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डिलीवरी के बाद क्या रूटीन होना चाहिए

आप सब यह तो जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और उस दौरान सभी आपको यह भी कहते हैं की डिलीवरी के बाद आराम मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं है, बल्कि बच्चे के जन्म के बाद भी महिला के शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं। महिला के शरीर में कमजोरी आ जाती है जिससे रिकवर होने में महिला को थोड़ा समय लगता है।

ऐसे में जिस तरह प्रेगनेंसी के दौरान अपने स्वास्थ्य को सही रखने के लिए महिला अपने रूटीन का अच्छे से ध्यान रखती है। वैसे ही डिलीवरी के बाद भी महिला को स्वस्थ रहने और जल्दी फिट होने के लिए एक रूटीन बनाना चाहिए। ताकि जल्द से जल्द महिला को फिट होने में मदद मिल सके। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला का क्या रूटीन होना चाहिए।

दूध व् लड्डू

डिलीवरी के बाद सुबह उठने के बाद फ्रैश होकर, ब्रश आदि करके आपको एक गिलास दूध व् एक ड्राई फ्रूट, गोंद, सौंठ आदि के लड्डू का सेवन करना चाहिए। यदि लड्डू नहीं है तो आप ब्रैड, बिस्कुट आदि का सेवन करें। इसे खाने से आपको एनर्जी मिलेगी।

उठने के एक घंटे अंदर करें नाश्ता

बच्चे के जन्म के बाद जब आप सुबह उठते हैं तो आपको उसके एक घंटे के अंदर नाश्ता कर लेना चाहिए। क्योंकि नाश्ता दिन का पहला आहार होता है। यदि आप अपना पहला मील समय से लेते हैं तो आपका रूटीन सेट हो जाता है। साथ ही दिन के पहले मील में जितना हो सके पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें ताकि आपको पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके।

मालिश करवाएं

आठ या नौ बजे तक नाश्ता करने के कम से कम एक से डेढ़ घंटे के गैप के बाद आपको मालिश करवानी चाहिए। मालिश करवाने से बॉडी को रिलैक्स महसूस होता है और शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आप सिजेरियन डिलीवरी हुई है तो टांको के अच्छे से ठीक होने के बाद मालिश करवाएं।

फल आदि खाएं

मालिश करवाने के तुरंत बाद नहाएं नहीं बल्कि मालिश करवाने के आधे घंटे के बाद फल आदि खाएं। ताकि शरीर में एनर्जी बरकरार रहें। उसके बाद गुनगुने पानी से नहाएं ऐसा करने से आपको आराम महसूस होगा। नहाने के बाद थोड़ी देर आराम करें।

दोपहर का खाना खाएं

आराम करने के बाद जब आप उठें तो दोपहर का खाना खाएं। दोपहर के मील में आप सब्जियों, चावल, सलाद, सूप, आदि को शामिल करें। क्योंकि जितना हेल्दी आहार आप लेंगी उतना ही ज्यादा आपके शरीर को पोषक तत्व मिलेंगे और आपको जल्दी फिट होने में मदद मिलेगी। लेकिन ध्यान रखें की दोपहर के खाने में देरी न करें।

शाम को ले स्नैक्स

शाम को फिर से स्नैक्स के रूप में जरूर कुछ न कुछ खाएं, जैसे की फल, दलिया, ओट्स आदि का सेवन आप कर सकती है। थोड़े थोड़े समय के गैप पर आपको इसीलिए खाना चाहिए। ताकि आपको कमजोरी बिल्कुल भी महसूस न हो। और जितना ज्यादा आप अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखेंगी उतना जल्दी आपको फिट होने में मदद मिलेगी।

रात के खाने में रखें इन बातों का ध्यान

रात को सोने से दो घंटे पहले आपको अपने आहार का सेवन कर लेना चाहिए। साथ ही रात को खाने में ऐसी चीजों का सेवन करें जिन्हे पचाने में आपको दिक्कत न हो। क्योंकि यदि आप खाना खाते ही सो जाती हैं या फिर खाने में ऐसी चीजों का सेवन करती है जिन्हे पचाने में आपको दिक्कत होती है। तो इससे पाचन सम्बन्धी परेशानियां बढ़ने के साथ महिला को अच्छी नींद भी नहीं आती है। ऐसे में रात का खाना खाते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए, और रात के खाने में ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए।

हल्दी दूध

रात को सोने से पहले हल्दी दूध पीना चाहिए। क्योंकि हल्दी दूध प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ महिला के शरीर में दर्द आदि की परेशानी को दूर करने में भी मदद करता है। इसीलिए डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट होने के लिए हल्दी दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

गुनगुना पानी

ठंडा पानी पीने की बजाय डिलीवरी के बाद महिला को कोशिश करनी चाहिए की जब भी वो पानी पीएं। तो महिला पानी को गुनगुना करके पीएं। क्योंकि गुनगुना पानी पीने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर इम्युनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही महिला को शरीर में दर्द से आराम भी महसूस होता है।

भरपूर आराम

केवल खाने या पीने का ध्यान रखने से ही डिलीवरी के बाद जल्दी फिट नहीं होती है। बल्कि जल्दी स्वस्थ होने के लिए महिला को भरपूर आराम भी करना चाहिए। और बच्चे के साथ एक ही बार में आपको पूरी नींद नहीं मिलती है ऐसे में जब भी बच्चा सो रहा हो तो आपको भी उसके साथ सो जाना चाहिए। ताकि आपको भरपूर आराम मिलें।

पेट के लिए बेल्ट का इस्तेमाल करें

डिलीवरी के बाद उठने, बैठने, लेटने में होने वाली परेशानी से बचने के लिए आपको पेट के लिए बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। इस बेल्ट का इस्तेमाल करने से न केवल डिलीवरी के उठने बैठने में आसानी होती है बल्कि आपको पेट को बाहर निकलने से रोकने में भी फायदा होता है।

तनाव नहीं लें

बच्चे के जन्म के बाद शारीरिक परेशानियों व् बच्चे की केयर को लेकर कुछ महिलाएं तनाव ले लेती है। लेकिन आपको तनाव नहीं लेना चाहिए क्योंकि तनाव लेने के कारण आपकी फिट होने में समय लग सकता है साथ ही बच्चा भी प्रभावित होता है। ऐसे में डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने के लिए आपको तनाव नहीं लेना चाहिए।

दवाइयां लें

डिलीवरी के बाद भी जल्दी फिट होने के लिए डॉक्टर्स कुछ विटामिन्स लेने की सलाह देते हैं। ऐसे में डिलीवरी के बाद आपको उन सभी विटामिन्स का समय से सेवन करना चाहिए ताकि आप जल्दी फिट हो सकें।

व्यायाम व् योगासन

डिलीवरी के तुरंत बाद तो नहीं लेकिन डिलीवरी के कुछ समय बाद आप धीरे धीरे व्यायाम व् योगासन भी कर सकती है। व्यायाम व् योगासन धीरे धीरे करके शुरू करना चाहिए। एक दम से आपको शरीर पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। क्योंकि इसके कारण आपको दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं डिलीवरी के बाद महिला के रूटीन से जुड़े कुछ टिप्स, यदि महिला डिलीवरी के बाद इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। साथ ही डिलीवरी के बाद भी बच्चे का विकास माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में बच्चे के बेहतर विकास के लिए किसी भी तरह की लापरवाही न करें।

गर्भ में बेबी का विकास रुकने के कारण

गर्भ में बेबी का विकास रुकने के कारण, गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान केवल एक ही बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंता करती है। की गर्भ में शिशु का विकास सही से ही रहा है या नहीं। शिशु को गर्भ में किसी तरह की कोई दिक्कत तो नहीं है। ऐसे में शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला अपना दुगुना ध्यान रखती है। लेकिन फिर भी कुछ केस ऐसे आते हैं जिसमे शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है या रुक जाता है। और इस बारे में अल्ट्रासॉउन्ड के बाद महिला का बताया जाता है या फिर बॉडी भी कुछ ऐसे संकेत देती है जो यह बताते हैं की शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो रहा है ।

