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डिलीवरी होने वाली है तो ये तैयारी कर लें

डिलीवरी होने वाली है तो ये तैयारी कर लें, प्रसव से पहले करें यह तैयारी, डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल ले जाने वाले बैग में क्या सामान रखें, Maternity bag checklist

गर्भावस्था का नौवा महिला लगते ही डिलीवरी किस समय हो इसका आप अंदाजा नहीं लगा सकते हैं, क्योंकि किसी भी समय आपको प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती है। ऐसे में आपको डिलीवरी होने से पहले की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, यानी की प्रसव के दौरान हॉस्पिटल में आपको क्या क्या सामान चाहिए उसका एक बैग तैयार करके रखना चाहिए। ताकि जब हॉस्पिटल जाने का समय आए तो आपको किसी तरह की परेशानी न हो और आप पहले से ही तैयार हो। तो आइये आज हम आपको बताते हैं की डिलीवरी होने से पहले आपको क्या क्या तैयारी करके रखनी चाहिए।

सभी रिपोर्ट्स

सबसे पहले महिला को अपने सभी जरूरी कागज़, जैसे की आधार कार्ड, या अन्य कोई आइडेंटिटी, प्रेगनेंसी की सभी रिपोर्ट्स, अल्ट्रासॉउन्ड की सभी रिपोर्ट, कैश पैसे आदि रख लेने चाहिए, क्योंकि हो सकता है की आपको इस सामान की डिलीवरी से पहले जरुरत पड़ जाए। साथ ही यदि कोई इंशोरेंस आदि है, क्रेडिट कार्ड आदि भी साथ में रख लेने चाहिए।

शिशु के लिए सामान

सबसे जरुरी चीज जिसका आपको खास ध्यान रखना चाहिए वो है शिशु के लिए कपडे, क्योंकि शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसे बाहर की हवा से बचाने के लिए आपको शिशु के लिए कपड़ो की जरुरत पड़ती है। इसके लिए आप शिशु के लिए पांच सात जोड़ी कपड़े, एक काम्बल, टोपी, जुराबे आदि रख लें।

डायपर

शिशु को आज कल जन्म के बाद ही सभी डायपर पहनाना शुरू कर देते हैं, ऐसे में आपको भी एक दिन में दस से बारह डायपर के हिसाब से आपको इन्हे बैग में रख लेना चाहिए, क्योंकि उस समय आपको इन सब चीजों के लिए घूमना नहीं पड़ेगा और हॉस्पिटल में यह सब चीजे जरुरी होती है। और यदि आप शिशु को डायपर नहीं पहनाती है तो आप उसके लिए कॉटन के कपडे आदि का इंतज़ाम करके रखें।

सैनिटरी नैपकिन

डिलीवरी होने के बाद महिला को तुरंत ब्लीडिंग होना शुरू हो जाती है, ऐसे में सैनिटरी नैपकिन को अपने पास रखना जरुरी होता है। हो सकता है इसे हॉस्पिटल वाले भी आपको दें, लेकिन फिर भी एक बार के लिए आपको घर से इसकी तैयारी करके जाना चाहिए, और एक नहीं बल्कि चार या पांच पैकेट आपको लेकर जाने चाहिए।

गर्भवती महिला के कपडे

गर्भवती महिला को डिलीवरी के बाद के लिए आरामदायक कपडे जैसे नाइटी, स्लीपर, ब्रा, पैंटी आदि रख लेनी चाहिए। ताकि आपको किसी तरह की परेशानी ना हो, साथ ही हो सके तो अपने साइज से एक नंबर बड़े अंडरगार्मेंट्स लेने चाहिए, क्योंकि यदि शिशु सिजेरियन डिलीवरी से होता है अधिक टाइट कपडे पहनने के कारण महिला को परेशानी हो सकती है। और साथ ही कॉटन के अंडरवियर का प्रयोग करें और इन्हे एक या दो नहीं बल्कि ज्यादा रखें क्योंकि इस दौरान ब्लीडिंग अधिक होने के कारण इनके खराब होने का खतरा भी ज्यादा होता है।

लोशन, लिप बाम, कंघी आदि

डिलीवरी के बाद महिला की स्किन सूखी होने लगती है, और डिलीवरी के बाद दो से तीन दिन महिला को हॉस्पिटल में रहना ही होता है, ऐसे में स्किन को पोषण देने के लिए और होंठो का सूखापन दूर करने के लिए महिला को लोशन, लिप बाम आदि को भी बैग में रख लेना चाहिए। इसके अलावा बालों के लिए कंघी व् बाल बाँधने का सामान आदि भी महिला को बैग में रख लेना चाहिए।

खाने पीने का सामान

आपको हॉस्पिटल ले जाने के लिए थोड़ा बहुत खाने का सामान भी साथ रखना चाहिए, जैसे की चिप्स, बिस्कुट, रस, आदि। इसके अलावा हॉस्पिटल जाते समय पानी की बोतल और ताजे फलों को भी जरूर साथ लेकर जाएँ।

हॉस्पिटल ले जाने के लिए अन्य सामान

हाथ धोने के लिए साबुन, तकिया, चादर, कम्बल, दुपट्टा या स्टॉल जिससे आप आसानी से ढककर शिशु को स्तनपान करवा सकें, गिलास, कटोरी, प्लेट, चम्मच, नमक, चीनी, चाक़ू, आदि आपको साथ लेकर जाने चाहिए।

तो यह है वो सामान जो महिला को डिलीवरी से पहले ही तैयार कर लेना चाहिए, ताकि जब भी महिला को ऐसा लगे की उसकी डिलीवरी का समय पास आने वाला है तो वह तुरंत बिना किसी दिक्कत के हॉस्पिटल में चली जाए।

पीरियड्स को कुछ दिनों के लिए टालना है? ये है घरेलू उपाय

मासिक धर्म एक ऐसी समस्या है जिसे 12 वर्ष की आयु से लेकर 50 वर्ष की आयु तक की सभी महिलाओं को झेलना पड़ता है। यह एक प्रकृतिक घटना है जो प्रत्येक माह होती है। मासिक धर्म की यही परेशानी महिलाओं को पुरुषों से अलग बनाती है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं को बहुत सी समस्यायों का सामना करना पड़ता है जैसे दर्द, ऐंठन और तनाव आदि। इस दौरान महिलाओं को धार्मिक स्थलों में प्रवेश की भी मनाही होती है।

कभी कभी होता है की, किसी लम्बी यात्रा पर जाना होता है या किसी खास फंक्शन या शादी में जाना होता है और ऐसे में अगर पीरियड्स आ जाए तो! इस बारे में सोचकर ही दिमाग खराब हो जाता है। इन परिस्थितियों से बचने के लिए महिलाएं बाजार में पीरियड्स टालने की तवाओं का इस्तेमाल करती है।

जो आपके पीरियड्स को तो टाल देती है लेकिन कई बार उन दवाओं साइड इफ़ेक्ट भी देखने को मिलते है। जो कई बार कई महीने तक आपको पीरियड्स नहीं होने देती। क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है तो इसे रोका तो नहीं जा सकता लेकिन हां, कुछ उपाय है जिनकी मदद से आप इन्हे कुछ समय के लिए आगे खिसका सकती है। क्योंकि ये उपाय पूरी तरह घरेलू उत्पादों पर निर्भर है तो साइड इफेक्ट्स के भी कोई चांस नहीं है।

