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गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर का चयन कैसे करें?

पीरियड्स मिस होने के बाद घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करके आप आसानी से यह जान सकती है की आप माँ बनने वाली है या नहीं। यदि आपकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसके बाद आपका सबसे पहला काम यह होता है की आप अपने लिए एक अच्छी डॉक्टर का चयन करें। क्योंकि डॉक्टर से मिलने के बाद ही आपकी प्रेगनेंसी के आगे के ट्रीटमेंट की प्रक्रिया की शुरुआत होगी।

साथ ही अब प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक डॉक्टर ही आपकी हेल्थ को अच्छे से देखेंगी, आपके मन में चल रहे सवालों का जवाब देंगी, आपको होने वाली दिक्कतों का समाधान करने में मदद करेंगी, आदि। ताकि आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको डॉक्टर का चयन करते समय किन किन बातों का ध्यान रखना जरुरी है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

डॉक्टर की जानकारी इक्कठी करें

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद आप जिन जिन डॉक्टर से राय लेना चाहती है उनके बारे में सबसे पहले उनकी जानकारी इक्कठी करें। जैसे की जिस हॉस्पिटल में काम करती हैं उन्हें कितने साल हो गए हैं, उनका रिकॉर्ड कैसा है, फैसिलिटी सही है या नहीं, आदि।

घर के नजदीक हो डॉक्टर

ध्यान रखें की आप जिस भी डॉक्टर का चुनाव कर रहे हैं उस डॉक्टर का क्लिनिक का हॉस्पिटल आपके घर से ज्यादा दूरी पर नहीं हो। ताकि यदि कभी इमरजेंसी हो तो आप आसानी से डॉक्टर तक पहुँच सके ताकि वो आपकी जांच कर सकें।

बात कर सकें

वैसे तो एक अच्छी डॉक्टर हमेशा बिज़ी ही होती है लेकिन फिर भी वो अपने सभी मरीज़ो की समस्या को सुलझाने में मदद करती है। ऐसे में डॉक्टर का चुनाव करते समय इस बात का ध्यान रखें की उस डॉक्टर का चुनाव करें जो आपसे फ़ोन पर बात कर सके जब भी आपको कोई दिक्कत हो।

डॉक्टर से मिलें

डॉक्टर का चुनाव करने के बाद एक बार डॉक्टर से मिलें और देखें की क्या आप जो भी सवाल पूछ रहे हैं उनका जवाब वो डॉक्टर अच्छे से दे रही हैं या नहीं, आपसे किस तरह से बात कर रही है, जांच करते समय आपके साथ किस तरीके से पेश आ रही हैं, आपकी पूरी हेल्थ के बारे में पूछ रही है या नहीं, कितना टाइम आपको दे रही हैं, आदि। उसके बाद यदि आप सही लगता है तो आप डॉक्टर का चुनाव करें।

आर्थिक रूप से भी जांच लें

ध्यान रखें की डॉक्टर का चुनाव करते समय एक बार यह भी जांच लें की डॉक्टर की फीस कितनी है ताकि आपको बाद में आर्थिक रूप से किसी तरह की दिक्कत नहीं आये।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर का चुनाव करते समय रखना चाहिए। ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान अच्छा ट्रीटमेंट मिल सके साथ ही आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य को सही रहने में मदद मिल सके।

How to choose your doctor during pregnancy

प्रेग्नेंट महिला आठवें और नौवें महीने में यह जरूर करें?

गर्भावस्था का आठवाँ और नौवां महीना महिला के लिए बहुत ही अहम होता है। क्योंकि इस दौरान गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है साथ ही गर्भवती महिला का वजन पूरी तरह बढ़ चूका होता है, महिला को शारीरिक परेशानियां महसूस हो सकती है, आदि ऐसे में महिला के लिए बहुत जरुरी होता है की महिला किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें।

क्योंकि जितना महिला अपना ध्यान रखती है उतना ही माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही डिलीवरी को आसान बनाने में भी मदद मिलती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं या कुछ काम बताने जा रहे हैं जो प्रेग्नेंट महिला को आठवें व् नौवें महीने में जरूर करने चाहिए।

रूटीन चेकअप

आठवें नौवें महीने में महिला को अपने रूटीन चेकअप को समय से करवाना चाहिए साथ ही यदि महिला को कोई टिका लगना है, टेस्ट होना है, अल्ट्रासॉउन्ड होना है उसमे देरी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान महिला को होने वाली कोई दिक्कत दिक्कत डिलीवरी पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

खान पान में पोषक तत्वों को जरूर शामिल करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को भरपूर पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेने की सलाह दी जाती है ताकि माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आठवें नौवें महीने में डाइट का और भी अच्छे से ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि इस दौरान शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है साथ ही महिला के शरीर को भी डिलीवरी के लिए एनर्जी की जरुरत होती है। इसीलिए जितना अच्छी डाइट महिला लेती है उतना ही डिलीवरी को आसान बनाने और शिशु के विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है।

