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प्रेगनेंसी के इस महीने में होने लगे पेट दर्द तो हो जाये सावधान

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही हर एक गर्भवती महिला को एक ही तरह की दिक्कत हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। इसके अलावा ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की प्रेगनेंसी हुई है तो शारीरिक परेशानियां जरूर होंगी। क्योंकि यदि कोई महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान, अपने रहन सहन का अच्छे से ध्यान रखती है, तो महिला को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती है।

लेकिन प्रेगनेंसी के समय महिला को किसी तरह की शारीरिक परेशानी होती है और महिला को ज्यादा दिक्कत होती है साथ ही महिला से सहन भी नहीं हो रहा होता है या शरीर में कोई असामान्य लक्षण महसूस होता है तो इन्हे महिला को अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान छोटी छोटी बातों को अनदेखा करने के कारण महिला को ज्यादा दिक्कत होने का खतरा रहता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान पेट में दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में किस तरह के पेट दर्द को नहीं करें अनदेखा?

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को मासिक धर्म के दौरान जिस तरह से पेट दर्द या पेट में मरोड़ उठने जैसी दिक्कत होती है तो महिला को उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • अचानक से असहनीय पेट दर्द होने पर महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • पेट दर्द के साथ दस्त, बुखार, उल्टी, ठण्ड लगने की समस्या यदि महिला को हो तो महिला को उसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • पेट के निचले हिस्से में तेजी से होने वाले दर्द को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • ब्लीडिंग के साथ होने वाले पेट दर्द को भी महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के किस महीने में न करें पेट दर्द को अनदेखा

गर्भावस्था के दौरान महिला को पेट दर्द की समस्या को किस महीने में बिल्कुल अनदेखा नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। आइये अब उस विषय में जानते हैं।

प्रेगनेंसी की शुरुआत में

गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में महिला को पेट में होने वाले दर्द को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए खासकर जब आपको दर्द बहुत अधिक और ज्यादा समय से हो रहा हो। क्योंकि प्रेगनेंसी की शुरुआत में होने वाला पेट दर्द एक्टोपिक प्रेगनेंसी का लक्षण होता है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी में बच्चा गर्भाशय के अंदर नहीं बल्कि बाहर ही होता है जिस कारण आपको यह दिक्कत होती है।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होने वाला तेज दर्द

गर्भावस्था की पहली तिमाही में यदि महिला को कभी पेट में बहुत तेज दर्द होता है, पेट में मरोड़ उठने लगते हैं, थोड़े बहुत ब्लड के धब्बे भी महसूस होते हैं। तो महिला को इस दर्द को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा होना गर्भपात का लक्षण होता है।

तीसरी तिमाही हो जब प्रेगनेंसी की

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में भी महिला को पेट दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द साथ ही पीठ में दर्द को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में होने वाले इस दर्द का कारण समय से पहले बच्चे का जन्म होने का लक्षण होता है। ऐसे में यदि थोड़ी सी सावधानी बरती जाये तो प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी का वो समय जब महिला को पेट में होने वाले दर्द को अनदेखा नहीं करना चाहिए। साथ ही यदि कभी महिला को ऐसा लगता है की महिला को पेट में गैस अधिक बन रही है और उसकी वजह से महिला को खट्टी डकार, सीने में जलन, उल्टी आदि की परेशानी होती है। तो इसे भी अनदेखा न करें और एक बार डॉक्टर से मिलकर इस परेशानी का इलाज करे ताकि आपको कोई भी दिक्कत अधिक न हो।

Be careful if you start having abdominal pain in this month of pregnancy

प्रेग्नेंट महिला ब्रोकली खा सकती है या नहीं?

ब्रोकली का दिखने में आकार बिल्कुल गोभी की तरह होता है लेकिन रंग में यह ऊपर से नीचे तक बिल्कुल हरी होती है। और जब पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों का नाम आता है तो उसमे ब्रोकली भी शामिल होती है। ब्रोकली के न्यूट्रिशन से भरपूर होने के कारण ही इसका सेवन करने से सेहत सम्बन्धी बहुत से फायदे मिलते हैं।

लेकिन जब बात प्रेगनेंसी की हो तो ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की जो सब्ज़ी एक स्वस्थ व्यक्ति को फायदा पहुंचाती है उससे प्रेग्नेंट महिला को भी फायदा हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में ब्रोकली के सेवन करने के बारे में बात करने जा रहे हैं।

ब्रोकली में मौजूद पोषक तत्व

कैल्शियम, जिंक, फाइबर, विटामिन्स, आयरन, फोलेट, प्रोटीन, पोटैशियम, व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक बॉडी को फिट रखने के लिए बहुत जरुरी होते हैं।

क्या ब्रोकली का सेवन प्रेग्नेंट महिला कर सकती है?

