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पैर में मोच आने पर करें यह उपाय

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पैर में मोच आना एक आम समस्या होती है जैसे की कभी कभी चलते हुए, खेलते हुए, या अचानक किसी कारण पैर मुड़ जाता है। जिसके कारण पैर में बहुत तेज दर्द का अनुभव होता है और साथ ही सूजन भी होने लगती है। ऐसे में कई बार दर्द असहनीय हो जाता है क्योंकि मांसपेशियों में अधिक खिंचाव के साथ ब्लड सर्कुलशन भी धीरे होने लगता है। ऐसे में यदि आप मोच लगने के बाद तुरंत डॉक्टर के पास नहीं जा सकें तो आप नीचे दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है। यदि आप इन टिप्स का इस्तेमाल करते हैं तो आपको पैर में आने वाली मोच की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

पैर में मोच आने पर इन टिप्स का इस्तेमाल करें:-

पैर में मोच आने पर बहुत अधिक दर्द व् चलने में परेशानी होती है। और कई बार तो मोच आने के कारण पैर में सूजन भी होने लगती है। इसीलिए आज हम आपको पैर की मोच का इलाज बताने जा रहें हैं जिससे आपको मोच की समस्या से राहत मिलेगी।

हल्दी का इस्तेमाल करें:-

हल्दी को यदि गुणों की खान कहा जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि यह आपकी बहुत शरीर से सम्बंधित परेशानी का हल करती है। ऐसे ही हल्दी का इस्तेमाल आप मोच की समस्या से राहत के लिए भी कर सकते है। इसके लिए आप एक चम्मच हल्दी में पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और उसके बाद इस पेस्ट को हल्का गर्म करें। उसके बाद इसे मोच की जगह पर लगाकर कम से कम दो घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।

बर्फ से करें सिकाई:-

बर्फ न केवल मोच के दर्द से आपको आराम दिलाती है बल्कि मोच के कारण होने वाली सूजन को भी इससे कम किया जा सकता है। इसके लिए आपको हर दो से तीन घंटे में कम से कम बीस मिनट के लिए बर्फ को किसी कपडे से ढक कर मोच वाली जगह की सिकाई करनी चाहिए। इससे आपको मोच से बहुत जल्दी आराम पाने में मदद मिलती है।

चूना और शहद भी है मोच के लिए असरदार उपाय:-

एक चम्मच शहद में थोड़ा सा चूना मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद उस पेस्ट से मोच वाली जगह पर अच्छे से मसाज करें। ऐसा दिन में दो बार जब तक करें, जब तक की आपको मोच से आराम न मिलें। इससे आपको दर्द के साथ सूजन को खत्म करने में भी मदद मिलती है क्योंकि जब आप इससे मसाज करते हैं तो इससे आपके ब्लड को सर्कुलेट होने में मदद मिलती है।

पान के पत्ते से भी मोच में मिलता है आराम:-

पान के पत्ते की एक साइड सरसों का तेल अच्छे से लगाएं और उसके बाद उसे किसी बर्तन में डालकर गर्म कर लें। गर्म करने के बाद इसे मोच वाली जगह पर अच्छे से थोड़ी देर के लिए बाँध लें, आपको मोच से आराम मिलेगा। ऐसा दिन में कम से कम दो बार जरूर करें।

तुलसी के पत्तों का करें प्रयोग:-

तुलसी एक आयुर्वेदिक औषधि की तरह काम करती है, इसीलिए यह आपकी मोच को भी दूर करने का एक असरदार उपाय है। इसके लिए आप तुलसी के आठ दस पत्तों को पीस कर उनका रस निकाल लें, और उसके बाद इस रस को सरसों के तेल में डालकर गर्म करें। जब यह गर्म हो जाए तो इससे अपने पैर की अच्छे से मसाज करें और हल्का कपडा बाँध लें ऐसा दिन में चार से पांच बार करें।

नमक और सरसों का तेल उपयोग करें:-

सरसों के तेल में नमक को डालकर अच्छे से गर्म करें और उसके बाद इसे अपनी मोच पर अच्छे से लगाएं, और फिर कपडा बाँध कर सो जाएँ। इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपको मोच से आराम मिलने में मदद मिलती है।

फिटकरी का करें इस्तेमाल:-

मोच के दर्द से आराम दिलाने के लिए फिटकरी भी बहुत फायदेमंद होती है। इसके लिए आप एक चम्मच का चौथा हिस्सा फिटकरी का चूर्ण लें और उसे एक गिलास गर्म दूध में अच्छे से मिक्स करें, और उसके बाद उसे पी जाए। ऐसा करने से भी आपको पैर में आई मोच से आराम मिलता है।

लहसुन का करें प्रयोग:-

इस उपाय को करने के लिए आप लहसुन की कलियों को पीसकर उनका रस निकाल लें, उसके बाद इसे बादाम या नारियल के तेल में बराबर अनुपात (जितना लहसुन का रस है) में डालकर मिक्स कर लें। और उसके बाद इसे गुनगुना करके अच्छे से अपने पैर पर लगाएं। इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपको मोच से राहत पाने में मदद मिलती है।

