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पुरुष की छाती में गाँठ का इलाज

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छाती में गांठ की समस्या केवल महिलाओं में ही नहीं बल्कि पुरुषो में भी देखी जाती है, और इस समस्या के कारण ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं। क्योंकि छाती में गांठ होने पर उन्हें केवल यही डर लगा रहता है की कहीं उनको कैंसर तो नहीं हो गया है। लेकिन छाती में गांठ का होने केवल कैंसर के कारण ही नहीं होता है। बल्कि ऐसे और बहुत कारण हो सकते हैं जिसके कारण पुरुषो की छाती में गांठ की समस्या हो सकती है। जैसे की मांसपशियों के एक जगह जुड़ जाने के कारण, छाती में उत्तको में वसा का जमाव होने के कारण, आयोडीन की कमी होने के कारण आदि। ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए आप बहुत से टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की आप छाती की गांठ की समस्या से बचने के लिए क्या कर सकते हैं।

मसाज करें

गुनगुने तेल को अपने हाथ पर लगाकर अच्छे से छाती की मसाज करें, जहां पर गांठ है वहां पर हलके हाथों से दबाएं, और मालिश करें। ऐसा करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, मांसपेशियों को अलग अलग करने में मदद मिलती है। ऐसा नियमित करने से हो सकता है आपकी छाती की गांठ धीरे धीरे खत्म हो जाये।

सिकाई करें

गरम पानी को बोतल में डालकर या हॉट पैड का इस्तेमाल करके अच्छे से अपनी छाती की सिकाई करें, इससे वसा का जमाव कम करने के साथ ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद मिलती है। जिससे आपको इस परेशानी से निजात मिल जाता है। आप चाहे तो बर्फ से भी सिकाई कर सकते हैं क्योंकि बर्फ ठंडी तो होती है पर इसकी तासीर गर्म होती है यह भी आपको गर्माहट प्रदान करती है, जिससे आपको छाती में होने वाली गांठ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा ईंट के छोटे टुकड़े को लेकर आप अच्छे से गैस पर गरम कर लें, और उसके बाद उसे सूती कपडे में डालकर उससे सिकाई करें इससे भी आपको गर्माहट का अहसास होता है और आपको इस परेशानी से निजता पाने में मदद मिलती है।

हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें

शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ ब्लड फ्लो को भी बेहतर करने में हरी पत्तेदार सब्जियां बहुत मदद करती हैं। साथ ही इससे बॉडी में वसा का जमाव भी नहीं होता है, और यह बॉडी को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व भी देती है। जिससे आपकी छाती में फैट के जमाव की समस्या से निजात के साथ ब्लड फ्लो भी बेहतर रहता है, और आपको छाती से जुडी इस समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है।

आयोडीन की कमी न होने दे

बॉडी में आयोडीन की कमी के कारण भी छाती में गांठ बन सकती है, लेकिन यदि आप पर्याप्त मात्रा में आयोडीन का सेवन करती हैं तो ऐसा करने से आयोडीन धीरे धीरे छाती में बनने वाली गांठ को पिघला देता है। जिससे आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

पानी का भरपूर सेवन बॉडी में होने वाली बहुत सी परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करता है। ऐसे में यदि आपको छाती में गांठ की समस्या है तो आपको पानी की कमी शरीर में नहीं होने देनी चाहिए, क्योंकि जितना आप पानी व् तरल चीजों का सेवन करते हैं उतनी ही जल्दी तरल पदार्थ के साथ गांठ कम होने लगती है।

डॉक्टर से राय लें

यदि आपके उपचार करने के बाद भी आपको आराम न मिलें, दर्द अधिक हो, या अन्य किसी भी तरह की परेशानी हो तो उसे नज़रअंदाज़ न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। और अपनी जांच अच्छे से करवानी चाहिए। ताकि यदि कोई समस्या हो तो आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ उपचार जिनका इस्तेमाल करके आप ब्रैस्ट से जुडी समस्या का समाधान कर सकते हैं। साथ ही आपको अपने खान पान का बेहतर ध्यान रखना चाहिए शरीर में खून व् पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।

ये 20 चीजें खाना बंद करें जब आप प्रेग्नेंट हो

प्रेग्नेंट महिला नहीं खाएं यह चीजें, प्रेगनेंसी के समय क्या खाना चाहिए और किन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसे लेकर प्रेग्नेंट महिला परेशान हो सकती है। खासकर जो महिलाएं पहली बार प्रेगनेंसी का अनुभव ले रही होती है उन्हें खान पान को लेकर ज्यादा दिक्कत हो सकती है। और खान पान के प्रति सतर्कता बरतना गर्भवती महिला के लिए जरुरी भी होता है। क्योंकि बेहतर खान पान यदि गर्भवती महिला व गर्भ में पल रहे शिशु के लिए यदि फायदेमंद होता है। तो गलत खान पान से गर्भवती महिला व भ्रूण के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है। तो आइये आज हम इस आर्टिकल में प्रेग्नेंट महिला के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनका सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो खाद्य पदार्थ कौन से हैं।

प्रेग्नेंट महिला नहीं खाएं कच्चे अंडे

  • प्रेग्नेंट महिला को कच्चे अंडो का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होता है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण होने के साथ उल्टियां, दस्त जैसी समस्या भी हो सकती है।

कैफीन का सेवन

  • गर्भवती महिला को जिन खाद्य पदार्थों में कैफीन की अधिकता हो उनका सेवन भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इसे गर्भपात, जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी हो सकती है।
  • चाय, कॉफ़ी, चॉकलेट आदि में कैफीन की मात्रा मौजूद होती है।

क्रीम दूध से बना पनीर

  • बाजार में मिलने वाला पनीर जिसे बनाने के लिए क्रीम वाले दूध का इस्तेमाल किया जाता है प्रेग्नेंट महिला को उस पनीर का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि उसमे लिस्टेरिया नामक बैक्टेरिया मौजूद हो सकता है।
  • जिससे गर्भपात, समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या का प्रेग्नेंट महिला को सामना करना पड़ सकता है।

कच्चा मांस

  • प्रेग्नेंट महिला को कच्चा मांस या अच्छे से न पका हुआ मांस भी नहीं खाना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें भी हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।
  • जिससे गर्भपात जैसी समस्या का प्रेग्नेंट महिला को सामना करना पड़ सकता है।

