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यह 10 दिक्कतें आने पर सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ती है?

गर्भावस्था का सबसे मुश्किल समय वह होता है जब महिला की डिलीवरी का समय पास आता है। खासकर जिन महिलाओं का पहला प्रसव होता है उन्हें प्रसव को लेकर बहुत ही डर भी महसूस हो सकता है। लेकिन यदि प्रसव की सही जानकारी हो तो प्रेग्नेंट महिला को प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।

साथ ही अधिकतर गर्भवती महिलाएं यही चाहती हैं की वो सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दें। क्योंकि सामान्य प्रसव से माँ और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है। लेकिन कुछ केस में ऐसा हो जाता है की महिला की सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ केस के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमे सिजेरियन डिलीवरी काने की जरुरत पड़ती है।

एमनियोटिक फ्लूड की कमी के कारण

यदि गर्भवती महिला के गर्भाशय में से एमनियोटिक फ्लूड धीरे धीरे निकलता रहता है और महिला के गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी हो जाती है। ऐसे में गर्भ में शिशु को रिस्क होने का खतरा बढ़ जाता है और शिशु को कोई खतरा नहीं हो इससे बचाव के लिए महिला को जल्द से जल्द सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह दी जाती है।

शिशु ने गर्भनाल गर्दन में लपेट रखी हो

कुछ केस में गर्भ में शिशु मूवमेंट करते हुए गर्भनाल को गर्दन में लपेट लेते हैं और गर्भनाल जब शिशु गर्दन में लपेट लेता है तो इसकी वजह से शिशु की मूवमेंट कम हो जाती है, शिशु तक ब्लड और ऑक्सीजन का फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है, और इसके कारण गर्भ में शिशु की जान को खतरा होने का डर होता है। ऐसे में शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो इससे बचाव के लिए डॉक्टर्स महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह देते हैं।

गर्भ में शिशु के जन्म लेने की सही पोजीशन में नहीं आने के कारण

जब गर्भ में शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन (यानी शिशु का सिर नीचे की तरफ और पैर ऊपर की तरफ होना) में आ जाता है तो इसका मतलब यह होता है की महिला की सामान्य डिलीवरी होने के चांस अधिक हैं। लेकिन यदि डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद भी गर्भ में शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में नहीं आता है यानी की शिशु का सिर नीचे की तरफ नहीं होता है या गर्भ में शिशु उल्टा होता है। तो ऐसे केस में गर्भ में शिशु के ज्यादा समय रहने पर भी शिशु को दिक्कत हो सकती है ऐसे में डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद डॉक्टर्स महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह देते हैं।

शिशु की मूवमेंट में कमी

यदि किसी कारण गर्भ में शिशु अच्छे से मूव नहीं करता है और गर्भवती महिला को शिशु की मूवमेंट में कमी महसूस होती है। तो ऐसे केस में भी महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि गर्भ में शिशु की मूवमेंट में कमी होने के कारण गर्भ में शिशु की जान को दिक्कत होने का खतरा हो सकता है। और ऐसा होने पर भी डॉक्टर्स महिला की सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह देते हैं।

शिशु के गर्भ में ही मल मूत्र करने के कारण

माँ के गर्भ में शिशु यदि मल मूत्र कर देता है तो ऐसे केस में भी ज्यादा देर तक गर्भ में शिशु का रहना सही नहीं होता है। ऐसे में शिशु को दिक्कतों से बचाने के लिए डॉक्टर्स जल्द से जल्द सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह देते हैं।

ब्लड प्रैशर हाई हो

यदि गर्भवती महिला का ब्लड प्रैशर हाई हो तो ऐसे केस में नार्मल डिलीवरी करवाने का रिस्क लेने से माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में माँ और बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर्स सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह देते हैं।

गर्भ में एक से ज्यादा शिशु के होने पर

यदि माँ के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होते हैं तो ऐसे केस में गर्भ में शिशु के सही पोजीशन में आने के चांस कम ही होते हैं। तो ऐसा होने पर भी महिला को कोई दिक्कत नहीं हो और बच्चे भी सही रहे इसके लिए महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह दी जाती है।

लेबर पेन नहीं हो

यदि गर्भवती महिला को डिलीवरी डेट के निकल जाने के बड़ा भी लेबर पेन नहीं हो और आर्टिफिशल पेन देने पर भी महिला को प्रसव का कोई लक्षण महसूस तो ऐसे केस में भी महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि गर्भ में शिशु का ज्यादा समय तक रहना माँ और बच्चे दोनों पर बुरा असर डाल सकता है।

ब्लीडिंग की समस्या होने पर

यदि किसी गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी में बहुत ज्यादा कॉम्प्लीकेशन्स होते हैं जैसे की महिला को प्रेगनेंसी के दौरान या डिलीवरी का समय पास आने पर ब्लीडिंग की समस्या शुरू हो जाती है। तो ऐसे केस में भी महिला को ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देने की सलाह दी जाती है।

बच्चे के दिल की धड़कन कम होने पर

यदि गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की धड़कन कम हो जाती है तो ऐसे केस में भी महिला की जल्द से जल्द सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह दी जाती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला की सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ती है ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। और महिला के सामान्य प्रसव के चांस बढ़ाने में मदद मिल सके।

Cesarean Delivery

प्रेगनेंसी में आलूबुखारा (Plum) खाने के फायदे और नुकसान

घर के बड़े बुजुर्ग, दोस्त, रिश्तेदार जो भी गर्भवती महिला को मिलता है हमेशा यह बात जरूर करता है की प्रेगनेंसी के दौरान अच्छे से खाना पीना चाहिए। क्योंकि जितनी बेहतर डाइट महिला प्रेगनेंसी के दौरान लेती है उतना ही फायदा माँ और बच्चे दोनों को मिलता है। लेकिन किसी भी चीज को खाने या पीने से पहले उसकी सही जानकारी होना बहुत जरुरी होता है की आखिर महिला जो भी खा या पी रही है उसका सेवन माँ और बच्चे के लिए सेफ है या नहीं।

आज इस आर्टिकल में हम ऐसे ही एक फल के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसे लेकर गर्भवती महिला यह सोच सकती है की आखिर प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उसे खाना चाहिए या नहीं? और वो फल है आलूबुखारा, तो आइये अब प्रेगनेंसी के दौरान आलूबुखारे के सेवन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रेगनेंसी में आलूबुखारा खाना चाहिए या नहीं?