मोच से राहत के अन्य टिप्स:-

  • मोच में जल्दी राहत के लिए जितना हो सके आपको आराम करना चाहिए, क्योंकि यदि आप आराम न करके अपने पैरों पर जोर डालते है तो इससे आपको ज्यादा दर्द का अनुभव होता है।
  • पट्टी या बैंडेज बाँधने से भी आपको मोच के दर्द से आराम मिलता है, लेकिन ध्यान रखने की आप पट्टी को ज्यादा टाइट न बांधे इससे ब्लड सर्कुलशन धीमा होने लगता है, और आपको अधिक दर्द का अनुभव हो सकता है।
  • पैरों के नीचे एक तकिया रखें इससे आपके पैर थोड़ा ऊपर रहेगा जिससे ब्लड को अच्छे से फ्लो होने में मदद मिलेगी। और इससे सूजन और दर्द को कम होने में मदद मिलेगी।
  • सरसों के तेल में हल्दी डालकर अच्छे से मसाज करें इससे भी आपको आराम मिलता है।
  • एलोवेरा जेल से मसाज करने पर भी पैर की मोच से राहत मिलती है।
  • मोच लगने पर हल्दी वाला दूध जरूर पीना चाहिए।
  • तेज पत्ते और लौंग के पाउडर को पानी के साथ अच्छे से मिक्स करें और उसके बाद इसे लेप की तरह मोच पर लगाकर छोड़ दें। इससे भी आपको मोच से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप मोच की समस्या से राहत पा सकते है, इसके आलावा यदि आपकी सूजन बढ़ती जा रही है तो एक बार डॉक्टर को दिखाना चाहिए। या फिर जब आपका पैर मुड़ा है या चोट लगी है और खून आने लग गया है तो भी आपको इसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ताकि यदि ज्यादा परेशानी हो तो आपको आराम मिल सकें।

गर्भवती महिला को गरम दूध पीना चाहिए या ठंडा? जानिए

प्रेगनेंसी में दूध

कैल्शियम से भरपूर दूध का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। दूध का सेवन करने से बॉडी में कैल्शियम की कमी पूरी करने में मदद मिलती है जिससे हड्डियों को मजबूती मिलती है और गर्भवती महिला को कमजोरी, थकावट जैसी समस्या से आराम मिलने के साथ ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए भी दूध का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन दूध को लेकर गर्भवती महिला के मन में बहुत सवाल होते हैं, तो आइये अब उन सवालों और उनके जवाब के बारे में जानते हैं।

प्रेगनेंसी में कौन सा दूध पीना चाहिए?

गर्भवती महिला को कच्चे दूध का सेवन कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को पेट से सम्बंधित समस्या होने के साथ डायरिया जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। साथ ही कच्चे दूध के सेवन के कारण गर्भवती महिला को इन्फेक्शन जैसी परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में दूध का सेवन करने से पहले उसे अच्छे से उबाल लेना बहुत जरुरी होता है, और मलाई रहित दूध का सेवन करना भी बेहतर होता है।

कैसे करें दूध का सेवन?

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला की जीभ के स्वाद में भी परिवर्तन आ सकता है। ऐसे में कई बार गर्भवती महिला का प्लेन दूध पीने की इच्छा नहीं होती है, तो इसमें स्वाद को बदलने के लिए फलों के साथ इसका शेक, ड्राई फ्रूट्स मिक्स करने के बाद दूध बनाकर, बादाम का दूध, केसर मिल्क आदि का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है।

दूध पीने का सही समय कौन सा है?

वैसे तो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में दिन में दो से तीन गिलास दूध का सेवन करना चाहिए, लेकिन सुबह के समय गर्भवती महिला को दूध पीने से बचना चाहिए। क्योंकि सुबह के समय दूध पीने से पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है, जिसके कारण जिससे भूख में कमी आ सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को दोपहर, शाम, या रात को दूध का सेवन करना चाहिए। और गर्भवती महिला यदि रात को बेड पर जाने से एक गिलास गुनगुने दूध का सेवन करती है तो इससे बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

गर्भवती महिला को गरम दूध पीना चाहिए या ठंडा?

गर्भवती महिला को न तो बहुत ज्यादा गरम दूध का सेवन करना चाहिए और न ही फ्रिज से निकाले बिल्कुल ठन्डे दूध का सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह दोनों ही गर्भवती महिला की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में जब भी दूध का सेवन करना हो तो हल्का गुनगुना करने के बाद ही दूध पीना चाहिए। क्योंकि इससे बॉडी को आराम मिलता है, और किसी तरह की परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता है। और यदि आप ठंडा दूध पीना चाहती है तो थोड़ी देर फ्रिज में रख सकती है, क्योंकि शेक के लिए गर्म दूध ठीक नहीं होता है। लेकिन दूध को ठंडा करने के लिए आइस क्यूब का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान दूध पीने से जुड़े कुछ खास टिप्स, ऐसे में गर्भवती महिला को दूध पीते समय इन बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को दूध का फायदा मिल सके।

गोरा बच्चा पैदा करने के लिए सूखा नारियल या कच्चा नारियल खाना चाहिए

प्रेगनेंसी में नारियल

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को घर का हर सदस्य, रिश्तेदार, सहेलियां अपने अनुभव के आधार पर बहुत सी सलाह देती है। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान यदि खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखा जाए तो ऐसा करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। लेकिन फिर भी कुछ खाने पीने की चीजों को लेकर महिला के मन में सवाल रहता है की इसे खाएं या नहीं, जैसे की नारियल। प्रेगनेंसी के समय बहुत सी महिलाएं पूछती है की नारियल का सेवन करना चाहिए या नहीं।

तो इसका जवाब होता है, हाँ, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान नारियल का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत से फायदे मिलते हैं। क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसके अलावा आप प्रेगनेंसी के दौरान सूखे नारियल, हरे नारियल, नारियल पानी, मलाई वाले नारियल का सेवन कर सकती है। नारियल का सेवन करने से गर्भवती महिला इम्यून सिस्टम को मजबूत करने, कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल करने, डिहाइड्रेशन की समस्या से सुरक्षित रहने, बॉडी में खून की कमी को पूरा करने, पेट सम्बन्धी समस्या से बचाव करने, मॉर्निंग सिकनेस से निजात पाने, मूड को बेहतर रखने, आदि में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में कौन सा नारियल खाने से बच्चा गोरा होता है

हर महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ, हष्ट पुष्ट, बुद्धिमान, गोरा व् सूंदर हो। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को कुछ ऐसे आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है जिससे शिशु को गोरा पैदा करने में मदद मिलती है। इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को हरा नारियल खाने और नारियल पानी पीने की सलाह दी जाती है। क्योंकि नारियल में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है जो की शिशु की स्किन को निखारने के साथ बालों की चमक को बरकरार रखने में भी मदद करती है।

