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क्या आपके बाल पतले हो गए हैं ऐसे करें घना

How To Get Thicker Hair Naturally?

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लंबे, सुंदर, घने और शाइनी बाल पाना हर महिला की पहली पसंद होते है लेकिन आज कल के प्रदुषण भरे वातावरण में ऐसे बाल पाना आसान नहीं। क्योंकि बालों को सम्पूर्ण देखभाल के साथ-साथ बाहरी सुरक्षा भी चाहिए होती है। जो आज के वातावरण में मिल पाना असंभव है। धूल मिटटी, सूरज की किरणें और प्रदुषण भरा वातावरण वाकई बालों को काफी नुकसान पहुंचाता है।

जिसके चलते अक्सर महिलाओं में बाल झड़ने और उनके पतले होने की समस्या देखने को मिलती है। बाल लंबे करना मुश्किल नहीं लेकिन उन्हें घना और मुलायम बनाना बहुत मुश्किल है। इसका कारण सिर्फ बाहरी प्रदुषण ही नहीं बल्कि आपके द्वारा की जाने वाले लापरवाहियां भी होती है।

रोजाना की भाग दौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर अपने बालों की ओर ध्यान देना भूल जाती है।जिसके चलते उनके बाल पतले होने लगते है। पतले बाल न तो देखने में अच्छे लगते है और न ही इनमे किसी तरह का स्टाइल बनाना संभव हो पाता है। इतना ही नहीं लोग भी महिलाओं के पतले बालों का काफी मजाक बनाते है।wet hair क्या आपके बाल पतले हो गए हैं

जिससे उनके आत्मसम्मान को काफी ठेस पहुँचती है। वैसे भी बालों को महिलाओं का श्रृंगार माना जाता है ऐसे में अगर इन्ही की खूबसूरती बरकरार नहीं रहेगी तो…? इसलिए यहाँ हम आपको पतले बालों को घना करने के लिए कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने पतले बालों को आसानी से घना बना सकती है। और चूँकि ये उपाय पूरी तरह घरेलू है तो इनके बालों पर कोई दुष्परिणाम भी नहीं होंगे। और इनके लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। तो आइये जानते है क्या है वे उपाय?

बालों के पतले होने का कारण :-

ये कुछ विशेष कारण है जिनकी वजह से बाल पतले होने लगते है।

  • बढ़ती उम्र के कारण।
  • खान पान का ध्यान नहीं रखना।
  • इम्यून सिस्टम का कमजोर रहना।
  • हॉर्मोन में असंतुलन।
  • अत्यधिक हेयर स्टाइलिस्ट प्रोडक्ट और overstyling का प्रयोग करना।
  • मौसम में परिवर्तन, बढ़ता प्रदुषण और सूरज की किरणों से अधिक संपर्क।
  • तनाव, स्ट्रेस या नींद नहीं आने की समस्या।
  • बिना बिमारी के हैवी डोज़ की दवाओं का सेवन।
  • अचानक वजन घटना।

पतले बालों को घना करने के घरेलू उपाय :-

1. आंवला :

पतले बालों को मोटा करने के लिए आंवला बहुत लाभकारी होता है। यह न केवल उनकी ग्रोथ को बढ़ाता है अपितु मोटा और काला भी करता है। इस आयुर्वेदिक देन में बहुत से एंटी ऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी पाया जाता है जिसे न केवल प्रयोग करने से अपितु इसके सेवन से भी स्वास्थ्य को लाभ पहुंचते है। बालो को घना करने के लिए नहाने से पूर्व अपने बालों में आंवले का रस और नींबू का रस मिलाकर लगाएं। दोनों की मात्रा समान रखें। उसके बाद जब यह सुख जाए तो गुनगुने पानी से अपने बालों को साफ़ कर लें।

2. मेथी :methidana

खाने में तो सभी मेथी का इस्तेमाल करते है लेकिन क्या आप जानते है ये आपके बालों को घना करने के लिए भी काम में लाइ जाती है। इसमें मौजूद प्रोटीन, निकोटिनिक एसिड आदि बालों के लिए बहुत लाभकारी होते है। प्रयोग के लिए एक चम्मच मेथी के पेस्ट में 2 चम्मच नारियल तेल मिलाएं और अपने बालों में लगाएं। 30 मिनट तक रखें और फिर शैम्पू करके बाल साफ़ कर लें। 1 महीने के लगातार प्रयोग से आपके बाल घने होने लगेंगे।

3. प्याज का रस :

पतले बालों की समस्या के लिए प्यास के रस का इस्तेमाल करना बहुत लाभकारी होता है। क्योंकि इसमें सल्फर की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो शरीर में कोलोजन के निर्माण को बढ़ाती है और ये बालों को घना करने में मदद करता है। इसके लिए प्याज को पीसकर उसका रस निकाल लें। और इस रस को अपने बालों में लगाकर 15 मिनट तक रख लें। उसके बाद शैम्पू करके बाल साफ कर लें।

4. नारियल तेल :

नारियल तेल बालों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इससे न केवल बालों में शाइन आती है अपितु वे घने और सुंदर भी बनते है। इसमें प्रोटीन की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है जो बालों को पूर्ण नमी प्रदान करती है। अगर आपके बाल भी लगातार झड़ रहे है तो आप इससे रोकने के लिए नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए 4 चम्मच नारियल तेल में 2 चम्मच नींबू का रस मिलाकर अपने बालों में लगाएं। बाल घने होंगे लगेंगे।

5. एलोवेरा :

एलोवेरा बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ये न केवल बालों को मजबूत और घना बनाता है बल्कि उन्हें शाइनी बनाने में भी मदद करता है। इसके लिए अपने बालों की जड़ों में एलोवेरा जेल लगाएं। और आधे घंटे रखने के बाद अपना सर धो लें। इस जेल का इस्तेमाल आप अपने बालों को कंडीशन करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकती है।

6. मेहंदी के पत्ते :

पतले और कमजोर बालों को घना करने के लिए आप हिना (मेहंदी) का भी इस्तेमाल कर सकती है। ये न केवल बालों को पोषण प्रदान करती है अपितु उन्हें एक कलर और मजबूती भी प्रदान करती है। इसके लिए मेहंदी के पत्तों को पीसकर मेहंदी बना लें और इसके अपने पुरे बालों में अच्छे से लगा लें। फिर इन्हे शावर कैप से ढक लें।3 घंटे रखने के बाद बालों को अच्छी तरह धो कर साफ़ कर लें और अगले दिन बालों में शैम्पू कर लें।

7. ओलिव आयल :

शायद आपको नहीं पता लेकिन खाना आदि बनाने में प्रयोग होने वाला ओलिव आयल भी आपके बालों की समस्या का समाधान कर सकता है। इसके लिए हफ्ते में एक बार अपने बालों में ऑलिव आयल से मसाज करें। यह डैमेज बालों को रिपेयर करके उन्हें मजबूत करता है और साथ ही उन्हें कंडीशन भी करता है। अगर आप नियमित रूप से इस तेल का इस्तेमाल करती है तो आपको कंडीशनर की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

8. गुड़हल :

गुड़हल के फूल भी पतले बालों को घना करने के लिए बहुत अधिक प्रयोग में लाये जाते है। इसमें मौजूद आयरन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, राइबोफ्लोबिन, थियामिन, नियासिन और विटामिन सी पाया जाता है। इसके लिए अपने बालों में गुड़हल के फूलों का रस और जैतून के तेल की बराबर मात्रा को मिलाकर आग में पकाएं और जब यह सुख जाए तो इसे शीशी में भरकर रख लें। रोजाना नहाने के बाद इसे बालों की जड़ों में अच्छे से लगाएं। बाल सुन्दर और शाइनी हो जाएंगे।

