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प्रेगनेंसी में करेला खाना चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं इस बात को लेकर सबसे ज्यादा असमंजस में रहती है की आखिर गर्भवती महिला को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। खासकर जब पहली प्रेगनेंसी हो तो खान पान को लेकर डर और भी ज्यादा होता है। लेकिन यदि महिला खाने पीने से जुडी जानकारी इक्कठी करती है और उसके बाद अपनी डाइट का चुनाव करती है। तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान सही खान पान से फायदा मिलता है। जिससे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान करेले के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं।

क्या प्रेग्नेंट महिला के लिए करेला खाना सेफ हैं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को केवल उन्ही चीजों का सेवन करना चाहिए जो माँ व् बच्चे की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। न की उन चीजों का सेवन करना चाहिए जो महिला को खाने में पसंद होते हैं। जहां तक बात करेले के सेवन की आती है तो अधिकतर लोग यहां तक की डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी में करेले का सेवन न करने की सलाह देते हैं। क्योंकि करेले और इसके बीजों में क्‍यूनिन, मोमोर्डिका और ग्‍लाइकोसिड नामक तत्‍व मौजूद होते हैं।

जो प्रेग्नेंट महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सही नहीं होते हैं। और यह तत्व शरीर में पहुंचकर महिला की शारीरिक परेशानियों को बढ़ाने के साथ शिशु के खतरा बन सकते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी करेले का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए साथ ही इसका जूस भी पीने से बचना चाहिए। आप चाहे तो इसके लिए एक बार अपने डॉक्टर से भी राय ले सकती हैं।

यदि वो आपको हफ्ते दस दिन में थोड़ा बहुत करेला खाने की सलाह दे तो आप खा भी सकती है। लेकिन यदि करेला खाने पर आपको थोड़ी भी दिक्कत हो या आपको लारेल की सुगंध या टेस्ट से कोई परेशानी हो तो आपको करेले का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। तो आइये अब आगे जानते हैं की प्रेगनेंसी में करेला खाने से कौन कौन सी सेहत सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है।

गर्भावस्था में करेला खाने से होते हैं यह नुकसान

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और करेले के सेवन के बारे में सोच रहे हैं तो उससे पहले जान लें की गर्भवती महिला यदि करेले का सेवन करती है तो इससे माँ व् बच्चे को कौन कौन से नुकसान पहुँचने का खतरा रहता हैं:

पाचन सम्बन्धी समस्या

करेले का सेवन करने से महिला को कब्ज़, पेट में दर्द, डायरिया, उल्टियां, जैसी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है। जिसकी वजह से महिला की दिक्कत बढ़ सकती है और डायरिया होने पर तो थकान कमजोरी, चक्कर जैसी परेशानी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

ब्लड शुगर लौ होने का खतरा

प्रेग्नेंट महिला यदि करेले का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला का शुगर लेवल लौ हो सकता है जिसके कारण महिला को थकान, चक्कर, कमजोरी, सिर दर्द जैसी परेशानियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

गर्भपात व् समय से पहले डिलीवरी का खतरा

करेले का सेवन करने से गर्भवती महिला को ब्लीडिंग होने का खतरा अधिक होता है जिसकी वजह से शुरूआती समय में महिला का गर्भपात होने का जोखिम बढ़ जाता हैं। वहीँ तीसरी तिमाही में करेले का सेवन करने से गर्भाशय में संकुचन बढ़ सकता है जिसकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा बढ़ जाता है। जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए सही नहीं होता है।

जन्म दोष का खतरा

करेले के साथ यदि महिला करेले के बीजों का सेवन भी करती है तो इसकी वजह से शिशु को जन्म दोष होने का खतरा भी बढ़ जाता है। जिसके कारण आपका बच्चा किसी न किसी समस्या से जूझ सकता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान करेले के सेवन से जुडी जानकारी तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान करेले के सेवन से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको या आपके होने वाले बच्चे को करेले के सेवन के कारण होने वाले नुकसान से बचे रहने में मदद मिल सके।

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प्रेगनेंसी में दही खाने के नुकसान कब होते हैं?

गर्भावस्था के दौरान किसी भी खाद्य पदार्थ का यदि सिमित मात्रा में, सही समय पर सेवन किया जाये तो वह गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन यदि वही खाद्य पदार्थ जरुरत से ज्यादा खाया जाये या गलत समय पर खाया जाये तो इसके नुकसान भी हो सकते हैं। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान खान पान को लेकर इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान दही के सेवन को लेकर बात करने जा रहे हैं। दही एक डेयरी प्रोडक्ट होता है जिसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

प्रेगनेंसी में दही खाएं या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान दही का सेवन करना फायदेमंद होता है। क्योंकि दही में कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो हड्डियों के लिए, कोशिकाओं के लिए, डाइज़ेशन के लिए, इम्युनिटी के लिए, स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। और यह सभी फायदे माँ के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी मिलते हैं। लेकिन दही का सेवन करते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना भी जरुरी होता है क्योंकि यदि दही से जुड़े टिप्स यदि ध्यान न रखें जाएँ तो इसके कारण आपको नुकसान पहुँच सकता है। तो आइये अब जानते हैं की दही का सेवन करने से कौन कौन से नुकसान होते हैं।

प्रेगनेंसी में दही का सेवन करने के नुकसान कब होते हैं

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और दही का सेवन कर रही है तो पहले इन बातों को जान लें ताकि आपको दही का सेवन करने के कारण कोई नुकसान नहीं हो। आइये अब विस्तार से जानते हैं प्रेग्नेंट महिला को दही का सेवन करने से कब नुकसान हो सकते हैं।

खट्टा दही खाने पर

प्रेग्नेंट महिला यदि बहुत दिनों का रखा हुआ दही या बहुत खट्टा दही का सेवन करती है तो इसकी वजह से गर्भवती महिला को फूड प्वाइजनिंग, एसिडिटी और पेट से जुडी अन्य समस्या हो सकती है।