आलूबुखारा एक ऐसा फल है जो मार्किट में बहुत कम समय के लिए ही दिखाई देता है। खाने में खट्टा मीठा स्वाद होने के कारण यह अधिकतर लोगो को बहुत पसंद भी आता है। और जहां बात गर्भवती महिला की आती है तो प्रेग्नेंट महिला भी चाहे तो सिमित मात्रा में आलूबुखारा का सेवन कर सकती है। क्योंकि आलूबुखारे में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

आलूबुखारा में मौजूद पोषक तत्व

आयरन, विटामिन सी, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम जैसे पोषक तत्व आलूबुखारे में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला की सेहत सम्बन्धी परेशानियों को कम करने के साथ माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद भी होते हैं।

प्रेगनेंसी में आलूबुखारा खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि आलूबुखारे का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

एनर्जी मिलती है

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं कमजोरी थकावट जैसी समस्या से परेशान रहती है। ऐसे में आलूबुखारे का सेवन करना महिला के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि आलूबुखारा खाने से शरीर में एनर्जी को बढ़ाने में मदद मिलती है।

आयरन

गर्भावस्था के समय शरीर में आयरन की ज्यादा जरुरत होती है इसीलिए डॉक्टर्स भी महिला को आयरन की दवाई लेने की सलाह भी देते हैं। लेकिन यदि महिला के शरीर में आयरन की कमी होती है तो इसके कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आलूबुखारा खाने से महिला की यह समस्या कम हो सकती है क्योंकि आलूबुखारा में आयरन मौजूद होता है।

विटामिन सी

विटामिन सी एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है, शरीर के सभी अंगों में आयरन को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है, समय से पहले डिलीवरी के खतरे को कम करने में मदद करता है। ऐसे में महिला के लिए विटामिन सी का सेवन बहुत जरुरी होता है और इसके लिए महिला आलूबुखारा का सेवन कर सकती है। क्योंकि आलूबुखारा में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।

कैल्शियम

आलूबुखारा में कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है और कैल्शियम हड्डियों की मजबूती व् दांतों को स्वस्थ रखने में बहुत फायदेमंद होता है। ऐसी में यदि महिला आलूबुखारे का सेवन करती है तो इससे महिला को भरपूर मात्रा में कैल्शियम मिलता है। जिसेस गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषण मिलता है और महिला को थकावट कमजोरी जैसी समस्या से राहत मिलती है। साथ ही कैल्शियम गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों व् दांतों के विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

फाइबर

गर्भावस्था के दौरान महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। जिसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है जैसे की कब्ज़, अपच, आदि। ऐसे में आलूबुखारे का सेवन करना महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि आलूबुखारे में मौजूद फाइबर महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है।

जेस्टेशनल शुगर से बचाव

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को जेस्टेशनल शुगर की समस्या होने का खतरा भी होता है ऐसे में यदि महिला आलूबुखारा का सेवन करती है। तो इससे गर्भवती महिला को जेस्टेशनल शुगर होने का खतरा कम हो जाता है क्योंकि इससे ब्लड में शुगर लेवल को कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में आलूबुखारा खाने के नुकसान

सिमित मात्रा में कोई भी चीज आपको जितना फायदा पहुंचाती है उतना ही नुकसान उसका तब पहुँचता है जब आप उस चीज को जरुरत से ज्यादा खा लेते हैं। वैसे ही गर्भवती महिला यदि जरुरत से ज्यादा आलूबुखारा का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला का वजन बढ़ने, पथरी की समस्या होने का खतरा रहता है। इसके अलावा यदि महिला को पहले पथरी की समस्या थी तो महिला को आलूबुखारा का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान आलूबुखारा का सेवन करने के फायदे व् नुकसान, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इसका सेवन कर सकती है। लेकिन यदि आलूबुखारा का सेवन करने से आपको किसी भी तरह की समस्या होती है। तो गर्भवती महिला को आलूबुखारा का सेवन नहीं करना चाहिए।

Health benefits of eating Plum during Pregnancy

प्रेगनेंसी में अगर यहां पेट में दर्द हो तो यह खतरा हो सकता है?

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी अलग अलग शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की हर एक गर्भवती महिला को ही प्रेगनेंसी के दौरान एक तरह की दिक्कतें होती है। साथ ही ऐसा भी होता है की बहुत सी गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के समय दिक्कत होती है और बहुत सी गर्भवती महिलाओं को दिक्कत नहीं होती है।

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में दिक्कत होती है और कुछ महिलाएं पूरे नौ महीने तक दिक्कतों का सामना करती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उल्टियां, शरीर में दर्द व् अकड़न, शरीर में दर्द, थकान, कमजोरी, यूरिन इन्फेक्शन, भूख में कमी, सफ़ेद पानी, पेट में दर्द अन्य और भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में महिला को कोई भी दिक्कत यदि हो रही है तो महिला को उससे बचने की दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना डॉक्टरी सलाह के दवाई का सेवन करना बच्चे पर बुरा असर डाल सकता है। साथ ही दिक्कत अधिक होने पर डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि यदि परेशानी अधिक होने पर उसे अनदेखा किया जाये तो इसकी वजह से दिक्कत और बढ़ सकती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले पेट दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान पेट दर्द होना सामान्य है या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान थोड़ा बहुत पेट दर्द होना सामान्य होता है क्योंकि बच्चे के विकसित होने के साथ गर्भाशय का आकार बढ़ता है जिसके कारण पेट के आस पास की स्किन में खिंचाव होता है। और इसके कारण हल्का फुल्का पेट दर्द महिला को हो सकता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कब्ज़, पेट में गैस की समस्या होना भी आम बात होती है जिसके कारण भी महिला को पेट में हल्का दर्द महसूस हो सकता है।

