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ब्रेस्ट में दर्द और चुभन के कारण और उपाय

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ब्रेस्ट में दर्द व् चुभन का महसूस होना महिलाओं के लिए एक आम समस्या होती है। बहुत सी महिलाएं इस समस्या से परेशान हो सकती है। लेकिन स्तन में दर्द एक ऐसी समस्या है जिसे ज्यादा समय के लिए महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि कई बार इसकी वजह से महिला की समस्या बढ़ सकती है। लेकिन हर बार स्तन में दर्द होना किसी खतरे का संकेत हो ऐसा भी जरुरी नहीं होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम स्तन में दर्द होने के क्या कारण होते हैं। और किस तरह इस समस्या से आराम पाया जा सकता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

स्तन में दर्द व् चुभन महसूस होने का कारण

यदि महिला को स्तन में दर्द व् चुभन की समस्या होती है तो हर महिला को यह परेशानी एक ही कारण की वजह से हो ऐसा जरुरी नहीं होता है। क्योंकि स्तन में दर्द व् चुभन महसूस होने के बहुत से कारण हो सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की महिला को ब्रेस्ट से जुडी समस्या के क्या कारण होते हैं।

मासिक धर्म: पीरियड्स के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को यह स्तन में दर्द व् चुभन की समस्या हो सकती है।

सूजन: यदि महिला को ब्रेस्ट में बाहरी तरफ या आंतरिक अंगो में सूजन हो गई है। तो महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी: प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव, स्तन में दूध बनने, स्तन का आकार में बदलाव आने के कारण, वजन बढ़ने के कारण महिला को ब्रेस्ट पेन या ब्रेस्ट में चुभन की समस्या हो सकती है।

स्तन में गाँठ: यदि किसी कारण स्तन में गाँठ हो गई है। तो स्तन में गाँठ होने के कारण भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

हार्मोनल असंतुलन: बॉडी में प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन हॉर्मोन के स्तर में उतार चढ़ाव होने के कारण भी महिला को ब्रेस्ट पेन या ब्रेस्ट में चुभन की समस्या हो सकती है।

ब्रेस्टफीडिंग: जो महिलाएं स्तनपान करवाती है उन महिलाओं के ब्रेस्ट की मांसपेशियों के खिंचाव उत्पन्न होने के कारण भी महिला को स्तन में दर्द की समस्या हो सकती है।

ब्रेस्ट साइज: यदि महिला के स्तन का आकार बड़ा है तो भी महिला को यह समस्या हो सकती है। साथ ही महिला यदि ऐसे में व्यायाम अधिक करती है तो महिला की यह परेशानी बढ़ सकती है।

गलत ब्रा: जो महिलाएं सही ब्रा नहीं पहनती है यानी की अपने साइज की ब्रा नहीं पहनती हैं। उन महिलाओं को भी ब्रेस्ट में दर्द की समस्या हो सकती है।

सर्जरी: यदि आपने कभी स्तन की सर्जरी करवाई है तो भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गलत आदतें: कैफीन का अधिक सेवन, धूम्रपान, शराब आदि का सेवन जो महिलाएं करती हैं उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

चोट: यदि स्तन में कोई चोट लगी है, घाव हुआ है, दाद हुआ है, तो भी महिला को स्तन में दर्द की समस्या हो सकती है।

खून की कमी: जिन महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तनाव: यदि महिला तनाव में रहती है, बहुत ज्यादा चिंता करती है, मानसिक रूप से परेशान अधिक रहती है। तो भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उम्र का बढ़ना: महिलाओं की बढ़ती उम्र के साथ मेनोपॉज़ के कारण व् ब्रेस्ट के टिश्यू में परिवर्तन के कारण भी महिला को ब्रेस्ट में दर्द व् चुभन का सामना करना पड़ सकता है।

स्तन में गाँठ: कई बार स्तन में दर्द के महसूस होने पर हाथ लगाने पर दर्द के साथ गाँठ महसूस होती है। तो यदि आपके स्तन में गाँठ होती है तभी आपको स्तन में दर्द व् चुभन महसूस हो सकती है। साथ ही इसे एक बार चेक जरूर करवाना चाहिए ताकि इसके कारण कोई बड़ी समस्या न हो।

ब्रेस्ट में दर्द व् चुभन को दूर करने के उपाय

यदि आप भी स्तन में दर्द या चुभन की समस्या से परेशान हैं तो कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करके इस परेशानी से निजात पाया जा सकता है। तो आइये अब जानते हैं की ब्रेस्ट पेन या ब्रेस्ट में चुभन की समस्या से निजात पाने के लिए आप किन टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आइस

यदि आपके ब्रेस्ट में दर्द या चुभन का अहसास हो रहा है तो आइस लेकर उसे सूती कपडे में डालकर अपने ब्रेस्ट पर घुमाएं। ऐसा दो से तीन मिनट तक दिन में दो से तीन बार करें। आपको जरूर आराम मिलेगा।

सिकाई

गर्म पानी की सिकाई करने से भी ब्रेस्ट की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद मिलती है। जिससे ब्रेस्ट पेन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

आयल मसाज

किसी तेल को लेकर हल्का गुनगुना करें, उसके बाद हलके हाथों से ब्रेस्ट की मसाज करें। ऐसा रात को सोने से पहले करें तो ज्यादा बेहतर होगा। मसाज करने से भी ब्रेस्ट में दर्द व् चुभन से आराम पाने में मदद मिलती है।

ब्रेस्ट में दर्द और चुभन से बचने के लिए पहने सही ब्रा

गलत ब्रा पहनने के कारण शुरुआत में यह परेशानी कम और धीरे धीरे बढ़ सकती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए सही ब्रा का चुनाव करें। इसके अलावा व्यायाम करते समय स्पोर्ट्स ब्रा पहने।

खान पान का ध्यान रखें

मैग्नीशियम, फाइबर, आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें। भरपूर मात्रा में सब्जियों व् फलों का सेवन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, ऐसा करने से भी आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

ब्रेस्ट में दर्द और चुभन से बचने के लिए गलत आदतें सुधारें

कैफीन, नशीले पदार्थों का सेवन करने से बचें, ऐसा करने से भी ब्रेस्ट में होने वाले दर्द व् चुभन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से मिलें

यदि आपको ब्रेस्ट पेन में समस्या ज्यादा रहती है, गाँठ महसूस होती है, एक ब्रेस्ट में दर्द रहती है, किसी भी समय अचानक से दर्द उठता है, तो इन सभी लक्षणों को अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। ताकि कोई भी परेशानी बढ़ न सकें, और डॉक्टर आपको आपकी परेशानी के समाधान के बारे में बता सके।

तो यह हैं ब्रेस्ट पेन व् ब्रेस्ट में चुभन होने के कारण व् उपाय, यदि आपको यह समस्या अधिक रहती है तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

प्रेगनेंट महिलाओं के लिए मार्च और अप्रैल महीने

प्रेगनेंट महिलाओं के लिए मार्च और अप्रैल महीने, कैसे गर्भवती महिलाये रखें अपना खयाल मार्च और अप्रैल में, How to take care of Pregnant Woman in March and April

गर्भावस्था का समय सभी महिलाओं के लिए ख़ास होता है। इस समय में बहुत सारी बातों का ध्यान रखना पड़ता है जैसे क्या खाना और क्या नहीं खाना है, किस समय में कैसे कपड़े पहनने है आदि। जैसा की हम सभी जानते है के मार्च का महीना शुरू हो चूका है और अप्रैल का महीना जल्दी ही आने वाला है, इन दोनों ही महीनों में एक गर्भवती महिला को अपना ख़ास ध्यान रखने की जरुरत होती है।

आइये जानते है इन दिनों में एक प्रेगनेंट महिला को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

मार्च का महीना

मार्च के महीने मिलेजुले दिनों का होता है इन दिनों में गर्भवती महिला को जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

