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जीभ और मुंह में छोटे लाल दाने के घरेलू उपचार

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आज के समय में हर कोई किसी न किसी समस्या से जूझता दिखाई पड़ता है फिर चाहे वो पेट की गैस की समस्या हो या सर दर्द। लेकिन इसके अलावा एक और समस्या है जिससे अक्सर लोग परेशान दिखाई पड़ते है और वो मुंह में छाले की समस्या। मुंह में छाले होना आम बात है लेकिन अगर ये समस्या बढ़ जाए तो बहुत कष्टकारी होती है।

मुंह में छाले होने पर मुंह के अंदर और जीभ पर सफ़ेद लाल दाने हो जाते है जिनमे दर्द होता है और जलन होती है। ऐसे तो सामान्यतः 3 से 5 दिन में अपने आप ही ठीक हो जाते है लेकिन कई बार इन्हे सहन कर पाना काफी कठिन हो जाता है। ऐसे में इनसे छुटकारा पाने के लिए लोग दवाओं का प्रयोग करते है।

लेकिन हर छोटी छोटी बिमारी के लिए दवा का प्रयोग करना ठीक नहीं। मुंह में छाले पेट में समस्याएं, ठीक प्रकार से शौच नहीं जाने, मसालेदार भोजन के अधिक सेवन, गलत आहार खाने और पानी का कम सेवन करने के कारण होते है। ज्यादातर ये मुंह के अंदर, जीभ, गले के पीछे, गालों के हिस्से पर होते है। लेकिन कई बार समस्या बढ़ने की वजह से ये गले और पेट के अंदर भी हो जाते है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर को दिखाना ही उचित होता है।

अगर आप भी अक्सर मुंह और जीभ में छाले की समस्या से परेशान है तो आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप घर बैठे अपनी इस समस्या से छुटकारा पा सकते है। इसके लिए आपको दवाओं में पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि ये सभी उपाय आपके घर में मौजूद वस्तुओं से ही बने है। तो आइए जानते है मुंह और जीभ पर लाल दाने यानि छाले के घरेलू उपाय!

मुंह और जीभ पर छाले के कारण :

किसी भी बीमारी का इलाज जानने से पूर्व उसके कारणों को जानना आवश्यक होता है ताकि अगली बार इस बात का ध्यान रखा जाए और बीमारी से बचा जा सके। नीचे हम आपको मुंह और जीभ पर छाले होने के कारण बता रहे है। जिन्हे ध्यान में रखकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते है।छालें कैसे ठीक करें

  • पाचनतंत्र में गड़बड़ी
  • अधिक तेल और मसालें वाला भोजन खाना
  • अनुवांशिक
  • हॉर्मोन में परिवर्तन
  • विटामिन B की कमी
  • खाते समय दांतों से गाल कट जाना
  • सिगरेट आदि का सेवन
  • खट्टी चीजों का सेवन करना
  • पानी कम पीना आदि।

मुंह और जीभ पर छाले के उपचार :-

1. नारियल का दूध :

छाले होने पर नारियल के दूध का इस्तेमाल करना बहुत लाभकारी होता है। साथ ही छालों में होने वाले दर्द को भी कम करता है। प्रयोग के लिए 1 चम्मच नारियल के दूध में थोड़ा सा शहद मिलाकर छाले वाले हिस्से पर मसाज करें। दिन में 3 से 4 बार प्रयोग करने से समस्या ठीक हो जाएगी। आप चाहे तो नारियल के दूध से कुल्ला करके भी छाले ठीक कर सकते है।

2. धना :

यह एक प्रकार का आयुर्वेदिक उपचार है जो छालो की समस्या पर जड़ से काम करता है। और आराम पहुंचाता है। इसके लिए एक कप पानी में 1 चम्मच धना डालकर उबाल लें और छान कर ठंडा कर लें। उसके बाद इस पानी से कुल्ला करें। रोजाना 2 से 3 बार इस उपाय का इस्तेमाल करें। आराम मिलेगा।

3. बेकिंग सोडा :

अगर आपके जीभ या मुंह पर छाले किसी खट्टी चीज जैसे नींबू संतरा आदि के खाने की वजह से हुए है तो इसमें बेकिंग सोडा बहुत लाभकारी होता है। इससे मुंह में हुआ इन्फेक्शन और बैक्टीरिया भी दूर हो जाते है। प्रयोग के लिए 1 चम्मच बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बनाए। अब इसे अपने छालों पर लगाएं। आप चाहे तो सीधे बेकिंग सोडा भी छालों पर लगा सकती है। इससे थोड़ी जलन होगी इसीलिए थोड़ा ध्यान से प्रयोग करें।

4. शहद :jeebh par lal dane

छालें में आराम देने के लिए शहद काफी लाभकारी होता है। इससे दर्द और जलन में काफी आराम मिलता है। इसके लिए रुई में शहद लगाकर उसे छालों पर लगाएं। आप चाहे तो इस तरह से ग्लिसरीन भी लगा सकते है। इससे छालों में ठंडक मिलती है।

5. एलोवेरा :

छालों से छुटकारा पाने का ये तरीका पूर्णतः नेचुरल है इसका प्रयोग कभी भी किया जा सकता है। एलोवेरा के जेल का प्रयोग करने से छालों में दर्द कम होता है। इसकी एंटी बैक्टीरियल प्रकृति बैक्टीरिया को दूर करने में मदद करती है।

6. तुलसी :

तुलसी के पत्ते बहुत सी समस्या में आराम दिलाने में मदद करते है। इसका प्रयोग करने से छाले भी ठीक हो जाते है। प्रयोग के लिए 4 से 5 तुलसी के पत्तो को धोकर उन्हें चबाएं। उसके बाद थोड़ा पानी पियें। दिन में 2 बार इसका प्रयोग करें छाले ठीक हो जाएंगे।

7. बर्फ :

बर्फ भी छालों में आराम दिलाने में मदद करती है। इसके लिए जब छाले हो तो बर्फ की सिकाई करें। इससे जलन और दर्द में आराम मिलेगा।

8. हल्दी :

हल्दी छालों के लिए भी काफी बेहतर उपाय है। ये हर प्रकार के घाव को ठीक करने की क्षमता रखती है। छालों में प्रयोग के लिए 1 ग्लास गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं। अब इस पाने से कुल्ला करें। दिन में इस प्रक्रिया को दोहराएं आपकी समस्या ठीक हो जाएगी।

9. अमरुद :

छालों में अमरूद का सेवन करना बहुत लाभकारी होता है। इसके रस को लगाने से छालें ठीक हो जाते है।

10. धनिया :

धनिये की पत्ती भी छालों में आराम देने में मदद करती है। इसके प्रयोग के लिए धनिये की पत्ती या उसके तने का रस निकाल लें। अब इस रुई में लेकर अपने छालों पर लगाएं। छाले ठीक हो जायेंगे।

पुरे शरीर में खुजली होने के क्या कारण होते है? क्या उपाय है?

Eczema : Causes & Remedies

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मानव शरीर बेहद नाजुक और सेंसिटिव होता है जिसमे अक्सर कोई न कोई परेशानी होती ही रहती है। इन्ही समस्यायों में से एक है खुजली। यह किसी को भी कभी भी किसी भी कारण से होने लगती है। जिसका मुख्य कारण अक्सर त्वचा के रूखेपन को ही माना जाता है।

परन्तु अगर यह खुजली लगातार कई समय हो होती रही तो हो सकता है की आपके लिवर या किडनी में कोई समस्या है। सामान्य तौर पर खाज खुजली की समस्या एलर्जी, चरम रोग या स्किन रैशेस कारण होती है। लेकिन कई बार इसका होना अन्य बातों का भी संकेत हो सकता है।

डॉक्टरों की माने तो, खुजली माइक्रोब्स यानि बहुत अधिक सूक्ष्म जीवाणुओं के संक्रमण के कारण होती है। जिसका कारण, कई दिनों तक स्नान नहीं करना, त्वचा पर धूल मिटटी आदि जमना होता है। वैसे खुजली कोई स्वतंत्र रोग नहीं है। यह शरीर के दूसरे रोगों के कारण भी हो सकती है। जैसे त्वचा का रूखापन, रक्त का दूषित होना आदि