इसके अलावा नारियल का सफ़ेद रंग स्किन में मौजूद मेलेनिन में मिलकर रक्त संचार को बेहतर करने में भी मदद करता है। जिसके चलते स्किन के रंग को बेहतर करने में मदद मिलती है, ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान शिशु की रंगत में निखार लाने के लिए नारियल का सेवन कर सकती है। और इसका सेवन केवल शिशु की रंगत में निखार लाने के लिए ही नहीं बल्कि नारियल का सेवन करने से गर्भवती महिला को होने वाले फायदों के लिए भी करना चाहिए।

तो यदि आप भी माँ बनने वाली है और गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत में निखार लाने के साथ उसके बेहतर विकास में मदद करना चाहती है। तो आप भी चाहे तो अपनी डाइट में नारियल का सेवन कर सकती है।

चेहरा जब खुरदरा हो तो कैसे ठीक करें?

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सुंदर और जवान दिखना भला किसे पसंद नहीं होता है। सभी चाहते है के उनके चेहरे की रौनक बनी रहे। कुछ महिलाओं का तो कॉन्फिडेंस उनकी सुंदरता के साथ बढ़ता और घटता है। वैसे भी सुंदर चेहरा हमारी पहचान भी तो बन जाता है। लड़का हो या लड़की हर कोई सुंदर चेहरे के लिए बहुत कुछ करता है। बहुत से लोग सुन्दर चेहरे के लिए महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल और पार्लर में कई घण्टों का समय और पैसा भी लगाते है। पर अक्सर सभी को उनका मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाता।

ना चाहते हुए भी भागती जिंदगी, धुप, गर्मी, प्रदूषण और रोजाना के कामकाज का असर हमारे चेहरे पर आ ही जाता है। जिसके कारण बहुत सी स्किन रिलेटेड समस्याएं हो जाती है। जैसे के चेहरे का कालापन, चेहरे के पोर्स का बंद होना या जरूरत से ज्यादा खुला हो जाना आदि। त्वचा के रोमछिद्रों की समस्या से हमारा चेहरा खुरदरा लगने लगता है, जिसके कारण यह अपनी चमक खो देता है।

चेहरे का खुरदरापन दूर करने का तरीका

धूल, मिटटी, कील-मुहांसो और गलत तरीके से किये गए फेशियल के कारण भी हमारे चेहरे के पोर्स ओपन हो जाते है। जिससे हमारा चेहरा खुरदरा और भद्दा दिखने लगता है।

आइये जानते क्या उपाय करके हम चेहरे का खुरदरापन दूर कर सकते है।

टमाटर  का रस:

  • टमाटर का ताजा रस निकालिये।
  • इस रस से चेहरे की 10 मिनट तक मसाज करें।
  • हल्के हाथो से मसाज करने के बाद चेहरे को धो लें।
  • इस उपाय को सप्ताह में दो बार करने से चेहरे का खुरदरापन धीरे धीरे दूर हो जायेगा।
  • टमाटर का रस चेहरे को सॉफ्ट भी बनाता है।

आलू का रस:

  • आलू का ताजा रस और निम्बू के रस की कुछ बुँदे ले।
  • अच्छे से मिक्स करने के बाद चेहरे पर मालिश करें।
  • इस उपाय को रोजाना करना है।
  • आलू के रस में एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते है।
  • निम्बू अपने प्राकृतिक एसिडिक गुणों के लिए जाना जाता है।
  • दोनों के उपयोग से आपके चेहरे के पोर्स बंद हो जायेंगे।
  • साथ ही इस उपाय से आपका चेहरा सुंदर, सॉफ्ट और चमकदार बनेगा।
  • इस उपाय को एक सप्ताह करने से ही आपको फर्क महसूस होगा।

बेसन और दहीं:

  • बेसन और दहीं को बराबर मात्रा में ले।
  • अच्छे से मिक्स करने के बाद इस पैक को अपने चेहरे पर लगाए।
  • सूखने के बाद पानी से धो लीजिए।
  • इस पैक से आपके चेहरा का खुरदरापन दूर होगा।
  • यदि आपकी स्किन ऑयली है तो इस पैक में आप निम्बू की कुछ बूंदो को भी मिला सकते है।
  • इस पैक को रोजाना या फिर हफ्ते में 2 से 3 बार भी इस्तेमाल कर सकते है।
  • दहीं का प्रयोग आपकी त्वचा के कालेपन को भी दूर करेगा।

पपीता:

  • पपीते को अच्छे से मैश करें।
  • इसमें शहद और कच्चा दूध मिलाये।
  • इस पैक को अपने चेहरे पर लगाए।
  • सूखने के बाद चेहरे को हल्के गुनगुने पाने से धो लीजिये।
  • इस पैक से आपके चेहरे की स्किन टाइट होगी जिससे पोर्स धीरे धीरे छोटे होंगे।
  • पपीते के इस्तेमाल से आपका चेहरा पर ग्लो भी आएगा।
  • शहद एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर होता है जो हमारी त्वचा को मॉइस्चराइज़ करके सॉफ्ट बनाता है।
  • कच्चा दूध त्वचा की रंगत निखारने के काम आता है।

इनमे से कोई भी तरीका अपनाकर आप अपने चेहरे का खुरदरापन दूर कर सकते है। पर ध्यान रखिये चेहरे के पोर्स साफ़ सफाई ना होने पर बड़े होते है जिसके कारण आपका चेहरा खुरदरा हो जाता है। इसके लिए जरुरी है के आप अपने चेहरे को अच्छे से साफ़ रखें। दिन में कम से कम दो बार चेहरे को धोइये, ऐसा करने से धूल मिटटी आपकी त्वचा पर ज्यादा नहीं जमेगी।

