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दो मुँहे बालों से ऐसे पाएं छुटकारा

सिर्फ आपका चेहरा ही नहीं आपके बाल भी आपकी पर्सनैलिटी को बढ़ाने में बहुत मदद करते है, यदि आपके बाल खूबसूरत न हो तो कही न कही आपकी लुक में कमी रह ही जाती है, साथ ही बालों के लिए भी महिलाओ की अपनी अपनी पसंद होती है, कुछ महिलाओ को लम्बे बाल, तो कुछ महिलाओ को पोनी टेल जितने बाल, या कुछ महिलाएं हेयर स्टाइल अच्छे से कर सकें इस तरह के बालों को पसंद करती है, लेकिन कई बार महिलाओं के बालों की अच्छे से केयर न करने के कारण बालों से जुडी परेशानी हो जाती है, जैसे की बालों का झड़ना, रुसी, बालों का दो मुँहे होना आदि, और ज्यादातर महिलाएं बालों के दो मुँहे होने के कारण परेशान रहती है।

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बालों के दो मुँहे होने की समस्या उन महिलाओ को को ज्यादा होती है, जो की बालों को लम्बे समय तक नहीं कटवाती है, बालों के लिए हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर का अधिक प्रयोग करती है, बालों के लिए अधिक केमिकल का इस्तेमाल करना, आदि इनके कारण महिलाओ को बालों के दो मुँहे होने की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्या आप भी बालों के दो मुँहे होने के कारण परेशान हैं, यदि हाँ तो आइये आज हम आपके लिए कुछ ऐसे टिप्स लाएं हैं जिनका इस्तेमाल करने से आपको बालों से जुडी इस परेशानी से निजात मिलेगा, साथ ही इनका आपके बालों पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ेगा।

दो मुँहे बाल होने के कारण:-

  • जो महिलाएं बालों को धोने के लिए अधिक गरम पानी का इस्तेमाल करती हैं उन्हें ये परेशानी हो सकती है।
  • बालों को अच्छे से तेल से पोषण न देना, मसाज़ आदि न करना जिसके कारण बाल रूखे होने लगते हैं और बालों के दो मुहें होने की समस्या कड़ी हो जाती है।
  • गीले बालों में में कंघी करने के कारण भी आपके बाल दो मुँहे होने लगते है।
  • प्रदूषण, अधिक देर तक बालों को धूप में रखने के कारण भी आपको ये समस्या हो सकती है।
  • बालों के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने के कारण भी आपको परेशानी हो सकती है।
  • नियमित बालों में शैम्पू करने के कारण भी बाल दो मुँहे होने लगते है।
  • ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करने से भी आपके बाल डैमेज होने लगते है।

दो मुँहे बालों से बचने के आसान उपाय:-

केले का प्रयोग करें:-

केला खाने से आपको जितना फायदा होता है, उतना ही, यह आपके बालों के लिए भी फायदेमंद होता है, इसके प्रयोग के लिए आप एक कप केले में आधा कप दही का मिलाएं, और उसके बाद इसमें कुछ बूंदे गुलाबजल की मिलाएं, और अच्छे से पीस कर पेस्ट के रूप में तैयार कर लें, अब इसके अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और सूखने के लिए छोड़ दे, और उसके बाद ठन्डे पानी से अपने बालों को धो लें, हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को करने से आपको बालों से जुडी इस परेशानी को खत्म करने में मदद मिलती है।

मलाई का प्रयोग करें:-

दो चम्मच मलाई में आधा कप दूध मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और बीस मिनट तक लगे रहने के बाद अपने बालों को धो लें, कुछ दिन इस उपाय को नियमित करने से आपको फायदा मिलता है।

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नारियल के तेल का प्रयोग करें:-

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नारियल तेल से यदि आप मसाज करते हैं तो ऐसा करने से आपको अपने बालों को मजबूत, घना और रेशमी बनाने के साथ दो मुँहे बालों की समस्या से भी निजात मिलता हैं, इसके इस्तेमाल के लिए आप हफ्ते में तीन से चार बार अच्छे से रात को नारियल तेल से मसाज करके छोड़ दें, और सुबह उठकर अपने बालों को धो लें, आपको फायदा मिलेगा।

मैथी के बीजो का इस्तेमाल करें:-

एक मुट्ठी मैथी के बीजो को लेकर अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसमें दही मिक्स करके थोड़ा पतला पेस्ट बनाएं जिससे ये आपके बालों में जड़ तक अच्छे से लग जाए, उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, और सूखने के बाद अपने बालों को साफ़ पानी से अच्छे से धो लें, ऐसा हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार करें आपको फायदा मिलेगा।

अंडे का प्रयोग करें:-

अंडे में प्रोटीन की मात्रा भरपूर होती है, और बालों के लिए प्रोटीन बहुत ही जरुरी होता है, इसके उपयोग के लिए आप अंडे के सफ़ेद भाग को अलग कर लें, अपने बालों के हिसाब से एक या दो अंडे लें, उसके बाद इसमें दो या तीन चम्मच बादाम या जैतून का तेल मिलाएं, और फिर इसमें आधा चम्मच शहद भी डालें, फिर तीनो को अच्छे से मिक्स करें तेल की तरह अपने बालों में लगाएं, उसके बाद उसे थोड़ी देर के लिए अपने बालों में ही रहने दें, थोड़ी देर बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें, ऐसा करने से आपके बालों को दो मुँहे होने की समस्या से राहत मिलता है।

दही का प्रयोग करें:-

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दही का इस्तेमाल करने से आपके बालों को चमकदार और रेशमी बनने में मदद मिलती है, इसके अलावा दही का इस्तेमाल यदि आप शहद के साथ करते हैं तो ऐसा करने से आपको दो मुँहे बालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप एक कटोरी दही में दो चम्मच शहद के डालकर अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद उसे अच्छे से अपने बालों में लगाएं, और थोड़ी देर बाद अपने बालों को धो लें, हफ्ते में तीन से चार बार इसको करने से आपको दो मुँहे बालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

दो मुँहे बालों से निजात पाने के अन्य उपाय:-

  • बालों के लिए ज्यादा केमिकल्स का इस्तेमाल न करें।
  • जितना हो सकें बालों के लिए इलेक्ट्रॉनिक चीजों का इस्तेमाल न करें, इससे भी आपके बाल बहुत तेजी से डैमेज होते है।
  • नियमित बालों में शैम्पू न करें, ज्यादा से ज्यादा आप तीन बार शैम्पू कर सकते है।”
  • बालों को हर दो महीने में ट्रिम करवाएं इससे आपको बालों से जुडी इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
  • हर दूसरे दिन बालों में गुनगुने ओलिव आयल से मसाज करें इससे भी आपके बालों को दो मुँहे होने से बचाने में मदद मिलती है।
  • अरंडी और सरसों के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर अपने बालों में लगाएं इससे भी आपके बालों को पोषण मिलता है, और दो मुँहे बालों की समस्या से आपको निजात पाने में मदद मिलती है।
  • देसी घी को गुनगुना करके अच्छे से अपने बालों में लगाएं इससे भी आपके बालों को फायदा मिलता है।
  • पपीते का इस्तेमाल करने से भी आपके बालों को पोषण मिलता है, पपीते को पीस कर अच्छे से अपने बालों में लगाएं इससे आपके बालों को पोषण मिलने के साथ दो मुँहे बालों की समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलती है।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको बालों से जुडी इस परेशानी से निजात पाने के मदद मिलती है, साथ ही आपके बालों को लम्बा, घना और मुलायम बनने में भी मदद मिलती है, साथ ही आपको अधिक पैसे भी खर्च नहीं करने पड़ते हैं बस हफ्ते में एक से दो बार इनका प्रयोग करें और बालों से जुडी परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता है।

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जन्म के समय बेबी का वजन कितना होना चाहिए?