अगर खुजली ब्लड में इन्फेक्शन के कारण हो रही है तो खुजली के साथ साथ छोटी छोटी फुंसियां भी निकल सकती है। जिनमे बहुत तेज खुजली होती है। जानकारी के लिए बता दें पेट में कीड़े होने पर भी खुजली की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस समस्या को जड़ से खत्म करना बेहद जरुरी होता है। क्योंकि शरीर में खुजली व्यक्ति की बेचैनी का कारण बनती है। जिसकी वजह से व्यक्ति का किसी काम में ध्यान नहीं लग पाता।

अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो परेशान न हो क्योंकि आज हम आपको शरीर में खुजली होने के कारण के साथ साथ उसके उपाय भी बताने जा रहे है जो आपको इस समस्या से निजात दिलाने में मदद करेंगे।

खुजली होने के कारण :-

ऐसे तो त्वचा में खुजली होने के बहुत से कारण होते है लेकिन कई बार कुछ विशेष कारणों की वजह से त्वचा में तीव्र खुजली होती है। और वे कारण निम्न है –

  • स्किन में इन्फेक्शन / रूखी त्वचा।
  • किसी प्रोडक्ट से एलर्जी।
  • धुप में अधिक देर तक घूमना।
  • जानवर के काटने से।
  • बालों में जुएं होने के कारण भी खुजली हो सकती है।
  • समस्या के बढ़ने पर खुजली के साथ साथ चक्क्ते और रैशेज भी हो जाते है।
  • पेशाब के बाद यदि साफ़ पानी से जननांग साफ़ न क्या जाए तो जीवाणुओं के संक्रमण से भी खुजली हो सकती है। body-itching
  • सोरायसिस, इम्यून सिस्टम के कमजोर होने पर होने वाली बीमारी। के कारण भी खुजली और जलन की समस्या हो सकती है।
  • ठीक प्रकार से नहीं नहाना।
  • गंदे कपडे पहनना।
  • मच्छर के काटने पर।
  • पेट में कीड़े होने पर।
  • गुर्दे की कोई बीमारी।
  • किसी खाद्य पदार्थ का रिएक्शन।

Eczema – खुजली की समस्या से निपटने के उपाय :-

1. नारियल तेल :

खुजली के कारण त्वचा के शुष्क होने या किसी कीड़े के काटने पर खुजली हो रही है तो उस स्थान पर नारियल तेल अच्छी तरह से लगा लें। अगर पुरे शरीर में खुजली हो रही है तो पुरे शरीर पर अच्छे से नारियल तेल लगाएं खुजली दूर होगी।

2. पेट्रोलियम जेली :पेट्रोलियम जेली के फायदे

बहुत अधिक संवेदनशील त्वचा के लिए पेट्रोलियम जेली बेस्ट उपाय है। इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता जिस वजह से इसके प्रयोग से आराम मिलता है। प्रयोग के लिए खुजली वाले स्थान पर अच्छे से पेट्रोलियम जेली लगाएं। खुजली के लिए यह काफी सस्ता और आसान उपाय है।

3. नींबू :

इसमें विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो त्वचा से खुजली दूर करने में सबसे फायदेमंद है। नींबू में volatile oil भी पाया जाता है जो सूजन को कम करने में मदद करता है। प्रयोग के लिए नींबू का रस निकालकर उसे प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं और कुछ देर सूखने दें। आराम मिलेगा।

4. बेकिंग सोडा :

यह आप सभी की रसोई में आसानी से पाया जाने वाला पदार्थ है। खुजली दूर करने के लिए तीन हिस्से बेकिंग सोडा को एक हिस्सा पाने में मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को प्रभावित हिस्से पर लगाएं। अगर पुरे शरीर में खुजली हो रही है तो एक तब में गुनगुना पानी लें और उसमे 1 कप बेकिंग सोडा मिलाएं। खुजली वाले अंग को आधा घंटा इस पानी में भिगोएं और फिर खुली हवा में सूखने दे। खुजली में राहत मिलेगी।

5. तुलसी के पत्ते :

तुलसी के पत्तों में thymol, eygenol पाया जाता है जो स्किन की खुजली को दूर करने की क्षमता रखते है। प्रयोग के लिए थोड़े से तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह धोकर प्रभावित हिस्से पर लगाकर रगड़ें। आप चाहे तो तुलसी के पत्तों को एक ढके हुए बर्तन में पानी के साथ अच्छी तरह उबाल लें। अब रुई लेकर उसे पानी में भिगोएं और खुजली वाले हिस्सों पर लगाएं।

6. सेब का सिरका :apple sider vineger

एक रुई को सेब के सिरके में भिगोकर खुजली वाले हिस्सों पर लगाएं। कुछ समय तक इसे यूँ ही रहने दें। यदि पुरे शरीर में खुजली हो रही है तो आप एक कप सेब के सिरके को पानी में डालकर नहाएं। धीरे धीरे खुजली में राहत मिलने लगेगी।

7. ठंडा पानी :

खुजली वाले हिस्सों पर लंबे समय तक ठंडा ठंडा पानी डाला जाए तो खुजली में आराम मिलता है। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों को कपडे में लपेटकर जहां खुजली महसूस हो वहां लगा सकते है। इससे प्रभावित हिस्से पर ठंडा मिलती है और खुजली में आराम मिलता है।

प्रसव पीड़ा लाने के लिए क्या करें?

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने गर्भवती महिला शिशु के जन्म के लिए बेसब्री से इंतज़ार करती है। और जैसे ही महिला को नौवां महीना लगता है और शिशु के जन्म के लिए दी गई अनुमानित तिथि पास आने लगती है। वैसे ही महिला चाहती है की बस अब शिशु का जन्म जल्दी से जल्दी हो जाएँ, लेकिन इस दौरान महिला इस बात का ध्यान रखें की जल्दबाज़ी में आप अपनी सेहत के साथ किसी तरह की लापरवाही न करें। जैसे की कुछ महिलाएं नौवां महीना लगते ही घर के सभी कामों को करना शुरू कर देती है, कई बार यह आपके लिए प्रसव को सरल करने की बजाय परेशानी का कारण भी बन सकता है। यदि महिला प्रसव पीड़ा को बढ़ाना चाहती है तो इसके लिए महिला कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।

प्रसव पीड़ा को लाने के लिए टिप्स

गर्भवती महिला को यदि नौवां महीना लग गया है और महिला प्रसव को आसान बनाना चाहती है, तो इसके लिए महिला कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है जिससे प्रसव पीड़ा को शुरू करने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रसव पीड़ा को लाने के लिए गर्भवती महिला किन तरीको का इस्तेमाल कर सकती है।

चहल कदमी

सैर करना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, और प्रसव पीड़ा को शुरू करने के लिए भी प्रेग्नेंट महिला नौवें महीने में चहल कदमी कर सकती है। ऐसा करने से शिशु को अपनी सही पोजीशन में आने के लिए मदद मिलने के साथ शिशु के सिर का भार ग्रीवा पर पड़ने लगता है। जिससे संकुचन की शुरुआत करने में मदद मिलती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की आप सारा दिन चलती रहें, बल्कि इस दौरान गर्भवती महिला को इस बात का भी ध्यान रखना है की वो एनर्जी से भरपूर रहे और खुद को थकने न दें। ताकि प्रसव को आसान बनाने में महिला को मदद मिल सके।

स्तन

प्रसव पीड़ा को उत्तेजित करने के लिए प्रेग्नेंट महिला स्तन की मालिश भी कर सकती है खासकर स्तन के आगे के हिस्से की, क्योंकि ऐसा करने से बॉडी में ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन बढ़ने लगता है। जिससे गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने में मदद मिलती है, और प्रसव पीड़ा उत्पन्न हो सकती है।

मसालेदार भोजन

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अधिक तेल, मसालें युक्त आहार का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि अधिक तेल मसाले युक्त आहार का सेवन करने महिला को पेट सम्बन्धी समस्या होने का खतरा हो सकता है। लेकिन ऐसा माना जाता है की प्रसव पीड़ा की शुरुआत करने के लिए गर्भवती महिला को मसालेदार भोजन का सेवन करना चाहिए। क्योंकि इससे प्रसव पीड़ा को उत्पन्न करने में मदद मिलती है।