नेचुरल सुंदरता बढ़ाने के बहुत ही सरल उपाय

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व्यक्ति की सुंदरता उनके फेस से झलकती है लेकिन कई बार लाख कोशिशे करने के बाद भी चेहरे में वे बात नहीं आ पाती। फेस की खुबसूरती बढाने के लिए सभी महंगे कॉस्मेटिक, क्रीम, जेल आदि का इस्तेमाल करते है। जबकि इनके इस्तेमाल से स्किन और भी अधिक खराब हो जाती है। जी हां, इन सभी चीजों में इस्तेमाल किये जाने वाले केमिकल स्किन को खराब करने का काम करते है। जिनकी वजह से स्किन रुखी और बेजान प्रतीत होने लगती है।

लेकिन क्या आप जानते है की कुछ तरीके है जिनकी मदद से बिना अधिक पैसे खर्च किये आप न केवल अपनी स्किन में बल्कि अपने पुरे लुक में भी परिवर्तन ला सकते है। जी हां, बाहर के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल तो आप सभी ने किया होगा। लेकिन क्या कभी घरेलू और प्राकृतिक चीजों के इस्तेमाल के बारे में सोचा है? अगर नहीं, तो अब समय है की अपनी स्किन को प्राकृतिक तरीके से ब्यूटीफुल बनाया जाए। यहाँ हम आपको ऐसी ही कुछ आसान टिप्स दे रहे है जिनकी मदद से आप अपनी स्किन के साथ साथ अपने लुक को भी सुन्दर और आकर्षक बना सकते है। तो आइये जानते है इन नेचुरल टिप्स के बारे में –

प्राकृतिक तरीकों से सुंदरता बढ़ाने की टिप्स :-

ये कुछ ऐसी आसान और प्राकृतिक टिप्स है जिनका इस्तेमाल कोई भी बिना किसी परेशानी के कर सकता है। क्योंकि यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है जिनका स्किन का किसी अन्य पर कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं होगा।

– थोडा समय तो लगेगा :

किसी भी उपाय का इस्तेमाल करने से पूर्व आपको यह जान लेना जरुरी है की किसी भी चीज को कार्य करने में समय लगता है। 1 या 2 दिन के इस्तेमाल से परिणाम की अपेक्षा करना गलत होगा। इसके लिए आपको कुछ दिन इन्तजार करना होगा। अर्थात इन सभी टिप्स को आपको कम से कम 1 महीने तक फॉलो करना होगा। जिसके बाद ही परिणाम सामने आयेंगे। अगर आप सोचेंगे की 3 – 4 दिन के प्रयोग से फर्क दिखने लगे तो यह संभव नहीं। इसलिए वेट करें और उपाय का इस्तेमाल करते रहे।

– अपने खाने पान पर ध्यान दें :

शायद आप नहीं जानते लेकिन आपके द्वारा खाया जाने वाली प्रत्येक उत्पाद का प्रभाव आपकी स्किन पर दिखता है। इसीलिए सभी अच्छा खाने का सलाह देते है। क्योंकि अगर आप अच्छा खायेंगे तो ही आपका फेस ग्लो करेगा। सुंदरता बढ़ाने के लिए आपको संतुलित और पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना होगा। इसके अलावा आपको ऐसे फलों का सेवन करना चाहिए जिनमे विटामिन सी का मात्रा अधिक हो क्योंकि इस तरह के फल स्किन में ग्लो लाने में मदद करते है और साथ ही स्किन में चमक भी लाते है।

– पानी का खूब सेवन करें :

पानी को स्वास्थ्य और सुंदरता के लिए बहुत जरुरी माना जाता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति शारीरिक रूप से तो बीमार होता ही है लेकिन इसका प्रभाव उसकी सुंदरता पर भी पड़ता है। इसलिए डॉक्टर भी भरपूर पानी पीने की सलाह देते है। इसके लिए आपको रोजाना 9 से 12 ग्लास पानी का सेवन करना होगा। ताकि शरीर में पानी की कमी न होने पाए। आप देखेंगे कुछ ही समय में आपका फेस ग्लो करने लगेगा।

– रोजाना 10 मिनट की योगा :

योगा करने से न केवल आपका स्वास्थ्य ठीक रहता है अपितु आपके फेस पर भी ग्लो आता है। जी हां, इसके लिए जरुरी नहीं की आप 1 घंटे तक योग करते रहे। आज के समय में इतना समय किसी के पास नहीं है की रोजाना 1 घंटा योग करने के लिए निकाल पाए। लेकिन 10 मिनट तो निकाले जा सकते है। योग से आपके शरीर के सभी अंग अच्छे तरीके से कार्य करते है जिससे रक्त का प्रवाह अच्छे से होता है और आपका खाना भी ठीक तरह से पचता है। और जब आपका खाना अच्छी तरह से पचता है तो आपका फेस भी चमकने लगता है।

– बालों का ख़ास ध्यान रखें :

जब भी बात सुंदरता की आती है तो उनमे सबसे पहला नाम बालों का आता है, क्योंकि आप पर पड़ने वाली हर नजर सबसे पहले आपके बालों को ही देखती है। इसीलिए अपने बालों का खास ध्यान रखना भी जरुरी है। इसके लिए आप सप्ताह में 2 या 3 दिन या संभव हो तो रोजाना बाल धोएं। बालों को धोने से पहले वाली रात बालों में अच्छे से आयल लगा लें। आयल को अगर हल्का गर्म करके लगाएंगे तो बेहतर होगा। बालों को धोने के लिए अच्छे हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। इन टिप्स की मदद से आपके बाल अच्छे और चमकदार बनेंगे। और रूखे होने से भी बचेंगे।

– त्वचा का ध्यान रखना भी है जरुरी :skin care

बालों के साथ-साथ स्किन का खास ध्यान रखना भी बेहद जरुरी है। क्योंकि इसका आपकी सुंदरता में खास योगदान होता है। स्किन की देखभाल के लिए आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखना होगा। यानी समय समय पर उसे साफ़ करना, पानी से धोने के बाद मोइस्चराइज़र लगाना, फेस धोने के लिए फेसवाश का इस्तेमाल करना, मेकअप या कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का कम इस्तेमाल करना, धुप में चेहरा ढक कर रखना आदि। इसके अलावा आपको ऐसे प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से बचना होगा जो आपकी स्किन को खराब कर सकते है। अगर आप चाहे तो घरेलू तरीकों की मदद से भी अपनी स्किन की केयर कर सकते है।

– फेस पैक का इस्तेमाल करें :

स्किन की खूबसूरती और चेहरे की चमक को बरकरार रखने के लिए आप फेस पैक का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन इनका इस्तेमाल आपको सप्ताह में 1 बार ही करना होगा। रोजाना इस्तेमाल करने से स्किन खराब हो सकती है। वैसे आप चाहे तो कॉस्मेटिक फेस पैक की जगह घरेलू फेस पैक्स का भी इस्तेमाल कर सकते है। इनकी मदद से आपकी स्किन को फेस पैक का फायदा भी मिलेगा और कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होगा।

– बालों के लिए मेहंदी :

यूँ तो सफेद बालों को छुपाने के लिए बहुत से हेयर कलर प्रोडक्ट्स मार्किट में मौजूद है लेकिन उन सभी में इस्तेमाल होने वाले केमिकल बालों को और अधिक कमजोर और सफेद बना देते है। ऐसे में आप चाहे तो मेहंदी का इस्तेमाल कर सकते है। जी हां, मेहंदी न केवल बालों को परफेक्ट कलर देने का काम करती है अपितु उन्हें मजबूती और चमक भी प्रदान करती है।

– ड्राई फेस से बचें :

