दांतों में अटका हुआ खाना ठीक तरह से साफ़ नहीं हो पाता है जिससे सांस से दुर्गन्ध आती है।

  • मुंह में छाले, जीभ पर मेल जमना, पायरिया, लंबे समय तक सर्दी-जुखाम बने रहना, नाक का संक्रमण, शरीर में रक्त की कमी, विटामिन्स की कमी, लंबे समय तक बीमार रहना, पुरानी खांसी, पेट की बिमारी, कब्ज, नींद का पूरी होना, सुबह देर से जागना, धूम्रपान करना, शराब का सेवन करना, आदि भी सांसों की दुर्गन्ध का कारण होते है।
  • इसके अलावा कुछ एलोपैथिक दवाओं के सेवन से भी सांसों से दुर्गन्ध आने लगती है।
  • अगर किसी व्यक्ति के दांत अंदर से खराब हो जाए तो भी मुंह से बदबू आने लगती है। इस स्थिति में उस दांत को निकलवा देना ही अच्छा माना जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन में परिवर्तन आने के कारण कुछ महिलाओं की सांसों से दुर्गंध आने लगती है।
  • पाचन तंत्र की खराबी के कारण भी सांस से दुर्गन्ध आने लगती है।

सांसों की दुर्गन्ध से कैसे बचें?

यहाँ हम कुछ सामान्य टिप्स दे रहे है जिनकी मदद से सांसों की दुर्गन्ध की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • इसके लिए दांतों की नियमित रूप से सही तरीके से साफ-सफाई करें। और साथ ही जीभ को भी अच्छे से साफ करें।
  • खाना खाने के बाद ब्रश करें विशेषकार रात के खाने के बाद।
  • देर रात तक जागने से बचें और सुबह जल्दी जागे।
  • पान, गुटका, तम्बाकू, बीडी, शराब आदि का सेवन करने से भी सांसों से दुर्गन्ध उत्पन्न होती है। इसलिए इनके सेवन से बचें।
  • दूसरों के इस्तेमाल किये गए रुमाल, टूथब्रश, लिपस्टिक, लिपस्टिक ब्रश आदि का इस्तेमाल न करें।
  • दो महीने में अपना ब्रश अवश्य बदलें।
  • लंबे समय तक खाली पेट ना रहें। क्योंकि इससे मुंह में saliva बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है जिसे मुंह से दुर्गन्ध आने लगती है।
  • अधिक मात्रा में मीठे का सेवन करने से भी सांसों से बदबू आने लगती है।
  • जितना हो सके पानी का सेवन करें क्योंकि पानी मुंह में मौजूद बदबू उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया को समाप्त करता है। यह मुंह के लिए एक क्लीनर के रूप में कार्य करता है इसलिए भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें।

सांस की दुर्गन्ध दूर करने के घरेलू उपाय :-

यह कुछ घरेलू उपाय है जिन्हें अपनाकर सांसों की दुर्गन्ध की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जाता है। आप भी अपनी समस्या के लिए इन उपाय का प्रयोग कर सकते है और अपनी परेशानी को दूर कर सकते है।

  • खाने में ताज़ी, हरी और रेशेदार सब्जियों का प्रयोग करें।
  • उपाय के लिए एक कप पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर गरारे करें। इसे मुंह का एसिटिक लेवल कम हो जाता है और सांस की बदबू दूर हो जाती है।
  • लौंग को हल्का भुनकर चूसे, इससे सांसों में ताजगी आने लगेगी।
  • पार्सले को माउथवाश के रूप में इस्तेमाल करें, यह मुंह की बदबू दूर करने में लाभकारी सिद्ध होगा।
  • गर्म पानी में नमक घोलकर कुल्ला करें और गरारे करें।
  • सांस की बदबू दूर करने के लिए त्रिफला की जड़ की छाल को मुंह में रखकर चबाएं।
  • जीरे को भुनकर खाने से भी सांसों की दुर्गन्ध दूर होती है।
  • रोजाना भोजन करने के बाद तुलसी के पाते या इलायची चबाएं।
  • सांसों की दुर्गन्ध के लिए पुदीने को पीसकर पानी में घोल लें और दिन में 2 से 3 बार इस पानी से कुल्ला करें।
  • अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। इससे पेट साफ़ रहेगा और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करेगा।
  • सुबह जागने के बाद और रात को सोने से पहले दांतों की अच्छे से सफाई करें और ब्रश करने के दौरान कुल्ला भी करते रहे
  • दालचीनी, सुंगधित इलायची, सोया के दाने चबाने से सांसों की दुर्गन्ध दूर होती है।
  • रोजाना सुबह एक ग्लास पानी में नींबू निचोड़कर उस पानी से कुल्ला करें। सांसों की दुर्गन्ध की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।
  • इलायची के सेवन से मुंह में ताजगी आती है और साथ ही सांसों की दुर्गन्ध भी दूर होती है। तो ये थे घरेलू उपाय जिनकी मदद से सांसों की दुर्गन्ध की समस्या को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है

कान दर्द दूर करने के उपाय

Ear Pain Remedies In Hindi : दर्द चाहे पेट में हो या सिर में शरीर में हो या पैर में परेशानी एक समान ही होती है। दर्द के कारण व्यक्ति ना तो ठीक से खा-पी पाता है और ना ही आराम कर पाता है। ऐसे तो दवा खाकर इन दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है लेकिन कुछ दर्द ऐसे भी होते है जिनमे दवा खाकर भी आराम नहीं मिलता और कान का दर्द उन्ही में से एक है।

कान दर्द की समस्या अक्सर छोटे बच्चों को होती है। इसके अलावा कान का बहना, कान का बंद होना सुनाई नहीं पड़ना आदि कुछ ऐसी सामान्य समस्याएं है जिनसे बच्चे ही नहीं अपितु बड़े भी परेशान रहते है। कान को भी मनुष्य के शरीर का नाजुक हिस्सा माना जाता है क्योंकि भले ही बाहर से यह सख्त दिखाई पड़ता है लेकिन अंदर से यह मुलायम और काफी नाजुक होता है। इसलिए इससे जुडी किसी भी समस्या में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए फिर चाहे वो दर्द ही क्यों का हो?