प्रेग्नेंट महिला नहीं खाएं मरकरी युक्त मछली यानी सी फ़ूड

  • गर्भावस्था के दौरान मरकरी युक्त मछली का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि मरकरी की मात्रा यदि गर्भवती महिला के शरीर में बढ़ जाती है तो इसके कारण भ्रूण के विकास में बाधा आ सकती है।
  • जैसे कि स्पेनिश मेकरल, मार्लिन या शार्क, किंग मेकरल, टिलेफिश जैसी मछलियों में मरकरी का स्तर ज़्यादा होता है।

कच्चा पपीता

  • कच्चा पपीता प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला को नहीं खाना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें लेटेक्स की मात्रा अधिक होने के कारण प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में यह गर्भपात जैसी समस्या खड़ी कर सकता है।
  • साथ ही कच्चे पपीते में पेपैन नामक एंजाइम होता है जो भ्रूण के विकास में रूकावट का कारण बन सकता है।

अनानास

  • गर्भवती महिला को जितना हो सके अनानास के सेवन से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि अनानास में ब्रोमेलिन की मात्रा मौजूद होती है जो समय पूर्व प्रसव का कारण बन सकती है।

डिब्बाबंद आहार

  • गर्भावस्था के दौरान डिब्बाबंद आहार का सेवन बाजार से लेकर गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें सोडियम की मात्रा की अधिकता होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान समस्या खड़ी कर सकती है।

प्रेग्नेंट महिला नहीं खाएं जंक फ़ूड

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का चटपटा, मसालेदार खाने की इच्छा हो सकती है।
  • लेकिन प्रेग्नेंट महिला को अपनी इस इच्छा पर थोड़ा कण्ट्रोल रखना चाहिए।
  • क्योंकि बाहर के खाने, जंक फ़ूड में तेज मसालों, शुगर, बहुत ज्यादा तेल आदि का इस्तेमाल होता है।
  • जो गर्भवती महिला व भ्रूण की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

बिना धुले फल व सब्जियां

  • प्रेगनेंसी के दौरान खान पान की चीजों में साफ सफाई का ध्यान रखना जरुरी होता है ताकि किसी भी तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • ऐसे में बिना धुले किसी भी फल या सब्ज़ी का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इन पर हानिकारक बैक्टेरिया होने का खतरा होता है जो प्रेग्नेंट महिला व शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • इसके अलावा यदि आपने किसी फल या सब्ज़ी को बहुत देर पहले से काटकर बिना ढके रखा हुआ है तो उसका सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।

करेला

  • गर्भावस्था के दौरान करेले का सेवन यदि बीजों के साथ किया जाएँ तो यह गर्भवती महिला व भ्रूण के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • क्योंकि इसके कारण गर्भपात, महिला को लिवर सम्बन्धी समस्या, ब्लड प्रैशर कम होना, पेट में दर्द जैसी समस्या हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला नहीं खाएं ज्यादा मीठा

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को मीठी चीजों का सेवन भी सिमित मात्रा में करना चाहिए।
  • क्योंकि अधिक मीठा खाने से प्रेग्नेंट महिला को जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने व गेस्टेशनल डाइबिटीज़ जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

नमक

  • जरुरत से ज्यादा नमक का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इसके कारण ब्लड प्रैशर का बढ़ना, सूजन आदि की समस्या बढ़ सकती है।
  • और प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर का बढ़ना गर्भपात का कारण भी बन सकता है।

प्रेग्नेंट महिला नहीं खाएं अदरक

  • गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अदरक का सेवन भी अधिक मात्रा में करने से बचना चाहिए साथ ही सूखा अदरक यानी सौंठ का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि अदरक की तासीर गर्म होती है ऐसे में अदरक का अधिक सेवन करने से गर्भपात का खतरा हो सकता है।

कच्चा दूध

  • गर्भवती महिला को कच्चे दूध का सेवन करने से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि कच्चे दूध में मौजूद बैक्टेरिया के कारण गर्भवती महिला को डायरिया जैसी दिक्कत होने का खतरा रहता है।

तुलसी

  • औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण भ्रूण की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • जिसके कारण गर्भपात का खतरा भी हो सकता है।

गर्म तासीर की चीजें

  • गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को उन चीजों का सेवन सिमित मात्रा में ही करना चाहिए जिनकी तासीर गर्म होती है।
  • जैसे की अंगूर, ड्राई फ्रूट, केसर आदि।
  • क्योंकि इनका सेवन करने से प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में गर्भपात व समय पूर्व प्रसव जैसी दिक्कत होने का खतरा भी रहता है।

कच्ची अंकुरित चीजें

  • गर्भवती महिला को कच्ची अंकुरित चीजों का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इनमे साल्मोनेला, लिस्टेरिया जैसे बैक्टेरिया मौजूद होते हैं।
  • जो गर्भवती महिला व भ्रूण की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

प्रेग्नेंट महिला नहीं खाएं गुड़

  • गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को ऐसी कोई भी चीज नहीं खानी चाहिए जिसमे पिघले हुए गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है।
  • गुड़ का सेवन भी जरुरत से ज्यादा गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि गुड़ की तासीर गर्म होती है ऐसे में यह गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

अल्कोहल

  • नशीले पदार्थ जैसे की अल्कोहल का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि अल्कोहल का सेवन करने से भ्रूण का शारीरिक के साथ मानसिक विकास भी प्रभावित हो सकता है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जो प्रेग्नेंट महिला को नहीं खाने चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान खाने पीने के कारण किसी तरह की समस्या न हो। और गर्भवती महिला व शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

गर्मियों में गर्भवती महिला को ठंडा तेल लगाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान महिला को फिट रहने रहने के लिए और रिलैक्स रहने के लिए कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। जैसे की पेट को छोड़कर महिला शरीर के बाकी हिस्सों की मालिश कर सकती है। और मालिश के लिए अधिकतर लोग आपको नारियल तेल, बादाम आदि को चुनने की सलाह देते हैं। लेकिन मार्किट में मिलने वाले ठन्डे तेल जैसे की नवरतन तेल आदि भी गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होते हैं। प्रेग्नेंट महिला इस तेल को अपने सिर, पैर, आदि सभी जगह पर लगा सकती है इससे स्किन को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचता है खासकर गर्मियों के मौसम मेएह बहुत फायदेमंद होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्मियों में गर्भवती महिला को ठंडा तेल इस्तेमाल करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