नॉन वेज के साथ दही खाने पर

गर्भवती महिला यदि चिकन, मटन के साथ दही का सेवन करती है तो इसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी समस्या, स्किन से जुडी एलर्जी होने का खतरा रहता है।

रात के समय दही खाने पर

गर्भवती महिला के लिए दही का सेवन फायदेमंद होता है लेकिन यदि रात के समय महिला दही खाती है तो दही को पचाना थोड़ा मुश्किल होता है जिसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है। साथ ही रात के समय दही खाने पर महिला को कोल्ड कफ की समस्या होने का खतरा भी रहता है।

अस्थमा की समस्या होने पर

यदि कोई गर्भवती महिला दमा की मरीज़ है तो उस गर्भवती महिला को भी दही का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। क्योंकिं अस्थमा की समस्या होने पर गर्भवती महिला यदि दही का सेवन करती है तो इसके कारण महिला की दिक्कत बढ़ सकती है।

गले से जुडी परेशानी

गर्भवती महिला को यदि दही का सेवन करने से कोई गले से जुडी समस्या होती है या महिला को गले में खराश की समस्या रहती है। तो महिला को दही का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।

जोड़ो में दर्द

गर्भवती महिला को यदि जॉइंट पेन की समस्या रहती है तो भी प्रेग्नेंट महिला को दही का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसे में दही का सेवन करने से महिला की यह परेशानी बढ़ सकती है।

सर्दी के मौसम में

ठण्ड के मौसम में गर्भवती महिला को दही का सेवन करने से परहेज करना चाहिए क्योंकि दही की तासीर ठंडी होती है। ऐसे में ठण्ड में दही का सेवन करने से सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है।

दूध के साथ दही

यदि प्रेग्नेंट महिला दूध और दही का सेवन एक साथ करती है तो महिला को ऐसा भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि दूध और दही का सेवन एक साथ करने पर प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा होता है।

यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान दही का सेवन करने से पहले दही से जुडी यह जानकारी जरूर रखनी चाहिए। ताकि आपको दही का सेवन करने के केवल बेहतरीन फायदे मिल सके और किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो।

प्रेगनेंसी में चेहरे पर सूजन होने के कारण

प्रेगनेंसी महिलाओं के लिए बहुत ही खूबसूरत व् खास समय होता है लेकिन साथ ही इस दौरान महिलाओं को बहुत सी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति बहुत ही ज्यादा ध्यान रखने की सलाह भी दी जाती है। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चा दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

लेकिन यह भी सच है की प्रेगनेंसी का समय सभी महिलाओं के लिए अलग अलग होता है। क्योंकि कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो कुछ के लिए प्रेगनेंसी का समय आसान होता है। साथ ही कुछ महिलाओं को डिलीवरी के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो कुछ की डिलीवरी भी आसान तरीके से हो जाती है।

आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली सूजन की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं जिससे की प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही के दौरान अधिकतर महिलाएं परेशान रह सकती है। लेकिन ज्यादातर लोग यह समझ नहीं पाते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना आम बात होती है या इससे कोई परेशानी हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान सूजन होना आम बात है?

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है जिसमे से सूजन की समस्या होना भी एक है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान इस बात एक ध्यान रखना भी जरुरी होता है की कब सूजन की समस्या होना आम बात होती है और कब यह गंभीर हो जाती है।

जैसे की प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला के पेट का आकार बढ़ने की वजह से पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है जिसकी वजह से नसों पर दबाव पड़ता है साथ ही ब्लड फ्लो में भी समस्या आती है। जिसकी वजह से पेट के निचले हिस्से से आगे यानी की पैरों में सूजन आ जाती है।

साथ ही यदि महिला सीधी होकर सो जाती है तो इसकी वजह से भी सिर से पैर तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है और इस कारण हाथों और चेहरे पर भी सूजन की समस्या हो जाती है। ऐसे में महिला को ध्यान रखना पड़ता है की यदि महिला को थोड़ी बहुत सूजन है तो ऐसा होना आम बात है लेकिन यदि सूजन जरुरत से ज्यादा है और दर्द भी हो रहा है तो यह गंभीर रूप ले रही है तो ऐसे में आपको डॉक्टर से राय लेना जरुरी होता है।

प्रेगनेंसी में चेहरे पर सूजन होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को हाथों पैरों के साथ चेहरे पर भी सूजन की समस्या हो जाती है ऐसे में महिला को यह समस्या होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं उसके बारे में जानते हैं।

हाई ब्लड प्रैशर

जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान रहती है उन महिलाओं को हाथों पैरों के साथ चेहरे पर भी सूजन की समस्या हो सकती है। यह स्थिति महोला व् शिशु के लिए परेशान करने वाली हो सकती है ऐसे में महिला को कोई भी दिक्कत होने पर एक बार डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए।

ब्लड फ्लो सही न होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई बार ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है और जब शरीर के सभी अंगों में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है तो इस कारण महिला को सूजन व् दर्द की समस्या होना बहुत ही आम बात होती है।

अधिक सोने के कारण

कुछ गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान पूरा दिन सोती रहती है तो उन महिलाओं को भी अपनी आँखे व् चेहरा थोड़ा सुजा हुआ महसूस हो सकता है। या फिर जब भी आप कभी सोकर उठती है और अपने आप को आईने में देखती है तो भी आपको अपना चेहरा सुजा हुआ नज़र आ सकता है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ना बहुत आम बात होती है ऐसे में कुछ महिलाओं के शरीर के वजन बढ़ने के साथ चेहरा भी थोड़ा भर जाता है जिसकी वजह से महिला को अपना चेहरा थोड़ा सुजा हुआ सा महसूस हो सकता है।

