प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने के कारण शरीर की मांसपेशियों में ढीलापन आने लगता है। जिसके कारण शरीर की क्रियाओं पर भी असर पड़ता है जैसे की पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। जिसकी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपच, गैस, पेट में दर्द जैसी परेशानियां महिला को हो सकती है। लेकिन महिला यदि अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें।
तो महिला को इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिल सकती है। साथ ही कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी में रात को पेट को फूलने और पेट में दर्द होने की समस्या अधिक होती है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में रात को पेट फूलने व् पेट में दर्द होने के क्या कारण होते हैं और किस प्रकार महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।
प्रेगनेंसी में रात को पेट को फूलने और पेट में दर्द होने के कारण
गर्भवती महिला को यदि रात में पेट दर्द व् पेट फूलने की परेशानी अधिक होती है तो इस समस्या के होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे की :-
जरुरत से ज्यादा खाना
यदि महिला को जितनी भूख है महिला उससे ज्यादा खा लेती है तो भोजन को अच्छे से हज़म करने में दिक्कत होती है। जिसके कारण पेट में दर्द होने होने के साथ गैस, सीने में जलन जैसी परेशानी महिला को होती है।
गैस बनाने वाले आहार
कुछ आहार ऐसे होते हैं जिन्हे खाने से गैस बनती है और रात के समय तो उन आहार का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। जैसे की गोभी, ज्यादा तेल मसाले वाली सब्जियां, बासी व् ठंडा खाना, चना, मटर, बीन्स आदि। यदि महिला इन खाद्य पदार्थों का सेवन करती है तो इनके कारण महिला को पेट दर्द व् पेट फूलने जैसी परेशानी होती है।
खाना खाते ही सो जाना
खाना खाने के तुरंत बाद यदि प्रेग्नेंट महिला सो जाती है। तो इस कारण भोजन अच्छे से हज़म नहीं होता है जिसके कारण महिला को रात को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।
दूध का सेवन
यदि आप पहले दूध नहीं पीती थी और अब आपने रात को सोने से पहले दूध पीना शुरू किया है तो इस वजह से भी रात को सोते समय आपको यह परेशानी हो सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान भी कुछ महिलाओं को रात को दूध पीने के बाद ऐसा अनुभव हो सकता है।
प्रेगनेंसी में रात को पेट को फूलने और पेट में दर्द होने की समस्या से बचने के उपचार
गर्भवती महिला को रात को हमेशा हल्का व् पोषक तत्वों से युक्त आहार खाना चाहिए।
ऐसा आहार ले जिसमे फाइबर की मात्रा हो ताकि भोजन को आसानी से हज़म करने में मदद मिल सके।
जितनी भूख हो उतना ही खाएं स्वाद के चक्कर में ज्यादा न खाएं क्योंकि उससे आपको ही परेशानी होगी।
रात को दूध पीने के कारण यदि आपको यह परेशानी हो रही है। तो आपको रात को दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।
ज्यादा तेल मसाले वाले आहार, बासी व् ठन्डे आहार, का सेवन रात को नहीं करना चाहिए।
ऐसे खाद्य पदार्थों को रात को बिल्कुल न खाएं जिससे आपको पेट में गैस बनने की समस्या हो।
रात को सोने से कम से कम दो घंटे पहले खाना खाएं ताकि भोजन को अच्छे से हज़म होने में मदद मिल सके जिससे आपको यह परेशानी न हो।
तो यह हैं प्रेगनेंसी में रात को पेट को फूलने और पेट में दर्द होने की समस्या से बचने के उपाय, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि रात को सोते समय आपको ऐसी किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
गर्भावस्था का समय हर महिला के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह कहना बेहतर होगा के प्रेगनेंसी का समय सिर्फ महिला के लिए ही नहीं बल्कि पुरे परिवार के लिए भी अनमोल होता है। इस समय में गर्भवती महिला को क्या खाना है और क्या नहीं खाना है इन बातो के बारे में समय समय पर सभी सलाह देते रहते है।
प्रेगनेंसी में हमे बहुत सी पसंदीदा चीजों को छोड़ना पड़ता है। क्योंकि हम जो चीज भी अपने मुँह में डालते है उसी प्रदार्थ के गुण और अवगुण हम अपने शिशु के साथ साँझा करते है। इन्ही बातो को ध्यान में रखते हुए हमे हर चीज का सेवन अपने शिशु की सेहत को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए।
बहुत बार ऐसा होता है के कुछ चीजों का सेवन हमे गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में छोड़ना पड़ता है और प्रेगनेंसी में अंतिम शरण में उन्हीं प्रदार्थो का सेवन शुरू करना होता है। यह सब बाते गर्भावस्था के पूरी प्रक्रिया पर निर्भर करती है। पर फिर भी गर्भावस्था के साथ जब गर्मियों का मौसम भी आ जाये तो उस समय में अपने डाइट का विशेष ध्यान रखने की जरुरत पड़ती है। आज हम आपको बताएंगे की गर्मियों में गर्भवती महिला को भूल कर भी किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
कैफीन युक्त प्रदार्थ
कैफीन युक्त प्रदार्थ यानी की चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक्स, सोडा आदि। गर्भावस्था में इन सभी चीजों का सेवन छोड़ देना चाहिए। कैफीन एक प्रकार का नशीला प्रदार्थ होता है जिसके सेवन के बाद हम और ज्यादा एक्टिव हो जाते है। गर्भावस्था के दौरान कैफीन युक्त प्रदार्थो के सेवन से शुगर, ब्लड प्रेशर, डिज़्ज़िनेस, पेट दर्द, हार्ट बीट का बढ़ना आदि गंभीर समस्याएं हो सकती है। इसीलिए गर्भावस्था में डॉक्टर भी चाय, कॉफ़ी और कोल्ड ड्रिंक्स के सेवन को मना करते है।
गर्मियों की अगर बात की जाए तो चाय और कॉफ़ी तो हम एक बार फिर छोड़ सकते है लेकि कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा ड्रिंक्स छोड़ना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। पर हम आपको बता दे की इन चीजों के सेवन से ना तो आपकी ढंग से प्यास बुझेगी और और साथ ही मिसकैरिज और जन्म के समय शिशु के कम वेट की समस्या की संभावना बढ़ जाती है। तो किसी प्रदार्थ का सेवन करना हमे कितना ही पसंद क्यों ना हो लेकिन हमारे शिशु से ऊपर नहीं हो सकता है। गर्भावस्था के समय में इन सभी चीजों के सेवन को ना कहे।
कच्ची अंकुरित दाल
कच्ची अंकुरित दाल और बीन्स वैसे तो बहुत ही पौष्टिक होती है। इनमे बहुत से मिनरल्स, विटामिन्स और सबसे ज्यादा मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। पर फिर भी अंकुरित की गयी दाल और बीन्स में नमी के कारण कुछ बैक्टीरिया आ जाते है। नमी के कारण पैदा हुए बैक्टीरिया पाने से धोने से भी ख़त्म नहीं होते है। यह बैक्टीरिया गर्भवती महिला के लिए हानिकारक हो सकते है।
