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गर्भवती महिला को डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

गर्भवती महिला को डॉक्टर से कब मिलना चाहिए, प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर से कब मिलना चाहिए, गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से कब मिलें, प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर की राय कब लेनी चाहिए

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हर कदम पर डॉक्टर की राय की जरुरत पड़ती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की वो रोजाना डॉक्टर से चेकअप करवाएं। प्रेगनेंसी के दौरान कम से कम बारह से अठारह बार तक डॉक्टर से चेकअप करवाना पड़ता है। लेकिन किसी भी गर्भवती महिला की स्थिति को देखकर पूरा अंदाजा नहीं लगा सकते हैं की इतनी बार डॉक्टर से मिलना पड़ेगा। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को बहुत सी समस्याएं हो जाती है तो कुछ स्वस्थ रहती है। ऐसे में डॉक्टर ही आपको गर्भवती महिला की स्थिति देखकर बता सकता है की कब आपको उनसे मिलना चाहिए। इसके अलावा किन स्थिति में आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए आइये जानते हैं।

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद

यदि पीरियड्स मिस होने के बाद आपने घर पर ही प्रेगनेंसी टेस्ट किया है और वो पॉजिटिव भी आया है, तो ऐसे में आपको बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। और डॉक्टर द्वारा बताये गए सभी टेस्ट करवाने चाहिए और दवाइयां लेनी चाहिए ताकि शुरुआत से ही आपको प्रेगनेंसी में किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।

अल्ट्रासॉउन्ड के लिए

गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान तीन से चार बार अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है। और डॉक्टर को आपसे अल्ट्रासॉउन्ड कब करवाना चाहिए इस बारे में जानने के लिए, कितनी बार करवाना चाहिए और उसकी रिपोर्ट दिखाने के लिए मिलना चाहिए। अल्ट्रासॉउन्ड की रिपोर्ट देखकर आप अपने शिशु के सही विकास के बारे में जान सकते हैं।

रूटीन चेकअप के लिए

पंद्रह से बीस दिन के अंतराल पर गर्भवती महिलाओं को रूटीन चेकअप करवाने के लिए डॉक्टर कहते है। ऐसे में आपको बिना लापरवाही किये डॉक्टर द्वारा दिए गए समय पर जांच करवानी चाहिए। ताकि आपको किसी भी तरह की परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान बचने में मदद मिल सके।

किसी शारीरिक परेशानी के अधिक होने पर

बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने के कारण गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कोई परेशानी अधिक हो जैसे की उल्टी अधिक आने लग जाए, थकान और कमजोरी का अनुभव हो, तनाव होने लगे, रक्तस्त्राव हो या आपको किसी भी कारण असहज महसूस हो। तो ऐसे में आपको घर पर इसका उपचार नहीं करना चाहिए, और न ही इसे इग्नोर करना चाहिए, बल्कि जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

शिशु की मूवमेंट कम होने पर

पांचवे महीने में गर्भवती महिला गर्भ में शिशु की हलचल को अच्छे से समझने लग जाती है, और जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है, वैसे वैसे शिशु ज्यादा हलचल करने लगता है। ऐसे में शिशु की हलचल कम होने लगे या आपको शिशु की हलचल महसूस न हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

दर्द की समस्या होने पर

यदि आपको पेट या पीठ में, सिर में, या शरीर के किसी अन्य भाग में अधिक दर्द महसूस हो, और असहनीय हो तो भी आपको एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेना चाहिए। क्योंकि शुरूआती दिनों में जहां पेट व् पीठ का दर्द गर्भपात का लक्षण होता है, वहीँ प्रेगनेंसी के बीच में इसका होना समयपूर्व प्रसव का लक्षण होता है, और आखिरी दिनों में यह लेबर पेन की तरफ इशारा कर सकता है।

डिलीवरी का समय पास आने पर

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में आपको डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए, क्योंकि लेबर पेन कब हो जाये इसका आपको पता नहीं होता है। ऐसे में आपको डॉक्टर से राय लेते रहना चाहिए ताकि डिलीवरी के समय आने वाली परेशानियों से बचने में आपको मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में यदि कोई दिक्कत हो

यदि आपको प्रेगनेंसी में किसी तरह की परेशानी हो, या आपको पहले से ही डॉक्टर ने सिजेरियन डिलीवरी करवाने के लिए कहा हो तो ऐसे में आपको जिस समय डॉक्टर ने मिलने के लिए कहा हो तभी आपको मिलना चाहिए।

तो यह है कुछ बातें जो यदि आपको महसूस हो तो आपको इस समय डॉक्टर से मिलना चाहिए और उनकी राय लेना चाहिए, साथ ही डॉक्टर से मिलने में कभी भी किसी भी तरीके की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इन टिप्स का इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली किसी भी परेशानी से बचने में मदद मिलती है।

Hindi Video : 1 to 9 Month Advice For Pregnancy Women

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तरबूज : आप सोच भी नहीं सकते की तरबूज खाने से ये भी फायदे होते है

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गर्मियों के दिनों में रिफ्रेशमेंट और प्यास भुजाने के लिए सभी तरबूज का सेवन करना पसंद करते है। सस्ता होने के साथ-साथ ये फल आपके स्वास्थ्य के लिए काफी गुणकारी भी होता है। जिसका मुख्य कारण होता है इसमें मौजूद पानी मी 92 % मात्रा। जो शरीर को बाहर चलने वाली लू और गर्मी के थपेड़ों से बचाने में मदद करती है। हालाँकि सर्दियों के दौरान लोग इसका सेवन कम कर देते है।यकीन गर्मियां आते-आते सभी के फ्रिज और किचन में ये फल देखने को मिलता है।

रेतीले और नदियों के किनारे उपजने वाले इस फल को पुरे भारत में बड़े चाव से खाया जाता है। ये फल काफी भारी होता है जो बाहर से हरा और अन्दर से लाल रंग का होता है। स्वाद में ये काफी मीठा होता है जो शरीर को ताजगी देने के साथ-साथ पेट भरने का भी अच्छा साधन है। इस प्राकृतिक देन में कई तरह विटामिन, मिनरल्स, एंटी ओक्सिडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते है। जो स्वास्थ्य के साथ-साथ आपके बालों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद है।

इसकी रेफ्रेशिंग प्रकृति के कारण आजकल तरबूज का इस्तेमाल कई लिपस्टिक, लिप ग्लॉस, एसेंस, शावर जेल और बॉडी fragrance आदि में भी किया जाता है। इसके अलावा भी तरबूज के कई फायदे है जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है। तो देर किस बात की! आइए जानते है त्वचा, स्वास्थ्य और बालों के लिए तरबूज के फायदे।

त्वचा के लिए तरबूज के फायदे :-

एक रेफ्रेशिंग फल होने के साथ-साथ ये एक रसीला फल भी है जो आपकी प्यास भुजाने का सबसे बेहतर तरीका है। इसमें विटामिन ए, सी और एंटी oxidents, की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो त्वचा के लिए बेहद जरुरी है। इसमें मौजूद पानी की उच्च मात्रा आपके शरीर को हाइड्रेट करके चमकदार त्वचा प्रदान करता है। तरबूज के विभिन्न फ़ायदे निम्नलिखित है-

1. बढती उम्र की निशानियाँ :

त्वचा में मौजूद फ्री रेडिकल्स बढती उम्र की निशानियों जैसे फाइन लाइन्स, झुर्रियां और दाग़-धब्बे का सबसे बड़ा कारण होता है। तरबूज में एंटी oxidents जैसे lycopene, Vitamin A और C की उच्च मात्रा पाई जाती है जो त्वचा के फ्री रेडिकल्स को समाप्त करने में मदद करती है। जिससे बढती उम्र की निशानियाँ भी कम हो जाती है। बेहतर परिणामों के लिए तरबूज को सीधे अपनी त्वचा पर लगायें या उसका सेवन करें।

