Home Blog Page 202

गर्भवती महिला के लिए केसर के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान घर का हर सदस्य अपनी राय देना शुरू कर देता है फिर चाहे वो खान पान को लेकर हो, या फिर किसी काम को लेकर, इसका कारण होता है की घर का हर सदस्य यही चाहता है की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। ऐसे में कुछ लोग प्रेगनेंसी के दौरान केसर का सेवन करने की भी सलाह देते हैं। क्योंकि केसर सबसे महंगा हर्ब होने के साथ बहुत से औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है। साथ ही केसर में थियामाइन और रिबोफ्लेविन भी मौजूद होते है जो प्रेगनेंसी के दौरान काफी फायदेमंद होते है।

कुछ लोग तो ऐसा तक कहते हैं की यदि गर्भवती महिला केसर का सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु को गोरा पैदा होने में मदद मिलती है। साथ ही केसर का सेवन गर्भवती महिला यदि पर्याप्त मात्रा में करे तो ही इसका फायदा मिलता है। क्योंकि आवश्यकता से अधिक किसी भी चीज का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नुकसानदायक भी हो सकता है। पहली तिमाही में नहीं लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही से गर्भवती महिला केसर का सेवन शुरू कर सकती है। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान केसर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

आयरन मिलता है

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली आयरन की कमी होने के कारण एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में केसर का सेवन गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

हदय सम्बन्धी समस्या से बचाव

केसर में क्रोसेटीन, पोटैशियम, एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। जिससे गर्भवती महिला के कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को हदय सम्बन्धी समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

पाचन दुरुस्त रहता है

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसका कारण प्रेगनेंसी में बॉडी में ब्लड फ्लो में अनियमितता हो सकती है। ऐसे में केसर का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

ऐंठन से मिलती है राहत

प्रेगनेंसी के दौरान पेट में दर्द व ऐंठन की समस्या का होना आम बात होती है, ऐसे में केसर का सेवन करने से पेट में होने वाले दर्द की समस्या के साथ ऐंठन की समस्या से भी राहत पाने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर से आराम

ब्लड प्रैशर की समस्या से भी कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान परेशान हो सकती है, और इस समस्या से राहत पाने के लिए केसर एक असरदार उपाय होता है। इसके लिए गर्भवती महिला को दूध में डालकर नियमित केसर का सेवन करना चाहिए।

किडनी लिवर को रखता है दुरुस्त

केसर बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने के साथ ब्लड को साफ़ करने का भी काम करता है। और गर्भवती महिला यदि केसर का सेवन करती है तो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के किडनी व लिवर को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

आँखों की समस्या से निजात मिलता है

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान तनाव, कमजोरी या थकान, होने के कारण आँखों में दर्द, लाल होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में केसर का सेवन करने से गर्भवती महिला को आँखों से जुडी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

मॉर्निंग सिकनेस से आराम

ज्यादातर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या से परेशान रहती है। सुबह उठने में थकावट महसूस होना, उल्टी आना, जी मचलाना जैसी समस्या गर्भवती महिला को हो सकती हैं। और इस परेशानी से राहत के लिए केसर का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए एक असरदार उपाय में से एक होता है।

मूड स्विंग्स से निजात

गर्भवती महिला के शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग्स का होना भी आम बात होती है जिसके कारण महिला को चिड़चिड़ाहट होना, गुस्सा आना, तनाव आदि हो सकता है। और प्रेगनेंसी के दौरान अधिक तनाव महिला और शिशु दोनों के लिए चिंता का कारण हो सकता है। और मूड स्विंग्स की समस्या से निजात पाने के लिए केसर का सेवन करना एक बेहतरीन उपाय होता है।

प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है

प्रेगनेंसी के दौरान इन्फेक्शन व एलर्जी होने का भी खतरा रहता है, और यदि गर्भवती महिला केसर का सेवन करती है। तो इससे गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे एलर्जी व इन्फेक्शन जैसी परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

बेहतर नींद

वजन बढ़ने के कारण, प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों के कारण कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान अनिंद्रा की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला रात को सोने पहले केसर वाले दूध का सेवन करती है तो इससे बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

गर्भ में शिशु की हलचल

गर्भ में शिशु की हलचल किसी भी गर्भवती महिला के लिए उसकी प्रेगनेंसी का सबसे खास अनुभव होता है। और केसर का सेवन करने से गर्भ में शिशु की हलचल को बढाने में मदद मिलती है। क्योंकि केसर का सेवन करने से बॉडी का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है जिसके कारण शिशु की हलचल ज्यादा महसूस हो सकती है, लेकिन इसके लिए गर्भवती महिला को ज्यादा केसर का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गर्भवती महिला और शिशु के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

स्किन के लिए है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला महिला की स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए भी केसर का सेवन करना फायदेमंद होता है, साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत में भी निखार आता है, ऐसा बहुत से लोग मानते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान केसर का सेवन करने से मिलते है, केसर का सेवन करने से पहले आप चाहे तो एक बार डॉक्टर की राय भी ले सकते हैं।

प्रेगनेंसी में देसी घी खाने के फायदे और क्या इससे नोर्मल डिलीवरी होती है

पुराने समय से ही गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के समय और डिलीवरी के बाद देसी घी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि घी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आप भी देसी को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है। लेकिन देसी घी का सेवन करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है।

जैसे की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में घी का सेवन न करें, यदि आपका वजन बहुत ज्यादा है तो घी का सेवन न करें, जरुरत से ज्यादा घी का सेवन न करें। इन बातों का ध्यान रखते हुए गर्भवती महिला घी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने से गर्भवती महिला व् बच्चे को कौन से फायदे मिलते हैं।

पाचन क्रिया होती है बेहतर

घी में एंटी वायरल गुण मौजूद होते हैं जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। जिससे गर्भवती महिला को खाना हज़म करने में परेशानी नहीं होती है, कब्ज़ से राहत मिलती है, भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है, आदि। ऐसे में रोजाना ज्यादा नहीं लेकिन रोटी पर लगाकर सब्ज़ी में एक घी का छोटा चम्मच डालकर घी को अपनी डाइट का हिस्सा गर्भवती महिला को जरूर बनाना चाहिए।

शरीर को मिलती है ऊर्जा

विटामिन्स, फैट, मिनरल्स के साथ, एंटी बैक्टेरियल, एंटी वायरल गुणों से भी घी भरपूर होता है। ऐसे में घी का सेवन करने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ती है जिससे बिमारियों से बचे रहने के साथ ही गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

मूड होता है बेहतर

घी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को तनाव से राहत मिलती है और महिला का मूड बेहतर होता है। जिससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

बच्चे का विकास होता है बेहतर

प्रेगनेंसी की दूसरी व् तीसरी तिमाही में बच्चे का विकास तेजी से होता है जिसके लिए गर्भवती महिला को ज्यादा कैलोरीज़ की जरुरत होती है। और देसी घी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए और बच्चे के विकास के लिए जरुरी कैलोरीज़ मिलती है। जिससे बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होने में मदद मिलती है।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान घी खाने से नोर्मल डिलीवरी होती है?

