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प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने की इच्छा क्यों बढ़ जाती है?

गर्भावस्था के दौरान महिला बहुत से नए बदलाव का अहसास करती है। जैसे की कुछ महिलाओं की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने की इच्छा बढ़ जाती है। लेकिन महिलाएं इस डर के कारण की कहीं बच्चे को कोई नुकसान न हो जाये सम्बन्ध बनाने से परहेज करने लगती है।

ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं है की हर एक गर्भवती महिला के साथ ऐसा हो क्योंकि कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जिनकी प्रेगनेंसी के दौरान अपने पार्टनर के करीब जाने की इच्छा में कमी आ जाती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था में सम्बन्ध बनाने से जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं। जैसे की:

प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना सेफ होता है या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर कपल सम्बन्ध बनाने को लेकर डरते हैं की कहीं बच्चे को कोई नुकसान न हो। जबकि सच यह हैं की गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड में बच्चा सेफ होता है। ऐसे में यदि पूरी सावधानी के साथ सम्बन्ध बनाया जाये तो इससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन फिर भी सम्बन्ध बनाने से पहले गर्भवती महिला को एक बार डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए। और डॉक्टर यदि आपको कहे तभी आपको सम्बन्ध बनाना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान सम्बन्ध बनाने की इच्छा में बढ़ोतरी के कारण?

प्रेगनेंसी में महिला को किसी खास चीज को खाने की क्रेविंग जिस तरह से बढ़ जाती है उसी तरह से कुछ महिलाओं की प्रेगनेंसी के दौरान अपने पार्टनर के करीब आने की इच्छा भी बढ़ जाती है। और इसका कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनके कारण महिला की इच्छा में बढ़ोतरी होती है। उसी तरह यदि महिला की सम्बन्ध बनाने की इच्छा में कमी आती है तो इसका कारण भी हार्मोनल बदलाव ही होते हैं साथ ही महिला की शारीरिक परेशानियां भी हो सकती है।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाते समय रखें यह सावधानियां

  • गर्भवती महिला की यदि सम्बन्ध बनाने की इच्छा नहीं है तो महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाते समय कोई भी नया एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते समय महिला और पुरुष दोनों को जोश से नहीं होश से काम लेना चाहिए।
  • बिना सुरक्षा के सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • दोनों में से किसी एक को भी किसी तरह का इन्फेक्शन है तो सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखें की पेट पर किसी तरह का जोर न पड़े।
  • यदि महिला को सम्बन्ध बनाते समय कोई दिक्कत होने लगे तो सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

किन महिलाओं को प्रेगनेंसी में नहीं बनाना चाहिए सम्बन्ध

  • पहले गर्भपात हुआ हो।
  • प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स हो।
  • डॉक्टर ने सम्बन्ध बनाने के लिए मना किया हो।
  • गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हो।
  • सम्बन्ध बनाने की इच्छा न हो।
  • पेट में दर्द की समस्या अधिक होती हो।
  • आपके पार्टनर ने अल्कोहल का सेवन किया हो।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने को लेकर कुछ बातें, जो हर गर्भवती महिला को पता होनी चाहिए। ताकि यदि आप डॉक्टर से पूछने के बाद भी सम्बन्ध बना रही हैं तो आपको किसी तरह की दिक्कत न हो।

जब लेबर पेन शुरू हो जाये तो यह पांच चीजें जरूर करें

डिलीवरी का समय पास आने पर महिला के मन में यह सवाल जरूर आता है की उसे कैसे पता चलेगा की उसकी डिलीवरी होने का समय पास आ गया है। तो इसका जवाब है की, डिलीवरी होने से पहले शरीर में बहुत से लक्षण महसूस होते हैं जैसे की महिला को पेट में दर्द होता है, पीठ में दर्द होता है, पेट के निचले हिस्से पर अधिक जोर महसूस होता है, प्राइवेट पार्ट से ब्लड या सफ़ेद चिपचिपा पदार्थ निकलता हुआ महसूस होता है, डायरिया की समस्या, आदि।

और इनमे से किसी भी लक्षण का प्रेग्नेंट महिला को महसूस होना डिलीवरी का समय पास आने का संकेत होता है। ऐसे में जैसे ही महिला को लेबर पेन स्टार्ट होता है तो महिला को क्या करना चाहिए। जिससे महिला की लेबर पेन के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं। ताकि आपको डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके।

हॉस्पिटल जाने की तैयारी शुरू करें

यदि महिला को लेबर पेन की शुरुआत हो रही है और दर्द धीरे धीर बढ़ रहा है तो महिला को हॉस्पिटल जाने की तैयारी करनी चाहिए। जैसे की हॉस्पिटल बैग निकाल लेना चाहिए, यदि आपके पार्टनर नहीं हैं तो आपको उन्हें फ़ोन करना चाहिए, हॉस्पिटल में डॉक्टर से बात करके बेड बुक करवा लेना चाहिए, आदि। ऐसा करने से हॉस्पिटल में जाकर आपको कोई दिक्कत नहीं होगी सीधा आपको बेड मिल जायेगा।

रिलैक्स रहें

माना की डिलीवरी का दर्द होने पर रिलैक्स रहना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन यह वो समय होता है जब महिला जितना अपने आप को रिलैक्स रखती है उतनी ही जल्दी डिलीवरी होने में मदद मिलती है और डिलीवरी के समय महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। जिससे डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है। क्योंकि ऐसा नहीं होता है की महिला को दर्द शुरू हुआ और बच्चे का जन्म हो गया, बल्कि दर्द शुरू होने के बाद हो सकता है की बच्चा दस घंटे में हो जाएँ, चौबीस घंटे में हो जायें, दो दिन में बच्चा हो, या उसी समय हो जाये, आदि। इसीलिए महिला को जितना हो सके धैर्य से काम लेना चाहिए और अपने आप को शांत रखना चाहिए।