गर्भ में शिशु का विकास

गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से गर्भवती महिला पर निर्भर करता है, क्योंकि भ्रूण के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व गर्भवती महिला के शरीर में संचित पोषण से ही लिए जाते हैं। और यह पोषण जो केवल गर्भवती महिला रोजाना खाती है उससे ही नहीं मिलता है बल्कि महिला के स्वास्थ्य और फिटनेस पर भी निर्भर करता है, यानी महिला के शरीर में मौजूद पोषक तत्वों से भी शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषण तत्व लिए जाते हैं।

गर्भवती महिला के शरीर में शिशु के अंगो का विकास, शिशु का वजन, शिशु की लम्बाई महीने दर महीने बढ़ती रहती है। और यदि शिशु का विकास गर्भ में बेहतर तरीके से होता है और महिला की डिलीवरी में कोई दिक्कत नहीं आती है, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों के बाद भी महिला अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखती है, आदि। तो गर्भवती महिला को एक स्वस्थ शिशु को जन्म देने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की स्वस्थ शिशु की पहचान कैसे की जाती है

जन्म के समय शिशु का वजन कितना होना चाहिए

जन्म के बाद शिशु का वजन ही शिशु के स्वास्थ्य पर उसकी प्रतिरोधक क्षमता को बताता है। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की जन्म के समय शिशु का वजन यदि कम होता है तो जन्म के बाद शिशु को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और जान एक स्वस्थ शिशु जन्म लेता है तो उसका वजन 2.5 किलोग्राम से लेकर 2.9 किलोग्राम हो सकता है। यदि शिशु का वजन 2.5 किलोग्राम से कम होता है तो ऐसे शिशु कम वजन वाले शिशु की श्रेणी में आते है।

जबकि बहुत से शिशु तीन या तीन से ज्यादा किलो वजन वाले भी हो सकते है। ऐसे में शिशु का वजन जन्म के के समय ढाई किलो से कम नहीं होना चाहिए। जन्म के बाद शिशु का वजन पहले हफ्ते कम होता महसूस हो सकता है लेकिन उसके बाद जैसे जैसे शिशु को पोषण मिलता है, वैसे वैसे उसका विकास होता है। और जन्म के समय यदि शिशु का वजन कम होता है तो बाद में शिशु का बेहतर तरीके से ध्यान रखकर शिशु को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

तो यह हैं जन्म के समय शिशु के वजन से जुडी कुछ जानकारी, ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले शारीरिक रूप से फिट होना चाहिए। और साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान अपनी दुगुनी केयर करनी चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

नौवें महीने में इन चीजों को भूलकर भी नहीं खाएं

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला के लिए बहुत ही यादगार होते हैं। और इन नौ महीनों में महिला फिट रहे इसके लिए महिला को अपने खान पान, रहन सहन का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। जैसे की कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करने की सलाह दी जाती है।

क्योंकि वह खाद्य पदार्थ गर्भवती महिला की परेशानी बढ़ाने के साथ बच्चे के विकास में कमी का कारण भी बन सकते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को क्या नहीं खाना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइये अब जानते हैं उन खाद्य पदार्थों के बारे में:

अंगूर (Grapes)

प्रेग्नेंट महिला को नौवें महीने में अंगूर का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि अंगूर की तासीर गर्म होने के साथ अंगूर के छिलके को पचाने में महिला को दिक्कत होती है। साथ ही इस कारण नौवें महीने में पेट में दर्द की समस्या भी बढ़ जाती है। अंगूर के अलावा अनानास का सेवन करने से भी आपको बचना चाहिए।

कच्चा अंडा व् नॉन वेज (Raw egg and meat)

नौवें महीने में प्रेग्नेंट महिला को कच्चा अंडा भी नहीं खाना चाहिए। क्योंकि कच्चे अंडे में मौजूद बैड बैक्टेरिया के कारण इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है जिससे माँ व् बच्चे दोनों पर गलत असर पड़ता है। साथ ही कच्चे अंडे का सेवन करने से महिला को उल्टी, दस्त, पेट में दर्द जैसी परेशानी भी होती है। कच्चे अंडे के साथ कच्चा मास, ठंडा व् बासी मास भी गर्भवती महिला को नहीं खाना चाहिए।

बासी व् ठंडा खाना ( Stale and Cold food)

प्रेग्नेंट महिला को बासी व् ठंडा खाना भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि ऐसे आहार में नूट्रिएंट्स नहीं होते हैं। साथ ही ऐसे आहार को हज़म करने में महिला को दिक्कत होती है जिस कारण महिला को पेट में दर्द, कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानियां हो सकती है।

जंक फ़ूड (Junk Food)

ज्यादा मसालेदार और चटपटा खाना भी प्रेगनेंसी के नौवें महीने में खाने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसा खाना हज़म करने में महिला को दिक्कत होती है जिसके कारण पेट सम्बन्धी समस्या होने के साथ खट्टे डकार, सीने में जलन जैसी परेशानी भी महिला को हो सकती है।

कैफीन (Caffeine)

नौवें महीने में महिला को कैफीन युक्त चीजें जैसे की चाय, कॉफ़ी, चॉकलेट्स आदि का भी अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि कैफीन के अधिक सेवन से बच्चे के विकास में कमी आ सकती है।

नशीले पदार्थ

किसी भी तरह के नशे का सेवन जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला नहीं करें। क्योंकि नशीले पदार्थ बच्चे के विकास पर बहुत बुरा असर डाल सकते हैं।

जरुरत से ज्यादा घी (Ghee)

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में आपको सभी घी का सेवन करने की सलाह जरूर देते हैं। लेकिन ध्यान रखें की यदि आपका वजन ज्यादा तो आप घी का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करें। क्योंकि इसके कारण आपका वजन बहुत ज्यादा बढ़ सकता है और इस वजन को डिलीवरी के बाद कम करने में आपको बहुत ज्यादा दिक्कत हो सकती है साथ ही वजन ज्यादा होने के कारण डिलीवरी में भी कॉम्प्लीकेशन्स हो सकती है।

मीठा (Sugar)

नौवें महीने में महिला को मीठा भी अधिक नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसके कारण जेस्टेशनल शुगर की परेशानी होने के साथ वजन भी जरुरत से ज्यादा बढ़ने का खतरा रहता है। जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए अच्छी बात नहीं होती है।

फिश (Fish)

हाई मर्करी युक्त फिश का सेवन भी प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण बच्चे पर गलत असर पड़ता है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए। क्योंकि यह सभी खाद्य पदार्थ नौवें महीने में कॉम्प्लीकेशन्स को बढ़ाते हैं साथ ही बच्चे के विकास और महिला की सेहत पर भी इनका बुरा असर पड़ता है।

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प्रेगनेंसी में गुड़ खाना चाहिए या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला अपने खान पान का पूरा ध्यान रखने की कोशिश करती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत न हो। इसीलिए महिला फलों व् सब्जियों का भरपूर सेवन करने के साथ अन्य चीजों का सेवन भी कर सकती है। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला व् भ्रूण के विकास के लिए फायदेमंद होते हैं। और उन खाद्य पदार्थों में गुड़ भी आता है। तो आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको प्रेगनेंसी के दौरान गुड़ के सेवन से जुडी पूरी जानकारी बताने का जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में गुड़ का सेवन करना चाहिए या नहीं?

  • गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला चाहे तो गुड़ का सेवन कर सकती है।
  • क्योंकि गुड़ में मौजूद आयरन, कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व गर्भवती महिला व् भ्रूण के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • लेकिन गर्भवती महिला को इसकी सही मात्रा पर ध्यान देना जरुरी होता है।
  • क्योंकि जरुरत के अनुसार यदि गुड़ का सेवन फायदेमंद होता है।
  • तो जरुरत से ज्यादा गुड़ का सेवन प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को नुकसान भी पहुंचा सकता है।
  • इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को गुड़ का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए।
  • की आखिर प्रेगनेंसी के दौरान कितने गुड़ का सेवन फायदेमंद हो सकता है।

प्रेगनेंसी में गुड़ का सेवन करने के फायदे

गर्भवती महिला यदि सिमित मात्रा में गुड़ का सेवन करती है। तो इससे प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं प्रेगनेंसी में गुड़ का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

  • गुड़ में आयरन की मात्रा की अधिकता होती है।
  • ऐसे में गुड़ का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को एनीमिया जैसी परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।
  • इसके अलावा खून की कमी के कारण होने वाली अन्य दिक्कतों से बचाव करने में भी मदद मिलती है।

ऊर्जा

  • प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा की बहुत अधिक जरुरत होती है।
  • और गुड़ का सेवन करने से महिला के शरीर में ऊर्जा को मेन्टेन रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ व् एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

कार्बोहाइड्रेट

गुड़ में कार्बोहाइड्रेट भी मौजूद होता है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में फायदेमंद होता है।

प्रेगनेंसी में गुड़ खाने के नुकसान

  • गुड़ का सेवन जरुरत से अधिक करने के कारण गर्भवती महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है। और प्रेग्नेंट महिला को बढ़ते वजन के कारण दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
  • सोडियम की मात्रा भी गुड़ में मौजूद होती है ऐसे में गुड़ के अधिक सेवन के कारण प्रेग्नेंट महिला को हाई ब्लड प्रैशर जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • अधिक मात्रा में गुड़ का सेवन गर्भवती महिला के लिए गेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी समस्या खड़ी कर सकता है।
  • किसी भी रूप में गुड़ को गर्म करके सेवन करने से बचें क्योंकि इसके कारण महिला को गर्भपात जैसी समस्या हो सकती है।
  • यदि आपका पहले गर्भपात हुआ है तो प्रेग्नेंट महिला को गुड़ का सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में गुड़ का सेवन करने से जुड़े कुछ खास टिप्स। ऐसे में प्रेगनेंसी में गुड़ का सेवन करने से गर्भवती महिला को किसी तरह का नुकसान न हो। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को गुड़ का सेवन सिमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसके अलावा गुड़ को आप किसी साफ़ जगह से खरीदें। गुड़ पर मक्खियां आदि न बैठी हुई हो, गुड़ पर मिट्टी आदि के कण न लगे हुए हो।

प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला को गुजरना पड़ता है इन समस्याओं से

प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला को गुजरना पड़ता है इन समस्याओं से, प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियां, गर्भवती महिला को होती है यह समस्याएं, गर्भावस्था के दौरान होने वाली आम परेशानियां

प्रेगनेंसी जहां किसी महिला को माँ बनने का सुख देती है, वहीँ पूरे नौ महीने में महिला को इसके लिए बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। क्योंकि इस दौरान बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। जिसके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है कई बार तो महिलाएं इसके कारण तनाव में भी आ जाती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि अपना अच्छे से ध्यान रखती है, केयर करती है तो इससे महिला की परेशानियों को कम करने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला को किन किन समस्याओं से गुजरना पड़ता है।

मॉर्निंग सिकनेस

ज्यादातर महिलाओं को गर्भवस्था के दौरान सुबह उठने में परेशानी का अनुभव करना पड़ता है, इसका कारण बॉडी में होने वाले बदलाव, ब्लड सर्कुलेशन पर पड़ने वाले प्रभाव, कमजोरी आदि हो सकता है।

उल्टी व् जी मचलाना

उल्टी को प्रेगनेंसी का लक्षण माना जाता है, और प्रेगनेंसी की शुरुआत में अधिकतर गर्भवती महिलाएं उल्टी की समस्या से परेशान रहती हैं। उल्टी की समस्या जहां कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में रहती है वहीँ कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने इस समस्या से परेशान रहती हैं।

कमजोरी व् थकान

प्रेगनेंसी की शुरुआत में कमजोरी व् थकान का अनुभव होना आम बात होती है, क्योंकि तेजी से बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा होता है। लेकिन यदि महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है, स्वस्थ रहती है तो इस परेशानी से निजात पाया जा सकता है।

ब्रेस्ट में बदलाव

ब्रेस्ट में कड़ापन, सूजन, दर्द, भारीपन महसूस होना प्रेग्नन्सी के दौरान ज्यादातर महिलाओं को होता है। क्योंकि ब्रेस्ट में दुग्ध ग्रंथियों के उत्तको के फैलाव के कारण ऐसा होता है। अधिक दर्द होने पर एक बार डॉक्टर से राय आप चाहे तो ले सकते हैं।

पेट से सम्बन्धी समस्या

पेट में हल्का दर्द, कब्ज़, गैस आदि की समस्या भी ज्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान रहती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस समस्या से बचने के लिए पानी का भरपूर सेवन करने के साथ अपने खान पान में भरपूर पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए।

पीठ में दर्द

ज्यादातर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान पीठ के दर्द की समस्या से भी परेशान रहती है इसका कारण गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण मांसपेशियों पर दबाव पड़ने लगता है जिसके कारण महिला को पीठ में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

वजन में बढ़ोतरी

महिलाएं अपने वजन को लेकर बहुत चिंतित रहती है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान वजन का बढ़ना जरुरी होता है। लेकिन महिला का वजन यदि जरुरत से ज्यादा बढ़ने लग जाता है तो यह भी महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

यूरिन से जुडी समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बार बार यूरिन आने से सम्बंधित समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है। प्रेगनेंसी की शुरुआत में जहां किडनी के अधिक सक्रिय होने के कारण महिला को यह परेशानी होती है, वहीँ दूसरी व् तीसरी तिमाही में वजन के बढ़ने के कारण मूत्राशय पर दबाव पड़ता है जिससे बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है।