ऐसा बहुत से लोगो से आपने भी सुना होगा की प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन करने से नोर्मल डिलीवरी होती है। लेकिन यह बात पूरी तरह सच नहीं है। लेकिन यह बात सच है की प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में और बच्चे का विकास बेहतर होने में मदद मिलती है। और माँ व् बच्चे का स्वस्थ रहना नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।

लेकिन यदि आपका वजन ज्यादा है या आप बहुत ज्यादा घी का सेवन करते हैं तो इससे महिला व् बच्चे दोनों का वजन बहुत ज्यादा हो जाता है जिससे डिलीवरी के दौरान परेशानी भी होती है। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की सिमित मात्रा में घी का सेवन करने से डिलीवरी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने में मदद मिलती है। और घी का सेवन ज्यादा करने से नुकसान भी हो सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी माँ बनने वाली हैं और प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने के बारे में सोच रही हैं। तो आप भी जरुरत के अनुसार घी का सेवन कर सकती है। लेकिन यह सोचकर घी का सेवन बिल्कुल न करें की घी खाने से आपकी नोर्मल डिलीवरी होगी।

प्रेग्नेंट महिला कोरोना वायरस से ऐसे बचें

प्रेग्नेंट महिला कोरोना वायरस से ऐसे बचें, प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत नाजुक समय होता है ऐसे में महिला को अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इम्युनिटी कमजोर होने के कारण महिला बहुत जल्दी किसी भी चीज से संक्रमित हो जाती है। और आज कल कोरोना वायरस के बहुत तेजी से फैलने का खतरा बढ़ गया है। और हर किसी व्यक्ति को अपनी सेहत के प्रति ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को और भी ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् उसमे पेट में पल रहे बच्चे को इस वायरस से बचें रहने में मदद मिल सके। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिलाओं को कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं। जो प्रेग्नेंट महिला को कोरोना वायरस से बचें रहने में मदद कर सकते हैं।

साफ सफाई

  • सबसे पहले प्रेग्नेंट महिला को अपने आस पास की साफ सफाई का ध्यान रखना है, जैसे की घर के लिए व् घर के आस पास के एरिया के लिए कीटाणुनाशक स्प्रे का इस्तेमाल करें।
  • ध्यान रखें की जो भी काम करें हाथों में ग्लव्स पहनकर करें।
  • अपने कपड़ों, बिस्तर, अपने सामान सभी को साफ रखें।
  • अपने द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला सामान जैसे की फ़ोन, टीवी का रिमोट आदि सभी को सैनिटाइज़र से साफ़ करें।
  • वाशरूम में जितनी बार जाएँ, जब भी किसी चीज को छुएं, उसके बाद अपने हाथों को अच्छे से साफ़ करें।
  • वाशरूम में थोड़ी भी गंदगी न रहने दें।
  • मैले कपडे, झूठे बर्तन ज्यादा इक्कठे न करें, और कपड़ों को डेटॉल में धोएं।

प्रेग्नेंट महिला कोरोना वायरस से बचने के लिए बार बार हाथ धोएं

  • कुछ करें चाहे न करें, थोड़ी थोड़ी देर बाद या तो साबुन से या सैनिटाइज़र से अपने हाथों को साफ़ करें।
  • पानी से हाथ धोने के बाद सूखे तोलिये या कॉटन के रुमाल से हाथ जरूर साफ करें।

मास्क पहनें

  • घर में हो चाहे बाहर मास्क जरूर पहनें।
  • ध्यान रखें की मास्क को बार बार हाथ न लगाएं।

प्रेग्नेंट महिला कोरोना वायरस से बचने के लिए भीड़भाड़ में न जाएँ

  • मूवी थिएटर, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, ट्यूशन सेंटर, फैमिली व फ्रैंड्स फंक्शन आदि में जाने से बचें।
  • घर में ही रहें, आस पास के पार्क आदि में जाने से भी बचें।

संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें

  • यदि किसी व्यक्ति को भी खांसी या जुखाम या अन्य कोई शारीरिक समस्या है तो उससे दूरी रखें।
  • क्योंकि प्रेग्नेंट महिला इससे बहुत जल्दी प्रभावित हो सकती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से प्रेग्नेंट महिला को कोरोना वायरस से बचें रहने में मदद मिल सकती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन टिप्स का ध्यान रखें इससे आपको और आपके बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी। इसके आलावा सैनिटाइज़र को हमेशा अपने पास रखें।

आईवीएफ के दौरान क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए

माँ बनना हर महिला की जिंदगी का सबसे बड़ा सुख होने के साथ एक प्यार भरा अहसास भी होता है। लेकिन कई बार किसी महिला या पुरुष में किसी कमी के होने के कारण महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है। ऐसे में यदि बहुत कोशिश के बाद भी महिला का गर्भ नहीं ठहरता है। तो आईवीएफ एक मेडिकल सुविधा है जिसका उपयोग करने से महिला आसानी से गर्भधारण कर सकती है। और माँ बनने के अपने सपने को पूरा कर सकती है। आईवीएफ कोई जटिल प्रक्रिया नहीं होती है।

लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान महिला को अपनी केयर अच्छे से करनी होती है। ताकि प्रेगनेंसी में हर तरह की दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके। और ऐसा भी नहीं है की आईवीएफ की प्रक्रिया के बाद महिला को नौ महीने तक बेड रेस्ट करना है। बस जैसे ही महिला की प्रेगनेंसी पूरी तरह से कन्फर्म हो जाती है। तो महिला भी सामान्य तरीके से प्रेगनेंसी होने वाली महिलाओं की तरह पूरी सावधानी रखते हुए रह सकती है। तो आइये पहले जानते हैं की आईवीएफ होता क्या है।

क्या है आईवीएफ?

आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक कृत्रिम तरीका है। जिसके इस्तेमाल से महिला का गर्भधारण करवाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में महिला के अंडाशय में से अंडे निकालकर पुरुष के शुक्राणु द्वारा निषेचित किये जाते हैं। जिस अंडे की क़्वालिटी सबसे अच्छी होती है उसी अंडे पर निषेचन किया जाता है। ताकि महिला के गर्भधारण की प्रक्रिया को सफल बनाने में मदद मिल सके। और फिर जब अंडा निषेचित ही जाता तो उसे लैब में रखा जाता है और यदि भ्रूण बनने के चांस होते हैं तो अंडे को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।

आईवीएफ के दौरान क्या खाएं

खान पान का ध्यान रखना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत जरुरी होता है। क्योंकि इससे महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की आईवीएफ के दौरान महिला को क्या क्या खाना चाहिए।

डेयरी प्रोडक्ट्स

  • कैल्शियम से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन महिला को जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि यह महिला की हड्डियों की मजबूती के साथ भ्रूण के शारीरिक विकास को बेहतर रखने में भी मदद करता है।
  • दूध का सेवन दिन में दो से तीन गिलास करने के साथ एक दिन में एक कटोरी दही का सेवन भी जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि दही प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ शिशु के विकास में भी मदद मिलती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

