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प्रेगनेंसी में नाभि का बाहर आना और नाभि के ऊपर नीचे लाइन आने का क्या कारण होता है?

प्रेगनेंसी में नाभि

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से बदलाव से गुजरना पड़ता है, और वह बदलाव शारीरिक, मानसिक व् भावनात्मक रूप से हो सकते हैं। शारीरिक बदलाव के न केवल महिला का वजन बढ़ता है बल्कि स्किन पर भी इसके कुछ बदलाव दिखाई देते हैं, जो की शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकते है। साथ ही नाभि के आकार में भी कुछ फ़र्क़ दिखाई देता है, लेकिन इसमें किसी भी तरह के घबराने की बात नहीं होती है बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान इस तरह के बदलाव का होना स्वाभाविक बात होती है। तो आइये आज हम आपको प्रेगनेंसी में नाभि में क्या क्या बदलाव दिखाई देते हैं इसके बारे में कुछ शेयर करना चाहते हैं।

प्रेगनेंसी में नाभि के बाहर आने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में बहुत से बदलाव देखने को मिलते हैं। वैसे ही जैसे जैसे प्रेगनेंसी के महीने बढ़ते हैं तो नाभि में भी कुछ परिवर्तन महसूस हो सकता है। जैसे की नाभि का बाहर आना, इसका कारण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय का आकार बढ़ना व् गर्भाशय में होने वाले परिवर्तन हो सकता है। क्योंकि जैसे जैसे गर्भाशय विकसित होता है, तो महिला का पेट बाहर की और आने लगता है, जिसके कारण नाभि पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है। और नाभि बाहर की निकली हुई महसूस हो सकती है।

नाभि गर्भनाल से जुडी हुई होती है, जिसके माध्यम से शिशु तक पोषण पहुंचाया जाता है। कुछ महिलाओं को नाभि में आये इस बदलाव के साथ नाभि में हल्के दर्द का अहसास, खुजली आदि भी महसूस हो सकती है। लेकिन नाभि पर ज्यादा जोर से खुजली आदि नहीं करनी चाहिए, साथ ही नाभि के बाहर आने पर परेशान होने की बात नहीं होती है। क्योंकि शिशु के जन्म के बाद जैसे जैसे शरीर अपने वापिस शेप में आता है वैसे वैसे नाभि भी अपनी शेप में आ जाती है। इसके अलावा नाभि की स्किन के आस भी गर्भवती महिला बदलाव महसूस हो सकता है।

गर्भावस्था में पेट के ऊपर नीचे लाइन होने का क्या मतलब होता है

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पेट के ऊपर नाभि के थोड़ा ऊपर से लेकर प्राइवेट पार्ट तक जाती हुई एक सीधी लाइन दिखाई दे सकती है। इस लाइन को लाइनिया निगरा के नाम से जाना जाता है। ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के आखिर में या तीसरी तिमाही में अच्छे से दिखाई से सकती है, और यह लाइन पहले से ही पेट पर नाभि के ऊपर नीचे होती है। और प्रेगनेंसी के दौरान इस लाइन का स्पष्ट रूप से महसूस होना भी बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है। साथ ही बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन, एस्ट्रोजन हॉर्मोन में होने वाले बदलाव के कारण स्किन में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ सकता है। जिसके कारण यह लाइन नाभि के ऊपर नीचे साफ़ दिखाई देने लग सकती है। साथ ही डिलीवरी के बाद यह लाइन अपने आप ही धीरे धीरे खत्म हो जाती है।

प्रेगनेंसी में नाभि के ऊपर नीचे दिखाई देने वाली काली रेखा क्या संकेत देती है

गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले बदलाव को लेकर, लक्षणों को देखकर घर के बड़े अंदाजा लगाने लग जाते हैं की लड़का होगा या लड़की। लेकिन यह केवल अंदाज़े का काम ही करता है, यह पूरी तरह से सच हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। ऐसे में पेट पर होने वाली इस काली रेखा को देखकर भी गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग के बारे में अंदाजा लगाया जाता है। जैसे की यदि नाभि से होकर जाने वाली रेखा नीचे की तरफ बिल्कुल सीधी जाती है और स्पष्ट रूप से दिखाई देती है तो यह गर्भ में लड़का होने का संकेत होती है, जबकि लाइन के सीधे न होने का मतलब गर्भ में लड़की का होना हो सकता है। ऐसे में यह भी केवल अंदाजा लगाने का तरीका ही है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान नाभि में आये बदलाव से जुडी कुछ बातें, तो यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान नाभि में आये इस बदलाव के कारण परेशान है तो अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है, क्योंकि ऊपर दी गई जानकारी से आपको नाभि से जुड़े सवालों का जवाब मिलने में मदद मिलती है।

मुँह की बदबू सिर्फ दाँतों और मसूडों ही वजह नहीं होती है ये भी है कारण

मुँह से बदबू आने के कारण आपको दुसरो के सामने हंसी का पात्र बनने के साथ आपको शर्मिंदगी का भी सामना करना पड़ सकता है, कई लोग सोचते हैं की दांतो की साफ़ सफाई न रखने के कारण आपके मुँह से बदबू आती है, और वो बार बार ब्रश करने लगते है, परंतु मुँह से बदबू आने के कारण केवल आपके दांत या आपके मसूड़े में होने वाली समस्या ही नहीं बल्कि और भी कई कारण हो सकते है, जिनके कारण आपको ये समस्या हो जाती है।

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मुँह से बदबू आने का सबसे बड़ा कारण होता है, जब आपके मुँह में लार बननी कम हो जाती है, जिसके कारण आपका मुँह सूखने लगता है, और आपके मुँह से बदबू आने लगती है, इसके अलावा जब आप बहुत देर के लिए न तो कुछ खाते है, न ही पीते है तो इसके कारण भी आपका मुँह सूखने लगता है, जिसके कारण आपके मुँह से बदबू आने लगती है, क्योंकि पानी मुँह के लिए कलींजर का काम करता है, खाने के बाद जब भी आप पानी का सेवन करते है तो इसके कारण आपके मुँह में होने वाला बैक्टेरिया खत्म हो जाता है, जिसके कारण भी आपके मुँह से बदबू आने लगती है।

मुँह से बदबू आने के और भी कई कारण हो सकते है, जैसे की आपका नाश्ता न करना, पानी का कम सेवन करना, कीमोथेरैपी होने के कारण, लीवर में समस्या होने के कारण, कारण चाहे कोई भी हो मुँह से आने वाली बदबू के कारण आपको बहुत ज्यादा शर्मिंदा होना पड़ सकता है, यहां तक की इसके कारण आपका साथी भी कई बार आपके पास नहीं आटा है, परंतु ये कोई ऐसी समस्या भी नहीं है की जिसका कोई उपचार न हो, बल्कि आप घरेलु तरीको का इस्तेमाल करके ही इस समस्या से राहत पा सकते है, आइये पहले विस्तार से जानते है की मुँह से बदबू आने के कौन कौन से कारण होते है।

ब्रेकफास्ट न करने के कारण:-

सुबह जब आप खाना खाते है तो इसके कारण आपके मुँह में लार बनती है, जिसके कारण आपकी जीभ साफ रहती है, और बैक्टेरिया खत्म होता है, परंतु यदि आप नाश्ता नहीं करते है, तो इसके कारण आपकी जीभ पर बैक्टेरिया जमने लगता है, न ही लार बनती है, जिसके कारण आपके मुँह से बदबू आने लगती है।