शिशु का विकास रुकने या अच्छे से न होने के लक्षण

  • बच्चे की धड़कन का महसूस न होना।
  • महिला के वजन का सही न बढ़ना।
  • पेट का आकार कम होना।
  • बॉडी में एचसीजी हॉर्मोन का लेवल कम होना।
  • पेट का बहुत ज्यादा टाइट महसूस होना।
  • प्रेग्नेंट महिला को ब्लीडिंग की समस्या अधिक होना।
  • सफ़ेद पानी की समस्या का गर्भवती महिला को अधिक होना।
  • पेट व् कमर में बहुत अधिक दर्द की समस्या होना।
  • ब्रेस्ट का आकार घटना।
  • गर्भ में शिशु की हलचल में कमी होना।
  • मॉर्निंग सिकनेस की समस्या का अनुभव न होना।

गर्भ में शिशु का विकास रुकने का कारण

प्रेगनेंसी के दौरान कई बार गर्भ में शिशु का विकास उस तरह से नहीं हो पाता है जिस तरह से होना चाहिए। और गर्भ में शिशु का विकास में कमी होने का कोई एक कारण नहीं होता है। तो आइये अब जानते हैं गर्भ में शिशु का विकास रुकने के क्या कारण होते हैं।

पोषक तत्वों की कमी

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • लेकिन यदि गर्भवती महिला अपनी डाइट में लापरवाही करती है।
  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार की जगह महिला जंक फ़ूड, ज्यादा मिर्च मसालों, तेलीय आहार आदि का सेवन करती है तो इसके कारण शिशु को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है।
  • या फिर यदि महिला वजन बढ़ने के चक्कर में डाइट करने लगती है तो इसके कारण भी शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
  • ऐसे में जब शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व शिशु को नहीं मिलते हैं तो इसके कारण शिशु के विकास में कमी या शिशु के विकास रुकने की समस्या हो सकती है।

गर्भ में बेबी का विकास रुकने का कारण है पानी की कमी

  • गर्भावस्था के दौरान महिला को बॉडी को हाइड्रेटेड रखने की सलाह दी जाती है।
  • क्योंकि बॉडी में तरल पदार्थों का भरपूर होना न केवल गर्भवती महिला की परेशानियों को कम करने में मदद करता है।
  • बल्कि इससे गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखने में भी मदद मिलती है।
  • और एमनियोटिक फ्लूड शिशु के विकास को बढ़ाने में मदद करता है।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इसके कारण गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी हो सकती है।
  • जिसके कारण शिशु के विकास में कमी व् शिशु का विकास रुकने जैसी परेशानी हो सकती है।

गलत खाद्य पदार्थों का सेवन

  • प्रेगनेंसी के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों की मनाही होती है क्योंकि उनके सेवन से शिशु का विकास बहुत बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
  • जैसे की शराब, कच्चा पपीता, कच्चा मास, कच्चे अंडे, कटे गले सड़े फल व् सब्जियां, चाइनीज़ फ़ूड, आदि।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला इनका सेवन करती है तो इसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है।
  • साथ ही इसके कारण शिशु का विकास रुकने के कारण गर्भपात, समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या भी हो सकती है।

गर्भ में बेबी का विकास रुकने का कारण है महिला का तनाव लेना

  • गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान तनाव में रहती है तो इसके कारण बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन की समस्या हो सकती है।
  • और बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन का होना गर्भ पर बुरा असर डाल सकता है जिसके कारण शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है। तो यदि आप चाहते हैं की गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो सके तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए, डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

नई माँ का दूध बढ़ाने के उपाय

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माँ का दूध नवजात शिशु के लिए अमृत के समान होता है क्योंकि शिशु के बेहतर विकास के लिए जिन जिन पोषक तत्वों की जरुरत होती है, वो उसे माँ के दूध से भरपूर मिलते है। साथ ही माँ का दूध शिशु को रोगो से लड़ने के लिए भी सक्षम बनाता है। लेकिन कई बार कुछ कारणों की वजह से माँ का दूध अच्छे से नहीं उतर पाता है जिसके कारण शिशु के भरपूर पोषण को लेकर नई माँ को चिंता हो जाती है। और कई बार दूध उतरता है तो कम मात्रा में उतरता है जिसके कारण शिशु की भूख नहीं मिटती है, तो आइये आज हम नई माँ की इस परेशानी का समाधान बताने जा रहें है जिससे महिला के ब्रैस्ट में दूध की वृद्धि करने में मदद मिलती है।

दूध व् दूध से बने उत्पाद

स्तन में दूध की वृद्धि के लिए सबसे पहले तो महिला को अपने आहार में दूध व् दूध से बनी चीजों का भरपूर सेवन करना चाहिए। इससे न केवल महिला को भरपूर प्रोटीन मिलता है बल्कि शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर होने में भी मदद मिलती है, और शिशु के के लिए दूध का उत्पादन बढ़ता है। इसीलिए दिन में तीन से चार गिलास दूध पीने के साथ दूध से बनी चीजों का भी सेवन करना चाहिए।

सौंफ

सौंफ न केवल स्तन में दूध की वृद्धि करता है बल्कि गैस जैसी समस्या को दूर करने के साथ पाचन शक्ति को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके लिए आप एक गिलास पानी गरम करके उसमे दो चम्मच सौंफ डालकर आधे घंटे के लिए रख दें, उसके बाद दिन में दो बार इसका सेवन करें, साथ ही खाने के बाद एक चम्मच सौंफ खाएं, चाय में सौंफ डालकर पीएं इससे भी आपको फायदा मिलता है।

मेवा

सूखे मेवे जैसे की बादाम, काजू, किशमिश, आदि का भरपूर सेवन करने से भी न केवल आपको भरपूर पोषक तत्व मिलते है बल्कि शिशु के लिए स्तन में दूध की वृद्धि करने में मदद मिलती है। खासकर बादाम को रात को भिगोकर रखें और सुबह छिलका उतारकर इसका सेवन करें आपको बहुत फायदा मिलेगा।

दाल का पानी

भरपूर मात्रा में दालों का सेवन और उबली हुई दाल का पानी पीने से भी आपको भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं। साथ ही इससे दूध उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप मूंग दाल का खासकर सेवन करें क्योंकि इसका सेवन ब्रेस्टमिल्क को सबसे ज्यादा बढ़ाने में आपकी मदद करता है।

लहसुन

अपने आहार में लहसुन को भी शामिल करें, क्योंकि लहसुन भी ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में आपकी मदद करता है। लेकिन कई बार इसके कारण दूध में से गंध भी आती है ऐसे में हो सकता है की शिशु दूध छोड़ दें, इसीलिए अधिक मात्रा में इसका सेवन न करें।

तिल व् सौंठ के लडू

डिलीवरी के बाद महिला को शारीरिक रूप से जल्दी फिट होने के लिए और दूध के उत्पादन को बढ़ाने के लिए तिल व् सौंठ के लडू खाने चाहिए। ऐसा करने से न केवल आपको भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं बल्कि डिलीवरी के बाद तेजी से रिकवर होने में मदद मिलती है।

जीरा

जीरा भी माँ का दूध बढ़ाने में मदद करता है, इसके लिए आप जीरे को अच्छे से भूनकर उसे पीस लें, पीसने के बाद उसे सब्जियों के ऊपर डालकर, सलाद आदि में डालकर उसका सेवन करें, जितना आप इसका अधिक सेवन करते हैं। उतना ही ज्यादा यह ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में आपकी मदद करता है।

नारियल का तेल

नारियल के तेल का सेवन करने से ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने वाले हॉर्मोन का उत्पादन बढ़ता है साथ ही ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जिसके कारण ब्रेस्ट में दूध की वृद्धि होती है। इसीलिए नई माँ को अपने आहार में नियमित दो से तीन चम्मच नारियल का तेल जरूर शामिल करना चाहिए।

दलिया

दूध से बना दलिया महिला को नियमित नाश्ते में पेट भरकर खाना चाहिए, इससे महिला को भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व मिलते हैं। साथ ही इसे दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद भी मिलती है।

सालमन मछली

सालमन मछली का सेवन करने से भी ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें प्रोटीन, विटामिन के साथ ओमेगा 3 फैटी एसिड भी भरपूर मात्रा में होते हैं।

ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने के अन्य उपाय

  • अपने खान पान में बिल्कुल भी लापरवाही न करें, समय से अपने आहार को लें, साथ ही ऐसे आहार का सेवन करें जिसमे भरपूर पोषक तत्व हो।
  • पानी के साथ अन्य पेय पदार्थ जैसे की दूध व् जूस आदि का भी भरपूर सेवन करें।
  • हरी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें।
  • गाजर का सेवन या गाजर का जूस पीने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • अंडे भी आपकी इस समस्या का समाधान करने में आपकी मदद करते हैं।
  • ब्राउन राइस भी ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाते हैं इसीलिए आप इन्हे भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
  • हर दो से तीन घंटे में कुछ न कुछ जरूर खाएं।
  • शिशु को अपने सीने से लगाकर सोएं, इससे भी मातृत्व का अहसास होता है, और ऐसा माना जाता है की इससे दूध की वृद्धि भी होती है।
  • ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल करके भी आप दूध का उत्पादन बढ़ा सकती है।
  • शिशु को हर दो घंटे में फीड दें, और फीड देने के लिए दोनों ब्रेस्ट का प्रयोग करें।
  • संतरे का रस पीने से भी दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • स्तनपान करवाते समय इस बात का ध्यान रखें की शिशु अच्छे से दूध पीएं क्योंकि जितना अच्छे से वो दूध पीता है उतनी ही दुग्ध नलिकाएं खुल जाती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करके नई माँ स्तन में दूध की वृद्धि की जा सकती है, और उसके बाद जैसे जैसे शिशु अच्छे तरीके से स्तनपान करने लगता है तो भी दूध का उत्पादन बढ़ता रहता है।

What is IVF? Best Gynecologist & IVF Centres in Delhi

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माँ बनना दुनिया का सबसे बड़ा वरदान कहा जाता है। माँ बनना हर औरत के लिए एक ख़ास एहसास होता है। लेकिन कई बार कुछ मजबूरियों और परेशानियों के चलते कई औरत जीवन का यह सुख नहीं भोग पाती। इसी सुख को पूरा करने के लिए IVF तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिसके बारे में आज हम आपको पूर्ण जानकारी देने जा रहे है।

माँ बनना दुनिया का सबसे बड़ा वरदान कहा जाता है। हर औरत माँ बनना चाहती है, माँ बनने के बाद ही औरत को सम्पूर्ण होने का एहसास होता है। परंतु बदलती जीवनशैली और भाग दौड़ भरी दिनचर्या के बीच एक नई समस्या ने समाज में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। और वो समस्या है इनफर्टिलिटी की समस्या, जिसके कारण अनेक दंपती जीवन के सबसे बड़े सुख को भोगने से वंचित रह जाते हैं और अपनी ज़िंदगी में अधूरापन महसूस करते हैं।

यूँ तो अधिकतर दम्पति विवाह के बाद दो तीन वर्ष तक माँ-बाप नहीं बनना चाहते और अधिक से अधिक समय अपने जीवनसाथी के साथ गुज़ारना चाहते हैं, ताकि वो एक दूसरे को ठीक से समझ पाएँ। परंतु शादी के तीन चार वर्ष बाद हर दम्पति चाहता है कि उनके घर में एक नन्हा मेहमान आ जाए, जो की उनके रिश्ते को और मज़बूत कर सके, उनके वंश को आगे बढ़ा सके। और अगर किसी कारणवश ऐसा नहीं हो पाता है तो फिर चिन्ताएँ उन्हें घेरने लगती हैं। घरेलू उपायों से लेकर डॉक्टरों के चक्कर तक लगने लगते हैं। डॉक्टरी इलाज से इस समस्या से आसानी से निजात पाया जा सकता है। परंतु फिर भी गर्भधारण सम्भव ना हो तो विज्ञान ने इतनी तरक़्क़ी कर ली है कि आपके लिए कोई ना कोई उपाय तो निकल ही आएगा। 

ऐसा ही एक उपाय है IVF यानि की In Vitro Fertilisation, ये एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें गर्भाशय से बाहर, अर्थात कृत्रिम परिवेश में, शुक्राणुओं द्वारा अंड कोशिकाओं का निषेचन किया जाता है। 

सामान्यत: डिंबक्षरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसका सुचारू रूप से चलना ही किसी महिला के माँ बनने की प्रक्रिया का आधार होता है। ये वह प्रक्रिया है, जिसमें अनिषेचित अंडे विमोचित किए जाते हैं। हर महीने-लगभग 28 दिन में, एक सेल विमोचित होता है। यौवनारंभ के बाद, हार्मोन अंडाशय को अंडा विमोचित करने के लिए प्रेरित करते हैं जो फैलोपिन ट्यूब से होकर गुजरता है। अगर अंडा शुक्राणु द्वारा निषेचित हो जाए तो यह निषेचित अंडा गर्भस्थल में जाकर स्थित हो जाता है और शिशु के रूप में विकसित होने लगता है।

Best Gynecologist & IVF Centres in Delhi

Ruby SehraProgeny is one of the best IVF centres in Delhi, offering complete infertility solutions to couples looking to conceive. At IVF Progeny, one of the premier IVF Centres in Delhi, we facilitate you with dealing in issues related to infertility, obstetrics and gynecology. Infertility as an issue has witnessed a surge and has resulted in tense relation between spouses, divorce etc. The hectic lifestyle of present generation is one of the major reasons for this sudden increase in the number of infertility issues. The hectic lifestyle results in erratic eating and sleeping habits thus making the person prone to health issues. While common health issues that have physical symptoms can be diagnosed in the beginning, problems related to infertility do not surface until a couple attempts to procreate. The bliss of parenthood is an unparalleled feeling. Couples try to do all that is possible to achieve it. They try to adhere to every advice they listen in order to fill the void created by infertility. Atheists turn to religion, the biggest pessimists in the world start believing in the idea of magical transformation.

IVF has evolved as a boon for all those who have problems related to procreation. The advancement has resulted in bringing happiness in the lives of couples who had lost all hopes of having a child. The spread of this IVF technology is proving to be increasingly helpful. Delhi being the capital of India was among the first to get an IVF centre. In the initial days the number of Best IVF centres in Delhi was very limited, locating an IVF doctor in Delhi was a difficult task but the scenario has changed with private practitioners opening up IVF clinics and centre.

Finding the Best IVF centres  in Delhi is not only possible now but today we can get the best gynecologist and IVF specialist doctor in Delhi. IVF Progeny being one of the best ivf centres in Delhi has the best IVF doctor in Delhi and anyone suffering from infertility issues can avail their services. Our IVF centres in Delhi provides you with one of the best IVF facilities, special guidance extends from the time when nature fails your attempts at conception, to the time you feel your womb being kicked by a tiny bundle of joy which you always prayed for. Progeny in itself means “The Offspring”, or a product of your kin. We value your emotions, and hence we bring to you’re a comprehensive blend of sophisticated world class equipment backed by a multidisciplinary team of highly skilled professionals in the fields of infertility, laparoscopic surgery, embryology, radiology, pathology and anaesthesiology in our IVF centre in Punjabi Bagh, Delhi.

Param Tej Sehra Medical & Gynae Center
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(A UNIT OF PARAM TEJ SEHRA MEDICAL CENTER)
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गर्भावस्था में नींद नहीं आना कितना खतरनाक हो सकता है जानिये

गर्भावस्था में जितनी आपकी ख़ुशी बढ़ती है उतना ही आपका स्ट्रेस लेवल भी बढ़ता जाता है। इस समय में आप बहुत से हार्मोनल और शारीरिक बदलावों से गुजरते है। इसी कारण गर्भवती महिला की पूरी रूटीन भी बदल जाती है। एक रिसर्च के अनुसार 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को नींद से जुडी समस्याएँ होने लगती है।

प्रेगनेंसी में दौरान आप जितनी नींद लेते है वह सिर्फ आपको और आपके बच्चे को ही इफ़ेक्ट नहीं करती बल्कि आपके डिलीवरी और लेबर को भी इम्पैक्ट करती है। गर्भावस्था में नींद की कमी डिलीवरी के समय बहुत से कम्प्लीकेशन लाती है। नींद के कमी के कारण गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर और किडनी पर असर पड़ता है जिसके कारण समय से पहले डिलीवरी के चान्सेस बढ़ जाते है। इस स्थिति को प्रीक्लैम्प्सिआ के नाम से भी जाना जाता है। जरुरी है के गर्भवती महिला की नींद का खास ख्याल रखें।