2. प्राकृतिक टोनर :तरबूज के फ़ायदे

ये रसीला फल एक प्राकृतिक astringent है जो त्वचा में जान डालकर एक प्राकृतिक टोनर के रूप में कार्य करता है। बेहतर परिणामों के लिए, तरबूज की स्लाइस को अपनी त्वचा पर रगड़ें या उसे शहद के साथ मिलाकर त्वचा पर लगायें। अगर आपकी त्वचा तेलिय है तो अखरोट के पाउडर को तरबूज के उस में डालकर अपनी त्वचा और गर्दन पर इसका प्रयोग करें।

3. मॉइस्चराइज और हाइड्रेट स्किन :

त्वचा में हुई डिहाइड्रेशन उसे रुखा और डल बना सकती है। तो अगर आपकी त्वचा भी रुखी है तो तरबूज के साथ शहद मिलाकर उसका प्रयोग अपनी त्वचा पर प्रयोग करें। ये उसे मॉइस्चराइज करने के साथ-साथ हाइड्रेट भी रखेगा। साथ ही इसे अपनी डाइट में भी सम्मिलित करें ताकि त्वचा को ऊपरी सुरक्षा के साथ-साथ भीतरी सुरक्षा भी मिलें।

4. एक्ने :

एक्ने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए तरबूज एक बेहतर घरेलू उपाय है। अगर आपकी त्वचा पर भी बहुत से एक्ने और पिंपल होते रहते है तो रोजाना तरबूज से अपनी त्वचा पर मसाज करें। प्रयोग के लिए –

  • त्वचा को अच्छी तरह से साफ़ कर लें।
  • अब रुई को तरबूज के रस में डुबोएं।
  • इसका इस्तेमाल अपनी त्वचा पर करें।
  • 15 मिनट तक रखें।
  • उसके बाद ठंडे पानी से साफ़ कर लें।

5. अतिरिक्त तेल की समस्या :

तरबूज में विटामिन ए की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो त्वचा को स्वस्थ रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये त्वचा के रोमछिद्रों के आकार को कम करके sebaceous glands में होने वाले तेल के निर्माण को कम करने में भी मदद करता है।

6. सनबर्न :

सनबर्न होने पर भी तरबूज का इस्तेमाल काफी लाभदायक होता है। इसके लिए –

  • तरबूज और खीरे के पल्प को बराबर मात्रा में मिलाकर उसका फेस पैक तैयार कर लें।
  • अब इसे अपनी त्वचा पर अच्छे से लगा लें।
  • 20 मिनट तक लगे रहने दें। और बाद में धो दें।
  • ये न केवल सनबर्न को ठीक करने में मदद करेगा बल्कि त्वचा की रंगत को भी हल्का करेगा।

बालों के लिए तरबूज के फायदे :- 

बालों का स्वस्थ होना अच्छे स्वास्थ्य और सिस्टम पर निर्भर करता है. क्योंकि अगर शरीर में जरुरी नुट्रीएंट्स और मिनरल्स की कमी होगी तो उसका प्रभाव आपकी स्कैल्प और बालों पर पड़ेगा. जो बालों से सम्बन्धित विभिन्न समस्याएं जैसे बालाओं का झाड़ना, उनके पतलेपन, dandruff, दोमुंहे बाल को भी बढ़ा सकता है. और तरबूज में बहुत से तत्व पाए जाते है जो आपके बालों के लिए काफी लाभदायक होते है. वे फायदे निम्नलिखित है-

7. बालों को ग्रोथ :

तरबूज में phytonutrients की अच्छी मात्र पायी जाती है जिसे citrulline भी कहा जाता है. ये शरीर में arginine की मात्रा बढ़ाता है. Arginine एक तरह का एमिनो acid है जो स्कैल्प में रक्त के परिसंचरण को सुधारता है. जिससे बालों की ग्रोथ में भी मदद मिलती है. इसके अलावा इसमें मौजूद प्रोटीन और मिनरल्स बालों की ग्रोथ बढ़ाने में मदद करते है।

स्वास्थ्य के लिए तरबूज के फायदे :-

तरबूज में विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी 6, विटामिन बी 1, मैग्नीशियम और पोटैशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है। साथ ही इसमे कैलोरी भी बहुत कम मात्रा में पाई जाती है। स्वास्थ्य के लिए तरबूज के फायदे निम्नलिखित है-

8. हृदय संबंधी परेशानी :

फैट और कोलेस्ट्रॉल की कम मात्रा और एंटी oxidents से भरपुर डाइट हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करती है। तरबूज में एंटी oxidents की अच्छी मात्रा पाई जाती है। ये शरीर में histidine-arginine के लेवल को भी नियंत्रित करता है। लाल तरबूज lycopene नामक एंटी oxidents का बेहतर स्रोत्र है जो शरीर में फ्री रेडिकल्स के निर्माण को कम करता है। फ्री रेडिकल्स स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होते है जो रक्त वाहिकाओं में रक्त के थक्के जमाने का कार्य करते है जिसके परिणामस्वरूप हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। Lycopene प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को भी कम करता है।

9. हड्डियाँ मजबूत करे :

Lycopene हड्डियों को मजबूत करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Dietary lycopene तनाव को कम करने में मदद करता है जो osteoblasts और osteoclasts को भी घटाता है। इसीलिए lycopene युक्त खाद्य पदार्थ जैसे तरबूज आदि का सेवन करना चाहिए ये आपकी हड्डियों को मजबूत करने में भी मदद करेगा। इसके अलावा तरबूज में पोटैशियम भी पाया जाता है जो शरीर में कैल्शियम के निर्माण को बढाकर हड्डियों और जोड़ों को मजबूती प्रदान करता है।

10. डिहाइड्रेशन :

तरबूज में सोडियम और पोटैशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो पसीने के द्वारा बह जाता है। तो अन्य तरल पदार्थों के साथ-साथ तरबूज का सेवन भी शुरू कर दें ये शरीर में डिहाइड्रेशन के रिस्क को भी कम करेगा।

11. एंटी कैंसर :

एक फल होने के वजह से टमाटर की तुलना में तरबूज में lycopene की दुगनी मात्रा पाई जाती है। ये तत्व कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। जिससे स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, uterine cancer, lung cancer और colourectal cancer के खतरे को कम करता है। शोध में पाया गया है, तरबूज में पाए जाने वाले तत्व ब्रैस्ट कैंसर कोशिकाओं के निर्माण को भी रोकते है।

12. किडनी :तरबूज गर्मियों में वरदान है

एक प्राकृतिक diuretic के चलते, तरबूज किडनी को साफ़ करके पेशाब की गति को बढ़ाता है। इसके अलावा इसमें पोटैशियम भी पाया जाता है जो रक्त में यूरिक acid की मात्रा को कम करने में भी मदद अकर्ता है। इसके साथ ही ये गुर्दे की पथरी के जोखिम को कम करने भी मदद करता है।

13. ब्लड प्रेशर :

तरबूज में पाए जाने वाला पोटैशियम और maganese ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद करता है। जबकि इसमें मौजूद एंटी oxidents रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने और sclerosis से सुरक्षा देने में भी मदद करते है।

14. एंटी इंफ्लेमेटरी :