रिलैक्स महसूस होता है

ठन्डे तेल से सिर या पेट को छोड़कर बॉडी के बाकी सभी हिस्सों की मालिश की जा सकती है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को शारीरिक परेशानियों के कारण काफी दिक्कत महसूस होती है और महिला बहुत ही सुस्त सा महसूस करती है। ऐसे में बैठे बैठे अपने आप या किसी दूसरे से ठन्डे तेल की मालिश करवाने से गर्भवती महिला को रिलैक्स महसूस होने में मदद मिलती है। साथ ही महिला दिमागी रूप से भी फ्रेश महसूस करती है।

ठंडक मिलती हैं

गर्मियों के मौसम में ठन्डे तेल की मालिश करने से ठंडक का अहसास होता है जिससे गर्भवती महिला को गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो सही होता है

ठन्डे तेल की मालिश करने से बॉडी के जिस हिस्से की आप मालिश करते हैं वहां मांसपेशियों में आई जकड़न को दूर करने व् ब्लड फ्लो को सही से होने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को सिर पैर आदि की मालिश के लिए ठन्डे तेल का का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

नींद आती है बेहतर

वजन बढ़ने के कारण, शारीरिक परेशानियों की वजह से गर्भवती महिला अपनी नींद को अच्छे से नहीं ले पाती है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को ज्यादा परेशानी होती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला रात को सोने सेपहले ठन्डे तेल से मालिश करती है। तो इससे गर्भवती महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

एनर्जी मिलती है

प्रेगनेंसी के दौरान मांसपेशियों में जकड़न, हड्डियों में कमजोरी, शारीरिक परेशानियों के अधिक होने के कारण गर्भवती महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या अधिक होती है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि ठन्डे तेल से अपनी बॉडी की मसाज करती है तो इसे मांसपेशियों और हड्डियों को आराम मिलता है, बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है जिससे गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर और एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

स्किन मुलायम होती है

गर्मी के मौसम में गर्भवती महिला को स्किन के ड्राई होने के कारण गर्भवती महिला को खुजली जैसी समस्या अधिक हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि ठन्डे तेल से मालिश करती है तो इससे स्किन की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो ठन्डे तेल का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो इन बेहतरीन फायदों के लिए आप भी ठन्डे तेल का इस्तेमाल कर सकती है।

गर्भावस्था में आहार गर्भवती महिला के लिए

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गर्भधारण के बाद महिला यदि अपने आहार का अच्छे से ध्यान रखती है तो ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला की जटिलताएं कम होती है, महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, भरपूर मात्रा में पोषक तत्व बॉडी को मिलते हैं, शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है, और यदि महिला शुरुआत से ही अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है तो ऐसा करने से प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात का खतरा कम होता है। गर्भवस्था के दौरान महिला को आयरन, फोलिक एसिड, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन व् अन्य मिनरल्स का भरपूर सेवन करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कौन कौन से आहार का सेवन करना चाहिए।

आयरन से भरपूर आहार

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को आयरन से भरपूर आहार का सेवन पहली तिमाही में ही शुरू कर देना चाहिए। ताकि बॉडी में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन हो, और शिशु के बेहतर विकास, महिला को स्वस्थ रहने, और डिलीवरी के दौरान महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए महिला को फोलिक एसिड की दवाई ले ने के साथ, हरी सब्जियां खासकर पालक, अनार, टमाटर, गाजर, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में आयरन मौजूद होता है।

डेरी उत्पाद

डेरी उत्पाद में प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा भरपूर होती है। जो की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास और मांसपेशियों की मजबूती को बनाएं रखने में मदद करते है। इसीलिए दूध, दही, मक्खन, पनीर आदि का सेवन आपको भरपूर करना चाहिए।

दालों का सेवन करें

दालों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर करना चाहिए क्योंकि इसमें आयरन, विटामिन, प्रोटीन, फाइबर व् अन्य मिनरल भरपूर होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

अंडा

विटामिन डी, प्रोटीन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अंडे का सेवन करने से हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, साथ ही यह भ्रूण के लिए भी बेहतर होता है। और सुबह नाश्ते में दो उबले अंडे का सेवन करने से आपको एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

पेय पदार्थ

बॉडी को हाइड्रेट रखने के लिए और बॉडी में पानी की कमी न हो इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ, घर में बना ताजा जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी, आदि का सेवन भी भरपूर करना चाहिए। क्योंकि पानी की कमी भी प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी का विषय बन जाती है।

फल

फलों का सेवन भी प्रेगनेंसी में भरपूर करना चाहिए क्योंकि इनमे मौजूद भरपूर पोषक तत्व भी फिट रहने के लिए बहुत जरुरी होते हैं। और खट्टे फल जैसे संतरा, कीनू, मौसमी आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि इनमे विटामिन सी, फाइबर आदि भरपूर होता है जो प्रेगनेंसी में होने वाली अपच की समस्या से आपको बचाए रखने में मदद करते हैं।

नट्स

सूखे मेवों में भी प्रोटीन, खनिज, व् अन्य मिनरल्स भरपूर होते है जो की महिला के साथ शिशु के लिए फायदेमंद होते हैं। सुबह उठकर आप भीगे हुए बादाम, खजूर, किशमिश आदि का सेवन कर सकते है, यह आपको एनर्जी से भरपूर रखने में भी मदद करते हैं।

नॉन वेज

यदि आप नॉन वेज खा लेती है तो प्रेगनेंसी में हफ्ते में एक बार मछली या चिकन का सेवन करना फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें आयरन, प्रोटीन, आदि फलों व् सब्जियों से ज्यादा होता है जो की प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होता है।

तो यह हैं कुछ गर्भवस्था के दौरान खान पान के लिए टिप्स इनका इस्तेमाल करने से न केवल प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। बल्कि इससे भ्रूण के विकास को भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। इसके साथ प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपनी नियमित जांच भी करवाते रहना चाहिए। और अपने आहार को समय से लें, वजन बढ़ने के डर से डाइट न करें, जंक फ़ूड से दुरी रखे, और दिन में थोड़े थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए।

यूट्यूब विडिओ –

एक से नौ महीने तक गर्भवती महिला को ये खाना चाहिए।

प्रेगनेंसी में भूख बढ़ाने के उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान खाने पीने की इच्छा में कमी आना आम बात होती है। इसका कारण तेजी से बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। इन हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक बदलाव भी देखने को मिलते हैं। लेकिन खान पान में लापरवाही करना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। क्योंकि यदि महिला अच्छे से आहार का सेवन नहीं करेगी तो बॉडी में एनर्जी नहीं होगी जिसके कारण थकान, कमजोरी के साथ अन्य बहुत सी परेशानियों का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