सोने, उठने, बैठने में परेशानी

वजन बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में महिला को उठने, बैठने, यहां तक की सोने में भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। और इस समय महिला को चाहिए की वो अपने दिमाग को शांत रखे और आराम से सब कुछ करें, ताकि उसे किसी भी तरह की परेशानी न हो, और सोते समय वो करवट लेकर सोये ऐसा करने गर्भवती महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो ज्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान सहनी पड़ती है, लेकिन इसमें किसी भी तरह के घबराने की बात नहीं होती है क्योंकि जैसे ही शिशु का जन्म होता है महिला अपनी साड़ी परेशानियां भूल जाती है। ऐसे ही प्रेगनेंसी के दौरान भी जितना हो सके महिला को अपने स्वास्थ्य को सही रखने के साथ, खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए और गर्भ में पल रहे शिशु के साथ इन लम्हो का आनंद लेना चाहिए।

कम नींद लेने के नुकसान

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क्या आप ऐसा सोचते हैं की जब आप सो जाते हैं तो आपके बॉडी पार्ट्स भी आराम करते हैं? यदि हाँ तो ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। जब आप सो रहे होते हैं तो आपके शरीर के कई अंग आपके बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थो को इकठ्ठा करने का काम करते हैं। ताकि जब आप सुबह उठें तो उठकर हल्का महसूस करें, और आपको फ्रैश फील हो। जिस तरह आपके स्वास्थ्य को सही रखने के लिए आपका संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करना जरुरी होता है। वैसे ही स्वस्थ रहने, बॉडी को फिट रखने, आपकी स्किन की चमक को बरकरार रखने, आपको बीमारियों से दूर करने, और भी बहुत से फायदों के लिए भरपूर नींद लेना बहुत जरुरी होता है।

एक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। लेकिन यदि आप इससे कम नींद लेते हैं तो इसके कारण आपके शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, जैसे की मोटापा आने लगता है, बहुत जल्दी थकावट होने लगती है, मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है, आदि। और भी बहुत से नुकसान होते हैं जो आपको नींद भरपूर न लेने के कारण होते हैं। क्या आप भी नींद के प्रति लापरवाही करते हैं? यदि हाँ तो इसके कारण आपको भी इन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की नींद भरपूर न लेने के कारण आपको किन किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

कम नींद लेने से होने वाले नुकसान

जिस तरह आपका खाना, पानी पीना, और काम करना जरुरी होता है। उसी तरह आपका भरपूर नींद लेना भी बहुत जरुरी होता है। और यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आइये जानते हैं इसके कारण आपको कौन कौन से नुकसान होते हैं।

शुगर होने का खतरा होता है

कम नींद लेने के कारण आपको मीठा खाने की और तेलीय खाना खाने की इच्छा बढ़ने लगती है, जिसके कारण आपके शरीर पर बुरा असर पड़ता है। और आपको हाई ब्लड प्रैशर और शुगर जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तनाव होने लगता है

नींद भरपूर न लेने के कारण आपके मस्तिष्क को आराम नहीं मिलता है, जिसके कारण आप परेशान रहने लगते हैं। और आपको मानसिक रूप से असहज महसूस होने लगता हैं। जिसके कारण तनाव भी हो सकता है। और तनाव होने के कारण आपको शरीर से जुडी और भी परेशानियां होने लगती है। इसीलिए इस समस्या से बचने के लिए जितना हो सके आपको भरपूर नींद लेनी चाहिए।

हदय सम्बन्धी समस्या

जब आप सोते हैं तो आपके शरीर और रक्त में मौजूद विषैले पदार्थो को साफ़ करने में मदद मिलती है। लेकिन जब नींद पूरी नहीं लेते हैं तो इसके कारण बॉडी की प्रक्रिया अच्छे से नहीं हो पाती है, और न ही शरीर से विषैले पदार्थ निकलते हैं। जिसके कारण हाई ब्लड प्रैशर की समस्या हो सकती है, और उसकी वजह से हदय सम्बन्धी समस्या जैसे की हार्ट अटैक का सामना भी करना पड़ सकता है।

ब्रैस्ट कैंसर

रिसर्च के अनुसार महिलाओं में कम नींद लेने के कारण आपकी कोशिकाओं को बहुत नुकसान होता है, जिसके कारण महिलाओं में ब्रैस्ट कैंसर की समस्या होने के चांस बढ़ जाते हैं।

ऑस्ट‍ियोपोरोसिस यानी हड्डियों से जुडी परेशानी

कम नींद लेने के कारण हड्डियों पर भी बुरा असर पड़ता है, क्योंकि हड्डियों को मजबूती देने वाले मिनरल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। जिसके कारण आपको ऑस्ट‍ियोपोरोसिस यानी हड्डियों की में कमजोरी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और इसके कारण आपके शरीर के कई अंगो में दर्द आदि की परेशानी भी शुरू हो जाती है, जैसे की जोड़ो का दर्द आदि।

मस्तिष्क के काम पर असर पड़ता है

नींद भरपूर न लेने का सबसे बुरा प्रभाव मस्तिष्क पर भी पड़ता है। क्योंकि आपके शरीर में होने वाली सभी क्रियाओं को सुचारु रूप से चलाने में सबसे अहम योगदान आपके मस्तिष्क का होता है। और जब उसे ही आराम नहीं मिलेगा तो शरीर में होने वाली सभी गतिविधियां भी प्रभावित होती है। नींद भरपूर न लेने कारण आपको निर्णय लेने में परेशानी होती है, सोचने में परेशानी होती है, यादाश्त पर असर पड़ता है। ऐसे में अपने मस्तिष्क को सुचारु रूप से काम करवाने के लिए आपको भरपूर नींद लेनी चाहिए।

मूड में बदलाव आता है

नींद कम लेने का असर आपके मूड पर भी पड़ता है इसके कारण आपके मूड में बदलाव आता है, जैसे की अचानक से आपको गुस्सा आ जाता है, किसी से बात करने का मन नहीं करता है, चिड़चिड़ापन होने लगता है, कभी किसी काम को करने का दिल करता है तो कभी नहीं करता, आदि।

मोटापा बढ़ता है

नींद की कमी के कारण मेटाबोलिज्म रेट भी प्रभावित होता है। इसके कारण मेटाबोलिज्म कम होने लगता है जिसके कारण शरीर में अतिरिक्त चर्बी का जमाव होने लगता है। कई बार ऐसा भी होता है की तनाव के कारण व्यक्ति का शरीर बहुत कमजोर भी हो जाता है। और मोटापा हो या दुबलापन दोनों ही आपको शारीरिक रूप से परेशान करते हैं।

स्किन पर पड़ता है बुरा असर

भरपूर नींद न लेने के कारण आपको स्किन से जुडी परेशानियां भी होने लगती है, जैसे की स्किन डल होने लगती है, आँखों के नीचे डार्क सर्कल आने लगते हैं, झाइयां, व् झुर्रियों की समस्या भी हो जाती है। जिसके कारण आपकी उम्र भी अधिक दिखने लगती है, और इसका मतलब यह होता है की आपकी ख़ूबसूरती बहुत कम हो रही है।

हार्मोनल असंतुलन हो जाता है

कम नींद लेने के कारण बॉडी में हॉर्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जिसके कारण आपके इम्यून सिस्टम पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। और इसके कारण आपको बहुत सी परेशानियां जैसे की संक्रमण व् इन्फेक्शन आदि होने का खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही इसके कारण शरीर की प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ता है। ऐसे में अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए जरुरी होता है की आप भरपूर नींद लें।