थोड़ी देर टहलें

प्रेगनेंसी के आठवें नौवें महीने में महिला को थोड़ी देर सुबह शाम जरूर टहलना चाहिए इससे महिला को एक्टिव रहने, शरीर में ब्लड फ्लो को सही रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा याद रखें की यदि महिला को बैड रेस्ट की सलाह है तो महिला बिल्कुल भी वॉक आदि नहीं करें क्योंकि इसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है।

हॉस्पिटल बैग पैक करें

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में ही महिला को अपना हॉस्पिटल बैग पैक कर लेना चाहिए। क्योंकि नौवें महीने में महिला को कभी भी डिलीवरी पेन शुरू हो सकता है ऐसे में यदि महिला का हॉस्पिटल बैग पैक होता है। तो महिला को हॉस्पिटल जाते समय किसी भी तरह की टेंशन लेने की जरुरत नहीं होती है। और महिला आराम से हॉस्पिटल चली जाती है।

शिशु की मूवमेंट का ध्यान रखें

आठवें नौवें महीने में गर्भ में शिशु को घूमने की कम जगह मिलती है। ऐसे में महिला को गर्भ में शिशु की मूवमेंट का खास ख्याल रखना चाहिए। और यदि कभी आपको ऐसा लगता है की गर्भ में शिशु मूव नहीं कर रहा है तो इसे अनदेखा नहीं करें जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें।

डिलीवरी पेन को समझें

प्रेगनेंसी के आठवें नौवें महीने में महिला को पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है ऐसे में महिला को डिलीवरी पेन के लक्षणों को अच्छे से समझना चाहिए। ताकि जब भी महिला को डिलीवरी पेन हो तो महिला जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जा सके जिससे महिला को डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके।

उन चीजों का सेवन करें जिनसे डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके

ऐसे बहुत से खाद्य पदार्थ होते हैं जिनसे प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को आठवें नौवें महीने में महिला को उन खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करना चाहिए। जिससे डिलीवरी पेन को उत्तेजित करने और डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके जैसे की घी, पालक, खजूर, आदि।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेगनेंसी के आठवें नौवें महीने में महिला को जरूर करने चाहिए। ताकि शिशु का विकास बेहतर तरीके से होने और डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके। इसके अलावा यदि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत होती है तो महिला को उसे अनदेखा किये बिना डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को सावन के सोमवार के व्रत रखने चाहिए या नहीं?

सावन का महीना भोलेबाबा को समर्पित होता है और ऐसा माना जाता है की सावन के सोमवार के यदि व्रत कर लिए जाएँ तो यह पूरे साल के सोमवार के व्रतों के बराबर होते हैं। इसीलिए अधिकतर लोग सावन के महीने में भोलेबाबा की कृपा पाने के लिए उपवास करते हैं पूजा अर्चना करते हैं।

इसके अलावा भोलेबाबा का यह व्रत हर कोई कर सकता है बच्चा, बूढ़ा, विवाहित औरतें, आदमी, कुँवारी लडकियां और लड़के, आदि। लेकिन जब बात गर्भवती महिला की हो तो व्रत रखना चाहिए या नहीं, कैसे रखना चाहिए, कहीं कोई नुकसान तो नहीं होगा, आदि ऐसी बहुत सी बातों को जानना जरुरी होता है।

प्रेग्नेंट महिला व्रत रखें या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में शिशु भी अपने जरुरी पोषण के लिए अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला यदि निर्जला या निराहार व्रत रखती है तो इसके कारण माँ और बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुँचता है। ऐसे में जितना हो सकें महिला को व्रत रखने से बचना चाहिए।

लेकिन यदि आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या नहीं हैं, आप फिट हैं और आप व्रत रखना चाहिए तो पूरा दिन भूखे प्यासे रहकर नहीं बल्कि फलाहार करके, पानी का सेवन करके, एक समय आहार लेकर आप व्रत कर सकती है।

और सोमवार के व्रत में एक समय आहार लिया जा सकता है बाकी समय भूख लगने पर महिला फलों का सेवन कर सकती है। ऐसे में यदि आप व्रत रखना चाहती है और पूरी तरह स्वस्थ है तो आप व्रत रख सकती है। बाकी यदि आप व्रत छोड़ सकती है तो इससे अच्छी कोई बात नहीं है।

सावन के सोमवार का व्रत रखने पर किन बातों का ध्यान रखें

यदि गर्भवती महिला व्रत रखना चाहती है तो महिला को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला को व्रत रखने पर किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। जैसे की:

प्यासी न रहें

गर्भावस्था के दौरान व्रत रखने पर महिला को पूरा दिन प्यासा नहीं रहना चाहिए। बल्कि थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ तरल लेते रहना चाहिए जिससे व्रत रखने पर भी शरीर में ऊर्जा बनी रहे।

फलाहार करें

यदि आप व्रत में भोजन नहीं करती है तो आप ऐसा नहीं है की पूरा दिन केवल पानी पीकर रहें बल्कि फल, सलाद आदि का सेवन जरूर करें। ताकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो और माँ और बच्चा दोनों को हेल्दी रहने में मदद मिल सके।

आराम करें

व्रत रखने पर सारा दिन केवल बैठी न रहे बल्कि थोड़ी देर आराम जरूर करें ताकि आपके शरीर को आराम मिल सके जिससे आपको एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके।