लीवर की बीमारी होने के कारण:-

जिन लोगो को लीवर की बीमारी की समस्या जैसे लीवर सिंड्रोम या जॉन्‍डिस (पीलिया ) आदि होने के कारण भी आपके मुँह से बदबू आने लगती है, परंतु जैसे ही आपकी ये समस्या ठीक होती हैं, ये परेशानी भी हल हो जाती है।

मुँह में अल्सर होने के कारण:-

मुँह में अल्सर होने के कारण भी आपके मुँह से बदबू आती है, क्योंकि इसके कारण आपके मसूड़ो में पास जमने लगती है, जिसके कारण कई बार खून भी आ जाता है, जिसके कारण कई बार इन्फेक्शन होने की समस्या भी हो जाती है,और मुँह से बदबू आने लगती है।

मसूडों से खून आने के कारण:-

कई बार आपके मसूडों से खून आता है, और खून वही जैम भी जाता है, जिसके कारण वहां बैक्टेरिया इक्कठे होने लगते है, जिसके कारण आपके मुँह से बदबू आने की समस्या शुरू हो जाती है।

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गले में होने वाले इन्फेक्शन के कारण:-

कई बार मुँह से बदबू आने का कारण आपके गले में होने वाला इन्फेक्शन भी हो सकता है, क्योंकि इसके कारण आपके गले में बैक्टेरिया ब्रोन्‍कियल मार्ग की कोशिकाओं को तोड़ देता है, जिसके कारण आपके मुँह से बदबू आने लगती है।

किडनी फेलियर होने के कारण:-

जिन लोगो को किडनी फेलियर की समस्या होती है, उनके मुँह से भी बदबू आती है, और उनके मुँह से ऐसी बदबू आती है, जैसे की उनके मुँह में मछली हो, और इसके कारण उन्हें किसी से मिलने में भी हिचकिचाहट होने लगती है।

डाइट में अधिक मात्रा में प्रोटीन होने के कारण:-

यदि आप अपनी डाइट में अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करते है, तो इसके कारण भी आपके मुँह से बदबू आने लगती है, और इसीलिए आपको समय समय पर खाने के बाद कुल्ला जरूर करना चाहिए ताकि आपके मुँह में बैक्टेरिया का जमाव न हो।

ज्यादा मात्रा में शराब का सेवन करने के कारण:-

मुँह से बदबू आने का एक कारण ज्यादा मात्रा में शराब का सेवन करना भी हो सकता है, इसके कारण आपके मुँह की लार ग्रन्थिया सूखने लगती है, जिसके कारण मुँह में लार बननी कम हो जाती है, और मुँह में होने वाली लार आपके बैक्टेरिया को खत्म करती है, इसीलिए जब लार ही नहीं बनेगी तो आपका मुँह सुख जाएगा, और आपको मुँह से आने वाली बदबू की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दवाईयो के सेवन के कारण:-

कई दवाइया ऐसी होती है, जो आपके मुँह को सुखा देती है, और आपके मुँह में लार को बनने नहीं देती है, जिसके कारण आपके मुँह से बदबू आने लगती है, इसके लिए आपको अधिक मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए।

कब्ज़ की समस्या या पेट से जुडी कोई परेशानी होने पर:-

जिन लोगो को कब्ज़ की समस्या अधिक या पेट से सम्बंधित परेशानी रहती है, उनके मुँह से अधिक बदबू आती है, क्योंकि उनका भी मुँह हमेशा सूखा हुआ ही रहता है।

साफ़ सफाई न रखना:-

जो लोग दांतों को सही से ब्रश नहीं करते है, भोजन खाने के बाद कुल्ला नहीं करते है, उनके मुँह में बैक्टेरिया का जमाव होना शुरू हो जाता है, जिसके कारण भी आपके मुँह से बदबू आ सकती है, इसके अलावा जो लोग पानी का सेवन भी कम मात्रा में करते है उनको भी मुँह से आने वाली बदबू का सामना करना पड़ सकता है।

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मुँह से आने वाली बदबू से बचने के उपाय:-

  • मुँह से आने वाली बदबू को रोकने का सबसे आसान उपचार होता है, की जितना हो सकें आप पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें।
  • अपने दांतों की साफ़ सफाई का भी विशेष ध्यान रखें।
  • दो चम्मच निम्बू के रस को एक गिलास गुनगुने पानी में डाल कर दिन में दो से तीन बार कुल्ला करें, इसके कारण आपको मुँह से आने वाली बदबू की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • ग्रीन टी का सेवन करने से भी मुँह की बदबू से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • मुँह में एक लॉन्ग को रख कर चूसने से भी आपको मुँह से आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलती है।
  • तुलसी के पत्ते और जामुन के पत्तों को मिलाकर चबाने से भी आपको मुँह से आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलती है।
  • नमक और सरसों के तेल को दांतो व् मसूड़ों की सफाई के लिए इस्तेमाल करने से भी आपको मुँह से आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलती है।
  • दो इलायची और थोड़ी सी मुलैठी को चबाने से भी आपको मुँह से आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलती हैं।
  • दालचीनी को पानी में उबाल कर उसके पानी से गार्गल्स करने पर भी आपको मुँह से आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलती है।
  • अनार के पेड़ की छाल को भी पानी में उबाल कर ठंडा करके उस पानी से भी गरारे करने से भी आपको इससे राहत मिलती है।इलायची और पुदीने का पान बनाकर खाने से भी आपको मुँह से आने वाली बदबू से आराम मिलता है।
  • कीकर या नीम का दातुन करने से दांतों की साफ़ सफाई के साथ आपको मुँह से आने वाली बदबू की समस्या से भी राहत मिलती है।

तो ये है कुछ कारण जिनके कारण आपको मुँह से आने वाली बदबू के कारण शर्मिंदा होना पड़ सकता है, इसीलिए यदि आपको समय रहते इस समस्या के इलाज़ के बारे में सोचना चाहिए, इसके अलावा ये कुछ अन्य टिप्स भी है जिनका इस्तेमाल करके आप मुँह से आने वाली बदबू से राहत पा सकते है, इसके अलावा आप पोष्टिक चीजों का सेवन करें पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करें , इनके कारण आपको फिट रहने के साथ इन परेशानियों से भी राहत पाने में मदद मिलती है, साथ ही साफ़ सफाई का भी विशेष रूप से ध्यान रखें।

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होंठ और गाल फटने से ऐसे बचाएं

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मौसम में आए बदलाव का असर आपकी स्किन पर देखने को जरूर मिलता है, क्योंकि इसके कारण स्किन सूखी पड़ने लगती है, जिसके कारण होंठ और गाल फटने लागते हैं। कई बार तो स्किन में खिंचाव होने के कारण दर्द भी होता है। साथ ही आपके चेहरे की सुंदरता भी कम होने लगती है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि आपके होंठों की त्वचा और चेहरे की स्किन शरीर की बाकी स्किन से ज्यादा संवेदनशील होती है। तो आइये आज हम आपको इस परेशानी से आसानी से बचाव करने के लिए कुछ टिप्स देने जा रहें हैं जो आपके होंठों और गालों की स्किन को कोमल और मुलायम बनाएं रखने में आपकी मदद करते हैं।