वैसे तो कान में दर्द होना कोई बड़ी बिमारी नहीं है लेकिन कई बार समय पर इलाज नहीं करवाने की वजह से छोटी समस्या ही बड़ी बन जाती है। इसलिए यहाँ हम आपको कान दर्द होने के कारण और उपाय बता रहे है। ताकि सही समस्या का सही ट्रीटमेंट करवाया जा सके और समस्या से छुटकारा पाया जा सके।

कान दर्द के कारण :-

किसी भी समस्या का इलाज करने से पूर्व उसके कारणों को जान लेना आवश्यक होता है ताकि भविष्य में उस समस्या के दोबारा होने से बचा जा सके। उसके अलावा सही ट्रीटमेंट लेने के लिए भी समस्या के सही कारण का पता होना जरुरी होता है। यहाँ हम आपको उन्ही के बारे में बता रहे है –कान दर्द

  • सर्दी जुखाम के कारण।
  • कान में पानी चले जाने की वजह से भी कान दर्द होने लगता है।
  • कान में मैल जमने के कारण।
  • इंफेक्शन या एलर्जी की वजह से।
  • किसी बारीक चीज से कान में खुजली करने के कारण।
  • कान की ठीक तरह से सफाई नहीं करने के कारण।

कान के रोगों के क्या लक्षण होते है?

  • कम सुनाई देना
  • कान में बार-बार खुजली होना।
  • बार-बार कान का सुन्न होना।
  • लगातार कान में दर्द रहना।
  • कान में भारीपन महसूस होना।
  • अपनी ही आवाज नहीं सुन पाना (उस कान से जिसमे तकलीफ हो)।

अगर किसी को ऊपर बताई गयी समस्याएं हो रही है तो समझ लें की वह व्यक्ति कान से जुड़े रोग से परेशान है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाए और अपना इलाज कराएं।

कान दर्द के घरेलू उपाय

1. तुलसी के पत्ते :

तुलसी के पत्तों में बहुत से गुण पाए जाते है। कान दर्द होने पर तुलसी के पत्तों को पीस लें। अब इस रस की कुछ बुँदे कान में डालें। इसका इस्तेमाल दिन में 2-3 बार करने से कान का इंफेक्शन और दर्द दूर हो जाएगा। कान में जख्म होने पर भी इस उपाय का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. मेथी दाने :methi

मेथी के दाने तेल में डालकर गर्म कर लें। अब इसे ठंडा होने दें और उसके पश्चात् छानकर कान में डालें। दर्द में तुरंत आराम मिल जाएगा।

3. नीम के पत्ते :

नीम के पत्तों के रस की 2-3 बूंद को कान में डालें। अगर किसी इंफेक्शन के कारण कान दर्द हो रहा है तो उसके लिए नीम का रस बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा नीम का तेल भी कान दर्द के लिए आयुर्वेदिक दवा के रूप में कार्य करता है।

4. लहसुन :

लहसुन में एंटी-बायोटिक और एंटी-सेप्टिक गुण पाए जाते है जो इंफेक्शन और दर्द को दूर करने में मदद करता है। इसके लिए सरसों के तेल में लहसुन की 2 से 3 कलियों को पीसकर गर्म कर लें। तेल के ठंडा होने के बाद उस तेल को छान लें और 2 से 3 बूंद कान में डालें। दर्द में आराम मिलेगा।

5. जैतून का तेल :कान से मैल कैसे साफ़ करें

जैतून का तेल भी कान दर्द की समस्या में बहुत आराम देता है। इसके लिए जैतून का तेल हल्का गुनगुना करके इसकी 3-4 बूंद कान में डालें। आप चाहे तो रुई को जैतून के तेल में भिगोकर भी इस्तेमाल कर सकते है। अगर जैतून का तेल उपलब्ध न हो तो आप सरसों के तेल का इस्तेमाल कर सकते है।

6. अदरक :

अदरक में बहुत से प्राकृतिक गुण पाए जाते है जो दर्द को दूर करने की क्षमता रखते है। कान दर्द होने पर अदरक को पीसकर उसे जैतून के तेल में डालें और हल्का गर्म कर लें। ठंडा होने तक इंतजार करें और उसके बाद छानकर इसकी 2-3 बूंद कान में डालें। कान में हो रही खुजली और झनझनाहट को इस उपाय की मदद से तुरंत दूर किया जा सकता है।

7. आम के पत्ते :

आम के पत्तों को पीसकर उनका रस निकाल लें। अब इस रस को हल्का गुनगुना कर लें। सहने योग्य रहने पर इसकी 2-3ल बूंद कान में डालें। दर्द में आराम मिल जाएगा।

8. प्याज़ :

कान दर्द से छुटकारा पाने के लिए प्याज का प्रयोग भी किया जा सकता है। इसके लिए एक चम्मच प्याज के रस को हल्का गुनगुना कर लें। अब इसकी 2 बूंद कान में डालें। इस उपाय की मदद से कुछ ही देर में दर्द बंद हो जाएगा।

9. मूली :

मूली का प्रयोग करके भी कान के दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिए मूली काटकर दो टुकड़े कर लें और उसे सरसों के तेल में गर्म कर लें, ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद उसे कान में डालें। इस उपाय की मदद से कान का मैल बाहर आ जाएगा और दर्द में आराम मिलेगा।

10. गर्म पानी की सिकाई :

