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सुंदर पलकें कैसे बनाएं?

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पलकों को सुंदर बनाने की टिप्स

आँखों को सुंदर बनाने में पलकें बहुत अहम भूमिका निभाती हैं। यह ना केवल आपके चेहरे को उभरती हैं बल्कि आपकी पर्सनालिटी को भी बेहतर बनाती हैं। आमतौर पर महिलाएं आँखों की खूबसूरती के लिए प्रयास करती रहती हैं। लेकिन बहुत ही कम पलकों के बारे में सोचती हैं। जबकि पलके ही आँखों की खूबसूरती में चार चाँद लगाती हैं।

आज हम आपको पलकों को सुंदर, घना और आकर्षक बनाने के कुछ उपाय बता रहे हैं। जिनकी मदद से आप अपनी हलकी पलकों को भी हैवी और सुंदर बना सकती हैं।

पलकों के हल्के या कमजोर होने के कारण

अगर आपकी पलके भी कमजोर, हल्की या पतली हैं तो हो सकता है ये सब कारण उसकी वजह हो।

  • अनुवांशिकता
  • बढ़ती उम्र
  • मेडिकल कारण
  • शरीर में पोषक तत्वों की कमी
  • गलत खान-पान
  • नेत्र में किसी तरह का कोई संक्रमण
  • शरीर में हार्मोनल बदलाव
  • अधिक कॉस्मेटिक का इस्तेमाल करना
  • लोकल कॉस्मेटिक का प्रयोग भी हल्की या कमजोर पलकों का कारण हो सकता है।

पलकों को लंबा, घना और सुंदर बनाने के उपाय

वैसे तो आजकल फेक लैशेज का बहुत चलन है। जिसे देखो वही फेक लैशेज लगाए रहती हैं। लेकिन कहीं न कहीं फेक लैशेज का प्रयोग भी कमजोर पलकों का एक कारण हैं। कुछ समय पहले तक केवल ब्राइडल के लिए ही फेक लैशेज का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अब पार्टी में जाना हो या शादी के फंक्शन में हर कोई पलकों को सुंदर दिखने के लिए फेक लैशेज को चुनता है। जो ठीक नहीं, क्यूंकि इन्हे लगाने के लिए विशेष प्रकार के ग्लू का इस्तेमाल किया जाता है। जो प्राकृतिक पलकों की जड़ों को कमजोर करने का काम करता है। यहाँ हम कुछ प्राकृतिक उपाय बता रहे हैं जिनका प्रयोग करके पलकों को प्राकृतिक रूप से लंबा, घना और सुंदर बनाया जा सकता है।

उपाय 1 : कैस्टर आयल

कैस्टर आयल बालों की जड़ों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह जड़ों को पोषण देकर उन्हें बढ़ाने में मदद करता है। इसके प्रयोग से केवल पलकों के बाल ही नहीं बल्कि सिर के बाल भी लंबे किये जा सकते है। इसके लिए रुई की मदद से तेल को अपनी पलकों पर लगाएं। और रातभर लगे रहने दें।


उपाय 2 : जैतून और अरंडी का तेल

बालों के लिए ये दोनों ही तेल बहुत फायदेमंद होते हैं। इन दोनों को मिलाकर इस्तेमाल करने से पलकों को दुगना फायदा मिलता है। इसके लिए जैतून और अरंडी के तेल को बराबर मात्रा में मिला लें। रोज रात को सोने से पहले इस तेल का इस्तेमाल अपनी पलकों पर करें। और सुबह चेहरा धो लें।


उपाय 3 : पेट्रोलियम जेली

यह पलकों के बालों को स्मूथ करके उन्हें बढ़ाने में मदद करती है। प्रयोग के लिए पेट्रोलियम जेली को अपनी पलकों पर ध्यान से लगाएं। और रातभर ऐसे ही रहने दें। कुछ ही इस्तेमाल से पलके घनी होने लगेंगी।


उपाय 4 : नींबू का छिलका

इस उपाय के इस्तेमाल के लिए नींबू के छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। अब इन्हे अरंडी या जैतून के तेल में से किसी एक में तीन दिन के लिए रख दें। उसके बाद रोजाना रात को सोने से पहले इस तेल को अपनी पलकों पर लगाएं।


उपाय 5 : ग्रीन टी

इसके लिए ग्रीन टी की पत्तियों को पानी में मिला लें और कुछ मिनट के लिए उबालने के लिए रख दें। जब पानी ठंडा हो जाए तो उसे रुई की मदद से अपनी पलकों पर रात के समय लगाएं। और पूरी रात लगे रहने दें। बचा हुआ पानी किसी डिब्बी में रख दें। और इसका इस्तेमाल करते रहें।


उपाय 6 : शिया बटर

पलकों को सुंदर बनाने के लिए सबसे पहले शिया बटर की कुछ मात्रा अपनी ऊँगली पर लें और दूसरी ऊँगली पर भी रगड़ लें। अब उँगलियों से उसे पलकों पर लगाएं। ऐसा रात में सोने से पहले करें और रातभर लगे रहने दें। शिया बटर आपको किसी भी ऑनलाइन स्टोर पर मिल जाएगा।


उपाय 7 :  विटामिन ई

इसके लिए आप विटामिन ई कैप्सूल का प्रयोग कर सकते हैं। प्रयोग के लिए विटामिन ई कैप्सूल को काटकर उसमे से तेल निकाल लें। अब इस तेल को अपनी पलकों पर लगाएं। तीन से चार घंटे तक ऐसे ही रहने दें। बेहतर होगा आप इसका प्रयोग रात के समय करें। इससे यह लंबे समय तक आपकी पलकों पर बना रहेगा।


उपाय 8 : एसेंशियल आयल

एसेंशियल आयल भी पलकों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इसके लिए आपको एक चम्मच अरंडी के तेल, 2 से 3 बूंद लैवेंडर आयल, 2 बूंद टी ट्री आयल और मस्कारे की एक खाली बोतल की आवश्यकता होगी। प्रयोग के लिए, सभी तेलों को मस्कारे की खाली बोतल में डाल लें। अब बोतल का ढक्कन बंद करके अच्छे से हिलाएं जिससे सभी तेल मिक्स हो जाएं। अब स्टिक से तेल लें और उसे पलकों पर लगाएं। इसका प्रयोग रात के समय करें और रातभर तेल को लगे रहने दें।


उपाय 9 : मसाज एंड ब्रशिंग

लंबी, सुंदर और आकर्षक पलकों के लिए रोजाना अपनी पलकों पर ब्रशिंग करें। इसके लिए आप बाजार से आई लैशेस ब्रश ले आएं और हल्के हाथों से पलकों पर ब्रश फेरें। ऐसा करने से भी आपकी पलके सुंदर होंगी। पलकों की मसाज भी उन्हें सुंदर बनाने में मदद करती है। इसके लिए किसी भी तेल से रोजाना रात को सोने से पहले अपनी पलकों की मसाज करें। पर ऐसा करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें की आपके हाथ बिलकुल साफ़ हो।


उपाय 10 : उचित आहार लें

बाल चाहे सिर के हो या पलकों के उन्हें लंबा, सुंदर और घना करने के लिए स्वस्थ और संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। इसके लिए आप विटामिन्स, मिनरल्स, आयरन, प्रोटीन, मैग्नेशियम और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन का सेवन करें। इसके लिए आप सेब, अमरुद, आम, पपीता, अंगूर, पालक, पत्ता गोभी, नट्स, बीन्स और स्प्राउट (अंकुरित अनाज) का सेवन कर सकती हैं। यह आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करेगा और पलकों के साथ-साथ सिर के बालों की ग्रोथ को भी बेहतर बनाएगा।

तो, ये कुछ उपाय हैं जिनका प्रयोग करके पलकों को सुंदर बनाया जा सकता है। अगर आप नियमित रूप से इन उपायों का इस्तेमाल करते हैं तो महीने भर में पलकें घनी, आकर्षक, लंबी और सुंदर हो जाएंगी।