जब बात प्रेग्नेंट महिला की आती है तो किसी भी सब्ज़ी, फल या अन्य चीज का सेवन करने से पहले यह जानना जरुरी होता है। की जो महिला खा रही है उसे खाना माँ व् बच्चे के लिए फायदेमंद है या नहीं। क्योंकि यदि महिला किसी ऐसी चीज का सेवन कर लेती है जो प्रेगनेंसी के दौरान सेफ नहीं होती है तो उसका सेवन करने से माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान हो सकता है।

ऐसे में ब्रोकली की बात की जाए तो ब्रोकली में मौजूद पोषक तत्व माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं साथ ही ब्रोकली का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला या बच्चे की सेहत को नुकसान भी नहीं होता है। तो आइये अब जानते हैं की ब्रोकली का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

फाइबर

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में हॉर्मोन्स में उतार चढ़ाव होता रहता है। साथ ही गर्भाशय का आकार भी लगातार बढ़ता है। जिस वजह से पाचन तंत्र धीमी गति से काम करता है और महिला को पाचन क्रिया से सम्बंधित परेशानी जैसे की कब्ज़, अपच, जैसी दिक्कतें हो जाती है। ऐसे में महिला को डॉक्टर्स फाइबर युक्त डाइट लेने की सलाह देते हैं क्योंकि फाइबर से भरपूर आहार महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। ऐसे में फाइबर के लिए प्रेग्नेंट महिला ब्रोकली को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है। यदि महिला ब्रोकली का सेवन करती है तो इससे महिला को फाइबर मिलता है जिससे महिला को कब्ज़, अपच, पेट में गैस, पेट फूलना, सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

आयरन व् फोलेट

ब्रोकली में आयरन और फोलेट भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है और यह दोनों ही पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यदि महिला ब्रोकली का सेवन करती है तो इससे महिला के शरीर में खून की कमी पूरी होने के साथ बच्चे के बेहतर विकास और बच्चे को जन्म दोष से बचे रहने में मदद मिलती है।

डाइबिटीज़ का खतरा होता है कम

गर्भावस्था के दौरान महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का भी खतरा रहता है लेकिन यदि महिला ब्रोकली का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि ब्रोकली का सेवन करने से ब्लड में शुगर लेवल को कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

ब्रोकली कैल्शियम, मैग्नीशियम का भी बेहतरीन स्त्रोत होती है ऐसे में गर्भवती महिला यदि ब्रोकली का सेवन करती है। तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला की हड्डियों को मजबूत रहने के साथ बच्चे की हड्डियों व् दाँतों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

प्रोटीन

प्रोटीन कोशिकाओं की मरम्मत व् नई कोशिकाओं के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि प्रोटीन युक्त डाइट लेती है तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद मिलती है। तो यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आप प्रोटीन के लिए ब्रोकली का सेवन जरूर करें ताकि गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को फायदा मिल सके।

इम्युनिटी मजबूत होती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है जिस कारण महिला को संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में महिला को संक्रमण से बचाव के लिए अपनी इम्युनिटी को बूस्ट करने की कोशिश करनी चाहिए। और इसके लिए महिला को अपने खान पान में इम्युनिटी बूस्ट करने वाले फ़ूड को शामिल करना चाहिए। ऐसे में ब्रोकली को महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें बीटा कैरोटीन और सेलेनियम मौजूद होता है जो गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद करता है।

प्रेग्नेंट महिला को एक दिन में कितनी ब्रोकली खानी चाहिए?

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान एक दिन में एक से दो कप ब्रोकली का सेवन कर सकती है। इसके अलावा महिला क्लो ब्रोकली खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए की ब्रोकली बिल्कुल फ्रैश हो और अच्छे से धोने के बाद ही इसे प्रयोग में लाये।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान ब्रोकली का सेवन करने के फायदे व् उससे जुडी जानकारी, तो यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आप भी अपनी डाइट में ब्रोकली को जरूर शामिल करें ताकि आपको और आपके बच्चे को ब्रोकली के बेहतरीन फायदे मिल सके।

Health benefits of eating broccoli during Pregnancy

क्या ऐसा हो सकता है की पीरियड्स भी हो जाये और गर्भ भी ठहर जाए?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के मन में बहुत से सवाल चल रहे होते हैं जैसे की प्रेगनेंसी में क्या खाएं क्या नहीं, प्रेगनेंसी में क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए, कैसे सोना चाहिए, कौन सा व्यायाम करना चाहिए, गर्भ में बच्चे के लिए क्या फायदेमंद है, आदि। इसके अलावा हेल्थ से सम्बंधित भी बहुत से सवाल महिला के मन में आते हैं। आज हम ऐसे ही एक सवाल के बारे में बात करने जा रहे हैं जो है की क्या ऐसा हो सकता है की पीरियड्स भी हो जाये और गर्भ भी ठहर जाए? तो आइये आज इस आर्टिकल में हम इस सवाल का जवाब जानते है।

क्या पीरियड्स और प्रेगनेंसी हो सकती है एक साथ?

