Home Blog Page 8

इस तरीके से गर्भाधारण जल्दी हो जाता है?

प्रेग्नेंट होना हर महिला के लिए बहुत ही खास लम्हा होता है साथ ही यह हर कपल के लिए बहुत ही ख़ुशी भरा अहसास होता है। और शादी के बाद अधिकतर कपल जल्द से जल्द चाहते हैं की उनके घर भी नन्हा मेहमान आये जिससे उनकी लाइफ की खुशियां और भी बढ़ जाएँ। क्या आप भी माँ बाप बनने की कोशिश कर रहे हैं? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जिनसे महिला को जल्द से जल्द गर्भधारण करने में मदद मिलती है।

सही उम्र

प्रेगनेंसी में के अठारह से अठाइस वर्ष की उम्र बिल्कुल सही होती है ऐसे में जल्दी गर्भाधारण करने के लिए आपको इसी उम्र में ट्राई करना चाहिए। क्योंकि उम्र अधिक होने के बाद प्रेगनेंसी होने में दिक्कतें आ सकती है साथ ही गर्भपात के चांस अधिक होते हैं।

दवाइयों का सेवन बंद करें

यदि आप गर्भाधारण न होने की दवाइयों का सेवन कर रही है तो आज से ही उन दवाइयों का सेवन बंद कर दें। क्योंकि जब तक आप उन दवाइयों का सेवन करेंगी तब तक आपको गर्भाधारण नहीं हो पायेगा। और दवाइयां बंद करने के बाद आपको जल्दी गर्भाधारण करने में मदद मिलेगी।

जीवनशैली हो बेहतर

महिला के जल्दी गर्भाधारण के लिए केवल महिला को ही नहीं बल्कि पुरुष की भी जीवनशैली बेहतर होनी चाहिए। और इसके लिए महिला समय से उठना चाहिए, समय से सोना चाहिए, खाना समय से खाना चाहिए, खाने में पौष्टिक आहार लेना चाहिए, खासकर उन डाइट का सेवन करना चाहिए जिससे प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद मिल सके। यदि महिला और पुरुष अपनी जीवनशैली को बेहतर रखते हैं तो इससे महिला को जल्दी कंसीव करने में मदद मिलती है।

फिट रहें

जल्दी गर्भाधारण के लिए जरुरी है की महिला फिट रहें और इसके लिए महिला को रोजाना योगासन, व्यायाम, मैडिटेशन आदि करना चाहिए। यदि महिला ऐसा करती है तो इससे महिला शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहती है जो जल्दी गर्भाधारण में मदद करता है।

वजन

वजन का सही होना महिला की प्रेगनेंसी में एक अहम रोल अदा करता है यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा होता है या कम होता है तो इसकी वजह से महिला को गर्भाधारण में समस्या आ सकती है। लेकिन यदि महिला का वजन नहीं तो जरुरत से ज्यादा होता है न कम होता है तो इससे महिला को जल्दी प्रेग्नेंट होने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आप भी जल्दी प्रेग्नेंट होना चाहती है तो आपको अपना वजन नियंत्रित रखना चाहिए।

गलत आदतों से रहे दूर

महिला और पुरुष दोनों यदि चाहते हैं की जल्द से जल्द गर्भाधारण हो तो इसके लिए महिला और पुरुष को गलत आदतों से दूर रहना चाहिए। जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान व् अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे प्रजनन क्षमता पर गलत प्रभाव पड़ता है।

साथ में समय बिताएं

कई बार कपल साथ में समय नहीं बिताते हैं और कभी कभार ही सम्बन्ध बनाते हैं और उन सम्बन्ध बनाने के बाद सोचते हैं की गर्भाधारण हो जायेगा। ऐसा होने का कारण उनका बिज़ी रहना हो सकता है लेकिन यदि आप बिज़ी रहेंगे तो हो सकता है की आपकी इस समस्या का जल्द समाधान नहीं हो। बल्कि जल्दी गर्भाधारण के लिए आप पति पत्नी को एक दूसरे के साथ समय बिताना चाहिए यदि आपको घर में समय नहीं मिलता है तो आप बाहर कहीं घूमने जाएँ और केवल एक दूसरे में ही रहें। ऐसा करने से आप तनाव से दूर रहेंगे और एक दूसरे के साथ बेहतर सम्बन्ध बना पाएंगे जिससे महिला का गर्भाधारण जल्दी होने में मदद मिलेगी।

ओवुलेशन पीरियड का ध्यान रखें

पीरियड्स के बाद जैसे ही महिला का ओवुलेशन पीरियड शुरू होता है उन दिनों में कपल यदि बेहतर सम्बन्ध बनाता है। तो ऐसे में निषेचन की प्रक्रिया होने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं जिससे महिला का गर्भाधारण हो सकता है। यदि आप भी चाहते हैं की आपका गर्भाधारण जल्द से जल्द हो तो अपने ओवुलेशन पीरियड्स को कैलकुलेट करके या डॉक्टर से इस बारे में जानकर आप इन दिनों में अपने पार्टनर के साथ बेहतर सम्बन्ध बनाएं।

सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखें

ऐसा नहीं है केवल सम्बन्ध बनाने से प्रेगनेंसी हो जाती है बल्कि सम्बन्ध बनाते समय आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखने की जरुरत होती है जिससे जल्दी गर्भाधारण में मदद मिलती है। ऐसे में कपल को सम्बन्ध बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो उस पोजीशन में सम्बन्ध बनाएं जिसमे शुक्राणु के अंडाशय तक पहुँचने के चांस ज्यादा हो, सम्बन्ध बनाते ही महिलाएं तुरंत खड़ी न हो जाएँ, रोजाना सम्बन्ध बनाएं, आदि।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से जल्दी गर्भाधारण होने में मदद मिलती है। यदि आप भी माँ बनने का प्रयास कर रही हैं तो आप भी इन टिप्स का ध्यान रखें ताकि आपको जल्दी से जल्द माँ बाप बनने का सुख मिल सकें। इसके अलावा यदि बहुत प्रयास करने के बाद भी आपको गर्भाधारण नहीं हो रहा है तो एक बार आप दोनों डॉक्टर से मिलकर बात करें।