काले होठों को गुलाबी करने का तरीका या उपाय

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लड़के हो या लड़कियाँ सभी को सुंदर दिखना बेहद पसंद होता है। और सुंदर दिखने के लिए हम सभी बहुत कुछ करते है कभी पार्लर जाते है और कभी महँगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी करते है। अपने चेहरे की भी अच्छे से देखरेख करते है परन्तु इन सभी में हम अपने होंठो को नजरअंदाज कर देते है या यु कहना सही होंगे की कभी हमारा ध्यान इन पर जाता ही नहीं।लड़कियां तो फिर भी लिपिस्टिक लगा कर उनकी सुंदरता बड़ा लेती है पर लड़के वह भी नहीं कर पाते है।

होठों के प्रति हमारा केयरलेस ऐटिटूड अक्सर उनके कालेपन को बढ़ा देता है। कई बार हमारे होठों के कालेपन को नशे करने के आदत से भी जोड़ दिया जाता है और इस कारण कई बार हमे सबके सामने शर्मिंदा होना पड़ता है।

होठों के कालेपन को दूर करने के उपाय

आइये जानते है कैसे घर बैठे ही हम अपने होठों को गुलाबी बना सकते है या उनका कालापन दूर कर सकते है।

बादाम का तेल :

  • बादाम का तेल होठों के कालेपन को दूर करने के काम आता है।
  • इसका क्लेरोसैंट गुण त्वचा के कालेपन को दूर करता है।
  • रोजाना रात को सोने से पहले होठों की बादाम तेल से मालिश करें।
  • रातभर के लिए बादाम तेल लगा ही रहने दे।

हल्दी पाउडर और दूध :

  • हमारे होठों पर कई बार डेड स्किन की परत जम जाती है, उसके कारण भी होंठ काले दिखते है।
  • होठों के डेड स्किन के निकलने के लिए इन्हे स्क्रब करना जरुरी है।
  • पर होठों पर हम फेस स्क्रब नहीं इस्तेमाल कर सकते।
  • हल्दी पाउडर तो दूध को मिलाकर अपने होठों पर स्क्रब करें।
  • यह एक प्राकृतिक स्क्रब है जो आपके होंठो को नुक्सान भी नहीं देगा।
  • यह स्क्रूप होंठो की डेड स्किन निकाल कर उन्हें गुलाबी बना देगा।

ग्लिसरीन :

  • रोजाना रात को सोने से पहले ग्लिसरीन होठों पर लगा कर सोये।
  • ग्लिसरीन होठों की पिगमेंटेशन खत्म करके उन्हें मॉइस्चराइज़ करती है।
  • इस उपाय से हमारे होठों का कालापन धीरे धीरे खत्म होने लगता है।

चुकुंदर :

  • एक छोटा टुकड़ा चुकुंदर का लें।
  • उससे होठों की 5 मिंट तक मसाज करें।
  • यह उपाय एक हफ्ते में 2-3 बार दोहराये।
  • इस उपाय से आपके होंठ जल्द ही पिंक हो जायेंगे।

खीरा :

  • यदि आपके होंठ गर्मियों की धुप के कारण काले पड़े है।
  • तब आप खीरे के टुकड़े से अपने होठों की मसाज करें।
  • खीरा आपके होठों का कालापन दूर करेगा।

निम्बू शहद :

  • निम्बू और शहद को बराबर मात्रा में मिला ले।
  • अब उंगलियों से अपने डार्क लिप्स पर लगाए।
  • 20 मिंट तक लगाकर रखे और फिर धो लें।
  • निम्बू में एसिडिक गुण होते है यह त्वचा के कालेपन को दूर करने में मदद करता है।
  • शहद के अंदर एंटीबायोटिक गुण होते है जो हमारे होंठो को पोषक तत्व प्रदान करते है।

एलोवेरा जेल :

  • एलोवेरा जेल में भी भरपूर पोषक तत्व पाए जाते है।
  • यह जेल हमारे त्वचा के लिए बहुत ही अच्छी होती है।
  • प्राकृतिक एलोवेरा जेल को अपने होठों पर लगाए और सूखने के लिए छोड़ दे।
  • सूखने के बाद पानी से धो लें।
  • यह उपाय रोजाना करें जब तक आपके होठों का रंग पिंक न हो जाये।

यह सभी उपाय आपके होठों के लिए एकदम सुरक्षित है। इनमे से कोई भी उपाय या तरीका अपनाकर आप अपने होठों के कालेपन को दूर कर सकते है। इसके अतिरिक्त सस्ती और केमिकल्स वाली लिपस्टिक और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को आपको छोड़ने से बेहद फायदा मिलेगा। अगर लिपस्टिक लगानी है तो अच्छी मॉइस्चराइज़र वाली इस्तेमाल करें।  

गोरा बच्चा पैदा हो इसके लिए यह खाएं

गर्भ में शिशु

हर गर्भवती महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहे शिशु का बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास हो, उनका शिशु तंदरुस्त, हष्ट पुष्ट, तेज दिमाग वाला, सूंदर, गोरे रंग वाला हो। जहां तक कहा जाता है की शिशु की शक्ल और रूप उसके माता पिता पर ही जाता है। लेकिन फिर भी प्रेगनेंसी के दौरान पुराने जमाने से ही गर्भवती महिला को घर के बड़े सलाह देते रहते थे की प्रेग्नेंट महिला को क्या करना चाहिए और क्या नहीं। जैसे की खाने को लेकर गर्भवती महिला को कौन सी चीजें खानी चाहिए जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है, और कौन सी चीजें शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है। वैसे ही शिशु की रंगत में निखार लाने के लिए भी कुछ आहार के बारे में बताया गया है जिनके सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत में निखार लाने में मदद मिलती है।

गर्भवती महिला को गोरा बच्चा पैदा करने के लिए यह चीजें खानी चाहिए

गोरे बच्चे की चाह हर किसी को होती है ऐसे में गर्भ में ही शिशु की रंगत में निखार लाने के लिए गर्भवती महिला को अपने आहार में कुछ खास चीजों को शामिल करना चाहिए। तो लीजिये आज हम ऐसे ही आहार के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु को गोरा करने में मदद मिलती है।

नारियल

बहुत से लोग अक्सर गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नारियल खाने, नारियल पानी पीने की सलाह देते हैं क्योंकि यह गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है। और साथ ऐसा भी माना जाता है की गर्भवती महिला यदि नारियल का सेवन करती है तो ऐसा करने से गोरा बच्चा पैदा करने में मदद मिलती है।

केसर वाला दूध

केसर वाले दूध का सेवन करने से न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। बल्कि ऐसा भी माना जाता है की केसर वाले दूध का सेवन करना से होने वाली संतान की रंगत निखरी हुई होती है।

संतरा

संतरा प्रेग्नेंट महिला के पेट से सम्बंधित समस्या से निजात पाने के साथ इम्युनिटी को बढ़ाने में भी फायदेमंद होता है। और बहुत सी बुजुर्ग महिलाएं गर्भ में पल रहा शिशु सूंदर व् गोरा हो इसके लिए प्रेगनेंसी में संतरा खाने की सलाह भी देती हैं।

देसी घी

देसी घी का सेवन प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में करने से शिशु को भरपूर पोषण मिलने के साथ डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में भी मदद मिलती है। साथ ही इसके कारण गर्भवती महिला को गोरे शिशु को जन्म देने में भी मदद मिलती है।

अंडा

प्रोटीन व् अन्य मिनरल्स से भरपूर अंडा प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की यदि गर्भवती महिला यदि अंडे के सफ़ेद हिस्से का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत को निखारने में मदद मिलती है।

आयरन युक्त आहार

जिन चीजों में आयरन की मात्रा भरपूर होती है जैसे की हरी सब्जियां, चुकंदर, गाजर, अनार आदि, ऐसी चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी नहीं होती है। जिससे शिशु के शरीर में भी खून का प्रवाह अच्छे से होता है और खून का प्रवाह अच्छे से होने के कारण शिशु की रंगत निखारने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को गोरे बच्चे को जन्म देने में मदद मिलती है।