ठंडी और गर्मी का मेलजोल:

  • मार्च के महीने में दिन में गर्मी और रात में सर्दी होती है।
  • ऐसे में एक प्रेग्नेंट महिला को अपना ख़ास ध्यान रखना चाहिए।
  • एकदम से गर्म कपड़ो का इस्तेमाल बंद नहीं करना चाहिए।
  • गर्म कपड़ो को ना पहनने से फ्लू होने का डर लगा रहता है।
  • आपने देखा होगा अक्सर एक नार्मल इंसान को खांसी होने से अंदर तक की आंते खिंच जाती है।
  • एक गर्भवती महिला को अगर खांसी हो जाए तो इसका असर उनके शिशु की सेहत पर भी पड़ता है।
  • महिला के साथ साथ शिशु की आंतो के खींचने का भी डर रहता है।
  • गर्भवती महिला को फ्लू और खांसी होने से शिशु के स्वास बंद होने का खतरा भी बना रहता है।
  • ऐसे में जरुरी है के गर्भवती महिला अच्छे से गर्म कपड़े पहनकर रहे।
  • दिन की थोड़ीसी धुप और गर्मी के कारण गर्मी के कपड़े ना पहने।
  • इस वर्ष के मार्च महीने में वैसे भी बहुत से बदलाव हो रहे है।
  • गर्भवती महिलाओं को अपने पहनने और ओढ़ने का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

भोजन का ध्यान:

  • इस ठंड और गर्म मौसम में जरूरी है के पहनने के साथ साथ अपने खाने का भी विशेष ध्यान रखे।
  • दिन की गर्मी को देखते हुए ठंडे पेय प्रदार्थो का प्रयोग ना करें।
  • भोजन में ठंडी चीजों का सेवन ना करें।
  • गर्भवती महिला जैसा भोजन सर्दियों में खा रही थी वैसा ही इसी महीने में भी लेती रहें।
  • फ्रीज़ की चीजों का इस्तेमाल ना करें।
  • प्रेग्नेंट महिलाओं का ठंडी चीजों के सेवन से फ्लू होने का खतरा बढ़ जाता है।

अप्रैल का महीना

अप्रैल के महीने में गर्मियों के दिन आ जाते है। आइये जानते है इन दिनों में एक गर्भवती महिला को कैसे अपना ध्यान रखना चाहिए।

केसर और बादाम:

  • कुछ गर्भवती महिलाये सर्दियों में केसर और बादाम के दूध पीती है।
  • अगर आप भी उसका सेवन कर रही थी तो अप्रैल के महीनें में बादाम वाला दूध पीना बंद कर दीजिये।
  • केसर और बादाम दोनों की ही तासीर गर्म होती है।
  • अप्रैल के माह में इनका प्रयोग गर्भवती महिला में लिए नुक्सानदायक हो सकता है।
  • यदि आप चाहिए तो भीगे हुए बादाम का छिलका उतारकर सेवन कर सकती है।
  • भीगे हुए बादाम गर्भवती महिलाओं को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

पानी का सेवन:

  • अप्रैल के महीने में गर्मियों का मौसम शुरू हो जाता है।
  • गर्मियों से बचने के लिए जरुरी है के गर्भवती महिलाये पानी का सेवन अच्छे से करें।
  • ठन्डे पानी का सेवन अभी भी ना करें।
  • पहले की अपेक्षा ली जाने वाली पानी की मात्रा को जरूर बढ़ा दे।
  • ठंडे शरबतों का सेवन ज्यादा ना लें।
  • दोपहर की गर्मी में एकदम से बाहर से आने पर ठंडे पानी का सेवन ना करें।

पानी वाले फल:

  • गर्मियों में बहुत से पानी वाले फल आते है जैसे तरबूज, खरबूजा और आम आदि।
  • गर्भवती महिलाये अभी इन फलों का ना खाये।
  • अप्रैल में बाजारों में मिलने वाले यह फल अच्छे से पके नहीं होते।
  • इन फलों को केमिकल्स का प्रयोग करके पकाया गया होता है।
  • अप्रैल माह में आम और तरबूज का प्रयोग आपके शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • पानी वाले फलों को खाने के लिए मई के महीने का इंतजार करें।

कहने को यह सभी बहुत छोटी छोटी बाते है पर एक गर्भवती महिला के लिए बेहद ही जरुरी ध्यान देने योग्य बाते है। कब क्या खाना है, क्या पहनना है, क्या ओढ़ना है, कब पानी पीना, किस समय में कौन से फल खाने है यह सभी बातें एक प्रेग्नेंट महिला और उसके शिशु की स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरुरी होती है। आपकी थोड़ी सी सावधानी आपके शिशु को हर बीमारी से बचाकर रखती है।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध

गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के लिए बहुत खास पल होता है, क्योंकि उसके उसके गर्भ में एक नन्ही जान होती है जिससे न केवल महिला शारीरिक रूप से बल्कि भावनात्मक रूप से भी जुड़ जाती है। तभी तो प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली इतनी परेशानियों के बाद भी महिला के चेहरे पर केवल शिशु के जन्म की ख़ुशी होती है। प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने गर्भवती महिला के लिए ख़ुशी से भरपूर होने के साथ सवालों से भी भरे हुए होते हैं। और उनमे से सबसे अहम सवाल जो की पति और पत्नी दोनों का होता है की क्या प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना सुरक्षित होता है? प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से गर्भ में शिशु को कोई नुक्सान तो नहीं पहुँचता है? आदि।

तो इसका जवाब होता है की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाया जा सकता है, लेकिन जैसे जैसे प्रेगनेंसी के दिन आगे बढ़ते हैं तो महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला की परेशानियां भी बढ़ सकती है। ऐसे में जहां प्रेगनेंसी के छठे सातवें महीने तक समबन्ध बनाया जा सकता है। वहीँ प्रेगनेंसी के शुरुआत के दिन और आखिर के समय में सम्बन्ध बनाते समय बहुत सावधानी बरतने की जरुरत होती है, और पहले तीन महीने में तो डॉक्टर सम्बन्ध बनाने के लिए मना भी कर सकते हैं। और वैसे भी यदि प्रेग्नेंट महिला और उनका पार्टनर यदि सम्बन्ध बनाते हैं तो उन्हें बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है। ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की परेशानी का अनुभव न हो।

प्रेगनेंसी के समय सम्बन्ध बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें

यदि प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है, महिला को सम्बन्ध बनाने में कोई भी समस्या नहीं है तो गर्भवती महिला और उनके पार्टनर प्रेगनेंसी के दौरान भी सम्बन्ध बनाने का लुत्फ़ उठा सकते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को सम्बन्ध बनाते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आइये जानते हैं।

गर्भवती महिला की स्थिति

गर्भावस्था में यदि महिला को किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स है, किसी भी तरह की शारीरिक समस्या है, पहले गर्भपात हो चूका हो, ब्लीडिंग की समस्या हो, तो ऐसे में प्रेगनेंसी के समय सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। क्योंकि यदि महिला को किसी तरह की परेशानी होने के बाद भी यदि आप सम्बन्ध बनाते है तो यह गर्भवती महिला की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

महिला की मंजूरी

जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है, जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक समस्या होती है, ऐसे में हो सकता है की महिला की सम्बन्ध बनाने के प्रति अरुचि उत्पन्न हो जाए। और महिला का सम्बन्ध बनाने का मन न हो तो ऐसे में गर्भवती महिला के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती न करते हुए उनकी मुश्किलों में उनका साथ देना चाहिए, और हो सकता है की जैसे जैसे प्रेगनेंसी आगे बढे वैसे महिला की परेशानी कम हो जाए, और गर्भवती महिला भी सम्बन्ध बनाने का आनंद प्रेगनेंसी के दौरान लेना चाहे।