पीरियड्स को आगे बढ़ने के घरेलू तरीके :-

1. अजवाइन की पत्तियां :ajwain-leaves

अजवाइन की पत्तियों को पानी में उबालकर पीने से भी पीरियड्स की डेट को डिले किया जा सकता है। प्रयोग के लिए अजवाइन की पत्तियों को पानी में डालकर उबाल लें। अब इसमें शहद डालें और पीरियड्स शुरू होने के 7 दिन पहले से पीना शुरू कर दें। आपकी डेट कुछ समय के लिए आगे हो जाएगी।

2. विनेगर :

दिन में तीन से चार बार एक ग्लास पानी में तीन चम्मच सिरका भी आपके पीरियड्स को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। जी हां, इसकी मदद से भी आप कुछ समय के लिए अपनी पीरियड डेट को आगे कर सकती है। ऊपर बताये गए तरीके से इसे पियें पीरियड्स डिले हो जाएंगे।

3. मसालेदार भोजन से बचें :

मसालेदार भोजन शरीर में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है जिसे पीरियड्स लेट की जगह जल्दी आ सकते है। तो क्योंकि आप अपने पीरियड्स को डिले करना चाहती है तो आपको पीरियड्स के एक सप्ताह पहले से मसालेदार भोजन को न कहना होगा। पीरियड्स को आगे बढ़ाने का ये तरीका सबसे सुरक्षित है।

4. आंवला :amla benefits

आंवले में विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसीलिए अगर आपका इसका सेवन करती है तो भी आपके पीरियड्स की डेट डिले हो जाएगी। साथ ही पीरियड्स में होने वाले दर्द में भी आराम मिलेगा। आप चाहे तो इसे सीधे खा सकती है या इसके रस का भी सेवन कर सकती है। यह आपके लिए लाभकारी रहेगा।

5. चावल का पानी :

अगर आप पीरियड्स को कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाना चाहती है, तो इसके लिए आप चावल के पानी का प्रयोग कर सकती है। ये आपके पीरियड्स को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। प्रयोग के लिए आप इसे सीधे पी सकती है या इसमें नींबू का रस भी मिला सकती है। इस पानी के लिए चावल को साफ़ पानी से धोएं और उस पानी को पी लें।

6. पुदीना :

सामान्यतौर पर हम इसका प्रयोग खाने का स्वाद बढ़ाने और उसमे खुशबु लाने के लिए करते है लेकिन क्या आप जानती है की ये आपकी इस समस्या को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। प्रयोग के लिए खीरे के रस के साथ पुदीना मिलाकर पियें। इसकी मदद से पीरियड्स की डेट कुछ आगे हो जाएगी। साथ ही उसमे होने वाले दर्द में भी आराम मिलेगा।

7. चने की दाल :

कुछ खास तरह के भोजन भी इस परेशानी को डिले करने में मदद करते है। जैसे की चने की दाल। इसकी मदद से भी आप अपने पीरियड्स को आगे बढ़ा सकती है। इसके लिए बाजार से चने की दाल लाएं और रोजाना इसे बनाएं। तब तक, जब तक आप अपने पीरियड्स को आगे बढ़ाना चाहती है।

गर्भवती महिला के क्या-क्या खाने से गर्भ में शिशु को नुकसान पहुँचता है?

प्रेगनेंसी में आहार

गर्भवस्था के दौरान खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि पौष्टिक व् संतुलित आहार गर्भवती महिला के लिए फ़ायदेमंद होने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए भी जरुरी होता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान हर गर्भवती महिला के मन में हर एक खाने की चीज को लेकर यह सवाल जरूर आता है की इसे प्रेगनेंसी के दौरान खाना चाहिए या नहीं। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें ज्यादा दिक्कत होती है। और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बरती गई पूरी सावधानी गर्भवती महिला को परेशानियों से बचाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद कर सकती है। और प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इसके लिए महिले अपने घर के बड़ो या फिर डॉक्टर से राय ले सकती है।

प्रेगनेंसी में क्या खाने से गर्भ में शिशु को नुकसान पहुँच सकता है

प्रेग्नेंट महिला को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए इसके बारे में गर्भवती महिला को जानना बहुत जरुरी होता है। तो लीजिये आज हम गर्भवती महिला को कौन से आहार का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचता है इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

अनानास

अनानास में ब्रोमेलिन मौजूद होता है और गर्भवती महिला यदि अनानास का सेवन करती है तो इससे शुरूआती दिनों में जहां गर्भपात का खतरा रहता है। वही प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में इसका अधिक सेवन करने से समय पूर्व प्रसव का खतरा रहता है। जिससे शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी खड़ी हो सकती है।

चाइनीज़ फ़ूड

चाइनीज़ फ़ूड में इस्तेमाल की जाने वाली सोया सॉस में मर्क्युरी की मात्रा अधिक होने के साथ सोडियम की मात्रा अधिक होती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। साथ ही इसमें कुछ ऐसे तत्व भी मौजूद होते हैं, जिसकी वजह से शिशु में जन्म के बाद किसी तरह की शारीरिक कमी देखने को मिल सकती है।

कैफीन

चाय कॉफ़ी में कैफीन की अधिक मात्रा मौजूद होती है और यदि कैफीन का सेवन गर्भवती महिला अधिक मात्रा में करती है तो इससे गर्भ में शिशु के विकास को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है, इसीलिए डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी के दौरान कैफीन का सेवन अधिक मात्रा में न करने की सलाह देते हैं। चाय, कॉफ़ी के अलावा ग्रीन टी, ब्लेक टी आदि के सेवन से भी प्रेग्नेंट महिला को परहेज करना चाहिए।

अंगूर

प्रेगनेंसी के दौरान अधिक मात्रा में अंगूर का सेवन करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही अंगूर का अधिक सेवन करने से समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या भी हो सकती है जिससे शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है।

मछली

गर्भवस्था के दौरान मछली का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है लेकिन जिन मछलियों में मर्क्युरी की मात्रा मौजूद होती है उनके सेवन से प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए। क्योंकि मर्क्युरी का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है।

कच्चा पपीता

प्रेग्नेंट महिला को कच्चे पपीते के सेवन से भी बचना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद लेटेक्स जहां प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में गर्भपात का कारण बनता है। वहीँ इसमें कुछ ऐसे तत्व भी मौजूद होते हैं जो गर्भ में शिशु के विकास में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।

कच्चे अंडे

कच्चे अंडे में साल्मोनेला नामक बैक्टेरिया मौजूद होता है जिससे गर्भवती महिला को पेट संबंधी समस्या होने के साथ इन्फेक्शन का खतरा भी रहता है। और यह इन्फेक्शन गर्भ में शिशु को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को कच्चे अंडे का सेवन करने से बचना चाहिए।

जंक फ़ूड

जंक फ़ूड, ज्यादा मसाले वाला आहार, एनर्जी ड्रिंक आदि को बनाने में जिन चीजों का इस्तेमाल होता है वह गर्भवती महिला और शिशु के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। और यदि गर्भवती महिला इनका सेवन करती है तो इससे समय पूर्व प्रसव, गर्भपात, शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है।

कच्ची अंकुरित चीजें

अंकुरित चीजों का सेवन कारण बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान इसके सेवन से थोड़ा बचना चाहिए। क्योंकि इसमें साल्मोनेला, लिस्टेरिया, नामक बेक्टेरिया होता है जिससे गर्भवती महिला को उलटी, दस्त की समस्या होने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंच सकता है।