ब्लैक हेड्स हटाने के 5 उपाय

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नाक, माथे और ठुड्डी पर होने वाले ब्लैकहेड्स से अधिकतर लड़कियां परेशान रहती है। जिसका कारण धूल, मिट्टी और वर्तमान का प्रदूषण होता है। कितनी ही कोशिश कर लें, बाहर का प्रदूषण चेहरे पर अपना असर दिखा देता है। इसके अलावा बदलती जीवनशैली के कारण खान-पान में लापरवाही के चलते भी चेहरे पर ब्लैक हेड्स की समस्या हो जाती है।

चेहरे पर ब्लैकहेड्स होना स्किन के लिए ठीक नहीं होता। क्यूंकि ब्लैकहेड्स के कारण स्किन के पोर्स बंद हो जाते हैं जिसके कारण त्वचा को पूरी तरह से ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। परिणामस्वरूप स्किन में प्रोब्लम्स होने लगती हैं। कई लोग ब्लैकहेड्स को दबाकर निकालने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस तरह ब्लैकहेड निकालने से त्वचा पर दाग पड़ सकते हैं। इन्हे हटाने का सबसे बेहतर तरीका है घरेलू टिप्स। घरेलू उपायों की मदद से बिना किसी परेशानी के चेहरे के ब्लैक हेड्स को साफ़ किया जा सकता है। आज हम आपको ब्लैक हैड्स हटाने के उपाय बता रहे हैं।

ब्लैक हेड्स हटाने के घरेलू उपाय

दालचीनी और नींबू

दालचीनी और नींबू त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। नींबू के रस में एंटी बैक्टेरियल गुण होते हैं जो ब्लैकहेड्स, वाइट हेड्स और मुहांसों को दूर करने में मदद करते हैं। दालचीनी त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार रहती हैं। दालचीनी स्किन के पोर्स में कसाव लाती है जिससे चेहरे को लंबे समय तक जवां बनाए रखने में मदद मिलती है।

प्रयोग के लिए

ब्लैकहेड्स हटाने के लिए एक या दो चम्मच दालचीनी पाउडर में 1 या 2 चम्मच नींबू का रस मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे के उस हिस्से पर लगाएं जहाँ पर ब्लैकहेड्स हैं। 20 मिनट तक लगाए रखें और उसके बाद पानी से धो लें। सप्ताह में तीन-से चार बार उपाय का प्रयोग करें। ब्लैक हेड्स साफ़ हो जाएंगे।

हल्दी और पुदीने का रस

हल्दी स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होती है। हल्दी में एंटी मिक्रोबायल तत्व पाए जाते हैं। जो त्वचा के छिद्रों में मौजूद बक्टेरिया को बाहर निकालकर पोर्स को साफ़ करने में मदद करते हैं। हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट तत्व भी होते हैं जो त्वचा की सतह को बेहतर बनाने का काम करते हैं। पुदीने का रस त्वचा को ठंडक प्रदान करता है।

प्रयोग के लिए

एक चम्मच हल्दी पाउडर में दो चम्मच ताजे पुदीने का रस मिलाएं। अच्छे से मिलाकर पेस्ट बना लें और पेस्ट को चेहरे के प्रभावित हिस्से पर लगाएं। 10-15 मिनट सूखने का इन्तजार करें। सूखने के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें। बाद में मॉइस्चराइजर लगाना ना भूलें। सप्ताह में एक बार इस पैक का इस्तेमाल करें। ब्लैक हेड्स जल्दी खत्म हो जाएंगे।

ग्रीन टी

ग्रीन टी में एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो त्वचा को स्वस्थ रखने के साथ-साथ चमकदार बनाने में भी मदद करते हैं। ग्रीन टी चेहरे से गंदगी को साफ़ करके ब्लैकहैड दूर करने में मदद करती है।

प्रयोग के लिए

प्रयोग के लिए एक चम्मच ग्रीन-टी की पत्तियों को पानी में डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और 15-20 मिनट के लिए ऐसे ही रहने दें। उसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा साफ़ कर लें। फेस धोने के बाद मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। सप्ताह में एक बार इस पेस्ट का इस्तेमाल फेस पर करें। त्वचा बिलकुल साफ हो जाएगी।

स्ट्रॉबेरी और शहद

स्ट्रॉबेरी भी चेहरे से ब्लैकहेड्स साफ़ करने में मदद करती है। स्ट्रॉबेरी सूजन को कम करके पोर्स को खोलने में मदद करती है। जिससे त्वचा प्राकृतिक रूप से एक्सफोलिएट हो जाती है। स्ट्रॉबेरी में विटामिन सी भी होता है जो त्वचा के रूखेपन को दूर करके नमी देता है।

प्रयोग के लिए

पैक बनाने के लिए 1 स्ट्रॉबेरी को क्रश करके उसमे आधा चम्मच शहद और आधा चम्मच नींबू का रस मिला लें। सभी चीजों को अच्छे से मिक्स करके पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। थोड़े-थोड़े दिनों के गैप पर इस पैक का इस्तेमाल करते रहें, ब्लैकहेड्स दूर हो जाएंगे।

एक्सफोलिएटिंग मास्क

एक्सफोलिएशन की मदद से चेहरे की मृत कोशिकाएं पूरी तरह बाहर निकल जाती हैं जिससे ब्लैकहेड्स भी साफ़ हो जाते हैं। ड्राई और ऑयली दोनों प्रकार की स्किन के लिए एक्सफोलिएशन फायदेमंद होता है। ओटमील इसके लिए बेहतर उपाय है। ओटमील में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जबकि योगर्ट और जैतून का तेल स्किन को पोषण देता है और त्वचा को स्वस्थ व् शाइनी बनाने में मदद करता है।