कम नींद लेने से होने वाले अन्य नुकसान

  • कम नींद लेने के कारण कई बार व्यक्ति को बहुत अधिक भूख तो कई बार बिल्कुल भूख नहीं लगती है।
  • शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस करने लगता है।
  • पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या उत्त्पन्न होने लगती है।
  • ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता है जिसके कारण आपकी काम करने की क्षमता कम होने लगती है।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने लगती है जिसके कारण आपको बहुत सी बीमारियों के होने का खतरा रहता है।
  • नींद कम लेने के कारण सिर दर्द की समस्या बहुत अधिक रहने लगती है।
  • आलस्य अधिक होने लगता है।
  • नींद की कमी के कारण व्यक्ति के दिमाग पर बहुत प्रभाव पड़ता है जिसके कारण कई बार व्यक्ति अपने आप को ही नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है।

तो यह हैं कुछ स्वास्थ्य से जुड़े नुकसान जो आपको भरपूर नींद न लेने के कारण होते हैं। इसीलिए यदि आप चाहते हैं की आप हमेशा फिट रहें और आपको इन परेशानियों का सामना न करना पड़े। तो आपको एक दिन में कम से कम आठ घंटे की जरूर नींद लेनी चाहिए और बेहतर होगा की आप दिनचर्या बनाएं की आपको रात को समय से सोना है और सुबह समय से उठना है। फिर देखिएगा भरपूर नींद लेने से आपको किस तरह पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

गर्भधारण का इलाज करवा रही हैं? तो यह चीजें जरूर खाएं

प्रेग्नेंट होने के लिए क्या खाएं, कई बार कुछ महिलाओं के मासिक धर्म के अनियमित होने के कारण, फैलोपियन ट्यूब से जुडी परेशानी होने के कारण, गर्भाशय से जुडी समस्या होने के कारण, प्रजनन क्षमता में कमी होने के कारण, गर्भधारण में समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला कुछ ट्रीटमेंट करवा सकती है जिससे महिला को इन परेशानियों को दूर करके गर्भधारण में मदद मिल सके। लेकिन इलाज करवाने के साथ महिला को अपनी डाइट में कुछ ऐसे आहार को शामिल भी जरूर करना चाहिए। जिससे महिला को गर्भधारण में और ज्यादा मदद मिल सके। तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे ही आहार के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन महिला को गर्भधारण का इलाज करवाने के साथ करना चाहिए।

प्रेग्नेंट होने के लिए खाएं हरी पत्तेदार सब्जियां

  • आयरन, फोलिक एसिड व् अन्य पोषक तत्व हरी सब्जियों में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • जो न केवल महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करते हैं बल्कि गर्भाशय की भीतरी परत के विकास को बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • जिससे महिला के गर्भधारण के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

ब्रोकली

  • जो महिलाएं गर्भधारण का प्रयास कर रही हैं या गर्भधारण का इलाज करवा रही हैं उनके लिए ब्रोकली एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है।
  • क्योंकि ब्रोकली में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन सी व् अन्य खाद्य पदार्थ भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • और अंडाशय में अंडे के विकास के लिए और निषेचन की प्रक्रिया के लिए महिला को विटामिन सी का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है।

खट्टे फल

  • खट्टे फलों में विटामिन सी उच्च मात्रा में मौजूद होता है।
  • जो अंडाशय में अंडो की गुणवत्ता को बेहतर करने के साथ अंडे को अंडाशय से निकलने में भी मदद करता है।
  • जिससे महिला के गर्भधारण के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट होने के लिए खाएं केला

  • जिन महिलाओं के मासिक चक्र के अनियमित होने के कारण उनकी प्रेगनेंसी में समस्या आ रही होती है।
  • उन महिलाओं को इस समस्या का इलाज करवाने के साथ केले का सेवन प्रचुर मात्रा में करना चाहिए।
  • क्योंकि केले में विटामिन बी 6 मौजूद होता है जिससे मासिक चक्र को नियमित करने और प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

अंडे

  • कोलिन, फ़ोलिक एसिड, ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन डी व् अन्य पोषक तत्व अंडे में प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • और यह पोषक तत्व उन महिलाओं के लिए पूर्ण आहार के समान होते है जो गर्भवती होने का प्रयास कर रही होती है।
  • ऐसे में गर्भधारण का इलाज करवा रही महिलाओं को अंडे को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।
  • ताकि महिला को जल्द से जल्द गर्भधारण करने में मदद मिल सके।

हल्दी

  • खाने का जायका बढ़ाने के साथ हल्दी प्रजनन क्षमता को बेहतर करने में भी मदद करती है।
  • क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं।
  • इसीलिए गर्भधारण का इलाज करवा रही महिलाओं को सब्ज़ी में हल्दी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

मिर्ची

  • सब्ज़ी का जायका बढ़ाने के लिए मिर्ची का इस्तेमाल करें या न करें।
  • लेकिन यदि आप गर्भधारण का प्रयास कर रही है तो मिर्ची को अपने आहार में जरूर शामिल करें।
  • क्योंकि मिर्ची का सेवन करने से पूरी बॉडी यानी की प्रजनन अंगो में भी ब्लड फ्लो को बेहतर होने में मदद मिलती है।
  • जिससे गर्भधारण के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट होने के लिए खाएं लहसुन

  • गर्भपात की सम्भावना को कम करने के लिए, प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए, लहसुन का सेवन करना बहुत अच्छा माना जाता है।
  • क्योंकि लहसुन में मौजूद सेलेनियम गर्भधारण के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।
  • इसीलिए गर्भधारण का इलाज करने वाली महिला को लहसुन को अपनी सब्जियों में जरूर शामिल करना चाहिए।

साल्मन मछली

  • ओमेगा 3 फैटी एसिड साल्मन मछली में प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  • जो महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • इसीलिए यदि कोई महिला गर्भधारण न होने की समस्या का इलाज कर रही हो तो ऐसे में महिला को सालमन मछली का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

अनानास

  • गर्भधारण के बाद अनानास का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।
  • लेकिन यदि आप गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं तो आपको अनानास का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि अनानास में मौजूद मैगनीज़ प्रजनन हॉर्मोन्स का निर्माण करने में मदद करता है।
  • जिससे गर्भधारण में आ रही परेशानियों को दूर करके महिला को गर्भधारण जल्द से जल्द करने में मदद मिलती है।
  • और ऐसा भी माना जाता है की जिन महिलाओं के शरीर में मैगनीज़ की कमी होती है।
  • उन्हें ही गर्भधारण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेग्नेंट होने के लिए खाएं अलसी

  • ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा अलसी में मौजूद होती है।
  • जो प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है।
  • इसीलिए गर्भधारण का प्रयास कर रही महिलाओं को अलसी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

तो यदि आप भी गर्भधारण से जुडी समस्याओं का सामना कर रही है या उसका इलाज कर रही हैं। तो आपको इन आहार को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

डिलीवरी के बाद क्या- क्या नहीं खाना चाहिए

डिलीवरी के बाद क्या- क्या नहीं खाना चाहिए, प्रसव के बाद महिला न करें इन चीजों का सेवन, डिलीवरी के बाद महिला रखें इन चीजों से परहेज, डिलीवरी के बाद आहार में न करें इन्हे शामिल , What not to eat after delivery

