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प्रेगनेंसी में भूलकर भी यह न खाएं नहीं तो नुकसान हो सकता है

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गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने आहार का बेहतर तरीके से ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से गर्भवती महिला पर निर्भर करता है। ऐसे में गर्भवती महिला को कुछ चीजों का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इनके सेवन से न केवल गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी बढ़ सकती है, बल्कि इससे गर्भपात, समय पूर्व प्रसव या शिशु के विकास में कमी आ सकती है। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

तुलसी के पत्ते

तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर होती है, और आपके शरीर से जुडी बहुत सी समस्याओं का हल करने में आपकी मदद करती है। लेकिन गर्भवती महिला को भूलकर भी तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें मरकरी की मात्रा बहुत अधिक होती है जो शिशु के विकास पर बुरा असर डाल सकती है।

मछली

प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादातर महिलाएं पूछती हैं की मछली का सेवन करना सही होता है या नहीं, और इसका जवाब होता है की गर्भवती महिला मछली का सेवन कर सकती है। लेकिन कुछ खास किस्म की मछली जिनमे मरकरी की मात्रा अधिक हो उसके सेवन से गर्भवती महिला को बचना चाहिए। क्योंकि उनके सेवन से गर्भवती महिला को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है साथ शिशु के विकास में कमी आती है। इसीलिए मछली के सेवन से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

कच्चा पपीता

कच्चे पपीते में लेटेक्स की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन हो सकता है। साथ ही शुरूआती दिनों में इसके कारण गर्भवती महिला को गर्भपात जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है, ऐसे में गर्भवती महिला को जितना हो सके इससे परहेज करना चाहिए।

चाइनीज़ फ़ूड

चाइनीज़ फ़ूड में मोनो सोडियम ग़ुलामेट यानी MSG की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो की गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हानिकारक होती है। साथ ही इसके अधिक सेवन के कारण शिशु में जन्म के समय डिफेक्ट होने खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही चाइनीज़ फ़ूड में सोया सॉस का इस्तेमाल होता है जिसमे नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है, और इसके कारण गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

कच्चे अंडे और मांस

गर्भवती महिला को कच्चे अंडे व् मांस का सेवन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को पेट से सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके कारण उल्टी, दस्त, पेट में दर्द की समस्या अधिक हो सकती है जिसके कारण गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा परेशानी जैसे की बॉडी में पानी की कमी व् कमजोरी आदि महसूस हो सकती है।

कैफीन

अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन भी गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है ऐसे में गर्भवती महिला को चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

नशे का सेवन

प्रेग्नेंट महिला को धूम्रपान, अल्कोहल व् अन्य किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण शिशु के विकास पर बहुत असर पड़ता है, और गर्भ में पल रहा शिशु शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

बाहर का खाना

गर्भवती महिला को बाहर का खाना, डिब्बाबंद जूस, फ्रोजन फ़ूड, आर्टिफिशल स्वीटनर, रेडी मेड फ़ूड, ज्यादा मसालें वाला खाना, रोड साइड मिलने वाला सामान आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि उसके सेवन से से गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है, साथ ही इसमें किसी भी तरह के पोषक तत्व नहीं होते हैं जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है।

अनानास

अनानास में ब्रोमेलिन की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण गर्भाशय की ग्रीवा में नमी आती है। और नमी आने के कारण गर्भवती महिला का शुरूआती दिनों में गर्भपात तो आखिरी के दिनों में समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या हो सकती है, ऐसे में गर्भवती महिला को अनानास का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

अंगूर

अंगूर की तासीर गर्म होती है जिसके कारण गर्भपात और समय पूर्व प्रसव होने का खतरा रहता है। ऐसे में गर्भवती महिला को अंगूर का सेवन भी नहीं करने की सलाह दी जाती है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली किसी भी परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

बैंगन

बैंगन का सेवन गर्भवती महिला यदि करती है तो इसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो से जुडी समस्या हो सकती है, जिसके कारण गर्भवती महिला को जहां सूजन आदि की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, वहीं बॉडी में ब्लड फ्लो के बेहतर न होने के कारण शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है।

कटहल

कटहल का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए इसमें विटामिन सी की मात्रा की अधिकता होने के कारण गर्भवती महिला को गर्भपात जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

कच्चा दूध

कच्चे दूध में हानिकारक बैक्टेरिया होता है, और गर्भवती महिला यदि इसका सेवन करती है तो इसके कारण डायरिया, उल्टी दस्त, पेट में दर्द जैसी परेशानी गर्भवती महिला को हो सकती है। साथ ही इससे बॉडी में पानी की कमी होने की समस्या का सामना भी महिला को करना पड़ सकता है ऐसे में गर्भवती महिला को कच्चे दूध का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुच्छ चीजें जिनका सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण न केवल गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होती है बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। और गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ताजे, संतुलित, पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

Hindi Video : Foods That Can Cause Miscarriage In Early Pregnancy

Pregnancy me Kya Nahi Khayen

डिलीवरी के बाद दूध नहीं उतरने पर क्या करें?

माँ का दूध शिशु के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता है। यदि शिशु के जन्म के बाद तुरंत माँ का पहला गाढ़ा दूध जिसे कोलेस्ट्रम कहा जाते हैं। शिशु को पिला दिया जाता है तो ऐसा करने से शिशु को बीमारियों से सुरक्षित रहने और बेहतर विकास में मदद मिलती है। लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी होती है जिन्हे डिलीवरी के बाद स्तन में दूध न उतरने या कम दूध उतरने की समस्या हो सकती है। यह कोई घबराने की बात नहीं होती है और घबराने की जगह इस समस्या का समाधान कैसे किया जाये इस बारे में सोचना ज्यादा जरुरी होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपसे शिशु के जन्म के बाद ब्रेस्टफीड नहीं उतरने पर या कम उतरने पर क्या करना चाहिए। उसके लिए कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जो आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।

डिलीवरी के बाद दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए शिशु को स्तनपान जरूर करवाएं

  • कई बार दूध न उतरने के कारण महिला डिलीवरी के बाद शिशु को दूध पिलाने की कोशिश ही नहीं करती है।
  • जो की गलत बात होती है बल्कि आपको शिशु के मुँह में निप्पल को जरूर देना चाहिए।
  • क्योंकि शिशु को जब भूख लगती है तो वो उसे चूसने के लिए दबाव लगाता है जो स्तन में दुग्ध ग्रंथियों को खुलने में मदद कर सकता है।
  • जिससे महिला को डिलीवरी के बाद दूध आना शुरू हो सकता है।
  • साथ ही आपको थोड़ी थोड़ी देर बाद ब्रेस्ट को दूध पिलाते समय बदलते रहना चाहिए ताकि दोनों स्तन में दूध का उत्पादन बढ़ सके।
  • और एक ही ब्रेस्ट से शिशु को दूध नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि इससे एक ब्रेस्ट छोटा और एक बड़ा हो सकता है।