प्रयोग के लिए

पैक बनाने के लिए 2 चम्मच ओटमील में 2 चम्मच दही मिलाकर मिश्रण बना लें। इस मिश्रण में एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच जैतून का तेल मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। 10-15 मिनट पेस्ट अपने चेहरे पर रखें और बाद में ठंडे पानी से फेस धो लें। हफ्ते में एक इस मास्क का इस्तेमाल करें। सभी ब्लैकहेड्स साफ़ हो जाएंगे और त्वचा भी दमकने लगेगी।

ये कुछ घरेलू उपाय हैं जिनकी मदद से ब्लैकहेड्स को साफ किया जा सकता है। ध्यान रहे, अगर किसी उपाय का प्रयोग करने पर जलन या इचिंग महसूस हो तो तुरंत पैक को साफ़ कर दें। किसी भी पैक का लगातार इस्तेमाल नहीं करें। 3 -4 दिन का गैप रखकर ही पैक का इस्तेमाल करें। समस्या ठीक हो जाएगी।

प्रेग्नेंट महिला को रात को देर से सोने से कौन-कौन सी दिक़्कतें आती हैं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को खान पान के अलावा भी बहुत सी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे की उठते समय, बैठते समय, सोते समय पूरी सावधानी की जरुरत बरतनी पड़ती है। क्योंकि गर्भवती महिला यदि किसी भी काम को करने में थोड़ी सी भी लापरवाही बरतती है तो इससे न केवल महिला को नुकसान पहुँचता है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी इसके कारण प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा महिला को अपनी नींद का भी अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है न केवल महिला को केवल नींद पूरी करने का ध्यान रखना पड़ता है बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए समय से सोना भी बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि महिला रात को देरी से सोती है और सुबह देरी से उठती है तो इसके कारण महिला की पूरी दिनचर्या गड़बड़ हो जाती है जिसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है।

गर्भवती महिला को देर रात को सोने के नुकसान

वजन बढ़ने के कारण, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के कारण हो सकता है की गर्भवती महिला को बेड पर जाते ही नींद न आये लेकिन महिला को समय पर बेड पर चले जाना चाहिए। क्योंकि महिला यदि सोने की कोशिश करती है तो पांच से दस मिनट बाद नींद आ जाती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला की रात को देर से सोने की आदत है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को रात को देर से सोने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

वजन

गर्भवती महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है लेकिन यदि वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ने लग जाये तो यह गर्भवती महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। और यदि गर्भवती महिला देर रात तक जगी रहती है तो महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि देर से सोने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या होने के कारण मेटाबोलिज्म रेट पर असर पड़ता है जिसके कारण महिला को वजन बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही देर रात तक जगे रहने के कारण भूख भी लगती है जिसके कारण आप जरुरत से ज्यादा आहार भी खा सकते हैं, और आहार का जरुरत से ज्यादा सेवन गर्भवती महिला के वजन को बढ़ा सकता है।

ब्लड प्रैशर

ब्लड प्रैशर की समस्या का गर्भवती महिला को होना गर्भवती महिला के साथ शिशु के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। और यदि गर्भवती महिला देर रात तक नहीं सोती है तो इसका असर महिला की रक्तचाप पर पड़ता है जिसके कारण महिला को ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और गर्भवती महिला को यदि ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या होती है तो इसके कारण महिला को दिल सम्बंधित समस्या के होने का भी खतरा रहता है।

मूड में बदलाव

रात को देर से सोने पर सुबह देरी से उठना या जल्दी उठना दोनों के ही कारण महिला के स्वभाव में फर्क आ सकता है। जैसे की महिला को अधिक गुस्सा या चिड़चिड़ापन महसूस होना, और गर्भवती महिला का अधिक गुस्सा करना गर्भ में शिशु पर गलत असर डाल सकता है।

यादाश्त

यदि गर्भवती महिला रात को देरी से सोती है तो इसका बुरा असर महिला के सोचने की क्षमता पर भी पड़ता है। जैसे की महिला को चीजों को भूलने की समस्या हो सकती है। और कई बार इसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है क्योंकि महिला कुछ चीज रखकर भूल जाती है की कहां रखी थी।

गेस्टेशनल शुगर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को गेस्टेशनल शुगर होने का खतरा रहता है और यदि महिला रात को देरी से सोती है तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है। क्योंकि देर से सोने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है जिसके कारण ब्लड में शुगर के लेवल के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। और गर्भवती महिला को गेस्टेशनल शुगर की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान परेशान होना पड़ सकता है।

इम्यून सिस्टम

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। और इसके साथ यदि प्रेग्नेंट महिला देरी से सोती है तो बॉडी में हार्मोनल असंतुलन के कारण इम्युनिटी और भी कम हो सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण यानी की बीमारियों से ग्रसित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में संक्रमण से बचाव और इम्युनिटी को मजबूत बनाये रखने के लिए गर्भवती महिला को रात को देरी से सोने से बचना चाहिए।

आलस

रात को देरी से सोना मतलब सुबह देरी से उठना या फिर यदि आप जल्दी भी उठ जाती हैं तो नींद पूरी न होने के कारण फ्रेश महसूस नहीं होता है। थोड़ी थोड़ी देर में उबासियाँ आती है, आँखे नींद से भरी रहती है, किसी काम को करने का मन नहीं करता है, आलस और भी ज्यादा होने लगता है। और इन सब लक्षणों का गर्भवती महिला के साथ होना किसी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या को आमंत्रित कर सकता है। ऐसे में इन सभी दिक्कतों से बचने के लिए गर्भवती महिला को रात को समय से सोना चाहिए और सुबह समय से उठना चाहिए।

शारीरिक परेशानी

थकान, कमजोरी, सिर दर्द, शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की समस्या रात को देरी से सोने के कारण गर्भवती महिला को हो सकती है। और इनके कारण महिला को सोने, उठने, बैठने सब चीजों में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