कई बार सर्दियों में अधिक ठंड पड़ने की वजह से भी कान में दर्द होने लगता है। इस स्थिति में किसी बोतल में गर्म पानी भरकर किसी कपडे या तौलिया से बोतल को लपेट लें। अब उस बोतल से कान की सिकाई करें। ऐसा करने से कुछ ही समय में कान का दर्द दूर हो जाएगा।

तो ये थे, कुछ आसान घरेलू उपाय दे रहे है जिनकी मदद से कान दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे किसी भी उपाय का इस्तेमाल करने से पूर्व डॉक्टर से परामर्श अवश्य ले लें। क्योंकि कान को शरीर का नाजुक हिस्सा माना जाता है और यदि इसके उपचार में जरा भी लापरवाही हुई तो व्यक्ति हमेशा के लिए अपनी सुनने की शक्ति खो सकता है। इसलिए सोच-समझकर ही उपाय का इस्तेमाल करें।

प्रेगनेंसी में गलत तरीके से सोने के नुकसान

प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला के शरीर में हो रहे बदलाव व् शारीरिक परेशानियों के होते हुए भी प्रेग्नेंट महिला को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि महिला यदि अपनी सेहत के प्रति थोड़ी भी लापरवाही करती है तो इससे शिशु और महिला दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। और स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए महिला को खान पान, व्यायाम, आदि के साथ सोने के तरीके का भी ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि जैसे गलत खान पान महिला व् शिशु की सेहत पर गलत असर डाल सकता है। उसी तरह गलत तरीके से सोना भी प्रेग्नेंट महिला व् शिशु की सेहत को प्रभावित कर सकता है।

प्रेग्नेंट महिला को सोने में दिक्कत क्यों होती है?

  • वजन बढ़ने के कारण महिला को सोने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • शारीरिक परेशानियों का प्रेगनेंसी के दौरान होना आम बात होती है जिसके कारण महिला को नींद लेने में दिक्कत हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को कितनी नींद लेनी जरुरी होती है?

  • आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ घंटे जरूर सोना चाहिए।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला की बात की जाएँ तो महिला को इससे थोड़ा ज्यादा सोना चाहिए।
  • क्योंकि शारीरिक परेशानियों के कारण महिला ज्यादा थकान व् कमजोरी का अनुभव करती है।
  • ऐसे में नींद लेने से महिला को रिलैक्स व् रिफ्रैश महसूस होने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में गलत तरीके से सोने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान महिला को सोते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि महिला यदि गलत तरीके से सोती है। तो इसके कारण भ्रूण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ महिला को भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में गलत तरीके से सोने से क्या नुकसान होते हैं।

ब्लड सर्कुलेशन

  • प्रेगनेंसी महिला को स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर विकास के लिए बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन का बेहतर तरीके से होना जरुरी होता है।
  • लेकिन यदि महिला गलत तरीके से सोती है जैसे की यदि पीठ के बल सो जाती है।
  • तो इससे गर्भाशय का दबाव दूसरे अंगो पर पड़ सकता है।
  • जिसके कारण बॉडी में अच्छे तरीके से ब्लड सर्कुलेट नहीं हो पाता है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला व् शिशु दोनों को सेहत सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में गलत तरीके से सोने से होती है मांसपेशियों में दर्द

  • पीठ के बल सोने से गर्भवती महिला की मांसपेशियों में दर्द व् सूजन की समस्या होने का खतरा भी रहता है।
  • जिससे गर्भवती महिला को बॉडी पार्ट्स में दर्द की समस्या हो सकती है।

पीठ में दर्द

  • प्रेग्नेंट महिला यदि पीठ के बल सोती है तो इससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पीठ में दर्द की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान अधिक परेशान होना पड़ सकता है।

सूजन

  • प्रेग्नेंट महिला यदि सीधा होकर सोती है तो इसके कारण सिर से पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है।
  • जिसके कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में सूजन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में गलत तरीके से सोने से होती है शिशु को दिक्कत

  • यदि प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में प्रेग्नेंट महिला पेट के बल सो जाती है।
  • तो इसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है।
  • खासकर गर्भ में शिशु का विकास बढ़ने के साथ महिला द्वारा ऐसा करना शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

दाईं तरफ होकर सोना

  • यदि प्रेग्नेंट महिला बहुत देर तक दाईं और करवट लेकर सोती है।
  • तो इससे महिला के जिगर व् फेफड़ों पर दबाव पड़ सकता है।
  • जिसके कारण गर्भ में शिशु तक ऑक्सीजन के प्रवाह में भी कमी आ सकती है।
  • ऐसे में आप दाईं और करवट लेकर सो सकती है लेकिन लम्बे समय तक इसी पोजीशन में सोने से बचना चाहिए।
  • और सोते समय थोड़ी थोड़ी देर बाद अपनी पोजीशन बदलते रहना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सोने के लिए सही पोजीशन कौन सी है?

  • गर्भावस्था के दौरान महिला को नींद भरपूर लेना बहुत जरुरी होता है।
  • लेकिन कौन सी पोजीशन में सोना प्रेग्नेंट महिला के लिए ज्यादा सही होता है इस बारे में जानना भी जरुरी होता है।
  • ताकि गलत तरीके से सोने के दुष्प्रभाव से महिला व् शिशु दोनों को बचाने में मदद मिल सके।
  • ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए।
  • क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान सोने के लिए यह सबसे सही पोजीशन है।
  • और इससे गर्भवती महिला व् शिशु को किसी तरह का नुकसान भी नहीं होता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान गलत तरीके से सोने से होने वाले नुकसान व् सोने से जुडी अन्य जानकारी। यदि आप भी गर्भवती है तो सोते समय आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको और आपके शिशु को इन सभी परेशानियों से बचाव करने व् प्रेगनेंसी में स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

कौन-कौन सी बीमारियां छुआछूत से फैलती है?