  • हरी सब्जियों में आयरन, फोलिक एसिड, फाइबर व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • जो बॉडी में खून की कमी को पूरा करने के साथ शिशु के मानसिक व् शारीरिक विकास को बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • इसीलिए महिला को पालक, ब्रोकली, व् अन्य हरी सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

फल

  • रसदार फल भी प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर फायदेमंद होते हैं।
  • क्योंकि यह बॉडी को पोषक तत्वों से भरपूर रखने के साथ हाइड्रेट रखने में भी मदद करते हैं।
  • जो की प्रेग्नेंट महिला और शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • और आईवीएफ द्वारा प्रेगनेंसी होने के बाद महिला को एवोकाडो, केला, अनार, आदि फलों का भरपूर सेवन करना चाहिए।

अंडे

  • प्रोटीन, फैट, कैल्शियम, choline जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अंडे का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि यह गर्भवती महिला व् शिशु के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • लेकिन प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से ही अंडो का सेवन प्रेग्नेंट महिला को करना चाहिए।

सूखे मेवे

  • ड्राई फ्रूट्स में भी पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होती है।
  • इसीलिए प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से रोजाना गर्भवती महिला को ड्राई फ्रूट का सेवन करना चाहिए।
  • इससे प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने के साथ भ्रूण के शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

दालें

  • दालें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन व् अन्य पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं।
  • जो गर्भवती महिला व् गर्भ में शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।
  • इसीलिए एक समय के आहार में प्रेग्नेंट महिला को किसी न किसी दाल का सेवन जरूर करना चाहिए।

पानी

  • खाने के साथ आईवीएफ द्वारा प्रेगनेंसी होने के बाद महिला को शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
  • क्योंकि बॉडी में डिहाइड्रेशन की समस्या प्रेगनेंसी में दिक्कत को बढ़ाने के साथ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
  • इसीलिए महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • तरल पदार्थों की मात्रा को बॉडी में सही रखने के लिए महिला जूस, नारियल पानी आदि का सेवन भी कर सकती है।

आईवीएफ के बाद क्या नहीं खाना चाहिए

  • कच्चा नॉन वेज, कच्चे अंडे, कच्ची सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • स्ट्रीट फ़ूड, ज्यादा मसालेदार व् तेलीय आहार, बासी खाना, ठंडा खाना, बिना ढके रखे हुए भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अधिक मात्रा में कैफीन युक्त आहार जैसे चाय कॉफ़ी का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
  • नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कच्चा दूध, सोडा, एनर्जी ड्रिंक, डिब्बाबंद जूस आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अधिक मीठे व् नमक के सेवन से बचना चाहिए।
  • समुंद्री भोजन जैसे की मरकरी युक्त मछली आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह है आईवीएफ द्वारा प्रेगनेंसी होने पर खान पान से जुड़े कुछ खास टिप्स। जो प्रेग्नेंट महिला को जरूर ध्यान में रखने चाहिए। साथ ही एक बार डॉक्टर से जरूर राय लें। ताकि किसी भी तरह की समस्या न हो।

प्रेगनेंसी कन्फर्म करने का सही तरीका क्या-क्या है?

प्रेगनेंसी कन्फर्म करने का सही तरीका क्या-क्या है,  माँ बनना हर महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है। और शादी के बाद यदि कभी भी महिला के पीरियड्स मिस हो जाते हैं। तो महिला के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है की कहीं “मैं प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई”। ऐसे में इस बात का पता लगाने के लिए महिलाएं आज कल घर पर भी जांच कर सकती है।

और यह जांच पीरियड्स मिस होने के कम से कम एक हफ्ते बाद महिलाओं को करनी चाहिए ताकि आपको सही परिणाम मिल सके। तो आइये अब जानते हैं की महिला प्रेगनेंसी कन्फर्म करने के लिए किन किन तरीकों का इस्तेमाल कर सकती है जो बिल्कुल सही और सटीक होते हैं।

डॉक्टर किन किन तरीको से करते हैं प्रेगनेंसी की जांच

यदि पीरियड्स के मिस होने के बाद आप डॉक्टर से जांच करवाते हैं तो डॉक्टर तीन तरीको का इस्तेमाल करके आपकी प्रेगनेंसी की जांच कर सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वह तरीके कौन से हैं।

यूरिन से: क्लिनिक में डॉक्टर यूरिन की मदद से प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। यूरिन में एचसीजी हार्मोन के स्तर को देखकर आपकी प्रेगनेंसी का परिणाम बताया जाता है।

ब्लड टेस्ट: ब्लड टेस्ट के माध्यम से भी महिला की प्रेगनेंसी की जांच की जा सकती है। इस टेस्ट में महिला को यदि एक्टोपिक प्रेगनेंसी है तो उसका भी पता चल जाता है।

अल्ट्रासॉउन्ड: कई बार डॉक्टर अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से भी महिला की प्रेगनेंसी की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा आइये अब प्रेगनेंसी टेस्ट के अन्य तरीको के बारे में जानते हैं।

प्रेगनेंसी कन्फर्म करने के लिए इस्तेमाल करें प्रेगनेंसी टेस्ट किट

  • आज कल मार्किट में प्रेगनेंसी टेस्ट किट मिल जाती है।
  • जिसमे यूरिन का सैंपल डालकर आसानी से पता लगाया जा सकता है की महिला प्रेग्नेंट हैं या नहीं।
  • इसके लिए प्रेगनेंसी किट में में यूरिन सैंपल डालने वाली जगह पर सुबह के सबसे पहले यूरिन को ड्रॉपर की मदद से दो से तीन बून्द डालें।
  • इसके बाद पांच से दस मिनट तक देखें यदि C (कण्ट्रोल लाइन) और T (टेस्ट लाइन) दोनों डार्क हो जाती है तो मुबारक हो टेस्ट पॉजिटिव है।
  • लेकिन यदि केवल C (कण्ट्रोल लाइन) दिखाई दे तो इसका मतलब होता है की टेस्ट नेगेटिव हैं।
  • और यदि T (टेस्ट लाइन) या कोई भी लाइन न दिखाई दे तो इसका मतलब होता है की आपके द्वारा किया गया टेस्ट गलत है।
  • प्रेगनेंसी टेस्ट किट के परिणाम अधिकतर सही आते हैं।

प्रेगनेंसी टेस्ट करने के घरेलू तरीके

टेस्ट किट के अलावा महिलाएं कुछ घरेलू तरीकों का इस्तेमाल करके भी प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं। और घरेलू प्रेगनेंसी टेस्ट के नतीजे भी अधिकतर सही आते हैं। तो आइये अब जानते हैं की महिलाएं घर पर किन तरीको का इस्तेमाल करके प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है।

टूथपेस्ट की मदद से प्रेगनेंसी टेस्ट

  • एक गिलास में सुबह का पहला यूरिन लें उसके बाद उसमे टूथपेस्ट को मिक्स करें।
  • टूथपेस्ट को मिक्स करने के बाद इस मिश्रण को रख दें।
  • और करीबन एक घंटे बाद किसी स्टिक की मदद से या ब्रश की मदद से इस पेस्ट को हिलाएं।
  • यदि यह मिश्रण झागदार होने के साथ इसका रंग नीला हो जाता है।
  • तो इसका मतलब है की आपका रिजल्ट पॉजिटिव हैं।
  • और यदि ऐसा कुछ नहीं होता है तो परिणाम नेगेटिव होता है।