पेट सम्बंधित समस्या

महिला के देर से सोने के कारण शरीर की बहुत सी क्रियाएं बुरी तरह से प्रभावित होती है जैसे की देर से सोने के कारण महिला की पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़ सकता है। और गर्भवती महिला को कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान अधिक परेशान होना पड़ सकता है।

तनाव

देर रात को सोने के कारण गर्भवती महिला मानसिक रूप से भी परेशानी का सामना कर सकती है। जैसे की महिला को तनाव जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और गर्भवती महिला का तनाव लेना न केवल प्रेग्नेंट महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या को बढ़ा सकता है बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुँच सकता है।

तो यह हैं कुछ स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां जो गर्भवती महिला को रात को देरी से सोने के कारण हो सकती है। ऐसे में इन परेशानियों से बचने के लिए गर्भवती महिला को रात को समय से सोना चाहिए। साथ ही अपनी नींद को पूरा लेना चाहिए ताकि नींद के कारण होने वाली परेशानियों से गर्भवती महिला और शिशु के स्वास्थ्य पर किसी भी तरह का गलत प्रभाव न पड़े।

प्रेगनेंसी में अगर फीवर हो तो शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है?

प्रेगनेंसी में बुखार

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ साफ़ सफाई का भी पूरे तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। लेकिन ध्यान रखने के बाद भी कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान बुखार की समस्या से परेशान हो जाती है, ऐसे में बॉडी का थोड़ा सा भी तापमान बढे तो इसे नज़रअंदाज़ करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि बुखार के कारण कोई और परेशानी न हो, साथ ही इस समय महिला को बॉडी को पूरी तरह से आराम देना चाहिए इससे बॉडी को फ्रेश महसूस होने में मदद मिलती है। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा जांच करवाने के बाद अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

गर्भवती महिला को बुखार होने पर शिशु को नुकसान हो सकता है या नहीं?

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान यदि गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ता है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह शिशु के विकास में परेशानी खड़ी कर सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में शिशु का विकास अभी शुरू ही होता है और यह पूरी तरह से प्रोटीन द्वारा किये गए विकास पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि बॉडी का तापमान बढ़ता है तो यह प्रोटीन के कार्य में बाधा डाल सकता है। जिसके कारण गर्भ में शिशु का विकास में कमी आने के साथ गर्भपात का खतरा भी बना रहता है, साथ ही पहली तिमाही में बुखार रहने पर शिशु को जन्म के समय होने वाली परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

लेकिन दूसरी या तीसरी तिमाही में बुखार के कारण शिशु पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन यदि बुखार का कारण कोई संक्रमण है। जैसे की डेंगू, टाइफाइड आदि तो इनके वायरस गर्भनाल से होते हुए शिशु तक पहुँच सकते हैं। जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है, साथ ही प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में आपको ऐसा महसूस हो या फ्लू के लक्षण बॉडी में दिखाई दें, तो आपको बिल्कुल भी देरी न करते हुए डॉक्टर से जांच करवाने पहुँच जाना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बुखार से बचने के लिए क्या करना चाहिए इसके बारे में आपको डॉक्टर बेहतर तरीके से बता देते हैं।

प्रेगनेंसी में बुखार होने पर दवाई का सेवन करना चाहिए

जी नहीं, गर्भावस्था के दौरान बुखार होने पर गर्भवती महिला को दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना डॉक्टरी परामर्श के ली गई दवाई गर्भ में शिशु पर नकारात्मक असर डाल सकती है। साथ ही जो दवाई आपके लिए सही है उसके बारे में डॉक्टर आपको अच्छे से राय दे सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान बुखार से बचने के टिप्स

  • भरपूर आराम करें।
  • साफ़ सफाई का ध्यान रखें।
  • ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए।
  • प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए।
  • पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • बासी भोजन, कटे पड़े फल, बिना धुली सब्जियों का इस्तेमाल न करें।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को फीवर हो जाए तो शिशु पर क्या असर पड़ता है उससे जुडी कुछ बातें, इसके अलावा गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

किचन में काम करते समय गर्भवती महिला को यह ध्यान रखना चाहिए

गर्भवती महिला को घर का काम

प्रेग्नेंट महिला यदि घर का काम काज करती रहती है तो इसे महिला को फिट रहने में मदद मिलती है। लेकिन कोई भी काम करते समय ध्यान रखना चाहिए की उसके कारण गर्भवती महिला और शिशु को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। घर का काम काज इतना भी न करें की आपको थकान की समस्या के कारण परेशानी हो। यदि गर्भवती महिला घर में साफ़ सफाई या किचन में या कोई और अन्य काम करती है, तो काम को पूरा करने के साथ अपनी सेहत का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा काम को तेजी से नहीं करना चाहिए, ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिसके कारण पेट पर जोर पड़े, आदि। क्योंकि जितनी सावधानी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बरतती है उतना ही गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

रसोई में काम करते समय गर्भवती महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला को किचन में काम तो करने की जरुरत पड़ती ही रहती है, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान किचन में आपको सुविधा का ध्यान रखना महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। ताकि किचन का काम भी हो जाए और गर्भवती महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को किचन में काम करते हुए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

तेजी न करें

किचन में काम करते हुए बिल्कुल भी तेजी न करें बल्कि काम को धीरे धीरे आराम करते हुए करें, ताकि काम भी आसानी से हो जाए। और काम करते हुए थकान जैसी परेशानी से बचने में मदद मिल सके।

एक जगह न खड़ी रहें

प्रेग्नेंट महिला को रसोई में कमा करते हुए एक ही जगह पर नहीं खड़े रहना चाहिए, क्योंकि इसके कारण पैरों पर अधिक दबाव पड़ता है और पैरों में दर्द की समस्या, सूजन जैसी परेशानी का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