कुछ खाएं पीये

लेबर पेन शुरू होने के बाद ऐसा नहीं है की दर्द हो रहा है तो आपको कुछ खाना पीना नहीं है। बल्कि इस समय आपको ऐसी डाइट लेनी है जिससे आपको ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिल सके। क्योंकि जितना महिला डिलीवरी के समय ऊर्जा से भरपूर रहती है उतना ही डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

पुश करें

लेबर पेन शुरू होने पर महिला को या तो धीरे धीरे वाक करनी चाहिए या फिर नीचे की तरफ पुश करना चाहिए यानी जोर लगाना चाहिए। ऐसा करने से डिलीवरी को जल्दी होने में मदद मिलती है।

लम्बे लम्बे सांस लें

लेबर पेन शुरू होने के बाद महिला को धीरे धीरे सांस लेने की बजाय लम्बे लम्बे सांस लेने चाहिए। क्योंकि लम्बे लम्बे सांस लेने से महिला को थकावट नहीं होती हैं, दर्द कण्ट्रोल होता है, डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियां कम होती है, आदि।

तो यह हैं वो पांच टिप्स जिनका ध्यान लेबर पेन शुरू होने पर महिला को रखना चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से डिलीवरी को आसान बनाने के साथ डिलीवरी को जल्दी होने में भी मदद मिलती है।

When labor Pain starts do these Five things

नई माँ के लिए बच्चे को दूध पिलाने के टिप्स

डिलीवरी के बाद माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार होता है। माँ का दूध पीने से बच्चे को बहुत से फायदे मिलते हैं साथ ही बच्चे को दूध पिलाने से माँ को भी बहुत से फायदे मिलते हैं। यदि आपने भी अभी अभी बच्चे को जन्म दिया है और यह आपका पहला बच्चा है तो बच्चे को स्तनपान कैसे करवाना चाहिए और बच्चे को स्तनपान करवाते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

इसके बारे में आपको पूरी जानकारी होनी चाहिए क्योंकि यदि आपको पूरी जानकारी होगी तो आपको बच्चे को स्तनपान करवाते समय कोई परेशानी नहीं होगी और बच्चे को भी माँ का दूध पर्याप्त मात्रा में मिल सकेगा। तो आइये जानते हैं नई माँ के लिए बच्चे को दूध पिलाने से जुडी जानकारी, ताकि स्तनपान से जन्म के बाद भी बच्चे का विकास अच्छे से हो सके।

बच्चे को दूध पिलाने का तरीका

बच्चे को दूध पिलाने के लिए महिला को छोटी छोटी चीजों का ध्यान रखना चाहिए जिससे महिला को बच्चे को दूध पिलाने में आसानी हो और बच्चा भी आराम से दूध पी सके। जैसे की:

सहारा लेकर बैठें

सबसे पहले महिला को पिल्लो, दीवार या किसी अन्य चीज से सहारा लेकर आराम से बैठना चाहिए। क्योंकि बच्चे को दूध पिलाते समय कितना समय लगेगा यह आप भी नहीं जानती है। ऐसे में बच्चे को दूध पिलाने में आपको कोई दिक्कत न हो इसके लिए सहारा लेकर बैठें। आरामदायक स्थिति में बैठने के लिए महिला चाहे तो अपने पैरों को सीधा भी रख सकती है।

गोद में एक सॉफ्ट तकिया रखें

बच्चे को गोद में लिटाने से पहले गोद में एक सॉफ्ट तकिया रखें उसके बाद बच्चे को उस तकिये पर लिटाएं। ऐसा करने से बच्चे को दूध पिलाने में आसानी होगी। क्योंकि बच्चे का मुँह आसानी से ब्रेस्ट तक पहुँच सकेगा।

बच्चे की पोजीशन का ध्यान रखें

तकिये पर बच्चे को पीठ के बल लिटाने के साथ ध्यान रखें की बच्चे के सिर के नीचे हाथ रखें। ताकि बच्चे का सिर थोड़ी ऊपर हो सके। ऐसा करने से बच्चे को दूध पीने में आसानी होगी। और बच्चे के दूध को गले में फंसने का खतरा नहीं होगा।

स्तनपान करते हुए बच्चे का ध्यान रखें

स्तनपान करवाते समय महिला को इस बात का ध्यान रखना है की ब्रेस्ट का अगला हिस्सा बच्चा अच्छे से मुँह में लें। साथ ही महिला को अपनी दो उँगलियों से ब्रेस्ट को पकड़कर रखना चाहिए और उसे प्रेस करते रहना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे को दूध पीने में आसानी होती है।

बच्चे को दूध पीने से आप न हटाएँ

नवजात शिशु तीस से चालीस मिनट तक भी ब्रेस्टफीड कर सकते है ऐसे में आपको अपने बच्चे को दूध पीने से नहीं हटाना चाहिए। हाँ, जब बच्चा अपने आप दूध पीना छोड़ दें तो बच्चे को हटाएँ और उसका मुँह साफ़ करें। कुछ बच्चे जब स्तन छोड़ देते हैं तो वो फिर से मुँह से स्तन पकड़ने की कोशिश करते हैं। जिसका मतलब होता है की बच्चे को और भूख लगी है ऐसे में आपको दूसरी तरफ से बच्चे को दूध पिलाना चाहिए।