Disease Spread By Direct Contact

छुआछूत से होने वाली बीमारियां ये है, Disease Spread by Direct Contact, छुआछूत की बीमारियां, डायरेक्ट कांटेक्ट से होने वाली बीमारियां और उनके लक्षण 

छुआछूत की बीमारी बड़ी आसानी से एक दूसरे में फ़ैल जाती है। विशेषकर ये बच्चों में बहुत तेजी से फैलती है। अगर किसी इंसान को या किसी बच्चे को निम्नलिखित बीमारियां हो तो उसके संपर्क में आने वाला भी उस बीमारी की चपेट में आ सकता है। यहाँ हम आपको उन्ही कुछ बिमारियों में बारे में विस्तार से बताने जा रहे है। ताकि आप खुद को और अपने बच्चों को इसके चपेट में आने से बचा सके।

क्योंकि बच्चों की स्किन ही नहीं बल्कि उनका शरीर भी काफी नाजुक होता है और उसमे कोई भी बीमारी बड़ी जल्दी से फैलती है। ऐसे में ग्रसित व्यक्ति को बच्चे से दूर रखना और भी जरुरी हो जाता है। छुआछूत की वे बीमारियां निम्न है :-

छुआछूत की बीमारी को फैलने से रोकने के कुछ टिप्स :

  • किसी भी इन्फेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद हाथों को अच्छे से धोएं।
  • संक्रमित व्यक्ति द्वारा यूज किये गए टिश्यू को अच्छे से डिस्पोस कर दें।
  • साबुन, या लिक्विड हैंडवाश का प्रयोग करें।
  • किसी भी डिस्पोजेबल वस्तु को एक से अधिक बार प्रयोग न करें।
  • बच्चों के टॉयज को रोजाना धोएं।
  • प्रत्येक बच्चे के उसके खुद के सोने वाले मैट और शीट होनी चाहिए।
  • ब्रश, कंघी, कम्बल, टोपी और कपडे आदि को शेयर करने से बचे।
  • बच्चे के गंदे कपड़ों को अलग रखें। इधर उधर नहीं फेंके।
  • बच्चे के घाव, कटने आदि के निशान को ढक कर रखें।
  • समस्या के बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।

सीधे संपर्क में आने से फैलने वाली बीमारियां :-

1. जुएं (Lice) :

जुएं बहुत ही छोटी परजीवी होती है जो बालों और जड़ों में जिंदा रहती है। पहले ये एक अंडे के रूप में होती है जो बालों की जड़ों से चिपकी रहती है जिसके बाद ये जुएं बन जाती है। जुओं नहीं दिखती लेकिन उनके अण्डों को देखा जा सकता है। यह लोगों के सर से सर मिलाने या संक्रमित व्यक्ति की टोपी, कंघी, बिस्तर और कपडे आदि शेयर करने से होती है। इसके होने पर व्यक्ति के सिर में तेज खुजली होती है और कई बार सिर से थोड़ा बहुत खून भी आ जाता है। इसे आप घरेलू नुस्खों द्वारा दूर कर सकते है।

Read : जुओं को हटाने के घरेलू तरीके

2. खाज (Scabies) :scabies

यह एक तरह का स्किन इन्फेक्शन होता है जो मकड़ी के परिवार के एक छोटे से जीव के कारण फैलता है। यह समस्या भी इन्फेक्टेड व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी के होने का सबसे बड़ा लक्षण स्किन में खुजली होती है जो विशेषकर रात्रि के समय होती है।

बच्चों में यह सिर, गले, हथेलियों या पैरों के तलवे में होती है। इस बीमारी का इलाज दवाओं का सेवन द्वारा किया जा सकता है। बच्चे के संक्रमित हिस्से को गर्म पानी में साफ़ करें और 72 घंटों तक उसे छेड़े नहीं। लेकिन एक बात का ध्यान रखे, अगर समस्या गंभीर है तो शुरुआत में ही डॉक्टर को दिखा लें। अन्यथा परेशानी आपको ही उठानी पड़ेगी।

3. Impetigo :impetigo

यह एक तरह का बैक्टीरियल स्किन इन्फेक्शन होता है जो अधिकतर होंठों और लिप्स पर होता है परन्तु ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। सामान्यतौर पर ये छालों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इस समस्या के होने पर शरीर में अजीब से छाले हो जाते है जो लाल और गोल होते है इनमे बहुत खुजली भी होती है।

शुरू शुरू में ये नाक के आस पास छोटे छोटे छाले होते है है जो बाद में पपड़ी बन जाते है। इसका इलाज एंटी बायोटिक्स का सेवन करके किया जा सकता है। समस्या के होने का अंदेशा होते है डॉक्टरी परामर्श लें क्योंकि ये समस्या बढ़ने पर स्किन को ही प्रभावित करती है।

4. दाद (Ringworm) :

यह एक तरह का फंगल इन्फेक्शन है जो बालों और त्वचा पर होता है। वैसे तो ये कोई गंभीर बीमारी नहीं है और इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। लेकिन ये बहुत ही इर्रिटेटिंग होती है। जिसमे काफी खुजली होती है। यह बीमारी भी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति द्वारा प्रयोग की गयी वस्तुओं का इस्तेमाल आदि करने से भी ये बीमारी फ़ैल सकती है।

इस बीमारी के होने पर स्किन पर रशेस और एक गोलाकार बन जाता है जिसमे छोटे छोटे दाने होते है। वे लाल होने के साथ-साथ काफी अजीब भी होने है। इसके किनारों पर बहुत खुजली होती है। जबकि इसका मध्य बिलकुल सामान्य स्किन की ही तरह दिखता है। इस बीमारी का पता चलते है डॉक्टर से ट्रीटमेंट लेना चाहिए। साथ ही उस व्यक्ति द्वारा प्रयोग की जाने वाली चीजों को अलग रखना चाहिए जिससे संक्रमण फैले नहीं।

5. लाल आँखे (Conjunctivitis) :