बिना धुले फल व् सब्जियां

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खाने में साफ़ सफाई का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है ऐसे में महिला खाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले फलो व् सब्जियों को अच्छे से धोने के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि यदि आप इन्हे बिना धोएं इस्तेमाल करते हैं तो इनमे मौजूद बैक्टेरिया से इन्फेक्शन का खतरा रहता है जो गर्भवती महिला के साथ शिशु की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

क्रीम

क्रीम से बने दूध, पनीर आदि का सेवन करने से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिए। क्योंकि इनमे लिस्टेरिया नामक बैक्टेरिया मौजूद होता है जिसके कारण महिला का गर्भपात होने के साथ समय पूर्व प्रसव का खतरा रहता है। जिससे जन्म के बाद शिशु को वजन में कमी होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नॉन वेज

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला चाहे तो नॉन वेज का सेवन कर सकती है। लेकिन नॉन वेज का सेवन करते हुए इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो ताजा होने के साथ अच्छे से पका हुआ होना चाहिए। क्योंकि अच्छे से न पके नॉन वेज का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे गर्भवती महिला को संक्रमित होने के ख़तरा रहता है जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

नशा

अल्कोहल, धूम्रपान या किसी भी तरह के नशे के सेवन से गर्भवती महिला को बचना चाहिए। क्योंकि जिस तरह से पोषक तत्व गर्भनाल की मदद से शिशु तक पहुचाएं जाते हैं उसी तरह गर्भवती महिला के नशे का सेवन करने से नशे के कण भी शिशु तक पहुँच सकते हैं। जिसके कारण शिशु का विकास केवल शारीरिक रूप से ही नही बल्कि मानसिक रूप से भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए क्योंकि इन चीजों का सेवन करने से केवल गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचता हैं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इसीलिए गर्भवती महिला को इन चीजों के सेवन से बचना चाहिए और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

गर्भावस्था के दिनों में पैरो में सूजन है? ये है उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला शरीर से सम्बंधित कई समस्या हो जाती है, जैसे की चक्कर आना, उलटी होना थकावट होना, घबराहट होना, आदि और कई महिलाओ को पैरो में सूजन की समस्या हो जाती है, और लगभग ज्यादातर महिलाओ को ये समस्या तीसरी तिमाही में होती है, और कई महिलाओ को ये समस्या बहुत ज्यादा भी होती है जिसके कारण उनका चलना फिरना भी मुश्किल हो जाता है, गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए नया अनुभव होता है, और वो इस दौरान ऐसे कई नए अनुभवो से भी गुजरता है, तो आइये सबसे पहले ये जानते है, की गर्भावस्था में होने वाली सूजन के क्या कारण होते है, उसके बाद जानते है की किस प्रकार आप इस समस्या से निजात पा सकते है।

गर्भावस्था के दौरान पैरो में होने वाली सूजन के कारण:-

  • गर्भवती महिलाओ के यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके कारण भी कई बार महिलाओ को पैरो में सूजन होने लगती है।
  • जो महिलाएं ज्यादा समय तक पैरो को लटका कर बैठती है, उनके पैरो में भी सूजन की समस्या हो जाती है।
  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओ को थकावट महसूस होने लगती है, और वो चलना फिरना बहुत कम कर देती है इस कारण भी महिलाओ को पैरो में होने वाली सूजन की समस्या हो जाती है।
  • गर्भवती महिलाओ के शरीर में पानी के जमने के कारण भी पैरो में सूजन की समस्या हो जाती है।
  • गर्भावस्था के समय महिला के शरीर में रक्त खंड में वृद्धि होने के कारण पैरों में सूजन आ सकती है।
  • कई महिलाओ को ब्लड प्रैशर की समस्या होने के कारण भी पैरो में सूजन की समस्या हो जाती है।
  • गर्भावस्था के दौरान पैरो के भर ज्यादा समय तक खड़े होने के कारण भी महिलाओ को पैरो में होने वाली सूजन की समस्या हो जाती है, और पैरो में दर्द का अहसास भी होने लगता है।

गर्भावस्था में पैरो को सूजन से बचने के उपाय:-

काले जीरे का इस्तेमाल करें:-

गर्भावस्था के समय में महिलाओ को होने वाली पैरो में सूजन की समस्या से राहत पाने के लिए काल जीरे का इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए सबसे पहले काला जीरा लें और उसका काढ़ा बना लें, उसके बाद इसका इस्तेमाल करके अपने पैरो को धोएं, इस काढ़े से पैरो को धोने से पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

फिटकरी के पानी से पैरो को धोएं:-

गर्भावस्था के समय फिटकरी के पानी का इस्तेमाल करके इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, फिटकरी को पानी में उबाल कर उस पानी के हल्का गुनगुना रहने पर उसमे थोड़ी देर अपने पैरो को रखें और हाथो से सहलाएं, इसे दिन में दो से तान बार करने पर आपको पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत में मदद मिलती है।

तेल की मदद से मसाज करें:-

पैरो में तेल की मसाज करने से भी आपको पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, क्योंकि इसके कारण आपके ब्लड सर्कुलेशन को ठीक होने में भी मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप सरसों, या जैतून का तेल लेकर उसे गरम करें, अब इसे अपने हाथो पर लगाकर अच्छे से मसाज करें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, यदि आपको पैरो में दर्द होता है, तो उससे भी आपको राहत मिलती है, आप इसे दिन में जितनी बार चाहे उतनी बार कर सकते है।

सिकाई करें:-

सिकाई करने से भी आपको गर्भावस्था के समय पैरो में होने वाली सूजन से भी राहत मिलने में मदद मिलती है, इसके लिए आप सिकाई वाले बेग से, गर्मं पानी में नामक डाल कर पैरो को धोने से, या फिर आप कपडे में किसी गरम चीज को बाँध कर जैसे की रेत आदि का इस्तेमाल करके भी पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत पा सकते है।

अजवाइन के चूर्ण का इस्तेमाल करें:-

अजवाइन के चूर्ण का इस्तेमाल करने से भी आपको पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप थोड़ा सा अजवाइन का चूर्ण लें, और उसे अच्छे से अपने पैरो पर घिसे, ऐसा करने से आपको पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

बरगद के पत्तो का इस्तेमाल करें:-

बरगद के पत्तो का इस्तेमाल करने से भी आपको पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत दिलाई जा सकती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप चार से पांच बरगद के पत्तो को लेकर उन पर एक तरफ अच्छे से घी लगाएं, और उन्हें अच्छे से सेक लें, ऐसा करने के बाद आप उन्हें किसी चीज की मदद जैसे की रुमाल आदि से अपने पैरो पर बाँध लें, ऐसा करने से आपको पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत मिलती है।

अदरक के तेल इस्तेमाल करें:-

अदरक के तेल का इस्तेमाल करने से भी गर्भावस्था के दिनों में पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप चाहे तो इसे हल्का गुनगुना भी कर सकते है, गरम करने के बाद अपने हाथो की मदद से इसे अच्छे से अपने पैरो पर लगाएं, और उनमे दबाव उत्त्पन्न करें, ऐसा करने से आपको पैरो में सूजन से राहत मिलती है, इसकी अलावा आप अदरक की चाय का सेवन भी कर सकती है।

पैरो की एक्सरसाइज करें:-

पैरो की एक्सरसाइज करने से भी आपको इस समस्या से राहत मिल सकती है, इसके लिए आप बैठे बैठे पैरो की एक्सरसाइज कर सकते है, इसके अलावा पैरो को एक ही जगह रख कर बितबए की बजाय हलकी फुलकी वाक करने से भी आपको पैरो की सूजन को कम करने में मदद मिलती है।

तो इन तरीको का इस्तेमाल करके आप पैरो में होने वाली सूजन की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा आप यदि पैरो में होने वाली सूजन के कारण या उसमे होने वाली दर्द की समस्या के कारण उठ भी नहीं पा रहे है, और यदि आपकी सूजन कम होने का नाम ही नहीं ले रही है, तो इस समस्या से राहत पाने के लिए आप डॉक्टर की राय भी ले सकते है, ताकि आपको इसके कारण ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े।

चाय पीने से गर्भ में शिशु को क्या दिक्कतें आती है?

