Home Blog Page 197

सफ़ेद बालों को जड़ से काला करने के घरेलु नुस्खे

बालों को महिलाओं की खूबसूरती माना जाता है। और इन्ही से उनका पूर्ण व्यक्तित्व भी निखर कर आता है। लेकिन आजकल के समय में बालों की पूर्ण देखभाल करना संभव नहीं जिसके कारण उनकी चमक एकसमान नहीं रहती। इसी प्रकार और भी कई समस्याएं है जो हमारे बालों की खूबसूरती को प्रभावित करती है। इन्ही समस्यायों में से एक है बालों का सफ़ेद होना।

आज के समय में बालों का असमय सफ़ेद होना आम बात है। जिसका मुख्य कारण बढ़ता प्रदुषण और धूल मिटटी आदि है। पहले के समय में ये समस्या केवल बुजुर्गो में देखने को मिलती थी, लेकिन आजकल छोटे छोटे बच्चो के बाल भी सफ़ेद होते दिख रहे है। प्रदुषण के अलावा नुट्रिशन और खान-पान में कमी के कारण भी सफ़ेद बालों की समस्या देखने को मिलती है।

ऐसे तो बाजार में बहुत से प्रोडक्ट उपलब्ध है जो मिनटों में बाल काले कर देते है लेकिन उन सभी में इस्तेमाल होने वाले केमिकल आपके बालों को नुकसान पहुंचा सकते है। ऐसे में इनका इस्तेमाल करना थोड़ा रिस्की हो सकता है। इसीलिए आज हम आपको सफ़ेद बालों को जड़ से काला करने के कुछ आसान और घरेलु उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप भी अपने सफ़ेद बालों को काला कर सकती है।

यह पढ़े : बाल कलर करने के साइड इफ़ेक्ट

सफ़ेद बालों को काला करने के घरेलू उपाय :- 

1. मेहंदी :

सफ़ेद बालों को काला करने के लिए मेहंदी (हिना) सबसे बेहतर और सस्ता उपाय माना जाता है। क्योंकि इसके लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है। तो अगर आपके बाल भी असमय सफ़ेद हो रहे है तो मेहंदी का प्रयोग कर सकते है। बालों का काला करने के साथ साथ ये आपके बालों को चमकदार और शिनी भी बनाती है। मेहंदी लगाने की सही विधि और तरीका जानने के लिए इसे पढ़े : मेहंदी लगाने की सही विधि!

2. नारियल तेल :coconut oil

शायद आप नहीं जानते लेकिन सामान्यतौर पर प्रयोग होने वाला नारियल तेल भी आपके सफ़ेद बालों को काला करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद तत्व बालों को भीतर से nourish करके पोषण प्रदान करते है। आप इसमें नींबू मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए नारियल तेल में 3 चम्मच नींबू का रस मिलाएं और इससे अपने बालों की जड़ों की मसाज करें। एक घंटे तक रखने के बाद बाल धो लें। इसका इस्तेमाल हफ्ते में दो बार करें परिणाम आपके सामने होंगे।

3. नीम की पत्ती :

त्वचा के लिए नीम की पत्तियां बहुत फायदेमंद होती है लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से सफ़ेद बालों को भी दूर किया जा सकता है। और यदि इन पत्तियों का इस्तेमाल नारियल तेल में मिलाकर किया जाए तो क्या कहने। इसके लिए नीम की कुछ पत्तियों को नारियल तेल में उबाल लें। उसके बाद पत्तियों को निकलकर अलग रख दें और तेल को ठंडा कर लें। ठंडा होने के बाद तेल से बालों की मसाज करें और 1 घंटे बाद बालों को अच्छी तरह धो लें। आपके बाल लम्बे भी होंगे और सफ़ेद भी नहीं होंगे।

4. चायपत्ती:

इसे हम नेचुरल हेयर डाई के रूप में भी प्रयोग कर सकते है। क्योंकि काली चाय में मौजूद गुण असमय सफ़ेद हुए बालों को काला करने में मदद करते है। और इसका प्रयोग करने के लिए आपको बहुत समस्या भी नहीं होगी। इसके लिए 2 चम्मच चाय पत्ती को पानी में अच्छी तरह उबाल लें। और इसे ठंडा होने दें लगभग 2 घंटे। ठंडा होने के बाद पानी को छान कर किसी स्प्रे बोतल में रख दें। अब इससे अपने बालों में स्प्रे करें। और 1 घंटा रखने के बाद बाल धो लें परिणाम आपके सामने होंगे।

5. आंवला :aavla oil

आंवला पाउडर भी बालों को काला करने में मदद करता है। इसके लिए आधा लीटर पानी में 2 चम्मच आंवला पाउडर और आधे नींबू का रस मिलाएं। और जब भी अपने बालों को धोएं तो सबसे पहले इस पानी का इस्तेमाल करें और उसके बाद ही शैम्पू करें। थोड़े दिनों के इस्तेमाल से ही आपके बाल काले होने लगेंगे।

6. काली मिट्टी :

सुनने में थोड़ा अजीब है लेकिन ये सत्य है की काली मिट्टी की मदद से भी आपके सफ़ेद बालों को काला किया जा सकता है। इस मिट्टी से बाल काले, चमकदार और मुलायम होते है। ये आपको किसी नदी या तालाब के किनारे आसानी से मिल जाएगी। इस मिट्टी में कंकर नहीं होते, और ये बहुत चिकनी होती है। इसके प्रयोग के लिए,मिटी को थोड़ा गीला कर लें (अगर सुखी हो तो) और उसे अपने बालों की जड़ों में लगाएं। 10 से 15 मिनट रखने के बाद बालों को शैम्पू कर लें। हफ्ते में एक बाद इसका प्रयोग करें आपके बाल पहले से अच्छे हो जायेंगे।

7. आयल मसाज :

बालों को सफ़ेद होने से बचाने के लिए उनमे निरंतर तेल मालिश करते रहे। इसके लिए आप नारियल तेल में कडी पत्ता और आंवले को मिलाकर उसे उबालें और ठंडा होने के पश्चात् उस तेल से बालों में मालिश करें। लाभ मिलेगा।

8. कडी पत्ता :

अगर आप अपने सफ़ेद बालों से छुटकरा पाना चाहते है तो अपने खान पान का ध्यान रखें। इसके लिए आप अपने खाने में कडी पत्ते को सम्मिलित करें। ये बालों को सफ़ेद होने से रोकते है। आप चाहे तो इसे चटनी के रूप में भी खा सकते है।

गर्भधारण के लक्षण

गर्भधारण के लक्षण, प्रेगनेंसी के लक्षण, ये हैं गर्भधारण के शुरूआती लक्षण, ये है गर्भावस्था के लक्षण, ये लक्षण दिखें तो जरूर करें प्रेगनेंसी टेस्ट, Pregnancy Symptoms, Early Signs of Pregnancy