इसके अलावा यदि गर्भ में पल रहे शिशु की जरुरत अनुसार उसे पोषक तत्व नहीं मिलते हैं तो उसके शारीरिक विकास में भी कमी आ सकती है। ऐसे में खान पान के प्रति लापरवाही गर्भवती महिला को नहीं करनी चाहिए। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को भूख की कमी होती है, तो ऐसे में महिला को भूख बढ़ाने के लिए कुछ खास टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान भूख बढ़ाने के लिए महिला क्या क्या कर सकती है।

एक बार में न खाएं

गर्भवती महिला को भूख बढ़ाने के लिए थोड़े थोड़े समय बाद खाना चाहिए और थोड़ा थोड़ा खाना चाहिए। इससे भोजन को आसानी से पचने में मदद मिलेगी, पेट भी खाली नहीं रहेगा, और भूख को बढ़ने में भी मदद मिलेगी। यदि खाने की इच्छा नहीं भी है तो भी एक रुटीन बनाना चाहिए जिससे धीरे धीरे उस रूटीन की आदत हो जाती है और फिर आपको भूख में कमी की समस्या से परेशानी नहीं होना पड़ता।

ज्यादा मसालों से बचें

ज्यादा मसालें वाले आहार, तेलीय आहार, बाहर का खाना, जंक फ़ूड आदि का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन, जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिसके कारण खाने की इच्छा में कमी आ सकती है, ऐसे में गर्भवती महिला को हल्का और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए जिसे हज़म करने में आसानी हो, और पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

हल्का व्यायाम करें

प्रेगनेंसी के दौरान आराम करना सेहत के लिए बहुत जरुरी होता है, लेकिन अधिक आराम प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में हल्का फुल्का व्यायाम प्रेगनेंसी के दौरान किया जा सकता है, इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियां, जैसे तनाव, वजन तेजी से बढ़ना, भूख में कमी जैसी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। व्यायाम करने से पहले एक बार डॉक्टर या जिम ट्रेनर की राय जरूर लेनी चाहिए।

पसंद का खाएं

ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने मनपसंद की चीजों को खाने का मन करे तो उन्हें जरूर खाना चाहिए, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की इससे गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को किसी तरह का नुकसान न हो। ऐसा इसीलिए क्योंकि महिला यदि अपनी पसंद के खाने का सेवन करती है तो इससे भी गर्भवती महिला की भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है।

योगासन

गर्भवती महिला यदि योगासन करती है तो इससे गर्भवती महिला को मानसिक रूप से स्वस्थ होने के साथ शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। और ऐसे कई तरह के योगासन होते हैं जो भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को योगासन करना चाहिए जिससे भूख से जुडी परेशानी से महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।

नई रेसिपी को ट्राई करें

भूख को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को नई रेसिपी को ट्राई करनी चाहिए, नई नई रेसिपी ट्राई करने के साथ इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की वह पोषक तत्वों से भरपूर हो। ऐसा करने से नई नई चीजों का स्वाद मिलते है जिससे भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

भरपूर मात्रा में तरल पदार्थो का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने में मदद मिलती है। पानी का भरपूर सेवन करने से पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को भूख बढ़ाने में मदद मिलती है। पानी के साथ अन्य तरल पदार्थ जैसे की जूस, निम्बू पानी आदि का सेवन भी भरपूर करना चाहिए।

फाइबर युक्त आहार का सेवन करें

प्रेगनेंसी में भूख को बढ़ाने के लिए फाइबर युक्त आहार का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने के साथ, भोजन को आसानी से पचाने में भी मदद मिलती है। जिससे भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी के दौरान भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है। और साथ ही खाने पीने में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए जिससे प्रेगनेंसी के समय गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के भी बेहतर विकास में मदद मिल सके।

सिजेरियन डिलीवरी से होते हैं यह नुकसान

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जैसे जैसे डिलीवरी का समय नजदीक आता है वैसे वैसे महिलाओं के मन में डर आने लगता है और वो सोचती रहती हैं, की उनकी डिलीवरी नार्मल होगी या सिजेरियन। लेकिन आज कल ऐसा देखा जाता है की तीन में से दो डिलीवरी सिजेरियन ही होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं की सिजेरियन डिलीवरी से महिला को कितनी परेशानी होती है, इसे सी सेक्शन डिलीवरी भी कहा जाता है। जिसमे महिला के पेट पर कट लगाकर शिशु को गर्भाशय से बाहर निकाला जाता है। इस डिलीवरी के दौरान महिला को किसी तरह का दर्द नहीं होता है, लेकिन आप जितने दर्द से उस समय बच जाती है, उतनी ही परेशानियां आपको बाद में होती है, तो आइये अब जानते हैं सिजेरियन डिलीवरी से जुडी कुछ बातों को।

सिजेरियन डिलीवरी से होने वाले नुकसान

आज कल महिलाएं दर्द से बचने के लिए या कुछ कॉम्प्लीकेशन्स के होने के कारण सिजेरियन डिलीवरी का सहारा लेती है। तो आइये आज हम आपको बताते हैं की सिजेरियन डिलीवरी के बाद आपको कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं।

ब्लड ज्यादा निकलता है

महिला को सिजेरियन डिलीवरी के दौरान कट लगाया जाता है जिसके कारण महिला का बहुत अधिक रक्त निकलता है, इसके अलावा डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को जो ब्लीडिंग होती है वो नार्मल डिलीवरी से अधिक और ज्यादा दिनों के लिए होती है। और कई बार तो सिजेरियन डिलीवरी में महिलाओं को रक्त चढ़ाना भी पड़ता हैं। ऐसे में महिला को अधिक कमजोरी हो सकती हैं।

रिकवर होने में ज्यादा समय लगता है

नार्मल डिलीवरी के बाद महिला जहां तीन से चार हफ्ते के बाद फिट होने लग जाती है, वहीँ सिजेरियन डिलीवरी की महिला दो महीने से ज्यादा का समय भी ले लेती है। क्योंकि टाँके सूखने के बाद भी महिलाओं को उठने बैठने में अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिससे महिलाओं को पूरी तरह से फिट होने में समय लगता है।