प्रेगनेंसी में चाय

गर्भावस्था के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसे लेकर थोड़ा महिला परेशान रह सकती है। और खान पान के प्रति सावधानी बरतना जरुरी भी है क्योंकि महिला जितना अच्छे तरीके से अपना ध्यान रखती है है उतना ही महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। ऐसे में बहुत सी महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान चाय का सेवन करना चाहिए या नहीं? इसे लेकर भी परेशान हो सकती है। तो इसका जवाब होता है की प्रेगनेंसी के दौरान चाय का सेवन महिला कर तो सकती है लेकिन अदरक वाल चाय, तीन चार कप चाय का सेवन, ग्रीन टी, ब्लैक टी, आदि के सेवन से महिला को परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसमें कैफीन की मात्रा की अधिकता होने के कारण इसे न केवल गर्भवती महिला बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी में चाय पीने से गर्भ में शिशु को क्या दिक्कत आती है

यदि गर्भवती महिला बहुत अधिक चाय का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को बॉडी में कैफीन की मात्रा अधिक होने के कारण परेशानी हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को चाय का सेवन अधिक मात्रा में करने से शिशु को गर्भ में कौन से नुकसान हो सकते हैं।

गर्भपात

गर्भावस्था की पहली तिमाही में यदि गर्भवती महिला चाय का अधिक सेवन करती है तो इससे कैफीन का बुरा असर गर्भ में शिशु को प्रभावित कर सकता है। जिसके कारण महिला को गर्भपात जैसी अनहोनी का सामना करना पड़ सकता है।

वजन में कमी

चाय में मौजूद कैफीन का सेवन करने से शिशु तक पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते हैं। और यदि ऐसा होता है तो इसके कारण जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या आ सकती है।

तनाव

चाय का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को अनिंद्रा की समस्या हो सकती है, और प्रेग्नेंट महिला की नींद पूरी न होने के कारण तनाव हो सकता है। और प्रेग्नेंट महिला का तनाव में आना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए नुक्सानदायक हो सकता है। और तनाव के कारण शिशु का शारीरिक के साथ मानसिक रूप से विकास भी प्रभावित होता है।

प्रेगनेंसी में चाय से जुड़े अन्य टिप्स

  • यदि गर्भवती महिला चाय पीना चाहती है तो दिन में एक कप चाय का सेवन कर सकती है।
  • खाली पेट गर्भवती महिला को चाय का सेवन नहीं करना चाहिए, हमेशा चाय के साथ कुछ न कुछ खाने का जरूर लेना चाहिए।
  • ग्रीन टी, ब्लैक टी, कॉफ़ी आदि के सेवन से भी परहेज करना चाहिए।
  • यदि प्रेगनेंसी में चाय पीने से आपको गैस, एसिडिटी जैसी परेशानी होती है तो आपको चाय से परहेज करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को चाय का अधिक सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु को हो सकते हैं। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके प्रेगनेंसी में चाय का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। और पोषक तत्वों से भरपूर आहार के साथ नारियल पानी, घर में बने ताजे फलों के रस का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।

माँ बनने के बाद शेप में कैसे लाएं अपने फिगर को

माँ बनने के बाद शेप में कैसे लाएं अपने फिगर को:-

गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन में आने वाला बहुत खास होता हैं| यदि आप पहली बार माँ बनने जा रही हैं तो उन महिलाओ से पूछिये जो इस अनुभव को ले चुकी हैं| माँ बनने के दौरान महिलाओ को नौ महीने तक बहुत से शरीर में आने वाले बदलाव से गुजरना पड़ता हैं| और कई बार कुछ महिलाओ को गर्भावस्था के समय बहुत सी परेशानियां हो जाती हैं| परंतु इन परेशानियों का अहसास बिलकुल खत्म हो जाता हैं जैसे ही नन्हा मेहमान होने वाली माँ की गोद में आता हैं|

माँ बनने के लिए सबसे जरुरी हैं की महिला मानसिक व् शारीरिक रूप से तैयार हो| क्योंकि गर्भावस्था के समय और बाद में भी महिलाओ के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं| गर्भावस्था के समय आने वाले बदलाव जैसे की चेहरे का कई बार चमकना, तो कई बार स्किन का ख़राब होना, शरीर के कई हिस्सो में दर्द का अहसास होना, स्तनों के आकार में परिवर्तन,पैरो में सूजन आना, आदि| ये सब कुछ समस्या हैं जो महिला को गर्भावस्था के समय में होते हैं|गर्भावस्था के बाद का आहार टिप्स । फिगर

गर्भावस्था के बाद आने वाले बदलाव जैसे की आपकी स्किन का हल्का होना, मोटापे की समस्या होना, स्तनों में परिवर्तन जैसे की स्तन का आकार बढ़ना, आदि| स्तनों के बढ़ने का एक कारण यदि बच्चा स्तनपान करते हैं, तो भी स्तन बड़े हो जाते हैं| गर्भावस्था के दौरान महिलाएं और बाद में भी कुछ न कुछ समस्या से जूझती ही रहती हैं| तो कई महिलाये इन परिवर्तन के लिए बहुत परेशान हो जाती हैं|

माँ बनने के बाद महिलाये सबसे ज्यादा इस बात से परेशान होती हैं| की उनका फिगर शेप में नहीं रहता हैं| आप यदि इस बारे में उन महिलाओ से जानिए, जो इस समस्या से जूझ रही हैं| और अब हम आपको बताते हैं, की यह कोई ऐसी समस्या नहीं हैं, जिसका कोई समाधान न हो बल्कि आप यदि कोशिश करेंगी तो थोड़े ही समय में इस समस्या से निजात पा सकती हैं| परंतु आपको ये तरीके तब अपनाने चाहिए, जब आप पूरी तरह से ठीक हो|

माँ बनने के बाद शेप में आने के लिए कुछ टिप्स:-

धीरे-धीरे व्यायाम की शुरुआत करें:-

अगर आपकी नार्मल डिलिवरी हुई हो तो 2 महीने तक कोई व्यायाम न करें| अगर सिजेरियन डिलीवरी हुई हो तो इस समय को 3 महीनों तक बढ़ा दें| और उसके बाद व्यायाम करना शुरू करें| जब आप शुरूआती दिनी में व्यायाम करते हैं तो आपको शुरू में सिर्फ 10-15 मिनट से ज्यादा व्यायाम न करें| और ज्यादा कठिन व्यायाम न करें, ऐसा करने से पैल्विक फ्लोर पर दबाव पड़ता है, जिस से ब्लीडिंग शुरू हो सकती है| जो नुक्सान दायक होती हैं|