माँ बनना किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है। लेकिन यह भी सच है की डिलीवरी के बाद माँ के गर्भ से केवल शिशु ही जन्म नहीं लेता है, बल्कि यह महिला के लिए भी दूसरे जन्म की तरह ही होता है। इस दौरान महिला के शरीर में बहुत अधिक कमजोरी आ जाती है, और यदि महिला की डिलीवरी सिजेरियन तरीके से हुई हो तो महिला को ज्यादा परेशानी हो सकती है। इसीलिए डिलीवरी के बाद महिला को पूरे तरीके से आराम करने से साथ अपनी बेहतर तरीके से केयर करने की सलाह दी जाती है। लेकिन महिला का पूरा ध्यान अपने से ज्यादा घर आए नन्हे मेहमान पर होता है। और शिशु की फिटनेस के लिए सबसे जरुरी होता है की डिलीवरी के बाद महिला फिट रहे।

और इसके लिए महिला को अपने खान पान के लिए किसी भी तरह की लापरवाही न करने की सलाह भी जाती है। डिलीवरी के बाद महिला को घी, गोंद के लड्डू, दूध व् दूध से बनी चीजें, फल, साबुत अनाज, व् अन्य बहुत सी चीजों के सेवन के लिए सलाह दी जाती है। और इसके साथ ही कुछ ऐसी चीजों के सेवन के लिए महिला को मनाही की जाती है जो शिशु या महिला की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। क्योंकि यदि महिला यदि कोई ऐसी चीज का सेवन कर लेती है जो की उसे नहीं लेनी चाहिए थी, तो दूध के जरिये उसका असर शिशु तक भी पहुँचता है जो शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला को किन किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

अंकुरित कच्चा अनाज

डिलीवरी के बाद महिला को अंकुरित कच्चे अनाज से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद हानिकारक बैक्टेरिया महिला के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, और यह शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिसके कारण महिला या शिशु को इन्फेक्शन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

दाल

मुंग की दाल को डिलीवरी के बाद सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि यह न केवल पोषक तत्वों से भरपूर होती है बल्कि इससे दूध का उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलती है। लेकिन डिलीवरी के बाद महिला को राजमा, सफ़ेद चने, काले चने, चने की दाल आदि न खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह पचाने में मुश्किल होती है, साथ ही इससे महिला को गैस, एसिडिटी जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

कच्ची व् बिना धुली सब्जियां

डिलीवरी के बाद महिला को ऐसे आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो की पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ, बैक्टेरिया मुक्त हो। और ऐसे में महिला को बिना धुली सब्जियां व् फल, कच्ची सब्जियां आदि न खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे महिला को पेट में दर्द आदि की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

जंक फ़ूड

पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने से डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है साथ ही इससे शिशु को भी दूध के जरिये भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पहुंचाने में मदद मिलती है। इसीलिए जंक फ़ूड, ज्यादा तेल मसालें वाले आहार, नूडल्स आदि से डिलीवरी के बाद महिला को परहेज रखना चाहिए क्योंकि न तो इनमे पोषक तत्व होते हैं साथ ही इनके सेवन से पेट में इन्फेक्शन आदि की समस्या का सामना आपको करना पड़ सकता है।

कुछ सब्जियां भी नहीं खानी चाहिए

डिलीवरी के बाद महिला को बैंगन, सीताफल, ककड़ी, ज्यादा मात्रा में गोभी, ज्यादा मात्रा में आलू, या जिन सब्जियों के सेवन से आपको परेशानी होती है आदि न खाने की सलाह दी जाती है। यदि आपकी भी डिलीवरी अभी हुई है तो आपको इन सब्जियों का सेवन करने से परहेज रखना चाहिए।

एलर्जी होने वाले पदार्थ

कुछ ऐसे आहार भी होते हैं जिनके सेवन से महिला को एलर्जी हो जाती है, ऐसे में महिला को इन चीजों के सेवन से भी परहेज करना चाहिए। क्योंकि यदि आपको इन चीजों से एलर्जी होती है तो हो सकता है आपके सेवन करने के बाद स्तनपान द्वारा शिशु तक जब यह पहुंचें तो यह शिशु को भी किसी तरह की एलर्जी से ग्रसित कर दें, ऐसे में इनसे परहेज करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ चीजें जो डिलीवरी के बाद महिला को नहीं खानी चाहिए साथ ही पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। साथ ही हर दो घंटे के बाद महिला को शिशु को स्तनपान करवाना पड़ सकता है ऐसे में हर दो घंटे बाद महिला को किसी न किसी चीज का सेवन जरूर करना चाहिए, साथ ही दूध पिलाने से पहले दूध, पानी, या अन्य किसी तरल आहार का सेवन जरूर करना चाहिए। और साथ ही अपने शिशु के हर पल को उसके साथ मिलकर खूब अच्छे से एन्जॉय करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में भीगे हुए चने और मूंग दाल खाने चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी में भीगे हुए चने व् मूंग दाल

गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिला का खान पान बहुत महत्व रखता है, साथ ही महिला कितना खा रही है यह जरुरी नहीं होता है बल्कि महिला जितना आहार ले रही है उसमे कितने पोषक तत्व हैं यह मायने रखता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान जितने पोषक तत्वों को अपने आहार में गर्भवती महिला द्वारा शामिल किया जाता है उतना ही गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। प्रेग्नेंट महिला जो कुछ भी प्रेगनेंसी के दौरान सेवन करती है उसे हर खाने की चीज को लेकर मन में सवाल आ सकता है की क्या यह प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद है या नहीं? तो आज हम ऐसे ही एक स्नैक्स के तौर पर लिया जाने वाला आहार भीगे हुए चने और मूंग दाल के बारे में बात करने जा रहे हैं की इनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला कर सकती है या नहीं और इनके सेवन से गर्भवती महिला को किसी भी तरह का नुकसान तो नहीं होता है।

जी हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान भीगे हुए चने व् मूंग दाल का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। क्योंकि इसमें आयरन, प्रोटीन, फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करने के साथ गर्भवती महिला की प्रेगनेंसी के दौरान आने वालो परेशानियों को कम करने और प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। लेकिन आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी चीज का अधिक सेवन और उसमे साफ़ सफाई का ध्यान न रखने के कारण गर्भवती महिला को परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान भीगे हुए चने या मूंग दाल का सेवन करती हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है।

भीगे हुए चने व् मूंग दाल खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि अपनी डाइट में भीगे हुए चने व् मूंग दाल को शामिल करती है तो इससे कौन कौन से फायदे मिलते हैं आइये विस्तार से जानते हैं।

आयरन: आयरन की मात्रा भीगे हुए चने व् मूंग दाल में भरपूर होती है जो गर्भवती महिला को एनीमिया जैसी समस्या से बचाने, डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानी को कम करने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है।

एनर्जी: भीगे हुए चने व् मूंग दाल में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला को कमजोरी व् थकान जैसी समस्या से बचाने के साथ पूरे दिन एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करते हैं।

फाइबर: फाइबर की मात्रा भरपूर होने के कारण भीगे हुए चने व् मूंग दाल का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। लेकिन आवश्यकता से अधिक यदि इसका सेवन किया जाए तो इसके कारण गैस जैसी समस्या से गर्भवती महिला को परेशान भी होना पड़ सकता है।

