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सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। जैसे की खाने पीने, सोने, व्यायाम करने, उठने, बैठने आदि। इन सभी चीजों का ध्यान रखना प्रेगनेंसी के दौरान जरुरी होता है क्योंकि इन्ही छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखने पर गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन गर्भवती महिला को मौसम को देखकर भी अपना ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि मौसम का ध्यान न रखा जाये तो इसके कारण भी गर्भवती महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की यदि सर्दी का मौसम है और आप ठंडी चीजों का सेवन कर रही हैं तो इसके कारण सर्दी के कारण होने वाली परेशानियों का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

सर्दियों में गर्भवती महिला रखें इन बातों का ध्यान

ठण्ड के मौसम में गर्भवती महिला को अपने स्वास्थ्य को सही रखने और सर्दी के कारण होने वाली परेशानी से बचाव के लिए बहुत सी बातों का अच्छे से ध्यान रखने की जरुरत होती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की सर्दियों में गर्भवती महिला को किन -किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कपडे

ठण्ड से बचने के लिए गर्भवती महिला को सबसे पहले अपने पहनावे का खास ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को गर्म कपडे पहनने चाहिए, सिर ढक कर रखना चाहिए, पैरों में जुराबे जरूर पहननी चाहिए, बाहर जाने पर हाथों में ग्लव्स भी पहनने चाहिए। इसके अलावा महिला को ज्यादा टाइट कपडे भी नहीं पहनने चाहिए जिसमे महिला को परेशानी का अनुभव हो। सर्दियों में होने वाली परेशानी से बचने के लिए सही कपड़ो का गर्भवती महिला द्वारा पहनना बहुत जरुरी होता है।

आहार

सर्दी में अपने आहार का भी गर्भवती महिला को अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की मौसमी फल व् सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए। खासकर विटामिन सी युक्त फल जैसे संतरा, निम्बू, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। यदि महिला सर्दियों में अपने आहार का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद मिलती है।

पानी

सर्दी का मौसम होने पर प्यास बहुत कम लगती है, लेकिन यदि गर्भवती महिला पानी कम पीती है तो इसके कारण गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु दोनों को ही परेशानी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को पानी पीने का सर्दियों में भी खास ध्यान रखना चाहिए इससे गर्भवती महिला को हाइड्रेटेड रहने, गर्भ में शिशु के विकास बढ़ने, महिला को स्किन सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नॉन वेज

नॉन वेज जैसे की मछली, चिकन आदि में प्रोटीन, आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। साथ ही इनके सेवन से गर्भवती महिला को ठण्ड के कारण होने वाली परेशानी से भी बचे रहने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला नॉन वेज का सेवन कर लेती है, तो सर्दियों में महिला को हफ्ते में दो बार कम से कम इसका सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की नॉन वेज अच्छी जगह से लिए हुआ होने के साथ अच्छे से पका हुआ हो।

अंडे

सर्दी के मौसम में गर्भवती महिला को नियमित रूप से कम से कम दो अंडो का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला और शिशु के लिए अंडे बहुत ही फायदेमंद होते है। और सर्दियों में होने वाली सर्दी जुखाम की समस्या से भी महिला को बचाने में मदद करते हैं।

साफ सफाई

सर्दी के मौसम में इन्फेक्शन बहुत जल्दी फैलता है, ऐसे में इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को साफ़ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला को इन्फेक्शन की समस्या होती है तो उसका असर शिशु पर भी पड़ सकता है। ऐसे में महिला और शिशु दोनों को इन्फेक्शन जैसी कोई परेशानी न हो इसके लिए गर्भवती महिला को सर्दी के मौसम में इन्फेक्शन से बचाव के लिए साफ़ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।

दूध और केसर

सर्दियों में ठण्ड से बचने के लिए गर्भवती महिला को नियमित रात को सोने से पहले दूध में केसर के दो तीन रेशे डालकर उसे अच्छे से उबालने के बाद गुनगुना रहने पर पीना चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ने के साथ महिला को सर्दी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

चाय

बहुत सी ऐसी महिलाएं होती है जिनका चाय पीने का बहुत मन करता है और सर्दियों में तो बहुत ज्यादा महिला की चाय पीने की इच्छा हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की चाय में कैफीन की मात्रा अधिक होती है ऐसे में चाय का अधिक सेवन बॉडी में कैफीन की मात्रा को बढ़ा सकता है। जिसके कारण शिशु पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसीलिए एक या दो कप से ज्यादा चाय का सेवन गर्भवती महिला को सर्दियों में नहीं करना चाहिए।

दवाइयां

सर्दी खांसी की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान होना आम बात होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को न तो इस समस्या को अनदेखा करना चाहिए और न ही बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी भी तरह की दवाई का सेवन करना चाहिए। क्योंकि इसे अनदेखा करने के कारण यह परेशानी बढ़ सकती है जिसके कारण आपको ज्यादा दिक्कत हो सकती है। वही बिना डॉक्टर की राय के दवाई का सेवन भी शिशु की सेहत को नुक्सान पहुंचा सकता है।

स्किन केयर

सर्दी के मौसम में स्किन का ड्राई होना बहुत ही आम बात होती है, और स्किन के ड्राई होने के कारण गर्भवती महिला को खुजली जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को अपनी स्किन को अच्छे से मॉइस्चराइज करके रखना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को सर्दियों के दौरान रखना चाहिए। क्योंकि इन सभी बातों का ध्यान रखने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को सर्दी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

क्या आपका शिशु कम हलचल करता है पेट में? यह कारण हो सकता है

गर्भ में शिशु की हलचल कम होने के कारण, पेट में शिशु की कम हलचल के कारण, गर्भ में शिशु की मूवमेंट से जुडी बातें, माँ के पेट में शिशु की हलचल कम होने के कारण

किसी भी महिला के लिए वो पल बहुत ही खास और यादगार होता है जब उसे पता चलता है की वो माँ बनने वाली है, लेकिन उससे भी खास पल वो होता है जब वो गर्भ में पहली बार शिशु की हलचल को महसूस करती है। गर्भ में शिशु की हलचल गर्भवती महिला को शिशु के सबसे करीब होने का अहसास करवाती है, और उसकी मातृत्व की भावना को बढ़ाती है। गर्भ में शिशु पांचवें महीने से हलचल शुरू कर देते हैं। शुरुआत में यह कम ही महसूस होती है लेकिन जैसे जैसे गर्भ में शिशु का विकास होता है उसकी हलचल को आप ज्यादा देर के लिए महसूस कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी के पांचवे महीने में दिन में एक या दो बार आपको शिशु की हलचल महसूस होती है, लेकिन सातवें आठवे महीने में यह थोड़े ज्यादा समय के लिए होती है। ज्यादा रौशनी में जाने पर या ज्यादा शोर वाली जगह पर जाने से शिशु असहज महसूस करता है तो यदि आप ऐसी जगह पर जाती है तो आप शिशु की हलचल को काफी ज्यादा तेजी से अनुभव करती हैं। लेकिन कई बार शिशु प्रेगनेंसी के सातवें आठवें महीने में भी उतनी हलचल नहीं करते हैं, जितनी की उन्हें करनी चाहिए। लेकिन ऐसा क्यों होता है? इसके कई कारण हो सकते हैं, तो आइये आज हम आपको बताते हैं शिशु की कम हलचल के कारण कौन कौन से हो सकते हैं।