हाइड्रेट रहे

होंठों या गाल के फटने का सबसे बड़ा कारण होता है की आपकी बॉडी हाइड्रेट नहीं होती है, यानी पानी की कमी के कारण बॉडी नमी खोने लगती है। जिसके कारण आपको स्किन के फटने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बहने के लिए आपको भरपूर पानी का सेवन करना चाहिए, जिससे बॉडी में पानी की कमी न हो और त्वचा की नमी बरकरार रहने में मदद मिल सके।

देसी घी

फटे गाल और होंठ पर हाथ और ऊँगली की मदद से दिन में दो से तीन बार देसी घी लगाएं ऐसा करने स्किन कोमल होगी, और आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

नारियल का तेल

नारियल का तेल भी स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है साथ ही यह फटे होंठों के लिए भी फायदेमंद होता है। इसीलिए रात को सोने से पहले अपने गाल और होंठों पर नारियल का तेल लगाएं। साथ ही अपनी नाभि पर भी लगाएं इससे आपकी स्किन फटने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

ग्लिसरीन

ग्लिसरीन का इस्तेमाल करने से भी आपको फटी स्किन और फटे होंठों की समस्या से बहाव करने में मदद मिलती है रात को सोने से पहले इसका इस्तेमाल करें और सुबह उठकर साफ पानी से इससे साफ़ कर लें।

लिप बाम और मॉइस्चराइजर

यदि आपको होंठ फटने की समस्या और गालों की ख़ूबसूरती को हमेशा बरकरार रखना है तो इसके लिए आपको होंठों के लिए लिप बाम का इस्तेमाल करना चाहिए, साथ ही स्किन के लिए मॉइस्चराइजर का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा करने से स्किन की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है जिससे आपको इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

शहद और चीनी

एक चम्मच चीनी और एक चम्मच शहद को मिलाकर उसे अपनी स्किन पर लगाएं, और दो मिनट के लिए स्क्रब की तरह इसका इस्तेमाल करें। और ऐसे ही इसे अपने होंठों पर भी लगाएं, और दो मिनट तक मसाज करें, इससे सभी मृत कोशिकाएं निकल जाती है। और साथ ही हफ्ते में तीन से चार बार इसे करने से आपको फटे गाल और होंठों की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

शीया बटर

शीया बटर में मौजूद गुण भी आपकी स्किन के रूखेपन को दूर करके उसकी कोमलता को बरकरार रखने में मदद करते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए आप शीया बटर को अपने होंठों और गाल पर लगाएं।

मलाई और हल्दी

एक चम्मच मलाई में थोड़ी सी हल्दी मिलाएं, उसके बाद इसे अपने होंठों और फटे गाल पर लगाकर होड़ दें, और चाहे तो एक मिनट के लिए मसाज भी कर सकते हैं। कुछ दिन रात को सोने से पहले इसे करें आपके होंठ और गाल मुलायम हो जाएंगे।

पोषक तत्व ले भरपूर

त्वचा को भरपूर पोषण न मिलने के कारण भी आपको फटे होंठ और फटे गाल जैसी परेशानी हो सकती है, ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए आपको भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों का सेवन करना चाहिए ताकि आपकी स्किन को भरपूर पोषण मिल सके, और आपको ऐसी कोई परेशानी न हो।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप आसानी से फटे होंठों और गाल की समस्या से निजात पा सकते हैं, साथ ही इनके इस्तेमाल से गाल और होंठों को मुलायम व् कोमल बनने में मदद मिलती है।

पेट में जुड़वाँ बच्चे है? ऐसे रखें ध्यान

पेट में जुड़वाँ बच्चे है? ऐसे रखें ध्यान:-

प्रेगनेंसी में महिला को अपना खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि उस समय एक नन्ही सी जान उसके गर्भ में पल रही होती है, और उसके साथ महिला में भी बहुत से शारीरिक बदलाव आते है, जो महिला के लिए नए अनुभव होते है, इसके कारण महिला को बहुत परेशानी भी हो सकती है, परंतु महिला को इन बदलाव से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उस मेहमान के बारे में सोचना चाहिए, परंतु ऐसी बहुत सी सावधानियां भी होती है, जो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बरतनी चाहिए, जिससे की उसे प्रेगनेंसी के दौरान और बाद में किसी भी परेशानी का सामना न करना पढ़ें।

यदि गर्भ में एक शीशी होता है तो महिला को बहुत तकलीफ होती है, सोचिये यदि महिला के गर्भ में एक नहीं दो नन्ही जान हो, तो महिला के लिए जरुरी हो जाता है, की वो अपनी देखभाल का और भी ज्यादा ध्यान रखे, साथ ही क्या करना चाहिए, और क्या नहीं करना चाहिए, इसका खास ध्यान रखना चाहिए, और साथ ही अपने स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी के होने पर देर नहीं करनी चाहिए, बल्कि तुरंत अपने डॉक्टर को जाकर दिखाना चाहिए, ताकि परेशानी ज्यादा न बढ़ें।

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन लगातार बढ़ता है, और यदि महिला के गर्भ में दो बच्चे है तो बच्चों के वजन का सीधा असर महिला के वजन पर भी पड़ता है, और महिला का वजन बढ़ने के साथ महिला को उतने बैठने में भी परेशानी होती है, साथ ही महिला को सीढिया चढ़ना, भारी वजन उठाना, झुककर काम करना, ज्यादा व्यायाम करना, ज्यादा देर तक एक ही जगह खड़े रहना या बैठे रहने में परेशानी अनुभव हो सकती है, इसके अलावा महिला को अपने योंन संबंधों को भी बिना डॉक्टर के परामर्श के नहीं करना चाहिए।

साथ ही कई महिलाएं तनाव में भी आ जाती है क्योंकि उन्हें उलटी सर दर्द चक्कर आदि जैसी समस्या होने लग जाती है, जिसके कारण उन्हें काफी कमजोरी का अहसास होने लगता है, इसीलिए महिलाओ को ध्यान रखना चाहिए, की वो अपना और अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखें। तो आइये आज हम उन्ही महिलाओ के लिए कुछ टिप्स देने जा रहें है, जो जुड़वाँ बच्चों को जन्म देने वाली महिला के काम आ सकते है, और महिला को ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही न करते हुए समय समय पर अपनी जाँच करवानी चाहिए।

पेट में जुड़वा बच्चे है ऐसे रखें ध्यान इसके लिए टिप्स:-

भारी वजन न उठायें:-

जुड़वाँ बच्चों के होने से महिला का वजन बढ़ने के साथ शुरूआती दिनों में भी महिला को बहुत सी सावधानियां बरतनी पड़ती है, जैसे की महिला के लिए जरुरी है की वो भारी वजन उठाने से परहेज रखें, क्योंकि भारी वजन उठाने से आपके पेट पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण महिलाओ का गर्भाशय में दर्द व् काई बार बच्चों के नीचे आने की सम्भावना भी बढ़ जाती है, जिससे महिला को कई बार ब्लीडिंग जैसी परेशानी भी शुरू हो जाती है, इससे बचने के लिए जरुरी है की आप भारी वजन उठाने से परहेज रखें।