बहुत से लोगों का फेस अक्सर ड्राई रहता है फिर चाहे सर्दियाँ हो या गर्मियां। गर्मियों के मौसम में चलने वाली गर्म लू के कारण और सर्दियों में चलने वाली सर्द हवाओं के कारण। अगर आपकी स्किन टाइप भी ऐसी ही है तो सतर्क हो जाइये। क्योंकि स्किन के ड्राई होना अच्छी बात नहीं यह स्किन को तो खराब करती है बल्कि आपकी सुंदरता पर ही ग्रहण लगाती है। इससे बचने के लिए आप मोइस्चराइज़र का इस्तेमाल कर सकते है। या अपनी स्किन टाइप को सूट होती क्रीम का इस्तेमाल करना भी आपके लिए अच्छा रहेगा। साबुन से फेस धोने बी बजाए फेस वाश का इस्तेमाल करें, कहीं बाहर जाते समय फेस को अच्छे से कवर कर लें। धुप में जाने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।

– मौसम के अनुसार स्किन की देखभाल करें :

हम सभी की स्किन बहुत सेंसिटिव होती है इसलिए गर्मी हो या सर्दी हर मौसम में इसे विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। अगर आप भी अपनी सुंदरता को बढ़ाना चाहते है तो मौसम के अनुसार ही अपनी स्किन की देखभाल करें। सर्दियों में ऑयली प्रोडक्ट्स का यूज करें जबकि गर्मियों में ऐसे प्रोडक्ट्स चुनें जो ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ स्किन को रफ और ग्रीसी होने से बचाएं।

– सही साबुन का इस्तेमाल करें :

नहाने के लिए सही साबुन का इस्तेमाल करें यानी अगर आपकी स्किन ऑयली है तो ग्लिसरीन युक्त साबुन का इस्तेमाल करें। और अगर आपकी स्किन ड्राई है तो मोइस्चराइज़ड मिल्क वाले साबुन का इस्तेमाल करें। फेस पर साबुन लगाने से बचें। और इन्हें हमेशा एक्सपायर डेट देखने के बाद ही खरीदें।

– जल्दी सोएं और सुबह जल्दी जागें :morning wake up

सुबह जल्दी जागने और रात को जल्दी सोने की आदत स्किन और स्वास्थ्य दोनों के लिए बहुत लाभकारी होता है। इससे आपके सभी अंग बेहतर तरीके से काम कर पाते है और स्किन में भी चमक और ग्लो आता है। इसलिए इस रूटीन को फॉलो करना भी जरुरी है। रात को देर तक जागने से बचें।

– अपने स्वभाव पर नियंत्रण रखें :

पूर्ण सुंदरता के लिए आपका सिर्फ बाहर से ही नहीं अपितु अन्दर से खुबसूरत होना भी बेहद जरुरी है। जिसके लिए आपको अपने आचरण और व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। लोगो से उखड कर नहीं प्यार से बात करें। जितना हो सके गुस्सा कम करे क्योंकि गुस्सा भी स्किन पर आने वाली फाइन लाइन्स का कारण होता है। साथ ही दिनभर पर खुश रहें। त्योरियां चढाने या सिकुड़ने से बचें क्योंकि ऐसा करने से आपके माथे की स्किन उसी शेप में ढलने लगती है जो बाद में काफी खराब और भद्दी दिखती है। जितना हो सके मुस्कुराये, मुस्कराने से फेस की शेप बेहतर होती है और उसे एक नयी चमक भी मिलती है।

तो ये थी कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप अपनी स्किन को प्राकृतिक रूप से सुन्दर और आकर्षक बना सकते है।

कान में खुजली होने के कारण और उपाय!

Itchy Ear (Ear itiching) : हमारे काम बहुत संवेदनशील और नाजुक होते है इनमे जरा सी समस्या होने पर व्यक्ति को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कान में खुजली होना भी इन्ही समस्यायों में से एक है। जिसके कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी कानों में बहुत तेज खुजली होने लगती है। आपने भी बहुत से लोगों को कान में उंगली डालकर खुजली करते हुए देखा होगा। क्योंकि ऐसा करने से काफी आराम मिलता है।

लेकिन कई बार ज्यादा खुजली होना भी परेशानी का कारण बन जाता है। परंतु क्या आप जानते है की आख़िरकार कान में खुजली होती क्यों है? और उसके क्या कारण है? शायद नहीं क्योंकि सभी इसे केवल मामूली खुजली समझते है जबकि कई बार यह खुजली किसी बड़ी परेशानी का संकेत बन जाती है। इसीलिए आज हम आपको कान में खुजली होने के कारण और कुछ उपाय बता रहे है जिनकी मदद से इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।

कान में खुजली होने के कारण (Causes of Itchy Ears) :-

त्वचा का रूखापन :

कान में खुजली होने की सबसे बड़ी वजह वहां की त्वचा में मौजूद रूखापन और खुस्की होती है। क्योंकि जब कान में मौजूद ग्रंथियां सही तरीके से कार्य नहीं करती और पर्याप्त तेल का उत्पादन नहीं करती तो स्किन रुखी हो जाती है जिसके कारण उसमे खुजली होने लगती है।

कान की देख-रेख में कमी :

कान की सही तरीके और समय पर साफ़ सफाई नहीं करने के कारण होने वाला वैक्स और डैंड्रफ भी खुजली होने का एक कारण हो सकता है। क्योंकि इसकी वजह से स्किन में फंगल इंफेक्शन, मिडिल इयर इंफेक्शन आदि भी हो सकता है।

विशेष संक्रमण :

कान में होने वाले विशेष संक्रमण के कारण भी कान में दर्द और खुजली होती है। क्योंकि इस तरह के संक्रमण में सूजन भी आती है जिसकी वजह से कई बार स्किन में काफी तेज खुजली भी होने लगती है।

पानी या सुनने के लिए प्रयोग किये जाने उपकरण :

कई बार कान में फंसा हुआ पानी या सुनने के लिए प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों का अधिक प्रयोग से भी कान में खुजली होने लगती है।

सोरायसिस :

यह एक तरह की त्वचा संबंधी समस्या है जिसमें त्वचा पर लाल धब्बे हो जाते है। वैसे तो यह अधिकतर खुली त्वचा पर होते है लेकिन कई बार यह शरीर के विशेष भागो में भी हो जाती है जैसे बाह या कान के अंदर।

साबुन के झाग :

कई बार नहाते समय साबुन या शैम्पू के झाग कान के भीतर चले जाते है और अन्दर जमा हो जाते है जिसके कारण कान में खुजली होती है। इसलिए इस बात का भी विशेष ध्यान रखे की नहाने के बाद कानों को अच्छे से साफ़ करें जिससे साबुन या शैम्पू कान में नहीं रहे।

कान में खुजली होने के उपाय :-

कान की त्वचा में परेशानी होने और संक्रमण होने के कारण खुजली की समस्या होने लगती है। जिनका मुख्य कारण – Ear Wax, कान में पानी चला जाना और कान में मौजूद बाहरी गंदगी के कण होते है। ऐसे में अगर आप इस खुजली से बचना चाहते है तो आपको ऐसे प्रोडक्ट्स का यूज बंद करना होगा जो किसी भी रूप में स्किन में जलन उत्पन्न कर सकता है। जैसे की कानों में पहनी जाने वाली बालियां या अन्य ब्यूटी और स्किन केयर प्रोडक्ट्स।

इसके अलावा कानों के लिए किसी भी ड्राप या दवा का इस्तेमाल करने से पूर्व पहले डॉक्टर से अवश्य पूछ लें। क्योंकि बहुत सी दवाएं भी कान में होने वाली खुजली का कारण होती है। यदि आपके किसी कान में कोई परेशानी है तो उस स्थिति में तब तक मलहम या ड्रॉप्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जब तक डॉक्टर सलाह न दे।

डॉक्टरी परामर्श के बाद निम्नलिखित दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है :-