जब आप प्रेग्नेंट होते है, तो सबसे पहला लक्षण होता है के आप थके हुए दिखने लगते है। नींद आपकी इसी थकान को दूर करने के काम आती है। आपमें इस बदलाव के लिए आप अपने अंदर बदलते  हार्मोन्स को जिम्मेदार मान सकते है, खासतौर पर वो प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन्स जो गर्भवती होते ही आपके अंदर तेजी से बढ़ने लगते है।  शुरुआत के दिनों में प्रेगनेंसी के कारण आपका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर दोनों ही कम हो जाते है जिस वजह से आप ज्यादा थकान महसूस करने लगती है। 

जल्दी ही गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीने बीतने पर आपकी एनर्जी फिर से लौटने लगेगी। और कुछ समय बाद जब प्रेगनेंसी के आखिरी के तीन महीनो शुरू होने के साथ साथ आपकी थकान फिर से बढ़ने लगेगी। इस समय में शिशु का विकास होने लगता है आपका पेट बाहर की और आ जाता जिससे आपकी पूरी बॉडी में स्ट्रेस सा आने लगता है इसी वजह से आपका तनाव और थकान बढ़ जाता है। यह समय होता है जब आप प्रॉपर नींद नहीं ले पाती। चाहे आपको पहले कभी भी नींद से जुडी समस्या ना हुई हो फिर भी यह समय ऐसा होता है जब नींद आने में समस्या आने ही लगती है।

इन कारणों के आलावा किडनी बहुत मुश्किलों से काम कर रही होती है पानी को फ़िल्टर करने के लिए इसी प्रक्रिया के दौरान यूरिन ज्यादा बनता है। और जैसे की आपके गर्भाशय में शिशु आकर भी बढ़ रहा है तो आपके ब्लैडर पर भी प्रेशर होता है। इसी कारण आपको बार बार बाथरूम जाना पड़ता है। कई बार रात में ज्यादा बाथरूम जाने की जरुरत पड़ती है अगर आपका शिशु रात के समय ही एक्टिव रहता है तो। इसी कारण गर्भवती महिला की राति की नींद पूरी तरीके से खराब हो जाती है।

आपके हार्ट को पहले से ज्यादा तेजी से काम करना पड़ता है। क्योंकि आपके गर्भाशय को ज्यादा ब्लड सप्लाई की जरुरत पड़ती है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान हमारी हार्टबीट भी बढ़ जाती है। इसके आलावा यदि गर्भाशय का आकार ज्यादा बड़ा है तो उसका प्रेशर हमारे लंग्स पर भी आ जाता है जिस वजह से हमे साँस लेने में भी कई बार परेशानी होने लगती है। इस प्रकार और भी कई अन्य कारण होते जिससे गर्भवती महिलाओं की नींद खराब हो जाती है।

नींद हमारे लिए सुविधा नहीं बल्कि यह हमारी सेहत के लिए बहुत ही जरुरी होती है। यह देखा गया है के गर्भवती महिला की अस्वस्थ नींद उसके और शिशु के लिए खतरनाक स्थितियां पैदा कर सकती है जैसे की हाइपरटेंशन, प्रीक्लैम्प्सिआ, गेसटीशनल डायबिटीज, पुलमोनोरी हाइपरटेंशन आदि। तो आप समझ सकते है यह समस्याएँ कितनी चिंताजनक हो सकती है।

यह देखने में आया है के जिन गर्भवती महिलाओं को रात में स्नोरिंग यानि की खर्राटों की समस्या हो, उनमे से 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाओं को प्रीक्लैम्प्सिआ की प्रॉब्लम हो जाती है। नींद में रूकावट के कारण भूर्ण तक सही से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जिस वजह से भूर्ण का अच्छे से विकास नहीं हो पाता है। एक अध्य्यन के अनुसार जो महिलाये 6 घंटे से कम की नींद लेती है ज्यादातर केसेस में उन्हें सी सेक्शन डिलीवरी के लिए जाना पड़ता है।

इन सभी कॉम्प्लीकेशन्स से बचने के लिए शुरआत से ही हमे सोने के सहीं आदतों को अपनाना चाहिए। आपको जिस पोजीशन में सोना पसंद, या जो आपके लिए कम्फर्टेबल है उसी पोजीशन को अपनाये। जैसे की राइट साइड में करवट लेकर थोड़ा सा घुटनों को मोड़ कर सोने से सबसे ज्यादा आराम मिलता है। इस पोजीशन में सोने से लार्ज वेन पर प्रेशर भी नहीं पड़ता और हार्ट आसानी से हमारे पैरो और टांगो में ब्लड का सर्कुलेशन कर पाता है।  पर कुछ डॉक्टर लेफ्ट साइड के पोजीशन में सोना ज्यादा एडवाइस करते है। उनका मानना है के लेफ्ट साइड सोने से लिवर पर प्रेशर नहीं पड़ता क्योंकि लिवर हमारे राइट साइड में होता है। कुछ डॉक्टरों का मानना है के लेफ्ट साइड की पोजीशन में सोने से ब्लड का फ्लो भूर्ण, गर्भाशय और किडनी की तरफ अच्छा होता है। इसीलिए सबसे बेहतर यही होता है के आप अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

पर किस साइड सोना इस चीज को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं लेना है।  ये सिर्फ एक तरीका है जिससे गर्भवती महिला आरामदायक पोजीशन में अच्छी नींद ले सके। और अक्सर जब हम सो रहे होते है तब हमे पता भी नहीं चलता की कब हमने पोजीशन बदल ली है। अगर आपको कमर दर्द है तो कमर की निचे तकिया लगाकर आराम लेने की कोशिश करें।

इन सभी बातों के आलावा अगर आपको नींद की कमी हो रही है तो अपने भोजन में कैफीन की मात्रा को कम कर दे। कैफीन जो के हमे चाय, कॉफ़ी, सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स आदि से मिलता है। यह हमारी नींद को कम करता है। रात के समय सिर्फ सलाद, फल और जूस के सहारे न रहकर, अच्छे से भोजन करें। अपने रात के सोने एक समय फिक्स कर लें। इसके आलावा तनाव से दूर रहने के लिए योगा क्लासेस भी ज्वाइन कर सकते है। योग और एक्सरसाइज करने से पहले अपने डॉक्टरों से जरूर सलाह लें।

इन सभी बदलावों के बावजूद भी आप सो नहीं पा रही है तो अपने डॉक्टर को जरूर बताये। ताकि आपका डॉक्टर आपका अच्छे से चेक-अप करें की कहीं कोई ज्यादा परेशानी की बात तो नहीं है। क्योंकि गर्भावस्था में आपके और शिशु के लिए सेहतमंद नींद बहुत ही आवश्यक है।

क्या खाने से गर्भ में शिशु बीमार होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खान पान का अच्छे से ध्यान रखने के साथ, अपनी डाइट में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए इस बात का भी ध्यान अच्छे से रखना चाहिए। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर आहार खाने से जहां शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। वही कोई चीज जो की प्रेगनेंसी के दौरान नहीं खानी चाहिए उसका सेवन करने से बच्चे को परेशानी भी हो सकती है।

इसीलिए गर्भवती महिला को हर कोई यही कहता है की अब वो अकेली नहीं है उसके गर्भ में पल रहा बच्चा भी उसी पर निर्भर करता है ऐसे में खान पान के साथ अन्य छोटी छोटी बातों का भी महिला को अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्भ में बच्चे के विकास में किसी भी तरह की कमी न आये।

प्रेगनेंसी में क्या खाने से शिशु बीमार हो सकता है

गर्भावस्था के दौरान कुछ ऐसी चीजें हैं जो गर्भवती महिला को नहीं खानी चाहिए, क्योंकि उनका सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। तो आइये अब उन खाद्य पदाथों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कच्चा पपीता

प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में गर्भवती महिला को कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि कच्चे पपीते का सेवन करने से उसमे मौजूद लेटेक्स प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में गर्भपात करवा सकते हैं। साथ ही इसमें मौजूद पपाइन नामक एंजाइम गर्भ में शिशु के बढ़ते विकास को भी रोक देता है। जिससे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है और इसका मतलब यह होता है की गर्भ में आपका शिशु बीमार है।