काले अंगूर

गर्भवती महिला यदि काले अंगूर का सेवन करती है, तो इसके कारण भी गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत पर असर पड़ता है ऐसा माना जाता है, और जन्म के समय शिशु की रंगत निखरी होने की सम्भावना अधिक होती है।

बादाम

विटामिन इ, प्रोटीन व् अन्य मिनरल्स से भरपूर बादाम का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। बल्कि ऐसा करने से गोरा बच्चे की चाह रखने वाली माँ को गोरे शिशु को जन्म देने के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

सौंफ

ऐसा भी माना जाता है की गर्भवती महिला यदि सौंफ का पानी पीती है या सौंफ का सेवन करती है, तो इसके कारण भी गर्भवती महिला को गोरे बच्चे को जन्म देने में मदद मिलती है, लेकिन सौंफ के पानी की कितनी मात्रा उपयुक्त होती है इसके लिए आप चाहे तो एक बार अपने डॉक्टर से राय ले सकती है।

दूध

घर के बड़े अक्सर ऐसा कहते हैं की यदि दूध जैसा गोरा बच्चा चाहिए तो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को दूध का भरपूर सेवन करना चाहिए। जितना महिला दूध पीती है उतना ही गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत को निखारने में मदद मिलती है।

अनानास

ऐसा भी माना जाता है की गर्भवती महिला यदि हफ्ते में एक बार एक गिलास अनानास के जूस का सेवन करती है तो इससे भी गोरा बच्चा पैदा करने में मदद मिलती है। अवैसे तो पर्याप्त मात्रा में इसका सेवन गर्भवती महिला कर सकती है, लेकिन फिर भी इसका सेवन कब और कैसे करना चाहिए इसके लिए गर्भवती महिला को एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत को निखारने में मदद मिलती है, और आपका होना वाला शिशु गोरा व् सूंदर पैदा होता है। अब यह कितने सच इस बारे में पूरी तरह से नहीं तो कहा जा सकता है, लेकिन इन सब चीजों का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में आपको जरूर मदद मिलेगी।

आ गया दही का दिन जानिए प्रेगनेंसी में खाने के फायदे

प्रेगनेंसी में दूध का सेवन करने की सलाह तो सभी देते हैं लेकिन दूध पीने के साथ प्रेग्नेंट महिला को रोजाना कम से कम एक कटोरी दही का सेवन भी जरूर करना चाहिए। लेकिन दही को रात में खाने से बचना चाहिए, और सुबह नाश्ते में या दोपहर के खाने में दही का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि दही में फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन इ, गुड़ बैक्टेरिया आदि मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में दही खाने के क्या फायदे होते हैं।

प्रोटीन से भरपूर दही मांसपेशियों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि दही का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला की मांसपेशियों को आराम मिलने के साथ बच्चे की मांसपेशियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। जिससे माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होने के कारण भी दही गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यदि प्रेग्नेंट महिला रोजाना एक कटोरी दही का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा कैल्शियम बच्चे की हड्डियों व् दांतों के विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

गुड़ बैक्टेरिया से भरपूर दही बॉडी में बैड बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद करती है। जिससे गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। और महिला व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

वजन बढ़ना प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी बात होती है लेकिन जरुरत से ज्यादा वजन का बढ़ना गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में दही का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कार्टिसोल नामक हॉर्मोन पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। जो प्रेग्नेंट महिला के वजन बढ़ने व् हार्मोनल असंतुलन के लिए जिम्मेवार होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को वजन को सही रखने व् बॉडी में हॉर्मोन के स्तर को सही रखने के लिए दही को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

बॉडी में होने वाले हार्मोनल अंसतुलन के कारण प्रेग्नेंट महिला की स्किन पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला दही का सेवन करती है तो महिला की स्किन से जुडी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। क्योंकि दही में मौजूद विटामिन इ स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

दही का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को पाचन क्रिया से जुडी समस्याएं जैसे की खाने का हज़म न होना, गैस बनना, कब्ज़ होना आदि से भी आराम मिलता है। इसके अलावा दही की तासीर ठंडी होने के कारण यह गर्भवती महिला को सीने में जलन एसिडिटी जैसी परेशानियों से बचाने में भी मदद करता है।

प्रेगनेंसी के दौरान दही का सेवन करने से गर्भवती महिला को हदय को स्वस्थ रखने, ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने, तनाव दूर करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सामान्य रखने में मदद मिलती है।

तो यदि आप भी माँ बनने वाली हैं और इन सभी फायदों के लिए और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए गर्भवती महिला को नियमित दही का सेवन करना चाहिए। एक बात का और ध्यान रखें की खट्टा दही और बाजार से लाया हुआ दही न खाएं बल्कि ताजा और घर में दही को जमाकर ही खाएं।

गर्भ क्यों नहीं ठहरता है?

प्रेगनेंसी का न होना किसी भी महिला के लिए बहुत बड़ी परेशानी हो सकती है, क्योंकि माँ बनना हर महिला के लिए उसी जिंदगी का सबसे प्यारा और अनोखा अहसास होता है। कुछ महिलाएं शादी के बाद थोड़ा समय लेती है की पहले वो अपने पार्टनर के साथ थोड़ा एन्जॉय करें उसके बाद वो बच्चा प्लान करेंगी। लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जो गर्भधारण के लिए प्रयास कर रही होती है और जल्द से जल्द प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, लेकिन उन्हें प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है। इसके अलावा कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जो गर्भधारण कर लेती है लेकिन न चाहते हुए भी उनका गर्भपात हो जाता है। ऐसे में कुछ महिलाएं मेडिकल ट्रीटमेंट लेकर इस समस्या से निजात पाने के लिए कोशिश करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं की आखिर महिला का गर्भ क्यों नहीं ठहरता है?

महिला को प्रेगनेंसी न होने के कारण

यदि कोई महिला गर्भधारण नहीं कर रही है तो इसका कोई एक कारण नहीं होता है, और ऐसा भी नहीं होता है की हर महिला को गर्भधारण न होने का एक ही कारण हो, क्योंकि यह हर महिला की शारीरिक अवस्था पर निर्भर करता है। प्रेगनेंसी न होने के कई कारण हो सकते हैं, और यह कारण आपकी किसी शारीरिक समस्या, आपके पति से जुडी समस्या, या आपके ही द्वारा की गई गलतियों के कारण हो सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिला को प्रेगनेंसी न होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं।

गर्भनिरोधक गोलियां

बहुत सी महिलाएं होती है जो गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है इन गोलियों का सेवन करने से जहां आपको अनचाही प्रेगनेंसी से बचे रहने में मदद मिलती है वही इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी आप पर पर पड़ते हैं। जैसे की इसके कारण मासिक चक्र अनियमित हो जाता है, बॉडी में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है, गर्भाशय की झिल्ली कमजोर हो सकती है और इन सभी परेशानियों के होने के कारण बाद में जब आप गर्भधारण करना चाहती है तो आपको गर्भधारण में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

तनाव

प्रेगनेंसी के लिए केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होना ही जरुरी नहीं होता है बल्कि प्रेगनेंसी के लिए आपका मानसिक रूप से फिट होना भी जरुरी होता है। ऐसे में यदि कोई महिला तनाव की समस्या से ग्रसित होती है या मानसिक रूप से प्रेगनेंसी के लिए अभी तैयार नहीं होती है। तो ऐसे में भी महिला को गर्भधारण न होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है या फिर प्रेगनेंसी यदि हो जाती है तो गर्भपात या समय पूर्व प्रसव जैसी दिक्कतें आ सकती है।