कोई दिक्कत होने पर व्रत खोल दें

यदि आपको ऐसा लग रहा है की आप व्रत नहीं रख पा रही हैं तो शरीर पर जोर नहीं डालें बल्कि व्रत खोल दें। यदि शरीर में दिक्कत होगी तो आपके लिए ज्यादा नुकसानदायक होगा और ठीक रहेंगी तो व्रत आप दुबारा भी कर लेंगी।

व्रत रखने के नुकसान

  • पूरा दिन व्रत रखने के कारण महिला को थकान व् कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है।
  • पानी का सेवन नहीं करने के कारण महिला को डीहाइड्रेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • महिला को खाली पेट रहने के कारण गैस की समस्या हो सकती है।
  • जो गर्भवती महिला ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान हैं उन्हें दिक्कत हो सकती है।
  • महिला और शिशु दोनों को शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा हो सकता है।
  • यदि प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही चल रही है तो महिला को व्रत करना भारी पड़ सकता है ऐसे में इस दौरान व्रत करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी बहुत जरुरी होती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान महिला को व्रत रखना चाहिए या नहीं, और व्रत रखने के कारण महिला को कौन से नुकसान हो सकते हैं उससे जुडी जानकारी। इसके अलावा यदि आपका मन है तो डॉक्टर से पूरी तरह राय लेने के बाद ही आप व्रत करें।

गर्भ में दो महीने का बच्चा कितना होता है?

प्रेगनेंसी का दूसरा महिला शुरू होने के साथ ही महिला को अपने शरीर में बहुत से बदलाव महसूस हो सकते हैं। और सबसे पहला बदलाव तो महिला यह महसूस करेगी की महिला के पीरियड्स मिस हो गए है। उसके बाद महिला घर में ही प्रेगनेंसी टेस्ट या डॉक्टर के पास जाकर प्रेगनेंसी टेस्ट करवाएंगी। उसके बाद महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी तो महिला के लिए यह बहुत ही ख़ुशी भरा अहसास होगा।

साथ ही इस दौरान महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने के कारण महिला को शारीरिक परेशानियों का अनुभव भी हो सकता है। और जो महिलाएं पहली बार माँ बनने जा रही है वो महिलाएं शरीर में होने वाले बदलाव व् दिक्कतों के कारण परेशानी का अनुभव कर सकती है। महिला को होने वाली परेशानियों के साथ इस दौरान गर्भ में शिशु का विकास भी शुरू हो जाता है। तो आइये अब आगे प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में बच्चा कितना हो जाता है उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में बच्चे का विकास

प्रेगनेंसी का दूसरा महीना मतलब की प्रेगनेंसी के पांच से आठ सप्ताह, इस दौरान गर्भ में शिशु का आकार लगभग एक इंच हो जाता है। साथ ही गर्भ में शिशु का वजन लगभग चौदह ग्राम तक हो जाता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के छह से नौ सप्ताह के बीच आपको डॉक्टर अल्ट्रासॉउन्ड के लिए भी बोल सकते हैं। क्योंकि इस दौरान गर्भ में शिशु के दिल की धड़कन भी आ जाती है। साथ ही इस दौरान शिशु की आँख, होंठ, कान, हाथ, पैर आदि की आकृतियां बननी भी शुरू हो जाती है।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में किन बातों का ध्यान रखें

  • महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
  • इस दौरान आपको डॉक्टर्स टेस्ट करवाने के लिए बोल सकते हैं तो आपको उन सभी टेस्ट को समय से करवाना चाहिए।
  • किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही गर्भपात जैसी बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।
  • इस दौरान आपको थोड़ी स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है लेकिन ज्यादा समस्या होने पर डॉक्टर से मिलें।
  • शरीर में होने वाले बदलावों से घबराएं नहीं बल्कि इन्हे समझने की कोशिश करें ताकि प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिल सके।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में शिशु के विकास से जुडी जानकारी, साथ ही गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ व् हेल्दी रहने के साथ हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

Baby development in the second month of pregnancy

गर्मियों में निम्बू पानी क्यों जरुरी है प्रेग्नेंट महिला के लिए?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने के साथ तरल पदार्थों की मात्रा को भी सही रखने की सलाह दी जाती है। इसके लिए महिला को भरपूर मात्रा में पानी पीने के साथ नारियल पानी, जूस, निम्बू पानी व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है। क्योंकि यह तरल पदार्थ महिला के शरीर में पानी की मात्रा को सही रखने के साथ शरीर में पोषक तत्वों मि मात्रा को सही रखने में मदद करते हैं।

खासकर गर्मियों के मौसम में तो गर्भवती महिला को इनका सेवन जरुरी करना चाहिए क्योंकि गर्मियों में जितना बॉडी हाइड्रेट रहती है उतना ही गर्भवती महिला को फायदे मिलता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को निम्बू पानी का सेवन क्यों करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में निम्बू पानी का सेवन क्यों करना चाहिए?

निम्बू पानी में मैग्नीशियम, कैल्शियम, फोलेट, विटामिन बी 6, विटामिन सी, राइबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जरुरी होते हैं। साथ ही निम्बू पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं इसीलिए गर्भवती महिला के लिए निम्बू पानी पीना जरुरी होता है।

क्या निम्बू पानी पीना गर्भवती महिला के लिए सेफ होता है?