सम्बन्ध

ऐसा भी माना जाता है की प्रेगनेंसी के नौवें महीने में यदि गर्भवती महिला अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाती है तो इससे भी प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिलती है। क्योंकि समबन्ध बनाने से गर्भाशय की ग्रीवा पर प्रभाव पड़ता है जिससे गर्भाशय में संकुचन उत्त्पन्न हो सकता है। और महिला को प्रसव पीड़ा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

गुनगुने पानी से नहाएं

गर्भाशय में संकुचन को उत्त्पन्न करने के लिए गर्भवती महिला एक और आसान तरीके का इस्तेमाल कर सकती है। और वो है गुनगुने पानी से स्नान करना। यदि प्रेग्नेंट महिला गुनगुने पानी से स्नान करती है तो इससे भी गर्भाशय में संकुचन को प्रेरित करने में मदद मिलती है।

अरंडी का तेल

पेट पर यदि गर्भवती महिला अरंडी के तेल को हलके हाथों से चारों और नियमित रूप से लगाती है तो ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को प्रसव को प्रेरित करने में मदद मिलती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की अरंडी के तेल का इस्तेमाल अधिक न करें क्योंकि इसके कारण महिला को घबराहट, उल्टी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

योगा

पूरी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला आराम से बैठकर थोड़ी देर योगा कर सकती है। और प्रेगनेंसी के नौवें महीने में आकर योगा करने से भी गर्भवती महिला की प्रसव पीड़ा की शुरुआत करने में मदद मिलती है।

खान पान

कुछ ऐसे आहार भी है जिनका सेवन करने से गर्भाशय में संकुचन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है जिससे प्रसव पीड़ा की शुरुआत करने में मदद मिलती है। और इसके लिए महिला अनानास, तुलसी के पत्ते, कच्चा पपीता, रेस्पबैरी की चाय, आदि का सेवन कर सकती है। लेकिन तब भी इनका सेवन जरुरत से ज्यादा न करें की आपको किसी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़े।

तो यह है कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से महिला को प्रसव पीड़ा को आसान बनाने में मदद मिलती है। लेकिन इनसे आपको प्रसव पीड़ा एक ही बार में शुरू हो जाये ऐसा कोई जरुरी नहीं है यह उपाय आपको प्रसव पीड़ा जब तक शुरू न हो जाये तब तक करने चाहिए। इसके अलावा यदि आपको डॉक्टर ने पहले से ही सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी है तो आपको ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे आपको दिक्कत होने का खतरा हो।

एबॉर्शन के बाद होने वाली परेशानियां!

गर्भावस्था जहां किसी महिला के लिए बहुत ख़ास लम्हा होता है, तो कई महिलाओ को एबॉर्शन भी करवाना पड़ता है, कई बार महिलाओ का गर्भपात खुद हो जाता है, तो कई महिलाएं जो की अनचाहा गर्भ नहीं चाहती है, और उनके गर्भ में शिशु आ जाता है, तो वो खुद एबॉर्शन करवा लेती है, परन्तु एबॉर्शन के बाद होने वाली परेशानियों के कारण महिला को काफी दिनों तक परेशान रहना पड़ता है, एबॉर्शन का एक या दो बार से ज्यादा होने के कारण आपको शरीर से सम्बंधित ज्यादा बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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गर्भपात के होने के कारण महिला के शरीर में हॉर्मोन में भी बदलाव आता है, और महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या होती है, पेट कमर में दर्द, मासिक चक्र पर प्रभाव पड़ना, बुखार होना, सर दर्द होना ऐसी ही कुछ समस्या महिला को हो जाती है, इसके अलावा कई बार महिलाएं घर पर ही घरेलू तरीको का इस्तेमाल करके या जिनका गर्भ थोड़े दिनों के बाद खुद ही गिर जाता है, उन्हें भी एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए क्योंकि कई बार गर्भाशय में कुछ टिश्यू रह जाते है जिसके कारण महिला को बाद में परेशान होना पड़ता है, और इसके कारण बार बार गर्भपात के चांस भी बढ़ जाते है, तो आइये अब हम आपको विस्तार से बताते है की गर्भपात के बाद महिला को कौन कौन सी समस्या हो जाती है।

ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है:-

एबॉर्शन के बाद महिला को बहुत अधिक मात्रा में ब्लीडिंग हो सकती है, और पीरियड्स के दिनों से ज्यादा दिनो तक ब्लीडिंग होती है, लेकिन यदि आपको ऐसा लग रहा है की आपको बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने के साथ हर एक घंटे में पैड को बदलना पैड रहा है, या कुछ गाढ़ा रक्तस्त्राव हो रहा है तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

मासिक चक्र में बदलाव आता है:-

जैसे ही गर्भपात के बाद ब्लीडिंग खत्म होती है, इसके बाद आपका मासिक चक्र भी इससे प्रभावित होता हैं, और दो से तीन महीने तक आपकी पीरियड्स की डेट में बदलाव आ सकता है, और आपको ब्लीडिंग में भी कम या ज्यादा की समस्या हो सकती है।

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बच्चेदानी से जुडी समस्या हो सकती है:-

कई बार एबॉर्शन के बाद भी गर्भाशय में कुछ टिश्यू रह जाते है, जिसके कारण महिला को अगली बार फिर से गर्भपात का खतरा बना रहता है, साथ ही इसके कारण बच्चेदानी में इन्फेक्शन की समस्या भी हो सकती है, इसीलिए एबॉर्शन के बाद एक बार डॉक्टर से अच्छे से गर्भाशय की जांच करवानी चाहिए जिससे आपको बाद में परेशानी न हो।

इन्फेक्शन के चांस बढ़ जाते है:-

एबॉर्शन के बाद महिला की स्थिति काफी नाजुक होती है, और इस दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट और गर्भाशय में इन्फेक्शन के चांस सबसे ज्यादा होते है, इसीलिए महिला को इस समय साफ़ सफाई का ध्यान देना चाहिए, साथ ही यदि आपको प्राइवेट पार्ट में खुजली या जलन जैसी समस्या हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पेट में दर्द होना:-

पीरियड्स के दौरान महिला को ब्लीडिंग ज्यादा होने पर कई बार पेट में दर्द हो जाता है, ऐसी ही एबॉर्शन के बाद भी महिला को कई बार पेट में दर्द होने लगता है, ऐसे में यदि ये दर्द ज्यादा हो या फिर असहनीय हो तो आपको इस बारे में एक बार डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए।

तनाव हो जाता है:-

जो महिला गर्भ में पल रहे शिशु को चाहती है, और गर्भपात हो जाता है, इसके कारण कई महिलाओ के शरीर में विकार उत्त्पन्न होने लगता है जिसके कारण महिलाएं बहुत ज्यादा चिंता करने लगती है, और उनके शरीर में डिसऑर्डर हो जाता है, और महिलाएं तनाव में रहने लगती है।

बार बार एबॉर्शन का खतरा बना रहता है:-

एक बार गर्भपात होने के कारण महिला के शरीर में कमजोरी आ जाती है, ऐसे में दुबारा गर्भधारण के लिए समय लेना चाहिए, और यदि महिला कुछ ही दिनों में फिर से गर्भधारण कर लेती है, तो इसके कारण महिला के गर्भपात का खतरा बन रहता है, और यदि महिला का दो से तीन बार गर्भपात हो जाता है, तो इसके कारण महिला के शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है, और फिर से गर्भधारण यदि महिला करना चाहती है तो उसमे महिला को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बांझपन की समस्या हो सकती है:-

गर्भपात किसी भी महिला के लिए बहुत ही असामान्य स्थिति होती है, ऐसे में इसका असर महिला की प्रजनन क्षमता पर पड़ता है, तो इस परेशानी से उभारने के लिए महिला के परिवार वालो या किसी डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए, यदि महिला को इसके कारण ज्यादा परेशानी हो जाती है, तो कई बार महिला को बांझपन की समस्या भी उत्त्पन्न हो सकती है, इसीलिए इससे बचने के लिए महिला उसके घर वालों को धैर्य से काम लेना चाहिए।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी की समस्या हो जाती है:-