फैलोपियन ट्यूब

प्रेगनेंसी से पहले एक बार बॉडी की अच्छे से जांच महिला और पुरुष दोनों को करवानी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि कई बार आप बहुत कोशिश कर रहे होते हैं लेकिन फिर भी गर्भधारण नहीं होता है। प्रेगनेंसी न होने के एक कारण महिला की फैलोपियन ट्यूब से जुडी समस्या हो सकती है और प्रेगनेंसी के लिए फैलोपियन ट्यूब का सही होना बहुत जरुरी होता है क्योंकि इसी ट्यूब में ही निषेचन की प्रक्रिया होती है। और यदि किसी महिला को यह दिक्कत होती है तो इसके कारण भी महिला को गर्भधारण नहीं हो पाता है।

गर्भपात

यदि महिला का पहले गर्भपात हो चूका हो तो ऐसे में महिला को दुबारा जल्दी गर्भधारण में परेशानी आ सकती है, या दुबारा गर्भपात होने के खतरा भी रहता है। क्योंकि गर्भपात होने के कारण न केवल शरीर में कमी आती है बल्कि इससे गर्भाशय भी थोड़ा कमजोर हो जाता है और गर्भाशय को वापिस से सही सेट होने के लिए थोड़ा समय लग सकता है। ऐसे में आपको प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत न आये तो इसके लिए एक बार गर्भपात होने के बाद दूसरी प्रेगनेंसी के लिए थोड़ा रुक जाना चाहिए।

उम्र

कई बार कपल यह सोचते हैं की शादी के बाद एन्जॉय करेंगे जबकि शादी ही वो अठाइस या तीस की उम्र में करते हैं। ऐसे में महिला की अधिक उम्र होने के कारण भी गर्भधारण होने में परेशानियां आ सकती है क्योंकि उम्र के बढ़ने के साथ अंडाशय में अंडे बनने में भी कमी सकती है जिसके कारण गर्भधारण में समस्या आ सकती है।

गलत आदतें

महिला की गलत आदतों के शिकार होने के कारण जैसे की अल्कोहल व् धूम्रपान का अधिक सेवन करने के कारण या फिर आपके पार्टनर गलत आदतें हैं तो इसके कारण प्रजनन क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ता है। जिसकी वजह से भी महिला को प्रेग्नेंट होने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

वजन

प्रेग्नेंट होने के लिए बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है और उनमे से एक महिला का वजन भी है यदि महिला का वजन बहुत ज्यादा है या बहुत कम है। तो भी गर्भधारण में समस्या आ सकती है, इसीलिए यदि आप गर्भधारण करना चाहती है तो उसके लिए वजन को नियंत्रित रखना बहुत जरुरी होता है।

सम्बन्ध

यदि महिला ऐसा सोचती है की यदि वो एक बार अपने पार्टनर से मिलन कर लेती है तो उसका गर्भ ठहर जाता है तो यह उसकी ग़लतफहमी है। क्योंकि ऐसा नहीं होता है की एक ही बार में शुक्राणु अंडे तक पहुँच जाते हैं, और निषेचन हो जाता है। ऐसे में आपको यदि प्रेग्नेंट होना है तो एक बार नहीं बल्कि नियमित रूप से अपने पार्टनर से सम्बन्ध बनाना चाहिए ताकि आपके गर्भधारण के चांस को बढ़ाने में मदद मिल सके।

पुरुष भी हो सकता है जिम्मेवार

ऐसा नहीं है की यदि महिला गर्भधारण नहीं कर पा रही है तो इसके लिए केवल महिला की जिम्मेवार होगी। बल्कि महिला के गर्भधारण न होने का कारण पुरुष भी हो सकते हैं। क्योंकि यदि पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी है तो भी महिला के अंडाशय तक शुक्राणु नहीं पहुँच पाते हैं। जिसके कारण महिला को गर्भधारण से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

सही समय

यदि आप माँ बनना चाहती है तो उसके लिए सही समय पर सम्बन्ध बनाना बहुत जरुरी होता है। यदि आप अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध तो बना रही है लेकिन सही समय जैसे की ओवुलेशन पीरियड के दौरान नहीं बना रही है तो इसके कारण भी आपको गर्भधारण में परेशानी आ सकती है। क्योंकि ओवुलेशन पीरियड यानी जिस दिन आपको पीरियड शुरू हुआ है उस दिन से गिनती करते हुए जो ग्यारह से अठारह दिन का समय होता है उसमे सम्बन्ध बनाने से आपको प्रेगनेंसी होने के चांस सबसे अधिक होते हैं।

शारीरिक परेशानी

यदि कोई महिला थायरॉयड या अन्य किसी ऐसी शारीरिक परेशानी से जूझ रही होती है तो इसके कारण गर्भवती महिला के शरीर में हार्मोनल असंतुलन होने के साथ मासिक धर्म चक्र भी प्रभावित होता है। और यदि आपको अनियमित पीरियड्स की समस्या है तो इसके कारण भी आपको प्रेगनेंसी न होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दवाइयां

जो महिलाएं मानसिक रूप से जुडी परेशानी की, लम्बे समय से चल रही बीमारियों की दवाई का सेवन कर रही होती है। तो उन महिलाओं की बॉडी में हार्मोनल असंतुलन होने के कारण गर्भधारण में समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को गर्भधारण से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है की यदि महिला गर्भधारण करना चाहती है तो अपनी इन परेशानियों का समाधान करें। और सबसे पहले डॉक्टर से जाकर मिलें और गर्भधारण न होने के सही कारण के बारे में जान सके। की आखिर महिला को गर्भधारण क्यों नहीं हो रहा है और उसके बाद उस समस्या का समाधान करें, ताकि महिला को प्रेगनेंसी के इस प्यारे से अनुभव को एन्जॉय करने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के सातवें से नौवें महीने में क्या परेशानियां होती है

प्रेगनेंसी का सातवें से नौवां महीना गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों के लिए बहुत अहम होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में बच्चे का विकास तेजी से होता है साथ ही इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही समय से पहले बच्चे का जन्म होने जैसी परेशानी, डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानी की समस्या खड़ी कर सकती है। इसके अलावा वजन बढ़ने के कारण महिला को शारीरिक रूप से परेशानियों का भी अधिक अनुभव होता है।

ऐसे में बहुत जरुरी होता है की प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला अपने बहुत ज्यादा ध्यान रखे ताकि महिला व् बच्चे दोनों को कोई परेशानी न हो और न ही डिलीवरी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स आएं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं प्रेगनेंसी के सातवें से नौवें महीने में महिला को क्या परेशानियां आ सकती है।

पेट व् पीठ में दर्द

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में बच्चे का विकास तेजी से होता है जिससे गर्भाशय का आकार भी तेजी से बढ़ता है। जिसके कारण पेट व् पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव अधिक होने के कारण महिला को पीठ व् पेट में दर्द की समस्या अधिक होती है। पीठ में दर्द जिन महिलाओं को पहले से ही होता है उन्हें पीठ में ज्यादा दिक्कत का अनुभव होता है। पेट में दर्द का अनुभव महिला को कभी कम तो कभी ज्यादा हो सकता है इसका कारण कब्ज़, गैस, बच्चे की मूवमेंट, पेट के निचले हिस्से पर दबाव अधिक पड़ना आदि हो सकते हैं।

कब्ज़

वजन बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया बहुत धीमी पड़ जाती है जिसके कारण कब्ज़ जैसी परेशानी का सामना महिला को अधिक करना पड़ सकता है। और कब्ज़ के कारण बवासीर, सीने में जलन, खट्टी डकार, गैस आदि की समस्या अधिक होती है।

थकान

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को बहुत ज्यादा थकान का अनुभव होता है क्योंकि वजन बढ़ने के कारण थोड़ा सा काम करने पर ही महिला को सांस फूलने की समस्या, थोड़ी देर खड़े रहने पर पैरों में दर्द आदि की समस्या महसूस होती है, साथ ही बॉडी पेन भी इस दौरान महिला को अधिक हो सकता है। जिसकी वजह से महिला बहुत ज्यादा थकान का अनुभव करती है।