स्ट्रैस

जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव की समस्या से ग्रसित हो जाती है उन महिलाओं को भी चेहरे पर सूजन की समस्या हो सकती है।

नींद में कमी

जिस तरह अधिक सोने के कारण गर्भवती महिला के चेहरे पर सूजन आ सकती है उसी तरह नींद में कमी होने यानी की महिला के कम सोने के कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान चेहरे पर सूजन आने के कारण, यदि आप भी गर्भवती है तो आपको भी प्रेगनेंसी में सूजन का होना कब सही है और कब नहीं इसके बारे में पता होना चाहिए। ताकि आपको व् आपके बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें।

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डिलीवरी के बाद चालीस दिनों तक ऐसे रखें अपना ध्यान

बच्चे के जन्म के बाद महिला का आराम करना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि इस दौरान महिला के शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है, महिला को टाँके लगे होते हैं, ब्लीडिंग हो रही होती है, महिला को उठने बैठने में परेशानी होती है, आदि। ऐसे में यदि महिला आराम नहीं करती है तो इसकी वजह से महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ जाती है। खासकर प्रेगनेंसी के शुरूआती दिन यानी कम से कम डेढ़ महीने तक महिला के लिए अपना ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद चालीस दिनों तक महिला को अपना ध्यान कैसे रखना चाहिए।

हेल्दी व् पौष्टिक चीजों का सेवन करें

जिस तरह प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला के लिए खान पान का बेहतर होना जरुरी होता है उसी तरह बच्चे के जन्म के बाद भी महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि महिला जितना अच्छे से अपने खान पान का ध्यान रखती है उतना जल्दी महिला को रिकवर होने में मदद मिलती है साथ बच्चे को भी दूध के माध्यम से भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं जिससे शिशु का विकास भी बेहतर होता है। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला को खान पान से जुडी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • थोड़ी थोड़ी देर बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए।
  • सौंठ के लड्डू, गोंद के लड्डू, अजवाइन के लड्डू, ड्राई फ्रूट्स के लड्डू का सेवन करें इससे स्तनों में दूध की वृद्धि बढ़ाने में मदद मिलती है साथ ही महिला को भी एनर्जी मिलती है।
  • पानी का भरपूर सेवन करें।
  • जब तक टाँके नहीं ठीक होते हैं तब तक दूध में जरा पत्ती डालकर पीएं ताकि टांको को कोई दिक्कत नहीं हो।
  • फाइबर युक्त डाइट लें ताकि पेट में कोई दिक्कत नहीं हो और पाचन तंत्र अच्छे से काम कर सके।
  • फल, सब्जियां, दालें, अंडे, आदि का भरपूर सेवन करें।
  • उन खाद्य पदार्थों का भी सेवन करें जिनसे स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सके।

टांको का ध्यान रखें

बच्चे के जन्म के बाद यदि आपको टाँके आये हैं तो आपको अपने टांको का खास ध्यान रखना चाहिए और उनकी साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई को टांको पर लगाना चाहिए जिससे टांको को ठीक होने में मदद मिल सके। और आप भी जल्द से जल्द ठीक हो सकें।

भरपूर आराम करें

सेहतमंद रहने के लिए जितना खान पान जरुरी है उतना ही आराम भी जरुरी है। और डिलीवरी के बाद तो चालीस दिन तक महिला जितना ज्यादा आराम करती है उतना ही जल्दी महिला को फिट होने में मदद मिलती है। ऐसे में डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने के लिए महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।

मालिश करवाएं

डिलीवरी के बाद मालिश करवाने से शरीर में एनर्जी आती है, आराम महसूस होता है, जल्दी रिकवरी होती है आदि। ऐसे में डिलीवरी के बाद आपको भी मालिश जरूर करवानी चाहिए। लेकिन यदि आपने सिजेरियन डिलीवरी से बच्चे को जन्म दिया है तो आपको मालिश करवाने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

टेंशन नहीं लें

बच्चे के जन्म के बाद शरीर में आई कमजोरी, बच्चे की केयर को लेकर कुछ महिलाएं टेंशन ले लेती है। जिसकी वजह से उनकी सेहत सम्बन्धी परेशानियां बढ़ सकती है। ऐसे में डिलीवरी के बाद इस बात का ध्यान रखें की आप बिल्कुल भी टेंशन नहीं लें क्योंकि आप जितना रिलैक्स रहेंगी उतना ही आपको जल्दी फिट होने में मदद मिलेगी।

घर का काम काज नहीं करें

डिलीवरी के बाद शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला घर का काम काज नहीं करें। बल्कि अपने काम में मदद के लिए किसी को रखें, घर का काम काज करने के लिए भी किसी हेल्पर को रखें। ताकि आपको भरपूर आराम मिल सके जिससे आपको जल्द से जल्द फिट होने में मदद मिल सके। और यह हेल्पर आप डिलीवरी से पहले ही ढूंढ कर रखें ताकि डिलीवरी के बाद आपको कोई दिक्कत नहीं हो।

सारा दिन बच्चे को उठाकर नहीं बैठें

बच्चे को खिलाने का शौक सभी को होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की आप सारा दिन बच्चे को उठाकर बैठे रहें। खासकर महिला को तो ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि लम्बे समय तक बैठे रहने के कारण महिला को पेट व् पीठ में दर्द की समस्या अधिक हो सकती है। साथ ही महिला अपने आप को थका हुआ महसूस करने के साथ कमजोरी का अनुभव भी कर सकती है।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

डिलीवरी के बाद महिला को चार से पांच हफ़्तों तक ब्लीडिंग हो सकती है और डिलीवरी के तुरंत बाद तो ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला ज्यादा लम्बे समय तक एक ही पैड न लगाएं, प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई रखे, आदि। ताकि महिला को इन्फेक्शन होने के खतरे से बचे रहने में मदद मिल सके।