पेट पर दबाव

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाते समय महिला के पेट का खास ध्यान रखना चाहिए की सम्बन्ध बनाते समय महिला के पेट पर किसी भी तरह का जोर न पड़े, महिला को पेट पर दबाव महसूस न हो। क्योंकि पेट पर जोर पड़ने के कारण गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी असहज महसूस हो सकता है।

कुछ नया ट्राई

किसी भी तरह के नए एक्सपेरिमेंट को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं ट्राई करना चाहिए। क्योंकि इस दौरान की गई छोटी सी गलती गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

तेजी

गर्भावस्था के दौरान सम्बन्ध बनाते समय बिल्कुल भी तेजी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि तेजी के कारण गर्भाशय को चोट लग सकती है साथ ही गर्भाशय में संकुचन हो सकता है, जिससे गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुँच सकता है। ऐसे में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए होश में काम लेना, और धैर्य रखना बहुत जरुरी होता है।

पार्टनर का ध्यान

गर्भवती महिला को अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की यदि उनका पार्टनर किसी यौन संचारित रोग से ग्रस्त है तो प्रेगनेंसी में उनके साथ सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

डॉक्टर की राय

किसी भी तरह की परेशानी से सम्बन्ध बनाते समय प्रेगनेंसी के दौरान बचने के लिए आपको एक बार डॉक्टर की राय भी लेनी चाहिए। क्योंकि डॉक्टर से ज्यादा बेहतर तरीके से गर्भवती महिला की स्थिति को कोई भी नहीं बता सकता है।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने पर शिशु पर कोई असर पड़ता है?

गर्भवती महिला और उनके पार्टनर यदि प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते समय पूरी सावधानी का ध्यान रखते हैं तो इसके कारण शिशु पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। जैसे की महिला के पेट पर जोर नहीं पड़ता चाहिए, गर्भाशय को चोट नहीं लगनी चाहिए, आदि। साथ ही यदि गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की समस्या होती है तो डॉक्टर ही सम्बन्ध बनाने की सलाह नहीं देते हैं। ऐसे में यदि स्वस्थ प्रेगनेंसी है तो बिना डर के प्रेगनेंसी के दौरान भी सम्बन्ध बनाने का पूरा मज़ा लिया जा सकता है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला और उनके पार्टनर को सम्बन्ध बनाते समय रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और शिशु को किसी भी तरह की समस्या न हो। साथ ही जितना हो सके पहले तीन महीने में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भाशय में संकुचन होने की सम्भावना बढ़ सकती है। जबकि प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में सम्बन्ध बनाना गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद भी हो सकता है, क्योंकि गर्भाशय में सनुचान का होना महिला की आसान डिलीवरी में मदद कर सकता है।

प्रेगनेंसी में इन 8 फलों का सेवन जरूर करना चाहिए

प्रेगनेंसी में फल

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। ऐसे में फलों का सेवन करने से गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत फायदा मिलता है। क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। फलों का सेवन स्नैक्स के रूप में, सुबह नाश्ते में या दिन में कभी भी कर सकते हैं, और फलों का सेवन करने के साथ गर्भवती महिला ताजे फलों का जूस बनाकर भी इसका सेवन कर सकती है।

प्रेगनेंसी में किन फलों को खाना चाहिए

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान उन चीजों का सेवन ज्यादा करना चाहिए जो प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक फायदेमंद होते है, और गर्भ में पल रहे शिशु और गर्भवती महिला दोनों को फायदा पहुँचाने में मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान किन फलों का सेवन करना चाहिए।

सेब

मैग्नीशियम, आयरन, फोलिक एसिड, मैगनीज़, जिंक जैसे पोषक तत्वों से भरपूर सेब का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि ये प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्वों को शिशु तक पहुँचाने में मदद करता है। साथ ही इससे संक्रमण से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

संतरा

संतरा भी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को जरूर खाना चाहिए क्योंकि इससमे गर्भवती महिला को अनेको फायदे मिलते हैं। जैसे की इसके सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है, संतरा फाइबर से भरपूर होता है जिससे कब्ज़ व् अन्य पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है, विटामिन सी की मात्रा भरपूर होने के कारण इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के साथ संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है, पोटैशियम की मात्रा भरपूर होने के कारण यह ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल रखने और तनाव से बचे रहने में मदद मिलती है, फोलेट से भरपूर होने के कारण यह शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है, आदि। ऐसे में संतरे का सेवन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।

केला

केले में पोटैशियम, विटामिन बी 1, विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसका सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु का बेहतर शारीरिक विकास को होने के साथ गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने, कब्ज़ जैसी परेशानी से बचे रहने, आदि बहुत से फायदे मिलते है। गर्भवती महिला को केले का सेवन दूध के साथ करने से बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को कफ की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तरबूज

विटामिन्स, पोटैशियम, फॉस्फोरस आदि जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ तरबूज में पानी की मात्रा भरपूर होती है। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हाइड्रेट रखने, पेट से जुडी परेशानियों का हल करने, मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी, जी मिचलाना जैसी परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है। साथ ही तरबूज का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु की मांसपेशियों को मजबूत बनने, दिमाग का विकास तेज होने, और आँखों की रौशनी को बढ़ाने में मदद मिलती है।

आम

आम गर्मियों में आने वाला एक फल होता है ओर यदि आपकी प्रेगनेंसी गर्मी के दौरान को तो आपको आजम का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि आम का सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है, जिससे कब्ज़, अपच, जैसी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है। साथ ही आम में मौजूद विटामिन ए और इ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

कीवी

कीवी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट गर्भवती महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। साथ ही कीवी में फोलेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो शिशु के तंत्रिका तंत्र के बेहतर विकास में मदद करने के साथ शिशु को जन्म के समय होने वाली बिमारियों से बचे रहने में भी मदद करता है।

अनार

आयरन की मात्रा का भरपूर होना गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। और अनार में आयरन की मात्रा भरपूर होती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही अनार में फाइबर भी प्रचुर मात्रा में होता है जो गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद करता है। इसके अलावा अनार में विटामिन के की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

स्ट्रॉबेरी

विटामिन सी से भरपूर स्ट्रॉबेरी का सेवन करने से गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही इसका सेवन करने से ब्लड प्रैशर को भी कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है, इसके अलावा स्ट्रॉबेरी में मौजूद पोटैशियम और मैगनीज़ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

तो यह हैं कुछ फल जी का सेवन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने और गर्भ में शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्वों की मात्रा को पूरा करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में खून बढाने के उपाय

प्रेगनेंसी में खून की कमी

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों से गुजरती है। ऐसे में कुछ महिलाओं को खून की कमी यानी एनीमिया के कारण परेशान होना पड़ सकता है। और गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी होती है तो इसके कारण गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियां अधिक बढ़ सकती है। जैसे की महिला बहुत ज्यादा थकान व् कमजोरी का अनुभव कर सकती है, सिर में दर्द व् चक्कर का अधिक अनुभव होना, शिशु के विकास में कमी आना आदि। साथ ही खून की कमी के कारण डिलीवरी के दौरान भी महिला को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला के लिए जरुरी होता है की समय रहते इस समस्या का समाधान किया जाए ताकि खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में खून की कमी के लक्षण

  • स्किन और नाखूनों का पीला पड़ना।
  • सांस लेने में दिक्कत का सामना करना।
  • बहुत ज्यादा थकान व् कमजोरी का अहसास होना।
  • सिर दर्द, चक्कर, बॉडी में अन्य हिस्सों में दर्द की समस्या का अधिक रहना, आदि।

प्रेगनेंसी में खून की कमी को दूर करने के उपाय

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी से परेशान न हो इसके लिए डॉक्टर्स गर्भवती महिला को अपने आहार का खास ध्यान रखने के साथ आयरन की दवाई लेने की सलाह भी देते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि चाहती है की आयरन की कमी के कारण महिला को किसी तरह की परेशानी न हो तो महिला को डॉक्टर की सलाह का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी को दूर करने के लिए क्या क्या करना चाहिए।

