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गर्भावस्था में क्या खाने से शिशु काला हो पैदा होता है?

जब कोई महिला गर्भवती होती है तो उसे हर कोई अलग अलग राय देता है, अपने अलग अलग एक्सपीरियंस सुनाता है, महिला को अपनी केयर करने के अलग तरीकों के बारे में बताते हैं, प्रेगनेंसी के दौरान सही गलत के बारे में बताते हैं, इसके अलावा यह भी कहते हैं की प्रेगनेंसी के ऐसा करोगे तो शिशु ऐसा होगा वैसा करोगे तो वैसा होगा, आदि। ऐसे ही प्रेगनेंसी के दौरान कुछ लोग यह भी कहते हैं की कुछ ऐसी चीजें है जिनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कम करना चाहिए क्योंकि उन्हें खाने से गर्भ में पल रहे शिशु का रंग काला हो जाता है।

क्या खाने से गर्भ में पल रहे शिशु का रंग काला होता है?

गर्भ में पल रहा शिशु अपने विकास के लिए पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है ऐसे में महिला जो भी खाती या पीती है। उसमे मौजूद पोषक तत्व शिशु तक पहुँचते हैं जिससे शिशु का विकास भी बढ़ता है। वैसे ही ऐसा माना जाता है की कुछ खाद्य पदार्थ यदि गर्भवती महिला खाती है तो उन्हें खाने से उनका असर भी शिशु पर पड़ता है जिसकी वजह से शिशु का रंग काला हो जाता है।

जामुन

जामुन खाना प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल सेफ होता है ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो जामुन का सेवन कर सकती है। लेकिन महिला को जामुन का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है की जामुन का सेवन ज्यादा करने से शिशु की रंगत पर असर पड़ता है और आपका होने वाला शिशु काला होता है।

नशीले पदार्थों का सेवन करने के कारण

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेने की बजाय नशीले पदार्थों का सेवन करती है। तो इससे शिशु का अच्छे से विकास नहीं हो पाता है साथ ही शिशु की रंगत पर भी इसका असर पड़ सकता है ऐसे में मन जाता है जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान शुम्रपान, शराब आदि पीती है तो उनका होने वाला शिशु काला पैदा होता है।

काली चीजों का सेवन करने की वजह से

जिन खाद्य पदार्थों का रंग काला होता है जैसे की काले अंगूर, आदि इन चीजों का सेवन यदि गर्भवती महिला अधिक करती है। तो इन खाद्य पदार्थों की रंगत का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है जिसकी वजह से आपका होने वाला शिशु काला पैदा होता है। इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है की यदि प्रेग्नेंट महिला सुबह उठते ही यदि किसी काली चीज को देखती है तो इसका असर भी गर्भ पर पड़ता है जिसकी वजह से शिशु काला हो सकता है। इसीलिए महिला को अपने कमरे में गोर व् सूंदर बच्चे की फोटो लगानी चाहिए ताकि आपका शिशु वैसा ही पैदा हो।

मेथी दाना

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला मेथी दाना का सेवन करती है तो इसकी वजह से भी गर्भ में पल रहे शिशु का रंग काला हो सकता है। वैसे भी प्रेगनेंसी के दौरान मेथी दाना का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि मेथी दाना की तासीर गर्म होती है जो माँ व् बच्चे की सेहत के लिए सही नहीं होता है।

नॉन वेज

प्रेगनेंसी के समय सही तरीके से यदि नॉन वेज का सेवन किया जाये तो इसका सेवन करने से माँ व् बच्चे दोनों को फायदा मिलता है। लेकिन ऐसा माना जाता है की यदि गर्भवती महिला जरुरत से ज्यादा नॉन वेज का सेवन करती है तो इसका बुरा असर शिशु की रंगत पर देखने को मिल सकता है जिसकी वजह से आपका होने वाला शिशु काला पैदा हो सकता है।

आयरन युक्त डाइट

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को आयरन युक्त डाइट भरपूर लेनी चाहिए क्योंकि आयरन की मदद से ही महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है। लेकिन यदि महिला आयरन युक्त डाइट का सेवन जरुरत से ज्यादा करती है तो इसका असर शिशु की रंगत पर देखने को मिल सकता है जिसकी वजह से शिशु का रंग काला पड़ सकता है।

क्या यह सच है की कुछ खाद्य पदार्थों को खाने से शिशु का रंग काला होता है?

गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत वैसे तो पूरी तरह से अपने माँ बाप के जीन्स पर ही निर्भर करता है। लेकिन कई बार कुछ केस में उल्टा भी हो जाता है। ऐसे में पूरी तरह से यह मान लेना की कुछ खाने से शिशु का रंग गोरा या काला हो जाता है सही नहीं है आप केवल प्रेगनेंसी के दौरान कोशिश कर सकते हैं।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाने से शिशु का रंग काला हो जाता है। उससे जुडी जानकारी, यदि आपको भी गोरा शिशु चाहिए और आप इन बातों पर यकीन करती हैं तो आपको भी इन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।

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प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट क्या-क्या खाना चाहिए?

माँ बनना हर महिला के लिए उसके जीवन का एक बहुत ही खास अनुभव होता है। ऐसे में इस दौरान महिला अपना खास ख़याल रखना चाहिए और खान पान में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान सही खान पान माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। और यदि महिला अपने खान पान का सही से ध्यान नहीं रखती है तो इसका बुरा असर भी माँ और बच्चे की सेहत पर ही पड़ता है।

ऐसे में महिला दिन भर में क्या खाती है क्या नहीं इसका ध्यान रखना महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। खासकर सुबह खाली पेट महिला क्या खाती है क्या पीती है अपने दिन की शुरुआत कैसे करती है यह सबसे ज्यादा मायने रखता है। क्योंकि दिन की शुरुआत यदि अच्छे से की जाये तो दिनभर आपको स्वस्थ रहने, एक्टिव रहने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को दिन की शुरुआत यानी की सुबह खाली पेट क्या क्या खाना पीना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

सबसे पहले पीएं पानी

सुबह उठने के बाद सबसे पहले महिला को दो तीन गिलास पानी पीने चाहिए। क्योंकि पानी पीने से महिला का पेट अच्छे से साफ़ होता है साथ ही महिला को एनर्जी भी मिलती है। जिससे महिला को पेट सम्बन्ध समस्या से बचे रहने और दिन भर एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

फलों का सेवन करें

सुबह खाली पेट महिला के लिए फलों का सेवन करना फायदेमंद होता है क्योंकि फ्रूट्स विटामिन्स, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं लेकिन महिला ध्यान रखें खट्टे फल जैसे की निम्बू, संतरा, कीवी जैसे फलों का सेवन महिला को सुबह खाली पेट नहीं करना चाहिए क्योंकि इनसे महिला को पेट में जलन, गैस, दर्द जैसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा अन्य फलों का सेवन महिला कर सकती है।

ड्राई फ्रूट्स

काजू, बादाम, अखरोट, किशमिश जैसे नट्स का सेवन भी गर्भवती महिला सुबह खाली पेट कर सकती है। यह सभी आयरन, फाइबर, कैल्शियम, विटामिन्स, ओमेगा फैटी एसिड जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन ध्यान रखें की सिमित मात्रा में ही इनका सेवन करें साथ ही आप चाहे तो रातभर इन्हे भिगोकर रखने के बाद भी आप इनका सेवन कर सकते हैं।

साबुत अनाज

ओट्स, दलिया, ब्राउन ब्रेड, पोहा, उपमा, इडली, मूंग दाल या बेसन का चिल्ला जैसे साबुत अनाज का सेवन भी गर्भवती महिला कर सकती है क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। साथ ही इन्हे खाने से महिला एनर्जी मिलती है इसके अलावा रोजाना एक ही चीज का सेवन करने से अच्छा महिला अलग अलग चीजों का सेवन कर सकती है। जिससे महिला के शरीर में सभी पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है।

अंडा

सुबह उठने के बाद महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ माँ व् बच्चे के लिए फायदेमंद भी हो। ऐसे में महिला अंडे का सेवन भी कर सकती है क्योंकि अंडा प्रोटीन व् कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है साथ ही इसमें अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे के लिए फायदेमंद होते हैं।

दूध व् दूध से बनी चीजें

गर्भवती महिला सुबह दूध व् दूध से बनी चीजों का सेवन भी कर सकती है क्योंकि दूध अपने आप में ही एक सम्पूर्ण आहार होता है। और इसमें सभी जरुरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे के लिए जरुरी होते हैं।

फलों का रस व् नारियल पानी

गर्भवती महिला सुबह के समय फलों का रस व् नारियल पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन भी कर सकती है क्योंकि यह भी उन जरुरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो माँ और बच्चे के लिए जरुरी होते हैं।

तो यह हैं कुछ हेल्दी चीजें जिनका सेवन गर्भवती महिला सुबह को खाली पेट करना चाहिए। इन सभी खाद्य पदार्थों से माँ और नच्चे को फायदा मिलता है इसके अलावा महिला को चाय कॉफ़ी, कच्चा अंडा व् मॉस, कच्चा दूध, तेलीय व् मसालेदार आहार, डिब्बाबंद चीजें, ठन्डे फल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए क्यंकि इनसे माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है।

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प्रेगनेंसी टेस्ट के बाद इन 10 बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए?