गर्भावस्था की शुरुआत में कुछ महिलाओं को स्पॉटिंग यानी की थोड़ी ब्लीडिंग होने की परेशानी हो सकती है। जो की हो सकता है की गर्भाशय में शिशु के प्रत्यारोपण के समय हुई हो। और ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ही आम बात होती है। लेकिन कुछ केस में महिला को ब्लीडिंग थोड़ी ज्यादा हो जाती है जिसे की यदि ब्लीडिंग की समस्या के होने के तुरंत बाद डॉक्टर को बता दिया जाए तो उसे कण्ट्रोल किया जा सकता है और गर्भ में शिशु भी स्वस्थ रहता है।

लेकिन यदि आपको पीरियड्स की तरह ब्लीडिंग हो जाती है और मासिक धर्म की तरह पेट में दर्द रहता हैं। तो ऐसे में केस में यह कहना की पीरियड्स हो गए हैं और गर्भ में शिशु स्वस्थ है तो यह बिल्कुल गलत होता है। क्योंकि ऐसे में केस में महिला का गर्भ गिर जाता है। तो ऐसा नहीं हो सकता है की पीरियड्स और गर्भावस्था एक साथ हो। लेकिन यदि महिला को कभी कभार प्रेगनेंसी में खून का धब्बा लगता है तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं होता है की महिला का गर्भ गिर गया है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी और पीरियड्स साथ हो सकते हैं या नहीं उससे जुडी जानकारी। यदि आप भी माँ बनने वाली है और प्रेगनेंसी के दौरान आपको स्पॉटिंग हो रही है तो इसे अनदेखा नहीं करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें ताकि इसे कण्ट्रोल किया जा सके। जिससे आपकी प्रेगनेंसी और शिशु के विकास में किसी भी तरह की समस्या नहीं आये।

बथुआ का साग प्रेग्नेंट महिला के लिए कितना फायदेमंद है और महिला को कितना खाना चाहिए

सर्दियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही मार्किट में हर एक हरी सब्ज़ी मिलने लगती है इसीलिए पालक, सरसों, आदि का सेवन सर्दियों में बहुत अधिक किया जाता है। और ऐसी ही एक हरी सब्ज़ी है बथुआ जो पालक, सरसों की तरह साग के रूप में खाई जाती है। हो सकता है की हरी सब्जियों के नाम पर आपका मुँह बन जाये और आपका इसे खाने का मन नहीं करें।

लेकिन जब बात हरी सब्जियों के फायदे की आती है तो यह खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। आज इस आर्टिकल में हम बथुआ का सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं। बथुआ का सेवन हर कोई कर सकता है और इसका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना बहुत फायदेमंद होता है।

बथुए में मौजूद पोषक तत्व

यदि आप बथुए का सेवन करते हैं तो इसका सेवन करने से आपको बहुत से फायदे मिलते हैं। क्योंकि बथुआ में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में बथुआ का साग खाने से माँ व् बच्चे को कौन से फायदे मिलते हैं।

खून की कमी होती है दूर

बथुआ आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होता है ऐसे में बथुआ खाने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। जिससे खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

कब्ज़ से बचाव

प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या से अधिकतर महिलाएं परेशान होती है। और इस परेशानी के होने के कारण गर्भवती महिला के शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव और गर्भाशय के बढ़ते आकार के कारण पाचन तंत्र का धीमा होना होता है। लेकिन बथुए का साग खाने से प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़ की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि बथुए के साग में फाइबर होता है जो महिला के पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में मदद करता है। कब्ज़ के साथ पेट फूलना, पेट में गैस, सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी परेशानियों से बचे रहने में भी बथुआ का सेवन करने से मदद मिलती है

वजन रहता है नियंत्रित

बथुआ में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है जिसकी वजह से यह प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ने देता है। और वजन का संतुलित रहना और सही तरीके से बढ़ना प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे के लिए सही रहता है।

इम्युनिटी बढ़ती है

विटामिन सी की मात्रा बथुए में मौजूद होती है जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला बथुआ का सेवन करती है तो इससे महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।

शरीर को देता है ऊर्जा

बथुआ कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होता है। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर के अंगो को मजबूत बनाएं रखने में मदद करते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला को बथुए का सेवन कितना करना चाहिए?