सूखे मेवे

यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी हो जाती है तो महिला को सूखे मेवे यानी काजू, बादाम, खजूर, किशमिश, अखरोट, आदि का सेवन करना चाहिए। क्योंकि सूखे मेवे आयरन का एक बेहतरीन स्त्रोत होते हैं जो गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियां जैसे की पालक, मेथी, ब्रोकली, पत्तागोभी, में भी आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है और आयरन के साथ इसमें अन्य पोषक तत्व भी भरपूर होते हैं। और यदि गर्भवती महिला हरी सब्जियों का सेवन भरपूर करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला के शरीर में आयरन को पूरा करने में मदद मिलती है। इसके अलावा हरी सब्जियों का सेवन करते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए की इन्हे अच्छे से धोने के बाद ही इस्तेमाल में लाना चाहिए।

चुकंदर

लाल लाल चुकन्दर में आयरन बहुत अधिक मात्रा में मौजूद होता है जो प्रेग्नेंट महिला में खून की कमी की समस्या को दूर करने के लिए फायदेमंद होता है। इसीलिए नियमित गर्भवती महिला को सलाद, फलों के साथ चुकंदर को मिलाकर इसके जूस का सेवन जरूर करना चाहिए।

फल

सेब, अनार, तरबूज जैसे फलों में भी आयरन की अधिकता बहुत ज्यादा होती है। और गर्भवती महिला यदि इनका सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। खासकर एक गिलास अनार के रस का सेवन या एक अनार के दाने का सेवन यदि गर्भवती महिला नियमित करती है तो गर्भवती महिला को खून की कमी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नॉन वेज

यदि गर्भवती महिला नॉन वेज का सेवन कर लेती है तो इससे बॉडी में आयरन की कमी को बहुत जल्दी पूरा करने में मदद मिलती है। क्योंकि नॉन वेज में आयरन, फोलेट, विटामिन सी, आदि भरपूर मात्रा में विद्यमान होते हैं। जो गर्भवती महिला को आयरन की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचाने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करते हैं।

मसाले

खाने के स्वाद को बढाने वाले कुछ मसालें भी गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। जैसे की अजवाइन, जीरा आदि आयरन के बेहतरीन स्त्रोत होते हैं।

अन्य सब्जियां

केवल हरी सब्जियां ही नहीं बल्कि, आलू, टमाटर, गाजर, शकरकंद, जैसी साब्जियां भी आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होती है ऐसे में गर्भवती महिला बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए इनका भरपूर सेवन कर सकती है।

ब्राउन राइस

ब्राउन राइस में भी आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है, जो गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है। ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो अपनी डाइट में ब्राउन राइस को भी शामिल कर सकती है। जिससे आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

दालें व् फालियाँ

जो गर्भवती महिलाएं नॉन वेज का सेवन नहीं करती है वो महिलाएं बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए दालें व् फलियों का भरपूर सेवन कर सकती है। क्योंकि इन्हे अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में शामिल करने से भी गर्भवती महिला को बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

व्यायाम

बॉडी की सभी क्रियाओं के बेहतर तरीके से काम करने से भी बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम भी करना चाहिए, क्योंकि व्यायाम करने के लिए ऑक्सीजन की मात्रा बॉडी में अधिक चाहिए होती है। और ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए बॉडी में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ता है जिससे गर्भवती महिला को बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को पर्याप्त बनाए रखने में मदद मिलती है। तो इसीलिए केवल खान पान से ही नहीं बल्कि गर्भवती महिला हल्का फुल्का व्यायाम करके भी इस समस्या से निजात पा सकती हैं, साथ ही इससे बॉडी में ब्लड फ्लो को भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

आयरन की कमी से बचने के लिए इन टिप्स का ध्यान रखें

यदि आपके शरीर में आयरन की कमी है तो आपको अपनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करने से बचना चाहिए जो बॉडी में आयरन को अवशोषित होने से रोकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की आयरन की कमी से बचने के लिए किन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।

  • चाय, कॉफ़ी, आदि कैफीन युक्त पदार्थो का सेवन करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए।
  • किसी भी तरह के नशे जैसे वाइन, शराब, आदि का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।
  • ज्यादा तेलीय, मसालेदार, जंक फ़ूड का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए।
  • कोल्ड ड्रिक्स का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं कारण चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे गर्भवती महिला को खून की मात्रा को बॉडी में पर्याप्त बनाए रखने में मदद मिलती है। और साथ ही खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

चेहरे पर तिल का क्या महत्व है?

चेहरे पर तिल का क्या महत्व है, चेहरे के कौन से हिस्से का तिल अच्छा होता है, चेहरे का कौनसा तिल अच्छा नहीं होता, चेहरे पर तिल क्यों होते है, चेहरे पर तिल से भविष्य ज्ञात करें, चेहरे के तिल से स्वभाव, चेहरे पर तिल का कारण, चेहरे के दायीं ओर तिल, होंठ के ऊपर तिल, माथे पर तिल का कारण और फल, आंख पर तिल, गाल पर तिल का महत्व, कौन से तिल का क्या महत्व है

किसी भी व्यक्ति के लिए उनके चेहरे की सुंदरता काफी महत्वपूर्ण होती है फिर चाहे वो महिलाएं हो या पुरुष। अपनी खूबसूरती को बढ़ाने के लिए वे सभी तरह तरह के प्रयास करते है। लेकिन बहुत से लोग ऐसे होते है जिनके चेहरे पर काला तिल होता है। जो देखने में तो खूसबूरत लगता ही है साथ साथ आपके चेहरे की शोभा भी बढ़ाता है।

लेकिन इसके अलावा भी कुछ है जिसके बारे में आप और हम नहीं जानते। जी हां, जहां एक तरफ चेहरे पर तिल होना सुंदरता को बढ़ाता है वहीं दूसरी ओर इनका भाग्य और भविष्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार शरीर और चेहरे पर मौजूद एक-एक तिल का अपना एक महत्व और कारण है। जिसके बारे में आम लोग नहीं जान सकते।

जहां एक तरफ चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर मौजूद तिल आपके स्वाभाव को दर्शाता है वहीं दूसरी ओर शरीर के तिल आपके भविष्य के बारे में बताते है। इसीलिए आज हम आपको चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर मौजूद तिलों का महत्व बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आप भी जान सकेंगे की आपके चेहरे पर मौजूद इस टिल का क्या महत्व है? और इससे आपके भाग्य में क्या लाभ होगा?

चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर तिल का महत्व 

भौहों के बीच में

अगर किसी व्यक्ति के दोनों भौहों के बीच में तिल हो तो वो बहुत बुद्धिमान होता है। ऐसे लोग अपनी बुद्धि और चातुर्य से कार्यों में सफलता और धन प्राप्त करते है। उन्हें अपने कार्य पूर्ण करने में कोई परेशानी नहीं आती।

बायीं आंख के कोने पर

अगर किसी व्यक्ति के बायीं आंख के कोने पर तिल है तो वे बहुत भावुक होते है। ऐसे लोगों को दूसरों से जलन की भावना रहती है।

दायीं आंख की पलक

जिन लोगों की दायीं आंख की पालक पर तिल होता है वे बौद्धिक क्षमता के मामलों में अन्य व्यक्तियों से बहुत आगे होते है। इस तरह के व्यक्तियों को बुद्धि से जुड़े कार्यों को करने में बहुत आनंद मिलता है।

दायीं आँख के नीचे

जिन व्यक्तियों के दायीं आंख के नीचे तिल होता है, वे बहुत कामुक होते है। प्रेम और उससे जुड़े मामलों में ये हमेशा दूसरों से अधिक भावुक होते है। ऐसे लोगों को दूसरों की मदद करना बहुत अच्छा लगता है।