और हल्का फुल्का पेट दर्द यदि महिला को होता है तो ऐसा होना बहुत ही सामान्य बात होती है। लेकिन यदि महिला को बहुत ज्यादा दर्द हो रहा होता है तो महिला को और शिशु को नुकसान पहुंचना के खतरा होता है। ऐसे में दर्द बढ़ने के बाद महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। साथ ही प्रेगनेंसी में पेट में होने वाले दर्द को लेकर यह समझना जरुरी होता है की कब महिला को पेट दर्द को अनदेखा करना चाहिए और कब नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में यहां पेट दर्द होने पर होती है दिक्कत

गर्भवती महिला को यदि पेट में दर्द हो रहा है और वो दर्द कैसे हो रहा कहाँ हो रहा है इसका ध्यान गर्भवती महिला को जरूर रखना चाहिए। ताकि महिला को यह समझने में आसानी हो जाये की महिला को होने वाला पेट दर्द सामान्य है या महिला को होने वाले पेट दर्द को अनदेखा नहीं करना है और डॉक्टर के पास जाना है। तो आइये अब जानते हैं की कहाँ पेट दर्द होने पर महिला को दिक्कत होती है।

पेट में तेज दर्द और ब्लीडिंग

यदि प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में महिला को पेट में दर्द महसूस रहा है, पेट में ऐंठन या अकड़न महसूस हो रही है या फिर महिला को ऐसे पेट में दर्द महसूस हो रहा है जैसा की मासिक धर्म के दौरान महसूस होता है। साथ ही महिला को खून के धब्बे लग रहे हैं या थोड़ी ब्लीडिंग हो रही है तो महिला को ऐसे पेट दर्द होने पर गर्भपात का खतरा होता है। और कुछ केस में यदि अचानक से ब्लीडिंग हो जाये तो अपने आप ही गर्भपात हो जाता है ऐसे में महिला को जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

यूरिन करने में परेशानी के साथ पेट दर्द

प्रेग्नेंट महिला को यदि यूरिन करते समय जलन, दर्द, खुजली होने के साथ पेट के निचले हिस्से में यदि दर्द महसूस होता है तो यह यूरिन इन्फेक्शन होने के कारण होता है। ऐसे में महिला को इसे भी अनदेखा न करते हुए तुरंत इसका इलाज करना चाहिए।

पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द

गर्भवती महिला को यदि पेट के निचले हिस्से में प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही दर्द महसूस होता है। तो इसका कारण एक्टोपिक प्रेगनेंसी हो सकती है। ऐसे में महिला को डॉक्टर द्वारा गर्भपात करवाने की जरुरत पड़ती है क्योंकि एक्टोपिक प्रेगनेंसी में बच्चा गर्भाशय में न विकसित होकर फैलोपियन ट्यूब में ही विकसित होने लगता है।

समय से पहले पेट में तेज दर्द

यदि प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही या तीसरी तिमाही में पेट में तेजी से दर्द महसूस होता है तो यह समय से पहले बच्चे के जन्म होने का लक्षण होता है। दर्द होने के साथ महिला को प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी भी निकल सकता है।

एक साइड में दर्द होना

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान यदि पेट की एक साइड में ज्यादा दर्द होने की समस्या होती है तो इसका कारण महिला को होने वाली पथरी की समस्या होती है। ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए महिला को क्या करना चाहिए इसके लिए महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए।

रुक रुक कर पेट में तेज दर्द होना

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट में पहले धीरे फिर तेज उसके बाद फिर धीरे फिर तेज या असहनीय दर्द होने लगता है तो इसका मतलब यह होता है की महिला की डिलीवरी का समय पास है और महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में पेट में होने वाला दर्द कब माँ और और बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है उससे जुड़े टिप्स, ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की महिला के पेट में दर्द कब और कैसे हो रहा है। ताकि पेट में होने वाले दर्द के कारण महिला को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

गर्भ में शिशु की हलचल इन 5 गलतियों की वजह से कम हो जाती है?

गर्भावस्था के दौरान गर्भ में शिशु का किक मारना महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे खूबसूरत अनुभव होता है। और जब शुरुआत में शिशु हलचल करना शुरू करता है तो महिला उस वक्त का बेसब्री का इंतज़ार करती है की कब शिशु दोबारा हलचल करेगा। प्रेगनेंसी के अठारह से बाइसवें हफ्ते के बीच में शिशु की हलचल गर्भ में पहली बार महसूस हो सकती है। जो महिलाएं दूसरी बार माँ बन रही होती है वो आसानी से गर्भ में शिशु की हलचल को समझ जाती है।

लेकिन यदि महिला पहली बार माँ बन रही हो तो महिला को शिशु की हलचल को समझने में समय लग सकता है। शुरुआत में शिशु की हलचल महिला को कम महसूस होती है लेकिन जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे शिशु ज्यादा समय के लिए हलचल करता है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान यदि महिला कुछ गलतियां करती है तो इसके कारण गर्भ में शिशु की हलचल में कमी आ सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला द्वारा की जाने वाली ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि गर्भवती महिला पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ व् फिट रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में शिशु का विकास भी अच्छे से होता है और शिशु का सही हलचल करना इस बात को बताता है की गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो रहा है व् गर्भ में शिशु स्वस्थ है। लेकिन यदि महिला अपनी डाइट को सही तरीके से नहीं लेती है, पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेती है तो इसके कारण शिशु के विकास में कमी आती है। और जब शिशु का विकास अच्छे से नहीं होता है और गर्भ में शिशु कमजोर होता है तो महिला को शिशु की हलचल कम महसूस होती है।