ब्रेस्टफीड करवाते समय ब्रेस्ट के साथ ऐसा करें

  • डिलीवरी के बाद दूध कम आने और न आने की समस्या का समाधान करने के लिए महिला को अपने ब्रेस्ट पर दबाव डालना चाहिए।
  • ब्रेस्ट को दबाना करना चाहिए, उसे हिलाना चाहिए, ऐसा करने से दूध ग्रंथियों को खुलने में मदद मिलती है।
  • और जब शिशु दूध पी रहा हो तो अपने हाथ से ब्रेस्ट पर दबाव बनाकर रखना चाहिए ताकि शिशु के लिए पर्याप्त दूध का उत्पादन हो सके।

तरल पदार्थ भरपूर मात्रा में पीएं

  • ब्रेस्टफीड न उतरने की समस्या को सुलझाने के लिए महिला को तरल पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • जैसे की दिन में आठ से दस गिलास पानी पीएं, दो से तीन गिलास दूध पीएं, नारियल पानी पीएं, जूस पीएं आदि।
  • क्योंकि जितनी बॉडी में तरल पदार्थों की मात्रा होगी उतना दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • साथ ही शिशु को स्तनपान करवाने से पहले कुछ न कुछ तरल पदार्थ जरूर लें।
  • ऐसा करने से स्तन में शिशु के लिए पर्याप्त दूध का उत्पादन करने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद दूध नहीं उतरने पर रखें खान पान का ध्यान

  • डिलीवरी के बाद दूध के पर्याप्त मात्रा में न उतरने पर या दूध बिल्कुल न उतरने की समस्या के समाधान के लिए  महिला को अपने खान पान का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।
  • क्योंकि जितना महिला खान पान का ध्यान अच्छे से रखती है उतना ही जल्दी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • जैसे की हरी सब्जियां, जीरा, सौंफ, लहसुन, चुकंदर, तुलसी, करेला, आदि का सेवन करना चाहिए इससे ब्रेस्ट में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिन्हे ट्राई करने से ब्रेस्ट में दूध न उतरने या कम उतरने की समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है। और डिलीवरी के बाद यदि आपको भी यह दिक्कत है तो आप भी इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके अपनी समस्या का समाधान कर सकती है।

गर्भवती महिला के लिए मशरुम खाने के फायदे और नुकसान

प्रेगनेंसी में मशरुम

गर्भावस्था के दौरान खाने पीने में बहुत सी सावधानियां बरतनी पड़ती हैं, क्योंकि खान पान में बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में समस्या खड़ी कर सकती है। ऐसे में कौन सी चीज प्रेगनेंसी के दौरान खानी चाहिए और कौन सी नहीं इसके बारे में जानना बहुत जरुरी होता है। तो लीजिए आज हम प्रेगनेंसी के दौरान मशरुम का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं की मशरुम का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए या नहीं। तो इसका जवाब है हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान मशरुम का सेवन किया जा सकता है क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला और भ्रूण दोनों के लिए उपयोगी होते हैं, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर इसका सेवन करना जरुरी होता है।

प्रेगनेंसी में मशरुम खाने के फायदे

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान यदि पोषक तत्वों से भरपूर मशरुम का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को बहुत से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में मशरुम खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट्स

मशरुम में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स गर्भवती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के साथ फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाली समस्या से भी बचाने में मदद करते हैं। और गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम का मजबूत होना गर्भवती महिला को और गर्भ में पल रहे शिशु को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है।

फाइबर

फाइबर की मात्रा भी मशरुम में मौजूद होती है जो गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को होने वाली कब्ज़ व् एसिडिटी की समस्या से सुरक्षित रखने में मदद करती है। साथ ही इसके कारण गर्भवती महिला के मेटाबोलिज्म को बेहतर रहने में मदद मिलती है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर तरीके से काम करती है।

आयरन

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में आयरन की मात्रा का भरपूर होना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि आयरन की कमी के कारण गर्भवती महिला को एनीमिया, शिशु के विकास में कमी, डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और मशरुम का सेवन करने से बॉडी हीमोग्लोबिन की मात्रा को पर्याप्त बनाए रखने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

विटामिन डी

हड्डियों के विकास के लिए जरुरी कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए बॉडी में विटामिन डी का होना बहुत जरुरी होता है जो की मशरुम में मौजूद होता है। ऐसे में गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती और भ्रूण की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए भी गर्भवती महिला चाहे तो अपनी डाइट में मशरुम को शामिल कर सकती है।

प्रोटीन

मशरुम में मौजूद प्रोटीन कोशिकाओं की मरम्मत करने में बहुत फायदेमंद होता है, जिससे गर्भवती महिला की मांसपेशियों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल

हाई न्यूट्रिएंट्स से भरपूर मशरुम का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही बॉडी में कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रित रहने से गर्भवती महिला के हदय को भी सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में मशरुम खाने के नुकसान

  • बहुत दिन रखें हुए, काले पड़े हुए, मशरुम का सेवन करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या का सामना अधिक करना पड़ सकता है।
  • कच्चे मशरुम का सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण एलर्जी, अस्थमा जैसी कई बीमारियों के होने का खतरा रहता है।
  • यदि गर्भवती महिला को मशरुम का सेवन करने से एलर्जी होती है या कोई और परेशानी होती है तो भी गर्भवती महिला को मशरुम का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • मोरेल मशरुम यह भी मार्किट में बहुत आसानी से मिल जाता है, इस तरह के मशरुम का सेवन यदि गर्भवती महिला ने कभी नहीं किया है तो प्रेगनेंसी के दौरान इसका सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान मशरुम खाने से जुड़े कुछ टिप्स, इसके अलावा ताजे मशरुम को अच्छे से साफ़ करके, पानी में धोकर, अच्छे से पकाने के बाद ही गर्भवती महिला को इसका सेवन करना चाहिए ताकि इसके कारण गर्भवती महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो, और गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

ग्वार फली खाना बहुत फायदेमंद है प्रेगनेंसी में

प्रेगनेंसी में ग्वार की फली

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ऐसी चीजों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है, जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास होने में भी मदद मिल सके। ग्वार की फली भी पोषक तत्वों से भरपूर होती है, जैसे की इसमें प्रोटीन, फोलिक एसिड, फाइबर, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, विटामिन सी, विटामिन ए, कैल्शियम, आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। इसीलिए गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिल सके, प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को शारीरिक परेशानियों से बचे रहने, शिशु के गर्भ में बेहतर विकास में मदद मिल सके इसीलिए ग्वार की फली को प्रेग्नेंट महिला की डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है।

प्रेगनेंसी में ग्वार की फली खाने के फायदे

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ग्वार की फली का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इसके सेवन से गर्भवती महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में ग्वार की फली का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