जी हाँ, सिमित मात्रा में प्रेग्नेंट महिला यदि निम्बू पानी का सेवन करती है तो यह गर्भवती महिला के लिए सेफ होता है। और इससे माँ व् बच्चे को सेहत सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं लेकिन यदि महिला जरुरत से ज्यादा निम्बू पानी पीती है तो इसकी वजह से गर्भवती महिला को दिक्कत होने का खतरा भी होता है। ऐसे में निम्बू पानी के बेहतरीन फायदें के लिए गर्भवती महिला को सिमित मात्रा निम्बू पानी का सेवन करना चाहिए।

गर्मियों में निम्बू पानी पीने के बेहतरीन फायदे

गर्भवती महिला यदि गर्मियों में निम्बू पानी का सेवन करती है तो इससे एक नहीं बल्कि काईन सेहत सम्बन्धी फायदे गर्भवती महिला को मिलते हैं। जैसे की:

मॉर्निंग सिकनेस से मिलती है राहत

प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या यानी की सुबह के समय उल्टी, मितली, थकान, कमजोरी महसूस होना बहुत आम बात होती है। ऐसे में यदि महिला निम्बू पानी का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

कब्ज़ से राहत

गर्भावस्था के दौरान होने वाली कब्ज़ की समस्या से राहत के लिए भी महिला को निम्बू पानी का सेवन जरूर करना चाहिए। यदि महिला निम्बू पानी का सेवन करती है तो इससे महिला के पेट को साफ़ रहने में मदद मिलती है।

डाइज़ेशन होता है बेहतर

गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को अपच यानी की खाना हज़म करने में दिक्कत हो सकती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला निम्बू पानी का सेवन करती है तो इससे महिला की पाचन क्रिया बेहतर तरीके से काम करती है जिससे महिला को अपच की समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

भूख बढ़ती है

गर्मियों के मौसम में खाने पीने की इच्छा में कमी आ सकती है जो की गर्भवती महिला और शिशु के लिए सही नहीं होता है। ऐसे में निम्बू पानी का सेवन करना महिला के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि निम्बू पानी का सेवन करने से महिला की भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के ब्लड प्रैशर का ऊपर नीचे होना बहुत ही आम बात होती है लेकिन यदि यह परेशानी बढ़ जाती है तो इसकी वजह से महिला और शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है। ऐसे में महिला के लिए निम्बू पानी बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि निम्बू पानी पीने से गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी बढ़ती है

विटामिन सी जैसे एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर निम्बू पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला बिमारियों व् संक्रमण से बची रहती है और प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चा स्वस्थ रहते हैं।

हड्डियों के लिए है फायदेमंद

निम्बू पानी में मैग्नीशियम और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जिससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलती है। साथ ही कैल्शियम व् मैग्नीशियम गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करते है।

यूरिन इन्फेक्शन से बचे रहने में मिलती है मदद

प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन इन्फेक्शन की समस्या होना आम बात होती है लेकिन यह समस्या अधिक हो जाये तो इसकी वजह से माँ व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में निम्बू पानी का सेवन करना महिला के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि निम्बू पानी पीने से गर्भवती महिला के शरीर में से हानिकारक बैक्टेरिया बाहर निकल जाता है। जिससे महिला को यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

एनर्जी मिलती है

निम्बू पानी का सेवन करने से गर्भवती महिला को एनर्जी मिलती है जिससे गर्भवती महिला को हमेशा एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

पैरों की सूजन से आराम

गर्भावस्था के दौरान पैरों में सूजन की समस्या होना आम बात होती है लेकिन यह समस्या बढ़ जाये तो बहुत तकलीफ भी दे सकती है। ऐसे में महिला को निम्बू पानी का सेवन फायदा पहुंचा सकता है क्योंकि निम्बू में मौजूद गुण सूजन की समस्या से राहत पहुंचाने में मदद करते हैं।

शरीर में पानी की कमी पूरी होती है

प्रेग्नेंट महिला यदि पानी का भरपूर सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। और शरीर में पानी की कमी पूरी होने से गर्भवती महिला को बहुत सी सेहत सम्बन्धी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

शिशु के लिए है फायदेमंद

निम्बू पानी में फोलेट भी मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए एक जरुरी पोषक तत्व होता है। और यह पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के साथ शिशु को जन्म दोष के खतरे से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को निम्बू पानी का सेवन क्यों करना चाहिए और निम्बू पानी का सेवन करने से महिला को कौन से फायदे मिलते हैं उससे जुडी जानकारी। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी निम्बू पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

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प्रेग्नेंट महिला को करेले कौन से महीने में नहीं खाने चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं। ऐसे में इन सभी बदलावों के कारण महिला और बच्चे को कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए महिला को अपने खान पान, रहन सहन, लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरुरत होती है। जैसे की महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी खाने पीने की चीजों को छोड़ने की सलाह दी जाती है क्योंकि उनके कारण माँ और बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