How to get pregnant fast

गर्भ में शिशु को परेशानी होती है जब महिला ये काम करती है

गर्भ में शिशु को परेशानी होती है जब महिला ये काम करती है। गर्भावस्था में हर महिला को अपने स्वास्थ्य का खास ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान कुछ काम ऐसे होते हैं जो शिशु के विकास और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को इन कामों से बचना चाहिए ताकि उनके बच्चे को कोई परेशानी न हो।

पहला काम है, धूम्रपान करना। धूम्रपान करना गर्भावस्था के दौरान बहुत हानिकारक हो सकता है। यह शिशु के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और उसे अस्थमा के बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को धूम्रपान से दूर रहना चाहिए।

दूसरा काम है, अत्यधिक शारीरिक श्रम करना। गर्भावस्था में अत्यधिक शारीरिक श्रम करना शिशु के विकास को प्रभावित कर सकता है। यह शिशु के लिए स्थायी नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक शारीरिक श्रम से बचना चाहिए।

तीसरा काम है, अत्यधिक तनाव में रहना। गर्भावस्था में अत्यधिक तनाव में रहना शिशु के विकास को प्रभावित कर सकता है। यह उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को तनाव से दूर रहना चाहिए।

चौथा काम है, अनुचित दवाओं का सेवन करना। गर्भावस्था में अनुचित दवाओं का सेवन करना शिशु के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को अपने डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का खास ध्यान रखना चाहिए। उन्हें इन कामों से बचकर अपने और अपने शिशु के लिए स्वस्थ्य और सुरक्षित रहना चाहिए।

गर्भावस्था में गलत सोने के नुकसान और सोने का सही तरीका

गर्भावस्था महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां बरती गई थोड़ी सी लापरवाही महिला और उसके बच्चे की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान जरुरी होता है की महिला छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखें। जैसे की महिला को क्या खाना है कितना खाना है, क्या करना है क्या नहीं करना हैं, कैसे सोना है कैसे नहीं सोना है, आदि।

यदि महिला इन छोटी छोटी बातों का प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में महिला के गलत तरीके से सोने से क्या नुकसान हो सकते हैं साथ ही महिला को किस पोजीशन में सोना चाहिए उसके बार में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में गलत तरीके से सोने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला के लिए भरपूर नींद लेना बहुत जरुरी होता है क्योंकि महिला यदि भरपूर नींद लेती है तो इससे महिला फ्रैश व् एक्टिव महसूस करती है। लेकिन यदि महिला गलत तरीके से सोती है तो इसकी वजह से महिला को दिक्क़तें भी हो सकती है। जैसे की:

कमर में दर्द

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला पीठ के बल सोती है तो इससे गर्भाशय का पूरा वजन रीढ़ की हड्डी पर आ जाता है जिसकी वजह से महिला को कमर में दर्द की समस्या अधिक हो सकती है।

बच्चा को हो सकती है दिक्कत

यदि प्रेग्नेंट महिला पेट के बल सोती है तो इसकी वजह से पेट पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है। और शिशु को गर्भ में दिक्कत होने का खतरा रहता है।

ऑक्सीजन नहीं पहुँचती

यदि महिला दाईं और करवट लेकर लम्बे समय तक सोती है तो इसकी वजह से गर्भाशय का भार लिवर और गर्भनाल पर पड़ता है जिसकी वजह से ब्लड फ्लो में रूकावट आने का खतरा होता है। और शिशु तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व सही तरीके से नहीं पहुँच पाती है। जिसकी वजह से शिशु परेशानी का अनुभव कर सकता है।

प्रेगनेंसी में किस तरीके से सोना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त नींद लेना बहुत जरुरी होता है क्योंकि भरपूर नींद लेने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। लेकिन यदि महिला नींद अच्छे से नहीं मिलती है तो इसका नकारात्मक प्रभाव महिला की सेहत और बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास पर पड़ता है। साथ ही प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला किसी भी पोजीशन में सो सकती है लेकिन दूसरी तिमाही में थोड़ा पेट बाहर आने के बाद महिला को सोने की सही पोजीशन का ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि माँ और बच्चे दोनों को कोई दिक्कत नहीं हो सके।

ऐसे में महिला को सोते समय बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए क्योंकि यह पोजीशन प्रेग्नेंट महिला के सोने के लिए सबसे सही पोजीशन है। इस पोजीशन में सोने से गर्भनाल या लिवर पर कोई दबाव नहीं पड़ता है और बच्चे तक ऑक्सीजन व् पोषक तत्व सही मात्रा में पहुँचते हैं। इसके अलावा आज कल मार्किट में स्लीपिंग पिल्लो भी मिल जाते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला को आरामदायक नींद लेने में मदद करते हैं।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में गलत तरीके से सोने के नुकसान व् सोने का सही तरीका, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान सोने की सही पोजीशन के बारे में पता होना चाहिए। ताकि आपको आरामदायक नींद लेने में मदद मिल सके। साथ ही गलत तरीके से सोने की वजह से आपको या बच्चे को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

Right way to sleep during pregnancy

इन गलतियों की वजह से बेबी का वजन जन्म के समय कम होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए गर्भ में पल रहे शिशु का विकास सबसे अहम होता है। इसीलिए महिला प्रेगनेंसी के दौरान हर वो काम करती है जिससे गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो सके। लेकिन फिर भी कुछ केस ऐसे होते हैं जिसमे जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी जैसी समस्या देखने को मिलती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ कारण या वजह बताने जा रहे हैं जिनकी वजह से गर्भ में शिशु के विकास में कमी आती है और जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी होती है।

पोषक तत्वों की कमी

गर्भावस्था के समय महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेने की सलाह दी जाती है, प्रीनेटल विटामिन लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन यदि महिला डाइट या दवाइयों के प्रति लापरवाही बरतती है तो इसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। जिस कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर असर पड़ता है और बच्चे का वजन सही तरीके से नहीं बढ़ता है। और इसका नतीजा यह होता है की जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या होती है।

कैफीन

प्रेग्नेंट महिला को कैफीन युक्त चीजें जैसे की चाय, कॉफी, कैफीन युक्त चॉकलेट्स आदि का सेवन सिमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। लेकिन यदि महिला जरुरत से ज्यादा इन चीजों का सेवन करती है। तो इसकी वजह से गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है। जिसकी वजह से बच्चे के वजन में कमी आ सकती है।