भ्रूण की हलचल की शुरुआत करने पर

यदि आपका गर्भ अभी पांच महीने का है तो शिशु अभी ज्यादा बड़ा नहीं होता है, ऐसे में शिशु गर्भ में हलचल तो करता है, लेकिन आप उसे ज्यादा समय के लिए महसूस नहीं करते हैं। दिन में ज्यादा से ज्यादा दो बार आप उसे महसूस कर सकते हैं। लेकिन जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे ही आप गर्भ में शिशु की हलचल को ज्यादा महसूस करने लग जाते हैं।

शिशु के कमजोर होने पर

यदि गर्भ में शिशु का वजन अच्छे से नहीं नहीं बढ़ता है, उसे अच्छे से पोषण नहीं मिलता है, तो शिशु कमजोर हो जाता है। जिसके कारण भी शिशु की गर्भ में हलचल में कमी आ सकती है।

शिशु से जुडी कोई समस्या होने पर

यदि शिशु का मानसिक या शारीरिक विकास अच्छे से नहीं हो पाता है यानी विकलांगता होने पर भी आपको हो सकता है गर्भ में शिशु की हलचल कम महसूस हो, इस बारे में एक बार आपको अपने डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में शिशु कम हलचल करता है लेकिन यदि आठवे नौवें महीने में दो घंटे से ज्यादा हो जाये और शिशु कोई हलचल न करें तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलें। साथ ही पांचवें महीने के बाद भी यदि आपको शिशु की हलचल महसूस न हो तो इसे भी इग्नोर न करें।

शुगर की बीमारी हो तो क्या-क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

Diabetes Patient Diet in Hindi  

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ब्लड प्रेशर और मधुमेह आज के समय की कुछ ऐसी बीमारियां है जो हर दूसरे व्यक्ति को अपनी चपेट में लिए हुए है। 30 वर्ष का युवा हो या 60 वर्ष का वृद्ध सभी इन बिमारियों से परेशान दिखाई पड़ते है। ये कुछ ऐसी बीमारियां है जो एक बार यदि व्यक्ति को अपने चपेट में ले लें तो जिंदगी भर इससे पीछा नहीं छुड़ा पाता। इसीलिए तो हाई बीपी और मधुमेह के रोगियों को जिंदगी भर इस बीमारी का दवा खानी पड़ती है।

बीपी की समस्या को तो व्यक्ति फिर भी झेल लेता है लेकिन मधुमेह में सिर्फ दवाओं का सेवन ही नहीं होता इसके अलावा खान पान और जीवनशैली में भी बहुत से बदलाव और परहेज करने होते है। इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम हो जाती है जिसकी पूर्ति इंजेक्शन या दवाओं के द्वारा की जाती है।डायबिटीज में क्या-क्या खाएं

शुगर को नियंत्रित करने के लिए लोग बहुत सी अंग्रेजी दवाओं का प्रयोग करते है लेकिन क्या आप जानते है की घरेलू उपायों और कुछ आयुर्वेदिक दवाओं के द्वारा भी आप इस समस्या का निदान कर सकते है। लेकिन बीमारी के उपचार के साथ-साथ खान पान में भी कुछ विशेष परहेज करने होते है। जिनके बारे में सभी को ज्ञात नहीं होता। इसीलिए आज हम आपको मधुमेह में किन चीजों को खाना चाहिए और किन को नहीं इस बारे में बताने जा रहे है। ताकि आप इस इनके बारे में अच्छे से जान सके। तो आइये जानते है शुगर पेशेंट्स के लिए कौन सी डाइट परफेक्ट रहती है?

शुगर की बीमारी में क्या खाना चाहिए?

1. सब्जियां :

शुगर के मरीज को सब्जियों में मेथी, पालक, करेला, बथुआ, सरसों का साग, कददू, ककड़ी, तोरई, टिंडा, शिमला मिर्च, भिंडी, सेम, शलगम, खीरा, ग्वार की फली, चने का साग, सोया का साग, गाजर आदि का सेवन कर सकते है। क्योंकि ये सभी सब्जियां और इसके साथ-साथ लहसुन शरीर में ग्लूकोज़ के लेवल को कम करने में मदद करता है।

2. मसालें :

मेथी, लहसुन और दालचीनी कुछ ऐसे मसालें है जो शरीर में ग्लूकोज़ के लेवल को कम करते है जबकि गुड़ इसे बढ़ाने का काम करता है। एलोवेरा जूस और जेल भी इसके लिए अच्छा है। ग्रीन टी शरीर में ग्लूकोज़ को सोखने की क्षमता बढ़ाती है।

3. घी / तेल :

अपने खाने में अलसी, सोयाबीन, सरसों, सूरजमुखी के तेल का प्रयोग करें। सूरजमुखी और कॉर्न आयल को सरसों के तेल में मिलाकर प्रयोग करें। पर ध्यान रहे पुरे दिन में 15 से 20 ग्राम (3 से 4 चम्मच) से अधिक न लें। महीने भर के लिए 1/2 आयल पर्याप्त है।

4. फाइबर और ओमेगा एसिड की मात्रा :शुगर की बीमारी हो तो क्या-क्या खाना

बिना पोलिश किये हुए ब्राउन राइस, छिलके वाली डालें, चोकर मिले हुए आटे का ही सेवन करें। इसके साथ सोयाबीन, साबुत चना, राजमा, लोभिया आदि का भी प्रयोग किया जा सकता है। अपने नियमित नाश्ते में स्प्राउट्स भी सम्मिलित करें। ब्राउन ब्रेड, ओट्स, दलिया आदि खा सकते है। पुरे दिन में 4 से 5 कटोरी सब्जियां सलाद के रूप में खाएं।

5. जूस :

आप करेला, गाजर, पालक, लौकी, शलगम, पता गोभी आदि सब्जियों का फ्रेश जूस निकालकर पी सकते हैं। इस समस्या में फलों के रस के सेवन की मनाही की जाती है क्योंकि इनमे शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। अगर पीना ही है तो बिना चीनी का दिन भर में आधा ग्लास जूस का ही सेवन करें।

6. फल :

जामुन आपके लिए ही बने है। इसके अलावा आंवला, नींबू, संतरा, टमाटर, पपीता, खरबूजा, नाशपाती, आदि भी आप खा सकते है। अमरुद, स्ट्रॉबेरी, मौसमी, माल्टा, अंजीर, सिंघाड़ा भी आप खा सकते है। लेकिन ध्यान रहे दिन भर में केवल 150 ग्राम फल का ही सेवन करें। और इन्हे भोजन के साथ नहीं बल्कि उससे बहुत पहले या बहुत बाद लें जिससे शुगर का लेवल बढे नहीं।

7. नॉन वेज :

तंदूरी या उबले हुए मुर्गे का मीट और मछली को उबालकर या भून कर खा सकते है। दिनभर में 1 या 2 अंडे खा सकते है। लेकिन इस बिमारी में शाकाहारी होना ही अच्छा रहता है।

8. दूध या उससे बनी चीजें :

लो फैट वाला दूध, दही, पनीर आदि का सेवन कर सकते है। डबल टोंड दूध आपके लिए अच्छा है, दिन भर में 2 कप चाय पी सकते है लेकिन बिना चीनी वाली। नमकीन लस्सी या छाछ का सेवन भी आप कर सकते है।

शुगर के मरीज को क्या-क्या नहीं खाना चाहिए?