कई बार गर्भपात के बाद महिला को एक्टोपिक प्रेगनेंसी की समस्या हो जाती है, इस प्रेगनेंसी का कोई मतलब नहीं होता है, क्योंकि इसमें अंडे महिला की बच्चेदानी में नहीं बल्कि फेलोपियन टयूब या कही और पनपने लगते है, ऐसे में प्रेगनेंसी तो होती नहीं है बल्कि महिला को गर्भपात के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है।

एबॉर्शन के बाद यदि ये परेशानियां ज्यादा हो तो डॉक्टर से संपर्क करें:-

  • यदि आपके प्राइवेट पार्ट से बदबूदार और चिपचिपा पदार्थ अधिक मात्रा में निकले तो आपको अपने डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए।
  • पेट में असहनीय दर्द होने पर, या शरीर के अन्य हिस्सों में तेजी से दर्द होने पर।
  • यदि आपको इस बहुत अधिक बुखार, चक्कर, सर दर्द आदि की समस्या हो।
  • ब्लीडिंग बहुत अधिक मात्रा में होने पर आपको ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है।

तो ये कुछ परेशानियां है जो आपको एबॉर्शन के बाद हो जाती है, परन्तु महिलाओ को इस स्थिति में अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस समय शरीर में आई कमजोरी में अच्छे से ध्यान न रखा जाएँ तो इसके कारण आपके शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है, साथ ही आपको डॉक्टर से भी अपना चेक अप जरूर करवाना चाहिए, क्योंकि कई बार गर्भाशय से जुडी यदि कोई परेशानी हो जाती है, और आप दुबारा गर्भधारण करना चाहते तो आपको समस्या हो सकती है, साथ ही जितना जल्दी को महिला को इस स्थिति से बाहर आना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए।

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नींबू पानी पीने के फ़ायदे!

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नींबू पानी पीने के क्या-क्या फ़ायदे है :- नींबू के फायदों के बारे में तो आप सभी जानते है इसीलिए इसे अपने सलाद या दाल सब्जी में सम्मिलित करना भी पसंद करते होंगे. और हो न हो नींबू पानी भी अवश्य पीते होगे लेकिन क्या कभी उसके फायदों के बारे में जानने की कोशिश करी. शायद नहीं क्योंकि कभी इसकी आवश्यकता ही नहीं पड़ी.

दुनिया भर में अधिकतर लोग ऐसे है जो अपने दिन की शुरुआत चाय या कॉफ़ी से होती है लेकिन क्या आप जानते है की इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी है जिनका दिन तभी निकलता है जब वे नींबू पानी पी लेते है. जी हां, आपके स्वास्थ्य के लिए जितना फायदेमंद नींबू है उतना ही लाभकारी नींबू पानी भी है.

यहाँ हम चीनी वाले नींबू पानी की बात नहीं कर रहे है अपितु बिना चीनी वाले नींबू पानी एनर्जी ड्रिंक की बात कर रहे है. नींबू का पानी आपके स्वास्थ्य के लिए कितना लाभकारी है इस बात का अंदाजा आप उसमे मौजूद तरह तरह के तत्वों से भी लगा सकते है. नींबू पानी में विटामिन्स, मिनरल्स, फाइबर और एनर्जी तत्व पाए जाते है जो आपके मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने, शरीर से सभी toxins बाहर निकालने, स्किन को चमकदार बनाने और स्वास्थ्य को अच्छा रखने में मदद करते है.

इसीलिए गर्म अवस्था में हो या ठंडा नींबू पानी का सेवन करते रहने चाहिए. लेकिन आज भी कुछ लोग है जो नींबू पानी के विभिन्न फायदों से अनजान है इसीलिए आज हम आपको नींबू पानी के 25 फायदों के बारे में बताने जा रहे है. जिन्हें जानकर आपको आश्चर्य तो होगा ही साथ-साथ प्रसन्नता भी होगी.

नींबू पानी पीने के 25 फ़ायदे :-

1. मेटाबोलिज्म को सही करता है –

नींबू पानी में मौजूद सिट्रिक एसिड आपके digestives juice को सक्रीय करने में मदद करता है जिससे मेटाबोलिज्म को एक बेहतर बूस्ट मिलता है और आपका पाचन बेहतर तरीके से हो पाता है.

2. शरीर को Detoxify करे –

शोध से पता चला है की एक गिलास नींबू पानी का सेवन करने से पुरे शरीर के सभी toxins बाहर निकल जाते है. इस पानी का सेवन सुबह करना अधिक लाभकारी होता है.

3. कब्ज में राहत दे –

Digestive जूस को सक्रिय करने के लिए डाइटरी फाइबर की हलकी डोज की आवश्यकता होती है जो नींबू पानी से मिलती है. इसकी मदद से कब्ज और सुजन की समस्या को भी ठीक किया जा सकता है.

4. आपको जगाए –

नींबू पानी आपके शरीर को हाइड्रेट करने में मदद करता और और साथ ही आपके पुरे digestive सिस्टम पर भी बेहतर प्रभाव डालता है. साथ ही आपके एनर्जी को भी बूस्ट करने में मदद करता है. अध्ययनों में ये पाया गया है की कैफीन की तुलना में ये आपके एनर्जी को बढाने में मदद करता है.

5. एक प्राकृतिक Diuretic –

यदि आप अपने शरीर के अतिरिक्त fluid से निजात पाना चाहते है तो नींबू पानी इसके लिए एक बेहतर उपाय है जो आपके शरीर में सब को संतुलित करने में मदद करता है.

6. सर्दी और फ्लू को ठीक करे –

नींबू में विटामिन C की अच्छी मात्रा पाइ जाती है. 25% से अधिक का मानना है की रोजाना आधे निचोड़े हुए नींबू के रस के पानी का सेवन करना लाभकारी होता है. ये आपके immune system को अच्छा करने में मदद करता है और साथ ही सर्दी और फ्लू को ठीक करने में भी मदद करता है.

7. ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करे –

नींबू में potassium की अच्छी मात्रा पायी जाती है, जो ब्लड प्रेशर को कम करके उसके सर्कुलेशन को अच्छा करने में मदद करता है. इसके साथ ही potassium, artery को आराम देकर शरीर में मौजूद fluid के लेवल को संतुलित करता है.

8. एक प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में –

इसमें पाए जाने वाले विटामिन C और मैग्नीशियम एक प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में कार्य करते है, जो दर्दनाक सुजन और शरीर में हुई किसी भी प्रकार की असुविधा को ठीक करने में मदद करता है.

9. साफ़-सुथरी त्वचा दे –

विटामिन C की अच्छी मात्रा collagen के उत्पादन को बढाती है, जो आपकी त्वचा को जवान और toned रखने में मदद करता है. इसके साथ ही नींबू पानी आपके शरीर से सभी toxins को भी बाहर करता है जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं नहीं होती.

10. आंतरिक शरीर को rehydrate करे –

पानी, हाइड्रेशन के लिए बेहद जरुरी होता है और इसके बिना हम थका हुआ, आलसी और अस्वस्थ महसूस करते है. नींबू पानी आपको हाइड्रेट करके शरीर में मौजूद प्रत्येक कोशिका को सही करता है.

11. वजन घटाने में सहायक –

शोध से पता चला है की नींबू में मौजूद pectin fiber आपकी भूख को नियंत्रित रखता है और साथ ही शरीर के मेटाबोलिज्म को पुरे दिन के लिए बचा कर रखता है. इसके अलावा ये आपका फट कम करके वजन घटाने में भी मदद करता है.

12. तनाव को कम करे –

इसमें मौजूद मैग्नीशियम और विटामिन C, तनाव, थकान और मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए बेहद शक्तिशाली एंटी-oxidents है. गर्म नींबू पानी का सेवन करने से इन सभी समस्याओ में आराम मिलता है.

13. बेहतर साँस प्रदान करे –

सांसो में दुर्गन्ध बैक्टीरिया, यीस्ट, प्लाक और कितानुओ के कारण होती है. नींबू पानी इन सभी बैक्टीरिया को खत्म करके आपके मुंह को एक बेहतर वातावरण प्रदान करता है और साथ ही एक फ्रेश lemon ब्रीथ भी प्रदान करता है.

14. शरीर को बिमारियों से बचाए –

नींबू पानी एक तरह का एंटी-oxident है जो फ्री रेडिकल डैमेज से बचाने में मदद करता है जो हमारी कोशिकाओ को नुकसान पहुंचाते है. इसके साथ ही ये कैंसर, मधुमेह और alzheimer जैसी बिमारियों को ठीक करने में भी मदद करता है.