संक्रमण के कारण

यदि गर्भवती महिला अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है और किसी कारण संक्रमण से ग्रसित हो जाती है। तो उस संक्रमण के वायरस शिशु तक भी पहुँच सकते हैं। जिसके कारण शिशु भी गर्भ में बीमार हो सकता है और शिशु के बीमार होने के कारण शिशु के विकास में कमी आती है साथ ही शिशु की हलचल में भी कमी आ सकती है। महिला को संक्रमण होने के कारण महिला का गलत खान पान, साफ़ सफाई का ध्यान न रखना, आदि हो सकते हैं।

पेट पर दबाव डालने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला ऐसा कोई भी काम करती है जिससे महिला के पेट पर दबाव पड़ता है जैसे की उल्टा होकर सोती है, पेट से सटकर काम करती है, आदि। तो इसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है जिसके कारण शिशु की हलचल या तो बहुत ज्यादा होने लगती है या फिर शिशु की हलचल कम हो जाती है।

नेगेटिव सोचने के कारण

गर्भावस्था के दौरान बच्चे का विकास पूरी तरह से माँ पर ही निर्भर करता है यह तो आप सभी जानते हैं। ऐसे में यदि गर्भवती महिला खुश रहती है तो गर्भ में शिशु भी एक्टिव रहता है लेकिन यदि महिला ही नेगेटिव सोचती रहती है और उदास रहती है साथ ही तनाव का शिकार हो जाती है। तो इसकी वजह से शिशु भी गर्भ में शिशु भी उदास रहता है साथ ही इसके कारण शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। और गर्भ में जब शिशु उदास रहता है तो इस कारण शिशु की हलचल में कमी आ सकती है।

गर्भनाल गले में लपेटने के कारण

गर्भ में कुछ शिशु की गर्दन गर्भनाल में लिपट जाती है जिसकी वजह से भी शिशु की हलचल में कमी आ सकती है। बच्चे के गर्भनाल लपेटने का कारण गर्भ में एक से ज्यादा शिशु का होना, शिशु का किसी कारण बहुत हलचल करना, एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा अधिक होना, आदि हो सकते हैं।

ध्यान रखें: प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपको लम्बे समय तक गर्भ में शिशु की हलचल महसूस नहीं हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। क्योंकि गर्भ में शिशु के हलचल न हो तो यह इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में शिशु ठीक नहीं है। ऐसे में किसी भी बुरे परिणाम से बचने के लिए जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें।

तो यह हैं गर्भ में शिशु की हलचल में कमी होने के कारण, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान अपना भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भ में शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेग्नेंट महिला को नज़र जल्दी क्यों लग जाती है?

माँ बनना महिला के लिए एक सुखद और खास अनुभव होता है और जब महिला माँ बनने वाली होती है। तो उससे जुड़े हर व्यक्ति की ख़ुशी दुगुनी हो जाती है क्योंकि अब उनके घर में एक नन्हा मेहमान आने वाला होता है। साथ ही जब महिला प्रेग्नेंट होती है तो महिला में एक अलग सा नूर दिखाई देने लगता है, महिला के चेहरे की चमक बढ़ जाती है, आदि।

इसके अलावा जैसे ही महिला से जुड़े लोगो को पता चलता है की महिला माँ बनने वाली है तो हर कोई महिला से मिलने आता है और उसे राय देने लगता है। और ऐसा प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही नहीं बल्कि बच्चे के जन्म तक और बच्चे के जन्म के बाद भी होता है। लेकिन कई बार महिला की तबियत यदि थोड़ी खराब हो जाती है, महिला सुस्त हो जाती है, या फिर महिला को पहले कम दिक्कत हो रही होती है और अचानक से ज्यादा होने लगती है, तो ऐसे में घर के बड़े बुर्जुग सोचते हैं की उन्हें नज़र लग गई है।

और ऐसा ही नहीं उसके बाद जब घरेलु नुस्खे इस्तेमाल करके नज़र उतरी जाती है तो महिला की नज़र उतर भी जाती है और महिला की तबियत थोड़ी ठीक होने लगती है। इसीलिए आपने देखा होगा की जैसे ही पता चलता है की महिला माँ बनने वाली है तो कई महिलाएं कला धागा पहन लेती है, चौराहे पर जाने से वहम करने लगती है, बाहर मीठे खाकर या इत्र लगाकर नहीं निकलती है, रात के समय बाहर नहीं जाती है, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही कारण बताने जा रहे हैं जिनकी वजह से महिला को नज़र लग सकती है।

महिला की खुद की नज़र लग जाती है

जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है वो बार बार अपने आप को निहारती रहती है और ऐसे में बाहर वालों से पहले महिला को खुद की ही नज़र लग जाती है। क्योंकि ऐसा माना जाता है की जब महिला अपने आप को ज्यादा देखती है और खुश होती रहती है तो महिला को अपनी ही नज़र लग जाती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने आप को देखना चाहिए लेकिन हमेशा ऐसे नहीं करना चाहिए।

जब कोई महिला को टोक देता है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बाहरी रूप से बहुत से बदलाव दिखाई देते हैं। जैसे की महिला स्किन ग्लो करने लगती है, बाल चमकदार हो जाते हैं, महिला ज्यादा खुश रहती है, महिला के पेट का आकार बढ़ जाता है, आदि। ऐसे में यदि महिला में आये इस बदलाव को लोग बार बार बोलते हैं और टोकते रहते हैं तो इस कारण महिला को नज़र लग जाती है। इसीलिए कहा जाता है की जब भी महिला के पास बाहर से कोई आता है तो महिला को ज्यादा नहीं बोलना चाहिए, पेट ढककर रखना चाहिए आदि।

चौराहे पर से जाने के कारण

ऐसा माना जाता है की गर्भवती महिला यदि चौराहा टाप जाती है तो इसकी वजह से भी महिला को बुरी नज़र लग सकती है। क्योंकि चौराहे पर बहुत से लोग टोना टोटका करते रहते हैं इसीलिए गर्भावस्था या वैसे भी हर किसी को चौराहा न तापने की सलाह दी जाती है।