दायीं आंख के नीचे और कान के पास

ऐसे व्यक्ति जिनकी दायीं आंख के नीचे और कान के पास तिल होता है, उनका स्वभाव बहुत ही रहस्यमयी होता है। ऐसे लोगों को समझ पाना काफी मुश्किल होता है।

नाक के प्रारंभिक हिस्से में

अगर किसी व्यक्ति के नाक के प्रारंभिक स्थान पर बीचों-बीच तिल हो तो ऐसे लोग कल्पनाशील होते है। इस तरह के लोग किसी भी कार्य को रचनात्मक ढंग से करना पसंद करते है। सोते जागते ये कल्पनाएं करते रहते है।

बायीं आंख के नीचे और नाक के पास

इस तरह के लोगों को दूसरों से बहुत जलन होती है। वे अपने बारे में अधिक सोचते है और लोगों से जलते है।

बायीं आंख के नीचे

अगर किसी व्यक्ति की बायीं आंख के नीचे तिल हो तो वे कामुक स्वभाव के होते है। और इनका जीवन साथी इन्हे इस स्वभाव को पहचान लेता है।

बायीं आंख के कोने

जिन व्यक्तियों के बायीं आंख के कोने के पास तिल होता है, वे अपने प्रेमी से लड़ाई-झगड़ा करते रहते है। इस तरह के लोग अपने प्रेमी को पाने के लिए अपराध भी कर सकते है।

बायीं आंख की पलक

ऐसे व्यक्तियों का दिमाग बहुत तेज़ होता है। अपनी नीतियों और चातुर्य से मुश्किल कामों में भी सफलता प्राप्त कर लेते है।

नाक पर

जिस व्यक्ति के नाक पर तिल होता है वे बहुत अधिक यात्राएं करता है। ऐसे लोगों के प्रेम संबंधों में काफी परेशानियां आती है।

दाहिने गाल की हड्डी

ऐसे लोग भावुक होते है। लेकिन कई बार भावनाओं के कारण ये बड़ी परेशानियों में भी फंस सकते है।

दाहिने गाल

दाहिने गाल पर तिल वाले लोग बहुत कामुक होते है। इनका समय समय पर अपने जीवन साथी के साथ मन-मुटाव रहता है।

दायीं ओर नाक के ठीक नीचे

इन व्यक्तियों के विचार बहुत श्रेष्ट होते है। साथ ही इनका स्वभाव बहुत रहस्यमयी होता है। ये अपने राज को किसी के सामने जाहिर नहीं होने देते। इनका भाग्य बहुत अच्छा होता है।

नाक के बीच में नीचे की ओर

इस तरह के व्यक्ति आजादी का जीवन जीना अधिक पसंद करते है। इन लोगों को यात्रायें करना बहुत अच्छा लगता है।

बायीं ओर होंठ के ऊपर

ये लोग अपनी संतान से बहुत प्रेम करते है। इन व्यक्तियों की उदारता के कारण घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। ऐसे लोगों पर विश्वास किया जा सकता है।

नाक पर बायीं ओर

ऐसे लोग हर कार्य को बड़े ही कलात्मक तरीके से करते है। कई बार ये अपने कार्यों से औरो को चौका भी देते है। इनके बहुत से प्रेम संबंध हो सकते है लेकिन शादी के बाद वे अपने जीवन साथी के प्रति पूरी निष्ठा निभाते है।

दायीं ओर होंठ के कोने पर

ऐसे व्यक्ति प्रेमी स्वभाव के होते है। जीवन साथी के प्रति ईमानदार रहे है। हां कभी-कभी इनके स्वभाव में ईर्ष्या आ जाती है।

दायीं ओर होंठ के ठीक ऊपर

इस तरह के लोग अपने हर कार्य को सही ढंग से करते है। ये बुद्धिमान होते है साथ ही इनकी कल्पनाशक्ति भी अच्छी होती है।

बाएं गाल की हड्डी और कान के पास

जिन लोगों के चेहरे के इस हिस्से पर तिल होता है उन्हें समझना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे व्यक्ति योजनाकार होते है।

बाएं गाल की हड्डी पर और कान से थोड़ा दूर

ऐसे लोगों को बौद्धिक क्षमता बहुत अच्छी होती है। इन्हे एक तरह का जीवन जीना अच्छा नहीं लगता है। समय समय पर बदलाव इनकी आदत होती है और यही इन्हे अच्छा लगता है।

बायीं ओर होंठ के कोने पर

ऐसे व्यक्ति कामुक स्वभाव के होते है जिसके कारण उनके जीवन में कई बार बहुत सी परेशानियां भी आती है।

चिन (ठुड्डी) पर बायीं ओर

ऐसे लोग धर्म क्षेत्र में रूचि रखने वाले होते है। ऐसे लोगों को भौतिक सुख और सुविधाएं बहुत आकर्षित करती है।

होंठ के नीचे

इन लोगों को जीवन भर असुरक्षा का भाव परेशान करता है। इन्हे अपनी सफलता पर संदेह रहता है। स्वास्थ्य के मामले में भी इन्हे सतर्कता बरतनी चाहिए।

ठुड्डी पर

ऐसे लोग परंपरावादी होते है। ये लोग अपने परिवार को सुखी रखने का प्रयास रखते है। इनके संबंध हमेशा स्वस्थ रहते है। वैसे तो ये शांत ही रहते है लेकिन कभी कभार इन्हे गुस्सा आ ही जाता है। किसी भी कार्य को पूरी लग्न और ईमानदारी के साथ पूर्ण करते है।

प्रेगनेंसी में पेट दर्द होने पर क्या करें?

प्रेगनेंसी में पेट दर्द

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करती है, जैसे की उल्टियां आना, बॉडी पेन, पेट से जुडी समस्या, तनाव, सफ़ेद पानी का गिरना, मॉर्निंग सिकनेस, थकान व् कमजोरी, मूड स्विंग्स, भूख में कमी या भूख ज्यादा लगना आदि और यह लक्षण प्रेगनेंसी के दौरान सामान्य होते है। इन्ही शारीरिक परेशानियों में पेट दर्द का होना भी एक आम समस्या है, और ज्यादातर महिलाएं इस परेशानी से जूझ सकती है। प्रेग्नेंट महिला के पेट में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे की पेट की मांसपेशियों में खिंचाव, वजन का बढ़ना, गर्भाशय का आकार बढ़ना, कब्ज़ व् एसिडिटी, सम्बन्ध बनाने के कारण, भूख लगने के कारण, आदि। ऐसे में हल्के फुल्के पेट दर्द के कारण गर्भवती महिला को बिल्कुल भी घबराने की जरुरत नहीं होती है।

गर्भावस्था में पेट दर्द होने पर क्या करें

यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान पेट दर्द होने के कारण परेशानी का अनुभव कर रही है तो घर में ही कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके इससे आसानी से आराम पाया जा सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले पेट दर्द से बचने के लिए गर्भवती महिला को क्या कर सकती है।

सिकाई

पेट के जिस हिस्से में दर्द महसूस हो वहां पर गर्म पानी की बोतल से सिकाई करनी चाहिए, इससे आपको आराम पाने में मदद मिलती है। साथ ही यदि दर्द का कारण मांसपेशियों में खिंचाव होता है तो मांसपेशियों को भी सिकाई की मदद से आराम पहुंचाने में मदद मिलती है।

हल्का व्यायाम

गर्भावस्था के दौरान आराम करना बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन साथ में हल्का व्यायाम प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ गर्भवती महिला को एक्टिव रहने में मदद करता है। ऐसे यदि प्रेग्नेंट महिला को हल्का पेट में दर्द रहता है तो इससे निजात पाने के लिए आपको थोड़ा व्यायाम जरूर करना चाहिए इससे बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर होने के साथ मांसपेशियों को रिलैक्स महसूस करवाने में मदद मिलती है जिससे पेट दर्द के साथ बॉडी के अन्य अंगो में होने वाले दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है। खासकर खाना खाने के बाद वाक जरूर करें ताकि भोजन को अच्छे से पचने में मदद मिल सके जिससे पेट दर्द जैसी समस्या से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिल सके।