पीरियड्स के मिस होने के बाद आप आसानी से घर में प्रेगनेंसी टेस्ट किट की मदद से चेक करके पता कर सकती है, की आप प्रेग्नेंट है या नहीं। इसके अलावा गर्भधारण के और बहुत से लक्षण होते हैं जिनसे आप पता कर सकते हैं की आप प्रेग्नेंट है या नहीं। क्योंकि प्रेग्नेंट होने पर शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण बहुत से बॉडी में बदलाव आते हैं, साथ ही आपको शारीरिक परेशानी आदि भी हो सकती है, जो की आपको गर्भधारण के संकेत देती है। जिससे आप आसानी से पता कर सकते हैं की आप गर्भवती है। तो आइये जानते हैं की वो आम लक्षण कौन से होते हैं।

गर्भधारण के लक्षण

गर्भधारण होने पर शरीर में बहुत तेजी से हार्मोनल बदलाव होते है, और इसके कारण बॉडी में बहुत से बदलाव होते हैं, तो आइये जानते हैं अब विस्तार से की गर्भधारण के लक्षण कौन कौन से होते हैं।

मासिक धर्म में देरी

प्रेग्नेंट होने का एक लक्षण यह होते है की आपको पीरियड्स नहीं आते है, जिसके कारण उलझन बनी रहती है। ऐसे में आप दस दिन बाद प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करके चेक कर सकती है की आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं।

ब्रेस्ट का हैवी होना

ब्रेस्ट के उत्तक बहुत ही सवेंदनशील होते है, ऐसे में शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ब्रेस्ट में सूजन व् भारीपन का महसूस होना, प्रेगनेंसी का एक लक्षण होता हैं। इसके अलावा यदि निप्पल का रंग भी गहरा होने लगता है तो यह भी गर्भधारण के कारण ही होता है।

बार बार यूरिन पास

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में किडनी बहुत अधिक सक्रिय हो जाती है, जिसके कारण बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है। ऐसे में मासिक धर्म में देरी होने के बाद या उससे पहले ही आपको ऐसा महसूस हो तो यह इस बात का संकेत देता हैं की आप प्रेग्नेंट हो सकती हैं।

पेट से सम्बंधित परेशानी

पेट में हल्का दर्द या कब्ज़ की परेशानी होना, भी प्रेगनेंसी होने का एक आम लक्षण होता है। जिससे की महिलाएं प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीनो में बहुत ज्यादा परेशान रहती है, क्योंकि हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन क्रिया पर असर पड़ता है।

मूड में बदलाव

व्यव्हार में अचानक से होने वाला बदलाव भी प्रेग्नेंट होने का एक आम लक्षण होता है। मूड में बदलाव होने के कारण ऐसा हो सकता है की कभी कभी तो आपको कोई चीज बहुत अच्छी लगने लगती है और कभी किसी चीज को देखने का मन भी नहीं करता है।

स्वाद में परिवर्तन

टेस्ट में बदलाव आना भी प्रेगनेंसी के शुरुआत में आम बात होती है। ऐसे में हो सकता है आपको कभी खट्टा अधिक खाने का मन करें तो कभी मीठा, कुछ महिलाओं को खाने की गंध से भी परेशानी होने लगती है। ऐसे में यह सब बातें महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करती है।

थकान व् कमजोरी अधिक महसूस होना

शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होने के कारण आपको कई बार बहुत अधिक कमजोरी व् थकान महसूस हो सकती है। खासकर सुबह उठने पर आपको सिर दर्द आदि की परेशानी व् बहुत कमजोरी महसूस होने लगती है

तापमान का बढ़ना

बॉडी का तापमान सामान्य से अधिक रहना भी प्रेगनेंसी का एक लक्षण होता है, ऐसे में यदि पीरियड्स मिस होने के साथ आपको ऐसा महसूस होता है की आपके शरीर का तापमान अधिक है तो यह भी आपकी प्रेगनेंसी की और इशारा करता है।

उल्टी व् मितली की समस्या होना

उल्टी व् मितली की समस्या का होना भी प्रेगनेंसी का ही एक सामान्य लक्षण है, यदि आपको उल्टी व् मितली की समस्या अधिक होने लगती है, या कुछ भी खाने पर अजीब सा महसूस होता है और ऐसा लगता है उल्टी आ जायेगी तो यह भी प्रेगनेंसी का ही एक आम लक्षण होता है।

सिर दर्द

हार्मोनल बदलाव होने के कारण ब्लड फ्लो पर भी असर पड़ता है, और यदि कभी ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाता है तो ऐसे में सिर दर्द, चक्कर आदि की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में आप इसे भी प्रेगनेंसी का एक शुरूआती लक्षण बोल सकते हैं। खासकर जब आप सुबह उठती है तो उस समय सिर में भारीपन महसूस होना आम बात होती है।

तो यह है कुछ लक्षण जिनसे आप पता कर सकती हैं की आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। इसके अलावा आपको जैसे ही पता चलता है की आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपना चेकअप करवाना चाहिए। साथ ही यदि पीरियड्स में देरी किसी और कारण भी हो रही है तो इसे एक बार जरूर दिखाना चाहिए।

विडिओ प्रेग्नेंसी के लक्षण

चश्मे से नाक के ऊपर निशान हो गए हैं? ऐसे हटाएँ

आज के समय में अधिकतर लोग आँखों की समस्यायों से परेशान रहते हैं। जिसमे सबसे ज्यादा केसेस नजर के कमजोर होने के होते हैं। इसका मुख्य कारण घंटों दफ्तर में काम करना और देर रात तक ऑफिस में वर्क करना होता हैं जबकि बच्चो में इस समस्या की असली वजह टीवी और स्मार्टफोन होते हैं। बहुत से लोग इस समस्या के लिए लेंस का प्रयोग करते हैं लेकिन सभी कांटेक्ट लेंस का प्रयोग नहीं कर सकते। जिसके लिए वे चश्मों का प्रयोग करते हैं।

लेकिन चश्मे के साथ आने वाली सबसे बड़ी समस्या नाक पर आने वाले जिद्दी निशान होते हैं जो न चाहते हुए भी पड़ ही जाते हैं। ऐसे तो आजकल frames में बहुत से बदलाव कर दिए गए हैं जिससे नाक पर हलके निशान बनते हैं लेकिन सभी को वे फ्रेम सूट नहीं करते।

यह पढ़े : चश्मा उतारने के घरेलू टिप्स!