लेकिन फिर भी अगर आप अंकुरित दाल और बीन्स का सेवन करना चाहते है तो ध्यान रखिये उन्हें कच्चा ना खाये। इनका प्रोटीन पाने के लिए इन्हे पकाकर या उबालकर इनका सेवन करना हानिकारक नहीं होगा।
जंक फ़ूड या स्ट्रीट फ़ूड
गर्मियां आते ही हमारा सारा ध्यान रोटी और सब्जी से हटकर स्ट्रीट फ़ूड और जंक फ़ूड पर चला जाता है। गर्भावस्था में खासतौर पर जब हमारे टेस्टबड्स बदल जाते है तब हमारा सारा ध्यान स्ट्रीट फ़ूड और जंक फ़ूड पर लग जाता है जैसे की गोल गप्पे, बर्गर, टिक्की, समोसा और चाट आदि। परन्तु इन सभी चीजों का सेवन गर्भावस्था के दौरान हानिकारक होता है। इन सभी खाद्य प्रदार्थो में नमक और मिर्च मसालों का अत्यधिक इस्तेमाल किया जाता है।
ज्यादा नमक और मसालों का सेवन हमारे ब्लड प्रेशर को बड़ा सकता है और मसालों का अत्यधिक सेवन पाचन क्रिया को कमजोर बनता है जिससे खाना पचने में परेशानी होने लगती है। इन सभी बातो के अतिरिक्त जंक फ़ूड और स्ट्रीट फ़ूड बनाते समय साफ़ सफाई का बिलकुल ध्यान नही रखा जाता है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान इस तरह के भोजन के सेवन से माँ और शिशु दोनों को ही इन्फेक्शन और कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अपने और शिशु के अच्छी सेहत के लिए जरुरी है के आप घर पर बने भोजन का ही सेवन करें।
मेथी दाना
मेथी दाना हमारे इंडियन मसालों में बहुत ही प्रसिद्ध है और कई व्यंजन तो इसके प्रयोग के बिना स्वादिष्ट ही नहीं लगते है। लकिन क्या आप जानते है गर्भावस्था में मेथी दाने के प्रयोग से मिसकैरिज का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपकी गर्भावस्था के अंतिम भाग में है कहने का मतलब जल्द ही डिलीवरी का समय आने वाला है तो आप मेथी दाने का सेवन कर सकते है। परन्तु यदि आप गर्भवस्था के शुरुआती समय में ही खड़े है तो मेथी कर प्रयोग आपके लिए पूर्णतः निषेध है क्योंकि इसके सेवन से ना सिर्फ गर्भपात बल्कि समय से पहले भी डिलीवरी होने का खतरा बना रहता है।
इसके अतिरिक्त जो लोग मेथी का सेवन करते है उन्हें कुछ दवाइयाँ से भी एलर्जी हो सकती है। इसीलिए अपने डॉक्टर से मिलने पर मेथी के सेवन के बारे में जरूर बताये।
अंडे और मीट
अगर आप अंडे और मीट का सेवन करती है तो गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में इन चीजों का सेवन बंद कर दे। अंडरकुक्ड मीट और अंडो में बैक्टीरिया होता है जो आपको और शिशु को कई तरह की बीमारियों और इन्फेक्शन से ग्रसित कर सकता है। गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में तो अंडे और मिट का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। अगर हम ऐसा ना करे तो अजन्मे शिशु में जन्म के समय कई प्रकार की विकलांगता हो सकती है जैसे की अंधापन, न्यूरोलॉजिकल प्रोब्लेम्स, अन्य डिसेबिलिटी आदि।
गर्भावस्था के पहले महीने से लेकर चौथे महीने तक मीट और अंडो का सेवन नहीं करना चाहिए। उसके बाद भी यदि गर्मियों के दिन है तो भी इनके सेवन से जहां तक हो बचना चाहिए। फिर भी अगर आप चाहें तो गर्भावस्था में अंतिम तीन महीनो में अच्छे से पके हुए मीट और अंडो का सेवन कर सकती है।
गर्मियों में गर्भावस्था के दौरान अच्छे से पके हुए भोजन का इस्तेमाल करना चाहिए। घर पर साफ़ सफाई से बना हुआ भोजन माँ और शिशु दोनों के लिए सेहतमंद होता है। इसके अतिरिक्त गर्मियों में प्यास बुझाने के लिए तरल प्रदार्थो में छाछ, दूध, दही, ग्रीन टी, फलो का रस व अन्य शरबत जो घर में बने हो उनका इस्तेमाल करें।
माँ बनना महिला के लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेवारी की तरह होता है, और जैसे जैसे प्रेगनेंसी में समय आगे बढ़ता है। वैसे वैसे महिला की परेशानियां भी बढ़ सकती है, क्योंकि शिशु का विकास बढ़ने के कारण महिला के वजन में बढ़ोतरी होती है। और वजन के बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को डिलीवरी को लेकर भी परेशानी होती रहती है, जैसे की कुछ महिलाएं तो यह सोचती रहती हैं की पता नहीं डिलीवरी के दौरान कितना दर्द होगा, डिलीवरी सिजेरियन होगी, प्रसव के दौरान शिशु को किसी तरह की परेशानी तो नहीं होगी, आदि। ऐसे में महिला के लिए सबसे जरुरी होता है की वो अपना ध्यान अच्छे से रखे ताकि महिला के साथ गर्भ में शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके, क्योंकि प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में शिशु का शारीरिक विकास तेजी से होता है। और ऐसे में महिला द्वारा की गई कोई लापरवाही न केवल शिशु के विकास पर बुरा असर डाल सकती है बल्कि इससे डिलीवरी के दौरान भी परेशानी बढ़ सकती है।
प्रेग्नेंट महिला को 6 से 9 महीने तक क्या नहीं करना चाहिए
प्रेग्नेंट महिला जितने अच्छे तरीके से अपनी केयर करती है उतना ही शिशु के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलने के साथ प्रेगनेंसी की शुरुआत से डिलीवरी तक आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।
खान पान
प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में शिशु का शारीरिक विकास तेजी से बढ़ता है ऐसे में बॉडी में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों का होना बहुत जरुरी होता है। लेकिन स्वस्थ व् पौष्टिक आहार का सेवन करने के साथ गर्भवती महिला को कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनका सेवन करने से परहेज करना चाहिए क्योंकि उनके कारण गर्भवती महिला की दिक्कतें बढ़ने के साथ गर्भ में शिशु के विकास से जुडी परेशानियों का सामना भी महिला को करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए।
क्रीम से बने दूध, पनीर आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
जंक फ़ूड, ज्यादा तेल मसाले वाले आहार, के सेवन से भी गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए। क्योंकि यह पाचन क्रिया को बुरी तरह प्रभावित करते हैं जिससे कब्ज़, एसिडिटी आदि की समस्या बढ़ सकती है।
कच्चे अंडे का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे भी महिला को पेट सम्बन्धी समस्या का सामना महिला को करना पड़ सकता है।
कच्चे मांस के सेवन से भी गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए।
नशीले पदार्थो का सेवन भी गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए।