फाइबर

कब्ज़ व् एसिडिटी की समस्या होने के कारण भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कब्ज़ व् एसिडिटी से राहत के लिए गर्भवती महिला को ऐसा आहार लेना चाहिए जिसमें फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद हो। क्योंकि फाइबर युक्त आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला को कब्ज़ व् एसिडिटी जैसी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है और साथ ही पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

तरल पदार्थ

प्रेग्नेंट महिला को तरल पदार्थ को भरपूर मात्रा में लेना चाहिए, क्योंकि पानी का बॉडी में भरपूर मात्रा में होना बॉडी में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। साथ ही इसके कारण डीहाइड्रेशन जैसी परेशानी से भी बचे रहने में मदद मिलती है, और साथ ही पेट दर्द की समस्या को कम करने में भी मदद मिलती है। और तरल पदार्थ की कमी को पूरा करने के लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ नारियल पानी, घर में बने ताजे जूस, निम्बू पानी आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

बेल्ट

पेट का आकार बढ़ने के कारण भी गर्भवती महिला को पेट में दर्द की अनुभूति हो सकती है ऐसे में महिला को मेटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि इससे पेट भार बढ़ने के बाद भी महिला को परेशानी नहीं होती है, क्योंकि बेल्ट पेट के भर को संभालने में मदद करती है जिससे पेट दर्द की समस्या से आराम पाने में मदद मिलती है।

थोड़ा थोड़ा खाएं

भोजन को सही तरीके से न लेने के कारण भी गर्भवती महिला को पाचन क्रिया से जुडी समस्या हो सकती है जिसके कारण पेट में दर्द का अहसास हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को दिन में बड़े बड़े मील लेने की बजाय थोड़े थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ हेल्दी खाना चाहिए इससे भोजन को आसानी से पचने में मदद मिलती है जिससे पेट दर्द की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

आराम लें

सारा दिन एक ही पोजीशन में बैठे रहने, बॉडी को आराम न देने के कारण भी गर्भवती महिला को पेट, कमर आदि में दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को पेट दर्द की समस्या से राहत पाने के लिए बॉडी को आराम भी जरूर देना चाहिए।

तनाव

गर्भवती महिला का तनाव लेना भी पेट दर्द या बॉडी में होने वाले अन्य दर्द का कारण हो सकता है, ऐसे में गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए, गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए, पेट या बॉडी के किसी अन्य पार्ट में दर्द से आराम के लिए तनाव लेने से बचना चाहिए।

सोते समय रखें ध्यान

पेट के जिस हिस्से में आपको दर्द हो उसकी उल्टी तरफ करवट लेकर थोड़ा आराम करें, और पेट के बल बिल्कुल न सोएं। ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को पेट में दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में पेट दर्द होने पर डॉक्टर से कब मिलें

  • पेट में ऐंठन अधिक महसूस होने पर।
  • यदि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में पेट दर्द महसूस हो और बिल्कुल वैसे ही जैसे की माहवारी के दौरान होता है तो यह गर्भपात का संकेत हो सकता है, ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
  • पेट में दर्द होने के साथ ब्लीडिंग की समस्या हो।
  • गर्भावस्था की आखिरी तिमाही में पेट में दर्द अधिक हो तो यह प्रसव का संकेत हो सकता है, और दर्द के साथ प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी की तरह तरल पदार्थ अधिक आये तो इसका मतलब होता है की पानी की थैली फट गई है ऐसे में बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर के पास पहुँच जाना चाहिए।
  • पेट में अधिक दर्द का होना एक्टोपिक प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है इसे भी अनदेखा न करते हुए समय से ट्रीटमेंट लेना चाहिए।

तो यह हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करके आप आसानी से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले पेट दर्द की समस्या से निजात पा सकती है। साथ ही यदि ऊपर दिया गया कोई भी लक्षण महसूस हो तो बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर के पास पहुँच जाना चाहिए ताकि किसी भी तरह की परेशानी से गर्भवती महिला को बचने में मदद मिल सके, और गर्भ में पल रहे शिशु को भी इसके कारण कोई परेशानी न हो।

कम और ज्यादा सोने से गर्भ पर क्या प्रभाव पड़ता है?

नींद का समय वह समय होता है जब आपका शरीर अपने आपको खुद से रिसेट करता है और अपनी एनर्जी को वापस रिचार्ज करता है। अच्छी नींद लेने से हमारी इम्युनिटी भी स्ट्रांग होती है। गर्भवस्था में आराम करना बहुत ही जरुरी हो जाता है जब की हमारे शरीर को हर प्रकार से ज्यादा काम करना पड़ता है। ये सही है के अच्छी और सेहतमंद नींद से हमे बहुत से फायदे मिलते है पर आपको यह जानकार हैरानी होगी की इसी नींद से गर्भवती महिला को बहुत से नुकसान भी हो सकते है। आज इस लेख में हम जानेंगे के गर्भवस्था में बहुत अधिक और जरुरत से कम सोने के क्या क्या नुकसान होते है।

गर्भावस्था में कम सोने से नुकसान

गर्भावस्था में हम जितने खुश होते है उतना ही हमारा तनाव बढ़ता है। इस समय में हमे बहुत सारे शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल बदलावों से निकलना पड़ता है। डॉक्टरों के मुताबिक 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को नींद से जुडी समस्याएँ होती है। आइये जानते है कम सोने क्या नुकसान होते है।
  • प्रेगनेंसी में हम जितना सोते है वह सिर्फ हमे नहीं बल्कि बच्चे को भी इफ़ेक्ट करता है। गर्भावस्था में कम सोने डिलीवरी के समय भी बहुत से कम्प्लीकेशन हो सकते है।
  • कम समय सोने से गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर और किडनी पर भी असर पड़ता है जिसके कारण समय से पहले डिलीवरी के होने का खतरा लगा रहता है। इस स्थिति को प्रीक्लैम्प्सिआ के नाम से भी जाना जाता है।
  • जब हम प्रेग्नेंट होते है, तो सबसे पहले हमे थकान महसूस होने लगती है। सोने से इसी थकान को दूर करने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के अंतिम शरण में भी हमारी थकान बहुत बढ़ जाती है। इस समय में शिशु का विकास होने लगता है और पेट बाहर की और आता है जिससे पूरे शरीर में तनाव महसूस होता है। इस समय भी अच्छी तरह सोना जरुरी हो जाता है
  • सोना हमारे लिए एक फैसिलिटी नहीं है बल्कि हमारी शरीर की जरुरत है।
  • गर्भवती महिला का कम सोना उसके और शिशु के लिए खतरनाक समस्या ला सकता है जैसे की हाइपरटेंशन, प्रीक्लैम्प्सिआ, गेसटीशनल डायबिटीज, पलमोनोरी हाइपरटेंशन आदि।
  • कम सोने से गर्भ तक सही से ऑक्सीजन नहीं पहुंचती जिस कारण शिशु का अच्छे से विकास नहीं हो पाता है।
  • एक रिसर्च के अनुसार जो महिलाये 6 घंटे से कम की नींद लेती है उन्हें सी सेक्शन डिलीवरी के लिए जाना पड़ता है।

गर्भावस्था में ज्यादा सोने से क्या नुकसान होता है?