संतुलित आहार ले:-

माँ बनने के बाद वापिस से अपनी शेप में आने के लिए संतुलित आहार लेना चाहिए| जैसे की साबूत अनाज, मौसमी फल, सब्जियां, सूखा मेवा और वसारहित दूध व दूध से बने उत्पादों को अपने भोजन में शामिल करें| बाहर के खाने से या आप कह सकते हैं की जंक फूड, सोडा आदि से परहेज करें| दिन की शुरुआत 1 गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच शहद डाल कर पीने के साथ करें| हो सके तो खली पेट इसका सेवन करें| दिन में 3 बार मेगा मील खाने के बजाय 6 बार मिनी मील खाएं|

वसा, नमक और चीनी का सेवन कम मात्रा में करें| चाय और कौफी का सेवन कम से कम करें| इसके आलावा अपनी डाइट में सलाद नियमित रूप से खाएं| आप यदि ऐसा करेंगी तो इससे आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी| और वजन की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा| इसके आलावा आप तरबूज का सेवन भी कर सकते हैं|

ग्रीन टी का प्रयोग करें:-

ग्रीन टी का प्रयोग दिन में कम से कम तीन से पांच बार करने से वजन कम करने में सहायता मिलती हैं| और ये हमारे शरीर को किसी प्रकार का नुक्सान भी नहीं करते हैं| ये हमारे शरीर में मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया को रोकते हैं| और उन हॉर्मोन्स को खत्म करते हैं जो शरीर में वजन को बढ़ाता हैं, यदि आप माँ बनने के बाद अपने फिगर को वापिस शेप में लाना चाहते हैं, तो आपको ग्रीन टी का प्रयोग करना चाहिए|

मीठे और नमक का सेवन ज्यादा मात्रा में न करे:-

ज्यादा मीठा और नमक खाने से ये हमारे शरीर में चर्बी को जमा देता हैं| इसलिए यदि आप माँ बनने के बाद वजन की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं| तो आपको कोशिश करनी चाहिए तो आप की आप अपने खाने में नमक और मीठे का सेवन कम से कम करे| यदि आप ऐसा करेंगे तो धीरे-धीरे आपकी बॉडी शेप यानि सही आकर में आ जाएँगी|

डिप्रैशन न ले:-

बच्चे के जन्म के बाद ऐस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरौन हॉर्मोन्स के स्तर में गिरावट आती है, जो डिप्रेशन का कारण बनता है| जिसकी वजह से आपका कई बार कुछ भी करने का मन नहीं करता हैं| इसीलिए आपके शरीर में वजन की समस्या बढ़ जाती हैं| इसीलिए किसी भी तरह का तनाव नहीं लेना चाहिए|

फिगर को शेप में लाने के लिए अन्य उपाय:-

  • नियमित व्यायाम करें परंतु हल्का व्यायाम करे|
  • पानी का अत्यधिक सेवन करें, और पानी पीने से हमे और भी फायदे होते है|
  • फल और सब्जियों को बिना पकाए खाएँ, जिसमे नमक का इस्तेमाल कम से कम हो|
  • ग्रीन-टी का सेवन करें|
  • वो भोजन करे जिसमे फाइबर और प्रोटीन हो|
  • सुबह जल्दी उठें और योगासन करें|
  • ऊपर जाने के लिये लिफ्ट के बजाय सीढियों का चयन करें|
  • भोजन से पहले पानी या जूस लें| और हो सके तो खाने के बाद पानी न पीएं|
  • कम से कम कैलोरी का सेवन करें|
  • नींद पूरी ले|
  • खाने को निगलने की बजाय चबाकर और धीरे-धीरे खाएँ|

तो ये सब कुछ टिप्स हैं जिनकी मदद से आप अपने फिगर को वापिस से सही कर सकते हैं| कई महिलाये माँ बनने के बाद ये सोचती हैं की वो, उतनी सुदर व् आकर्षित नहीं रही हैं| क्योंकि उनका वजन बढ़ गया हैं| परंतु इस चीज को लेकर उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं लेनी चाहिए| बल्कि कुछ ही दिनी के बाद आप इन तरीको का इस्तेमाल करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं| इसीलिए माँ बनने के बाद वापिस से अपने फिगर माँ आने के लिए आपको ये टिप्स अपनाने चाहिए|

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धतूरे के फायदे

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Dature Ke Fayde

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हमारे आस-पास ऐसे बहुत से फल और पेड़ मौजूद है जिनका धर्मिक महत्व तो है ही साथ-साथ वे स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी होते है। धतूरा भी उन्ही फलों में से एक है जिसे हिन्दू धर्म के देवता महादेव पर चढ़ाया जाता है। यह एक सामान्य जंगली पौधा है जो कहीं भी अपने आप ही उग जाता है। इस पौधे के फल को भगवान शिव पर भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। क्योंकि शिव जी को धतूरा बेहद प्रिय है।

लेकिन क्या आप जानते है की यह पूजनीय होने के साथ साथ स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। इसका प्रयोग बहुत सी आयुर्वेदिक औषधियां बनाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसे विष वर्ग में रखा गया है। अगर इसकी बहुत कम मात्रा का इस्तेमाल किया जाए तो यह शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखता है।

धतूरे के पत्तों के अर्क को यदि कान में डाला जाए तो आंख दुखना बंद हो जाती है। केवल इसका फल ही नहीं अपितु उसकी जड़, फूल और पत्तों में भी बेहद लाभकारी औषधिये गुण पाए जाते है। पैरों में सूजन होने पर इसके पत्तों का इस्तेमाल करना लाभकारी होता है। साँस के रोगों और जोड़ों के दर्द में भी यह काफी अच्छा होता है। परन्तु सभी को इसके गुणों के बारे में इतना सब पता नहीं होता। इसीलिए आज हम आपको धतूरे के फायदों के बारे में बताने जा रहे है। जिन्हे जानकर आप भी इस औषधि का निर्देशानुसार प्रयोग कर पाएंगे।

धतूरे के फायदे :-

1. जुएं खत्म करें :धतूरे के फायदे

प्रयोग के लिए आधा लीटर सरसों के तेल में 250 ग्राम धतूरे के पत्तों का रस निकालकर और इतनी ही मात्रा में पत्तियों का कल्क बनाकर धीमी आंच पर पका लें। और जब केवल तेल बचे तो इसे बोतल में भरकर रख दें। अब इस तेल का इस्तेमाल अपने बालों में सिर धोने से कुछ घंटे पूर्व करें। जुएं समाप्त हो जाएंगी।

2. सूजन :

अगर शरीर के किसी हिस्से में सूजन हो जाए तो धतूरे के पत्तों को हल्का गुनगना करके सूजन वाले स्थान पर बांध लें। इसके अतिरिक्त आप अन्य उपाय का भी प्रयोग कर सकते है। इसके लिए इसके फल, फूल, पत्ते, त्वक, कांड यानि पंचांग का रस निकालकर तिल के तेल में पका लें। जब केवल तेल बचें तो इसे अलग रख लें। और इसका इस्तेमाल जोड़ों में करें और पत्तों को बांध लें।

3. गठिया :

धतूरा गठिया रोग में भी बेहद लाभकारी होता है। दर्द होने पर धतूरे के पंचांग का रस निकालकर उसको तिल के तेल में पका लें। जब तेल रह जाए तो इस तेल से मालिश करें। जोड़ों और दर्द वाले हिस्सों पर अच्छे से मालिश करने के बाद उसपर धतूरे का पत्ता बांध लें। गठिया की समस्या ठीक हो जाएगी।

4. यौन :