किसी के सामने खाने के कारण

कुछ गर्भवती महिलाओं को बहुत भूख लगती है जिसके कारण महिला थोड़ी थोड़ी देर में कुछ खा सकती है ऐसे में यदि आप किसी के सामने कुछ खाती है। और आगे से वो आपको टोक देता है जैसे की कह देता है की हमे तो भूख नहीं लगती थी तुझे बहुत लगती है, ऐसे में महिला के खाने को टोक हो जाती है और महिला को नज़र लग जाती है। जिसके बाद ऐसा भी हो सकता है की महिला की खाने की इच्छा में कमी आ जाये।

मीठा खाकर बाहर जाने के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला को महिला को मीठा खाकर बाहर नहीं निकलना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है की मीठा खाकर बाहर निकलने से आपको नज़र लगने का खतरा ज्यादा हो जाता है।

सुगन्धित चीजों का इस्तेमाल करके बाहर निकलने की वजह से

ऐसा माना जाता है की प्रेग्नेंट महिला को सुगन्धित चीजों का इस्तेमाल करने के बाद घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि सुगन्धित चीजों की और बुरी शक्तियां जल्दी खींच जाती है जिसके कारण महिला को नज़र लग सकती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को नज़र लग सकती है। ऐसे में नज़र से बचाव के लिए महिला को इन गलतियों को करने से बचना चाहिए। इसके अलावा महिला को हफ्ते में दो बार अपनी नज़र जरूर उतार लेनी चाहिए या आपको नहीं आती तो घर में मौजूद बड़ो से उतरवा लेनी चाहिए।

Causes of evil eye during pregnancy

मुँह में छाले होने पर अपनाएं यह घरेलू नुस्खें

मुँह में छाले होने की समस्या बहुत आम होती है लेकिन इस समस्या के होने पर आपको काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि मुँह में छाले होने पर खाने पीने में दिक्कत होती है क्योंकि हर चीज खासकर मसाले वाली चीज जब छालों पर लगती है तो बहुत दर्द होता है। ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए कई लोग दवाई का इस्तेमाल करते हैं ।

जबकि कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से आप आसानी से इस समस्या से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे आसान तरीको के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे ट्राई करने से आपको मुँह में होने वाले छालों की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है।

देसी घी

मुँह में छाले होने पर देसी घी का इस्तेमाल करने से इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकती है। इसके लिए आप रात को सोने से पहले छालों पर देसी घी लगाएं और रात भर के लिए इसे ऐसे ही रहने दें। दो तीन दिन तक लगातार इस उपाय को करें आपको इसका फायदा जरूर मिलेगा।

एलोवेरा

एलोवेरा जैल को छालों पर लगाने से भी आपको इस समस्या से आराम पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दिन में एक या दो बार एलोवेरा जैल को छालों पर लगाएं।

पान का पत्ता

मुँह में होने वाले छालों की समस्या से आराम पाने के लिए आप पान के पत्ते में कत्था लगाकर इसे खाएं। इसे खाने से आपको इस समस्या से बहुत जल्दी आराम पाने में मदद मिलती है।

लहसुन

एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर लहसुन का इस्तेमाल करने से भी मुँह में होने वाले छालों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप लहसुन की दो चार कलियों को पीसकर उनका पेस्ट बनाएं उसके बाद उस पेस्ट को छालों पर लगाएं। छालों पर लगाने के पंद्रह से बीस मिनट बाद उस जगह को साफ़ कर लें। ऐसा करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलता है।

टी ट्री आयल

यदि आपके घर में टी ट्री आयल मौजूद हैं तो यह नुस्खा भी आपको इस समस्या से बहुत जल्दी आराम दिलाने में मदद करता है। इसके लिए आप दिन में दो तीन बार टी ट्री आयल मुँह में छालों पर लगाएं। और पंद्रह बीस मिनट बड़ा कुल्ला कर लें।

कच्चा दूध

दिन में दो से तीन बार कच्चे दूध से कुल्ला करें यह तरीका आसान होने के साथ बहुत ज्यादा फायदेमंद भी होता है और आपको बहुत जल्दी मुँह के छालों से आराम पहुंचाने में मदद करता है।

टूथ पेस्ट

टूथपेस्ट में एंटी-माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं जो आपके मुँह में छाले बनाने वाले इन्फेक्शन को मारने में मदद करते हैं। ऐसे में मुँह में होने वाले छालों की समस्या से निजात पाने के लिए आप टूथ पेस्ट को उस जगह पर लगाएं जहां छाले है। ऐसा दो तीन दिन दिन तक करें आपको इस समस्या से बहुत जल्दी आराम पाने में मदद मिलेगी।

टमाटर

जी हाँ, टमाटर का इस्तेमाल करने से भी छाले की समस्या को कम करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप टमाटर का रस निकाल लें उसके बाद आधी कटोरी रस को एक गिलास में डालें और बाकी पानी मिला लें। फिर उस पानी से कुल्ले करें इससे छालों को कम करने में मदद मिलती है।

भरपूर पानी पीएं

पेट में गर्मी होने के कारण भी छाले हो जाते हैं ऐसे में दिन भर में भरपूर पानी का सेवन करें इससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहेगा जिससे छालों की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

तुलसी के पत्ते

तुलसी में एंटी माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं ऐसे में तुलसी का इस्तेमाल करने से भी आपको छालों की समस्या से बहुत जल्दी आराम पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप तुलसी के के पत्तों को अच्छे से चबाइए फिर थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। ऐसा करने से आपको इस समस्या से आराम पाने में मदद मिलेगी।

नमक वाला पानी

गुनगुने पानी में नमक डालकर दिन में चार से पांच बार कुल्ला करें इससे मुँह में मौजूद बैड बैक्टेरिया को मारने में मदद मिलेगी जिससे मुँह में छालों की समस्या से भी बहुत जल्दी आराम मिलेगा।