1. एंटी बायोटिक मलहम
2. बेबी आयल
3. स्टेरॉयड सामयिक मलहम, सूजन को कम करने में मदद करता है। (जैसे 1% हाइड्रोकर्टेसीन क्रीम या 0.1% बीटामाथासोन क्रीम)
4. तैराक के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले इयर ड्राप, एल्कोहोल, एसिटिक एसिड या हाइड्रोजन पेरोक्साइड के घुलनशील तरल का एक पतला सलूशन।

यदि आपके कान में खुजली के साथ मवाद या रक्त भी निकल रहा है तो इस स्थिति में डॉक्टरी सलाह लेकर एंटी बायोटिक दवाओं का सेवन करें।

कान में खुजली के घरेलू उपाय :

इसके लिए सरसों तेल को अच्छे से गर्म कर लें। इससे सरसों तेल में मौजूद अवगुण और केमिकल जल जाएंगे। उसके बाद तेल को ठंडा होने दें और ऊँगली से चेक कर लें की आप उतना गर्म सह सकते है या नहीं? बहुत हल्का गर्म तेल अपने कानों में डाल लें। और दुसरे दिन इयरबड से कान की अच्छे से सफाई कर लें। कान के अन्दर जमा हुआ मैल बाहर निकलना शुरू हो जाएगा और आपका कान साफ हो जाएगा।

कान की खुजली को कैसे रोकें?

शायद आप नहीं जानते लेकिन आपके द्वारा अपनाई जाने वाली कान साफ़ करने की तकनीक भी कान में खुजली का कारण होती है। अगर आप इस खुजली से बचना चाहते है तो उसके लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें –

माचिस की तीली, पेपर क्लिप्स, बालों की पिन, रुई के गोले, चाबी, शार्प नेल्स, रुई लगी हुई टूथपिक आदि को कभी भी कान साफ़ करने के लिए इस्तेमाल नहीं करें। ऐसा करने से इयर ड्रम और इयर कैन को नुकसान हो सकता है।

तो ये थे, कान में खुजली होने के कारण और उपाय जिनकी मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे गंभीर स्थिति होने पर डॉक्टर से ही जाँच कराएं। खुद किसी भी ट्रीटमेंट का इस्तेमाल करने से बचें। क्योंकि हो सकता है आप जिस दवा का इस्तेमाल करें वो आपकी समस्या के लिए उपयुक्त न हो।

डिलीवरी के बाद बॉडी शेप में कैसे आती है

डिलीवरी के बाद बॉडी शेप

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं और साथ ही महिला का वजन भी बढ़ जाता है। और यह समस्या डिलीवरी के बाद कुछ हद तक कम तो हो जाती है लेकिन फिर भी स्तन में दूध उतरने के कारण स्तन में ढीलापन होना, पेट बाहर आना, स्किन में ढीलापन होना आदि आम बात होती है। लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं होती है जिसका कोई समाधान न हो। बल्कि डिलीवरी के बाद कुछ दिनों तक महिला आराम करने के बाद वापिस से अपनी बॉडी को शेप में लाने के लिए कोशिश कर सकती है। और नियमित अपनी बॉडी का अच्छे से ध्यान रखने पर महिला को अपनी बॉडी को वापिस शेप में लाने में मदद भी मिलती है।

डिलीवरी के बाद बॉडी को शेप में लाने के टिप्स

शिशु को जन्म के बाद बॉडी को वापिस शेप में लाने के लिए महिला को अपनी फिटनेस को वापिस लाने के लिए अपने रूटीन का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। ताकि महिला को अपनी बॉडी को वापिस शेप में लाने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला अपनी बॉडी को वापिस शेप में लाने के लिए क्या-क्या कर सकती है।

आराम करें

महिला यदि चाहती है की डिलीवरी के बाद उसकी बॉडी अच्छे से शेप में आ जाए तो इसके लिए सबसे जरुरी होता है की महिला शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट हो। डिलीवरी के बाद महिला को कमजोरी जैसी समस्या न हो, महिला फ्रेश व् रिलैक्स महसूस करें। और इसके लिए सबसे जरुरी है की महिला डिलीवरी के बाद पूरी तरह आराम करें, क्योकि यदि महिला का स्वास्थ्य फिट होगा तभी तो डिलीवरी के बाद महिला को अपनी बॉडी को वापिस शेप में शुरुआत कर सकेगी।

स्तनपान

डिलीवरी के बाद कुछ महिलाएं ऐसा सोचती है की स्तनपान करवाने से उनका शेप खराब हो जाता है। जबकि यह गलत है बल्कि स्तनपान महिला की स्किन के ढीलेपन को दूर करने में मदद करने के साथ वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। साथ ही जैसे जैसे शिशु दूध पीना बंद करता है वैसे वैसे ब्रेस्ट भी शेप में आने लगती है।

पानी

बॉडी को शेप में लाने के लिए महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करने से बॉडी को हाइड्रेट रहने के साथ बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालने में मदद मिलती है। साथ ही पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करने से बॉडी में वसा का जमाव कम होता है जिससे चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही चर्बी को कम करने के लिए महिला को दिन में दो से तीन गिलास गर्म पानी का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

सलाद व् फल

फल व् सलाद का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होने के साथ कैलोरी की मात्रा कम होती है जिससे महिला को फिट रहने के साथ वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है। इसीलिए दिन में एक से दो बार महिला को इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

व्यायाम व् योगासन

डिलीवरी के थोड़े दिन बाद डॉक्टर से राय लेने के बाद महिला थोड़ा बहुत व्यायाम व् योगासन भी कर सकती है। क्योंकि ऐसा करने से महिला की चर्बी को कम करने में मदद, स्किन के ढीलेपन को कम करने में मदद मिलती है। और नियमित रूप से थोड़ी देर व्यायाम व् योगासन करने से महिला के वजन को कम करने के साथ धीरे धीरे बॉडी को वापिस शेप में लाने में मदद मिलती है।

आहार का ध्यान रखें

प्रसव के बाद महिला फिट रहें, शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी न हो इसके लिए महिला को अपनी डाइट का खास ध्यान रखना पड़ता है, यानी पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। लेकिन आहार का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखें की एक ही बार में पेट भर कर खाने की बजाय थोड़े थोड़े अंतराल पर कुछ खाएं जिससे भोजन को आसानी से पचाने में मदद मिलने में मदद मिल सके। और महिला को ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जिसमे वसा व् कैलोरी की मात्रा कम हो।

बेल्ट

डिलीवरी के बाद पेट पर बाँधने के लिए एक बेल्ट आती है, जिसके लिए आज कल डॉक्टर भी राय देते हैं। इस बेल्ट की मदद से न केवल महिला को उठने बैठने में आसानी होती है। बल्कि इससे पेट व् कमर की मांसपेशियों को टाइट होने में मदद मिलती है जिससे पेट को पर जमी चर्बी को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

भरपूर नींद

भरपूर नींद भी महिला को बॉडी को शेप में लाने के लिए जरुरी होती है, क्योंकि यदि महिला की नींद पूरी नहीं होती है तो इससे महिला को तनाव, वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में वजन को नियंत्रित रखने के लिए महिला को भरपूर नींद लेना भी जरुरी होता है। और इसके लिए दिन में आठ से दस घंटे की नींद महिला को जरूर लेनी चाहिए।

डिलीवरी के बाद इन बातों का खास ध्यान रखें

  • जब तक महिला के टाँके अच्छे से ठीक नहीं हो जाते तब तक महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।
  • शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी न आए इसके लिए शिशु को स्तनपान जरूर करवाना चाहिए।
  • डिलीवरी के कम से कम एक से डेड महीने बाद महिला को व्यायाम आदि शुरू करना चाहिए, और यदि महिला की डिलीवरी सिजेरियन है तो महिला और फिट होने में थोड़ा ज्यादा समय भी लग सकता है।
  • डिलीवरी के बाद महिला को डाइटिंग नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे शिशु के विकास में कमी आ सकती है।
  • तनाव लेने से बचना चाहिए क्योंकि यह आपकी परेशानी को बढ़ा सकता है।
  • बॉडी को फिट करने के चक्कर में महिला को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके डिलीवरी के बाद महिला को अपनी बॉडी को फिट करने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला डिलीवरी के बाद इनका इस्तेमाल करके अपनी बॉडी को धीरे धीरे शेप में ला सकती है, लेकिन डिलीवरी के बाद बॉडी को शेप में लाने के साथ शिशु की देखभाल भी अच्छे तरीके से करनी चाहिए ताकि शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी न आए।

रूखे बालों को अगर हमेशा चमकदार बनाना है तो ये रूटीन अपनाएं!