बिना धुले फल, सब्जियां, आदि भी महिला को खाने में प्रयोग नहीं करने चाहिए।
नामक व् मीठे का सेवन अधिक मात्रा में करने से बचना चाहिए।
घर के काम
वजन अधिक बढ़ने और पेट के बाहर निकलने के कारण महिला को काम करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला घर के छोटे छोटे काम तो कर सकती है लेकिन जिन काम को करने में पेट पर दबाव महसूस हो, पेट पर जोर पड़े, ज्यादा देर खड़े रहना पड़े, झुककर काम करना पड़े, आदि काम को करने से बचना चाहिए। जैसे की पोछा लगाना, पैर के भार बैठकर कपडे धोना आदि काम भी महिला को नहीं करने चाहिए। साथ ही घर में यदि कोई पालतू जानवर है तो उसके काम करने से बचना चाहिए और यदि करना भी पड़े तो मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल करके ही काम को करना चाहिए। साथ ही ही घर के काम जैसे की पोछा लगाने आदि में जिन केमिकल का इस्तेमाल होता है उसका इस्तेमाल करने से भी गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए।
व्यायाम
प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला हल्का फुल्का व्यायाम कर सकती है, लेकिन बहुत अधिक व्यायाम करने से महिला को बचना चाहिए। जैसे की महिला को फिट रहने के लिए सैर जरूर करनी चाहिए लेकिन ज्यादा तेजी से नहीं चलना चाहिए। व्यायाम करना चाहिए लेकिन जिस व्यायाम को करने में महिला को परेशानी हो या पेट पर दबाव महसूस हो उस तरीके के व्यायाम को महिला को नहीं करना चाहिए।
घूमना फिरना
भीड़भाड़ वाली जगह, प्रदूषण वाली जगह, ट्रैवेलिंग, अधिक सीढ़ियां चढ़ना आदि से प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को बचना चाहिए। क्योंकि इस समय गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है ऐसे में ट्रैवेलिंग करने के कारण जहां झटका लगने के कारण पेट में दर्द, समय पूर्व प्रसव का खतरा जैसी समस्या हो सकती है है वहीँ प्रदूषण वाली जगह जाने के कारण या भीड़भाड़ में जाने के कारण इन्फेक्शन का खतरा रहता है।
तनाव
जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे गर्भवती महिला यह सोचकर परेशान हो सकती है की उसकी डिलीवरी सिजेरियन होगी या नोर्मल, प्रसव के दौरान शिशु पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा, आदि। ऐसे में महिला को तनाव से बचना चाहिए क्योंकि यदि महिला इन सब बातों को सोचकर तनाव लेती है, तो इसके कारण परेशानी कम होने की बजाय बढ़ सकती है।
पेट के बल सोना
वजन बढ़ने के कारण महिला को सोने में इस दौरान परेशानी हो सकती है, लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला पेट के भार न सोये। क्योंकि इससे गर्भ में शिशु की दिक्कत हो सकती है, साथ ही सीधे होकर भी न सोये क्योंकि इसके कारण पैरों तक ब्लड फ्लो में रूकावट आ सकती है जिसके कारण महिला को पैरों में सूजन व् उठते समय चक्कर आदि की परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में सोते समय महिला को करवट लेकर सोना चाहिए और बार बार करवट बदलते रहना चाहिए।
सम्बन्ध
शिशु का वजन बढ़ने के कारण इस दौरान महिला का पेट बाहर की तरफ आ जाता है जिसके कारण यदि महिला और पुरुष सम्बन्ध बनाते हैं तो इससे पेट पर दबाव पड़ने का खतरा रहता है। और ऐसे में गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी परेशानी हो सकती है। इसीलिए इससे बचने के लिए गर्भवती महिला को जितना हो सके प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए साथ ही इसके लिए आप एक बार चाहे तो डॉक्टर से भी राय ले सकते हैं।
डॉक्टर से जांच
प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिला को लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। इस दौरान अपना रूटीन चेक अप समय से करवाना चाहिए, साथ ही यदि कोई भी परेशानी हो तो उसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाइयों का सेवन समय से करना चाहिए इसमें बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान की गई थोड़ी सी भी लापरवाही शिशु की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।
तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में रखना चाहिए, और साथ ही ऊपर दिए गए कामों को करने से बचना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और डिलीवरी के दौरान किसी भी तरह की समस्या से बचने में मदद मिल सके।
अमरुद खाने के लाभ और उसके फ़ायदों के बारे में तो हम सभी जानते है। लेकिन क्या आप जानते है की अमरुद फल की पत्तियां भी मानव प्रजाति के लिए कितनी लाभकारी होती है। इस प्राकृतिक के औषधीय गुण हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते है। इसमें एंटी oxidents, एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते है। ताजे अमरुद की पत्तियों को प्राकृतिक पैन रिलीवर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
इन पत्तियों में polyphenols, carotenoids, flavonoids और tannins जैसे रासयनिक तत्व पाए जाते है जो हमारे स्वास्थ्य संबंधी कई बिमारियों से लड़ने में मदद करते है। दवाइयों और ड्रग्स आदि के अधिक इस्तेमाल से होने वाले साइड इफ़ेक्ट से बचने के लिए हर्बल प्लांट का इस्तेमाल किया जाता है जो स्वास्थ्य संबंधी समस्या को ठीक करने में मदद करते है। अमरुद की पत्तियां उन्ही औषधियों में से एक है।
अपने औषधीय गुणों के कारण आज के समय में अमरुद की पत्तियां काफी लोकप्रिय होती जा रही है। इसके अलावा आजकल अमरुद की पत्तियों के सप्लीमेंट्स कैप्सूल और अमरुद की पत्तियों की चाय के रूप में उपलब्ध है।
पहले के समय में तो लोग इन प्राकृतिक औषधियों का अच्छा ज्ञान रखते है लेकिन आजकल के व्यस्त समय में कोई इन्हें पूछता भी नहीं। इसकी बजाय वे अन्य उपायों का इस्तेमाल करता है। जिनमे पैसे तो खर्च होते ही है साथ-साथ साइड इफ़ेक्ट होने का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में इनका प्रयोग कर अपने पैसे बर्बाद करने से बेहतर है की कुछ अच्छे और कारगार उपायों का प्रयोग किया जाए।
लेकिन सभी को इन पत्तियों के फ़ायदों के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं होती जिसके अभाव में वे इसका इस्तेमाल नहीं करते। इसीलिए आज हम आपको अमरुद की पत्तियों के फायदें बताने जा रहे है। जिन्हें जानकर आप इसका प्रयोग करे बिना रह नहीं पायेंगे। तो आइए जानते है अमरुद की पत्तियों की फायदें!!
अमरुद की पत्तियों के इन फ़ायदों को जानते है आप?