वैसे समय के साथ चश्मा तो उतर जाता हैं और नजरे भी ठीक हो जाती हैं लेकिन पीछे रह जाते हैं ये जिद्दी निशान जो आपकी सुंदरता को खराब कर सकते हैं। क्योंकि आजकल हर कोई बाहर आता जाता हैं ऐसे में इन निशानों का रहना आपके व्यक्तित्व पर प्रभाव डाल सकता हैं। इसीलिए आज हम आपको चश्मे के नाक पर पड़े दाग हटाने के कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहें हैं जिनकी मदद से आप इन जिद्दी निशानों से हमेशा के लिए पीछा छुड़ा सकेंगे।

चश्मे से नाक के ऊपर बने निशान हटाने के उपाय :- 

1. खीरा :

खीरे का प्रयोग त्वचा के दाग-धब्बे हटाने के लिए किया जाता हैं। आप इसका इस्तेमाल चश्मे के निशान हटाने के लिए बीच कर सकते हैं। इसके लिए खीरे के कुछ टुकड़ों को नाक के हिस्से पर रगड़ें जहां निशान बने हो। अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए खीरे के रस का इस्तेमाल करें। आप इसमें टमाटर और आलू का रस भी मिला सकते हैं।

2. नींबू का रस :नाक पर से चश्मे के निशान

नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा के दागों को दूर करने में मदद करता हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद ब्लीचिंग गुण भी किसी कॉस्मेटिक ब्लीच से कम नहीं हैं। इसके लिए किसी छोटे बर्तन में नींबू का रस निकालकर कॉटन बॉल की मदद से उसे अपनी त्वचा पर लगाएं। अच्छे परिणामों के लिए रोजाना इस विधि का इस्तेमाल करें।

3. शहद :

ये हर घर में मौजूद होता हैं और दाग-धब्बे हटाने का एक बेहतर घरेलू उपाय भी हैं। इसके लिए आप शहद, दूध और जौ का एक मिश्रण तैयार कर लें। अब इस मिश्रण का प्रयोग त्वचा के उस हिस्से पर करें जहां निशान हैं कुछ दिनों के प्रयोग से दाग पूरी तरह साफ़ हो जायेंगे। साथ ही डेड स्किन भी आसानी से निकल जाएगी।

4. सेब का रस :

अगर इसमें कुछ न मिलाया जाए तो सेब का रस बहुत गाढ़ा होता हैं। इसके इस्तेमाल के लिए रस जितनी मात्रा में पानी मिलाएं और इससे अपनी नाक पर अच्छे से मसाज करें। नाक के साथ-साथ आप इसे त्वचा के अन्य हिस्सों पर भी लगा सकते हैं दाग पूरी तरह गायब हो जायेंगे।

5. बादाम का तेल :

बालों के लिए बादाम के तेल का इस्तेमाल सभी करते हैं लेकिन क्या जानते हैं की त्वचा के दाग निकालने के लिए भी बादाम के तेल का प्रयोग किया जा सकता हैं। इसमें मौजूद विटामिन इ त्वचा को साफ़ करके दाग हलके करने में मदद करता हैं। इसके लिए तेल को सीधे ही नाक के उस हिस्से पर लगाएं जहां निशान बने हुए हैं। लगातार इस्तेमाल से बहुत लाभ मिलेगा।

6. गुलाबजल :गुलाब जल से पाएं सुंदर त्वचा

अपने चश्मे से पड़े निशान को आप गुलाबजल की मदद से भी दूर कर सकते हैं। इसके लिए आप बाजार से गुलाबजल ले आये और उसका प्रयोग प्रभवित हिस्से पर करें। आप चाहे तो घर पर गुलाब की पंखुड़ियों से रस निकालकर भी गुलाबजल बना सकते हैं। आप इसमें सिरका डालकर भी प्रयोग कर सकते हैं।

इसे भी पढ़े : चश्मे वाली लड़कियां ऐसे करें मेकअप!

7. स्ट्रॉबेरी का रस :

इसके लिए बाजार से स्ट्रॉबेरी ले और उन्हें पीसकर रस निकाल लें। इसके बाद रुई की मदद से चेहरे के काले धब्बों वाले हिस्सों पर इस पेस्ट को लगाएं। कुछ दिनों के प्रयोग से आपके डेग पूरी तरह साफ़ हो जायेंगे। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स त्वचा को साफ़ करके उसकी रंगत निखारने में मदद करता हैं।

8. कच्चा दूध :

कच्चा दूध भी आपके नाक पर से चश्मे के निशानों को हटाने में मददगार साबित हो सकता हैं। इसके लिए गाय के दूध या पाउडर वाले दूध का इस्तेमाल किया जा सकता हैं। दूध में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की सफाई करने में मदद करता हैं। इसके लिए त्वचा पर कच्चा दूध लगाएं और धीरे धीरे मालिश करें। 15 मिनट रखने के बाद हलके गर्म पानी से इसे साफ़ कर लें।

9. एलोवेरा :

एलोवेरा के जेल का प्रयोग भी त्वचा के दाग और निशान दूर करने के लिए किया जाता हैं। इसके लिए एलोवेरा के एक पत्ते में से जेल निकाल लें और इसका प्रयोग निशान वाले हिस्से पर करें। रोजाना के इस्तेमाल से दाग पूरी तरह गायब हो जायेंगे।

10. आलू :

आलू में मौजूद ब्लीच के गुण त्वचा को साफ़ करने के साथ-साथ उसकी अशुद्धियाँ दूर करने में भी मदद करते हैं। नाक पर से चश्मे के दाग हटाने के लिए आलू को मैश करके उसका गुदा बना लें। अब इस जुड़े से रस निकालकर उसे त्वचा पर लगाएं। 20 मिनट तक लगाएं रखें और उसके बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। परिणाम आपके सामने होंगे।

तो ये थे कुछ तरीके जिनकी मदद से आप अपनी त्वचा पर पड़े चश्मे के दागों को आसनी से हटा सकते हैं। चूँकि ये सभी वस्तुएं आपके घर में ही मौजूद हैं तो आपको इनके लिए बहुत से पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं हैं।

कान से मैल निकालने के तरीके, कान साफ़ कैसे करें?

How to Remove Ear Wax :- कान को मनुष्य के शरीर का सबसे संवेदनशील अंग होता है। इसलिए इस देख-रेख में जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, विशेषकर तब जब बात कान साफ़ करने की हो। लेकिन बहुत से लोग इन बातों की परवाह किये बिना ही कान में तिल्ली, इयर बड और नोकीली आदि डालने लगते है जो बिलकुल गलत है।

कान में वैक्स होना शरीर को बचाने का एक प्राकृतिक तरीका है। क्योंकि यह कानों की नली में आने वाली गंदगी और बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है परंतु कान में अधिक वैक्स का होना भी ठीक नहीं। क्योंकि अधिक वैक्स के कारण कानों से कम सुनाई देने लगता है और कान में दर्द भी होने लगता है। कई बार इसके कारण कान ब्लाक भी हो जाता है। जिसे साफ़ करने के लिए लोग कान में रुई की तिल्ली या किसी महीन चीज का इस्तेमाल करने लगते है जो कई बार उनके लिए परेशानी का कारण बन जाता है।

इयर वैक्स को साफ़ करने के लिए लोग इस तरह के बहुत से गलत तरीकों का इस्तेमाल करते है जो सीधे-सीधे उनके कान के लिए नुकसानदेह होता है। इसलिए कान साफ़ करने के लिए कभी भी इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

कब करें कान साफ़?