बालों को महिलाओं की खुबसूरती का अभिन्न हिस्सा माना जाता है इसीलिए सभी उनकी देखभाल में कोई कसर नहीं छोडती। जहां एक तरफ शाइनी बाल आपकी पर्सनालिटी में चार चांद लगा देते है वहीं रूखे, उलझे और बेजान बाल अच्छी खासे लुक को खराब कर देते है। लेकिन आजकल के इस प्रदुषण, गंदगी और धुल भरे वातावरण में अपने बालों को चमकदार रख पाना काफी कठिन है।

आप भले ही कितनी ही कोशिशे कर लें, महंगे से महंगा हेयर प्रोडक्ट यूज कर लें लेकिन बाहर जाते ही बाल पहले की तरह रूखे और बेजान हो जाते है। इसके अलावा कुछ लापरवाहियों और गलतियों की वजह से भी बालों की चमक को हानि पहुंचती है। ऐसा नहीं है की कोई अपने बालों की खुबसूरती के लिए प्रयास नहीं करता लेकिन आजकल के समय में सही हेयर प्रोडक्ट और ट्रीटमेंट चुन पाना काफी मुश्किल है। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे डेली रूटीन बताने जा रहे है जिनकी मदद से बालों की चमक को बरकरार रखा जा सकता है। इतना ही नहीं इन टिप्स की मदद से आप अपने बालों को लंबे समय तक शाइनी बनाए रख सकती है। तो आइए जानते है का है वो रूटीन –

रूखे बालों को चमकदार और शाइनी बनाए रखने के लिए फॉलो करें ये रूटीन :-

1. बालों के लिए चुनें सही प्रोडक्ट्स :washing-hair

कई बार गलत प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से भी बालों की चमक खत्म हो जाती है। इसलिए हमेशा सही और अच्छे हेयर प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए आपको अपने बालों की टाइप को पहचानना होगा। जी हां, अगर आपके बाल ऑयली है तो सप्ताह में तीन बार और अगर आपके बाल ड्राई है तो हफ्ते में दो बार बाल धोने चाहिए। क्योंकि गंदे बाल भी बालों की शाइन खत्म कर देते है।

इसके साथ ही ऐसे शैम्पू का इस्तेमाल करें जिनमे प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया गया हो। क्योंकि केमिकल प्रोडक्ट्स बालों को काफी नुकसान पहुंचाते है। हफ्ते में एक बार किसी अच्छे क्लीयरिफाइंग शैम्पू का इस्तेमाल करें इससे बालों की पूरी गंदगी एक ही बार में साफ़ हो जाएगी। वैसे आप चाहे तो अपने शैम्पू में एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर भी प्रयोग में ला सकती है। यह बालों की पूरी गंदगी को साफ़ करके उन्हें चमकदार बनाने में मदद करेगा।

2. नियमित रूप से करें ऑयलिंग :hair oiling

 

लंबे बालों के लिए ही नहीं अपितु शाइनी और खुबसूरत बालों के लिए भी ऑयलिंग बहुत जरुरी होती है। ये बालों को कंडीशन करके उनमें नमी को बनाए रखने में मदद करती है जिससे वे रूखे नहीं होते और उलझते नहीं है। इसके लिए सप्ताह में कम से कम 2 बार रात को सोने से पहले बालों में तेल अवश्य लगायें। जिसके लिए नारियल या सरसों के तेल को हल्का गुनगुना करके बालों में मालिश करें।

बेहतर परिणामो के लिए तेल लगाने के बाद एक तौलिया को गर्म पानी में डुबोकर अच्छे से निचोड़ लें और फिर 10 मिनट के लिए इसे अपने बालों में लपेटकर रखें। अगली सुबह हेयर वाश कर लें। नियमित रूप से ऐसा करने से आपके बाल पहले से अच्छे और खुबसूरत दिखने लगेंगे।

3. हाईड्रेटिंग मास्क का इस्तेमाल करें :

शायद आप नहीं जानती लेकिन आपकी किचन में ऐसी बहुत सी चीजें है जो आपके बालों को बिना नुकसान पहुंचाएं शाइनी बना सकती है। जी हां, इन प्रोडक्ट्स की मदद से आप बालों के लिए शाइनी हेयर मास्क बना सकती है जो बालों को डीप-कंडीशन करके उन्हें आकर्षक बनाते है। इसके लिए अंडे से बना हेयर मास्क काफी लाभकारी रहेगा।

प्रयोग के लिए एक अंडे को फोड़कर उसे अच्छी तरह से फेंट लें और उसमे 1 चम्मच बादाम तेल व् 2 चम्मच दही मिलाएं। अच्छे से मिक्स करके इस पैक को अपने बालों में लगायें। आधे घंटे तक रखें और उसके बाद बाल धो लें। बाल धोने के लिए केवल ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करें, गुनगुने पानी या गर्म पानी का इस्तेमाल न करें।

4. बाल धोने के बाद यह भी ध्यान रखें :applying serum for hairs

अगर आप सोचती है की केवल बाल धोने से बाल शाइनी हो जाते है तो यह गलत है। क्योंकि बालों को शैम्पू करने के बाद भी अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है। जिसके लिए हेयर सीरम बेस्ट उपाय है। यह बालों को कंडीशन तो करता ही है साथ-साथ उनकी चमक को भी बरकरार रखता है।

5. बाहरी वातावरण से बचाव :

बालों को अच्छा बनाने के लिए केवल उनकी सफाई ही नहीं बल्कि उनका बचाव करना भी जरुरी है। जिसके लिए आपको बाहर जाते समय बालों का खास ध्यान रखना होगा। अर्थात जब भी कहीं बाहर जाएं तो बालों को ढक कर रखें। क्योंकि सूरज की हानिकारक किरणें भी बालों को काफी नुकसान पहुंचाती है। जिससे उनकी चमक और नमी दोनों खो जाती है। इसके लिए आप बाजार में मिलने वाले हेयर सनस्क्रीन का भी इस्तेमाल कर सकती है।

इसके साथ ही महीने में एक बार हेयर स्पा अवश्य कराएँ। ये बालों के लिए एक प्रोटेक्टिव लेयर का काम करता है जिससे बाहरी वातावरण बालों को अधिक नुकसान नहीं पहुंचा पाता। वैसे आप चाहे तो खुद घर पर भी हेयर स्पा कर सकती है। ये बालों को प्राकृतिक पोषण देने का काम करेगा। जिसके कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होंगे।

6. हीट उपकरणों से बनाएं दूरी :hair blower for drying hair

स्ट्रेटनर हो या ब्लो ड्रायर, कर्लर हो या प्रेसिंग मशीन ये सभी बालों को काफी नुकसान पहुंचाते है। क्योंकि इन सभी में बालों को स्टाइल करने के लिए आर्टिफिशियल हीट का इस्तेमाल किया जाता है जिससे बाल न केवल ड्राई होते है अपितु उनकी चमक भी खो जाती है। इसलिए बालों में हीट उपकरणों का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। अगर आप चाहती है तो विशेष मौके पर इनका इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन ध्यान रहे प्रयोग से पूर्व बालों में हीट प्रोटेक्टिव स्प्रे और जेल आवश्यक लगा लें। साथ ही बालों को धोने के लिए कभी भी गर्म पानी का इस्तेमाल नहीं करें। ये बालों को और अधिक ड्राई करने का काम करता है।