आहार का ध्यान रखें:-

खान पान का ध्यान रखना गर्भावस्था में बहुत जरुरी होता है, क्योंकि महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास भी महिला के द्वारा लिए गए मिनरल्स की मदद से ही होता है, बच्चे का विकास सही ढंग से हो, और साथ ही बच्चे के अंदर सभी मिनरल्स भी पुरे ढंग से पहुच कर उसके विकास योगदान करें और साथ ही महिला का स्वास्थ्य भी ठीक रहें क्योंकि खा जाता है की स्वस्थ माँ के गर्भ में स्वस्थ बच्चा निवास करता है, इसीलिए महिला को अपने बच्चे और अपने स्वास्थ्य के लिए संतुलित, पोष्टिक, व् सभी मिनरल्स से भरपूर आहार लेना चाहिए।

पेट के भार कोई काम न करे:-

महिला को पुरे नौ महीने ध्यान रखना चाहिए की वो ऐसा कोई भी काम न करें जिससे की उसके पेट पर किसी भी तरह का दबाव पढ़ें, क्योंकि जुड़वाँ बच्चों के कारण पेट पर दबाव पड़ने से ज्यादा परेशानी हो सकती है, इसके अलावा महिला को पैरो के भार भी ज्यादा देर तक नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि इससे पेट में खिंचाव होता है, साथ ही महिला के लिए जरुरी है की वो झुककर भी कोई काम न करें, ऐसा करने से बाद में उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए आपको पेट के भार कोई भी काम नहीं करना चाहिए। इसके अलावा महिला को ज्यादा सीढ़िया चढ़ने से भी परहेज रखना चाहिए।

डॉक्टर से लगातार करवाएं जाँच:-

महिला के गर्भ में यदि दो बच्चे होते है वैसे तो ज्यादा ये सिजेरियन की मदद से ही जन्म लेटे है, परंतु कुछ नार्मल भी हो जाते है, ऐसे में आपको बच्चो की स्थिति को जानने के लिए समय समय पर डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए, क्योंकि ऐसे में कॉम्पिलिकेशन्स ज्यादा होती है, इसके अलावा महिला के पेट दर्द, ब्लीडिंग या ज्यादा उलटी होने की समस्या को भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपको ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, इसके अलावा महिला को खान पान से तो परहेज रखना ही नहीं चाहिए क्योंकि ऐसे में आपको कमजोरी होने के कारण बच्चे की डिलीवरी समय से पहले होने की आशंका भी लगातार बनी रहती है।

डेरी उत्पाद का सेवन जरूर करें:-

महिलाओ को जो की जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली होती है, उसके लिए अपने शरीर को सशक्त रखना बहुत जरुरी होता है, इसके लिए जरुरी होता है की आप ज्यादा मात्रा में कैल्शियम व् प्रोटीन का सेवन करें, जिससे बच्चो की हड्डियों को भी मजबूती मिले, इसके लिए आपको दूध, पनीर जैसे डेरी उत्पाद का सेवन जरूर करना चाहिए, और इसके सेवन से महिला की फुर्ती भी बनी रहती है, और साथ में महिला को कमजोरी का अहसास भी नहीं होता है, और जो महिलाएं ज्यादा दूध का सेवन करती है, उनमे ज्यादा सहमत होती है, की वो जुड़वा बच्चों को जन्म दे सकें।

सेक्स करने में रखें परहेज:-

पेट में एक बच्चे के होने पर आपको डॉक्टर सेक्स की सलाह नहीं देते है, तो सोचिये ऐसे में यदि आपके पेट में जुड़वा बच्चे है तो कैसे होगा, इसके लिए जरुरी है की आप पुरे नौ महीने जितना हो सकें उतना सेक्स से परहेज रखें, क्योंकि सेक्स करने से गर्भाशय से टकराव होने का खतरा रहता है, साथ ही दो बच्चोंके होने के कारण गर्भाशय की थैली बड़ी भी हो जाती है, इसीलिए हो सकें तो सेक्स करने से पहले आपको डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए, और साथ ही जरुरी है की आप डॉक्टर के कहे अनुसार ही चले ताकि बच्चे और माँ के स्वास्थ्य पर कोई भी बुरा असर न पढ़ें।

जुड़वाँ बच्चों के गर्भ में होने पर ध्यान देने योग्य अन्य बातें:-

  • महिला को सीढ़िया नहीं चढ़नी चाहिए, और यदि चढ़े भी तो उसमे ज्यादा तेजी नहीं बरतनी चाहिए, आराम से चढ़ना चाहिए।
  • महिला को चलने पर यदि थकान का अनुभव हो तो आराम करना चाहिए, क्योंकि सांस फूलने से महिला पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • महिला को पैरो के भार भी ज्यादा देर तक नहीं बैठना चाहिए।
  • पेट के ऊपरी हिस्से में यदि दर्द ज्यादा हो तो तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • ज्यादा सर दर्द, धुंधला दिखना, चक्र आदि की परेशानी हो तो भी डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
  • ज्यादा उलटी आने को भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पेट पर दबाव पड़ता है, और साथ ही कमजोरी भी आती है, इसीलिए डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।
  • महिला को पेट के भार सोना भी नहीं चाहिए।
  • एक ही जगह पर ज्यादा देर तक लेटे भी नहीं रहना चाहिए, थोड़े समय बाद करवट लेनी चाहिए जिससे की आपको शिशु के हिलने का आभास हो सकें, क्योंकि पांचवे महीने में शिशु हिलने लग जाता है।
  • महिला को समय पर चेक अप्स और अल्ट्रासॉउन्ड करवाना चाहिए।
  • खान पान में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
  • और साथ ही महिला को नींद भी भरपूर मात्रा में लेना चाहिए।
  • ज्यादा थकान वाला कोई भी काम नहीं करना चाहिए।
  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • ऐसा आहार लेना चाहिए जिसमे सभी खनिज उचित मात्रा में विद्यामान हो।
  • महिला को चाहिए की कभी उसे समस्या हो तो बिना देर किये तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपना चेक अप करवाना चाहिए।

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दूध पीने के क्या फायदे होते है? जरूर पढ़ें

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दूध पीने के बहुत से फायदे होते है, परंतु ये भी है की हर किसी को दूध पीना पसंद नही होता है, और खास कर छोटे बच्चे को दूध पीने के लिए कह दो, तो उसके पास दूध के न पीने के अनगिनत बहाने होते है, और छोटे ही नहीं कई बार तो बड़े भी बहाने बनाने लगते है, परंतु क्या आप जानते है, की दूध पीने से आपको स्वास्थ्य संबंधी कितने फायदे होते है, क्योंकि दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन, फॉस्फोरस, आदि खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते है।

दूध पीना हर किसी को पसंद नहीं होता है, परंतु जब आप दूध पीने से आपको कौन कौन से फायदे होते है, इस बारे में जानेंगे, तो आप जरूर दूध पीना शुरू कर देंगे, दूध सभी प्रकार के खनिज से भरपूर होता है, फिर चाहे वो कैल्शियम हो, प्रोटीन हो, या फिर विटामिन, और दूध का सेवन करने से ये सभी खनिज आपके शरीर में विद्यमान होते है, जिसके कारण आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, जैसे की ये बच्चों के साथ बड़ो की हड्डियों के विकास में मदद करता है, आपके दांतो की सुरक्षा करता है, आपके हदय को सुरक्षित रखता है, आपको एक बेहतर नींद लेने में मदद करता है, आदि।