आज कल महिला प्रेग्नेंट हैं या नहीं इसके बारे में जानकारी पाना कोई मुश्किल नहीं है। क्योंकि महिलाएं अब घर पर मेडिकल स्टोर से प्रेगनेंसी टेस्ट किट लाकर आसानी से प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती है। और प्रेगनेंसी टेस्ट किट का इस्तेमाल कैसे करना है उसके बारे में प्रेगनेंसी टेस्ट किट के कवर पर लिखा होता है। लेकिन प्रेगनेंसी टेस्ट किट के इस्तेमाल के बाद महिला को क्या क्या करना चाहिए इसके बारे में महिला को जरूर पता होना चाहिए।

जैसे की यदि महिला के पीरियड्स ज्यादा लेट हो गए हैं और प्रेगनेंसी टेस्ट किट में रिपोर्ट नेगेटिव आई है तो महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए की आखिर पीरियड्स नहीं आने का क्या कारण है। इसके अलावा यदि महिला ने घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट किया है और रिपोर्ट पॉजिटिव है तो महिला को क्या क्या करना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको उन 10 बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका खास ध्यान महिला को प्रेगनेंसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर रखना चाहिए।

सबसे पहले डॉक्टर का चुनाव करें

घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करने पर यदि महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उसके बाद सबसे पहले महिला को सबसे पहले एक सही डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए। और डॉक्टर का चुनाव करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे की डॉक्टर का रिकॉर्ड पता करना चाहिए, डॉक्टर डिलीवरी भी करती है या नहीं करती है, घर के कितनी पास आपकी डॉक्टर है, डॉक्टर अच्छे से मरीज़ों को समय देती है या नहीं, जरुरत पड़ने पर डॉक्टर आपसे फ़ोन पर बात कर सकती है या नहीं, आदि।

प्रेगनेंसी की जानकारी जुटाना शुरू करें

गर्भावस्था कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को प्रेगनेंसी व् प्रसव से जुडी जानकारी इक्कठा करनी शुरू कर देनी चाहिए। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान क्या करें क्या नहीं करें, क्या सही है क्या नहीं है, आदि। क्योंकि जितना ज्यादा महिला के पास जानकारी होती है उतना ही प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

एक दम से सभी को न बताएं की आप प्रेग्नेंट हैं

गर्भावस्था कन्फर्म होने के बाद एक दम से सभी को नहीं बताएं की आप प्रेग्नेंट हैं। हाँ जो आपके घर में रहते हैं आप उन्हें बता सकते हैं। लेकिन अन्य सभी लोगो को तीन महीने पूरे होने के बाद ही बताएं क्योंकि शुरूआती समय बहुत ही नाजुक होता है ऐसे में जितना छुपाकर रखा जाएँ उतना सही होता है। क्योंकि जितने ज्यादा लोगो को पता चलता है उतने ज्यादा लोग आपसे मिलने आते हैं, उतना ज्यादा आपको राय देते हैं जिससे शुरुआत से ही आपको रेस्ट नहीं मिल पाता है और आपको दिक्कत हो सकती है। ऐसे में जितना हो सके महिला शुरुआत में आराम करें और तीन महीने पूरे होने के बाद आप अपनी यह ख़ुशी सबके साथ शेयर करें।

सावधानी बरतें

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद शुरूआती तीन महीने महिला के लिए बेहद अहम होते हैं ऐसे में जितना हो सके महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए जैसे की ज्यादा उछल कूद भागदौड़ नहीं करनी चाहिए, भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, बिना डॉक्टरी सलाह के किसी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए, आदि। क्योंकि इसके कारण महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

बिल्कुल भी टेंशन नहीं लें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी भी तरह की टेंशन नहीं लेनी चाहिए क्योंकि टेंशन लेने से महिला की किसी समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि महिला की दिक्कत बढ़ सकती है। साथ ही इस दौरान महिला जितना खुश रहती है उतना ही महिला की दिक्कतों को कम करने में मदद मिलती है।

डॉक्टर ने जो -जो टेस्ट बताएं हैं उन्हें करवाएं

गर्भावस्था के दौरान महिला को उन सभी टेस्ट को समय से करवा लेने चाहिए जो महिला को डॉक्टर द्वारा बताये गए हैं। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन भी महिला को शुरू कर देना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान जिन जिन चीजों की जरुरत आपको पड़ सकती है उन्हें घर ले आएं