ब्रेस्ट से रिसाव

स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया प्रेगनेंसी की पहली तिमाही से ही शुरू हो जाती है। लेकिन प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला की ब्रेस्ट से चिपचिपे सफ़ेद पदार्थ का रिसाव हो सकता है जिसके कारण महिला को परेशानी का अनुभव हो सकता है।

स्ट्रेचमार्क्स

पेट के बढ़ते आकार के कारण गर्भवती महिला को इस दौरान पेट, ब्रेस्ट आदि पर गहरे मार्क्स नज़र आ सकते हैं। ऐसे में आप इसके लिए किसी क्रीम आदि का इस्तेमाल कर सकती है ताकि आपको यह परेशानी ज्यादा न हो।

यूरिन पास करने की इच्छा में बढ़ोतरी

बढ़ते वजन के कारण गर्भवती महिला की बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है कई बार तो अचानक से छींक आदि आने पर महिला का थोड़ा यूरिन बीच में भी निकल सकता है। ऐसे में जब भी यूरिन पास करने की इच्छा को तो तुरंत प्रेग्नेंट महिला को यूरिन पास करने जाना चाहिए।

सूजन

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में पेट का आकार बढ़ने के कारण पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है। साथ ही थोड़ी देर खड़े रहने पर भी पैरों पर अधिक दबाव महसूस होता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को पैरों में सूजन की समस्या होती है। कुछ गर्भवती महिलाओं को इस दौरान हाथ व् मुँह पर भी सूजन की समस्या हो सकती है।

सोने में दिक्कत

वजन बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को सोने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्योंकि न तो महिला को सीधा सोना होता है और न ही बहुत देर तक एक ही पोजीशन में महिला सो सकती है, ऐसे में अच्छी और गहरी नींद लेने में महिला को दिक्कत होती है। सोने के साथ गर्भवती महिला को वजन बढ़ने के कारण उठने, बैठने, लेटने आदि में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

तनाव

जो प्रेग्नेंट महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें डिलीवरी को लेकर डर, बच्चे को कोई परेशानी न हो इसे लेकर डर महसूस हो सकता है। जिसके कारण महिलाएं तनाव में आ सकती है जो की गर्भवती महिला को कॉम्प्लीकेशन्स को बढ़ा सकता है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के सातवें से नौवें महीने में हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इन परेशानियों को लेकर घबराना नहीं चाहिए, तनाव नहीं लेना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना आम बात होती है और यदि कोई परेशानी हो या कोई असहज लक्षण महसूस हो तो इस दौरान महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही माँ व् बच्चे दोनों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

पालक सूप के फायदे! अपने बच्चों को जरूर पिलाएं

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हरी सब्जियां आपकी सेहत के लिए कितनी लाभदायक है ये तो आप जानते ही होंगे, और हरी सब्जियों में मौजूद पालक आपके लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है, इसमें मौजूद विटामिन, खनिज, और फाईटोन्यूट्रिएंट्स अधिक मात्रा में पाएं जाते है, और साथ ही ही इसमें कैलोरीज़ भी काफी कम होती है, तो आज हम पालक से बने सूप के फायदों के बारे में आपको बताना चाहते है, जिसे यदि आप या आप अपने बच्चों को देती है, तो इससे उनके कितने पोषक तत्व मिलते है, और कितने फायदे मिलते है, आपके बच्चे इसे खाने से शायद मना कर दें, परन्तु यदि आप उनके स्वाद के अनुसार इसका सूप बनाकर उन्हें देंगी तो उन्हें पसंद भी आएगा और इससे मिलने वाले फायदे भी उन्हें मिलेंगे।

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पालक में विटामिन ए, सी, इ, बी 2, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, मैगनीज़, जिंक, प्रोटीन, फाइबर आदि होने के साथ और भी बहुत से पोषक तत्व भरपूर पाएं जाते है जो आपके शरीर में डिटॉक्सीफिकेशन, से लेकर आपके मस्तिष्क और हड्डियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, यदि आप इसे अपने आहार में सलाद, सब्ज़ी या सूप बनाकर इसका सेवन करते है, और साथ ही अपने परिवार को भी करवाती है तो यह आपको बहुत से फायदे देता है, तो आइये अब विस्तार से जानते है की पालक सूप के कौन कौन से फायदे होते हैं, जो आपको उसका सेवन करने से मिलते है।

डिटॉक्सीफिकेशन में मदद करता है:-

पालक में क्लोरोफिल पर्याप्त मात्रा में होता है, जो आपके यकृत और कोलन में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करता है, इसके अलावा इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण, एंटी बैक्टेरियल, भी भरपूर होते है जो आपके शरीर में डिटॉक्सीफिकेशन में मदद करते है, तो इसके लिए आप पालक सूप को अपने बच्चों को जरूर पिलाएं इससे उन्हें बोमारियों से लड़ने व् अपने शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकाल कर फिट रहने में मदद मिलती है।

मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है:-

रोजाना व्यायाम, भाग दौड़, खेल कूद के कारण आपकी मांसपेशियां काफी थक जाती है, और पालक सूप का सेवन आपके लिए एनर्जी बूस्टर का काम करता है, यह एक रिसर्च में भी साफ़ किया गया है की व्यायाम के दौरान आपकी मांसपेशियों में जो ऑक्सीजन की कमी आती है, वो आपको पालक को किसी भी रूप में उसका सेवन करने से मिलती है, क्योंकि इसमें कुछ ऐसे नाइट्रेट होते है जो आपकी मांसपेशियों को कुशलता से चलाने में मदद करते हैं, और आपको हमेशा फिट रखता है।

आपके शरीर में आयरन की कमी को पूरा करता है:-

आयरन की कमी का असर आपके शरीर की सभी क्रियाओंपर पड़ता है, साथ ही इसकी कमी के कारण आपको थकान व् एनीमिया जैसी बिमारी का सामना भी करना पड़ सकता है, और पालक में हीमोग्लोबिन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, साथ ही यह वसा और आपके शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है,एक कप पालक का सूप आपके शरीर की ३५ प्रतिशत तक की आयरन की कमी को पूरा करता है, और इससे आपके बालों, त्वचा नाख़ून, मस्तिष्क सबको सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है, इसीलिए शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

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आपके हार्ट को हैल्थी रखने में मदद करता है:-

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पालक एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जिसमे विटामिन सी, बीटा कैरोटीन भरपूर होता है, जो आपके दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है, इसके अलावा इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट, कोलेस्ट्रॉल के हानिकारक ऑक्सीकरण को होने से रोकते हैं, जो की आपके हार्ट और धमियों के लिए खतरा बन सकती है, और आपको दिल सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, आपके हदय को सुरक्षित रखने वाले तत्व फोलेट, मैग्नीशियम, पोटैशियम आदि भी भरपूर मात्रा में शामिल होते है, साथ ही इसमें कुछ ऐसे नाइट्रेट भी होते है जो आपकी रक्त वाहिकाओं कोखोलकर उनसे सुचारु रूप से काम करवाने में मदद करते है, जिससे आपके हार्ट को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

कैंसर रोगियों के लिए फायदेमंद है पालक सूप:-

फ्लेवोनोइड्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर पालक आपको कैंसर से लड़ने में मदद करते है, जो की पालक में भरपूर मात्रा में पाया जाता है, शोधकर्ताओं ने ये भी बताया है की यदि आप हफ्ते में दो से तीन बार पालक का सेवन करते हैं तो इससे महिलाओ को ब्रैस्ट कैंसर होने की सम्भावना बहुत कम होती है, इसके अलावा इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, फोलेट और फाइबर भी उपरोक्त मात्रा में होते है, जो कैंसर के जोखिम को कम करने में आपकी मदद करते है, साथ ही इसमें कैरोटीनॉयड ल्यूटिन, जेकेथिन, आदि भी होते हैं जो आपकी बॉडी को फ्री रेडिकल्स को दूर करने में मदद करता है जो आपके शरीर के विभिन्न अंगो में कैंसर का खतरा बनता है।