यह एक तरह की सूजन होती है जो आई बाल के ऊपर की पतली झिल्ली में होती है। ये किसी भी वायरस या बैक्टीरिया के कारण हो सकती है। यह बीमारी भी अन्य बिमारियों की तरह संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में रहने या उस व्यक्ति द्वारा प्रयोग की गयी टॉवल आदि का प्रयोग करने से फैलती है। इस बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण आँखों के सफ़ेद हिस्से का लाल हो जाना होताहै।

संक्रमित आँख से आंसू और एक अजीब पदार्थ का स्त्राव होता रहता है। जिसके साथ ही खुजली और सूजन भी होती है। कई बार इस बीमारी के कारण सुबह जागने पर आँखे चिपक भी जाती है। ये बीमारी एक से दूसरे व्यक्ति में 24 घंटे के अंदर ही फ़ैल जाती है। इस बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि उसे बढ़ने से बचाया जा सके। साथ ही आँखों से निकलने वाले पदार्थ को रुमाल से साफ़ करते रहना चाहिए ताकि वह चेहरे के बाकी हिस्सों पर नहीं फैले।

गर्मियों में शरबत पीने के फायदे और नुकसान

गर्मी में मौसम में भरपूर मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है। क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से बॉडी को गर्मी में हाइड्रेट रहने और गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। पानी के साथ गर्मी में कई लोग शरबत पीना भी पसंद होता है। और ये शरबत बेल, गुलाब या अन्य किसी भी चीज का हो सकता है।

सिमित मात्रा में यदि शरबत का सेवन किया जाये तो न केवल यह गर्मी में होने वाली परेशानी को दूर करता है बल्कि आपके मुँह के स्वाद को भी ठीक रखता है। लेकिन यदि जरुरत से शरबत का सेवन किया जाये तो यह सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है। तो आइये अब जानते हैं की शरबत पीने से कौन से फायदे मिलते हैं और कौन से नुकसान होते हैं।

शरबत पीने के फायदे

  • शरबत पीने से आपको तरोताजा महसूस करने में मदद मिलती है जिससे आप फ्रेश व् रिलैक्स महसूस करते हैं।
  • शरीर में तरल पदार्थ की कमी को पूरा करने के लिए शरबत का सेवन करना फायदेमंद होता है।
  • पेट में गैस, कब्ज़, जैसी परेशानी को दूर करने के लिए शरबत पीना फायदेमंद होता है।
  • शरबत का सेवन करने से बॉडी हाइड्रेट रहती है, जिससे सेहत सम्बन्धी समस्या से बचे रहने के साथ स्किन से जुडी परेशानियों को दूर करने में भी मदद मिलती है।
  • गरंमी से राहत पाने के लिए शरबत का सेवन खुद करना और दूसरों को भी शरबत पिलाना बहुत अच्छा होता है।

शरबत पीने से होने वाले नुकसान

  • मीठा होने के कारण शरबत का अधिक सेवन करने के कारण ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है।
  • यदि आप ज्यादा शरबत पीते हैं तो ज्यादा शरबत पीने के कारण उल्टी, दस्त जैसी परेशानियों का सामना भी आपको करना पड़ सकता है।
  • यदि आप जरुरत से ज्यादा शरबत का सेवन करते हैं तो इसके कारण आपको भूख में कमी की समस्या भी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो शरबत का सेवन करने से आपको हो सकते हैं। ऐसे में आपको शरबत पीने के केवल फायदे हो तो दिन में एक या दो ज्यादा गिलास शरबत के ही पीने चाहिए। इसके अलावा शरबत में ज्यादा बर्फ का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, गर्मी में तुरंत आते ही पसीने में ठंडा शरबत नहीं पीना चाहिए। ऐसे में यदि आप इन बातों का ध्यान रखते हैं और जरुरत अनुसार ही शरबत का सेवन करते हैं तो गर्मी से राहत के लिए शरबत का सेवन एक बेहतरीन तरीका होता है।

गर्मियों में शरबत पीने के फायदे गर्भवती महिला के लिए हिंदी में वीडियो देखिये

बच्चों की चोटी (बाल बनाने) के नए डिज़ाइन

बालों को महिलाओं की खूबसूरती का अभिन्न हिस्सा माना जाता है, परन्तु आजकल के प्रदुषण भरे वातावरण में बालों की केयर कर पाना वाकई काफी मुश्किल होता है। बच्चा हो या बड़ा बढ़ते प्रदुषण के कारण सभी के बालों में तरह तरह की समस्याएं होने लगती है। किसी को सफ़ेद बालों की प्रॉब्लम तो किसी को बालों के झड़ने की समस्या। परन्तु इन सभी में सबसे मुश्किल समस्या बालों के पतले होने यानी बाल झड़ने की होती है। पहले केवल शरीर से कमजोर लोगों और बढती उम्र के साथ बाल झड़ा करते थे परन्तु आजकल छोटे छोटे बच्चो के भी बाल भी झड़ने लगे है जिसके कारण उनके बालों की ग्रोथ ठीक प्रकार से नहीं हो पाती।

वैसे तो इस समस्या का मुख्य कारण आजकल का वातावरण ही माना जाता है परन्तु इसके अतिरिक्त वर्तमान का खान-पान बच्चों की बदलती जीवनशैली भी बालों की ग्रोथ पर प्रभाव डालती है। बालों को लंबा करने या बढ़ाने के लिए किसी भी बाहरी वस्तु के इस्तेमाल की आवशयकता नहीं होती, इसके लिए केवल अंदरूनी पोषण की आवश्यकता होती है। माना जाता है, बालों में लगाये जाने वाले प्रोडक्ट्स का प्रभाव उतना जल्दी नहीं दिखता जितना जल्दी खान-पान को सही करने से दिखता है। जिसके लिए बच्चे को – हरी सब्जियां, दूध, दही, प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन्स युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कराना ठीक रहेगा। परंतु इसके अलावा भी एक तरीका है जिसकी मदद से बच्चों के बालों को बढ़ाया जा सकता है।