किसी तरह की लापरवाही नहीं करें

बच्चे के जन्म के बाद महिला काफी कमजोर हो जाती है। ऐसे में जल्द से जल्द रिकवर होने के लिए महिला को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जैसे की ज्यादा देर तक बैठे रहना नहीं चाहिए, उठने बैठने में जल्दी नहीं करनी चाहिए, ठन्डे पानी से नहीं नहाना चाहिए, जंक फ़ूड, मसालेदार भोजन, ज्यादा मिर्च वाला आहार नहीं खाना चाहिए, आदि। क्योंकि ऐसा करने से महिला को दिक्कत हो सकती है।

डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयां लें

डिलीवरी के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए डॉक्टर आपको कुछ विटामिन्स लेने की सलाह दे सकते हैं। ऐसे में आपको समय से उन विटामिन्स का सेवन करना चाहिए ताकि आपको जल्दी से जल्दी फिट होने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान डिलीवरी के बाद चालीस दिन तक महिला को रखना चाहिए। ताकि डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी से जल्दी फिट होने में मदद मिल सके। इसके अलावा यदि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत हो जैसे की उल्टियां हो रही हो, पेट व् पीठ में ज्यादा दर्द हो, टांको से जुडी समस्या हो, ब्लीडिंग अधिक हो रही हो, आदि। तो इन लक्षणों को अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

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कपडे से दाग हटाने के क्या-क्या तरीके होते हैं?

कई बार काम करते समय, खाते समय, या किसी चीज के कपड़ो पर गिर जाने के कारण कपड़ों पर दाग लग जाते हैं। और यह दाग महंगे डिटर्जेंट का इस्तेमाल करने पर भी नहीं उतरते हैं। ऐसे में आपको कई बार अपने नए कपड़ों को छोड़ना पड़ता है। साथ ही यदि आपके कपडे महंगे होते हैं और आपने अभी पहली बार ही उन्हें पहना होता है तो बहुत ज्यादा दुःख भी लगता है क्योंकि अब वो कपडे दाग लग जाने के कारण दूसरी बार पहनने लायक नहीं रहते हैं। तो आइये अजा इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे कुछ नुस्खे बताने जा रहे हैं जो आपको कपड़ों से जिद्दी दाग हटाने में मदद करते हैं।

सिरका

यदि कभी खाना खाते समय कपड़ों पर सब्ज़ी के दाग लग जाते हैं, टमाटर का रस गिर जाता है तो इस तरह के दाग को हटाने के लिए आप सिरके का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए आप दाग वाले हिस्से को लगभग आधे घंटे के लिए सिरके में भिगोकर रख दें। इसके बाद हाथ से अच्छे से दाग को रगड़ें आप देखेंगे की कपडे पर लगे दाग हट जायेंगे।

बर्तन धोने वाला साबुन लिक्विड

आपके किसी कपडे पर यदि तेल या घी का दाग लग जाता है तो आप उस दाग को दूर करने के लिए दाग वाली जगह पर थोड़ा लिक्विड लगाएं। उसके बाद उसे अच्छे से रगड़ें और फिर थोड़ा गुनगुना पानी डालकर दुबारा दो मिनट के लिए रगड़ें। उसके बाद उसे धो दें एक बार में हो सकता है ही दाग अच्छे से नहीं जाएँ आप ऐसा दो से तीन बार करें दाग धीरे धीरे हल्का होकर चला जायेगा।

कपडे धोने वाला डिटर्जेंट

कपडे पर लगे हल्के फुल्के दाग जैसे की मिट्टी के दाग हटाने के लिए आप डिटर्जेंट में थोड़ा पानी मिलाकर एक पेस्ट बनाएं उसके बाद आप इसे दाग पर लगाकर छोड़ दें। फिर पांच मिनट के बाद थोड़ा गुनगुना पानी डालकर उसे अच्छे से रगड़ें और साफ़ पानी से धो दें। ऐसा करने से भी आपको कपडे के दाग हटाने में मदद मिलती है।

निम्बू

निम्बू का इस्तेमाल करने से भी आप कपड़ों पर लगे दाग को हटा सकते हैं। इसके लिए आप दाग वाली जगह पर निम्बू को रगड़ें। निम्बू रगड़ने से दाग हल्का होने लगेगा उसके बाद आप डिटर्जेंट में कपडे को धो लें। ऐसा दो से तीन बार करने पर कपड़ों पर लगा दाग हट जायेगा।

खट्टी दही या छाछ

जी हाँ, खट्टी दही या छाछ का इस्तेमाल करने से भी कपड़ों पर लगे दाग को हटा सकती हैं खासकर पान, गुटखे के छींटें वाले दाग को हटाने के लिए यह तरीका बहुत ही असरदार है। इसके लिए आप दाग वाली जगह को दस से पंद्रह मिनट के लिए खट्टी दही या छाछ में डुबोकर रख दें और फिर उसे अच्छे से रगड़ें। फिर उसके बाद कपडे को धो लें, ऐसा दो से तीन बार करने पर कपडे पर लगे जिद्दी दागों को हटाने में मदद मिलती है।

टूथपेस्ट

चाय कॉफ़ी के लगे दागों को हटाने के लिए आप दाग लगने के तुरंत बाद वहां पर कोलगते लगा दें उसके बाद उसे दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। फिर टूथपेस्ट पर थोड़ा पानी लगाकर उसे घिसें ऐसा करने से भी दाग को तुरंत हटाने में मदद मिलती है।

डेटॉल

यदि किसी कपडे पर स्याही का दाग लग जाता है तो आप रुई पर डेटॉल लगाकर उस दाग पर रगड़ें आप देखेंगे की दाग धीरे धीरे हल्का हो जायेगा।

