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ककड़ी का सेवन करना प्रेगनेंसी में कितना फायदेमंद है जानिए

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए सलाद का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। और सलाद के रूप में प्रेग्नेंट महिला खीरा, टमाटर, प्याज़, गाजर, ककड़ी आदि का सेवन कर सकती है। क्योंकि यह सभी सब्जियां प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होती है। तो इस आर्टिकल में हम आपसे ककड़ी का सेवन करने से गर्भवती महिला को कौन से फायदे मिलते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं। लेकिन ककड़ी का सेवन करते समय गर्भवती महिला को एक बात का ध्यान रखना चाहिए की ककड़ी कड़वी न हो। तो आइये अब जानते हैं ककड़ी के फायदों के बारे में:

कैलोरी होती है कम

वैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ना अच्छी बात होती है लेकिन यदि गर्भवती महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ता है। तो यह प्रेग्नेंट महिला के लिए सही नहीं होता है, ऐसे में ककड़ी का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि ककड़ी में कैलोरी कम होती है जो गर्भवती महिला के वजन को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

पानी की कमी नहीं होती है

प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में ककड़ी का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि ककड़ी में पानी की मात्रा मौजूद होती है जो गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करती है।

कब्ज़ से मिलती है राहत

प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया के कमजोर होने के कारण गर्भवती महिला को कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानियों का सामना अधिक कर सकती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला ककड़ी का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। क्योंकि ककड़ी में फाइबर मौजूद होता है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और कब्ज़ एसिडिटी जैसी समस्या से गर्भवती महिला को बचाने में मदद करता है।

इम्युनिटी बढ़ाता है

ककड़ी एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है जो इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करती है। और प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में ककड़ी का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिल सके।

शुगर से करता है बचाव

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को गेस्टेशनल शुगर होने का खतरा रहता है, लेकिन ककड़ी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि ककड़ी का सेवन करने से ब्लड में शुगर के लेवल को सामान्य रखने में मदद मिलती है।

विटामिन बी

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव, मूड स्विंग्स की वजह से परेशान होती है। जिसके कारण महिला हमेशा गुस्से, चिड़चिड़ाहट, आलस आदि से भरी रहती है साथ ही तनाव के कारण तो महिला अकेले रहने लगती है और किसी से बात करना भी पसंद नहीं करती है। जो की प्रेगनेंसी के दौरान हानिकारक हो सकता है लेकिन ककड़ी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इस समस्या से निजात मिल सकता है क्योंकि ककड़ी में विटामिन बी मौजूद होता है। जो की महिला के मूड को बेहतर करने, तनाव को दूर करने और महिला को खुश रहने में मदद करता है।

विटामिन के

ककड़ी में विटामिन के की मात्रा भी मौजूद होती है जो की हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि ककड़ी का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला की हड्डियां मजबूत होती है जिससे महिला को थकान व् कमजोरी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

हाई ब्लड प्रैशर से होता है बचाव

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर हाई होने की समस्या होने का खतरा भी रहता है जिससे माँ व् बच्चे दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ककड़ी का सेवन करने से इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि ककड़ी में मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। साथ ही ककड़ी का सेवन करने से हदय को स्वस्थ रहने व् कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल में रहने में मदद मिलती है।

बच्चे का विकास होता है बेहतर

ककड़ी में विटामिन सी, विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन बी3, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन व् अन्य पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भ में बच्चे का विकास बेहतर करने के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को ककड़ी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान ककड़ी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को मिलते हैं। ऐसे में इन बेहतरीन फायदों के लिए गर्भवती महिला को ककड़ी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। लेकिन जरुरत से ज्यादा भी ककड़ी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नुकसान पहुंचा सकता है।

च्यवनप्राश खाना प्रेगनेंसी में फायदेमंद है या नुकसानदायक

च्यवनप्राश शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक होता है क्योंकि इसमें बहुत सी जड़ी बूटियां मौजूद होती है। च्यवनप्राश का सेवन करने से बीमारियों से सुरक्षित रहने के साथ सर्दी के मौसम में ठण्ड से बचाव होने में भी मदद मिलती है। और ज्यादातर लोग च्यवनप्राश का सेवन सर्दी के मौसम में ही करते हैं। लेकिन बहुत सी गर्भवती महिलाएं भी इस बारे में जानना चाहती है की क्या प्रेगनेंसी के दौरान च्यवनप्राश का सेवन किया जा सकता है? प्रेगनेंसी में हर एक चीज के सेवन से पहले गर्भवती महिला को उसके बारे में पूरी जानकारी होना जरुरी होता है, क्योंकि महिला जो भी अपने आहार में लेती है उसका असर केवल महिला पर ही नहीं पड़ता है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी उससे प्रभावित होता है। ऐसे में हर परेशानी से बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला को कुछ भी खाने पीने से पहले उसके बारे में जानना जरुरी होता है।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान च्यवनप्राश का सेवन किया जा सकता है?

गर्भवती महिला को च्यवनप्राश का सेवन करने से पहले प्रेगनेंसी का कौन सा महीना चल रहा है इसका ध्यान रखना जरुरी होता है। क्योंकि च्यवनप्राश जड़ी बूटियों से मिलकर बना होता है और इसकी तासीर भी गर्म होती है, ऐसे में प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में इसका सेवन जहां महिला की दिक्कतें बढ़ा सकता है। वहीँ प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में भी इसका सेवन अधिक नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भाशय में संकुचन का खतरा रहता है। अब आप ये सोच रहे होंगे फिर इसका सेवन कब करना है। च्यवनप्राश का सेवन गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही और तीसरी तिमाही में कर सकती है।

लेकिन इसके सेवन के कारण महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को इसकी सही मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। गर्भवती महिला को एक दिन में गर्मियों में आधा और यदि ठण्ड का मौसम है तो एक चम्मच से ज्यादा च्यवनप्राश का सेवन नहीं करना चाहिए। और यदि महिला को ब्लीडिंग जैसी समस्या है तो महिला को च्यवनप्राश का सेवन भी नहीं करना चाहिए। जितना हो सके महिला को सुबह के समय ही च्यवनप्राश का सेवन करना चाहिए ताकि इसका फायदा अच्छे से शरीर को मिल सके। इसके अलावा आप अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बार डॉक्टर से भी इसके बारे में राय ले सकती है।

प्रेगनेंसी में च्यवनप्राश खाने के फायदे

सही मात्रा में और सही समय पर यदि प्रेग्नेंट महिला च्यवनप्राश का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान च्यवनप्राश खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान एनीमिया की समस्या से ग्रसित हो सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला की दिक्कतों को बढ़ने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। साथ ही शरीर में खून की कमी होने के कारण समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या का खतरा भी रहता है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए च्यवनप्राश का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि च्यवनप्राश में आयरन की मात्रा मौजूद होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को सामान्य बनाएं रखने में मदद करती है।

विटामिन सी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को विटामिन सी युक्त आहार को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है क्योंकि गर्भवती महिला के लिए विटामिन सी बहुत फायदेमंद होता है। विटामिन सी गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु को स्वस्थ रखने के साथ बॉडी में आयरन की मात्रा को अवशोषित करने में भी मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ भ्रूण के विकास को बेहतर जैसे की शिशु की हड्डियों को मजबूत होने में मदद मिलती है। और च्यवनप्राश विटामिन सी का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला च्यवनप्राश का सेवन कर सकती है।

इम्युनिटी

च्यवनप्राश में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने में मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

सर्दियों में है फायदेमंद

यदि आपकी दूसरी या तीसरी तिमाही चल रही है और सर्दियों का मौसम है तो गर्भवती महिला के लिए च्यवनप्राश का सेवन बहुत फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि सर्दियों में ठण्ड के कारण होने वाली परेशानियां जैसे की सर्दी, खांसी, जुखाम, इन्फेक्शन जैसी परेशानियों से बचाव के लिए च्यवनप्राश का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

डिलीवरी

च्यवनप्राश का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ एक्टिव रहने में भी मदद मिलती है, जिससे प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को च्यवनप्राश का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में च्यवनप्राश का सेवन करने से गर्भवती महिला को किसी भी तरह का नुकसान न हो इससे बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को जरुरत के अनुसार ही च्यवनप्राश का सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सही देखरेख कैसे करें

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प्रेगनेंसी के दौरान जहां महिला का मन नए सपनो का संजोने और उम्मीदों से भर जाता है, वहीँ उसके मन में एक डर भी होता है। और यह डर गर्भवती महिला को अपने लिए नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे नवजात के लिए होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी वो समय होता है जहां महिला को अपनी दुगुनी केयर और दुगुनी सावधानी बरतनी पड़ती है। और शुरुआत में तो तो यदि महिला लापरवाही करती है तो यह गर्भपात का कारण भी बन सकती है। इसीलिए तो कहा जाता है की माँ बनना भी महिला के लिए ख़ुशी होने के साथ किसी जुंग से कम नहीं होता है।

खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनने का अनुभव लेती है उनके लिए यह समय थोड़ा ज्यादा परेशानी वाला होता है। क्योंकि शारीरिक बदलाव, और हार्मोनल बदलाव के कारण महिला थोड़ा ज्यादा परेशान होती हैं, जबकि दूसरी बार माँ बनने वाली महिला को इस बारे में पता होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए सबसे जरुरी होता है की महिला अपनी अच्छे से देखरेख करे, खान पान से लेकर अपने उठने बैठने तक का ख्याल रखे। तो आइये आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी देखरेख कैसे करनी चाहिए।

खान -पान का ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के अपने खान पान का ध्यान रखना सबसे जरुरी होता है, क्योंकि इससे ही महिला को सभी जरुरी पोषक तत्व मिलते हैं। जो न केवल महिला की फिटनेस के लिए जरुरी होते हैं बल्कि शिशु का विकास करने में भी बहुत अहम होते हैं। और इसके लिए महिला को हरी सब्जियों, फलों, नट्स, सलाद, स्नैक्स, दालें, अंडे आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। और इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की सब्जियां व् फल मौसमी होने के साथ अच्छे से धुले हुए हो, और ताजा बना हुआ हो, साथ ही जंक फ़ूड और बाहर के खाने से परहेज करना चाहिए।

आयरन भरपूर लें

आयरन की कमी के कारण महिला के स्वास्थ्य के साथ शिशु के विकास पर भी असर पड़ता है। ऐसे में गर्भवती महिला को फोलिक एसिड का सेवन प्रेगनेंसी के तीन महीने पहले से ही कर देना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान भी नॉन वेज, गाजर, टमाटर, चुकंदर, अनार आदि आयरन युक्त चीजों का भरपूर सेवन करना चाहिए।

पेय पदार्थ

प्रेगनेंसी में एनर्जी से भरपूर रहने के लिए और बॉडी को हाइड्रेट रखने के लिए पानी का सेवन महिला को भरपूर करना चाहिए। साथ ही जूस, नारियल पानी आदि भी भरपूर पीना चाहिए इससे पोषक तत्व भी बॉडी को मिलते हैं। और यदि आप पानी का सेवन भरपूर नहीं करती हैं तो इसके कारण गर्भ में शिशु को भी परेशानी हो सकती है।

थोड़ा व्यायाम भी है जरुरी

रक्त का प्रवाह बेहतर हो, और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने के लिए थोड़ा व्यायाम भी जरूर करना चाहिए। इसके लिए आप किसी जिम ट्रेनर से भी राय ले सकती है। नहीं तो सुबह शाम थोड़ी देर वॉक, योगासन आदि करना चाहिए। लेकिन यदि आपको डॉक्टर ने आराम बोलै है तो एक बार डॉक्टर से राय भी लेनी चाहिए।

तनाव न लें

यदि आप चाहते है की प्रेगनेंसी के दौरान आपको या शिशु को कोई समस्या न हो तो इसके लिए आपको तनाव से भी दूरी रखनी चाहिए। और खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए, परिवार के साथ समय बिताना चाहिए, आप कैसा महसूस कर रही है इन बातों को अपने पार्टनर से शेयर करना चाहिए, और अकेले नहीं रहना चाहिए, ऐसा करने से आपको तनाव से बचने में मदद मिलती है।

नींद

स्वस्थ रहने के लिए गर्भावस्था के दौरान भरपूर नींद लेना भी बहुत जरुरी होता है, कई बार इस दौरान अनिंद्रा की समस्या भी हो जाती है। लेकिन आपको पूरी नींद लेनी चाहिए, यदि आपकी रात को नींद पूरी नहीं होती है तो दिन में थोड़ा सोना चाहिए। इससे आपको फ्रेश महसूस होता है।

इनसे रखे दूरी

जल्दी जल्दी काम करना, भागदौड़ करना, पेट पर जोर डालना, यात्रा करना, सीढिया चढ़ना, उल्टा होकर सोना, खाने में ज्यादा गैप रखना, प्रदूषण वाली जगह पर जाना,गलत तेज आवाज़ में रहना, गलत बातों को सोचना आदि। ऐसा कोई भी काम प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण शिशु पर बुरा असर पड़ता है और आपको भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

टीकाकरण

प्रेगनेंसी के दौरान जो भी जरुरी टीके महिला को लगने होते हैं उन्हें नहीं छोड़ना चाहिए और उनके समय से लगवाना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली किसी भी तरह की परेशानी से बचाव करने में आपको मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जो आपकी प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करते हैं, और आपको फिट रखने में मदद करते हैं। इसके साथ आपको अपनी नियमित जांच भी करवाते रहना चाहिए और यदि कोई भी परेशानी हो तो उसे इग्नोर न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में डिप्रेशन हो तो क्या नुकसान हो सकते हैं

प्रेगनेंसी में डिप्रेशन हो तो क्या नुकसान हो सकते हैं, गर्भावस्था में तनाव के नुकसान, गर्भवती महिला को तनाव लेने के नुकसान, Harmful effect of depression during Pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खुश रहने और किसी भी तरह का मानसिक तनाव लेने के लिए मना किया जाता है। क्योंकि यह गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक होता है। इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु की मानसिक क्षमता पर भी असर पड़ता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे लगातार हार्मोनल बदलाव शारीरिक बदलाव के कारण कुछ महिलाएं तनाव की शिकार भी हो सकती है। ऐसे में तनाव से निजात पाने वाली दवाइयों का सेवन भी शिशु पर बुरा असर डालता है। इसीलिए ऐसा कुछ महसूस होने पर ही आपको तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में तनाव लेने के क्या नुकसान हो सकते हैं।

गर्भपात का डर

गर्भावस्था के शुरूआती महीने में यदि महिला तनाव में रहती है, तो इसके कारण महिला को गर्भपात जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

शिशु का शारीरिक विकास बेहतर न होना

तनाव के कारण शिशु का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से नहीं हो पाता है जिसके कारण जन्म लेने बाद शिशु का वजन बहुत कम होता है। और कमजोर होने के कारण शिशु को और भी ज्यादा देखभाल की जरुरत पड़ती है।

ऑटिज़्म बिमारी

जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव से राहत पाने वाली दवाइयों का सेवन करती है अक्सर उनके द्वारा जन्म दिए शिशु में देखा जाता है, की उनकी निर्णय लेने की क्षमता दूसरे बच्चों से कम होती है। यानी वो मानसिक रूप से थोड़ा स्लो होते हैं।

समय से पहले प्रसव

स्वस्थ गर्भावस्था के दौरान शिशु पूरे समय के बाद ही जन्म लेता है, लेकिन यदि आप तनाव की शिकार है तो आप समय से पहले प्रसव का दर्द हो सकता है। और शिशु का जन्म भी समय से पहले ही हो जाता है।

सिजेरियन डिलीवरी

सिजेरियन डिलीवरी होने का एक कारण महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाला तनाव हो सकता है। ऐसे में नार्मल डिलीवरी के लिए आपको प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह का तनाव नहीं लेना चाहिए।

शिशु से लगाव न होना

कई महिलाओं पर तनाव का कितना बुरा असर पड़ता हैं की वो अपने शिशु से जुड़ नहीं पाती है, जिसके कारण उनका लगाव भी शिशु से नहीं होता है। साथ ही यदि तनाव अधिक होता है तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला गलत लत यानी धूम्रपान, शराब आदि की शिकार भी हो जाती है।

प्रेगनेंसी में तनाव से बचने के कुछ टिप्स

  • अपने आप को व्यस्त रखें, और दूसरों की काम में मदद लें, ताकि आपको काम में भी आनंद आए और आप उसे भी एन्जॉय कर सकें।
  • योगासन या थोड़ी देर वॉक जरूर करें इससे आपको शांति मिलेगी साथ ही आपकी बॉडी भी फिट रहेगी।
  • अकेले न रहे अपने परिवार के साथ अपने पार्टनर के साथ समय बिताएं।
  • अपने शरीर में होने वाले बदलान, अनुभव, परेशानियों को छुपाएं नहीं बल्कि उन्हें शेयर करें।
  • संगीत सुने, किताबे पड़े, धार्मिक ग्रन्थ पढ़ें, इससे भी आपको अच्छा महसूस होता है।
  • किसी भी बता को लेकर दिमाग पर जोर न डाले।
  • कोई भी दिक्कत होने पर डॉक्टर से राय जरूर लें।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो आपको प्रेगनेंसी के दौरान तनाव लेने से होते हैं। इसीलिए यदि आप चाहती है की आपकी प्रेगनेंसी में कोई समस्या न हो और गर्भ में पल रहे शिशु का भी बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास हो तो इसके लिए आपको जितना हो सके प्रेगनेंसी में खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए और प्रेगनेंसी के दौरान नए नए होने वाले अनुभव को एन्जॉय करना चाहिए।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भवती महिला अगर तनाव लेती हैं तो शिशु पर इसका बुरा असर पड़ सकता है?

एलोवेरा से बनाएं फेस पैक और पाएं निखरी त्वचा

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अपनी त्वचा को चमकने और उसमे ग्लो बनाए रखने के लिए आप न जाने कितने प्रयास करती है, महंगी कास्मेटिक का इस्तेमाल करती है। जबकि हमारे घर में ही ऐसी बहुत सी चीजें मौजूद है जिनकी मदद से अपनी खूबसूरती को बढ़ाया भी जा सकता है और बरकरार भी रखा जा सकता है। जी हां, हम बात कर रहे है घरेलू उपायों की। खूबसूरती को बढ़ने के लिए शहद, हल्दी, बेसन, मसूर दाल, दालचीनी, दूध आदि का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसके अलावा एक और प्राकृतिक देन जिसकी मदद से त्वचा संबंधी बहुत सी समस्यायों को दूर किया जा सकता है। और वो है एलोवेरा!

एलोवेरा एक तरह का छोटा पैदा होता है जिसके जेल अर्थात गूदे से त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को दूर किया जाता है। पहले के समय में सभी इसके फायदों से अवगत थे लेकिन आजकल के समय में बहुत कम इसके महत्त्व हो समझते है। आपको यह जानकर हैरानी होगी की आपके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाले कॉस्मेटिक के 50 % में एलोवेरा का इस्तेमाल मुख्य इंग्रेडिएंट के रूप में किया जाता है।

इसके अल्वा त्वचा संबंधी कई अन्य समस्याओं के लिए भी अलग-अलग चीजों के साथ मिलाकर इसका प्रयोग किया जाता है। लेकिन कौन सी समस्या के लिए कौन सा पैक बेहतर होगा ये सभी को नहीं पता होता। इसीलिए आज हम आपको एलोवेरा के विभिन्न फेस पैक्स के बारे में बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आप अलग अलग समस्याओं का सही तरीके से इलाज कर सकते है। तो आइए जानते है एलोवेरा से बने फेस पैक!

विभिन्न समस्यायों के लिए एलोवेरा फेस पैक्स :

1. ग्लोइंग स्किन के लिए :alovera face mask

इस पैक को बनाने के लिए आपको एलोवेरा, हल्दी, शहद, दूध और रोज वाटर की जरूरत होगी। पैक बनाने के लिए सबसे पहले पहले एक चुटकी हल्दी, 1 चम्मच शहद, 1 चम्मच दूध और रोज वाटर की कुछ बूंदो को डालकर पेस्ट बना लें। अब इसमें एलोवेरा जेल डालकर अच्छे से मिलायें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर 20 मिनट के लिए लगाएं। उसके बाद हलके गुनगुने या ठंडे पानी से चेहरा धो लें।

2. टैन रिमूव करने के लिए :

इस पैक को बनाने के लिए एलोवेरा और नींबू के रस की आवश्यकता होगी। प्रयोग के लिए एलोवेरा और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें और उसके त्वचा के प्रभावित हिस्सों पर लगाएं। 10 मिनट के लिए छोड़ दें और उसके बाद चेहरा साफ़ कर लें। आप चाहे तो रुई की मदद से भी इस पेस्ट को त्वचा पर लगा सकती है।

3. पिगमेंटेशन के दाग :

इसके लिए रोज वाटर और एलोवेरा लें और उन दोनों को मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। 20 मिनट तक उसे अपने चेहरे पर लगाएं रखें। उसके बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। ये पैक आपके फेस पर ग्लो लाने में भी मदद करेगा। इस पेस्ट से कुछ देर तक मसाज करने से पोर्स को साफ़ हो जाते है।

4. डिटॉक्स फेस पैक :

इस पैक के लिए एलोवेरा, आम, और नींबू के रस की आवश्यकता होगी। पैक बनाने के लिए एलोवेरा जेल को आम के टुकड़ों के साथ डालकर पीस लें। अब इसमें नींबू का रस मिलाएं। पेस्ट बनाने के बाद उसे 20 मिनट के लिए अपनी स्किन पर लगाएं। उसके बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। ये त्वचा को डिटॉक्स करने के साथ-साथ रिफ्रेश करने में भी मदद करेगा।

5. ऑयली और एक्ने वाले स्किन के लिए :acne 1

इसके लिए एलोवेरा की पत्ती और शहद की आवश्यकता होगी। सबसे पहले एलोवेरा की पत्ती को उबाल लें और पीसकर एक पेस्ट बना लें। अब इसमें शहद मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। २० मिनट तक रखने के बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें। प्रत्येक सप्ताह इसका इस्तेमाल करने से ऑयली स्किन और एक्ने वाली स्किन ठीक हो जाएगी और त्वचा क्लियर हो जाएगी।

6. सेंसिटिव स्किन के लिए :

इस तरह की स्किन के लिए पैक बनाने के लिए एलोवेरा, खीरे का रस, दही और रोज आयल की आवश्यकता होगी। पैक तैयार करने के लिए सबसे पहले एलोवेरा जेल, खीरे का रस और दही को मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अब इसमें रोज या किसी अन्य एसेंशियल आयल को कुछ बूंदे डालें। पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट तक रखें। उसके बाद ठंडे पानी से चेहरा साफ़ कर लें। ये त्वचा से सारी गंदगी साफ़ करके आपकी स्किन को फ्रेश करेगा।

7. ड्राई स्किन के लिए :

इस स्किन टाइप के लिए फेस पैक बनाने के लिए एलोवेरा, कॉटेज चीज़, खजूर, खीरा और नींबू के रस की आवश्यकता होगी। सबसे पहले 2 चम्मच कॉटेज चीज़ को एलोवेरा जेल के साथ पीस लें। अब इसमें बिना बीज के खजूर, खीरे की स्लाइस और थोड़ा सा नींबू का रस डालकर फिर से पीस लें। अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाएं और 30 मिनट तक लगे रहने दें। उसके बाद गुनगुने पानी से चहरा साफ़ कर लें। और अंत में ठन्डे पानी से चेहरा धोएं।

8. डेड स्किन के लिए :

डेड स्किन को साफ़ करने के लिए एलोवेरा, खीरा और दलिया लें। पेस्ट बनाने के लिए सबसे पहले खीरे के टुकड़ों और एलोवेरा जेल को एक साथ पीस लें। अब इसमें दलीय मिलाएं और मिश्रण को अच्छे से मिक्स करें। पुरे चेहरा पर फैलाकर इस पेस्ट को लगाएं और गोलाई में मसाज करें। 10 मिनट तक रखें और उसके बाद साफ़ कर लें।

9. Mature और ड्राई स्किन के लिए :

इस पैक को बनाने के लिए एलोवेरा और बादाम लें। सबसे पहले कसे हुए बादामों को एलोवेरा है के साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे और गले पर लगाएं। 15 मिनट तक रखने के बाद पेस्ट साफ कर लें।

10. रूखी और combination स्किन के लिए :

इस तरह की स्किन के लिए एलोवेरा, ओलिव आयल और शिया बटर की आवश्यकता होगी। सबसे पहले एलोवेरा जेल को पीसकर उसमे ओलिव आयल और शिया बटर को मिलाएं और पेस्ट बना लें। अब इसे अपने पुरे चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 15 मिनट तक रखने के बाद ठंडे पानी से चेहरा साफ़ कर लें। ये स्किन में नमी को लॉक करके उसे साफ़ और फ्रेश रखने में मदद करेगा।

सफ़ेद दाग हटाने के घरेलू इलाज़

सफ़ेद दाग से बचने के घरेलू इलाज़:-

सफ़ेद दाग एक त्वचा से सम्बंधित रोग होता है, जिसके कारण शरीर के अंग जैसे हाथ पैर या मुँह कही पर भी सफ़ेद दाग पड़ जाते है, इसके कारण की लोग अपने आप को भद्दे समझने लगते है और तनाव का शिकार भी हो जाते है, इसके कारण कई हो सकते है, जैसे कई लोगो के अंदर इसका कारण, अनुवांशिक भी हो सकता है, जैसे की उनके परिवार में यदि ये परेशानी किसी को होती है, तो उसके कारण ये रोग उनके अंदर भी आ गया है, जिसके कारण उन्हें सफ़ेद दाग हो गए है।

कई लोग तो इसके कारण ये समझते है की जैसे उन्हें पता नहीं क्या हो गया है, और साथ ही उन्हें समाज से भी निकाल दिया गया है, इसका एक और कारण एलर्जी भी हो सकता है, लेकिन जो इसका सबसे बडा कारण होता है वो है लोगो के खान पान ने भूल, क्योंकि कई बार उन चीजो का एक साथ सेवन कर लेटे है, जिनका सेवन उभे नहीं करना चाहिए, जैसे की दूध, छाछ, लस्सी और दही के साथ कभी भी मछली का सेवन नहीं करना चाहिए, इसके कारण भी आपको सफ़ेद दाग की समस्या हो सकती है।

इसके साथ न ही कभी मिठाई जैसे रबड़ी आदि के साथ दही का सेवन नहीं करना चाहिए, परंतु इस परेशानी का भी समाधान होता है, थोड़ा लंबा होता है, और इसे करने के लिए आपको धैर्य की जरुरत होती है, और साथ ही इसके लिए आपको इन तरीको का इस्तेमाल नियमित रूप से करना चाहिए, तो आइये आज हम आपको इस समस्या का समाधान बताने जा रहे है, जिससे आप आसानी से सफ़ेद दाग से हमेशा के लिए निजात पा सकते है, और अपनी त्वचा को वापिस से कोमल व् मुलायम और आकर्षित बना सकते है।

सफ़ेद दाग को हटाने के घरेलू इलाज़:-

तांबे के बर्तन में पानी पीएं:-

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तांबे में मेलेमिन पाया जाता है, जो त्वचा में न हो तो सफ़ेद दाग की समस्या खड़ी हो जाती है, यदि आपको भी कोई ऐसी समस्या है तो आपको रात के समय तांबे के बर्तन में पानी भर के रखना चाहिए, और रोजाना सुबह उठ कर इस पानी का सेवन करने से आपको सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, साथ ही आपके स्वास्थ्य को भी इससे लाभ पहुँचता है।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

नारियल के तेल का इस्तेमाल करने से आपको अपनी पुरानी स्किन को वापिस लाने में मदद मिल सकती है, और साथ ही इसमें जीवाणुरोधी और संक्रमण विरोधी गुण भी पाए जाते हैं। यदि आप दिन में दो से तीन बार नारियल के तेल से उस जगह पर मसाज करते है, जहाँ पर आपको सफ़ेद दाग की समस्या है, तो आपको थोड़े ही दिनों के नियमित इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

हल्दी का इस्तेमाल करें:-

हल्दी का इस्तेमाल करने से भी आपको सफ़ेद दाग की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप एक कप सरसो के तेल में पांच चमच्च हल्दी को डाल कर एक लेप तैयार करें, अब इस लेप को प्रभावित जगह पर लगाएं, आप इस लेप को दिन में दो बार भी लगा सकते है, थोड़े ही दिनों के नियमित इस्तेमाल से आपको इस समस्या से बचने में मदद मिलेगी, और साथ ही आपको इस समस्या से निजात पाने में छह से सात माह भी लग सकते है, परंतु इस उपाय का इस्तेमाल करने से आपको निजात मिल जायेगा।

नीम का इस्तेमाल करें:-

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नीम को एक औषधि की तरह इस्तेमाल किया जाता है, इसके अलावा यदि आपको कही चोट भी लग जाती है तो नीम का लेप लगाने से थोड़ी ही देर में इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, और साथ ही निशान भी नहीं रहता है, इसके साथ यदि आपको सफ़ेद दाग की समस्या है तो भी ये आपकी मदद कर सकता है, इसके लिए हल्दी में नीम के पत्तो को अच्छे से पीस कर मिला कर एक लेप तैयार करें, अब इस लेप को सफ़ेद दाग वाली प्रभावित जगह पर लगाएं, थोड़े ही दिनों में इस समस्या से राहत पाने में आपको मदद मिलेगी।

इसके अलावा आप नीम की पत्तियो को छाछ के साथ पीस कर भी सफ़ेद दाग वाले स्थान पर लगा सकती है, इसका इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके साथ आपको नीम के जूस का सेवन भी कर सकते है, या नीम के तेल का इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। तो आप नीम का कोई भी उपयोग कर सकती है, इन सबसे आपको सफ़ेद दाग की समस्या को खत्म करने ,में मदद मिलती है।

लाल मिट्टी का इस्तेमाल करें:-

लाल मिट्टी में तांबा भरपूर मात्रा में पाया जकात है, जो त्वचा में मेलेमिन के साथ त्वचा का दुबारा से निर्माण करने में मददगार साबित होता है, इसका इस्तेमाल करने के लिए आप अदरक के रस में लाल मिट्टी को मिलाकर अच्छे से उस स्थान पर लगाएं जहाँ पर सफ़ेद दाग होते है, थोड़े ही दिनों के नियमित इस्तेमाल से आप सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाकर नई त्वचा का निर्माण कर सकते है।

अदरक का इस्तेमाल करें:-

अदरक के रस को पानी के साथ अच्छे से मिलाकर आप सफ़ेद दाग से प्रभावित वाली जगह पर लगाएं, और इसके साथ आप अदरक के रस को पानी में मिलाकर उसका सेवन भी कर सकते है, इन तरीको के नियमित इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से निजात पाने में अदरक में मौजूद मेलेमिन के कारण मदद मिलती है, और साथ ही आपको इस समस्या से थोड़े ही दिनों में आराम के साथ एक नई त्वचा भी मिल जाती है।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

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सेब का सिरका भी सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाने में आपकी मदद कर सकता है, इसके उपयो के लिए आप सेब के सिरके को पानी में मिलाकर सफ़ेद दाग से प्रभावित जगह पर लगाएं, और साथ ही आप सेब के सिरके को पानी में डाल कर उसका सेवन भी कर सकते है, इसका इस्तेमाल करने से आपको थोड़े ही दिनों में सफ़ेद दाग के कारण होने वाली समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, और त्वचा के लिए भी अच्छा होता है।

एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-

एलोवेरा का इस्तेमाल करने से भी आपको त्वचा संबंधी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है, आपको सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाने के लिए एलोवेरा के गुद्दे को निकाल कर उसे उस स्थान पर लगाना है, जहाँ पर आपको सफ़ेद दाग है, आप इसे सूखने तक लगाएं रखें और थोड़ी देर बाद हाथ को धो लें, इसके बाद आप इसका इस्तेमाल दिन में दो से तीन बार भी कर सकते है, और आप चाहे तो एलोवेरा जूस का सेवन भी कर सकते है।

सफ़ेद दाग की समस्या को दूर करने के अन्य घरेलू उपचार:-

  • बथुए की पत्तियो को खाने से और इसके रस को सफ़ेद दाग पर लगाने से आपको सफ़ेद दाग की समस्या से बचने में मदद मिलती है।
  • एलोवेरा को लगाने व् इसके जूस का सेवन करने से भी इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • नीम की पत्तियो के जूस में शहद मिलाकर उसका सेवन करने से भी इस समस्या से आराम मिलता है।
  • ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ जैसे लस्सी आदि का सेवन करने से आपको इस संमस्या से आराम पाने में मदद मिलती है।
  • अदरक के टुकड़े को सफ़ेद दाग पर रोजाना थोड़े समय के लिए रगड़ने से भी इस समस्या से आराम पाने में मदद मिलती है।
  • भोजन में ज्यादा मास मछली आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • भोजन में ज्यादा खटाई मसाले, मिर्च आदि का ज्यादा सेवन भी नहीं करना चाहिए।
  • उडद की डाल को भिगाकर थोड़ी देर के लिए रख दें, और उसके बाद उसे पीस कर सफ़ेद दाग पर लगाएं आपको सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।
  • जितना हो सकें अखरोट का सेवन करना चाहिए।
  • तुलसी के तेल का इस्तेमाल भी सफ़ेद दाग वाले स्थान पर करने से इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती  है।

सफ़ेद दाग की समस्या से निजात पाने के घरेलू टिप्स, सफ़ेद दाग है? ये है घरेलू नुस्खे, सफ़ेद दाग की समस्या से छुटकारा पाने के आसान टिप्स, ऐसे पाएं सफ़ेद दाग की समस्या से आराम, ये घरेलू नुस्खे करेंगे सफ़ेद दाग की समस्या से निजात, safed daag ki samasya se nijat paane ke lie tips, aise karen safed daag ki samasya ka smadhan, safed daag ki samasya se nijat paana chahte hain ye hain tips

पैरों की उंगलियों में पानी लग गया है? ऐसे ठीक करें

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आज के समय में हर कोई अपने शरीर का बहुत ध्यान रखता है। लेकिन फिर भी कई बार हमारे शरीर में ऐसी परेशानियां हो जाती है जिन्हे सहन करना आसान नहीं होता। कमर दर्द, सर दर्द आदि जैसी समस्याओं को तो दवा खाकर दूर किया जा सकता है लेकिन कुछ परेशानियां है जिनमे दवा खाने का भी कोई असर नहीं होता। इन्ही कुछ समस्याओं में से एक है पैरों से संबंधित समस्याएं। यहाँ हम घुटने के दर्द, पैरों में सूजन आदि के विषय में नहीं अपितु उनमे होने वाले संक्रमण या इन्फेक्शन की बात कर रहे है।

अधिक देर तक पानी में काम करने या धान उगाने वाले किसानो को अक्सर ये समस्या हो ही जाती है। धान लगाते समय उसे रोपने के लिए बहुत अधिक पानी में रहना पड़ता है जिसके कारण उन्हें ये बीमारी हो जाती है। इसके अलावा जो लोग नंगे पैर खड़े होकर काम करते है उन्हें भी ये समस्या हो सकती है। कभी कभी बहुत घंटों तक लगातार जूते पहनने के कारण उँगलियों के बीच में भी ये बीमारी हो जाती है।

पैरों में पानी लगने के कारण :-

ऐसे तो किसी भी इन्फेक्शन का मुख्य कारण गंदगी होता है। और इस समस्या का कारण भी यही है। दरअसल अधिक समय तक पानी और मिटटी के सम्पर्क में रहने से त्वचा मुलायम हो जाती है जिसके कारण उसमे फफूंद और संक्रमण फैलने लगता है। इस बीमारी के होने पर पैरों में तेज खुजली होने के साथ-साथ सूजन भी आने लगती है। कई बार इसमें पीप से भरे फोड़े भी हो जाते है।

इस समस्या का मुख्य कारण बैक्टीरिया होते है। जो त्वचा में एकत्रित होकर संक्रमण पैदा करते है। ऐसे में इन बैक्टीरिया को साफ़ करना और सही देखभाल करना जरुरी है। इसीलिए आज हम आपको पैरों में पानी लगने या उनमे संक्रमण होने का इलाज बताने जा रहे है जिनकी मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

पैरों में पानी लग जाए तो ऐसे ठीक करें :-

इस बीमारी के होने पर पैरों में मवाद वाले फोड़े हो जाते है जिन्हे ठीक करने के लिए टैट्रासाईक्लीन नामक दवाई को खाना और बैक्टीरिया रोधी या फफूँद रोधी दवाई को संक्रमण वाले स्थान पर लगाने की सलाह दी जाती है।

जेंशियन वायलट दवा लगाने से बीमारी में चार पांच दिन में आराम मिल जाता है। तेल युक्त नीम का सत्त लगाने से भी संक्रमण में फायदा मिलता है।

बहुत से किसान इस बीमारी से राहत पाने के लिए आग जलाकर उसके धुएं से अपने पैरों को सेकते है।

इस बीमारी से बचने के लिए रबर के जूतों का इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे उनमे पानी न घुसे और पैर सूखे रहे। इसके अलावा खेती का काम करने के बाद पैरों को ठीक तरह से सुखाकर भी इस बीमारी से बचाव संभव है।

 

गिलोय का इस्तेमाल और इसके फायदे

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एक ऐसी इंडियन हर्ब है जिसकी डिमांड पूरी दुनिया में है और उस पौधे का नाम है गिलोय। आयुर्वेद में गिलोय के पौधे को एक विशेष स्थान मिला है। पूरी दुनियां इसके गुणो और उपयोगों को मानती है। समय के साथ साथ आयुर्वेद ने इस हर्ब के बहुत से औषधीय गुण ढूढ़ लिए है। गिलोय के अनगिनत औषधीय गुण और उपयोग है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च द्वारा गिलोय के सभी गुणों को प्रमाणित भी किया है।

गिलोय के फायदे

आइये जानते है किस तरह इस गुणकारी गिलोय को हम किन किन परेशानियों के लिए इस्तेमाल कर सकते है।

कब्ज में राहत:

  • गिलोय के पत्तियों को सूखा कर उनका पाउडर बना लीजिये।
  • इस पाउडर की आधा चम्मच को गुड़ के साथ लीजिये।
  • इसके सेवन से पेट से जुडी सभी समस्या दूर होंगी।
  • कब्ज के भी राहत मिलेगी।

 ब्लड शुगर में कमी:

  • गिलोय टाइप II डाइबिटीज़ के इलाज में बहुत ही फायदेमंद होता है।
  • डाइबिटीज़ पेशेंट को रोजाना गिलोय जूस का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • ऐसा करने से हाई ब्लड शुगर कण्ट्रोल होती है।
  • बाजार में आसानी से गिलोय जूस आपको मिल जाता है।

इम्युनिटी:

  • गिलोय ना सिर्फ बीमारियां ठीक करने के काम आता है बल्कि बिमारियों से लड़ने की ताकत भी बढ़ाता है।
  • इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते है।
  • यह हमारे शरीर के टॉक्सिन्स को निकाल करके ब्लड साफ़ करता है।
  • इसका नियमित इस्तेमाल आपकी इम्युनिटी बढ़ाता है।
  • इसके सेवन से कोई भी बीमारी आपको जल्दी से नहीं लगती।

पीलिया:

  • गिलोय का इस्तेमाल पीलिया को सहीं करने के काम भी आता है।
  • इसके पत्तों को पीस कर छाछ में मिलाकर रोगी को देने से पीलिया ठीक करने में मदद मिलती है।
  • गिलोय के 20 ml रस को 2 चम्मच शहद में देने से भी रोगी को आराम मिलता है।
  • यह उपाय दिन में तीन से चार बार करना चाहिए।

कोढ़ या कुष्ठ का इलाज:

  • कुष्ठ रोग का इलाज गिलोय से संभव है।
  • 20 ml गिलोय का रस कुष्ठी रोगी को देने से लाभ मिलता है।
  • यह उपाय दिन में दो तीन बार, तीन महीने तक करने से कोढ़ से पूरी तरह मुक्ति मिलती है।

हेल्दी हार्ट:

  • गिलोय के उपयोग से आप एक स्वस्थ दिल पा सकते है।
  • काली मिर्च और गिलोय के पाउडर को मिलाकर लेने से हार्ट प्रॉब्लम्स ठीक होती है।
  • यह उपाय करने से सीने का दर्द खत्म होता है।
  • यह तरीका लगातार सात दिनों तक करना चाहिए।

मोटापा:

  • गिलोय का नियमित इस्तेमाल मोटापे से भी निजात दिलाता है।
  • इसका एक चम्मच रस और एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें।
  • एक महीने तक लगातार सुबह और शाम इसका सेवन करने से जल्दी फायदा मिलता है।

सर्दी खांसी या फ्लू:

  • 1 चम्मच गिलोय के रस का रोजाना सेवन करें।
  • इसके सेवन से सर्दी खांसी ठीक होगी।
  • खांसी जब तक ठीक ना हो तब तक इसका सेवन बंद ना करें।

गठियाँ रोग:

  • गिलोय के चूर्ण का इस्तेमाल गठियाँ रोग को भी ठीक करता है।
  • इसका इस्तेमाल जोड़ो का दर्द ठीक कर उन्हें मजबूत बनाता है।

इन सभी के अतिरिक्त गिलोय के और भी बहुत से औषधीय गुण है। गिलोय का इस्तेमाल बुखार, टी बी, कान दर्द, आखों आदि के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

शादी के बाद लड़कियां सूंदर क्यों दिखने लगती है

शादी के बाद माना जाता है ही लड़कियों का रूप और भी निखर जाता है, और कही न कही ये सच भी है, इसका कारण शादी के बाद लड़कियों को अपने प्रति ज्यादा केयर करना, शरीर में हॉर्मोन्स का बदलाव, लड़कियों का पूरी तरह से सजना संवरना, ब्यूटी ट्रीटमेंट करवाते रहना, व् शादी के बाद होने वाली ख़ुशी के कारण भी लड़कियों का रंग निखर जाता है, इसके अलावा और भी बहुत सी बातें होती है।

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शादी से पहले लड़कियां न तो ज्यादा ब्यूटी ट्रीटमेंट लेती है, न तो अपनी अच्छे से केयर करती है, परंतु शादी के बाद हर लड़की को बहुत ख़ुशी होती है, उसके मन में नए नए अरमान होते है, जिसके कारण उसके चेहरे की चमक वैसे ही बढ़ जाती है, इसके अलावा शादी के बाद महिला और पुरुष में होने वाले सम्बन्ध के कारण भी महिला के हॉर्मोन्स में परिवर्तन आता है, इसके अलावा लड़कियां शादी से पहले ज्यादा कास्मेटिक का इस्तेमाल नहीं करती है, और न ही ज्यादा सजती संवारती है, परंतु शादी के बाद पूरा मेक अप अच्छे अच्छे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने के कारण उनके चेहरे की चमक बढ़ जाती है, इसके अलावा और भी बहुत से कारण होते है जिसके कारण लड़कियां शादी के बाद और भी सूंदर हो जाती है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की वो कौन से कारण होते है।

शरीर में होने वाले हॉर्मोन्स में परिवर्तन के कारण:-

शादी के बाद महिला और पुरुष के बीच सम्बन्ध बनता है, जिसके कारण महिला के शरीर में होने वाले हॉर्मोन्स में बदलाव आता है, जिसके कारण महिला का रूप और भी निखर जाता है, और यदि महिला इस सम्बंध का पूरा आनंद लेती है, और चरम सुख तक पहुचती है, इसके कारण उनके शरीर में हॉर्मोन्स में तेजी से बदलाव आता है, जिसके कारण उनकी त्वचा चमकने लगती है, एक ये कारण भी महिला की सुंदरता को शादी के बाद बढ़ाता है।

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महिला पूरी तरह से सजती संवरती है:-

शादी से पहले लड़कियां बिलकुल सिंपल रहती है, वो ज्यादा मेक अप नहीं करती है, और सभी कास्मेटिक का इस्तेमाल भी नहीं करती है, परंतु शादी के बाद महिला पूरे ढंग से सजती संवरती है, सभी तरह के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती है, फिर चाहे वो मेक अप का बेस हो या फिर लिपस्टिक्स के कलर हो, महिला के इसी सजने संवरने के कारण भी उनके चेहरे में एक अलग ही ग्लो नजर आता है, जिसके कारण भी लड़कियों की ख़ूबसूरती शादी के बाद बढ़ जाती है।

महिला लेती है ब्यूटी ट्रीटमेंट्स:-

शादी से पहले महिला ज्यादा पार्लर भी नहीं जाती है, यदि जाती भी है तो केवल थ्रेडिंग करवाने या क्लींजिंग करवाने, वो पूरी तरह से कभी भी ब्यूटी ट्रीटमेंट नहीं लेती है, परंतु शादी के बाद महिला पूरे ब्यूटी ट्रीटमेंट लेती है, साथ ही अपनी ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए स्पा आदि भी लेती है, जिसके कारण उसके चेहरे की चमक बढ़ती है, इसके साथ महिला घर पर भी अपने चेहरे की चमक को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक उपाय का इस्तेमाल करती रहती है, जिसके कारण शादी के बाद महिला की ख़ूबसूरती में निखार आ जाता है।

लड़कियों की ख़ुशी के मारें भी उनके चेहरे का ग्लो बढ़ जाता है:-

शादी से पहले हर लड़की का अरमान होता है की उसका ससुराल ऐसा होना चाहिए, उसका पति ऐसा होना चाहिए, और लड़का हो या लड़की उसके चेहरे पर उसकी शादी की चमक का ग्लो भी दिखने लग जाता है, और लड़कियों को तो अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने की सबसे ज्यादा ख़ुशी होती है, जिसके कारण उनके चेहरे की चमक भी बढ़ने लग जाती है, और जब उसके सपने शादी के बाद सच होने लगते है, उसका पति उसके ससुराल वाले उसे बहुत प्यार करते है, तो उसकी ख़ुशी और भी दिखने लग जाती है, और इस ख़ुशी की चमक उनके चेहरे पर साफ़ दिखने लग जाती है।

अपनी अच्छे से केयर करने के कारण:-

शादी से पहले लड़कियां अपनी ब्यूटी को लेकर कम ही उत्साहित होती है, जिसके कारण वो उस तरह से अपनी केयर नहीं करती है जिस तरह से उन्हें करनी चाहिए परंतु शादी के बाद वो अपनी ख़ूबसूरती को निखारने के लिए ज्यादा समय देती है, समय समय पर अपने ब्यूटी ट्रीटमेंट लेती है, अपने बालों की केयर करती है, अपने चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए कुछ न कुछ करती है, अपने ड्रेसिंग पर ध्यान देती है, जिसके कारण उनकी पर्सनैल्टी और ख़ूबसूरती बढ़ती है।

तो ये कुछ कारण है जिसके कारण शादी के बाद लड़कियों की सुंदरता और भी बढ़ जाती है, और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि नई शादी के बाद दुल्हन का सबसे अलग दिखना भी जरुरी होता है यदि उसके चेहरे पर चमक दिखाई नहीं देगी, तो कैसे पता चलेगा की उसकी नई शादी हुई है, तो यदि आपकी भी शादी होने वाली है तो ये चमक और ख़ुशी आपके चेहरे पर भी साफ़ दिखाई देगी।

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प्रेगनेंसी के लिए सुपर फ़ूड कौन-कौन से हैं?

प्रेगनेंसी के सुपर फ़ूड है, गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जहां प्रेग्नेंट महिला को खान पान का बहुत अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। हम यह नहीं कह रहे हैं की आप हर दम खाती रहें। बल्कि खान पान का ध्यान रखने का मतलब है की आप जो भी खाएं वो पोषक तत्वों से भरपूर हो। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए और भ्रूण के बेहतर विकास के लिए बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होना जरुरी होती है।

और यदि आप ऐसे आहार का सेवन करती हैं जिसमे पोषक तत्व नहीं होते हैं। तो गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण प्रेग्नेंट महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का अधिक सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इससे गर्भ में शिशु का विकास भी प्रभावित होता है। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में आपको प्रेगनेंसी में क्या खाएं इससे जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

प्रेग्नेंट महिला आहार में शामिल करे यह सुपर फ़ूड

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कुछ ऐसे आहार है जो जरूर खाने चाहिए। क्योंकि यह पोषक तत्वों की खान होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में भ्रूण के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान लिए जाने वाले सुपरफूड कौन से हैं।

हरी सब्जियां

  • हरी सब्जियों में आयरन, फोलिक एसिड,फोलेट, कैल्शियम आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • आयरन बॉडी में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है, जिससे प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • वहीँ फोलिक एसिड और फोलेट गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास को बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • साथ ही शिशु को जन्म के समय होने वाली समस्याओं से बचाव करने में भी मदद मिलती है।
  • इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी एक समय की डाइट में किसी न किसी हरी सब्ज़ी को जरूर शामिल करना चाहिए।
  • इसके अलावा अन्य सब्जियां जैसे गाजर, चुकंदर, घीया, गोभी आदि का भी महिला को जरूर सेवन करना चाहिए।

फल व् फलों का रस

  • रसदार फल न केवल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं बल्कि प्रेग्नेंट महिला को हाइड्रेट रखने में भी मदद करते हैं।
  • इसीलिए सुबह शाम महिला को किसी न किसी एक फल का सेवन भी जरूर करना चाहिए।
  • खासकर संतरे, मौसम्बी, अनार, सेब आदि का सेवन महिला को जरूर करना चाहिए।
  • और हो सके तो मौसमी फलों का ही सेवन करें।
  • फलों के साथ फलों के रस का सेवन करना भी प्रेग्नेंट महिला और शिशु के लिए फायदेमंद होता है।

अंडा

  • अंडा प्रेगनेंसी के दौरान लिए जाने वाला एक सुपरफूड है जिसमे प्रोटीन, फैट जैसे पोषक तत्व के साथ choline भी मौजूद होता है।
  • प्रोटीन, फैट आदि जहां शिशु के शारीरिक विकास को बढ़ाने के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • वहीँ choline गर्भ में शिशु के मानसिक विकास को बेहतर रखने में मदद करता है।
  • साथ ही अंडे का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को भी ऊर्जा से भरपूर रहने के साथ स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • लेकिन ध्यान रखें की आप कच्चे अंडे या अच्छे से न पके हुए अंडे का सेवन करने से बचें।
  • और जब भी आपका अंडे खाने का मन हो ताजे अंडे लाएं और उनका सेवन करें।

प्रेगनेंसी के सुपर फ़ूड है नॉन वेज

  • यदि प्रेग्नेंट महिला नॉन वेज का सेवन कर लेती है तो प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाहि से, हफ्ते में एक या दो बार महिला को नॉन वेज का सेवन भी जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि शाकाहारी भोजन की अपेक्षा नॉन वेज खाने से बॉडी को आयरन अधिक मिलता है।
  • और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को आयरन की कमी को शरीर में नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि इससे महिला व् शिशु दोनों को दिक्कत हो सकती है।
  • लेकिन ध्यान रखें की अच्छे धोने के बाद पका हुआ, ताजा नॉन वेज ही खाएं ताकि किसी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या प्रेग्नेंट महिला या शिशु को न हो।

डेयरी प्रोडक्ट्स

  • गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती व् गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला को कैल्शियम का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • और डेयरी प्रोडक्ट्स में कैल्शियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है, साथ ही अन्य पोषक तत्व जैसे फैट, प्रोटीन आदि भी मौजूद होते हैं।
  • ऐसे में गर्भवती महिला को दूध, दही, छाछ, पनीर आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के सुपर फ़ूड है दालें

  • प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम व् अन्य मिनरल्स से भरपूर दालों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।
  • नियमित एक समय के आहार में दाल का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • दालों का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने व् शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलने में मदद मिलती है।

साबुत अनाज

  • फोलिक एसिड, विटमिन बी, आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर साबुत अनाज का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि यह सभी पोषक तत्व प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला की बॉडी को फिट रखने व् भ्रूण के विकास में बहुत फायदेमंद होते हैं।

प्रेगनेंसी के सुपर फ़ूड है ड्राई फ्रूट्स

  • ड्राई फ्रूट्स में हेल्दी फैट्स मौजूद होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला और भ्रूण के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • जो प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने के साथ शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में बहुत फायदेमंद होते हैं।
  • इसीलिए नियमित रूप में किसी न किसी ड्राई फ्रूट जैसे की बादाम, अखरोट आदि का सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।

तरल पदार्थ

  • खाने के साथ प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए हाइड्रेट रहना भी जरुरी होता है।
  • और हाइड्रेट रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को एक दिन में आठ से दस गिलास पानी पीना बहुत जरुरी होता है।
  • पानी के अलावा प्रेग्नेंट महिला को जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी आदि का भी सेवन करते रहना चाहिए।
  • क्योंकि यह बॉडी को हाइड्रेट रखने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर रखने में भी मदद करते हैं।

तो यह हैं कुछ सुपर फोड़ जो प्रेग्नेंट महिला को जरूर अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।