नशीले पदार्थों का सेवन

प्रेग्नेंट महिला को नशीले पदार्थों जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान आदि न करने की सलाह दी जाती है साथ ही ऐसी जगह पर भी न जाने की सलाह दी जाती है जहां कोई धूम्रपान कर रहा हो या नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा हो। ऐसे में यदि महिला इनका सेवन करती है या धूम्रपान के संपर्क में आती है तो इसका बुरा असर गर्भनाल से शिशु तक पहुँचता है। जिसके कारण शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास में कमी आने का खतरा भी बढ़ जाता है। और इसी कारण की वजह से जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी आने चांस बढ़ जाते हैं।

समय पूर्व डिलीवरी

यदि किसी महिला की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है तो इस कारण भी जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी आ सकती है। क्योंकि उस समय तक गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान शारीरिक परेशानियां अधिक होने के कारण, लापरवाही करने के कारण, आदि महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा होता है।

गर्भ में शिशु ज्यादा होना

यदि किसी महिला के गर्भ में जुड़वा बच्चे हैं या ट्रिप्लेट्स हैं तो इसकी वजह से भी जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी जैसी समस्या आ सकती है।

संक्रमण

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है लेकिन यदि महिला गर्भाशय में संक्रमण, या अन्य किसी संक्रमण से ग्रस्त हो जाती है। तो इसकी वजह से भी शिशु पर बुरा असर पड़ने के चांस ज्यादा होते हैं। जिसके कारण जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी जैसी समस्या देखने को मिल जाती है।

गर्भाशय से जुडी समस्या

यदि किसी गर्भवती महिला को गर्भाशय से जुडी समस्या है जैसे की रसौली है या अन्य कोई समस्या है तो इसका असर भी गर्भ में शिशु के विकास पर पड़ सकता है जिसकी वजह से जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या उत्त्पन्न हो सकती है।

गर्भनाल से जुडी समस्या

गर्भनाल के माध्यम से गर्भ में पल रहे शिशु तक पोषक तत्वों, ब्लड, ऑक्सीजन आदि को भरपूर मात्रा में पहुँचाया जाता है। लेकिन यदि किसी गर्भवती महिला को गर्भनाल से जुडी समस्या होती है तो इस कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने का खतरा होता है।

हाई ब्लड प्रैशर

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होने के कारण भी जन्म के समय बच्चे के वजन में कमी जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। क्योंकि हाई ब्लड प्रैशर होने के कारण शिशु तक पोषक तत्व, ब्लड आदि सही से नहीं पहुँच पाता है जिसकी वजह से शिशु को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

शुगर

यदि कोई गर्भवती महिला शुगर से पीड़ित है तो भी जन्म के समय शिशु के वजन में कमी आने की समस्या होने का खतरा अधिक होता है।

तनाव

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खुश रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि यदि कोई महिला तनाव से ग्रसित होती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ता है। और महिला को समय से पहले डिलीवरी, बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पहले बच्चे का जन्म में भी कोई दिक्कत रही हो

यदि महिला का पहला बच्चा भी कम वजन वाला हुआ है तो इसके कारण भी दूसरे बच्चे का वजन भी जन्म के समय कम होता हो सकता है। लेकिन ऐसा होगा ही यह कोई जरुरी नहीं है।

गर्भ में बच्चे का वजन सही रहे इसके लिए क्या करें?

बच्चे का विकास पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि जन्म के समय बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। जैसे की:

  • महिला को कैफीन, नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए और समय पर अपने आहार का सेवन करना चाहिए।
  • खुश रहना चाहिए।
  • किसी भी तरह की शारीरिक समस्या होने पर उसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का समय से सेवन करने के साथ समय पर अपनी जांच करवानी चाहिए।
  • योगासन व् मैडिटेशन करना चाहिए जिसे महिला स्वस्थ रहे और महिला के साथ गर्भ में बच्चा भी स्वस्थ रहें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में पल रहे शिशु के वजन में कमी जैसी दिक्कत आ सकती है। ऐसे में जरुरी होता है की महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखे ताकि महिला को किसी भी तरह की शारीरिक समस्या नहीं हो। जिससे गर्भ में शिशु का विकास भी अच्छे से हो और जन्म के समय बच्चे को होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

Causes of Low baby weight during birth

गर्भावस्था के 1 से 4 महीने तक यह काम नहीं करें?

प्रेगनेंसी के शुरुआती समय महिला के लिए बहुत ही नाजुक होता है और इस दौरान महिला की स्थिति बहुत ही मुश्किलों से भरी हो सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में तेजी से हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं। जिसकी वजह से महिला को शारीरिक परेशानियां अधिक हो सकती है इसके अलावा जो महिलाएं पहली बार माँ बनने का अनुभव कर रही होती है उन्हें और भी ज्यादा दिक्कत महसूस हो सकती है। क्योंकि उनके शरीर में हो रहे बदलाव को समझने में उनको दिक्कत हो सकती है।

साथ ही प्रेगनेंसी की शुरुआत में महिला उल्टियां, जी मिचलाना, बॉडी पेन, सिर दर्द, पेट में हल्का दर्द, स्पॉटिंग, भूख में कमी, थकान, कमजोरी, तनाव, ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या, जैसी परेशानी का अनुभव कर सकती है। ऐसे में महिला के लिए जरुरी होता है की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें। क्योंकि महिला की थोड़ी सी लापरवाही गर्भपात जैसी समस्या का समस्या करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को अपना ध्यान रखने के साथ कुछ काम करने से भी बचना चाहिए।

गर्भावस्था के पहले चार महीने में क्या काम नहीं करें?