इस प्राकृतिक देन में flavonoids, carotenoids और triterpenoids तत्वों की उच्च मात्रा पाई जाती है जो सुजन और जलन को कम करने में मदद करते है। इसलिए कसरत के बाद एथलिट को भी तरबूज के रस का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो हृदय गति को सामान्य करके मांसपेशियों के दर्द में राहत देता है।

15. नींद :

तरबूज में पाया जाने वाले polysaccharide carbohydrates नींद को सुधारने में मदद करता है। जो शरीर में serotonin के उत्पादन को बढ़ाता है। इसके लिए रोज रात डिनर से पहले तरबूज के कुछ टुकड़ों का सेवन करें। ये आपकी नींद को बेहतर करने में मदद करेगा।

16. मोटापा :तरबूज के लाभ

तरबूज में पाए जाने वाला citrulline नामक तत्व वजन घटाने में भी मदद करते है। शरीर द्वारा absorb करने के बाद ये एमिनो acid arginine में बदल जाता है। जो मोटापा बढ़ाने वाले सेल्स के निर्माण को रोकता है। इसके साथ ही बॉडी के फैट को dissolve करने में भी मदद करता है।

17. आंखों के लिए :

तरबूज में beta-carotene की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो शरीर में पहुँचने के बाद विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है। ये आंखो के रेटिना में पिगमेंट्स के निर्माण को बढ़ाता है, जिससे नाईट ब्लाइंडनेस और आंखों से संबंधित समस्यायों को ठीक करने में मदद मिलती है। इसके अलावा विटामिन ए स्वस्थ त्वचा, दांत, और muscus membrane के लिए भी जरुरी है।

18. मधुमेह :

मधुमेह के लिए तरबूज न केवल एक सुरक्षित फल है अपितु उसे नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इसीलिए इसे अपनी नियमित डाइट में सम्मिलित कर लें। इसके अलावा तरबूज में कई जरुरी नुट्रीएंट्स भी पाए जाते है जो शरीर के लिए बेहद लाभकारी होते है।

19. पानी का प्रतिस्थापक :

तरबूज की 92 % मात्रा पानी ही होती है। और इसके भूख मिटने वाले गुणों को हम कैसे भूल सकते है। किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ का सेवन करने से बेहतर है की इस फल का सेवन किया जाए। ये हम सभी जानते है की दिन भर में पानी का सेवन करना कितना महत्वपूर्ण होता है लेकिन क्या आप जानते है की तरबूज पानी का एक बेहतर प्रतिस्थापक है। जो आपको हाइड्रेट करने के साथ-साथ एनर्जी भी प्रदान करेगा।

तो इस गर्मी स्वाद के साथ-साथ आपनी सेहत और त्वचा को भी सुन्दर बनाएं और दिल खोलकर तरबूज का सेवन करें। हालाँकि इसके अधिक सेवन से दस्त आदि की समस्या भी हो सकती है। तो सेवन थोडा संभलकर कर करें। ताकि आपकी त्वचा तो स्वस्थ रहे ही साथ-साथ आपका स्वस्थ भी अच्छा रहे।

प्रेगनेंसी का तीसरा महीना

गर्भवस्था का तीसरा महीना

प्रेग्नेंसी का समय बढ़ने के साथ- साथ गर्भवती महिला की परेशानियां भी बढ़ने लगती है। साथ ही इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु का विकास कितना हो गया है इसे जानने के लिए भी उत्सुक रहती है। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में कुछ शारीरिक परेशानियां भी बढ़ सकती हैं जैसे की गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण, HCG हॉर्मोन का उत्पादन तेजी से होने के कारण बार बार यूरिन आने की समस्या, मॉर्निंग सिकनेस, ज्यादा थकान व् कमजोरी का अनुभव होना, नींद अधिक आना, हार्मोनल बदलाव के कारण, पाचन क्रिया धीमी होने के कारण कब्ज़ की समस्या का बढ़ना, पैरों में ऐंठन व् दर्द महसूस होना, पेट व् कमर में दर्द रहना, बार-बार खाने की इच्छा होना या भूख में कमी, मूड स्विंग्स आदि। ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी ज्यादा केयर करनी चाहिए ताकि शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी न आए। साथ ही इस महीने में आप चाहे तो डॉक्टर की मदद से शिशु के दिल की धड़कन को भी सुन सकती है।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु का विकास

इस महीने में शिशु का आकार लगभग एक बड़े नींबू के जितना हो जाता है। साथ ही शिशु के लगभग सभी अंग बन जाते हैं जैसे की हाथ, पैर, उंगलियां, अंगूठे, सिर, दांतों का विकास, किडनी, आँखे आदि, लेकिन अभी शिशु की स्किन बहुत नाजुक, मुलायम, पतली होती है। इस समय शिशु की बॉडी में ब्लड फ्लो भी बेहतर तरीके से होने शुरू हो जाता है। इसके अलावा शिशु गर्भ में हिचकियाँ लेना, मुट्ठी खोलना व् बंद करने जैसी हरकतें भी कर सकता है।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में शिशु का वजन

गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु का वजन लगभग अठाइस (28) ग्राम तक हो जाता है। और इस समय शिशु की लम्बाई लगभग 2 से 3 इंच तक हो जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपने खान पान का खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भ में शिशु के विकास को तेजी से बढ़ने में मदद मिल सके।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में क्या खाएं क्या नहीं

प्रेग्नेंट महिला को इस दौरान अपने खान पान पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत होती है, क्योंकि इस समय गर्भ में शिशु के अंग विकसित हो चुके होते हैं, और अब उन्हें बेहतर शारीरिक विकास की जरूरत होती है। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में गर्भवती महिला को अपनी डाइट में किन किन चीजों को शामिल करना चाहिए और किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में क्या खाएं

आयरन व् फोलेट: गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु के सिर का विकास सबसे ज्यादा होता है ऐसे में दिमाग के बेहतर विकास के लिए बॉडी में आयरन और ब्लड की मात्रा का पूरा होना बहुत जरुरी होता है ताकि शिशु के मस्तिष्क के विकास में किसी भी तरह की कमी न आए। ऐसे में महिला को हरी पत्तेदार सब्जियों, चुकंदर, अनार, संतरा, अंडे, ओटमील, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

डेयरी प्रोडक्ट्स: कैल्शियम व् प्रोटीन की मात्रा को बॉडी में भरपूर होने के कारण शिशु की मांसपेशियों और हड्डियों के बेहतर विकास में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को डेयरी प्रोडक्ट्स यानी दूध व् दूध से बनी चीजों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

विटामिन B6: प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में गर्भवती महिला को जी मिचलाने की समस्या अधिक हो सकती है ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को विटामिन B6 युक्त पदार्थ जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे आदि को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

तरल पदार्थ: बॉडी को हाइड्रेट रखने के लिए महिला को भरपूर मात्रा में पानी पीने के साथ नारियल पानी, ताजे फलों के रस का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि इससे बॉडी में पानी की कमी को पूरा करने के साथ सभी जरुरी विटामिन्स भी बॉडी को मिलते हैं।

कार्बोहाइड्रेट: गर्भवती महिला को इस दौरान थकान व् कमजोरी अधिक महसूस हो सकती है ऐसे में बॉडी में ऊर्जा की मात्रा को पर्याप्त बनाए रखने के लिए महिला को कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थ जैसे की आलू, चावल, आटे की ब्रेड आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

गर्भवस्था के तीसरे महीने में क्या नहीं खाएं

अधपका मीट व् कच्चे अंडे: अधपका मीट नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसके कारण पेट सम्बन्धी समस्या होने के साथ गर्भपात होने का भी खतरा रहता है। साथ ही कच्चे अंडो के सेवन से भी परहेज करना चाहिए क्योंकि यह भी महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