1. अन्य चीजें :

मैदा, सफ़ेद चावल, शराब, बियर आदि आपके लिए नहीं है। आपको भूलकर भी इनका सेवन नहीं करना चाहिए। बोर्नविटा, हॉर्लिक्स, बूस्ट, माल्टोवा, प्रोटीनेक्स आदि का भी आप सेवन नहीं कर सकते।

2. मीठे पदार्थ :

इस बारे में आपको विस्तार से बताने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि मधुमेह के रोगियों को मीठी चीजों से दूर रहने के लिए ही कहा जाता है। लेकिन जानकारी के लिए बता दें, चीनी, गुड़, मिठाई, टॉफ़ी, चॉकलेट, आइस क्रीम आदि का सेवन आप नहीं करें।

3. फल :

सेब, केला, चीकू, आम, शहतूत, तरबूज, लीची, शरीफा, चेरी, अंगूर, अनानास और गन्ना आदि का सेवन डायबिटीज के मरीजों को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें मीठे की मात्रा बहुत अधिक होती है जो आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है।

4. सब्जियां :

आलू, अरबी, शकरगंद और कचालू जैसी स्टार्च युक्त सब्जियां भी मधुमेह के रोगियों को नहीं खानी चाहिए।

5. घी / तेल :

देसी घी, वनस्पति घी – तेल, नारियल आयल, मक्खन, क्रीम, खोया और पनीर का सेवन आपको नहीं करना चाहिए। महीने में आधा किलो से ज्यादा तेल या घी का सेवन नहीं करना चाहिए।

6. नॉन वेज :

अंडे की जर्दी, कीमा, गुर्दे या लिवर का मीट, बकरे का मीट, अंडे का पीला भाग, मटन आदि का सेवन डायबिटीज के मरीजों को नहीं करना चाहिए। यह उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता।

7. इनसे भी बचें :

चाय, कॉफ़ी, शेक, जूस, आदि में भी शुगर की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है जो आपके लिए अच्छी नहीं होती।इसके अलावा पास्ता, वाइट ब्रास आदि में भी शुगर होता है इसीलिए मधुमेह के रोगियों को इनका सेवन भी नहीं करना चाहिए।

अब तो आप अच्छी तरह से जान गए होंगे की मधुमेह के रोगियों को किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए और किन चीजों का नहीं? लेकिन ध्यान रहे जिन चीजों को आप खा रहे है उनमे चीनी मिलाने के विचार को बिलकुल छोड़ दें। क्योंकि चीनी डायबिटीज के मरीजों की सबसे बड़ी दुश्मन होती है। जो आपकी समस्या को और भी खतरनाक बना सकती है।

प्रेगनेंसी में मसूर दाल खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के समय हर वो चीज खानी चाहिए जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ प्रेग्नेंट महिला व् शिशु के लिए फायदेमंद भी हो। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला जो भी खाती है उसका असर गर्भ में शिशु तक पहुँचता है। ऐसे में हर कोई गर्भवती महिला को खान पान में विशेष सावधानी बरतने की सलाह देता हैं। प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को दालों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि दालें पोषक तत्वों की खान होती है। तो लीजिये आज हम भी इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी के दौरान मसूर दाल का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में मसूर दाल खानी चाहिए या नहीं

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को मसूर दाल का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि इसमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ भ्रूण के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में मसूर दाल का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में मसूर दाल खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि मसूर दाल का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला व् भ्रूण को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से उन फायदों के बारे में जानते हैं।

फाइबर

  • मसूर दाल में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है।
  • जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पाचन क्रिया को बेहतर करने के साथ कब्ज़, एसिडिटी, अपच जैसी परेशानी से भी महिला को बचाने में मदद करती है।

प्रोटीन

  • प्रोटीन से भरपूर आहार का सेवन करने से बॉडी में मांसपेशियों की मजबूती को बने रहने में मदद मिलती है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि मसूर दाल का सेवन करती है।
  • तो इससे बॉडी में प्रोटीन की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला की मांसपेशियों को मजबूत होने के साथ भ्रूण के शरीर व् मस्तिष्क की मांसपेशियों को बेहतर होने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने व् शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

कैल्शियम

  • मसूर दाल में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
  • जो प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
  • जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को थकान, कमजोरी, जोड़ो में दर्द आदि की परेशानी से आराम मिलता है ।
  • साथ ही इससे भ्रूण की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास को होने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में मसूर दाल खाने से मिलता है फोलेट

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फोलेट युक्त आहार को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है।
  • क्योंकि फोलेट भ्रूण के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • इससे शिशु की रीढ़ की हड्डी व् मस्तिष्क का बेहतर विकास होने में मदद मिलती है।
  • साथ ही फोलेट से शिशु को जन्म के समय होने वाली परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

इम्युनिटी बूस्टर

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की इम्युनिटी कमजोर पड़ सकती है।
  • लेकिन मसूर दाल में मौजूद गुण प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं।
  • और ऐसा तभी होता है जब गर्भवती महिला इसे अपनी डाइट में शामिल करती है।
  • इम्युनिटी के मजबूत होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

शारीरिक परेशानियों को करता है नियंत्रित

  • मसूर दाल का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • हदय सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • मसूर दाल का सेवन करने से ब्लड में शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को मसूर दाल का सेवन करने से मिलते हैं। लेकिन जरुरत से ज्यादा मसूर दाल का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण पेट में गैस की समस्या हो सकती है। साथ ही यदि आप किसी बिमारी से जुडी दवाई का सेवन कर रही हैं। तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर पूछ लेना चाहिए की क्या आप मसूर दाल का सेवन कर सकती हैं या नहीं।

नौवें महीने में डिलीवरी कब होती है?

डिलीवरी कब होती है

प्रेगनेंसी का आठवां महीना जैसे ही खत्म होता है वैसे ही गर्भवती महिला सोचने लगती है की डिलीवरी कब होगी। वैसे डॉक्टर द्वारा एक तिथि दी जाती है जिससे अनुमान लगाया जा सकता है की महिला की डिलीवरी उस समय के आस पास ही होगी। लेकिन ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है की उसी तारीख को ही महिला शिशु को जन्म दे। क्योंकि यह पूरी तरह से महिला के स्वास्थ्य और गर्भ में शिशु के विकास और पोजीशन पर निर्भर करता है। बहुत से केस ऐसे भी देखने को मिलते हैं जहां नौवें महीने की शुरुआत में ही डिलीवरी हो जाती है तो कुछ महिलाएं नौवा महीना खत्म होने के बाद भी शिशु को जन्म देती है। ऐसे में महिला के लिए यह समझ पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है की डिलीवरी शुरुआत में होगी, महीने के बीच में ही हो जाएगी या आखिर तक महिला को इंतज़ार करना पड़ेगा।

नौवें महीने किस समय होती है डिलीवरी?