स्वाथ्य के लिए अमरुद की पत्तियों के फ़ायदे :-
अमरुद की पत्तियों का इस्तेमाल कई बिमारियों के लिए हर्बल ट्रीटमेंट के रूप में किया जाता है। क्योंकि इसमें कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते है। इसके अलावा स्वास्थ्य के लिए भी अमरुद की पत्तियों के कई फ़ायदे है जिनकी विस्तृत जानकारी नीचे दी गयी है।
1. वजन घटने में :
अमरुद की पत्तियां वजन घटाने में बेहद सहायक होती है। ये शरीर में मौजूद हार्ड स्टार्च को शुगर में परिवर्तित होने से रोकती है। जिससे शरीर को वजन कम करने में मदद मिलती है। इसीलिए वजन घटाने के लिए अमरुद की पत्तियों के चूरन को प्रयोग में लाया जाता है।
2. मधुमेह :
एक शोध के अनुसार, अमरुद के पत्तो की चाय alpha-glucosidease enzyme की प्रक्रिया द्वारा ब्लड शुगर को कम करने में मदद करती है। इसके अलावा शरीर को सुक्रोज और लेक्टोज को सोखने से भी रोकती है जिससे ब्लड में शुगर लेवल नियंत्रित रहता है। इसीलिए 12 हफ्ते तक लगातार अमरुद की पत्तियों की चाय का सेवन करें, ये इन्सुलिन के निर्माण के बिना ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित करने में मदद करेगा।
3. कोलेस्ट्रॉल :
शोध से पता चला है, की लगातार तीन महीने तक अमरुद की पत्तियों की चाय का सेवन करने से LDL और Bad कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। और वो भी गुड कोलेस्ट्रॉल को हानि पहुंचाए बिना। इसके अलावा अमरुद की पत्तियां एक बेहतर लीवर टॉनिक है।
4. डायरिया :
अमरुद की पत्तियां डायरिया और पेचिश की समस्या के लिए एक बेहतर प्राक्रतिक औषधि है। डायरिया की समस्या के लिए 30 ग्राम अमरुद की पत्तियों को एक मुट्ठी चावल के आटे और 1-2 ग्लास पानी के साथ उबाल लें। और दिन में दो बार इसका सेवन करें। आराम मिलेगा।
पेचिश की समस्या के लिए, अमरुद की पत्तियां और जड़ लेकर उन्हें 90 डिग्री के तापमान पर 20 मिनट तक उबालें। उसके बाद पानी को छान लें और उसका सेवन तब तक करते रहे जब तक पूरी तरह आराम नहीं आ जाता।
5. पाचन की समस्या :
अमरुद की पत्तियों की चाय , digestive enzyme के उत्पादन को बढ़ाकर पाचन संबंधी समस्यायों को दूर करने में मदद करती है। दरअसल इसमें कई शक्तिशाली एंटी बैक्टीरियल एजेंट पाए जाते है जो पेट में मौजूद बैक्टीरिया को समाप्त करके बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न होने वाले enzymes को रोकते है। अमरुद की पत्तियांफ़ूड पोइसिनिंग और उलटी जैसी समस्या में भी बेहद फायदेमंद होती है। पेट के दर्द में आराम पाने के लिए, अमरुद की 8 पत्तियों को 1.5 लीटर पानी में उबाल लें और दिन में तीन बार इसका सेवन करें।
6. Bronchitis का इलाज :
अमरुद की पत्तियां Bronchitis की समस्या को ठीक करने में बेहद लाभकारी होती है। ये फेफड़ों को खुल कर कफ की समस्या दूर करती है।
7. दांतों में दर्द, गले की खराश और मसूड़ों की समस्या :
अपने एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण, अमरुद की पत्तियां दांत में दर्द, मसूड़ों की समस्या और गले की खराश को ठीक करने में मदद करती है। अगर इसका प्रयोग गरारें करने के लिए किया जाए। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण, दांतों और मसूड़ों को सुरक्षित करने में मदद करते है। इसीलिए बहुत से टूथपेस्ट और माउथ फ्रेशनर में अमरुद की पत्तियों का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण सामग्री के रूप में किया जाता है। आप चाहे तो इसकी पत्तियों से एक प्राकृतिक पेस्ट भी बना सकते है।
8. डेंगू का बुखार :
डेंगू के बुखार में अमरुद की पत्तियों का प्रयोग एक प्राकृतिक औषधि के रूप में किया जाता है। क्योंकि अमरुद की पत्तियों का रस खून में प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है।इसके लिए अमरुद की 9 पत्तियां लेकर उन्हें 5 कप पानी में उबाल लें। जब पानी 3 कप रह जाए तो उसे छान लें। ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार 1-1 कप इस पानी का सेवन करें।
9. प्रोस्टेट कैंसर :
अमरुद की पत्तियों का इस्तेमाल प्रोस्टेट कैंसर की समस्या को ठीक करने के लिए भी किया जा सकता है।
10. एलर्जी में राहत :
अमरुद की पत्तियां histamine के स्राव को रोकती है। इसके अलावा अमरुद की पत्तियों में पाया जाने वाला तत्व एलर्जी से होने वाले रिएक्शन को रोकने में भी मदद करता है।
11. शुक्राणुओं का निर्माण :
अमरुद की पत्तियों की चाय का सेवन करने से शुक्राणुओं के निर्माण में वृद्धि होती है, जो गर्भधारण करने में मदद करता है।
12. घाव और इन्फेक्शन :
अमरुद की पत्तियों में हीलिंग प्रॉपर्टी भी पाई जाती है जो कटे और घाव को ठीक करने में मदद करते है। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण इन्फेक्शन को ठीक करके यूट्रस की जलन और सुजन को भी कम करते है। अमरुद की पत्तियों की चाय कान के इन्फेक्शन को ठीक करने में भी मदद करती है।
त्वचा के लिए अमरुद की पत्तियों के फ़ायदे :-
जब बात त्वचा की देखभाल की आती है, तो अमरुद की पत्तियां त्वचा को स्वस्थ रखने के साथ-साथ उसमे होने वाली तरह-तरह की बिमारियों को दूर करने में भी मदद करती है। त्वचा के लिए अमरुद की पत्तियों के अन्य फ़ायदे निम्नलिखित है।
13. एक्ने और दाग़-धब्बे :
आज के समय में अधिकतर लोग मुहांसे और दाग़-धब्बों की समस्या से परेशान रहते है। क्योंकि ये आपकी स्किन पर बहुत बुरा प्रभाव डालते है। अमरुद की पत्तियां इस समस्या को दूर करने के में मदद करती है। इसके एंटी सेप्टिक गुणों के चलते ये त्वचा में मुहांसे उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया को समाप्त करते है। इसके लिए अमरुद की कुछ पत्तियों को मैश करके उन्हें अपने मुहांसों और दाग़-धब्बों पर लगा लें। कुछ देर बाद उसे साफ़ पानी से धो लें। रोजाना के इस्तेमाल से आपकी त्वचा साफ़ हो जाएगी।
14. ब्लैकहैडस :
इस समस्या के उपचार के लिए, अमरुद की कुछ पत्तियों को थोड़े से पानी से साथ पीस लें। अब इसका इस्तेमाल नाक के ब्लैकहैड हटाने के लिए स्क्रब के रूप में करें। कुछ ही दिनों में आपकी समस्या ठीक हो जाएगी।
15. एंटी एजिंग प्रकृति :
अमरुद की पत्तियों में एंटी oxidents पाए जाते है जो त्वचा को नुकसान पहुँचाने वाले फ्री रेडिकल्स को समाप्त करके त्वचा को एजिंग से बचाते है। इसके साथ ही त्वचा के रंग और उसके रूप को सुधारने में भी मदद करते है। पके हुए अमरुद के पत्तों का काढ़ा त्वचा में कसाव लाने में मदद करता है।
16. खुजली में दे आराम :
त्वचा में खुजली होना एक ऐसी समस्या है जिसे यदि समय पर ठीक न किया जाए तो ये एक गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। अमरुद के पत्ते इस समस्या से आराम दिलाने का इंस्टेंट उपाय है। जो एलर्जी कंपाउंड को रोक कर त्वचा की खुजली में आराम देते है।
अमरुद की पत्तियों के बालों के लिए लाभ :-
17. बालों का झड़ना :