अंगूर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अंगूर का स्वाद पसंद आ सकता है लेकिन प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके अंगूर के सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि अंगूर की तासीर गर्म होती है ऐसे में प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में जहां इसके कारण गर्भपात का खतरा हो सकता है। वहीँ अंगूर का अधिक सेवन समय से पहले डिलीवरी का कारण भी बन सकता है जिसकी वजह से जन्म के समय बच्चे के शारीरिक विकास में कमी होने की समस्या खड़ी हो सकती है।

तुलसी के पत्ते

तुलसी के पत्ते का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद एस्ट्रोगोल गर्भ गिरने का कारण बन सकता है।

चाइनीज़ फ़ूड

चाइनीज़ फ़ूड को बनाने के लिए सोया सॉस का इस्तेमाल किया जाता है जिसमे मर्करी की मात्रा मौजूद होती है। जिससे गर्भ में बच्चे का विकास प्रभावित हो सकता है और इसके कारण गर्भपात, समय पूर्व प्रसव, जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या होने का खतरा हो सकता है। इसके अलावा अन्य जंक फ़ूड का भी सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि वह भी गर्भ में शिशु की सेहत को नुक्सान पहुंचा सकता है।

कच्ची अंकुरित चीजें

कच्ची अंकुरित चीजों का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें साल्मोनेला, लिस्टेरिया जैसे बेक्टेरिया मौजूद होते हैं जिसके कारण महिला को संक्रमण होने के साथ बच्चे के विकास में कमी जैसी परेशानी हो सकती है यानी की शिशु बीमार हो सकता है।

कच्चे अंडे व् कच्चा मास

प्रेगनेंसी के दौरान महिला अंडे व् नॉन वेज का सेवन कर सकती है क्योंकि इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं। लेकिन कच्चे मास व् कच्चे अंडे का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद बैड बैक्टेरिया गर्भवती महिला को संक्रमित कर सकता है और उसके कारण बच्चे पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

मर्करी युक्त मछली

प्रेगनेंसी के दौरान महिला मछली का सेवन कर सकती है। लेकिन जिन मछलियों में मर्करी की मात्रा मौजूद होती है। उस किस्म की मछलियों का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए क्योंकि मर्करी गर्भ में शिशु की सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव डाल सकती है। जिससे उसके विकास में कमी आ सकती है और माँ के पेट में बच्चा बीमार हो सकता है।

बिना धुले फल व् सब्जियां

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बिना धुले फल व् सब्जियों का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि बिना धुले फल व् सब्जियों में टॉक्सोप्लाज़्मा नाम का बैक्टीरिया मौजूद हो सकता है, जिससे आपके पेट में पल रहे बच्चे के विकास में बाधा आती है।

अनानास

प्रेग्नेंट महिला को अनानास का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि अनानास में मौजूद तत्व गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर बुरा असर डाल सकते हैं जिसके कारण गर्भ में शिशु बीमार हो सकता है यानी की शिशु के विकास में कमी आने का खतरा बढ़ सकता है।

क्रीम वाला दूध

क्रीम से बने दूध में बैड बैक्टेरिया मौजूद होता है जो प्रेग्नेंट महिला के पेट में पल रहे बच्चे के विकास पर बुरा असर डाल सकता है। क्योंकि क्रीम से बने दूध में मौजूद बैड बैक्टेरिया के कारण महिला को संक्रमण का खतरा हो सकता है जिससे बच्चा भी प्रभावित होता है।

घर में बनी आइस क्रीम

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को घर में बनी आइस क्रीम का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसे बनाने के लिए कच्चे अण्डों का इस्तेमाल किया जाता है और कच्चे अण्डों में मौजूद बैक्टेरिया बच्चे को बीमार कर सकते हैं।

तो यह हैं वो चीजें जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को करने से बचना चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में किसी भी तरह की दिक्कत न आ सके। और उन खाद्य पदार्थों का भरपूर मात्रा में सेवन करने चाहिए जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने और बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं।

आदतें जो आपके व्यक्तित्व पर असर डालती है

बुरी आदतें कैसे छोड़े :- हम सभी लोग पुरे दिन में न जाने कितने ही कार्य करते है जिनमे सभी का अपनी-अपनी जगह पर खास महत्त्व होता है. जैसे की स्कूल में पढाई करना, घर पर टीवी देखना, शाम को दोस्तों के साथ खेलने जाना, ऑफिस की फाइलें पूरी करना और न जाने क्या-क्या. इनमे से कुछ हम अपने कार्य के रूप में करते है तो कुछ को अपनी आदत बना लेते है.

लेकिन आदतें हमेशा अच्छी नहीं होती कुछ आदतें ऐसे होती है जो आपके लिए तो नुकसानदेह होती ही है साथ-साथ आपसे मिलने जुलने वाले व्यक्तिओ के साथ आपके रिश्तो को भी खराब करती है. बुरी आदतों को कोई जान बूझकर नहीं सीखता बल्कि जाने अनजाने गलत संगत में पड़ जाने के बाद हम अक्सर इस तरह की गंदी आदतों का शिकार बन जाते है जिनके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं था.

इन बुरी आदतों का असर हमारे व्यक्तित्व के साथ-साथ हमारे स्वास्थ्य पर भी पढ़ने लगता है. लेकिन बुरी आदतों की सबसे बड़ी खामी ये होती है की आदत से ग्रसित व्यक्ति को इस बारे में नहीं पता होता लेकिन उसके आस पास रहने वाले लोग और नाते रिश्तेदार उसकी आदतों के कारण उनसे दुरी बनाने लगते है. और वे व्यक्ति इसी सोच से परेशान रहता है की आखिर मैंने क्या क्या?

शायद आप नहीं जानते लेकिन ऐसी कई आदतें होती है जिन्हें आप जाने-अनजाने धीरे-धीरे अपनी जिंदगी में उतारने लगते है. जो आगे चलकर आपकी सेहत और आपके जीवन में बहुत बुरा प्रभाव डालती है. इसीलिए हमेशा खुद को बुरी और गंदी आदतों से बचा कर रखना चाहिए. और यदि आपमें कोई ऐसे आदात है जो आपके रिश्तो को खराब कर रही है तो उसे ठीक करने का प्रयास करें. ऐसा करने से आपकी लाइफ ही अच्छे रहेगी और लोगो के मध्य आपकी personality बनी रहेगी.

इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपनी बुरी आदतों से छुटकारा पा सकते है. इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है बस अपनी दिनचर्या और आपने स्वाभाव में थोड़ा सा परिवर्तन लाना है. तो आइए जानते है वे बुरी आदतें जो आपके व्यक्तित्व पर प्रभाव डालती है और उनके समाधान!!

ये बुरी आदतें डालते डालती है आपके व्यक्तित्व पर प्रभाव 

ज्यादा शराब पीना :

आज से नहीं बल्कि पिछली कई सदियों से शराब मनुष्य के लिए नुकसानदेह ही मानी जाती है. लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन करना आपकी मौत का कारण भी बन सकता है. कई बार तो इस गंदी आदत के चलते लोगो को अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ता है.

शराब पीने से लिवर खराब हो जाता है, वजन बढ़ने लगता है, चक्कर आते है और थकान आदि जैसी समस्या आपको घेर लेती है. यदि आप भी इस आदत से परेशान है तो शराब का सेवन बन्द कर दें. लेकिन ये भी सत्य है की एकदम से शराब छोड़ना आसान नहीं इसीलिए धीरे धीरे करके इसकी मात्रा को कम करते रहे. ये आपके लिए ही अच्छा रहेगा.

देर तक सोना :

आज के समय में बहुत से लोग ऐसे है जो देर तक सोना पसन्द करते है लेकिन शायद वे नहीं जानते की अधिक देर तक सोना बिमारियों का सबसे बड़ा कारण होता है. शोध में पाया गया है की सुबह देर तक सोने वालो की तुलना में सुबह जल्दी उठने वाले कम बीमार पड़ते है और उनका स्वास्थ्य भी ठीक रहता है.

अधिक देर तक सोना न केवल आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अपितु आपके पुरे दिन को भी खराब कर देता है. क्योंकि देर तक सोने से पुरे दिन भर आलस रहता है जिसकी वजह से आपका मन किसी भी काम में ठीक से नहीं लगता. इसीलिए अपनी इस आदत को बदले और सुबह जल्दी उठना शुरू कर दें. लेकिन भरपूर नींद लेना भी बेहद जरुरी है.