यदि आपको प्लेन दूध पसंद नहीं है, तो आप दूध को अलग अलग तरह से इस्तेमाल करके उसके स्वाद को बदल कर उसका सेवन कर सकते है, जैसे की मैंगो शेक बनाकर, इलायची वाला दूध बनाकर, बादाम का इस्तेमाल करके, खीर बनाकर, कस्टर्ड बनाकर आदि, इसके साथ आप दूध के फायदे लेने के लिए दूध से बने उत्पादों का भी सेवन कर सकते है, जैसे की छाछ, दही, पनीर आदि का, इसके कारण आपको दूध जैसे ही लाभ मिलते है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की आपको दूध पीने से कौन कौन से फायदे होते है, और आपको इसे क्यों पीना चाहिए।

दमकती त्वचा पाने में है फायदेमंद:-

दमकती और चमकदार त्वचा पाने के लिए क्या करें

दूध पोषक तत्वो से भरपूर होता है, और इसमें कुछ ऐसे पोषक तत्व भी पाएं जाते है, जो आपको त्वचा को दमकता हुआ बनाने में आपकी मदद करते है, जैसे की दूध में पाया जाने वाला लैक्टिक एसिड आपकी त्वचा को कोमल और मुलायम रखने में मदद करता है, साथ ही इसमें कुछ ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते है, जो प्रदूषण के कारण होने वाले दुष्प्रभाव से आपकी त्वचा को बचाने में मदद करते है, पीने के साथ कच्चे दूध को यदि आप अपनी त्वचा पर लगाते है, तो भी ये आपकी त्वचा को कोमल और मुलायम बनाते है।।

हड्डियों को बनाता है मजबूत:-

दूध में कैल्शियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आपकी हड्डियों और आपके स्वास्थ्य के विकास के लिए जरूरी होता है, रोजाना नियमित रूप से एक गिलास दूध पीने से ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका कम हो जाती है, और साथ ही छोटे बच्चों को दूध का सेवन जरूर करवाना चाहिए क्योंकि इसके सेवन से उनकी हड्डियों का विकास होने में मदद मिलती है, और हड्डिया मजबूत भी बनती है।

दांतों को मजबूती देता है:-

दूध का सेवन करने से आपके दांतों को भी मजबूती मिलती है, कैल्शियम और फोस्फोरस दांतों को स्वस्थ रखने के लिए बहुत अच्छा होता है, और साथ ही दूध में कैसीन भी दांतों के लिए बहुत अच्छा होता है, क्योंकि ये दांतों के इनेमल पर एक पतली परत बना लेता है, जिसके कारण आपके दांतों और मसूड़ो को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने में मदद करता है:-

दूध का सेवन करने से आपके शरीर में प्रोटीन की मात्रा की पूर्ति होती है, जिसके कारण मांसपेशियों को उर्जा मिलती है, और साथ ही दूध के सेवन से कोशिकाओ में होने वाली टूट फुट की मरम्मत के लिए ये आपको उर्जा भी देता है, और साथ ही इसके कारण वर्क आउट के बाद शरीर में आने वाली कमी को पूरा करने में भी आपकी मदद करता है, इसीलिए व्यायाम करने के बाद एक गिलास दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

तनाव को कम करने में मदद करता है:-

यदि आप रात को सोते समय एक ग्लास गुनगुने दूध का सेवन करते है, तो इसके कारण आपकी मासपेशियों और नसों को आराम महसूस होता है, जिसके कारण आप मानसिक रूप से भी आराम महसूस करते है, और आपको नींद अच्छी आने में भी मदद मिलती है, और सुबह उठ कर आप फ्रेश भी महसूस करते है।

घाव भरने में मदद करता है:-

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अब आप ये सोच रहे होंगे की दूध पीने से घाव कैसे भर जाता है, इसके लिए यदि आपको कोई चोट लगी है, तो उसके घाव को भरने के लिए यदि आप नियमित रूप से हल्दी वाले दूध का सेवन करते है, तो आपके घाव को भरने में मदद मिलती है, और साथ ही इन्फेक्शन होने का भी खतरा नहीं रहता है, क्योंकि दूध तो लाभकारी है, और हल्दी में भी एंटीसेप्टिक के गुण पाएं जाते है।

शरीर का विकास में मदद करता है:-

दूध पीने से आपके शरीर में सभी खनिज भरपूर मात्रा में विद्यमान होते है, जिसके कारण आपके शरीर के विकास अच्छे से होने में मदद मिलती है, खास कर बच्चे को दूध जरूर देना चाहिए, क्योंकि इसका सेवन करने से उसके शरीर में हड्डियों का विकास आछे से होता है, और साथ ही उसके मस्तिष्क को भी तेजी से काम करने में मदद मिलती है।

आपके शरीर को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है:-

यदि आप रोजाना नियमित रूप से दूध का सेवन करती है, तो इसके कारण आपके शरीर को और आपकी त्वचा को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है, यदि आप वर्क आउट करते है, तो इसके सेवन से आपके शरीर को को वर्क आउट के बाद होने वाली कमजोरी का अहसास नहीं होता है, और शरीर को पोषण भी मिलता है।

अनिंद्रा की समस्या को दूर करता है:-

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अध्यन में ये बात सामने आई है की यदि आप रोजाना नियमित रूप से रात को सोने से पहले दूध का सेवन करते है, तो इसके कारण आपके शरीर की मांसपेशियों को राहत मिलती है, जिसके कारण आपको रात के समय एक बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको सुबह उठकर फ्रेश महसूस होता है।

गले की खराश से राहत दिलाता है:-

यदि आपको गले में खराश जैसी समस्या है तो आप गरम दूध में थोड़ा सा काली मिर्च का पाउडर डाल कर उसका सेवन करें, ऐसा करने से आपको गले की खराश को खत्म करने में मदद मिलती है।

कब्ज़ से राहत मिलती है:-

कब्ज़ से राहत पाने के लिए भी गरम दूध का सेवन करने से आपको बहुत से फायदे होते है, इसके लिए आप गरम दूध को दवा के तौर पर भी ले सकते है, इसके कारण आपके पाचन तंत्र को भी मजबूत होने में मदद मिलती है, और आप चाहे तो छाछ का सेवन भी कर सकते है, छाछ का सेवन करने से आपको इस समस्या से राहत मिलती है, और आपका पाचन तंत्र मजबूत होता है।

दूध का सेवन करने से बढ़ती है आँखों की रौशनी:-

यदि आप दूध का नियमित रूप से सेवन करते है, तो ऐसा करने से आपको अपनी आँखों की रौशनी को बढ़ाने माँ मदद मिलती है, क्योंकि दूध में विटामिन ए और बी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण आपकी आँखों की रौशनी को बढ़ने में मदद मिलती है, इसीलिए बच्चों को तो प्रतिदिन दूध का सेवन जरूर करवाना चाहिए।

दूध पीने से होने वाले अन्य फायदे:-

  • दूध में कैल्शियम, पोटेशियम और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है, जो आपके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
  • यदि आप नियमित रूप से दूध पीते है तो इससे स्ट्रोक की आशंका कम हो जाती है।
  • स्टडीज़ के अनुसार दूध के सेवन से कार्डियो वैस्कुलर बीमारियों का खतरा कम रहता है।
  • दूध में विटामिन ए और बी मौजूद होता है, जो आपकी आँखों की रौशनी को बेहतर करने में मदद करता है।
  • रोजाना दूध पीने से कई प्रकार के कैंसर का खतरा भी कम होता है।
  • दूध में विटामिन बी12 होता है जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को भी मजबूत रखने में मदद करता है।
  • रोजाना नियमित रूप से रात को गरम दूध पीने से अनिंद्रा की समस्या दूर होती है, और आपको बेहतर नींद आती है।
  • दूध का नियमित सेवन करने से आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, क्योकि इसके सेवन से आपके शरीर में खनिज भरपूर होते है।