कुर्सी रखें

गर्भवती महिला को किचन में एक काम करते समय एक आरामदायक कुर्सी भी रखनी चाहिए ताकि सारा काम खड़े होकर न करना पड़े, जो काम आप बैठकर कर सकती है वो बैठकर हो जाए जैसे की सब्जियां काटना, आदि। ऐसा करने से महिला को ज्यादा थकान भी नहीं होती है, और महिला को किचन में काम करते समय दिक्कत से बचे रहने में मदद मिलती है।

पेट के बल काम न करे

किचन की शेल्फ के साथ लगकर काम करने के कारण, बर्तन साफ़ करते समय पेट पर जोर पड़ सकता है जिसके कारण गर्भवती महिला को दिक्कत हो सकती है, ऐसे में महिला को सावधानी बरतनी चाहिए, साथ ही किचन में झुककर यदि कोई काम करना पड़े तो उसे करने से बचना चाहिए और घर के किसी अन्य सदस्य की मदद लेनी चाहिए।

पंखा लगवाएं

कई बार गर्भवती महिला को किचन में काम करते हुए गर्मी का अनुभव हो सकता है, ऐसे में जब गैस बंद हो और महिला को कोई अन्य काम किचन में काम कर रही तो तो गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचने के लिए महिला पंखे का इस्तेमाल कर सकती है।

सारा काम खड़े रहकर न करें

गर्भवती महिला को किचन का सारा काम खड़े रहकर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण महिला को थकावट जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए सब्जियां काटना, आटा गूथना, जैसे काम महिला आराम से बैठकर कर सकती है, उसके बाद बचा हुआ काम खड़े होकर किया जा सकता है, ऐसा करने से काम को आसानी से करने में मदद मिलती है।

एलर्जी वाली चीजों से दूर रहें

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को किसी चीज की गंध से एलर्जी हो सकती है। ऐसे में वो गंध किसी सब्ज़ी या दाल के बनने की भी हो सकती है, यदि आपको भी किसी सब्ज़ी या दाल की गंध से एलर्जी होती है तो आपको जितना हो सके ऐसी सब्जियां बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसके कारण महिला को उल्टी जैसी परेशानी का अनुभव हो सकता है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान गर्भवती महिला को किचन में काम करते समय रखना चाहिए, इन टिप्स का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को किचन में आसानी से काम करने में मदद मिलती है।

पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में क्या फर्क होता है

पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में क्या फर्क होता है, गर्भवती महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में आते हैं यह बदलाव, पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में होते हैं यह फर्क, प्रेगनेंसी से जुड़े टिप्स

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही प्यारा अहसास होता है फिर चाहे वो पहली बार हो या दूसरी बार हो। लेकिन ऐसे बहुत से बदलाव हैं जो गर्भवती महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी के बीच देखने को मिलते हैं। जैसे की पहली प्रेगनेंसी के दौरान महिला में डर और चिंता बहुत अधिक होती है, वहीँ दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला थोड़ी निश्चित हो जाती है। इसके अलावा और भी बहुत से बदलाव है जो गर्भवती महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान देखने को मिलते हैं तो आइये अब जानते हैं की वो बदलाव कौन से हैं।

चिंता होती है कम

पहली बार प्रेगनेंसी के दौरान झना महिला छोटी छोटी बातों को लेकर चिंता करती रहती है, हर बात के बारे में सबसे पूछती रहती है, जैसे की क्या सही है क्या गलत है, अपने शरीर में होने वाले हर बदलाव को लेकर परेशान रहती है, आदि। वहीँ दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ज्यादातर चीजों के बारे में पता चल जाता है। जिससे महिला की चिंता कम हो जाती है।

डर होता है कम

गर्भवती महिला में प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर हमेशा डर रहता है की उसका विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, उसे कोई परेशानी तो नहीं है, महिला द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली हर छोटी छोटी चीज को लेकर महिला डरती रहती है की इसका इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं, जबकि दूसरी बार प्रेगनेंसी के दौरान महिला का यह डर कम हो जाता है। हालाँकि शिशु को लेकर हमेशा डर रहता है, लेकिन उसका विश्वास भी बढ़ जाता है क्योंकि गर्भ में पल रह शिशु के लिए क्या सही क्या नहीं इसके बारे में महिला को जानकारी मिल जाती है।

हो जाता है अनुभव

पहली बार माँ बनने के दौरान जहां महिला घर के हर बड़े से राय लेती है, किताबो में, इंटरनेट से इसके बारे में जानकारी इक्कठा करती है। वहीँ दूसरी बार माँ बनने पर शरीर में होने वाले बदलाव आदि से महिला अनजान नहीं रहती है जिससे उसे प्रेगनेंसी का अनुभव हो जाता है, जिससे अब हो सकता है की महिला दूसरों को प्रेगनेंसी में सही क्या है और गलत क्या है इस बारे में राय देने लगती है।

बॉडी शेप को लेकर कम होती है चिंता

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव आना बहुत ही आम बात होती है, ऐसे में पेट का आकार बढ़ना, शरीर के बाकी हिस्सों में भी बदलाव देखकर पहली बार महिला जहां बहुत परेशान हो सकती है, वहीँ दूसरी बार महिला शरीर में होने वाले इन बदलाव को जानती है ऐसे में शारीरिक रूप से हो रहे इस बदलाव को देखकर भी महिला ज्यादा चिंता नहीं करती है।

खाने को लेकर समस्या

पहली बार माँ बनने पर जहां महिला इस बात की जानकारी इक्कठा करती है की महिला को क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, वहीँ दूसरी बार माँ बनने पर महिला को इस बारे में भी पता चल जाता है की गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए क्या सही है और क्या नहीं है। इसीलिए खान पान को लेकर महिला की चिंता कम हो जाती है।

सवाल होते हैं कम

कोई भी महिला जब पहली बार माँ बनती है तो उसके दिमाग में लगातार प्रश्नो का उठना आम बात होती है। जैसे की गर्भ में शिशु का विकास कैसे होता है, प्रेगनेंसी के दौरान सही क्या है, गलत क्या है, क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, आदि। लेकिन दूसरी बार माँ बनने पर महिला के मन में उठ रहे यह प्रश्न कम हो जाते हैं।