हमे गर्भावस्था में स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त नींद लेना जरुरी होता है। अच्छे से सोने से प्रेगनेंसी में कमजोरी, थकान, तनाव, मूड स्विंग्स, जैसी परेशानी से निजात में मदद करती है। इसके अलावा शिशु के विकास में भी मदद मिलती है। पर अच्छे से सोने का मतलब यह नहीं की पूरा समय हम सोने में ही बता दे। क्योकि किसी भी चीज की अधिकता नुकसान पहुंचाती है। आइये जानते है प्रेगनेंसी में ज्यादा सोना से होने वाले नुक़्सानो के बारे में।
  • गर्भवस्था में वजन बढ़ना जरुरी होता है, परन्तु यदि वजन ज्यादा बढ़े तो इसके कारण परेशानी हो सकती है।  गर्भवती महिला अगर सारा दिन सोती है तो इससे शरीर पर वसा जमने लगती है, और वजन ज्यादा बढ़ने से बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
  • वजन बढ़ने से प्रेगनेंसी में महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या भी होती है। यदि महिला को यह समस्या हो जाती है तो यह गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचाती है। हाई ब्लड प्रेशर होने के कारण डिलीवरी के समय भी समस्याए हो सकती है। ब्लड प्रेशर ज्यादा होने से समय से पूर्व डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।
  • ज्यादा सोना से प्रेगनेंसी के दौरान आलस भी बढ़ता है, किसी काम को करने का मन नहीं करता है, यहां तक की जो गर्भवती महिला और शिशु के लिए जरुरी है महिला उस काम से भी परहेज करने लगती है।
  • अधिक सोने से शरीर में दर्द महसूस होता है, जिसके कारण शरीर को बिना कुछ काम किये ही हमेशा थकान महसूस होती है। ऐसे में कमजोरी महसूस होना भी आम बात होती है।
  • शिशु का गर्भ में वजन बढ़ने के कारण पीठ में हल्के फुल्के दर्द का रहना आम बात होती है, लेकिन यदि महिला सारा दिन सोती है तो पीठ में ज्यादा दर्द की समस्या हो सकती है, जिसके कारण महिला को उठने बैठने, यहां तक की सोने में भी परेशानी होने लगती है।
  • अधिक सोने के लिए मस्तिष्क पर भी बुरा असर पड़ता है, जिसके कारण तनाव महसूस होता है, और गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए ही तनाव बहुत नुकसानदायक होता है।
गर्भावस्था के दौरान ज्यादा और कम सोने से होने वाले दोनों नुक़्सानो के बारे में हमने आपको बताया है। ध्यान रखिये किसी भी चीज की कमी या अधिकता दोनों ही नुकसानदेह होती है। एक गर्भवती महिला को रात में 8 से 9 घंटो की पूर्ण स्वस्थ नींद लेनी चाहिए और हो सके तो दिन में भी 2 घंटे की झपकी लेनी अच्छी सेहत के लिए फायदेमंद रहती है। नींद कम आने पर आपको संतुलित भोजन करना चाहिए इसके आलावा थोड़ा बहुत योग और हल्की फुलकी एक्सरसाइज भी करनी चाहिए जससे आपको स्वस्थ नींद लेने में मदद लिए। और यदि आपको ज्यादा नींद आती हो तो अपनी नींद पर रोक लगाए और सुबह जल्दी उठकर मॉर्निंग वाक करे और योगा करे। इसके आलावा कम सोने के लिए ज्यादा हैवी भोजन का सेवन ना करें। इन सभी उपाय के बावजूद आपको बहुत कम या बहुत ज्यादा नींद आती हो तो अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

गर्भावस्था में अखरोट खाने के फायदे

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गर्भावस्था के दौरान हर गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर चीजें खाने की सलाह दी जाती है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। और ड्राई फ्रूट्स में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। तो आज हम आपको अखरोट खाने के कुछ फायदे बताने जा रहे हैं जो न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के भी शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करते हैं।

एनर्जी से भरपूर रखते हैं

विटामिन्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स, मिनरल्स, ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर अखरोट का सेवन करने से गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं। और यह पोषक तत्व गर्भनाल से शिशु तक भी पहुँचते हैं। जिससे की गर्भ में पल रहे शिशु और गर्भवती महिला दोनों को ही एनर्जी मिलती है, और महिला हमेशा ऊर्जा से भरपूर महसूस करती है।

इम्युनिटी बढ़ती है

प्रेगनेंसी के दौरान इम्युनिटी को बढ़ाने में भी अखरोट का सेवन करने से बहुत फायदा मिलता है। क्योंकि अखरोट में कॉपर, पॉलीफिनॉल, विटामिन इ व् अन्य एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते है। और इम्युनिटी के बढ़ने से गर्भ में पल रहे शिशु और गर्भवती महिला को संक्रमण से बचे रहने में फायदा होता है।

वजन नियंत्रित रहता है

अखरोट में मौजूद फाइबर गर्भवती महिला को वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे प्रेगनेंसी में शुगर, ब्लड प्रैशर, कोलेस्ट्रॉल जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

तनाव कम होता है

बॉडी में लगातार हो रहे हार्मोनल बदलाव और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली शारीरिक परेशानी के कारण महिलाएं तनाव में आ सकती है। ऐसे में महिला यदि तनाव में रहती है तो इसके कारण महिला के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ने के साथ शिशु की सेहत पर भी असर पड़ता है। ऐसे में गर्भवती महिला को तनाव से मुक्त रहने के लिए नियमित अखरोट का सेवन करना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास और महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

सूजन कम करता है

कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान कॉम्प्लीकेशन्स होने के कारण आंतरिक सूजन जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में अखरोट का सेवन करने से आंतरिक सूजन को कम करने के साथ ब्लड फ्लो को बेहतर करने में भी मदद मिलती है, जिससे शिशु तक भी ब्लड सर्कुलेशन अच्छे से होता है।

एलर्जी से बचाता है

बच्चे को किसी भी आहार के कारण फ़ूड एलर्जी न हो इससे बचने के लिए अखरोट बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि अखरोट में फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं। और इससे शिशु की ग्रोथ भी अच्छे से होती है।

बेहतर नींद के लिए

गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए और शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर तरीके से करने के लिए गर्भवती महिला का नींद को पर्याप्त मात्रा में लेना बहुत जरुरी होता है। और गर्भवती महिला यदि अखरोट का सेवन करती है, तो उनके शरीर में मेलाटोनिन नाम का एक हॉर्मोन बनता है जो गर्भवती महिला को अच्छी और गहरी नींद लेने में मदद करता है।

गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए

शिशु के बेहतर शारीरिक विकास जैसे ही हड्डियों की मजबूती के लिए और दिमाग को स्ट्रांग करने के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अखरोट का सेवन जरूर करना चाहिए।

पाचन क्रिया को बेहतर करता है

फाइबर की मात्रा प्रचुर होने के कारण भोजन को आसानी से पचाने और मेटाबोलिज्म को बेहतर करने के में भी अखरोट का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। पाचन क्रिया बेहतर होने के कारण महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पेट सम्बन्धी समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करता है

अखरोट को खाने से उसमे मौजूद पोषक लवण कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कण्ट्रोल करने में मदद करते हैं। जिसके कारण प्रेगनेंसी के समय होने वाली हाई ब्लड प्रैशर की समस्या को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

महिला की ख़ूबसूरती को बरकरार रखता है

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं को बालों के झड़ने व् स्किन से सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन अखरोट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को साफ़, सूंदर और चमकदार बनाएं रखने के साथ दाग धब्बे झुर्रियों जैसी परेशानी से बचाव करने में भी मदद करते हैं, और बालों को पोषण देकर उनकी मजबूती को भी बनाएं रखते हैं।

तो यह हैं कुछ अनोखे फायदे जो आपको प्रेगनेंसी के दौरान अखरोट का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में आपको गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए अखरोट का सेवन जरूर करना चाहिए।

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गर्भावस्था में अखरोट खाने के फायदे