डिलीवरी को लेकर यदि बात की जाये तो यदि गर्भ में शिशु स्वस्थ है, शिशु अपनी डिलीवरी की सही पोजीशन में आ चूका है, और बॉडी में प्रसव के लक्षण दिखाई देते हैं तो डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है। लेकिन कई बार पूरे नौ महीने खत्म होने के बाद भी महिला को प्रसव पीड़ा का अहसास होता है तो उस समय शिशु का जन्म हो सकता है। पर कुछ केस में गर्भ में शिशु सही पोजीशन में नहीं आ पाता है, गर्भनाल को शिशु लपेट लेता है, महिला को कोई परेशानी होती है, शिशु गर्भ में मल पास कर देता है तो ऐसे केस में प्रेगनेंसी के नौवें महीने की शुरुआत में भी डॉक्टर डिलीवरी के लिए बोल सकते हैं। और ऐसी परिस्थितियां होने पर महिला की डिलीवरी नोर्मल की बजाय सिजेरियन की जाती है ताकि महिला और शिशु दोनों को किसी भी तरह का नुकसान न हो।

साथ ही कुछ केस ऐसे भी देखने को मिलते हैं जहां डॉक्टर की देय तिथि के बाद भी महिला को प्रसव पीड़ा का अहसास नहीं होता है। ऐसे केस में शिशु को गर्भ में कोई परेशानी न हो तो डॉक्टर आर्टिफिशल दर्द लगाकार या सिजेरियन डिलीवरी द्वारा प्रसव की राय देते हैं। ऐसे में नौवें महीने में हर गर्भवती महिला की डिलीवरी एक ही समय हो ऐसा भी कोई जरुरी नहीं होता है क्योंकि हर महिला की शारीरिक परिस्थितियां और लक्षण अलग अलग हो सकते हैं। जिसके कारण किसी महिला को प्रेगनेंसी के पहले हफ्ते तो किसी महिला को आखिरी हफ्ते में भी डिलीवरी हो सकती है। साथ ही ही कई बार तो आठवें महीने में भी कुछ महिलाएं शिशु को जन्म दे देती हैं जिसे प्री मेच्योर डिलीवरी कहा जाता है। इसीलिए डिलीवरी के लिए सही समय का अनुमान लगा पाना थोड़ा मिश्किल हो सकता है क्योंकि हर गर्भवती महिला की स्थिति अलग अलग हो सकती है।

डिलीवरी के लक्षण

डिलीवरी एक ही दम नहीं हो जाती है बल्कि डिलीवरी होने से पहले महिला की बॉडी कुछ संकेत दे सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी होने से पहले गर्भवती महिला की बॉडी कौन -कौन से संकेत दे सकती है।

  • पेट में नीचे की और अधिक भार महसूस होने के साथ पेट व् सीने में हल्कापन महसूस होना।
  • गर्भाशय में संकुचन अधिक होने के कारण।
  • रुक रुक कर पेट में दर्द का अहसास होना, कभी तेजी से दर्द का अहसास होना तो कभी हल्के फुल्के दर्द का अनुभव होना।
  • एमनियोटिक फ्लूड का बाहर आना, और फ्लूड के साथ हल्के खून के धब्बे महसूस होना।
  • कब्ज़ की समस्या का अधिक होना, या बहुत जल्दी जल्दी यूरिन पास करने की इच्छा होना।
  • मांसपेशियों में खिंचाव का अनुभव होना, पेट और पीठ की मांसपेशियों के खिचाव के साथ दर्द का बढ़ना।
  • गर्भवती महिला की भावनाओं में उतार चढ़ाव होना या शिशु की आने की तैयारी में जुट जाना भी महिला के प्रसव का समय पास आने का लक्षण होता है।

तो यह हैं गर्भवती महिला की डिलीवरी से जुडी कुछ बातें, साथ ही महिला की डिलीवरी जब होने वाली होती है उससे जुड़े कुछ लक्षण। ऐसे में यदि महिला को इनमे से कोई भी लक्षण महसूस हो तो महिला को बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। साथ ही नौवें महीने में हमेशा डॉक्टर के साथ संपर्क में बने रहना चाहिए।

प्रेगनेंसी में घर के ये काम नहीं करने चाहिए

प्रेगनेंसी में घर के ये काम नहीं करने चाहिए, प्रेगनेंसी में भूलकर भी न करें यह घरेलू काम, गर्भवती महिला को घर में यह काम नहीं करने चाहिए, प्रेगनेंसी के लिए खास टिप्स

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपनी बेहतर तरीके से केयर करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में खान पान से लेकर महिला को अपने उठने बैठने तक का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। ताकि किसी भी कारण महिला को परेशानी न हो, क्योंकि महिला यदि कोई लापरवाही करती है तो इसका बुरा प्रभाव केवल महिला पर ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। लेकिन सारा दिन महिला आराम भी नहीं कर सकती है। साथ ही घर के बहुत से काम भी होते हैं जो महिला को करने पड़ते हैं। लेकिन कुछ ऐसे काम भी है जो गर्भवती महिला को घर में नहीं करने चाहिए क्योंकि इनसे महिला को परेशानी हो सकती है। तो लीजिए आज हम आपको कुछ ऐसे ही घर के कामो के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।

पोछा लगाना

घर में नियमित रूप से झाडू पोछा लगाना पड़ता है ताकि घर में साफ़ सफाई रहे लेकिन गर्भवती महिला को ज्यादा झुककर न तो झाड़ू लगाना चाहिए और न ही जमीन पर बैठकर ज्यादा रगड़कर पोछा लगाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से महिला के पेट पर दबाव पड़ता है, खासकर जब महिला का पेट निकल जाता है तो ऐसा करने से गर्भ में शिशु भी असहज महसूस कर सकता है।

कपडे धोना

गर्भवती महिला को पैरों के भार बैठकर कपडे भी नहीं धोना चाहिए, क्योंकि कपड़ो को साफ़ करने के लिए महिला को पूरा जोर लगाना पड़ता है और पैरों के भार बैठकर ऐसा करने से पेट पर जोर पड़ता है। जिसके कारण महिला को पेट में दर्द या अन्य किसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जैसे की समय से पहले डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

केमिकल का इस्तेमाल

पोछा के पानी में केमिकल डालकर पोछा लगाने, कपडे धोने के के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले साबुन, सर्फ का इस्तेमाल करने से उसकी खुशबू के कारण आपको इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है। ऐसे में जितना हो सके आपको इन सब चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