उत्साह होता है कम

घर में आने वाला शिशु केवल महिला के लिए ही नहीं बल्कि पूरे घर में आने वाली ख़ुशी का कारण बनता है। लेकिन कहीं न कहीं ज्यादातर लोग इस बात को मानेंगे की पहले शिशु के आने पर जहां घर में ज्यादा उत्साह होता है वहीँ दूसरी बार महिला में यह उत्साह कम देखने को मिलता है।

तो यह हैं कुछ बदलाव जो गर्भवती महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान देखने को मिलते हैं। ऐसे में महिला में जो भी बदलाव आये लेकिन महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न करते हुए अपना ख्याल अच्छे से रखना चाहिए।

अंकुरित चने खाने के फायदे जानकार हैरान हो जायेंगे आप

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प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, मिनरल, विटामिन्स व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर अंकुरित चने खाने से आपको बहुत से फायदे मिलते हैं। आपने अंकुरित चने के बारे में सुना तो होगा ही लेकिन क्या आप इसे खाते हैं? यदि नहीं तो इनके फायदे जानकार आप इन्हे खाना जरूर शुरू कर देंगे। यह शरीर को स्ट्रांग रखने के साथ इम्युनिटी को बढ़ाता है जिससे आपको बहुत से रोगो से लड़ने की क्षमता मिलती है। साथ ही ख़ूबसूरती में निखार लाने के साथ यह फिटनेस को बरकरार रखने में भी मदद करता है। तो लीजिए अब विस्तार से जानते हैं की अंकुरित चने खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एनर्जी सोर्स होता है

अंकुरित चने में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं जो की बॉडी में ऊर्जा को बरकरार रखने में मदद करते हैं। यदि आप नियमित इनका सेवन करते हैं तो इससे कमजोरी, थकान, आलस, सुस्ती जैसी समस्याओं को दूर करने के साथ बॉडी को स्ट्रांग बनाने में मदद मिलती है।

हीमोग्लोबिन का है स्त्रोत

शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ नए रक्त को बनाने में भी अंकुरित चने के सेवन से फायदा मिलता है, क्योंकि इसमें फॉस्फोरस और आयरन प्रचुर मात्रा में होता है। साथ ही बॉडी में ब्लड फ्लो भी बेहतर तरीके से होता है जिससे आपकी बॉडी को मजबूत और सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया को रखता है बेहतर

फाइबर की मात्रा से भरपूर अंकुरित चने क सेवन करने से पेट अच्छे से साफ़ हो जाता है। जिसके कारण मेटाबोलिज्म बेहतर होता है साथ ही आपको कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानी से भी राहत मिलती है। और इससे पाचन क्रिया बेहतर चलती है जिससे आपको पर्याप्त भूख भी लगती है, और शरीर में पोषक तत्व भी भरपूर होते है।

शुगर के रोगियों के लिए

यदि आप शुगर की समस्या से परेशान है तो अंकुरित चने का सेवन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं होता है। क्योंकि इसका सेवन करने से यह ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करते हैं, और शरीर में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोस की मात्रा को भी कम करते हैं। और इसका फायदा उठाने के लिए आपको नियमित सुबह उठकर इसे खाना चाहिए।

यूरिन से जुडी समस्या

बार बार यूरिन आने की समस्या, यूरिन इन्फेक्शन आदि की समस्या होने पर अंकुरित चने खाने से आपको बहुत फायदा मिलता है। क्योंकि यह शरीर में होने वाली प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, जिससे इन्फेक्शन आदि की समस्या से बचाव करने में आपको मदद मिलती है।

पुरुषो के लिए है फायदेमंद

यदि आप नियमित सुबह अंकुरित चने खाने के बाद एक गिलास दूध पीते हैं तो ऐसा करने से शुक्राणु की गुणवत्ता बेहतर होती है। साथ ही इससे पुरुषो को हमेशा स्फूर्ति से भरपूर और शक्तिशाली रहने में मदद मिलती है, लेकिन इसका सेवन नियमित करना चाहिए।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है

रक्त में से बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करके गुड़ कोलेस्ट्रॉल को नियमित करने में अंकुरित चने से खाने से बहुत फायदा मिलता है। जिससे आपको फिट रहने, दिल की बीमारियों से दूर रहने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी बढ़ाता है

क्लोरोफिल, फॉस्फोरस, विटामिन, मिनरल्स की मात्रा से भरपूर अंकुरित चने का सेवन नियमित करने से इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे आप किसी भी तरह की बिमारी और संक्रमण की समस्या से आसानी से सुरक्षित रह सकते हैं।

स्किन के लिए है फायदेमंद

भीगे हुए चने का सेवन करने से स्किन से जुडी परेशानी जैसे खुजली, एलर्जी आदि से बचने में मदद मिलती है। साथ ही इसका नियमित सुबह सेवन करने से स्किन के ग्लो को बरकरार रखने में भी मदद मिलती है। इसीलिए अपनी ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए भी आप इसका सेवन कर सकते हैं।

वजन कम करने के लिए

बॉडी में पोषक तत्वों की कमी को भरपूर रखकर भी आपके वजन को नियंत्रित रखने में अंकुरित चने का सेवन करने से आपको फायदा मिलता है। क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा नियमित होती है जो की आपके शरीर को फिट रखने के साथ मोटापा नहीं बढ़ने देती है।

तो यह हैं कुछ खास फायदे जो आपको नियमित अंकुरित चने का सेवन करने से मिलते है। वैसे आप भुने हुए चने, भीगे हुए चने या सब्ज़ी बनाकर भी इसका फायदा उठा सकते हैं। लेकिन यदि आप इसका दुगुना फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको अंकुरित चने का ही सेवन करना चाहिए।