कान साफ़ करने का सबसे बेस्ट टाइम नहाने के बाद का होता है। क्योंकि नहाने के बाद कान का वैक्स बहुत नरम हो जाता है। ऐसे में जब आप इसे सामान्य टॉवल से भी साफ़ करते है तो यह आसानी से साफ हो जाता है।

इयर वैक्स होने के क्या कारण होते है?कान से मैल कैसे साफ़ करें

ऐसे तो यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिसका कोई विशेष कारण नहीं होता, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को यह अधिक मात्रा में हो रहा है तो उसका सबसे पहला कारण इयरफोन का इस्तेमाल करना होता है। इसके अतिरिक्त समय-समय पर कान साफ़ नहीं करने के कारण भी कान में वैक्स की समस्या उत्पन्न होने लगती है।

आज हम आपको कुछ ऐसे आसान और सरल घरेलू उपायों के बारे में बता रहे है जिनकी मदद से कान में जमी मैल यानी इयर वैक्स को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है।

कान का मैल साफ़ करने के तरीके (इयर वैक्स साफ़ करने के उपाय)

1. नमक और पानी का घोल :

सुनने में थोडा अजीब है लेकिन इसकी मदद से आप अपने कान के मैल को साफ़ कर सकते है। इसके लिए आधा को हलके गर्म पानी में 1 छोटा चम्मच नमक घोल लें। अब उसमे रुई भिगोएं और उसे कानों में निचोड़ दें। पानी को कान में अच्छे से जाने दें उसके बाद कान को पलट कर पानी बाहर निकाल दें। कान साफ़ हो जाएगा ।

2. हाइड्रोजन पेरोक्साइड :

यह एक मेडिकेटिड तरीका जो जिसका इस्तेमाल कान साफ करने के लिए बहुत अधिक किया जाता है लेकिन ध्यान रहे प्रयोग करते समय इस सलूशन की सीमित मात्रा ही लें अन्यथा ये आपके लिए घातक हो सकती है। कान का मैल साफ़ करने के लिए 3% हाइड्रोजन पेरोक्साइड लें और उसमे पानी मिलाकर घोल बना लें। अब इस घोल की कुछ बुँदे ड्रॉपर से कान में डालें और दवा को अच्छे से कान में जानें दें। उसके बाद कान पलटे और बाकी का बचा हुआ घोल बाहर निकाल दें।

3. बेबी आयल :कान से मैल निकालने के तरीके

अगर आओ ऊपर बताये गए तरीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते तो उसकी जगह बेबी आयल का भी इस्तेमाल कर सकते है। यह भी कान की गंदगी को साफ़ करने में सहायक होता है। इसके लिए बेबी आयल या मिनरल आयल की कुछ बुँदे कान में डालें। उसके बाद कान में रुई लगा दें। ताकि तेल बाहर न निकले। तेल डालने से वैक्स मुलायम हो जाएगा और आसानी से बाहर निकल आएगा जिसे बाद में आप सॉफ्ट इयर बड से आसानी से साफ़ कर सकते है।

4. बादाम का तेल :

इयर वैक्स को साफ़ करने के लिए बादाम के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए कान में 1 या 2 बूंद बादाम का तेल डालकर सर को उसी दिशा में रहने दें। 5 मिनट तक ऐसे ही रहें और उसके बाद रुई लगाकर कान बंद कर दें। ऐसा करने से वैक्स मुलायम हो जाएगी और आराम से साफ़ हो जाएगी।

कान का मैल या इयर वैक्स को साफ़ करने के अन्य उपाय :

  • सफ़ेद सिरके और अल्कोहल की बराबर मात्रा मिलाकर उसकी कुछ बुँदे कान में डालने से भी कान का मैल साफ हो जाता है।
  • ओलिव आयल की २ बूंद इयर वैक्स को साफ़ कर सकती है। इसके लिए रोज रात को सोने से पहले कान में 2 से 3 बूंद ओलिव आयल कान में डालें।
  • कानों में थोडा सा गर्म पानी डालें और कुछ सेकंड के लिए ऐसे ही रहने दें। उसके बाद कान पलट कर पानी बाहर निकाल दें कान का मैल साफ़ हो जाएगा।
  • प्याज को घिसकर उसका रस निकाल लें और इस रस की कुछ बुँदे ड्रॉपर की मदद से कान में डालें। मैल साफ़ हो जाएगा।
  • नीम के पत्तों की भाप कान में लेने से भी कान का मैल बाहर निकल जाता है।
  • भांगरा और समुद्र्फल खाने से भी कान बिलकुल साफ हो जाता है।

तो ये थे कुछ सामान्य घरेलू उपाय जिनकी मदद से कान में जमा मैल को आसानी से साफ़ किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे, उपाय के इस्तेमाल के बाद कान साफ़ करने के लिए किसी बड़े की ही मदद लें बच्चे स्वयं कान साफ़ करने की कोशिश न करें अन्यथा कान में दिक्कत हो सकती है। उसके अलावा कान साफ़ करने के लिए कभी भी तिल्ली या किसी नोकीली चीज का इस्तेमाल ना करें।

नोट : कान की किसी भी समस्या के लिए घर पर कुछ भी ना करें खासकर बच्चों के लिए। किसी भी समस्या के लिए सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लें और उसके बाद ही उपाय का इस्तेमाल करें।

कान का दर्द, कान में मैल, कान में जमी मैल, इयर वैक्स, कान साफ़ कैसे करें, कान को साफ़ करने के तरीके, कान का मैल निकालने के उपाय

कैसे दूर करें नोर्मल डिलीवरी के डर को?

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं यही चाहती है की उनका प्रसव सामान्य तरीके से हो। क्योंकि सामान्य प्रसव में उस समय तो थोड़ा दर्द सहना पड़ता है। लेकिन उसके बाद महिला को जल्दी रिकवर होने और शिशु को जन्म के समय होने वाली दिक्कत से बचाव करने में भी मदद मिलती है। लेकिन नोर्मल डिलीवरी को लेकर महिला के मन में डर भी होता है। जैसे की बहुत ज्यादा दर्द होगा, कहीं शिशु को तो इसके कारण कोई दिक्कत नहीं होगी, आदि।

और कुछ सभी लोगो की अलग अलग डिलीवरी के प्रति राय को सुनकर भी महिला का मन डर से भर जाता है। लेकिन इसके लिए आपको डरने की जरुरत नहीं होती है। तो आइये आज हम आपको नोर्मल डिलीवरी के कुछ आसान उपाय बताने जा रहे हैं। जो न केवल नोर्मल डिलीवरी के डर से आपको दूर करते हैं बल्कि सामान्य प्रसव के लिए आपके शरीर को तैयार करने में भी आपकी मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

किसी की बातों में न आएं

  • प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से लोग अपनी प्रेगनेंसी के एक्सपीरियंस को आपसे शेयर करते हैं।
  • कुछ लोग अच्छा बोलते हैं तो कुछ डरा भी देते हैं।
  • लेकिन गर्भवती महिला को उन नकारात्मक विचारों को अपने मन में नहीं बिठाना चाहिए।
  • क्योंकि ऐसा जरुरी नहीं है की जैसा उनके साथ हुआ हो वैसा आपके साथ भी हो।
  • क्योंकि उनके शरीर में और आपके शरीर में होने वाले बदलाव अलग हो सकते हैं।
  • ऐसे में सामान्य प्रसव के डर को कम करने के लिए जितना हो सके अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए और अच्छा सोचना चाहिए।