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी चीजों की जरुरत पड़ सकती है जैसे की आरामदायक चप्पल, थोड़े ढीले कपडे, आरामदायक गद्दा, आदि। ऐसे में महिला को जिन जिन चीजों की जरुरत पड़ सकती है महिला को उन सभी चीजों को प्रेगनेंसी के दौरान घर ले आना चाहिए ताकि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करना शुरू करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने लाइफस्टाइल, दिनचर्या में बदलाव की जरुरत होती है। क्योंकि इस दौरान महिला को हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर हर काम करने की जरुरत होती है। ऐसा करने से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। इसीलिए महिला के लिए जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के दौरान अपने लाइफस्टाइल और दिनचर्या में थोड़ा बदलाव करे।

ज्यादा ख़ुशी के चक्कर में लापरवाही नहीं करें

माँ बनना महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन अहसास होता है साथ ही यह समय महिला के लिए बहुत नाजुक भी होता है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला ज्यादा ख़ुशी के चक्कर में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें।

कोई भी दिक्कत होने पर या कुछ समझ नहीं आने पर डॉक्टर से बात करें

प्रेगनेंसी की शुरुआत में महिला को यदि कुछ भी समझने में दिक्कत हो, कुछ भी ऐसा लक्षण महसूस हो जिससे महिला को दिक्कत को तो ऐसे में महिला को बिना किसी झिझक के अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें प्रेगनेंसी को समझने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे में महिलाएं घबराएं नहीं बल्कि हर लक्षण को समझने की कोशिश करें इससे महिला की प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो दस बातें जिनका ध्यान महिला को प्रेगनेंसी टेस्ट करने के बाद रखना चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने अनुभव को खुलकर एन्जॉय करना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी कोई बीमारी नहीं है। साथ ही महिला को सभी की बातें सुनकर स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए और गर्भावस्था के दौरान अपना थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।

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क्या प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाना चाहिए?

सम्बन्ध बनाने से कपल को न केवल शारीरिक रूप से संतुष्टि मिलती है बल्कि सम्बन्ध बनाने से मानसिक रूप से रिलैक्स रहने, शारीरिक परेशानियों को कम करने आदि में भी मदद मिलती है। साथ ही सम्बन्ध बनाने से कपल एक दूसरे से इमोशनली भी जुड़ जाता है और उनके बीच प्यार और भी बढ़ता है। इसीलिए तो माना जाता है की एक शादीशुदा लाइफ को परफेक्ट बनाने के लिए पति और पत्नी के बीच प्यार के साथ उनके शारीरिक रिश्ते भी अच्छे होने चाहिए।

शादीशुदा जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए जब कपल अगला कदम रखता है यानी की जब उनकी फैमिली बढ़ने वाली होती है। तो उस दौरान सम्बन्ध बनाने को लेकर कपल के मन में बहुत से सवाल भी होते हैं। इसका मतलब जब महिला प्रेग्नेंट होती है तो उस दौरान शारीरिक रूप से नजदीक होने को लेकर कपल के मन में उथल पुथल हो रही होती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको महिला को प्रेग्नेंट होने पर सम्बन्ध बनाना चाहिए या नहीं उसके बारे में ही बताने जा रहे हैं।

क्या प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बना सकते हैं?

यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपके और आपके पति दोनों के मन में यह सवाल जरूर आ सकता है की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाएं या नहीं? खासकर जब पहली प्रेगनेंसी हो क्योंकि दूसरी प्रेगनेंसी में तो अधिकतर सभी चीजें पता चल जाती है। तो आपके इस सवाल का जवाब है की डॉक्टर्स के अनुसार स्वस्थ प्रेगनेंसी यानी की यदि महिला को किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है तो कपल प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बना सकता है।

लेकिन यदि महिला को किसी तरह की दिक्कत है, महिला आरामदायक नहीं महसूस करती है, आपके पति को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन है, डॉक्टर ने मना किया है, प्रेगनेंसी के शुरूआती दिन है, आदि। तो ऐसे कुछ केस में महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। इसके अलावा इस मुद्दे पर भी आप चाहे तो अपने डॉक्टर से राय ले सकते हैं और खुलकर बात कर सकते हैं ताकि आपको सही जानकारी मिलें।

किन केस में गर्भवती महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए?