कमजोर हो जाती है

खान पान में भी यदि देखा जाए तो नार्मल डिलीवरी के बाद महिलाओं को दूध, घी का सेवन करवाना शुरू कर देते हैं, जिससे महिला को शारीरिक रूप से जल्दी से फिट होने में मदद मिले। और उसे कमजोरी न हो जबकि सिजेरियन डिलीवरी के दो हफ्ते या जब तक टाँके पूरी तरह सूख नहीं जाते हैं तब तक महिलाओं को ऐसा कुछ भी नहीं दे सकते जिसके कारण महिलाएं अधिक कमजोर महसूस करने लगती है। क्योंकि यदि महिलाएं को घी आदि का सेवन करवाते हैं तो इसके कारण टाँके सूखने में अधिक समय लगता है।

बच्चे पर भी पड़ता है असर

सिजेरियन डिलीवरी से जन्म लेने वाले बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली उतनी मजबूत नहीं होती है जितनी की नार्मल डिलीवरी वाले बच्चों की होती है। ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी वाले बच्चे बहुत जल्दी रोगो की चपेट में आने लगते हैं।

इन्फेक्शन का डर होता है

प्रसव के बाद महिला और बच्चे दोनों को ही संक्रमण का खतरा अधिक होता है, ऐसे में यदि थोड़ी लापरवाही की जाए तो महिला और शिशु दोनों को इन्फेक्शन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

सम्बन्धो पर पड़ता है असर

सी सेक्शन डिलीवरी होने के बाद महिला को पूरी तरह से फिट होने में अधिक समय लगता है। जिसके कारण उनके सम्बन्धो पर भी असर पड़ता है, क्योंकि जब आप सम्बन्ध बनाना भी शुरू कर देते हैं उसके बाद भी आपको काफी दिनों तक बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है, जिसके कारण आप अपनी लाइफ को उस तरह एन्जॉय नहीं कर पाते हैं जिस तरह से आपको करना चाहिए।

मोटापा

सिजेरियन डिलीवरी के बाद ज्यादातर महिलाओं को पेट बाहर निकलने की समस्या से परेशान होना पड़ता है, क्योंकि इस दौरान कम से कम तीन महीने तक वो किसी भी तरह की एक्सरसाइज नहीं कर सकती है। और यदि करती भी है तो इसके लिए उन्हें बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो आपको सिजेरियन डिलीवरी के बाद होते हैं, इसके अलावा कई बार यह आपकी आर्थिक समस्या से भी जुडी समस्या को खड़ी कर सकता है क्योंकि नार्मल डिलीवरी की अपेक्षा सिजेरियन डिलीवरी में अधिक खर्चा होता है।

प्रेगनेंसी में मुँह कड़वा होना, फीका लगना और खाने का मन नहीं करना ये है उपाय

प्रेगनेंसी में मुँह का स्वाद

गर्भवती महिला के शरीर में प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं, और इन बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां जैसे की उल्टी, सीने में जलन, पेट से जुडी समस्या आदि का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही हॉर्मोन में आये इन बदलाव के कारण महिला के जीभ के स्वाद में भी बदलाव आ सकता है। जिसके कारण महिला का कुछ भी खाने का मन नहीं करता है, खाने का स्वाद फीका लगता है, मुँह का स्वाद कड़वा महसूस होने लगता है, आदि।

इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है क्योंकि बहुत सी गर्भवती महिलाओं को यह परेशानी हो सकती है। लेकिन ऐसे में महिला को अपने खान पान का ध्यान रखना चाहिए, चाहे थोड़ा थोड़ा करके कुछ खाएं लेकिन खाने में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के साथ शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी भी हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं इस समस्या का कारण क्या होता है और इस समस्या से बचने के लिए क्या कर सकते है।

प्रेगनेंसी में मुँह का स्वाद कड़वा होने के कारण

  • यदि गर्भवती महिला के शरीर में विटामिन की कमी होती है तो जीभ के स्वाद में कड़वापन महसूस होना आम बात होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान मुँह में बैक्टेरिया उत्पन्न हो सकते हैं, जिसके कारण मुँह के स्वाद में गड़बड़ी हो सकती है।
  • किसी तरह की एलर्जी या शारीरिक समस्या से यदि गर्भवती महिला ग्रसित होती है तो भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि गर्भवती मुँह की साफ सफाई का ध्यान नहीं रखती है तो भी यह परेशानी हो सकती है।

गर्भवती महिला मुँह के कड़वापन को दूर करने के लिए इन टिप्स का इस्तेमाल करें

प्रेगनेंसी के दौरान मुँह का कड़वापन दूर करने के लिए महिला कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है, इन टिप्स का इस्तेमाल करने से महिला के मुँह के स्वाद को बदलने में मदद मिलती है। जिससे मुँह का कड़वापन भी दूर होता है।

सेब का सिरका

एक कप पानी को गुनगुना करके इसमें दो चम्मच सेब का सिरका मिलाएं, उसके बाद इससे कुल्ला करें। ऐसा दिन में दो बार करें, ऐसा करने से मुँह को कड़वाहट को दूर करने में मदद मिलती है, जिससे खाने की इच्छा में भी बढ़ोतरी होती है।

निम्बू

निम्बू पर थोड़ी सी काली मिर्च, काला नमक लगाकर इसे चूसें, या फिर निम्बू पानी बनाकर इसका सेवन करें। ऐसा करने से भी मुँह के बिगड़े स्वाद को ठीक करने में मदद मिलती है। और ऐसा करने से महिला की जीभ का स्वाद बेहतर होने के साथ महिला का कुछ खाने का मन भी कर सकता है।

अपनी पसंद का कुछ बनाएं

जीभ के स्वाद में परिवर्तन आने के कारण हो सकता है की गर्भवती महिला की कुछ भी खाने की इच्छा न करें। ऐसे में महिला को अपनी पसंद और और अपने स्वादानुसार घर पर कुछ ट्राई करना चाहिए। क्योंकि हो सकता है यदि महिला के जीभ के स्वाद को बदलने में इससे कुछ मदद मिले और महिला की भूख को बढ़ाने में फायदा हो।

तरल पदार्थ

भूख कको बढ़ाने और जीभ के स्वाद को बदलने के लिए गर्भवती महिला को तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करना चाहिए। पानी, जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी, जैसे तरल पदार्थो का सेवन करने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है। साथ ही पानी का भरपूर सेवन करने से पाचन क्रिया को भी बेहतर होने में मदद मिलती है। जिससे भूख को बढ़ाने के साथ मुँह के स्वाद को भी ठीक करने में मदद मिलती है।