तो, ये थे कुछ डेली रूटीन जिन्हें अपनाकर रूखे बालों को शाइनी और आकर्षक बनाया जा सकता है। एक बात और हेयर प्रोडक्ट्स को चुनते वक्त विशेष सावधानी रखें। गलत और एक्सपायर डेट वाले प्रोडक्ट्स बालों को नुकसान पहुंचा सकते है। साथ ही इन्हें चुनते वक्त हेयर टाइप को भी ध्यान में रखें। यानी ऑयली बालों के लिए उन्ही प्रोडक्ट्स को चुनें जिन्हें ऑयल्स का अधिक इस्तेमाल नहीं किया गया हो। जबकि रूखे बालों के लिए ऑयली हेयर प्रोडक्ट्स सही चुनाव होंगे।

प्रेगनेंसी में महिलाओं के लिए सुपरफूड है आंवला

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प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण जीभ के स्वाद में भी परिवर्तन आता है। ऐसे में कुछ गर्भवती महिलाओं का खट्टा तो कुछ का मीठा खाने का मन करता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान स्वाद से ज्यादा सेहत का ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि महिला को ऐसा आहार खाने की सलाह दी जाती है जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए फायदेमंद भी हो। ऐसे में खट्टे और मीठे स्वाद के साथ पोषक तत्व से भरपूर आंवले का सेवन करना प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद हो सकता है। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान आंवले का सेवन करने से क्या फायदे मिलते हैं, आंवले का सेवन कितना करना चाहिए, कैसे करना चाहिए, और कब आंवले का सेवन नहीं करना चाहिए। सबसे पहले जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान आंवले का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते है।

ब्लड प्रैशर

गर्भवती महिला को ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आंवले का सेवन बॉडी में रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है जिससे ब्लड प्रैशर की समस्या बचाव होता है।

विटामिन्स से होता है भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में विटामिन्स का होना बहुत जरुरी होता है, और आंवले में विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते हैं। जो की प्रेगनेंसी के समय बॉडी में जरूरत के अनुसार आयरन को कंज्युम करने में मदद करते हैं ताकि हीमोग्लोबिन के स्तर को बने रहने में मदद मिल सके।

एंटी इंफ्लेमेटरी गुण

बहुत सी महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान हाथों व् पैरों में होने वाली सूजन की समस्या से परेशान रहती है। लेकिन आंवले का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से राहत मिलती है क्योंकि यह पानी की मात्रा से भरपूर होता है जो विषैले पदार्थो को बॉडी से बाहर निकालता है, और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण सूजन से राहत दिलाता है।

विटामिन सी और आयरन से होता है भरपूर

आयरन और विटामिन सी से भरपूर आंवला बॉडी में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाएं रखने के साथ खून को साफ़ करने, ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद करता है। साथ ही इससे बॉडी में खून की कमी की समस्या से बचने में मदद मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली एनीमिया की समस्या से राहत मिलती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है

विटामिन सी से भरपूर होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान आंवले का सेवन करने से इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे सर्दी, खांसी, जुखाम, फ्लू, अन्य संक्रमण आदि से बचाव करने में मदद मिलती है।

फाइबर होता है

कब्ज और बवासीर की समस्या से भी बहुत सी महिलाएं प्रेगनेंसी में परेशान हो सकती है, लेकिन फाइबर से भरपूर होने के कारण आंवला गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाने में मदद करता है। क्योंकि यह पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित करने में मदद करता है जिससे पाचन तंत्र को मजबूत बनने में मदद मिलती है।

मॉर्निंग सिकनेस

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस से बहुत सी महिलाएं परेशान होती है। ऐसे में आंवला के जूस का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है

गर्भावस्था के दौरान मसूड़ों में दर्द, खून का आना, मुँह से बदबू आदि की समस्या का होना, संक्रमण का कारण बन सकता है। ऐसे में कैल्शियम और विटामिन सी से भरपूर आंवले का सेवन करने से मसूड़ों को स्वस्थ रहने के साथ दांतों को मजबूत बनाने में भी मदद करता है।

समय पूर्व प्रसव की सम्भावना को कम करता है

आंवले का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी समस्याओं से निजात मिलता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, और साथ ही समय से पहले प्रसव होने की समस्या से बचाव होता है।

मूड फ्रेश रखता है

गर्भवती महिला को मूड स्विंग्स होना भी आम बात होती है। ऐसे में गुस्सा चिड़चिड़ापन, तनाव आदि हो सकता है और आंवले का सेवन करने से आपके मूड को रिफ्रेश करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में किस तरह कर सकते हैं आंवले का सेवन

आंवले का सेवन अचार की तरह रोटी या चावल के साथ आंवले का सेवन किया जा सकता है और यह आपके खाने के जायके को भी बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही घर में यदि आप किसी फल का जूस निकाल रहे हैं तो उसमे भी आंवले को मिलाकर जूस बनाया जा सकता है, आंवला पाउडर या आंवले के मुरब्बे के रूप में भी इसका सेवन किया जा सकता है। या फिर कुछ महिलाओं को कच्चे आंवले का सेवन ही अच्छा लगता है, ऐसे में जिस तरीके से आप इसका आनंद लेना चाहे उसी रूप में इसका सेवन कर सकते है।

प्रेगनेंसी में कितना आंवला खाना चाहिए

गर्भवती महिला दिन में एक या दो आंवले एक सेवन कर सकती है, क्योंकि इसके अधिक सेवन से कब्ज़, डायरिया, शरीर में पानी की कमी, और स्किन के रूखे होने के चांस भी होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में आंवले का सेवन कब नहीं करना चाहिए

यदि गर्भवती महिला को दस्त या डायरिया की समस्या है तो इसके सेवन से बचना चाहिए, साथ ही सर्दी जुखाम होने पर भी प्रेग्नेंट महिला को आंवले का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में आंवले का सेवन करने के फायदे और साथ ही आंवले का सेवन करने करते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में भी बताया गया है। तो यदि प्रेगनेंसी के दौरान स्वाद और फायदे से भरपूर आंवले का सेवन गर्भवती महिला करना चाहती है तो कर सकती है।

Hindi Video : Amla Benefits During Pregnancy

Amla During Pregnancy

खाली पेट चाय पीने के नुकसान प्रेगनेंसी में

गर्भावस्था के दौरान अपने खाने पीने की आदतों में गर्भवती महिला महिला को थोड़ा बदलाव करने की जरुरत होती है। क्योंकि कई बार कुछ आदतें प्रेग्नेंट महिला की सेहत पर गलत असर डाल सकती है। जैसे की अधिकतर लोगो की आदत होती है की सुबह सुबह उठते ही सबसे पहले चाय का सेवन करना।

लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपकी भी ऐसी ही आदत है तो इसके कारण आपको नुकसान पहुँच सकता है। क्योंकि खाली पेट चाय पीने से गर्भवती महिला की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में खाली पेट चाय पीने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

पेट में बनती है गैस

खाली पेट चाय का सेवन करने से गर्भवती महिला को पेट में गैस की समस्या की अधिक परेशानी हो सकती है। जिसके कारण पेट में हल्का दर्द, खट्टी डकार जैसी समम्स्या हो सकती है।

बढ़ती है थकान

अधिकतर लोगो का यही कहना होता है की चाय पीने से उनमे एनर्जी आती है। जबकि यदि आप खाली पेट चाय का सेवन कर रहे हैं तो आपको थकान, आलस, घबराहट, कमजोरी महसूस होना जैसी परेशानियां अधिक हो सकती है। ऐसे में इन सभी परेशानियों से बचने के लिए गर्भवती महिला को खाली पेट चाय पीने से बचना चाहिए।