15. आँखों को स्वास्थ्य रखे –

इसमे मौजूद विटामिन C और एंटी oxidents की अच्छी मात्रा आपकी आँखों को स्वस्थ और मोतियाबिंद से रहित बनाने में मदद करती है. इसके साथ ही ये आपको आँखों को फ्री रेडिकल के डैमेज से बचाने में भी मदद करता है और आपको चमकदार आंखे और अच्छी दृष्टि प्रदान करता है.

16. आपको खुश रखे –

शोध से पता चला है की साफ़ सुथरे पानी में से आ रही नींबू की खुशबु और इसका खट्टा मीठा स्वाद आपके मस्तिष्क पर बेहद प्रभाव डालता है. और endorphins को triggering करता है जिससे हम खुश महसूस करे.

17. एथलेटिक रिकवरी को बढ़ाए –

एक जोरदार कसरत के बाद आपको एक बेहतर तरल पदार्थ, electrolytes और एनर्जी की भरपाई करने की आवश्यकता होती है और नींबू पानी इसके लिए एक बेहतर तरल पदार्थ है. ये आपको विटामिन्स, मिनरल्स और alkaline ऊर्जा देने में भी मदद करता है जिससे मांसपेशियों को जल्द रिकवर करने में मदद मिलती है और थकान भी कम होती है.

18. ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करे –

इसमें मौजूद फाइबर और चीनी की कम मात्रा आपके शुगर लेवल को संतुलित करने में मदद करता है. शोध में ये भी पाया गया है की lemon water इन्सुलिन के उत्पादन को उत्तेजित करते है जिससे ब्लड शुगर लम्बे समय तक स्टेबल रहता है.

19. आपके मस्तिष्क के लिए लाभकारी –

lemon water में potassium की अच्छी मात्रा पायी जाती है जो स्वस्थ मस्तिष्क के लिए इसे एक बेहतर ड्रिंक बनाता है. Potassium triggers ऑक्सीजन को सीधे मस्तिष्क तक ले जाता है. जो इसे अच्छे से कार्य करने में और चीजो को याद रखने में मदद करता है. इसके अलावा तनाव दूर करने में भी सहायता प्रदान करता है.

20. हड्डियों के लिए फायदेमंद –

नींबू पानी में कैल्सियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो स्वस्थ और मजबूत हड्डियों के लिए बेहद जरुरी है. इसके साथ ही ये टूटी हड्डियों और सूजे हुए जोड़ो को ठीक करने में भी मदद करता है.

21. ये पूरी तरह फैट रहित है –

नींबू पानी केवल फैट फ्री ही नहीं है बल्कि आपके शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट को कम करने में भी मदद करता है.

22. कैलोरी की कम मात्रा –

lemon water के 1 गिलास में कुल 20 कैलोरी पायी जाती है लेकिन ये बहुत ही स्वादिष्ट होता है. और शायद इस बात पर यकीन न हो की ज्यादा से ज्यादा lemon water का सेवन करना, कम चीनी वाले पेय पदार्थो के सेवन करने से अधिक फायदेमंद है. जो आपको एक बेहतर स्वास्थ्य और अच्छा शरीर प्रदान करने में मदद करता है.

23. गर्भवती महिला के लिए लाभकारी –

folate जन्म दोष को ठीक अकरने में मदद करता है और बच्चे के स्वस्थ मस्तिष्क व् पीठ की बेहतर वृद्धि में मदद करता है. गर्भावस्था के दौरान folate बेहद जरुरी supplements में से एक है जो आपके बच्चे से स्वास्थ्य और सेहत के लिए जरुरी है. और lemon water इसका बेहतर स्रोत्र है.

24. लीवर के लिए बेहतर –

नींबू पानी में कई तरह के enzymes पाए जाते है जो आपके लीवर के लिए बेहद लाभकारी होते है. इसके साथ ही ये लीवर में bile के उत्पादन को भी बढ़ाता है जिससे digestive हेल्थ को सुधारा जा सकता है.

25. विटामिन और मिनरल की खान –

नींबू पानी का एक ग्लास विटामिन ए, बी, सी और इ, potassium, कैल्सियम, मैग्नीशियम, folate, सेलेनियम, जिंक, एंटी-oxident और bioflavonoids होते है जो आपके शरीर के लिए हाइड्रेशन का एक बेहतर स्रोत्र है.

सावधानी : नींबू के साथ पानी का प्रयोग करने से पूर्व ये जरुर सुनिश्चित कर लें की lemon में मौजूद एसिड आपके tooth enamel को नुकसान भी पंहुचा सकता है. इसीलिए यदि संभव हो तो इसे पीने के लिए स्ट्रॉ का इस्तेमाल करे और उसके बाद मुंह अवश्य धोएं.

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प्रेग्नेंट महिला को कौन से टीके लगवाना जरुरी होता है?

प्रेगनेंसी में टीकाकरण

गर्भवती महिला की बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को संक्रमण होने का खतरा रहता है। और यदि गर्भवती महिला किसी तरह के संक्रमण से परेशान होती है तो इसका बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए टीकाकरण करवाना बहुत जरुरी होता है। प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही डॉक्टर आपको कौन कौन सी जांच करवानी है और कौन से टीके प्रेगनेंसी के दौरान लगवाने जरुरी होते हैं इस बारे में बता देते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान टीकाकरण करवाना बिल्कुल सेफ होता है, और डॉक्टर्स भी आपको वही टीके लगवाने की सलाह देते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान जरुरी होते हैं। और टीकाकरण के लिए आपको गर्भावस्था के एक अच्छे डॉक्टर से ही टीकाकरण करवाना चाहिए, और टीकाकरण करवाते समय इंजेक्शन की साफ़ सफाई और एक्सपाइरी डेट का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि आप टीकाकरण किसी ऐसी जगह से करवाते हैं जहां साफ़ सफाई नहीं है, तो इससे भी आपको संक्रमण कम होने की बजाय बढ़ने का खतरा हो सकता है, इसीलिए टीकाकरण करवाते समय इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में टीकाकरण करवाने से शिशु को कोई नुकसान तो नहीं होता है?

गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण करवाने से शिशु पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। बल्कि जो टीके प्रेगनेंसी के दौरान लगाए जाते हैं वो टीके गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान हर समस्या से बचाने में मदद मिल सके इसीलिए लगाए जाते हैं। लेकिन टीके लगवाते समय आपको इस बात का ध्यान रखना है की किसी अच्छे प्रेगनेंसी के डॉक्टर से ही अपना ट्रीटमेंट लें। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले टीकाकरण को समय पर करवाए इसमें किसी भी तरह की देरी न करें, क्योंकि यदि आप टीकाकरण को नज़रअंदाज़ करती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला और शिशु दोनों को परेशानी होने का खतरा रहता है।

गर्भावस्था में कौन कौन से टीके लगवाने जरुरी होते है?

प्रेगनेंसी के दौरान जो भी टीके लगवाने जरुरी होते है इसके लिए प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही डॉक्टर आपको बताना शुरू कर देते हैं। ताकि गर्भवती महिला का टीकाकरण सही समय पर हो सके और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान कौन से टीके लगवाने जरुरी होते हैं।

डीटीपी का टीका

डीटीपी यानी डिप्थीरिया, टेटेनस, पर्टुसिस का टीका गर्भवती महिला को लगाया जाता है। यह टीका गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यह गर्भ में पल रहे शिशु को काली खांसी जैसी गंभीर बिमारी से सुरक्षित रहने में मदद करता है। रिसर्च के अनुसार यदि यह टीका गर्भवती महिला को नहीं लगाया जाता है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत ज्यादा रिस्क होता है।

फ्लू

बरसात के मौसम में फ्लू का खतरा सबसे अधिक होता है और यदि गर्भवती महिला को फ्लू हो जाता है तो इसके कारण गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है जिससे महिला को फ्लू का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में गर्भवती महिला को फ्लू के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए फ्लू का टीका भी लगाया जाता है।