खान-पान के साथ-साथ यदि इस उपाय का भी इस्तेमाल किया जाए तो कुछ ही समय में बच्चों के बालों को बढाया जा सकता है। और वो उपाय है बाल बांधने या चुटिया बनाने का तरीका। शायद आप नहीं जानते परंतु बाल बांधने का तरीका भी बालो की लम्बाई पर प्रभाव डालता है। अगर आप गौर करेंगी तो देखेंगी की जो महिलाएं नियमित रूप से अपने बालों को खोलकर रखती है उनकी तुलना में जो महिलाएं अपने बालों में गुथ की चुटिया बनाए रखती है उनके बाल अधिक लंबे होते है। यहाँ हम आपको चुटिया बांधने के कुछ स्टाइल बता रहे है, जिनकी मदद से आप कुछ ही समय में अपने बच्चे के बालों को लंबा कर सकती है।

बच्चों के बाल बढ़ाने के लिए बाल बांधने के स्टाइल :-

1. साधारण चुटिया :

यह पारंपरिक रूप से बनाया जाने वाला हेयर स्टाइल है जिसे लगभग सभी महिलाएं अपनाती है। इसे बनाना भी काफी आसान होता है। नियमित रूप से इस हेयर स्टाइल को बनाने से बालों की ग्रोथ बढाई जा सकती है।

2. फ्रेंच चुटिया :

यह एक क्लासिकल हेयर स्टाइल है जिसे लंबे और हलके बालों के लिए पसंद किया जाता है। परंतु अगर नियमित रूप से ओइलिंग करके इस हेयर स्टाइल को बनाया जाए तो बालों की लम्बाई बढ़ाई जा सकती है। वैसे भी छोटे बच्चे पर यह हेयर स्टाइल काफी सूट करता है। और इस हेयर स्टाइल में हर बाल को गुथा जाता है जिससे बालों की ग्रोथ बढ़ाने में मदद मिलती है।

3. डच ब्रैड / उलटी फ्रेंच चुटिया :

इसे हम उलटी फ्रेंच चुटिया इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इसमें बालों को फ्रेंच चुटिया की तरह ही गुथा जाता है बस गुथने का तरीका उससे उल्टा होता है। यानी इस हेयर स्टाइल में बालों को फ्रेंच ब्रैड की तरह लेकिन उससे उल्टा गुथा जाता है। बालों को लम्बाई देने के लिए ये हेयर स्टाइल भी बहुत लाभाकरी होता है।

4. रोप ब्रैड :

इस हेयर स्टाइल में बालों को ट्विस्ट किया जाता है। इस हेयर स्टाइल को बनाना भी काफी आसान होता है। और यह बालों की लम्बाई बढ़ाने में भी मदद करता है। अगर नियमित रूप से आयल लगाकर इस हेयर स्टाइल को बनाया जाए तो कुछ ही महीनों में बाल लंबे किये जा सकते है।

5. खजूर की चुटिया :

इस हेयर स्टाइल को मुख्य रूप से पतले बालों को बांधने के लिए यूज किया जाता है। लेकिन इसका प्रयोग करके भी बालों को बढ़ाया जा सकता है। इस चुटिया में बालों के छोटे छोटे हिस्से लेकर उन्हें एक के ऊपर एक रखकर गुथा जाता है और गुथने के बाद यह खजूर जैसा दिखाई पड़ता है।

6. आगे से फ्रेंच करके चुटिया बनायें :

यह काफी पारंपरिक स्टाइल है जिसे पुराने समय की महिलाएं बहुत अधिक बनाया करती थी। इस स्टाइल में बालों को आगे से दो हिस्सों में बांटकर दोनों तरफ गुथ की चुटिया बनाकर फिर पीछे एक चुटिया बनाई जाती है। इसमें बालों की लंबाई तो बढती ही है साथ साथ व मजबूत भी होते है।

तो ये थे कुछ सामान्य हेयर स्टाइल जिनकी मदद से बच्चों के बालों को लंबा किया जा सकता है। अगर आपके बच्चे के बाल काफी ज्यादा छोटे है तो आप उसके लिए 1 या 2 पोनीटेल का भी चयन कर सकती है। ये स्टाइल बच्चों को काफी सूट भी करता है।

कौन-कौन से चर्म रोग होते हैं?

चर्म रोग के प्रकार, Types of Skin Disease, मुहांसे, पैरों के दाद, बालतोड़, त्वचा पर खुजली, डैंड्रफ, एक्जिमा, मेलस्मा, घमौरी, सोरायसिस, सनबर्न, दाद, सफेद दाग, चेचक की समस्या की पूर्ण जानकारी, Types of Skin Problems, Skin Diseases, Skin Disorders, Twacha me Samasya, Charm Rog, Twacha ke Rog


चर्म रोग की समस्या

त्वचा शरीर का सबसे नाजुक हिस्सा होता है। क्यूंकि शरीर के भीतरी अंगों की तुलना में त्वचा सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में रहती है। जिसके चलते बाहर की धूप, लू, धूल, मिट्टी, गंदगी, प्रदुषण, बाहरी वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया आदि सभी त्वचा को प्रभावित करते हैं। त्वचा के रोग यानी चर्म रोग भी इन्ही सब कारणों की वजह से होता है।

त्वचा के रोग / चर्म रोग क्या है?