जंक फ़ूड: बाहर का खाना, मसालेदार व् तेलीय भोजन, कटे पड़े फल, स्ट्रीट फ़ूड, चाइनीज़ खाना आदि के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि यह गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकते हैं।

डिब्बाबंद आहार: डिब्बाबंद आहार ज्यादा दिन चल सके इसके लिए इसमें कुछ अलग तरह के केमिकल मिलाएं जाते हैं जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में महिला को इन्हे सेवन से भी परहेज रखना चाहिए।

सी फूड : प्रेग्नेंट महिला को सी फूड नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें मर्करी की मात्रा अधिक होती है जो की भ्रूण के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

नशा: शराब, तम्बाकू, धूम्रपान से भी इस दौरान महिला को परहेज रखना चाहिए। क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आ सकती है।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में क्या करे क्या नहीं

गर्भावस्था की पहली तिमाही बहुत ही ज्यादा मुश्किलों से भरी होने साथ बहुत ही नाजुक भी होती है। क्योंकि इस दौरान बरती गई लापरवाही के कारण महिला का गर्भपात हो सकता है। ऐसे में महिला को हर छोटी छोटी बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। ताकि महिला के स्वास्थ्य और गर्भ में शिशु को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचें। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में गर्भवती महिला को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में क्या करना चाहिए

  • डॉक्टर से चेकअप करवाने जरूर जाएँ। जिसमे वजन व् ब्लड प्रैशर की जांच करवाना सबसे जरुरी होता है।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाइयों का सेवन समय से करें।
  • प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में डॉक्टर अल्ट्रासॉउन्ड के लिए भी बोल सकते हैं, तो अपना स्कैन भी समय से करवाएं।
  • खान पान का ध्यान रखे, नींद भरपूर लें, जितना हो सके बॉडी को आराम दें, तनाव न लें, और कोई भी असहज लक्षण महसूस होने पर एक बार डॉक्टर से राय जरूर लें।
  • तनाव की समस्या से बचने के लिए आप मैडिटेशन कर सकते हैं क्योंकि इससे आपको आराम भी महसूस होता है।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में क्या नहीं करें

  • इस समय गर्भपात होने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं ऐसे में महिला को यात्रा करने से बचना चाहिए।
  • खाने में लापरवाही न करें।
  • वजन के बढ़ने के डर से डाइटिंग न करें।
  • तनाव से बचें।
  • शारीरिक श्रम अधिक न करें।
  • आराम करने से परहेज न करें।
  • जितना हो सके बेड रेस्ट करें।
  • ज्यादा चहलकदमी न करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के तीसरे महीने से जुडी सम्पूर्ण जानकारी ऐसे में गर्भवती महिला को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। और किसी भी तरह की लापरवाही करने से बचना चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलने के साथ गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को बेहतर रहने में भी मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में व्हाट्सएप का प्रयोग कितना खतरनाक होता है जानिए

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गर्भावस्था में व्हाट्सएप की आदत

दोस्तों, क्या आप भी अपनी प्रेगनेंसी में घंटों सोशल मीडिआ पर बिताती हैं? क्या आप भी अपने दिन का काफी समय व्हाट्सएप, फेसबुक आदि पर बिताती हैं? तो हो सकता है ये आपके आने वाले शिशु की सेहत और उसकी मानसिकता पर गहरा प्रभाव डालें। जी हां, रीसर्च में पाया गया है जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स या स्मार्टफोन आदि का ज्यादा इस्तेमाल करती है उनके बच्चों का मानसिक विकास अन्य बच्चों की तुलना में धीमी गति से होता है।

इतना ही नहीं स्मार्टफोन पर अधिक समय तक व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर ऑनलाइन रहने से आपके मस्तिष्क पर भी असर पड़ता है जो आपके गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर असर डालता है। प्रेगनेंसी के दौरान व्हाट्सएप के इस्तेमाल से मोबाइल का रेडिएशन तो खराब होता है लेकिन व्हाट्सएप से आने वाला सामाजिक रेडिएशन भी आपके मन और मूड को खराब कर सकता है। इसलिए आज हम आपको यह बताने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी में व्हाट्सएप का इस्तेमाल आपके और आपके शिशु के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।

मोबाइल का रेडिएशन

प्रेगनेंसी में व्हाट्सएप
प्रेगनेंसी में व्हाट्सएप

आज के जीवन में भले ही मोबाइल सबसे जरुरी अंग हो, लेकिन गर्भावस्था के दौरान इसके इस्तेमाल के समय काफी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि मोबाइल पर व्हाट्सएप चलाने से आँखों, दिमाग और हाथों तीनों पर असर पड़ता है और रिसर्च में ये पाया गया है की मानसिक समस्याएं जैसे सिरदर्द, सिर में झनझनाहट, थकान, डिप्रेशन, अनिद्रा, चक्कर आने जैसी समस्याएं पोषण की कमी के अलावा मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से हो सकती हैं।

वहीं गर्भावस्था के दौरान मोबाइल का प्रयोग करने से इसका असर आपके मस्तिष्क को भी प्रभावित कर   सकता है और जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। दरअसल मोबाइल आदि गैजेट्स में से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगे निकलती है जो बच्चे के स्वास्थ्य और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करती है। इसलिए जितना हो सकता प्रेगनेंसी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कालिंग आदि करने के लिए आप कुछ समय तक मोबाइल का यूज कर सकती हैं लेकिन स्मार्टफोन पर सोशल मीडिया या व्हाट्सएप चलाने के लिए आप मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करें।

सामाजिक रेडिएशन

गर्भावस्था के दौरान व्हाट्सएप का अधिक इस्तेमाल करने से केवल मोबाइल का रेडिएशन ही नहीं बल्कि सामाजिक रेडिएशन भी आपके और आपके शिशु के लिए अच्छा नहीं होता। इसलिए यहाँ हम आपको प्रेगनेंसी में व्हाट्सएप के इस्तेमाल करने से होने वाले सामाजिक रेडिएशन के बारे में बता रहे हैं।

शेयर की गयी पिक्स मन को विचलित कर सकती है

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और सोशल मीडिया आजकल लोगों की आम दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। छोटी से छोटी बात को भी लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर देते है, जो आपके स्टेटस को ढेरों व्यूज तो दिलवा देता है लेकिन आपके मन को पूरी तरह खराब कर देता है। आपने भी देखा होगा अक्सर दोस्त अपने टूर, पार्टी, या किसी अन्य फंक्शन की फोटो जब भी सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर शेयर करते हैं तो आपके मन में सबसे पहला ख्याल यही आता है की काश! मैं भी वहां होती। लेकिन कहीं न कहीं आपके मन में पुरे दिनभर उसकी सारी फोटोज घूमती रहेंगी। और आप पुरे दिन उसके बारे में सोचती रहेंगी। जिसका सीधा प्रभाव आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क पर पडेगा, इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान जितना हो सके सोशल मीडिया से दूर रहें क्यूंकि ये सिर्फ आपको परेशान करने का काम करता है।

शेयर किये गए मैसेज डालते है नकारत्मक प्रभाव

सोशल मीडिया या व्हाट्सएप ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ लोग अच्छी और बुरी दोनों तरह की चीजें और बातें शेयर करते हैं। जहाँ अच्छे मैसेज आपके पुरे दिन को खुशनुमा बना देते है वहीं कुछ गलत और खराब मैसेज आपके दिमाग पर नेगेटिव प्रभाव डाल सकते हैं। इसके अलावा आजकल व्हाट्सएप पर नेगेटिव चीजें बहुत ज्यादा फॉरवर्ड होती हैं। ऐसे में आपको चाहिए की जितना हो सके प्रेगनेंसी में व्हाट्सएप से दूर रहें। क्योंकि गलत मैसेज से आपका मन खराब हो सकता है, और दुखी व् खराब मन बच्चे की सेहत को बहुत प्रभावित करता है।