हेपेटाइटिस बी

हेपेटाइटिस बी का इंजेक्शन भी गर्भवती महिला को जरूर लगाया जाता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को यह परेशानी होने का खतरा अधिक होता है। साथ ही इस इंजेक्शन के लगवाने से महिला और शिशु को डिलीवरी के बाद भी संक्रमण से बचाव करने में मदद मिलती है।

अन्य टीके

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कत हो या महिला को कोई और परेशानी हो तो इसके कारण और टीके भी लगाए जा सकते हैं। लेकिन इन टीको की जानकारी आपको डॉक्टर द्वारा दी जाती है।

टीकाकरण के बाद गर्भवती महिला इन बातों का ध्यान रखें

गर्भवती महिला को टीकाकरण करवाने के बाद कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि इंजेक्शन लगवाने के बाद महिला को किसी तरह की समस्या न हो।

  • इंजेक्शन लगवाने के बाद कम से कम आधे घंटे तक महिला को हॉस्पिटल में ही रुकना चाहिए, ताकि टीका लगने के कारण यदि कोई भी परेशानी हो तो समय पर डॉक्टर की मदद मिल सके।
  • इंजेक्शन लगाने के बाद महिला को उस जगह पर खुजली करने से बचना चाहिए। क्योंकि खुजली करने के कारण महिला को इन्फेक्शन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि टीका लगी जगह पर लालिमा या सूजन महसूस हो तो महिला को उस जगह की ठन्डे पानी से सिकाई करनी चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को उससे आराम मिल सके।
  • किसी भी तरह की दवाई का इस्तेमाल इंजेक्शन वाली जगह के लिए नहीं करना चाहिए।

तो यह है गर्भवती महिला के टीकाकरण से जुडी जानकारी, तो यदि आप भी गर्भवती है या प्रेगनेंसी की प्लानिंग कर रही हैं तो आपको भी इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए। की प्रेगनेंसी के दौरान सही समय पर अपना टीकाकरण जरूर करवाए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले संक्रमण की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सके।

गोरा होने की क्रीम (स्किन व्हाइटनिंग क्रीम) घर पर ऐसे बनाएं

How To Make Skin Whitening Creams At Home?

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आज के समय में हर चीज में मिलावट देखने को मिलती है फिर चाहे वो खान पान की वस्तुएं हो या ब्यूटी प्रोडक्ट्स। जहां खाने पीने की चीजों में कंकड़ पत्थर की मिलावट की जाती है वहीँ कॉसमेटिक प्रोडक्ट्स में एक्सपायर, लोकल और घटिया प्रोडक्ट्स को महंगे प्रोडक्ट्स में मिलाकर बेचा जाता है। ऐसा नहीं है की सभी इस तरह से अपने प्रोडक्ट्स बेचते है नामी-गिरामी और बड़ी बड़ी कंपनियां आज भी अपने प्रोडक्ट्स की क्वालिटी को बरकरार रखे हुए है। अन्य कास्मेटिक की बात अलग है लेकिन क्रीम्स का प्रयोग महिलाएं सबसे अधिक करती है। जिनमे सबसे अधिक मिलावट होती है।

लेकिन इन बड़ी कंपनियों की क्रीम्स खरीद पाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता क्योंकि उनकी एक क्रीम की कीमत महीने भर के पुरे कॉस्मेटिक की कीमत के बराबर होती है। ऐसे में उन्हें मजबूरन अन्य छोटी-मोटी कंपनियों के कास्मेटिक क्रीम्स का इस्तेमाल करना पड़ता है जो कई बार उनके फेस और त्वचा पर रिएक्शन कर जाती है। और आप उसे ठीक करने के लिए दवाओं का यूज करना भी शुरू कर देती है। लेकिन बार बार परेशानी का सामना करना ठीक नहीं।स्किन व्हाइटनिंग क्रीम्स घर पर बनाएं

इससे बेहतर होगा की इनका इस्तेमाल न किया जाए। लेकिन क्रीम के बिना महिलाओं की स्किन काफी ड्राई और रूखी हो जाती है। ऐसे में करें तो क्या? परेशान न हो, भले ही बाजार की क्रीम्स को मशीन में बनाया जाता हो लेकिन उन सभी में यूज तो प्राकृतिक उत्पादों का ही होता है। अगर आप चाहे तो इन स्किन व्हाइटनिंग क्रीम्स को स्वयं घर पर भी बना सकती है। इन्हे बनाने के लिए आपको सिर्फ इनमे यूज होने वाली सामग्री को खरीदना पड़ सकता है जो बहुत ज्यादा कॉस्टली भी नहीं है।

यहाँ हम आपको उनकी स्किन व्हाइटनिंग क्रीम्स की विधियां बताने जा रहे है जिनके द्वारा आप इन क्रीम्स को बड़ी आसानी से घर पर बना सकेंगी। इन क्रीम्स की मदद से आप ग्लोइंग, चमकदार और शाइनी स्किन वो भी बिना किसी हानिकारक प्रभाव के आसानी से पा सकेंगी। लेकिन उसके लिए आपको थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ेगी। तो आइये जानते है क्या है घर पर स्किन व्हाइटनिंग क्रीम्स बनाने की विधि।

घर पर स्किन व्हाइटनिंग क्रीम्स बनाने की विधि :-

1. गोरा बनने की क्रीम :Dahi aur nimbu ki cream

सामग्री –
  • डेढ़ कप बिना चीनी की दही।
  • 1 चम्मच शहद।
  • 2 चम्मच नींबू का रस।
  • 3 से 4 बादाम।
  • चुटकी भर हल्दी।
विधि –
  • इस क्रीम को बनाने के लिए सबसे पहले बादाम को मिक्सी में पीसकर पाउडर बना लें।
  • ध्यान रहे बादाम पूरी तरह पीस जाने चाहिए जिससे उसका बटर बनाया जा सके।
  • अब इस पाउडर में शहद, नींबू का रस, हल्दी और दही मिला लें।
  • और एक बार मिक्सी में डालकर पीस लें।
  • मिक्सी से निकालकर इसे किसी डिब्बे में बंद करके रख दें। और रोज रात को सोने से पहले इसका प्रयोग करें। स्किन दमकने लगेगी।

2. स्किन व्हाइटनिंग क्रीम :

सामग्री –
  • 1 चुटकी हल्दी।
  • 2 चम्मच बेसन।
  • गाढ़ी क्रीम (मलाई)।
  • नींबू का रस।
विधि –
  • सबसे पहले एक कटोरे में 2 चमच बेसन और हल्दी को एक साथ मिला लें।
  • अब इसमें नींबू के रस की 5 से 10 बूंद डालें। और अच्छे से मिलाएं।
  • अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो नींबू के रस मात्रा कुछ कम कर दें अन्यथा ये जलन पैदा कर सकता है।
  • अब धीरे धीरे इस मिश्रण में 1 चम्मच गाढ़ी क्रीम मिलाएं। और मिश्रण को मिलाते रहे।
  • इसके बाद सुनिश्चित कर लें की मिश्रण अच्छी तरह से एकसार हो गया है।
  • अब इसे अपने शरीर के किसी भी हिस्से पर लगाएं और कुछ ही दिनों में गोरी त्वचा पाए।
  • रात्रि के समय इसका प्रयोग ज्यादा लाभकारी रहेगा।

3. ग्लो पाने के लिए :

सामग्री –
  • 1 कप नींबू का रस।
  • गुलाब जल।
विधि –
  • इसके लिए गुलाबजल की कुछ बूंदे एक कप नींबू के रस में डालें।
  • अब इसे अच्छे से मिलाएं।
  • इसमें एक रुई डुबोएं और उसे अपने फेस पर गोलाई में लगाए।
  • 15 मिनट तक रखे और उसके बाद गर्म पानी से फेस साफ़ कर लें।
  • कुछ ही दिनों में स्किन चमकने लगेगी।

4. स्किन निखारने के लिए :

सामग्री –
  • 1 चम्मच चंदन पाउडर।
  • 1 चम्मच फ्रेश नींबू का रस।
  • टमाटर के रस की कुछ बूंदे।
  • खीरे के रस की कुछ बूंदे।
विधि –
  • सभी चीजों को एक ग्लास बाउल में डाल लें।
  • अब उन्हें तब तक मिलाते रहे जब तक ये सभी अच्छी तरह से नहीं मिल जाएं।
  • अच्छी तरह से मिलाने के बाद उसे किसी डिब्बी में रख लें।
  • अब रोजाना इसका इस्तेमाल फेस पर करें।
  • स्किन दमकने लगेगी।