टमाटर

टमाटर पर नमक लगाकर भी यदि स्याही के दाग पर या अन्य किसी हल्की चीज के दाग पर रगड़ा जाएँ तो इससे भी कपडे पर लगे दाग को हटाने में मदद मिलती है। ध्यान रखें की टमाटर को कपडे पर सूखने नहीं दें पानी का इस्तेमाल जरूर करें।

मिट्टी का तेल

पेण्ट के दाग को हटाने के लिए आप उस दाग पर मिट्टी का तेल लगाएं और उस जगह को रगड़ें ऐसा करने से कपडे पर लगे पेण्ट के जिद्दी से जिद्दी दाग को हटाने में मदद मिलती है।

अमोनिया

अमोनिया का इस्तेमाल करने से भी कपड़ों पर लगे दाग को आसानी से हटाने में मदद मिलती है इसके लिए आप दाग लगे कपडे को पांच मिनट के लिए अमोनिया में डुबोकर रख दें। उसके बाद डिटर्जेंट कस इस्तेमाल करके इसे धो दें ऐसा करने से आपको कपडे पर लगे दागों को हटाने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी मिलाएं और एक पेस्ट बनाएं अब इस पेस्ट को दाग लगी जगह पर लगाकर दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद हल्का गुनगुना पानी डालकर इसे अच्छे से रगड़ें और साफ़ पानी और डिटर्जेंट में धो लें। ऐसा करने से भी आपको कपडे पर लगे दागों को हटाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको कपड़ों पर पड़े दाग को हल्का करने में मदद मिलती है। यदि आपके भी किन्ही कपड़ों पर दाग लग गए हैं तो आप भी इन आसान टिप्स को ट्राई कर सकते हैं आप देखेंगे की एक बार नहीं तो दो बार में आपके यह दाग हल्के पड़ने लग जाएंगे।

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घर के दरवाज़े के बाहर क्या रखना शुभ होता है?

हर एक व्यक्ति चाहता है की उसके घर में सुख समृद्धि हमेशा बनी रहे और हमेशा खुशियां व् धन धान्य में बरकत हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार भी यदि घर का वास्तु सही हो तो घर में हमेशा सुख समृद्धि का वास होता है। साथ ही वास्तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार सबसे अहम होता है। इसीलिए आपने देखा होगा और आप भी घर के मुख्य दरवाज़े पर हमेशा कुछ न कुछ शुभ जरूर लगाकर रखते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको घर के दरवाज़े के बाहर क्या रखना या लगाना शुभ माना जाता है उसके बारे में ही बताने जा रहे हैं।

माला

घर में सकारात्मक ऊर्जा यानी की पॉजिटिव एनर्जी के प्रवेश के लिए घर के मुख्य दरवाज़े पर पीपल, आम और अशोक के पत्तों की माला का तोरण द्वार बना कर बांधना चाहिए। ऐसा करने से घर में पॉजिटिव एनर्जी बनी रहने के साथ सुख समृद्धि में भी बढ़ावा मिलता है।

माँ लक्ष्मी जी के पैर

माँ लक्ष्मी जी के पैर भी घर के मुख्य दरवाज़े पर जरूर बनाने चाहिए। ऐसा माना जाता है की घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर से मां लक्ष्मी के पैर बनाने से घर पर धन-दौलत और समृद्धि का आगमन होता है और घर में खुशियां बरकरार रहती है।

शुभ लाभ

घर में नेगेटिव एनर्जी का आगमन नहीं हो और पॉजिटिव एनर्जी हमेशा बनी रही इसके लिए घर के दोनों तरफ सिन्दूर, हल्दी या मार्किट से लाकर शुभ लाभ लगाना चाहिए। ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है साथ ही ऐसा करने से घर में खुशियों का आगमन भी होता है।

गणेश जी का चित्र

घर के मुख्य दरवाज़े पर गणेश भगवान का चित्र लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही ध्यान रखें की घर के बाहर गणेश जी का चित्र लगाने के साथ अंदर की तरफ भी एक गणेश जी का चित्र लगाएं ताकि दोनों की पीठ एक एक दूसरे की तरफ हो। ऐसा माना जाता है की ऐसा करने से घर में पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है। और घर के अंदर किसी भी तरह की नेगेटिव एनर्जी प्रवेश नहीं कर पाती है।

स्वास्तिक

हिंदू धर्म में स्वास्तिक को बहुत ही शुभ चिन्ह माना गया है इसीलिए हर शुभ और मांगलिक कार्यों को जब भी किया जाता है तो इसमें स्वास्तिक का निशान जरूर बनाया जाता है और उसके बाद पूजा पाठ को संपन्न किया जाता है। ऐसे में यदि आप अपने प्रवेश द्वार पर स्वास्तिक का निशान बनाते हैं तो इसे बनाने से घर के सौभाग्य और समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है।

हरे पौधे

घर के मुख्य दरवाज़े के पास हरे पौधों को रखना भी बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भी घर में पॉजिटिव माहौल रहता है साथ ही हरियाली को देखकर मन भी प्रसन्न रहता है। इसके अलावा एक बात का और ध्यान रखें की घर के मुख्य दरवाज़े के पास कांटेदार व् सूखे हुए पौधे नहीं रखें क्योंकि यह नेगेटिविटी के प्रतीक होते हैं।

बेल यानी घंटी का ध्यान रखें

घर की डोर बेल लगवाते समय इस बात का ध्यान रखें की बेल मधुर व् आराम से बजने वाले संगीत की हो। न की बहुत तेज आवाज़ वाली हो ऐसा माना जाता है की मधुर संगीत भी घर में पाजिटिविटी बरकरार रखने में मदद करता है।

देवी देवताओं की मूर्तियां

घर के मुख्य दरवाज़े के आस पास देवी देवताओं की मूर्तियां लगाना भी शुभ माना जाता है। क्योंकि ऐसा करने से भगवान् का आशीर्वाद और पॉजिटिव एनर्जी घर में बनी रहती है। लेकिन ध्यान रखें की उनपर धूल मिट्टी का जमाव नहीं हो और आप उन्हें नियमित रूप से साफ़ करें।