प्रोफाइल पिक्स से इर्षा

व्हाट्सएप पर लगी प्रोफाइल पिक भले ही दोस्तों और रिश्तेदारों को खुश करने के लिए लगाई जाती हैं, लेकिन कहीं न कहीं ये प्रोफाइल पिक आपके मन में इर्षा की भावना ला सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान वैसे भी काफी मूड स्विंग्स होते हैं, ऐसे में लोगों की अच्छी-अच्छी प्रोफाइल पिक देखकर हो सकता है आपको इर्षा हो। जिसके कारण आपके गर्भ में पल रहे बच्चे का स्वभाव भी इस तरह का हो सकता है। इसलिए जितना हो सके व्हाट्सएप या दूसरे सोशल मीडिया से दूर रहें।

अधिक समय तक व्हाट्सएप पर रहना

कई घंटों तक व्हाट्सएप पर रहना आपकी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है, क्योंकि मोबाइल स्क्रीन को लगातार लंबे समय तक देखते रहने से आपकी आँखों पर असर पड़ सकता है, आपके दिमाग में इरिटेशन हो सकता है। लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन को देखने से आँखों पर बहुत प्रेशर पड़ता है जिससे आपके शिशु के स्वास्थ्य और दिमाग पर असर पड़ सकता है।

अब आप अच्छी तरह समझ गई होंगी की प्रेगनेंसी में व्हाट्सएप का इस्तेमाल कितना खतरनाक होता है। ये सिर्फ आपके मन को ही नहीं खराब करता बल्कि आपके आने वाले शिशु के व्यक्तित्व को भी खराब कर देता है। इस तरह की स्थितियों में शिशु कई बार चिड़चिड़ा, गुस्सैल बन जाता है इसलिए जितना हो सके गर्भावस्था में प्रेगनेंसी से दूर रहें।

बकरी के दूध के चमत्कारिक फायदे

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गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट, हाथी, गधा, घोड़ा आदि सभी दूध देते हैं, और सभी के दूध का अपना अलग अलग इस्तेमाल भी है, आज हम बकरी के दूध के बारे में आपको कुछ खास चमत्कारिक फायदे बताने जा रहे हैं, बकरी का दूध पीने से आपके बहुत से रोगो का उपचार होता है, क्योंकि इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, सेलेनियम, भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढाकर आपको रोगो से बचाने में मदद करता है, इसके अलावा यदि किसी कारण शिशु को माँ का दूध नहीं मिलता है, तो उसके लिए बकरी का दूध अधिक तुल्य होता है, क्योंकि इससे बच्चे को भरपूर पोषण मिलता है, साथ ही शिशु इसे आसानी से पचा भी लेता है, और इसमें प्रोटीन, लिपिड, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज, फैटी एसिड भी पाएं जाते है, जो शिशु को भरपूर पोषण देने में आपकी मदद करते हैं, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की बकरी के दूध को पीने से कौन कौन से फायदे होते हैं।

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आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है:-

बकरी के दूध का सेवन करने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें पाया जाने वाला सेलेनियम आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएं रखने में मदद करता है, और आपको रोगो से बचाता है, एड्स के रोगी की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है, इसीलिए डॉक्टर उसे बकरी का दूध पीने की सलाह देते है, क्योंकि यह उसे रोग से लड़ने के लिए शक्ति देता है, और साथ ही यह उसे आसानी से पच भी जाता है।

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डेंगू से बचाव के लिए है रामबाण उपाय:-

डेंगू, चिकनगुनिया जैसे रोगो से आपको बचाने में बकरी का दूध बहुत ही लाभदायक होता है, इस परेशानी के होने पर रोगी के शरीर में प्लेटलेट्स कम हो जाते है, और बकरी का दूध पीने से आपके शरीर में होने वाली प्लेटलेट्स की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है, साथ ही आपकी प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद मिलती है, इसके अलावा अतिसार, रक्त पित्त, क्षय, खांसी, आदि को भी ठीक करने में मदद मिलती है।

शिशु के लिए बकरी के दूध के फायदे:-

अगर कहा जाए की बकरी का दूध माँ के दूध के जैसा होता है, तो गलत नहीं होगा यदि किसी शिशु को माँ का दूध नहीं मिल पाता है, तो उसे यदि बकरी का दूध दिया जाएँ तो वह शिशु को आसानी से पच भी जाता है, और इससे शिशु को भरपूर पोषण मिलता है ।

त्वचा के लिए भी है फायदेमंद:-

आपकी स्किन के लिए भी बकरी का दूध बहुत अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि बकरी के दूध का ph स्तर भी आपकी स्किन के जितना ही होता है, जो की आपकी स्किन पर होने वाली झुर्रियों, दाग धब्बो से बचने में आपकी मदद करता है, इसके लिए आप इसका सेवन करने के साथ अपने चेहरे पर भी लगा सकते है।

दिल के रोगो से बचाव करता है बकरी का दूध:-

हदय सम्बन्धी बीमारियों से आपको बचाने में भी बकरी का दूध आपकी बहुत अधिक मदद करता है, क्योंकि इसमें मौजूद फैटी एसिड आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित करने में आपकी मदद करते हैं, और इसके सेवन से आपको दिल के दौरे, स्ट्रोक, और भी कई प्रकार की परेशानी से बचाने में मदद मिलती है।

बालों को पोषण मिलता है:-

बकरी के दूध से यदि आप अपने बालों में लगाते हैं, तो ऐसा करने से आपको बालों को रेशमी, मुलायम, और चमकदार बनाने में मदद मिलती है, साथ ही आपको यदि बालों के झड़ने की समस्या है तो उससे भी बचाव होने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें मौजूद पोटैशियम, विटामिन बी 2, फॉस्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम बालों को मजबूती देने में आपकी बहुत मदद करता है।

हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है:-

ज्यादातर लोग हड्डियों की मजबूती के लिए गाय के दूध को अपनी पहली पसंद मानते हैं, क्योंकि इसमें कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है, लेकिन आपको ये जानकार हैरानी होगी की बकरी के दूध में गाय के दूध से भी अधिक मात्रा में कैल्शियम पाया जाता हैं, कैल्शियम के साथ इसमें एमिनो ट्रीप्टोफन भी मौजूद होता है, और यह हड्डियों के साथ आपके दांतों को भी मजबूती मिलती है, और आपके शरीर के अन्य अंगो को भी यह भरपूर पोषण मिलता है।

मोटापा कम करने में मदद करता है:-

बढ़ता वजन हर दूसरे व्यक्ति की समस्या बना हुआ है, लेकिन यदि आप नियमित बकरी का दूध पीते हैं तो इसमें मौजूद फैटी एसिड आपके शरीर में जमी हुई अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करते है, और नियमित इसके सेवन से आपके शरीर का बढ़ा हुआ वजन भी धीरे धीरे कम होने लगता है।

बकरी के दूध से मिलने वाले ने फायदे:-

  • बकरी के दूध का सेवन नियमित रूप से करने पर आपको ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।
  • इसके सेवन से आपकी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, जिससे आपको पेट सम्बन्धी बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।
  • विटामिन ए की मात्रा की मात्रा की अधिकता होने के कारण यह आपकी आँखों की रौशनी को भी बढ़ाने में मदद करती है।
  • उलटी, दस्त, आदि की समस्या से राहत दिलाने में भी यह आपकी बहुत मदद करता है।
  • बढ़ती उम्र में बच्चे के अच्छे से शारीरिक विकास के लिए आपको बकरी का दूध बच्चों को जरूर पिलाना चाहिए।
  • शुगर के रोग से भी राहत दिलाने में मदद मिलती है।
  • कैंसर जैसे रोग से बचाव करने में भी यह आपकी बहुत अधिक मदद करता है।
  • बकरी का दूध एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर होता है, जो की शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाली जलन व् सूजन की समस्या से राहत मिलती है, इसके लिए आपको दिन में एक गिलास बकरी का दूध जरूर पीना चाहिए।

तो ये हैं कुछ फायदे जो आपको बकरी के दूध का सेवन करने से होते है, इसीलिए यदि आप इसे रोजाना पीना चाहते है, तो इससे आपको बहुत फायदा मिलता है।

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सातवें या आठवें महीने में डिलीवरी होने के क्या कारण होते हैं?