केले रहना और लोगो से बात चित न करना :

कुछ लोग होते है जो दूसरे लोगो से जल्दी घुलते मिलते नहीं और न ही किसी से ज्यादा बातचित करना पसन्द करता है. लेकिन ये बहुत नुकसादेह होता है. क्योंकि स्वस्थ रहने के लिए मन का स्वस्थ होना बेहद जरुरी है और ये तभी संभव है जब आपका मस्तिष्क फ्रेश हो.

और यदि ऐसा नही होता है तो आप हमेशा दुखी रहेंगे जिसका प्रभाव सीधा आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली पर पड़ता है. यदि आप भी उन्ही लोगो में से है जो अकेला रहना अधिक पसन्द करते है तो इसे छोड़े और थोड़ा सोशल बने, लोगो से बात चित करें उनसे अपनी बातें शेयर करें. ऐसा करने से आपका मन खुश रहेगा और आप स्ट्रेस फ्री फील करेंगे. क्योंकि अकेलापन भी स्ट्रेस का एक कारण होता है.

अधिक समय तक हेडफोन का इस्तेमाल :

आज के आधुनिक समय में ऐसे बहुत से लोग है जो सारा-सारा दिन हेडफोन या इयरफ़ोन को कानों में लगाएं रहते है. कुछ लोग को इसका प्रयोग यात्रा के दौरान या यूँ ही अपना समय काटने के लिए इसका प्रयोग करते है तो कुछ अपने काम के दौरान हल्का फील करने के लिए इसे यूज करते है.

लेकिन यदि आप पुरे पुरे दिन इसका इस्तेमाल करते है तो ये आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. साथ ही आपके कानो को नुकसान पहुँचने की संभावना भी बनी रहती है. यदि आप भी इस आदत की आदि है तो तुरंत इसे बदले आपके लिए ही लाभकारी रहेगा.

टीवी से चिपके रहना :

हम लोगो में से कई ऐसे होते है जो बहतु अधिक टीवी देखना पसंद करते है, यदि उन्हें कोई बीच में टीवी के सामने से न उठाये तो वे सारा दिन एक टक टीवी देख सकते है. लेकिन क्या आप जानते है की दिल के दौरे, स्ट्रोक, आँखों का कमजोर होना और मोटापे की समस्या इसी टीवी का परिणाम होती है. ये गन्दी आदत न केवल आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती है अपितु आपको दोस्तों के बीच शर्मिंदा भी करती है.

इसीलिए अपना मूड फ्रेश करने और खुद को लाइट फील कराने के लिए ही टीवी देखे न की खुद को नुकसान पहुँचाने के लिए.

हील्स का अधिक प्रयोग :

आज कल की कुछ लड़कियां खुद को स्टाइलिश दिखाने के चक्कर में ऊँची ऊँची हील्स पहनती है जबकि कुछ अपने शौक के कारण इसे पहनना पसन्द करती है. लेकिन क्या आप जानती है की हील आपकी सुंदरता को तो बढ़ा देती है लेकिन आपके स्वास्थ्य और शरीर पर कितना बुरा प्रभाव डालती है.

ये न केवल शरीर में रक्त के संचारण को प्रभावित करती है बल्कि शरीर की मुद्रा और जोड़ो पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है. जिसकी वजह से गठिया, पीठ का दर्द, कूल्हों का भरी होना और कण्डरा चोट का खतरा भी बना रहता है. कई बार तो हाई हील्स एक्सीडेंट्स का कारण भी बन जाती है. इसीलिए इनका उपयोग सोच-समझकर करें.

देर से खाना खाना :

कुछ लोग होते है जो खाना समय पर नहीं खाते या फिर देर से खाना खाते है. जिसकी वजह से उनके शरीर को इसी रूटीन की आदत पड़ जाती है और कुछ ही दिनों में उन्हें भूख लग्न बन्द हो जाती है. जिसकी वजह से शरीर में कमजोरी, वजन का कम होना और एसिडिटी जैसी बीमारियां भी होने लगती है.

इसीलिए बेहतर है की समय पर और सही भोजन करें. ये न केवल आपको स्वस्थ रखने में मदद करेगा अपितु आपकी दैनिक कार्यो में भी आपकी मदद करेगा. इसके अलावा समय पर भोजन करने से हमारी कार्यक्षमता में भी वृद्धि होती है.

धूम्रपान का सेवन :

आज के समय क्या युवा और क्या बूढ़े सभी इस गंदी आदत का शिकार होते जा रहे है. सिगरेट पीना कितना नुकसानदेह होता है ये सभी जानते है लेकिन फिर भी इसका सेवन किये बिना उन्हें चैन नहीं आता. कारण उन्हें इसकी लत लग चुकी है. आपको जानकर हैरानी होगी की शरीर में ब्लड क्लोटिंग और फेफड़ो का गलन आदि सभी धूम्रपान आदि से सेवन से ही होती है.

इसीलिए यदि आप भी इस आदत के शिकार है तो तुरंत इसे बदलिए. आप इसे छोड़ने के लिए समाज कल्याण केंद्रों की मदद भी ले सकते है. लेकिन थोड़ा जल्दी क्योंकि कहीं ऐसा न हो की आप सोचते रह जाये और वक्त आपके हाथ से निकल जाये.

अधिक झूठ बोलना :

कुछ लोग होते है जो बात-बात पर झूठ पर बोलते है. लेकिन वे नहीं जानते की झूठ बोलने से न केवल उनके व्यक्तिव पर बुरा प्रभाव डालता है बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालते है. क्योंकि यदि आप लगातार झूठ बोलते है तो इसका अर्थ है की आप सच से डर रहे है और ये डर आपके भीतर तनाव उत्पन्न करता है.

तनाव शरीर के लिए कितना हानिकारक है ये तो सभी जानते है. इसीलिए यदि आप भी छोटी छोटी बात पर झूठ बोलते है तो अपनी इस आदत को बदले.

हर बात पर दवा खाना :

बहुत से लोग ऐसे है जिनको छोटी-छोटी बात पर दवा खाने की आदत होती है. जबकि वे नहीं जानते की ये उनके लिए कितना हानिकारक होता है. ये न केवल आपकी आदत खराब करती है अपितु आपके स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है. इसीलिए बेवजह दवा न खाएं.

नाश्ता न करना :

नाश्ता हमारे पुरे दिन की दैनिक क्रियाओ के लिए बेहद जरुरी होता है. और यदि आप नाश्ते में केवल एक कप चाय या कॉफ़ी के साथ टोस्ट खाते है तो ये आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह हो सकता है. क्योंकि ये आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करता है. इसके अलावा, ये शरीर के metabolism और ऊर्जा भंडार को भी प्रभावित करता है.

जंक फ़ूड का अधिक सेवन :

आज कल के मॉडर्न ज़माने में हर कोई अधिक से अधिक फ़ास्ट फ़ूड का सेवन करना पसन्द करते है. लेकिन इनमे वसा, मसाले, चीनी और कृतिम परिरक्षक सबसे अधिक होते है. जो आपके शरीर के मोटापे को तो बढ़ाते ही है साथ-साथ कई तरह की बिमारियों को भी आमंत्रित करते है. इसीलिए स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन करे.

नाख़ून चबाना :

हमारे हाथो में दिन रात बहुत से बैक्टीरिया रहते है क्योंकि ये हमेशा दूसरी और खुली वस्तुयों के सम्पर्क में रहते है ऐसे में नाख़ून चबाना आपके स्वाथ्य को है पंहुचा सकता है. ऐसा करने से नाखुनो में मौजूद कीटाणु आपके मुँह के जरिये शरीर में प्रवेश कर जाते है और आपको बीमार कर देते है. इसके अतिरिक्त नाख़ून चबाने से फ्लू, सर्दी, जुखाम, बुखार आदि बीमारिया होने का खतरा भी बना रहता है.

दुसरो की चुगली करना :

ऐसे तो gossip करना सभी की आदत बन जाती है लेकिन ये आपके लिए बहुत नुकसानदेह होती है, क्योंकि इसमें आप केवल दुसरो की बुराई करते है जिसके चलते आप अपना बहुत सा समय यूँही व्यर्थ कर देते है. और यदि आप किसी से चुगली करते है तो ये आपके व्यक्क्तित्व पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है इसीलिए चुगली करना छोड़ दें. क्योकि ये केवल Waste of Time एंड Mind के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है.