घोड़े की नाल

घर के मुख्य दरवाज़े पर घोले की नाल लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती है और बुरी नज़र से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

फ्लावर पॉट

घर के बाहर कांच का सूंदर सा फ्लॉवर पॉट लगाकर उसमे खुशबूदार फूल लगाएं। और ध्यान रखें की फूलों को बदलते रहें। खुशबूदार फूलों को घर के बाहर सजाकर रखें से भी घर में पाजिटिविटी बनी रहती है।

घर में सुख समृद्धि बढ़ाने के लिए मुख्य दरवाज़े से जुडी इन बातों का ध्यान रखें

  • आप इस बात का खास ध्यान रखें की आपके घर का मुख्य दरवाज़ा घर के अन्य दरवाज़ों से बड़ा होना चाहिए।
  • जब भी आप घर के मुख्य दरवाज़े को खोलें तो आपको उसमे से बिल्कुल भी आवाज़ नहीं आनी चाहिए। और यदि उसमे आवाज़ आती भी है तो आपको उसे जल्द से जल्द ठीक करवाना चाहिए।
  • घर के मुख्य दरवाज़े को कभी भी गन्दा नहीं रखें और दरवाज़े पर लगे सामान को भी गन्दा नहीं रहने दें।
  • ध्यान रखें की प्रवेश द्वार पर हमेशा रौशनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ चीजें जिन्हे आप यदि घर के मुख्य दरवाज़े के बाहर लगाते हैं तो इससे घर में बरकत बनी रहती है। इसके अलावा घर के मुख्य दरवाज़े के आस पास कभी गंदगी का जमाव भी नहीं होने देना चाहिए और उसे हमेशा साफ़ सुथरा रखना चाहिए। यदि आपका मुख्य दरवाज़ा ही गन्दा होता है तो यह शुभ नहीं माना जाता है।

Auspicious things to keep outside the door of the house

डिलीवरी के बाद स्किन की खोई चमक वापिस लाने के टिप्स

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने ही नहीं बल्कि डिलीवरी के बाद भी महिला को बहुत से बदलाव अपने शरीर में महसूस होते हैं। और डिलीवरी के बाद धीरे धीरे महिला जब अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो महिला को वापिस स्वस्थ होने में मदद मिलती है।

शारीरिक रूप से बदलाव के साथ महिला की स्किन में भी बदलाव आता है जैसे की कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान चेहरे पर झाइयां, दाग धब्बों की समस्या हो सकती है। ऐसे में यह समस्या डिलीवरी के बाद और भी बढ़ सकती है ।

क्योंकि डिलीवरी के बाद महिलाएं अपने से ज्यादा बच्चे में व्यस्त हो जाती है। तो आज हम महिलाओं की इसी समस्या से बचाव के कुछ समाधान बताने जा रहे हैं। जो आसान होने के साथ असरदार भी होते हैं और महिला को उन्हें फॉलो करने में भी कोई परेशानी नहीं होती है।

हाइड्रेट रहें

डिलीवरी के बाद स्किन की खोई चमक को वापिस लाने के लिए महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं साथ ही स्किन की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है। जिससे आपके चेहरे की खोई चमक को वापिस लाने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट

जिस तरह शरीर को स्वस्थ रहने के लिए पोषक तत्वों की जरुरत होती है उसी तरह स्किन की चमक को बरकरार रखने के लिए उन्हें भी पोषक की जरुरत होती है। ऐसे में डिलीवरी के बाद स्किन की खोई चमक को वापिस लाने के लिए महिला पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें खासकर फलों का सेवन भरपूर मात्रा में करें। ऐसा करने से स्किन हेल्दी रहती है जिससे उसका ग्लो बरकरार रहने में मदद मिलती है।

मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें

स्किन की नमी को बरकरार रखने व् उसे पोषित करने के लिए गर्भवती महिला को नहाने के बाद मॉइस्चराइजर जरूर लगाना चाहिए। ऐसा करने से स्किन को पोषण मिलता है। जिससे डिलीवरी के बाद आपके चेहरे की चमक को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

नींद ले भरपूर

नींद भरपूर न लेने के कारण भी महिला की चेहरे से जुडी समस्याएँ बढ़ सकती है। ऐसे में इस परेशानी को कम करने के लिए गर्भवती महिला को नींद भरपूर लेनी चाहिए। नींद भरपूर लेने से महिला और स्किन दोनों को फ्रैश महसूस होता है जिससे महिला को स्किन सम्बन्धी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

नहाने से पहले यह करें

जब भी महिला नहाने के लिए जाती है तो उससे दस से पंद्रह मिनट पहले रुई की मदद से कच्चे दूध को अपने चेहरे पर लगाएं। ऐसा करने से स्किन पर जमी गंदगी को बाहर निकालने और चेहरे की रंगत निखारने में मदद मदद मिलती है। और उसके बाद महिला नहाने के बाद कोई लोशन इस्तेमाल जरूर करें।

एलोवेरा जैल Aloe vera gel

एलोवेरा जैल को नहाने से आधे घंटे पहले अपने चेहरे पर लगाएं और उसके बाद चेहरे को साफ़ कर लें। ऐसा करने से भी महिला को चेहरे की खोई चमक को वापिस लाने में मदद मिलती है। क्योंकि एलोवेरा जैल स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

गुलाब जल

रात को सोने से पहले रुई की मदद से चेहरे पर गुलाब जल लगाएं और सुबह उठकर साफ़ पानी से चेहरे को धो लें। इसके अलावा दिन में भी किसी भी समय गुलाब जल लगाएं और थोड़ी देर बाद चेहरे को धो लें। ऐसा करना आपकी स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

मसाज करें

रात को सोने से पहले बादाम आयल, मॉइस्चराइजर या अन्य किसी आयल से चेहरे की मसाज करें ऐसा करने से स्किन में ब्लड सर्कुलेशन अच्छे से होता है। और स्किन को पोषण मिलता है जिससे चेहरे की चमक को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे डिलीवरी के बाद फॉलो करने से महिला को चेहरे की चमक को वापिस लाने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को डिलीवरी के बाद ज्यादा केमिकल वाली चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए ताकि शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

Skin care tips after delivery

भ्रूण में जान कब आती है?