फर्श पर बिखरे सामान को उठाना

गर्भवती महिला को यदि घर में फर्श पर यदि सामान बिखरा हुआ दिखाई देता है तो उसे पेट के बल झुककर उसे भी नहीं उठाना चाहिए। क्योंकि इससे पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है साथ ही यदि आप बैठकर भी उठाते हैं तो भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप पैरों के भार न बैठें बल्कि जोड़ो के भार आराम से फर्श पर बैठकर सामान इक्कठा कर लें।

किचन में बरते सावधानी

यदि आप किचन में काम करते हैं तो भी आपको ज्यादा समय तक एक ही जगह पर खड़े नहीं रहना चाहिए इससे थकान, पैरों में सूजन आदि समस्या हो सकती है। इसीलिए आराम के लिए कुर्सी आदि को किचन में रखे ताकि बीच बीच में बैठकर थोड़ा आराम भी करती रहें।

घर के पालतू जानवर का काम

यदि आपके घर में आपने किसी पालतू जानवर को पाल रखा है तो उसकी साफ़ सफाई भी आपको नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपको बहुत जल्दी इन्फेक्शन हो सकता है, और जो शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में या तो घर का कोई और सदस्य या आप मास्क और हाथों पर ग्लव्स पहनकर ही उसका काम करें।

भारी सामान न उठायें

घर में आपको पानी से भरी बाल्टी, ज्यादा भारी सामान, कोई भारी कुर्सी, सिलिंडर आदि नहीं उठाना चाहिए। क्योंकि शुरूआती दिनों में जहां इस तरह की लापरवाही गर्भपात का कारण बन सकती है। वहीँ बाद में इसके कारण पेट में दर्द, पीठ में दर्द, आदि की समस्या हो सकती है।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं करना चाहिए इसके अलावा पंखे साफ़ करना, मेज पर चढ़कर किसी काम को करना, ज्यादा सीढ़ियां चढ़ना, आदि काम से भी महिला को परहेज करना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रखने में मदद मिल सके।

बड़ी उम्र होने पर माँ बनने पर होने वाली परेशानियां

बड़ी उम्र होने पर माँ बनने पर होने वाली परेशानियां:-

बड़ी उम्र में प्रजेन्सी की परेशानियां: माँ बनना हर औरत के लिए सौभाग्य की बात होती हैं| माँ बनने की ख़ुशी से ही औरत झूम उठती हैं| परंतु आज के समय में हर एक व्यक्ति की राय माँ बनने के मामले में बहुत अलग हैं| कुछ औरते कहती हैं की समय से बच्चा हो जाये तो ठीक हैं, परंतु कई औरते ऐसी भी हैं जो ये सोचती हैं, की 35 या फिर 30 के बाद ही बच्चा करना सही होता हैं| परंतु ज्यादा उम्र होने पर कभी-कभी बहुत सी समस्याओ का सामना करना पड़ सकता हैं|

औरत की नई जिंदगी शादी के बाद शुरू होती हैं, परंतु उसका नया जन्म बच्चा होने के बाद होता हैं| और औरत को जीवन को नया आधार मिलता हैं| माँ बनने के लिए वैसे तो सही उम्र 23 से 27 ही निर्धारित की गई हैं| परंतु कई बार औरते जल्दी माँ बनने का निर्णय नहीं लेती हैं, ऐसे माँ बनने में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं|

आपको ये पता होना चाहिए जैसे-जैसे लड़की की उम्र बढ़ती हैं वैसे ही अंडे भी पुराने हो जाते हैं| इसीलिए जो महिलाये माँ बड़ी उम्र होने पर माँ बनने पर होने वाली परेशानियांबनने के लिए ज्यादा उम्र का चुनाव करती हैं उन्हें इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए| आज के समय में महिलाओ को कैरियर बनाने के साथ इस बारे में भी जरूर विचार करना चाहिए| इसीलिए आपको कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए| और आपको ज्यादा उम्र में माँ बनने से होने वाली परेशानियों के बारे में भी पता होना चाहिए|

माँ बनने के लिए ध्यान देने योग्य जरुरी बाते:-

माँ बनने से पहले आपको कुछ बातो का ध्यान आवश्य रखना चाहिए| जिससे की आपको किसी समस्या का बाद में सामना न करना पड़े| आइये जानते हैं की माँ बनने से पहले आपको किन-किन बातो का ध्यान रखना चाहिए|

  • माँ बनने से पहले आप इस बारे में जरूर सोचे की आप मानसिक व् शारीरिक रूप से तैयार है या नहीं| और यदि नहीं तो आप इस बारे में पहले तैयार हो|
  • माँ बनने के लिए सही उम्र का चुनाव करे| न तो उम्र को बहुत कम चुने और न ही बिलकुल ज्यादा| ज्यादा उम्र होने पर कई बार माँ बनने में दिक्कत आ सकती हैं|
  • माँ बनने से पहले अपने शरीर की जाँच करवाये| पता करे की आप माँ बनने के लिए शारीरिक रूप से तैयार हैं या नहीं|
  • माँ बनने के लिए आप अपने डॉक्टर से भी परामर्श ले सकती हैं|
  • अपने पति के साथ इस विषय में विचार जरूर करे|
  • आप एक नवजात शिशु को सँभालने व् उसकी देखभाल करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं इस बात का भी ध्यान रखे|

बड़ी उम्र में माँ बनने से होने वाली परेशानियां:-

सिजेरियन के चांस बढ़ जाते हैं:-

ज्यादा उम्र होने पर यदि आप माँ बनने के बारे में सोचती हैं तो ऐसे में सिजेरियन के चांस बढ़ जाते हैं| क्योंकि समय बढ़ने के साथ शरीर पर असर पड़ता हैं| जिसके कारण कई बार शरीर में वो ऊर्जा नहीं रह जाती जिससे की नार्मल डिलीवरी हो सके| इसीलिए बड़ी उम्र में 10 में से 8 केस नार्मल की बजाय सिजेरियन डिलीवरी के होते हैं|

फर्टिलिटी पर असर पड़ता हैं:-

समय बढ़ने के साथ फर्टिलिटी कम हो जाती हैं| जिसके कारण यदि आप बढ़ती उम्र में माँ बनने का फैसला करती हैं, तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं| और समय के साथ आपकी फर्टिलिटी पर भी असर पड़ता हैं| जिससे की बच्चा पैदा करने में आपको समस्याओ का सामना करना पड़ सकता हैं|

तनाव आ जाता हैं:-

बढ़ती उम्र के साथ माँ बनने में भी समस्या आनी शुरू हो जाती है| जिसके कारण कई बार महिलाये तनाव में आ जाती हैं| और कई बार तो डिप्रेशन में भी चली जाती हैं| जिसके कारण उनके स्वाभाव में भी परिवर्तन आ जाता हैं| कई बार तनाव के कारण महिलाये किसी से बात भी करना पसंद नहीं करती हैं| इसीलिए आपको समय रहते माँ बनने का फैसला ले लेना चाहिए| जिससे की आपको तनाव का सामना न करना पड़े|