धतूरे के बीज को अकरकरा और लौंग के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गोलिया बना लें। यह S*x पॉवर को बढाने का काम करते है। धतूरे के बीजों के तेल की मालिश पैरों के तलवे पर करने से यह उत्तेजक का काम करता है। धतूरे, कपूर, शहद और पारे को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीस लें इस लेप को जननांग पर लगाने से संभोग शक्ति तेज होती है।

5. स्वप्नदोष :धतूरे के फायदे

धतूरे के फल को बीच से काटकर उसमे लौंग रखें और फिर मिटटी के बर्तन में भुने। जब वह अच्छी तरह भून जाए तो उसे पीसकर उसकी उड़द के बराबर की गोलिया बना लें और रोजाना दो बार इनका सेवन करें। इससे बुखार और मन के रोग दूर होते है साथ साथ स्वप्नदोष की समस्या भी ठीक होती है।

6. कान में दर्द :

250 ग्राम सरसों के तेल, 60 मिली गंधक और 500 ग्राम धतूरे के पत्तों का रस निकालकर इन्हे धीमी आंच पर पकाएं। जब केवल तेल बचे तो एक या दो बून्द कान में डालें। कान दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।

7. घाव :

धतूरे के पत्तों का कल्क बनाकर संक्रमित घावों पर लगाने और उसकी पट्टी बांधने से घाव जल्दी भर जाता है।

8. गर्भधारण :

धतूरे के फलों की चरण की 2.5 मात्रा को आधा चम्मच गाय के घी और शहद के साथ चाटने से स्त्रियों को गर्भधारण में मदद मिलती है।

9. मिर्गी एवं दमा :

धतूरे की जड़ को सूंघने से मिर्गी शांत हो जाती है। धतूरे के पत्तों का धुंआ दमा शांत करता है।

10. सावधानियां :

माना धतूरे में बहुत से लाभकारी औषधिये गुण पाए जाते है लेकिन यह बात भी सच है की यह एक विष है और इसका अधिक सेवन करना आपके लिए मुसीबत की वजह बन सकता है। अधिक मात्रा का सेवन करने से होने वाले रोगों की लिस्ट में निम्न बीमारियां शामिल है – सिरदर्द, पागलपन और बेहोशी, आंखे व् चेहरा लाल होना, शरीर का तापमान बढ़ने आदि की समस्या हो सकती है।

11. बालों के लिए धतूरे के फायदे

बाल झड़ने की समस्या होने पर धतूरा आपके लिए बहुत फायेमंद हो सकता है। इसके लिए धतूरे के रस को सिर पर मलने से बाल उगते है। लेकिन उपाय का प्रयोग कुछ हफ़्तों तक लगातार करना चाहिए। धतूरे के पत्तों का रस सिर पर लगाने से गंजापन दूर होता है। साथ ही सिर की जुएं भी मर जाती है।

बार-बार मुहांसे होने के क्या कारण है?

Bar Bar Muhase Hona

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आजकल लोगों की लाइफस्टाइल काफी बदल गयी है जिसमे उनकी खान पान की आदतें भी बदलने लगी है। बहुत से टीनएजर अपने खाने पीने पर ध्यान नहीं देते और कास्मेटिक ब्यूटी क्रीम्स का इस्तेमाल करते है जिसके कारन उनके फेस पर मुहांसे निकलने लगते है। और वैसे भी इस आगे में मुहांसे निकलना स्वाभाविक है। कुछ के पिम्पल्स तो ट्रीटमेंट लेने के बाद ठीक हो जाते है जबकि कुछ की स्किन पर पिंपल्स फिर से निकल जाते है।

बहुत सी लड़कियों को यही शिकायत होती है की उनकी आइब्रो या होंठ के आसपास अक्सर मुहांसे निकलते रहते है। एक ठीक होता है तो दूसरा उसकी जगह ले लेता है। जो वाकई काफी परेशान करने वाला होता है। लेकिन ऐसा होता क्यों है?

कोई इसे प्रदुषण की देन मानता है तो कोई कास्मेटिक की। लेकिन वास्तव में इसका क्या कारण कोई नहीं जानता। इसीलिए आज हम आपको बार बार मुहांसे होने के कारण बताने जा रहे है। जिन्हे जानकार शायद आप इन्हे नियंत्रित करके समस्या को खत्म कर पायें।

बार बार पिंपल्स होने के कारण :-bar bar muhanse hone ke kran

किसी भी लड़की के फेस पर यदि एक पिंपल हो जाए तो वे इसपर खास गौर नहीं करती। किसी आयुर्वेदिक फेस वाश की मदद से कुछ दिनों में वो अपने आप ही चला जाता है। लेकिन जब बार-बार एक ही जगह पर नए-नए पिंपल आने लगे तो यह परेशान करने वाला हो सकता है। क्योंकि लड़कियां अपने फेस को लेकर बहुत संवेदनशील होती है ऐसे में अगर बार-बार पिंपल होने लगे तो यह उनके लिए परेशानी का कारण बन जाता है। यहाँ हम आपको कुछ विशेष कारणों की सूचि दे रहे है जिनकी वजह से फेस पर बार-बार पिंपल्स होते है।

विशेषज्ञों की माने तो निम्न दो वजहों से बार-बार मुहांसे निकलते है :

1. डर्मेटोलॉजिस्ट के मुताबिक, सभी के चेहरे पर एक “स्ट्रेस एरिया” हो सकता है अर्थात एक ऐसा हिस्सा जहां बार बार मुहांसे निकलते है, विशेषकर तब, जब तनाव या किसी अन्य बिमारी के कारण आपका इम्यून सिस्टम कमजोर पद जाए। ऐसा होर्मोनेस की वजह से भी हो सकता है अर्थात कई बार महिलाओं को इस स्ट्रेस एरिया में हर बार उनकी MC के दौरान भी मुहांसे होते है।

2. अगर आप मुहांसे के ऊपर वाले पीले हिस्से को हर बार दबा देते है, तो हो सकता है की आपका रोमछिद्र संक्रमित हो गया हो, और इसी वजह से बार बार मुहांसे निकल रहे हो। दरअसल स्किन को दबाने से कोशिकाओं की बाहरी परत ढीली हो जाती है, झा तेल इकठ्ठा होने के कारण रोमछिद्र त्वचा में नीचे की ओर खिसक जाता है जिसकी वजह से इंफ्लेमेटरी रिएक्शन हो जाता है।

इसके अतिरिक्त त्वचा पर उभरे मुहांसे की वजह कोई अंदरूनी मुंहासा भी हो सकता है। इन मुहांसों का केवल सिर ही त्वचा पर दिखाई देता है और बाकी हिस्सा त्वचा के नीचे रहता है। ऐसा तब होता है जब Pores के कई हिस्से हो जाते है और वहां मौजूद आयल एक कोण के आकार में ऊपर उठ जाता है।

इस तरह का पिंपल स्किन के लिए समस्याएं खड़ी कर सकता है ऐसे में अगर लम्बे समय तक यह आपकी स्किन पर दिख रहे है तो डॉक्टर से मिलें और कोई कोर्टिसॉन मेडिसिन लें।

हां, हमेशा के लिए इन्हे स्किन से हटाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन अगर आप उन्हें दबाना और नोचना बंद कर लें तो इनसे हमेशा के लिए पीछा छुड़ा सकते है। लेकिन इसके साथ ही आपको लाइफ स्टाइल में भी कुछ बदलाव करने होंगे।