संतरे का जूस

जिन लोगो के शरीर में विटामिन सी की कमी होती है उन लोगो को छालों की समस्या अधिक हो सकती है। ऐसे में संतरे का जूस पीने से उनकों फायदा मिल सकता है क्योंकि संतरे के जूस में विटामिन सी होता है जिससे छालों की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

सेब का सिरका

सेब के सिरके में थोड़ा पानी मिलाएं और उससे कुल्ला करें इससे मुँह में मौजूद बैड बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है। जिसेस छालों की समस्या से भी जल्द से जल्द आराम आता है।

शहद

शहद में एंटीबैक्टीरियल गुण होते है, जो मुंह के छालों को ठीक करने में बहुत असरदार है। शहद का इस्तेमाल करने से मुंह के छालों को नमी मिलती है और उसे सूखने से बचाने में मदद मिलती है। अगर आप शहद के साथ एक चुटकी हल्दी डालकर लगाएंगे तो ये उपाय और भी असरदार होता है। जल्दी आराम पाने के लिए दिन में तीन से चार बार यह उपाय कीजिए आपको फायदा मिलेगा।‌

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से मुँह में होने वाले छालों की समस्या से आसानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। साथ ही ध्यान रखें की एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन से चार बार इन उपाय को करेंगे तो आपको जल्दी फायदा मिलेगा।’

Home remedies for mouth ulcers

लम्बे समय के बाद हुआ है गर्भधारण? तो यह गलतियां नहीं करें

माँ बनना महिला के लिए बहुत ही सुखद व् बेहतरीन अहसास होता है। लेकिन कई बार महिला को गर्भधारण करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और प्रेगनेंसी नहीं होने का कारण महिला की बढ़ती उम्र, महिला का बढ़ा हुआ वजन, शारीरिक बिमारी, सम्बन्ध बनाने में की जाने वाली गलतियां, पुरुष से जुडी समस्या आदि हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की इन समस्याओं के कारण महिला का गर्भ कभी नहीं ठहरता है। बल्कि यदि महिला अपना इलाज करती है सही ट्रीटमेंट लेती है तो महिला का गर्भ ठहर जाता है।

ऐसे में जब महिला का गर्भ बहुत मुश्किल से ठहरा हो तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला कोई गलती करती है तो इसके कारण महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है यहां तक की महिला का गर्भ भी गिर सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम महिला को लम्बे समय के बाद गर्भधारण होने पर कौन कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए। उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

उन चीजों को नहीं खाएं जिनसे गर्भपात का खतरा हो

यदि बहुत कोशिशों के बाद महिला का गर्भाधारण हुआ है तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे शिशु के विकास को खतरा हो या फिर महिला के गर्भपात का खतरा हो। जैसे की महिला को कच्चा पपीता, गर्म तासीर वाली चीजें, डिब्बाबंद आहार, ज्यादा तली भुनी चीजें, जंक फ़ूड, बिना धुले फल व् सब्जियां, बिना ढके कटे पड़े फल, बासी व् ठंडा खाना, अधपका खाना आदि नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा महिला को डाइट भी नहीं करनी चाहिए यानी की भूखा नहीं रहना चाहिए।

जांच में लापरवाही नहीं करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला अपनी जांच समय से करवाएं, टीकाकरण समय से करवाए, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का समय से सेवन करें। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिर तक कोई लापरवाही नहीं करें

यदि महिला का गर्भधारण बहुत मुश्किल से हुआ है तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जैसे की महिला को भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, यात्रा नहीं करनी चाहिए, ज्यादा तेजी से नहीं चलना चाहिए, भागदौड़ अधिक नहीं करनी चाहिए, ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए, सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए, पेट के भार नहीं सोना चाहिए, घर के काम करने में कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए, जरुरत से ज्यादा काम नहीं करना चाहिए, आदि। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दिक्कत होने के खतरा को कम करने में मदद मिलती है।

तनाव से दूर रहे

गर्भावस्था के दौरान शारीरिक के साथ महिला का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी जरुरी होता है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला सकारात्मक सोचें पॉजिटिव रहे और बिल्कुल भी तनाव नहीं लें। साथ ही महिला को जितना हो सके खुश रहना चाहिए क्योंकि महिला जितना खुश रहती है उतना ही माँ व् बच्चे दोनों के लिए अच्छा होता है। साथ ही तनाव से बचे रहने के लिए महिला चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान मैडिटेशन का सहारा ले सकती है।

नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला नशीले पदार्थों जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन बिल्कुल नहीं करें। क्योंकि इसकी वजह से बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है साथ ही गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी होने जैसी समस्या का खतरा भी होता है। इसके अलावा महिला को कैफीन युक्त चीजें जैसे की चाय, कॉफ़ी का सेवन भी अधिक नहीं करना चाहिए।

बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी तरह की दवाई का सेवन नहीं करें

गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला बिना डॉक्टर से पूछें किसी भी तरह की दवाई का सेवन नहीं करें। क्योंकि ऐसा करने से इन दवाइयों का बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है जिसकी वजह से बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आने का खतरा होता है।

पेट पर दबाव नहीं पड़ने दें

गर्भवती महिला और शिशु को दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की महिला पेट पर दबाव नहीं पड़ने दें। क्योंकि इसके कारण महिला को पेट में दर्द जैसी समस्या अधिक होने के साथ गर्भ में शिशु को भी असहज महसूस होता है। और इसके लिए महिला को पेट के भार सोना नहीं चाहिए, पेट को किसी चीज के साथ सटाकर काम नहीं करना चाहिए, झुककर काम नहीं करना चाहिए, आदि।

किसी भी समस्या के होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला को किसी भी परेशानी के अधिक होने पर उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि आप किसी दिक्कत के अधिक होने पर उसे अनदेखा करती है। तो इसके कारण आपकी परेशानी बढ़ सकती है। और इसका परिणाम बुरा भी हो सकता है ऐसे में आपको इस परेशानी से बचे रहने के लिए किसी भी दिक्कत के बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