बालों की झड़ने की समस्या को रोकने के लिए एक मुट्ठी अमरुद की पत्तियों को एक लीटर पानी में 20 मिनट के लिए उबाल लें। 20 मिनट बाद उसे गैस से उतार लें और ठंडा होने दें। ठंडा होने के पश्चात् इससे अपनी स्कैल्प की मसाज करें। बालों के झड़ने की समस्या में फायदा मिलेगा। इसके अलावा dandruff, दोमुहें बाल और तेलिय स्कैल्प की समस्या भी अमरुद के पत्तो के इस्तेमाल से दूर हो जाती है।
खून की कमी को पूरा करने के लिए प्रेगनेंसी में ये खाएं, खून की कमी को पूरा करने के आहार, प्रेगनेंसी में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं यह आहार, ये हैं आयरन से भरपूर आहार
गर्भावस्था के दौरान महिला में खून की मात्रा का भरपूर होना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि महिला में खून की कमी होती है तो इसके कारण महिला को कमजोरी थकान, व् एनीमिया जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही डिलीवरी के दौरान भी खून की कमी के कारण महिला को ज्यादा दिक्कत होती है। इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने आयरन की दवाई का सेवन करने के लिए कहा जाता है।
ताकि महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो और शिशु के विकास में भी किसी तरह की कोई कमी न आए। तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे आहार बताने जा रहें हैं जिनका सेवन यदि आप प्रेगनेंसी के समय करती है तो इससे आपको भरपूर मात्रा में पोषक तत्व तो मिलते ही हैं, बल्कि इसमें आयरन की मात्रा भी भरपूर होती है, जो आपकी खून की कमी से सम्बंधित समस्या का समाधान करने में मदद करती है।
गाजर व् चुकंदर
गाजर व् चुकंदर को सलाद के रूप में या फिर इनके जूस को मिलाकर पीने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान फायदा होता है। इनके नियमित सेवन से आपके शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है। आप चाहे तो गाजर के मुरब्बे का सेवन भी कर सकते हैं।
आंवले का मुरब्बा
खून की कमी को पूरा करने के साथ आंवले का मुरब्बा प्रेगनेंसी से जुडी समस्याओ को दूर करने में आपकी मदद करता है। नियमित एक या दो आंवले के मुरब्बे खाकर ऊपर से एक गिलास दूध का पीएं, आपको एनर्जी भी मिलेगी और ब्लड की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
खजूर
खजूर का सेवन करने से भी प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली खून की कमी की समस्या को दूर करने में आपको मदद मिलती है। इसके लिए आप आठ दस खजूर खाने में बाद ऊपर से दूध पी लें, इसके अलावा अन्य सूखे मेवे खाने से भी फायदा मिलता है।
टमाटर
आयरन के स्तर को बढ़ाने के लिए टमाटर का सेवन करने से भी आपको फायदा मिलता है, टमाटर का सूप, सलाद के रूप में टमाटर या टमाटर का जुइए गाजर के साथ बनाकर पीने से आपको फायदा मिलता है।
बथुआ
खून की मात्रा को बढ़ाने के साथ नए खून को बनाने के लिए भी बथुए के साग का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए आप दिन में एक समय के आहार में इसे जरूर खाएं आपको प्रेगनेंसी में खून की कमी से जुडी किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी।
हरी सब्जियां
हरी सब्जियों में आयरन की मात्रा भरपूर होती है, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने आहार में हरी सब्जियों को शामिल करना चाहिए। साथ ही आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की सब्जियां ताज़ी होनी चाहिए, अच्छे से धोने के बाद ही उन्हें पकाएं, और मौसम में आने वाली हरी सब्जियों का सेवन ही करें।
गुड़
प्रेगनेंसी में खाने के बाद गुड़ खाएं, या वैसे ही गुड़ और चने का सेवन करें इससे भी आयरन की मात्रा बढ़ती है।
कच्चे केले
प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्जी बनाकर उसका सेवन करें, यह कैल्शियम, आयरन, विटामिन से भरपूर होती है, और इससे महिला के शरीर में आयरन की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।
अनार
अनार का जूस या वैसे अनार का सेवन नियमित दिन में एक बार भी करने से आपको बहुत फायदा मिलता है, इससे न केवल आपको आयरन भरपूर मात्रा में मिलता है बल्कि अन्य पोषक तत्व भी भरपूर मिलते हैं।
तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाली आयरन की कमी को दूर करने में मदद मिलती है। इसके अलावा जो आयरन की दवाइयां आपको डॉक्टर देते हैं उन्हें लेने में भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। और उन्हें नियमित लेना चाहिए क्योंकि वो भी प्रेगनेंसी में आयरन की कमी को पूरा करने में आपकी मदद करते हैं।
गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जब महिला को कुछ भी काम करने से पहले बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे की जो काम आप कर रही है उसे करने में आपको दिक्कत तो नहीं हो रही है, ज्यादा थकावट महसूस तो नहीं हो रही है, पीठ में दर्द महसूस तो नहीं हो रहा है, पेट पर दबाव तो नहीं पड़ रहा है, आदि।
क्योंकि ऐसा कोई भी काम जिसे करने से आपको यह सब दिक्कतें हो वो काम प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे किसी भी काम को करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को नुकसान पहुँचता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में महिला को हाथ से कपडे धोने से क्या नुकसान होते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।
थकावट होती है ज्यादा
गर्भवती महिला यदि बैठकर कपडे धोती है तो बार बार उठने, बैठने, व् कपड़ों को घिसने में जोर लगाने के कारण, महिला को ज्यादा थकावट होती है। जिसके कारण कपडे धोने के बाद महिला को बॉडी में दर्द, थकान, कमजोरी का अनुभव अधिक होता है। साथ ही जब महिला कपड़ो को पानी में डालकर उठाती है तो कपडे भारी हो जाते हैं जिसके कारण महिला को थकावट और ज्यादा महसूस होती है।
पीठ में दर्द
लम्बे समय तक बैठकर कपडे धोने से प्रेग्नेंट महिला की पीठ पर भी अधिक जोर पड़ता है जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है। जिसके कारण महिला को उठने, बैठने, लेटने, सोने आदि में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पेट पर पड़ता है दबाव
शुरूआती तीन महीनों में तो नहीं लेकिन दूसरी तिमाही में जब महिला का पेट बाहर की तरफ निकलता है। तो ऐसे में यदि महिला यदि बैठकर कपडे धोती है तो इसके कारण पेट पर अधिक दबाव पड़ता है। जिसकी वजह से गर्भ में बच्चा असहज महसूस करता है और उसे दिक्कत होती है। लेकिन पहले तीन महीनों में भी महिला को यह काम नहीं करना चाहिए क्योंकि पहली तिमाही में इस तरह के काम करने से महिला को ब्लीडिंग होने का खतरा रहता है।
पेट में दर्द
हाथ से कपडे धोने के कारण महिला के पेट पर जोर पड़ता है जिसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को पेट में दर्द की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सूजन
हाथ से कपडे धोने के लिए पैरों के भार बैठना पड़ता है। और प्रेगनेंसी के दौरान पैरों के भार अधिक बैठने की वजह से पैरों में सूजन की समस्या का सामना प्रेग्नेंट महिला को करना पड़ सकता है।