बच्चे को दूध पिलाते समय किन किन बातों का ध्यान रखें

  • बच्चे को कम से कम दो से तीन घंटे के अंतराल से पहले दूध नहीं पिलायें।
  • हर बार दूध पिलाने से पहले ब्रेस्ट को धोएं नहीं।
  • बच्चे को दूध पिलाने से पहले पानी, दूध या किसी अन्य तरल चीज का सेवन करें इससे दूध को अच्छे से उतरने में मदद मिलती है।
  • ध्यान रखें की जब आप दूध पीला रही हो तो ब्रेस्ट से बच्चे की नाक पर दबाव न पड़ रहा हो क्योंकि इसके कारण बच्चे को दूध पीते समय सांस लेने में दिक्कत होती है।
  • बच्चे को दूध पीते समय खांसी हो जाये, हिचकी आ जाये, बच्चा उल्टी जैसा मुँह बनाएं तो तुरंत बच्चे को दूध पिलाने से रोक देना चाहिए।
  • बच्चे के दूध पीते समय स्तन बदलते रहे जैसे की पहले आपने जिस स्तन से दूध पिलाया था अब अगली बार दूसरे स्तन से दूध पिलायें। क्योंकि एक ही स्तन से दूध पिलाने से आपको परेशानी हो सकती है।
  • बच्चा दूध पीते पीते सो जाये तो आराम से बच्चे को हटा दें।
  • नहाने के तुरंत बाद धूप से आने के तुरंत बाद, महिला को ब्रेस्टफीड नहीं करवाना चाहिए बल्कि थोड़ी देर रुकना चाहिए उसके बाद बच्चे को फीड करवाना चाहिए।

महिला के स्तन में दूध न उतरने पर महिला क्या करें?

कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद अच्छे से दूध नहीं उतर पाता है। जिसके कारण महिलाएं परेशान हो सकती है। ऐसे में महिला को इस परेशानी से निजात पाने के लिए ब्रेस्टफीड बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करना चाहिए, बच्चे को फीड करवाना चाहिए इससे बच्चा जैसे जैसे दूध पीने के लिए स्तन पर जोर लगाता है वैसे वैसे दूध अच्छे से उतरने लग जाता है, ब्रेस्टफीड पंप का इस्तेमाल करें, आदि। यदि इन तरीको के बाद भी ब्रेस्टफीड अच्छे से नहीं उतरता है तो महिला को एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं स्तनपान करवाने से जुड़े कुछ टिप्स जिनका ध्यान महिला को जरूर रखना चाहिए। यदि महिला इन सभी टिप्स का ध्यान रखती है। तो ऐसा करने से महिला को बच्चे को फीड करवाने में आसानी होती है।

Breastfeeding tips for New Moms

डिलीवरी के बाद लूज़ पेट को टाइट करने के तरीके

प्रेगनेंसी के दौरान लगातार बच्चे के बढ़ते विकास के साथ गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है जिसके कारण पेट भी बाहर की तरफ निकलता है। डिलीवरी होने के बाद एक दम से पेट अंदर नहीं जाता है और पेट की स्किन भी लटकी हुई सी महसूस होती है। ऐसे में पेट की लूज़ स्किन को देखकर महिलाओं को ऐसा लगता है की उनकी सुंदरता और फिटनेस कम हो गई है।

साथ ही महिला को ऐसा भी लगता है की अब यह स्किन कभी टाइट नहीं होगी जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। क्योंकि कुछ ऐसे खास टिप्स हैं जिनका ध्यान यदि डिलीवरी के बाद रखा जाता है तो इससे महिला के लूज़ पेट की स्किन को टाइट करने में मदद मिलती है। तो आइये जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं:

बेल्ट पहने

डिलीवरी के बाद यदि आप चाहती है तो आपकी बेली स्किन लूज़ न हो इसके लिए आपको बच्चे के जन्म के बाद पेट पर मेटरनिटी बेल्ट बांधनी चाहिए। ऐसा करने से आपको उठने बैठने में आसानी होती है साथ ही पेट के आस पास की मांसपेशियों को टाइट रहने में मदद मिलती है। जिससे लूज़ बेली को टाइट करने में मदद मिलती है।

बच्चे को फीड जरूर करवाएं

डिलीवरी के बाद महिला को लूज स्किन को टाइट करने के लिए अपने बेबी को फीड जरूर करवाना चाहिए। क्योंकि फीड करवाने से शरीर की मांसपेशियों पर जोर पड़ता है जिससे मांसपेशियों को सेट होने में मदद मिलती है। और मांसपेशियों का ढीलापन दूर होने लगता है। और जब ऐसा होता है तो धीरे धीरे महिला की बेली शेप में आने लगती है।

पूरा दिन बैठी न रहें

डिलीवरी के बाद बेबी को फीड करवाने के अलावा ज्यादा समय तक महिला को कमर सीधी करके बैठना नहीं चाहिए। बल्कि जितना हो सके लेटे रहना चाहिए। क्योंकि ज्यादा बैठने से आपकी यह परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा महिला को अपनी नींद भी भरपूर लेनी चाहिए क्योंकि जितना महिला आराम करती है उतना ही जल्दी महिला को फिट होने में मदद मिलती है।

डाइट

डिलीवरी के लूज़ बेली को टाइट करने के लिए महिला को अपनी डाइट का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि महिला जितना अच्छे तरीके से अपनी डाइट लेती है। उतना ही महिला की स्किन को, बॉडी को पोषण मिलता है, जिससे महिला को डिलीवरी के बाद वापिस फिट होने में मदद मिलती है। साथ ही स्किन को पोषण मिलने पर स्किन का लचीलापन बढ़ने लगता है और ढीली त्वचा टाइट होने लगती है।

गर्म पानी

पेट की ढीली त्वचा को टाइट करने के लिए महिला को गरम पानी भी पीना चाहिए। क्योंकि गरम पानी पीने से बॉडी के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, वसा का जमाव कम होता हैं, जिससे बॉडी को वापिस सही शेप में जल्दी से जल्दी आने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को दिन भर में नोर्मल पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि जितना महिला हाइड्रेटेड रहती है उतना ही स्किन में लचीलेपन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

मालिश

डिलीवरी के बाद पेट की मालिश करवाने से भी आपको लूज़ बेली की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि मालिश करवाने से शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, मांसपेशियों को टाइट होने में मदद मिलती है साथ ही स्किन में लचीलापन भी बढ़ता है। जिससे बहुत जल्दी स्किन के ढीलेपन को दूर करने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की यदि आपकी डिलीवरी सिजेरियन हुई है या फिर आपको डिलीवरी में टाँके आये हैं तो मालिश करवाने से पहले एक बार डॉक्टर की राय जरूर लें।