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के लगभग आधे हिस्से तक महिला को पता भी नहीं चलता है की महिला का गर्भ ठहर गया है। उसके बाद जब महिला के पीरियड्स मिस हो जाते हैं तो महिला को लगता है की कहीं उसका गर्भ तो नहीं ठहर गया है। ऐसे में फिर महिला घर में प्रेगनेंसी टेस्ट या डॉक्टर के पास जाकर प्रेगनेंसी टेस्ट करवाती है तो यह कन्फर्म होता है की महिला का गर्भ ठहरा है या नहीं।

ऐसे में यदि महिला की प्रेगनेंसी कन्फर्म हो गई है तो उसके साथ ही धीरे धीरे गर्भ में शिशु का विकास होना भी शुरू हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की गर्भ में शिशु में जान कब आती है। यदि नहीं तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में शिशु में जान कब आती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

कब आती है भ्रूण में जान?

यदि आपकी प्रेगनेंसी कन्फर्म हो गई है तो प्रेगनेंसी के पांच से छह हफ़्तों के बीच गर्भनाल विकसित होने लग जाती है। जो शिशु को ब्लड, ऑक्सीजन व् पोषक तत्वों को पहुंचाने में मदद करती है। जिससे गर्भ में शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व शिशु को मिलते हैं और धीरे धीरे शिशु का विकास बढ़ने लगता है।

उसके बाद डॉक्टर्स आपको प्रेगनेंसी के छह से नौ हफ़्तों के बीच अल्ट्रासॉउन्ड करवाने के लिए बोल सकते हैं। यह अल्ट्रासॉउन्ड गर्भ में शिशु के दिल की धड़कन जानने के लिए किया जाता है। उसके बाद जब आप यह अल्ट्रासॉउन्ड करवाती है तो इसमें आपको पता चलता है की गर्भ में शिशु के दिल की धड़कन आई है या नहीं।

यदि आपका अल्ट्रासॉउन्ड नोर्मल है और गर्भ में शिशु का दिल धड़क रहा है तो धड़कन आने के साथ यह बात भी कन्फर्म हो जाती है की गर्भ में भ्रूण में जान आ गई है। और आप चाहे तो डॉक्टर्स की मदद से बच्चे के दिल की धड़कन सुन भी सकते हैं। उसके बाद गर्भ में शिशु का विकास धीरे धीरे और बढ़ता है।

जैसे की शिशु के अंगों की आकृतियां बनने लगती है, फिर उन अंगों का विकास शरीर होता है, शिशु गर्भ में हलचल करने लगता है, शिशु की सुनने की क्षमता में वृद्धि होती है, गर्भ में शिशु बहुत सी हरकतें जैसे की उबासी लेना अंगड़ाई लेना आदि शुरू कर देता हैं।

तो यह है भ्रूण में जान कब आती है उससे जुडी जानकारी, यदि आपके मन में भी यह सवाल चल रहा था। तो आप भी इस आर्टिकल को पड़ने के बाद यह जान सकती है की गर्भ में शिशु का विकास धीरे धीरे कैसे बढ़ता है। और यदि आप चाहती हैं की आपके गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे से हो।

तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान, रहन सहन व् अन्य छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला और गर्भ में शिशु कोई दिक्कत नहीं हो जिससे महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

अचानक से प्रसव पीड़ा शुरू हो जाये तो ये करना चाहिए?

गर्भावस्था के पूरे समय महिला को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि महिला जितनी सावधानी बरतती है जितना अच्छे से अपना ख्याल रखती है। उतना ही गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है। इसके अलावा जैसे जैसे महिला की डिलीवरी का समय नजदीक आता है उस दौरान महिला को ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

क्योंकि इस दौरान बरती गई लापरवाही का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर डाल सकता है, डिलीवरी में कॉम्प्लीकेशन्स खड़ी कर सकता है, आदि। साथ ही डिलीवरी का समय पास आने पर महिला को प्रसव पीड़ा के लक्षणों के बारे में जान लेना चाहिए ताकि जब भी महिला को प्रसव पीड़ा हो तो महिला तुरंत इलाज करवा सके जिससे माँ और बच्चे दोनों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आये। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको अचानक से प्रसव पीड़ा शुरू होने पर महिला को क्या-क्या करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

घबराएं नहीं

यदि महिला को अपने शरीर में प्रसव के लक्षण महसूस हो रहे हैं या प्रसव पीड़ा शुरू हो गई तो महिला को घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि घबराने की वजह से दिमाग काम करना बंद कर देता है जिसके कारण आपको आगे क्या करना है वो आप सोच नहीं पाते हैं। ऐसे में प्रसव पीड़ा के शुरू होने पर महिला को रिलैक्स रहे और सोचें की आपको क्या सबसे पहले करना है जैसे की डॉक्टर को फ़ोन, घर के सदस्य को बुलाना है, डिलीवरी बैग को लाना है, आदि। ताकि आप बिना घबराये आराम से जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुँच सकें।

चिल्लाएं नहीं

यह बात बिल्कुल सही है की प्रसव पीड़ा के दौरान होने वाला दर्द असहनीय होता है लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है की इस दौरान महिला जितना धैर्य से काम लेती है उतना ही महिला को अपनी दिक्कत को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही यदि महिला ज्यादा चिल्लाने लग जाती है तो महिला थक जाती है जिसके कारण महिला को ही बाद में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रसव पीड़ा के होने पर महिला को ज्यादा चिल्लाना नहीं चाहिए।