समय पूर्व प्रसव: गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी होने के कारण समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या का सामना भी गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है। और भीगे हुए चने और मूंग दाल में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी से गर्भवती महिला को बचाने में मदद करता है।

प्रोटीन: प्रोटीन की मात्रा भी भीगे हुए चने और मूंग दाल में पर्याप्त होती है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करता है। ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकती है। प्रोटीन के अलावा फोलेट जैसे अन्य न्यूट्रिएंट्स बजी इसमें भरपूर मात्रा में शामिल होते है जो गर्भस्थ शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

भीगे हुए चने व् मूंग दाल का सेवन करते हुए इन बातों का ध्यान रखें

  • रात भर भीगे हुए चने व् मूंग दाल का सेवन उससे अगले दिन ही कर लें, न की उसे दो दिन बाद खाएं ऐसा करने से आपको पेट सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि आपको भीगे हुए चने या मूंग दाल में से हल्की सी भी स्मैल आ रही है तो उनका सेवन न करें।
  • अच्छे से धोने के बाद ही मूंग दाल व् चने को खाने के लिए इस्तेमाल करें, क्योंकि इन पर बैक्टेरिया का जमाव हो सकता है जिसके कारण गर्भवती महिला को इन्फेक्शन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।
  • भीगे हुए चने का सेवन अधिक मात्रा में न करें क्योंकि इसके कारण एसिडिटी की समस्या से गर्भवती महिला को परेशान होना पड़ सकता है।
  • रोजाना इनका सेवन करने से बचना चाहिए।
  • पर्याप्त मात्रा में ही इनका सेवन करें क्योंकि आवश्यकता से अधिक कोई भी चीज प्रेग्नेंट महिला के लिए नुकसानदायक हो सकती है, जैसे की महिला को दस्त जैसी समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को भीगे हुए चने व् मूंग दाल का सेवन करने से मिलते हैं, इसके अलावा इनका सेवन करने से पहले ऊपर दिए गए टिप्स का ध्यान भी जरूर रखना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को इसके फायदे मिल सके और किसी भी तरह का नुकसान न हो।

चेहरे पर लगे चोट के निशान हटाने के तरीके!

चेहरे पर लगा चोट का निशान देखने में तो अजीब लगता ही है साथ-साथ आपकी पर्सनालिटी को भी प्रभावित करते है। इसीलिए आज हम आपको त्वचा पर लगे चोट के निशान को दूर करने के घरेलू उपाय बताने जा रहे है। जो सुरक्षित होने के साथ-साथ लाभकारी भी होंगे।

साफ़-सुथरी और बेदाग त्वचा किसे पसंद नहीं होती। लेकिन कई बार हमारी बचपन की गलतियों और छोटी मोटी लापरवाही के चलते हम अपनी इस इच्छा से हमेशा के लिए दूर हो जाते है। क्योंकि कभी-कभी त्वचा पर आए मुहांसे, बचपन में लगी या किसी अन्य कारण से हमारे चेहरे पर कुछ दाग़ और निशान रह जाते है। जो हमारी खूबसूरती पर हमेशा के लिए ग्रहण लगा देते है। अब भला चाँद पर दाग़ किसे पसंद होता है?

ऐसा नहीं है की हम उनसे छुटकारा पाने के प्रयास नहीं करते। लेकिन चाहते हुए भी इस समस्या से छुटकारा नहीं पा पाते। बाज़ार में मौजूद क्रीम और लोशन जख्म तो ठीक कर देते है। लेकिन उनके दाग़ जिन्दगी भर जस के तस ही रहते है। बहुत से लोग इन निशानों को हटाने के लिए कई तरह की दवाइयों का प्रयोग करते है। कुछ लोग तो उन्हें हटाने के लिए सर्जरी तक करवा लेते है। लेकिन सिर्फ चोट के निशान के लिए सर्जरी करवाना हर किसी के लिए सम्भव नहीं।

ऐसे में आपको चाहिए की कुछ ऐसे तरीकों का इस्तेमाल करे जो फायदेमंद होने के साथ-साथ सुरक्षित हो। इसके लिए घरेलू उपाय बिलकुल परफेक्ट रहेंगे। लेकिन सभी को इन उपायों की पूर्ण जानकारी नहीं होती। इसीलिए आज हम आपको चोट के निशान हटाने के कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे है। जिनकी मदद से आप घर बैठे ही बिना किसी दवाओं के इस्तेमाल के इन निशानों को हमेशा के लिए हटा सकती है।

चोट के निशान दूर करने के घरेलू उपाय :- 

1. बेकिंग सोडा :

बेकिंग सोडा हर घर में मिलने वाली चीज है जो त्वचा संबंधी सभी समस्यायों को दूर करने में मदद करता है। मुहांसे हो या ब्लैकहैड, खुजली हो या चोट का निशान, ये घरेलू उत्पाद हर परेशानी को दूर कर सकता है। अगर आपके चेहरे पर भी किसी तरह की चोट का निशान है और आप उसे हमेशा के लिए हटाना चाहती है तो उसके लिए ये करें।

  • सबसे पहले एक चम्मच बेकिंग सोडा और तीन चम्मच पानी लें।
  • इसके बाद दोनों को अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट बना लें।
  • अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा एक उस हिस्से पर लगायें जहां चोट का निशान है।
  • 5 मिनट तक इसे ऐसे ही लगे रहने दें ताकि यह सुख जाए।
  • सूखने के बाद गुनगुने पानी से अपना चेहरा साफ़ कर लें।
  • नोट : इस पेस्ट को लगाते समय एक बात का ध्यान रखें की जब आप इसे लगायें और ज्यादा रगड़े नहीं।
  • कुछ ही दिनों के इस्तेमाल से आपकी चोट का निशान बिलकुल गायब हो जाएगा।

2. शहद :

कच्चे शहद में कई तरह के औषधीय और कॉस्मेटिक गुण पाए जाते है जो चोट के निशान को दूर करने में भी सक्षम है। ये त्वचा एम् टिश्यू के निर्माण को बढाकर घाव भरने में मदद करता है। बेकिंग सोडा त्वचा को exfoliate करता है जबकि शहद उसे मुलायम और स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके प्रयोग के लिए।

  • 1 चम्मच कच्चा शहद, 1 चम्मच बेकिंग सोडा, 1 छोटी टॉवल और गर्म पानी की आवश्यकता होगी।
  • सबसे पहले शहद और बेकिंग सोडा को मिलाकर एक पेस्ट बना लें।
  • अब इस पेस्ट से चोट के निशान की 3-5 मिनट तक मसाज करें।
  • मसाज करने के बाद उस जगह गर्म टॉवल रखें।
  • जब टॉवल ठंडी हो जाए तो उसके बाद त्वचा को साफ़ कर लें।
  • दिन में दो बार के इस्तेमाल से निशान अपने आप चला जाएगा।

3. एलोवेरा :

एलोवेरा में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते है जो त्वचा में हो रही जलन को दूर करके, चोट के निशान को हटाकर त्वचा में नए सेल्स के उत्पादन को बढ़ाते है। जिससे समय के साथ-साथ निशान हल्का पड़ने लगता है। इसके लिए-