सबसे पहले तो गर्भवती महिला को बथुए का सेवन पालक, सरसों आदि के साथ या दही में रायता बनाकर या रोटी में मिलाकर करना चाहिए। सिर्फ बथुए का सेवन करने से बचना चाहिए। उसके बाद यदि आप बथुआ खाती है तो एक दिन में महिला एक कटोरी बथुए का रायता, एक कटोरी साग या दो बथुए की रोटी का सेवन कर सकती है ध्यान रखें की तीनों चीजें नहीं एक दिन में इनमे से किसी एक ही चीज का सेवन करें। स्वाद के चक्कर में आकर भी महिला को इससे ज्यादा बथुए का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान बथुआ खाने के कुछ बेहतरीन फायदे जो गर्भवती महिला को मिलते हैं तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और बथुआ मार्किट में मिल रहा है तो आपको भी इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

Health benefits of eating bathua in Pregnancy

प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में चुकंदर खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्वस्थ रहे और बच्चे का विकास भी बेहतर तरीके से हो साथ ही प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स से बचे रहने में मदद मिल सके इसके लिए जरुरी होता है की महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें। क्योंकि जो भी आप प्रेगनेंसी के दौरान खाती पीती है यदि वह पोषक तत्वों से भरपूर होता है तो इसका पूरा फायदा आपको और आपके बच्चे को मिलता है। और ऐसा नहीं है की हमेशा एक ही तरह की डाइट ले बल्कि बदलते मौसम के साथ अपने खान पान में भी महिला को जरूर बदलाव करना चाहिए। आज हम प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में चुकंदर खाने से कौन -कौन से फायदे मिलते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

चुकंदर में कौन कौन से पोषक तत्व मौजूद होते हैं?

कैल्शियम, विटामिन सी, आयरन, फोलेट, पोटैशियम, मैगनीज़, व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में चुकंदर में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होने के साथ गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। आइये अब विस्तार से प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में चुकंदर खाने के क्या फायदे मिलते हैं उसके बारे में जानते हैं।

फोलेट

फोलेट गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए एक अहम पोषक तत्व होता है जो यदि शिशु को भरपूर नहीं मिलता है तो इसके कारण शिशु को बहुत दिक्कत आती है। जैसे की शिशु की रीढ़ की हड्डी का विकास अच्छे से नहीं होता है, बच्चे का मानसिक विकास अच्छे से नहीं होता है, शिशु को जन्म दोष होने का खतरा होता है। ऐसे में शिशु को इन दिक्कतों से बचाव के लिए महिला को फोलेट युक्त डाइट का सेवन भरपूर करना चाहिए ताकि बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो। और इसके लिए महिला चुकंदर का सेवन कर सकती है जो की सर्दियों में मौसम में खूब आता है और चुकंदर में फोलेट भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

आयरन

आयरन की कमी के कारण डिलीवरी में परेशानी, बच्चे के जन्म के समय वजन में कमी, प्रेगनेंसी के दौरान कॉम्प्लीकेशन्स जैसे की शारीरिक परेशानियां अधिक होने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन चुकंदर का सेवन करने से महिला की इन सभी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। क्योंकि चुकंदर आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होता है।

इम्युनिटी करता है बूस्ट

विटामिन सी जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो चुकंदर में भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और सर्दियों के मौसम में यदि महिला की इम्युनिटी कमजोर होती है तो इस वजह से महिला को सर्दी के कारण इन्फेक्शन होने का खतरा अधिक होता है। लेकिन यदि महिला सर्दियों में चुकंदर का सेवन करती है तो इससे महिला को इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है क्योंकि चुकंदर महिला को इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद करता है।

जोड़ो में दर्द व् सूजन की समस्या से बचाव

गर्भावस्था के दौरान सूजन व् वजन बढ़ने के कारण जोड़ो में दर्द की परेशानी होना आम बात होती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला चुकंदर का सेवन कर सकती है क्योंकि चुकंदर में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो महिला को प्रेगनेंसी में इन परेशानियों से बचे रहने में मदद करते हैं।

कैल्शियम

चुकंदर कैल्शियम का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भावस्था के दौरान महिला की हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है जिससे महिला को थकावट व् कमजोरी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही कैल्शियम गर्भ में पल रहे बच्चे की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

हाई ब्लड प्रैशर और ब्लड शुगर लेवल से जुडी परेशानी होती है दूर

बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाई बी पी की समस्या हो सकती है लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला चुकंदर का सेवन करती है तो इससे महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही चुकंदर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला का ब्लड शुगर लेवल भी कण्ट्रोल रहता है जिससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली डाइबिटीज़ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

मेटाबोलिज्म रहता है बेहतर

चुकंदर पोटैशियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भावस्था के दौरान महिला के मेटाबोलिज्म रेट को सही रखने में मदद करता है।

लिवर रहता है स्वस्थ

चुकंदर का सेवन करने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है और महिला का लिवर भी सही रहता है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला को चुकंदर का सेवन करने से मिलते हैं। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान चुकंदर का सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि आपको और आपके बच्चे को यह बेहतरीन फायदे मिल सकें। इसके अलावा प्रेगनेंसी में चुकंदर का सेवन करने के साथ चुकंदर के पत्तों का सेवन भी करना चाहिए क्योंकि चुकंदर के पत्ते भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।