व्यायाम

डिलीवरी के तुरंत बाद नहीं बल्कि थोड़ा समय रुक कर धीरे धीरे व्यायाम करना भी शुरू करें। क्योंकि व्यायाम करने से मांसपशियों को टाइट करने, शरीर में ब्लड फ्लो को सुधारने में मदद मिलती है। जिससे डिलीवरी के बाद लूज़ बेली की समस्या से प्रेग्नेंट महिला को बहुत जल्दी आराम पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से डिलीवरी के बाद महिला को लूज़ बेली को टाइट करने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की बेली को टाइट करने के लिए महिला बिल्कुल भी खाना नहीं छोड़ें, जरुरत से ज्यादा व्यायाम नहीं करें, तनाव नहीं लें, स्तनपान न छुड़वाएं, क्योंकि ऐसा करने से महिला की परेशानी कम होने की बजाय बढ़ सकती है।

How to Tighten Loose Belly Skin after Delivery

बेकिंग सोडा से प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें?

प्रेगनेंसी की खबर उन कपल्स के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी होती है जो गर्भधारण के लिए कोशिश कर रहे होते हैं। ऐसे में महिला को यह कैसे पता चलता है की उसका गर्भ ठहर गया है? इसके बहुत से कई तरीके होते हैं। जैसे की आज कल पीरियड्स के मिस होने पर मार्किट से प्रेगनेंसी टेस्ट किट लाकर उसमे यूरिन का नमूना डालकर आसानी से घर बैठे ही महिला चेक कर लेती है की उनका गर्भ ठहरा है या नहीं।

प्रेगनेंसी टेस्ट किट के अलावा बहुत से घरेलु नुस्खे भी हैं जो यह पता लगाने में मदद करते हैं की महिला गर्भ ठहरा है या नहीं। इस आर्टिकल में हम आपको एक ऐसे ही सिंपल और आसान घरेलू नुस्खें के बारे में बताने जा रहे हैं। जो आपका गर्भ ठहरा है या नहीं इस बारे में बताने में मदद करता है। और यह घरेलू नुस्खा है बेकिंग सोडा की मदद से प्रेगनेंसी टेस्ट करना। तो आइये अब जानते हैं की बेकिंग सोडा की मदद से प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे किया जाता है।

बेकिंग सोडा से प्रेगनेंसी टेस्ट करने का तरीका

  • सबसे पहले एक साफ और सूखा कंटेनर लें जिसमे आप यूरिन डाल सकें।
  • उसके बाद एक दूसरे साफ़ और सूखे कंटेनर में एक चम्मच बेकिंग सोडा डालें।
  • अब बेकिंग सोडा पर धीरे धीरे यूरिन डालना शुरू करें।
  • यदि बेकिंग सोडा के यूरिन से मिलने पर आपको मिक्सचर में बुलबुले या झाग दिखाई देती है तो इसका मतलब होता है की महिला प्रेग्नेंट हैं।
  • लेकिन यदि कोई रिएक्शन नहीं होता तो इसका मतलब होता है की महिला का गर्भ नहीं ठहरा है।
  • ध्यान रखें की टेस्ट के सही रिजल्ट के लिए आप सुबह का पहला यूरिन लें, क्योंकि उसमे एसिड की मात्रा अधिक होती है जिससे सही परिणाम मिलने के चांस ज्यादा होते हैं।

तो यह है बेकिंग सोडा से प्रेगनेंसी टेस्ट करने का तरीका, लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की इससे आपको बिल्कुल सटीक परिणाम मिलें। ऐसे में एक बार बेकिंग सोडा से टेस्ट करने के बाद आपको डॉक्टर से भी टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

How to do Pregnancy Test with Baking Soda

प्रेगनेंसी में विटामिन ए लेने के फायदे और इन खाद्य पदार्थों में विटामिन ए होता है

प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने के लिए और बच्चे के विकास के लिए महिला को विटामिन्स से भरपूर आहार लेने की सलाह दी जाती है। यदि प्रेग्नेंट महिला विटामिन्स से भरपूर आहार का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और पेट में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला अपनी डाइट का अच्छे से सेवन नहीं करती है। तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी में विटामिन ए लेने के क्या फायदे होते हैं और किन खाद्य पदार्थों में विटामिन ए होता है इस बारे में बताने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं की:

गर्भवती महिला को विटामिन ए की कमी के कारण हो सकती हैं यह परेशानियां

प्रेग्नेंट महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान विटामिन ए युक्त डाइट का सेवन नहीं करती है तो इसके कारण महिला को बहुत सी परेशानियां हो सकती है। जैसे की:

  • थकान की समस्या।
  • वजन में कमी।
  • अनिंद्रा की समस्या।
  • सर्दी, खांसी, निमोनिया होने का खतरा।
  • दस्त की समस्या।
  • स्किन और बालों से जुडी समस्या।
  • दांतों व् हड्डियों से जुडी परेशानी।
  • दिखने में कमी।

प्रेगनेंसी में विटामिन ए लेने के फायदे

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान विटामिन ए युक्त डाइट का सेवन करती है तो इससे माँ व् बच्चे को एक नहीं बल्कि कई फायदे मिलते हैं। जैसे की:

इम्युनिटी बढ़ती है

विटामिन ए एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी को बढ़ाता है। जिससे गर्भवती महिला व् होने वाले बच्चे को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण व् बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

आँखों के लिए फायदेमंद

गर्भावस्था के दौरान विटामिन ए का सेवन करने से गर्भवती महिला को आँखों को रौशनी को बढ़ाने के साथ गर्भ में बच्चे की आँखों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