उल्टी की हो सकती है समस्या

यदि आप सुबह उठकर खाली पेट चाय का सेवन करती है तो इसके कारण मुँह का स्वाद बिगड़ सकता है। जिसके कारण उल्टी, जी मिचलाना, जैसी परेशानियां भी अधिक हो सकती है।

भूख की होती है कमी

प्रेग्नेंट महिला के लिए भरपूर आहार लेने बहुत जरुरी होता है ताकि प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने और बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिल सके। लेकिन खाली पेट चाय पीने से पेट फूलने की समस्या हो सकती है जिसके कारण खाना अच्छे से हज़म नहीं होता है। और खाना अच्छे से हज़म न होने के कारण भूख की कमी की समस्या हो सकती है जो महिला और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

अल्सर

यदि आप खाली पेट चाय का सेवन करती है और चाय बहुत स्ट्रांग पीती है साथ ही आप माँ भी बनने वाली है। तो आपको अपनी इस आदत को तुरंत बदल देना चाहिए। पहले तो आप दिन में किसी भी समय चाय का सेवन करें लेकिन चाय बिल्कुल भी स्ट्रांग नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इसके कारण पेट में जख्म होने का खतरा रहता है। जिससे माँ और बच्चे दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मूड खराब रहता है

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को मूड स्विंग्स होना आम बात होती है। लेकिन यदि आप खाली पेट चाय का सेवन करती है तो ऐसा करने से आपको थकान महसूस अधिक होती है। जिसके कारण आपके व्यवहार में चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। जिसके कारण हो सकता है आपका किसी काम को करने में भी मन न लगे।

बच्चे को हो सकता है नुकसान

चाय में कैफीन की मात्रा मौजूद होती है, ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला खाली पेट चाय का सेवन करती है। तो खाली पेट कैफीन का सेवन करने के कारण बॉडी पर ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण बच्चे के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। और इसके कारण शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या हो सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट चाय पीने से हो सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट चाय पीने से बचना चाहिए या फिर चाय के साथ रस, बिस्कुट आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

वीडियो गर्भावस्था में चाय या खाली पेट चाय पीने के नुकसान 

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प्रेगनेंसी में अचार खाएं या नहीं?

गर्भावस्था में अचार

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर महिला के खान पान पर भी देखने को मिलता है। जैसे की इस समय महिला का खट्टा, मीठा, चटपटा आदि कुछ भी खाने का मन कभी भी कर सकता हैं, और किसी खास चीज को खाने की यदि प्रेग्नेंट महिला की इच्छा बार बार होती है तो इसे क्रेविंग कहा जाता है। और ऐसी ही खाने की चीजों में शामिल है अचार, ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान अचार का स्वाद बहुत पसंद आता है। लेकिन अचार का सेवन करना चाहिए या नहीं, अचार के सेवन से शिशु को किसी तरह का नुकसान तो नहीं होगा इन बातों को लेकर गर्भवती महिला परेशान हो सकती है। तो इसका जवाब होता है की महिला यदि अचार का सेवन पर्याप्त मात्रा में करती है, घर के बने अचार का सेवन करती है। तो इससे महिला को फायदा होता है जबकि अधिक मात्रा में इसका सेवन महिला के लिए बहुत नुकसानदायक भी हो सकता है।

प्रेगनेंसी में अचार खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि अचार का सेवन करना चाहती है तो कर सकती है लेकिन इस बात का ध्यान रखना जरुरी है की ज्यादा मात्रा में इसका सेवन न किया जाये। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में अचार का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली

कच्चे आम, आंवला, गाजर के बने ताजे अचार में पोषक तत्व जैसे की विटामिन्स, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं, इसीलिए कभी कभी गर्भवती महिला चाहे तो अचार का सेवन कर सकती है।

पाचन क्रिया

अचार में मौजूद स्वस्थ बैक्टेरिया मौजूद होता है, जो गर्भवती महिला की आंत में गुड़ बैक्टेरिया को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने के साथ पाचन क्रिया से जुडी परेशानियों से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

कम वसा और कोलेस्ट्रॉल

अचार में वसा व् कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे गर्भवती महिला की बॉडी में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी का बैलेंस बनाए रखने में मदद मिलती है। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जिस अचार में मीठे की मात्रा अधिक हो, या बहुत ज्यादा तेल, मसाले, नमक आदि का इस्तेमाल किया हो उस अचार का सेवन करने से बचना चाहिए।

शरीर की जरुरत पूरी करता है

शिशु के गर्भ में बेहतर विकास के लिए और गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए बॉडी में पोटैशियम, सोडियम जैसे खनिज तत्वों का बैलेंस रहना बहुत जरुरी होता है। और अचार का सेवन करने से बॉडी में खनिज तत्वों का बैलेंस बनाए रखने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में अचार खाने के नुकसान

यदि किसी चीज का सेवन पर्याप्त मात्रा में व् जरुरत के अनुसार किया जाये तो वह गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है। लेकिन जरुरत से ज्यादा ऐसी चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला को नुकसान भी पहुँच सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में अचार खाने से क्या नुकसान होते हैं।

ब्लड प्रैशर

अचार में नमक यानी की सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है, और गर्भवती महिला की बॉडी में सोडियम की अधिकता होने के कारण ब्लड प्रैशर के बढ़ने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है।

डीहाइड्रेशन

सोडियम की मात्रा अधिक होने के कारण अचार का अधिक सेवन करने से गर्भवती महिला को डीहाइड्रेशन जैसी परेशानी का सामना भी कएने पड़ सकता है। और पानी की कमी का गर्भवती महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या को बढ़ाने के साथ गर्भ में शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

एसिडिटी

अचार का अधिक सेवन करने के कारण पेट में एसिड का उत्पादन होने लगता है जिसके कारण गर्भवती महिला को एसिडिटी, सीने में जलन जैसी परेशानी के कारण दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

सूजन

पानी की कमी के कारण बॉडी में सूजन की समस्या भी हो सकती है, ऐसे में गर्भवती महिला यदि अधिक अचार का सेवन करती है तो इससे बॉडी में सोडियम की मात्रा की अधिकता होने लगती है जिससे सूजन जैसी परेशानी का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

वजन

जो गर्भवती महिला ऐसे अचार का सेवन करती है जो स्वाद में मीठा होता है, तो ऐसे अचार में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। और प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कैलोरी की मात्रा अधिक होने के कारण महिला को वजन बढ़ने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भवती महिला को अचार का सेवन करते समय इन बातों का ध्यान रखे

  • प्रेग्नेंट महिला यदि अचार का सेवन करती है तो साथ में पानी का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। ताकि डिहाइड्रेशन के कारण होने वाली परेशानी से गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु दोनों को सुरक्षित रहने में मदद मिल सके।
  • ज्यादा तेल, नमक, मसालों से युक्त अचार का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • बाजार के अचार की बजाय घर में बने ताजे अचार का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए।
  • जिन प्रेग्नेंट महिलाओं को गैस की समस्या अधिक रहती है उन्हें अचार का सेवन से परहेज रखना चाहिए।
  • अचार खाने के कारण यदि आपको किसी तरह की एलर्जी या गले से सम्बंधित समस्या हो जाती है तो भी अचार के सेवन से परहेज करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में अचार का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान अचार का सेवन करना गलत नहीं होता है। लेकिन जरुरत के अनुसार और अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए ही इसे अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

गर्भावस्था में कमर और पेट में दर्द रहने के क्या कारण होते हैं?