ब्लीडिंग: यदि महिला को प्रेगनेंसी के शुरूआती समय या पूरी प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग की समस्या होती है तो ऐसे केस में महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

गर्भ में एक से ज्यादा शिशु: यदि महिला के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु हैं तो ऐसे केस में भी गर्भवती महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

कमजोर गर्भाशय: कई महिलाओं का गर्भाशय कमजोर होता है और यह बात आपको डॉक्टर द्वारा बताई भी जाती है ऐसे केस में भी महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

इन्फेक्शन: यदि महिला या पुरुष दोनों में से किसी को भी प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन है तो महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

मिसकैरिज: प्रेग्नेंट महिला को यदि पहले मिसकैरिज की समस्या हुई है या फिर बहुत मुश्किल से गर्भधारण हुआ है तो ऐसे केस में भी गर्भवती महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

डॉक्टर ने मना किया हो: यदि गर्भवती महिला को डॉक्टर द्वारा सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी गई हो तो भी गर्भवती महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

महिला का मन नहीं हो: कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी में तनाव, मूड स्विंग्स, शारीरिक परेशानियों आदि के कारण थोड़ा दिक्कत महसूस करती है। जिसके कारण उनकी सम्बन्ध न बनाने की इच्छा हो सकती है। ऐसे में उनके पार्टनर को यह बात समझनी चाहिए और उन्हें बिल्कुल भी परेशान नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें खुश कैसे रखा जाये इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान

गर्भावस्था के दौरान यदि कपल सम्बन्ध बनाता भी है तो उन्हें बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला या बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। जैसे की:

  • अधिकतर लोग प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध न बनाने की सलाह देते हैं क्योंकि इस दौरान गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है ऐसे में आपको भी पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाते समय कोई भी नई पोजीशन ट्राई नहीं करें क्योंकि इससे दिक्कत हो सकती है।
  • बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाने की सोचें भी नहीं क्योंकि इससे इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है।
  • सम्बन्ध बनाते समय बिल्कुल भी तेजी नहीं करें या ऐसा कुछ नहीं करें जिससे महिला के पेट पर दबाव पड़े।
  • यदि सम्बन्ध बनाते समय महिला को कोई दिक्कत महसूस हो तो तुरंत आपको वहीँ रुक जाना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना चाहिए या नहीं उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। और किसी भी तरह की दिक्कत होने पर डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए साथ ही किसी भी बात को लेकर मन में सवाल हो तो उसे भी डॉक्टर के साथ जरूर शेयर करें। ताकि आपके मन में चल रही दुविधा को दूर करने में मदद मिल सके और आपको मानसिक रूप से स्वस्थ रहें।

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Why does a snake never bite a pregnant woman?

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Snake and Pregnant Women, गर्भवती महिला और सांप, Why does a snake never bite a pregnant woman? How does a snake know that a woman is pregnant? सांप कभी गर्भवती स्त्री को क्यों नहीं काटता है? सांप को पता कैसे चलता है कि स्त्री गर्भवती है ?

Know why a snake never bites a pregnant women. Mythical and scientific reason behind snakes and pregnant women. Watch Hindi Video. गर्भवती महिला को सांप क्यों नहीं काटता है

आयुर्वेद के अनुसार 1 से 9 महीने तक गर्भवती महिला क्या खाएं

गर्भावस्था के दौरान खानपान का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। अगर आप अपना अच्छे से ख्याल रखेंगे अच्छा खाना खाएंगे पौष्टिक आहार लेंगे, तो आपके शिशु के लिए आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा। आइए जानते हैं इस हिंदी वीडियो के माध्यम से एक प्रेग्नेंट महिला को हर 1 महीने यानी कि गर्भावस्था के 1 से 9 महीने तक क्या क्या खाने चाहिए।

अगर आप भी चाहते हैं गर्भ में शिशु का विकास हो सही तरीके से हो। और आपको भी पूरे 9 महीने तक कोई परेशानी नहीं हो। तो आपको अपना खुद से ख्याल रखना होगा और इस वीडियो में बताई गई बातों का ध्यान रखना होगा। ताकि डिलीवरी तक आपको कोई परेशानी नहीं हो। आइए जानते हैं क्या-क्या खाना सही रहता है एक गर्भवती महिला के लिए।

शिशु काले निशान के साथ क्यों पैदा होता है

कई बार होता है शिशु के जन्म होने पर शिशु के किसी शारीरिक अंग जैसे की हाथ, पैर, टांग, मुँह, गले आदि पर काले या भूरे रंग का निशान होता है। इस निशान को बर्थ मार्क कहा जाता है जरुरी नहीं है की हर बच्चे को बर्थमार्क हो। लेकिन कुछ बच्चों के साथ ऐसा हो सकता है ऐसे में कई बार माता पिता घबरा जाते हैं लेकिन इसमें किसी भी तरह के घबराने की बात नहीं होती है क्योंकि यह कोई बिमारी नहीं होती है तो आइये अब इस आर्टिकल में बर्थमार्क के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या बर्थमार्क से कोई परेशानी हो सकती है?