लेकिन एक बात का भी ध्यान रखें की अगर स्किन पर बार-बार मुहांसे हो रहे है और इनमे दर्द भी हो रहा है। तो हो सकता है की ये किसी विशेष परेशानी का कारण हो। ऐसे में डॉक्टरी परामर्श लेना ही उचित होगा।

ये भी हो सकते है बार बार मुहांसे होने का कारण :-

अगर आप चाहती है की आपके मुहांसे हमेशा के लिए ठीक हो जाए तो एक सैलिसिलिक एसिड क्लीन्ज़र लें और उसका इस्तेमाल अपनी त्वचा पर करें। यह पोर्स के अंसार जाकर मुहांसे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को समाप्त करके उसे ठीक करने का काम करता है। जहा मुहांसे सबसे अधिक होते है वहा भी इस क्लीन्ज़र का इस्तेमाल करें।

लेकिन इस्तेमाल से पूर्व सूजन पर ध्यान दे। इसके लिए आधे-आधे घंटे के गैप पर स्किन पर बर्फ की सिकाई करें। त्वचा को डिटॉक्सीफाई करने के लिए मास्क लगाएं और पोरसे को साफ़ रखें।

हेयर प्रोडक्ट्स :

आपके खूबसूरत बालों की लटें भी आपके मुहांसों का कारण बन सकती है। जी हां, बालों में यूज किये जाने वाले केमिकल और तेलीय प्रोडक्ट भी चेहरे पर बार बार होने वाले मुहांसों का कारण हो सकते है। इसीलिए इन्हे चेहरे से दूर रखें।

चश्मा :

कई बार एक ही जगह बार बार छूने वाली वास्तु भी इन मुहांसों का कारण बनती है।

मेकअप :

एक बात और, रात को सोते समय हमेशा मेकअप उतारें। क्योंकि फेस को सबसे अधिक नुकसान ये मेकअप ही पहुंचाता है। इनमे मौजूद केमिकल स्किन को ऊपर से प्रभावित करते है जिसे मुहांसे आदि निकलने लगते है।

बार बार होने वाले मुहांसे के बारे में और अधिक जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाए :

Read More : बार बार पिंपल होने के कारण और उपाय

गर्भावस्था में ऐसे नहीं करें

गर्भावस्था में नहीं करें यह काम, प्रेगनेंसी महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां महिला को छोटी से छोटी बात का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना सही होता है, और किन चीजों का सेवन महिला को नहीं करना चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला क्या कर सकती है। और किन कामों को महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि महिला यदि कोई ऐसा काम करती है जो महिला को नहीं करना चाहिए।

तो इसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और उस लापरवाही का नकारात्मक असर शिशु पर भी पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इन परेशानियों से बचाव करने में मदद मिल सके। इसके लिए महिला को कुछ चीजों से प्रेगनेंसी के दौरान परहेज करना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को किन किन कामों को नहीं करना चाहिए।

खाने का ध्यान

  • प्रेग्नेंट महिला को अपने आहार के सेवन में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और समय से अपने भोजन का सेवन करना चाहिए।
  • खाने में ज्यादा गैप नहीं रखना चाहिए, हर दो से तीन घंटे के गैप में कुछ न कुछ जरूर खाना चाहिए।
  • खाना बनाने से पहले सब्जियों को अच्छे से धोने के बाद ही प्रयोग में लाएं।
  • फलों का सेवन भी बिना धोएं न करें।
  • कच्चा, अच्छे से न पका हुआ, बिना ढके हुए रखा भोजन, बासी भोजन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
  • मीठे का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण गेस्टेशनल डाइबिटीज़, वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है।
  • नमक की मात्रा भी भोजन में न तो कम लेनी चाहिए और न ही बहुत ज्यादा लेनी चाहिए।
  • हो सके तो मौसम के अनुसार ही फलों व् सब्जियों का सेवन करें।

भारी सामान उठाना

  • गर्भवती महिला को भारी सामान उठाने या सरकाने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि इसके कारण पेट पर जोर पड़ने के कारण महिला को ब्लीडिंग, पेट में दर्द या अन्य किसी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
  • इसके अलावा पैरों के भार बैठकर काम, झुककर काम आदि भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करने चाहिए।

गर्भावस्था में नहीं करें भागदौड़

  • प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा बाहर आना जाना नहीं चाहिए यानी की ज्यादा भागादौड़ी नहीं करनी चाहिए।
  • यहां तक की प्रेग्नेंट महिला को सीढ़ियां चढ़ने से भी परहेज करना चाहिए।

व्यायाम

  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिला को बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करना चाहिए।
  • दूसरी तिमाही में प्रेग्नेंट महिला व्यायाम कर सकती है लेकिन इसके लिए एक बार डॉक्टर या जिम ट्रेनर से राय जरूर लेनी चाहिए।

केमिकल व् प्रदूषण

  • गर्भावस्था के दौरान महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिसमे केमिकल का इस्तेमाल होता है।
  • क्योंकि इसके कारण महिला के साथ शिशु को भी इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है।
  • इसके अलावा महिला को प्रदूषण वाली जगह पर नहीं जाना चाहिए।
  • और न ही ज्यादा भीड़भाड़ व् शोरगुल वाले जगह पर जाना चाहिए क्योंकि इसके कारण शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है।
  • घर में यदि कोई पालतू जानवर है तो उसके काम को करने से भी बचना चाहिए।
  • इसके अलावा यदि आप ऐसी किसी जगह पर जाते हैं या ऐसा कोई काम करते हैं तो मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल जरूर करें।

गर्भावस्था में नहीं करें यात्रा

  • गर्भावस्था के दौरान हो सके तो गर्भवती महिला को लम्बी यात्रा करने से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि यात्रा के दौरान किसी तरह का झटका आदि लगने के कारण महिला को दिक्कत हो सकती है।

यह नहीं पीएं

  • खाने के साथ प्रेग्नेंट महिला को पेय पदार्थों के सेवन के समय भी कुछ बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • जैसे की गर्भवती महिला को चाय की तरह उबले हुए पानी का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अधिक मात्रा में कैफीन जैसे की चाय, कॉफ़ी आदि का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
  • अल्कोहल, धूम्रपान न तो करना चाहिए और न ही ऐसी जगह पर खड़े रहना चाहिए जहां इसका सेवन कोई कर रहा हो।
  • डिब्बाबंद जूस, एनर्जी ड्रिंक, सोडा आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।
  • घर में बने ताजे जूस का सेवन भी एक दिन में ज्यादा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि जूस में शुगर की मात्रा अधिक हो सकती है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को वजन बढ़ने, गेस्टेशनल डाइबिटीज़ का खतरा हो सकता है।
  • कच्चे दूध व् कच्चे दूध से बनी चीजों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।

सोने का तरीका

  • प्रेग्नेंट महिला को नींद भरपूर मात्रा में लेनी चाहिए क्योंकि इससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • लेकिन महिला को पेट के बल या एक ही पोजीशन में ज्यादा देर तक नहीं सोना चाहिए।
  • वजन बढ़ने के बाद महिला को पीठ के बल होकर भी नहीं सोना चाहिए।
  • क्योंकि इससे बॉडी में ब्लड फ्लो में रूकावट आ सकती है।

गर्भावस्था में नहीं लें तनाव

  • प्रेग्नेंट महिला को तनाव भी नहीं लेना चाहिए।
  • क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला की सेहत सम्बन्धी समस्या बढ़ने के साथ शिशु के विकास में भी समस्या आ सकती है।