बुरी आदतें जो आपके व्यक्तिव पर प्रभाव डालती है, बुरी आदतें कैसे छोड़े, कौन सी बुरी आदतें आपके लिए नुकसानदेह है, बुरी आदतों को छोड़ने की टिप्स

गुड़ और चना खाने के फायदे

गुड़ और चना खाने के फायदे, स्वस्थ रहने के लिए बेहतर खान पान का होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर आहार बॉडी को फिट रखने में मदद करता है। तो लीजिये आज हम एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहें हैं। जिसका सेवन करने से स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत से फायदे मिलते हैं। और वो है गुड़ और चना, यह पोषक तत्वों की खान होता है। यह पोषक तत्व शरीर के अंगो को स्वस्थ रखने के साथ आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने में भी मदद करते हैं।

गुड़ और चना एक साथ खाने आपके मुँह का स्वाद भी बदल जाता है। तो आइये आज हम आपको गुड़ और चने का सेवन करने के कुछ चौकाने वाले फायदे बताने जा रहें हैं। जिन्हे जानने के बाद आप इनका सेवन यदि नहीं करते हैं तो करना शुरू कर देंगे। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गुड़ और चना खाने से कौन कौन से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे मिलते हैं।

आयरन

खून की कमी के कारण आज कल बहुत से लोग परेशानी में रहते हैं। खून की कमी बॉडी में होने के कारण और भी शारीरिक परेशानियां होने का खतरा रहता है। लेकिन गुड़ और चना खाने से आपको इस परेशानी से राहत मिल सकती है। क्योंकि इसमें आयरन पर्याप्त मात्रा में होता हैं। जो बॉडी में हीमोग्लोबिन के स्तर को सही रखने में मदद करता है।

प्रोटीन

गुड़ और चने में प्रोटीन की मात्रा भी मौजूद होती है। जो शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। और मांसपेशियों की मजबूती बॉडी में ऊर्जा को भरपूर रखने में मदद करती है। जिससे थकान व् कमजोरी जैसी परेशानियों से बचें रहने में मदद मिलती है।

फाइबर

गलत खान पान, सही समय और सही तरीके से आहार का सेवन न करने के कारण पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्याओं का होना आज कल आम बात हो गई है। लेकिन आपको गुड़ और चने का सेवन करने से इस परेशानी से आसानी से निजात मिल सकता है। क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा मौजूद होती है जो पाचन क्रिया को बेहतर रखने में मदद करती है।

विटामिन बी 6

विटामिन बी 6 का बॉडी में भरपूर होना दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि यह यादाश्त को तेज करने में मदद करता है। और गुड़ और चने को साथ मिलकर सेवन करने से आपको विटामिन बी 6 भरपूर मात्रा में मिलता है।

पोटैशियम

  • गुड़ और चने को मिलाकर सेवन करने से बॉडी में पोटैशियम की मात्रा को भरपूर रखने में भी मदद मिलती है।
  • जिससे दिल को हेल्दी रखने, कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे हार्ट अटैक जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है।

गुड़ और चना खाने से मिलता है फॉस्फोरस

  • फॉस्फोरस दांतों की मजबूती के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • और गुड़ और चने में यह मौजूद होता है।
  • यदि आप गुड़ और चने का सेवन करते हैं तो इससे आपको दांतों से सम्बंधित परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।

जिंक

  • जिंक की मात्रा भी गुड़ और चने में मौजूद होती है।
  • और स्किन के लिए जिंक बहुत फायदेमंद होता है।
  • ऐसे में ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए भी आप चाहे तो गुड़ व् चने का सेवन कर सकते हैं।

वजन

  • मोटापा एक ऐसी परेशानी है जिससे आज हर दूसरा व्यक्ति परेशान है।
  • लेकिन आप गुड़ और चना का सेवन करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं।
  • क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा मौजूद होती है।
  • जो पाचन शक्ति को बेहतर रखने में मदद करता है।
  • साथ ही इससे मेटाबोलिज्म को बेहतर रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

गुड़ और चना खाने से मिलता है कैल्शियम

  • चने और गुड़ का सेवन साथ करने से बॉडी को कैल्शियम मिलता है।
  • जो हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है। जिससे महिला को कमजोरी थकान जैसी परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।

गुड़ और चना खाने के अन्य फायदे

  • कब्ज़ व् एसिडिटी जैसी समस्या से राहत मिलती है।
  • प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे इन्फेक्शन की समस्या से बचें रहने में मदद मिलती है।
  • बार बार यूरिन आने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • यूरिन इन्फेक्शन जैसी परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।
  • पुरुषों को शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गुड़ और चने का सेवन करने से मिलते हैं। लेकिन इसका सेवन जरुरत से ज्यादा भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन सेहत पर उल्टा असर डाल सकता है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को गुड़ का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। क्योंकि गुड़ की तासीर गर्म होने के कारण यह महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

स्लिम ट्रिम शरीर चाहती हैं? आज से ये करना शुरू कर दें

परफेक्ट फिगर शेप और स्लिम ट्रिम बॉडी पाने की इच्छा हर महिला की होती है, परन्तु खराब दिनचर्या, बदलती जीवनशैली और गलत आदतों के कारण महिला के शरीर पर अतिरिक्त चर्बी जमने लगती है, जिससे मोटापा आने लगता है मोटापा न केवल आपकी लुक को खराब करता है, बल्कि इससे आपकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है, अधिक मोटापे के कारण आपको अपनी मनपसंद ड्रेस पहनने से परहेज करना पड़ता है, कई बार अपनी चर्बी छुपाने के लिए तरह तरह के आईडिया ढूंढ़ती है, लेकिन हर बार ऐसा करने से अच्छा है की आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव करके अपनी बॉडी को फिट रखने की कोशिश करनी चाहिए, क्या आप परफेक्ट बॉडी शेप पाने की इच्छा रखते हैं? यदि हाँ तो यह इतना मुश्किल भी नहीं है बस इसके लिए आपको कुछ चीजों का त्याग करना होगा, और गलत आदतों को छोड़ अपनी एक सही दिनचर्या बनाने होगी तो आइये आज हम आपको परफेक्ट स्लिम ट्रिम शरीर पाने के लिए कुछ टिप्स बताते हैं।

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अपनी नींद को भरपूर लें:-

अब आप ये सोच रहे होंगे की स्लिम ट्रिम बॉडी पाने के लिए सबसे पहला तरीका भरपूर नींद कैसे है, आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद के लिए लोग लापरवाह हो गए हैं, नींद पूरी न होने का असर आपकी सेहत पर साफ़ दिखाई देता है, इसीलिए अपने आप को फिट रखने के लिए आपको दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए, और रात को जितना जल्दी हो सो जाएँ ताकि सुबह समय से उठ सकें, भरपूर नींद लेने के कारण आपके शरीर के सभी अंगो को भरपूर आराम मिलता है, जिससे आपको फ्रेश मेहसूस होता है, और आपके अंदर भरपूर ऊर्जा भी रहती है, जिससे आपको फिट रहने में मदद मिलती है।

व्यायाम व् योगासन करें:-

exercise

सुबह जल्दी उठने के बाद आपको व्यायाम करना चाहिए इससे आपके शरीर में जमी अतिरिक्त कैलोरी को बर्न होने में मदद मिलती है, साथ ही आपके शरीर में व्यायाम करने से पसीना निकलता है, जिससे भी आपके शरीर पर जमी चर्बी कम होती है, योगासन भी आपके शरीर को फिट रखने में मदद करता है, तो आइये अब हम आपको बताते हैं की स्लिम और ट्रिम होने के लिए आप कौन कौन से व्यायाम और योगासन कर सकते हैं।

  • नियमित कम से कम आधा घंटा दौड़ लगाने से आपके वजन को तेजी से कम होने में मदद मिलती है।
  • साइकिलिंग करने से भी आपके वजन को कम होने में मदद मिलती है।
  • बिना बोले नियमित कम से कम आधा घंटा तेजी से वॉक करने से आपको एक महीने में तीन किलो वजन कम करने में मदद मिलती है।
  • एरोबिक्स करने से भी आपको अपनी बॉडी को शेप में लाने और स्लिम ट्रिम बॉडी पाने में मदद मिलती है।
  • सीढिया चढ़ना भी एक तरह का व्यायाम है, इसीलिए ऊपर जाने के लिए लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें इससे भी आपको फायदा मिलता है।
  • भुजंगासन, पश्चिमोत्तानासन, पूर्वोत्तानासन, बालासन, कपालभाति आदि करने से आपके शरीर पर जमी चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, और आपकी बॉडी स्लिम ट्रिम हो जाती है।