बच्चे पर आ सकती हैं परेशानी:-

कई बार ज्यादा उम्र होने के कार महिलाओ के शरीर में भी कमी आ जाती हैं| ऐसे में माँ बनने के साथ उनकी जिम्मेवारी भी बढ़ जाती हैं| जिसके कारण कई बार उन्हें बच्चे को सँभालने में तकलीफ का सामना करना पड़ सकता हैं| और ऐसे में बच्चे को भी सही ढंग से केयर नहीं मिल पाती हैं| और बच्चो को तो पूरी केयर की जरुरत होती हैं, यदि उनकी सही ढंग से केयर न की जाये तो उन्हें तकलीफ का सामना करना पड़ सकता हैं| इसीलिए आपको सही उम्र में ही बच्चा पैदा करने का फैसला ले लेना चाहिए|

गर्भधारण करने में आ सकती हैं तकलीफ:-

ज्यादा उम्र होने के बाद गर्भधारण करने में भी समस्या उत्तपन हो जाती हैं| क्योंकि शुक्राणु पूरी तरह से योनि में अंडे को निषेचित नहीं कर पाते हैं| जिसके कारण गर्भधारण नहीं हो पाता हैं| आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आपको ३० से पहले ही माँ बनने का फैसला ले लेना चाहिए|

  • तो ये हैं कुछ बाते जिनका ध्यान आपको माँ बनने से पहले ध्यान रखना चाहिए साथ ही आपको माँ बनने से पहले अपने आप को मानसिक व् शारीरिक दोनों ही तरह से तैयार करना चाहिए|आज के इस भागदौड़ वाले समय में हमे ये भी नहीं भूलना चाहिए की माँ बनना भी एक औरत के लिए उतना ही जरुरी हैं जितना की उनका कैरियर| इसीलिए उन्हें माँ बनने की सही उम्र का चुनाव करके, माँ बनने की अनमोल ख़ुशी को हासिल करना चाहिए| और बड़ी उम्र में माँ बनने से होने वाली परेशानियों से बचना चाहिए|
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लड़का पैदा करने का गर्भधारण ऐसे होता है

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गर्भवती महिला के लक्षणों को देखकर घर के बड़े अक्सर अंदाजा लगाते रहते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की। लेकिन ज्यादातर लोग चाहते हैं की उनका बेटा खासकर जब बात पहले बच्चे की आती है। लेकिन इसका फैसला आप नहीं कर सकते हैं। यह तो क्रोमोसोम पर निर्भर करता है, की xx मिलते हैं या xy। क्या आप भी बच्चे की प्लानिंग कर रही हैं और चाहती है की आपको एक बेटा हो, तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहें हैं जिन्हे ट्राई करने के बाद गर्भ में लड़का होने के चांस बढ़ जाते हैं तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

लड़का कैसे पैदा होता है

पुरुष के शुक्राणु दो तरह के होते हैं जिन्हे की क्रोमोसोम के नाम से भी जाना जाता है एक होता है x क्रोमोसोम और y क्रोमोसोम, महिला में केवल दो x क्रोमोसोम ही होते हैं। सम्बन्ध बनाने के बाद जब पुरुष का x और महिला का x क्रोमोसोम मिलते हैं तो एक लड़की जन्म लेती है, जबकि यदि महिला का x और पुरुष का y क्रोमोसोम मिलते हैं तो महिला के गर्भ में पल रहा शिशु लड़का होता है।

लड़का पैदा करने के लिए ध्यान देने योग्य बातें

गर्भ में कौन सा शिशु है वो लड़का है या लड़की इसे आप निर्धारित नहीं कर सकते हैं लेकिन आप चाहे तो ट्राई जरूर कर सकते हैं। तो लीजिये आज हम आपके लिए ऐसे टिप्स लाएं हैं जिनकी मदद से लड़का पैदा करने के गर्भधारण के चांस बढ़ जाते हैं।

सम्बन्ध किस दिन बनाएं

पीरियड्स खत्म होने के चौथी, छठी, 8वीं, 10वीं, 12वीं, 14वीं और 16वीं रात को सम्बन्ध बनाने से लड़के के गर्भ में ठहरने के चांस बढ़ जाते हैं। इसके लिए जैसे की आपको रात को दस बजे पीरियड्स आये हैं तो अगले दिन दस बजे आपका एक दिन पूरा होगा ऐसे गिनने के बाद ही आप सम्बन्ध बनाएं साथ ही 5वीं, 7वीं, 9वीं, 11वीं, 13वीं तथा 15वीं रात सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

ज्यादा समय बिताएं पार्टनर के साथ

यदि आप लड़के की चाह रखते हैं तो चौथी, छठी, 8वीं, 10वीं, 12वीं, 14वीं और 16वीं रात को एक बार नहीं बल्कि दो से तीन बार आपको अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से x और y क्रोमोमसोम के मिलने के चांस बढ़ जाते हैं, जिससे गर्भ में लड़का होने के चांस बढ़ जाते हैं।

ऐसे बनाएं सम्बन्ध

सम्बन्ध बनाते समय पुरुष को ऐसे पोजीशन को ट्राई करना चाहिए जिसमे शुक्राणु सीधा गर्भाशय की दीवार पर जाएँ, ताकि x और y क्रोमोमसोम के मिलने के चांस बढ़ सकें। साथ ही दोनों संतुष्ट भी हो, इसके लिए महिला के साथ पीछे से सम्बन्ध बनाना सबसे बेहतरीन तरीका होता है।

तनाव न लें

लड़के की चाहत रखने वाले कपल को सम्बन्ध बनाते समय या वैसे भी तनाव नहीं लेना चाहिए, इससे शुक्राणु की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है, जिसके कारण आपकी समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में यदि आप लड़के की चाह रखते हैं तो आपको और आपके पार्टनर को तनावमुक्त रहना चाहिए।

चाय पीएं

यदि आप अपने पार्टनर से सम्बन्ध बनाना चाहते हैं और चाहते हैं की उससे उसके गर्भ में एक लड़का हो तो सम्बन्ध बनाने से आधा घंटा पहले एक कप तेज चाय या कॉफ़ी का सेवन करें। ऐसा करने से शुक्राणुओं की गति तेज हो जाती है। और उनके लम्बे समय तक जिन्दा रहने की क्षमता बरकरार रहती है।

तो यह हैं कुछ खास तरीके जिनका इस्तेमाल यदि आप करते हैं तो ऐसा करने से गर्भ में लड़का होने के चांस बढ़ जाते हैं। इसके अलावा महिला और पुरुष को अपने खान पान का भी बेहतर तरीके से ध्यान रखना पड़ता है, ताकि उन्हें स्वस्थ रहने में मदद मिल सके, और साथ ही शुक्राणु की गुणवत्ता भी बेहतर हो।

यूट्यूब विडिओ –

लड़का पैदा करने के लिए क्या करें? लड़का पैदा करने की टिप्स।

पीरियड्स में पेट दर्द के घरेलू इलाज

How to Reduce Stomach Pain in Periods?