चर्म रोग त्वचा पर होने वाला संक्रमण या रोग है जो त्वचा के बाहरी हिस्से पर कहीं पर भी हो सकता है। चर्म रोग की समस्या होने पर त्वचा में खुजली, दाने, रैशेस, लालिमा, सूजन, जलन, छाले, बाहरी हिस्से पर घाव आदि जैसी समस्या होने लगती है। कुछ चर्म रोग चर्म रोग सामान्य होते हैं जबकि कुछ बहुत गंभीर। सामान्यतः लोग केवल एक्जिमा को चर्म रोग मानते हैं। जबकि एक्ज़िमा के अलावा भी ऐसी कई समस्याएं होती है जो चर्म रोग का रूप होती है। आज हम आपको बता रहे हैं की चर्म रोग कितने प्रकार के होते हैं?

चर्म रोग या त्वचा रोग के प्रकार

दोस्तों, जिस तरह संक्रमण कई तरह का होता है उसी प्रकार चर्म रोग भी कई प्रकार के होते हैं। यह स्थाई और अस्थाई होने के साथ-साथ दर्द रहित और दर्द देने वाले भी होते हैं। कुछ में समस्या खुद अपने आप ही ठीक हो जाती है जबकि कुछ में डॉक्टरी इलाज आवश्यक होता है। यहाँ हम उन सभी चर्म रोगों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

Acne (मुहांसे)

Acne

मुहांसे, पिंपल या एक्ने त्वचा पर होने वाली आम समस्या है। जो अक्सर किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान होने वाले हॉर्मोनल बदलाव के कारण होते है। मुहांसे होने का एक कारण त्वचा में आयल का अधिक उत्पादन भी होता है। जो पोर्स को ब्लॉक कर देता है। पोर्स ब्लॉक होने पर त्वचा को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। जिससे गंदगी और बैक्टीरिया जमा होने लगते हैं और मुहांसे होने लगते हैं। मुहांसे होने पर त्वचा में लाल उभरे हुए दाने, दर्द, सूजन या कभी-कभी जलन की समस्या हो सकती है।

Athlete Foot (पैरों के दाद)

पैरों की दाद एक तरह का संक्रामक रोग है। जो पैरों के अंगूठे और उँगलियों के बीच में होता है। ये समस्या होने पर पैरों की उँगलियों के बीच की जगह मुलायम हो जाती है और खाल उतरने लगती है। इसके कारण कई बाद पैरों से बदबू भी आती है। ये रोग अधिकतर गर्मियों में होता है। इस चर्म रोग में खुजली भी होती है। ये समस्या अधिकतर ज्यादा देर तक पानी में नंगे पैर रहने की वजह से होती है। इससे बचने के लिए पैरों को हमेशा साफ और सूखा रखना चाहिए। और उंगलयों के बीच में फुट पाउडर लगाना चाहिए।

Boil (बालतोड़)

बालतोड़, त्वचा के रोमछिद्रों में होने वाली समस्या है, जिसे बोइल भी कहते हैं। बालतोड़ होने पर पहले त्वचा पर लालिमा आती है और उसके अंदर सूजन आने लगती है। एक-दो दिन बाद उस हिस्से के बीचों-बीच सफ़ेद भाग उभरने लगता है और उसमे पस आ जाता है। बालतोड़ अक्सर चेहरे, गर्दन, अंडरआर्म, कंधे और कूल्हों पर होता है। छोटी सी चोट या कट लगने पर ये बैक्टीरिया रोमछिद्र के भीतर चले जाते हैं और वहां इंफेक्शन फैलाते हैं। इसीलिए कभी भी कोई चोट लगे तो उसे खुला ना छोड़े। चोट की सफाई करके उसपर बैंडेज लगा लें। ताकि बैक्टीरिया स्किन के भीतर ना जा सके।

Dermatitis (त्वचा पर खुजली व् लाल दाने)

डर्मेटाइटिस को एक तरह का स्किन इंफेक्शन कहा जाता है, जो कई प्रकार का होता है। यह तनाव, शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव, वातावरण या किसी चीज से एलर्जी के कारण हो सकता है। यह समस्या होने पर त्वचा में सूजन, और लालिमा आ जाती है। इसके अलावा रैशेस, छाले, रुखी, फटी त्वचा, जलन, दर्द होना, खुजली की समया होने लगती है। ये समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। खुद से किसी चीज को प्रभावित हिस्से पर नहीं लगाना चाहिए।

Dandruff (रुसी)

Dandruff

डैंड्रफ (जिसे रुसी कहते हैं) भी एक तरह का चर्म रोग होता है। जो अधिकतर स्कैल्प पर होता है। डैंड्रफ होने पर त्वचा रूखी होकर झड़ने लगती है और रूखेपन के कारण उसमे तेज खुजली भी होती है। कुछ परिस्थितियों में स्कैल्प में जलन व् सूजन भी हो सकती है। स्कैल्प के अलावा कई बार ये समस्या हाथ पैरों की त्वचा में भी देखने को मिलती है। डैंड्रफ की समस्या, साफ-सफाई नहीं रखने के कारण, सर्दियों में गर्म पानी का ज्यादा इस्तेमाल करने पर, अनुवांशिकता, बैक्टीरिया और त्वचा में रूखेपन के कारण होती है। इसे बचने का बेहतर उपाय है की स्कैल्प में ऑइलिंग करते रहें।

Eczema (एक्जिमा)

एक्जिमा एक प्रकार का त्वचा रोग है जो त्वचा के किसी भी हिस्से में हो सकता है। एक्जिमा होने पर त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते और लाल दाने हो जाते हैं। छोटे बच्चों में ये अधिकतर देखने को मिलती है। कुछ मामलों में यह समस्या संक्रमण के कारण होती है। एक्जिमा होने पर त्वचा में तेज खुजली होती है और कई बार खुजली से कारण त्वचा से खून भी निकलने लगता है। ये त्वचा में होने वाली गंभीर समस्या है इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

Lucoderma (सफेद दाग)