वैसे तो बर्थ मार्क से कोई भी दिक्कत नहीं होती है और न ही बर्थमार्क के कारण शिशु को कोई जन्मदोष होता है। लेकिन कई बार जब बच्चों के मुँह या हाथ पर बड़ा सा मार्क दिखाई देता है तो इसकी वजह से बच्चों को बड़ा होने के बाद शर्मिंदगी महसूस हो सकती है। इसके अलावा कई बार फोड़े जैसे, जले के निशान जैसे मार्क भी जन्म के समय कुछ बच्चों को होते हैं ऐसे में यदि उन बच्चों को कोई दिक्कत होती है तो इसके बारे में आप डॉक्टर से राय ले सकते हैं और उनका उपचार भी करवा सकते हैं।

क्या बर्थमार्क का कोई इलाज़ होता है?

वैसे तो शरीर के किसी अन्य हिस्से पर बर्थमार्क हो तो इसकी वजह से कोई दिक्कत नहीं होती है लेकिन मुँह या हाथ पर निशान होने के कारण व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। ऐसे में यदि आप इस समस्या से निजात पाना चाहे तो लाज़र ट्रीटमेंट की मदद से इसे अपने शरीर से हटवा सकते हैं।

आखिर क्यों हो जाता है बर्थमार्क?

ऐसा माना जाता है की शिशु को बर्थमार्क होने के कारण अनुवांशिक हो सकता है यदि आपके घर में किसी को जन्म के समय ऐसा मार्क था तो हो सकता है की आपके बच्चे को भी ये मार्क हो जाये। या फिर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला कोई लापरवाही करती है जैसे की ग्रहण लगने के दौरान कुछ गलत करती है तो ऐसा माना जाता है की इसकी वजह से भी बच्चे को मार्क आ सकते हैं।

तो यह हैं शिशु काले निशान के साथ क्यों पैदा होता है उससे जुडी जानकारी, यदि आपके बच्चे के साथ भी ऐसा कुछ है तो बिल्कुल भी घबराने की बात नहीं है। लेकिन यदि आपको ऐसा लग रहा है की इस निशान की वजह से आपके बच्चे को कुछ दिक्कत हो रही है तो आप लेज़र ट्रीटमेंट की मदद से इसे हटवा भी सकते हैं।

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क्या आपका एक ब्रेस्ट बड़ा और एक ब्रेस्ट छोटा है

प्राइवेट पार्ट, ब्रेस्ट महिला के शरीर के ऐसे हिस्से है जिनके बारे में बात करते हुए महिलाएं अक्सर शर्माती है। और यदि इन पार्ट्स से जुडी कोई समस्या हो तो भी महिलाएं इस विषय में किसी से खुलकर बात नहीं करती है। आपने भी सुना होगा की कई महिलाओं का एक ब्रेस्ट बड़ा और एक ब्रेस्ट छोटा होता है।

यह कोई हैरान करने वाली बात नहीं है बल्कि लगभग 80-85% औरतों के साथ यह दिक्कत हैं। लेकिन बस महिलाएं इसके बारे में किसी से बात नहीं करती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपसे महिलाओं को यह समस्या क्यों होती है इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

एक ब्रेस्ट बड़ा और एक छोटा होने के कारण

यदि किसी महिला का एक ब्रेस्ट बड़ा और एक छोटा होता है तो इस समस्या के होने का एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। जैसे की:

प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के कारण

शरीर में हार्मोनल बदलाव होना आम बात होती है लेकिन यह बदलाव यदि संतुलित रहते हैं तो इससे कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन यदि हार्मोनल बदलाव में असंतुलन होता है तो इसकी वजह से कई शारीरिक परेशानियां जन्म ले लेती है। ऐसे ही शरीर में यदि प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर यदि असंतुलित रहता है तो इसकी वजह से महिला का एक ब्रेस्ट बड़ा और एक छोटा रह जाता है।

ब्रेस्टफीडिंग के समय की गई गलती

जब महिला अपने शिशु को स्तनपान करवाती है तो उसे डॉक्टर द्वारा भी समझाया जाता है की शिशु को दोनों स्तन से दूध पिलाएं। नहीं तो महिला को ब्रेस्ट पेन जैसी समस्या हो सकती है लेकिन शायद आप यह नहीं जानते की यदि महिला हमेशा एक ही स्तन से शिशु को दूध पिलाती है। तो इसकी वजह से महिला जिस स्तन से दूध पिलाती रहती है वो बड़ा और दूसरा छोटा रह जाता है। और इस गलती की वजह से महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

ब्रेस्ट कैंसर

यदि किसी महिला को ब्रेस्ट कैंसर होता है तो भी महिला के साथ ऐसा हो सकता है। ऐसे में यदि अचानक से महिला को यदि यह बदलाव अपने ब्रेस्ट में दिखाई दे तो महिला को इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत जांच करवानी चाहिए।