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पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए महिलाएं बहुत जल्दी अपनी समस्यायों से परेशान हो जाती है। ऐसे में हर महीने आने वाले मासिक धर्म सभी के लिए असहनीय होते है। पहले के समय के मुकाबले आज के समय में महिलाओं को अधिक दर्द और तकलीफ का सामना करना पड़ता है। जिसका कारण बदलती जीवनशैली, प्रदुषण और खान पान में बदलाव होता है।

पहले की महिलाएं केवल पौष्टिक आहार ही खाती थी लेकिन आजकल की महिलाएं खाने के साथ साथ फ़ास्ट फ़ूड और बाहर के खाने को भी पसंद करती है जो सीधे सीधे उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। इसके अलावा मासिक धर्म का अनियमित होना भी महिलाओं के उन दिनों में दर्द का विशेष कारण बनता है।

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इन दिनों होने वाला दर्द एक बार नहीं होता बल्कि रह रहकर उठता है जो और भी ज्यादा असहनीय होता है। अचानक होने वाला पेट दर्द और कमर व् पीठ का दर्द सहना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में अधिकर लड़कियां दवाइयां खाने के बारे में सोचती है जो की बिलकुल गलत है। क्योंकि यह एक प्राकृतिक क्रिया है जिसमे अगर आपने हस्तक्षेप किया तो परिणाम घातक हो सकते है।periods

डॉक्टर भी केवल गंभीर स्थिति में ही दवाओं के सेवन की अनुमति देते है। ऐसे में क्या करें? क्योंकि दर्द के साथ ऑफिस या घर में काम कर पाना लगभग असंभव हो जाता है। लेकिन कुछ उपाय है जिनकी मदद से आप अपने सभी काम भी कर सकती है और आपका दर्द भी छूमंतर हो जाएगा। यहाँ हम आपको उन्ही उपायों के बारे में बताने जा रहे है। तो आइये जानते है क्या है वे उपाय –

मासिक धर्म में होने वाले पेट दर्द को दूर करने के घरेलू उपाय :-

1. दूध :

इसमें कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो इन दिनों होने वाले दर्द को कम करने में मदद करती है। साथ ही शरीर की कैल्शियम की कमी हो भी पूरा करती है। इसके लिए आप दूध को थोड़ा गर्म करके पीएं।

2. पपीता :

मासिक धर्म में होने वाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए आप इसका सेवन कर सकती है। कई बार ब्लड का फ्लो ठीक तरह से नहीं हो पाने के कारण भी पेट में दर्द होने लगता है। पपीता इस फ्लो को ठीक करने में मदद करता है। जिससे दर्द में राहत मिलती है।

3. गाजर :

हलवा बनाने के लिए ही नहीं अपितु यह सब्जी आपके दर्द को ठीक करने में भी आपकी मदद कर सकती है। स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है, पीरियड्स के दिनों में गाजर का रस पीने से ब्लड का फ्लो अच्छे से होता है जिससे दर्द में भी आराम मिलता है।

4. लैवेंडर :lavender oil'

पीरियड्स के समय में लैवेंडर के तेल से पेट की मालिश करने में बहुत आराम मिलता है। इसके लिए थोड़ा सा लैवेंडर एसेंशियल आयल लें और उससे 10 से 15 मिनट के लिए पेट की मालिश करें।

5. तुलसी :

माना इन दिनों तुलसी के पास जाने के इजाजत आपको नहीं मिलती लेकिन आप किसी और की मदद से कुछ तुलसी के पत्ते ले सकती है। इन पत्तों को मिलाकर बनाई गयी चाय दर्द में आराम देने में मदद करती है। इसमें मौजूद तत्व दुःख रही मांसपेशियों को आराम देने का काम करते है।

6. गर्म पानी :

सुनने में थोड़ा अटपटा है लेकिन ये उपाय काफी कारगर है। मासिक धर्म के दिनों में गर्म पानी से स्नान करने से भी पीरियड्स के दिन में होने वाले दर्द में आराम मिलता है। इसके लिए नहाते समय मग्गे से सीधे गर्म पानी अपनी नाभि और पेट पर डालें।

7. अदरक :

मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए कटी हुई अदरक को एक कप पानी में डालकर उबाल लें। आप चाहे तो इसमें शहद भी मिला सकती है। अच्छे से उबलने के बाद छान कर पी लें। दिन में 3 बार भोजन के बाद इसका सेवन करने से दर्द में राहत मिलेगी।

8. सौंफ :सौंफ खाने के फ़ायदे

सौंफ पेट के स्वास्थ्य और अंडाशय की जकड़न को सुधारती है जिससे ब्लड फ्लो में प्रॉब्लम नहीं आती। इसके लिए एक ग्लास पानी में सौंफ गर्म करें और छान कर उस पानी का सेवन करें। कुछ ही देर में दर्द में आराम मिल जाएगा।

9. खान पान पर ध्यान :

कई बार सही न्यूट्रीशियन नहीं मिलने की वजह से भी पीरियड्स के दिनों में पेट दर्द होने लगता है। ऐसे में जरुरी है की आप अपने खान पान पर ध्यान दें। इसके लिए विटामिन B6 युक्त भोजन का सेवन करें। क्योंकि यह पेट की सूजन को कम करता है। जबकि अखरोट और कद्दू के बीज इस दौरान होने वाली ऐंठन में आराम देते है।

10. जंक फ़ूड :

मासिक धर्म के दौरान बहुत सी बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। जैसे की जंक फ़ूड, इन दिनों जंक फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए। जिनमे बर्गर, पास्ता, कोल्ड ड्रिंक्स और शराब आदि सम्मिलित है। ये सभी फ़ूड शरीर में हॉर्मोन के संतुलन को बिगाड़ देते है जिससे दर्द बढ़ सकता है। इसलिए इन दिनों सादे और सिंपल भोजन का सेवन करना चाहिए।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से आप पीरियड्स में होने वाले पेट दर्द को आसानी से दूर कर सकते है। इसके लिए आपको कहीं बाहर जाने की भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये सभी उपाय आपके घर और किचन में ही मौजूद है। तो देर किस बात अब जब की पेट दर्द हो तो इन उपाय का इस्तेमाल करें और अपनी समस्या से राहत पाएं।

बरसाती बुखार से बचने के घरेलू उपाय

बदलते मौसम के साथ ही कई बार व्यक्ति बीमारियों की चपेट में आ सकता है, क्योंकि मौसम में बदलाव का असर आपके प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है, और साथ ही इसके कारण आपके इम्यून सिस्टम पर भी पड़ता है, खासकर बरसात के मौसम में मच्छर आदि होने के कारण इन्फेक्शन, मलेरिया, डेंगू, आदि होने का खतरा ज्यादा रहता है, और मौसम या वातावरण में होने वाले थोडे से बदलाव से भी हमारा शरीर बहुत जल्दी प्रभावित होता है, इसीलिए मौसम में होने वाले बदलाव के समय आपको अपने शरीर का अच्छे से ख्याल रखना चाहिए, बरसाती बुखार होने का सबसे बड़ा कारण होता है इन्फेक्शन।