तो यह हैं कुछ परेशानियां जो महिला को पैरों के भार बैठकर कपडे धोने से हो सकती है। ऐसे में यदि आपको प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं हैं तो भी ऐसे काम आप न करें क्योंकि इनके कारण आपकी शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है।
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आपने देखा होगा की बहुत से लोग काला धागा पहनते हैं, यह धागा हाथ, पैर, गले में पहन सकते हैं। लेकिन कभी आपने यह सोचा है की वो ऐसा क्यों करते हैं, यह केवल दिखावे के लिए है, ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए है या फिर इसके पीछे कोई और कारण हैं। काले धागे को पहनने को लेकर सभी लोग तरह -तरह की बातें करते हैं जैसे की लोगो का मानना होता है की इससे नज़र नहीं लगती है, व्यक्ति को पॉजिटिव रहने में मदद मिलती है, आदि। तो लीजिये आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं की आखिर काला धागा लोग क्यों पहनते हैं और इसे पहनने से क्या फायदे मिलते हैं।
नज़र के बचाव के लिए
वैज्ञानिको के अनुसार भी काला रंग ऊष्मा को अवशोषित करता है, वैसे ही लोगो का मानना है की यदि काले रंग के धागा पहना जाएँ तो इसके कारण काली नज़र भी अवशोषित हो जाती है, जिससे बुरी नज़र से बचाव करने में मदद मिलती है, साथ ही किसी का बुरा साया या बुरी हवाओं को आप पर नहीं पड़ता है, क्योंकि यह उन्हें अवशोषित कर लेता है।
सकरात्मक ऊर्जा मिलती है
ऐसा भी माना जाता है की जो व्यक्ति काला धागा गले, हाथ, या पैर में पहनता है इससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, और नकारात्मकता से दूर रहने में उनको मदद मिलती है।
शनि दोष से बचाव होता है
कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता है की शनि की बुरी दृष्टि उस पर पड़े, क्योंकि यह व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में बहुत से लोग शनिवार के दिन घर में या शनि मंदिर में जाकर काला धागा पहनते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है की इससे शनि की बुरी दृष्टि से बचाव करने में मदद मिलती है।
छोटे बच्चों के लिए है फायदेमंद
छोटे बच्चे बहुत ही प्यारे होते है ऐसे में उनकी कोई भी हरकत देखकर सभी खुश होते है, और यह हरकत केवल घर वाले ही नहीं बल्कि बाहर वाले भी देखते हैं। ऐसे में माना जाता है की बच्चों को यदि टोक लग जाएँ तो बच्चे बीमार हो सकते है, खाने पीने से परहेज करने लगते हैं। इसीलिए छोटे बच्चों को नज़र से बचाने के साथ उन्हें हष्ट पुष्ट रखने के लिए भी बचपन से हाथ पैर में काले धागे पहनाएं जाते हैं।
सफलता मिलती है
काले धागे को यदि सीधे हाथ की कलाई पर बाँधा जाता है तो ऐसा करने से आपके काम में आने वाली परेशानियां दूर होती है, साथ ही आपको सफलता मिलती है। ऐसे में आप भी चाहे तो सफलता के इस मूल मन्त्र को अपना सकते हैं।
बीमारियों से बचाव होता है
शनिवार को काले धागे पर हनुमान जी के पैरों से सिन्दूर लगाकर यदि कोई व्यक्ति पहनता हैं तो ऐसा करने से उसे बीमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है, ऐसा भी लोगो का मानना है।
गर्भवती महिला को काला धागा पहनने के फायदे
पुराने जमाने से ही गर्भवती महिला को भी अपना अच्छे से ध्यान रखने के लिए कहा जाता है, और तीन महीने तक तो प्रेगनेंसी को किसी से शेयर न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि आज भी लोग ऐसा मानते हैं की इससे महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को बुरी नज़र लग सकती है, ऐसे में गर्भवती महिला को इन सभी नज़र से बचाने के लिए और प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रखने के लिए काला धागा पहनाया जाता है।
तो यह हैं कुछ फायदे जो काला धागा पहनने से मिलते हैं, यदि आप भी पहनना चाहे तो इसे पहन सकते हैं। क्योंकि इसके पहनने से किसी भी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़ता है। और इसे पुरुष, महिला, बच्चे बूढ़े कोई भी पहन सकता है, साथ ही यह भी आप पर ही निर्भर करता है की आप इसे हाथ में पहनना चाहते हैं, पैर में पहनना चाहते हैं या फिर गले में पहनना चाहते हैं।।
Hindi Video : Black Thread During Pregnancy is Very Important
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाएं बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना कर सकती हैं। और उन्ही परेशानियों में से एक होती है पेट दर्द की समस्या, पेट दर्द की समस्या का होना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ही आम बात होती है। क्योंकि जैसे जैसे गर्भाशय का आकार बढ़ता है वैसे वैसे महिला को हल्के फुल्के पेट में दर्द की समस्या हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की आप इसे अनदेखा करें क्योंकि पेट दर्द तेज हो रहा है, दर्द के साथ बुखार उल्टी, कमजोरी, आदि की समस्या है, तो यह परेशानी का कारण हो सकता है। और पेट के किस हिस्से में दर्द हो रहा है इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान पेट दर्द को कब अनदेखा नहीं करना चाहिए।
पेट में तेजी से दर्द
यदि गर्भवती महिला को पेट में ऐंठन व् तेजी से दर्द हो रहा है जैसे की पीरियड्स के दौरान हो सकता है, साथ ही ब्लीडिंग की समस्या भी हो, तो इसे प्रेग्नेंट महिला को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। खासकर यदि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही चल रही हो क्योंकि यह प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात का लक्षण हो सकता है।
पेल्विक की मांसपेशियों में दर्द
प्रेग्नेंट महिला को यदि प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही पेल्विक एरिया और पेट में कभी तेज और कभी धीमा दर्द हो साथ ही इस दौरान महिला को रक्तस्त्राव की समस्या भी हो सकती है तो यह भी महिला के लिए परेशानी का कारण हो सकता है। क्योंकि यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है, ऐसे में महिला को बॉडी में इस लक्षण के महसूस होने पर एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।
यूरिन करते समय पेट में दर्द
गर्भावस्था के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को तरह तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यूरिन इन्फेक्शन की परेशानी का सामना भी महिला को करना पड़ सकता है। और यदि गर्भवती महिला को यूरिन पास करते समय पेट में दर्द, जलन, बदबू महसूस हो तो यह संक्रमण का लक्षण हो सकता है।
पेट में साइड के हिस्से में दर्द
अधिक वजन, बॉडी में एस्ट्रोजन के अधिक मात्रा में बढ़ने के कारण, अधिक उम्र में प्रेगनेंसी, पहले घर में किसी को पथरी की समस्या होना, आदि इन कारणों की वजह से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी में पथरी की समस्या भी हो सकती है। और यदि गर्भवती महिला को पेट के साइड के हिस्से में बहुत अधिक दर्द की समस्या होती है तो यह पथरी का लक्षण हो सकता है।