समय पूर्व प्रसव

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। पहली तिमाही में शुरुआती समय होने के कारण थोड़ी सी भी लापरवाही के कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीँ प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही भी महिला के लिए बहुत अहम होती है। क्योंकि इस दौरान महिला का वजन बढ़ जाता हैं, शिशु का विकास तेजी से बढ़ रहा होता है ऐसे में महिला यदि थोड़ी सी भी लापरवाही करती है तो इसके कारण समय पूर्व प्रसव यानी समय से पहले शिशु का जन्म होने का खतरा रहता है। और यदि शिशु का जन्म समय से पहले हो जाता है तो शिशु को वजन में कमी, रोगो के लगने का डर, जन्म के समय होने वाली बीमारियों का खतरा, जैसी समस्या का सामना कारण पड़ सकता है, साथ ही ऐसा होने के कारण महिला को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

समय पूर्व प्रसव के कारण

गर्भवस्था के दौरान महिला को डिलीवरी के लिए एक तिथि दी जाती है और उस तिथि के आस पास शिशु का जन्म होने के चांस सबसे अधिक होते हैं। लेकिन कई बार महिला की दिए गए समय से पहले यानी सातवें या आठवें महीने में ही महिला का प्रसव हो जाता है, और हर महिला को एक ही वजह से समय पूर्व प्रसव की समस्या हो ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है। बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को समय पूर्व प्रसव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की महिला को समय पूर्व प्रसव होने का क्या कारण होता है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना जरुरी होता है क्योंकि इसका कारण गर्भ में शिशु के विकास का होना होता है। लेकिन यदि महिला का वजन तेजी से बढ़ने के साथ जरुरत से ज्यादा बढ़ने लगे तो इसके कारण न केवल प्रेगनेंसी के दौरान महिला की कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ती है बल्कि इसके कारण समय पूर्व प्रसव का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा यदि महिला का वजन बहुत कम भी होता है तो भी महिला को यह समस्या हो सकती है।

जल्दी प्रेगनेंसी

जिन महिलाओं को पहले शिशु के जन्म के बाद बहुत जल्दी प्रेगनेंसी हो जाती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि हो सकता है की गर्भाशय में कमजोरी हो, महिला शारीरिक रूप से फिट न हो, ऐसे में भी समय से पहले शिशु के होने के चांस बढ़ सकते हैं।

अनुवांशिक

यदि आपके घर में या आपको ही पहले समय पूर्व प्रसव हुआ है तो भी दूसरी बार आपको यह समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला को इस परेशानी से बचने के लिए अपना बहुत ज्यादा ख्याल रखने की जरुरत होती है।

एक से ज्यादा शिशु

कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान जुड़वां या तीन बच्चों को इक्कठे जन्म दे सकती है, ऐसे में यदि महिला के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होते हैं। तो भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ब्लीडिंग की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत सी परेशानियों का सामना कर सकती है। ऐसे में कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग की समस्या से भी परेशान हो सकती है। और यदि कोई भी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही में साथ तीसरी तिमाही में भी रक्तस्त्राव की समस्या से परेशान होती है तो इसके कारण भी महिला को समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

महिला को होने वाली शारीरिक परेशानियां

गर्भवस्था के दौरान यदि कोई महिला हाई ब्लड प्रैशर, किसी तरह के संक्रमण आदि से अधिक परेशान रहती है। तो यदि महिला की यह सब परेशानियां अधिक बढ़ जाती है तो इसके कारण भी महिला को समय से पहले शिशु के जन्म के होने का खतरा रहता है।

शिशु का नीचे की तरफ होना

यदि पूरी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु का भार नीचे की तरफ होता है तो ऐसा होने के कारण महिला को पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी जाती है। ताकि महिला या शिशु को किसी भी तरह की परेशानी न हो। लेकिन यदि महिला ऐसे में अपना ख्याल अच्छे से नहीं रखती है तो इसके कारण समय से पहले प्रसव पीड़ा होने का डर रहता है।

आयरन की कमी

जिन गर्भवती महिला में प्रेगनेंसी के दौरान आयरन की कमी होती है उन महिलाओं को भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और केवल महिला ही नहीं इसके कारण शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में आयरन लेने की सलाह दी जाती है।

गर्भाशय

इन्फेक्शन या किसी अन्य कारण की वजह से महिला का गर्भाशय यदि कमजोर होता है, ऐसे में शिशु के बढ़ते वजन के कारण गर्भाशय का मुख समय से पहले खुलने की आशंका रहती है। जिसके कारण भी महिला को समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

डॉक्टर की राय

कई बार गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल कम होने लगती है, शिशु का विकास रुक जाता है, शिशु को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, या गर्भ में शिशु को कोई समस्या होती है तो कुछ केस में डॉक्टर भी समय से पहले ही महिला को डिलीवरी करवाने की राय दे सकते हैं।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा रहता है, ऐसे में यदि आप गर्भवती है तो आपको ऐसी कोई परेशानी न हो इसके लिए आपको अपना बेहतर तरीके से ख्याल रखने के साथ डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए ताकि कोई भी परेशानी होने से बचने में मदद मिल सके। और समय पूर्व प्रसव के खतरे से बचने के साथ जन्म के बाद शिशु और महिला दोनों को ही हर तरह की समस्या से सुरक्षित रखने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के एक से तीन महीने तक सम्बन्ध बनाने में क्यों मनाही होती है

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध क्यों नहीं बनाना चाहिए, प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए एक बहुत ही नाजुक दौर होता है। इसीलिए महिला या शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इससे बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। और यह सलाह केवल खान पान को लेकर ही नहीं बल्कि महिला की शारीरिक गतिविधियों को लेकर भी जुडी होती है।

ऐसे में प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने को लेकर भी बहुत से लोग अलग अलग तर्क भी सामने रखते हैं। लेकिन फिर भी कपल इस बात को लेकर डर में रहते हैं की कहीं प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से शिशु को किसी तरह की दिक्कत तो नहीं होगी। और इस बात को वो डॉक्टर से शेयर करने में भी हिचकिचाते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने को लेकर कुछ बातें करने जा रहें हैं।

क्या प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बना सकते हैं?

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला के शरीर में होने वाले बदलाव के कारण महिला परेशान हो सकती है। हालाँकि इस दौरान कुछ गर्भवती महिलाओं की सम्बन्ध बनाने की इच्छा बढ़ जाती है। लेकिन इस डर के कारण कहीं किसी तरह की दिक्कत न हो महिला सम्बन्ध बनाने से परहेज कर सकती है। जबकि सच तो यह हैं यदि प्रेगनेंसी में कोई कम्प्लीकेशन नहीं है, महिला स्वस्थ है, महिला सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार है, पूरी सावधानी के साथ कपल सम्बन्ध बना रहा है तो प्रेगनेंसी के सम्बन्ध बनाया जा सकता है।

क्या सम्बन्ध बनाने से शिशु को किसी तरह का नुकसान होता है?