हार्मोनल बदलाव

जब लड़कियों का विकास होना शुरू होता है तो कई बार शरीर में हार्मोनल असंतुलन होने के कारण लड़की के एक ब्रेस्ट का विकास पहले और एक बाद में होता है। ऐसा होने के कारण भी लड़कियों को अपने ब्रेस्ट में यह बदलाव महसूस हो सकता है।

स्तन में गाँठ

कुछ महिलाओं को ब्रेस्ट में गाँठ की समस्या भी हो जाती है और गाँठ होने के कारण महिला का एक स्तन बड़ा और एक स्तन छोटा महसूस हो सकता है। इसके अलावा जिस ब्रेस्ट में महिला को गाँठ होती है उस स्तन में महिला को दर्द भी अधिक महसूस हो सकता है।

अनुवांशिक

ब्रेस्ट के छोटे बड़े रहने का कारण अनुवांशिक भी हो सकता है यदि आपकी माँ या बहन के साथ ऐसा है तो आपके साथ भी ऐसा हो सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिलाओं को एक ब्रेस्ट के बड़ा और एक ब्रेस्ट के छोटा होने की समस्या होती है। यदि आपके साथ भी यह दिक्कत है तो आप भी जैतून के तेल से मालिश करके, सही ब्रा पहनकर, आदि कुछ तरीकों से इस समस्या को दूर कर सकती है।

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प्रेगनेंसी में छाती में दर्द होने के कारण?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को तरह तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे की उल्टियां होना, शरीर के अंगों में दर्द होना, सूजन होना, पेट सम्बन्धी समस्या होना, सीने में जलन होना दर्द होना, ब्रेस्ट में हल्का दर्द रहना, बार बार यूरिन आना, भूख कम या ज्यादा लगना आदि। और प्रेगनेंसी के दौरान यह सब परेशानियां होना बहुत ही आम बात होती है। कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक इन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

तो कुछ महिलाएं पहली तिमाही के बाद ठीक हो जाती है। साथ ही ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की हर महिला को एक ही तरह की समस्या हो बल्कि यह पूरी तरह महिला की शारीरिक अवस्था पर निर्भर करता है। ऐसे में महिला को ज्यादा दिक्कत नहीं हो और माँ व् बच्चा प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहे इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। तो आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली छाती में दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

क्यों होता है प्रेगनेंसी में छाती में दर्द?

गर्भवती महिला को यदि प्रेगनेंसी के दौरान छाती में दर्द की समस्या रहती है तो इस समस्या के होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे कई कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की:

अस्थमा

जिन गर्भवती महिलाओं को अस्थमा की समस्या होती है उन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान छाती में दर्दम सांस फूलने जैसी समस्या प्रेगनेंसी के दौरान हो सकती है।

एसिडिटी

अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान एसिडिटी की समस्या से परेशान रहती है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम करती है। और इस वजह से खाना अच्छे से हज़म नहीं हो पाता है और महिला को अपच व् कब्ज़ होने के कारण एसिडिटी होने लगती है। जिसके कारण महिला को छाती में दर्द भी महसूस हो सकता है।

संक्रमण

यदि प्रेग्नेंट महिला को किसी तरह का संक्रमण या फ्लू हो गया है तो इसकी वजह से खांसी जुखाम जैसी समस्या हो सकती है। और खांसी जुखाम होने के कारण कफ जमने लगता है जिसके कारण जब भी आप खांसते हैं या छींकते हैं तो इसकी वजह से छाती में दर्द महसूस हो सकता है।

गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु का विकास बढ़ने के साथ पेट के आस पास के हिस्सों व् फेफड़ों पर थोड़ा दबाव पड़ना शुरू हो जाता है। जिसकी वजह से महिला को सीने में दर्द, हार्ट बीट बढ़ना जैसी समस्या हो सकती है।

ब्लड प्रैशर बढ़ने के कारण

जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होती है उन महिलाओं को ब्लड प्रैशर में होने वाले उतार चढ़ाव के कारण छाती में दर्द की समस्या हो सकती है।

तनाव

कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव का शिकार भी हो जाती है जिसकी वजह से वो हर चीज के बारे में ज्यादा सोचने लगती है। और यही तनाव कई बार महिला के सिर दर्द के साथ छाती दर्द का कारण भी बन जाता है।

वजन

जिन महिलाओं का वजन प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है उन महिलाओं को भी प्रेगनेंसी के दौरान सीने में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

नींद कम लेना

नींद कम लेने के कारण भी शरीर में असहजता महसूस हो सकती है जिसकी वजह से महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है। और इन्ही शारीरिक परेशानियों की वजह से महिला को छाती में दर्द जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में होने वाले छाती में दर्द से बचने के उपाय