प्रेगनेंसी कन्फर्म करने के लिए इस्तेमाल करें बेकिंग सोडा

  • इस तरीके का इस्तेमाल करने के लिए एक डिस्पोजल गिलास में दो चम्मच बेकिंग सोडा डालें।
  • और उसके बाद उसमे उतना सुबह का पहला यूरिन मिलाएं की बेकिंग सोडा उसमे अच्छे से मिक्स हो सके।
  • अब इस मिश्रण को मिक्स करें, यदि मिक्स करने पर आपको मिश्रण के ऊपर बुलबुले से महसूस होते हैं।
  • तो यह इस बात का संकेत होता है की आप माँ बनने वाली हैं।

डेटॉल

  • एक डिस्पोजल गिलास में सुबह का पहला यूरिन और डेटॉल को बराबर मात्रा में मिलाएं।
  • उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स करें, यदि मिक्स करने के बाद भी डेटॉल यूरिन के ऊपर तैरने लगती है।
  • तो यह प्रेगनेंसी टेस्ट के पॉजिटिव होने की तरफ इशारा करता है।
  • लेकिन यदि मिश्रण सफ़ेद हो जाता है तो यह प्रेगनेंसी टेस्ट के नेगेटिव होने की तरफ इशारा करता है।

प्रेगनेंसी कन्फर्म करने के लिए इस्तेमाल करें सिरका

  • एक डिस्पोजल गिलास में सुबह का पहला यूरिन लें और थोड़ा सा सिरका मिलाएं।
  • अब इस मिश्रण को अच्छे से मिक्स करें।
  • यदि मिश्रण का रंग बदल जाता है तो यह महिला के गर्भवती होने की तरफ इशारा करता है।

चीनी

  • सुबह के पहले यूरिन में थोड़ी सी चीनी डालकर मिक्स करें।
  • यदि चीनी पूरी घुल जाती है तो यह आपके गर्भवती न होने का संकेत होता है।
  • जबकि यदि चीनी यूरिन में घुलने की बजाय इक्कठी होने लगती है तो यह आपके गर्भवती होने का संकेत होता है।

तो यह हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करके महिलाएं आसानी से घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं। इन टेस्ट के बाद आपको एक बार डॉक्टर से भी जांच करवानी चाहिए। ताकि आपका प्रेगनेंसी का सही ट्रीटमेंट शुरू हो सके।

करेला बहुत गुणकारी है इसके सेवन से ये फायदे होंगे!

0

स्वाद में कड़वा और रंग में हरा लगने वाल करेला आपके सवास्थ्य के लिए बड़ा ही गुणकारी होता है, इसका सेवन बच्चे बहुत कम करना पसंद करते है, परंतु इसके फायदे जान कर आप इसका सेवन आज से ही करना शुरू कर देंगे, ये किसी औषधि से कम नहीं होता है, और इसका इस्तेमाल बहुत सी दवाइयों को बनाने के लिए भी किया जाता है, तो आइये अब जानते है करेले के बाए में कुछ और बातें।

करेला किसी औषधि से कम नहीं होता है, और आपके शरीर की बहुत सी बीमारियों को खत्म करने में ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है, चाहे फिर वो बवासीर की समस्या हो, या शुगर लेवल की, आपकी भूख को बढ़ाने के साथ आपकी त्वचा के लिए भी करेला बहुत फायदेमंद होता है, इसका सेवन कई लोग सब्ज़ी बनाकर भी करते है, जिसके कारण इसकी कड़वाहट कम हो जाती है, कई लोग तो करेले का अचार भी बनाते है, परंतु इसे ज्यादा लोग खाना पसंद नहीं करते है, परंतु यदि आपको यदि अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना है, तो आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए, और साथ ही करेले का जूस भी बनता है, और इसके भी बहुत फायदे होते है, तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है की करेले के गुणकारी लाभ आपके स्वास्थ्य के लिए।

शुगर को करता हैं कण्ट्रोल:-

शुगर के मरीज़ों के लिए करेला किसी वरदान से कम नहीं होता है, करेले में मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्व होते है, जो आपको आपके ब्लड शुगर लेवल को कण्ट्रोल करने में मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप करेले के जूस में गाजर का जूस मिलाकर सेवन कर सकते है, या आप करेले को सूखाकर उसका पाउडर बना लें, और अपनी सब्ज़ी व् खाने में इसे डाल कर खाएं, इससे भी आपको बहुत फायदा मिलता है, और इसका सबसे ज्यादा फायदा उठाने के लिए नियमित रूप से सुनह उठ कर करेले के जूस का सेवन करें, आपका शुगर लेवल हमेशा कण्ट्रोल में रहेगा।

पत्थरी के रोगियो के लिए भी करेला होता है फायदेमंद:-

करेले का सेवन करने से आपको स्टोन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, यदि आप रोजाना नियमित रूप से करेले के जूस व् सब्ज़ी का सेवन करते है, तो इसके कारण आपकी पत्थरी गल जाती है, और धीरे धीरे पिघल कर बाहर आने लगती है, इसके अलावा यदि आप करेले के रस में शहद मिलाकर उसका सेवन करते है, तो इसके कारण भी पत्थरी पिघल कर पेशाब के रास्ते बाहर आ जाती है, और आपको इस समस्या से राहत मिलती है।

पाचन तंत्र को करता है मजबूत:-

करेले का सेवन करने से आपके पाचन तंत्र को मजबूत होने के साथ आपकी भूख को बढ़ने में भी मदद मिलती है, करेले में एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है, जिसके कारण शरीर में ऑक्सिन का लेवल बढ़ता है, और और आपके भोजन को टूटने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपका भोजन जल्दी पचता है, इसीलिए यदि आपको भूख नहीं लगती है, या आपके पाचन तंत्र को मजबूत करने के लिए रोजाना करेले का जूस या सब्ज़ी का सेवन करना चाहिए।

त्वचा के लिए है फायदेमंद:-

skin

करेले का सेवन आपके त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, करेले में पाएं जाने वाले बिटर्स और एल्केलाइड तत्व आपके रक्त को साफ़ करने का काम करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप करेले के जूस का सेवन कर सकते है, या नियमित रूप से आप करेले की सब्ज़ी का भी सेवन कर सकते है, इसके अलावा यदि आप करेले को मिक्सी में पीस कर रात को सोते समय यदि अपनी त्वचा चाहे वो चेहरे की हो या कही और की, उस पर होने वाले दाग धब्बे और फोड़े फुंसी को खत्म करने में मदद मिलती है, साथ ही दाद खुजली आदि समस्या की समाधान के लिए भी आप इसका इस्तेमाल कर सकती है।