गर्भावस्था के दौरान शिशु एमनियोटिक फ्लूड और गर्भाशय में सुरक्षित होता है। ऐसे में पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ और होश में यदि प्रेग्नेंट महिला सम्बन्ध बनाती है। तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। लेकिन सम्बन्ध बनाने से पहले एक बात डॉक्टर की रे जरूर लेनी चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंट महिला स्वस्थ है या नहीं इसके बारे में डॉक्टर से बेहतर आपको कोई नहीं बता सकता है।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने की क्यों मनाही होती है?

प्रेगनेंसी के पहला महीना तो कब गुजर जाता है पता भी नहीं चलता है क्योंकि पीरियड्स मिस होने के बाद ही आपको गर्भावस्था का पता चलता है। लेकिन दूसरे और तीसरे महीने में सम्बन्ध क्यों नहीं बनाना चाहिए आइये जानते हैं।

शुरुआत होती है प्रेगनेंसी की

  • गर्भाशय में शिशु के प्रत्यारोपण के बाद यह समय बहुत ही नाजुक होता है।
  • क्योंकि इस दौरान शिशु का शुरूआती विकास शुरू हो रहा होता है।
  • ऐसे में सम्बन्ध बनाने से किसी तरह की दिक्कत न हो या कपल से कोई गलती न हो जाएँ।
  • इसीलिए प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में डॉक्टर्स सम्बन्ध न बनाने की सलाह देते हैं।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होता है गर्भपात का होता है खतरा

  • वैसे तो गर्भाशय में शिशु सुरक्षित होता है।
  • लेकिन पहली तिमाही में यदि आप गलती से थोड़ी तेजी कर देते हैं।
  • तो इसके कारण ब्लीडिंग होने का खतरा रहता है।
  • ब्लीडिंग यदि जरुरत से ज्यादा होने लग जाए तो ऐसे में गर्भपात होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

महिला को हो सकती है दिक्कत

  • प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में गर्भवती महिला की बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से हो रहे होते हैं।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी शारीरिक के साथ मानसिक परेशानी का अनुभव हो सकता है।
  • ऐसे में यदि महिला सम्बन्ध बनाती है तो इसके कारण महिला की दिक्कतें ज्यादा बढ़ सकती है।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होता है संक्रमण का खतरा

  • यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में या कभी भी बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाती है।
  • तो इसके कारण महिला को संक्रमण का खतरा रहता है।
  • और संक्रमण का बढ़ना शिशु पाए भी असर डाल सकता है।
  • ऐसे में जितना हो सके प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने से जुड़े कुछ खास टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं? और और प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने को लेकर परेशान है तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गर्भावस्था में दूध का रिप्लेसमेंट क्या होता है?

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गर्भावस्था में हमारे शरीर में बहुत से बदलाव होते है। प्रेगनेंसी में अक्सर हमारे शरीर में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन्स की कमी हो जाती है। जिसके लिए घर के सभी बड़े हमे दूध और दूध से बनी चीजें खाने की सलाह देते है।

कुछ महिलाओं को दूध पीना बिलकुल पसंद नहीं होता पर गर्भावस्था के दौरान बेमन से दूध पीना ही पड़ता है। ऐसे में कभी कभी दूध या दूध से बना भोजन पचने में परेशानी होने लगती है। नतीजे स्वरूप गर्भवती महिला और गर्भ में पलने वाले शिशु का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। दूध से हमे सबसे ज्यादा कैल्शियम मिलता है। यह सिर्फ गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि शिशु की भी हड्डियों को मजबूत बनाता है।

अगर आपके साथ भी कुछ ऐसी ही स्थिति है तो घबराइए मत हम आज आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे जिन्हें खाने से गर्भावस्था के दौरान दूध पिने की जरुरत नहीं पड़ेगी या यु कहें की दूध ना पिने से जो पोषक तत्वों की कमी हो जाती है वो कैसे पूरी करें।

गर्भावस्था में दूध का रिप्लेसमेंट क्या है ?

  • दूध से हमे सबसे ज्यादा कैल्शियम मिलता है। दूध ना पिने से प्रेगनेंसी में कैल्शियम की कमी हो जाती है। रोज़ाना 10-12 भीगे हुए बादामों का छिलका उतार कर खाने से भी कैल्सियम की कमी पूरी हो जाती है।
  • ओटमील कैल्शियम से भरपूर होता है, प्रेगनेंसी में ओटमील का नियमित सेवन करने से कैल्शियम की कमी नहीं होंगी।
  • बीन्स में सिर्फ कैल्शियम ही नहीं बल्कि प्रोटीन की भी भरपूर मात्रा होती है गर्भावस्था में बीन्स को नियमित रूप से सलाद या सब्जी में ले सकते है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अगर दूध नहीं पीना चाहते तो रोज़ाना दो संतरे खाने से भी कैल्शियम पा सकते है।
  • जो गर्भवती महिलाये लेक्टॉस एलर्जी के कारण दूध नहीं पी पाती है, ऐसे में वह महिलायें सोया मिल्क का सेवन कर सकती है।
  • सफ़ेद तिल भी कैल्शियम से भरपूर होता है, 1 स्पून में 88 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। गर्भवती महिलाये सफ़ेद तिल के लड्डू का सेवन कर सकती है।
  • जो महिलायें नॉनवेज खाती है, वह दूध के स्थान पर फिश से भी कैल्शियम पा सकती है।
  • गर्भावस्था में हरी पत्तेदार सब्जिया खाने से भी दूध ना पिने के कमी पूरी होती है।

गर्भावस्था के दौरान एक बैलेंस्ड डाइट ही आपको सभी पोषक तत्व देती है, पर फिर भी अगर आप दूध नहीं पी पा रहें है या दूध से एलर्जिक है तो ऊपर बताये गए प्रदार्थो का सेवन कर दूध की कमी को पूरा कर सकते है।

डायबिटीज के लक्षण क्या होते है?

डायबिटीज आज के समय में होने वाली सबसे आम समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। वैसे तो डायबिटीज कोई हानिकारक बिमारी नहीं है, परंतु यदि समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो यह आपके शरीर के लिए दुखदाई हो सकती है। बहुत से लोगों की इस बीमारी का पता शुरुवात में ही लग जाता है जबकि कुछ को काफी समय तक इसकी भनक भी नहीं लगती और तब तक यह बिमारी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी होती है।

वास्तव में डायबिटीज, लोगों लाइफस्टाइल से जुडी एक वंशानुगत बिमारी है। जब शरीर की पैंक्रियाज नामक ग्रंथि इंसुलिन का निर्माण करना बंद कर देते है तब डायबिटीज की समस्या होती है। दरअसल, इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोस को नियंत्रित करने में मदद करता है और जब शरीर में इंसुलिन का निर्माण होना बंद हो जाता है तो रक्त में ग्लूकोस की मात्रा अधिक हो जाती है जिससे मधुमेह होता है। वैसे तो इस बीमारी का कोई पुक्ता इलाज नहीं है परन्तु यदि समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए तो इसे कम किया जा सकता है। यहां हम आपको डायबिटीज के मुख्य लक्षणों को बता रहे है जिनकी मदद से मधुमेह की बीमारी को आसानी से पहचाना जा सकता है।

डायबिटीज के क्या-क्या लक्षण होते है?