साथ ही ऐसी बहुत सी चीजें होती है जिन्हे महिला को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है क्योंकि उनसे माँ और बच्चे को न्यूट्रिशन मिलता है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान करेले के सेवन करने के बारे में बात करने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले यह जानना जरुरी है की प्रेगनेंसी के दौरान करेले का सेवन करना चाहिए या नहीं।

गर्भवती महिला को करेले का सेवन करना चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ भी खाने या पीने से पहले इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है की प्रेग्नेंट महिला जो भी खा या पी रही है वो माँ और बच्चे के लिए सेफ है या नहीं। ताकि महिला के खान पान के कारण माँ और बच्चे को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचें। ऐसे में जब बात प्रेगनेंसी में करेले के सेवन को लेकर आती है तो वैसे करेले में बहुत से न्यूट्रिशन मौजूद होते हैं लेकिन फिर भी गर्भवती महिला को करेला नहीं खाने की सलाह दी जाती है।

क्योंकि करेले में न्यूट्रिशन के साथ कुछ ऐसे तत्व भी मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे की सेहत के लिए सही नहीं होते हैं। करेले के साथ करेले के बीज में मौजूद तत्व भी माँ और बच्चे की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। ऐसे में जितना हो सके प्रेग्नेंट महिला को करेले का सेवन नहीं करना चाहिए। और जब करेले का सेवन करने की गर्भवती महिला को मनाही होती है तो प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में गर्भवती महिला को करेला नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा यदि महिला की कभी करेला खाने की इच्छा होती है तो उससे पहले महिला को एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में करेला खाने के नुकसान

गर्भवती महिला यदि करेले का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानियां होने का खतरा रहता है। जैसे की:

पाचन सम्बन्धी दिक्कतें

प्रेग्नेंट महिला बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन सम्बन्धी परेशानियों का सामना कर सकती है। ऐसे में यदि महिला करेले का सेवन करती है तो महिला की पाचन सम्बन्धी परेशानियां और भी बढ़ सकती है। जैसे की महिला को पेट में गैस, पेट फूलना, पेट में ऐंठन, डायरिया जैसी परेशानियां अधिक हो सकती है।

गर्भपात और समय से पहले डिलीवरी

करेले का सेवन करने के कारण गर्भवती महिला को गर्भपात व् समय से पहले बच्चे का जन्म होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि करेले में मौजूद तत्व ब्लीडिंग की समस्या और लेबर पेन की समस्या खड़ी कर सकते हैं।

स्किन सम्बन्धी परेशानी

करेले का सेवन करने से महिला को स्किन सम्बन्धी समस्या जैसे की लाल लाल दाने होना, दाद की समस्या होना आदि दिक्कतें हो सकती है।

एनीमिया

करेले में मौजूद तत्व शरीर में रेड ब्लड सेल्स को नष्ट कर सकते हैं जिसकी वजह से गर्भवती महिला को एनीमिया जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा एनीमिया के कारण गर्भवती महिला की सेहत सम्बन्धी परेशानियां बढ़ने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

क्या प्रेग्नेंट महिला को करेले का जूस पीना चाहिए?

जी नहीं, करेले के जूस का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि करेले का जूस पीने से गर्भवती महिला को ब्लीडिंग, लेबर पेन समय से पहले होने आदि का खतरा रहता है जिससे प्रेग्नेंट महिला के लिए कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है। ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को करेले का जूस नहीं पीना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी में करेले के सेवन से जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको भी करेले का सेवन करने के कारण इन परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

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प्रेगनेंसी में भिंडी खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपनी रोजाना की डाइट में बहुत सी हेल्दी सब्जियों को शामिल करने की सलाह दी जाती है। ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिल सके। और इन्ही में से एक सब्जी है भिंडी, दिखने में हरी और साथ भिंडी खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होती है। यदि गर्भवती महिला भिंडी का सेवन करना चाहती है तो महिला बिना किसी डर के कर सकती है। तो आइये अब प्रेगनेंसी में भिंडी का सेवन करने के बारे में विस्तार से जानते हैं।

गर्भावस्था के दौरान भिंडी का सेवन क्यों करना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ महिला और शिशु की सेहत के लिए फायदेमंद भी हो। और भिंडी आयरन, जिंक, फोलेट, प्रोटीन, आयरन, विटामिन सी, विटामिन डी, पोटैशियम, एनर्जी आदि पोषक तत्वों से भरपूर होती है। साथ ही भिंडी का सिमित मात्रा में सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला और बच्चे को फायदा मिलता है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को भिंडी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन जिन महिलाओं को भिंडी का सेवन करने से कोई एलर्जी या सेहत सम्बन्धी समस्या होती है उन्हें भिंडी का सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में भिंडी खाने के फायदे

प्रेग्नेंट महिला यदि भिंडी का सेवन करती है तो इससे माँ और बच्चे को एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में भिंडी खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

फाइबर

भिंडी फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के पाचन तंत्र दुरुस्त रखने में मदद करती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़, एसिडिटी, अपच, जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं भरपूर

विटामिन सी एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो भिंडी में भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। साथ ही भिंडी में कैरोटीनॉइड, फेनोलिक यौगिक, विटामिन इ जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स भी मौजूद होते हैं। जिससे महिला की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलती है। और इम्युनिटी बढ़ने से माँ और बच्चे दोनों को संक्रमण व् बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