जरुरत से ज्यादा व्यायाम नहीं करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम जरूर करना चाहिए लेकिन यदि महिला को लम्बे समय बाद प्रेगनेंसी हुई है, पहले गर्भपात हो चूका है, प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स है, ब्लीडिंग की समस्या है, आदि तो प्रेगनेंसी महिला को व्यायाम नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे में व्यायाम करने से आपकी और शिशु की दिक्कतें बढ़ सकती है। इसके अलावा कौन सा व्यायाम करना प्रेगनेंसी के दौरान सेफ होता है इसके लिए महिला को एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

पेट या पीठ के बल नहीं सोयें

गर्भावस्था के दौरान भरपूर नींद लेने के साथ सोने की सही पोजीशन का ध्यान रखना भी जरुरी होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को पेट या पीठ के बल बिल्कुल भी नहीं सोना चाहिए। हाँ, महिला चाहे तो करवट लेकर, स्लीपिंग पिल्लो का इस्तेमाल करके सो सकती है। इसके अलावा गर्भवती महिला के लिए बाईं और करवट लेकर सोना सबसे बेहतरीन पोजीशन होती है।

पहनावें का ध्यान रखें

प्रेग्नेंट महिला इस बात का ध्यान रखें की महिला ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहने और ऊँची एड़ी के सैंडल या चप्पल न पहने। क्योंकि इसके कारण भी माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं वो गलतियां जो महिला को लम्बे समय के बाद गर्भधारण होने के बाद नहीं करनी चाहिए। ऐसे में यदि महिला इन छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखती है तो माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ व् हष्ट पुष्ट रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के कितने महीने तक सम्बन्ध बनाना चाहिए?

शारीरिक सम्बन्ध बनाना शादीशुदा कपल के रिश्ते को और भी मजबूत करता है। क्योंकि सम्बन्ध बनाते समय कपल केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी एक दूसरे के करीब आता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से कपल सम्बन्ध बनाने को लेकर डरते हैं और सम्बन्ध बनाने को लेकर उनके मन में सवाल चल रहे होते हैं।

ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को सभी खान पान, रहन सहन आदि के बारे में बहुत सी सलाह देते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना सेफ है या नहीं उसके बारे में कम हो लोग बता पाते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने को लेकर बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान कब सम्बन्ध बनाना चाहिए?

वैसे देखा जाये तो यदि महिला की प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है महिला और शिशु दोनों स्वस्थ है तो महिला प्रेगनेंसी के दौरान कभी भी सम्बन्ध बना सकती है। लेकिन ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को ज्यादा मुश्किलें होती हैं साथ ही इस दौरान गर्भपात का खतरा भी अधिक होता है। ऐसे में यदि सम्बन्ध बनाने के दौरान कोई गलती हो जाये तो इससे महिला को दिक्कत हो सकती है।

इसीलिए पहली तिमाही में सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में सम्बन्ध बनाना बिल्कुल सेफ होता है साथ ही प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में भी सम्बन्ध बनाया जा सकता है। लेकिन उस दौरान महिला का पेट बाहर की तरफ ज्यादा निकला हुआ होता है ऐसे में सम्बन्ध बनाते समय महिला और पुरुष दोनों को ध्यान रखना चाहिए की किसी भी तरह की लापरवाही नहीं हो। साथ ही यदि महिला को किसी तरह की दिक्कत है तो सम्बन्ध बनाने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर पूछें।

गर्भावस्था के दौरान सम्बन्ध बनाते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • प्रेग्नेंट महिला को यदि प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स हैं तो महिला को बिल्कुल भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाते समय इस बता का ध्यान रखें की महिला पूरी तरह से तैयार हो।
  • प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते समय किसी भी तरह का न्य एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहिए।
  • पुरुष को सम्बन्ध बनाते हुए इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला के पेट पर बिल्कुल भी दबाव नहीं पड़े।
  • सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखें बिल्कुल भी तेजी नहीं करें और जोश में होश नहीं खोएं।
  • साफ सफाई का ध्यान महिला और पुरुष दोनों को रखना चाहिए।
  • यदि महिला या पुरुष दोनों में से किसी को भी इन्फेक्शन है तो महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए।

क्या सम्बन्ध बनाने से शिशु को कोई नुकसान होता है?

जी नहीं, सम्बन्ध बनाने से गर्भ में पल रहे शिशु को कोई भी नुकसान नहीं होता है क्योंकि गर्भाशय में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में होता है। जो गर्भ में शिशु को सुरक्षित रखने व् शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है। ऐसे में यदि आप यह सोचकर सम्बन्ध नहीं बनाते हाँ की शिशु को कोई नुकसान होगा तो ऐसा बिल्कुल नहीं सोचें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से जुड़े टिप्स, ऐसे में यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने को लेकर डर रहे हैं तो डरें नहीं। क्योंकि इस दौरान कुछ महिलाओं की सम्बन्ध बनाने की इच्छा बढ़ जाती है साथ ही सम्बन्ध बनाने से महिला को मानसिक रूप से रिलेक्स रहने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाते समय इन बातों का जरूर ध्यान रखें

गर्भावस्था के दौरान सम्बन्ध बनाने की अफवाह से डरने की बजाय लोगो को इसे समझने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए, ऐसा मानना बिल्कुल गलत बात है। और लोगो के पास इससे जुडी जानकारी न होने के कारण कपल प्रेगनेंसी में एक दूसरे के करीब आने से भी डरते हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से जुड़े टिप्स बताने जा रहे हैं लेकिन उससे पहले इस सवाल का जवाब जानते हैं की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बना सकते हैं या नहीं?

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाएं या नहीं?