थोड़ा थोड़ा खाएं

हो सकता है की मुँह का स्वाद खराब होने के कारण महिला की कुछ खाने की इच्छा न हो, लेकिन फिर भी महिला को थोड़ा थोड़ा कुछ खाते रहना चाहिए। क्योंकि इससे मुँह के स्वाद में परिवर्तन आने के साथ महिला की भूख को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। साथ ही जो कुछ भी खाएं ताजा व् हल्का आहार लें, ताकि उसे पचाने में आसानी हो, और महिला को किसी तरह की परेशानी न हो।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी के दौरान मुँह के स्वाद का कड़वापन दूर करने के साथ भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी गर्भवती है और मुँह के कड़वेपन की समस्या से परेशान है तो आप भी ऊपर दिए गए किसी भी टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।

गर्भवती स्त्री को अनार खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का अपने आहार का अच्छे से ध्यान देना बहुत जरुरी होता है। ताकि महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलें जिससे उसे स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। और आम महिलाओं की तुलना में गर्भवती महिला को हरी सब्जियों और फलों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि शिशु का विकास भी महिला के खान पान पर ही निर्भर करता है। तो आज हम एक ऐसे ही फल की बात करने जा रहे हैं जो की प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला खाती है तो उसे बहुत फायदा मिलता है। और वो है अनार, अनार का जूस या फिर अनार को वैसे ही खाने पर दोनों ही तरह से यह आपको फायदा पहुंचाता है।

गर्भवती महिला को दूसरी और तीसरी तिमाही में तीन सौ अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है। और ऐसे में अनार का सेवन करने से महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिल जाते है। क्योंकि इसमें कैल्शियम, फोलेट, विटामिन सी, आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते है। इसके अलावा अनार खाने से केवल महिला को ही फायदा नहीं मिलता है बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को शारीरिक और मानसिक रूप से बेहतर होने में भी मदद मिलती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर मात्रा में इस फल का सेवन करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान अनार खाने से आपको कौन कौन से फायदे होते है।

आयरन की कमी को पूरा करता है:- प्रेगनेंसी के दौरान महिला में ब्लड की मात्रा का भरपूर होना जरुरी होता है, ताकि उसे डिलीवरी के समय किसी तरह की परेशानी न हो। और शिशु का भी बेहतर तरीके से विकास हो सके। लेकिन यदि महिला में आयरन की कमी होती है तो उसे एनीमिया हो सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान अनार का सेवन करने से आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

पेट सम्बंधित समस्याओं का करता है समाधान:- गर्भावस्था में पेट सम्बंधित समस्या जैसे की कब्ज़, अपच, आदि का होना आम बात होती है। ऐसे में कई बार महिला बहुत परेशानी का अनुभव भी करती है। लेकिन अनार का सेवन करने से महिला प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। क्योंकि अनार में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है जो आपकी पेट से जुडी परेशानियों का समाधान करने में आपकी मदद करता है।

गर्भ में पल रहे शिशु को भी होता है फायदा:- अनार के सेवन से केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी बहुत फायदा मिलता है। क्योंकि अनार में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स बच्चे के दिमाग को सुरक्षित रखने और उसके विकास में मदद करते है। साथ ही अनार में मौजूद फोलेट बच्चे बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है जिससे उसे जन्मजात बिमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।

नार्मल डिलीवरी की सम्भावना को बढ़ाता है:- प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी होने के कारण डिलीवरी के समय आपको परेशानी का अनुभव हो सकता है। लेकिन अनार का सेवन करने से आपकी खून की कमी की समस्या को दूर होने में मदद मिलती है जिसके कारण डिलीवरी के नार्मल होने के चांस ज्यादा होते है।

हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती मिलती है:- अनार में विटामिन के मौजूद होता है जो की महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों की मजबूती के लिए भी फायदेमंद होता है। साथ ही इसमें मौजूद पोटैशियम महिला की मांसपेशियों को भी फिट रखने में मदद करता है, इसी कारण महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अनार के सेवन की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे उसे फिट रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में भी रखता है चेहरे की चमक को बरकरार:- प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण आपके चेहरे की चमक भी कम होने लगती है। ऐसे में अनार का सेवन करने से आपकी सुंदरता को बरकरार रखने में भी मदद मिलती है। और इससे आपके चेहरे के ग्लो को भी बढ़ाने में मदद मिलती है।

खून की कमी को पूरा करता है:- प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में खून की मात्रा का पूरा होना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि खून की कमी होने के कारण महिला को प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के समय बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान अनार का सेवन आप करती हैं तो आपके शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान अनार का सेवन करते हुए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:-

  • अनार के जूस में अधिक मात्रा में कैलोरी होती है इसीलिए अनार का जूस उतना ही पीएं जितना आप पी सकते है।
  • यदि आप ब्लड प्रैशर से जुडी किसी दवाई का प्रेगनेंसी में सेवन कर रहे है तो आपको अनार खाने के बारे में डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।
  • प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप कैल्शियम, आयरन के अलावा किसी और दवाई का भी सेवन करती है तो भी आपको अनार के सेवन के बारे में एक बार अपने डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ फायदे जो आपको अनार का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान होते हैं। इसके अलावा आपको अन्य फलों और सब्जियों का भी भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान पूरी तरह से फिट रहने में मदद मिल सकें और यदि आप स्वस्थ रहती है तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

धुप में निकलने से पहले ये जरुर करें

गर्मियों के मौसम में अपनी त्वचा और स्वास्थ्य की खास देखभाल करने की आवश्यकता होती है। साथ ही कहीं बाहर जाने से पहले और धुप में निकलने से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि त्वचा और स्वास्थ्य को धुप से बचाया जा सके। और आज हम आपको उन्ही कुछ ख़ास बातों के बारे में बताने जा रहे है। 

कुछ ही दिनों में गर्मियों का मौसम आने वाला है और इसके साथ ही आने वाली है त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न समस्याएं। गर्मियों में मौसम में होने वाली सबसे अधिक परेशानियाँ त्वचा के साथ ही होती है। जैसे ही रैशेज, घमौरियां, सनबर्न और न जाने क्या-क्या?