आयरन

भिंडी में आयरन भी मौजूद होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है। साथ ही भिंडी में मौजूद विटामिन सी बॉडी में सभी पार्ट्स में आयरन को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है जिससे माँ और बच्चा दोनों हेल्दी रहते हैं।

फोलेट

फोलेट गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और दिमागी विकास को बेहतर करने के साथ शिशु को जन्मदोष से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है। जिससे आपका बच्चा जन्म के समय स्वस्थ रहता है।

प्रोटीन

भिंडी में प्रोटीन की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भ में पल रहे शिशु की कोशिकाओं के बेहतर विकास के लिए फायदेमंद होती है। साथ ही प्रोटीन प्रेग्नेंट महिला के लिए भी फायदेमंद होता है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन यदि जरुरत से ज्यादा बढ़ता है। तो इसकी वजह से माँ और बच्चा दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन भिंडी यदि महिला भिंडी का सेवन करती है। तो इससे महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है क्योंकि भिंडी में फैट और कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है।

हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से होता है बचाव

यदि किसी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होती है तो उन महिलाओं को भिंडी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि भिंडी में सोडियम की मात्रा कम होती है और पोटैशियम ज्यादा होता है। जो हाई ब्लड प्रैशर के लिए अच्छा होता है।

ब्लड शुगर

भिंडी का सेवन करने से गर्भवती महिला के ब्लड में शुगर के लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है जिससे महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नींद आती है बेहतर

भिंडी में ट्रिप्‍टोफेन जैसे एमिनो एसिड मौजूद होते हैं जो कि प्रेग्नेंट महिला के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर रखने में मदद करते हैं जिससे अच्‍छी नींद आने में मदद मिलती हैं।

नोर्मल डिलीवरी में मिलती है मदद

ऐसा भी माना जाता है प्रेगनेंसी के दौरान सिमित मात्रा में भिंडी का सेवन करने से महिला के सामान्य प्रसव होने के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है। क्योंकि भिंडी का सेवन करने से महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं जिससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान भिंडी खाने के फायदे, यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आप भी भिंडी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। ताकि भिंडी में मौजूद पोषक तत्वों के बेहतरीन फायदे आपको और आपके बच्चे को मिल सके जिससे आपको और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। लेकिन भिंडी का रहने करने से पहले ध्यान रखें की भिंडी ताज़ी और उसे अच्छे से धोने व् पकाने के बाद आप उसे खाएं।

Health benefits of lady finger during pregnancy

 वजन कम करने का सबसे आसान तरीका, वजन कम कैसे करें

अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो भारी भरकम और कठिन उपायों को छोड़ कर आसान तरीका अपनाएँ। क्यूंकि तरीका जितना आसान होगा उतना ही आप किसी चीज़ को रेगुलर कर पायेगें, और आपके लिए आसान होगा। 

तो आइये जानते हैं आसान और सही तरीका वजन कम करने का क्या है और वजन कम कैसे करें।

  • दूध की जगह पर दही खाएं इससे आपका वजन कम होगा। 
  • एक चमच्च मेथी रात को भिगो दें और सुबह खाएं, फर्क कुछ दिनों में ही नजर आएगा। 
  • खीरा और नीम्बू का सेवन जरूर करें,ये फैट जमा होने नहीं देता।
  • नारियल पानी जरूर पियें। 
  • ग्रीन टी रोजाना पियें। 
  • ब्लैक टी भी पी सकते हैं। दूध वाली चाय पीने से बचें। 
  • सुबह शाम गरम पानी जरूर पियें। 
  • ठंडा पानी पीने से बचें।
  • खाने के बाद पानी न पियें, 40 मिनट बाद गुनगुना पानी पियें। 
  • कम नमक खाएं। 
  • कम चीनी खाएं। 
  • सही समय पर सोएं,देर रात तक न जागें।

इन्हीं छोटी छोटी बातों का ध्यान अगर आप रखते हैं तो बड़ी समस्या नहीं आती है यही बात मोटापे के साथ भी है। गलत खान पान,गलत रहन सहन, गलत रूटीन हो तो मोटापा अपने आप आ जायेगा, और आपको पता भी नहीं चलेगा। सही खान पीन के साथ साथ अगर आप शारीरक श्रम भी करते हैं मोटापा जल्द कम होने में मदद मिलेगी।

ब्रेस्टफीडिंग छुड़वाने के तरीके

बच्चे के जन्म के बाद माँ के दूध के अलावा बच्चे के लिए और कोई उत्तम आहार नहीं होता है। इसीलिए बच्चे के जन्म के बाद कम से कम छह महीने तक बच्चे को माँ का दूध पिलाने की सलाह ही दी जाती है और कुछ बच्चे छह महीने नहीं बल्कि एक, डेढ़, दो साल या उससे ज्यादा समय तक भी माँ का दूध पीते हैं। ऐसे में जितना माँ का दूध पिलाना बच्चे के लिए जरुरी है उतना ही बच्चे की उम्र बढ़ने के बाद बच्चे का दूध छुड़वाना भी जरुरी है। और यदि बच्चा ज्यादा समय तक माँ का दूध पीता है तो इस आदत को छुड़वाने में उतना ही ज्यादा समय भी लगता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जो आपको बच्चे का दूध छुड़वाने में मदद करते हैं।

ब्रेस्टफीडिंग छुड़वाने का सही समय क्या होता है?