  • यदि प्रेग्नेंट महिला ऐसी डाइट लेती है जिसे पचाने में महिला को आसानी होती है साथ ही वो डाइट पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है तो इससे महिला को पेट सम्बन्धी दिक्कत नहीं होती है तो इससे महिला को एसिडिटी जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है जिससे छाती के दर्द की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को मौसम का बदलाव होने पर अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए, किसी संक्रमित व्यक्ति के पास नहीं जाना चाहिए, इससे महिला को खांसी जुखाम से बचे रहने के साथ छाती में दर्द की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।
  • जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान अपने वजन को नियंत्रित रखती है उन्हें भी इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • तनाव से दूरी रखने के साथ गर्भवती महिला को अपने आप को खुश रखना चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिला को छाती में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें।
  • पानी का भरपूर सेवन करें, नींद भरपूर लें।
  • थोड़ा देर व्यायाम, योगा, मैडिटेशन आदि जरूर करें।

छाती में दर्द की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

यदि महिला को उठते, बैठते, लेटते समय छाती में दर्द ज्यादा महसूस होने के साथ अन्य लक्षण जैसे की बुखार, उल्टियां आदि भी महसूस हो रहे हैं या फिर महिला से दर्द बर्दाश ही नहीं हो रहा है। तो ऐसे कुछ केस में गर्भवती महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि छाती में दर्द की समस्या को अनदेखा करना महिला व् बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान छाती में दर्द होने की समस्या के कारण व् इस समस्या से बचने के असरदार उपाय, यदि आप भी माँ बनने वाली है तो प्रेगनेंसी के दौरान इस बात का आपको ध्यान रखना चाहिए की कब छाती में दर्द होना सामान्य होता है कब नहीं, ताकि प्रेगनेंसी में होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में आपको मदद मिल सकें।

Causes of chest pain in pregnancy

गर्भवती महिला को आंगनवाड़ी से क्या-क्या मिलता है?

प्रेगनेंसी के दौरान सही सुविधाएँ न मिलने के कारण कुछ महिलाओं को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। और महिला को दिक्कत होने के साथ इसका असर बच्चे पर भी पड़ता है। ऐसे में यदि आपके आस पास कोई आंगनवाड़ी केंद्र है तो आपको वहां जाना चाहिए। क्योंकि सरकार द्वारा आंगनवाड़ी में गर्भवती महिलाओं के पालन पोषण के लिए काम किया जाता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भवती महिला को आंगनवाड़ी से क्या-क्या मिलता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भवती महिला को आंगनवाड़ी से क्या-क्या मिलता है?

  • यदि कोई महिला गर्भवती हो गई है तो महिला को अपना नाम आँगनवाड़ी केंद्र में रजिस्टर करवाना चाहिए।
  • उसके बाद आंगनवाड़ी केंद्र से आपको एक मातृ एवं बाल संरक्षण कार्ड और सुरक्षित मातृत्व की पुस्तिका मिलेगी।
  • फिर महिला की आयरन, कैल्शियम, थायरॉयड, ब्लड, वजन आदि सभी की जांच करवाई जाएगी।
  • प्रेगनेंसी के दौरान जो जो विटामिन्स लेने होते हैं वो भी आपको दिए जायेंगे।
  • गर्भावस्था के दौरान होने वाला टीकाकरण की सुविधा आपको दी जाएगी।
  • अब तो खान पान का इंतज़ाम भी आंगनवाड़ी केंद्र में ही किया जा रहा है।
  • महिला को प्रेगनेंसी से जुडी पूरी जानकारी दी जाएगी की महिला को प्रेगनेंसी के दौरान क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए, क्या सही है क्या नहीं, बच्चे के लिए क्या सही है, आदि।
  • इसके अलावा जो गर्भवती महिलाएं आंगनवाड़ी केंद्र पर नहीं जा सकती है या किसी को शारीरिक समस्या है तो उन महिलाओं को घर पर ही यह सभी सुविधाएँ घर पर ही पहुंचाई जाएँगी।
  • साथ ही डिलीवरी के लिए भी महिला को धनराशि की मदद भी की जाती है।
  • उसके बाद जब बच्चे का जन्म होता है तो बच्चे का टीकाकरण भी किया जाता है और जच्चा के लिए भी उसकी अच्छे से केयर हो उसका खान पान अच्छा हो उसकी व्यवस्था की जाती है।

तो यह हैं वो सुविधाएँ जो आंगनवाड़ी द्वारा प्रेग्नेंट महिला को दी जाती है। ऐसे आपको भी अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र से इन सभी सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए। खासकर जो महिलाएं या परिवार आर्थिक रूप से सशक्त नहीं है उन्हें इस योजना का लाभ जरूर उठाना चाहिए।