गर्मियां तो होती ही है परेशानियाँ देने वाली, ऐसे में आपके पसीने छुटना तो आम बात है। लेकिन इसका मतलब ये तो बिलकुल भी नहीं है की गर्मियां रहने तक हम सभी अपने काम काज पर रोक लगा दें। क्योंकि सर्दी हो या गर्मी हमें अपने काम तो पुरे करने ही होंगे। और इसके लिए बाहर भी जाना पड़ेगा।

लेकिन गर्मी के दिनों में बाहर जाते समय जो सबसे मुख्य समस्या होती है वो है त्वचा का झुलसना और पसीना आना। अब गर्मियों में पसीना आना तो लाजमी है। ऐसे में आपको चाहिए की कुछ ऐसे तरीकों का इस्तेमाल करें जिनसे आपकी त्वचा को बची ही रहे साथ-साथ आपको धुप से कोई हानि भी न हो। इसके लिए आपको धुप में निकलने से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होगा। ताकि आपकी स्किन धुप के प्रभाव से झुलसे न। तो आइए जानते है धुप में निकलने से पहले किन बातों का रखें ध्यान!!

धुप में निकलने से पहले ये जरुर करें :-

1. सनस्क्रीन :

कहीं भी बाहर जाने से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगा लें। क्योंकि इसे त्वचा एम् एडजस्ट होने में भी समय लगता है। पुरे दिन में कई बार सनस्क्रीन लगायें विशेषकर धुप में निकलते समय। यदि आपको सनस्क्रीन की ऑयली प्रकृति पसंद नहीं है तो आप इसमें थोडा सा टेलकम पाउडर या कैलामाइन लोशन मिलाकर इसका इस्तेमाल कर सकती है।

2. गॉगल्स और हैट :

धुप में बाहर निकलते समय आँखों पर black गॉगल्स और हैट जरुर पहने। बाहर जाते समय गहरे रंग के कपडे बिलकुल न पहनें इसकी बजाय हलके या सफ़ेद रंग के कपडें पहने ये आपके शरीर को ठंडक देने में मदद करेंगे। धुप में जाना हो तो कॉटन के कपड़ों का चुनाव करें। बेहतर होगा पूरी बाजू के कपडें पहने, इससे सन टैनिंग की संभावना कम होगी।

3. फलों के रस का सेवन :

गर्मियों के समय बाहर निकलने से पहले कुछ ऐसे तरल पदार्थों का सेवन करें जो आपके शरीर में नमी बनाए रखें। इसके लिए फलों का रस सबसे उत्तम उपाय है। क्योंकि अगर शरीर में थोड़ी सी भी नमी की कमी हुई तो heat स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसके साथ ही इन दिनों छाछ, कैरी का पन्ना, शर्बत और रसीले फल या उनके रस का सेवन करें। ये शरीर में नमी को बरकरार रखने में मदद करेंगे। यदि आपको बाहर अधिक समय बिताना है तो कुछ तरल पदार्थ अपने साथ भी रखें और जरुरत पड़ने पर इनका सेवन करें।

यह भी पढ़े : गर्मियों में त्वचा की देखभाल कैसे करें?

4. पानी का इस्तेमाल :drinking water

बाहर निकलने से पहले खूब सारा पानी पीएं। क्योंकि धुप में आपका शरीर गर्म हो जाता है ऐसे में पानी आपकी बॉडी को सामान्य बनाए रखेगा। इसके साथ ही गर्मियों के दिनों में जितना हो सके उतने पानी का सेवन करें। क्योंकि इस दौरान बॉडी में नमी बनाए रखना बेहद जरुरी होता है। इसके अभाव में आपके शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। साथ ही कहीं बाहर जाते समय अपने साथ पानी की एक बोतल जरुर लेकर जाएँ।

5. मुल्तानी मिट्टी मास्क :

ऑयली स्किन और पसीने के कारण त्वचा में बैक्टीरिया और विषाणु पैदा होने लगते है। जिसके कारण त्वचा में pimple और मुहांसे होते है। अगर आपकी त्वचा में भी अक्सर मुहांसे आदि की समस्या रहती है और धुप में बाहर जाने से ये और बढ़ जाती है तो इसके लिए मुल्तानी मिट्टी के फेस पैक का इस्तेमाल करें। ये त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उतेजित उत्तकों को शांत कर मुहांसे बढ़ने से रोकता है। साथ ही त्वचा में एकत्रित अतिरिक्त तेल और गंदगी को भी साफ़ कर देता है। आप चाहे तो इसके साथ गुलाबजल मिलाकर भी इसका प्रयोग कर सकती है।

6. टमाटर का इस्तेमाल :

इसका इस्तेमाल त्वचा की टैनिंग से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है। क्योंकि इसमें विटामिन सी पाया जाता है जो मेलेनिन के निर्माण को रोकता है। मेलेनिन एक तरह का तत्व है जो त्वचा के रंग को डार्क करने में मदद करता है। इसके लिए टमाटर का रस निकालकर उसका प्रयोग अपनी त्वचा पर करें। आप चाहे तो इसका सेवन करके भी इसके लाभ उठा सकते है। इसीलिए रोजाना टमाटर अवश्य खाएं।

7. संतरा :orange-juice[review]

संतरा एक तरह का रसीला फल होता है। साथ ही इसमें विटामिन सी की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है। जो त्वचा के रंग को निखारने के साथ-साथ उसे अंदरूनी पोषण देने में भी मदद करता है। इसके अलावा ये आपकी बढती उम्र को कम करने में भी मदद करता है। इसीलिए रोजाना कम से कम एक संतरे का सेवन जरुर करें। आप चाहे तो इसके रस का इस्तेमाल सीधे त्वचा पर भी कर सकते है। ये त्वचा की गंदगी को साफ़ करने के साथ-साथ उसे ग्लो देने में भी मदद करता है।

8. कीवी :

कीवी शरीर में ठंडक बनाए रखती है। इसीलिए गर्मियों में हो सके तो रोजाना कम से कम 1 कीवी तो जरुर खाएं। यदि आपको कहीं बाहर जाना हो तो ये फल अपने साथ ले कर जाए या घर पर ही इसे खा लें। इसमें मौजूद गुण त्वचा को पोषण देने के साथ-साथ निखर देने का भी काम करते है।

9. खुबानी और शहद का लोशन :

गर्मियों में अधिकतर खुबानी और शहद के लोशन का इस्तेमाल करें, ये त्वचा को मुलायम रखने और धुप के हानिकारक प्रभाव से बचाने में मदद करेगा।

10. सनबर्न होने पर बर्फ :सनबर्न से त्वचा को कैसे बचाएं

अगर आपकी त्वचा पर सनबर्न है तो उसके लिए किसी अन्य लोशन या क्रीम का इस्तेमाल करने की बजाय बर्फ का इस्तेमाल करें। ये त्वचा के तापमान को ठंडा कर उसमे होने वाली जलन और खुजली को शांत करेगी। आप चाहे तो अन्य घरेलू उत्पादों की मदद से भी सनबर्न की समस्या से छुटकारा पा सकते है।

इसके लिए यह पढ़े : सनबर्न के घरेलू उपचार!