हदय रोगियो के लिए है फायदेमंद:-

करेले का सेवन करने से आपकी बॉडी में कोलेस्ट्रॉल का लेवल सामान्य रहता है, इसके कारण आपके शरीर में रक्त की सफाई होने से रक्त का संचरण भी अच्छे से होता है, जिसके कारण हार्ट अटैक जैसे खतरे भी कम हो जाते है, यदि आपको भी ऐसी कोई समस्या है तो आपको करेले का सेवन जरूर करना चाहिए, और साथ ही नियमित रूप से यदि आप करेले के जूस का सेवन करते है तो भी आपको बहुत फायदा मिलता है।

वजन कण्ट्रोल करने के लिए करें करेले का सेवन:-

यदि आप अपने वजन को कण्ट्रोल करना चाहते है, तो आपके लिए करेला फायदेमंद हो सकते है, इसके अंदर कुछ ऐसे एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है, जो आपके शरीर से विषैले तत्वो को मूत्र मार्ग के जरिये शरीर से बाहर निकालता है, जिससे आपको वजन कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए करेले के रस में कुछ बुँदे निम्बू के रस की मिलाएं, और सुबह खली पेट इसका सेवन करें, इसके कारण आपके मेटाबोलिज्म को बढ़ावा मिलता है, और साथ ही आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त होने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपका वजन कण्ट्रोल में रहता है।

बवासीर के रोगियो के लिए है फायदेमंद:-

करेले का सेवन करने से जिन लोगो को खूनी बवासीर की समस्या होती है, उससे राहत पाने में मदद मिलती है, इसके सेवन के लिए आप करेले के रस में आधा चम्मच शक्कर मिलाकर एक महीने तक इसका सेवन करें, इसके कारण आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलेगी, और इसका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होता है।

जोड़ो के दर्द से राहत दिलाता है:-

जोड़ो के दर्द का इलाज

आज कल जोड़ो में दर्द की समस्या हर तीसरे व्यक्ति को होती है, जिसके कारण न वो उठ सकता है, और न ही आराम से बैठ सकते है, हर वक़्त उनके हाथ अपने घटनो पर ही होते है, और करेले का सेवन करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए यदि रोगी करेले की पत्तियो को पीस कर एक लेप तैयार करें और इसे अपने जोड़ो पर लगा कर मसाज करें, तो आपको इस समस्या से राहत मिलती है इसके साथ  यदि आप चाहे तो करेले और तिल के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर उससे अपने जॉइंट्स की मसाज करती है, तो इसके कारण आपको जोड़ो के दर्द से राहत मिलती है।

करेला खाने के अन्य फायदे:-

  • उलटी दस्त या हैजा की समस्या होने पर यदि आप करेले के रस में थोड़ा पाई और नमक दाल कर सेवन करते है, तो आपको फायदा मिलता है।
  • करेले में फॉस्फोरस की मात्रा पर्याप्त होने के कारण, ये आपको पुराने से पुराने कफ की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है।
  • खांसी से राहत पाने में भी करेला बहुत मदद करता है।
  • गठिया की समस्या होने पर भी करेला का जूस पीने से आपको फायदा मिलता है।
  • यदि आपको कही जलन आदि की समस्या है तो भी आप करेले के रस से वहाँ मालिश करके जलन से राहत पा सकते है।
  • कब्ज़ में कुछ ऐसे फाइबर होते है जो आपके पेट को साफ़ रखने में मदद करते है, जिसके कारण आपको कब्ज़ की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • करेले में विटामिन ए की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण ये आपको आँखों की रौशनी को बढ़ाने में मदद मिलती है, साथ ही जिनको शाम के समय कम दिखाई देने लगता है, उनके इस समस्या से भी छुटकारा मिल जाता है।

जैसे कहा जाता है बुरा दिखने वाला इंसान बुरा नहीं होता है, और कड़वा बोलने वालो से ही लोग परहेज करते है, क्योंकि उन्हें सच अच्छा नहीं लगता है, परंतु वो उनके फायदे के लिए होता है, उसी प्रकार करेले का स्वासद चाहे कितना ही कड़वा हो, और देखने में भी अच्छा नहीं लगता हो, परंतु इसके कारण आपको बहुत से स्वास्थ्य संबंधी लाभ होते है, इसीलिए यदि आपको अपने स्वास्थ्य को सही रखना है या आपको इन में से कोई शारीरिक परेशानी है, तो इसका सेवन करके आप कुछ ही दिनों में इस समस्या से राहत पा सकते है।

गुटखा खाने से क्या नुक्सान होते हैं, कैसे छुड़ायें गुटखा खाने की आदत को 

तम्बाकू को हम बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, पान, पान मसाला, जर्दा, चैनी खैनी, आदि के रूप में इस्तेमाल करते है। इसके सेवन से नशा होता है जो बाद में बहुत नुकसान पहुँचाता है। तम्बाकू का सेवन किसी भी रूप में किया जाये नुकसान ही करता है। आज हम गुटखा से होने वाले नुकसान की चर्चा करेंगे और आपको बतायेंगे की कैसे इसकी लत को छोड़ा जाये। अंतराष्‍ट्रीय तंबाकू सर्वेक्षण के अनुसार भारत की 40% आबादी धुवाँ रहित तम्बाकू का सेवन गुटखा, जर्दा, खैनी के रूप में करती है। तम्बाकू के सेवन से पूरी दुनिया में हर साल 50 लाख से अधिक लोगो की मौत हो जाती है। तम्बाकू में निकोटीन तत्व होता है जिसको खाने से इसकी आदत हो जाती है। बार बार इसे खाने की इक्षा होती है।

एक दो बार खाने पर गुटखा की लत आसानी से लग जाती है और व्यक्ति दिन भर में 10 से 15 पुड़िया गुटखा का सेवन कर लेता है। कई बार इसकी अधिक लत लग जाने पर व्यक्ति 20 से 30 पुड़िया गुटखा खा जाता है। यह सभी दुकानों पर आसानी से मिल जाता है। इसकी कीमत भी दूसरी नशीली चीजो से कम होती है, इसलिए बड़ो, बूढों से लेकर कम आयु के बच्चे भी इसका शिकार हो जाते है।