कैसे भगाएं घरेलू मक्खियाँ? मक्खी भगाने के घरेलु उपाय

साफ़ सुथरा और महकता हुआ घर किसे अच्छा नहीं लगता। लेकिन कई बार कुछ छोटे जीवों के कारण यह सफाई पूरी तरह बेकार हो जाती है। आप कितनी ही सफाई क्यों न कर लें ये घर में आकार पूरी सफाई को खराब कर देते है। मक्खियां भी इन्ही जीवों में से एक है। जिनका घर में होना काफी इरिटेटिंग होता है। वैसे तो मक्खियां अक्सर गंदगी और गीली जगहों पर ही बैठना अधिक पसंद करती है। लेकिन साफ़ सफाई भी इन्हें काफी भाती है इसीलिए गंदगी वाली जगह से ये सीधे लोगो के घरों में घुस जाती है।मक्खियों को दूर करने के उपाय

मौसम चाहे गर्मियों का हो या बरसात का मक्खियों का आतंक कम नहीं होती। गर्मियों में बढती गर्मी के कारण तो सर्दियों में बढती नमी के कारण ये अपने बिल छोड़कर इधर उधर घुमने लगती है। ऐसे तो सर्दियों में भी इक्की-दुक्की मक्खी देखने को मिल जाती है लेकिन इस समय ये इतना परेशान नहीं करती जितना की गर्मियों और बरसात के मौसम में करती है।मक्खियों को बीमारी फैलाने वाले जीवों में से सबसे प्रभावी माना जाता है क्योंकि ये पहले बाहर की कचरे और गंदगी वाली जगहों पर बैठती है और बाद में घर में घुसकर खाने की चीजों पर बैठकर उन्हें दूषित कर देती है।

भले ही ये मक्खियां काटती नहीं है लेकिन इनका शरीर के आस पास मंडराना और कानों के पास भिनभिना काफी अजीब लगता है। विज्ञान के मुताबिक मक्खियों को बीमारी फैलाने वाले सबसे खतरनाक जीवों में से एक माना जाता है क्योंकि ये बहुत जल्दी बिमारियों को फैलाती है। इसीलिए उन्हें घर से दूर ही रखना चाहिए। लेकिन कई बार बहुत से उपाय करने के बाद भी ये मक्खियां घर से नहीं जाती। इसलिए आज हम आपको घर की मक्खियां भगाने के आसान और घरेलू उपाय बता रहे है। जिनकी मदद से इन मक्खियों को बड़ी ही आसानी से घर से भगाया जा सकता है।

घरेलू मक्खियां भगाने के घरेलू उपाय और तरीके :-

1. कपूर :

पूजा में तो कपूर का इस्तेमाल सभी करते है लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से घरेलू मक्खियों को भी बड़ी आसानी से भगाया जा सकता है। जी हां, कपूर की गंध काफी तेज होती है जिसे कोई भी छोटा जीव सहन नहीं कर पाता। मक्खियों के लिए भी यह गंध बहुत असहनीय होती है। अगर आपके घर में भी बहुत मक्खियां है तो उसके लिए थोडा सा कपूर जलाकर पुरे कमरे में घुमा दें। इसकी महक से कुछ ही देर में मक्खियां भाग जाएंगी।

2. यू.वी ट्रैप (Ultra Violet Trap) :UV fly trap

अल्ट्रा वायलेट ट्रैप एक तरह की लाइट होती है जो मक्खियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। और जैसे ही मक्खियां उस लाइट पर बैठती है तो तुरंत मर जाती है। मक्खियों को भगाने के लिए ये तरीका बहुत ही अच्छा उपाय है। हां, ये तरीका थोडा महंगा जरुर है लेकिन बहुत कारगर है।

3. तुलसी :

तुलसी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ और भी बहुत से कार्यों के लिए लाभकारी होती है। यह एक एंटी बैक्टीरियल पौधा है जो मक्खी मच्छर जैसे छोटे जीवों को घर में घुसने से रोकता है। इसके लिए आपको अपने खिड़की और दरवाजें के बाहर तुलसी का पौधा लगाना होगा। वैसे आप चाहे तो टकसाल, लैवेंडर और गेंदे के पौधे का भी प्रयोग कर सकते है। ये भी मक्खी मच्छर को भगाने में बहुत लाभकारी होते है।

4. मोस्कीटो रैकेट :

मक्खियों के साथ साथ मच्छरों को भगाने के लिए भी ये उपाय बहुत कारगर है। इस तरह के रैकेट आपको बाजार में बहुत ही सामान्य सी कीमत पर आसानी से मिल जाएंगे। इनका इस्तेमाल करके घर के कोने कोने से मक्खियों को ढूंढ़कर भगाया जा सकता है। इस रैकेट के अगले हिस्से में करंट होता है जिसके सम्पर्क में आते ही मक्खी मर जाती है।

5. एसेंशियल आयल :

इस तेल के ऑयल्स फूलों और पत्तियों के अक्स को निकालकर तैयार किये जाते है। और वे तेल बहुत से कामों के लिए इस्तेमाल किये जाते है। लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से घर की मक्खियों को भी दूर भगाया जा सकता है। इनमे लैवेंडर, नीलगिरी, पुदीना और लेमनग्रास आदि एसेंशियल आयल सम्मिलित है। इनकी खुशबु घर की मक्खियों को भगाने में मदद करती है। प्रयोग के लीये इसे अपने अपने बेडरूम और रसोइघर में छिडकें। मक्खियां भाग जाएंगी।

6. ड्यूल कर्टन :

जी हां, आजकल ये फैशन होने के साथ-साथ जरुरी भी हो गया है। इसकी मदद से घर में पर्याप्त रोशनी तो आती ही है साथ-साथ मक्खियां भी दूर रहती है। इसमें खिडकियों पर दो पर्दें लगायें जाते है जिनमे से एक काफी पतला होता है और दूसरा मोटा। पतले वाला पर्दा रोशनी आने और मक्खियों को दूर करने में मदद करता है जबकि मोटा पर्दें सोते समय रोशनी को अवरुद्ध करने का काम करता है।

7. ग्रीन एप्पल सोप :

शोधों से पता चलता है की ग्रीन एप्पल सोप मक्खियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। और जब मक्खियां इसकी तरफ आकर्षित होती है तो उस पानी में डूब जाती है। अगर आपके घर में भी बहुत मक्खियां रहती है तो उसके लिए ग्रीन एप्पल लिक्विड सोप को एक जार में डालें और उसमे कुछ इंच तक पानी भर दें। महक से आकर्षित होकर मक्खियां उस पानी के पास आने लगेंगी और जब वे आए तो आप उन्हें अन्य तरीकों से खत्म कर सकते है।

8. एप्पल और लौंग :

अगर आपके घर में बहुत ज्यादा मक्खियां है तो आप इस उपाय की मदद भी ले सकते है। क्योंकि मक्खियों को लौंग की खुशबु बर्दाश्त नहीं होती और वे उस जगह को छोड़कर वहां से तुरंत भाग जाती है। उपाय के लिए एक सेब में कुछ लौंग दबा दें और इन्हें ऐसी जगह पर रख दें जहां मक्खियां आती हो। कुछ ही समय में साड़ी मक्खियां भाग जाएंगी।

9. लाल मिर्च स्प्रे :

छोटे से छोटे जीव को लाल मिर्च से परेशानी होती है। फिर चाहे वो चूहें हो या मक्खियां। इसके लिए थोडा सा लाल मिर्च पाउडर स्प्रे बोटल में डालें और उसमे थोडा पानी मिलाएं। उस बोतल बंद करके अच्छे से हिलाएं। अब इस मिश्रण का छिडकाव हर उस जगह करें जहां मक्खियां रहती है।

10. दालचीनी का इस्तेमाल करके भी मक्खियों को भगाया जा सकता है। क्योंकि मक्खियों को दालचीनी की महक पसंद नहीं होती। इसके लिए किचन में थोडा सा दालचीनी पाउडर या उसकी स्टिक रख दें। मक्खियां तुरंत भाग जाएंगी।


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