लम्बी साँसें लें

प्रसव पीड़ा शुरू होने पर महिला को कोशिश करनी चाहिए की महिला लम्बी लम्बी साँसे लें। ऐसा करने से महिला को दर्द को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है जिससे महिला को घबराहट व् चिल्लाने जैसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है।

जल्दबाज़ी नहीं करें

प्रसव पीड़ा के होने के बाद महिला को जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा नहीं है की पीड़ा शुरू होने के बाद ही आपको बच्चा हो जायेगा। बल्कि महिला को आराम से धैर्य से काम लेना चाहिए। इसके अलावा जितना महिला इस समय आराम से धैर्य से काम लेती है उतना ही महिला को दिक्कत कम होती है।

जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुंचें

प्रसव पीड़ा के शुरू होने पर जितना जल्दी हो सके आपको हॉस्पिटल पहुँचने की कोशिश करनी चाहिए। और इसके लिए घर में जो भी सदस्य मौजूद है आप उसके साथ जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुंच जाये। और घर से निकलने के साथ ही हॉस्पिटल में फ़ोन कर दें ताकि आपको जल्दी से ट्रीटमेंट मिल सके। साथ ही इस बता का ध्यान रखें की डिलीवरी का समय पास आने पर अकेले न रहे क्योंकि अकेले रहने पर आपको प्रसव पीड़ा के समय ज्यादा दिक्कत हो सकती है।

हॉस्पिटल पहुँचने पर आसानी से डिलीवरी हो इसके लिए ध्यान रखें

हॉस्पिटल पहुँचने के बाद भी महिला को ऊपर बताये गए टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जितना महिला रिलैक्स होती है, चिल्लाती नहीं है उतना ही महिला को डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर रखना चाहिए। क्योंकि इन टिप्स का ध्यान रखने से डिलीवरी के दौरान महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है साथ ही यदि महिला इस दौरान लापरवाही करती है, ज्यादा घबरा जाती है। तो इसके कारण महिला को ज्यादा दिक्कत हो सकती है। ऐसे में जितना हो सके महिला को रिलैक्स रहने की कोशिश करनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में आम नहीं खाएं यह गंभीर नुकसान हो सकते हैं?

खाने में खट्टा मीठा होने के कारण आम सभी का पसंदीदा फल होता है। साथ ही आम में मौजूद गुणों के कारण इसे फलों का राजा भी कहा जाता है। इसके अलावा आम के मौसम का अधिकतर लोग इंतज़ार करते हैं और यह एक तरीके का नहीं होता है बल्कि कई तरीके के आम मार्किट में देखने को मिलते हैं। और सभी के स्वाद में थोड़ा थोड़ा फ़र्क़ होने के कारण किसी को कोई आम पसंद आता है और किसी को कोई आम पसंद आता है। आज इस आर्टिकल में हम आम से जुडी कुछ जानकारी आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में आम खाना चाहिए या नहीं?

आम में फाइबर, आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, विटामिन ए, विटामिन सी, जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। क्योंकि यह पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ बहुत सी शारीरिक समस्या से बचाव रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक विकास, मानसिक विकास व् जन्म दोष से बचाव के लिए भी आम फायदेमंद होता है।

इसीलिए सही मौसम में सही मात्रा में यदि महिला आम का सेवन करती है तो इससे महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। लेकिन बरसात का मौसम आने पर महिला को आम के सेवन से परहेज करना चाहिए क्योंकि इस दौरान आम का सेवन करना महिला के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में आम खाने से महिला को क्या समस्याएं हो सकती है।

गर्भावस्था में आम खाने के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला आम का सेवन करती है तो इसके कारण महिला को फायदा होने के साथ नुकसान भी हो सकता है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इस बात की जानकारी जरूर होनी चाहिए की प्रेगनेंसी में आम खाने से महिला को क्या समस्याएं हो सकती है।

कीड़े होने के कारण बिमारियों का होता है डर

बरसात के मौसम में अधिकतर फलों में कीड़े होने की सम्भावना बढ़ जाती है और आम भी उन्ही फलों में से एक है। और कई बार तो आम में मौजूद कीड़े नज़र भी नहीं आते हैं। ऐसे में बरसात का मौसम आने पर यदि महिला आम का सेवन करती है तो महिला को इसके कारण शारीरिक परेशानियों व् गंभीर बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

वजन

आम का सेवन यदि महिला जरुरत से ज्यादा करती है तो इसकी वजह से महिला के शरीर में कैलोरी बढ़ने लगती है जिसकी वजह से महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है। और गर्भवती महिला का वजन यदि जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो इसके कारण गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है।

सेहत पर पड़ता है उल्टा प्रभाव

इस मौसम में ज्यादातर आम कृत्रिम तरीके से पकाएं जाते हैं और उन आमों में कैल्शियम कार्बाइड होता है जो गर्भवती महिला के स्वास्थ्य पर गलत असर डालने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी बुरा असर डाल सकता है। और गर्भवती महिला की दिक्कतें बढ़ने के साथ प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स आने का खतरा होता है।

पाचन सम्बन्धी बढ़ती है परेशानियां

यदि महिला अच्छे से चेक करके आम का सेवन करती है तो इससे महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन फिर उसके बाद महिला आम के बाद कुछ ऐसी चीजों का सेवन करती है जो महिला को बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। तो उसकी वजह से भी महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। जैसे की आम के बाद पानी पीने से, कोल्ड ड्रिंक पीने से, तेल मसाले मिर्च वाली चीजें खाने से, दही खाने से, करेले खाने से बॉडी में गलत रिएक्शन हो सकता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को पाचन सम्बन्धी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो आम का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को कोई समस्या नहीं हो इससे बचने के लिए महिला को गलत तरीके, गलत मौसम में आम का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।