गुटखा खाने से होने वाले नुकसान-

  • दांत खराब होते है- गुटखा का नियमित सेवन करने वाले लोगो में दांतों से जुडी अनेक समस्यायें उत्पन्न हो जाती है। दांतों का रंग सफ़ेद से लाल हो जाता है, दांत गल जाते है, ढीले हो जाते है और सड़न पैदा हो जाती है।
  • मुंह का कैंसर होता है– हमारे देश में हर साल तम्बाकू जनित मुंह और गले के कैंसर के हर साल 10 लाख मामले सामने आ रहे है। धुंआ रहित तम्बाकू में 3000 से अधिक रासायनिक तत्व होते है जो 30 प्रकार का कैंसर पैदा करते है। पूरे विश्व में मुंह के कैंसर के रोगियों की सबसे जादा संख्या भारत में है। गुटखा के नियमित सेवन से मुंह में जीभ, जबड़ों और गालो के भीतर कैंसर कोशिकायें जन्म ले लेती है। उसके बाद मुंह खुलना बंद हो जाता है। विभिन्न तरह की परेशानियाँ पैदा हो जाती है। व्यक्ति की जान जा सकती है।
  • फेफड़ों का कैंसर होता है- नियमित गुटखा खाने से गले, श्वासनली से होते हुए कैंसर फेफड़ों तक पहुँच जाता है।
  • मुंह के विभिन्न रोगों को जन्म देता है- पान मसाला, गुटखा आदि के सेवन से सासों से भयंकर दुर्गन्ध आने लगती है। मसूड़ो को बहुत नुकसान पहुँचता है। मसूड़े फूल जाते है, दांतों की जड़ कमजोर हो जाती है। पायरिया रोग की शुरुवात हो जाती है। दांत गिरना शुरू हो जाता है।
  • हाई ब्लडप्रेशर होता है- जो लोग रोज गुटखा, पान मसाला जैसे पदार्थ का सेवन करते है उसका ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है। इसके साथ साथ हृदय रोगों का खतरा रहता है। लकवा मार सकता है। आँखों की रोशनी तक जा सकती है।
  • यौन शक्ति को कम करता है- इसे खाने से नपुंसकता बढ़ती है। गुटखा का सेवन शरीर में सेक्स हार्मोंस को कम कर देता है जिससे यौन शक्ति कम हो जाती है। यौनेच्छा प्रभावित होती है।
  • होने वाले बच्चे पर बुरा प्रभाव- गर्भधारण के समय गुटखा, तम्बाकू, जर्दा, खैनी का सेवन करने से होने वाले बच्चे को अनेक रोग होने की सम्भावना रहती है।

गुटखा छोड़ने के उपाय-

  • चुइंगम चबायें- अगर आपको भी गुटखा खाने की बुरी लत है तो इसके स्थान पर चुइंगम खायें। इसे चबाते रहे। धीरे धीरे जब गुटखा खाने की तलब लगे चुइंगम ही खाया करें। इससे ये आदत छूट जायेगी।
  • व्यायाम करें- इसे करने से निकोटीन युक्त नशीले पदार्थ लेने की तलब कम हो जाती है।
  • खुद को व्यस्त रखे- आमतौर पर गुटखा व अन्य तम्बाकू उत्पाद खाने की तलब खाली समय में अधिक लगती है इसलिए खुद को किसी न किसी काम में व्यस्त रखे। जैसे- फोन से किसी से बात करें, या कम्प्यूटर में कोई गेम खेलने लग जायें। आप टीवी भी देख सकते है। संगीत सुनना भी अच्छा विकल्प है। ऐसा काम करें की आपको तम्बाकू पदार्थ की याद न आये।
  • गुटखा की जगह माउथफ्रेशनर खाये- अक्सर गुटखा खाने वालों ही आदत बन जाती है कि मुंह में कुछ न कुछ पड़ा रहे। इसलिए माउथफ्रेशनर खाते रहे।
  • अदरक चबायें- जब गुटखा खाने का दिल करे तो इसे खायें। अदरक को छोटे छोटे टुकड़ों में काट ले, इस पर नीबू का रस डालें, थोड़ा काला नमक और अजवायन मिला लें। सभी को अच्छे से मिलाकर सुखा ले और एक बॉक्स में रख लें। जब भी तंबाकू, गुटखा खाने का मन करे इसे खायें। चबाते और चूसते रहें। इससे आपका ध्यान गुटखा से हट जायेगा और अपच, गैस, कब्ज से मुक्ति मिलेगी। पेट की बिमारी नही होगी।
  • अनारदाने का सेवन करें– इससे भी तम्बाकू की लत छूटती है। पाचन तंत्र स्वस्थ्य रहता है।
  • सौंफ को मिश्री के दाने के साथ चूसे- जब भी गुटखा आदि नशीले पदार्थ खाने का दिल करे आप सौफ को मिश्री के साथ धीरे धीरे चूसे। इससे आपका मुंह फ्रेश रहेगा, ताजगी बनी रहेगी। लत छूट जायेगी।
  • विटामिन सी का सेवन करें- निकोटीन की लत को विटामिन सी का सेवन करके दूर कर सकते है। भरपूर मात्रा में विटामिन सी लेने से निकोटीन लेने की इक्षा कम हो जाती है। रसदार फलो जैसे- अंगूर, संतरा, चुकंदर, पालक, नींबू, आंवला, टमाटर आदि का सेवन करना चाहिये। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है।
  • मजबूत इक्षाशक्ति से तम्बाकू सेवन छोड़े– यहाँ सवाल आपके जीवन का है। इसके सेवन से हानि आपको ही होगी। इसलिए आपको अपने मन में मजबूत इक्षाशक्ति जगानी होगी। ये बुरा शौक आपके परिवार के अन्य लोगो, बच्चो, महिलाओं को भी लग सकता है। इसलिए आप इसे छोड़ने की कोशिश करें।
  • गुटखा खिलाने वाले दोस्तों से दूर रहें- आपके ऐसे दोस्त जो नियमित तौर पर गुटखा जैसे तम्बाकू उत्पाद खाते है उनसे न मिले। इसकी बहुत संभावना है की वो आपको फिर से गुटखा खाने को दे सकते है।

निष्कर्ष: गुटखा खाने से कुछ मिनटों का आनन्द भले ही मिल जाता है पर असल में ये मौत का दूसरा नाम है। यही वजह है कि तम्बाकू उत्पादों के पैकेट के 40% भाग पर कैंसर की चेतावनी दी जाती है। ये बात स्पष्ट है कि गुटखा खाने की लत आसानी से नही छूटती है। पर आपको इससे होने वाले भारी नुकसान के बारे में सोचना होगा।

आपके आस पास ऐसे अनेक लोग होंगे जिनको पान मसाला, गुटखा और तम्बाकू जैसे उत्पाद के सेवन से मुंह में या किसी और अंग में कैंसर हो गया होगा और उनका ओपरेशन हुआ होगा। ऐसे उदाहरण से आपको सीख लेनी चाहिये। आज के लेख में हमने आपको गुटखा सेवन से होने वाले गम्भीर खतरे और इसको छोड़ने के उपाय बताये हैं। मजबूत इक्षाशक्ति के द्वारा ही आप इससे छुटकारा पा सकते है। ये लेख आपको कैसा लगा, जरुर बतायें।

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की कमी को दूर करने के उपाय

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की कमी को दूर करने के उपाय, महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या होने के कारण, महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने के घरेलू नुस्खे

इनफर्टिलिटी की समस्या होने के कारण महिला गर्भधारण करने में असमर्थ रहती है, और महिलाओं में होने वाली इस समस्या के बहुत से कारण हो सकते हैं। जैसे की महिला का किसी शारीरिक समस्या, गर्भाशय से जुडी कोई परेशानी या फिर महिला की गलत आदतें भी हो सकती हैं। एनीमिया, फैलोपियन ट्यूब से जुडी कोई समस्या, गर्भाशय फाइब्रॉएड, थायरॉयड, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, यौन संचारित रोग, शराब व् धूम्रपान की लत, शरीर में पोषक तत्वों की कमी कुछ भी हो सकते हैं। लेकिन यह कोई ऐसी समस्या भी नहीं होती है की इसका इलाज न हो बल्कि समय पर यदि इसका इलाज किया जाए तो आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की कमी को दूर करने के उपाय