स्किन और बालों के लिए है फायदेमंद

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर गर्भवती महिला की स्किन और बालों पर भी पड़ता है। जिसके कारण स्किन सम्बन्धी समस्या और बालों के झड़ने जैसी परेशानी महिला को हो जाती है। लेकिन यदि महिला विटामिन ए युक्त आहार का सेवन करती है तो इससे महिला को स्किन व् बालों से सम्बंधित परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में शिशु की स्किन के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। इसके अलावा विटामिन ए हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

प्रेगनेंसी के दौरान बिमारियों से रखता है सुरक्षित

विटामिन ए से भरपूर डाइट लेने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हदय सम्बन्धी समस्या, अस्थमा, डाइबिटीज़ जैसी परेशानियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

विटामिन ए युक्त खाद्य पदार्थ

ऐसे बहुत से खाद्य पदार्थ होते हैं जिसमे विटामिन ए भरपूर मात्रा में मौजूद होता है और यह सभी चीजें प्रेगनेंसी के दौरान खाना फायदेमंद भी होता है। जैसे की शकरकंद, गाजर, चुकंदर, ब्रोकली, कद्दू, शलगम, मटर, हरी सब्जियां, धनिया, राजमा, बीन्स, सरसों, तरबूज, आम, चीकू, पीले व् नारंगी फल, साबुत अनाज, अंडा, दूध आदि।

तो यह हैं कुछ फायदे जो विटामिन ए युक्त आहार का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने के लिए और विटामिन ए की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने के लिए महिला को विटामिन ए युक्त डाइट जरूर लेनी चाहिए।

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गर्भवती महिला के पेट में दर्द रहना कोई खतरा तो नहीं

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गर्भवती महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण उसे कई बार शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। और इनकी दिक्कतों में से एक होती है पेट दर्द की समस्या, गर्भवती महिला को पेट में हल्का दर्द रहना आम बात होती है। क्योंकि गर्भाशय का साइज बढ़ने के कारण पेट के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव होने के कारण आपको दर्द महसूस होता है।

लेकिन कई बार महिलाएं पेट में होने वाले दर्द के कारण तनाव में आ जाती है, क्योंकि गर्भवती महिला को यह डर सताता है की इसके कारण शिशु पर तो कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में आज हम आपको इसी विषय के बारे में कुछ बातें बताने जा रहे हैं जैसे की प्रेगनेंसी में पेट दर्द के क्या कारण हो सकते हैं, इस दर्द के होने से किसी तरह की परेशानी होती है नहीं, इसका शिशु पर तो कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, आदि। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं प्रेगनेंसी में पेट के दर्द होने के क्या कारण होते हैं।

प्रेगनेंसी में क्यों होता है पेट में दर्द

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पेट में दर्द होना काफी सामान्य बात होती है और पेट में दर्द होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि इसके बहुत से कारण हो सकते हैं। पेट में हल्का फुल्का दर्द होना जहां सामान्य बात होती है वहीँ दर्द का बढ़ना महिला के लिए परेशानी का कारण भी हो सकता है ऐसे में इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी में पेट दर्द के क्या क्या कारण हो सकते हैं आइये जानते हैं।

पाचन क्रिया से जुडी समस्या होने के कारण

प्रेगनेंसी के शुरुआत के दिनों में बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण कब्ज़, गैस, एसिडिटी की समस्या होना काफी आम बात होती है। इसके कारण पेट के निचले हिस्से या ऊपरी हिस्से में दर्द का अनुभव होना काफी आम बात होती है। साथ ही जिन महिलाओं को अधिक उल्टियां आती है तो इसके कारण भी पेट में खिंचाव होता है जिसके कारण हल्के दर्द का अनुभव हो सकता है।

गर्भपात के लक्षण

यदि आपकी गर्भवस्था की पहली तिमाही चल रही है और आपको पेट में बहुत अधिक दर्द का अनुभव हो रहा है, जैसा की कई बार मासिक धर्म के दौरान होता है। तो यह गर्भपात का लक्षण हो सकता है, ऐसे में आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी

यह प्रेगनेंसी सामान्य से अलग होती है इसके होने पर गर्भधारण गर्भाशय की जगह कहीं बाहर जैसे की फैलोपियन ट्यूब आदि में हो जाता है। इसके होने पर भी महिला को पेट में अधिक दर्द की समस्या रह सकती है। साथ ही यह महिला के लिए काफी नुकसानदायक भी होती है। इसीलिए दर्द का अनुभव ज्यादा होने पर एक बार डॉक्टर से जरूर जांच करवानी चाहिए।

यूरिन इन्फेक्शन

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन इन्फेक्शन की समस्या हो जाती है, और ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान काफी आम बात होती है। और यूरिन इन्फेक्शन होने पर यूरिन पास करते समय जलन महसूस, पेशाब के रंग में बदलाव, पेट में दर्द होना, आदि, आम बात होती है। लेकिन यदि आपको पेशाब के रंग में बदलाव के साथ थोड़ा ब्लड भी दिखाई दे तो आपको एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

खाने में लापरवाही

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बेहतर खान पान की सलाह दी जाती है, साथ ही खाने में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। साथ ही यदि महिला खाने में लापरवाही करती है, दूषित या फिर बहुत समय से रखे ठन्डे व् बासी खाने का सेवन करती है तो इसके कारण भी महिला को पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है। जिसके कारण पेट में दर्द होना काफी आम बात होती है।

गर्भाशय के आकार का बढ़ना

गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे शिशु का आकार भी बढ़ता है जिसके कारण गर्भाशय की मांसपेशियों में खिंचाव होना आम बात होती है। इसके कारण भी महिला को पेट या पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है।

लेबर पेन का लक्षण

यदि आपको प्रेगनेंसी के आखिरी में महीने में पेट दर्द बहुत ज्यादा होता है, तो यह लेबर पेन का लक्षण भी हो सकता है। दर्द के साथ प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ भी निकलता है तो इसका मतलब होता है की आपके घर में अब जल्दी ही नन्हा मेहमान शामिल होने वाला है।