तो ये है कुछ फायदे जो आपको दूध पीने से मिलते है, इसके साथ कई लोगो को दूध पीने पसंद नहीं होता है, ऐसे में उन्हें दूध से बने उत्पादों का सेवन करने से भी फायदे होते है, जैसे की दूध से ज्यादा दही में प्रोटीन और कैल्शियम होता है, और इसमें विटामिन सी और आयरन जैसे पोषक तत्व भी होते है, साथ ही छाछ में भी सूक्ष्म जीव होते है, जो हमारी आंतों को सक्रिय रखते है, साथ ही जिन्हें पाचन तंत्र से जुडी परेशानी होती है, उन्हें दूध की जगह छाछ का ही सेवन करना चाहिए, पनीर का सेवन करने से भी आपको फायदा होता है, इसीलिए हर व्यक्ति को दूध तो पीना चाहिए यदि नहीं तो दूध से बने आहार का सेवन जरूर करना चाहिए।

गर्भावस्था में पूजा पाठ करने के फायदे

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धर्म ग्रंथो में सभी रिश्तों के बारे में बताया गया है लेकिन उसमे सबसे अनोखा, प्यारा, और मजबूत रिश्ता माँ और उसके बच्चे का होता है। क्योंकि एक माँ अपने खून से सींच कर एक नन्ही जान को इस दुनिया में लाती है। और शिशु भी सबसे पहले केवल अपनी माँ के अहसास को ही महसूस करता है। और माँ जो भी करती है, जो भी खाती है, जो भी सुनती है गर्भ में शिशु भी उसे महसूस करता है। ऐसे में महिला को शिशु की बेहतर परवरिश के लिए और प्रेगनेंसी के दौरान अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए पूजा करना चाहिए, क्योंकि पूजा पाठ से मन को शांति मिलती है, जो की गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरुरी होती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी में पूजा पाठ करने से और भी फायदे मिलते हैं, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो फायदे कौन से हैं।

तनाव से राहत मिलती है

प्रेगनेंसी के दौरान तनाव गर्भपात का कारण बनने के साथ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी का कारण हो सकता है। लेकिन यदि आप पूजा पाठ करती है तो इससे आपको मानसिक रूप से फ्रेश महसूस होता है बुरे विचार आपके मन में नहीं आते हैं। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान तनाव से बचने में आपको मदद मिलती है और आप स्वस्थ रहती है जिससे शिशु को भी स्वस्थ रहने में फायदा होता है।

मूड अच्छा रहता है

चिड़चिड़ापन होना, गुस्सा आना, प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है और इसका कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं। लेकिन यदि आप पूजा पाठ करती है तो इससे आपको गुस्सा, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है, और आपका मूड अच्छा रहता है जिससे आपको प्रेगनेंसी के दौरान ख़ुशी के साथ गर्भ में शिशु के साथ होने वाले हर अनुभव का आनंद लेने में मदद मिलती है।

स्वास्थ्य बेहतर रहता है

यदि आप पूजा पाठ करते हैं तो आपका हर काम में मन लगता है, जिससे आपको प्रेगनेंसी के दौरान अपनी बेहतर तरीके से केयर करने में मदद मिलती है। और आप अपने खान पान और अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखते हैं जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों से बचाव में भी मदद मिलती है।

मन शांत रहता है

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी बातें मन में चलती रहती है, जैसे की गर्भावस्था में होने वाली समस्याओं से जुडी, शिशु के विकास से सम्बंधित आदि, जिसके कारण महिला अपना अच्छे से ख्याल नहीं रख पाती है। और यदि महिला थोड़ी देर अपना ध्यान पूजा पाठ में लगाती है तो इससे उसके मन को शांति मिलती है, और मन में चल रहे सवालों से राहत भी मिलती है। और मन शांत होता है तो इससे महिला और शिशु दोनों ही स्वस्थ रहते हैं।

शिशु का बेहतर होता है विकास

अभिमन्यु के बारे में आपने सुना होगा की गर्भ से ही उसमे अपनी माँ से शिक्षा लेना आरम्भ कर दिया था। उसी तरह आपका शिशु भी गर्भ में आपके द्वारा की गई बातों को सुनता है, ऐसे में आपके पूजा पाठ करने से गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास को बढ़ाने और उसके दिमाग को तेज करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास फायदे जो गर्भवती महिला को पूजा पाठ करने से मिलते है, और यह फायदे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों का समाधान करने में मदद करते हैं। इसीलिए यदि आप भी प्रेग्नेंट है तो थोड़ी देर आपको भी पूजा पाठ करना चाहिए।

कोरोना वायरस क्या है?

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आजकल हम सभी समाचारो और न्यूज़ में कोरोना वायरस के बारे में सुन रहे है। हम सभी जानते है के चीन से ही यह वायरस शुरू हुआ और वहीं पर सबसे ज्यादा फ़ैल चूका है। और अब धीरे धीरे कोरोना वायरस और भी देशो में फैलता जा रहा है। भारत में भी इस वायरस के रोगी पाया जा चूका है।

कोरोना वायरस से निपटने के लिए पहले हमे इसके बारे में जानना होगा। तभी हम इस वायरस की रोकथाम के लिए कुछ कर सकते है।

कोरोना वायरस क्या है ?

वायरस की बड़ी फॅमिली में से निकला हुआ यह वायरस COV या कोरोना वायरस के नाम से जाना जाता है। कोरोना वायरस पशु जन्य वायरस है मतलब की यह वायरस पशुओं में से निकल कर आया है। चीन के वुहान में सबसे पहले इस वायरस के संक्रमण का रोगी दिसंबर 2019 में पाया गया। देखते ही देखते यह वायरस पुरे चीन में फ़ैल गया। और अब बाकी देशो में भी तेजी फ़ैल रहा है।

आपको ये जान कर हैरानी होगी की कोरोना वायरस बहुत ही सूक्ष्म वायरस है। यह इंसान के एक बाल की तुलना में 900 गुना छोटा है। इतना छोटा होने के बावजूद यह वायरस बहुत ही प्रभावी है। इतना प्रभावी की इस वायरस से अब तक अकेले चीन में 3000 से ज्यादा लोग मर चुके है।

कोरोना वायरस के लक्षण :

  • इस वायरस की शुरुआत हल्के जुकाम और खासी सी होती है।
  • धीरे धीरे बुखार, गले में ख़राश जैसी समस्याएं होने लगती है।
  • बहुत ज्यादा खराब स्थिति में सांस लेने में तकलीफ और रेस्पिरेटरी प्रोब्लेम्स होने लगती है।
  • अंत में किडनी फेलियर और मृत्यु तक हो रही है इस वायरस से।
  • कुछ लोगो में इनमे से कोई भी लक्षण नहीं दिखता बस उन्हें हल्की हल्की थकान महसूस होती है।
  • कोरोना वायरस बहुत तेजी से एक दूसरे से बहुत जल्दी फैलता है।