फाइबर

ग्वार की फली में घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिल को कब्ज़, एसिडिटी, जैसी समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है। साथ ही ग्वार की फली का सेवन करने से पाचन क्रिया को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

आयरन

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाली आयरन की कमी के कारण एनीमिया की समस्या से परेशान हो सकती है, इसके अलावा आयरन की कमी के कारण गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या, शिशु के विकास में कमी, डिलीवरी के दौरान परेशानी बढ़ सकती है, आदि। इन सभी परेशानियों से बचाव के लिए और बॉडी में आयरन की मात्रा को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला को अपने आहार में ग्वार की फली का सेवन जरूर करना चाहिए।

कैल्शियम

कैल्शियम की मात्रा ग्वार की फली में भरपूर होती है, ऐसे में ग्वार की फली का सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर

प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रैशर का होना गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। और ग्वार की फली में हाइपोग्लाइसेमिक और हाइपोलिपिडेमिक गुण मौजूद होते हैं, जिससे यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट में शामिल करती है तो महिला के ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल में रखने के साथ हदय सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

मधुमेह

ग्लाइको न्यूट्रिएंट से भरपूर ग्वार की फली का प्रेगनेंसी के दौरान सेवन करने से गर्भवती महिला को गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि यह ब्लड में शुगर लेवल को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही यदि कोई गर्भवती महिला यदि शुगर की समस्या से परेशान होती है तो ग्वार की फली का सेवन करने से शुगर को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

शिशु के लिए है बेहतर

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला हर कोशिश करती है, ऐसे में महिला को अपनी डाइट में ग्वार की फली को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन के और फोलिक एसिड न केवल गर्भ में भ्रूण के बेहतर विकास में मदद करते हैं बल्कि जन्म के समय शिशु को होने वाली बीमारियों से भी सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

ब्लड फ्लो होता है बेहतर

आयरन की मात्रा भरपूर होने के कारण ग्वार की फली का सेवन करने से बॉडी में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ने में मदद मिलती है। साथ ही इससे बॉडी में ब्लड फ्लो भी बेहतर तरीके से होता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान हर एक अंग तक पर्याप्त ऑक्सीजन और ब्लड पहुंचाने में मदद मिलती है। और बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों को कम करने और गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास को होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ग्वार की फली का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। ऐसे में इन सभी फायदों के लिए गर्भवती महिला को ग्वार की फली को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

ब्रैस्ट के स्ट्रेच मार्क दूर करने के तरीके

हर लड़की या महिला सुंदर व खूबसूरत दिखना चाहती है। अपनी सुंदरता को बरकरार रखने के लिए या उसे बढ़ाने के लिए हम सभी कुछ ना कुछ उपाय करते रहते है। लड़कियों और महिलाओं को अपने जीवन में बहुत से शारीरक व हार्मोनल बदलावों से गुजरना पड़ता है इन्ही बदलावों के कारण कई बार हमारे शरीर पर कुछ दाग आ जाते है। इन दागो में सबसे आम है स्ट्रेच मार्क।

स्ट्रेच मार्क क्या है?

जब शरीर पर पतली और लम्बी लाइनें दिखने लगे तो समझ लीजिये स्ट्रेच मार्क है। शुरुआत में यह हल्के पिंक या पर्पल कलर की होती है, कुछ समय बाद इनका रंग बदल जाता है।

स्ट्रेच मार्क क्यों होते है?

स्ट्रेच मार्क्स किसी को भी शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकते है। यह मार्क्स हमारे शरीर के अंदर टिशू ब्रेकडाउन के कारण होते है। जब हमारे अंदर की त्वचा में खिचाव आता है तब यह निशान पड़ जाते है। आइये जानते है स्ट्रेच मार्क्स किस कारण हो सकते है।

  • प्रेगनेंसी की दौरान जब हमारा वेट बढ़ता है तब भी स्ट्रेच मार्क्स पड़ जाते है।
  • पुबर्टी में जब लड़कियों के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते है तब भी अक्सर ब्रैस्ट पर स्ट्रेच मार्क्स आ जाते है।
  • हार्मोनल बदलावों के कारण जब अचानक से किसी का वेट बढ़ता या घटता है तब भी स्ट्रेच मार्क्स पड़ जाते है।
  • जेनेटिक प्रॉब्लम होने से भी कुछ महिलाओं के शरीर पर स्ट्रेच पड़ जाते है।
  • कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के उपयोग से भी कई बार स्ट्रेच मार्क्स हो जाते है।

स्ट्रेच मार्क्स दूर करने के उपाय

यह मार्क्स जड़ से खत्म करना बहुत ही मुश्किल है। स्ट्रेच मार्क्स को कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स या मेडिसिन भी नहीं हटा सकते।कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स या मेडिसिन्स पर बहुत से पैसे बर्बाद करने से अच्छा कुछ घरेलु उपाय इस्तेमाल करें। घरेलु उपाय से स्ट्रेच मार्क्स बहुत जल्द ही हल्के पड़ जाते है।

आइये जानते है घरेलु उपाय जिनसे ब्रैस्ट के स्ट्रेच मार्क्स दूर हो सकते है।

तेल की मसाज :

  • मसाज एक साइंटिफिक तरीका है त्वचा के टिशू ब्रेकडाउन को ठीक करने का।
  • किसी भी प्राकृतिक तेल की मसाज रक्त संचरण में खराब हुए ब्रैस्ट टिशू को सही करने में सहायक होती है।
  • ऑलिव आयल, जोजोबा आयल, आलमंड आयल से उँगलियों को सर्कुलर मोशन में घुमाते हुए ब्रैस्ट की मसाज करें।
  • इस प्रकार रोज मसाज करने से स्तनों के स्ट्रेच मार्क्स हल्के पड़ने लगेंगे।

कोका बटर और शिया बटर :

  • कोका बटर और शिया बटर विटामिन इ से भरपूर होते है।
  • विटामिन इ हमारे त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • कोका बटर और शिया बटर स्किन क्रीम के रूप में भी आपको मिल जाएगा।

आलू का रस :

  • आलू में बहुत से विटामिन्स और मिनरल्स होते है।
  • इस के रस को इस्तेमाल करने से हमारे शरीर की डेड स्किल निकल कर नई स्किन आती है।
  • आलू के रस अलटरनेट डेज में ब्रैस्ट पर मसाज करें।
  • ऐसा करने से ब्रैस्ट की पुरानी त्वचा निकल जायेगी और नई त्वचा आएगी जिससे स्ट्रेच मार्क्स नहीं दिखेंगे।

अंडे का सफ़ेद भाग :

  • अंडे के सफ़ेद हिस्से में बहुत प्रोटीन होता है।
  • नहाने से पहले स्तनों पर अंडे के सफ़ेद भाग से मसाज करें।
  • सूखने के बाद नहाकर, हल्के हाथों से ब्रैस्ट पर ऑलिव आयल से मसाज करें।
  • ऐसा करने से स्ट्रेच मार्क्स खत्म हो जायेंगे।