5. चेहरे को चमकाने के लिए :

सामग्री –
  • 1 कप बिना चीनी की दही।
  • 1 चम्मच फ्रेश ऑरेंज जूस।
विधि –
  • इसके लिए सबसे पहले दही और ऑरेंज जूस को एक बाउल में डाल लें।
  • अब उन दोनों को अच्छी तरह से मिलाएं।
  • पूरी तरह मिलाने के बाद उसे अपने फेस पर लगाएं।
  • कुछ ही दिनों के प्रयोग से आपकी स्किन चमकने लगेगी।

तो ये थी कुछ घरेलू स्किन व्हाइटनिंग क्रीम्स जिनकी मदद से आप घर बैठे अपनी स्किन को चमका सकती है। इन क्रीम्स की सबसे बड़ी खासियत यही है की इनके इस्तेमाल से आपको कोई नुकसान नहीं होगा। और इसके लिए आपको बहुत से पैसे खर्च नहीं पड़ेंगे। बस थोड़ी मेहनत करनी होगी। जो ज्यादा मुश्किल काम नही है।

अपनी प्रेगनेंसी कब तक दूसरों को नहीं बतानी चाहिए?

आपने यह तो सुना होगा की ख़ुशी बाटने से बढ़ जाती है, लेकिन कुछ खुशियां ऐसी भी जिन्हे बताने में ज्यादा जल्दी नहीं करनी चाहिए। और वो ख़ुशी है प्रेगनेंसी की, हाँ यदि आप प्रेगनेंसी कन्फर्म कर चुकी है तो आप अपने पार्टनर से यह बात शेयर कर सकती है। अपने घर में रहने वाले सदस्यों को बता सकती है, लेकिन अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों को प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही नहीं बताना चाहिए। अब आप यह सोच रहे होंगे की प्रेगनेंसी की खबर को सुनकर सभी खुश होते हैं तो आप क्यों किसी को न बताएं। इसके पीछे कुछ कारण है आइये पहले उन कारणों को जानते हैं की क्यों प्रेगनेंसी की खुशखबरी बताने में ज्यादा जल्दी नहीं करनी चाहिए।

पूरी तरह कन्फर्म

घर में टेस्ट करने के बाद डॉक्टर से मिलें, यदि डॉक्टर भी कन्फर्म कर देती है की आप प्रेग्नेंट हैं तो इसका मतलब यह नहीं है की आप सबको बता दें। क्योंकि प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत ही खास होते हैं इस दौरान गर्भपात होने के सबसे ज्यादा चांस होते हैं। ऐसे में कुछ गड़बड़ हो जाये तो जितने ज्यादा लोग इस बारे में जानते हैं उतना ही इस परेशानी को कम करना मुश्किल हो जाता है।इसीलिए जब तक तीन महीने अच्छे से निकल नहीं जाते तब तक आपको यह बात किसी से शेयर नहीं करनी चाहिए।

नज़र

बड़े बुर्जुग इस बात को बहुत मानते थे की ऐसी बातें किसी को बताने में ज्यादा जल्दी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे किसी की नज़र लगने का डर रहता है। और वह नज़र गर्भवती महिला और शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है।

अनचाहा गर्भ

यदि आप शिशु नहीं चाहते हैं और आपका गर्भ ठहर गया है तो आपको अपने पार्टनर के साथ इसे सबसे पहले शेयर करना चाहिए और किसी को भी नहीं बताना चाहिए। ताकि आप दोनों इसका हल निकाल सकें और ऐसी बातें किसी और से शेयर करना ठीक भी नहीं होता है।

कब बताएं अपनी प्रेगनेंसी?

वैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान तीसरे महीने के बाद महिला का हल्का फुल्का पेट बाहर आ सकता है तब लोग अपने आप ही पूछने लग जाते हैं। ऐसे में आपको इसके बारे में बताने की जरुरत नहीं होती है फिर भी जो आपके बहुत नजदीकी है और आप उनसे अपनी ख़ुशी शेयर करना चाहते हैं तो कम से कम तीन महीने बाद ही उन्हें बताएं। क्योंकि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही बहुत कठिन होती है यदि महिला को इस दौरान कोई परेशानी न हो तो उसके बाद महिला को थोड़ा आराम मिलता है और परेशानी कम हो जाती है। लेकिन ख़ुशी में आप अपना ख्याल रखना न भूलें, और अपनी अच्छे से केयर करें। ताकि प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने आपको हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं आपको अपनी प्रेगनेंसी कब दूसरों के साथ शेयर करनी चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए ।

साँवलेपन का घरेलु इलाज करे और पाए गोरापन

हर किसी की चाहत होती है गौरी, दमकती हुई और बिना दाग धब्बों की त्वचा पाना। बाजार में बहुत सी ऐसी क्रीम और ब्यूटी प्रोडक्ट्स मिल जाते जिससे कुछ समय के लिए गोरापन पाया जा सकता है। लेकिन बाजार में उपलब्ध ज्यादातर ब्यूटी प्रोडक्ट्स और क्रीम केमिकल बेस्ड होते है। कुछ समय के लिए इनके इस्तेमाल से गोरापन तो मिल जाता है पर थोड़े समय बाद इन प्रोडक्ट्स में मिले केमिकल अपना असर दिखाने लगते है जिस कारण त्वचा को बहुत नुक्सान होता है जैसे पहले से ज्यादा कालापन, ऐलर्जी, पिम्पल्स आदि।

गौरी और चमकती हुई त्वचा पाने के लिए केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने के स्थान पर बेहतर होगा अगर हम घरेलु उपाय अपनाये। घरेलु उपाय का असर हो सकता है के कुछ देर दिखे पर सबसे अच्छी बात यह होती है के इनसे हमारी त्वचा को कोई नुक्सान नहीं पहुंचता है। त्वचा के अच्छे दंग से की गयी देखभाल हमारी त्वचा की रंगत के साथ साथ चमक भी लाती है। नीचे दिए गए उपाय को अपनी रूटीन में लाये बिना किसी शक के आपको अपने चेहरे पर निखार दिखेगा।

निम्बू का रस

निम्बू के रस को दस मिनट के लिए अपने चेहरे पर लगाए और सूखने के बाद पानी से धो लें। निम्बू में कुदरती ब्लीचिंग कॉम्पोनेन्ट होते है जो हमारी त्वचा को निखारने के काम आते है। इसके प्रयोग से त्वचा का सांवलापन और दाग धब्बे या ब्लाक स्पॉट भी दूर होते है। इस प्रयोग को आप एक दिन छोड़कर एक दिन इस्तेमाल कर सकते है।

पर ध्यान रखिये इस उपाय के प्रयोग के बाद तुरंत धुप में ना जाएँ। धुप में जाने से त्वचा पर रैश पड़ सकते है। निम्बू के रस को कटी और जख्म वाली त्वचा पर इस्तेमाल ना करें। अगर आपकी त्वचा बहुत सेंसिटिव और ड्राई है तो निम्बू के रस में बराबर मात्रा में पानी मिलकर प्रयोग करें। इससे आपको नुक्सान नहीं पहुंचेगा।

हल्दी

एक छोटी चम्मच हल्दी को निम्बू रस या संतरे के रस में मिलाकर पैक बनाएं। अब इस पैक को अपनी सांवली त्वचा पर 15 मिनट तक लगाकर छोड़ दे। सूखने के बाद पानी से धो लें। इस उपाय को आप सप्ताह में दो से तीन बार तक इस्तेमाल कर सकते है। हल्दी को सदियों से हमारे पूर्वज त्वचा के लिए इस्तेमाल करते आ रहे है। आज भी कई ब्यूटी क्रीम्स में इसका इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी हमारी त्वचा को निखार कर उसे गोरा बनाती है।

हल्दी का इस्तेमाल करते समय ध्यान रखें के इस पैक को 15 मिनट से ज्यादा ना लगाए। ज्यादा देर तक लगाए रखने से त्वचा पर हल्दी का पीला रंग भी चढ़ सकता है इसके अतिरिक्त अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो इस पैक में थोड़ा सा पानी भी मिला लें।