हड्डियों को फायदा करता है:-

पालक के सूप का सेवन करने से आपको हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें पाया जाने वाला विटामिन हड्डी मैट्रिक्स में कैल्शियम की मात्रा को बनाएं रखने में मदद मिलती है, साथ ही पालक का सेवन करने से ओस्टेयोकैल्किन को बढ़ाने में भी मदद करता है, जो आपके शरीर में आपकी हड्डियों की ताकत और घनत्व को बनाएँ रखने में आपकी मदद करता है, और इसका सेवन यदि बच्चे करते हैं तो इससे उनकी हड्डियों के विकास को तेजी से होने में मदद मिलती है, और वो मजबूत भी बनती हैं।

पालक करती है आपके दिमाग को तेज:-

आपके दिमाग को अच्छे से काम करने के लिए और सरंक्षित रखने के लिए लुटेन, फोलेट और बीटा कैरोटीन पर्याप्त मात्रा में चाहिए होता है जो की पालक में भरपूर पाया जाता है, इसीलिए बच्चों के दिमाग के विकास के लिए उन्हें पालक का सेवन भरपूर मात्रा में करवाना चाहिए।

रक्तचाप को कम करने में मदद करता है:-

पालक में पोटैशियम अधिक मात्रा में और सोडियम कम मात्रा में होता है, जिससे यह आपकी उक्त रक्तचाप को कम करने में मदद करता है, इसके अलावा इसके पाएं जाने वाले पेप्टाइड और एंटी ऑक्सीडेंट भी आपको उक्त रक्तचाप कोकम करने में मदद करते हैं, इसीलिए यदि आपको भी उच्च रक्तचाप की समस्या होती है तो इससे बचने के लिए आपको पालक का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

आपकी आँखों की सुरक्षा में मदद करता है:-

पालक में ऐसे बहुत से तत्व पाए जाते है जो आपकी आँखों को सुरक्षा देने के साथ इसे बहुत सी बीमारियों से दूर रखने में भी मदद करते हैं, यदि आप पालक का सूप बनाने के लिए इसे जैतून के तेल में बनाते है तो यह आपके लिए दुगुना फायदा करता है, और आपको आँखों से सम्बंधित समस्या से निजात दिलाने में मदद करता है।

तो ये कुछ फायदे जो आपको पालक सूप का सेवन करने से मिलते है, तो इन फायदों को उठाने और अपने आप को बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए, हफ्ते में दो से तीन बार तो इसका सेवन जरूर करना चाहिए, और अपने बच्चों को भी इसकी आदत डालनी चाहिए ताकि पालक के गुणकारी लाभ उन्हें भी मिल सकें।

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एक भी जूं नहीं बचेगी अगर करेंगे ये उपाय

जुओं को भगाने के उपाय, जुएं भगाना, जुओं से छुटकारा, जुएं मारने के लिए, जुएं भगाने का आसान उपाय, जुए होने के कारण, जुएं भगाने के घरेलु उपचार, क्या होती है जुएं lice, जुएं हटाने के उपाय और घरेलु नुस्खे, जुओं का इलाज

बालों का सुन्दर होना उतना ही जरुरी है जितना की आपके चेहरे का। लेकिन कई बार कुछ समस्यायों के चलते आपके इन बालों की सुंदरता में ग्रहण सा लग जाता है। फिर चाहे वो दोमुंहे बालों की समस्या हो या डैंड्रफ की। लेकिन इसके अलावा भी एक समस्या है जो बालों की खूबसूरती को तो खराब करती ही है साथ-साथ आपके व्यक्तित्व को भी प्रभावित करती है।

ये समस्या है बालों में जुओं की। जो अक्सर गंदे और गीले बालों में उत्पन्न होती है। आज के समय में बालों में जुएं होना आम बात है। क्योंकि ये समस्या एक से दूर के सर में बहुत तेजी से फैलती है जिसके कारण इनकी तादाद बहुत जल्दी बढ़ती है। जूं एक छोटा परजीवी है जो बालों की जड़ों से चिपका रहता है और स्कैल्प से खून पीता है। ऐसे तो ये समस्या अधिकतर बारिशों के मौसम में होती है लेकिन कई बार गर्मियों और सर्दियों में भी जुएं पड़ने का खतरा बना रहता है।

ज्यादातर ये समस्या स्कूली बच्चों और 5 से अधिक आयु के बच्चों में पायी जाती है। लेकिन कई बार बड़ी उम्र के लोगों के सर में भी जुएं देखने को मिलती है। सर में जुएं होने से इंसान को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि इनके होने से सर में तेज खुजली होने के साथ-साथ जख्म भी हो जाते है।

सिर में खुजली के घरेलू उपाय ये हैं

कई बार ये जख्म इतने गहरे हो जाते है की इनका इलाज करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में बालों को कटवाना भी पड़ सकता है। तो इससे बेहतर है की समस्या शुरू होने से पहले ही उसे खत्म कर दिया जाए। अर्थात ये समस्या बालों में गंदगी की वजह से होती है और यदि हम बालों में पूर्ण साफ़-सफाई रखेंगे तो सर में जुएं होने की संभावना भी कम होगी।

इसके अलावा कुछ घरेलू उपाय भी है जिनकी मदद से बालों से जुओं को पूरी तरह निकाला जा सकता है। लेकिन सभी को इन उपायों के बारे में पता नहीं होता। इसीलिए आज हम आपको उन सभी उपायों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

बालों में जुएं होने के कारण :-

जूं उड़ नहीं सकती लेकिन इसके अलावा भी कई कारण है जिनकी वजह से ये आपके बालों में आ जाती है। जैसे –

  • गीले बाल बांधना,
  • जूंं वाले व्यक्ति की टोपी, स्काफ, कंघी, बिस्तर, हैड फ़ोन आदि का इस्तेमाल करना
  • बालों में गंदगी होना
  • संक्रमित व्यक्ति के अधिक सम्पर्क में रहना आदि

बालों से जुएं निकालने के उपाय :-

1. लहसुन :

लहसुन की तेज गंध और इससे होने वाली चरपराहट बहुत ही तीखी होती है। और इस तीखी गंध में साँस लेना जुओं के लिए बहुत मुश्किल होता है। इसीलिए जब आप इसे अपने बालों में लगाते है तो जुएं बेहोश होकर मर जाती है। इसके प्रयोग के लिए लहसुन की 8 से 10 कलियों को पीसकर उसमे नींबू का रस मिलाएं। अब इस मिश्रण को बालों की जड़ों में अच्छे से लगाएं। इसे लगाने के आधा घंटे बाद आप सर धो सकते है।

2. बेबी आयल :

बेबी आयल आप मार्किट के किसी भी मेडिकल स्टोर से खरीद सकते है। शायद आप नहीं जानते लेकिन ये भी जुओं को मारने के प्रभावी तरीकों में से एक है। इसके लिए बेबी आयल को कपडे धोने वाले डिटर्जेंट के साथ मिलाएं और उसमे थोड़ा सा सिरका मिलाकर अपने सर में लगाएं। ऐसा करने से जुएं मर जाती है और आप उन मरी हुई जुओं को कंघी की मदद से निकाल सकते है।

3. कपूर और नारियल तेल :

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सिर की जुएं मारने का ये तरीका सबसे पुराना और प्रभावी तरीका है। इसका इस्तेमाल हर जगह एक ही तरह से किया जाता है। इसमें मौजूद कपूर जुओं का दम घोटने का काम करता है जबकि नारियल तेल उन्हें बालों से निकालने में। इसके लिए नारियल तेल में कपूर की टिक्की डालकर उसे अच्छी तरह घोल लें। अब इस तेल को बालों की जड़ों में अच्छी तरह लगाएं। इससे जुएं अपने आप मर जाएँगी।

4. नीम :