महिलाओं में होने वाली इनफर्टिलिटी की समस्या का इलाज किया जा सकता है, तो आज हम आपको महिलाओं से जुडी इस परेशानी का इलाज बताने जा रहें हैं। यदि आपको भी यह समस्या है तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकती हैं।

दालचीनी

डिम्ब ग्रंथि में होने वाली समस्या को दूर करने के लिए दालचीनी का इस्तेमाल बहुत ही प्रभावी होता है, साथ ही पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की परेशानी को खत्म करने में भी यह आपकी मदद करता हैं जिससे आपकी फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके उपयोग के लिए आप नियमित एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर डालकर उसका सेवन करें, साथ ही सब्जियों, सलाद के ऊपर भी दालचीनी पाउडर का छिड़काव करके सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।

अनार

पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर अनार का सेवन करने से आपको प्रजनन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है क्योंकि इसके से गर्भाशय में रक्त का प्रवाह बेहतर होने लगता है, जिसके कारण गर्भ की परत मोटी हो जाती है। और भ्रूण को गर्भ में भरपूर पोषण दे सकती है, इसके लिए आप ताजे अनार का नियमित सेवन करने के साथ अनार के जूस का सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं।

तिल का तेल

शुक्राणुओं की गुणवत्ता को बढ़ाने को उन्हें गतिशील बनाने के लिए तिल के तेल का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही नियमित तिल के तेल को गुनगुना करके पेट पर मालिश करने से गर्भाशय में ऑक्सीजन के प्रवाह में सुधार आता है, जिससे प्रजनन क्षमता बेहतर होती है, और मालिश करके आपको नहाना जरूर चाहिए।

शतावरी

शातावरी का सेवन भी महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने, अंडाणु को पोषण देने के साथ महिला की यौन इच्छा को बढ़ाने में भी मदद करता है। साथ ही इसके कारण एस्ट्रोजन के उत्पादन में भी वृद्धि होती है। जिसके कारण मासिक धर्म को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। और महिला का गर्भ ठहरने के चांस बढ़ते हैं।

खजूर

खजूर भी महिलाओं में प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच हरे धनिये के साथ दस से बारह खजूर के बीज निकालकर अच्छे से पीस लें। उसके बाद एक कप गाय के दूध में इसे उबालें, और ठंडा करके नियमित इसका सेवन करें साथ ही आप वैसे भी खजूर का सेवन कर सकते हैं। इससे आपको बहुत फायदा मिलता है।

बरगद की छाल

बरगद की छाल को पीसकर उसका चूर्ण तैयार करें, और एक चम्मच चूर्ण का सेवन एक गिलास दूध में डालकर नियमित करें। आप चाहे तो इसमें थोड़ा चीनी भी मिला सकते हैं, लगभग छह महीने तक नियमित इसे करें और पीरियड्स के दौरान इसका सेवन न करें। ऐसा करने से आपको प्रजनन अंगो में होने वाले विकार को दूर करके उसे बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

अश्वगंधा चूर्ण

रोजाना पांच ग्राम अश्वगंधा चूर्ण का सेवन गर्म दूध में डालकर करने से आपको प्रजनन क्षमता बढ़ाने के साथ हार्मोनल विकार सम्बन्धी समस्या से भी निजात मिलता है। और नियमित इसका सेवन करने से आपको गर्भधारण करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास उपाय जिनका इस्तेमाल करने से आप इनफर्टिलिटी से जुडी इस समस्या का समाधान कर सकते हैं, और यदि इसका कारण आपकी किसी शारीरिक समस्या से जुड़ा होता है तो इसके लिए आपको डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। ताकि इसका इलाज हो सकें और आप माँ बनने का खास अनुभव ले सकें। और साथ ही आपको योगासन करना चाहिए, भरपूर पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करना चाहिए ताकि आपको फिट रहने में मदद मिल सकें।

कपड़ों से दाग छुड़ाने के तरीके

कपड़ों से दाग छुड़ाने के तरीके

हल्दी या सब्जी के दाग, चाय के दाग, इंक (स्याही) के दाग, जंग के दाग, पान और कत्थे के दाग कपड़ो से दाग कैसे हटाएँ

व्यक्ति की पहचान हमेशा से ही सबसे पहले उसके कपडे देख कर की जाती है। जिस व्यक्ति या महिला के कपडे सुंदर, साफ़ और जितने आकर्षित होते है लोग उनसे बात करने के लिए आतुर रहते हैं। और आकर्षण का केंद्र भी वही लोग जल्दी और पहले बनते है। गंदे कपडे पहनने वाले की तुलना में साफ़ सुथरे कपडे पहनने वाले को अधिक प्रतिष्ठा मिलती  है।

जब भी हम कहीं बहार जाते है तो अच्छे और साफ़ कपडे पहनना ही पसंद करते है। क्यूंकि वही एक तरह से हमारी  पहचान भी बन जाते है। पर ऐसे में क्या हो जब हमारे कपड़ो पर कोई दाग लग जाये? दाग लग गया ये तो एक बार को ठीक भी है पर अगर वो दाग आसानी से नहीं जाये तब हम क्या करें ? कितने परेशान हो जाते है हम। लेकिन इस परेशानी से भी छुटकारा आसानी से मिल जाता है।

तो आइए आज इस आर्टिकल के माधयम से जानते है कि अगर कपड़ो पर दाग लग जाये तो उन्हें आसानी से हटाने के क्या तरीके हैं।

चाय के दाग

चाय के दाग हटाने के लिए आप उबले आलू के साथ उसके पानी में ही कुछ देर के लिए छोड़ दें। और उसके बाद उसे अच्छी तरह से  साबुन से धो लें।

चाय का दाग यदि अचानक लग जाये तो आप तुरंत ही कोई भी टेलकम पाउडर का प्रयोग कर सकते है।

गिल्सरीन से भी चाय का दाग हटाने में मदद मिलती है। उसके लिए आप जिस जगह चाय या कॉफ़ी के दाग लग गए हैं, गिल्सरीन लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। दाग तुरंत हैट जायेंगे।

सोडियम टेट्राबोरेट से भी चाय और कॉफ़ी के दाग चले जाते है। थोड़े से पानी में सोडियम टेट्राबोरेट का घोल बनाकर दाग की जगह लगा दें। फिर उसके बाद कपडे को साफ़ पानी से धो दें। जरूरत हो तो साबुन का प्रयोग करें।

यदि चाय या कॉफ़ी पीते समय या फिर अचानक दाग लग जाये तो शक्कर भी उस दाग पर डाल सकते हैं। इससे शक्कर तुरंत ही चाय कॉफ़ी के दाग को सोख लेगी और दाग आसानी से छूट जायेगा।