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बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा समस्या आपको पानी के कारण होती है, इसीलिए इस समय में आपको कही भी न तो पानी को इक्कठा होने देना चाहिए और साथ ही आपको पानी को अच्छे से उबाल कर उसका सेवन करना चाहिए, क्योंकि आपका इम्यून सिस्टम कमजोर होने के कारण यह बहुत जल्दी आपको इन्फेक्शन या बुखार की चपेट में ला देता है, और बरसात का मौसम लगभग आ ही गया है, तो आइये आज हम आपको ऐसे घरेलू उपचार बताते है जिनका इस्तेमाल करके आप बरसात में होने वाले बुखार और इन्फेक्शन की समस्या से आपको बचाने में मदद करेगा, तो आइये जानते है की वो घरेलू उपाय कौन से है।

लहसुन का इस्तेमाल करें:-

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बरसाती बुखार से राहत पाने के लिए आप घर में लहसुन के साथ सरसों के तेल का इस्तेमाल करके इस परेशानी से राहत पा सकते है, इस उपचार को करने के लिए चार या पांच लहसुन की कलियाँ लें, उसके बाद इसमें चार या पांच चम्मच सरसों का तेल डालकर इसे अच्छे से किसी बर्तन में गरम करें, उसके बाद इसे ठंडा होने के लिए रख दें, उसके बाद इस तेल को छान कर इससे अच्छे से अपने तलवो की मसाज करें, आपको राहत मिलेगी।

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तुलसी का इस्तेमाल करें:-

तुलसी किसी आयुर्वेदिक औषधि से कम नहीं है, इसमें पाए जाने वाले एंटीसेप्टिक इंग्रीडिएंट्स आपको बैक्टेरिया, वायरस के कारण होने वाले संक्रमण व् रोगो से बच्छाव करने में मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए दिन में तीन से चार बार चार या पांच तुलसी के पत्तों को चाय में डाल कर अच्छे से उबाल लें, और उसका सेवन करें, इससे आपको सर्दी, खांसी, बुखार से राहत पाने में मदद मिलेगी।

पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें:-

बुखार होने का का एक कारण शरीर में होने वाली पानी की कमी भी हो सकता है, इसीलिए इन दिनों में आपको पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए, परन्तु ध्यान रखें की पानी साफ़ हो, और हो सकें तो पानी की उबाल कर ठंडा करके उसका सेवन करें, क्योंकि बरसात में पानी के कारण ही सबसे ज्यादा इन्फेक्शन फैलता है।

शहद का इस्तेमाल करें:-

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शहद की तासीर गरम होती है, इसीलिए ये बुखार से राहत दिलाने के साथ आपको बरसात में होने वाली सर्दी खांसी की समस्या से भी राहत दिलाने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक चम्मच शहद में चुटकी भर लौंग का पाउडर लें, लौंग और शहद के इस मिश्रण को दिन में दो बार लेने से ही आपको राहत का अहसास होगा।

सूखे अदरक का काढ़ा बनाकर पीएं:-

अदरक एंटी इन्फ्लैमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जो आपको बरसात के मौसम में बुखार से बचाने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप पानी में एक चम्मच सूखा अदरक, एक छोटा चम्मच हल्दी, काली मिर्च और थोड़ी सी चीनी डालकर अच्छे से उबाल लें, और इस मिश्रण को जब तक उबालते रहें जब तक की की यह आधा न रह जाएँ, उसके बाद इस काढ़े का सेवन दिन में तीन से चार बार करें, आपको इसके सेवन से बुखार से राहत पाने में मदद मिलेगी।

धनिया चाय का सेवन करें:-

धनिये में फाइटोनूट्रीअन्ट और विटामिन भरपूर होते है, जो आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में आपकी मदद करते है, और प्राकृतिक तरीके से आपको बुखार से निजात दिलाने में आपकी मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच धनिये के दानो को डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद इसे कप में छानकर स्वाद के अनुसार इसमें थोड़ा दूध और चीनी डालकर पीने से आपको बुखार से राहत मिलती है, दिन में दो या तीन बार आप इसका सेवन कर सकते है।

हर्बल चाय बनाकर उसका सेवन करें:-

herbal-tea

बरसात के मौसम में बुखार की समस्या से बचने के लिए आपको हर्बल चाय बनाकर उसका सेवन करना चाहिए, इसके लिए आप पुदीना, तुलसी, अदरक, शहद, निम्बू, बड़ी का फूल, काली मिर्च, दालचीनी, मुलैठी, आदि में से जो भी आपके पास हो पानी में डालकर उन्हें अच्छे से उबाल लें, और तब तक उबालते रहें जब तक पानी आधा न रह जाएँ, उसके बाद इसमें थोड़ा सा शहद मिलकर दिन में तीन से चार बार इसका सेवन करें, आपको जरूर रहत मिलेगी।

बरसाती बुखार से बचने के अन्य उपाय:-

  • साफ़ सफाई का ख़ास ध्यान रखें, अपने आस पास कही भी पानी या कूड़े का जमाव न होने दें।
  • तरल पदार्थो का सेवन भरपूर करें, परन्तु जितना हो सकें तले और मसालेदार खाने से परहेज रखें।
  • बर्फ के पानी में सूती कपडे को डालकर उसे अपने माथे पर रखें इससे भी आपको राहत मिलेगी।
  • खुले स्थान और रोड साइड बिक रही चीजों का सेवन बिलकुल न करें, क्योंकि इसके कारण आपको पेट से सम्बंधित परेशानी और इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है।
  • कटे हुए फल सलाद आदि का सेवन न करें, क्योंकि खुले में रहने के कारण इन पर भी बैक्टेरिया का जमाव हो जाता है।
  • हरी सब्जियों का सेवन न कतरें, क्योंकि इस समय कीड़े पतंगे बहुत अधिक होते है, और यदि करते भी हैं तो साफ़ सफाई का ध्यान रखें, और दही के साथ इनका सेवन बिलकुल न करें।
  • सूखी मेथी के दानो को रात भर पानी में भिगार रखें और सुबह उठकर इन्हे पीस लें, और इसमें निम्बू का रस और शहद मिलाकर दिन में तीन से चार बार इसका सेवन करें, इससे आपको बरसाती बुखार से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • पौधे, कूलर आदि के पानी को भी आपको बदलते रहना चाहिए, क्योंकि एक जगह पानी के जमाव से भी आपको इन्फेक्शन का खतरा रहता है।

तो ये हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करके आप बरसाती बुखार की समस्या से बच सकते है, इसके अलावा यदि बुखार ठीक न हो रहा हो, या आप असहज महसूस कर रहे हो तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि इन दिनों में वायरल के साथ डेंगू, मलेरिया भी बहुत अधिक फैलता है, इसके अलावा इन दिनों में साफ़ सफाई का भी ख्याल रखना चाहिए क्योंकि साफ़ सफाई न रखने के कारण भी आपको इन्फेक्शन हो सकता है।

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