नीम में मौजूद एंटी सेप्टिक गुण जुओं से होने वाले घाव और उनमे होने वाले इन्फेक्शन से बचाने में मदद करते है। इसके अलावा ये जुओं को मारने में भी बेहद लाभकारी होता है। इसके इस्तेमाल के लिए नीम की कुछ पत्तियों को पीसकर उनका पेस्ट बना लें। और इस पेस्ट को कम से कम 1 घंटे तक बालों में लगाए रखें। उसके बाद बालों को शैम्पू करके धो लें। हफ्ते में 2 बार इस्तेमाल से जुएं समाप्त हो जाएँगी।

5. नारियल तेल :juon ko marne

नारियल तेल बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन इसकी मदद से आप बालों से जुएं भी निकाल सकते है। इसके लिए सबसे पहले अपने बालों को सेब के सिरके से धो लें। और बालों के सूखने का इन्तजार करें। बाल सुख जाने के बाद उनमे नारियल तेल लगाएं और 8 घंटे तक लगे रहने दें। उसके बाद बालों में शैम्पू कर लें। शैम्पू के बाद कंघी की मदद से जुएं निकाल लें।

बालों से जुएं निकालने के अन्य उपाय :

  • जुओं को निकालने के लिए टी ट्री आयल में थोड़ा सा शैम्‍पू और तीन बड़े चम्‍मच नारियल या जैतून का तेल मिलाकर मिश्रण बना लें और इसे अपने बालों में लगाएं। एक घंटे तक रखने के बाद बालों को गर्म पानी से धो लें।
  • आप चाहे तो नीम के तेल का प्रयोग करके भी जुओं को बालों से निकाल सकते है।
  • इसके अतिरिक्त जैतून का तेल भी जुएं निकालने में काफी मददगार साबित हो सकता है।
  • आप अपने बालों में प्याज का रस लगाकर उसे 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। और उसके बाद बाल धो लें।
  • अमरुद के पत्तों की पीसकर उनका पेस्ट अपने बालों में लगाएं। इससे भी जुएं भगाने में फायदा मिलता है।

मसालों के नुकसान ही नहीं! बल्कि ये फायदे भी है

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मसालों का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है, ये केवल आपकी सब्ज़ी का जायका ही नहीं बढ़ाते, बल्कि आपको बहुत से फायदे भी पहुंचाते है, आज तक आपने सुना होगा की मसालों का सेवन करने से मोटापा बढ़ता है, इसके ज्यादा सेवन से पेट सम्बंधित परेशानियां हो जाती है, इसके कारण आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, और भी बहुत ऐसी बातें आपने सुनी होंगी, परन्तु क्या आपने कभी मसालों के फायदों के बारे में सुना है क्या आप जानते है की मसालों में एंटी ऑक्सीडेंट्स और कैंसर विरोधी तत्व पाएं जाते है, सिर्फ यदि आप लाल मिर्च को छोड़ दें।

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मसालों के ऐसे बहुत से फायदे है जो आपको फिट और स्वस्थ रखने में मदद करते है, जैसे की इलायची आपके पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है, तो दालचीनी के इस्तेमाल से शुगर का इलाज किया जा सकता है, आपके मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है, लौंग का इस्तेमाल आप दांतों से सम्बंधित परेशानी के लिए कर सकते है, तो हल्दी एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होने के साथ आपकी ख़ूबसूरती को निखारने में मदद करती है, तेज पत्ता एंटी फंगल और एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर होता है, इसके अलावा और भी बहुत से ऐसे फायदे है जो आपको मसालों से मिलते है तो आइये आज हम आपको मसालों के ऐसे गुण बताएंगे जिसके कारण आप केवल ये नहीं कहेंगे की मसालों के सेवन से आपको नुकसान होता है, तो आइये हम आपको बताते है की मसालों से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

हल्दी के फायदे:-

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हल्दी के बिना किसी भी सब्ज़ी का रंग आपको फीका लग सकता है, साथ ही इसके एंटी बैक्टेरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होती है, आइये जानते है हल्दी के क्या क्या फायदे है

  • हल्दी के इस्तेमाल से आपको माहवारी के दर्द से राहत मिलती है।
  • हल्दी का दूध पीने से खांसी सर्दी की समस्या से राहत मिलती है।
  • हल्दी के एंटीसेप्टिक गुण के कारण ये आपके घाव को भरने में मदद करती है।
  • मुँह के छालों की समस्या से आराम दिलाती है।
  • जोड़ो के दर्द आदि से भी निजता दिलाने में मदद करती है।
  • आपकी त्वचा की खूबसूरी को बढ़ाने में आपकी मदद करती है।

दालचीनी के फायदे:-

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दालचीनी में एंटीमाइक्रोबियल, एंटी क्लोटिंग और ड्यूरेटिक्सआदि गुण होते है, इसमें अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते है साथ ही इसमें मिनरल्स भी होते है जैसे मैग्नीशियम, आयरन और कैल्शियम, इसीलिए ये आपके लिए बहुत फायदेमंद भी होती है, तो आइये जानते है दालचीनी के फायदे कौन से है।

  • दालचीनी के इस्तेमाल से आपके दिमाग को दुरुस्त होने में मदद मिलती है।
  • दालचीनी को चबाने से आपके दांत भी मजबूत होते है।
  • दालचीनी की चाय पीने से भी आपको फायदा मिलती है।
  • दालचीनी को रात भर के लिए पानी में रख दें, उसके बाद सुबह उठ कर इस पानी में नीमू का रस और शहद मिलाकर लेने से भी आपका वजन घटता है।
  • दालचीनी में निम्बू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से मुहांसे और पिम्पल की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • रोजाना आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर लेने से आपकी शगर सही होती है।

इलायची के फायदे:-

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इलायची का सेवन भी मसालों के रूप में किया जाता है, इलायची का सेवन करने से पहले आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप इसका सेवन रात में न करें, और गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

  • गले की खराश को दूर करने में मदद करती है।
  • गले में सूजन की समस्या होने पर मूली के पानी में इलायची को पीस कर उसका सेवन करने से आपको फायदा मिलता है।
  • इलायची को पानी में उबाल कर पीने से उलटी की समस्या से राहत मिलती है।
  • इसके कारण आपके पाचन तंत्र से जुडी परेशानी को भी खत्म होने में मदद मिलती है।
  • ब्लड प्रैशर के मरीजों के लिए इलायची फायदेमंद होती है।
  • बदहज़मी की परेशानी से राहत दिलाने के लिए भी इलायची बहुत फायदेमंद होती है।

तेज पत्ते के फायदे:-

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तेज पत्ते का इस्तेमाल भी मसालें के रूप में किया जाता है, और ये भी आपके स्वास्थ्य के साथ आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने में बहुत मदद करता है, तो आइये जानते है की तेज पत्ते से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

  • शुगर के मरीज़ो के लिए और आपके दिल को स्वस्थ बनाएं रखने के लिए तेज पत्ता बहुत उपयोगी होता है।
  • आपके बालों में होने वाली रुसी की समस्या से राहत दिलवाने में भी तेज पत्ता बहुत फायदा करता है।
  • आपके दांतों की चमक को बरकरार रखने के लिए भी यह बहुत उपयोगी है।
  • तेज पत्ते के इस्तेमाल से आपके चेहरे को फ्रेश और खूबसूरत बनने में मदद मिलती है, और साथ ही आपके चेहरे पर होने वाले मुहांसो को दूर करने में भी यह मदद करता है।
  • आपके बालों को चमकदार बनाने में भी यह बहुत उपयोगी होता है।

लौंग के फायदे:-

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लौंग का इस्तेमाल भारतीय खाने का स्वसद बढ़ाने के साथ आपकी बहुत सी परेशानियों का हल करने के लिए भी किया जाता है, और लोग लौंग के तेल का भी इस्तेमाल करते है, और इसे एंटीसेप्टिक के रूप में भी किया जाता है, आइये विस्तार से जानते है की लौंग के क्या फायदे होते है।