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आपका होने वाला बच्चा चिड़चिड़ा होगा अगर प्रेगनेंसी में करेंगी यह गलतियां

प्रेगनेंसी के दौरान महिला हर वो काम करती है जिससे उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को फायदा मिलें। क्योंकि बच्चा गर्भ में अपने विकास के लिए पूरी तरह अपनी माँ पर निर्भर करता है। ऐसे में महिला यदि अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है तो बच्चे का शारीरिक विकास अच्छे से होता है, महिला यदि स्ट्रेस फ्री रहती है तो इससे बच्चे का विकास और बेहतर तरीके से होता है, आदि।

लेकिन यदि महिला कोई गलती करती है तो इसका नकारात्मक असर भी बच्चे पर पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो यदि महिला करती है तो इससे होने वाला बच्चा खुशमिज़ाज़ पैदा होने के बजाय चिड़चिड़ा पैदा होता है। क्या आप भी प्रेग्नेंट है? तो यह आर्टिकल आपके लिए है आइये अब जानते हैं की वो गलतियां कौन सी हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का गुस्सा अधिक करना और चिड़चिड़ा रहना

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला के स्वाभाव व् व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिल सकता है। जैसे की महिला को छोटी छोटी बातों पर गुस्सा आता है, महिला चिड़चिड़ी हो जाती है, आदि। ऐसे में यदि महिला इन लक्षणों को कण्ट्रोल करने की बजाय इन्हे अपने ऊपर हावी होने देती है तो इसके कारण बच्चे पर भी इसका असर पड़ता है जिसके कारण बच्चा जन्म के बाद गुस्से वाला व् चिड़चिड़ा पैदा होता है।

तनाव

गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाएं शरीर में होने वाले बदलाव, शारीरिक परेशानियों, बच्चे के विकास को लेकर चिंतित होने की वजह से तनाव में आ जाती है। और यदि गर्भावस्था के दौरान महिला बहुत अधिक तनाव में रहती है तो इसके कारण होने वाले बच्चे के मानसिक विकास में कमी आने के साथ होने वाला बच्चा चिड़चिड़ा भी पैदा होता है। क्योंकि तनाव का नकारात्मक असर शिशु को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है।

महिला के खुश नहीं रहने के कारण

यह तो आप जानते ही हैं की यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला खुश रहती है तो इससे होने वाला बच्चा भी खुश रहता है। ऐसे ही यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत ज्यादा चिड़चिड़ी रहती है। तो इसके कारण होने वाला बच्चा भी चिड़चिड़ा ही पैदा होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के भरपूर आराम नहीं करने के कारण

प्रेग्नेंट महिला जितनी जरुरत है यदि उतना ही प्रेगनेंसी के दौरान आराम करती है उतना ही महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है और गर्भ में शिशु भी स्वस्थ रहता है। लेकिन यदि महिला आराम नहीं करती है तो इसके कारण महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ जाती है जिसकी वजह से महिला चिड़चिड़ी हो जाती है और उसका असर बच्चे पर भी पड़ता है।

महिला का एक्टिव नहीं रहना

गर्भवती महिला जितना एक्टिव रहती है उतना ही महिला को फिट रहने में मदद मिलती है साथ ही बच्चा भी एक्टिव व् स्वस्थ होता है। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला ही एक्टिव नहीं रहती है सुस्त रहती है तो होने वाला बच्चा ही सुस्त और चिड़चिड़ा होता है।

तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और चाहती हैं की आपका होने वाला बच्चा चिड़चिड़ा नहीं हो तो प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का ध्यान रखें। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान अपने आप को फिट रखें और खुश रहें क्योंकि जितना आप खुश रहेंगी स्वस्थ रहेंगी उतना ही आपका बच्चे भी हष्ट पुष्ट और खुशमिजाज पैदा होगा।

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किन्नू खाना प्रेगनेंसी में कितना फायदेमंद हैं

दिखने के आकार में बिल्कुल संतरे जैसा, संतरी रंग का गोलाकार एक फल होता है जिसे किन्नू कहते हैं। किन्नू, संतरा, निम्बू सभी एक ही किस्म के फल है। जिस तरह संतरे व् निम्बू में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। उसी तरह किन्नू में भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी में किन्नू का सेवन करना कितना फायदेमंद होता है और प्रेग्नेंट महिला को एक दिन में कितने किन्नू का सेवन करना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

किन्नू में कौन- कौन से पोषक तत्व मौजूद होते हैं?

खाने में किन्नू एक स्वादिष्ट और रसदार फल तो होता ही है साथ ही इसमें न्यूट्रिएंट्स भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। किन्नू में विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, फाइबर, शुगर, सोडियम आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

प्रेगनेंसी में किन्नू खाने के फायदे

मौसम के अनुसार कुछ फल आते हैं जो की स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं। ऐसे में यदि आप गर्भवती है और उन फलों का सेवन करने से आपको और आपके बच्चे को फायदा मिलता है। तो आपको प्रेगनेंसी में उन फलों का सेवन जरूर करना चाहिए। अब हम आपको प्रेगनेंसी में किन्नू के सेवन के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं और किन्नू भी एक मौसमी फल ही है।

इम्युनिटी बूस्टर की तरह करता है काम

किन्नू में विटामिन सी जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट है मौजूद होता है। जो की कोशिकाओं की मरम्मत, नए उत्तकों के विकास, शरीर में एनर्जी को भरपूर बनाएं रखने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी बूस्ट होती है और प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों को बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

आयरन व् फोलेट

किन्नू फल में फोलेट और आयरन की मात्रा भी मौजूद होती है। फोलेट शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। साथ ही शरीर में ब्लड फ्लो सभी अंगों तक हो इसमें भी मदद करता है। और आयरन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है। साथ ही आयरन व् फोलेट भ्रूण के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

विषैले पदार्थ निकलते हैं बाहर

विटामिन ए व् विटामिन सी दोनों ही बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।

ऊर्जा से रखता है भरपूर

किन्नू में कार्बोहाइड्रेट भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला का ऊर्जा से भरपूर रहना माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसीलिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किन्नू का सेवन जरूर करना चाहिए।

पाचन तंत्र सम्बन्धी परेशानियों को करता है दूर

गर्भावस्था के समय महिला के शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण और बढ़ते गर्भाशय के आकार के कारण महिला का पाचन तंत्र धीमा पड़ सकता है। जिस वजह से महिला को पाचन तंत्र सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिस वजह से महिला को कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन, पेट टाइट होना, पेट में दर्द जैसी परेशानियां हो जाती है। ऐसे में महिला यदि किन्नू का सेवन करती है तो इससे महिला को बहुत फायदा मिलता है। क्योंकि किन्नू में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान किन्नू का सेवन करने से माँ व् बच्चे को मिलते हैं। इसके अलावा किन्नू में कैल्शियम, फोलिक एसिड, पोटैशियम आदि भी मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला और बच्चे को फायदा पहुंचाते हैं। ।।इसीलिए किन्नू का यदि मौसम है तो एक दिन में महिला को रोजाना एक किन्नू का सेवन दिन के समय जरूर करना चाहिए। रात के समय किन्नू का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए।

Benefits of eating Kinnow in Pregnancy

जिनकी प्रेगनेंसी कोरोनाकाल में हुई है उन्हें इन बातों का ध्यान रखना जरुरी है

आज जब हर जगह कोरोना जैसी भयंकर बिमारी का कहर बढ़ता है तो उससे बचाव के लिए आपका सतर्क रहना बहुत जरुरी है। क्योंकि यह एक ऐसी बिमारी है जिससे यदि घर का एक व्यक्ति संक्रमित होता है तो उसके कारण दूसरों को भी इस बीमारी के होने का खतरा अधिक होता है। आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला के लिए कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जो इस कोरोनाकाल के चलते गर्भवती महिला को ध्यान रखने चाहिए। ताकि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

चिड़चिड़ेपन से रहें दूर

कोरोना से बचाव के लिए घर में रहना सबसे सुरक्षित है ऐसे में पूरा दिन घर में रहने के कारण हो सकता है महिला को बोरियत महसूस हो, चिड़चिड़ापन हो। लेकिन महिला को कोशिश करनी है की किस तरह महिला घर में रहकर खुश रहें, चिड़चिड़ापन न महसूस करे। क्योंकि इसका सीधा असर आपकी सेहत और बच्चे पर भी पड़ता है। ऐसे में महिला को चिड़चिड़ापन न हो इसके लिए महिला परिवार के साथ समय बिताएं, अपनी पसंद का कोई काम करें, प्रेगनेंसी में खुश कैसे रहें इसके बारे में जानकारी लें। ताकि महिला को चिड़चिड़ेपन से दूर रहने और प्रेगनेंसी में खुश रहने में मदद मिल सकें।

अपने लिए समय निकालें

घर में सभी सदस्यों के रहने के कारण हो सकता है जितना ज्यादा आपकी केयर हो उतना ही ज्यादा आपका काम भी बढ़ जाएँ। लेकिन इस चक्कर में अपनी सेहत के साथ कोई लापरवाही नहीं करें, अपने लिए समय निकालें, भरपूर आराम करें, अपनी दिनचर्या में किसी तरह का बदलाव नहीं करें, आदि। क्योंकि करोनकाल में जितना ज्यादा आप अपनी सेहत का ध्यान रखेंगी और गलतियां नहीं करेंगी उतना ही आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी।

शारीरिक परेशानियों से बचे रहें

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को शारीरिक परेशानियां होने का खतरा होता है। ऐसे में सारा दिन घर में रहने के कारण आलस होना भी आम बात होती है और ज्यादा आलस महिला की शारीरिक परेशानियों को बढ़ा सकता है। ऐसे में शारीरिक परेशानियों से बचे रहने के लिए जरुरी है की महिला घर में ही योगासन करें, व्यायाम करें, सारा दिन केवल आराम ही न करें, डाइट का अच्छे से ध्यान रखें, गलत चीजों का सेवन नहीं करें, सारा दिन केवल काम ही न करें यानी बॉडी को जरुरत से ज्यादा नहीं थकाएं, आदि। यदि महिला इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को शारीरिक परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

मानसिक परेशानियों से रहें दूर

कोरोना के भय के कारण बिल्कुल भी तनाव नहीं लें बल्कि जितना हो सके मानसिक परेशानियों से दूर रहें। क्योंकि इस दौरान जितना आप अपने आप को मानसिक तनाव से दूर रखेंगी उतना ही आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी। और मानसिक तनाव को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है की आप अकेली नहीं रहें, मैडिटेशन करें, अपने आप को बिज़ी रखें।

खुश रहने की कोशिश करें

गर्भावस्था के दौरान माँ जितना खुश रहती है उतना ही गर्भ में शिशु भी स्वस्थ रहता हैं। ऐसे में कोरोना के चलते आप घर में रहकर भी अपने आप को खुश रखने की कोशिश करें। ताकि आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

इम्युनिटी बढ़ाएं

संक्रमण से बचाव के लिए गर्भावस्था के दौरान जरुरी है की महिला अपनी इम्युनिटी को बढ़ाएं। और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए महिला अपना खान पान बेहतर रखें। साथ ही डॉक्टर्स द्वारा दी गई दवाइयों का नियमित रूप से सेवन करें।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान जिनकी प्रेगनेंसी कोरोनाकाल में हुई है उन्हें रखना जरुरी है। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आप भी इन बातों का ध्यान रखें क्योंकि यदि आप इन बातों का ध्यान रखें तो इससे आपको इस बीमारी से बचे रहने के साथ प्रेगनेंसी में स्वस्थ रहने में भी मदद मिलेगी।

Health care tips for pregnancy during corona period

प्रेगनेंसी में खिचड़ी खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान खान पान को लेकर महिला के मन में बहुत से सवाल होते हैं जैसे की क्या खाएं, क्या नहीं खाएं, कितनी मात्रा में खाएं, किस समय किस खाद्य पदार्थ का खाना कितना फायदेमंद होता है, आदि। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान खिचड़ी का सेवन क्यों करना चाहिए, खिचड़ी खाने से कौन से फायदे मिलते हैं, इस बारे में बात करने जा रहे हैं। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? और सोच रही है की प्रेगनेंसी में खिचड़ी का सेवन कितना फायदेमंद होता है? यदि हाँ, तो आइये अब हम इस आर्टिकल में आपको खिचड़ी का सेवन करने के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

ऊर्जा मिलती है भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव, शारीरिक परेशानियों के कारण महिला में ऊर्जा की कमी हो जाती है। जिसकी वजह से थकान, कमजोरी, स्ट्रेस जैसी परेशानियां गर्भवती महिला को होती हैं। लेकिन खिचड़ी का सेवन करने से महिला को बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

क्योंकि खिचड़ी को बनाने के लिए आप दालों का इस्तेमाल करते हैं जो की प्रोटीन व् अन्य मिनरल्स का बेहतरीन स्त्रोत होता है, साथ ही यदि आप चाहे तो खिचड़ी में अलग अलग तरह की सब्जियों को भी मिक्स कर सकते हैं, दही और घी डालकर खा सकते हैं जिससे उसमे पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। और गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया रहती है बेहतर

गर्भवती महिला के शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव व् वजन बढ़ने के कारण महिला की पाचन क्रिया प्रभावित होती है। जिसकी वजह से पाचन तंत्र धीरे काम करता है और भोजन के हज़म न होने के कारण महिला को पेट सम्बंधित परेशानियां, सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में गैस जैसी दिक्कतें होती हैं। लेकिन यदि महिला खिचड़ी का सेवन करती है तो महिला की पाचन क्रिया बेहतर होती है क्योंकि खिचड़ी पचाने में हल्की होती है जो आसानी से हज़म हो जाती है और महिला का पेट भी भर जाता है।

कब्ज़ से मिलती है राहत

खिचड़ी एक ऐसा आहार होता है जिसे पचाने में महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है। जिससे पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है और महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पेट हल्का महसूस होता है

प्रेगनेंसी के दौरान पेट फूलना, पेट टाइट होना, पेट में गैस होना, आम बात होती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला खिचड़ी का सेवन करती है तो महिला को पेट सम्बंधित इन परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो खिचड़ी का सेवन करने से गर्भावस्था के दौरान महिला को मिलते हैं। ऐसे में इन बेहतरीन फायदों के लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खिचड़ी का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही खिचड़ी एक ऐसा आहार है जिसे बनाने में बहुत कम समय लगता है इसीलिए जब भी प्रेग्नेंट महिला को भूख लगे तो महिला आसानी से इसे बना सकती है।