हल्दी या सब्जी के दाग

हल्दी का दाग हटाने के लिए आप बेसन का इस्तेमाल करें। इसके लिए आप थोड़ा सा बेसन घोल कर दाग वाली जगह पर लगा दें और धूप  में कुछ देर के लिए सूखा दें। दाग आसानी से निकल जायेगा।

स्प्रिट को थोड़ा पानी में घोल बनाकर दाग पर लगा दें। उसके बाद उसे साबुन से धो लें। दाग निकल जायेगा।

दाग हटाने के लिए हाइड्रोजन पराक्साइड की कुछ बूंदें कपडे पर लगे दाग पर डाल दें और धूप में सूखने दें। उसके बाद आप देखेंगे की दाग है ही नहीं। दाग बिलकुल निकल गया है।

अगर संभव हो तो सबसे पहले आप जब भी हल्दी का दाग लगे तो उसे साफ़ पानी और साबुन से धो लें। ऐसा करने से भी दाग तुरंत ही निकल जाता है।

इंक (स्याही) के दाग

पेन के दाग निकलने के लिए 5 मिनट तक हेयर स्प्रै का इस्तेमाल करें। और उसके बाद उसे ड्रायर करने से पहले इस बात का जरूर ध्यान रखें की दाग पूरी तरह निकल गया हो, नहीं तो वह दाग परमानेंट हो जायेगा।

पेन के दाग को हटाने के लिए उबले हुए चावल का मांड इस्तेमाल करें। इसके लिए कुछ देर मांड के पानी में दाग वाले कपडे को डाल दें और उसके बाद जब आप देखेंगे तो दाग पूरी तरह से मिट जायेगा।

सिरका भी बड़े काम आता है दाग हटाने के लिए। इंक लगी जगह पर कुछ देर के लिए सिरका डाल कर रख दें और फिर इसे धो लें।

क्या आप जानते है की टूथपेस्ट से केवल दांत ही साफ़ नहीं होते बल्कि दाग भी हटाए जा सकते है। जी हां जिस कपडे पर दाग लग गया हो उसके दोनों तरफ टूथपेस्ट लगाने से इंक के दाग छूट जाते है।

लगभग 30 मिनट तक यदि स्याही के दाग वाले कपडे को छाछ में भिगोकर छोड़ दिया जाये तो भी ये दाग आसानी से निकल जाते हैं।

जंग के दाग

जंग के दाग निकलने के लिए निम्बू के रस को दाग पर लगा देना कुछ देर के लिए छोड़ दें। उसके बाद उसे गरम पानी से धो लें। दाग निकल जायेंगे।

सिरके से भी दाग निकल जाते हैं।  दाग को थोड़ी देर लिए सिरके में अच्छी तरह से भिगो कर रख दें।  उसके बाद उसे साबुन से धो लें।  कपड़ो पे से दाग़ हमेशा के लिए निकल जायेगा।

फ़टे दूध का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके लिए फटा हुआ दूध थोड़ा थोड़ा करके अच्छी तरह से दाग पर मसलने से दाग छूट  जायेगा।

कॉर्नस्टार्च को दूध के साथ मिलाकर लगाने से भी दाग आसानी से निकल जाता है।

पान और कत्थे के दाग 

पान के दाग हटाने के लिए उस पर कच्चा आलू  पीसकर आलू के रस के साथ ही दाग पर लगा दें।  कुछ देर बाद आप जब कपड़ो को धोएंगे तब तक दाग पूरी तरह निकल गया होगा।

नीबू को भी दाग पर लगा कर अच्छी तरह रगड़ने से दाग चले जाते है।

दही का भी प्रयोग करने से दाग निकल जाते है। इसके लिए दाग वाली जगह पर आप थोड़ी देर दही लगा रहने दें, और फिर साबुन से धो लें।

पान और कत्थे के दाग हटाने में प्याज का रस भी बहुत कारागार होता है। प्याज के रस को निकल कर दाग और कुछ देर लगा रहने दें ,और उसके बाद धो लें।

तो यह थे कुछ घरेलु तरीके जिन्हे अपनाकर आप अपने कपड़ो से दाग बिलकुल निकाल सकते हैं। और अपने कपड़ो की सुंदरता को भी हमेशा के लिए बरकरार रख सकते है। तो यदि कभी भी इस तरह की कोई दाग से जुडी हरि परेशानी आये तो परेशान न होएं और इन तरीकों का इस्तेमाल जरूर करें।

प्रेगनेंसी में राजमा खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने के लिए, शिशु के बेहतर विकास के लिए, प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कॉम्प्लीकेशन्स से बचाने के लिए महिला को अतिरिक्त ऊर्जा और न्यूट्रिएंट्स की जरुरत होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को ऐसी चीजों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है जो न्यूट्रिएंट्स से भरपूर हो और माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद भी हो।

और ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ है राजमा जिसे किडनी बीन्स कहा जाता है। राजमा का सेवन गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों के लिए ही बहुत फायदेमंद होता है। इसीलिए गर्भवती महिला को सिमित मात्रा में अपनी डाइट में किडनी बीन्स को जरूर शामिल करना चाहिए।

क्यों करना चाहिए गर्भवती महिला को राजमा का सेवन?

राजमा में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फाइबर, विटामिन सी व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो न केवल प्रेग्नेंट महिला को फिट रखते हैं बल्कि गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। इसीलिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान राजमा का सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला को राजमा खाने से पेट सम्बंधित या अन्य कोई भी परेशानी होती है तो राजमा का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में राजमा का सेवन करने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला न्यूट्रिएंट्स से भरपूर राजमा का सेवन करती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को बहुत से फायदे मिलते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों को फिट रखते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में राजमा का सेवन करने के कुछ फायदे:-

आयरन

राजमा में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता हैं। जिससे गर्भवती महिला को खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही शिशु के बेहतर विकास के लिए पर्याप्त मात्रा में रक्त शिशु तक पहुँचता है।

डाइट्री फाइबर

डाइट्री फाइबर से भरपूर राजमा गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ बॉडी में कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल करने, ब्लड में शुगर के लेवल को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है।

कैल्शियम

राजमा में कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करके महिला को ऊर्जा से भरपूर रखता है। जिससे गर्भवती महिला को थकान, कमजोरी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही इसका सेवन करने से शिशु की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

मैग्नीशियम

मैग्नीशियम ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने, हदय को स्वस्थ रखने, मांसपेशियों को आराम पहुंचाने आदि में बहुत फायदेमंद होता है। और राजमा में मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में इन फायदों के लिए राजमा का सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।

एंटीऑक्सीडेंट्स

राजमा में विटामिन सी, विटामिन बी 6, जिंक, फोलेट, विटामिन के जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला को इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

प्रोटीन

राजमा प्रोटीन का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला की मांसपशियों में आई कमजोरी को दूर करने के साथ गर्भ में बच्चे की कोशिकाओं के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को राजमा का सेवन करने से मिलते हैं। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी सिमित मात्रा में राजमा का सेवन जरूर करना चाहिए। आप सब्ज़ी, चाट, सूप आदि बनाकर राजमा को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा राजमा का सेवन न करें क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज गर्भावस्था के दौरान परेशानी खड़ी कर सकती है।