दूध

एक चम्मच दूध और एक चम्मच शहद को अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पैक को अपनी त्वचा पर लगाएं 15 से 20 मिनट बाद पानी से धो लें। इस उपाय को बिना किसी शक के आप रोजाना इस्तेमाल कर सकते है। दूध में मौजूद प्राकृतिक तत्व आपकी त्वचा की देखभाल कर इसे गोरा बना देंगे। शहद का इस्तमाल आपकी त्वचा को चमकदार बनाकर उसे बिलकुल सॉफ्ट बना देगा।

ध्यान रखिये अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो कम फैट वाले दूध का इस्तेमाल करें और स्किन ड्राई है तो फुल क्रीम दूध का इस्तेमाल भी अच्छा रहेगा। ऑयली स्किन पर फुल क्रीम दूध के इस्तेमाल से त्वचा और भी ज्यादा ऑयली हो सकती है।

टमाटर

टमाटर को मिक्सी में पीस कर एक अच्छा सा पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। उसके बाद ताजे पानी से चेहरा धो लें। नहाने से पहले इस प्रयोग को आप रोजाना इस्तेमाल कर सकते है। टमाटर में मौजूद तत्व हमारी स्किन की पिगमेंटेशन दूर कर उसे गौरा बनाते है। यह पैक हमारी डेड स्किन को भी बाहर निकालता है।

त्वचा के सांवलेपन को दूर करने के लिए टमाटर सबसे बेहतरीन उपाय है। इस उपाय को ऑयली, ड्राई या सेंसिटिव स्किन पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। टमाटर का प्रयोग धुप से हुए सांवलेपन को भी दूर करने के काम आता है।

दहीं

2 चम्मच दही और 1 चम्मच शहद को अच्छे से मिक्स कर पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे और सांवली त्वचा पर लगाए और 20 मिनट तक सूखने के बाद ताजे पानी से त्वचा को धो लें। अच्छे परिणाम के लिए एक उपाय को आप रोजाना इस्तेमाल कर सकते है।

दही का प्रयोग सिर्फ हमारी त्वचा की रंगत ही नहीं निखारेगा बल्कि हमारी त्वचा की गन्दगी साफ़ करेगा। और इस पैक के इस्तेमाल से त्वचा के बंद पोर्स भी खुल जाते है।

गुलाबजल

रोजाना अपने चेहरे को गुलाबजल से सांफ करें। गुलाबजल में कॉटन को भिगो कर अपने चेहरे पर लगाए सूखने के बाद चाहें तो पानी से धो सकते है। इस उपाय को बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के दिन में दो बार इस्तेमाल कर सकते है। गुलाबजल आपकी त्वचा गौरा और चमकदार ही नहीं बनाएगा बल्कि त्वचा पर हुए रैश को भी सहीं करेगा।

गुलाबजल का प्रयोग आप कभी भी कहीं भी कर सकते है। खास बात यह है के इसका इस्तेमाल किसी भी प्रकार की त्वचा पर किया जा सकता है। आप चाहें तो गुलाबजल घर पर भी बना सकते है गुलाब के फूलो को पानी में डाल कर उबालें और तब तक उबालें जब तक पानी आधा ना हो जाये। ठंडा होने के बाद छानकर किसी भी बोतल में भरकर रख लें और अपनी जरुरत के हिसाब से इस्तेमाल करते रहें।

नारियल पानी

नारियल पानी को अपनी सांवली त्वचा पर कॉटन की मदद से लगाएं। 15 से 20 मिनट तक सूखने के बाद पानी से धो लें। इस उपाय को भी आप रोजाना दिन में दो बार इस्तेमाल कर सकते है। नारियल पानी आपकी त्वचा और बालों के लिए बहुत ही गुणकारी माना जाता है। इसके इस्तेमाल से आपकी त्वचा सुंदर, निखरी और बेदाग हो जाएगी। इस उपाय को भी कोई भी इस्तमाल कर सकता है।

पपीता

पपीते का छिलका उतारकर उसे मिक्सी में डाल कर अच्छे से पीस लें। अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाए 20 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दे और फिर ताजे पानी से त्वचा को साफ़ करने। इस उपाय को आप सप्ताह में दो बार इस्तेमाल कर सकते है। पपीता हमारी त्वचा के खराब सेल्स को निकाल कर नए सेल्स का निर्माण करता है। जिससे हमारी त्वचा कुदरती रूप से गौरी हो जाती है। पपीते में मौजूद विटामिन सी हमारी त्वचा पर ग्लो लाता है और उसे सॉफ्ट बनता है।

इन सभी उपाय के अतिरिक्त आप सुन्दर और गौरी त्वचा पानी के लिए अच्छा सेहतमंद भोजन और ताजे फल और खूब सारे पानी का भी सेवन करें। घर से बाहर जाते समय अपनी त्वचा को अच्छे से ढक कर जाए जिससे धूल, धुप और प्रदूषण से आपकी स्किन को कोई हानि ना पहुंचे।

फोलिक एसिड कौन-कौन से खाद्य पदार्थों में होता है

फोलिक एसिड यदि पर्याप्त मात्रा में बॉडी में मौजूद होता है तो इससे व्यक्ति को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। खासकर जब कोई महिला गर्भधारण का प्रयास कर रही होती है या प्रेग्नेंट होती है। तो महिला को फोलिक एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि फोलिक एसिड भ्रूण के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करता है। साथ ही फोलिक एसिड बॉडी में नहीं कोशिकाओं का निर्माण करने के साथ आपको बहुत सी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचे रहने में मदद करता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनमे फोलिक एसिड मौजूद होता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

  • हरी पत्तेदार सब्जियों में फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में होता है।
  • फोलिक एसिड के साथ आयरन, मैग्नीशियम, जैसे पोषक तत्व भी हरी पत्तेदार सब्जियों में भरपूर होते हैं।
  • ऐसे में फोलिक एसिड के लिए आप पालक, ब्रोकली व् अन्य हरी सब्जियों में भरपूर होते हैं।

फोलिक एसिड से भरपूर होते हैं ड्राई फ्रूट्स

  • नट्स जैसे की अखरोट, बादाम आदि में फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • फोलिक एसिड के साथ कैल्शियम, प्रोटीन आदि की मात्रा भी ड्राई फ्रूट्स में मौजूद होती है।

एवोकाडो

  • एवोकाडो एक ऐसा फल है जिसमे फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • ऐसे में फोलिक एसिड के लिए आप एवोकाडो का सेवन भी कर सकते हैं।

दालें

  • दालें पोषक तत्वों से भरपूर होती है आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों के साथ दालों में फोलिक एसिड भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • दालों के साथ छोले, लोबिया, राजमा आदि भी फोलिक एसिड के बेहतरीन स्त्रोत होते हैं।

फोलिक एसिड से भरपूर होती हैं सूजी

  • सूजी भी फोलिक एसिड का एक बेहतरीन स्त्रोत होती है।
  • ऐसे में नाश्ते में सूजी का हलवा, उत्पम, इडली आदि बनाकर सूजी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

अंडा

  • प्रोटीन, कैल्शियम होने के साथ अंडे में फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • ऐसे में दिन में दो अच्छी तरह से पके हुए अंडो को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

साबुत अनाज

  • साबुत अनाज में भी फोलिक एसिड की मात्रा मौजूद होती है।
  • ऐसे में साबुत अनाज से बनी ब्रेड व् अन्य खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

फोलिक एसिड से भरपूर होते हैं फल

  • पपीता, अनार, सेब, सिट्रस फ्रूट जैसे संतरा, मौसम्बी, आदि में फोलिक एसिड की मात्रा मौजूद होती है।
  • ऐसे में फोलिक एसिड के लिए इन फलों को भी आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

सब्जियां

  • चुकंदर, टमाटर, गाजर, हरी मटर आदि कुछ सब्जियां हैं जिसमे फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।
  • ऐसे में फोलिक एसिड के लिए इन सब्जियों का सेवन भी किया जा सकता है।

तो यह हैं वो खाद्य पदार्थ जिनका सेवन करने से आपको फोलिक एसिड मिलता है। ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए आपको इन खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। साथ ही फोलिक एसिड से भरपूर जो खाद्य पदार्थ गर्भवती महिला को फायदा करते हैं। उन खाद्य पदार्थों का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।