पेट के निचले हिस्से में दर्द
यदि प्रेग्नेंट महिला को पेट के निचले हिस्से में में तेजी से दर्द हो चाहे वो प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में हो तो इसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि पेट के निचले हिस्से में दर्द का कारण प्रसव होने का संकेत हो सकता है। ऐसे में महिला को ध्यान रखना चाहिए की कहीं यह दर्द समय पूर्व तो नहीं हो रहा है और यदि प्रसव का समय पास आने पर हो रहा है तो अब आपका शिशु इस दुनिया में आने के लिए पूरी तरह से तैयार है, और इस दौरान दर्द के साथ महिला को प्राइवेट पार्ट से चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता हुआ भी महसूस हो सकता है यह एमनियोटिक फ्लूड हो सकता है।
तो यह है प्रेगनेंसी में पेट के दर्द से जुडी कुछ बातें, ऐसे में यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट में दर्द की समस्या होती भी है तो भी महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और किस तरह का और पेट के किस हिस्से में दर्द हो रहा है इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए, ताकि प्रेग्नेंट महिला और शिशु को हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।
गरमी का मौसम यानि अत्यधिक तापमान और कई तरह की परेशानियाँ। चिलचिलाती धूप और बढ़ती गरमी लोगों का जीना मुश्किल कर देती है। घर से बाहरनिकलना तो दूर घर में भी गरमी लोगों को चैन से जीने नहीं देती। गरमी के मौसम में बाहर खाने-पीने से तरह-तरह की बीमारियाँ लोगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं।किसी को फूड पॉइज़निंग तो किसी को डायरिया जो जाता है। ऐसी गरमी में खुद को फिट रखने के लिए क्या किया जाए, लोग समझ नहीं पाते। बदलते मौसम में खुदको फिट रखने के लिए अपने लाइफस्टाइल में भी कुछ बदलाव करना जरूरी हैं, ताकि खुद को इस गरमी में स्वस्थ रखा जा सके।
पहले हम जानेंगे की गरमी में कौन-कौन सी बीमारियाँ हैं, जिनसे हमें बचना है –
सनस्ट्रोक– आमतौर पर गर्मियों में सनस्ट्रोक की समस्या हो जाती है क्योंकि इस मौसम में शरीर की खुद को ठंडा रखने की क्षमता कम हो जाती है। सनस्ट्रोक सेबचने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पीते रहना जरूरी है। हीट स्ट्रोक से पीड़ित होने पर लोगों को तेज बुखार और कमजोरी महसूस होती है।
फोड़े– गर्मी के कारण शरीर के कई हिस्सों में छाले या फोड़े निकल आते हैं। इस मामले में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
एलर्जी– धूल और गर्मी से एलर्जी होना आम बात है। इसलिए तेज धूप में बाहर जाने से बचें।
घमोरियाँ – तेज़ गरमी और धूप में घमोरियाँ होना एक बहुत ही आम समस्या है।
हैजा, टायफायड, पीलिया और दस्त पानी से होने वाली आम बीमारियां हैं जो बाहर के खाने से होती हैं। बाहर का खाना गर्मी में जल्दी खराब हो जाता है। गर्मी मेंपानी की मांग बढ़ जाती है और प्रदूषित पानी के कारण बीमारियां फैलती हैं।
गरमी और बरसात के दिनों में इधर-उधर पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और मच्छरों से होने वाली दूसरी बीमारियां फैलती हैं।
गरमीमेंसेहतमंदरहनेकेलिएअपनाएँयेटिप्स :-
ताजेफलवहरीसब्ज़ियाँखाएँ – गरमियों के मौसम में अधिक तला हुआ व मसालेदार भोजन ना करें। ऐसे भोजन में बहुत अधिक कैलोरी होती है और शरीर कोसुस्त कर देता है। ऐसे भोजन से हर वक़्त पेट भारी भारी महसूस होता है, acidity और gastric प्रॉब्लम भी हो सकती है, इसलिए ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँइत्यादि ही खाएँ व सेहतमंद बने रहें।
पानीअधिकाधिकपिएँ – गरमियों में बढ़ा हुआ तापमान और चिलचिलाती धूप शरीर में डीहाइड्रेशन यानी पानी की कमी पैदा कर सकते हैं, जिसके कारणशरीर में से अधिक पसीना निकलने से इलैक्ट्रोलाइट नामक तत्व, जैसे कि sodium और potassium का असंतुलन हो जाता है। इसकी वजह से Hypernatremiaऔर Hypokalemia जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इससे आप अत्यधिक थकी हुई, उबकाई जैसी महसूस करती हुई और यहां तक कि डायरिया या कब्ज से पीड़ितभी महसूस कर सकती हैं। इसलिए दिन में 10-15 गिलास पानी अवश्य पिएँ व ख़ुद को गरमी से होने वाले नुक़सानों से बचाए रखें।
तरलपदार्थोंतथाशर्बतकासेवनबढ़ाएं – गरमी के मौसम में नारियल पानी, छाछ, फलों का रस तथा शर्बतों का सेवन करें । ये सभी पेय आपके शरीर मेंइलैक्ट्रोलाइट के संतुलन को पुनर्जीवित करते हैं।
सलाद – सलाद को अपने भोजन में ज़रूर शामिल करें। खीरा गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है। ये शरीर से विषैले पदार्थो को निकालनेमें मदद करता है। इससे एसिडिटी और जलन जैसी समस्यायें नहीं होती हैं।खीरे के अलावा अपने भोजन में कच्चा प्याज़, टमाटर, ककड़ी, मूली, गाजर को भी शामिल करें।
अपनीगरमियोंकीडाइटलिस्टमेंइन्हेंज़रूरशामिलकरें :-
तरबूज़ – तरबूज़ एक ठंडी तासीर का फल है, इसलिए ये दिमाग को शांत रखता है। इस में लाइकोपिन नामक तत्व पाया जाता है, जो त्वचा की चमक कोबरकरार रखता है। ये कोलस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। तरबूज के नियमित सेवन से कब्ज कीसमस्या दूर हो जाती है। साथ ही खून की कमी होने पर इसका जूस फायदेमंद साबित होता है।
पुदीना – साधारण-सा दिखने वाला यह पौधा पुदीना गुणों की खान है। ये अपने आप में बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी प्रभाव रखता है। गर्मियों में पुदीने कीचटनी खाना भी सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। पुदीने की पत्तियां गर्मियों में ठंडक प्रदान करती हैं। यह आपके भोजन को बेहतर ढंग से पचाने में मदद करती हैं।पुदीने और आम का पन्ना आपको डिहाइड्रेशन और लू लगने जैसे खतरों से बचाता है। गर्मी की वजह से घबराहट होने पर या जी मिचलाने पर एक चम्मच सूखेपुदीने की पत्तियां और आधा छोटा चम्मच इलायची का चूर्ण एक गिलास पानी में उबालकर, ठंडा होने के बाद पीने से बहुत जल्दी आराम मिलता है। अगर साथही हैजा होने की शिकायत है तो प्याज का रस और नींबू का रस पुदीना के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से बहुत जल्द आराम मिल जाता है।
नींबू – गरमी के मौसम में नींबू बहुत फायदेमंद होता है। गरमी में राहत दिलाता है। शरीर में गरमी और उमस के चलते कम हुए लवणों की मात्रा को भी नियंत्रितकरता है। नींबू में और भी कई गुण भी होते हैं। यह यूरिक एसिड और अन्य विषैले पदार्थो को साफ करता है, जिससे यकृत की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। नींबू मेंविटामिन-सी और कई ऐसे पदार्थ होते हैं जो कि आपके शरीर को रोगों से लड़ने में मदद करता है। इससे साँस संबंधी रोग, सर्दी-जुकाम, खाँसी होने के खतरे भीकम हो जाते हैं। साथ ही इसमें Saponin नामक तत्व होता है जो शरीर को फ्लू से बचाने में मदद करता है।