प्रेगनेंसी में कमर और पेट में दर्द

गर्भवस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की उल्टी आना, सिर में भारीपन, थकावट, कमजोरी, ब्रेस्ट में दर्द, पेट में दर्द, कमर में दर्द आदि का महसूस होना। कुछ महिलाओं को ज्यादा परेशानियों का अनुभव करना पड़ता है तो कुछ महिलाएं पहले तीन महीने के बाद बिल्कुल नोर्मल हो जाती है, या थोड़ी बहुत परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है। यह सब बातें गर्भवती महिला की फिटनेस के साथ बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर भी निर्भर करती है। थोड़ी बहुत परेशानी का अनुभव होना आम बात होती है, लेकिन परेशानी अधिक होने पर इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए, और एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

गर्भावस्था में कमर और पेट में दर्द रहने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान कमर और पेट में दर्द का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि कई कारणों से महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था की शुरुआत से ही गर्भवती महिला की बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। हार्मोनल बदलाव के कारण बॉडी में रिलैक्सिन नाम का हॉर्मोन बनता है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए गर्भाशय के आकार को बढ़ाने में मदद करता है, ऐसे में इस हॉर्मोन के कारण गर्भवती महिला को पेट या कमर में दर्द की समस्या का अनुभव हो सकता है।

मांसपेशियों के कारण

गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण मांसपेशियां अलग होने लगती है, और साथ ही इनमे खिंचाव भी बढ़ने लगता है। साथ ही गर्भाशय का आकार भी गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक विकास के साथ बढ़ता रहता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है और इसी कारण गर्भवती महिला को पेट या कमर में दर्द की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भपात

पहली तिमाही में यदि गर्भवती महिला को पेट या कमर में बहुत अधिक दर्द हो, साथ में स्पॉटिंग की समस्या हो, और वैसा ही महसूस हो जैसा की पीरियड्स के दौरान होता है। तो यह गर्भपात का संकेत हो सकता है ऐसे में आपको जल्दी से जल्दी डॉक्टर की राय लेनी चाहिए।

तनाव

प्रेगनेंसी में पेट और कमर में दर्द का कारण तनाव भी हो सकता है। बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण तनाव में आ जाती है। लेकिन तनाव मुश्किलों को कम नहीं करता है बल्कि गर्भवती महिला की मुश्किलों को बढ़ा सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए।

उठने बैठने का तरीका

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान छोटी छोटी बातों का बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। जैसे की उठते बैठते समय ध्यान रखना, सीढ़ियां चढ़ते समय ध्यान रखना, आदि। क्योंकि सही पोजीशन न बैठने के कारण, उठते समय ध्यान न रखने का असर भी प्रेगनेंसी में पेट या कमर की दर्द की समस्या खड़ी कर सकता है।

वजन

दूसरी तिमाही के बाद गर्भवती महिला का वजन बढ़ने लग जाता है, ऐसे में वजन बढ़ने के कारण पीठ पर जोर पड़ता है, और पेट का भार नीचे की तरफ होने लगता है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में हल्के पेट या कमर में दर्द का अनुभव होना आम बात होती है।

डिलीवरी का संकेत

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में पेट या कमर में हल्के दर्द का रहना, और दर्द का समय -समय पर बढ़ जाना, इस बात का संकेत हो सकता है की अब डिलीवरी होने वाली है। ऐसे में इस दर्द को अनदेखा न करते हुए जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। साथ ही शिशु का झुकाव नीचे की तरफ बढ़ने के कारण दर्द का अनुभव भी बढ़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पेट या कमर में होने वाले दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में हल्का फुल्का दर्द होने पर घबराने की कोई बात नहीं होती है लेकिन दर्द का अधिक अनुभव होने पर इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

शिशु का सिर नीचे कब होता है? और आप कैसे जानेगें की शिशु पोजीशन में आ गया है

गर्भ में शिशु का सिर नीचे की तरफ कब होता है, आप कैसे जानेंगे की शिशु अपनी पोजीशन में आ गया है, कौन से महीने में शिशु का सिर नीचे की तरफ होता है, बच्चे का सिर नीचे की स्थिति में कब आता है

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला के लिए नए अनुभव, और नए सवालों से भरे हुए होते है। शुरुआत में जहां महिला शरीर में होने वाले बदलाव और परेशानियों के बारे में सोचती है, तो दूसरी तिमाही में शिशु की हलचल का अनुभव सबसे खास होता है। वहीँ आखिरी महीने में महिला डिलीवरी को लेकर सोचती है की उसे कैसे पता चलेगा की अब शिशु का जन्म होने वाला है, उसकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, कब शिशु अपनी जन्म लेने की सही पोजीशन में आएगा आदि। तो लीजिये आज हम आपको ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने जा रहे हैं।

शिशु का सिर नीचे की तरफ कब आता है

हर महिला के लिए यह बात कह पाना मुश्किल होता है की गर्भ में शिशु अपने सिर को नीचे की तरफ कब करता है। क्योंकि यह महिला की शारीरिक प्रक्रियाओं के साथ शिशु के विकास, और गर्भ में शिशु के लिए कितनी जगह है, आदि पर निर्भर करता है। नोर्मल केस में देखा जाए तो तीस से चौतीस हफ़्तों के के बीच शिशु सिर नीचे की तरफ करने लगता है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है की शिशु अपना सिर नीचे की तरफ नहीं करता है, यानी की उसका सिर ऊपर और पैर और कूल्हे नीचे की तरफ होते है, और डिलीवरी के समय तक भी शिशु अपना सिर नीचे की तरफ नहीं करता है। इस पोजीशन को ब्रीच पोजीशन कहा जाता है।

शिशु के इस पोजीशन में होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे की शिशु के विकास में कमी होने के साथ महिला द्वारा पहले बच्चे के समय भी शिशु का गर्भ में इसी अवस्था का होना। और यदि शिशु डिलीवरी का समय पास आने पर भी इसी पोजीशन में ही रहता है तो इसका मतलब होता है की महिला को शायद शिशु के जन्म के लिए सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़े। ऐसे में पूरी तरह से किसी भी महिला के लिए यह बता पाना की शिशु कब हेड डाउन पोजीशन में आएगा यह थोड़ा मुश्किल होता है।

शिशु पोजीशन में आ गया है यह आप कैसे जानेंगे

गर्भ में शिशु की पोजीशन में आ गया है यह तो पता करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन गर्भवती महिला की बॉडी कुछ ऐसे संकेत देती है। जिससे यह पता चल जाता है की महिला के प्रसव का समय पास आ गया है। तो आइये अब जानते हैं की महिला प्रसव के समय का कैसे पता लगा सकती है।

  • डिलीवरी का समय पास आने पर प्राइवेट पार्ट से यूरिन की तरह सफ़ेद गाढ़े चिपचिपे पदार्थ का निकलना महिला के प्रसव के समय के पास आने का संकेत देता है। यह एमनियोटिक फ्लूड होता है जिसमे गर्भाशय में शिशु पूरे नौ महीने तक रहता है, इस फ्लूड के निकलने का मतलब होता है की गर्भाशय की थैली फट गई है और अब शिशु का जन्म कभी भी हो सकता है।
  • यदि गर्भवती महिला के पेट में हल्का हल्का दर्द होता है, और रुक जाता है, और उसके बाद धीरे धीरे यह दर्द बढ़ता है और घटता है, तो यह लेबर पेन हो सकता है, यह भी शिशु का जन्म अब कभी भी हो सकता है इस बात की और इशारा करता है।

तो यह है कुछ बातें जो आपको गर्भ में शिशु की पोजीशन या डिलीवरी का समय पास आने के समय ध्यान रखनी चाहिए, साथ ही यदि डॉक्टर की दी गई तारीख के आस पास भी आपको कोई दर्द या कुछ महसूस नहीं होता है तो भी आपको जल्दी से जल्दी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।