बच्चे का दूध छुड़वाना वैसे तो पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है की महिला कब बच्चे का दूध छुड़वाना चाहती है। और सच तो यह हैं की जो बच्चे लम्बे समय तक माँ का दूध पीते हैं वो जल्दी बोलना, चलना, सीखते हैं साथ ही उनका दिमाग भी तेज होता है। लेकिन एक उम्र के बाद बच्चे का दूध छुड़वाना पड़ता है ऐसे में जब बच्चा छह महीने के बाद थोड़ा थोड़ा ठोस आहार लेने की शुरुआत कर देता है और एक साल तक महिला अपने दूध के साथ बच्चे को वह आहार दे सकती है।

उसके बाद भी महिला ऐसा कर सकती है लेकिन डेढ़ से दो साल के बाद महिला के लिए जरुरी होता है की वह बच्चे का दूध छुड़वा दें। क्योंकि अब बच्चे की भूख बढ़ने लगती है और बच्चे के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्वों की पूर्ति सिर्फ दूध से नहीं हो पाती है। साथ ही बच्चे के बड़े होने के बाद बच्चे को बाहर कहीं जाने पर दूध पिलाने में परेशानी होती है। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की डेढ़ से दो साल बच्चे का दूध छुड़वाने की सही उम्र होती है।

स्तनपान छुड़वाने के तरीके

बच्चे की ब्रेस्टफीडिंग छुड़वाने के लिए महिला को धैर्य से काम लेने की जरुरत होती है क्योंकि कोई भी बच्चे एक ही दिन में दूध पीना नहीं छोड़ देता है। तो आइये अब उन टिप्स के बार में विस्तार से जानते हैं की स्तनपान छुड़वाने के लिए महिला को क्या-क्या करना चाहिए।

सबसे पहले बच्चे को दूध पिलाने का दूसरा तरीका अपनाएँ

बच्चे का दूध छुड़वाने से पहले आपको बच्चे को धीरे धीरे कप या गिलास में दूध पीने की आदत डालनी चाहिए। जैसे जैसे बच्चे को यह आदत पड़ जाती है वैसे वैसे बच्चा आपका दूध पीना कम कर देता है।

दिन में न पिलायें दूध

ब्रेस्टफीडिंग छुड़वाने के लिए आप बच्चे की यह आदत बनाएं की दिन में उसे दूध न पिलायें बल्कि दिन में बच्चे को कुछ न कुछ बनाकर खाने के लिए दें या दूसरे तरीके से दूध पिलायें। और केवल रात में ही ब्रेस्टफीडिंग करवाएं उसके बाद रात को सोने से पहले बच्चे को अच्छे से पेट भरकर सुलाएं ताकि पहले दिन में और फिर रात में बच्चे की स्तनपान करने की आदत छूट जाये ।

बच्चे का ध्यान कहीं और भटकायें

यदि भूख लगने पर आपका बच्चा दूध मांग रहा है तो बच्चे के साथ खेले व् खेलते खेलते उसे कुछ और खाने के लिए दें। जिससे उसका पेट भी भर जाए और वो दूध भी नहीं मांगे।

ब्रेस्ट पर दबाव नहीं डालें

ब्रेस्ट पर दबाव अधिक पड़ने के कारण स्तनों में दूध उतरता रहता है ऐसे में महिला को वो काम बिल्कुल नहीं करने चाहिए जिससे की स्तनों पर दबाव पड़े जैसे की उल्टा सोना, टाइट ब्रा पहनना, ब्रेस्ट दबाना आदि। यदि आप ऐसा इस बात का ध्यान रखेंगी तो इससे स्तनों में दूध उतरना कम हो जायेगा जिससे बच्चे को दूध भरपूर नहीं मिलेगा और बच्चे की ब्रेस्टफीडिंग की आदत छूट जाएगी।

बच्चे के खाने के समय का ध्यान रखें

जैसे जैसे बच्चे को दूध पिलाना आप छोड़ते हैं वैसे वैसे आप इस बात का ध्यान रखें की किस समय बच्चे को भूख लगती है और बच्चे के लिए दूसरा आहार तैयार रखें। जिससे बच्चे को सही समय पर आहार मिल सके और बच्चे की दूध पीने की आदत कम हो जाये।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से बच्चे की दूध पीने की आदत को छुड़वाने में मदद मिलती है। यदि आप भी बच्चे की ब्रेस्टफीडिंग को छुड़वाना चाहती हैं तो आप भी इन टिप्स का ध्यान रखें।

How to stop breastfeeding

गर्भवती महिला में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?