प्रसव के लक्षणों को समझे व् जानकारी इक्कठी करें

  • यदि महिला को नोर्मल डिलीवरी को लेकर डर लगा रहा है तो सबसे पहले आपको प्रसव की जानकारी इक्कठी करनी चाहिए।
  • ताकि बॉडी में होने वाले बदलाव को समझने में आपको आसानी हो सके और डिलीवरी के डर को कम करने में मदद मिल सके।
  • इसके लिए महिला किताबों, इंटरनेट, डॉक्टर आदि से पूरी जानकारी ले सकती है।

नोर्मल डिलीवरी के डर को कम करने के लिए रखें खान पान का ध्यान

  • गर्भवती महिला को डिलीवरी को लेकर डरने की बजाय अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • ताकि डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके।
  • और इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • खान पान में पोषक तत्वों से भरपूर आहार को शामिल करना चाहिए।
  • डेयरी प्रोडक्ट्स, फल, हरी सब्जियों, अंडे, नॉन वेज आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

नियंत्रित वजन

  • गर्भवती महिला को अपने वजन पर भी नियंत्रण रखना चाहिए।
  • क्योंकि वजन कम हो या ज्यादा हो दोनों ही डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को बढ़ा सकते हैं।
  • इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को न तो अपना वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ने देना चाहिए न ही कम होने देना चाहिए।

नोर्मल डिलीवरी के डर को कम करने के लिए रखें तनाव से दूरी

  • मानसिक रूप से परेशानी प्रेग्नेंट महिला के डिलीवरी के डर को बढ़ा सकती है।
  • साथ ही तनाव के कारण गर्भ में शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
  • ऐसे में इस परेशानी से बचने और डिलीवरी के डर को खत्म करने के लिए प्रेग्नेंट महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए।

खून की कमी

  • नोर्मल प्रसव में कोई समस्या न हो इससे बचाव के लिए महिला को शरीर में खून की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
  • क्योंकि शरीर में खून की कमी होने के कारण डिलीवरी के दौरान दिक्कतें बढ़ सकती है।
  • ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए आयरन की डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई का सेवन करें।
  • साथ ही अपनी डाइट में आयरन युक्त आहार का भी भरपूर सेवन करें।

अकेले न रहें

  • अकेले रहने से गर्भवती महिला का डिलीवरी के लिए प्रेग्नेंट महिला का डर बढ़ सकता है।
  • ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को इस दौरान अकेले रहने से बचना चाहिए।
  • आप चाहे तो घर के किसी सदस्य को नहीं तो कोई पूरे दिन के लिए नौकरानी आदि रख सकती हैं।

हाइड्रेट रहें

  • प्रेग्नेंट महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि महिला को हाइड्रेट रहने में मदद मिल सके।
  • क्योंकि हाइड्रेट रहने से डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है साथ ही गर्भ में शिशु भी स्वस्थ रहता है।

नोर्मल डिलीवरी के डर को कम करने के लिए करें हल्का व्यायाम

  • मानसिक व् शारीरिक रूप से रिलैक्स रहने के लिए महिला को हल्का फुल्का व्यायाम भी जरूर करना चाहिए।
  • इससे महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है जिससे नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • साथ ही व्यायाम करने से मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिलती है जिससे डिलीवरी के डर को दूर करने में भी मदद मिलती है।

मालिश करें

  • प्रसव को आसान बनाने के लिए महिला को पेट के निचले हिस्से की मालिश करनी चाहिए।
  • इससे महिला के शरीर को सामान्य प्रसव के लिए तैयार करने में मदद मिलती है।

नोर्मल डिलीवरी के डर को कम करने के लिए रखें डॉक्टर से संपर्क

  • आपको एक अच्छे से डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए ताकि आप अपनी प्रेगनेंसी का ट्रीटमेंट अच्छे से शुरू करने में मदद मिल सके।
  • सभी दवाइयां जो डॉक्टर द्वारा गर्भवती महिला को बताई गई हैं उन सभी दवाइयों का गर्भवती महिला को सेवन करना चाहिए।
  • टीकाकरण समय से करवाना चाहिए।
  • किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • पूरी प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए।
  • ताकि किसी भी तरह की दिक्कत से बचाव करने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला को ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला की नोर्मल डिलीवरी होने में मदद मिल सके। साथ ही नोर्मल डिलीवरी के दौरान लगने वाले डर को भी कम करने में मदद मिल सके।

गर्भ में शिशु को कोरोना से ऐसे बचाएं

गर्भावस्था में इम्युनिटी लेवल कमजोर होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। और गर्भवती महिला को यदि संक्रमण हो जाता है तो इसका खतरा गर्भ में शिशु के लिए भी बढ़ जाता है। और आज कल जब कोरोना वायरस इतना फ़ैल रहा है तो ऐसे में गर्भवती महिला को ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत है।

ताकि माँ व् बच्चे दोनों को इस खतरे से बचाने में मदद मिल सके। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जो प्रेग्नेंट महिला को जरूर ध्यान में रखने चाहिए ताकि गर्भवती महिला को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिल सके और बच्चा भी संक्रमण से बचा रहे।

हाथों की साफ़ सफाई

सबसे ज्यादा संक्रमण फैलने का खतरा हाथों से होता है क्योंकि सारा दिन हर काम को करने में आपके हाथ ही इस्तेमाल होते हैं। इसीलिए हाथों पर ही सबसे ज्यादा बैड बैक्टेरिया होने का खतरा होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने हाथों की साफ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और इसके लिए समय समय पर हाथों को साबुन व् पानी से अच्छे से धोना चाहिए, चाहे आप कोई काम करें या न करें लेकिन हाथों को जरूर धोएं। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला इस बात का ध्यान रखती है तो इससे माँ व् बच्चे को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है। और जितना हो सके प्रेग्नेंट महिला को सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए।

हॉस्पिटल जाने से बचे

आजकल हॉस्पिटल में संक्रमित मरीज़ों की संख्या तेजी से बढ़ रही है ऐसे में आपको अपने रूटीन चेकअप के लिए भी हॉस्पिटल जाने से बचना चाहिए। क्योंकि हॉस्पिटल जाने से भी बच्चे या आपको संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, ऐसे में फ़ोन पर अपनी डॉक्टर से बात करें। जब तक बहुत ज्यादा दिक्कत न हो तब तक हॉस्पिटल जाने से बचे।

संक्रमित लोगो से दूरी

यदि आपके आस पास ऐसा कोई है जिसे खांसी, जुखाम या अन्य कोई भी परेशानी है तो उस व्यक्ति के संपर्क में न आये। क्योंकि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

घर में भी पहने मास्क

प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके घर में भी मास्क पहनकर रखना चाहिए, खासकर जब महिला छत पर, बालकनी आदि में बैठी हो। ऐसा इसीलिए करें क्योंकि जितना प्रेग्नेंट महिला अपना ध्यान रखेगी उतना ही बच्चे को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलेगी।