प्रेगनेंसी में पेट में दर्द से शिशु को कोई नुकसान तो नहीं होता

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पेट में हल्का दर्द रहना काफी सामान्य बात होती है, और इसके कारण शिशु पर भी कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। ऐसे में यदि कभी आपको बहुत अधिक दर्द का अनुभव हो, तो ऐसे में इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

प्रेगनेंसी में पेट में दर्द से बचने के उपाय

  • हल्का व्यायाम करने से बॉडी को आराम मिलता है, जिससे आपको पेट दर्द से बचाव में भी मदद मिलती है।
  • खान पान में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। और साथ ही जितना हो सके ताजे, संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए।
  • बहुत देर तक कटे पड़े फल, बासी ठंडी सब्जियों आदि के सेवन से बचना चाहिए।
  • भारी सामान अदि नहीं उठाना चाहिए।
  • भरपूर आराम करना चाहिए।
  • बॉडी को हाइड्रेट रखना चाहिए इसके लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करना चाहिए, नारियल पानी पीना, चाहिए, इससे भी पेट दर्द को आराम मिलता है।
  • पेट के बल नहीं सोना चाहिए।
  • गुनगुने पानी से पेट की सिकाई करनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इसे लेकर घबराना नहीं चाहिए और अधिक दर्द होने पर डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। और यदि आपको हल्का फुल्का दर्द रहता हैं तो आप ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या से निजात भी पा सकते हैं।

डिलीवरी के बाद फ़ास्ट रिकवरी के लिए यह खाएं

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला अपना जितना ध्यान रखती है उससे ज्यादा ध्यान महिला को डिलीवरी के बाद कुछ समय तक रखना पड़ता है। क्योंकि प्रसव के बाद महिला का शरीर काफी कमजोर हो जाता है। और शिशु भी जन्म के बाद कम से कम छह महीने तक माँ के दूध पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला को शिशु के विकास को बेहतर करने के लिए और अपने आप को जल्दी फिट करने के लिए अपना ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है। और डिलीवरी के बाद जल्दी रिकवर होने के लिए सबसे जरुरी होता है की महिला अपने आप को भरपूर आराम दे और अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखे। क्योंकि जितना पोषक तत्वों से भरपूर महिला आहार लेती है स्तनपान के जरिये शिशु का विकास उतना ही बेहतर होता है। और महिला को उतना ही जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। 

डिलीवरी के बाद महिला को क्या खाना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान जहां महिला को गर्म तासीर वाली चीजों की मनाही होती है। प्रसव के बाद उन्ही चीजों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की डिलीवरी के बाद महिला को अपनी डाइट में बहुत ज्यादा बदलाव करना पड़ सकता है। ताकि शिशु का विकास और महिला की हेल्थ दोनों बेहतर रह सकें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम डिलीवरी के बाद जल्दी रिकवरी के लिए महिला को क्या खाना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

देसी घी

  • प्रसव के बाद महिला को घी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए और इसका सेवन महिला सब्ज़ी, रोटी, हलवा, लड्डू, आदि में डालकर कर सकती है।
  • क्योंकि घी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो महिला के साथ शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
  • जैसे की डिलीवरी के बाद घी का सेवन करने से हड्डियों में मजबूती, जोड़ो में मजबूती, सिर व् बॉडी में दर्द से आराम, पाचन तंत्र से जुडी परेशानियों से आराम पाने में मदद मिलती है।
  • स्तनपान के जरिये घी में मौजूद पोषक तत्व शिशु को भी फायदा पहुंचाने में मदद करते हैं।
  • घी का सेवन करने के साथ डिलीवरी के बाद महिला व् शिशु को घी की मालिश से भी बहुत फायदा मिलता है।
  • सिजेरियन डिलीवरी जिन महिलाओं की होती है उन्हें डिलीवरी के बाद घी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए।

सौंठ

  • डिलीवरी के बाद महिला को घी, सौंठ, ड्राई फ्रूट्स आदि को मिलाकर लड्डू बनाकर उनका नियमित सेवन करना चाहिए।
  • क्योंकि सौंठ का लड्डू खाने से डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करके महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।

डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने के लिए खाएं गोंद का लड्डू

  • गोंद के लड्डू का सेवन भी डिलीवरी के बाद करना बहुत फायदेमंद होता है।
  • क्योंकि इसमें भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो प्रसव के बाद महिला की हड्डियों को मजबूत करने, कमजोरी को दूर करने आदि में मदद करते हैं।
  • गोंद के लड्डू बनाते समय घी, ड्राई फ्रूट्स आदि का भी भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए।

दालें

  • प्रसव के बाद महिला को नियमित रूप से दाल का सूप बनाकर पीना चाहिए और उसमे घी भी डालना चाहिए।
  • दालों में प्रोटीन, आयरन व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • जो न केवल डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद करते हैं।
  • बल्कि शिशु के लिए ब्रेस्टमिल्क को भी बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • प्रसव के बाद सबसे ज्यादा मूंग दाल का सेवन महिला को करना चाहिए।

दूध

  • कैल्शियम, प्रोटीन, वसा से भरपूर दूध का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को भरपूर करना चाहिए।
  • क्योंकि इससे महिला की हड्डियों को मजबूत होने के साथ शिशु की हड्डियों का बेहतर विकास होने में भी मदद मिलता है।
  • साथ ही महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करके महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।
  • और एक दिन में दो से तीन गिलास दूध महिला को जरूर पीना चाहिए।

डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने के लिए खाएं हरी सब्जियां

  • डिलीवरी के बाद महिला को आयरन, कैल्शियम, फाइबर से भरपूर हरी सब्जियों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • क्योंकि हरी सब्जियों का सेवन करने से भी डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।
  • साथ ही इससे महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है।

साबुत अनाज

  • ओट्स, दलिया, जैसे साबुत अनाज का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि इससे महिला के शरीर में एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद मिलती है।

अजवाइन

  • अजवाइन का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि इससे न केवल महिला के एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद मिलती है बल्कि ब्रेस्टमिल्क को भी बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • साथ ही अजवाइन के एंटी फंगल, एंटी बैक्टेरियल, एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण महिला को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।
  • प्रसव के बाद महिला पराठों, सब्जियों, हलवा आदि में इसका इस्तेमाल कर सकती है।
  • साथ ही अजवाइन का सेवन करने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों से भी निजात पाने में मदद मिलती है।

तिल का लड्डू

  • प्रसव के बाद महिला तिल के लड्डू का सेवन भी कर सकती है।
  • क्योंकि यह स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है।
  • जो प्रसव के बाद महिला को जल्दी फिट होने में मदद करता है।

डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने के लिए खाएं बादाम

  • बादाम का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि बादाम में कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन बी12, विटामिन ई के अलावा अन्य कई मिनरल्स मौजूद होते हैं।
  • जो महिला के साथ शिशु के लिए भी फायदेमंद होते है।

अंडे

  • प्रसव के बाद महिला को अंडे भी जरूर खाने चाहिए क्योंकि अंडा प्रोटीन का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है।
  • जो डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट करने में मदद करता है।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन प्रसव के बाद महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने से महिला को जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए, पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, दूध भरपूर पीना चाहिए, तनाव नहीं लेना चाहिए, स्तनपान करवाना चाहिए, खाने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए, आदि। इन बातों का भी डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने के लिए अच्छे से ध्यान रखें चाहिए।

तीन महीने के अंदर गर्भपात होने के क्या कारण होते हैं

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने

गर्भावस्था के पहले तीन महीने महिला के लिए बहुत ही नाजुक होते हैं, क्योंकि इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही गर्भवती महिला के लिए समस्या का कारण बन सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को छोटी से छोटी चीज का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इस दौरान कुछ महिलाएं मिसकैरिज का सामना भी कर सकती है, और ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है की हर महिला के गर्भपात होने के एक कारण हो। बल्कि प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में मिसकैरिज होने के बहुत से कारण हो सकते हैं।

गर्भावस्था के पहले तीन महीने में गर्भपात होने के कारण

कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में गर्भपात की समस्या से जूझ सकती है। और महिला के पहली तिमाही में गर्भपात होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं आइये विस्तार से जानते हैं।

बच्चेदानी से जुडी समस्या

यदि गर्भवती महिला बच्चेदानी से जुडी किसी समस्या जैसे की इन्फेक्शन, बच्चेदानी का खराब होना, बच्चेदानी का दो भागो में बटा होना, बच्चेदानी में रसौली का होना आदि से परेशान होती है। तो इसके कारण महिला का गर्भ ठहरने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और यदि गर्भ ठहर जाता है तो बच्चेदानी से जुडी परेशानी के कारण गर्भपात जैसी समस्या का महिला को सामना करना पड़ सकता है।

वजाइनल इन्फेक्शन

प्राइवेट पार्ट में होने वाला इन्फेक्शन भी गर्भ गिरने का कारण हो सकता है। क्योंकि प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने के कारण यह गर्भाशय को भी संक्रमित कर सकता है जिसके कारण महिला को यह परेशानी हो सकती है।

जल्दी गर्भाधारण

एक शिशु के जन्म के बाद यदि महिला बहुत जल्दी गर्भाधारण कर लेती है तो इसके कारण भी महिला का गर्भपात हो सकता है। क्योंकि हो सकता है की गर्भाशय अभी अच्छे से अपनी स्थिति में न आया हो, महिला के शरीर में कमजोरी हो, ऐसे में महिला के गर्भपात के चांस बढ़ जाते हैं।

दवाइयों का सेवन

गर्भ ठहरने के बाद यदि किसी शारीरिक परेशानी के होने पर महिला डॉक्टर की राय के बिना ही दवाइयों का सेवन अधिक मात्रा में करती है तो इसका बुरा असर भी गर्भ पर पड़ सकता है, जिसके कारण हो सकता है की महिला को ब्लीडिंग की समस्या शुरू हो, और ब्लीडिंग अधिक होने के कारण महिला का गर्भपात भी हो सकता है।

नशे का सेवन

गर्भवती महिला यदि नशीले पदार्थ जैसे की धूम्रपान, शराब आदि का सेवन करती है, तो इसके कारण महिला के पहले तीन महीने में गर्भ गिरने की सम्भावना अधिक होती है। साथ ही महिला यदि इसका बहुत अधिक सेवन करती है तो महिला को गर्भाधारण में भी मुश्किलों का सामना कर सकती है।

शारीरिक कमजोरी

महिला का किसी शारीरिक समस्या से ग्रसित होना जैसे की शुगर, थायरॉइड, हाई ब्लड प्रेशर, एनीमिया की समस्या का होना, महिला में वजन में कमी, मानसिक रूप से प्रेगनेंसी के लिए तैयार न होना, आदि। इन सभी कारणों की वजह से भी महिला को गर्भपात जैसी परेशानी के कारण परेशान होना पड़ सकता है।

लापरवाही

ज्यादा उछल कूद, भाग दौड़, सीढ़ियां चढ़ना, पेट के बल काम करना, झुककर काम करना, पेट के बल सोना, तनाव लेना, आदि लापरवाही यदि महिला करती है तो इसके कारण गर्भ पर असर पड़ सकता है जिसके कारण महिला का गर्भपात हो सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को ऐसी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

पुरुष से जुडी समस्या

अधिक नशा करना, किसी बिमारी से ग्रसित होना, शुक्राणु में कमी की समस्या का होना, आदि की समस्या से यदि कोई पुरुष परेशान होता है। तो ऐसे में भी महिला को गर्भ से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके कारण या तो गर्भ ठहरता नहीं है और यदि ठहरता है तो गर्भपात होने के चांस अधिक होते हैं।

प्रदूषण

जहरीली गैस के संपर्क में आने के कारण, रेडिएशन का बुरा प्रभाव, वायरल इन्फेक्शन, जैसे प्रदूषण के बुरे प्रभाव के सम्पर्क में यदि गर्भवती महिला आती है तो इसके कारण भी गर्भ पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। जिसके कारण महिला का गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते हैं।

हार्मोनल असंतुलन

गर्भपात होने का एक आम कारण होता है हार्मोनल असंतुलन, यदि महिला की बॉडी में हॉर्मोन्स से जुडी परेशानी है तो इसके कारण भी गर्भ पर बुरा असर पड़ सकता है जिसके कारण महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में गर्भपात की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गर्भपात की समस्या से बचने के लिए एक बार अच्छे से शारीरिक जांच जरूर करवानी चाहिए ताकि महिला यदि शिशु को जन्म देना चाहती है तो इन परेशानियों से बचाव करने में मदद मिल सके। और यदि महिला का एक बार किसी कारण गर्भपात हो जाता है, तो दुबारा से गर्भाधारण के लिए महिला को कम से कम तीन महीने का गैप जरूर रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में बालों में डाई लगाना कितना खतरनाक हो सकता है? डाई नहीं तो क्या लगाएं

गर्भावस्था के दौरान महिला हर छोटी से छोटी बात का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि महिला द्वारा की गई छोटी सी लापरवाही केवल महिला पर नकारात्मक असर नहीं पड़ता है बल्कि भ्रूण पर भी इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को कुछ भी करने से पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जो वो कर रही है वो सही है या नहीं। जैसे की कुछ महिलाएं बालों में डाई लगाती है और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐसा करना चाहिए या नहीं सबसे पहले इसकी जानकारी होना बहुत जरुरी है।

प्रेगनेंसी में बालों में डाई लगाना चाहिए या नहीं?

डाई को बनाने के लिए बहुत से केमिकल जैसे की अमोनिया आदि का इस्तेमाल किया जाता है। और यह केमिकल प्रेगनेंसी के दौरान न केवल गर्भवती महिला पर बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके गर्भावस्था में स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए डाई का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। तो आइये अब यह भी आपको बताते हैं की आखिर प्रेग्नेंट महिला को डाई का इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहिए और प्रेगनेंसी में इसका इस्तेमाल करने के क्या दुष्प्रभाव होते है।

प्रेगनेंसी में डाई लगाने के नुकसान

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी के दौरान स्किन थोड़ी सेंसिटिव हो जाती है। ऐसे में यदि महिला डाई का इस्तेमाल करती है तो इससे स्किन प्रभावित हो सकती है जिसके कारण स्किन एलर्जी होने का खतरा रहता है।
  • डाई लगाने के कारण उसकी स्मैल में जब आप सांस लेते हैं तो वो स्मैल आपके शरीर में पहुँच सकती है, और उस स्मैल में हानिकारक कण यानी डाई में मौजूद केमिकल होते हैं। जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • ऐसा भी कहा जाता है की डाई लगाने से प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। और गर्भवती महिला की इम्युनिटी के कमजोर होने के कारण गर्भवती महिला और शिशु को संक्रमण होने का खतरा रहता है।
  • डाई में मौजूद केमिकल का असर गर्भवती महिला की आँखों पर भी देखने को मिल सकता है जैसे की आँखों का लाल होना, आँखों में से आंसू आना, आँखों का कमजोर होना आदि।
  • बालों के झड़ने जैसी परेशानी भी महिला को डाई का इस्तेमाल करने से अधिक हो सकती है।

प्रेगनेंसी में बालों में डाई नहीं तो क्या लगाएं?

गर्भावस्था के दौरान यदि आप अपने बालों में कलर करना चाहती है तो आपको प्राकृतिक तरीको का इस्तेमाल कर सकती है। जिससे न तो गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान हो और साथ ही आपके बाल भी कलर हो जाएँ। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान बालों को कलर करने के लिए क्या- क्या करना चाहिए।

मेहँदी: बालों को कलर करने के लिए मेहँदी का इस्तेमाल करने एक बेहतरीन विकल्प है, इसे न तो गर्भवती महिला को किसी तरह का नुकसान होता है और न ही भ्रूण पर कोई बुरा असर पड़ता है। लेकिन कोशिश करते की सुबह के समय मेहँदी लगाएं और धो दें, क्योंकि शाम को थोड़ा मौसम ठंडा होने के कारण आपको दिक्कत हो सकती है। बालों को काला करने के लिए जहां आप हिना में दही और चायपत्ती का इस्तेमाल कर सकती हैं, वही बालों को भूरा करने के लिए आप हिना के साथ कॉफ़ी का इस्तेमाल कर सकती है।

कॉफ़ी: पांच छोटे पैकेट कॉफ़ी, आधा चुकंदर, आधा प्याज, एक गाजर, को पानी में एक साथ डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद इसे पीस लें। और ठंडा होने के बाद पेस्ट को बालों में लगाएं और सूखने के बाद बालों को अच्छे से धो लें, ऐसा करने से भी आपको अपने बालों के रंग को काला करने में मदद मिलती है। साथ ही इससे बाल सिल्की व् शाइनी भी हो जाते हैं। आप चाहे तो केवल कॉफ़ी में पानी को मिलाकर भी बालों में लगा सकती है इससे भी बालों के रंग में बदलाव आ सकता है।

तो यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान हेयर कलर लगाने का सोच रही हैं तो आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और शिशु की स्वस्थता को प्राथमिकता देनी चाहिए, न की बालों के रंग को। यदि आप फिर भी बालों को कलर करना चाहती है तो प्राकृतिक तरीको से अपने बालों को कलर कर सकती हैं क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला को शिशु को किसी भी नुकसान से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।