गर्भवती होने की खबर के साथ ही महिला की जिंदगी नई उम्मीदों व् उत्साह से भर जाती है। माँ बनने के ख्याल के साथ ही महिला के मन में मातृत्व की भावना जागने लगती है। ऐसे में महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने से ज्यादा अपने शिशु के विकास के बारे में चिंता करती है की गर्भ में पल रहा शिशु ठीक है या नहीं, उसका विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, आदि। लेकिन हर महिला के स्वभाव, व्यवहार आदि में फ़र्क़ होता है जैसे की कुछ महिलाएं बहुत शांत स्वाभाव की होती है तो कुछ महिलाओं का स्वभाव थोड़ा तीखा होता है।

ऐसे में जब महिला माँ बनने जा रही होती है तो महिला के लिए जरुरी होता है की वो अपने रहन सहन, स्वाभाव, व्यवहार, आदतों में भी थोड़ा बदलाव करें। क्योंकि कई बार महिला की गलत आदतों का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ जाता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे गुणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो हर गर्भवती महिला में जरूर होने चाहिए।

सहनशील होना है जरुरी

प्रेगनेंसी के समय महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं, महिला को बहुत सी दिक्कतें होती है, महिला को अलग सा महसूस हो सकता है, आदि। ऐसे में कुछ महिलाएं हड़बड़ाहट मचा देती है और इसी गलती की वजह से उनकी दिक्कतें और बढ़ सकती है। ऐसे में महिला का सहनशील होना बहुत जरुरी है ताकि महिला थोड़े बहुत बदलाव, दिक्कत आदि को सहन कर सकें जिससे महिला की प्रेगनेंसी को आसान बनाने व् दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिल सकें।

खुशमिजाज रहना होता है अच्छा

ऐसा माना जाता है की गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है ऐसे में महिला प्रेगनेंसी के दौरान जैसा खाती पीती है, जैसा स्वाभाव रखती है, जो भी करती है उसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। यदि महिला खुश रहती है तो तो गर्भ में पल रहा शिशु भी खुश व् एक्टिव रहता है यदि महिला तनाव में रहता है तो शिशु पर उसका नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला के अंदर खुशमिजाज होने का गुण होना भी बहुत जरुरी है।

शांत रहने का गुण होना भी है जरुरी

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला के व्यवहार में भी बदलाव आ सकता है जिसकी वजह से महिला का गुस्सा, चिड़चिड़ाहट आदि बढ़ सकती है। ऐसे में महिला का अपने ऊपर कण्ट्रोल रहना यानी की महिला का अपने आप को शांत रखना बहुत जरुरी है क्योंकि ज्यादा गुस्सा, चिड़चिड़ाहट माँ व् बच्चे दोनों के लिए अच्छी नहीं होती है। ऐसे में गर्भवती महिला के अंदर शांत रहने का गुण होना भी बहुत जरुरी है।

केयरिंग होना है जरुरी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का व्यवहार अपने लिए केयरिंग जरूर होना चाहिए क्योंकि यदि महिला अपना ध्यान अच्छे से रखेगी तभी शिशु का ध्यान भी अच्छे से रख पाएगी। और यदि महिला लापरवाह होगी तो इससे न केवल महिला की सेहत को नुकसान पहुंचेगा बल्कि शिशु पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा।

समय का पक्का होना है जरुरी

गर्भावस्था के दौरान फिट रहने के लिए जरुरी है की महिला की हर चीज समय पर हो जैसे की महिला का खाना खाना, दवाई लेना, समय पर जांच करवाना, नींद का सही समय होना, आदि। क्योंकि यह सभी चीजें प्रेगनेंसी के दौरान सबसे जरुरी होती है और महिला यदि समय का ध्यान रखती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि महिला कोई भी काम समय से नहीं करती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला का समय का पक्का होना बहुत जरुरी है ताकि माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकें।

कण्ट्रोल रहना आना चाहिए

गर्भवती महिला के अंदर अपने आप को कण्ट्रोल करने का गुण भी होना चाहिए जैसे की प्रेगनेंसी से पहले आपका कुछ भी खाने पीने, घूमने आदि का मन करता था तो आप तुरंत कर लेती थी। लेकिन अब आपके लिए जरुरी है की आप अपने ऊपर कण्ट्रोल कर सकें और ऐसे ही कुछ भी न खाएं पीएं, कहीं भी घूमने फिरने से पहले अपना अच्छे से ध्यान रखें, बल्कि पूरी सावधानी का ध्यान रखते हुए अपना ध्यान रखें जिससे आपको और आपके होने वाले बच्चे दोनों को फायदा हो।

सकारात्मक रहना है जरुरी

गर्भवती महिला के अंदर हमेशा पॉजिटिव रहने का गुण होना बहुत जरुरी है क्योंकि महिला जितना ज्यादा पॉजिटिव रहती है। उतना ही गर्भवती महिला को अपनी प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिलती है। और यदि महिला हमेशा नेगेटिव रहती है और हमेशा उल्टा सीधा सोचती रहती है तो महिला के साथ यह शिशु के लिए भी सही नहीं होता है इसीलिए प्रेग्नेंट महिला के लिए सकारात्मक रहना बहुत जरुरी है।

तो यह हैं कुछ गुण जो गर्भवती महिला में जरूर होने चाहिए क्योंकि यह सभी गुण प्रेग्नेंट महिला की प्रेगनेंसी को आसान बनाने व् गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला व् शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

What qualities should a pregnant woman have