बाहर से आये किसी व्यक्ति से न मिलें

यदि आपके घर में कोई बाहर से आता है तो आपको उससे नहीं मिलना चाहिए, और हो सके तो इस समय बाहर से किसी को अपने घर में ही नहीं आने देना चाहिए। क्योंकि आप नहीं जानते हैं की जो व्यक्ति आपके घर आया है वो कहा कहा गया था, ऐसे में संक्रमण का डर रहता है। इसीलिए गर्भवती महिला को इस बता का ध्यान रखना चाहिए।

बाहर से आने वाला सामान

यदि आपके घर में बाहर से कोई भी चीज आती है तो प्रेग्नेंट महिला को उसे तुरंत हाथ लगाने से बचना चाहिए, और अच्छे से धोने के बाद ही प्रयोग में लाना चाहिए। ऐसे में यदि आपके घर में केवल आप ही है तो आपको इन सभी कामों के लिए ग्लव्स का इस्तेमाल करना चाहिए। ताकि आपको और आपके बच्चे को संक्रमण के खतरे से बचे रहने में मदद मिल सके।

खान पान और आराम का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के दौरान इम्युनिटी लेवल को बढ़ाने के लिए लिए महिला को अच्छे से अपनी डाइट लेनी चाहिए और भरपूर आराम करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से जब इम्युनिटी बढ़ती है तो प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलेगी, लेकिन आपको इन सभी बातों का ध्यान केवल एक दिन नहीं बल्कि हमेशा रखना है। ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में भूलकर भी इन चीजों को नहीं खाना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि बेहतर खान पान जहां गर्भवती महिला व् बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करता है। वहीँ कुछ गलत आहार खाने से माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान भी होता है। और कुछ खाद्य पदार्थ तो ऐसे होते हैं जिनका सेवन करने से गर्भपात तक हो जाता है।

ऐसे में जरुरी है की गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें, और हर एक खाने की चीज के बारे में अच्छे से जानकारी होने के बाद ही उसका सेवन करें, ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। तो आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।

चाइनीज़ फ़ूड: चाइनीज़ फ़ूड में मोनो सोडियम गूलामेट होता है जो गर्भ में बच्चे के विकास को रोकने व् जन्म के समय शिशु को होने वाली बिमारियों का कारण बनता है।

कच्चा पपीता: कच्चे पपीते में लेटेक्स की मात्रा मौजूद होती है जो गर्भ में शिशु के विकास को रोकती है साथ ही इसके सेवन से महिला का गर्भपात व् समय से पहले बच्चे का जन्म होने का खतरा होता है।

अनानास: अनानास का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें भी कुछ ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जिससे प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में गर्भपात होने का खतरा रहता है।

कच्चा अंडा: कच्चे अंडे का सेवन भी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें साल्मोनेला नामक बैक्टेरिया मौजूद होता है। जो महिला की शारीरिक परेशानियां जैसे की डायरिया आदि को बढ़ाने के साथ, महिला व् बच्चे को संक्रमित भी कर सकता है। जिससे बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है।

कच्चा दूध: कच्चे दूध का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें भी लिस्टेरिया नामक बैक्टेरिया मौजूद होता है जो माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचाता है।

मर्करी युक्त मछली: प्रेग्नेंट महिला को मर्करी युक्त मछली का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है साथ ही गर्भपात होने का खतरा भी होता है।

अधपका मास: प्रेग्नेंट महिला को अच्छे से न पका हुआ मास, कच्चा मास, बासी व् ठंडा मास आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला की सेहत सम्बन्धी परेशानी बढ़ने के साथ बच्चे के विकास को भी नुकसान होता है।

बिना धुले फल व् सब्जियां: बिना धुले फल व् सब्जियां, बहुत से कटे पड़े फल व् सब्जियों का प्रयोग भी खाने के लिए नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनपर हानिकारक बैक्टेरिया का जमाव हो जाता है जिससे माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुँचता है।

मसालेदार भोजन: गर्भवती महिला को ज्यादा तले भुने, तेलीय व् मसालेदार भोजन का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़, अपच, जैसी परेशानी अधिक होती है।

डिब्बाबंद चीजें: डिब्बाबंद जूस, डिब्बाबंद अन्य चीजों का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसी चीजों को लम्बे समय तक सही रखने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जो की माँ व् बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होता है।

नशीली चीजें: नशीली चीजें जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि नशीली चीजों का सेवन करने से शिशु का विकास बुरी तरह प्रभावित होता है जिसकी वजह से गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म जैसी परेशानियां होती है।

कैफीन: चाय, कॉफ़ी व् अन्य खाद्य पदार्थ जिनमे कैफीन की मात्रा की अधिकता होती है उनका सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण बच्चे के वजन में कमी, महिला को गैस आदि की समस्या होने का खतरा रहता है। साथ ही अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करने से गर्भपात व् समय से पहले डिलीवरी होने की सम्भावना बढ़ती है।

कच्ची अंकुरित चीजें: कच्ची अंकुरित चीजों में साल्मोनेला, लिस्टेरिया, ई कोलाई जैसे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिससे प्रेग्नेंट महिला को फूड प्वॉयजनिंग की समस्या हो सकती है। साथ ही यह बैक्टेरिया बच्चे के विकास को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

गर्म तासीर वाली चीजें: प्रेग्नेंट महिला को उन चीजों का सेवन भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए जिनकी तासीर गर्म होती है क्योंकि इसके कारण गर्भपात व् समय से पहले बच्चा होने जैसी परेशानियां हो सकती है। जैसे की अंगूर, खजूर, अदरक, तिल, ड्राई फ्रूट्स, आदि।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन गर्भवती महिला को बिल्कुल भी प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला खान पान से जुडी इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद बॉडी के किन पार्ट को नहीं छूना चाहिए

डिलीवरी के बाद बॉडी के किन पार्ट को नहीं छूना चाहिए, डिलीवरी के बाद बॉडी के इन पार्ट्स को छूने से बचें, प्रसव के बाद महिला को कौन से बॉडी पार्ट्स को नहीं छूना चाहिए, डिलीवरी के बाद महिला न करें यह गलतियां, Do not touch these body parts after delivery

डिलीवरी के बाद गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव होना बहुत आम बात होती है, और यह सब बदलाव डिलीवरी के बाद बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण होते हैं। जिसके कारण महिला को त्वचा बहुत ही संवेदनशील हो जाती है, ऐसे में महिला को अपना बेहतर तरीके से ध्यान रखना पड़ता है साथ ही शिशु की भी अच्छे से केयर करनी पड़ती है। और इसके लिए जरुरी है महिला कुछ बातों का खास ध्यान रखे, जैसे की डिलीवरी के बाद महिला के कुछ बॉडी पार्ट्स होते हैं जिन्हे महिला को बार बार नहीं छूना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को शिशु से सम्बंधित परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला को कौन से अंगो को नहीं छूना चाहिए।