1. अनुवांशिक कारण :

यदि आपके परिवार के किसी भी अन्य सदस्य को मधुमेह की समस्या रही हो तो आपको सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि यह एक अनुवांशिक बिमारी है और हो सकता है यह बीमारी आपको भी हो जाए। इसीलिए सचेत रहे और समय समय पर रक्त जाँच कराते रहे।

2. वजन का कम होना :

मधुमेह यदि शुरुवाती स्टेज में है तो व्यक्ति का वजन बहुत तेजी से कम होने लगता है। इस स्थिति में सामान्य दिनों की अपेक्षा आदमी का वजन एकदम से कम होने लगता है। अगर आपको यह लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टरी जाँच कराएं।

3. तबियत खराब रहना :

डायबिटीज होने पर व्यक्ति को कोई भी संक्रमण बहुत जल्दी हो जाती है और वो समय पर ठीक भी नहीं होता। मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति को वायरल, खांसी-जुखाम या किसी भी अन्य बैक्टीरियल इंफेक्शन से जल्द राहत नहीं मिलेगी। इसके अलावा यदि उन्हें कोई छोटा संक्रमण हो जाए या चोट लग जाए तो वह बड़े घाव बन जाते है।

4. भूख लगना :bahar ka khana

मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति का वजन तो कम होता है लेकिन उनकी भूख बहुत तेजी से बढती है। अन्य दिनों की तुलना उनकी भूख कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें बार-बार खाना खाने की इच्छा होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है तो तुरंत जाँच कराएं।

5. घाव जल्दी न भरना :

डायबिटीज से पीढित व्यक्ति के शरीर में यदि कोई घाव लग जाए तो वह जल्दी से नहीं भरता है। इतना ही नहीं एक छोटी सी खरोंच ही क्यों का हो, वह धीरे धीरे घाव में बदल जाती है और उसे ठीक होने में काफी समय लग जाता है।

6. थकान महसूस होना :

अगर किसी की डायबिटीज शुरुवाती स्टेज में है तो उस व्यक्ति को सारा दिन थकान महसूस होगी। रोजाना भरपूर नींद लेने के बाद भी सुबह जागने पर ऐसा लगेगा जानों नींद ली ही ना हो। इसके साथ साथ पुरे शरीर में कमजोरी और थकान भी महसूस होगी। अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो रहा है तो समझ लें खून में शुगर का लेवल बढ़ रहा है।

7. बार-बार पेशाब आना :peshab se khun ana

मधुमेह होने पर व्यक्ति को बार-बार पेशाब आता है। दरसल डायबिटीज होने पर शरीर में अधिक मात्र में शुगर इकठ्ठा होने लगता है जो पेशाब के रास्ते बाहर निकलता है। इसलिए मधुमेह के रोगी को बार-बार पेशाब आने की समस्या रहती है।

8. अत्यधिक प्यास लगना :

मधुमेह के रोगी को प्यास भी बहुत लगती है। क्योंकि शरीर का सारा पानी और शुगर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है और शरीर को अतिरिक्त पानी की आवश्यकता पड़ती रहती है। इसलिए उन्हें प्याद बहुत ज्यादा लगती है। बहुत से लोग इसे सामान्य समझकर इसपर गौर नहीं करते और समझ ही नहीं की कब बिमारी उनके शरीर में प्रवेश कर गयी।

तो ये थे, कुछ सामान्य लक्षण जिनपर गौर करके मधुमेह होने या नहीं होने की स्थिति को पहचाना जा सकता है। अगर इनमे से कोई भी एक लक्षण आपको अपने शरीर या स्वास्थ्य में दिखाई दें तो तुरंत रक्त जाँच कराएं और डॉक्टर से सलाह लें।

कफ की समस्या दूर करने के बेहतरीन आयुर्वेदिक उपाय

कफ एक ऐसी समस्या होती है जिसमे खांसी आने के साथ बलगम आना, गले व् सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें होती है। साथ ही कफ की समस्या होने पर कुछ खाने या पीने में भी दिक्कत होती है। यह समस्या ठंडी चीजों का सेवन करने पर, धूम्रपान करने वाले लोगो को, ज्यादा मिर्च मसाले खाने पर, मौसम के बदलाव के साथ व् अन्य कारणों की वजह से हो सकती है।

ऐसे में आजकल तो लोग इन चीजों की दवाइयां लेने के लिए तुरंत डॉक्टर के पास जाते हैं लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इस परेशानी का इलाज आपके घर में ही मौजूद होता है और यह इलाज आसान होने के साथ असरदार भी होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कफ की समस्या दूर करने के कुछ बेहतरीन आयुर्वेदिक उपाय बताने जा रहे हैं।

हल्दी

कफ की समस्या को दूर करने के लिए हल्दी एक बेहतरीन विकल्प होता है क्योंकि हल्दी में एंटी बैक्टेरियल, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी वायरल गुण मौजूद होते हैं। ऐसे में हल्दी को पानी में अच्छे से उबाल कर उस पानी के गुनगुने रहने पर दिन में तीन से चार बार गरारे करने से, हल्दी वाला दूध पीने से, हल्दी के साथ अन्य जड़ी बूटियों को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से कफ की समस्या से बहुत जल्दी निजात पाने में मदद मिलती है।

मुलैठी

मुलैठी का इस्तेमाल करने से भी कफ की समस्या से बहुत जल्दी निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप मुलैठी का काढ़ा बनाकर, देसी घी में मुलैठी का पाउडर डालकर, दूध में मुलैठी को डालकर या मुलैठी को वैसे ही मुँह में रखने से भी कफ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। मुलेठी का इस्तेमाल करने से बलगम भी बाहर निकल जाती है।

पीपली

यह भी एक मसाला होता है जो आप रसोई घर में इस्तेमाल करते हैं लेकिन आयुर्वेद के अनुसार पीपली का इस्तेमाल करने से कफ की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। पीपली का तेल, पाउडर व् काढ़े के रूप में आप इस्तेमाल कर सकते हैं।

अदरक

अदरक का इस्तेमाल करने से भी कफ की परेशानी को दूर करने में मदद मिलती है। अदरक का इस्तेमाल करने के लिए आप अदरक के टुकड़े को मुँह में रख कर चूस सकते हैं, अदरक का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं, अदरक के रस में शहद डालकर उसका सेवन कर सकते हैं, आदि। इस उपाय को दिन में दो से तीन बार करना चाहिए ताकि आपको जल्दी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सके।

शहद

शहद भी कफ की समस्या से बचाव के लिए एक बेहतरीन उपाय है इसके लिए आप रोजाना रात को सोने से पहले एक से डेड चम्मच शहद का सेवन करें। यह उपाय असरदार होने के साथ असरदार भी होता है।

काली मिर्च

एक चम्मच शहद में चार से पांच काली मिर्च पीसकर उसका सेवन करें ऐसा करने से भी कफ की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। इसके अलावा काली मिर्च को देसी घी के साथ गर्म करके खाने से भी कफ की समस्या दूर होती है।

नमक पानी के गरारे

दिन में दो से तीन बार पानी को गर्म करके उसमे थोड़ा नमक मिलाएं और गरारे करें। ऐसा करने से भी कफ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

गर्म पानी पीएं

कफ की समस्या से बचने के लिए जितना हो सके गर्म पानी पीएं क्योंकि गर्म पानी पीने से भी कफ की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन आयुर्वेदिक उपाय जिन्हे ट्राई करने से कफ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही आपको बलगम के कारण भी परेशानी नहीं होती है। ऐसे में यदि आपको भी कफ की परेशानी है तो आप भी इन आयुर्वेदिक टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।