निम्बू कर रस :

  • निम्बू एक प्राकृतिक एसिड के रूप में कार्य करता है।
  • रोजाना निम्बू के रस को स्ट्रेच मार्क्स वाले स्थान पर लगाइये।
  • सूखने के बाद धो लें।
  • ऐसा करने से जल्द ही आपके ब्रैस्ट से स्ट्रेच मार्क्स साफ़ हो जायेंगे।

एलोवीरा जेल :

  • एलोवेरा जेल त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है।
  • इससे हमारे शरीर के सभी दाग धब्बे साफ़ हो जाते है।
  • एलोवेरा जेल से सुबह-शाम स्तनों की मालिश करिये।
  • और सूखने के बाद धो लें।

यह कुछ आसान से घरेलु उपाय जो हमारे ब्रैस्ट के स्ट्रेच मार्क्स को साफ़ करने में सहायक होंगे। स्ट्रेच मार्क्स वाली जगह पर ज्यादा खुजली ना करें। खुजली करने से स्ट्रेच मार्क्स बढ़ जाते है। उम्मीद यह सभी उपाय आपको पसंद आएंगे।

गर्भ में पल रहे बच्चे से ऐसे बनाएं भावनात्मक सम्बन्ध

गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के जीवन के सबसे सुनहरे पलो में से एक होता है, और ये उसकी जिंदगी का एक नया अनुभव भी होता है, जैसे ही महिला को ये पता चलता है की वो माँ बनने वाली है, वैसे ही वो अपने शिशु के लिए सपने संजोने लगती है, और माँ को बच्चे से प्रेम होने लगता है, तीन से चार महीने के बाद बच्चा भी अपनी हरकते करनी शुरू कर देता है, ऐसे में माँ को चाहिए कि वो अपने अजन्मे बच्चे से सम्बन्ध बनाएं, ताकि वो आपको महसूस कर सकें, गर्भ में पल रहा शिशु भी बाहर की गतिविधियों को समझ सकता है, और यदि आप अपने पेट पर हाथ लगाती है तो वो आपको महसूस भी करता है।

इसीलिए बच्चे कई बार ज्यादा तेज शोर वाली जगह में जाने पर डर कर लाते भी मारने लगते है, इसीलिए आपको गर्भ से ही बच्चे की गतिविधियों पर ध्यान रख कर उनसे भावनात्मक सम्बन्ध बनाना चाहिए, और बच्चा जैसे ही जन्म लें तो बच्चा उसके स्पर्श को पहले से ही जनता हो, और वो उसे अनोखी न लगें डॉक्टर्स भी इस विषय में आपको बहुत सी राय देते है, की किस प्रकार आप गर्भ में पल रहे शिशु से भावनात्मक सम्बन्ध बना सकती है, तो आइये आज हम आपको इसी बारे में कुछ बताने जा रहे है, जो आपको गर्भ में पल रहे शिशु से भावनात्मक सम्बन्ध बनाने में मदद करती है।

बच्चे को अपना स्पर्श दें:-

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने अजन्मे शिशु से सम्बन्ध बनाने के लिए अपने पेट को स्पार्ह करते रहना चाहिए, इसके लिए आप तेल की मदद से अपने पेट की हलके हाथो से मालिश करते हुए बच्चे को अपने स्पर्श का अहसास दिला सकते है, जब आप अपने पेट पर मालिश करते है तो बच्चा हलकी सी कम्पन का अहसास करता है, और धीरे धीरे उसे आपके स्पर्श की पहचान हो जाती है, और बच्चे के जन्म के बाद भी आपके हाथो के स्पर्श का उसे पता चल जाता है।

बच्चे के साथ बातें करें:-

baby

जब बच्चा गर्भ में होता है तब वह आपको सुन सकता है, इसीलिए आपको अकेले में बच्चे से बातें करनी चाहिए, और आप चाहे तो कहानियां भी उन्हें सुना सकती है, इसके कारण बच्चा आपकी आवाज़ से अपिरिचित नहीं रहता है, वे जन्म के बाद भी आपका बच्चा उन आवाज़ के साथ सहज महसूस करता है, आप अपने पति के साथ बैठकर भी इस लम्हे का आनंद उठा सकती है, ऐसे में बच्चा अपने पापा की आवाज़ को भी पहचानने लगता है।

गर्भ में पल रहे बच्चे की हरकत पर प्रतिक्रिया दें:-

पहले लोग कहते थे की बच्चा जब पेट में कोई हरकत करता है तो वो आपसे कुछ कहना चाहता है, ऐसे में आपको अपने बच्चे के साथ भावनात्मक सम्बन्ध बनाने के लिए चाहिए की आप बच्चे को अपनी प्रतिक्रिया दें, या तो आप उनसे बातें करें, या फिर उन्हें गाना सुनाएँ, ऐसा करने से बच्चा महसूस करता है, और आपको भी अच्छा महसूस होता है।

बच्चे को संगीत सुनाएँ:-

music

गर्भ में पल रहे बच्चे को आपको पुरे नौ महीने संगीत सुनना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे गर्भ के अंदर भी इसे महसूस कर सकते है, क्योंकि बच्चा भी उस संगीत का अहसास कर सकता है, और उसके बाद जन्म के बाद जब भी बच्चा रोता है, तो उसे आप वही संगीत सुनाएँ, ऐसा करने से आपको खुद ही पता चलेगा की बच्चा जब वो संगीत सुनते ही चुप हो जायेगा, की बच्चा उस संगीत को पहचानता है, ऐसा करने से भी आप गर्भ में पलरहे शिशु से भावनात्मक रूप से जुड़ने में मदद ले सकते है।और हमेशा के लिए अपनी इन यादों को संजो कर भी रख सकते है।

अच्छी अच्छी बातों को सोचें:-

गर्भावस्था के समय आपको किसी भी प्रकार का तनाव नहीं लेना चाहिए, और हमेशा खुश रहना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है, और यदि आप चाहते है की आपका बच्चा हँसता हुआ इस दुनिया में आएं, तो उसके लिए जरुरी होता है की माँ खुद भी खुश रहें, क्योंकि माँ जो भी करता है बच्चा उसे अच्छे से समझते है, और उसे महसूस भी करता है।

योगा करें:-

योगा करना गर्भावस्था में केवल महिला के लिये ही नहीं बल्कि बच्चे के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि गर्भावस्था में अलग तरह का योगा करवाया जाता है, जो महिला को आराम पहुँचाता है, और इसके कारण बच्चे को भी आराम महसूस होता हैं, और बच्चा इसे महसूस भी करता है, इसीलिए महिला को इस तरीके का इस्तेमाल करके बच्चे और अपने स्वास्थ्य को भी ठीक रख सकती है।

पापा को भी दे थोड़ा समय:-

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केवल माँ को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के पिता को भी उसे समय देना चाहिए, उससे बातें करनी चाहिए, महिला के पेट पर स्पर्श करके बच्चे को अपने स्पर्श का अहसास दिलाना चाहिए, उसके साथ उससे बातें भी करनी चाहिए, ऐसा करने से बच्चा अपने माँ और पिता दोनों की ही आवाज़ और स्पर्श को अच्छे से पहचान सकता है, और उन्हें जन्म के बाद महसूस भी कर सकता है।

इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी भी ऐसे स्थान पर नहीं जाना चाहिए, जहाँ ज्यादा शोर हो, क्योंकि इसके कारण बच्चा असहज महसूस करता है, अपने आपको को तनाव में नहीं रखना चाहिए, थोड़े थोड़े समय के बाद बच्चे को अपना स्पर्श देते रहना चाहिए, उससे बातें करनी चाहिए, ऐसा करने से भी आप अपने बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ने में और अपने अहसास को उस तक पहुचाने में सफल हो सकते है, इसके साथ आपको गर्भावस्था के नौ महीने की एक बाबे एल्बम बनानी चाहिए, ताकि आपके बच्चे के बड़े होने पर आपसे इस तोहफे को गिफ्ट के रूप में देकर खुश कर सकें।

 

साँस की बदबू को दूर करने के उपाय

आप खुद ही सोचिये की आप किसी से बात कर रहे है, और सामने वाले व्यक्ति ने अपने हाथ को अपने नाक पर रखा है और आपसे दूर भागने का मौका ढूंढ रहा है तो आपको कैसा लगेगा? साँस से आने वाली बदबू के कारण आपको कई बार लोगो के सामने शर्मिंदा होना पड़ सकता है, और ये समस्या महिला और पुरुष दोनों को ही हो सकती है, अब आप ये सोच रहे होंगे की इसका क्या समाधान है, और इसका कारण क्या हो सकता है, तो कई बार ऐसा होता है की आपको भी पता नहीं होता है की आपकी साँस में से बदबू आ रही है, वो तो जब लोग आपसे बात करते हुए भागने लगते है, तो आपको पता चलता है।

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साँस से आने वाली बदबू आने के कई कारण हो सकते है, जैसे की कुछ लोग जो अपने मुँह की साफ़ सफाई नहीं करते है, पानी का कम सेवन करते है, पेट से सम्बंधित किसी समस्या से जो लोग हमेशा परेशान रहते है, पायरिया के रोगी, इसके अलावा शरीर में जिंक की कमी और शुगर की समस्या होने पर भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, और यह कोई ऐसी समस्या नहीं होती है की जिसका कोई समाधान न हो, तो आइये सबसे पहले जानते है की इसके कारण क्या होते है, और उसके बाद इस समस्या का इलाज आप किस तरह से कर सकते है, इस बारे में बात करेंगे।

साँस की बदबू आने के क्या क्या कारण होते हैं:-

  • जो लोग कब्ज़ से परेशान रहते है उन्हें ये समस्या होती है।
  • दांतों की साफ़ सफाई न रखने या पायरिया की समस्या होने पर।
  • जो लोग अपने आहार में लहसुन, लोंग, प्याज़, अदरक का सेवन अधिक करते है।
  • खाने के बाद कुल्ला न करने के कारण कई बार दांतों में खाना फंसा रहता है, जिसके कारण ये समस्या हो सकती है।
  • जो लोग पानी का सेवन भरपूर मात्रा में नहीं करते है।
  • शरीर में जिंक की कमी होने पर।
  • शुगर के मरीज़ को ये समस्या हो सकती है।
  • अगर आप लम्बे समय तक भोजन का सेवन नहीं करते हैं, तो भी आपकी साँस से बदबू आने लग जाती है।

साँस की बदबू से बचने के उपाय:-

निम्बू के रस का इस्तेमाल करें:-

निम्बू के रस का इस्तेमाल करके आपको साँस से आने वाली बदबू से निजात पा सकते है, इसके लिए आप एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच निम्बू का रस मिलाकर दिन में दो बार कुल्ला करें, कुछ दिन लगातार इस उपाय को करने से आपको फायदा होगा।

ग्रीन टी का सेवन करें:-

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ग्रीन टी में मौजूद एंटी बैक्टेरियल गुण आपको मुँह में पैदा होने गंदे बैक्टेरिया को खत्म करती है, जिसके कारण आपको मुँह से सम्बंधित बीमारियों से निजात पाने में मदद मिलती है, और साँस से आने वाली दुर्गन्ध से छुटकारा पाने में भी मदद मिलती है।

तुलसी और जामुन के पत्तो का इस्तेमाल करें:-

तुलसी आपके शरीर से सम्बंधित किसी भी परेशानी का समाधान करने में बहुत मदद करती है, और साँस से आने वाली दुर्गन्ध की समस्या से बचने के लिए आप नियमित सुबह तीन चार तुलसी के पत्ते और तीन चार जामुन के पत्तों को मिक्स करके अच्छे से चबाएं, आपको फ्रेश फील होगा, साथ ही साँस से आने वाली दुर्गन्ध से बचाव करने में आपको मदद मिलेगी।

अनार के पेड़ की छाल का इस्तेमाल करें:-

अनार के पेड़ की छाल भी साँस की बदबू की समस्या से राहत दिलाने में बहुत मदद करती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अनार के पेड़ की छाल को एक गिलास पानी में डाल कर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद उस पानी के गुनगुना होने पर उस पानी से कुल्ला करें, नियमित ऐसा करने से आपको इसका असर खुद दिखाई देगा।

मेथी का इस्तेमाल करें:-

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मेथी की चाय का सेवन करने से भी आपको मुँह से आने वाली बदबू की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप पानी में एक चम्मच मेथी को उबाल लें, उसके बाद दिन में कम से कम एक बार चाय की तरह इसका सेवन करें, आपको इस उपाय को करने से फायदा जरूर मिलेगा।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

आधा चम्मच बेकिंग सोडा को एक गिलास गरम पानी में डालकर उबाल लें, उसके बाद इस पानी से जब तक कुल्ला दिन में एक बार नियमित करें जब तक की आपको साँस की बदबू से राहत न मिलें, नियमित इसका कुल्ला करने से यह आपके मुँह के एसिड के स्तर को सही रखने में मदद करता है, जिससे आपको मुँह की बदबू की समस्या से राहत मिलती है।

खट्टे फलों का सेवन करें:-

खट्टे फलों में विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, जो आपको साँस से आने वाली बदबू की समस्या से निजात दिलाने में मदद करती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप यदि नियमित इनका सेवन करे इससे आपकी सेहत भी सही रहेगी, और आपका मुँह फ्रेश फील करेगा।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें:-

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सेब का सिरका भी आपको साँस की बदबू की समस्या से बचाने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक गिलास गुनगुने पानी में यदि दो चम्मच सिरके के डालकर उस पानी से कुल्ला करते है, तो आपको कुछ ही दिनों में इस समस्या से निजात मिल जाता है।

साँस की दुर्गन्ध से बचने के अन्य उपाय:-

  • सरसों के तेल में नमक मिलाकर अपने दांतों को साफ़ करने से आपके दांत भी साफ़ होते है, साथ ही मुँह के कारण साँस से आने वाली बदबू की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।
  • सौंफ, मिश्री, इलायची, मुलेठी, भुना जीरा, धनिया पिपरमिंट आदि प्राकृतिक माउथ फ्रेशनर हैं, इनका सेवन करते रहने से भी साँस से आने वाली बदबू से छुटकारा मिलता है।
  • इलायची और पुदीने का पान बनाकर चबाने से भी आपको साँस की बदबू से निजात मिलता है।
  • साँस से बदबू आने पर मुँह में एक लौंग रखकर चूस लें, साथ ही आप लौंग पाउडर को पानी में उबाल कर यदि उससे कुल्ला करते है तो भी आपको राहत मिलती है।
  • दालचीनी या उसके पाउडर को पानी में उबालकर कुल्ला करने से भी आपको राहत मिलती है।
  • इलायची और थोड़ी सी मुलहठी को चबाने से भी आपको इस समस्या से निजात मिलता है।
  • कीकर या नीम का दातुन नियमित करने से भी आपको मुँह की बदबू से निजात मिलता है।

तो ये कुछ कारण और उपाय हैं जिनकी मदद से आप अपनी साँस की बदबू की समस्या से निजात पा सकते है, इसके अलावा आपको अपने दांतों की साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए, खान पान में लापरवाही नहीं करनी चाहिए दिन में दो बार खासकर सुबह और रात को सोने से पहले ब्रश करके उसका सेवन जरुर करना चाहिए, ऐसा करने से भी आपको इस समस्या से बचाया जा सकता है।

प्रेगनेंसी में पेट पर खुजली से बचने के उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत से परिवर्तन आते है, वो उनके स्वास्थ्य से सम्बंधित भी होते है और साथ ही शारीरिक भी होते है, ऐसे ही गर्भावस्था में महिला के पेट पर या पेट के निचले हिस्से में खुजली होना एक आम बात होती है, और ये कोई बिमारी नही होती जिसे लेकर आप असहज महसूस करें, इसके कारण आपके शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा का बढ़ना या समय के साथ आपके पेट के आकार में परिवर्तन आने के कारण आपकी त्वचा में खिंचाव भी हो सकता है।

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जैसे जैसे प्रेगनेंसी के समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे महिला के पेट का आकार भी बढ़ने लगता है, जिसके कारम त्वचा में खिंचाव आने के साथ रूखापन भी आने लगता है, गर्भ में जैसे जैसे शिशु का विकास होता है, वैसे वैसे पोल्विक हिसा फैलता है, जिसके कारण पेट पर होने वाली खुजली की समस्या हो जाती है, ऐसे में आपको घबराने की जरुरत नहीं होती है, बल्कि आप घर बैठे ही कुछ तरीको का इस्तेमाल करके आसानी से इस समस्या से राहत पा सकते है, जैसे की नैरायल के तेल का इस्तेमाल, बेकिंग सोडा का इस्तेमाल ऐसे ही बहुत से उपाय है तो आइये आपको विस्तार से हम बताते है जो आपकी इस समस्या का समाधान करके आपको खुजली से राहत दिलाएंगे, और साथ ही आपकी त्वचा को पोषण देने में भी आपकी मदद करेंगे और यदि आपको खुजली की ज्यादा समस्या है तो आप इस बारे में अपने डॉक्टर से भी राय ले सकते है।

ओटमील का इस्तेमाल करें:-

गर्भावस्था में होने वाली खुजली से बचने के लिए आप अपने नहाने के पानी में एक कप थोड़ी देर भिगोया हुआ दलिया मिला दें, और उसके बाद इस पानी से नहाएं, थोड़े ही दिनों के नियमित इस्तेमाल के कारण आपको पेट पर होने वाली खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

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बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करने पर भी आप प्रेगनेंसी में होने वाली पेट पर खुजली की समस्या से राहत पा सकते है, इसके लिए आप अपने नहाने के पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर उससे स्नान करें, या फिर आप एक चम्मच बेकिंग सोडा में थोड़ा सा पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और अपने पेट पर लगाएं, उसके बाद पानी से अपने पेट को अच्छे से साफ़ करें, ऐसा करने से भी आपको खुजली की समस्या से राहत मिलती है।

मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें:-

जैसे जैसे गर्भावस्था में पेट का आकार बढ़ता है वैसे ही त्वचा में खिंचाव उत्त्पन्न होता है, जिसके कारण आपको खारिश होने लगती है, इस समस्या से बचने के लिए और अपनी त्वचा से रूखेपन को दूर करने के लिए आपको मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए, जिसके कारण आपको त्वचा के रूखेपन की समस्या से राहत मिलती है, और पेट पर होने वाली खुजली से भी आराम मिलता है।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

नारियल का तेल आपकी त्वचा को अच्छे से पोषण देने और आपकी त्वचा से जुडी हर समस्या के समाधान में आपकी मदद करता है, प्रेगनेंसी में होने वाली पेट पर खुजली की समस्या से बचने के लिए आपको नारियल के तेल को हल्का सा गरम करके अच्छे से अपने पेट पर लगाना चाहिए ऐसा करने से आपको पेट पर होने वाली खुजली की समस्या से राहत मिलती है।

एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें:-

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एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करके भी आप प्रेगनेंसी में होने वाली पेट पर खुजली की समस्या से राहत पा सकती है, इसके लिए आप एलोवेरा के पत्ते को काट कर उसका गुद्दा निकाल कर अच्छे से अपने पेट पर लगाएं और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, उसके बाद पानी की मदद से इसे साफ कर दें, इसके कारण आपकी त्वचा को नमी मिलेगी, और आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलेगी।

गरम पानी से न नहाएं:-

खुजली होने का एक कारण आपका गरम पानी से नहाना भी हो सकता है, यदि आप इस समस्या से राहत पाना चाहती है, तो आपको बिलकुल गरम पानी की जगह हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए, ऐसा करने से आपको खुजली की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

नमी युक्त साबुन का इस्तेमाल करें:-

यदि आपको पेट पर खुजली की समस्या है तो आपको किसी भी तरह के सोप का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपकी त्वचा रूखी हो जाती है, जिसके कारण इसे अच्छे से पोषण नहीं मिल पाता है, और नतीजा आपको खुजली हो जाती है, आपको किसी अच्छे से नमी युक्त साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए, जिसके कारण आपकी त्वचा की नमी को बरकरार रखने में मदद मिलें।

ज्यादा टाइट कपडे न पहने:-

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प्रेगनेंसी में होने वाली खुजली का एक कारण आपका अधित टाइट कपड़ें पहनना भी हो सकता है, क्योंकि इसके कारण कपड़ो और आपकी बॉडी के बीच में घर्षण उत्त्पन्न होते है जिसके कारण आपको खुजली की समस्या हो जाती है, इसीलिए यदि आप इस समस्या से बचना चाहते है, तो जितना हो सकें आपको प्रेगनेंसी में अपने साइज से ढीले कपडे ही पहनने चाहिए।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें:-

गर्भावस्था के समय में पेट के आकार के बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर हाथ नहीं जाता है, जिसके कारण वहां की अच्छे से साफ़ सफाई नहीं हो पाती है, और आपको खुजली की समस्या हो जाती है, इसीलिए यदि आप खुजली की समस्या से राहत पाना चाहते है तो इसके लिए आप अपनी साफ सफाई का भी ध्यान रखें अपने पेट पर मैल को न जमने दें।

डॉक्टर से राय लें:-

यदि आपको अत्यधिक और हमेशा ही खुजली की समस्या रहती है, तो आपको इसके लिए अपने डॉक्टर से भी संपर्क करना चाहिए क्योंकि कई बार ज्यादा खुजली के कारण इन्फेक्शन या रैशेस का भी खतरा हो जाता है, जिसके कारण आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए यदि आपको भी प्रेगनेंसी के समय ज्यादा खुजली होती है, तो आपको अपने डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके आप प्रेगनेंसी में होने वाली पेट पर खुजली की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा आप किसी भी तेल से मसाज करके अपनी त्वचा को नमी युक्त बना सकते है, जिसके कारण त्वचा रूखी नहीं रहती है, और आपको खुजली की समस्या भी नहीं होती है, तो यदि आपको भी प्रेगनेंसी में ऐसी परेशानी है तो आप भी इनमे से किसी भी तरीके का इस्तेमाल करके इस समस्या से रहत पा सकती है।

गर्भवती महिलाएं होली पर भूलकर भी ये न करें

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गर्भावस्था में होली की सावधानियां

होली रंगों का त्यौहार है जिसे सभी बड़े धूम-धाम से मनाते हैं, क्यूंकि सालभर में सिर्फ एक यही त्यौहार है जब सभी एक रंग में रंगे दिखाई पड़ते हैं। लेकिन गर्भवती महिला को होली के दिन अपना खास ख्याल रखना चाहिए। शिशु केयर के साथ-साथ आपको कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। क्यूंकि इस दौरान आपको सिर्फ अपनी ही नहीं गर्भ में पल रहे शिशु का भी ध्यान रखना होता है, जो हर प्रकार से आप पर निर्भर है।

होली खेलना सभी को अच्छा लगता है लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान होली खेलना गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। आज हम आपको कुछ खास टिप्स दे रहे हैं जिन्हे आपको होली के दिन ध्यान रखना है।

गर्भवती महिलाओं के लिए होली टिप्स

रंगों से बचें

होली वाले दिन जो सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात होती है वो है होली के रंगों का इस्तेमाल। होली के रंगों में कई तरह के केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं जो त्वचा पर बुरा असर डालते हैं। गर्भवती महिलाओं की त्वचा पहले से ही बहुत सेंसिटिव होती है। जो इन केमिकल मिले रंगों से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाती है।

अगर आप केमिकल मिले रंगों से होली खेलती हैं तो आपको स्किन एलर्जी, रैशेस, दाने, त्वचा पर लालिमा, खुजली आदि की समय हो सकती है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए ठीक नहीं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को सिंथेटिक कलर्स का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आप केवल होम मेड कलर्स और फूलों की होली खेलें।

पानी से होली न खेलें

होली खेलते समय सभी पानी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन पानी के कारण फर्श या ग्राउंड में फिसलन आ जाती है जिससे फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप ऐसे फिसलन वाले हिस्से पर होली खेलेंगी तो आपके गर्भ को नुकसान पहुँचने की संभावना हो सकती है। इसीलिए पानी से होली ना खेले।

इसके अलावा ज्यादा देर तक पानी में भीगे रहने से सर्दी, खांसी, जुखाम, बुखार जैसे संक्रमण होने की संभावना भी बनी रहती है। और गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का संक्रमण गर्भ में पल रहे शिशु के लिए ठीक नहीं होता। इसलिए पानी की होली से दूर रहें।

खान-पान का ध्यान रखें

होली के दिन रंगों और पानी के अलावा आपको खान-पान को लेकर भी खास सावधानी बरतनी चाहिए। होली वाले दिन सभी के घर में पकवान और मिठाइयां बनती हैं। ऐसे में अगर आप बहुत ज्यादा मिठाई या ऑयली फ़ूड खा लेती हैं तो ये आपकी पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकता है, आपको अपच, गैस या जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए होली वाले दिन खान-पान में सावधानी बरतें।

कुछ नया ट्राई न करें

होली के दिन बहुत से लोग भांग, ठंडाई, खस का शर्बत, कोल्ड ड्रिंक्स, आदि जैसे कई तरह के पेय पदार्थों का प्रबंध रखते हैं। गर्भवती महिलाओं को इस तरह के पेय पदार्थों से दूर रहना चाहिए। कुछ भी नए पेय पदार्थ ट्राई नहीं करने चाहिए जो आपने पहले कभी खाया-पीया न हो। कोल्ड ड्रिंक्स आप ना पियें, आप ठंडाई पी सकती हैं लेकिन केवल मेवे और दूध वाली। नशीले पदार्थों से दूर रहें और भांग वाली ठंडाई का सेवन भूलकर भी नहीं करें। ये आपके और गर्भ के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

गर्भवती महिला होली वाले दिन क्या करें?

सही कपडे पहनें

गर्भवती महिला कोशिश करें होली वाले दिन घर से बाहर नहीं निकलें, अगर किसी खास कारण से घर के बाहर जाना पड़े तो फुल स्लीव्स के कपडे पहनें और गोगल्स जरूर लगाएं। इससे बाहर के वातावरण में मौजूद रंग और बाकी हानिकारक कण आँखों और त्वचा को इफ़ेक्ट नहीं करेंगे। आँखों में रंग जाने से आपको आँख में एलर्जी हो सकती है। इसलिए आँखों और त्वचा का खास ख्याल रखें।

शरीर में तेल लगाएं

भले ही आप किसी के साथ रंगों से होली नहीं खेलने वाली हैं लेकिन फिर भी सुबह अपने शरीर और बालों में नारियल या सरसों का तेल अच्छी तरह लगा लें। ताकि अगर भूलवश या उत्साह में कोई आपके ऊपर रंग डाल भी दे तो उसका असर आपकी स्किन पर न हो। अगर आप पहले से सावधानी बरतेंगी तो बाद में किसी तरह की कोई समस्या नहीं होगी।

अच्छा खाना खाएं

बाकी सबके साथ-साथ आपको अपने खान-पान का ध्यान रखना है। होली वाले दिन आप हेल्दी भोजन लें। फ्रूट्स, सलाद, जूस, नारियल पानी, केसर दूध, सही समय पर नाश्ता, लंच और डिनर करें। ज्यादा हेवी फ़ूड नहीं खाए।

आग से दूर रहें

होलिका दहन वाले दिन आपको होलिका के नजदीक नहीं होना चाहिए। जहाँ होलिका जल रही है उस स्थान से थोड़ा दूर ही खड़ी हो। नजदीक खड़े होने पर आग की गर्मी, और धुँआ आपको परेशान कर सकता है। इसलिए ध्यान रखें। आप पूजा कर सकती हैं लेकिन ज्यादा देर तक उस स्थान पर खड़ी न रहें।

हरी मिर्च खाने का फायदे

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खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए यदि हरी मिर्च का इस्तेमाल न किया जाए, तो ऐसा लगता है की खाने में कुछ कमी रह गई, आपके मुँह का स्वाद बढ़ाने के साथ हरी मिर्च खाने से आपको सेहत सम्बन्धी बहुत से फायदे भी मिलते हैं, क्योंकि इसमें विटामिन ए, बी6, सी, आयरन, कॉपर, पोटेशियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, बीटा कैरोटीन, आदि भरपूर मात्रा में होते हैं, और यह भी आपके लिए किसी औषधि से कम नहीं होती है, आपकी ख़ूबसूरती से लेकर कैंसर जैसी समस्या का इलाज करने में भी यह बहुत मदद करती है, तो क्या आप भी जानना चाहते हैं की हरी मिर्ची खाने से आपको कौन कौन से फायदे होते हैं यदि हाँ तो आइये आज हम आपको इसके फायदे बताते हैं।

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दमे के रोगी को लाभ मिलता है:-

यदि कोई व्यक्ति दमे के रोग से परेशान हैं, और वो नियमित एक चम्मच ताज़ी हरी मिर्च का रस निकालकर और इसमें शहद डालकर इसका सेवन करता है, तो उसे थोड़े ही दिनों में इसका असर दिखाई देने लगता है, और दमे से राहत पाने में मदद मिलती है।

शुगर को कण्ट्रोल करने में मदद करती है:-

शुगर के रोगी के लिए भी मिर्ची बहुत फायदेमंद होती है, यदि आप नियमित एक गिलास पानी में एक हरी मिर्च पुंछ के साथ डालकर पानी में भिगोकर रख देते हैं, और उसके बाद सुबह उठकर इसमें से मिर्च निकालकर इस पानी का सेवन कुछ दिनों तक नियमित करते है तो आपको इसका फायदा मिलता है, और आपकी लौ और हाई दोनों तरह की शुगर को फायदा मिलता है।

कैंसर से बचाती है:-

हरी मिर्च का सेवन नियमित रूप से करने पर इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स आपके शरीर में इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिसके कारण आपको कैंसर से बचने में मदद मिलती है, जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें फेफड़ो के कैंसर होने का खतरा अधिक होता है, और पुरुषो में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने के लिए भी हरी मिर्च का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

स्किन में निखार आता है:-

स्किन में निखार लाने के लिए भी आप हरी मिर्च का सेवन कर सकते है, क्योंकि यह आपके ब्लड को साफ़ करती है, जिससे आपकी त्वचा में आने वाला फ़र्क़ भी साफ़ दिखाई देता है, इसके लिए आप दिन में तीन या चार हरी मिर्च का सेवन कर सकते है, लेकिन याद रखें ऐसा न हो की सुंदरता को बढ़ाने के लिए आप अधिक हरी मिर्च खा लें इससे आपको जलन जैसी समस्या भी उत्त्पन हो सकती है, इसीलिए इसका सही मात्रा में ही सेवन करें।

पाचन क्रिया में सुधार आता है:-

हरी मिर्च का सेवन करने से आपको भोजन को पचाने में मदद मिलती है, और इसका कारण होता है की इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिससे आपको कब्ज़ जैसी परेशानी से भी बचने में मदद मिलने के साथ आपके पाचन तंत्र को भी सुधारने में मदद मिलती है।

इन्फेक्शन से बचाव करने में मदद मिलती है:-

बैक्टेरियल गुणों से भरपूर होने के कारण यह आपको इन्फेक्शन से भी बचाव करने में मदद करती है, स्किन इन्फेक्शन हो या बॉडी में कहीं इन्फेक्शन हो इसके सेवन से बैड बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है, जिससे आप संक्रमण से बचे रहते हैं।

एनीमिया से राहत दिलाता है:-

महिलाओ में ज्यादातर एनीमिया की समस्या देखने को मिलती है, और इसका कारण शरीर में होने वाली आयरन की कमी होती है, लेकिन यदि आप नियमित रूप से हरी मिर्च का सेवन करते हैं तो ऐसा करने से आपको अपने शरीर में ब्लड की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है, जिससे आपको इस परेशानी से भी राहत मिलती है।

ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करता है:-

हरी मिर्च का सेवन करने से भी आपके शरीर में शुगर के कारण रक्तचाप का स्तर खराब होने की आशंका रहती है, और हरी मिर्च का सेवन करने से आपको इस समस्या का समाधान मिलता है, जिससे आपको ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

मूड को फ्रैश रखने में मदद करता है:-

जब भी आप हरी मिर्च का सेवन करते है, तो इससे मस्तिष्क में एंडोर्फिन का संचार होता है, जिससे आपके मूड को फ्रैश होने में मदद मिलती है, और इसे मूड बूस्टर के नाम से भी जाना जाता है, इसीलिए अपने मूड को तरोताजा रखने के लिए भी आप इसका सेवन कर सकते है।

हरी मिर्च का सेवन करने के अन्य फायदे:-

  • विटामिन ए की मात्रा भरपूर होने के कारण हरी मिर्च का सेवन करने से आपकी आँखों को बहुत फायदा मिलता है।
  • आपके शरीर को बैक्टेरिया फ्री रखने के साथ आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में भी हरी मिर्च बहुत फायदेमंद होती है।
  • विटामिन सी की मात्रा भरपूर होने के कारण आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • फ्री रेडिकल से बचाव करने में मदद करती है जिससे कैंसर से भी बचाव करने में मदद मिलती है।
  • आपके शरीर में कैलोरी को बर्न करके शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी और वजन को कम करने में मदद मिलती है।
  • आपकी स्किन में कसाव लाने के लिए और उसे खूबसूरत बनाने के लिए हरी मिर्च में मौजूद विटामिन इ बहुत फायदेमंद होता है।
  • हदय सम्बन्धी बीमारियों को दूर करने व् शरीर में रक्त के थक्को के जमने की समस्या को खत्म करने में मदद मिलती है।
  • आपके चोट का का घाव भरने के साथ आपके दांतों, और हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है क्योंकि इसमें विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है।

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तो ये हैं कुछ फायदे जो आपको मिर्ची का सेवन करने से होते हैं इसीलिए इसे अपने आहार में चाहे कम ही पर जरूर शामिल करना चाहिए ताकि आपके खाने का जायका बढ़ने के साथ आपको स्वस्थ रहने में भी मदद मिल सकें।

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