टांको को

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को टाँके लगाए जाते हैं, कुछ केस में नोर्मल डिलीवरी के दौरान भी महिला को टाँके लग सकते हैं। ऐसे में महिला को बार बार टांको को छूने से बचना चाहिए, और उन्हें डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई लगाने के समय और साफ़ सफाई के समय ही हाथ लगाना चाहिए। बार बार टांको को हाथ लगाने से दर्द की समस्या होने के साथ महिला को टांको में इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है।

ब्रेस्ट को न छुएं

स्तनपान के दौरान महिला को ब्रेस्ट को पकड़कर शिशु को दूध पिलाना चाहिए ताकि शिशु अच्छे से स्तनपान कर सकें। लेकिन महिला को बार बार ब्रेस्ट को पूरा दिन टच नहीं करनी चाहिए, न ही हर बार स्तनपान करवाने से पहले ब्रेस्ट को धोना चाहिए क्योंकि इससे ब्रेस्ट पर बैक्टेरिया का जमाव हो सकता है, जिसके कारण शिशु को इन्फेक्शन होने के चांस बढ़ सकते हैं।

प्राइवेट पार्ट

डिलीवरी के बाद महिला को दो से तीन हफ्ते तक लगातार ब्लीडिंग हो सकती है, जिसके कारण पेट में दर्द होना, महिला को पैड बदलने जाने की परेशानी होना आम बात होती है, क्योंकि इस दौरान गर्भवती महिला को बहुत अधिक ब्लीडिंग होती है। लेकिन बार बार प्राइवेट पार्ट को छूना भी सही बात नहीं होती है, क्योंकि इससे आपको प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है, दिन में तीन से हर बार पैड बदलने के अलावा फ्रैश होने पर ही आप अच्छे से साफ़ सफाई करें। और उसके बाद अच्छे से से हाथ धोकर सैनीटाइज़र का इस्तेमाल करने के बाद ही शिशु को हाथ लगाएं ताकि शिशु को भी इनेफ्क्शन की समस्या से बचाव करने में मदद मिल सके।

चेहरे की स्किन

कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद चेहरे पर दाने, मुहांसे जैसी समस्या भी हो जाती है, ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो बार बार दानों को न छुएं, और न ही उन्हें नाख़ून से कुरेदे इससे महिला को अधिक दाने हो सकते हैं जिससे उनकी ख़ूबसूरती पर बुरा असर पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ बॉडी पार्ट्स जिन्हे गर्भवती महिला को डिलीवरी के बाद बार बार नहीं छूना चाहिए। क्योंकि इससे गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए, साथ ही डिलीवरी के बाद जल्दी से फिट होने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए अपने खान पान का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

Hindi Video : Women should not touch these parts of their body after delivery

Things to Remember After Delivery

बच्चा होने के बाद शरीर को फिट रखने के लिए ये करें!

डिलीवरी के बाद एक नन्हे मेहमान के आने की ख़ुशी को लेकर महिला जितना उत्साहित होती है। तो उतनी ही चिंता महिला को शरीर में आने वाले बदलाव की भी होती है। क्योंकि खान पान में बदलाव, बॉडी में आ रहा परिवर्तन, अचानक से वजन बढ़ना, ब्रैस्ट शेप में बदलाव आना आदि। कई महिलाएं इस डर से बच्चे को स्तनपान भी नहीं करवाती है की उनका शेप खराब न हो जाए। लेकिन माँ का दूध बच्चे के लिए बहुत जरुरी होता है इससे बच्चे के विकास को तेजी से होने में मदद मिलती है।

और वैसे भी ये इतनी बड़ी परेशानी नहीं है की जिसका कोई हल न हो। डिलीवरी के बाद थोड़े दिन तक महिला को पहले अच्छे से आराम करना चाहिए, अपना और अपने बच्चे का दुगुना ध्यान रखना चाहिए। और कम से कम दो महीने के बाद अपने शरीर को फिट करने के बारे में सोचना चाहिए। और धीरे धीरे इसकी शुरुआत करनी चाहिए। ताकि बच्चे को भी पूरा पोषण मिलें और आपको भी फिट रहने में मदद मिले, तो आइये अब हम आपको कुछ ऐसे खास टिप्स बताते है जो आपको डिलीवरी के बाद फिट रहने में मदद करेंगे।

बच्चा होने के बाद शरीर को फिट रखने के टिप्स:-

हलके फुल्के व्यायाम से करें शुरुआत:-

exercise

फिटनेस के लिए सबसे जरुरी होता है की आप व्यायाम करें लेकिन डिलीवरी के बाद अचानक से ज्यादा कड़ा व्यायाम नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे आपके शरीर पर उल्टा प्रभाव पड़ सकता है। आप चाहे तो योगासन कर सकती है और आराम से थोड़ी बहुत एक्सरसाइज करे जिससे आपकी सेहत पर कोई उल्टा प्रभाव न पड़े।

पानी का सेवन भरपूर करें:-

महिला को डिलीवरी के बाद जितना हो सके गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए। इससे उनके शरीर की कैलोरी बर्न होती है और साथ ही चर्बी भी नहीं बढ़ती है। इसके अलावा आप चाहे तो दिन में एक समय नीबू व् शहद डालकर भी पानी का सेवन कर सकती है आपको फायदा मिलेगा।

संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करें:-

महिला को डिलीवरी के बाद अपने आहार के साथ बिलकुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए बल्कि जितना हो सके संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। और थोड़े थोड़े समय के बाद खाते रहना चाहिए। इससे महिला के शरीर को सभी पोषव तत्व मिलते है और बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है। याद रखें की दिन में बड़े मील लेने की जगह थोड़े थोड़े समय बाद ताजा व् पौष्टिक आहार लें।

मीठे व् तेलीय भोजन का सेवन कम करें:-

डिलीवरी के बाद भी अपने शरीर को फिट रखने के लिए आपको जितना हो सकें अधिक मीठे व् तेलीय भोजन का सेवन करने की बजाय हैल्थी आहार का सेवन करना चाहिए। क्योंकि यदि आप अधिक मीठा या तेलीय खाते है इससे आपका फैट बढ़ता है तो जितना हो सके इससे डिलीवरी के बाद परहेज रखें।

योगासन करें:-

योगासन न केवल आपकी बॉडी को फिट रखने में मदद करता है बल्कि आपको मानसिक परेशानी से राहत दिलाने में भी मदद करता है। इसीलिए सुबह उठकर योगासन करें इससे आपको फिट रहने और साथ ही फ्रेश रहने में मदद मिलेगी। परन्तु योगासन करते समय उन आसन से दुरी रखें जिन्हे करने में आपके शरीर को अधिक परेशानी हो सरल योगासन करें।

बैली रैप का इस्तेमाल करें:-

belly wrap

यह पेट पर बाँधने वाली एक बेल्ट होती है जो ज्यादातर महिलाओ को सिजेरियन डिलीवरी के बाद दी जाती है। इससे महिला के पेट की चर्बी न बढ़ने के साथ पीठ में रहने वाली दर्द की समस्या से भी निजात मिलता है। और इससे चर्बी इसलिए नहीं बढ़ती है क्योंकि यह आपके पेट के उत्तको और मांसपेशियों को फिट रखने में मदद करती है।

चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन न करें:-

चाय कॉफ़ी के अधिक सेवन से न केवल आपको परेशानी होगी बाल्की आपके शिशु पर भी इसका गलत असर पड़ता है। कई बार महिलाएं अपनी थकावट को दूर करने के लिए अधिक चाय कॉफ़ी का सेवन करती है जो की आपकी भूख को कम करता है और साथ ही इससे आपके शरीर को भी नुकसान होता है। इसकी जगह जूस आदि का सेवन करें।

नींद पूरी लें:-

वैसे भी हर व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। लेकिन डिलीवरी के बाद महिला को बच्चे के साथ अपनी नींद को पूरा करने में परेशानी होती है। तो इसके लिए चाहिए की महिला भी अपने शिशु के साथ आराम करें ताकि उसकी नींद पूरी हो। क्योंकि नींद पूरी न होने के कारण भी महिला को तनाव, चिड़चिड़ापन हो सकता है जो भी आपको अनफिट करता है इसीलिए भरपूर नींद लेनी चाहिए।

दालों का सेवन करें:-

डिलीवरी के बाद महिला को दालों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व न केवल महिला को बल्कि शिशु को भी फायदा देते है। यदि आप दाल का सूप आदि बनाकर पीती है तो इससे आपके वजन को भी नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद फिट रहने के अन्य टिप्स:-

  • खाने के बाद वाक हमेशा करें।
  • नींद के प्रति लापरवाही न करें यदि रात के समय आपकी नींद पूरी नहीं होतो दिन में अपनी नींद को पूरा करें।
  • तनाव न लें क्योंकि इससे भी आपकी बॉडी अनफिट रहती है।
  • शिशु के विकास और अपने शरीर को फिट रखने के लिए अपने आहार में हरी सब्जियों, फलों आदि को भरपूर मात्रा में शामिल करें।
  • ब्रेस्टफीडिंग करवाते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखें की आप अपने साइज की ब्रा पहने इससे आपकी ब्रैस्ट को शेप में रहने में मदद मिलती है।
  • ज्यादा देर तक बैठे नहीं खासकर शुरूआती दिनों में क्योंकि इसके कारण आपके पेट पर चर्बी बढ़ने लगती है।
  • महिलाओ की स्किन भी कई बार डल पड़ने लगती है इसीलिए अपने चेहरे की ख़ूबसूरती का भी ध्यान रखें।
  • खुश रहें और अपने मातृत्व को एन्जॉय करें।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके डिलीवरी के बाद भी अपनी बॉडी को वापिस शेप में ला सकते है। परन्तु यद् रखें की डिलीवरी के बाद एक दम से आप अपने शरीर पर ज्यादा दबाव न डालें। क्योंकि इससे आपके साथ आपके शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है। डिलीवरी के थोड़े दिनों बाद इन टिप्स का इस्तेमाल करके आप अपनी बॉडी को फिट कर सकते है।

इन चीजों को पीने के बाद गर्भ गिर जाता है

अनचाहा गर्भ

माँ बनने की ख़ुशी किसी भी महिला के लिए बहुत अहम होती है, लेकिन यदि महिला बिना प्लानिंग के गर्भधारण कर ले, तो यह ख़ुशी से ज्यादा महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, ऐसे में महिला गर्भपात करवाने की कोशिश कर सकती है। अनचाहे गर्भ का कारण सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल न करना हो सकता है, यदि गर्भ थोड़े दिन का हो तो इसे आसानी से गिराया जा सकता है, लेकिन गर्भ यदि तीन महीने का हो जाए तो इसके लिए डॉक्टर से राय लेना ही बेहतरीन विकल्प होता है। ऐसे में कुछ महिलाएं घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके इस परेशानी से निजात पा सकती है, तो कुछ डॉक्टर की राय लेना पसंद करती है।

अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए पेय पदार्थ

केवल दवाई का सेवन करने से या खाने पीने की चीजों का सेवन करने से ही गर्भपात नहीं होता है, बल्कि कुछ ऐसे पेय पदार्थ भी हैं जिनका जिन्हे पीने से भी गर्भपात की सम्भावना को बढ़ाया जा सकता है। तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे ही पेय पदार्थो के बारे में बताने जा रहे हैं।

पुदीने का तेल या चाय

यदि महिला दिन में तीन से चार बार खाने में या वैसे ही दो से तीन बूँदे पुदीने के तेल डालकर उसका सेवन करें, या फिर दिन में तीन से चार बार पुदीने की चाय का सेवन करें। क्योंकि इससे बॉडी का तापमान बढ़ता है, जिससे यह गर्भपात करने के लिए यह एक असरदार नुस्खे की तरह काम करता है।

ग्रीन टी

ग्रीन टी का सेवन करने से बॉडी को बहुत फायदा मिलता है, लेकिन गर्भवती महिला को इसका सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इसका सेवन करने से गर्भपात के चांस बढ़ जाते हैं, लेकिन यदि आप गर्भपात करना चाहती है तो दिन में तीन से चार बार ग्रीन टी का सेवन जरूर करना चाहिए।

कैफीन

कॉफ़ी, चाय, ब्लैक टी में कैफीन बहुत अधिक मात्रा में होता है। और कैफीन का सेवन अधिक मात्रा में करने से गर्भाशय में संकुचन की सम्भावना बढ़ जाती है। गर्भाशय में अधिक संकुचन का होना गर्भपात की सम्भावना को बढ़ाता है, ऐसे में महिला गर्भपात करने के लिए इस उपाय का इस्तेमाल भी कर सकती है, और जल्दी फायदे के लिए चाय में तुलसी, इलायची, आदि भी डाल सकते हैं।

बबूल के पत्ते

बबूल के पत्ते दो ग्राम लें, उसके बाद उसे उसे दो कप पानी में उबाल लें। पानी के आधा रहने तक उसे अच्छे से उबालते रहें, उसके बाद उसका सेवन करें। इस उपाय को नियमित दिन में दो बार तक तक करें जब तक गर्भपात नहीं हो जाता है।

अल्कोहल

अल्कोहल का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी में अल्कोहल का सेवन करने से गर्भवती महिला की सेहत पर बुरा असर पड़ने के साथ, गर्भ में भ्रूण के शारीरिक और मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ते हैं। साथ ही इसके कारण महिला का गर्भपात भी हो सकता है, ऐसे में यदि आप ड्रिंक करती हैं, और गर्भपात करना चाहती है तो आप अल्कोहल का सेवन कर सकती है।

तो यह हैं कुछ पेय पदार्थ जिनके सेवन से गर्भपात की सम्भावना को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा एक बात का और ध्यान रखना चाहिए की गर्भपात होने के बाद गर्भाशय की जांच जरूर करवानी चाहिए की कहीं टिश्यू तो नहीं रह गए। क्योंकि यदि यह टिश्यू गर्भाशय में रह जाते हैं तो इसके कारण बाद में महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।