कोरोना वायरस से बचने के उपाय :

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अभी इस वायरस की कोई भी vaccination नहीं बनी है।
  • इससे बचने के लिए दिन में 5 -6 बार हाथ धोइये।
  • कच्चे फल और सब्जियों का सेवन ना करें।
  • सभी भोजन को अच्छे से पका कर खाये।
  • अन्य लोगों से 3 फ़ीट की दुरी बनाकर रखें।
  • हाथो के लिए अल्कोहल बेस्ड हैंड रब का इस्तेमाल करें।
  • जानवरो के संपर्क में आने से बचे।
  • अंडे और मांस के सेवन से परहेज करें।
  • आखों और नाक को चुने से पहले हैंड रब का इस्तेमाल जरूर करें।

कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते हुए केस देखकर WHO ने इंटरनेशनल आपातकाल घोषित कर दिया है। इस वायरस की स्थिति देखते हुए इससे बचने के सभी उपाय अपनाये। रोगी की स्थिति खराब होते ही हॉस्पिटल लेकर जाए।

बच्चों के दाँतों को सड़न से बचाने के उपाय

बच्चों की प्यारी-सी मुस्कुराहट सबका मन मोह लेती है। हर एक माता-पिता बस यही चाहते हैं कि उनका बच्चा हमेशा हँसता मुस्कुराता रहे। ख़ूबसूरत मुस्कुराहट में सुंदर और स्वस्थ दाँतों का बहुत बड़ा योगदान होता है। अगर दाँत स्वस्थ ना हों, उनमें सड़न हो तो आपकी मुस्कान अधूरी है। यूँ तो दाँत हमारे शरीर का सबसे मज़बूत भाग हैं परंतु ध्यान ना रखा जाए तो इनमें भी सड़न और कैविटी हो जाती है।
आपने भी कभी ना कभी दाँत का दर्द महसूस किया ही होगा, ये दर्द सच में असहनीय होता है। ज़रा सोचिए, आपका बच्चा दाँत के दर्द से परेशान हो, तड़प रहा हो तो आप क्या करेंगे। हमें पता है कि ये ख़्याल भी माता-पिता के लिए अकल्पनीय और असहनीय होता है। आपको ऐसी परिस्थिति का सामना ना करना पड़े, उसके लिए आपको अपने बच्चे के दाँतों के स्वास्थ्य के प्रति तभी से सजग हो चाहिए, जब उसके दूध के दाँत यानि temporary teeth आने शुरू होते हैं। बच्चे को शुरुआत से दाँतों के विशेष सफ़ाई रखने के लिए प्रोत्साहित करें।

दाँतों की सड़न एक बहुत ही आम समस्या है और थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता से हम इस समस्या से दूर रह सकते हैं। आपने सुना ही होगा कि ” prevention is better than cure “, इसलिए समस्या के उपाय जानने से पहले हम जानेंगे कि दाँतों में सड़न के कारण क्या होते हैं। अगर हमें सड़न के कारण पता होंगे तो हम उनसे बचने के उपाय भी सोच सकेंगे। निम्नलिखित तीन कारणों से दाँतों में मुख्यतः सड़न पैदा होती है –

खानपान –

जिन खाद्य पदार्थों में शुगर और कार्बोहाईड्रेट की मात्रा अधिक होती है, उनको खाने से दाँतों में सड़न होने का अधिक ख़तरा रहता है। ऐसे पदार्थ चिपचिपे होते हैं और खाना खाने के बाद भी दाँतो में चिपके रह जाते हैं। यही दाँतों में फँसा हुआ खाना, फिर दाँतों में सड़न पैदा करता है। और छोटे बच्चों को तो ख़ासकर मीठी चीज़ों से ख़ास लगाव होता है, ऐसे में ये आपका फ़र्ज़ है कि आप उसे सही ग़लत में फ़र्क़ समझाएँ। बच्चे को बताएँ कि मीठा खाना उनके दाँतों के लिए कितना नुक़सानदायक हो सकता है।
दाँतों की सफ़ाई – दाँतों की ठीक से सफ़ाई ना करना, बैठे बिठाए सड़न को न्योता देने जैसा है। खाना खाते वक़्त भोजन के कुछ कण दाँतों में फँस जाते हैं और उन्हें ब्रश करके निकाला ना जाए तो वो दाँतों में सड़न पैदा करते हैं। बचपन से ही दिन में दो बार ब्रश करने की आदत बच्चे में डालें।

मुँह में मौजूद बैक्टिरिया –

ब्रश करके दाँतों में फँसा भोजन तो हम निकाल देते हैं परंतु मुँह में मौजूद बैक्टिरिया इतनी आसानी से नहीं निकलते। ब्रश करने के बाद किसी अच्छे माउथवाश का प्रयोग करना चाहिए। परंतु छोटे बच्चों को माउथवाश ना करवाएँ या फिर अपनी निगरानी में करवाएँ, बच्चा ग़लती से उसे निगल भी सकता है। बैक्टिरिया मुँह में ना पनपे, उसके लिए हर बार खाना खिलाने के बाद बच्चे को कुल्ली ज़रूर करवाएँ और रात को सोते वक़्त ब्रश करने को ज़रूर कहें।
बच्चों में अच्छी आदतें डालना, माता-पिता का ही फ़र्ज़ होता है।

क्या घी खाने से डिलीवरी आसान होती है?

प्रेगनेंसी में घी

घी पोषक तत्वों से भरपूर होता है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इसका सेवन करना चाहिए या नहीं इसे लेकर गर्भवती महिला के मन में सवाल आ सकता है। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने से जुडी कुछ बातें बताने जा रहे हैं जिससे आपको यह जानने में आसानी होगी की प्रेगनेंसी में घी का सेवन करना चाहिए या नहीं। गर्भावस्था के समय यदि महिला कमजोर है या महिला का वजन कम है तो महिला को घी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि घी में मौजूद पोषक तत्व महिला को फिट रखने और वजन बढ़ाने में मदद करते हैं साथ ही इससे गर्भ में शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। यदि प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही या दूसरी तिमाही में अल्ट्रासॉउन्ड में दौरान आपको यह पता चलता है की शिशु का वजन सामान्य से कम है।

तो भी गर्भवती महिला को अपनी डाइट में घी का सेवन करना चाहिए, क्योंकि घी का सेवन करने से शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला का वजन पहले से ही अधिक है तो गर्भवती महिला को घी का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि घी में वसा की मात्रा अधिक होती है ऐसे में महिला का वजन और अधिक बढ़ सकता है, और प्रेग्नेंट महिला का जरुरत से ज्यादा वजन होना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी खतरा बन सकता है। इसके अलावा यदि शिशु का वजन गर्भ में सही है लेकिन फिर भी आप बहुत ज्यादा मात्रा में घी का सेवन कर रही है तो शिशु का वजन भी जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है जिसके कारण शिशु को गर्भ में परेशानी का अनुभव हो सकता है। साथ ही यदि महिला को उल्टी, जी मिचलाने जैसी समस्या अधिक रहती है तो भी गर्भवती महिला को घी के सेवन से परहेज करना चाहिए।

क्या घी खाने से डिलीवरी में कम परेशानी होती है?