सफेद दाग तभी एक प्रकार का चर्म रोग है। इस रोग में त्वचा के अलग-अलग हिस्सों पर सफेद दाग आ जाते हैं। जिसे ल्यूकोडर्मा कहते हैं। यह समस्या तब होती है जब त्वचा में रंग बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती है। यह समस्या इम्यून सस्टम के कारण, थायराइड, धूप में अधिक रहना, तनाव, केमिकल के सम्पर्क में ज्यादा रहना या अनुवांशिकता के कारण हो सकती है।

Measles (खसरा, छोटी माता)

खसरा, जिसे छोटी माता भी कहा जाता है श्वसन प्रणाली से संबंधित एक वायरल संक्रमण है। यह एक तरह का संक्रमित रोग है जो पुरे शरीर में बड़ी तेजी से फैलता है। खसरा होने पर रोगी को बुखार, सुखी खांसी, गले में खराश, आँखों में सूजन, गाल व् मुंह में सफेद दाग, त्वचा पर लाल खुजली वाले दाने होने लगते हैं। संक्रमित व्यक्ति जब छींकते हैं या खासते हैं तो ये वायरस हवा में फैल जाते हैं। यह रोग अक्सर बचपन में होता है। जो लगभग 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाता है। पहले ये एक आम बिमारी हुआ करती थी लेकिन आजकल इसके टीके बचपन में ही लगा दिए जाते हैं। जिससे बीमारी का खतरा नहीं रहता।

Melasma (त्वचा पर भूरे दाग)

मेलस्मा अधिकतर महिलाओं में होने वाला त्वचा रोग है। इस रोग में त्वचा पर काले, भूरे रंग के दाग दिखते है। मेलस्मा अधिकतर गर्भावस्था के दौरान सूर्य की रौशनी में ज्यादा देर तक रहने के कारण हो सकता है। इसके अलावा हार्मोनल चैंजेस के कारण भी त्वचा पर भूरे रंग के दाग बनने लगते हैं। मेलस्मा होने पर कुछ खास ट्रीटमेंट नहीं किया जाता क्यूंकि समय बदलने के साथ ये अपने आप ही गायब हो जाते हैं।

Miliaria (घमौरी)

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अधिक गर्मी और बरसात के मौसम में ज्यादा देर तक भीगने के कारण पीठ और छाती के आसपास लाल रंग के छोटे-छोटे निकल आते हैं जिन्हे घमौरी कहा जाता है। धुप के सम्पर्क में आते ही घमौरियों में तेज खुजली और जलन होने लगती है। इसीलिए गर्मियों के दिनों में त्वचा को जितना हो सके धूप की सीधी किरणों से बचाना चाहिए।

Psoriasis (सोरायसिस)

सोरायसिस होने पर त्वचा पर लाल, परत वाले चकत्ते होने लगते हैं। सोरायसिस कोई संक्रामक रोग नहीं है। यह एक बार होने वाली समस्या है जो समय के साथ बढ़ती ही जाती है। इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी इस समस्या का मुख्य कारण होती है। डेड स्किन को बदलने और त्वचा में नई कोशिकाओं का निर्माण करने में लगभग 28 दिनों का समय लगता है, लेकिन सोरायसिस से पीड़ित लोगों की त्वचा केवल 4 – 5 दिनों में त्वचा की नई कोशिकाओं का निर्माण करने लगती है। जिससे कोशिकाएं जमने लगती है। परिणामस्वरूप लाल, शुष्क और खुजली वाले पैच त्वचा पर दिखने लगते हैं।

Ringworm (दाद)

यह रोग त्वचा की सही तरीके से साफ़-सफाई नहीं करने के कारण होता है। इसके अलावा शरीर के किसी हिस्से का लंबे समय तक पानी में रहने के कारण भी दाद की समस्या हो जाती है। दाद एक तरह का संक्रामक रोग है, यह दूसरों से बड़ी जल्दी फैलता है। इसीलिए सावधानी बरतनी चाहिए। दाद की समस्या सिर, हथेली, एड़ी, कमर, दाढ़ी या अन्य भाग में हो सकता है। दाद होने पर त्वचा पर गोल निशान बन जाता है जिसमे जलन और खुजली होती है।

Small Pox (चेचक, बड़ी माता)

चिकनपॉक्स या चेचक वायरस के कारण होने वाली गंभीर संक्रामक बिमारी है। ये रोग होने पर त्वचा पर छाले जैसे दानें उभर आते हैं जिनमे पानी भरा होता है, इसके साथ-साथ खुजली, थकान, कमजोरी और बुखार भी महसूस होता है। चेचक पेट, पीठ व् चेहरे पर सबसे पहले दिखाई देते हैं उसके बाद पुरे शरीर में फैल जाते हैं। ये समय भी कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण होती है। इसे ठीक होने में कम से कम 2 से 3 सप्ताह का समय लग जाता है। छाले इस अवधि तक ठीक हो जाते हैं लेकिन दाग रह जाते हैं जो समय के साथ अपने-आप साफ हो जाते हैं।

Sunburn (धूप में झुलसी त्वचा)

गर्मियों के दिनों में, धूप की हानिकारक किरणों के चलते अक्सर त्वचा पर लालिमा, सूजन और दर्द की समस्या हो जाती है। इसी को सनबर्न या धूप में झुलसी हुई त्वचा कहा जाता है। सनबर्न होने पर स्किन में काफी समस्याएं होने लगती है। कई बार तेज जलन और खुजली भी होने लगती है। सनबर्न के कारण त्वचा की केवल ऊपरी परत ही नहीं बल्कि अंदरूनी परत पर भी प्रभाव पड़ता है। इसीलिए गर्मियों के दिनों से घर से बाहर निकलते समय खास सावधानी बरतनी चाहिए। ताकि त्वचा में कोई गंभीर समस्या ना हो।

तो दोस्तों, आज आपने तरह तरह के चर्म रोग और उनके बारे में जाना। आशा है अब आप उन कारणों का ध्यान रखेंगे जिनकी वजह से चर्म रोग होता है।