डॉक्टर की राय

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपनी समय से जांच करवानी नहीं भूलनी चाहिए।
  • समय पर सभी इंजेक्शन लगवाने चाहिए।
  • और कोई भी दिक्कत होने पर एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर से बिना पूछें किसी भी तरह की दवाई का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ काम जो गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए। क्योंकि इनके कारण प्रेग्नेंट महिला व् शिशु दोनों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में इसके कारण किसी तरह की परेशानी न हो। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को इन बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

सिर की खुजली से परेशान है? इन घरेलू उपाय से पाएं निजात

सिर की साफ़ सफाई न रखना, अच्छे से बालों की केयर न करने, गलत शैम्पू का इस्तेमाल करने, डेंड्रफ की समस्या होना, बरसात के मौसम में बालों को भीगने के कारण, आदि, इन सब परेशानियों के कारण सिर में खुजली की समस्या हो जाती है, तो आइये आज हम आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बताने जा रहे है।

खुजली की समस्या या शरीर पर हो या आपके सिर में इसके कारण आपको लोगो के सामने समाजिक तोर पर शर्मिंदा होना पड़ सकता है, कई लोग सिर में होने वाली खुजली की समस्या से परेशान होते है, सिर में होने वाली खुजली के बहुत से कारण होते है, जैसे की सिर की साफ़ सफाई का ध्यान न रखना, सिर की त्वचा के रूखे होने के कारण, गलत खान पान, गलत शैम्पू का इस्तेमाल करने के कारण या बरसात के मौसम में बालों के गीले होने के कारण, भी आपको सिर मेंहोने वाली खुजली की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, कई बार बच्चों के या बड़ो के सिर में जुएं होने कारण भी खुजली होने लगती है।

कई बार तो ये खुजली इतनी बढ़ जाती है, जिसके कारण आप अपने आप को खुजली करने से रोक ही नहीं पाते है, और कई बार तो सिर में लाल दाने या लाल चकते भी पड़ जाते है, क्या आप भी सिर में होने वाली खुजली की समस्या से परेशान है? तो चिंता मत कीजिये क्योंकि ये कोई ऐसी परेशानी नहीं है, की जिसका कोई इलाज़ न हो, बल्कि आप कुछ घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके इस समस्या से आसानी से राहत पा सकते है, तो आइये जानते है की सिर की खुजली को मिटाने के वो घरेलू नुस्खे कौन से है, और जब भी आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या हो तो आप इनमें से किसी भी तरीके का इस्तेमाल करके सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पा सकते है।।

निम्बू के रस का प्रयोग करें:-

निम्बू के रस का प्रयोग अपने सिर में करने से सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, क्योंकि निम्बू में मौजूद सिट्रिक एसिड सिर की त्वचा की साफ़ सफाई करता है, जिसके कारन आपको सिर की खुजली से राहत मिलती है, इसके लिए नीबू के रस को निकाल कर सिर में अच्छे से लगा लें और थोड़ी देर बाद बालों को धो लें, इसके कारण आपको खुजली की समस्या से राहत पाने के साथ अपने बालों में चमक लाने में भी मदद मिलती है।

गेंदे के फूलों का इस्तेमाल करें:-

गेंदे के फूलों में एंटी-इंफ्लेमेंटरी और एंटीबैक्‍टीरियल गुण मौजूद गुण उपस्थित होते है, जो आपके त्वचा के बढ़ बैक्टेरिया को खत्म करके खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद करते है, इसके लिए आप गेंदे के फूल को अच्छे से पीस कर एक पेस्ट तैयार करें, और अब इस पेस्ट को अच्छे से अपने बालों की जड़ों में लगाएं, और थोड़ी देर बाद बालों को अच्छे से धो लें, ऐसा करने से आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

प्याज के रस का इस्तेमाल करें:-

प्याज का रस आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत दिलाने में आपकी बहुत मदद करता है, इसके लिए आप मिक्सर में एक बड़ा प्याज और थोड़ा सा पानी मिलाकर अच्छे से पीस लें, और अब इस पेस्ट को अच्छे से अपने बालों की जड़ों में लगाएं, और लगभग एक घंटे तक लगे रहने दे, और उसके बाद हर्बल शैम्पू की मदद से अपने बालों को अच्छे से साफ़ करे, ऐसा करने से आपको सिर में होने वाली खुजली के साथ डेंड्रफ और बालों के झड़ने की समस्या से भी निजात मिल जायेगा।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

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सेब के सिरके में थोड़ा सा पानी मिलाकर सिर के स्कैल्प पर अच्छे से मसाज करें, और थोड़ी देर के लिए ऐसे ही छोड़ दें, ऐसा करने से आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत मिलती है, साथ ही बालों को जड़ो से मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

तेल से मसाज करें:-

खुजली की समस्या से राहत पाने के सबसे आसान तरीका होता है, की आप अपने सिर की अच्छे से मसाज करें, लेकिन हो सकें तो ज्यादा खुशबूदार तेल और ज्यादा केमिकल वाले तेल का इस्तेमाल न करें, इसके लिए आप एक कटोरी में थोड़ा सा नारियल और थोड़ा सा बादाम के तेल को मिक्स कर लें, आप चाहे तो इसे हल्का गरम भी कर सकते है, अब इस तेल की मदद से अपने स्कैल्प पर अच्छे से मसाज करें, ऐसा करने से आपके बालों की चमक को बढ़ने के साथ आपके सिर में होने वाली खुजली की समस्या से भी राहत पाने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करके भी आप सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पा सकते है, इसके लिए आप थोड़ा सा पानी में बेकिंग सोडा को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करे, और अब इसे अपने स्कैल्प पर आछे से लगाएं, और थोड़ी देर बाद हर्बल शैम्पू का इस्तेमाल करके अच्छे से अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

कपूर का इस्तेमाल करें:-

कपूर का इस्तेमाल करने से आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए कपूर को पीस कर अच्छे से नियाल के तेल में मिला लें, और उसके बाद इसे अपने स्कैल्प पर अच्छे से मसाज करें, ऐसा करने से आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत मिलती है, क्योंकि कपूर की तासीर ठंडी होती है, जिसके कारण ये आपके सिर को ठंडक पहुँचाने में मदद करती है।

दही का इस्तेमाल करें:-

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यदि आप खुजली की समस्या से तुरंत राहत पाना चाहते है, तो अपने बालों में अच्छे से दही लगाएं, और इससे सिर को धोएं, ऐसा करने से आपके सिर में ठंडक पहुचती है, जिसके कारण आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, और साथ ही डेंड्रफ और बालों को सिल्की और चमकदार बनाने में भी दही आपकी बहुत मदद करती है, वैसे भी आपको महीने में दो बार दही का इस्तेमाल अपने बालों की चमक को बढ़ने के लिए जरूर करना चाहिए।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप सिर में होने वाली खुजली की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा यदि खुजली का कारण जुएं है तो आपको अपने सिर की सफाई पर ध्यान देना चाहिए, इसके साथ आपको ज्यादा केमिकल और सस्ते शैम्पू का इस्तेमाल अपने बालों के लिए नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपके बाल भी ख़राब हो जाते है, और नियमित रूप से यदि आप अपने बालों की मसाज करते है, व् उनकी साफ़ सफाई का ध्यान रखते है, तो आपको सिर में होने वाली खुजली की समस्या के कारण परेशान भी नहीं होना पड़ता है।