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10 एक्टिविटी जो प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करनी चाहिए

गर्भावस्था के दौरान महिला के स्वस्थ रहने, गर्भ में पल रहे बच्चे को स्वस्थ रहने और बच्चे के बेहतर विकास के लिए सबसे जरुरी होता है। की महिला ऐसा कोई भी काम नहीं करे जिससे महिला को नुकसान हो या महिला की सेहत पर गलत असर पड़े। क्योंकि यदि महिला अपनी सेहत व् स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है किसी तरह की लापरवाही करती है तो इसका सीधा असर बच्चे की सेहत व् विकास पर पड़ता है।

इसीलिए प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से महिला को इस बात का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है की महिला ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिससे गर्भवती महिला या बच्चे को नुकसान हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी एक्टिविटीज के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को नहीं करनी चाहिए।

भारी सामान उठाना

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान भारी सामान उठाना व् सरकाना नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा करने से पेट पर जोर पड़ता है। जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द, गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

पैरों के बल बैठकर या पेट पर दबाव पड़ने वाले काम नहीं करना

गर्भवती महिला को पैरों के बल बैठकर कोई काम नहीं करना चाहिए खासकर जब महिला का पेट बाहर निकल जाता है। साथ ही गर्भवती महिला को पेट पर जिन कामों को करने से दबाव पड़े जैसे की टॉयलेट साफ़ करना, पेट के बल खड़े रहकर काम करना, पोछा लगाना, झुककर काम करना आदि महिला को नहीं करने चाहिए। क्योंकि ऐसे कामों को करने के कारण माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है।

बहुत ज्यादा व्यायाम करना

प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपको किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है तो थोड़ा बहुत व्यायाम करना बहुत अच्छी बात होती है। क्योंकि इससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है इसीलिए महिला को बहुत ज्यादा व्यायाम भी नहीं करना चाहिए।

गलत पोजीशन में सोना

गर्भवती महिला को बिल्कुल भी गलत पोजीशन में नहीं सोना चाहिए। जैसे की महिला को सीधा होकर नहीं सोना चाहिए क्योंकि ऐसी पोजीशन पर सोने से रीढ़ की हड्डी पर बहुत ज्यादा दबाव बढ़ जाता है। जिसके कारण गर्भवती महिला को पीठ दर्द की समस्या अधिक हो सकती है। साथ ही महिला को पेट के बल भी नहीं सोना चाहिए क्योंकि इस पोजीशन में सोने के कारण बच्चे पर नकारात्मक असर पड़ता है।

यात्रा करना

गर्भावस्था के दौरान महिला को यात्रा करने से भी बचना चाहिए क्योंकि यात्रा के दौरान महिला को झटका लगने का खतरा होता है। जिसकी वजह से महिला को शारीरिक परेशानियां जैसे की बॉडी पेन, पेट दर्द आदि होने के साथ बच्चे पर भी गलत असर पड़ता है।

ज्यादा देर तक खड़े रहना

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को लम्बे समय के लिए एक ही जगह पर नहीं खड़े नहीं रहना चाहिए। क्योंकि बहुत देर तक एक ही जगह खड़े रहने के कारण पेट में खिंचाव महसूस हो सकता है साथ ही गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, प्रेगनेंसी में परेशानियां होने का खतरा अधिक होता है।

मालिश

प्रेगनेंसी के दौरान हाथों पैरों की मालिश करना अच्छी बात होती है लेकिन महिला को पेट की मालिश नहीं करनी चाहिए खासकर पेट पर ज्यादा दबाव डालकर क्योंकि इसके कारण गर्भ में बच्चे को नुकसान पहुँचने का खतरा बढ़ जाता है।

गर्म पानी से नहाना

प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से शरीर के तापमान में फ़र्क़ आने के कारण शिशु को नुकसान पहुँच सकता है। खासकर पहली तिमाही में ऐसा करना गर्भपात का कारण बनता है।

ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहनें और ऊँची एड़ी की स्लीपर

गर्भवती महिला को ज्यादा टाइट व् चुभने वाले कपडे और ऊँची एड़ी की स्लीपर भी नहीं पहननी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने के कारण भी माँ व् बच्चे दोनों को ही परेशानी होती है।

बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी सेहत सम्बन्धी परेशानियां होती है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं होता है की महिला अपनी मर्ज़ी से दवाइयों का सेवन करें क्योंकि बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयों का सेवन करने के कारण गर्भ में बच्चे की सेहत बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। ऐसे में महिला को और बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो इससे बचने के लिए महिला को डॉक्टर से बिना पूछे किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं वो एक्टिविटीज जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यह सभी एक्टिविटीज गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर डालती हैं।

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