यदि आपकी पहली प्रेगनेंसी है और अभी आपने कंसीव किया है तो आपको पहली तिमाही में बहुत ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत है। क्योंकि प्रेगनेंसी के पहले चार महीनों में गर्भ में शिशु के अंगों की आकृतियां बन रही होती है यानी की शिशु का शुरूआती विकास हो रहा होता है। ऐसे में महिला यदि अपना ध्यान नहीं रखती है तो इससे महिला को तो दिक्कत तो होती है साथ ही शिशु पर भी इसका गलत असर पड़ता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी के पहले चार महीने में महिला को किन कामों को करने से बचना चाहिए।

महिला को बिल्कुल भूखे नहीं रहना चाहिए

प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण जीभ के स्वाद में बदलाव आना आम बात होती है। ऐसे में महिला को कुछ खाने का मन नहीं करता है साथ ही शारीरिक परेशानियों के कारण भी महिला की खाने की इच्छा में कमी आ सकती है। लेकिन महिला को बिल्कुल भी भूखे नहीं रहना चाहिए चाहे महिला को भूख हो या न हो महिला को हर दो से तीन घंटे में कुछ न कुछ हेल्दी जरूर खाना चाहिए। ताकि महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो।

गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ नहीं खाएं

गर्भावस्था के शुरूआती चार में महीनों में महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए जिनकी तासीर गर्म होती है क्योंकि इनकी वजह से महिला के शरीर के तापमान बढ़ जाता है और महिला को ब्लीडिंग हो सकती है। जैसे की महिला को तिल, अधिक मात्रा में ड्राई फ्रूट्स, अंडा, ज्यादा मिर्च मसालें, आदि खाने से बचना बचना चाहिए।

ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी चाहिए

प्रेगनेंसी की खबर कन्फर्म होने के बाद महिला को शुरूआती समय में ज्यादा भाग दौड़ करने से बचना चाहिए क्योंकि इसका हानिकारक प्रभाव बच्चे पर पड़ सकता है। ऐसे में जितना हो सके प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में महिला को आराम ही करना चाहिए।

सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए

गर्भावस्था के शुरूआती चार महीनों के साथ प्रेगनेंसी के आखिर तक महिला को सीढ़ियां चढ़ने से बचना चाहिए खासकर पहले चार महीनों में तो ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे पेट के निचले हिस्से पर जोर पड़ता है जिसकी वजह से स्पॉटिंग हो सकती है। इसके अलावा यदि आप ऊपर रहते हैं तो आप या तो लिफ्ट का इस्तेमाल करें या फिर केवल जरुरत पड़ने पर सीढ़ियों का इस्तेमाल करें साथ ही इस बात का ध्यान रखें की सीढ़ियां बहुत ही आराम से चढ़े या उतरें ज्यादा तेजी नहीं करें।

सम्बन्ध बनाने से बचें

प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में सम्बन्ध बनाना सेफ नहीं माना जाता है क्योंकि इस दौरान सम्बन्ध बनाने में यदि गलती हो जाये तो ब्लीडिंग होने का खतरा अधिक होता है ऐसे में जितना हो सकें पहली तिमाही में तो बिल्कुल भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

गैस के पास खड़े रहकर काम नहीं करें

प्रेगनेंसी के पहले चार महीनों के अलावा पूरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गैस के पास खड़े रहकर काम नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में गर्माहट अधिक हो सकती है यानी की शरीर के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। जिससे महिला व् बच्चे दोनों को दिक्कत महसूस हो सकती है।

पेट पर दबाव पड़ने वाले काम नहीं करें

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में महिला उन कामों को करने से भी बचना चाहिए जिन्हे करने से पेट पर दबाव पड़े। क्योंकि प्रेगनेंसी की शुरुआत में पेट पर दबाव पड़ना अच्छी बात नहीं होती है ऐसा करने शिशु के लिए बिल्कुल सेफ नहीं होता है। जैसे की महिला को बाथरूम साफ नहीं करना चाहिए, झाड़ू पोछा करने से बचना चाहिए, झुककर कोई चीज उठाने से बचना चाहिए, आदि।

यात्रा करने से बचना चाहिए

गर्भावस्था के शुरूआती समय में गर्भवती महिला को यात्रा करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि यात्रा करने के कारण झटका आदि लगने का डर रहता है जिसकी वजह से महिला को दिक्कत हो सकती है। यहां तक की महिला का गर्भपात होने खतरा भी अधिक होता है।

भारी सामान नहीं उठाना चाहिए

गर्भवती महिला को भारी सामान उठाने से बचना चाहिए। क्योंकि भारी सामान उठाने से पेट पर दबाव पड़ने का खतरा रहता है जिसकी वजह से महिला को दिक्कत महसूस हो सकती है।

स्टूल या सीढ़ी पर चढ़कर काम नहीं करें

गर्भवती महिला का किसी मेज या सीढ़ी पर चढ़कर काम नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसे काम करने की वजह से गिरने का खतरा होता है जिसके कारण गर्भ में शिशु को चोट पहुँच सकती है साथ ही महिला को चोट लगने का खतरा भी होता है।

नशे का सेवन

यदि गर्भवती महिला पहले धूम्रपान या शराब का सेवन करती थी तो अब महिला को गलती से भी किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि नशे का सेवन करने की वजह से गर्भ में शिशु का शुरूआती विकास रुक सकता है।

दवाइयों का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इन दवाइयों का असर गर्भनाल के रास्ते शिशु पर पड़ सकता है। और शिशु के विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

टाइट कपडे या ऊँचे जूते चप्पल पहनने से बचें

प्रेग्नेंट महिला को टाइट कपडे या ऊँचे जूते चप्पल नहीं पहनने चाहिए क्योंकि इनकी वजह से महिला को दिक्कत होने का खतरा होता है जहां टाइट कपडे पहनने की वजह से महिला असहज महसूस कर सकती है वहीँ ऊँचे जूते चप्पल पहनने के कारण महिला के गिरने का खतरा होता है।

व्यायाम नहीं करें

प्रेगनेंसी के पहले चार महीनों में महिला को जरुरत से ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए और हो सके तो वाक के अलावा महिला को अन्य कोई व्यायाम नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में अधिक व्यायाम करने के कारण गर्भ पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है।

मालिश

प्रेगनेंसी के दौरान मालिश करने से महिला आरामदायक महसूस कर सकती है लेकिन पहली तिमाही में महिला को पेट की मालिश नहीं करवानी चाहिए क्योंकि इसकी वजह से पेट पर दबाव पड़ सकता है जिसकी वजह से महिला दिक्कत का अनुभव कर सकती है।

गर्म पानी से नहीं नहाएं

गर्भावस्था के शुरूआती समय में महिला को बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए क्योंकि इसके कारण शरीर का तापमान बढ़ सकता है। जिसकी वजह से गर्भपात का खतरा होता है। गर्म पानी से नहाने के अलावा गर्भवती महिला को जकूजी या सोना बाथ भी नहीं लेना चाहिए।

स्ट्रेस नहीं लें

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण शारीरिक समस्या होना आम बात होती है लेकिन इसे लेकर महिला को ज्यादा टेंशन नहीं लेनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला स्ट्रेस ज्यादा लेती है तो इसकी वजह से गर्भ के विकास में कमी, गर्भपात जैसी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टर को दिखाने में लापरवाही

प्रेगनेंसी के किसी भी महीने में महिला को डॉक्टर को दिखाने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि सही समय पर जांच न करवाने, वैक्सीन नहीं लगवाने आदि के कारण महिला को दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं कुछ काम जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के पहले चार महीनों में नहीं करने चाहिए। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है और ऐसी कोई भी लापरवाही नहीं करती है। तो इससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

Do not do this work for 1 to 4 months of pregnancy

फूंक मार-मार कर बेबी को खाना क्यों नहीं खिलाना चाहिए?

हर माँ चाहती है की उसका बच्चा हेल्दी रहे और इसके लिए महिला बच्चे के खान पान से लेकर हर छोटी छोटी बात का ध्यान रखती है। लेकिन कई बार देखा जाता है की महिलाएं जब अपने बच्चे को खाना खिलाती है तो वो वो खाने को पहले फूंक मारती हैं और उसके बाद बच्चे को खाना खिलाती है।

महिला द्वारा की जाने वाली इस हरकत भी बच्चे के फायदे के लिए ही होती है और महिला ऐसा इसीलिए करती है की कहीं बच्चे को खाना गर्म नहीं लगे और बच्चे का मुँह नहीं जल जाए। लेकिन सच यह हैं की महिला तो इसे फायदा सोचकर करती है लेकिन इसकी वजह से शिशु की सेहत को नुक्सान पहुँच सकता है। अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे होता है तो आइये अब इस आर्टिकल में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

बच्चे को फूंक मारकर खाना खिलाने से नुकसान कैसे होता है?

हमारे मुँह में, दांतों पर बैड बैक्टेरिया का जमाव होता है ऐसे में जब महिला खाने पर फूंक मारती है तो हमारी सांस के जरिये वह बैड बैक्टेरिया खाने में पहुँच सकता है और उसके बाद जब शिशु उस भोजन को खता है तो वह बैड बैक्टेरिया शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। तो आइये अब जानते हैं की बच्चे को फूंक मारकर खाना खिलाने से कौन कौन से नुकसान हो सकते है।

दांतों को होता है नुकसान

आपको यह जानकार हैरानी होगी की दांतों में कीड़ा लगाने वाला बैक्टेरिया एक मुँह से दूसरे मुँह में जा सकता है और यह झूठा खाना खाने, झूठा पाने पीने, फूंक मारकर ख़ाना खिलाने, किस करने आदि से भी फ़ैल सकता है। ऐसे में यदि महिला बच्चे को फूंक मारकर खाना खिलाती है तो इसकी वजह से यह बैक्टेरिया बच्चे के मुँह में पहुँच सकता है जिससे बच्चे के दांतों में कैविटी होना, कीड़ा लगना जैसी समस्या हो सकती है।

सेहत सम्बन्धी समस्या

आप जब खाने में फूंक मारते हैं तो वह बैड बैक्टेरिया खाने में पहुंचकर शिशु के शरीर में पहुँच सकता है जिसकी वजह से बच्चे को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा हो सकता है।

बच्चे को खाना खिलाते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • जब आप बच्चे को खाना खिलाते हैं तो वह खाना पंखे के नीचे रखकर या किसी और तरीके से ठंडा करें।
  • यदि आपको दांतों से जुडी समस्या है तो बच्चे को अपनी झूठी चम्मच से नहीं खिलाएं, अपने झूठे गिलास में पानी नहीं दें।
  • हो सके तो बच्चे के होंठों पर किस करने से भी बचें।
  • बच्चे के मुँह की साफ सफाई का ध्यान रखें।

तो यह हैं बच्चे को फूंक मारकर खाना क्यों नहीं खिलाना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी ऐसा करते हैं तो ऐसा करने से बचें। ताकि आपके बच्चे को हर तरह की सेहत सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

डिलीवरी के बाद हर महिला को होती है इन 7 चीजों की जरुरत?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि प्रेगनेंसी ले दौरान महिला जितना अच्छे तरीके से अपना ध्यान रखती है उतना ही माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की बच्चे के जन्म के बाद महिला अपना ध्यान रखना बंद कर दें। क्योंकि डिलीवरी के बाद भी महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं, महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां होने लगती है, बच्चे की जिम्मेवारी बढ़ जाती है, पहली डिलीवरी के बाद तो महिला को स्तनपान जैसी प्रक्रिया पहली बार करनी होती है उसे लेकर महिला को दिक्कत होती है, आदि।

ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला भी महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकें। इसके अलावा डिलीवरी के बाद ऐसी कुछ चीजें होती है जिनकी जरुरत महिला को पड़ सकती है ऐसे में उन चीजों को महिला को पहले ही मंगा कर रख लेना चाहिए। ताकि डिलीवरी के बाद जब महिला घर आये तो महिला को अपनी जरुरत का सारा सामान मिल सके जिससे महिला की दिक्कत को कम करने में मदद मिल सकें। क्योंकि जितना महिला को दिक्कत कम होगी उतना ही महिला रिलैक्स रहेगी और जल्दी फिट होगी। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की डिलीवरी के बाद हर महिला को किन चीजों की जरुरत होती है।

सैनिटरी पैड

डिलीवरी के बाद महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है साथ ही फ्लो बहुत ज्यादा होता है और ज्यादा दिनों के लिए जैसे की एक महीने तक ब्लीडिंग होती है। ऐसे में महिला को डिलीवरी से पहले ही बेहतरीन क़्वालिटी के सैनिटरी पैड घर पर माँगा कर रख लेने चाहिए और ज्यादा माँगा कर रख लेने चाहिए। ताकि महिला को इस वजह से कोई दिक्कत नहीं हो।

दूध निकालने वाला पंप

डिलीवरी के बाद शुरुआत में कुछ महिलाओं को दूध उतरने में परेशानी हो सकती है ऐसे में महिला को ब्रेस्ट पंप पहले से ही मंगवा कर रख लेना चाहिए। ताकि शिशु के जन्म के बाद शिशु को माँ के दूध को लेकर कोई दिक्कत नहीं हो साथ ही शिशु का विकास अच्छे से तरीके से हो सके।

नर्सिंग पैड्स

बच्चे के जन्म के बाद स्तन से दूध आना नेचुरल प्रक्रिया होती है। ऐसे में जब महिला अपने शिशु को स्तनपान कराती हैं तो कुछ महिलाओं को स्तनपान करवाने के बाद भी स्तन से दूध निकलता है। और कभी कभी अचानक से दूध का फ्लो इतना तेज हो जाता है कि आपके द्वारा पहने हुए कपड़े के बाहर तक आ जाता है जो की दिखने में गन्दा लग सकता है साथ ही आपको बार बार कपडे बदलने पड़ते हैं जिसके कारण आपको परेशानी हो सकती है। ऐसे में आपको नर्सिंग पैड की जरूरत होती है क्योंकि इन्हें लगाने से दूध नर्सिंग पैड में सूख जाता है। और दूध बाहर की तरफ नहीं आता है।

एक आरामदायक तकिया

महिला को बच्चे को दूध पिलाने में कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए आपको एक आरामदायक पिल्लो भी पहले से ही ले आना चाहिए। ताकि महिला अपनी गोदी में तकिया रखकर शिशु को उस पर लिटा दें। और उसके बाद पीछे की तरफ सहारा लेकर शिशु को आराम से दूध पीला दे इससे न तो महिला को दिक्कत होगी और न ही शिशु को कोई परेशानी होगी।

दवाइयां

डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में कमजोरी नहीं आये इसके लिए डॉक्टर्स आपको कुछ दवाइयां लेने की सलाह देते हैं साथ ही आपको यदि टाँके आये है तो वो टाँके जल्द से जल्द ठीक हो सके इसके लिए उन पर दवाई लगाने के लिए भी देते हैं। ऐसे में डिलीवरी के तुरंत बाद ही आपको उन दवाइयों को ले आना चाहिए ताकि आपको जल्द से जल्द रिकवर होने में मदद मिल सकें।

आरामदायक कपडे

डिलीवरी के बाद बच्चे को दूध पिलाते समय महिला को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को पहले से ही ऊपर से चैन वाली मैक्सी, आज कल बच्चों को आराम से दूध पिलाया जा सके वह ब्रा भी मिलती है, एक्स्ट्रा पेंटी आदि भी महिला को खरीद कर रख लेनी चाहिए। ताकि महिला को कपड़ो की वजह से बाद में कोई दिक्कत नहीं हो।

शिशु के बिछौने

छोटा बच्चा बार बार यूरिन पास करता है, बीच में पॉटी करता है ऐसे में शिशु का काम एक या दो बिछौनो से नहीं चलता है। ऐसे में महिला को शिशु के लिए पहले से ही कॉटन के बिछौने बनवा लेने चाहिए ताकि बाद में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनकी जरुरत डिलीवरी के बाद महिला को हो सकती है ऐसे में महिला को इन चीजों को मंगवा लेना चाहिए। इसके अलावा डिलीवरी के बाद भी महिला को अपनी डाइट, अपने रहन सहन, अपने उठने बैठने, सोने आदि का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि महिला जितने अच्छे तरीके से अपना ध्यान रखती है उतना ही महिला को जल्द से जल्द फिट होने में मदद मिलती है।

After delivery every woman needs these 7 things

कन्सीव करने में दिक्कत हो रही है तो यह कारण हो सकते हैं

आजकल महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आने की समस्या बढ़ती जा रही है। और इस परेशानी के सबसे अहम कारण की यदि बात की जाये तो वो है लोगो का गलत लाइफस्टाइल, गलत खान पान, स्ट्रेस, अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही, आदि। इन सभी के कारण महिलाएं जल्दी कन्सीव नहीं कर पा रही है। साथ ही आजकल महिलाएं ज्यादा उम्र में भी शादी करने का फैसला लेती है जिसकी वजह से महिलाओं को गर्भधारण में दिक्कत आती है। तो आइये इस आर्टिकल में हम ऐसे ही कारणों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं जिनकी वजह से महिलाओं को गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है।

महिलाओं के कंसीव करने की सही उम्र क्या होती है?

यदि कोई महिला माँ बनने का फैसला लेती है तो पच्चीस से तीस वर्ष की उम्र माँ बनने के लिए बिल्कुल सही होती है। इस उम्र से पहले या बाद में भी महिला गर्भधारण कर सकती है लेकिन यदि महिला की उम्र कम या इससे ज्यादा हो जाती है तो महिला को कंसीव करने में दिक्कत आने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कॉम्प्लीकेशन्स का खतरा भी बढ़ जाता है।

कंसीव करने में दिक्कत होने के कारण

यदि किसी महिला को बहुत कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है तो इसके कई कारण हो सकते हैं। यह कारण महिला के साथ पुरुष से भी जुड़े होते हैं क्योंकि महिला के कन्सीव करने में महिला व् पुरुष दोनों का योगदान होता है। तो आइये उन कारणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

तनाव

महिलाओं के कंसीव न करने का एक कारण तनाव भी है यदि किसी महिला को तनाव होता है तो इसका असर महिला के पीरियड्स पर पड़ सकता है। साथ ही पुरुष को स्ट्रेस होने पर उनका स्पर्म काउंट कम हो सकता है जिसकी वजह से न तो महिला और पुरुष के बीच बेहतर सम्बन्ध बनते हैं। और न ही निषेचन होने का चांस अधिक होता है जिसकी वजह से महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है।

वजन

महिला का वजन कम हो या अधिक हो दोनों ही महिला की फर्टिलिटी और पीरियड्स के चक्र पर बुरा असर डालते हैं। और जब महिला की फर्टिलिटी सही नहीं होती है और महिला अनियमित पीरियड्स का शिकार होती है तो इसकी वजह से भी महिला को गर्भधारण में समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

एग सही न बनने के कारण

महिला की ओवरी में एग बनते हैं और यह एग पुरुष के स्पर्म द्वारा निषेचित किया जाता है जिसके बाद महिला का गर्भधारण होता है। लेकिन यदि महिला के एग अच्छे से नहीं बनते हैं या एग रिलीज़ नहीं हो पाते हैं तो इसकी वजह से महिला को गर्भधारण में दिक्कत होती है।

फैलोपियन ट्यूब से जुडी समस्या

फैलोपियन ट्यूब से ही एग जाकर गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है लेकिन यदि महिला की फैलोपियन ट्यूब ही सही नहीं है उसमे किसी तरह की दिक्कत है। तो फैलोपियन ट्यूब से जुडी समस्या होने के कारण भी महिलाओं को गर्भधारण में समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भाशय से जुडी परेशानी

यदि महिला का गर्भाशय मजबूत नहीं है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु रुक नहीं पाता है, महिला के गर्भाशय में रसौली है तो इन कारणों की वजह से भी महिला को प्रेग्नेंट होने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

स्पर्म काउंट से जुडी समस्या

महिला के प्रेग्नेंट होने के लिए जितना ओवरी से निकलने वाले एग की क़्वालिटी का अच्छा होना जरुरी है उतना ही पुरुषों के स्पर्म काउंट का बेहतर होना भी जरुरी है। यदि महिला के एग की क़्वालिटी तो अच्छी हो लेकिन पुरुष के स्पर्म काउंट की क़्वालिटी अच्छी न तो इसकी वजह से भी निषेचन की क्रिया नहीं हो पाती है। और महिला के गर्भधारण में समस्या आ सकती है।

गलत आदतों के कारण

यदि महिला या पुरुष धूम्रपान अधिक करते हैं, अल्कोहल या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं। तो इसके कारण भी फर्टिलिटी और स्पर्म काउंट पर बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से महिला को कंसीव करने में दिक्कत आ सकती है।

शारीरिक बीमारी

यदि महिला थायरॉयड या अन्य किसी गंभीर शारीरिक बीमारी से पीड़ित है तो भी महिला को गर्भधारण में समस्या आ सकती है।

नींद में कमी के कारण

जब आप नींद पूरी नहीं लेते हैं तो इसकी वजह से स्ट्रेस हो जाता है, थकान बढ़ने लगती है और इस वजह से महिलाओं को मासिक चक्र में गड़बड़ी जैसी समस्या हो जाती है तो पुरुष का स्पर्म काउंट भी इससे प्रभावित होता है। और इस कारण महिलाओं को कन्सीव करने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

टाइट कपडे पहनने के कारण

यदि आप अपने प्राइवेट पार्ट के लिए टाइट अंडरवियर का इस्तेमाल करती है तो इसकी वजह से प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। यह महिला और पुरुष दोनों के लिए हैं और इसी कारण महिला को प्रेगनेंसी से जुडी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

सही सम्बन्ध न बनाने के कारण

यदि महिला और पुरुष खुश होकर सम्बन्ध नहीं बनाते हैं, बहुत कम या बहुत ज्यादा सम्बन्ध बनाते हैं, ओवुलेशन पीरियड में सम्बन्ध नहीं बनाते हैं तो इन सभी कारणों की वजह से भी महिला को कंसीव करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रदूषण

बढ़ता प्रदूषण भी फर्टिलिटी पर बुरा असर डालने का एक अहम कारण है और इस कारण भी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से महिला को प्रेग्नेंट होने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

पीरियड्स से जुडी समस्या

जिन महिलाओं को पीरियड्स के समय पर न आने की, जरुरत से ज्यादा ब्लीडिंग होने की, पीरियड्स कम आने जैसी समस्या होती है उन महिलाओं को भी प्रेगनेंसी से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने के कारण

जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन अधिक करती है उन महिलाओं के गर्भाशय की झिल्ली पर बुरा असर पड़ता है। जिसकी वजह से महिला को बाद में गर्भधारण करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

जल्द प्रेग्नेंट होने के टिप्स

  • अपनी डाइट का ध्यान रखें हेल्दी डाइट ले इससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी और जितना आप स्वस्थ रहेंगे उतना ही आपको इस परेशानी को दूर करने में मदद मिलेगी।
  • तनाव से दूरी रखें और जितना हो सकते हैं खुश रहें।
  • यदि महिला को ओवरी, गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब से जुडी कोई समस्या है तो उसका इलाज करवाएं।
  • अपने लाइफस्टाइल को बेहतर रखें।
  • भरपूर नींद लें।
  • महिला व् पुरुष एक अच्छे डॉक्टर का चुनाव करके उससे अपने शरीर की जांच करवाएं ताकि गर्भधारण नहीं होने के सही कारण का पता लगाया जा सके।
  • सही उम्र में माँ बनने का फैसला लें।
  • अपने वजन को न तो कम होने दें और या ही जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने दें।

तो यह हैं कन्सीव करने में दिक्कत होने के कारण व् इस परेशानी से बचाव के कुछ सुझाव, यदि आपको भी प्रेगनेंसी में दिक्कत आ रही है तो आपको भी प्रेग्नेंट नहीं होने के सही कारण का पता करना चाहिए। ताकि आपको इस समस्या से निजात पाकर संतान सुख को पाने में मदद मिल सकें।

Reasons for not getting pregnant

प्रेगनेंसी के दौरान यदि चेहरे और पैरों पर सूजन होने लगे तो क्या करें?

गर्भावस्था जहां महिला के लिए एक ख़ुशी का पल होता है वहीँ इस दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। जैसे की महिला के शरीर में बदलाव होने लगते हैं, महिला का वजन बढ़ता है, कुछ महिलाओं की स्किन पर भी असर पड़ता है, पेट सम्बन्धी परेशानियां महिला को हो सकती है, ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या का सामना महिला को करना पड़ सकता है, मूड स्विंग्स जैसे की गुस्सा या चिड़चिड़ाहट महिला को अधिक हो सकती है,

तनाव की समस्या महिला को हो सकती है, सिर दर्द व् बॉडी के अन्य पार्ट्स में दर्द की समस्या महिला को हो सकती है, सूजन की समस्या से महिला को परेशान होना पड़ सकता है, आदि। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की यह सभी परेशानियां गर्भवती महिला जो जरूर हो बल्कि सभी गर्भवती महिलाओं को अलग अलग दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान चेहरे और पैरों पर सूजन होने लगे तो महिला को क्या करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में सूजन होना सही है या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान सूजन आना बहुत ही सामान्य बात होती है। और यह सूजन महिला को हाथों, पैरों, चेहरे, होंठ आदि पर आ सकती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान यदि कोई भी लक्षण असामान्य दिखाई दे तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। ऐसे ही प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को शरीर के किसी भी अंग पर सूजन की समस्या अधिक हो तो महिला को उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में सूजन होने के कारण

  • शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • जो महिलाएं ज्यादा समय तक पैरों के भार खड़ी रहती हैं उन्हें पैरों व् टखनों में इस परेशानी का सामना अधिक करना पड़ सकता है।
  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ने के कारण यह समस्या हो सकती है।
  • हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से जूझ रही गर्भवती महिलाओं को यह समस्या हो सकती है।
  • जो गर्भवती महिलाएं किडनी लिवर की समस्या से जूझ रही होती है उन्हें भी इस समस्या का सामना अधिक करना पड़ सकता है।
  • धूम्रपान करने के कारण।

प्रेग्नेंट महिला को पैरों और मुँह पर सूजन होने पर क्या करना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान यदि किसी गर्भवती महिला को पैरों व् मुँह पर सूजन की समस्या है तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करने से इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। जैसे की:

सिकाई

गुनगुने पानी में नमक डालकर उसमे थोड़ी देर पैरों को रखने से पैरों की सिकाई हो जाती है जिससे पैरों को आराम मिलता है और सूजन की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।

मसाज

रात को सोने से पहले रोजाना गुनगुने तेल से मसाज करें ऐसा आप पैरों के साथ चेहरे पर भी कर सकते हैं। ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को पैरों की सूजन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है क्योंकि इससे ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

सोने की सही पोजीशन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सही पोजीशन में सोना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दिल, लिवर, गर्भाशय व् शरीर के अन्य सभी हिस्सों में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। जिससे महिला को सूजन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है और प्रेगनेंसी में सोने की सही पोजीशन महिला का बाईं और करवट लेकर सोना होती है।

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा सही रहती है। जिससे महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है और महिला जितना स्वस्थ रहती है उतना ही प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम होने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा सही रहती है जिससे महिला को सूजन की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।

नमक कम लें

नमक का सेवन गर्भवती महिला को सिमित मात्रा में करना चाहिए क्योंकि नमक जरुरत से ज्यादा खाने पर महिला को सूजन की समस्या अधिक हो सकती है।

आरामदायक चप्पल व् जूते पहनें

ऐसे जूते चप्पल पहने जिसमे से हवा आसानी से पास हो जाये क्योंकि बंद जूते चप्पल पहनने के कारण न तो से पैरों तक हवा पास होती है और पैरों में ब्लड फ्लो में रूकावट भी हो सकती है। ऐसे में महिला को सूजन की समस्या को कम करने के लिए हवादार जूते चप्पल पहनने चाहिए।

एक ही पोजीशन में ज्यादा देर न रहें

गर्भवती महिला को एक ही पोजीशन में ज्यादा देर नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इसके कारण ब्लड फ्लो पूरे शरीर में अच्छे से नहीं हो पाता है जिसकी वजह से महिला को सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी में सूजन की समस्या से बचे रहने के लिए महिला को एक ही पोजीशन में ज्यादा देर नहीं रहना चाहिए।

व्यायाम

सूजन की समस्या से राहत पाने के लिए गर्भवती महिला को थोड़ी देर व्यायाम भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि व्यायाम करने से शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है जिससे गर्भवती महिला को सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

कैफीन का सेवन कम करें

चेहरे व् पैरों की सूजन की समस्या से राहत पाने के लिए गर्भवती महिला को कैफीन युक्त चीजें जैसे की चाय कॉफ़ी का सेवन भी कम करना चाहिए। क्योंकि कैफीन युक्त चीजों का ज्यादा सेवन सूजन की समस्या को बढ़ा सकता है।

स्विमिंग

सूजन की समस्या से राहत पाने के लिए गर्भवती महिला चाहे तो स्विमिंग कर सकती है स्विमिंग करने से शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है जिससे गर्भवती महिला को सूजन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ उपाय जिनसे महिला को सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को एक बात का ध्यान रखना चाहिए यदि महिला को चेहरे पर, पैरों पर या शरीर के अन्य किसी भी हिस्से में सूजन की समस्या अधिक हो तो महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि ज्यादा सूजन की समस्या होने किसी शारीरिक बीमारी के होने का लक्षण होता है।

Swelling problem during Pregnancy

बच्चा पेट में कितने महीने में घूमने लगता है?

माँ के पेट में बच्चा ऐसी बहुत सी हरकतें करता है जिन्हे महिला देख नहीं पाती है लेकिन कुछ हरकतों को महसूस कर सकती है। जैसे की गर्भ में शिशु का अगड़ाई लेना, सिर घूमाना, अंगूठा चूसना, हिचकियाँ लेना, रोना, हंसना, आदि को महिला देख नहीं पाती है। लेकिन शिशु का किक मारना महिला महसूस कर सकती है और यह अनुभव महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे बेहतरीन अनुभव होता है। जब शिशु गर्भ में घूमता हुआ अपने हाथ पैर चलाता है तो महिला को शिशु की हलचल का अनुभव होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की शिशु गर्भ में कितने महीने में घूमने लगता है उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

गर्भ में शिशु कब घूमने लगता है

माँ के पेट में शिशु का विकास दिन प्रतिदिन बढ़ता है और शिशु का विकास पूरी तरह से माँ पर ही निर्भर करता है। क्योंकि जितना बेहतरीन महिला आहार लेती है उतने पोषक तत्व शिशु को मिलते हैं और शिशु का विकास बढ़ता है, जितना महिला खुश रहती हैं उतना शिशु गर्भ में एक्टिव रहता है, आदि। और जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में अपने होने का अहसास अपनी माँ को करवाता भी है।

शिशु का यह अहसास गर्भ में शिशु द्वारा मारी जाने वाली किक द्वारा अनुभव किया जाता है। गर्भ में शिशु सोहलवें, सत्रहवें, हफ्ते में या उसके बाद किक मारना शुरू कर देता है। शुरुआत में आपको शिशु के घूमने का अहसास कम हो सकता है लेकिन जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे ज्यादा समय के लिए आपको शिशु की हलचल का अनुभव हो सकता है। इसके अलावा यदि गर्भ में शिशु के विकास में कमी होती है तो भी गर्भ में शिशु की हलचल कम महसूस हो सकती है।

तो यह है शिशु गर्भ में कब घूमना शुरू करता है उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी यह पता होना चाहिए। क्योंकि जितनी ज्यादा प्रेगनेंसी की जानकारी होती है उतना ही महिला को प्रेगनेंसी को समझने और आसान बनाने में मदद मिलती है।

Baby movement during pregnancy