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पानी का भरपूर सेवन करें:-

पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करने से भी आपको अपने वजन को कम करने में मदद मिलती है, क्योंकि यदि आप भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करते है, तो यूरिन के रास्ते उतने ही विषैले पदार्थ आपके शरीर से बाहर निकलते हैं और आपकी कैलोरी भी बर्न होती है, सुबह उठने के बाद आपको क से कम दो गिलास पानी का सेवन करना चाहिए इससे आपका पेट अच्छे से साफ़ होता है, जिससे आपके पाचन को बेहतर बनने में मदद मिलती है, साथ ही दिन में चार से पांच गिलास गरम पानी का सेवन भी जरूर करना चाहिए और खाना खाने के आधे घंटे बाद तो जरूर करना चाहिए ऐसा यदि आप नियमित करते हैं तो कुछ ही दिनों में आपको अपने शरीर में फ़र्क़ दिखना शुरू हो जाता है।

अधिक मीठे और नमक का सेवन न करें:-

ज्यादा मीठा और नमक दोनों ही आपकी सेहत के लिए हानिकारक होते है, साथ ही आपके शरीर में मोटापे को भी बढ़ाते है, इसीलिए यदि आप स्लिम ट्रिम बॉडी पाना चाहते हैं तो जितना हो सकें अधिक मीठे के सेवन और नमक के सेवन से परहेज करना चाहिए।

तेलीय व् अधिक मसालेदार भोजन से परहेज करें:-

fast-food

बदलते लाइफ स्टाइल के साथ लोगो के खान पान का तरीका भी बदल गया है, बाहर का खाना अधिक खाने के कारण वजन का बढ़ना आम बात है, साथ ही यह आपके शरीर के लिए नुकसानदायक भी होता है क्योंकि इसमें किसी तरह के पोषक तत्व नहीं होते हैं, यदि आप स्लिम ट्रिम बॉडी शेप पाना चाहते हैं तो आपको तेलीय व् मसालेदार भोजन का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए और यह नहीं की आप इसका सेवन केवल बाहर बल्कि घर में भी अधिक तला हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए, संतुलित पौष्टिक आहार का सेवन नियमित करें, इससे आपको फिट रहने में मदद मिलेगी, साथ ही आप स्वस्थ भी रहेंगे।

ग्रीन टी का सेवन करें:-

दिन में नियमित दो से तीन कप ग्रीन टी का सेवन करने से भी आपके मेटाबोलिज्म को बेहतर होने में मदद मिलती है जिससे आपके शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा नहीं होती है, और आपको फिट रहने में मदद मिलती है, साथ ही इससे आपकी त्वचा में भी निखार आता है, इसीलिए इसका सेवन आपको करना चाहिए, और सके तो बिना शुगर के करें।

स्लिम ट्रिम बॉडी पाने के अन्य उपाय:-

  • नियमित एक कटोरी दही या छाछ का सेवन करने से आपको अपने शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद मिलती है।
  • जबरदस्ती भोजन का सेवन न करें, चाहे तो भूख से थोड़ा कम खाएं।
  • दिन मे तीन बड़े मील लेने की जगह थोड़ा थोड़ा खाएं।
  • खाना खाने के बाद एक दम से कभी भी न सोने के लिए जाएँ।
  • खाने के बाद मीठा खाने की आदत से परहेज करें।
  • अपनी कमर को सीधा रखें झुकाकर न बैठें।
  • तनाव भी मोटापे का कारन होता है इससे बचें।
  • खाना बनाने के लिए माइक्रोवेव, या नॉन स्टिक बर्तनो का इस्तेमाल करें इनमे तेल कम लगता है।

तो ये हैं कुछ तिस्प जिनका इस्तेमाल करके आप अपनी बॉडी को स्लिम ट्रिम और सेक्सी बना सकते है, और यदि आप हमेशा फिट रहना चाहते हैं तो आपको इन्हे नियमित करना चाहिए, कुछ ही दिनों तक नियमित इन तरीको का इस्तेमाल करने से आपको अपनी बॉडी में आया बदलाव साफ दिखने लगेगा।

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प्रेगनेंसी में छुहारे खाने चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी में छुहारे खाने के फायदे, प्रेगनेंसी महिला के लिए वो समय होता है जहां महिला खुशियों का अनुभव करने के साथ थोड़ी डरी हुई भी हो सकती है। खासकर जब महिला पहली बार माँ बनने जा रही हो। क्योंकि इस दौरान महिला यदि किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसका असर पेट में पल रहे बच्चे पर भी पड़ सकता है। इसीलिए हर गर्भवती महिला को अपनी सेहत का ध्यान प्रेगनेंसी के दौरान आम दिनों से दुगुना रखना चाहिए।

जैसे की महिला को कुछ भी खाने से पहले यह जानना जरुरी होता है की जो वो खा रही है उसे प्रेगनेंसी के दौरान वो खा सकती है या नहीं, या फिर शिशु पर तो उसका कोई बुरा तो प्रभाव नहीं पड़ेगा, आदि। तो आइये आज इस आर्टिकल में छुहारे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान छुहारे का सेवन करना चाहिए या नहीं?

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान छुहारे का सेवन कर सकती है लेकिन इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। जैसे की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को छुहारे का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि छुहारे की तासीर गर्म होने के कारण यह शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन दूसरी तिमाही से महिला इसका सेवन शुरू कर सकती है।

छुहारे में कौन कौन से पोषक तत्व होते हैं

आयरन, जिंक, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर, फोलेट, मैग्नेशियम, एमिनो एसिड्स आदि पोषक तत्व छुहारे में मौजूद होते हैं।

प्रेगनेंसी में कितने छुहारे खाने चाहिए?

गर्भवती महिला दूसरी तिमाही से दिन में एक या दो छुहारे खा सकती है। या फिर आप खीर, आदि में डालकर भी इसका सेवन कर सकती है। जरुरत से ज्यादा छुहारे का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में छुहारे खाने के फायदे

यदि प्रेगनेंसी के समय कोई महिला छुहारे का सेवन करती है तो इससे महिला के साथ बच्चे को भी बहुत से फायदे मिल सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में छुहारे खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

  • छुहारे में आयरन की मात्रा मौजूद होती है।
  • जो बॉडी में रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाने के साथ बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर करने में भी मदद करता है।
  • जिससे महिला व् बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

फोलेट

  • छुहारे में फोलेट की मात्रा भी मौजूद होती है।
  • जो माँ के पेट में पल रहे बच्चे के दिमागी विकास के लिए बहुत जरुरी होता है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला छुहारे का सेवन करती है तो इससे बच्चे के दिमागी विकास को बढ़ावा मिलने के साथ शिशु को जन्म दोष के खतरे से भी बचे रहने में मदद मिलती है।
  • फोलेट के साथ छुहारे में एमिनो एसिड्स भी मौजूद होते हैं जो शिशु के विकास को बढ़ाने में बहुत मदद करते हैं।

फाइबर

  • कब्ज़, एसिडिटी, पेट फूलना जैसी परेशानियां प्रेगनेंसी के दौरान होना बहुत आम बात होती है।
  • लेकिन छुहारे का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सकती है।
  • क्योंकि छुहारे में मौजूद फाइबर महिला के पाचन को दुरुस्त रखने में मदद करता है।

कैल्शियम और मैग्नीशियम

  • छुहारे में कैल्शियम व् मैग्नीशियम की मात्रा भी मौजूद होती है।
  • और प्रेग्नेंट महिला यदि छुहारे का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही इससे बच्चे की हड्डियों व् दांतों के विकास को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान छुहारे के सेवन से जुड़े कुछ खास टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और प्रेगनेंसी में छुहारे का सेवन करना चाहती है। तो आप भी छुहारे का सेवन कर सकती है लेकिन इसकी सही मात्रा और प्रेगनेंसी में कब छुहारे का सेवन करना चाहिए इस बात का ध्यान जरूर रखें।