प्रेगनेंसी के समय घी खाने से गर्भवती महिला और शिशु को फायदा मिलता है यह तो बिल्कुल सच है। और पुराने समय से ही प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में महिला को भरपूर घी का सेवन करने की सलाह दी जाती थी क्योंकि बुर्जुग महिलाओं का ऐसा मानना था की यदि प्रसूति को घी खिलाया जाये तो इससे नोर्मल डिलीवरी होने में मदद मिलती है। साथ ही डिलीवरी के दौरान होने वाली पीड़ा को भी कम करने में मदद मिलती है क्योंकि घी का सेवन करने से गर्भाशय की सतह में चिकनाहट बढ़ती है जिससे महिला को डिलीवरी के दौरान कम परेशानी का सामना करना पड़ता है। और यह नुस्खा आज तक इस्तेमाल किया जाता है और कई केस में इसका सफल असर भी देखने को मिलता है।

लेकिन किसी तरह की रिसर्च में यह बात पूरी तरह साफ़ नहीं की गई है। ऐसे में घी का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। क्योंकि गर्भवती महिला जितनी स्वस्थ रहेगी उतना ही शिशु का विकास अच्छे से होगा और साथ ही डिलीवरी के समय आने वाली परेशानियों को भी कम करने में मदद मिलेगी। लेकिन घी का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से घी का सेवन कितना और कब करना चाहिए या गर्भवती महिला को वजन के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे में जरूर पूछना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को घी का सेवन करने से भरपूर फायदा मिल सके।

प्रेग्नेंट महिला घी का सेवन कैसे करें

गर्भवती महिला को यदि घी का सेवन करती है तो खाने में घी का इस्तेमाल किस तरह से किया जा सकता है इस बारे में भी गर्भवती महिला को अच्छे से पता होना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को घी का सेवन किस तरह से करना चाहिए।

  • रोटी के ऊपर घी लगाकर गर्भवती महिला इसका सेवन कर सकती है।
  • दाल या सब्ज़ी के ऊपर एक चम्मच घी डालकर घी का सेवन किया जा सकता है।
  • चावल, खिचड़ी, दलिया आदि के ऊपर एक या दो चम्मच घी डालकर घी का सेवन किया जा सकता है।
  • एक कप दूध में घी डालकर भी घी का सेवन किया जा सकता है ।
  • लड्डू को घी डालकर बनाने के बाद भी घी का सेवन किया जा सकता है।

प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने के फायदे

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला सिमित मात्रा में घी का सेवन कर सकती है, और यदि महिला जरुरत के अनुसार घी का सेवन करती है। तो घी का सेवन करने से गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी फायदा मिलता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।
  • घी में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होती है ऐसे में घी का सेवन करने से गर्भवती महिला को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद मिलती है।
  • घी का सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है जिससे महिला को कब्ज़ जैसी समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान निजात पाने में मदद मिलती है।
  • गर्भवती महिला को कमजोरी,थकान, कम वजन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में घी का सेवन करने से गर्भवती महिला को डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानी को कम करने के साथ शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।
  • तनाव जैसी परेशानी से निजात मिलता है और साथ ही मूड को खुश रखने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स ऐसे में गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन सिमित मात्रा में कर सकती है। लेकिन महिला को अपने वजन का ध्यान जरूर रखना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिला को मार्किट में लिए घी की जगह घर में बने घी का सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में खुश रहने के फायदे

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गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए कठिन होने के साथ बहुत ही खूबसूरत लम्हा होता है। लेकिन बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण, शारीरिक परेशानियों के कारण खुश रहना और हमेशा सकारात्मकता बनाएं रखना थोड़ा मुश्किल होता है। परन्तु गर्भ में पल रहे शिशु के लिए महिला का खुश रहना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि न केवल यह शिशु के विकास के लिए बेहतर होता है, बल्कि ऐसा करने से महिला को भी प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में खुश रहने से क्या फायदे मिलते हैं, और आप गर्भावस्था में खुश रहने के लिए क्या क्या कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी में खुश रहने के फायदे

किसी भी महिला के लिए जिंदगी का सबसे सुखद अहसास प्रेगनेंसी होता है क्योंकि इस दौरान उसके गर्भ में पल रही जान महिला को दुनिया के सबसे बेहतरीन अनुभव करवाती है, जिसे की और कोई महसूस नहीं कर सकता है। इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी के समय खुश रहने की सलाह दी जाती है, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने से क्या फायदे मिलते हैं आइये जानते हैं।

तनाव होता है कम

तनाव प्रेगनेंसी के दौरान न केवल महिला के लिए समस्या का कारण बनता है बल्कि इसके कारण महिला को गर्भपात व् शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी की समस्या हो सकती है। लेकिन यदि गर्भावस्था के दौरान आप खुश रहती है तो ऐसा करने से आपको इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

दिनचर्या होती है बेहतर

खुश रहना किसी भी व्यक्ति के लिए दवाई का काम करता है, इससे शरीर की सभी क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है, क्योंकि खुश रहने से आपका दिमाग शांत होता है। जिसके कारण आपको अपना हर काम समय पर करने में मदद मिलती है और आपकी दिनचर्या भी सही रहती है और आपका स्वास्थ्य बेहतर रहता है जो की गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने में मदद करता है।

स्वास्थ्य रूप से रहती है फिट

प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा व्यायाम करना मना होता है लेकिन इस दौरान खुश रहना आपके लिए व्यायाम का काम करते है। जिस तरह व्यायाम करने से आपको फिट रहने में मदद मिलती है उसी तरह प्रेगनेंसी के दौरान आपके खुश रहने से आपके स्वास्थ्य को बेहतर रहने और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

शिशु का होता है बेहतर विकास

गर्भावस्था के दौरान शिशु गर्भनाल के माध्यम से महिला से जुड़ा होता है, ऐसे में शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है। और यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहती है तो इससे महिला स्वस्थ रहती है और अपनी बेहतर केयर करती है जिससे शिशु के विकास को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने के कुछ खास टिप्स

  • खान पान रखे बेहतर, प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी को फिट रहने के लिए बेहतर खान की जरुरत होती है, यदि आप फिट रहते हैं तो इससे आपको खुश रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखें, अपनी फ़िक्र करें, अपनी पसंद का काम करें, अपने आप को समय दें, इससे भी आपको खुश रहने में मदद मिलती है।
  • बॉडी में होने वाले बदलाव, प्रेगनेंसी में होने वाले हर नए अनुभव, अपनी फोटो आदि को डायरी या फोटो एल्बम में संजोये। इससे आपको ख़ुशी भी मिलती है, और जीवनभर के लिए यह यादें आपके साथ रहती है।
  • प्रेगनेंसी के समय होने वाले हर अनुभव को शेयर करें, अपनी परेशानी शेयर करें इससे आपको ख़ुशी मिलेगी।
  • थोड़ी देर योगासन या मैडिटेशन करें इससे आपके दिमाग को शांत रहने में मदद मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आप खुश रहते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खुश रहने से मिलते हैं, और आप इन टिप्स का इस्तेमाल करके प्रेगनेंसी के समय खुश भी रह सकती हैं। इसके अलावा यदि आपको कोई भी शारीरिक समस्या हो तो उसे इग्नोर नहीं करना चाहिए और उसके लिए अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए, ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली हर परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

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गर्भावस्था में खुश रहने के फायदे, प्रेग्नेंसी में खुश रहना कितना जरुरी है?