यदि आप माँ बनने वाली है और आपकी प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है तो प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना बिल्कुल सेफ होता है। लेकिन सम्बन्ध बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है ताकि आपकी पार्टनर और आपके होने वाले बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। तो आइये अब आगे विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते समय किन बातों का रखना चाहिए और प्रेगनेंसी में कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

गर्भावस्था में सम्बन्ध बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें

प्रेग्नेंट महिला यदि सम्बन्ध बना रही है तो महिला और उनके पार्टनर को बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गर्भावस्था की पहली तिमाही

ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कपल को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाते समय थोड़ी सी भी चूक हो जाये तो इसकी वजह से मिसकैरिज का खतरा हो सकता है।

साफ़ सफाई का ध्यान

गर्भावस्था के दौरान सम्बन्ध बनाते समय साफ़ सफाई का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि साफ़ सफाई का ध्यान न रखा जाये तो इससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।

सुरक्षा का इस्तेमाल

प्रेगनेंसी के दौरान कपल को सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। ताकि किसी भी तरह के संक्रमण खासकर यौन संक्रमण के खतरे माँ और बच्चे को सुरक्षित रहने में मदद मिल सके।

थोड़ा धैर्य रखें

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सम्बन्ध बनाने में पुरुष को तेजी नहीं करनी चाहिए और थोड़ा धैर्य रखना चाहिए ताकि दोनों ही इस पल का आनंद उठा सके और महिला को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो। साथ ही यदि महिला का यदि सम्बन्ध बनाने का मन नहीं है तो महिला के साथ किसी तरह की जबरदस्ती भी नहीं करें।

पोजीशन है जरुरी

प्रेगनेंसी के दौरान इस बात का ध्यान रखें की सम्बन्ध बनाने में कोई नया एक्सपेरिमेंट नहीं करें। और केवल उन्ही पोजीशन में सम्बन्ध बनाएं जिन में महिला को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

महिला के पेट पर दबाव नहीं पड़ने दें

सम्बन्ध बनाते समय इस बात का ध्यान रखें की महिला के पेट पर बिल्कुल भी दबाव नहीं पड़े। क्योंकि पेट पर दबाव पड़ने की वजह से गर्भ में शिशु को असहज महसूस हो सकता है।

किन गर्भवती महिलाओं को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए

  • यदि महिला की प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स हैं।
  • जिन महिलाओं का इस प्रेगनेंसी से पहले एक या दो बार मिसकैरिज हुआ है उन्हें भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • जिन महिलाओं का गर्भाशय कमजोर होता है उन्हें भी सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए और यह आपको डॉक्टर द्वारा पहले ही बता दिया जाता है।
  • यदि आपके गर्भ में जुड़वां या उससे ज्यादा बच्चे हैं तो भी प्रेगनेंसी में सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • पुरुष या महिला के प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हो तो भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • कुछ महिलाओं को ब्लीडिंग, एमनियोटिक फ्लूड लीक होने जैसी समस्या हो जाती है उन महिलाओं को भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • यदि आपका बच्चे नीचे की तरफ है तो भी आपको सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने को लेकर घबरा रहे हैं या आपके मन में कुछ सवाल चल रहे हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद है।

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला रात को नहीं खाएं यह चीजें?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी बहुत सी आदतों में बदलाव लाने की जरुरत होती है। क्योंकि यह बदलाव माँ व् बच्चे दोनों के लिए अच्छे होते हैं। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बदलते मौसम के साथ अपने रहन सहन में भी बदलाव करना जरुरी होता है। ताकि बदलते मौसम के साथ माँ और बच्चे दोनों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो।

खासकर सर्दियों के मौसम में महिला को अपने थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है क्योंकि इस मौसम में ठण्ड के कारण आपको सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का ज्यादा खतरा होता है। ऐसे में महिला को अपने पहनावें का ध्यान रखने के साथ खान पान का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों के मौसम में रात के समय क्या-क्या नहीं खाना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

दही

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला को रात के समय दही का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि दही की तासीर ठंडी होती है। ऐसे में दही का सेवन करने के कारण जुखाम, खांसी, गले में इन्फेक्शन जैसी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

चाय और कॉफी

सर्दी के मौसम में रात के समय महिला को चाय कॉफ़ी पीने की इच्छा अधिक हो सकती है। लेकिन महिला को अपनी इस इच्छा पर कण्ट्रोल करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला को अनिंद्रा की समस्या हो सकती है साथ ही शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ने के कारण बच्चे के विकास में बाधा आ सकती है। इसके अलावा महिला को बेचैनी घबराहट जैसी समस्या भी हो सकती है।

मीठा

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं की मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है ऐसे में महिला सिमित मात्रा में मीठी चीजों का सेवन कर सकती है। लेकिन दिन भर में मीठी चीजों का सेवन करने के साथ रात को सोते समय महिला को मीठे का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि ज्यादा मीठे का सेवन करने से ब्लड में शुगर लेवल बढ़ सकता है जिसकी वजह से महिला को जेस्टेशनल शुगर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

ज्यादा तला भुना आहार

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम करती है ऐसे में महिला को फाइबर युक्त डाइट लेने, सही समय पर अपना भोजन खाने की सलाह दी जाती है। और सर्दी के मौसम में महिला की तला भुना खाने की इच्छा बढ़ सकती है लेकिन महिला को रात के समय ज्यादा तले भुने आहार का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसे आहार को पचा पाना महिला के लिए मुश्किल होता है जिसकी वजह से रातभर महिला को गैस. अपचा जैसी समस्या हो जाती है।

ठंडी चीजें

ठंडी चीजों का सेवन भी गर्भवती महिला को रात के समय नहीं करना चाहिए क्योंकि इनका सेवन करने के कारण महिला को ठण्ड के कारण होने वाली परेशानियां हो सकती है। जैसे की महिला को आइस क्रीम, ठन्डे फल, फ्रिज से निकली चीजें, ठंडा पानी आदि नहीं खाना या पीना चाहिए।

तो यह हैं वो खाद्य पदार्थ जिनका सेवन गर्भवती महिला को सर्दियों के मौसम में रात को करने से बचना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने के कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा सर्दी के मौसम में होने वाली परेशानियों से बचे रहने के लिए महिला को अपना और ज्यादा ख्याल रखना चाहिए।