11. लू चलने पर :लू चलने पर चेहरा ढक लें

यदि आप कहीं बाहर जा रही है और बहुत तेज़ लू चल रही हो तो अपने चेहरे को अपने दुपट्टे या किसी चुन्नी से ढक लें। क्योंकि गर्मियों के दौरान चलने वाली लू आपकी त्वचा की पूरी नमी सोख लेती है जिससे त्वचा रुखी होकर बेजान लगने लगती है। साथ ही अपने हाथों और पैरों को भी ढक कर रखें। ऐसे में बेहतर होगा कॉटन के पूरी बाजु वाले कपडे पहने। सनस्क्रीन लोशन अपने बैग में ही रखें और जब आवश्यकता हो लगा लें।

खांसी का घरेलू इलाज

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खांसी का होना आम बात होती है लेकिन कई बार इसके कारण आपको बहुत परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खांसी के होने का कारण मौसन में आने वाला बदलाव, तेलीय खाना, व् प्रदुषण हो सकता है। ज्यादातर लोग खांसी की समस्या होने पर डॉक्टर्स के पास जाना पसंद नहीं करते हैं, लेकिन इसका इलाज जरुरी होता है क्योंकि इसके होने के कारण आप किसी भी काम को अच्छे से नहीं कर पाते हैं। साथ ही सीने में जलन, गले में दर्द की परेशानी का सामना भी आपको करना पड़ सकता है। तो लीजिये आज हम आपको खांसी की समस्या से बचने के कुछ आसान घरेलू उपचार बताने जा रहें हैं जो आपको इस परेशानी से राहत दिलाने में मदद करेंगे।

सौंठ

रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में सौंठ डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद गरम दूध का छानकर सेवन करें, उसके बाद पानी भी न पीएं। खांसी में पूरी तरह आराम न आने तक नियमित इस उपचार को करें।

शहद

शहद का इस्तेमाल कई तरह से करने पर आपको खांसी की समस्या से राहत मिलती है। जैसे की एक चम्मच शहद के साथ दो चार किशमिश और मुनक्का डालकर इसका सेवन करें, त्रिफला और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर इसे खाएं, आधा चम्मच शहद में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर डालकर इसका सेवन करें, या फिर दिन में दो से तीन बार एक चम्मच शहद का सेवन करें इनमे से किसी भी तरीके का इस्तेमाल करने से आपको खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

अदरक

यदि आप अदरक का एक टुकड़ा मुँह में रखकर उसे थोड़ी देर चूसते हैं तो यह भी आपके गले को आराम देता है, जिससे आपको खांसी से आराम मिलता है। इसका अलावा आपको एक कप पानी में अदरक, तुलसी का पत्ते, काली मिर्च और थोड़ा सा शहद डालकर उसे अच्छे से उबालकर उसका सेवन करते हैं तो भी आपको खांसी से आराम मिलता है।

प्याज़ का रस

खांसी सुखी हो या बलगम वाली दोनों के लिए ही यह उपचार काफी फायदेमंद होता है, इसके लिए आप एक चम्मच प्याज़ के रस में एक चम्मच शहद को मिलाकर उसका सेवन करें आपको खांसी की समस्या से बहुत जल्दी राहत पाने में मदद मिलेगी।

अनार का रस

ताजा अनार का रस निकालकर उसे हल्का गुनगुना कर लें, और इसका सेवन दिन में दो बार जब तक करें जब तक की आपको खांसी से आराम न आ जाए। यह उपाय भी खांसी की समस्या से राहत दिलाता है।

काली मिर्च या लौंग

यदि आप काली मिर्च या फिर लौंग को थोड़ी देर अपने मुँह में रखकर चूसते हैं, तो भी आपको बहुत आराम मिलता है। और खांसी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

हल्दी

खांसी से बचाव के लिए हल्दी भी एक आयुर्वेदिक औषधि की तरह काम करती है, इसके लिए आप एक कप पानी में एक चम्मच हल्दी, और थोड़ा काली मिर्च पाउडर, और चुटकी भर दालचीनी पाउडर डालकर अच्छे से उबाल लें। उसके बाद इसे छानकर इसमें एक चम्मच शहद डालकर इसका सेवन करें। या फिर हल्दी की जड़ को भूनकर उसे अच्छे से पीस लें, उसके बाद दिन में दो बार इसे पानी और आधा चम्मच शहद के साथ लें। दोनों ही तरीको से आपको खांसी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

निम्बू

दो चम्म्ह निम्बू के रस में एक चम्मच शहद का मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करें। इससे गले के इन्फेक्शन को दूर करके आपको खांसी की समस्या से निजात दिलाने में मदद मिलती है।

लहसुन

एक कप पानी में दो लौंग, एक चम्मच अजवाइन, तीन से चार लहसुन की कलियाँ डालकर अच्छे से उबाल कर छान लें, उसके बाद एक चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपको खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

गाजर का रस

गाजर के रस में थोड़ा पानी मिलाकर और आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन से चार बार लें, ऐसा करने से भी आपको खांसी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

काढ़ा पीएं

एक बड़े गिलास पानी में तुलसी के पत्ते, काली मिर्च, लौंग, अदरक, शहद आदि डालकर पानी के आधा रहने तक उबाल लें। उसके बाद इसका सेवन करें ऐसा करने से भी आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। आप दिन में दो बार कम से कम जरूर पीएं।

बादाम

रात भर बादाम को भिगोने के बाद सुबह उठकर इन्हे छीलकर अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसमें मक्खन और मिश्री मिलाकर दिन में दो से तीन बार खाएं ऐसा करने से भी आपको खांसी से आराम मिलता है।

गर्म दूध

गर्म दूध में एक चम्मच शहद, या अदरक उबाल कर, या फिर एक चम्मच हल्दी डालकर पीने से भी आपको खांसी जैसी समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ घरेलू उपचार जिनका इस्तेमाल करने से आपको बहुत जल्दी खांसी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा खांसी की समस्या के होने पर आपको गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करने चाहिए, और गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए इससे गले की खराश को आराम मिलता है और बलगम भी निकलती है जिससे आपको खांसी से आराम पाने में मदद मिलती है।