खीरा – सलाद के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले खीरे में इरेप्सिन नामक एंजाइम होता है, जो प्रोटीन को पचाने में सहायता करता है। खीरा पानी और फ़ाइबरका बहुत अच्छा स्रोत होता है, इसमें 96% पानी होता है। खीरे में विटामिन ए, बी1, बी2, बी3, बी5, बी6, फोलेट, पौटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, ज़िंक,मेंगानीज़ आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। खीरा कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है, वज़न घटाता है। ये कब्ज़, बदहजमी, अल्सर आदि बीमारियों से राहतदिलाने में मदद करता है क्योंकि इसमें जल की मात्रा ज़्यादा होने के कारण यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल देता है और उच्च फाइबर कीमात्रा पेट को साफ करने में मदद करता है। इसमें जो इरेप्सिन नाम का एन्जाइम होता है वह प्रोटीन को सोखने में मदद करता है।
गरमीसेबचावकेलिएअपनाएँयेउपाय :-
हमेशा शांत रहें। दिन में कम से कम दस से बारह गिलास पानी पिएँ। गर्मियों के दिनों में शरीर का पानी पसीना बनकर बाहर निकलता हैं, इसलिए शरीर में पानीकी कमी ना होने दें।
धूप में कहीं बाहर जाते समय अपने आप को धूप की किरणों से बचाए रखें, इसके लिए आप टोपी भी पहन सकते हैं या फिर छाते का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अपने शरीर को हल्के फुल्के व्यायाम से चुस्त और तंदरुस्त रखें।
गरमी से राहत पाने के लिए किसी हिल स्टेशन पर जा सकते हैं।
तले हुए और मसालेदार भोजन से दूर रहें।
ऊपर दिए गए उपाय अपनाकर आप भयंकर गरमी से लड़ सकते हैं और राहत पा सकते हैं। तो इन आने वाली गरमियों में आप अपना व अपनों का ख़्याल रखें।
माँ बनना किसी भी महिला के लिए इतना आसान नहीं होता है क्योंकि नौ महीने तक गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और यह परेशानियां केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी महिला को परेशान कर सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला सिर दर्द व् चक्कर, उल्टियां व् जी मिचलाना, शरीर के अंगो में दर्द, वजन के बढ़ने के कारण परेशानी, तनाव, मांसपेशियों में खिंचाव, मॉर्निंग सिकनेस, सूजन, आदि परेशानियां हो सकती है। लेकिन हर एक प्रेग्नेंट महिला को एक ही तरह की समस्या हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है यह पूरी तरह से महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। तो आइये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान थकान की समस्या अधिक क्यों होती है इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, जिससे लगभग हर प्रेग्नेंट महिला गुजरती है।
प्रेगनेंसी में थकान होने के कारण
प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी का अनुभव होना बहुत ही आम बात होती है, लेकिन थकान होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि गर्भवती महिला को थकान होने के बहुत से कारण हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में थकान होने के कौन कौन से कारण होते हैं।
प्रत्यारोपण
जिस समय निषेचित अंडा गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है उस दौरान गर्भनाल का भी विकास होता है। और उस दौरान बॉडी में बहुत ऊर्जा खर्च होती है जिसके कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की शुरुआत में थकान का अनुभव अधिक हो सकता है।
हार्मोनल बदलाव
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। जिसके कारण महिला को थकान का अहसास हो सकता है। ऐसे में इस दौरान महिला को अपना ज्यादा ध्यान देने की जरुरत होती है ताकि महिला को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
पोषण की कमी
गर्भवती महिला यदि अपने आहार को समय से नहीं लेती है, पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन नहीं करती है तो इससे बॉडी को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है। जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को थकावट की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
आयरन की कमी
बॉडी में आयरन की कमी होने के कारण गर्भवती महिला को एनीमिया यानी खून की कमी जैसी समस्या समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और गर्भावस्था के दौरान बॉडी में खून की कमी होने के कारण महिला को थकावट जैसी समस्या हो सकती है।
लौ ब्लड प्रैशर
प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं लौ ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान हो सकती है। और जिन महिलाओं को यह समस्या होती है उन्हें थकान का अनुभव अधिक हो सकता है।
तनाव
बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण, या माँ बनने के बाद शिशु और अपनी केयर के बारे में सोचकर तनाव से ग्रसित हो जाती है। और महिला का मानसिक रूप से परेशानी का अनुभव करना भी थकान का कारण हो सकता है।
नींद में कमी
बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण, वजन बढ़ने के कारण, प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों के कारण, गर्भवती महिला को अनिंद्रा की समस्या हो सकती है। और प्रेग्नेंट महिला की नींद पूरी न होने के कारण गर्भवती महिला को नींद में कमी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वजन
वजन अधिक बढ़ने के कारण भी गर्भवती महिला को थकान जैसी परेशानी का अनुभव हो सकता है। खासकर तीसरी तिमाही में महिला की यह समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में महिला को आराम जरूर करना चाहिए ताकि थकान के कारण अधिक परेशानी ना हो।
मूड स्विंग्स
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग्स की समस्या भी हो सकती है। जिसके कारण गुस्सा, चिड़चिड़ापन आदि महसूस होना आम बात होती है और इन्ही बदलाव के कारण भी महिला को थका हुआ सा महसूस कर सकती है।
पानी की कमी
गर्भवती महिला यदि पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इसके कारण भी महिला को थकान का अनुभव हो सकता है। क्योंकि पानी की कमी के कारण बॉडी में ऊर्जा की भी कमी हो जाती है जिसके कारण गर्भवती महिला थका हुआ महसूस हो सकता है।
दर्द
प्रेगनेंसी के दौरान कमर, पेट, टांगो, आदि में दर्द की समस्या होने के कारण भी प्रेग्नेंट महिला थका थका सा महसूस कर सकती है। और इससे निजात पाने के लिए महिला को आराम भरपूर करना चाहिए।
कामकाजी महिला
जो महिलाएं काम करती हैं ऑफिस जाती है और ज्यादा देर तक एक ही जगह पर बैठी होती है।उन महिलाओं को भी थकावट की समस्या हो सकती है। या घर में भी एक ही जगह पर बहुत देर तक बैठी रहती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को थकान का अनुभव हो सकता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। साथ ही अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए, आयरन व् अन्य पोषक तत्वों की बॉडी में कमी नहीं होने देनी चाहिए, इन सभी का ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला को थकान जैसी समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।