  • एक पत्ते का एलोवेरा जेल निकाल लें।
  • सबसे पहले ताजे जेल को चोट के निशान पर लगायें। ऐसा रात को सोने से पहले करें तो बेहतर होगा।
  • उसके बाद धीरे धीरे इससे त्वचा की मसाज करें।
  • इसे धोएं नहीं बल्कि त्वचा में समाने दें। ये आपकी चोट के दाग़ को हल्का करने में मदद करेगा।
  • रात को सोने से पहले दिन में 2 से 3 बार इस उपाय का इस्तेमाल करें।

4. खीरा :

खाने का सहायक होने के साथ-साथ ये त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं भी दूर करने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल और एंटी ओक्सिडेंट गुण त्वचा में सेल्स के रिजनरेशन को बढ़ा कर उनमे नए सेल्स का निर्माण करता है। जिससे चोट का निशान हलका पड़ने लगता है। इसके उपयोग के लिए-

  • सबसे पहले एक खीरे को काट लें। और उसका पेस्ट बना लें।
  • पेस्ट बनाने के बाद इसे अपनी चोट के निशान पर अच्छे से लगायें।
  • कुछ देर रखने के बाद साफ़ पानी से हटा लें।
  • ये आपकी चोट के निशान को दूर करने के साथ-साथ त्वचा को चमकदार बनाने में भी मदद करेगा।
  • आप चाहे तो खीरे का रस निकालकर उसे भी चोट के निशान पर लगा सकती है।

5. प्याज़ :

चोट के निशानों को दूर करने के लिए ये बहुत बेहतर तरीके से काम करती है। दरअसल प्याज़ में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते है जो कोलेजन के निर्माण को बढ़ाकर निशानों को दूर करने में मदद करता है। आजकल को कई क्रीम्स और जेल में प्याज़ एक्सट्रेक्ट बेसिक सामग्री के रूप में प्रयोग की जाने लगी है। नियमित रूप से इसके इस्तेमाल करने से scar रहित स्किन पाई जा सकती है।

  • इसके उपाय के लिए आपको प्याज़ के रस की आवश्यकता होगी।
  • जिसके लिए एक प्याज़ को पीसकर उसका रस निकाल लें।
  • अब इस रस को चोट के निशान पर लगा लें और सूखने का इंतजार करें।
  • 15 मिनट बाद पानी से इस रस को साफ़ कर लें।
  • दिन में 3-4 बार इस उपाय का इस्तेमाल करने से आपकी समस्या दूर हो जाएगी।

6. कोको बटर :

आप चाहे तो कोको बटर का इस्तेमाल करके भी अपनी चोट के निशान को दूर कर सकती है। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है बस बटर और कोको को एक साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें। आप चाहे तो बाज़ार में मिलने वले कोको बटर का भी इस्तेमाल कर सकती है। पेस्ट बनाने के बाद इसे अपनी चोट के निशान पर लगायें। थोड़ी देर रखने के बाद धो दें। दिन में तीन से चार बार के इस्तेमाल से आपकी त्वचा पर से चोट का निशान हल्का पड़ जाएगा।

7. क्रीम और लोशन :face 1

घरेलू उपचारों के अतिरिक्त आप दाग़ हटाने वाली क्रीम और लोशन का भी इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन इनके इस्तेमाल से पूर्व डॉक्टरी सलाह जरुर लें। आप इन्हें दिन कई बार भी लगा सकती है। ये तरीका भी चोट के निशान को दूर करने में आपकी मदद करेगा।

चेहरे से चोट के निशान दूर करने के अन्य उपाय :- 

1. कच्चा आलू :

आलू में विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो त्वचा के स्किन टोन को हल्का करके दाग़ आदि को दूर करने में मदद करता है। इसके लिए सबसे पहले एक कच्चा आलू लें और उसे गोल slices में काट लें। अब इन टुकड़ों को चोट के निशान पर गोलाई में रगड़े। ऐसा तब तक करते रहे जब तक टुकड़ा पूरी तरह सुख न जाए। पहली स्लाइस सूखने के बाद दूसरी स्लाइस ले और उसे भी ऐसे ही रगड़ें। 20 से 30 मिनट तक करने के बाद जब चेहरा सुख जाए तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें। और हां, धोने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें। इस उपाय को काम करने में थोडा वक्त लगेगा इसीलिए हफ्ते में 3 से 4 बार इसका प्रयोग करें।

2. नींबू :

नींबू में मौजूद ब्लीचिंग गुण त्वचा के दाग़ आदि दूर करने में मदद करते है। इसकी मदद से आप चेहरे पर लगे चोट के निशान को भी दूर कर सकती है। इसके लिए नींबू को काट कर उसका रस निकाल लें। अब रुई को नींबू के रस के भिगोकर चोट के निशान पर लगायें। 10 से 15 मिनट तक रखने के बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें।

3. बादाम :

बादाम के फल के साथ-साथ उसका तेल भी मनष्य के लिए लाभकारी होता है। इससे त्वचा को निखरती ही है साथ ही बुद्धि भी तेज होती है। इसके अतिरिक्त त्वचा पर चोट के निशान को दूर करने के लिए ये काफी लाभकारी होता है। इसके लिए 2 से 3 बादाम को रातभर भिगो कर रख दें। अगली सुबह छिलका उतारकर उसे पीस लें। पेस्ट में थोडा गुलाबजल भी मिलाएं। अब इस मिश्रण को अपने दाग़ पर लगायें। और 10-15 मिनट तक इसे लगाए रखें। बाद में गुनगुने पानी से अपना चेहरा धो लें।

4. चंदन :

चंदन में एंटी बायोटिक गुण पाए जाते है जो त्वचा में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया समाप्त करने में मदद करता है। इसके अलावा त्वचा के निशानों को दूर करने के लिए भी ये उपाय काफी असरदार है। इसके लिए एक चम्मच चंदन के पाउडर में दूध या गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगायें और मसाज करें। एक घंटे तक रखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। आपकी समस्या दूर हो जाएगी।

5. जैतून का तेल (ओलिव आयल) :

ओलिव आयल में कई तरह के विटामिन जैसे A,D,E,C,B1 और B2 पाए जाते हैं जो त्वचा के लिए लाभकारी हैं। इसमे मौजूद anti-inflammatory properties scars का नामो-निशान खत्म करने में मदद करती हैं। इसके प्रयोग के लिए रुई से ओलिव आयल को चोट के निशान पर लगायें। इससे तब तक मसाज करते रहे जब तक त्वचा पूरा तेल न सोख लें। उसके बाद एक बाल्टी में गर्म पानी लेकर उसमे तौलिया डुबोएं। और भाप लेने के लिए गर्म कपड़े को अपने चेहरे पर रखें। 5-10 मिनट तक इसे अपने चेहरे पर हो रखें। उसके बाद नार्मल पानी से चेहरा धो लें।

तो ये थे कुछ घरेलू उपाय, जिनकी मदद से आप अपने चेहरे से चोट के निशान को हमेशा के लिए हटा सकती है। और सबसे बड़ी बात इन उपायों के लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है। तो अगली बार, दाग़ हटाने के लिए कॉस्मेटिक क्रीम नहीं बल्कि घरेलू तरीकों का इस्तेमाल करें।