  • दांतो में होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए लौंग व् इसके तेल दोनों का ही इस्तेमाल किया जाता है।
  • त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे मुंहासों, ब्लैकहेड्स आदि से परेशान है तो इसके लिए आप अपने फेस पैक में कुछ बुँदे लौंग के तेल की मिलाएं इसके कारण आपको अपनी त्वचा को खूबसूरत बनाने में मदद मिलती है।
  • लौंग की चाय का सेवन करने से आपको तनाव से राहत पाने में मदद मिलती है, आप इसमें तुलसी पुदीना आदि को भी मिक्स कर सकते है।
  • किसी जहरीले कीड़े के काटने पर, कट लग जाने पर, घाव पर और फंगल इंफेशन होने पर भी लौंग के तेल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है।
  • लौंग का इस्तेमाल बालों के लिए कंडीशनर के रूप में भी किया जाता है।
  • सर्दी की समस्या को दूर करने के लिए भी लौंग या लौंग के तेल का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है।

काली मिर्च के फायदे:-

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काली मिर्च केवल स्वाद के रूप में ही इस्तेमाल नहीं की जाती है, बल्कि इसके बहुत से औषधीय गुण भी होते है, इसका प्रयोग आप सलाद व् फलों के ऊपर भी कर सकता है, इसके अलावा आइये जानते है की इसके अन्य फायदे कौन से होते है।

  • ब्लड प्रैशर की समस्या को कण्ट्रोल करने में मदद करता है।
  • बवासीर के रोगी यदि काली मिर्च, जीरा, और शक्कर या मिश्री को पीस कर इसका सेवन करते है, तो उनको फायदा होता है।
  • शहद को काली मिर्च पाउडर के साथ चाट कर खाने से भी आपको खांसी की समस्या से राहत मिलती है।
  • पीसी काली मिर्च को घी में मिलाकर सुबह शाम खाने से आँखों की रौशनी बढ़ती है।
  • किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाव में आपके लिए लाभदायक होती है।

जीरा के फायदे:-

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जीरे में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमटरी, गुण मौजूद होते है, साथ ही इसमें आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक, विटामिन आदि भी भरपूर मात्रा में होते है, जिसके कारण ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है, तो आइये जानते है की जीरे के इस्तेमाल से आपको कौन कौन से फायदे हो सकते है।

  • जीरे के सेवन से आपकी पाचन क्रिया से जुडी परेशानी हल होती है।
  • इसके कारण स्तनपान करवाने वाली महिला के स्तन में दूध की वृद्धि होती है।
  • जीरे का इस्तेमाल करने से आपके शरीर में रक्त की मात्रा में वृद्धि होती है, जिसके कारण एनीमिया जैसी परेशानी का हल मिलता है।
  • शुगर के रोगी में शुगर को कण्ट्रोल करने में मदद करता है।
  • आपकी यादाश्त को बढ़ाने के साथ आपकी हड्डियों को मजबूत बनाने में भी मदद करता है।
  • जीरे की चाय का सेवन करने से आपको अनिंद्रा की समस्या से राहत मिलती है।

सौंफ के फायदे:-

सौंफ में कॉपर, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैगनीज़, सिलेनियम, ज़िन्क और मैग्नेशियम जैसे मिनरल्स पाये जाते उपरोक्त मात्रा में पाए जाते है, जो आपके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करने के साथ और भी बहुत से फायदे देते है, तो आइये जानते है की सौंफ के इस्तेमाल से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

  • सांस में आने वाली बदबू को दूर करने में मदद करता है।
  • पीरियड्स के समय होने वाले दर्द की समस्या से राहत दिलाता है।
  • कब्ज़, बदहज़मी जैसी परेशानी का समाधान करता है।
  • एनीमिया की समस्या से आपको सुरक्षित रखने में आपकी मदद करता है।
  • आपका वजन घटाने में आपकी मदद करता है।
  • ब्लड प्रैशर को सही करने में आपके लिए फायदेमंद होता है।

तो ये कुछ फायदे है जो आपको मसालों का सेवन करने से होते है, और मसालों में भी बहुत सी ऐसी और चीजे है जैसे ही पीपली, मोती इलायची आदि ये सब भी गुणों से भरपूर है, और इनके सेवन से आपको फायदे भी मिलते है, ये सच है की किसी भी चीज का अधिक मात्रा में सेवन करना आपके लिए परेशानी बन सकता है, इसीलिए मसालों का सेवन भी आपको उपरोक्त मात्रा में करना चाहिए, और यदि आप इनका सही मात्रा में सेवन करते है, तो आपको इसके कारण मिलने वाले लाभ भी मिल सकते है।

शिशु जब बाहर की आवाज़ सुनने लगता है गर्भ में

माँ बनना हर महिला का सबसे खूबसूरत लम्हा होता है साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला हर पल केवल अपने गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में ही सोचती है। प्रेगनेंसी के दौरान चाहे कितनी ही परेशानियां आये लेकिन महिला के लिए शिशु का विकास सबसे जरुरी होता है। और हर गर्भवती महिला यह जानने के लिए उत्सुक रहती है की गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं। ऐसे में शिशु की पहली हलचल का अनुभव करना महिला के लिए बहुत खास होता है, और गर्भ में शिशु के घूमता ही नहीं है बल्कि बाहर क्या हो रहा है उसे सुन भी सकता है। प्रेगनेंसी की शुरुआत से नहीं बल्कि जैसे जैसे गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे शिशु के अंग विकसित होते हैं और जैसे जैसे शिशु के अंग विकसित होते हैं वैसे वैसे शिशु की सुनने की क्षमता में भी वृद्धि होती है।

शिशु की सुनने की क्षमता

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में शिशु के सभी अंग की आकृतियां बननी शुरू हो जाती है। और लगभग तीसरे महीने तक सभी अंग बन भी जाते हैं, और उसके बाद जैसे जैसे प्रेगनेंसी के समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे शिशु का विकास भी तेजी से आगे बढ़ता है। और शिशु के सभी अंग अपने काम करने शुरू करने लगते हैं, और शिशु लगभग अपने हलचल के माध्यम से गर्भ के बाहर हो रही गतिविधियों पर अपनी प्रक्रिया दे सकता है। क्योंकि तेज आवाज़, तेज रौशनी, आदि को गर्भ में शिशु महसूस कर सकता है। और जब शिशु इन्हे महसूस करता है तो आपको गर्भ में शिशु की हलचल ज्यादा मसहूस हो सकती है। और शिशु के कान बनने की प्रक्रिया पांचवें महीने के आस पास पूरी हो जाती है और शिशु की सुनने की क्षमता धीरे धीरे बढ़ने लगती है।

क्या शिशु गर्भ में बाहर की आवाज़ सुनता है?

जी हाँ, प्रेगनेंसी के पांचवें महीने के आस पास शिशु की सुनने की क्षमता बढ़ने लगती है, जिससे वो बाहर हो रही गतिविधियों को सुन सकता है और गर्भ में हलचल करके उन पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे सकता है। जैसे की यदि आप यदि तेज आवाज़ में गाने सुनती हैं, या भीड़भाड़ वाली जगह पर जाती है, तो शिशु गर्भ में चौंक सकता है। जिससे गर्भ में शिशु की हलचल भी ज्यादा महसूस हो सकती है। लेकिन महिला को ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं जाना चाहिए। क्योंकि ऐसी जगह पर जाने से इन्फेक्शन का खतरा रहता है जिससे गर्भ में शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है। साथ ही महिला को गर्भ में शिशु से थोड़ी देर बातें भी करनी चाहिए क्योंकि गर्भ में शिशु न केवल आपकी बातें सुन सकता है। बल्कि इससे गर्भ में शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद भी मिलती है।

तो यह हैं गर्भ में शिशु की सुनने की क्षमता से जुडी कुछ बातें, ऐसे में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को अपनी अच्छे से केयर करने के साथ शिशु के साथ थोड़ा समय भी बिताना चाहिए। ताकि शिशु की सुनने की क्षमता में वृद्धि होने के साथ शिशु के मस्तिष्क के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके।